• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

Should I include a thriller part in the story or continue with Romance only?

  • 1) Have a thriller part

    Votes: 56 39.7%
  • 2) Continue with Romance Only.

    Votes: 95 67.4%

  • Total voters
    141

Skb21

Well-Known Member
3,792
6,021
158
28th Update (दिनेश की दिल की बात और पार्टी)

दिनेश: जान ये भी कोई पूछने वाली बात है? और फिर दिनेश निशा को अपनी बाहों में लेकर दोनों सुकून की नींद मं चले जाते है.


अब आगे..

अगली सुबह सब अपने काम में लग जाते है और फिर दीपू भी तैयार हो जाता है और जाने से पहले तीनो को मस्त चूमता है और साथ में गांड भी दबाते हुए अपने काम के लिए निकल जाता है.

वसु अपना काम कर रही थी तो उसे कुछ याद आता है और फिर वो दीपू की बुआ लता को फ़ोन करती है.

वसु लता से: दीदी कैसी हो?

लता: क्या बात है... इतने दिनों बाद हम तुम्हे याद आये? मुझे लगा तुम हम सब को भूल ही गए हो. लगता है शादी के बाद बहुत मजे ले रही हो.

वसु: ऐसा नहीं है दीदी... काम में सब उलझ गए थे और दीपू का बिज़नेस भी बढ़ रहा है तो वो भी बिजी रहता है. वैसे आपसे एक बात बताना था.

लता उसको छेड़ते हुए: कोई खुश खबर है क्या?

वसु ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. बात वो नहीं है.

लता: तो फिर क्या है?

वसु: यही की माँ बाबा गुज़र गए है.

लता ये सुनके एकदम शॉक हो जाती है और कहती है कब कैसे और उन्हें क्यों नहीं बताया?

वसु; दीदी: बात बहुत जल्दी हो गया. उन दोनों की तबियत एकदम बहुत ज़्यादा खराब हो गयी और डॉक्टर्स ने कहा तो की वो दोनों १- २ दिन के मेहमान ही है. इन सब में जब हम वहां घर पहुंचे तो हालत बहुत बिगड़ गयी थी.

लता: सुनकर बहुत दुःख हुआ. वसु, अब बाकी घर वाले कैसे है? मैं जल्दी ही समय निकल कर आती हूँ.

वसु: ठीक है जब भी समय मिलेगा तो आ जाना. हमें भी अच्छा लगेगा. वैसे एक और बात बतानी थी.

लता: अब और क्या?

वसु: थोड़ा झिझकते हुए... बात ये है की जब माँ बाबा अपने अंत के बहुत नज़दीक थे तो उन्होंने इक इच्छा ज़ाहिर की थी.

लता: क्या?

वसु: यही की वो जाने से पहले निशा की शादी देखना चाहते थे. और जैसे आपको पता है निशा और दिनेश की हम शादी अगले महीने ही करने वाले थे. लेकिन इन सब के चलते हमने उन दोनों की शादी माँ बाबा के सामने जल्दी कर दी. बस यही उनकी आखरी इच्छा थी (वो दूसरी इच्छा बताती नहीं है लता को... मीना के बारे में). वो लोग भी निशा की शादी देख कर बहुत खुश हो गए और फिर वो भी भगवान् के घर चले गए.

लता: हम्म...दुःख तो बहुत हुआ लेकिन अच्छा किया की उनकी आखरी इच्छा पूरी कर दी. मैं जल्दी ही वहां आती हूँ और फिर सब से मिल भी लेती हूँ.

वसु: जी... ज़रूर आईये... हम सब को आपके आने का इंतज़ार रहेगा और फिर ऐसे ही कुछ और बातें कर के वसु फ़ोन कट कर देती है.


दिनेश की दिल की बात...

दीपू ऑफिस जाता है और फिर दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और फिर उससे गले लग जाता है.

दीपू: यार तू तो जानता है की हालत कैसे थे. बस नाना नानी की आखरी इच्छा थी... इसीलिए जल्दी ही तुम्हारी शादी कर दी नहीं तो हम सब तुम दोनों की शादी बहुत धूम धाम से करना चाहते थे.

दिनेश: हाँ मैं भी जानता हूँ. माँ भी कह रही थी की वो भी मेरी शादी ऐसे ही करना चाहती थी लेकिन क्या करे. लेकिन कोई दुःख नहीं. उनके चेहरे पे वो ख़ुशी देख कर जब हम दोनों की शादी हो गयी थी तो हमें भी काफी अच्छा लगा.

दीपू ये बात सुनकर फिर से दिनेश से गले लग जाता है.

दिनेश: तू चिंता मत कर. अगले हफ्ते में घर में पार्टी रखता हूँ... सब के लिए. तुम लोग भी सब आना. निशा को भी बहुत अच्छा लगेगा.

