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Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

Should I include a thriller part in the story or continue with Romance only?

  • 1) Have a thriller part

    Votes: 56 39.7%
  • 2) Continue with Romance Only.

    Votes: 95 67.4%

  • Total voters
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bhut badhiya update hai... Meena bhi taayr ho ghia hai..... aab to aur maza aane wala hai.... but thoda eroticsim badhao.... her baar same ho raha hai...kuch change kuch different karo aage....
kya different karna hai???

Mast_Ram
 
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be kinky, use ice cream, chocolate, honey...etc... during... foreplya to enhance the erotisim....
ok, thanks...but my Kinky use nahi karoonga...mujhe wo pasand nahi hai...baaki sochta hoon..

Btw, jab tumhaare paas itne ideas hai to tum hi ek story kyun nahi likhte? hum bhi phir wo padh kar pasand karenge.... :) kya kehte ho??

Mast_Ram
 
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Dhakad boy

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35th Update (रात के मजे जारी है) (Mega Update)


दीपू भी प्यार से वसु का माथा चूमते हुए... मेरे लिए भी आज का दिन स्पेशल था. चलो अब सो जाते है... वर्ण सुबह उठने में देरी होगी. वसु: देरी तुम्हे होगी... मुझे नहीं. दीपू: मतलब? वसु: बुद्धू देरी तुम्हे ऑफिस में जाने के लिए होगी. मैं तो घोड़े बेच कर सोने वाली हूँ. दोनों इस बात पे हस देते है और एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.

अब आगे..

अगली सुबह:


अगली सुबह दीपू उठता है तो देखता है की वसु घोड़े बेच के सो रही है. उसे देख कर दीपू को हसी आती है और वो प्यार से उसका माथा चूम कर फ्रेश होने बाथरूम जाता है.

फ्रेश हो कर वो किचन में जाता है तो कविता वहां पर चाय बना रही होती है. वो जाकर कविता को पीछे से पकड़ कर उसके कान को चूमते हुए उसकी चूची दबाता है.

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कविता: आह...आह सुबह सुबह फिर से चालु हो गए. रात को मजा नहीं आया क्या?

दीपू: रात की बात अलग है और सुबह की. वैसे भी तुममे में और वसु में फरक भी है ना.

कविता: तुम तो बड़े ज़ालिम निकले.

दीपू: क्यों क्या हुआ?

कविता: होना क्या है... रात को तुम दोनों मजे कर रहे थे और हम को अकेले छोड़ दिया. ठीक से सो भी नहीं पाए.

दीपू: क्यों? सोये क्यों नहीं?

कविता: सोते कैसे? रात भर तो इतनी आवाज़ें आ रही थी तुम्हारे कमरे से. वैसे मेरी बन्नो अब कैसी है?

दीपू: तुम ही जाकर देख लो ना तुम्हारी बन्नो कैसे है और उसे पलट कर... तुम तुम्हारी बन्नो को देख लेना लेकिन पहले मेरा मुँह तो मीठा कर दो और ऐसा कहते हुए वो कविता को चूमता है तो कविता भी सुबह सुबह पूरी उसका साथ देती है और दोनों २ - ३ min तक एक दुसरे को चूस चूस कर रस पीते है.

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२ Min बाद कविता: अब मुझे जाने दो और दीपू को धक्का देते हुए उसे अलग करती है. उसे चाय देकर वो कमरे में जाती है वसु को देखने के लिए.

कविता फिर चाय लेकर वसु के कमरे में जाती है तो देखती है की वो मस्त सो रही है. उसको देख कर हस्ते हुए वो वसु को उठाती है.

कविता: उठ जा मेरी बन्नो. और कितना सोयेगी देख सुबह हो गयी है और दीपू को भी ऑफिस जाना है.

वसु अंगड़ाई लेते हुए: सोने दे ना. मुझे बहुत नींद आ रही है.

कविता: वो तो बड़ा ज़ालिम निकला. लगता है तुझे सोने नहीं दिया.

वसु: हाँ रे... पूरी रात पेलता रहा और सोने नहीं दिया. १- २ घंटे पहले ही सोई हूँ. इसीलिए तो कह रही हूँ सोने दे कर के.

कविता: अभी नहीं. पहले उठ कर फ्रेश हो जा. दोपहर को सो जाना. कोई तुझे रोकेगा नहीं. वैसे तू पलट और देकने दे तेरी क्या हालत हैं. ऐसा कहते हुए कविता वसु को पेट के बल सुला कर उसकी कमर से चादर निकल कर उसकी गांड देखती है. उसमें से अभी भी थोड़ा पानी आ रहा था और उसकी गांड काफी खुली हुई और सूझ गयी थी.

कविता उसको देख कर: क्या बात है बन्नो लगता है रात को तुझे मस्त तरीके से चोदा है. अभी भी तेरी गांड से पानी निकल रहा है और ऐसा कहते हुए कविता उसकी गांड की तरफ झुक कर उसकी गांड को चाटती है और उसमें से निकला पानी को चाट कर कहती है... पानी अभी भी सूखा नहीं है.

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और वैसे भी लगता है की उसने तेरी गांड पूरी खोल दी है. मेरी २ उंगलियां भी आराम से जा रही है और ऐसा कहते हुए कविता वसु की गांड में २ उंगलियां दाल कर अंदर बाहर करने लगती है.

वसु: मत करना नहीं तो मैं फिर से बहक जाऊँगी.

कविता: मुझे पता है. एक बार जब गांड में लेना शुरू करोगी तो वहीँ लेने की इच्छा होगी.

वसु: हाँ सही कहा. पहले तो बहुत दर्द हुआ लेकिन फिर बाद में बहुत मजा आया. अब अपनी उंगलियां निकाल वर्ना...

कविता: वर्ना क्या?

वसु कुछ बोलने को होती इतने में वहां दिव्या भी आ जाती है.

दिव्या: मैं तो तुम दोनों को किचन में ढूढ़ रही थी लेकिन तुम दोनों तो सुबह सुबह ही मेरे आने से पहले ही शुरू हो गए?

कविता: देख ना वसु की क्या हालत हो गयी है और ऐसा कहते हुए कविता वसु की गांड को थोड़ा फैला देती है और दिव्या को दिखाती है और उसकी गांड खुल जाती है और अंदर का लाल छेद सब दीखता है.

दिव्या उसे देख कर अपना मुँह खोले कहती है... बाप रे... लगता है ये दोनों रात में बहुत मजे किये और मुझे भी पता नहीं था की दीपू दीदी की गांड का उद्धघाटन करेगा.

कविता: इसीलिए तो कल दीपू ने रात में कहा था की वो वसु के साथ अकेला सोयेगा और देख अभी भी इसकी गांड से पानी निकल रहा है और मैंने चख भी लिया है.

दिव्या कविता के पास आकर: मुझे भी चकना है और कविता को पकड़ कर उसके होंठ चूसने लगती है जिसमें कविता भी उसका साथ देती है और दीपू का पानी एक दुसरे से शेयर करते है.

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वसु दोनों को देख कर मुस्कुराती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

इतने में दीपू कमरे में आता है और तीनो को देख कर हस्ते हुए कहता है: मैं नहाने जा रहा हूँ. कोई आएगा क्या मेरे साथ? तीनो एक साथ: ना बाबा... तुम अकेले ही नहा लो. हमें पता है अगर हम तुम्हारे साथ आएंगे तो तुम फिर से शुरू हो जाओगे. दीपू कुछ नहीं कहता और हस्ते हुए बाथरूम में चला जाता है नहाने.

थोड़ी देर बाद जब दीपू नहा कर बाहर आता है तो तीनो ऐसे ही मस्ती करते रहते है.

दीपू: अरे यार देखो मेरी पीठ में कुछ हुआ हस क्या? जलन हो रही हैऔर मेरा हाथ वहां नहीं पहुँच रहा हैऔर दीपू पीछे मुड कर अपने पीठ उन्हें दिखाता है.

दीपू के पीठ पे बहुत खरोंचे दिख रही थी और ऐसा लगता हैजैसे किसी ने उसकी पीठ पर नाखून से खरोंचा है. तीनो उसकी पीठ देख कर उसके पास जाते है और पूछते है की ये कैसा हुआ? पहले तो कभी ऐसा नहीं हुआ था. फिर दीपू को रात की याद आती है और वसु को देखते हुए कहता है... ये तो वसु ही बता सकती है.

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जब दीपू ये बात बोलता हस तो वसु दीपू को देखती रहती है और फिर उसे भी रात का ख्याल आता हस जब उसने उत्तेजना में दीपू की पीठ पर अपने नाखून गाढ़े थे. वसु को जब याद आता हस तो उसकी आँखों से आंसू आ जाते हस और दीपू से कहती हस की ये मेरी गलती है और रोने लगती है. दीपू उसे अपनी बाहों में लेकर चुप कराता हस और कहता हस की इसमें रोने की क्या बात है?

