Romantic36th Update (घर में खुशियों का आगमन)
दिव्या: वैसे लगता है जन्मदिन तुम्हारा हुआ... और बदन सब का टूटा.... इस बात पे दोनों हस्ते है और फिर वसु दरवाज़ा निकाल कर दोनों बाहर आ जाते है....
अब आगे..
अगली सुबह:
सब लोग अपना काम करते हस और चाय पीते हुए बातें करते रहते है. वसु अभी भी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी जिसे देख कर सब अपनी हसीं दबा देते हस लेकिन वसु उनके चेहरे को देख कर समझ जाती है और थोड़े गुस्से नज़र से दीपू की तरफ देखती है. दीपू भी उसको देख कर आँख मार देता है.
थोड़ी देर बाद जब वसु किचन में जाती हस तो वहां से वो दीपू को बुलाती है. दीपू जब वसु के पास किचन में जाता हस तो
वसु: तुम कितने बेशरम हो गए हो. मुझसे ठीक से चला नहीं जा रहा हस और तुम आँख मार रहे हो.
दीपू: वसु को अपनी बाँहों में लेकर... इसमें शर्म कैसा? मैं तो अपनी बीवी को आँख मार रहा हूँ और तुम्हे भी याद होगा जब दिव्या और कविता का भी ऐसा हाल था जब... इतना बोल कर दीपू रुक जाता हस तो वसु उसे झूठे गुस्से से देखती हस और हस देती है.
दीपू दरवाज़े पे देखते है की कोई नहीं है तो उसका सर पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देता है जिसमें वसु भी उसका पूरा साथ देती है और दोनों ३- ४ Min तक एक दुसरे का रस चूस लेते है.
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दोनों किस करते वक़्त दीपू वसु की गांड दबा देता है लेकिन वसु की हलकी चीख दीपू के होंठों पे डाब जाती है. ४ Min बाद जब दोनों अलग होते है तो वसु दीपू के सीने मैं हल्का मुक्का मारती है और उसे दूर कर देती है.
दीपू: चल जल्दी ठीक हो जाओ. अब तो रोज़ तुम्हारी गांड मारूंगा. उसके पास आकर उसके कान में: बोलो मेरा लंड लोगी ना अपने गांड में.
वसु: चुप कर. तुझे हर बार यही बात सूझती है क्या? बाहर निकल और ऑफिस के लिए तैयार हो जा. और उसे बाहर धकेल देती है. जब वो निकल जाता है तो वसु के चेहरे पे हसी आ जाती है और मन में सोचती है... कल सच में गांड मरवाने में बड़ा मजा आया... जितना दर्द देते है उतना ही मजा भी देता है……
और जैसे दीपू ने कहा था.... उस रात वो दिव्या की जम के बजाता है आगे और पीछे से और उसे भी पूरा खुश कर देता है. दिव्या का भी वो वसु जैसा हाल कर देता है. कविता बच जाती है क्यूंकि वो उस रात मीना के साथ सोई हुई थी.
कुछ दिनों बाद:
कुछ दिनों बाद सुबह सब अपने काम में लगे रहते है. दीपू भी अपने ऑफिस चला गया था. घर में सब लोग बैठ कर ऐसे ही बात कर रहे थे. वसु को थोड़ा चक्कर आता है और और उसका सर थोड़ा भारी लग रहा था.
वसु: मुझे थोड़ा चक्कर आ रहा है और ऐसे बोलते हुए उसके पेट में थोड़ा गड़बड़ होता है और वो भाग कर बाथरूम में चली जाती है जहाँ उसे उल्टियां होने लगती है. वसु के हालत देख कर कविता और दिव्या भी उसके पीछे भागते है लेकिन वसु बाथरूम में जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लेती है.
कविता: क्या हुआ? तुमने दरवाज़ा क्यों बंद कर दिया?
थोड़ी देर बाद वसु अपने आप को थोड़ा ठीक करते हुए बाथरूम का दरवाज़ा खोलती है और कहती है... सर थोड़ा चकरा रहा था और थोड़ी उल्टियां भी हुई है.
कविता ये बात सुन कर: क्या बात है क्यूंकि उसे शायद पता चल गया था की वसु को चक्कर क्यों आ रहा है.
कविता उसे अपनी बाहों में लेकर कान में कहती है: बन्नो बधाई हो. लगता है तू माँ बनने वाली है.
दिव्या को कुछ पता नहीं चलता तो वो उन दोनों को ऐसे देख कर पूछती है की वसु को क्या हुआ है?
कविता: अरे बुद्धू तू जल्दी से मौसी बनने वाली है या फिर छोटी माँ. दिव्या ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है और वसु को गले लगा लेती है.
वसु: मुझे पता नहीं की तुम जो कह रही हो वो सही है या नहीं.
कविता: क्यों जब दीपू और निशा पैदा हुए थे तो तुझे उल्टियां नहीं आयी थी क्या? और ऐसा बोल कर कविता हस देती है और कहती है चल तुझे डॉक्टर के पास लेकर जाते है.
बाहर आने से पहले कविता दोनों से कहती है की फिलहाल ये बात मीना और लता को ना बताएं. जब कन्फर्म हो जाएगा तभी उन्हें बताएँगे और उन्हें थोड़ा सरप्राइज भी देंगे. इस बात पे दोनों मान जाते है और अपने आप को ठीक करके बाथरूम से बाहर आ जाते है.
लता: क्या हुआ वसु को?
कविता: कुछ नहीं दीदी... इसका सर थोड़ा भारी लग रहा है. एक बार डॉक्टर को दिखा कर ले आते है.
लता: हाँ ठीक रहेगा.
दिव्या: मैं एक बार दीपू को फ़ोन कर के उसे भी हॉस्पिटल आने को कहती हूँ.
लता: हाँ उसे भी पता चलना चाहिए ना की उसकी बीवी की हालत ठीक नहीं है और ऐसा कहते हुए सब हस देते है.
दिव्या दीपू को फ़ोन करती है. ठीक उसी वक़्त दीपू किसीसे मिलने बाहर गया था और जल्दबाज़ी में अपना फ़ोन नहीं ले जाता. जब दिव्या फ़ोन करती है तो ऋतू उसका फ़ोन receive करती है.
दिव्या: दीपू?
ऋतू: मैं ऋतू बोल रही हूँ. दीपू थोड़ा बाहर गया है. बोलो क्या काम है.
दिव्या: कुछ नहीं माँ जी… लगता है दीदी वसु की थोड़ी तबियत खराब हो गयी है. हम उसे डॉक्टर के पास ले जा रहे है. अगर दीपू होता तो उसे भी वहाँ आने को कहते.
ऋतू थोड़ा घबराते हुए: सब ठीक तो है ना दिव्या. अचानक वसु की तबियत को क्या हुआ है?
दिव्या: पता नहीं माँ जी. डॉक्टर के पास जाएंगे तो पता चलेगा.
ऋतू: मैं भी आऊं क्या?
दिव्या: नहीं माँ जी ज़रुरत नहीं है. हाँ हो सके तो शाम को एक बार आ जाना. सब से मुलाकात भी हो जायेगी और तब तक हम दीदी को डॉक्टर के पास भी दिखा लाएंगे.
ऋतू: हाँ ये ठीक कहा तुमने. हम शाम को आ जाएंगे.
दिव्या: ठीक है मा जी और दीपू को भी बता दीजिये.
ऋतू: तू चिंता मत कर. जैसे ही वो यहां आएगा मैं उसे बता दूँगी. वो जल्दी ही वहाँ पहुँच जाएगा और फिर फ़ोन रख कर देती है.
हॉस्पिटल में:
कविता और दिव्या फिर वसु को डॉक्टर के पास लय जाते है. डॉक्टर उसे चेक करती है और दोनों को देख कर कहती है... इनके पति कहाँ है?
कविता: जी वो अपने काम पे गए है.
डॉक्टर: आप दोनों कौन हो?
दिव्या: हम इसकी बहने है. वैसे दीदी की हालत कैसी है? वो ठीक तो हो जायेगी ना?
डॉक्टर: चिंता करने की कोई बात नहीं है. बस खुश खबर ही है की आपकी दीदी पेट से है और वो जल्दी ही माँ बनने वाली है. डॉक्टर की बात सुनकर जहाँ कविता और दिव्या खुश हो जाती है वहीँ वसु शर्मा कर अपने सर नीचे कर लेती है.
डॉक्टर: इसीलिए मैंने इनके पति के बारे में पुछा था.
कविता: जी ये बात हम उनको बता देंगे.
डॉक्टर: ठीक है लेकिन अब इनका ज़्यादा ख्याल रखना. कोई भारी चीज़ उन्हें उठाने मत देना और अब इनको आराम की बहुत ज़रुरत है और जहाँ तक हो सके इसको खुश रखना. ये जितना खुश रहेगी बच्चा भी उतना ही अच्छा और तंदुरुस्त होगा. और समय समय पे दवायें लेते रहना.
कविता: जी समझ गए. और फिर तीनो हॉस्पिटल से घर के लिए निकल जाते है.
कार में जब तीनो बैठे होते है तो कविता और दिव्या दोनों वसु को बहुत बधाई देते है और प्यार से उसके पेट पे हाथ रख कर कविता धीरे से उसके कान में कहती है: बधाई हो बन्नो. तू फिर से माँ बनने वाली है. वसु थोड़ा शर्मा जाती है और उसी लय में कहती है धीरे से... चिंता मत कर... तू भी मेरी तरह ही जल्दी से पेट से हो जायेगी. जिस तरह दीपू अपना माल तेरे अंदर ही छोड़ता है मुझे पता है तेरा भी ऐसे ही हालत जल्दी ही हो जायेगी और ऐसे ही बातें करते हुए वो घर आ जाते है.
तब तक दीपू भी घर आ जाता है. ऑफिस में जब वो अपने सीट पे आया था तो ऋतू ने उसे बताया था की वसु की हालत ठीक नहीं है. वो वसु को फ़ोन करता है तो उसका फ़ोन स्विच ऑफ होता है तो वो लता को फ़ोन करता है और वो कहती है की वो तीनो हॉस्पिटल गए है और वो जल्दी ही घर आ जाए.
घर पे:
घर में सब लोग उनके आने का इंतज़ार कर रहे होते है. दीपू से रहा नहीं जाता और वो टहलते हुए फिर से फ़ोन करता है तो इस बार कविता फ़ोन receive कर के कहती है की वो सब घर आ रहे है.
दीपू: माँ को क्या हुआ है? तो ठीक तो है ना?
कविता: हम जल्दी ही घर आ रहे है और तुम्हे सब बता देंगे. अगर उतनी ही चिंता थी तो तू हॉस्पिटल क्यों नहीं आया?
दीपू: मुझे काम में थोड़ा देर हो गया इसीलिए नहीं आ पाया.
कविता: ठीक है इंतज़ार कर.... हम जल्दी ही घर आ रहे है.
थोड़ी देर बाद वसु कविता और दिव्या घर आ जाते है तो बाकी तीनो भी उनका ही इंतज़ार करते रहते है. उनको देख कर दीपू दौड़ कर वसु को पकड़ कर उससे पूछता है की उसे क्या हुआ है और वो अब कैसी है? वसु कुछ नहीं कहती और शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लेती है.
दिव्या: अब इतनी जल्दी क्या है? हम घर आ गए है ना... हमें पहले पानी तो पीने दो. फिर मीना जा कर सब के लिए पानी लाती है और सब बैठ कर उनके बोलने का इंतज़ार करते है की आखिर बात क्या है और वसु की हालत क्यों बिगड़ी है.
कविता और दिव्या उन दोनों को देख कर मन में ही हस्ती रहती है.
आखिर में दीपू से रहा नहीं जाता तो वो कहता है: तुम लोग सब चुप क्यों हो? कोई बताएगा की आखिर बात क्या है.
कविता फिर दीपू की तरफ देख कर थोड़े गुस्से (दिखावा) से कहती है... तूने क्या किया है. वसु की ज़रा भी फ़िक्र नहीं है. दीपू को लगता है की सच में वसु को कोई बिमारी है और उसे चिंता सताने लगती है.
दीपू: मैंने क्या किया है?
कविता को लगता है की अब उसे और परेशान करना अच्छा नहीं है तो वो हस्ते हुए कहती है.... अरे पगले तेरी बीवी को कुछ नहीं हुआ है. दीपू को अब भी समझ नहीं आता तो पूछता है की फिर वो सब डॉक्टर के पास क्यों गए?
कविता फिर उठ कर दीपू के पास जाती है और उसके कान को पकड़ कर... बुद्धू तू बाप बनने वाला है.
कविता जब ये बात बताती है तो शॉक से पहले दीपू को कुछ समझ नहीं आता. २ Min बाद जब ये बात उसके दिमाग में जाती है तो ख़ुशी से कविता को पकड़ कर उसे गले लगाता है और फिर वसु की तरफ देखता है जो अपने सर नीचे करे हुए हस्ती रहती है.
लता और मीना भी ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाते है तो दीपू वसु के पास आकर उसके चेहरे के ऊपर कर के उसकी आँखों में देखते हुए पूछता है तो वसु शर्म से हाँ कह कर अपनी आँखें नीचे कर लेती है. दीपू तो ख़ुशी से पागल हो जाता है और वो वसु को अपनी बाहों में लेकर ज़ोर से उसे गले लगा लेता है. इतने में लता और मीना भी उसके पास आकर वसु को प्यार से दुलारते है और उसे बधाई देते है.
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लता दीपू से: तू तो बड़ा तेज़ निकला रे और हस देती है.
अब घर में थोड़ा ख़ुशी का माहौल था तो इतने में दिव्या मिठाई लाती है और पहले दीपू को और फिर बाद में वसु को भी मिठाई पकड़ाती है. दोनों एक दुसरे को देख कर मिठाई आपस में बाटते है और एक दुसरे को खिलाते है. दीपू फिर सभी को अपने हाथ से मिठाई खिलाता है और सब ख़ुशी से मिठाई खाते है.
दोपहर को सब ख़ुशी से खाना खा कर आराम करने चले जाते है.
दीपू वसु को अपनी बाहों में लेकर ऐसे ही बातें करता रहता है तो इतने में वहां दोनों कविता और दिव्या भी आ जाते है.
दोनों वसु को देख कर कहते है: हमें बहुत ख़ुशी है की तुम माँ बनने वाली हो लेकिन थोड़ी जलन भी हो रही है. वसु उनकी बात समझ जाती है और दीपू की और देख कर कहती है... तुम क्या कहते हो?
दीपू हस्ते हुए क्यूंकि (उसे भी पता चल गया था की उन दोनों ने वो बात क्यों की)...मैं क्या कहूँ? अगर तुम सब एक साथ पेट से हो गए तो फिर तुम्हारे छोटे दीपू का ख्याल कौर रखेगा और हस देता है.
वसु: बात तो तुम्हारी सही है लेकिन उनकी बात भी सही है. कविता भी बिस्तर पे आकर दीपू के दुसरे कंधे पे अपना सर रख कर... मुझे भी जल्दी से माँ बना दोनों ना.... देखो मेरी उम्र भी वसु जितनी ही है. अगर और देरी हुई तो फिर मुझे भी कठिनाई हो सकती है और बड़े आस से दीपू की तरफ देखती है.