दीपू: ज़रूर आएंगे.. वैसे निशा कैसी है? कोई तकलीफ तो नहीं दे रही है ना तुझे और हस देता है.

दिनेश: वो कैसी है देखना है तो आज शाम घर चल... तू ही देख ले.

दीपू: नहीं यार उसकी ज़रुरत नहीं है. हम अगले हफ्ते आने ही वाले है ना तो तब उससे मिल लेंगे.

दोनों फिर अपने काम में लग जाते है. कुछ समय बाद दीपू को याद आता है तो वो दिनेश से कहता है.

दीपू: अरे यार जब तू होली में बहार गया था तो तूने मुझे फ़ोन कर के बताया था की तुझे मुझसे कुछ बात करनी है. दिनेश को वो बात याद आती है तो कहता है... सुन चल हम बाहर कहीं जाते है और वहीँ तुझसे बात करता हूँ. दीपू दिनेश की तरफ सवालिया नज़र से देखता है तो दिनेश कुछ नहीं कहता और कहता ही की वो लोग बाद में बात करेंगे.

फिर दोनों दोपहर को खाना खा कर बाहर चले जाते है. गाँव से थोड़ा दूर वो दोनों एक अच्छे जगे में जाते है और वहां बातें करने के लिए बैठ जाते है.

दीपू: तो बता तू मुझसे क्या बात करना छा रहा था.

दिनेश भी थोड़ा झिझकता है और उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो बात को कैसे आगे बढाए.

दीपू उसकी और देख कर कहता है.. यार हम दोनों बचपन के दोस्त है और अब तो तू मेरा जीजा भी हो गया है तो मुझे कैसे शर्माना. जो भी हो बोल दे... क्या पता शायद मैं तेरी मदत कर दूँ.

दिनेश: फिर से थोड़ा हिचखिचाते हुए.. यार मैं सोच रहा तह की तूने कैसे २ शादियां कर ली है? वो भी अपने माँ और मौसी से?

दीपू ये बात सुनकर हस देता है और कहता है... लगता है तुझे अब और बात बताना पड़ेगा.

दिनेश दीपू की तरफ देख कर: क्या?

दीपू: यही की मेरी तीसरी शादी भी हो गयी है और ये बात निशा को भी पता है.

दिनेश: जब ये बात सुनता है तो वो अपना मुँह खोले आश्चर्य से दीपू को देखता रह जाता है.

दीपू: ज़्यादा सोच मत.. शायद ये मेरी ज़िन्दगी में लिखा था.

दिनेश: अपने आप को थोड़ा संभालते हुए.. वैसे तीसरी बीवी कौन है?

दीपू भी थोड़ा शर्माते हुए: वो मेरी मामी की मम्मी है. मैं ज़्यादा कुछ नहीं बताऊंगा.. लेकिन जो होना था वो हो गया.. अब मैं उसे बदल नहीं सकता. खैर मेरी छोड़. तू बता तू क्या कहना छा रहा था.

दिनेश: मेरी भी कुछ ऐसी ही समस्या है भाई.

दीपू: क्या समस्या है?

दिनेश: जब हम होली में गए थे तब पहली बार मुझे मेरी माँ पे ध्यान आया और मुझे भी लगा की वो भी थोड़ी बहुत एक आदमी को अपनी ज़िन्दगी में मिस करती है और शायद चाहती है की उसको भी एक आदमी का सहारा मिल जाए तो बहुत अच्छा होगा उसके लिए.

दीपू: अरे ये तो बहुत अच्छी बात है यार... तू भी सही कह रहा है. आंटी की उम्र भी मेरी माँ जितनी है और मैं जानता हूँ की जब से मेरी माँ से शादी हुई है वो कितनी बदल गयी है और अब वो बहुत खुश भी है. तू सही कह रहा है. अगर आंटी फिर से शादी कर ले तो उनकी ज़िन्दगी भी खुशाल हो जायेगी.

दिनेश: तेरी बात भी सही है... लेकिन मैं सोच रहा था की कौन उससे अभी शादी करेगा... और फिर मुझे तेरी याद आयी की वसु आंटी को तुझसे कोई बेहतर आदमी नहीं मिल सकता है तो यही बात माँ पे भी बन सकता है.... और ऐसा कहते हुए दिनेश रुक जाता है.

दोपहर की थोड़ी ठण्डी हवा में ये बात एकदम हवे में ही रह जाती है. पहले तो दीपू को समझ नहीं आता की दिनेश क्या कहना चाहता है.... लेकिन जल्दी ही वो बात समझ जाता है और कहता है... तो जनाब ये बात है.. तू भी मेरी तरह आंटी से शादी करना चाहता है ना... बोल मेरी सोच सही है ना?