वसु: मुझे दुःख होगा ना की तुम्हारी पीठ पे मेरी नाखून के निशाँ है.

दीपू: अरे ये तेरी नाखून के निशाँ नहीं बल्कि हमारे प्यार की निशानी है. देखो तुम्हारे बदन पे भी ऐसे निशाँ है और दिव्या और कविता को वसु का गाला दिखाता है जहाँ पर उनके प्यार की निशानी थी.

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दीपू को थोड़ी मस्ती सूझती हस तो वो वसु के बदन से चादर हटा कर दिव्या और कविता से कहता है: देखो हमारे प्यार की निशानी इसकी चूची पे भी है. आगे से तुम लोगों को भी ऐसे ही निशानी दिखेगी अपने बदन पर और दोनों को आँख मार देता है.

वसु ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती हस और अपने हाथ से अपनी चूचियों को ढकने की कोशिश करती है.

दीपू: अब क्या शर्माना?

वसु दीपू को देखती रहती है तो दिव्या और कविता दोनों हस देते है और फिर झुक कर दोनों वसु की चूची पे टूट पड़ते है और दोनों एक एक को लेकर चूसना शुरू कर देते है.

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दीपू: चलो मैं ऑफिस के लिए निकल जाता हूँ. तुम सब आराम करो. आज रात को तुम्हे (दिव्या और कविता) को जागना है. जाते वक़्त वो तीनो के होंठ पे गहरा चुम्बन देता है जिसमें तीनो उसका साथ देती है और फिर वो अपने ऑफिस के लिए निकल जाता है और दिव्या उसे छोड़ने बाहर चले जाती है.. फिर वसु भी बाथरूम में चली जाती है और नहा धो कर फ्रेश हो कर चाय पीती है.

कविता: सुनो वसु मैं सोने जा रही हूँ. मुझे दो घंटे बाद उठा देना.

वसु: मैं रात भर जागी रही तो समझ आता है लेकिन अभी तुझे क्यों नींद आ रही है?

कविता: इसीलिए बन्नो की हमें भी रात भर नींद नहीं आयी. चल मुझे सोने दे.

वसु: ऐसे कैसे सोने दूँगी तुझे और वो कविता को बिस्तर पे फेक देती है और उसके ऊपर छड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए उसकी चूची को दबाते हुए: बोल ना रात को नींद क्यों नहीं आयी तुझे?

कविता इस बात से शर्मा जाती है और वसु को पकड़ के उसके होंठ चूमते हुए धीरे से उसके कान में कहती है: लगता है मैंने मीना को भी एक तरह से समझा दिया है की दीपू उससे “मिलने” जल्दी ही आने वाला है.

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वसु: ये तो बड़ी अच्छी बात है. अगर मीना भी माँ बन जाए तो मैं भी दादी बन जाऊँगी. वैसे बताना रात को तूने क्या किया की मीना समझ गयी है.

कविता: तो फिर सुन...


पिछली रात कविता के कमरे में:

पिछली रात को जब दीपू और वसु अपने प्यार के रंग में रंग रहे थे वहीँ कविता और मीना को उनकी आवाज़ें और सिसकियाँ सुनाई दे रही थी.

दोनों कविता और मीना को नींद नहीं आ रही थी और सोते वक़्त दोनों की पीठ एक दुसरे की तरफ थी. उनकी आवाज़ सुनकर दोनों उत्तेजित हो चुके थे और एक दुसरे के बिना जाने अपनी चूत मसल रही थी. लेकिन वो अपनी उत्तेजना को कितनी देर तक रोक पाते एक दुसरे के जाने बिना. कविता का हाथ पूरी उसके चूत के पानी से भीग गया था क्यूंकि वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी. ऐसा नहीं था की पहले आवाज़ नहीं आती थी लेकिन आज आवाज़ें कुछ ज़्यादा ही आ रही थी (क्यूंकि उनको पता नहीं था की दीपू आज वसु की गांड मार रहा है.) और यही हाल मीना का भी था.

कविता को नींद नहीं आती तो वो पलट कर मीना की तरफ देखती है तो वही हाल मीना का भी था. आखिर में दोनों एक दुसरे को देखते है और मीना कहती है

मीना: आज ये आवाज़ें बहुत ज़ोर से आ रही है. क्या दीपू... ऐसा बोल कर मीना रुक जाती है तो कविता मीना की आँखों में देख कर कहती है: हाँ बेटी जो तू सोच रही है वो सही है. दीपू लम्बे रेस का घोडा है और वो जल्दी थकता नहीं है बल्कि हमें थका देता है. तेरा तो पता नहीं लेकिन मैं बहुत उत्तेजित हो चुकी हूँ और मेरी चूत एकदम गीली हो गयी है.

मीना कविता को देखते हुए: माँ आप ये कैसी गन्दी बात कर रही हो और अपनी आँखें झुका लेती है.

कविता: बेटी इसमें क्या गन्दी बात है? जो है वो है और मैं झूट नहीं बोल रही हूँ. कविता को लगता है की मीना शर्मा रही है और उसका शर्माना दूर करना पड़ेगा तो वो मीना का हाथ पकड़ कर अपनी चूत पे रख देती है.

मीना को लगा नहीं था की उसकी माँ कभी ऐसा कर सकती है तो मीना झट से अपना हाथ छुड़ा लेती है.

मीना: आप क्या कर रही हो?

कविता फिर मीना के ऊपर आ जाती है और उसकी आँखों में देखते हुए कहती है.... क्यों मनोज ने कभी ऐसा नहीं किया क्या?

मीना थोड़ा शर्माते हुए: कभी नहीं.

कविता: एक बात कहूँ... बिस्तर पे तू जितनी शर्माएगी तो उतना ही पछ्तायेगी. तुझे कभी मजा नहीं आएगा. पहले में भी तेरी ही तरह थी. बहुत शर्माती थी और जिसे तो गन्दी बात कहती हो मैं भी कभी नहीं कहती थी. लेकिन दीपू, वसु और दिव्या ने कमरे में मुझे पूरा बेशरम बना दिया और तब से मुझे भी रोज़ मजे मिलते है और मैं भी खूब मजे देती हूँ.

कविता मीना के होंठ चूमती है तो फिर से मीना चौक जाती है क्यूंकि अब तक किसी औरत/लड़की ने मीना को ऐसा चूमा नहीं था. मीना शर्म से अपने होंठ बंद ही रखती है जिसे कविता समझ जाती है.

कविता: अपनी जुबां खोलना. मीना कविता की आँखों में देख कर मना करती है तो कविता हस्ते हुए अपना एक हाथ उसकी चूची पे रख कर ज़ोर से दबा देती है तो मीना की सिसकारी निकल जाती है तो उसी वक़्त कविता फिर से मीना को चूमती है और इस बार अपनी जीभ उसके मुँह में घुसा देती है मीना के होंठ और जुबां चूसने लगती है.

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यह १- २ Min चलता है. मीना को पहले थोड़ा अजीब लगता है लेकिन अब उसे भी थोड़ा मजा आने लगता है.

कविता उसको चूमते हुए अब उसकी दोनों चूचियां दबाते रहती है तो मीना भी बहकने लगती है. मीना सिसकारियां लेते हुए कहती है की उसे भी अब अच्छा लग रहा है और उसे कुछ हो रहा है.

कविता ये बात सुनकर हस देती है और उसके गले को चूमते हुए उसकी चूची पे आ जाती है और उसके कपडे निकालते हुए उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगती है. मीना से भी अब रहा नहीं जाता और वो कविता का सर अपनी चूची पे दबा देती है. कविता को अब लगता है की मीना भी खुल रही है. वो एक चूची को मुँह में लेकर चूसती है तो दोस्सरे को ज़ोर से दबाती है.

अब मीना भी रंग में आने लगती है. १० Min तक मीना की चूचियों को चाटने और चूसने के बाद कविता फिर से मीना के ऊपर आकर फिर से उसको चूमती है तो इस बार मीना पूरे जोश में कविता को चूमती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है. कुछ देर बाद दोनों अलग होते है तो हफ्ते रहते है.

मीना:आज तक मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ है माँ... और फिर थोड़ा शर्माते हुए... अच्छा भी लगा.

कविता: ये हुई ना बात मेरी बेटी. बिस्तर पे तू जितना खुलेगी उतना ही तुझे मजा आएगा.

मीना: लेकिन मनोज तो कभी ऐसा नहीं करता.

कविता: इसीलिए तो इतना शर्माती है. मीना भी अब थोड़ा खुलने लगती है तो कहती है: वैसे आप तो बहुत अच्छे से चूमती हो. मैंने आज तक किसीको ऐसा नहीं चूमा.

कविता: मतलब?

मीना शर्माते हुए: जब आपने अपनी जुबां मेरे मुँह में डाल कर... ऐसा बोलते हुए मीना रुक जाती है तो कविता कहती है: बेटी अभी तो तुझे बहुत कुछ जानना है. वैसे में भी तेरी तरह ही थी. मुझे भी पहले ठीक से चूमना नहीं आता था... लेकिन मेरा पति और दो सौतन है ना... मेरा सब शर्म दूर कर दिया और अब तो दोनों होंठ को बहुत अच्छे से चूमती हूँ.