दिव्या भी झूटी गुस्से से कहती है... अगर तू भी पेट से हो गयी तो मैं क्यों पीछे रहूँ. जानू मेरे बारे में भी सोचो ना... कविता से: अगर तुम भी पेट से हो गयी तो फिर ये तो मुझे रोज़ सोने भी नहीं देगा और मेरी बजाते रहेगा. मैं उसे इतना ना झेल पाऊँगी.
दीपू: तुम दोनों की बात भी सही है.
दीपू कविता को देखते हुए: अगर तुम और मीना एक साथ पेट से हो गयी तो फिर मीना को एक भाई/ बेहन मिल जाएगी और तुम भी नानी बन जाओगी. क्या कहती हो?
कविता ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है तो वसु उठकर कविता के पास आती है और उसको देखते हुए अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देती है और उसको चूमते हुए कहती है...
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दीपू की बात एकदम सही है. कविता शर्मा जाती है और कहती है की वो एक बार मीना से भी बात कर लेगी.
फिर ऐसे ही मस्ती की बातें करते हुए सब सो जाते है.
शाम को:
ऋतू और निशा भी उनके घर आते है और वसु के बारे में पूछते है तो फिर कविता दोनों को भी खुश खबर देती है तो दोनों भी बहुत खुश हो जाते है.
निशा वसु को कमरे में ले जाती है और निशा वसु को अपने गले लगा कर कहती है... माँ तुमने इतने दिनों बाद एक अच्छी खबर सुनाई है. मैं बहुत खुश हूँ और उसको देखते हुए उसकी आँखों से आंसूं निकल आते है.
वसु समझ जाती है और उसको अपने बाहों में लेकर कहती है: मैं समझ सकती हूँ बेटा तू क्यों रो रही है. अगर सब ठीक होता तो ऐसा खबर तुम मुझे देती और मैं नानी बन जाती लेकिन ऊपर वाले की बात को कोई नहीं टाल सकता.
निशा: नहीं माँ ये तो ख़ुशी के आंसूं है.
वसु: मैं तेरी माँ हूँ... मुझे सब पता है तू चाहे कितना भी झूट बोल दे.
निशा अब कुछ नहीं कह पाती और अपनी आँखें साफ़ कर के दोनों बाहर आते है.
ऋतू भी वसु को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वो भी उसको थोड़ा अलग ले जाकर कहती है: तुमने तो बहुत अच्छी खबर दी हो वसु.
वसु ऋतू को अपने बाहों में लेकर उसका धन्यवाद करती है और जब देखती है की वो दोनों ही अकेले है तो उसके होंठ को प्यार से चूम कर कहती है... सच में...मैंने कभी नहीं सोचा था की इस उम्र में मैं फिर से पेट से हो जाऊंगी.
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ऋतू: अभी तेरी उम्र ही क्या है? तू तो अभी भी जवान और गदरायी लग रही हो. और दीपू तो एक हट्टा कट्टा नौजवान लड़का है. ये तो होना ही था और मैं भी बहुत खुश हूँ और फिर उसके चेहरे पर भी उदासी छा जाती है.
वसु ऋतू को गले लग कर... चिंता मत करो.. मुझे तुम्हारे और दिनेश के बारे में भी पता चला था की वो भी तुमसे शादी करना चाहता था जैसे दीपू ने मुझसे किया. लेकिन क्या पता भगवान् ने तुम्हारे और निशा के लिए कुछ सोचा होगा.
वैसे तुम भी तो अपने उम्र से बहुत काम ही लगती हो और तुम भी तो एकदम सेक्सी लग रही हो. अगर तुम चाहो तो लड़कों की लाइन लग जायेगी... बस तुम्हारी हाँ की देरी है. बोलो क्या कहती हो?
ऋतू: नहीं रे.... अभी मैं ऐसा कुछ नहीं सोच रही हूँ. मुझे तो निशा को लेकर बहुत चिंता हो जाती है. वो तो अभी भी जवान है और इतनी काम उम्र में ही वो विधवा हो गयी है.
वसु: मैं समझ सकती हूँ. हमें भी उसकी बहुत चिंता लगी रहती है. देखते है अगर मैं कुछ कर सकती हूँ तो....
और फिर दोनों बाहर आ जाते है और सब से मिल कर बातें करने लग जाते है. फिर सब लोग मिल कर ख़ुशी ख़ुशी से खाना खाते है और दोनों अपने घर चले जाते है भले ही दीपू और बाकी लोग उनको उस रात रुकने के लिए कहते है. लेकिन ऋतू नहीं मानती और दोनों ऋतू और निशा अपने घर चले जाते है.
मीना और मनोज की बातें:
अब लोग वसु का अच्छे से ध्यान रखते है और उसे कुछ कान नहीं करने देते. घर में सब काम कविता और दिव्या ही करते है. जब सब अपने काम में लगे रहते है तो मीना मनोज को फ़ोन करती है.
मीना मनोज से: कैसे हो तुम?
मनोज: मैं ठीक हो. क्या बात है बहुत दिनों बाद फ़ोन कर रही हो.
मीना: तुम्हे तो पता है ना.... अभी अभी ही यहाँ पर हालत थोड़ा ठीक हो रहा है. कल ही निशा और उसकी सास आये थे घर पे. उनको देख कर मुझे भी थोड़ा बुरा लगा.
मनोज: हम्म.... तुम्हारी बात भी सही है. बोलो और क्या बात है?
मीना: मैं जिसके लिए यहां इतनी देर से हूँ तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है ना? कहीं ऐसा ना हो की जब मैं माँ बन जाऊं तो तुम्हे बुरा ना लगे. अगर भगवान् की मर्ज़ी है तो हम दोनों बिना माँ बाप बने ही अपनी ज़िन्दगी गुज़ार सकते है. मुझे उसके कोई प्रॉब्लम नहीं है.
मनोज: हाँ तुम सही कह रही हो. शायद मुझ में ही कमी है. लेकिन अगर तुम माँ बन गयी तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं रहेगा... अभी भी और आगे जाकर भी.
मीना: ठीक है. एक और बात... मुझे माँ ने बताया है की जब बच्चा होगा तो वो हमारा ही होगा. हम ही उसे अपना नाम देंगे और दीपू और बाकी दीदी भी इस बात के लिए मान गए है.
मनोज: ये तो बहुत अच्छी बात है. ठीक है हो सके तो जल्दी आ जाना. मेरा यहां अकेले रहना भी मुश्किल हो रहा है.
मीना: हाँ जल्दी आने की कोशिश करती हूँ और फिर वो फ़ोन कट कर देती है.
उस रात जब मीना और कविता साथ में होते है सोने के लिए तो मीना कहती है...
मीना: देखो ना माँ... वसु दीदी भी पेट से हो गयी है. मैंने मनोज से इस बारे में बात की है जो हमने कुछ दिन पहले बात की थी.. उन्होंने भी कहा है की उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है... ना अब या फिर आगे जा कर भी.
कविता: ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा. मैं जल्दी ही वसु और दीपू से इस बारे में बात करती हूँ.
मीना: ठीक है माँ.. मुझे भी बता देना.
कविता: ठीक है उनसे बात करके ज़रूर बता दूँगी.
मीना: वैसे एक और बात है माँ.
कविता: क्या?
मीना: कल से मेरे “अच्छे दिन” शुरू होने वाले है...
कविता मीना की तरफ देख कर समझ जाती है और प्यार से उसका माथा चूम कर कहती है... आशा करो की जल्दी ही तू भी मुझे खुश खबर दे….
वहीँ रात को ऋतू और निशा दोनों एक दुसरे की बाहों में रह कर बाते करते है.
निशा: देखो ना माँ वसु माँ फिर से पेट से हो गयी है. पता नहीं मुझे कभी ऐसा ख़ुशी मिलेगा के नहीं.
ऋतू: मैं जानती हूँ बेटा. तू तो अभी भी जवान है. बोल तेरे लिए कोई लड़का देखूं क्या?
निशा: नहीं माँ... मैंने अपनी ज़िन्दगी में सिर्फ दो लोगों से प्यार किया है. निशा की बात सुनकर ऋतू निशा की तरफ देखती है तो निशा कहती है... हाँ मैं सही कह रही हूँ. एक दिनेश और...
ऋतू: और दूसरा कौन है? कोई और है क्या जिसके बारे में मुझे पता नहीं है... निशा ऋतू की तरफ देख कर... दूसरा और कोई नहीं... मेरा भाई दीपू...
ऋतू निशा की बात सुनकर आश्चर्य से उसे देखती है और फिर हस देती है...
निशा: आप क्यों हस रही हो माँ?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा..मैंने इसके बारे में कभी सोचा नहीं था......
निशा: क्या सोचा नहीं था?
ऋतू: यही की तू भी दीपू से प्यार करती है.
निशा: “भी” का क्या मतलब है?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा...
और फिर ऋतू निशा को देख कर प्यार से उसके होंठों को चूमती है जिसमें निशा भी उसका साथ देती है. ऋतू निशा की जुबां को अपने मुँह में लेती है और निशा भी पूरी शिद्दत से अपनी जुबां ऋतू के मुँह में देती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है और दोनों एक दुसरे को फिर से “शांत” करके सो जाते है….
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Nice update....36th Update (घर में खुशियों का आगमन)
दिव्या: वैसे लगता है जन्मदिन तुम्हारा हुआ... और बदन सब का टूटा.... इस बात पे दोनों हस्ते है और फिर वसु दरवाज़ा निकाल कर दोनों बाहर आ जाते है....
अब आगे..
अगली सुबह:
सब लोग अपना काम करते हस और चाय पीते हुए बातें करते रहते है. वसु अभी भी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी जिसे देख कर सब अपनी हसीं दबा देते हस लेकिन वसु उनके चेहरे को देख कर समझ जाती है और थोड़े गुस्से नज़र से दीपू की तरफ देखती है. दीपू भी उसको देख कर आँख मार देता है.
थोड़ी देर बाद जब वसु किचन में जाती हस तो वहां से वो दीपू को बुलाती है. दीपू जब वसु के पास किचन में जाता हस तो
वसु: तुम कितने बेशरम हो गए हो. मुझसे ठीक से चला नहीं जा रहा हस और तुम आँख मार रहे हो.
दीपू: वसु को अपनी बाँहों में लेकर... इसमें शर्म कैसा? मैं तो अपनी बीवी को आँख मार रहा हूँ और तुम्हे भी याद होगा जब दिव्या और कविता का भी ऐसा हाल था जब... इतना बोल कर दीपू रुक जाता हस तो वसु उसे झूठे गुस्से से देखती हस और हस देती है.
दीपू दरवाज़े पे देखते है की कोई नहीं है तो उसका सर पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देता है जिसमें वसु भी उसका पूरा साथ देती है और दोनों ३- ४ Min तक एक दुसरे का रस चूस लेते है.
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दोनों किस करते वक़्त दीपू वसु की गांड दबा देता है लेकिन वसु की हलकी चीख दीपू के होंठों पे डाब जाती है. ४ Min बाद जब दोनों अलग होते है तो वसु दीपू के सीने मैं हल्का मुक्का मारती है और उसे दूर कर देती है.
दीपू: चल जल्दी ठीक हो जाओ. अब तो रोज़ तुम्हारी गांड मारूंगा. उसके पास आकर उसके कान में: बोलो मेरा लंड लोगी ना अपने गांड में.
वसु: चुप कर. तुझे हर बार यही बात सूझती है क्या? बाहर निकल और ऑफिस के लिए तैयार हो जा. और उसे बाहर धकेल देती है. जब वो निकल जाता है तो वसु के चेहरे पे हसी आ जाती है और मन में सोचती है... कल सच में गांड मरवाने में बड़ा मजा आया... जितना दर्द देते है उतना ही मजा भी देता है……
और जैसे दीपू ने कहा था.... उस रात वो दिव्या की जम के बजाता है आगे और पीछे से और उसे भी पूरा खुश कर देता है. दिव्या का भी वो वसु जैसा हाल कर देता है. कविता बच जाती है क्यूंकि वो उस रात मीना के साथ सोई हुई थी.
कुछ दिनों बाद:
कुछ दिनों बाद सुबह सब अपने काम में लगे रहते है. दीपू भी अपने ऑफिस चला गया था. घर में सब लोग बैठ कर ऐसे ही बात कर रहे थे. वसु को थोड़ा चक्कर आता है और और उसका सर थोड़ा भारी लग रहा था.
वसु: मुझे थोड़ा चक्कर आ रहा है और ऐसे बोलते हुए उसके पेट में थोड़ा गड़बड़ होता है और वो भाग कर बाथरूम में चली जाती है जहाँ उसे उल्टियां होने लगती है. वसु के हालत देख कर कविता और दिव्या भी उसके पीछे भागते है लेकिन वसु बाथरूम में जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लेती है.
कविता: क्या हुआ? तुमने दरवाज़ा क्यों बंद कर दिया?
थोड़ी देर बाद वसु अपने आप को थोड़ा ठीक करते हुए बाथरूम का दरवाज़ा खोलती है और कहती है... सर थोड़ा चकरा रहा था और थोड़ी उल्टियां भी हुई है.
कविता ये बात सुन कर: क्या बात है क्यूंकि उसे शायद पता चल गया था की वसु को चक्कर क्यों आ रहा है.
कविता उसे अपनी बाहों में लेकर कान में कहती है: बन्नो बधाई हो. लगता है तू माँ बनने वाली है.
दिव्या को कुछ पता नहीं चलता तो वो उन दोनों को ऐसे देख कर पूछती है की वसु को क्या हुआ है?
कविता: अरे बुद्धू तू जल्दी से मौसी बनने वाली है या फिर छोटी माँ. दिव्या ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है और वसु को गले लगा लेती है.
वसु: मुझे पता नहीं की तुम जो कह रही हो वो सही है या नहीं.
कविता: क्यों जब दीपू और निशा पैदा हुए थे तो तुझे उल्टियां नहीं आयी थी क्या? और ऐसा बोल कर कविता हस देती है और कहती है चल तुझे डॉक्टर के पास लेकर जाते है.
बाहर आने से पहले कविता दोनों से कहती है की फिलहाल ये बात मीना और लता को ना बताएं. जब कन्फर्म हो जाएगा तभी उन्हें बताएँगे और उन्हें थोड़ा सरप्राइज भी देंगे. इस बात पे दोनों मान जाते है और अपने आप को ठीक करके बाथरूम से बाहर आ जाते है.
लता: क्या हुआ वसु को?
कविता: कुछ नहीं दीदी... इसका सर थोड़ा भारी लग रहा है. एक बार डॉक्टर को दिखा कर ले आते है.
लता: हाँ ठीक रहेगा.
दिव्या: मैं एक बार दीपू को फ़ोन कर के उसे भी हॉस्पिटल आने को कहती हूँ.
लता: हाँ उसे भी पता चलना चाहिए ना की उसकी बीवी की हालत ठीक नहीं है और ऐसा कहते हुए सब हस देते है.
दिव्या दीपू को फ़ोन करती है. ठीक उसी वक़्त दीपू किसीसे मिलने बाहर गया था और जल्दबाज़ी में अपना फ़ोन नहीं ले जाता. जब दिव्या फ़ोन करती है तो ऋतू उसका फ़ोन receive करती है.
दिव्या: दीपू?