दिनेश भी थोड़ा शर्माते हुए हाँ कहता है.

दिनेश: तू क्या सोचता है इसके बारे में?

दीपू: वैसे तेरी बात भी सही है. आंटी के लिए तेरे से अच्छा और कोई लड़का नहीं मिल सकता.

दीपू: सुन भाई... मैं तुझे इतना ही कहूंगा की अगर आंटी राज़ी हो जाए और वो भी बिना किसीके दबाव में और वो खुद कहे ही वो भी तेरे से शादी करने के लिए तैयार है तो बात आगे बढ़ा. लेकिन उससे पहले में यह कहुंगा की तू आंटी से बात करने से पहले निशा से बात कर ले क्यूंकि याद रख. वो तेरी पहली बीवी है. उसके पीछे तू उसे बिना बातये आंटी से बात करेगा तो उसे बड़ा झटका लगेगा और वो अगर नहीं मानी तो फिर बहुत पन्गा हो जाएगा.

(दीपू दिनेश को आंटी के साथ शादी नहीं करने की सलाह नहीं दे सकता था क्यूंकि वो खुद ही तीन शादी किया और वो भी खुद अपनी माँ और रिश्तेदार के साथ)

दिनेश: तू सही कह रहा है यार. निशा से पहले बात करना पड़ेगा और जानना पागेगा की वो क्या सोचेगी इसके बारे में. वैसे मैं सोच रहा था की अगले हफ्ते हम हनीमून जाने का प्लान कर रहे है तो मैं उसे उसी वक़्त इस बात के बारे में बात करता हूँ.

दीपू: हाँ ये सही रहेगा. अगर वो मानती नहीं है तो एक बार मुझे भी बताना. मैं उससे बात करता हूँ. वो मेरी बात कभी नहीं टालती... लेकिन अगर बात यहाँ तक ना आये और वो खुद भी मान जाए तो बहुत अच्छा होगा.

दिनेश: हाँ यार तू सही कह रहा है.

दीपू: लेकिन एक बात याद रख.. आंटी तो तू कैसे मनाएगा वो तुझ पर निर्भर करता है लेकिन कोई ज़ोर ज़बरदस्ती मत करना. अगर वो तेरे दबाव में आकर शादी कर ले तो आगे जा कर बहुत मुश्किल होगा और सब की ज़िन्दगी में परेशानी भी आ सकती है.

दिनेश: तू सही कह रहा है. देखता हूँ की मैं माँ को कैसे मनाऊं. लेकिन उससे पहले मुझे निशा से बात करनी पड़ेगी.

फिर वो दोनों ऐसे ही कुछ और बातें करते है और फिर वहां से ऑफिस के लिए निकल जाते है और शाम को दोनों अपने अपने घर चले जाते है.

यहाँ जब दिनेश और दीपू बात कर रहे होते है तो वहीँ दीपू के घर में तीनो आँगन में बैठे हुए थे.


तीनो की छेड़ छाड़ ....

दिव्या: आज शायद पहली बात इस घर में और कोई नहीं है. पिछले हफ्ते तक तो निशा और मीना भी रहते थे... लेकिन अब घर में हम ही रह गए है.

कविता: हाँ तू सही कह रही है. वैसे तेरे कहना का क्या मतलब है?

दिव्या: यही सोच रही हूँ की दीपू आज हम तीनो के साथ क्या करेगा और यही सोचते हुए में पूरी गीली हो रही हूँ. मेरी पैंटी पूरी गीली हो गयी थी तो अब मैं उसे उतार भी चुकी हूँ.

वसु: तेरे को तो बड़ी ठरक छड़ी हुई है..

दिव्या: क्यों दीदी आप नहीं हो क्या? और ऐसा कहते हुए दिव्या वसु की एक चूची को पकड़ कर मसलते हुए दबा देती है और देखती है की उसके निप्पल्स ब्लाउज में से एकदम तनी हुई है. आप मुझसे कह रहे हो लेकिन आप खुद ही उत्तेजित हो और कविता की तरफ देख कर: देखो कैसे इनके निप्पल्स एकदम तने हुए है.

वसु: चुप कर.. तू कुछ भी बकवास करती रहती है. ये दोनों को देख कर कविता वसु के पास आकर कहती है... तुम्हारी पैंटी भी पूरी गीली है क्या और ऐसा कहते हुए कविता अपना हाथ वसु के साडी के अंदर दाल कर उसकी चूत को छूती है तो अपना हाथ निकल कर बड़ी आँखें करती हुई.. ओह रे...

तू तू हम सब से भी आगे है और अपना गीला हाथ दिव्या को दिखा कर अपनी ऊँगली को चाटते हुए... इसने तो पैंटी पहनी ही नहीं है और देख कैसी इसका रस बह रहा है और कहती है... ये तो बहुत स्वादिष्ट है और फिर से ऊँगली चाट लेती है.