मीना थोड़ा आश्चर्य से कविता को देख कर: दोनों होंठ?

कविता मीना के कान में कहती है... हाँ... दोनों होंठ... एक ऊपर के और एक नीचे के... और ऐसा कहते हुए कविता मीना की चूत पे अपना हाथ रख कर ज़ोर से दबा देती है और कहती है... ये है दूसरी होंठ... कविता के ऐसे करने से मीना भी बेहक जाती है और फिर से कविता का सर पकड़ कर उसके होंठ पे टूट पड़ती हैं जैसे उसकी जुबां को खा जायेगी.

थोड़ी देर बाद... मीना: माँ अभी भी उस कमरे से बहुत आवाज़ आ रही है.

कविता: मैंने कहा था ना... दीपू बहुत लम्बी रेस का घोडा है. और वैसे भी आज वसु का जन्मदिन है तो उसकी हालत तो बुरी होनी ही है.

कविता फिर मीना को चूमते हुए नीचे की तरफ जाती है और पहले चूचियां, गहरी नाभि और मीना की जांघ को अच्छे से चूमती और चाटती है. इतना करते है मीना झड़ जाती है और आज काफी दिनों बाद उसका पानी निकला था... क्यूंकि इतने दिनों के बाद उसे ऐसा मजा मिल रहा था. कविता चूमते और चाटते हुए जब वो मीना की चूत के पास आती है तो देखती है की वहां पर थोड़े बाल है.

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कविता मीना की तरफ देख कर: ये क्या... इतने सारे बाल बढ़ा रखे है तुमने? साफ़ क्यों नहीं करती? अगर ऐसा ही रहा तो इन्फेक्शन भी हो जाएगा. और वैसे एक बात बताओं..दीपू को एकदम साफ़ और चिकना चाहिए.

उसने हम सब को पहले ही कह दिया था इस बारे में. तो तू भी अब से एकदम चिकनी और साफ़ रखना.

मीना उसकी बात सुनकर हाँ में सर हिलाती है तो फिर कविता उसकी चूत चाटने लगती है और अपनी जुबां निकल कर ऊपर से नीचे तक चूत चाटने लग जाती है.

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मीना तो जैसे आसमान में पहुँच गयी थी क्यूंकि उसे आज तक इतना मजा कभी नहीं मिला था.. एक और बात थी की आज तक वो किसी औरत के साथ बिस्तर पे नहीं थी... और आज वो इस बिस्तर पे किसी और के साथ नहीं बल्कि उसकी माँ के साथ ही बिस्तर पे मजे ले रही थी.

कविता उसकी चूत को चूमते हुए एक ऊँगली उसकी चूत में डालते हुए अंदर बाहर करती है तो ये दोहरा झटका मीना सेहन नहीं कर पाती और कविता का सर पकड़ कर उसकी चूत पे दबा देती है और ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगती है.

लेकिन ये आवाज़ दुसरे कमरे की आवाज़ों से कम ही था.

कविता भी अपनी जुबां को उसकी लाल गुलाबी रस से भरी चूत में अंदर तक ठेल देती है और बड़ी शिद्दत से उसकी चूत को चूसने लगती है. ७- ८ Min में ही मीना फिर से झड़ कर जैसे जमीन पे आ जाती है और हफ्ते रहती है.

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कविता अपना सर उठा कर मीना को देखती है और उसके चेहरे पे संतुष्टि के भाव देख कर उसे भी बड़ा सुकून मिलता है और ऊपर आकर मीना को देखते हुए फिर से अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देती है और दोनों फिर से एक गहरी लम्बी चुम्बन का मजा लेते है. मीना को इस बात का पता नहीं था की इस चुम्बन में वो खुद अपना रस चख रही थी.

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कविता मीना को देख कर: कैसा लगा?

मीना: बहुत अच्छा लगा. मुझे पता नहीं था की एक औरत को चूमने में इतना मजा आता है.

कविता: मेरी लाडो मेरा पूछने का मतलब था की तेरा रस कैसे लगा तुझे?

मीना: मैं समझी नहीं.

कविता: जब ५ Min पहले जब हम दोनों एक दुसरे का रस चूस रहे थे तो तुमने अपनी चूत का रस चखा है. जब मैं तुम्हारी चूत चूस रही थी तो तुमने अपना पानी गिरा दिया था जो मैंने बड़े चाव से चक लिया था और वही तुमने चखा था मेरी जुबां से.

मीना कविता की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती.

कविता: चिंता मत कर... अभी तुझे बहुत कुछ सीखना है. चल जैसे मैंने तुझे संतुष्ट किया है तू भी मुझे कर. मेरी चूत भी बहुत गीली हो गयी है.

मीना फिर से कविता को चूमते हुए उसके चूची को पकड़ कर कहती है: ये इतने बड़े कैसे हो गए है? मेरे तो काफी छोटे है.

कविता जान बूझ कर: क्या बड़े हो गए है?

मीना थोड़ा हिचखिचाती है लेकिन आखिर कह ही देती है: ये तुम्हारी चूचियां.

कविता: मैंने कहा था ना... बिस्तर पे एकदम बेशरम बन जा और अपने बदन के अंगों को जैसे देसी भाषा में बोलते है वैसे ही बोलै कर. तुझे भी बहुत मजा आएगा.

मीना: मैं समझ गयी माँ... तो बोलो ये चूचियां तो मेरे हाथ में भी सही से नहीं आ रहे है. काफी बड़े हो गए है. मेरे कब इतने बड़े होंगे?

कविता: जब से शादी हुई है तब से एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब दीपू या वसु या दिव्या ने इसे चूसा और दबाया ना हो. वो तीनो तो रोज़ इससे बहुत खेलते है और इसे चूस चूस कर ही मेरा पानी निकाल देते है. और हाँ जब तक तू यहाँ है और जिस दिन तू दीपू के पास जायेगी तो तब से रोज़ ये दबाएगा और जल्दी ही मेरी तरह ही तेरे भी बड़े हो जाएंगे और मीना को आँख मार देती है.

अब तेरी बारी है तो तू भी ज़रा अच्छे से चूस दे. कविता की ये बात सुनकर मीना भी अच्छे से चूसती और चाटती रहती है और वो तो उसके निप्पल को भी काटती है जिसमें कविता को भी बहुत मजा आता. फिर वो भी अपनी माँ की तरह उसके बदन से खेलते हुए नीचे जाती है और उसकी गोल और गहरी नाभि को जैसे एकदम खा जाती है. इससे तो कविता को तारे नज़र आते है. वो मीना का सर अपनी नाभि पे ज़ोर से दबा देती है और आज पहली बार (और ना जाने कितनी बार) झड़ जाती है और अपना पानी छोड़ देती है. कविता को बड़ा सुकून मिलता है झड़ने से और मीना जब उसकी चूत पे आकर देखती है तो एकदम गुलाबी रस से पूरा भरा हुआ था. जैसे वो एक तरह से मीना को दावत दे रहा था की आ जाओ और मुझे अच्छे से चूस लो.

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अब मीना भी पीछे नहीं हटने वाली थी और वो भी पूरे जोश और ख़ुशी से कविता की चूत को चूसने और काटने लग जाती है. वो भी उसकी माँ की तरह २ उंगलियां उसकी चूत में डालती है जो आसानी से चले जाते है.

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कविता तो जैसे जन्नत पे पहुँच गयी थी और वो अपना हाथ मीना के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है और उत्तेजना में बड़बड़ाती रहती है. उसे भी पता नहीं चलता की वो क्या बक रही है क्यूंकि वो भी उतनी ही उत्तेजना में थी.

मीना भी खूब कविता की चूत चूसती है

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और ८- १० Min के बाद जब कविता से रहा नहीं जाता तो ज़ोर से सिसकारी लेते हुए झड़ जाती है और अपना पूरा पानी गिरा देती है. मीना बी उसका पूरा पानी पी जाती है. पहले तो उसे थोड़ा अजीब लगा लेकिन बाद में उसे तो जैसे उसका पानी शहद जैसे लगा जिसे वो पूरा निगल गयी. मीना जब कविता को देखती है तो थकी हुई अपनी आँखें बंद कर के ज़ोर ज़ोर से सांसें ले रही थी.

मीना फिर ऊपर आकर कविता की तरह उसको चूमती है और कविता भी मीना के मुँह से अपना रस चख लेती है.

मीना: माँ कैसे लगा?

कविता: पूछ मत बेटी... तूने तो मुझे जन्नत तक ले गयी थी. ऐसा लगा ही नहीं की तू ये सब पहली बार कर रही है.

मीना: हाँ ये सब मेरे लिए पहली बार ही था लेकिन शायद मैंने वैसे ही किया जैसे आप ने किया था.