ऋतू: मैं ऋतू बोल रही हूँ. दीपू थोड़ा बाहर गया है. बोलो क्या काम है.
दिव्या: कुछ नहीं माँ जी… लगता है दीदी वसु की थोड़ी तबियत खराब हो गयी है. हम उसे डॉक्टर के पास ले जा रहे है. अगर दीपू होता तो उसे भी वहाँ आने को कहते.
ऋतू थोड़ा घबराते हुए: सब ठीक तो है ना दिव्या. अचानक वसु की तबियत को क्या हुआ है?
दिव्या: पता नहीं माँ जी. डॉक्टर के पास जाएंगे तो पता चलेगा.
ऋतू: मैं भी आऊं क्या?
दिव्या: नहीं माँ जी ज़रुरत नहीं है. हाँ हो सके तो शाम को एक बार आ जाना. सब से मुलाकात भी हो जायेगी और तब तक हम दीदी को डॉक्टर के पास भी दिखा लाएंगे.
ऋतू: हाँ ये ठीक कहा तुमने. हम शाम को आ जाएंगे.
दिव्या: ठीक है मा जी और दीपू को भी बता दीजिये.
ऋतू: तू चिंता मत कर. जैसे ही वो यहां आएगा मैं उसे बता दूँगी. वो जल्दी ही वहाँ पहुँच जाएगा और फिर फ़ोन रख कर देती है.
हॉस्पिटल में:
कविता और दिव्या फिर वसु को डॉक्टर के पास लय जाते है. डॉक्टर उसे चेक करती है और दोनों को देख कर कहती है... इनके पति कहाँ है?
कविता: जी वो अपने काम पे गए है.
डॉक्टर: आप दोनों कौन हो?
दिव्या: हम इसकी बहने है. वैसे दीदी की हालत कैसी है? वो ठीक तो हो जायेगी ना?
डॉक्टर: चिंता करने की कोई बात नहीं है. बस खुश खबर ही है की आपकी दीदी पेट से है और वो जल्दी ही माँ बनने वाली है. डॉक्टर की बात सुनकर जहाँ कविता और दिव्या खुश हो जाती है वहीँ वसु शर्मा कर अपने सर नीचे कर लेती है.
डॉक्टर: इसीलिए मैंने इनके पति के बारे में पुछा था.
कविता: जी ये बात हम उनको बता देंगे.
डॉक्टर: ठीक है लेकिन अब इनका ज़्यादा ख्याल रखना. कोई भारी चीज़ उन्हें उठाने मत देना और अब इनको आराम की बहुत ज़रुरत है और जहाँ तक हो सके इसको खुश रखना. ये जितना खुश रहेगी बच्चा भी उतना ही अच्छा और तंदुरुस्त होगा. और समय समय पे दवायें लेते रहना.
कविता: जी समझ गए. और फिर तीनो हॉस्पिटल से घर के लिए निकल जाते है.
कार में जब तीनो बैठे होते है तो कविता और दिव्या दोनों वसु को बहुत बधाई देते है और प्यार से उसके पेट पे हाथ रख कर कविता धीरे से उसके कान में कहती है: बधाई हो बन्नो. तू फिर से माँ बनने वाली है. वसु थोड़ा शर्मा जाती है और उसी लय में कहती है धीरे से... चिंता मत कर... तू भी मेरी तरह ही जल्दी से पेट से हो जायेगी. जिस तरह दीपू अपना माल तेरे अंदर ही छोड़ता है मुझे पता है तेरा भी ऐसे ही हालत जल्दी ही हो जायेगी और ऐसे ही बातें करते हुए वो घर आ जाते है.
तब तक दीपू भी घर आ जाता है. ऑफिस में जब वो अपने सीट पे आया था तो ऋतू ने उसे बताया था की वसु की हालत ठीक नहीं है. वो वसु को फ़ोन करता है तो उसका फ़ोन स्विच ऑफ होता है तो वो लता को फ़ोन करता है और वो कहती है की वो तीनो हॉस्पिटल गए है और वो जल्दी ही घर आ जाए.
घर पे:
घर में सब लोग उनके आने का इंतज़ार कर रहे होते है. दीपू से रहा नहीं जाता और वो टहलते हुए फिर से फ़ोन करता है तो इस बार कविता फ़ोन receive कर के कहती है की वो सब घर आ रहे है.
दीपू: माँ को क्या हुआ है? तो ठीक तो है ना?
कविता: हम जल्दी ही घर आ रहे है और तुम्हे सब बता देंगे. अगर उतनी ही चिंता थी तो तू हॉस्पिटल क्यों नहीं आया?
दीपू: मुझे काम में थोड़ा देर हो गया इसीलिए नहीं आ पाया.
कविता: ठीक है इंतज़ार कर.... हम जल्दी ही घर आ रहे है.
थोड़ी देर बाद वसु कविता और दिव्या घर आ जाते है तो बाकी तीनो भी उनका ही इंतज़ार करते रहते है. उनको देख कर दीपू दौड़ कर वसु को पकड़ कर उससे पूछता है की उसे क्या हुआ है और वो अब कैसी है? वसु कुछ नहीं कहती और शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लेती है.
दिव्या: अब इतनी जल्दी क्या है? हम घर आ गए है ना... हमें पहले पानी तो पीने दो. फिर मीना जा कर सब के लिए पानी लाती है और सब बैठ कर उनके बोलने का इंतज़ार करते है की आखिर बात क्या है और वसु की हालत क्यों बिगड़ी है.
कविता और दिव्या उन दोनों को देख कर मन में ही हस्ती रहती है.
आखिर में दीपू से रहा नहीं जाता तो वो कहता है: तुम लोग सब चुप क्यों हो? कोई बताएगा की आखिर बात क्या है.
कविता फिर दीपू की तरफ देख कर थोड़े गुस्से (दिखावा) से कहती है... तूने क्या किया है. वसु की ज़रा भी फ़िक्र नहीं है. दीपू को लगता है की सच में वसु को कोई बिमारी है और उसे चिंता सताने लगती है.
दीपू: मैंने क्या किया है?
कविता को लगता है की अब उसे और परेशान करना अच्छा नहीं है तो वो हस्ते हुए कहती है.... अरे पगले तेरी बीवी को कुछ नहीं हुआ है. दीपू को अब भी समझ नहीं आता तो पूछता है की फिर वो सब डॉक्टर के पास क्यों गए?
कविता फिर उठ कर दीपू के पास जाती है और उसके कान को पकड़ कर... बुद्धू तू बाप बनने वाला है.
कविता जब ये बात बताती है तो शॉक से पहले दीपू को कुछ समझ नहीं आता. २ Min बाद जब ये बात उसके दिमाग में जाती है तो ख़ुशी से कविता को पकड़ कर उसे गले लगाता है और फिर वसु की तरफ देखता है जो अपने सर नीचे करे हुए हस्ती रहती है.
लता और मीना भी ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाते है तो दीपू वसु के पास आकर उसके चेहरे के ऊपर कर के उसकी आँखों में देखते हुए पूछता है तो वसु शर्म से हाँ कह कर अपनी आँखें नीचे कर लेती है. दीपू तो ख़ुशी से पागल हो जाता है और वो वसु को अपनी बाहों में लेकर ज़ोर से उसे गले लगा लेता है. इतने में लता और मीना भी उसके पास आकर वसु को प्यार से दुलारते है और उसे बधाई देते है.
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लता दीपू से: तू तो बड़ा तेज़ निकला रे और हस देती है.
अब घर में थोड़ा ख़ुशी का माहौल था तो इतने में दिव्या मिठाई लाती है और पहले दीपू को और फिर बाद में वसु को भी मिठाई पकड़ाती है. दोनों एक दुसरे को देख कर मिठाई आपस में बाटते है और एक दुसरे को खिलाते है. दीपू फिर सभी को अपने हाथ से मिठाई खिलाता है और सब ख़ुशी से मिठाई खाते है.
दोपहर को सब ख़ुशी से खाना खा कर आराम करने चले जाते है.
दीपू वसु को अपनी बाहों में लेकर ऐसे ही बातें करता रहता है तो इतने में वहां दोनों कविता और दिव्या भी आ जाते है.
दोनों वसु को देख कर कहते है: हमें बहुत ख़ुशी है की तुम माँ बनने वाली हो लेकिन थोड़ी जलन भी हो रही है. वसु उनकी बात समझ जाती है और दीपू की और देख कर कहती है... तुम क्या कहते हो?
दीपू हस्ते हुए क्यूंकि (उसे भी पता चल गया था की उन दोनों ने वो बात क्यों की)...मैं क्या कहूँ? अगर तुम सब एक साथ पेट से हो गए तो फिर तुम्हारे छोटे दीपू का ख्याल कौर रखेगा और हस देता है.
वसु: बात तो तुम्हारी सही है लेकिन उनकी बात भी सही है. कविता भी बिस्तर पे आकर दीपू के दुसरे कंधे पे अपना सर रख कर... मुझे भी जल्दी से माँ बना दोनों ना.... देखो मेरी उम्र भी वसु जितनी ही है. अगर और देरी हुई तो फिर मुझे भी कठिनाई हो सकती है और बड़े आस से दीपू की तरफ देखती है.
दिव्या भी झूटी गुस्से से कहती है... अगर तू भी पेट से हो गयी तो मैं क्यों पीछे रहूँ. जानू मेरे बारे में भी सोचो ना... कविता से: अगर तुम भी पेट से हो गयी तो फिर ये तो मुझे रोज़ सोने भी नहीं देगा और मेरी बजाते रहेगा. मैं उसे इतना ना झेल पाऊँगी.
दीपू: तुम दोनों की बात भी सही है.
दीपू कविता को देखते हुए: अगर तुम और मीना एक साथ पेट से हो गयी तो फिर मीना को एक भाई/ बेहन मिल जाएगी और तुम भी नानी बन जाओगी. क्या कहती हो?
कविता ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है तो वसु उठकर कविता के पास आती है और उसको देखते हुए अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देती है और उसको चूमते हुए कहती है...
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दीपू की बात एकदम सही है. कविता शर्मा जाती है और कहती है की वो एक बार मीना से भी बात कर लेगी.
फिर ऐसे ही मस्ती की बातें करते हुए सब सो जाते है.
शाम को:
ऋतू और निशा भी उनके घर आते है और वसु के बारे में पूछते है तो फिर कविता दोनों को भी खुश खबर देती है तो दोनों भी बहुत खुश हो जाते है.
निशा वसु को कमरे में ले जाती है और निशा वसु को अपने गले लगा कर कहती है... माँ तुमने इतने दिनों बाद एक अच्छी खबर सुनाई है. मैं बहुत खुश हूँ और उसको देखते हुए उसकी आँखों से आंसूं निकल आते है.
वसु समझ जाती है और उसको अपने बाहों में लेकर कहती है: मैं समझ सकती हूँ बेटा तू क्यों रो रही है. अगर सब ठीक होता तो ऐसा खबर तुम मुझे देती और मैं नानी बन जाती लेकिन ऊपर वाले की बात को कोई नहीं टाल सकता.
निशा: नहीं माँ ये तो ख़ुशी के आंसूं है.
वसु: मैं तेरी माँ हूँ... मुझे सब पता है तू चाहे कितना भी झूट बोल दे.
निशा अब कुछ नहीं कह पाती और अपनी आँखें साफ़ कर के दोनों बाहर आते है.
ऋतू भी वसु को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वो भी उसको थोड़ा अलग ले जाकर कहती है: तुमने तो बहुत अच्छी खबर दी हो वसु.
वसु ऋतू को अपने बाहों में लेकर उसका धन्यवाद करती है और जब देखती है की वो दोनों ही अकेले है तो उसके होंठ को प्यार से चूम कर कहती है... सच में...मैंने कभी नहीं सोचा था की इस उम्र में मैं फिर से पेट से हो जाऊंगी.
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ऋतू: अभी तेरी उम्र ही क्या है? तू तो अभी भी जवान और गदरायी लग रही हो. और दीपू तो एक हट्टा कट्टा नौजवान लड़का है. ये तो होना ही था और मैं भी बहुत खुश हूँ और फिर उसके चेहरे पर भी उदासी छा जाती है.
वसु ऋतू को गले लग कर... चिंता मत करो.. मुझे तुम्हारे और दिनेश के बारे में भी पता चला था की वो भी तुमसे शादी करना चाहता था जैसे दीपू ने मुझसे किया. लेकिन क्या पता भगवान् ने तुम्हारे और निशा के लिए कुछ सोचा होगा.
वैसे तुम भी तो अपने उम्र से बहुत काम ही लगती हो और तुम भी तो एकदम सेक्सी लग रही हो. अगर तुम चाहो तो लड़कों की लाइन लग जायेगी... बस तुम्हारी हाँ की देरी है. बोलो क्या कहती हो?
ऋतू: नहीं रे.... अभी मैं ऐसा कुछ नहीं सोच रही हूँ. मुझे तो निशा को लेकर बहुत चिंता हो जाती है. वो तो अभी भी जवान है और इतनी काम उम्र में ही वो विधवा हो गयी है.
वसु: मैं समझ सकती हूँ. हमें भी उसकी बहुत चिंता लगी रहती है. देखते है अगर मैं कुछ कर सकती हूँ तो....
और फिर दोनों बाहर आ जाते है और सब से मिल कर बातें करने लग जाते है. फिर सब लोग मिल कर ख़ुशी ख़ुशी से खाना खाते है और दोनों अपने घर चले जाते है भले ही दीपू और बाकी लोग उनको उस रात रुकने के लिए कहते है. लेकिन ऋतू नहीं मानती और दोनों ऋतू और निशा अपने घर चले जाते है.
मीना और मनोज की बातें:
अब लोग वसु का अच्छे से ध्यान रखते है और उसे कुछ कान नहीं करने देते. घर में सब काम कविता और दिव्या ही करते है. जब सब अपने काम में लगे रहते है तो मीना मनोज को फ़ोन करती है.
मीना मनोज से: कैसे हो तुम?
मनोज: मैं ठीक हो. क्या बात है बहुत दिनों बाद फ़ोन कर रही हो.
मीना: तुम्हे तो पता है ना.... अभी अभी ही यहाँ पर हालत थोड़ा ठीक हो रहा है. कल ही निशा और उसकी सास आये थे घर पे. उनको देख कर मुझे भी थोड़ा बुरा लगा.
मनोज: हम्म.... तुम्हारी बात भी सही है. बोलो और क्या बात है?
मीना: मैं जिसके लिए यहां इतनी देर से हूँ तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है ना? कहीं ऐसा ना हो की जब मैं माँ बन जाऊं तो तुम्हे बुरा ना लगे. अगर भगवान् की मर्ज़ी है तो हम दोनों बिना माँ बाप बने ही अपनी ज़िन्दगी गुज़ार सकते है. मुझे उसके कोई प्रॉब्लम नहीं है.
मनोज: हाँ तुम सही कह रही हो. शायद मुझ में ही कमी है. लेकिन अगर तुम माँ बन गयी तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं रहेगा... अभी भी और आगे जाकर भी.
मीना: ठीक है. एक और बात... मुझे माँ ने बताया है की जब बच्चा होगा तो वो हमारा ही होगा. हम ही उसे अपना नाम देंगे और दीपू और बाकी दीदी भी इस बात के लिए मान गए है.