वसु ये देख कर एकदम शर्मा जाती है और आँगन से कमरे में जाने को उठती है तो दिव्या उसे रोक लेती है और वही दीवान में उसे सुला कर... क्यों भाग रही हो दीदी? मेरी पैंटी गीली है तो मैं ठरकी.. तो फिर तुम क्या हो?

वसु शर्मा कर कुछ नहीं कहती तो कविता उसके बगल में बैठ कर उसके होंठ चूमते हुए कहती है.. तू ठरकी है तो ये तो एकदम पूरी चुदासी हो गयी है और फिर तीनो हस देते है.

वसु कविता से: हम दोनों ठरकी और चुदासी है तो हम दोनों से आगे ही बढ़ चुकी है और उसकी गांड को चिमटी काटते हुए.. हम तो यहाँ से कुंवारे है.. तूने तो अपनी गांड भी मरवा ली है.

कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. चिंता मत करो.. जल्दी ही तुम दोनों की गांड का उद्धघाटन जल्दी ही होने वाला है. वो तो गांड का बड़ा दीवाना है और मुझे तो आश्चर्य है की तुम जैसी मस्त बड़ी गांड वाली कैसे अब तक बच गयी.. इस बात पे तीनो हस देते है और ऐसे ही कामुक बातों से तीनो भी गरम हो जाते है लेकिन इससे ज़्यादा वो और कुछ नहीं करते और कमरे में जाकर तीनो ही एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.


दिनेश के घर में पार्टी:

२- ३ दिन बात जैसे ऋतू और दिनेश ने बताया था... वो अपने घर में एक छोटा सा पार्टी रखते है और अपने ऑफिस के कुछ काम करने वाले लोगों को भी बुलाते है. जब दीपू वसु और बाकी लोग उनके घर जाते है तो तीनो पहले ही उनका इंतज़ार कर रहे थे. जहाँ दिनेश कुरता और पयजामा पहन कर स्मार्ट लग रहा था वहीँ निशा और ऋतू भी सज धज कर एकदम सेक्सी लग रही थी.

9dd89b7c5bcd856214024746aaf13a2b.jpg


0-A-Saree31.jpg


IMG-8301.jpg


उन दोनों को देख कर पहली बार दीपू भी डगमगा जाता है क्यूंकि वो दोनों उतनी कामुक और सेक्सी लग रही थी.

वहीँ वसु, दिव्या और कविता भी एकदम मस्त माल लग रही थी. सब ने कपडे ऐसे पहने थे जो छुपा काम रहे थे और दिखा ज़्यादा रहे थे.

6d728c8f79bd6259dbb63d8af986d568.jpg


Teej-0c587a561f244b0481fa68f76e0625f3.jpg


Teej-93e1baf93eb4da92bdcf6a1d50b2e214.jpg


वसु निशा को देख कर एकदम खुश हो जाती है और जाकर उसके गले लग जाती है. निशा भी अपनी माँ को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वैसे ही हाल दोनों दिव्या और कविता का भी था. ऑफिस के कुछ लोग जो आए थे उनमें से १- २ लोग तो वहां की महिलाओं को देख कर अपना लार टपका रहे थे... लेकिन बात वहीँ तक रह जाती है. दीपू भी निशा और दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और जाकर निशा को भी अपनी बाहों में लेकर उसके हाल चाल पूछता है. निशा एकदम खुश नज़र आ रही थी...

(और खुश भी क्यों ना हो.. जब से वो इस घर में आयी है रोज़ दिनेश और निशा रात को मस्त चुदाई करते है और दिनेश तो उसे पूरा थका ही देता है. उसका पूरा चेहरा खिल खिला सा लग रहा था)

दीपू भी दिनेश से गले लगता है और उसे फिर से बधाई देता है.

और ऐसे ही दीपू ऋतू आंटी को भी बधाई देता है और उसके गले भी लग जाता है. गले लगने से ऋतू ही मस्त ठोस चूची भी दीपू के सीने में दब जाती है और आज पहली बार ऐसा होता ही जब उसे उसके और दिनेश की बात याद आती है की वो भी उसकी माँ की तरह अपने जवानी के उत्तम समय में है. वो मन में सोचता है की दिनेश सही कह रहा है की उसे भी एक मर्द की ज़रुरत है और सोचता है की बिस्तर पे वो नंगी कैसे होगी. (जैसा ऊपर में लिखा था... आज वो पहली बार था जब दीपू ऋतू को देख कर उसे ऐसे ख़याल आते है. इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. ये और बात थी की कुछ दिन पहले ही दिनेश और दीपु ने ऋतू के बारे में बात किया था.)… लेकिन फिर वो सब बातें अपने ध्यान से हटा देता है की वो गलत सोच रहा है. वो उसकी दोस्त की माँ है और उसकी बहिन की सास. तो ऐसा सोचना अच्छा नहीं रहेगा… लेकिन आगे कब क्या और कैसे होने वाला है ये किसी को पता नहीं था….