कविता फिर मीना को अपनी बाहों में ले कर कहती है: तू शायद सोच रही होगी तो मैंने तेरे साथ ऐसा क्यों किया. बात ये है की जब तू दीपू के साथ बिस्तर पे रहेगी तो तुझे कोई गिल्ट नहीं होना चाहिए की तू ये सब जबरदस्ती के लिए कर रही है. मैं सिर्फ इतना ही कहूँगी की तू पूरे मन से उसके पास जा और फिर जब तू माँ बन जायेगी तो तेरी ख़ुशी दुगनी हो जायेगी. मैं फिर से एक बार और कहूँगी की तू एक बार मनोज से बात कर ले और तुम दोनों को इसमें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए आगे जा कर.

और हाँ एक बाद याद रखना. जब भी तुझे बच्चा होगा वो तेरा और मनोज का ही होगा (दुनिया की नज़रों में)भले ही तुम दीपू के साथ हम बिस्तर होगी. तुम दोनों मिलकर उसे अपना नाम देना. समझ गयी. यही हम सब भी चाहते है.

मीना: आप ठीक कह रही हो माँ. मैं तो पूरे दिल से उसके पास जाऊँगी लेकिन जैसे आपने कहा मैं एक बार फिर से मनोज से बात कर लेती हूँ.

कविता फिर मीना को देख कर प्यार से उसका माथा चूम लेती है और कहती है अब सो जाए?

मीना: नहीं माँ इतनी जल्दी नहीं. देखो अभी भी उसके कमरे से आवाज़ आ रही है. मैं तो ये सोच कर ही परेशान हूँ की मैं उसका लंड झेल पाऊँगी की नहीं.

कविता: चिंता मत कर. मैं उससे कहूँगी की आराम से करे. वो मेरी बात मान लेगा. एक और बात. दीपू ने मुझसे कहा है की जब तू उसके पास जायेगी तो मैं भी तेरे साथ रहूँ. वो नहीं चाहता की तू कोई गिल्ट फील करे.

मीना: हाँ ये सही रहेगा. जब आप मेरे साथ रहोगे तो मुझे भी कोई दिक्कत नहीं होगी.

कविता: चल हम दोनों एक दुसरे को मजे देते है.

मीना: वो कैसे?

कविता: हम दोनों एक दुसरे को एक बार फिर से चूस कर झाड़ा देते है तो दोनों को मजा आएगा.

मीना: कैसे?

कविता फिर बिस्तर पे सो जाती है और मीना की चूत को अपने मुँह में ले लेती है और उसी तरह से उसे भी सुला कर उसका मुँह अपनी चूत पे रख देती है. याने दोनों ६९ पोजीशन पे आ जाते है

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और फिर दोनों एक दुसरे की चूत में ऊँगली करते हुए चाटने और चूसने लगते है. ये मीना के लिए नया था क्यूंकि उसने इस पोजीशन में कभी भी नहीं किया था. उसे भी मजा आने लगा और देखते ही देखते दोनों एक दुसरे को संतुष्ट कर देते है और फिर से एक दुसरे का पानी निकल कर पी जाते है. इसमें दोनों को संतुष्टि मिलती है और आखिर में कविता मीना को अपनी बाहों में लेकर सो जाती है क्यूंकि दोनों भी बहुत थके हुए थे.


<Back to Present>

वसु: कविता की पिछली रात की बात सुनकर वसु कहती है: वाह तूने तो बहुत अच्छा किया .

वसु : मुझे ख़ुशी है की शायद मीना मान गयी है. मुझे उम्मीद है की तू जल्दी ही नानी बन जायेगी.

कविता: और तू दादी... दोनों हस देते है और दोनों फिर से एक दुसरे को गहरा चुम्बन देते है और सो जाते है.

दोपहर को जब दोनों सो कर उठते है तो वसु थोड़ा लंगड़ाते हुए चल रही थी क्यूंकि उसे अभी भी बहुत दर्द हो रहा था. लता उसको हॉल में ऐसे आता देख कर हस देती है और कहती है कल तुम्हारा जन्मदिन शायद “बहुत अच्छे” से मनाया गया है. वसु ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और झूठे गुस्से से लता को डाटती है.

लता: मैं तो मजाक कर रही थी. तू आराम कर. हम संभाल लेंगे.

वसु: वैसे दिव्या कहाँ है? वो दिख नहीं रही है.

लता: वो भी तेरे सामान घोड़े बेच कर सो रही है.

वसु: क्यों उसे क्या हुआ है?

लता: पता नहीं. वो भी तुम्हारी तरह ही सो रही है.

वसु:ठीक है मैं देख कर आती हूँ.


दिव्या के कमरे में:

वसु जब दिव्या के कमरे में जाती है तो देखती है की वो भी गहरी नींद में सो रही है. वसु उसे देख कर उसे उठाती है तो दिव्या भी अंगड़ाई लेते हुए उठ जाती है और वसु से कहती है: जन्मदिन तो तुम्हारा था. तुम्हारी क्या हालत है मुझे ठीक से पता नहीं लेकिन मेरी तो हालत एकदम बुरी है. बदन भी दुःख रहा है. सोने दो ना.

वसु: चल बकवास मत कर. दोपहर हो गयी है. और कितना सोयेगी. उठ जा. वैसे तेरे बदन क्यों दर्द कर रहा है?

दिव्या: जाओ पहले दरवाज़ा बंद कर दो. वसु दरवाज़ा बंद कर देती है तो दिव्या कहती है... ये बुआ भी ना... लगता है बहुत चुड़क्कड़ है.

वसु: क्यों क्या हुआ?

दिव्या: होना क्या है... कल रात को तुम्हारे कमरे से आवाज़ें आ रही थी और हम दोनों को नींद नहीं आयी तो बुआ तो मेरे ऊपर ही आ गयी और पूरा बदन निचोड़ दिया. मेरे होंठ, चूची, जांग, चूत और गांड... किसी को नहीं छोड़ा और खूब चूस चूस कर पता नहीं कितनी बार मुझे झडा दिया.

वैसे मैं भी पीछे नहीं थी. मैंने भी उसको पूरा निचोड़ दिया और उसे भी उतना ही मजा दिया.

वसु: उसको देख कर लगता तो नहीं है की इतना कुछ हुआ होगा.

दिव्या: वो मेरे से थोड़ी देर पहली ही जाग गयी होगी और देखना खाना खाने के बाद फिर से सो जायेगी.

वसु इस बात पे हस देती है और फिर प्यार से दिव्या के होंठ से अपने होंठ मिला देती है और दोनों भी एक मस्त चुम्बन में जुड़ जाते है.

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वसु: एक बात बताओं...

दिव्या: क्या?

वसु: तुम्हारे जैसे हाल कविता और मीना का भी है. वसु जब ये बात कहती है तो दिव्या अपना मुँह खोले आश्चर्य से वसु को देखती रहती है.

वसु: हाँ सही कह रही हूँ. सुबह जब मैं फ्रेश हो कर आयी थी तो कविता ने मुझे उनकी रात की बात बतायी... एक और बात... लगता है मीना भी अब दीपू के लिए तैयार हो रही है. दिव्या ये बात सुनकर खुश हो जाती है.

दिव्या: वैसे अब तुम्हारा दर्द कम हुआ के नहीं? मुझे पता है जब वो गांड मारता है तो बदन को पूरा तोड़ देता है.

वसु: हाँ ये एहसास मुझे भी कल हुआ है. लेकिन अब मैं थोड़ा ठीक हूँ.

दिव्या: चिंता मत करो... जल्दी ही तुम्हे भी इसकी आदत पड़ जायेगी और दोनों हसने लगते है.

दिव्या: वैसे लगता है जन्मदिन तुम्हारा हुआ... और बदन सब का टूटा.... इस बात पे दोनों हस्ते है और फिर वसु दरवाज़ा निकाल कर दोनों बाहर आ जाते है....


Note: दिव्याऔर लता का रात का Scene नहीं लिखा है क्यूंकि वो बोरिंग हो जाता. बस ये imagine कर लो की जैसे कविता और मीना ने रात बितायी थी वैसे ही इन दोनों की रात भी बीती. :)

मैं काफी Busy रहता हूँ अपने काम पर... और शायद उपदटेस थोड़े Delay हो रहे है ..लेकिन मेरे पिछले ३- ४ उपदटेस Mega Updates रहे है और उनको लिखने में बहुत टाइम लगता है... सोचना भी बहुत पड़ता है और कौनसा फोटो कहाँ ऐड करना है ये भी बहुत मुश्किल काम है. इसीलिए मैं आशा करता हूँ की इस अपडेट में Minimum ३५- ४० लाइक्स और कमैंट्स आएंगे. जब तक नहीं आते मैं नेक्स्ट अपडेट लिखना स्टार्ट नहीं करूंगा. मैं ये कोई गुस्से या नाराज़गी से नहीं कह रहा हूँ...लेकिन जब मैं इतना मेहनत करता हूँ एक अपडेट पोस्ट करने के लिए तू मुझे भी उतना ही Motivation मिलना चाहिए otherwise लिखने का कोई फायदा नहीं रहेगा. I hope you all agree and understand. Thank you.
Shandar update bhai
Kavita ne meena ko bhi toda khol diya hai
Ab lagta hai jaldi hi meena aur dipu ki chudai bhi ho jayegi
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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35th Update (रात के मजे जारी है) (Mega Update)


दीपू भी प्यार से वसु का माथा चूमते हुए... मेरे लिए भी आज का दिन स्पेशल था. चलो अब सो जाते है... वर्ण सुबह उठने में देरी होगी. वसु: देरी तुम्हे होगी... मुझे नहीं. दीपू: मतलब? वसु: बुद्धू देरी तुम्हे ऑफिस में जाने के लिए होगी. मैं तो घोड़े बेच कर सोने वाली हूँ. दोनों इस बात पे हस देते है और एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.