मनोज: ये तो बहुत अच्छी बात है. ठीक है हो सके तो जल्दी आ जाना. मेरा यहां अकेले रहना भी मुश्किल हो रहा है.
मीना: हाँ जल्दी आने की कोशिश करती हूँ और फिर वो फ़ोन कट कर देती है.
उस रात जब मीना और कविता साथ में होते है सोने के लिए तो मीना कहती है...
मीना: देखो ना माँ... वसु दीदी भी पेट से हो गयी है. मैंने मनोज से इस बारे में बात की है जो हमने कुछ दिन पहले बात की थी.. उन्होंने भी कहा है की उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है... ना अब या फिर आगे जा कर भी.
कविता: ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा. मैं जल्दी ही वसु और दीपू से इस बारे में बात करती हूँ.
मीना: ठीक है माँ.. मुझे भी बता देना.
कविता: ठीक है उनसे बात करके ज़रूर बता दूँगी.
मीना: वैसे एक और बात है माँ.
कविता: क्या?
मीना: कल से मेरे “अच्छे दिन” शुरू होने वाले है...
कविता मीना की तरफ देख कर समझ जाती है और प्यार से उसका माथा चूम कर कहती है... आशा करो की जल्दी ही तू भी मुझे खुश खबर दे….
वहीँ रात को ऋतू और निशा दोनों एक दुसरे की बाहों में रह कर बाते करते है.
निशा: देखो ना माँ वसु माँ फिर से पेट से हो गयी है. पता नहीं मुझे कभी ऐसा ख़ुशी मिलेगा के नहीं.
ऋतू: मैं जानती हूँ बेटा. तू तो अभी भी जवान है. बोल तेरे लिए कोई लड़का देखूं क्या?
निशा: नहीं माँ... मैंने अपनी ज़िन्दगी में सिर्फ दो लोगों से प्यार किया है. निशा की बात सुनकर ऋतू निशा की तरफ देखती है तो निशा कहती है... हाँ मैं सही कह रही हूँ. एक दिनेश और...
ऋतू: और दूसरा कौन है? कोई और है क्या जिसके बारे में मुझे पता नहीं है... निशा ऋतू की तरफ देख कर... दूसरा और कोई नहीं... मेरा भाई दीपू...
ऋतू निशा की बात सुनकर आश्चर्य से उसे देखती है और फिर हस देती है...
निशा: आप क्यों हस रही हो माँ?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा..मैंने इसके बारे में कभी सोचा नहीं था......
निशा: क्या सोचा नहीं था?
ऋतू: यही की तू भी दीपू से प्यार करती है.
निशा: “भी” का क्या मतलब है?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा...
और फिर ऋतू निशा को देख कर प्यार से उसके होंठों को चूमती है जिसमें निशा भी उसका साथ देती है. ऋतू निशा की जुबां को अपने मुँह में लेती है और निशा भी पूरी शिद्दत से अपनी जुबां ऋतू के मुँह में देती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है और दोनों एक दुसरे को फिर से “शांत” करके सो जाते है….
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बहुत ही खुबसुरत लाजवाब और शानदार अद्भुत रमणिय मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया36th Update (घर में खुशियों का आगमन)
दिव्या: वैसे लगता है जन्मदिन तुम्हारा हुआ... और बदन सब का टूटा.... इस बात पे दोनों हस्ते है और फिर वसु दरवाज़ा निकाल कर दोनों बाहर आ जाते है....
अब आगे..
अगली सुबह:
सब लोग अपना काम करते हस और चाय पीते हुए बातें करते रहते है. वसु अभी भी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी जिसे देख कर सब अपनी हसीं दबा देते हस लेकिन वसु उनके चेहरे को देख कर समझ जाती है और थोड़े गुस्से नज़र से दीपू की तरफ देखती है. दीपू भी उसको देख कर आँख मार देता है.
थोड़ी देर बाद जब वसु किचन में जाती हस तो वहां से वो दीपू को बुलाती है. दीपू जब वसु के पास किचन में जाता हस तो
वसु: तुम कितने बेशरम हो गए हो. मुझसे ठीक से चला नहीं जा रहा हस और तुम आँख मार रहे हो.
दीपू: वसु को अपनी बाँहों में लेकर... इसमें शर्म कैसा? मैं तो अपनी बीवी को आँख मार रहा हूँ और तुम्हे भी याद होगा जब दिव्या और कविता का भी ऐसा हाल था जब... इतना बोल कर दीपू रुक जाता हस तो वसु उसे झूठे गुस्से से देखती हस और हस देती है.
दीपू दरवाज़े पे देखते है की कोई नहीं है तो उसका सर पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देता है जिसमें वसु भी उसका पूरा साथ देती है और दोनों ३- ४ Min तक एक दुसरे का रस चूस लेते है.
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दोनों किस करते वक़्त दीपू वसु की गांड दबा देता है लेकिन वसु की हलकी चीख दीपू के होंठों पे डाब जाती है. ४ Min बाद जब दोनों अलग होते है तो वसु दीपू के सीने मैं हल्का मुक्का मारती है और उसे दूर कर देती है.
दीपू: चल जल्दी ठीक हो जाओ. अब तो रोज़ तुम्हारी गांड मारूंगा. उसके पास आकर उसके कान में: बोलो मेरा लंड लोगी ना अपने गांड में.
वसु: चुप कर. तुझे हर बार यही बात सूझती है क्या? बाहर निकल और ऑफिस के लिए तैयार हो जा. और उसे बाहर धकेल देती है. जब वो निकल जाता है तो वसु के चेहरे पे हसी आ जाती है और मन में सोचती है... कल सच में गांड मरवाने में बड़ा मजा आया... जितना दर्द देते है उतना ही मजा भी देता है……
और जैसे दीपू ने कहा था.... उस रात वो दिव्या की जम के बजाता है आगे और पीछे से और उसे भी पूरा खुश कर देता है. दिव्या का भी वो वसु जैसा हाल कर देता है. कविता बच जाती है क्यूंकि वो उस रात मीना के साथ सोई हुई थी.
कुछ दिनों बाद:
कुछ दिनों बाद सुबह सब अपने काम में लगे रहते है. दीपू भी अपने ऑफिस चला गया था. घर में सब लोग बैठ कर ऐसे ही बात कर रहे थे. वसु को थोड़ा चक्कर आता है और और उसका सर थोड़ा भारी लग रहा था.
वसु: मुझे थोड़ा चक्कर आ रहा है और ऐसे बोलते हुए उसके पेट में थोड़ा गड़बड़ होता है और वो भाग कर बाथरूम में चली जाती है जहाँ उसे उल्टियां होने लगती है. वसु के हालत देख कर कविता और दिव्या भी उसके पीछे भागते है लेकिन वसु बाथरूम में जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लेती है.
कविता: क्या हुआ? तुमने दरवाज़ा क्यों बंद कर दिया?
थोड़ी देर बाद वसु अपने आप को थोड़ा ठीक करते हुए बाथरूम का दरवाज़ा खोलती है और कहती है... सर थोड़ा चकरा रहा था और थोड़ी उल्टियां भी हुई है.
कविता ये बात सुन कर: क्या बात है क्यूंकि उसे शायद पता चल गया था की वसु को चक्कर क्यों आ रहा है.
कविता उसे अपनी बाहों में लेकर कान में कहती है: बन्नो बधाई हो. लगता है तू माँ बनने वाली है.
दिव्या को कुछ पता नहीं चलता तो वो उन दोनों को ऐसे देख कर पूछती है की वसु को क्या हुआ है?
कविता: अरे बुद्धू तू जल्दी से मौसी बनने वाली है या फिर छोटी माँ. दिव्या ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है और वसु को गले लगा लेती है.
वसु: मुझे पता नहीं की तुम जो कह रही हो वो सही है या नहीं.
कविता: क्यों जब दीपू और निशा पैदा हुए थे तो तुझे उल्टियां नहीं आयी थी क्या? और ऐसा बोल कर कविता हस देती है और कहती है चल तुझे डॉक्टर के पास लेकर जाते है.
बाहर आने से पहले कविता दोनों से कहती है की फिलहाल ये बात मीना और लता को ना बताएं. जब कन्फर्म हो जाएगा तभी उन्हें बताएँगे और उन्हें थोड़ा सरप्राइज भी देंगे. इस बात पे दोनों मान जाते है और अपने आप को ठीक करके बाथरूम से बाहर आ जाते है.
लता: क्या हुआ वसु को?
कविता: कुछ नहीं दीदी... इसका सर थोड़ा भारी लग रहा है. एक बार डॉक्टर को दिखा कर ले आते है.
लता: हाँ ठीक रहेगा.
दिव्या: मैं एक बार दीपू को फ़ोन कर के उसे भी हॉस्पिटल आने को कहती हूँ.
लता: हाँ उसे भी पता चलना चाहिए ना की उसकी बीवी की हालत ठीक नहीं है और ऐसा कहते हुए सब हस देते है.
दिव्या दीपू को फ़ोन करती है. ठीक उसी वक़्त दीपू किसीसे मिलने बाहर गया था और जल्दबाज़ी में अपना फ़ोन नहीं ले जाता. जब दिव्या फ़ोन करती है तो ऋतू उसका फ़ोन receive करती है.
दिव्या: दीपू?
ऋतू: मैं ऋतू बोल रही हूँ. दीपू थोड़ा बाहर गया है. बोलो क्या काम है.
दिव्या: कुछ नहीं माँ जी… लगता है दीदी वसु की थोड़ी तबियत खराब हो गयी है. हम उसे डॉक्टर के पास ले जा रहे है. अगर दीपू होता तो उसे भी वहाँ आने को कहते.
ऋतू थोड़ा घबराते हुए: सब ठीक तो है ना दिव्या. अचानक वसु की तबियत को क्या हुआ है?
दिव्या: पता नहीं माँ जी. डॉक्टर के पास जाएंगे तो पता चलेगा.
ऋतू: मैं भी आऊं क्या?
दिव्या: नहीं माँ जी ज़रुरत नहीं है. हाँ हो सके तो शाम को एक बार आ जाना. सब से मुलाकात भी हो जायेगी और तब तक हम दीदी को डॉक्टर के पास भी दिखा लाएंगे.
ऋतू: हाँ ये ठीक कहा तुमने. हम शाम को आ जाएंगे.
दिव्या: ठीक है मा जी और दीपू को भी बता दीजिये.
ऋतू: तू चिंता मत कर. जैसे ही वो यहां आएगा मैं उसे बता दूँगी. वो जल्दी ही वहाँ पहुँच जाएगा और फिर फ़ोन रख कर देती है.
हॉस्पिटल में:
कविता और दिव्या फिर वसु को डॉक्टर के पास लय जाते है. डॉक्टर उसे चेक करती है और दोनों को देख कर कहती है... इनके पति कहाँ है?
कविता: जी वो अपने काम पे गए है.
डॉक्टर: आप दोनों कौन हो?
दिव्या: हम इसकी बहने है. वैसे दीदी की हालत कैसी है? वो ठीक तो हो जायेगी ना?
डॉक्टर: चिंता करने की कोई बात नहीं है. बस खुश खबर ही है की आपकी दीदी पेट से है और वो जल्दी ही माँ बनने वाली है. डॉक्टर की बात सुनकर जहाँ कविता और दिव्या खुश हो जाती है वहीँ वसु शर्मा कर अपने सर नीचे कर लेती है.
डॉक्टर: इसीलिए मैंने इनके पति के बारे में पुछा था.
कविता: जी ये बात हम उनको बता देंगे.
डॉक्टर: ठीक है लेकिन अब इनका ज़्यादा ख्याल रखना. कोई भारी चीज़ उन्हें उठाने मत देना और अब इनको आराम की बहुत ज़रुरत है और जहाँ तक हो सके इसको खुश रखना. ये जितना खुश रहेगी बच्चा भी उतना ही अच्छा और तंदुरुस्त होगा. और समय समय पे दवायें लेते रहना.
कविता: जी समझ गए. और फिर तीनो हॉस्पिटल से घर के लिए निकल जाते है.
कार में जब तीनो बैठे होते है तो कविता और दिव्या दोनों वसु को बहुत बधाई देते है और प्यार से उसके पेट पे हाथ रख कर कविता धीरे से उसके कान में कहती है: बधाई हो बन्नो. तू फिर से माँ बनने वाली है. वसु थोड़ा शर्मा जाती है और उसी लय में कहती है धीरे से... चिंता मत कर... तू भी मेरी तरह ही जल्दी से पेट से हो जायेगी. जिस तरह दीपू अपना माल तेरे अंदर ही छोड़ता है मुझे पता है तेरा भी ऐसे ही हालत जल्दी ही हो जायेगी और ऐसे ही बातें करते हुए वो घर आ जाते है.
तब तक दीपू भी घर आ जाता है. ऑफिस में जब वो अपने सीट पे आया था तो ऋतू ने उसे बताया था की वसु की हालत ठीक नहीं है. वो वसु को फ़ोन करता है तो उसका फ़ोन स्विच ऑफ होता है तो वो लता को फ़ोन करता है और वो कहती है की वो तीनो हॉस्पिटल गए है और वो जल्दी ही घर आ जाए.
घर पे:
घर में सब लोग उनके आने का इंतज़ार कर रहे होते है. दीपू से रहा नहीं जाता और वो टहलते हुए फिर से फ़ोन करता है तो इस बार कविता फ़ोन receive कर के कहती है की वो सब घर आ रहे है.
दीपू: माँ को क्या हुआ है? तो ठीक तो है ना?
कविता: हम जल्दी ही घर आ रहे है और तुम्हे सब बता देंगे. अगर उतनी ही चिंता थी तो तू हॉस्पिटल क्यों नहीं आया?
दीपू: मुझे काम में थोड़ा देर हो गया इसीलिए नहीं आ पाया.
कविता: ठीक है इंतज़ार कर.... हम जल्दी ही घर आ रहे है.
थोड़ी देर बाद वसु कविता और दिव्या घर आ जाते है तो बाकी तीनो भी उनका ही इंतज़ार करते रहते है. उनको देख कर दीपू दौड़ कर वसु को पकड़ कर उससे पूछता है की उसे क्या हुआ है और वो अब कैसी है? वसु कुछ नहीं कहती और शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लेती है.
दिव्या: अब इतनी जल्दी क्या है? हम घर आ गए है ना... हमें पहले पानी तो पीने दो. फिर मीना जा कर सब के लिए पानी लाती है और सब बैठ कर उनके बोलने का इंतज़ार करते है की आखिर बात क्या है और वसु की हालत क्यों बिगड़ी है.
कविता और दिव्या उन दोनों को देख कर मन में ही हस्ती रहती है.
आखिर में दीपू से रहा नहीं जाता तो वो कहता है: तुम लोग सब चुप क्यों हो? कोई बताएगा की आखिर बात क्या है.
कविता फिर दीपू की तरफ देख कर थोड़े गुस्से (दिखावा) से कहती है... तूने क्या किया है. वसु की ज़रा भी फ़िक्र नहीं है. दीपू को लगता है की सच में वसु को कोई बिमारी है और उसे चिंता सताने लगती है.
दीपू: मैंने क्या किया है?