सब लोग उनसे मिलने आते है और उनको बधाई देकर खाना खा कर चले जाते है... लेकिन उनमें से १- २ ऐसे थे जो दिनेश और दीपू को घूरे जा रहे थे. दीपू की नज़र उनपर एक बार पड़ती है तो उसे कुछ ठीक नहीं लगता जैसे शायद कोई अनहोनी होने वाली हो लेकिन इस वक़्त वो ज़्यादा ध्यान नहीं देता क्यूंकि सब ख़ुशी के मूड में थे और सब लोग हस कर अपना वक़्त बिता रहे थे.

ऑफिस के सब लोग चले जाने के बाद सिर्फ घर वाले ही रह जाते है और सब के जाने के बाद जब ऋतू की नज़र कविता पे जाती है तो पूछती है की ये कौन है. (ऋतू को कविता के बारे में पता नहीं था. उसे सिर्फ वसु और दिव्या के बारे में ही पता था).

अब समय आ गया था जब दीपू को ऋतू को अपनी तीसरी शादी की बात बतानी थी. उसकी किस्मत अच्छी थी की उसने दिनेश को पहले ही ये खबर दी थी वरना और मुश्किल हो जाता. जब ऋतू कविता के बारे में पूछती है तो वसु और दिव्या दोनों एक दुसरे की तरफ देख कर कुछ नहीं कह पा रहे थे तो वहीँ दीपू भी सोच रहा था की क्या बोले और वो दिनेश की तरफ देखता है.

दिनेश को समझ आता है की बात को उसे ही संभालना है तो दिनेश कहता है: माँ ये और कोई नहीं दिनेश की तीसरी बीवी है. नाम कविता है .उनकी शादी भी मेरी तरह ही ऐसे हालत में हुई की इन्हे समय ही नहीं मिला की हमें बताएं. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा आश्चर्य हो जाती है लेकिन अपने आप को संभालते हुए वो कविता को उसके पास बुला कर उसके माथे पे प्यार से एक चुम्मा देकर उसे आशीर्वाद देती है. जब ऋतू ऐसा करती है तो सब की जान में जान आती है और दीपू दिनेश को और देख कर एक तरह से उसे धन्यवाद देता है.

ऋतू दीपू की और देख कर... तुम और कितने ऐसे सुरपरिसेस दोगे? और मज़ाक में कहती है की दो काफी नहीं थे क्या.. जो तुमने तीसरी शादी कर ली है. इस बात पर दीपू और वसु कुछ नहीं कहते क्यूंकि उनको पता था आगे और कुछ भी संभव हो सकता है.

ऋतू: वैसे तुम्हारी तीसरी बीवी भी बहुत सुन्दर है और फिर ऐसे ही सब मज़ाक और बातें करते हुए खाना खाते है. खाना खाते वक़्त दीपू चोर नज़रों से अपनी बीवियों को देख रहा था क्यूंकि सब लोग सेक्सी दिख रहे थे और ऋतू की बात से उसे भी ठरकी बना दिया था.

सबसे पहले कविता खाना ख़तम करती है और फिर जब सब बातें करते हुए अपने खाने में मगन थे तो वो कहती है की वो अपना प्लेट किचन में रख के आ जायेगी. ऋतू मना करती है की उसकी कोई ज़रुरत नहीं है. यहीं पे बैठी रहो. जब सब का हो जाएगा तो एक साथ टेबल साफ़ कर देंगे. लेकिन कविता नहीं मानती और वो उठ कर अपनी गांड मटकाते हुए किचन में चली जाती है.

64f0185fcd43457b8ae9841674343ec0.gif


उसको देख कर दीपू भी अपना खाना ख़तम कर लेता है और कविता के पीछे चला जाता है. ऋतू से बात करते हुए वसु एक तिरछी नज़र दीपू पे डालती है और मन में सोचती है की कविता तो गयी.... और फिर नार्मल तरीके से बाकी सब से बात करती रहती है. किचन में कविता अपना प्लेट रख रही होती है तो चुपके से दीपू भी उसके पीछे आ जाता है और उसके साथ अपना हाथ दो कर उसके गले को किस करता है. कविता तो पहले चकमा जाती है और थोड़ा डर भी जाती है लेकिन दीपू को देख कर कहती है की यहाँ क्या कर रहे हो? दूसरों का घर है और कोई भी आ सकता है. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था. वो कविता की मस्त ठोस चूची को दबाते हुए गले को किस करते हुए कहता है...