अब आगे..

अगली सुबह:


अगली सुबह दीपू उठता है तो देखता है की वसु घोड़े बेच के सो रही है. उसे देख कर दीपू को हसी आती है और वो प्यार से उसका माथा चूम कर फ्रेश होने बाथरूम जाता है.

फ्रेश हो कर वो किचन में जाता है तो कविता वहां पर चाय बना रही होती है. वो जाकर कविता को पीछे से पकड़ कर उसके कान को चूमते हुए उसकी चूची दबाता है.

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कविता: आह...आह सुबह सुबह फिर से चालु हो गए. रात को मजा नहीं आया क्या?

दीपू: रात की बात अलग है और सुबह की. वैसे भी तुममे में और वसु में फरक भी है ना.

कविता: तुम तो बड़े ज़ालिम निकले.

दीपू: क्यों क्या हुआ?

कविता: होना क्या है... रात को तुम दोनों मजे कर रहे थे और हम को अकेले छोड़ दिया. ठीक से सो भी नहीं पाए.

दीपू: क्यों? सोये क्यों नहीं?

कविता: सोते कैसे? रात भर तो इतनी आवाज़ें आ रही थी तुम्हारे कमरे से. वैसे मेरी बन्नो अब कैसी है?

दीपू: तुम ही जाकर देख लो ना तुम्हारी बन्नो कैसे है और उसे पलट कर... तुम तुम्हारी बन्नो को देख लेना लेकिन पहले मेरा मुँह तो मीठा कर दो और ऐसा कहते हुए वो कविता को चूमता है तो कविता भी सुबह सुबह पूरी उसका साथ देती है और दोनों २ - ३ min तक एक दुसरे को चूस चूस कर रस पीते है.

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२ Min बाद कविता: अब मुझे जाने दो और दीपू को धक्का देते हुए उसे अलग करती है. उसे चाय देकर वो कमरे में जाती है वसु को देखने के लिए.

कविता फिर चाय लेकर वसु के कमरे में जाती है तो देखती है की वो मस्त सो रही है. उसको देख कर हस्ते हुए वो वसु को उठाती है.

कविता: उठ जा मेरी बन्नो. और कितना सोयेगी देख सुबह हो गयी है और दीपू को भी ऑफिस जाना है.

वसु अंगड़ाई लेते हुए: सोने दे ना. मुझे बहुत नींद आ रही है.

कविता: वो तो बड़ा ज़ालिम निकला. लगता है तुझे सोने नहीं दिया.

वसु: हाँ रे... पूरी रात पेलता रहा और सोने नहीं दिया. १- २ घंटे पहले ही सोई हूँ. इसीलिए तो कह रही हूँ सोने दे कर के.

कविता: अभी नहीं. पहले उठ कर फ्रेश हो जा. दोपहर को सो जाना. कोई तुझे रोकेगा नहीं. वैसे तू पलट और देकने दे तेरी क्या हालत हैं. ऐसा कहते हुए कविता वसु को पेट के बल सुला कर उसकी कमर से चादर निकल कर उसकी गांड देखती है. उसमें से अभी भी थोड़ा पानी आ रहा था और उसकी गांड काफी खुली हुई और सूझ गयी थी.

कविता उसको देख कर: क्या बात है बन्नो लगता है रात को तुझे मस्त तरीके से चोदा है. अभी भी तेरी गांड से पानी निकल रहा है और ऐसा कहते हुए कविता उसकी गांड की तरफ झुक कर उसकी गांड को चाटती है और उसमें से निकला पानी को चाट कर कहती है... पानी अभी भी सूखा नहीं है.

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और वैसे भी लगता है की उसने तेरी गांड पूरी खोल दी है. मेरी २ उंगलियां भी आराम से जा रही है और ऐसा कहते हुए कविता वसु की गांड में २ उंगलियां दाल कर अंदर बाहर करने लगती है.

वसु: मत करना नहीं तो मैं फिर से बहक जाऊँगी.

कविता: मुझे पता है. एक बार जब गांड में लेना शुरू करोगी तो वहीँ लेने की इच्छा होगी.

वसु: हाँ सही कहा. पहले तो बहुत दर्द हुआ लेकिन फिर बाद में बहुत मजा आया. अब अपनी उंगलियां निकाल वर्ना...

कविता: वर्ना क्या?

वसु कुछ बोलने को होती इतने में वहां दिव्या भी आ जाती है.

दिव्या: मैं तो तुम दोनों को किचन में ढूढ़ रही थी लेकिन तुम दोनों तो सुबह सुबह ही मेरे आने से पहले ही शुरू हो गए?

कविता: देख ना वसु की क्या हालत हो गयी है और ऐसा कहते हुए कविता वसु की गांड को थोड़ा फैला देती है और दिव्या को दिखाती है और उसकी गांड खुल जाती है और अंदर का लाल छेद सब दीखता है.

दिव्या उसे देख कर अपना मुँह खोले कहती है... बाप रे... लगता है ये दोनों रात में बहुत मजे किये और मुझे भी पता नहीं था की दीपू दीदी की गांड का उद्धघाटन करेगा.

कविता: इसीलिए तो कल दीपू ने रात में कहा था की वो वसु के साथ अकेला सोयेगा और देख अभी भी इसकी गांड से पानी निकल रहा है और मैंने चख भी लिया है.

दिव्या कविता के पास आकर: मुझे भी चकना है और कविता को पकड़ कर उसके होंठ चूसने लगती है जिसमें कविता भी उसका साथ देती है और दीपू का पानी एक दुसरे से शेयर करते है.

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वसु दोनों को देख कर मुस्कुराती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

इतने में दीपू कमरे में आता है और तीनो को देख कर हस्ते हुए कहता है: मैं नहाने जा रहा हूँ. कोई आएगा क्या मेरे साथ? तीनो एक साथ: ना बाबा... तुम अकेले ही नहा लो. हमें पता है अगर हम तुम्हारे साथ आएंगे तो तुम फिर से शुरू हो जाओगे. दीपू कुछ नहीं कहता और हस्ते हुए बाथरूम में चला जाता है नहाने.

थोड़ी देर बाद जब दीपू नहा कर बाहर आता है तो तीनो ऐसे ही मस्ती करते रहते है.

दीपू: अरे यार देखो मेरी पीठ में कुछ हुआ हस क्या? जलन हो रही हैऔर मेरा हाथ वहां नहीं पहुँच रहा हैऔर दीपू पीछे मुड कर अपने पीठ उन्हें दिखाता है.

दीपू के पीठ पे बहुत खरोंचे दिख रही थी और ऐसा लगता हैजैसे किसी ने उसकी पीठ पर नाखून से खरोंचा है. तीनो उसकी पीठ देख कर उसके पास जाते है और पूछते है की ये कैसा हुआ? पहले तो कभी ऐसा नहीं हुआ था. फिर दीपू को रात की याद आती है और वसु को देखते हुए कहता है... ये तो वसु ही बता सकती है.

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जब दीपू ये बात बोलता हस तो वसु दीपू को देखती रहती है और फिर उसे भी रात का ख्याल आता हस जब उसने उत्तेजना में दीपू की पीठ पर अपने नाखून गाढ़े थे. वसु को जब याद आता हस तो उसकी आँखों से आंसू आ जाते हस और दीपू से कहती हस की ये मेरी गलती है और रोने लगती है. दीपू उसे अपनी बाहों में लेकर चुप कराता हस और कहता हस की इसमें रोने की क्या बात है?

वसु: मुझे दुःख होगा ना की तुम्हारी पीठ पे मेरी नाखून के निशाँ है.

दीपू: अरे ये तेरी नाखून के निशाँ नहीं बल्कि हमारे प्यार की निशानी है. देखो तुम्हारे बदन पे भी ऐसे निशाँ है और दिव्या और कविता को वसु का गाला दिखाता है जहाँ पर उनके प्यार की निशानी थी.

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दीपू को थोड़ी मस्ती सूझती हस तो वो वसु के बदन से चादर हटा कर दिव्या और कविता से कहता है: देखो हमारे प्यार की निशानी इसकी चूची पे भी है. आगे से तुम लोगों को भी ऐसे ही निशानी दिखेगी अपने बदन पर और दोनों को आँख मार देता है.