कविता को लगता है की अब उसे और परेशान करना अच्छा नहीं है तो वो हस्ते हुए कहती है.... अरे पगले तेरी बीवी को कुछ नहीं हुआ है. दीपू को अब भी समझ नहीं आता तो पूछता है की फिर वो सब डॉक्टर के पास क्यों गए?
कविता फिर उठ कर दीपू के पास जाती है और उसके कान को पकड़ कर... बुद्धू तू बाप बनने वाला है.
कविता जब ये बात बताती है तो शॉक से पहले दीपू को कुछ समझ नहीं आता. २ Min बाद जब ये बात उसके दिमाग में जाती है तो ख़ुशी से कविता को पकड़ कर उसे गले लगाता है और फिर वसु की तरफ देखता है जो अपने सर नीचे करे हुए हस्ती रहती है.
लता और मीना भी ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाते है तो दीपू वसु के पास आकर उसके चेहरे के ऊपर कर के उसकी आँखों में देखते हुए पूछता है तो वसु शर्म से हाँ कह कर अपनी आँखें नीचे कर लेती है. दीपू तो ख़ुशी से पागल हो जाता है और वो वसु को अपनी बाहों में लेकर ज़ोर से उसे गले लगा लेता है. इतने में लता और मीना भी उसके पास आकर वसु को प्यार से दुलारते है और उसे बधाई देते है.
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लता दीपू से: तू तो बड़ा तेज़ निकला रे और हस देती है.
अब घर में थोड़ा ख़ुशी का माहौल था तो इतने में दिव्या मिठाई लाती है और पहले दीपू को और फिर बाद में वसु को भी मिठाई पकड़ाती है. दोनों एक दुसरे को देख कर मिठाई आपस में बाटते है और एक दुसरे को खिलाते है. दीपू फिर सभी को अपने हाथ से मिठाई खिलाता है और सब ख़ुशी से मिठाई खाते है.
दोपहर को सब ख़ुशी से खाना खा कर आराम करने चले जाते है.
दीपू वसु को अपनी बाहों में लेकर ऐसे ही बातें करता रहता है तो इतने में वहां दोनों कविता और दिव्या भी आ जाते है.
दोनों वसु को देख कर कहते है: हमें बहुत ख़ुशी है की तुम माँ बनने वाली हो लेकिन थोड़ी जलन भी हो रही है. वसु उनकी बात समझ जाती है और दीपू की और देख कर कहती है... तुम क्या कहते हो?
दीपू हस्ते हुए क्यूंकि (उसे भी पता चल गया था की उन दोनों ने वो बात क्यों की)...मैं क्या कहूँ? अगर तुम सब एक साथ पेट से हो गए तो फिर तुम्हारे छोटे दीपू का ख्याल कौर रखेगा और हस देता है.
वसु: बात तो तुम्हारी सही है लेकिन उनकी बात भी सही है. कविता भी बिस्तर पे आकर दीपू के दुसरे कंधे पे अपना सर रख कर... मुझे भी जल्दी से माँ बना दोनों ना.... देखो मेरी उम्र भी वसु जितनी ही है. अगर और देरी हुई तो फिर मुझे भी कठिनाई हो सकती है और बड़े आस से दीपू की तरफ देखती है.
दिव्या भी झूटी गुस्से से कहती है... अगर तू भी पेट से हो गयी तो मैं क्यों पीछे रहूँ. जानू मेरे बारे में भी सोचो ना... कविता से: अगर तुम भी पेट से हो गयी तो फिर ये तो मुझे रोज़ सोने भी नहीं देगा और मेरी बजाते रहेगा. मैं उसे इतना ना झेल पाऊँगी.
दीपू: तुम दोनों की बात भी सही है.
दीपू कविता को देखते हुए: अगर तुम और मीना एक साथ पेट से हो गयी तो फिर मीना को एक भाई/ बेहन मिल जाएगी और तुम भी नानी बन जाओगी. क्या कहती हो?
कविता ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है तो वसु उठकर कविता के पास आती है और उसको देखते हुए अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देती है और उसको चूमते हुए कहती है...
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दीपू की बात एकदम सही है. कविता शर्मा जाती है और कहती है की वो एक बार मीना से भी बात कर लेगी.
फिर ऐसे ही मस्ती की बातें करते हुए सब सो जाते है.
शाम को:
ऋतू और निशा भी उनके घर आते है और वसु के बारे में पूछते है तो फिर कविता दोनों को भी खुश खबर देती है तो दोनों भी बहुत खुश हो जाते है.
निशा वसु को कमरे में ले जाती है और निशा वसु को अपने गले लगा कर कहती है... माँ तुमने इतने दिनों बाद एक अच्छी खबर सुनाई है. मैं बहुत खुश हूँ और उसको देखते हुए उसकी आँखों से आंसूं निकल आते है.
वसु समझ जाती है और उसको अपने बाहों में लेकर कहती है: मैं समझ सकती हूँ बेटा तू क्यों रो रही है. अगर सब ठीक होता तो ऐसा खबर तुम मुझे देती और मैं नानी बन जाती लेकिन ऊपर वाले की बात को कोई नहीं टाल सकता.
निशा: नहीं माँ ये तो ख़ुशी के आंसूं है.
वसु: मैं तेरी माँ हूँ... मुझे सब पता है तू चाहे कितना भी झूट बोल दे.
निशा अब कुछ नहीं कह पाती और अपनी आँखें साफ़ कर के दोनों बाहर आते है.
ऋतू भी वसु को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वो भी उसको थोड़ा अलग ले जाकर कहती है: तुमने तो बहुत अच्छी खबर दी हो वसु.
वसु ऋतू को अपने बाहों में लेकर उसका धन्यवाद करती है और जब देखती है की वो दोनों ही अकेले है तो उसके होंठ को प्यार से चूम कर कहती है... सच में...मैंने कभी नहीं सोचा था की इस उम्र में मैं फिर से पेट से हो जाऊंगी.
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ऋतू: अभी तेरी उम्र ही क्या है? तू तो अभी भी जवान और गदरायी लग रही हो. और दीपू तो एक हट्टा कट्टा नौजवान लड़का है. ये तो होना ही था और मैं भी बहुत खुश हूँ और फिर उसके चेहरे पर भी उदासी छा जाती है.
वसु ऋतू को गले लग कर... चिंता मत करो.. मुझे तुम्हारे और दिनेश के बारे में भी पता चला था की वो भी तुमसे शादी करना चाहता था जैसे दीपू ने मुझसे किया. लेकिन क्या पता भगवान् ने तुम्हारे और निशा के लिए कुछ सोचा होगा.
वैसे तुम भी तो अपने उम्र से बहुत काम ही लगती हो और तुम भी तो एकदम सेक्सी लग रही हो. अगर तुम चाहो तो लड़कों की लाइन लग जायेगी... बस तुम्हारी हाँ की देरी है. बोलो क्या कहती हो?
ऋतू: नहीं रे.... अभी मैं ऐसा कुछ नहीं सोच रही हूँ. मुझे तो निशा को लेकर बहुत चिंता हो जाती है. वो तो अभी भी जवान है और इतनी काम उम्र में ही वो विधवा हो गयी है.
वसु: मैं समझ सकती हूँ. हमें भी उसकी बहुत चिंता लगी रहती है. देखते है अगर मैं कुछ कर सकती हूँ तो....
और फिर दोनों बाहर आ जाते है और सब से मिल कर बातें करने लग जाते है. फिर सब लोग मिल कर ख़ुशी ख़ुशी से खाना खाते है और दोनों अपने घर चले जाते है भले ही दीपू और बाकी लोग उनको उस रात रुकने के लिए कहते है. लेकिन ऋतू नहीं मानती और दोनों ऋतू और निशा अपने घर चले जाते है.
मीना और मनोज की बातें:
अब लोग वसु का अच्छे से ध्यान रखते है और उसे कुछ कान नहीं करने देते. घर में सब काम कविता और दिव्या ही करते है. जब सब अपने काम में लगे रहते है तो मीना मनोज को फ़ोन करती है.
मीना मनोज से: कैसे हो तुम?
मनोज: मैं ठीक हो. क्या बात है बहुत दिनों बाद फ़ोन कर रही हो.
मीना: तुम्हे तो पता है ना.... अभी अभी ही यहाँ पर हालत थोड़ा ठीक हो रहा है. कल ही निशा और उसकी सास आये थे घर पे. उनको देख कर मुझे भी थोड़ा बुरा लगा.
मनोज: हम्म.... तुम्हारी बात भी सही है. बोलो और क्या बात है?
मीना: मैं जिसके लिए यहां इतनी देर से हूँ तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है ना? कहीं ऐसा ना हो की जब मैं माँ बन जाऊं तो तुम्हे बुरा ना लगे. अगर भगवान् की मर्ज़ी है तो हम दोनों बिना माँ बाप बने ही अपनी ज़िन्दगी गुज़ार सकते है. मुझे उसके कोई प्रॉब्लम नहीं है.
मनोज: हाँ तुम सही कह रही हो. शायद मुझ में ही कमी है. लेकिन अगर तुम माँ बन गयी तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं रहेगा... अभी भी और आगे जाकर भी.
मीना: ठीक है. एक और बात... मुझे माँ ने बताया है की जब बच्चा होगा तो वो हमारा ही होगा. हम ही उसे अपना नाम देंगे और दीपू और बाकी दीदी भी इस बात के लिए मान गए है.
मनोज: ये तो बहुत अच्छी बात है. ठीक है हो सके तो जल्दी आ जाना. मेरा यहां अकेले रहना भी मुश्किल हो रहा है.
मीना: हाँ जल्दी आने की कोशिश करती हूँ और फिर वो फ़ोन कट कर देती है.
उस रात जब मीना और कविता साथ में होते है सोने के लिए तो मीना कहती है...
मीना: देखो ना माँ... वसु दीदी भी पेट से हो गयी है. मैंने मनोज से इस बारे में बात की है जो हमने कुछ दिन पहले बात की थी.. उन्होंने भी कहा है की उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है... ना अब या फिर आगे जा कर भी.
कविता: ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा. मैं जल्दी ही वसु और दीपू से इस बारे में बात करती हूँ.
मीना: ठीक है माँ.. मुझे भी बता देना.
कविता: ठीक है उनसे बात करके ज़रूर बता दूँगी.
मीना: वैसे एक और बात है माँ.
कविता: क्या?
मीना: कल से मेरे “अच्छे दिन” शुरू होने वाले है...
कविता मीना की तरफ देख कर समझ जाती है और प्यार से उसका माथा चूम कर कहती है... आशा करो की जल्दी ही तू भी मुझे खुश खबर दे….
वहीँ रात को ऋतू और निशा दोनों एक दुसरे की बाहों में रह कर बाते करते है.
निशा: देखो ना माँ वसु माँ फिर से पेट से हो गयी है. पता नहीं मुझे कभी ऐसा ख़ुशी मिलेगा के नहीं.
ऋतू: मैं जानती हूँ बेटा. तू तो अभी भी जवान है. बोल तेरे लिए कोई लड़का देखूं क्या?
निशा: नहीं माँ... मैंने अपनी ज़िन्दगी में सिर्फ दो लोगों से प्यार किया है. निशा की बात सुनकर ऋतू निशा की तरफ देखती है तो निशा कहती है... हाँ मैं सही कह रही हूँ. एक दिनेश और...
ऋतू: और दूसरा कौन है? कोई और है क्या जिसके बारे में मुझे पता नहीं है... निशा ऋतू की तरफ देख कर... दूसरा और कोई नहीं... मेरा भाई दीपू...
ऋतू निशा की बात सुनकर आश्चर्य से उसे देखती है और फिर हस देती है...
निशा: आप क्यों हस रही हो माँ?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा..मैंने इसके बारे में कभी सोचा नहीं था......
निशा: क्या सोचा नहीं था?
ऋतू: यही की तू भी दीपू से प्यार करती है.
निशा: “भी” का क्या मतलब है?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा...
और फिर ऋतू निशा को देख कर प्यार से उसके होंठों को चूमती है जिसमें निशा भी उसका साथ देती है. ऋतू निशा की जुबां को अपने मुँह में लेती है और निशा भी पूरी शिद्दत से अपनी जुबां ऋतू के मुँह में देती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है और दोनों एक दुसरे को फिर से “शांत” करके सो जाते है….
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Shandar update bhai36th Update (घर में खुशियों का आगमन)
दिव्या: वैसे लगता है जन्मदिन तुम्हारा हुआ... और बदन सब का टूटा.... इस बात पे दोनों हस्ते है और फिर वसु दरवाज़ा निकाल कर दोनों बाहर आ जाते है....
अब आगे..
अगली सुबह:
सब लोग अपना काम करते हस और चाय पीते हुए बातें करते रहते है. वसु अभी भी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी जिसे देख कर सब अपनी हसीं दबा देते हस लेकिन वसु उनके चेहरे को देख कर समझ जाती है और थोड़े गुस्से नज़र से दीपू की तरफ देखती है. दीपू भी उसको देख कर आँख मार देता है.
थोड़ी देर बाद जब वसु किचन में जाती हस तो वहां से वो दीपू को बुलाती है. दीपू जब वसु के पास किचन में जाता हस तो
वसु: तुम कितने बेशरम हो गए हो. मुझसे ठीक से चला नहीं जा रहा हस और तुम आँख मार रहे हो.
दीपू: वसु को अपनी बाँहों में लेकर... इसमें शर्म कैसा? मैं तो अपनी बीवी को आँख मार रहा हूँ और तुम्हे भी याद होगा जब दिव्या और कविता का भी ऐसा हाल था जब... इतना बोल कर दीपू रुक जाता हस तो वसु उसे झूठे गुस्से से देखती हस और हस देती है.
दीपू दरवाज़े पे देखते है की कोई नहीं है तो उसका सर पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देता है जिसमें वसु भी उसका पूरा साथ देती है और दोनों ३- ४ Min तक एक दुसरे का रस चूस लेते है.
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दोनों किस करते वक़्त दीपू वसु की गांड दबा देता है लेकिन वसु की हलकी चीख दीपू के होंठों पे डाब जाती है. ४ Min बाद जब दोनों अलग होते है तो वसु दीपू के सीने मैं हल्का मुक्का मारती है और उसे दूर कर देती है.
दीपू: चल जल्दी ठीक हो जाओ. अब तो रोज़ तुम्हारी गांड मारूंगा. उसके पास आकर उसके कान में: बोलो मेरा लंड लोगी ना अपने गांड में.
वसु: चुप कर. तुझे हर बार यही बात सूझती है क्या? बाहर निकल और ऑफिस के लिए तैयार हो जा. और उसे बाहर धकेल देती है. जब वो निकल जाता है तो वसु के चेहरे पे हसी आ जाती है और मन में सोचती है... कल सच में गांड मरवाने में बड़ा मजा आया... जितना दर्द देते है उतना ही मजा भी देता है……
और जैसे दीपू ने कहा था.... उस रात वो दिव्या की जम के बजाता है आगे और पीछे से और उसे भी पूरा खुश कर देता है. दिव्या का भी वो वसु जैसा हाल कर देता है. कविता बच जाती है क्यूंकि वो उस रात मीना के साथ सोई हुई थी.
कुछ दिनों बाद:
कुछ दिनों बाद सुबह सब अपने काम में लगे रहते है. दीपू भी अपने ऑफिस चला गया था. घर में सब लोग बैठ कर ऐसे ही बात कर रहे थे. वसु को थोड़ा चक्कर आता है और और उसका सर थोड़ा भारी लग रहा था.