545c0aa2032d3debfca49d30135f5c9c.gif


तुम आज सब लोग एक से बढ़कर एक माल लग रहे हो. तुम सब एक साथ ऐसे सेक्सी बन कर आओगे तो मेरे बारे में कुछ सोचा नहीं क्या की मेरा क्या होगा? और ऐसे ही उसकी चूची दबाते हुए उसका हाथ अपने लंड पे रखते हुए कहता है... देखो कैसे तन कर तुम्हारी गांड में जाना चाहता है. कविता भी अब बहकने लगती है और कहती है...Pls यहाँ मत करो ना... घर चलो ना... फिर मैं ही तुम्हारे पास आऊँगी और चुदुँगी..

दीपू: वो तो घर की बात है लेकिन पहले मुझे तुम्हारे होंटो का रस चूसने दो...

GIF-20260117-215728-758.gif


और ऐसा कहते हुए वो कविता को दीवार से सत्ता कर उसके होंठ चूसने लग जाता है जिसमें अब कविता भी उसका पूरा साथ देती है.

IMG-20221201-185211.jpg


दीपू उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूचियां भी ब्लाउज के ऊपर से दबाता रहता है. इतने में उन्हें किसीके आने की आहट होती है तो दोनों अलग हो जाते है और फिर अपने आप को ठीक करके पहले दीपू निकल जाता है वहां से और उसके पीछे कविता भी १ Min बाद निकल जाती है.

फिर थोड़ी देर बाद सब लोग खाना खा कर बैठ कर बातें करते रहते है तो वसु सामान लेकर किचन में जाती है रखने. उसके पीछे ऋतू भी आ जाती है और वसु को देखती है तो देखती ही रह जाती है.

IMG-7742.jpg


क्यूंकि उस पोजीशन में वसु की ठोस चूचियां और बहार को निकली हुई गांड एकदम साफ़ नज़र आ रही थी. . उसको देख कर उसके बगल में आकर

ऋतू: १-२ महीनों में तू तो बहुत गदरा गयी है. देख ये तेरी उठी हुई गांड और उसकी गांड पे एक चपत मार देती है.

वसु: oooh….oouucchh…क्या कर रही है? कोई देख लेगा ना.

ऋतू: कोई नहीं देखेगा. सब अपने बातों में मगन है. वैसे भी अभी थोड़ी देर पहले दीपू और कविता को यहाँ आते देखा था तो अब कोई नहीं आएगा. उसको देख कर... लगता है तू तो बहुत मजे कर रही है.

वसु ऋतू से बात सुनकर हस देती है और कहती है.. तू ठीक ही कह रही है. वैसे एक बात पूछूं?

ऋतू: पूछ.

वसु: तू भी तो बहुत गदरायी हुई है और ऐसा कहते हुए एक बार बहार देखते हुए जब वहां कोई नहीं था तो आगे आकर उसकी चूची को दबा देती है. तू इतनी मस्त बदन को लेके कैसे रहती है? तेरी इच्छा नहीं होती क्या?

ऋतू: हाँ सही कह रही है. मैं भी आग में जल रही हूँ. मेरी भी इच्छा होती है लेकिन डरती हूँ की दिनेश क्या सोचेगा.

वसु: अरे इसमें डरने की क्या बात है? अब तो उसकी भी शादी हो गयी है. वो भी अब समझ जाएगा. अगर तेरी नज़र में कोई लड़का है तो बोल मैं बात करती हूँ.. और अगर नहीं है तो मैं ही तेरे लिए ढूढ़ देती हूँ और ऐसा कहते हुए ऋतू को आँख मार देती है. दोनों फिर अपना काम करते है और बाहर आने से पहले वसु ऋतू को दीवार से सटा कर... जाने से पहले तेरी आग और थोड़ा भड़काती हूँ ताकि तू भी जल्दी से मेरी तरह और गदरायी बन जा.. और ऐसा कहते हुए वो ऋतू के होंठ चूम लेती है. ऋतू को तो पहले झटका लगता लेकिन वो भी समझ जाती है और वो भी वापिस वसु को चूम लेती है.

porn-gif-magazine-teensex201439.gif


२ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अपने आप को ठीक कर के बाहर आ जाते है और बाकी सब के साथ बात करने लग जाते है.

बाहर जाने से पहले..

ऋतू: वैसे तू मुझे खुश खबर कब दे रही है?

वसु: पता नहीं यार.. दीपू तो हमेशा कहते रहता है की वो भी जल्दी बाप बने.. लेकिन मैं ही मना करती रहती हूँ.

ऋतू: मेरी बात मान तो तू भी जल्दी पेट से हो जा.. अब तेरी उम्र भी हो रही है. अगर और देर हो गया तो फिर मुश्किल भी हो सकता है. वैसे तू खुश तो है ना?