वसु ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती हस और अपने हाथ से अपनी चूचियों को ढकने की कोशिश करती है.

दीपू: अब क्या शर्माना?

वसु दीपू को देखती रहती है तो दिव्या और कविता दोनों हस देते है और फिर झुक कर दोनों वसु की चूची पे टूट पड़ते है और दोनों एक एक को लेकर चूसना शुरू कर देते है.

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दीपू: चलो मैं ऑफिस के लिए निकल जाता हूँ. तुम सब आराम करो. आज रात को तुम्हे (दिव्या और कविता) को जागना है. जाते वक़्त वो तीनो के होंठ पे गहरा चुम्बन देता है जिसमें तीनो उसका साथ देती है और फिर वो अपने ऑफिस के लिए निकल जाता है और दिव्या उसे छोड़ने बाहर चले जाती है.. फिर वसु भी बाथरूम में चली जाती है और नहा धो कर फ्रेश हो कर चाय पीती है.

कविता: सुनो वसु मैं सोने जा रही हूँ. मुझे दो घंटे बाद उठा देना.

वसु: मैं रात भर जागी रही तो समझ आता है लेकिन अभी तुझे क्यों नींद आ रही है?

कविता: इसीलिए बन्नो की हमें भी रात भर नींद नहीं आयी. चल मुझे सोने दे.

वसु: ऐसे कैसे सोने दूँगी तुझे और वो कविता को बिस्तर पे फेक देती है और उसके ऊपर छड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए उसकी चूची को दबाते हुए: बोल ना रात को नींद क्यों नहीं आयी तुझे?

कविता इस बात से शर्मा जाती है और वसु को पकड़ के उसके होंठ चूमते हुए धीरे से उसके कान में कहती है: लगता है मैंने मीना को भी एक तरह से समझा दिया है की दीपू उससे “मिलने” जल्दी ही आने वाला है.

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वसु: ये तो बड़ी अच्छी बात है. अगर मीना भी माँ बन जाए तो मैं भी दादी बन जाऊँगी. वैसे बताना रात को तूने क्या किया की मीना समझ गयी है.

कविता: तो फिर सुन...


पिछली रात कविता के कमरे में:

पिछली रात को जब दीपू और वसु अपने प्यार के रंग में रंग रहे थे वहीँ कविता और मीना को उनकी आवाज़ें और सिसकियाँ सुनाई दे रही थी.

दोनों कविता और मीना को नींद नहीं आ रही थी और सोते वक़्त दोनों की पीठ एक दुसरे की तरफ थी. उनकी आवाज़ सुनकर दोनों उत्तेजित हो चुके थे और एक दुसरे के बिना जाने अपनी चूत मसल रही थी. लेकिन वो अपनी उत्तेजना को कितनी देर तक रोक पाते एक दुसरे के जाने बिना. कविता का हाथ पूरी उसके चूत के पानी से भीग गया था क्यूंकि वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी. ऐसा नहीं था की पहले आवाज़ नहीं आती थी लेकिन आज आवाज़ें कुछ ज़्यादा ही आ रही थी (क्यूंकि उनको पता नहीं था की दीपू आज वसु की गांड मार रहा है.) और यही हाल मीना का भी था.

कविता को नींद नहीं आती तो वो पलट कर मीना की तरफ देखती है तो वही हाल मीना का भी था. आखिर में दोनों एक दुसरे को देखते है और मीना कहती है

मीना: आज ये आवाज़ें बहुत ज़ोर से आ रही है. क्या दीपू... ऐसा बोल कर मीना रुक जाती है तो कविता मीना की आँखों में देख कर कहती है: हाँ बेटी जो तू सोच रही है वो सही है. दीपू लम्बे रेस का घोडा है और वो जल्दी थकता नहीं है बल्कि हमें थका देता है. तेरा तो पता नहीं लेकिन मैं बहुत उत्तेजित हो चुकी हूँ और मेरी चूत एकदम गीली हो गयी है.

मीना कविता को देखते हुए: माँ आप ये कैसी गन्दी बात कर रही हो और अपनी आँखें झुका लेती है.

कविता: बेटी इसमें क्या गन्दी बात है? जो है वो है और मैं झूट नहीं बोल रही हूँ. कविता को लगता है की मीना शर्मा रही है और उसका शर्माना दूर करना पड़ेगा तो वो मीना का हाथ पकड़ कर अपनी चूत पे रख देती है.

मीना को लगा नहीं था की उसकी माँ कभी ऐसा कर सकती है तो मीना झट से अपना हाथ छुड़ा लेती है.

मीना: आप क्या कर रही हो?

कविता फिर मीना के ऊपर आ जाती है और उसकी आँखों में देखते हुए कहती है.... क्यों मनोज ने कभी ऐसा नहीं किया क्या?

मीना थोड़ा शर्माते हुए: कभी नहीं.

कविता: एक बात कहूँ... बिस्तर पे तू जितनी शर्माएगी तो उतना ही पछ्तायेगी. तुझे कभी मजा नहीं आएगा. पहले में भी तेरी ही तरह थी. बहुत शर्माती थी और जिसे तो गन्दी बात कहती हो मैं भी कभी नहीं कहती थी. लेकिन दीपू, वसु और दिव्या ने कमरे में मुझे पूरा बेशरम बना दिया और तब से मुझे भी रोज़ मजे मिलते है और मैं भी खूब मजे देती हूँ.

कविता मीना के होंठ चूमती है तो फिर से मीना चौक जाती है क्यूंकि अब तक किसी औरत/लड़की ने मीना को ऐसा चूमा नहीं था. मीना शर्म से अपने होंठ बंद ही रखती है जिसे कविता समझ जाती है.

कविता: अपनी जुबां खोलना. मीना कविता की आँखों में देख कर मना करती है तो कविता हस्ते हुए अपना एक हाथ उसकी चूची पे रख कर ज़ोर से दबा देती है तो मीना की सिसकारी निकल जाती है तो उसी वक़्त कविता फिर से मीना को चूमती है और इस बार अपनी जीभ उसके मुँह में घुसा देती है मीना के होंठ और जुबां चूसने लगती है.

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यह १- २ Min चलता है. मीना को पहले थोड़ा अजीब लगता है लेकिन अब उसे भी थोड़ा मजा आने लगता है.

कविता उसको चूमते हुए अब उसकी दोनों चूचियां दबाते रहती है तो मीना भी बहकने लगती है. मीना सिसकारियां लेते हुए कहती है की उसे भी अब अच्छा लग रहा है और उसे कुछ हो रहा है.

कविता ये बात सुनकर हस देती है और उसके गले को चूमते हुए उसकी चूची पे आ जाती है और उसके कपडे निकालते हुए उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगती है. मीना से भी अब रहा नहीं जाता और वो कविता का सर अपनी चूची पे दबा देती है. कविता को अब लगता है की मीना भी खुल रही है. वो एक चूची को मुँह में लेकर चूसती है तो दोस्सरे को ज़ोर से दबाती है.

अब मीना भी रंग में आने लगती है. १० Min तक मीना की चूचियों को चाटने और चूसने के बाद कविता फिर से मीना के ऊपर आकर फिर से उसको चूमती है तो इस बार मीना पूरे जोश में कविता को चूमती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है. कुछ देर बाद दोनों अलग होते है तो हफ्ते रहते है.

मीना:आज तक मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ है माँ... और फिर थोड़ा शर्माते हुए... अच्छा भी लगा.

कविता: ये हुई ना बात मेरी बेटी. बिस्तर पे तू जितना खुलेगी उतना ही तुझे मजा आएगा.

मीना: लेकिन मनोज तो कभी ऐसा नहीं करता.

कविता: इसीलिए तो इतना शर्माती है. मीना भी अब थोड़ा खुलने लगती है तो कहती है: वैसे आप तो बहुत अच्छे से चूमती हो. मैंने आज तक किसीको ऐसा नहीं चूमा.

कविता: मतलब?

मीना शर्माते हुए: जब आपने अपनी जुबां मेरे मुँह में डाल कर... ऐसा बोलते हुए मीना रुक जाती है तो कविता कहती है: बेटी अभी तो तुझे बहुत कुछ जानना है. वैसे में भी तेरी तरह ही थी. मुझे भी पहले ठीक से चूमना नहीं आता था... लेकिन मेरा पति और दो सौतन है ना... मेरा सब शर्म दूर कर दिया और अब तो दोनों होंठ को बहुत अच्छे से चूमती हूँ.

मीना थोड़ा आश्चर्य से कविता को देख कर: दोनों होंठ?

कविता मीना के कान में कहती है... हाँ... दोनों होंठ... एक ऊपर के और एक नीचे के... और ऐसा कहते हुए कविता मीना की चूत पे अपना हाथ रख कर ज़ोर से दबा देती है और कहती है... ये है दूसरी होंठ... कविता के ऐसे करने से मीना भी बेहक जाती है और फिर से कविता का सर पकड़ कर उसके होंठ पे टूट पड़ती हैं जैसे उसकी जुबां को खा जायेगी.