वसु: मुझे थोड़ा चक्कर आ रहा है और ऐसे बोलते हुए उसके पेट में थोड़ा गड़बड़ होता है और वो भाग कर बाथरूम में चली जाती है जहाँ उसे उल्टियां होने लगती है. वसु के हालत देख कर कविता और दिव्या भी उसके पीछे भागते है लेकिन वसु बाथरूम में जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लेती है.
कविता: क्या हुआ? तुमने दरवाज़ा क्यों बंद कर दिया?
थोड़ी देर बाद वसु अपने आप को थोड़ा ठीक करते हुए बाथरूम का दरवाज़ा खोलती है और कहती है... सर थोड़ा चकरा रहा था और थोड़ी उल्टियां भी हुई है.
कविता ये बात सुन कर: क्या बात है क्यूंकि उसे शायद पता चल गया था की वसु को चक्कर क्यों आ रहा है.
कविता उसे अपनी बाहों में लेकर कान में कहती है: बन्नो बधाई हो. लगता है तू माँ बनने वाली है.
दिव्या को कुछ पता नहीं चलता तो वो उन दोनों को ऐसे देख कर पूछती है की वसु को क्या हुआ है?
कविता: अरे बुद्धू तू जल्दी से मौसी बनने वाली है या फिर छोटी माँ. दिव्या ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है और वसु को गले लगा लेती है.
वसु: मुझे पता नहीं की तुम जो कह रही हो वो सही है या नहीं.
कविता: क्यों जब दीपू और निशा पैदा हुए थे तो तुझे उल्टियां नहीं आयी थी क्या? और ऐसा बोल कर कविता हस देती है और कहती है चल तुझे डॉक्टर के पास लेकर जाते है.
बाहर आने से पहले कविता दोनों से कहती है की फिलहाल ये बात मीना और लता को ना बताएं. जब कन्फर्म हो जाएगा तभी उन्हें बताएँगे और उन्हें थोड़ा सरप्राइज भी देंगे. इस बात पे दोनों मान जाते है और अपने आप को ठीक करके बाथरूम से बाहर आ जाते है.
लता: क्या हुआ वसु को?
कविता: कुछ नहीं दीदी... इसका सर थोड़ा भारी लग रहा है. एक बार डॉक्टर को दिखा कर ले आते है.
लता: हाँ ठीक रहेगा.
दिव्या: मैं एक बार दीपू को फ़ोन कर के उसे भी हॉस्पिटल आने को कहती हूँ.
लता: हाँ उसे भी पता चलना चाहिए ना की उसकी बीवी की हालत ठीक नहीं है और ऐसा कहते हुए सब हस देते है.
दिव्या दीपू को फ़ोन करती है. ठीक उसी वक़्त दीपू किसीसे मिलने बाहर गया था और जल्दबाज़ी में अपना फ़ोन नहीं ले जाता. जब दिव्या फ़ोन करती है तो ऋतू उसका फ़ोन receive करती है.
दिव्या: दीपू?
ऋतू: मैं ऋतू बोल रही हूँ. दीपू थोड़ा बाहर गया है. बोलो क्या काम है.
दिव्या: कुछ नहीं माँ जी… लगता है दीदी वसु की थोड़ी तबियत खराब हो गयी है. हम उसे डॉक्टर के पास ले जा रहे है. अगर दीपू होता तो उसे भी वहाँ आने को कहते.
ऋतू थोड़ा घबराते हुए: सब ठीक तो है ना दिव्या. अचानक वसु की तबियत को क्या हुआ है?
दिव्या: पता नहीं माँ जी. डॉक्टर के पास जाएंगे तो पता चलेगा.
ऋतू: मैं भी आऊं क्या?
दिव्या: नहीं माँ जी ज़रुरत नहीं है. हाँ हो सके तो शाम को एक बार आ जाना. सब से मुलाकात भी हो जायेगी और तब तक हम दीदी को डॉक्टर के पास भी दिखा लाएंगे.
ऋतू: हाँ ये ठीक कहा तुमने. हम शाम को आ जाएंगे.
दिव्या: ठीक है मा जी और दीपू को भी बता दीजिये.
ऋतू: तू चिंता मत कर. जैसे ही वो यहां आएगा मैं उसे बता दूँगी. वो जल्दी ही वहाँ पहुँच जाएगा और फिर फ़ोन रख कर देती है.
हॉस्पिटल में:
कविता और दिव्या फिर वसु को डॉक्टर के पास लय जाते है. डॉक्टर उसे चेक करती है और दोनों को देख कर कहती है... इनके पति कहाँ है?
कविता: जी वो अपने काम पे गए है.
डॉक्टर: आप दोनों कौन हो?
दिव्या: हम इसकी बहने है. वैसे दीदी की हालत कैसी है? वो ठीक तो हो जायेगी ना?
डॉक्टर: चिंता करने की कोई बात नहीं है. बस खुश खबर ही है की आपकी दीदी पेट से है और वो जल्दी ही माँ बनने वाली है. डॉक्टर की बात सुनकर जहाँ कविता और दिव्या खुश हो जाती है वहीँ वसु शर्मा कर अपने सर नीचे कर लेती है.
डॉक्टर: इसीलिए मैंने इनके पति के बारे में पुछा था.
कविता: जी ये बात हम उनको बता देंगे.
डॉक्टर: ठीक है लेकिन अब इनका ज़्यादा ख्याल रखना. कोई भारी चीज़ उन्हें उठाने मत देना और अब इनको आराम की बहुत ज़रुरत है और जहाँ तक हो सके इसको खुश रखना. ये जितना खुश रहेगी बच्चा भी उतना ही अच्छा और तंदुरुस्त होगा. और समय समय पे दवायें लेते रहना.
कविता: जी समझ गए. और फिर तीनो हॉस्पिटल से घर के लिए निकल जाते है.
कार में जब तीनो बैठे होते है तो कविता और दिव्या दोनों वसु को बहुत बधाई देते है और प्यार से उसके पेट पे हाथ रख कर कविता धीरे से उसके कान में कहती है: बधाई हो बन्नो. तू फिर से माँ बनने वाली है. वसु थोड़ा शर्मा जाती है और उसी लय में कहती है धीरे से... चिंता मत कर... तू भी मेरी तरह ही जल्दी से पेट से हो जायेगी. जिस तरह दीपू अपना माल तेरे अंदर ही छोड़ता है मुझे पता है तेरा भी ऐसे ही हालत जल्दी ही हो जायेगी और ऐसे ही बातें करते हुए वो घर आ जाते है.
तब तक दीपू भी घर आ जाता है. ऑफिस में जब वो अपने सीट पे आया था तो ऋतू ने उसे बताया था की वसु की हालत ठीक नहीं है. वो वसु को फ़ोन करता है तो उसका फ़ोन स्विच ऑफ होता है तो वो लता को फ़ोन करता है और वो कहती है की वो तीनो हॉस्पिटल गए है और वो जल्दी ही घर आ जाए.
घर पे:
घर में सब लोग उनके आने का इंतज़ार कर रहे होते है. दीपू से रहा नहीं जाता और वो टहलते हुए फिर से फ़ोन करता है तो इस बार कविता फ़ोन receive कर के कहती है की वो सब घर आ रहे है.
दीपू: माँ को क्या हुआ है? तो ठीक तो है ना?
कविता: हम जल्दी ही घर आ रहे है और तुम्हे सब बता देंगे. अगर उतनी ही चिंता थी तो तू हॉस्पिटल क्यों नहीं आया?
दीपू: मुझे काम में थोड़ा देर हो गया इसीलिए नहीं आ पाया.
कविता: ठीक है इंतज़ार कर.... हम जल्दी ही घर आ रहे है.
थोड़ी देर बाद वसु कविता और दिव्या घर आ जाते है तो बाकी तीनो भी उनका ही इंतज़ार करते रहते है. उनको देख कर दीपू दौड़ कर वसु को पकड़ कर उससे पूछता है की उसे क्या हुआ है और वो अब कैसी है? वसु कुछ नहीं कहती और शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लेती है.
दिव्या: अब इतनी जल्दी क्या है? हम घर आ गए है ना... हमें पहले पानी तो पीने दो. फिर मीना जा कर सब के लिए पानी लाती है और सब बैठ कर उनके बोलने का इंतज़ार करते है की आखिर बात क्या है और वसु की हालत क्यों बिगड़ी है.
कविता और दिव्या उन दोनों को देख कर मन में ही हस्ती रहती है.
आखिर में दीपू से रहा नहीं जाता तो वो कहता है: तुम लोग सब चुप क्यों हो? कोई बताएगा की आखिर बात क्या है.
कविता फिर दीपू की तरफ देख कर थोड़े गुस्से (दिखावा) से कहती है... तूने क्या किया है. वसु की ज़रा भी फ़िक्र नहीं है. दीपू को लगता है की सच में वसु को कोई बिमारी है और उसे चिंता सताने लगती है.
दीपू: मैंने क्या किया है?
कविता को लगता है की अब उसे और परेशान करना अच्छा नहीं है तो वो हस्ते हुए कहती है.... अरे पगले तेरी बीवी को कुछ नहीं हुआ है. दीपू को अब भी समझ नहीं आता तो पूछता है की फिर वो सब डॉक्टर के पास क्यों गए?
कविता फिर उठ कर दीपू के पास जाती है और उसके कान को पकड़ कर... बुद्धू तू बाप बनने वाला है.
कविता जब ये बात बताती है तो शॉक से पहले दीपू को कुछ समझ नहीं आता. २ Min बाद जब ये बात उसके दिमाग में जाती है तो ख़ुशी से कविता को पकड़ कर उसे गले लगाता है और फिर वसु की तरफ देखता है जो अपने सर नीचे करे हुए हस्ती रहती है.
लता और मीना भी ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाते है तो दीपू वसु के पास आकर उसके चेहरे के ऊपर कर के उसकी आँखों में देखते हुए पूछता है तो वसु शर्म से हाँ कह कर अपनी आँखें नीचे कर लेती है. दीपू तो ख़ुशी से पागल हो जाता है और वो वसु को अपनी बाहों में लेकर ज़ोर से उसे गले लगा लेता है. इतने में लता और मीना भी उसके पास आकर वसु को प्यार से दुलारते है और उसे बधाई देते है.
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लता दीपू से: तू तो बड़ा तेज़ निकला रे और हस देती है.
अब घर में थोड़ा ख़ुशी का माहौल था तो इतने में दिव्या मिठाई लाती है और पहले दीपू को और फिर बाद में वसु को भी मिठाई पकड़ाती है. दोनों एक दुसरे को देख कर मिठाई आपस में बाटते है और एक दुसरे को खिलाते है. दीपू फिर सभी को अपने हाथ से मिठाई खिलाता है और सब ख़ुशी से मिठाई खाते है.
दोपहर को सब ख़ुशी से खाना खा कर आराम करने चले जाते है.
दीपू वसु को अपनी बाहों में लेकर ऐसे ही बातें करता रहता है तो इतने में वहां दोनों कविता और दिव्या भी आ जाते है.
दोनों वसु को देख कर कहते है: हमें बहुत ख़ुशी है की तुम माँ बनने वाली हो लेकिन थोड़ी जलन भी हो रही है. वसु उनकी बात समझ जाती है और दीपू की और देख कर कहती है... तुम क्या कहते हो?
दीपू हस्ते हुए क्यूंकि (उसे भी पता चल गया था की उन दोनों ने वो बात क्यों की)...मैं क्या कहूँ? अगर तुम सब एक साथ पेट से हो गए तो फिर तुम्हारे छोटे दीपू का ख्याल कौर रखेगा और हस देता है.
वसु: बात तो तुम्हारी सही है लेकिन उनकी बात भी सही है. कविता भी बिस्तर पे आकर दीपू के दुसरे कंधे पे अपना सर रख कर... मुझे भी जल्दी से माँ बना दोनों ना.... देखो मेरी उम्र भी वसु जितनी ही है. अगर और देरी हुई तो फिर मुझे भी कठिनाई हो सकती है और बड़े आस से दीपू की तरफ देखती है.
दिव्या भी झूटी गुस्से से कहती है... अगर तू भी पेट से हो गयी तो मैं क्यों पीछे रहूँ. जानू मेरे बारे में भी सोचो ना... कविता से: अगर तुम भी पेट से हो गयी तो फिर ये तो मुझे रोज़ सोने भी नहीं देगा और मेरी बजाते रहेगा. मैं उसे इतना ना झेल पाऊँगी.
दीपू: तुम दोनों की बात भी सही है.
दीपू कविता को देखते हुए: अगर तुम और मीना एक साथ पेट से हो गयी तो फिर मीना को एक भाई/ बेहन मिल जाएगी और तुम भी नानी बन जाओगी. क्या कहती हो?
कविता ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है तो वसु उठकर कविता के पास आती है और उसको देखते हुए अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देती है और उसको चूमते हुए कहती है...
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दीपू की बात एकदम सही है. कविता शर्मा जाती है और कहती है की वो एक बार मीना से भी बात कर लेगी.
फिर ऐसे ही मस्ती की बातें करते हुए सब सो जाते है.
शाम को:
ऋतू और निशा भी उनके घर आते है और वसु के बारे में पूछते है तो फिर कविता दोनों को भी खुश खबर देती है तो दोनों भी बहुत खुश हो जाते है.
निशा वसु को कमरे में ले जाती है और निशा वसु को अपने गले लगा कर कहती है... माँ तुमने इतने दिनों बाद एक अच्छी खबर सुनाई है. मैं बहुत खुश हूँ और उसको देखते हुए उसकी आँखों से आंसूं निकल आते है.
वसु समझ जाती है और उसको अपने बाहों में लेकर कहती है: मैं समझ सकती हूँ बेटा तू क्यों रो रही है. अगर सब ठीक होता तो ऐसा खबर तुम मुझे देती और मैं नानी बन जाती लेकिन ऊपर वाले की बात को कोई नहीं टाल सकता.
निशा: नहीं माँ ये तो ख़ुशी के आंसूं है.
वसु: मैं तेरी माँ हूँ... मुझे सब पता है तू चाहे कितना भी झूट बोल दे.
निशा अब कुछ नहीं कह पाती और अपनी आँखें साफ़ कर के दोनों बाहर आते है.
ऋतू भी वसु को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वो भी उसको थोड़ा अलग ले जाकर कहती है: तुमने तो बहुत अच्छी खबर दी हो वसु.
वसु ऋतू को अपने बाहों में लेकर उसका धन्यवाद करती है और जब देखती है की वो दोनों ही अकेले है तो उसके होंठ को प्यार से चूम कर कहती है... सच में...मैंने कभी नहीं सोचा था की इस उम्र में मैं फिर से पेट से हो जाऊंगी.
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ऋतू: अभी तेरी उम्र ही क्या है? तू तो अभी भी जवान और गदरायी लग रही हो. और दीपू तो एक हट्टा कट्टा नौजवान लड़का है. ये तो होना ही था और मैं भी बहुत खुश हूँ और फिर उसके चेहरे पर भी उदासी छा जाती है.