वसु: हाँ यार बहुत खुश हूँ. वो तो मुझे बहुत खुश रकता है. और उसके प्यार करने का तरीका भी बहुत मस्त है.

वो तो उसके बाप से भी एक कदम बढ़ कर है. मुझे तो पूरी तरह थका ही देता है लेकिन वो फिर भी नहीं रुकता. मेरी तो किस्मत अच्छी है की जब मैं थक जाती हूँ तो दिव्या और कविता उस पर टूट पड़ते है तो मुझे थोड़ी राहत मिलती है.

उसके बारे में सोचते हुए ही मैं तो बहुत बार गीली भी हो जाती हूँ.

ऋतू: अरे वाह... तुम सब के तो बड़े मजे हो रहे है फिर . ये तो बहुत अच्छी बात है. जल्दी से अब काम में लग जा और जब हम अगली बार मिलेंगे तो मुझे तुझ से खुश खबर सुन्ना है और फिर से इस बार ऋतू वसु को चूम लेती है और दोनों बाहर आ जाते है.

फिर सब लोग १०- १५ Min और बातें करते है और फिर वसु और बाकी सब भी ऋतू और दिनेश से इज़ाज़त लेते है और अपने घर की और निकल जाते है... दोनों परिवार अपने अपने ख्यालों के बारे में सोचते रहते है... वसु जो कुछ देर पहले ऋतू से बात की थी... और दिनेश जो २- ३ दिन पहले दीपू से अपने मन की बात किया था...
Fabulous update waiting for next
 
  • Like
Reactions: Napster

Mass

Well-Known Member
12,400
26,280
259
New Update posted on Pg 278. Pls read, like and comment. Look forward to your comments.

Rider07
 
  • Like
Reactions: Napster

Mass

Well-Known Member
12,400
26,280
259
New Update posted on Pg 278. Pls read, like and comment. Look forward to your comments.

ayush01111
 

parkas

Well-Known Member
33,379
70,991
303
28th Update (दिनेश की दिल की बात और पार्टी)

दिनेश: जान ये भी कोई पूछने वाली बात है? और फिर दिनेश निशा को अपनी बाहों में लेकर दोनों सुकून की नींद मं चले जाते है.


अब आगे..

अगली सुबह सब अपने काम में लग जाते है और फिर दीपू भी तैयार हो जाता है और जाने से पहले तीनो को मस्त चूमता है और साथ में गांड भी दबाते हुए अपने काम के लिए निकल जाता है.

वसु अपना काम कर रही थी तो उसे कुछ याद आता है और फिर वो दीपू की बुआ लता को फ़ोन करती है.

वसु लता से: दीदी कैसी हो?

लता: क्या बात है... इतने दिनों बाद हम तुम्हे याद आये? मुझे लगा तुम हम सब को भूल ही गए हो. लगता है शादी के बाद बहुत मजे ले रही हो.

वसु: ऐसा नहीं है दीदी... काम में सब उलझ गए थे और दीपू का बिज़नेस भी बढ़ रहा है तो वो भी बिजी रहता है. वैसे आपसे एक बात बताना था.

लता उसको छेड़ते हुए: कोई खुश खबर है क्या?

वसु ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. बात वो नहीं है.

लता: तो फिर क्या है?

वसु: यही की माँ बाबा गुज़र गए है.

लता ये सुनके एकदम शॉक हो जाती है और कहती है कब कैसे और उन्हें क्यों नहीं बताया?

वसु; दीदी: बात बहुत जल्दी हो गया. उन दोनों की तबियत एकदम बहुत ज़्यादा खराब हो गयी और डॉक्टर्स ने कहा तो की वो दोनों १- २ दिन के मेहमान ही है. इन सब में जब हम वहां घर पहुंचे तो हालत बहुत बिगड़ गयी थी.

लता: सुनकर बहुत दुःख हुआ. वसु, अब बाकी घर वाले कैसे है? मैं जल्दी ही समय निकल कर आती हूँ.

वसु: ठीक है जब भी समय मिलेगा तो आ जाना. हमें भी अच्छा लगेगा. वैसे एक और बात बतानी थी.

लता: अब और क्या?

वसु: थोड़ा झिझकते हुए... बात ये है की जब माँ बाबा अपने अंत के बहुत नज़दीक थे तो उन्होंने इक इच्छा ज़ाहिर की थी.

लता: क्या?

वसु: यही की वो जाने से पहले निशा की शादी देखना चाहते थे. और जैसे आपको पता है निशा और दिनेश की हम शादी अगले महीने ही करने वाले थे. लेकिन इन सब के चलते हमने उन दोनों की शादी माँ बाबा के सामने जल्दी कर दी. बस यही उनकी आखरी इच्छा थी (वो दूसरी इच्छा बताती नहीं है लता को... मीना के बारे में). वो लोग भी निशा की शादी देख कर बहुत खुश हो गए और फिर वो भी भगवान् के घर चले गए.