थोड़ी देर बाद... मीना: माँ अभी भी उस कमरे से बहुत आवाज़ आ रही है.

कविता: मैंने कहा था ना... दीपू बहुत लम्बी रेस का घोडा है. और वैसे भी आज वसु का जन्मदिन है तो उसकी हालत तो बुरी होनी ही है.

कविता फिर मीना को चूमते हुए नीचे की तरफ जाती है और पहले चूचियां, गहरी नाभि और मीना की जांघ को अच्छे से चूमती और चाटती है. इतना करते है मीना झड़ जाती है और आज काफी दिनों बाद उसका पानी निकला था... क्यूंकि इतने दिनों के बाद उसे ऐसा मजा मिल रहा था. कविता चूमते और चाटते हुए जब वो मीना की चूत के पास आती है तो देखती है की वहां पर थोड़े बाल है.

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कविता मीना की तरफ देख कर: ये क्या... इतने सारे बाल बढ़ा रखे है तुमने? साफ़ क्यों नहीं करती? अगर ऐसा ही रहा तो इन्फेक्शन भी हो जाएगा. और वैसे एक बात बताओं..दीपू को एकदम साफ़ और चिकना चाहिए.

उसने हम सब को पहले ही कह दिया था इस बारे में. तो तू भी अब से एकदम चिकनी और साफ़ रखना.

मीना उसकी बात सुनकर हाँ में सर हिलाती है तो फिर कविता उसकी चूत चाटने लगती है और अपनी जुबां निकल कर ऊपर से नीचे तक चूत चाटने लग जाती है.

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मीना तो जैसे आसमान में पहुँच गयी थी क्यूंकि उसे आज तक इतना मजा कभी नहीं मिला था.. एक और बात थी की आज तक वो किसी औरत के साथ बिस्तर पे नहीं थी... और आज वो इस बिस्तर पे किसी और के साथ नहीं बल्कि उसकी माँ के साथ ही बिस्तर पे मजे ले रही थी.

कविता उसकी चूत को चूमते हुए एक ऊँगली उसकी चूत में डालते हुए अंदर बाहर करती है तो ये दोहरा झटका मीना सेहन नहीं कर पाती और कविता का सर पकड़ कर उसकी चूत पे दबा देती है और ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगती है.

लेकिन ये आवाज़ दुसरे कमरे की आवाज़ों से कम ही था.

कविता भी अपनी जुबां को उसकी लाल गुलाबी रस से भरी चूत में अंदर तक ठेल देती है और बड़ी शिद्दत से उसकी चूत को चूसने लगती है. ७- ८ Min में ही मीना फिर से झड़ कर जैसे जमीन पे आ जाती है और हफ्ते रहती है.

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कविता अपना सर उठा कर मीना को देखती है और उसके चेहरे पे संतुष्टि के भाव देख कर उसे भी बड़ा सुकून मिलता है और ऊपर आकर मीना को देखते हुए फिर से अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देती है और दोनों फिर से एक गहरी लम्बी चुम्बन का मजा लेते है. मीना को इस बात का पता नहीं था की इस चुम्बन में वो खुद अपना रस चख रही थी.

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कविता मीना को देख कर: कैसा लगा?

मीना: बहुत अच्छा लगा. मुझे पता नहीं था की एक औरत को चूमने में इतना मजा आता है.

कविता: मेरी लाडो मेरा पूछने का मतलब था की तेरा रस कैसे लगा तुझे?

मीना: मैं समझी नहीं.

कविता: जब ५ Min पहले जब हम दोनों एक दुसरे का रस चूस रहे थे तो तुमने अपनी चूत का रस चखा है. जब मैं तुम्हारी चूत चूस रही थी तो तुमने अपना पानी गिरा दिया था जो मैंने बड़े चाव से चक लिया था और वही तुमने चखा था मेरी जुबां से.

मीना कविता की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती.

कविता: चिंता मत कर... अभी तुझे बहुत कुछ सीखना है. चल जैसे मैंने तुझे संतुष्ट किया है तू भी मुझे कर. मेरी चूत भी बहुत गीली हो गयी है.

मीना फिर से कविता को चूमते हुए उसके चूची को पकड़ कर कहती है: ये इतने बड़े कैसे हो गए है? मेरे तो काफी छोटे है.

कविता जान बूझ कर: क्या बड़े हो गए है?

मीना थोड़ा हिचखिचाती है लेकिन आखिर कह ही देती है: ये तुम्हारी चूचियां.

कविता: मैंने कहा था ना... बिस्तर पे एकदम बेशरम बन जा और अपने बदन के अंगों को जैसे देसी भाषा में बोलते है वैसे ही बोलै कर. तुझे भी बहुत मजा आएगा.

मीना: मैं समझ गयी माँ... तो बोलो ये चूचियां तो मेरे हाथ में भी सही से नहीं आ रहे है. काफी बड़े हो गए है. मेरे कब इतने बड़े होंगे?

कविता: जब से शादी हुई है तब से एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब दीपू या वसु या दिव्या ने इसे चूसा और दबाया ना हो. वो तीनो तो रोज़ इससे बहुत खेलते है और इसे चूस चूस कर ही मेरा पानी निकाल देते है. और हाँ जब तक तू यहाँ है और जिस दिन तू दीपू के पास जायेगी तो तब से रोज़ ये दबाएगा और जल्दी ही मेरी तरह ही तेरे भी बड़े हो जाएंगे और मीना को आँख मार देती है.

अब तेरी बारी है तो तू भी ज़रा अच्छे से चूस दे. कविता की ये बात सुनकर मीना भी अच्छे से चूसती और चाटती रहती है और वो तो उसके निप्पल को भी काटती है जिसमें कविता को भी बहुत मजा आता. फिर वो भी अपनी माँ की तरह उसके बदन से खेलते हुए नीचे जाती है और उसकी गोल और गहरी नाभि को जैसे एकदम खा जाती है. इससे तो कविता को तारे नज़र आते है. वो मीना का सर अपनी नाभि पे ज़ोर से दबा देती है और आज पहली बार (और ना जाने कितनी बार) झड़ जाती है और अपना पानी छोड़ देती है. कविता को बड़ा सुकून मिलता है झड़ने से और मीना जब उसकी चूत पे आकर देखती है तो एकदम गुलाबी रस से पूरा भरा हुआ था. जैसे वो एक तरह से मीना को दावत दे रहा था की आ जाओ और मुझे अच्छे से चूस लो.

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अब मीना भी पीछे नहीं हटने वाली थी और वो भी पूरे जोश और ख़ुशी से कविता की चूत को चूसने और काटने लग जाती है. वो भी उसकी माँ की तरह २ उंगलियां उसकी चूत में डालती है जो आसानी से चले जाते है.

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कविता तो जैसे जन्नत पे पहुँच गयी थी और वो अपना हाथ मीना के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है और उत्तेजना में बड़बड़ाती रहती है. उसे भी पता नहीं चलता की वो क्या बक रही है क्यूंकि वो भी उतनी ही उत्तेजना में थी.

मीना भी खूब कविता की चूत चूसती है

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और ८- १० Min के बाद जब कविता से रहा नहीं जाता तो ज़ोर से सिसकारी लेते हुए झड़ जाती है और अपना पूरा पानी गिरा देती है. मीना बी उसका पूरा पानी पी जाती है. पहले तो उसे थोड़ा अजीब लगा लेकिन बाद में उसे तो जैसे उसका पानी शहद जैसे लगा जिसे वो पूरा निगल गयी. मीना जब कविता को देखती है तो थकी हुई अपनी आँखें बंद कर के ज़ोर ज़ोर से सांसें ले रही थी.

मीना फिर ऊपर आकर कविता की तरह उसको चूमती है और कविता भी मीना के मुँह से अपना रस चख लेती है.

मीना: माँ कैसे लगा?

कविता: पूछ मत बेटी... तूने तो मुझे जन्नत तक ले गयी थी. ऐसा लगा ही नहीं की तू ये सब पहली बार कर रही है.

मीना: हाँ ये सब मेरे लिए पहली बार ही था लेकिन शायद मैंने वैसे ही किया जैसे आप ने किया था.

कविता फिर मीना को अपनी बाहों में ले कर कहती है: तू शायद सोच रही होगी तो मैंने तेरे साथ ऐसा क्यों किया. बात ये है की जब तू दीपू के साथ बिस्तर पे रहेगी तो तुझे कोई गिल्ट नहीं होना चाहिए की तू ये सब जबरदस्ती के लिए कर रही है. मैं सिर्फ इतना ही कहूँगी की तू पूरे मन से उसके पास जा और फिर जब तू माँ बन जायेगी तो तेरी ख़ुशी दुगनी हो जायेगी. मैं फिर से एक बार और कहूँगी की तू एक बार मनोज से बात कर ले और तुम दोनों को इसमें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए आगे जा कर.