वसु ऋतू को गले लग कर... चिंता मत करो.. मुझे तुम्हारे और दिनेश के बारे में भी पता चला था की वो भी तुमसे शादी करना चाहता था जैसे दीपू ने मुझसे किया. लेकिन क्या पता भगवान् ने तुम्हारे और निशा के लिए कुछ सोचा होगा.
वैसे तुम भी तो अपने उम्र से बहुत काम ही लगती हो और तुम भी तो एकदम सेक्सी लग रही हो. अगर तुम चाहो तो लड़कों की लाइन लग जायेगी... बस तुम्हारी हाँ की देरी है. बोलो क्या कहती हो?
ऋतू: नहीं रे.... अभी मैं ऐसा कुछ नहीं सोच रही हूँ. मुझे तो निशा को लेकर बहुत चिंता हो जाती है. वो तो अभी भी जवान है और इतनी काम उम्र में ही वो विधवा हो गयी है.
वसु: मैं समझ सकती हूँ. हमें भी उसकी बहुत चिंता लगी रहती है. देखते है अगर मैं कुछ कर सकती हूँ तो....
और फिर दोनों बाहर आ जाते है और सब से मिल कर बातें करने लग जाते है. फिर सब लोग मिल कर ख़ुशी ख़ुशी से खाना खाते है और दोनों अपने घर चले जाते है भले ही दीपू और बाकी लोग उनको उस रात रुकने के लिए कहते है. लेकिन ऋतू नहीं मानती और दोनों ऋतू और निशा अपने घर चले जाते है.
मीना और मनोज की बातें:
अब लोग वसु का अच्छे से ध्यान रखते है और उसे कुछ कान नहीं करने देते. घर में सब काम कविता और दिव्या ही करते है. जब सब अपने काम में लगे रहते है तो मीना मनोज को फ़ोन करती है.
मीना मनोज से: कैसे हो तुम?
मनोज: मैं ठीक हो. क्या बात है बहुत दिनों बाद फ़ोन कर रही हो.
मीना: तुम्हे तो पता है ना.... अभी अभी ही यहाँ पर हालत थोड़ा ठीक हो रहा है. कल ही निशा और उसकी सास आये थे घर पे. उनको देख कर मुझे भी थोड़ा बुरा लगा.
मनोज: हम्म.... तुम्हारी बात भी सही है. बोलो और क्या बात है?
मीना: मैं जिसके लिए यहां इतनी देर से हूँ तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है ना? कहीं ऐसा ना हो की जब मैं माँ बन जाऊं तो तुम्हे बुरा ना लगे. अगर भगवान् की मर्ज़ी है तो हम दोनों बिना माँ बाप बने ही अपनी ज़िन्दगी गुज़ार सकते है. मुझे उसके कोई प्रॉब्लम नहीं है.
मनोज: हाँ तुम सही कह रही हो. शायद मुझ में ही कमी है. लेकिन अगर तुम माँ बन गयी तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं रहेगा... अभी भी और आगे जाकर भी.
मीना: ठीक है. एक और बात... मुझे माँ ने बताया है की जब बच्चा होगा तो वो हमारा ही होगा. हम ही उसे अपना नाम देंगे और दीपू और बाकी दीदी भी इस बात के लिए मान गए है.
मनोज: ये तो बहुत अच्छी बात है. ठीक है हो सके तो जल्दी आ जाना. मेरा यहां अकेले रहना भी मुश्किल हो रहा है.
मीना: हाँ जल्दी आने की कोशिश करती हूँ और फिर वो फ़ोन कट कर देती है.
उस रात जब मीना और कविता साथ में होते है सोने के लिए तो मीना कहती है...
मीना: देखो ना माँ... वसु दीदी भी पेट से हो गयी है. मैंने मनोज से इस बारे में बात की है जो हमने कुछ दिन पहले बात की थी.. उन्होंने भी कहा है की उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है... ना अब या फिर आगे जा कर भी.
कविता: ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा. मैं जल्दी ही वसु और दीपू से इस बारे में बात करती हूँ.
मीना: ठीक है माँ.. मुझे भी बता देना.
कविता: ठीक है उनसे बात करके ज़रूर बता दूँगी.
मीना: वैसे एक और बात है माँ.
कविता: क्या?
मीना: कल से मेरे “अच्छे दिन” शुरू होने वाले है...
कविता मीना की तरफ देख कर समझ जाती है और प्यार से उसका माथा चूम कर कहती है... आशा करो की जल्दी ही तू भी मुझे खुश खबर दे….
वहीँ रात को ऋतू और निशा दोनों एक दुसरे की बाहों में रह कर बाते करते है.
निशा: देखो ना माँ वसु माँ फिर से पेट से हो गयी है. पता नहीं मुझे कभी ऐसा ख़ुशी मिलेगा के नहीं.
ऋतू: मैं जानती हूँ बेटा. तू तो अभी भी जवान है. बोल तेरे लिए कोई लड़का देखूं क्या?
निशा: नहीं माँ... मैंने अपनी ज़िन्दगी में सिर्फ दो लोगों से प्यार किया है. निशा की बात सुनकर ऋतू निशा की तरफ देखती है तो निशा कहती है... हाँ मैं सही कह रही हूँ. एक दिनेश और...
ऋतू: और दूसरा कौन है? कोई और है क्या जिसके बारे में मुझे पता नहीं है... निशा ऋतू की तरफ देख कर... दूसरा और कोई नहीं... मेरा भाई दीपू...
ऋतू निशा की बात सुनकर आश्चर्य से उसे देखती है और फिर हस देती है...
निशा: आप क्यों हस रही हो माँ?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा..मैंने इसके बारे में कभी सोचा नहीं था......
निशा: क्या सोचा नहीं था?
ऋतू: यही की तू भी दीपू से प्यार करती है.
निशा: “भी” का क्या मतलब है?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा...
और फिर ऋतू निशा को देख कर प्यार से उसके होंठों को चूमती है जिसमें निशा भी उसका साथ देती है. ऋतू निशा की जुबां को अपने मुँह में लेती है और निशा भी पूरी शिद्दत से अपनी जुबां ऋतू के मुँह में देती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है और दोनों एक दुसरे को फिर से “शांत” करके सो जाते है….
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Hmm..mazedaar mode pe aayi hai kahani..Ek taraf Deepu ne apni maa ki god bhar di hai aur jaldi hi apni maa ko apne bachche ki maa bana dega..36th Update (घर में खुशियों का आगमन)
दिव्या: वैसे लगता है जन्मदिन तुम्हारा हुआ... और बदन सब का टूटा.... इस बात पे दोनों हस्ते है और फिर वसु दरवाज़ा निकाल कर दोनों बाहर आ जाते है....
अब आगे..
अगली सुबह:
सब लोग अपना काम करते हस और चाय पीते हुए बातें करते रहते है. वसु अभी भी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी जिसे देख कर सब अपनी हसीं दबा देते हस लेकिन वसु उनके चेहरे को देख कर समझ जाती है और थोड़े गुस्से नज़र से दीपू की तरफ देखती है. दीपू भी उसको देख कर आँख मार देता है.
थोड़ी देर बाद जब वसु किचन में जाती हस तो वहां से वो दीपू को बुलाती है. दीपू जब वसु के पास किचन में जाता हस तो
वसु: तुम कितने बेशरम हो गए हो. मुझसे ठीक से चला नहीं जा रहा हस और तुम आँख मार रहे हो.
दीपू: वसु को अपनी बाँहों में लेकर... इसमें शर्म कैसा? मैं तो अपनी बीवी को आँख मार रहा हूँ और तुम्हे भी याद होगा जब दिव्या और कविता का भी ऐसा हाल था जब... इतना बोल कर दीपू रुक जाता हस तो वसु उसे झूठे गुस्से से देखती हस और हस देती है.
दीपू दरवाज़े पे देखते है की कोई नहीं है तो उसका सर पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देता है जिसमें वसु भी उसका पूरा साथ देती है और दोनों ३- ४ Min तक एक दुसरे का रस चूस लेते है.
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दोनों किस करते वक़्त दीपू वसु की गांड दबा देता है लेकिन वसु की हलकी चीख दीपू के होंठों पे डाब जाती है. ४ Min बाद जब दोनों अलग होते है तो वसु दीपू के सीने मैं हल्का मुक्का मारती है और उसे दूर कर देती है.
दीपू: चल जल्दी ठीक हो जाओ. अब तो रोज़ तुम्हारी गांड मारूंगा. उसके पास आकर उसके कान में: बोलो मेरा लंड लोगी ना अपने गांड में.
वसु: चुप कर. तुझे हर बार यही बात सूझती है क्या? बाहर निकल और ऑफिस के लिए तैयार हो जा. और उसे बाहर धकेल देती है. जब वो निकल जाता है तो वसु के चेहरे पे हसी आ जाती है और मन में सोचती है... कल सच में गांड मरवाने में बड़ा मजा आया... जितना दर्द देते है उतना ही मजा भी देता है……
और जैसे दीपू ने कहा था.... उस रात वो दिव्या की जम के बजाता है आगे और पीछे से और उसे भी पूरा खुश कर देता है. दिव्या का भी वो वसु जैसा हाल कर देता है. कविता बच जाती है क्यूंकि वो उस रात मीना के साथ सोई हुई थी.
कुछ दिनों बाद:
कुछ दिनों बाद सुबह सब अपने काम में लगे रहते है. दीपू भी अपने ऑफिस चला गया था. घर में सब लोग बैठ कर ऐसे ही बात कर रहे थे. वसु को थोड़ा चक्कर आता है और और उसका सर थोड़ा भारी लग रहा था.
वसु: मुझे थोड़ा चक्कर आ रहा है और ऐसे बोलते हुए उसके पेट में थोड़ा गड़बड़ होता है और वो भाग कर बाथरूम में चली जाती है जहाँ उसे उल्टियां होने लगती है. वसु के हालत देख कर कविता और दिव्या भी उसके पीछे भागते है लेकिन वसु बाथरूम में जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लेती है.
कविता: क्या हुआ? तुमने दरवाज़ा क्यों बंद कर दिया?
थोड़ी देर बाद वसु अपने आप को थोड़ा ठीक करते हुए बाथरूम का दरवाज़ा खोलती है और कहती है... सर थोड़ा चकरा रहा था और थोड़ी उल्टियां भी हुई है.
कविता ये बात सुन कर: क्या बात है क्यूंकि उसे शायद पता चल गया था की वसु को चक्कर क्यों आ रहा है.
कविता उसे अपनी बाहों में लेकर कान में कहती है: बन्नो बधाई हो. लगता है तू माँ बनने वाली है.
दिव्या को कुछ पता नहीं चलता तो वो उन दोनों को ऐसे देख कर पूछती है की वसु को क्या हुआ है?
कविता: अरे बुद्धू तू जल्दी से मौसी बनने वाली है या फिर छोटी माँ. दिव्या ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है और वसु को गले लगा लेती है.
वसु: मुझे पता नहीं की तुम जो कह रही हो वो सही है या नहीं.
कविता: क्यों जब दीपू और निशा पैदा हुए थे तो तुझे उल्टियां नहीं आयी थी क्या? और ऐसा बोल कर कविता हस देती है और कहती है चल तुझे डॉक्टर के पास लेकर जाते है.
बाहर आने से पहले कविता दोनों से कहती है की फिलहाल ये बात मीना और लता को ना बताएं. जब कन्फर्म हो जाएगा तभी उन्हें बताएँगे और उन्हें थोड़ा सरप्राइज भी देंगे. इस बात पे दोनों मान जाते है और अपने आप को ठीक करके बाथरूम से बाहर आ जाते है.
लता: क्या हुआ वसु को?
कविता: कुछ नहीं दीदी... इसका सर थोड़ा भारी लग रहा है. एक बार डॉक्टर को दिखा कर ले आते है.
लता: हाँ ठीक रहेगा.
दिव्या: मैं एक बार दीपू को फ़ोन कर के उसे भी हॉस्पिटल आने को कहती हूँ.
लता: हाँ उसे भी पता चलना चाहिए ना की उसकी बीवी की हालत ठीक नहीं है और ऐसा कहते हुए सब हस देते है.
दिव्या दीपू को फ़ोन करती है. ठीक उसी वक़्त दीपू किसीसे मिलने बाहर गया था और जल्दबाज़ी में अपना फ़ोन नहीं ले जाता. जब दिव्या फ़ोन करती है तो ऋतू उसका फ़ोन receive करती है.
दिव्या: दीपू?
ऋतू: मैं ऋतू बोल रही हूँ. दीपू थोड़ा बाहर गया है. बोलो क्या काम है.
दिव्या: कुछ नहीं माँ जी… लगता है दीदी वसु की थोड़ी तबियत खराब हो गयी है. हम उसे डॉक्टर के पास ले जा रहे है. अगर दीपू होता तो उसे भी वहाँ आने को कहते.
ऋतू थोड़ा घबराते हुए: सब ठीक तो है ना दिव्या. अचानक वसु की तबियत को क्या हुआ है?
दिव्या: पता नहीं माँ जी. डॉक्टर के पास जाएंगे तो पता चलेगा.
ऋतू: मैं भी आऊं क्या?
दिव्या: नहीं माँ जी ज़रुरत नहीं है. हाँ हो सके तो शाम को एक बार आ जाना. सब से मुलाकात भी हो जायेगी और तब तक हम दीदी को डॉक्टर के पास भी दिखा लाएंगे.
ऋतू: हाँ ये ठीक कहा तुमने. हम शाम को आ जाएंगे.
दिव्या: ठीक है मा जी और दीपू को भी बता दीजिये.
ऋतू: तू चिंता मत कर. जैसे ही वो यहां आएगा मैं उसे बता दूँगी. वो जल्दी ही वहाँ पहुँच जाएगा और फिर फ़ोन रख कर देती है.
हॉस्पिटल में:
कविता और दिव्या फिर वसु को डॉक्टर के पास लय जाते है. डॉक्टर उसे चेक करती है और दोनों को देख कर कहती है... इनके पति कहाँ है?
कविता: जी वो अपने काम पे गए है.
डॉक्टर: आप दोनों कौन हो?
दिव्या: हम इसकी बहने है. वैसे दीदी की हालत कैसी है? वो ठीक तो हो जायेगी ना?
डॉक्टर: चिंता करने की कोई बात नहीं है. बस खुश खबर ही है की आपकी दीदी पेट से है और वो जल्दी ही माँ बनने वाली है. डॉक्टर की बात सुनकर जहाँ कविता और दिव्या खुश हो जाती है वहीँ वसु शर्मा कर अपने सर नीचे कर लेती है.
डॉक्टर: इसीलिए मैंने इनके पति के बारे में पुछा था.
कविता: जी ये बात हम उनको बता देंगे.
डॉक्टर: ठीक है लेकिन अब इनका ज़्यादा ख्याल रखना. कोई भारी चीज़ उन्हें उठाने मत देना और अब इनको आराम की बहुत ज़रुरत है और जहाँ तक हो सके इसको खुश रखना. ये जितना खुश रहेगी बच्चा भी उतना ही अच्छा और तंदुरुस्त होगा. और समय समय पे दवायें लेते रहना.
कविता: जी समझ गए. और फिर तीनो हॉस्पिटल से घर के लिए निकल जाते है.
कार में जब तीनो बैठे होते है तो कविता और दिव्या दोनों वसु को बहुत बधाई देते है और प्यार से उसके पेट पे हाथ रख कर कविता धीरे से उसके कान में कहती है: बधाई हो बन्नो. तू फिर से माँ बनने वाली है. वसु थोड़ा शर्मा जाती है और उसी लय में कहती है धीरे से... चिंता मत कर... तू भी मेरी तरह ही जल्दी से पेट से हो जायेगी. जिस तरह दीपू अपना माल तेरे अंदर ही छोड़ता है मुझे पता है तेरा भी ऐसे ही हालत जल्दी ही हो जायेगी और ऐसे ही बातें करते हुए वो घर आ जाते है.
तब तक दीपू भी घर आ जाता है. ऑफिस में जब वो अपने सीट पे आया था तो ऋतू ने उसे बताया था की वसु की हालत ठीक नहीं है. वो वसु को फ़ोन करता है तो उसका फ़ोन स्विच ऑफ होता है तो वो लता को फ़ोन करता है और वो कहती है की वो तीनो हॉस्पिटल गए है और वो जल्दी ही घर आ जाए.
घर पे:
घर में सब लोग उनके आने का इंतज़ार कर रहे होते है. दीपू से रहा नहीं जाता और वो टहलते हुए फिर से फ़ोन करता है तो इस बार कविता फ़ोन receive कर के कहती है की वो सब घर आ रहे है.
दीपू: माँ को क्या हुआ है? तो ठीक तो है ना?
कविता: हम जल्दी ही घर आ रहे है और तुम्हे सब बता देंगे. अगर उतनी ही चिंता थी तो तू हॉस्पिटल क्यों नहीं आया?
दीपू: मुझे काम में थोड़ा देर हो गया इसीलिए नहीं आ पाया.
कविता: ठीक है इंतज़ार कर.... हम जल्दी ही घर आ रहे है.
थोड़ी देर बाद वसु कविता और दिव्या घर आ जाते है तो बाकी तीनो भी उनका ही इंतज़ार करते रहते है. उनको देख कर दीपू दौड़ कर वसु को पकड़ कर उससे पूछता है की उसे क्या हुआ है और वो अब कैसी है? वसु कुछ नहीं कहती और शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लेती है.
दिव्या: अब इतनी जल्दी क्या है? हम घर आ गए है ना... हमें पहले पानी तो पीने दो. फिर मीना जा कर सब के लिए पानी लाती है और सब बैठ कर उनके बोलने का इंतज़ार करते है की आखिर बात क्या है और वसु की हालत क्यों बिगड़ी है.
कविता और दिव्या उन दोनों को देख कर मन में ही हस्ती रहती है.
आखिर में दीपू से रहा नहीं जाता तो वो कहता है: तुम लोग सब चुप क्यों हो? कोई बताएगा की आखिर बात क्या है.
कविता फिर दीपू की तरफ देख कर थोड़े गुस्से (दिखावा) से कहती है... तूने क्या किया है. वसु की ज़रा भी फ़िक्र नहीं है. दीपू को लगता है की सच में वसु को कोई बिमारी है और उसे चिंता सताने लगती है.
दीपू: मैंने क्या किया है?
कविता को लगता है की अब उसे और परेशान करना अच्छा नहीं है तो वो हस्ते हुए कहती है.... अरे पगले तेरी बीवी को कुछ नहीं हुआ है. दीपू को अब भी समझ नहीं आता तो पूछता है की फिर वो सब डॉक्टर के पास क्यों गए?
कविता फिर उठ कर दीपू के पास जाती है और उसके कान को पकड़ कर... बुद्धू तू बाप बनने वाला है.
कविता जब ये बात बताती है तो शॉक से पहले दीपू को कुछ समझ नहीं आता. २ Min बाद जब ये बात उसके दिमाग में जाती है तो ख़ुशी से कविता को पकड़ कर उसे गले लगाता है और फिर वसु की तरफ देखता है जो अपने सर नीचे करे हुए हस्ती रहती है.
लता और मीना भी ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाते है तो दीपू वसु के पास आकर उसके चेहरे के ऊपर कर के उसकी आँखों में देखते हुए पूछता है तो वसु शर्म से हाँ कह कर अपनी आँखें नीचे कर लेती है. दीपू तो ख़ुशी से पागल हो जाता है और वो वसु को अपनी बाहों में लेकर ज़ोर से उसे गले लगा लेता है. इतने में लता और मीना भी उसके पास आकर वसु को प्यार से दुलारते है और उसे बधाई देते है.
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लता दीपू से: तू तो बड़ा तेज़ निकला रे और हस देती है.
अब घर में थोड़ा ख़ुशी का माहौल था तो इतने में दिव्या मिठाई लाती है और पहले दीपू को और फिर बाद में वसु को भी मिठाई पकड़ाती है. दोनों एक दुसरे को देख कर मिठाई आपस में बाटते है और एक दुसरे को खिलाते है. दीपू फिर सभी को अपने हाथ से मिठाई खिलाता है और सब ख़ुशी से मिठाई खाते है.
दोपहर को सब ख़ुशी से खाना खा कर आराम करने चले जाते है.
दीपू वसु को अपनी बाहों में लेकर ऐसे ही बातें करता रहता है तो इतने में वहां दोनों कविता और दिव्या भी आ जाते है.
दोनों वसु को देख कर कहते है: हमें बहुत ख़ुशी है की तुम माँ बनने वाली हो लेकिन थोड़ी जलन भी हो रही है. वसु उनकी बात समझ जाती है और दीपू की और देख कर कहती है... तुम क्या कहते हो?
दीपू हस्ते हुए क्यूंकि (उसे भी पता चल गया था की उन दोनों ने वो बात क्यों की)...मैं क्या कहूँ? अगर तुम सब एक साथ पेट से हो गए तो फिर तुम्हारे छोटे दीपू का ख्याल कौर रखेगा और हस देता है.
वसु: बात तो तुम्हारी सही है लेकिन उनकी बात भी सही है. कविता भी बिस्तर पे आकर दीपू के दुसरे कंधे पे अपना सर रख कर... मुझे भी जल्दी से माँ बना दोनों ना.... देखो मेरी उम्र भी वसु जितनी ही है. अगर और देरी हुई तो फिर मुझे भी कठिनाई हो सकती है और बड़े आस से दीपू की तरफ देखती है.
दिव्या भी झूटी गुस्से से कहती है... अगर तू भी पेट से हो गयी तो मैं क्यों पीछे रहूँ. जानू मेरे बारे में भी सोचो ना... कविता से: अगर तुम भी पेट से हो गयी तो फिर ये तो मुझे रोज़ सोने भी नहीं देगा और मेरी बजाते रहेगा. मैं उसे इतना ना झेल पाऊँगी.
दीपू: तुम दोनों की बात भी सही है.
दीपू कविता को देखते हुए: अगर तुम और मीना एक साथ पेट से हो गयी तो फिर मीना को एक भाई/ बेहन मिल जाएगी और तुम भी नानी बन जाओगी. क्या कहती हो?
कविता ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है तो वसु उठकर कविता के पास आती है और उसको देखते हुए अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देती है और उसको चूमते हुए कहती है...
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दीपू की बात एकदम सही है. कविता शर्मा जाती है और कहती है की वो एक बार मीना से भी बात कर लेगी.
फिर ऐसे ही मस्ती की बातें करते हुए सब सो जाते है.
शाम को:
ऋतू और निशा भी उनके घर आते है और वसु के बारे में पूछते है तो फिर कविता दोनों को भी खुश खबर देती है तो दोनों भी बहुत खुश हो जाते है.
निशा वसु को कमरे में ले जाती है और निशा वसु को अपने गले लगा कर कहती है... माँ तुमने इतने दिनों बाद एक अच्छी खबर सुनाई है. मैं बहुत खुश हूँ और उसको देखते हुए उसकी आँखों से आंसूं निकल आते है.
वसु समझ जाती है और उसको अपने बाहों में लेकर कहती है: मैं समझ सकती हूँ बेटा तू क्यों रो रही है. अगर सब ठीक होता तो ऐसा खबर तुम मुझे देती और मैं नानी बन जाती लेकिन ऊपर वाले की बात को कोई नहीं टाल सकता.
निशा: नहीं माँ ये तो ख़ुशी के आंसूं है.
वसु: मैं तेरी माँ हूँ... मुझे सब पता है तू चाहे कितना भी झूट बोल दे.
निशा अब कुछ नहीं कह पाती और अपनी आँखें साफ़ कर के दोनों बाहर आते है.
ऋतू भी वसु को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वो भी उसको थोड़ा अलग ले जाकर कहती है: तुमने तो बहुत अच्छी खबर दी हो वसु.
वसु ऋतू को अपने बाहों में लेकर उसका धन्यवाद करती है और जब देखती है की वो दोनों ही अकेले है तो उसके होंठ को प्यार से चूम कर कहती है... सच में...मैंने कभी नहीं सोचा था की इस उम्र में मैं फिर से पेट से हो जाऊंगी.
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ऋतू: अभी तेरी उम्र ही क्या है? तू तो अभी भी जवान और गदरायी लग रही हो. और दीपू तो एक हट्टा कट्टा नौजवान लड़का है. ये तो होना ही था और मैं भी बहुत खुश हूँ और फिर उसके चेहरे पर भी उदासी छा जाती है.
वसु ऋतू को गले लग कर... चिंता मत करो.. मुझे तुम्हारे और दिनेश के बारे में भी पता चला था की वो भी तुमसे शादी करना चाहता था जैसे दीपू ने मुझसे किया. लेकिन क्या पता भगवान् ने तुम्हारे और निशा के लिए कुछ सोचा होगा.
वैसे तुम भी तो अपने उम्र से बहुत काम ही लगती हो और तुम भी तो एकदम सेक्सी लग रही हो. अगर तुम चाहो तो लड़कों की लाइन लग जायेगी... बस तुम्हारी हाँ की देरी है. बोलो क्या कहती हो?
ऋतू: नहीं रे.... अभी मैं ऐसा कुछ नहीं सोच रही हूँ. मुझे तो निशा को लेकर बहुत चिंता हो जाती है. वो तो अभी भी जवान है और इतनी काम उम्र में ही वो विधवा हो गयी है.
वसु: मैं समझ सकती हूँ. हमें भी उसकी बहुत चिंता लगी रहती है. देखते है अगर मैं कुछ कर सकती हूँ तो....
और फिर दोनों बाहर आ जाते है और सब से मिल कर बातें करने लग जाते है. फिर सब लोग मिल कर ख़ुशी ख़ुशी से खाना खाते है और दोनों अपने घर चले जाते है भले ही दीपू और बाकी लोग उनको उस रात रुकने के लिए कहते है. लेकिन ऋतू नहीं मानती और दोनों ऋतू और निशा अपने घर चले जाते है.
मीना और मनोज की बातें:
अब लोग वसु का अच्छे से ध्यान रखते है और उसे कुछ कान नहीं करने देते. घर में सब काम कविता और दिव्या ही करते है. जब सब अपने काम में लगे रहते है तो मीना मनोज को फ़ोन करती है.
मीना मनोज से: कैसे हो तुम?
मनोज: मैं ठीक हो. क्या बात है बहुत दिनों बाद फ़ोन कर रही हो.
मीना: तुम्हे तो पता है ना.... अभी अभी ही यहाँ पर हालत थोड़ा ठीक हो रहा है. कल ही निशा और उसकी सास आये थे घर पे. उनको देख कर मुझे भी थोड़ा बुरा लगा.
मनोज: हम्म.... तुम्हारी बात भी सही है. बोलो और क्या बात है?
मीना: मैं जिसके लिए यहां इतनी देर से हूँ तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है ना? कहीं ऐसा ना हो की जब मैं माँ बन जाऊं तो तुम्हे बुरा ना लगे. अगर भगवान् की मर्ज़ी है तो हम दोनों बिना माँ बाप बने ही अपनी ज़िन्दगी गुज़ार सकते है. मुझे उसके कोई प्रॉब्लम नहीं है.
मनोज: हाँ तुम सही कह रही हो. शायद मुझ में ही कमी है. लेकिन अगर तुम माँ बन गयी तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं रहेगा... अभी भी और आगे जाकर भी.
मीना: ठीक है. एक और बात... मुझे माँ ने बताया है की जब बच्चा होगा तो वो हमारा ही होगा. हम ही उसे अपना नाम देंगे और दीपू और बाकी दीदी भी इस बात के लिए मान गए है.
मनोज: ये तो बहुत अच्छी बात है. ठीक है हो सके तो जल्दी आ जाना. मेरा यहां अकेले रहना भी मुश्किल हो रहा है.
मीना: हाँ जल्दी आने की कोशिश करती हूँ और फिर वो फ़ोन कट कर देती है.
उस रात जब मीना और कविता साथ में होते है सोने के लिए तो मीना कहती है...
मीना: देखो ना माँ... वसु दीदी भी पेट से हो गयी है. मैंने मनोज से इस बारे में बात की है जो हमने कुछ दिन पहले बात की थी.. उन्होंने भी कहा है की उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है... ना अब या फिर आगे जा कर भी.
कविता: ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा. मैं जल्दी ही वसु और दीपू से इस बारे में बात करती हूँ.
मीना: ठीक है माँ.. मुझे भी बता देना.
कविता: ठीक है उनसे बात करके ज़रूर बता दूँगी.
मीना: वैसे एक और बात है माँ.
कविता: क्या?
मीना: कल से मेरे “अच्छे दिन” शुरू होने वाले है...
कविता मीना की तरफ देख कर समझ जाती है और प्यार से उसका माथा चूम कर कहती है... आशा करो की जल्दी ही तू भी मुझे खुश खबर दे….
वहीँ रात को ऋतू और निशा दोनों एक दुसरे की बाहों में रह कर बाते करते है.
निशा: देखो ना माँ वसु माँ फिर से पेट से हो गयी है. पता नहीं मुझे कभी ऐसा ख़ुशी मिलेगा के नहीं.
ऋतू: मैं जानती हूँ बेटा. तू तो अभी भी जवान है. बोल तेरे लिए कोई लड़का देखूं क्या?
निशा: नहीं माँ... मैंने अपनी ज़िन्दगी में सिर्फ दो लोगों से प्यार किया है. निशा की बात सुनकर ऋतू निशा की तरफ देखती है तो निशा कहती है... हाँ मैं सही कह रही हूँ. एक दिनेश और...
ऋतू: और दूसरा कौन है? कोई और है क्या जिसके बारे में मुझे पता नहीं है... निशा ऋतू की तरफ देख कर... दूसरा और कोई नहीं... मेरा भाई दीपू...
ऋतू निशा की बात सुनकर आश्चर्य से उसे देखती है और फिर हस देती है...
निशा: आप क्यों हस रही हो माँ?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा..मैंने इसके बारे में कभी सोचा नहीं था......
निशा: क्या सोचा नहीं था?
ऋतू: यही की तू भी दीपू से प्यार करती है.
निशा: “भी” का क्या मतलब है?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा...
और फिर ऋतू निशा को देख कर प्यार से उसके होंठों को चूमती है जिसमें निशा भी उसका साथ देती है. ऋतू निशा की जुबां को अपने मुँह में लेती है और निशा भी पूरी शिद्दत से अपनी जुबां ऋतू के मुँह में देती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है और दोनों एक दुसरे को फिर से “शांत” करके सो जाते है….
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