और हाँ एक बाद याद रखना. जब भी तुझे बच्चा होगा वो तेरा और मनोज का ही होगा (दुनिया की नज़रों में)भले ही तुम दीपू के साथ हम बिस्तर होगी. तुम दोनों मिलकर उसे अपना नाम देना. समझ गयी. यही हम सब भी चाहते है.

मीना: आप ठीक कह रही हो माँ. मैं तो पूरे दिल से उसके पास जाऊँगी लेकिन जैसे आपने कहा मैं एक बार फिर से मनोज से बात कर लेती हूँ.

कविता फिर मीना को देख कर प्यार से उसका माथा चूम लेती है और कहती है अब सो जाए?

मीना: नहीं माँ इतनी जल्दी नहीं. देखो अभी भी उसके कमरे से आवाज़ आ रही है. मैं तो ये सोच कर ही परेशान हूँ की मैं उसका लंड झेल पाऊँगी की नहीं.

कविता: चिंता मत कर. मैं उससे कहूँगी की आराम से करे. वो मेरी बात मान लेगा. एक और बात. दीपू ने मुझसे कहा है की जब तू उसके पास जायेगी तो मैं भी तेरे साथ रहूँ. वो नहीं चाहता की तू कोई गिल्ट फील करे.

मीना: हाँ ये सही रहेगा. जब आप मेरे साथ रहोगे तो मुझे भी कोई दिक्कत नहीं होगी.

कविता: चल हम दोनों एक दुसरे को मजे देते है.

मीना: वो कैसे?

कविता: हम दोनों एक दुसरे को एक बार फिर से चूस कर झाड़ा देते है तो दोनों को मजा आएगा.

मीना: कैसे?

कविता फिर बिस्तर पे सो जाती है और मीना की चूत को अपने मुँह में ले लेती है और उसी तरह से उसे भी सुला कर उसका मुँह अपनी चूत पे रख देती है. याने दोनों ६९ पोजीशन पे आ जाते है

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और फिर दोनों एक दुसरे की चूत में ऊँगली करते हुए चाटने और चूसने लगते है. ये मीना के लिए नया था क्यूंकि उसने इस पोजीशन में कभी भी नहीं किया था. उसे भी मजा आने लगा और देखते ही देखते दोनों एक दुसरे को संतुष्ट कर देते है और फिर से एक दुसरे का पानी निकल कर पी जाते है. इसमें दोनों को संतुष्टि मिलती है और आखिर में कविता मीना को अपनी बाहों में लेकर सो जाती है क्यूंकि दोनों भी बहुत थके हुए थे.


<Back to Present>

वसु: कविता की पिछली रात की बात सुनकर वसु कहती है: वाह तूने तो बहुत अच्छा किया .

वसु : मुझे ख़ुशी है की शायद मीना मान गयी है. मुझे उम्मीद है की तू जल्दी ही नानी बन जायेगी.

कविता: और तू दादी... दोनों हस देते है और दोनों फिर से एक दुसरे को गहरा चुम्बन देते है और सो जाते है.

दोपहर को जब दोनों सो कर उठते है तो वसु थोड़ा लंगड़ाते हुए चल रही थी क्यूंकि उसे अभी भी बहुत दर्द हो रहा था. लता उसको हॉल में ऐसे आता देख कर हस देती है और कहती है कल तुम्हारा जन्मदिन शायद “बहुत अच्छे” से मनाया गया है. वसु ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और झूठे गुस्से से लता को डाटती है.

लता: मैं तो मजाक कर रही थी. तू आराम कर. हम संभाल लेंगे.

वसु: वैसे दिव्या कहाँ है? वो दिख नहीं रही है.

लता: वो भी तेरे सामान घोड़े बेच कर सो रही है.

वसु: क्यों उसे क्या हुआ है?

लता: पता नहीं. वो भी तुम्हारी तरह ही सो रही है.

वसु:ठीक है मैं देख कर आती हूँ.


दिव्या के कमरे में:

वसु जब दिव्या के कमरे में जाती है तो देखती है की वो भी गहरी नींद में सो रही है. वसु उसे देख कर उसे उठाती है तो दिव्या भी अंगड़ाई लेते हुए उठ जाती है और वसु से कहती है: जन्मदिन तो तुम्हारा था. तुम्हारी क्या हालत है मुझे ठीक से पता नहीं लेकिन मेरी तो हालत एकदम बुरी है. बदन भी दुःख रहा है. सोने दो ना.

वसु: चल बकवास मत कर. दोपहर हो गयी है. और कितना सोयेगी. उठ जा. वैसे तेरे बदन क्यों दर्द कर रहा है?

दिव्या: जाओ पहले दरवाज़ा बंद कर दो. वसु दरवाज़ा बंद कर देती है तो दिव्या कहती है... ये बुआ भी ना... लगता है बहुत चुड़क्कड़ है.

वसु: क्यों क्या हुआ?

दिव्या: होना क्या है... कल रात को तुम्हारे कमरे से आवाज़ें आ रही थी और हम दोनों को नींद नहीं आयी तो बुआ तो मेरे ऊपर ही आ गयी और पूरा बदन निचोड़ दिया. मेरे होंठ, चूची, जांग, चूत और गांड... किसी को नहीं छोड़ा और खूब चूस चूस कर पता नहीं कितनी बार मुझे झडा दिया.

वैसे मैं भी पीछे नहीं थी. मैंने भी उसको पूरा निचोड़ दिया और उसे भी उतना ही मजा दिया.

वसु: उसको देख कर लगता तो नहीं है की इतना कुछ हुआ होगा.

दिव्या: वो मेरे से थोड़ी देर पहली ही जाग गयी होगी और देखना खाना खाने के बाद फिर से सो जायेगी.

वसु इस बात पे हस देती है और फिर प्यार से दिव्या के होंठ से अपने होंठ मिला देती है और दोनों भी एक मस्त चुम्बन में जुड़ जाते है.

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वसु: एक बात बताओं...

दिव्या: क्या?

वसु: तुम्हारे जैसे हाल कविता और मीना का भी है. वसु जब ये बात कहती है तो दिव्या अपना मुँह खोले आश्चर्य से वसु को देखती रहती है.

वसु: हाँ सही कह रही हूँ. सुबह जब मैं फ्रेश हो कर आयी थी तो कविता ने मुझे उनकी रात की बात बतायी... एक और बात... लगता है मीना भी अब दीपू के लिए तैयार हो रही है. दिव्या ये बात सुनकर खुश हो जाती है.

दिव्या: वैसे अब तुम्हारा दर्द कम हुआ के नहीं? मुझे पता है जब वो गांड मारता है तो बदन को पूरा तोड़ देता है.

वसु: हाँ ये एहसास मुझे भी कल हुआ है. लेकिन अब मैं थोड़ा ठीक हूँ.

दिव्या: चिंता मत करो... जल्दी ही तुम्हे भी इसकी आदत पड़ जायेगी और दोनों हसने लगते है.

दिव्या: वैसे लगता है जन्मदिन तुम्हारा हुआ... और बदन सब का टूटा.... इस बात पे दोनों हस्ते है और फिर वसु दरवाज़ा निकाल कर दोनों बाहर आ जाते है....


Note: दिव्याऔर लता का रात का Scene नहीं लिखा है क्यूंकि वो बोरिंग हो जाता. बस ये imagine कर लो की जैसे कविता और मीना ने रात बितायी थी वैसे ही इन दोनों की रात भी बीती. :)

मैं काफी Busy रहता हूँ अपने काम पर... और शायद उपदटेस थोड़े Delay हो रहे है ..लेकिन मेरे पिछले ३- ४ उपदटेस Mega Updates रहे है और उनको लिखने में बहुत टाइम लगता है... सोचना भी बहुत पड़ता है और कौनसा फोटो कहाँ ऐड करना है ये भी बहुत मुश्किल काम है. इसीलिए मैं आशा करता हूँ की इस अपडेट में Minimum ३५- ४० लाइक्स और कमैंट्स आएंगे. जब तक नहीं आते मैं नेक्स्ट अपडेट लिखना स्टार्ट नहीं करूंगा. मैं ये कोई गुस्से या नाराज़गी से नहीं कह रहा हूँ...लेकिन जब मैं इतना मेहनत करता हूँ एक अपडेट पोस्ट करने के लिए तू मुझे भी उतना ही Motivation मिलना चाहिए otherwise लिखने का कोई फायदा नहीं रहेगा. I hope you all agree and understand. Thank you.
Shaandar update
 
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JTN

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What a beautiful update!!!
Superb fantastic and pleasant.
A lot of lesbo going on, Erotic between maa beti or ab meena ka number aega par vo pahle manoj se fir se confirm karegi.
Vaise kainchi(scissor) ban kar karne me kya maza aata hoga, asli maza to okhli me musal ki awaajo me hai------- this is only my point of view not related to anyone
 
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