लता: हम्म...दुःख तो बहुत हुआ लेकिन अच्छा किया की उनकी आखरी इच्छा पूरी कर दी. मैं जल्दी ही वहां आती हूँ और फिर सब से मिल भी लेती हूँ.

वसु: जी... ज़रूर आईये... हम सब को आपके आने का इंतज़ार रहेगा और फिर ऐसे ही कुछ और बातें कर के वसु फ़ोन कट कर देती है.


दिनेश की दिल की बात...

दीपू ऑफिस जाता है और फिर दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और फिर उससे गले लग जाता है.

दीपू: यार तू तो जानता है की हालत कैसे थे. बस नाना नानी की आखरी इच्छा थी... इसीलिए जल्दी ही तुम्हारी शादी कर दी नहीं तो हम सब तुम दोनों की शादी बहुत धूम धाम से करना चाहते थे.

दिनेश: हाँ मैं भी जानता हूँ. माँ भी कह रही थी की वो भी मेरी शादी ऐसे ही करना चाहती थी लेकिन क्या करे. लेकिन कोई दुःख नहीं. उनके चेहरे पे वो ख़ुशी देख कर जब हम दोनों की शादी हो गयी थी तो हमें भी काफी अच्छा लगा.

दीपू ये बात सुनकर फिर से दिनेश से गले लग जाता है.

दिनेश: तू चिंता मत कर. अगले हफ्ते में घर में पार्टी रखता हूँ... सब के लिए. तुम लोग भी सब आना. निशा को भी बहुत अच्छा लगेगा.

दीपू: ज़रूर आएंगे.. वैसे निशा कैसी है? कोई तकलीफ तो नहीं दे रही है ना तुझे और हस देता है.

दिनेश: वो कैसी है देखना है तो आज शाम घर चल... तू ही देख ले.

दीपू: नहीं यार उसकी ज़रुरत नहीं है. हम अगले हफ्ते आने ही वाले है ना तो तब उससे मिल लेंगे.

दोनों फिर अपने काम में लग जाते है. कुछ समय बाद दीपू को याद आता है तो वो दिनेश से कहता है.

दीपू: अरे यार जब तू होली में बहार गया था तो तूने मुझे फ़ोन कर के बताया था की तुझे मुझसे कुछ बात करनी है. दिनेश को वो बात याद आती है तो कहता है... सुन चल हम बाहर कहीं जाते है और वहीँ तुझसे बात करता हूँ. दीपू दिनेश की तरफ सवालिया नज़र से देखता है तो दिनेश कुछ नहीं कहता और कहता ही की वो लोग बाद में बात करेंगे.

फिर दोनों दोपहर को खाना खा कर बाहर चले जाते है. गाँव से थोड़ा दूर वो दोनों एक अच्छे जगे में जाते है और वहां बातें करने के लिए बैठ जाते है.

दीपू: तो बता तू मुझसे क्या बात करना छा रहा था.

दिनेश भी थोड़ा झिझकता है और उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो बात को कैसे आगे बढाए.

दीपू उसकी और देख कर कहता है.. यार हम दोनों बचपन के दोस्त है और अब तो तू मेरा जीजा भी हो गया है तो मुझे कैसे शर्माना. जो भी हो बोल दे... क्या पता शायद मैं तेरी मदत कर दूँ.

दिनेश: फिर से थोड़ा हिचखिचाते हुए.. यार मैं सोच रहा तह की तूने कैसे २ शादियां कर ली है? वो भी अपने माँ और मौसी से?

दीपू ये बात सुनकर हस देता है और कहता है... लगता है तुझे अब और बात बताना पड़ेगा.

दिनेश दीपू की तरफ देख कर: क्या?

दीपू: यही की मेरी तीसरी शादी भी हो गयी है और ये बात निशा को भी पता है.

दिनेश: जब ये बात सुनता है तो वो अपना मुँह खोले आश्चर्य से दीपू को देखता रह जाता है.

दीपू: ज़्यादा सोच मत.. शायद ये मेरी ज़िन्दगी में लिखा था.

दिनेश: अपने आप को थोड़ा संभालते हुए.. वैसे तीसरी बीवी कौन है?

दीपू भी थोड़ा शर्माते हुए: वो मेरी मामी की मम्मी है. मैं ज़्यादा कुछ नहीं बताऊंगा.. लेकिन जो होना था वो हो गया.. अब मैं उसे बदल नहीं सकता. खैर मेरी छोड़. तू बता तू क्या कहना छा रहा था.

दिनेश: मेरी भी कुछ ऐसी ही समस्या है भाई.

दीपू: क्या समस्या है?

दिनेश: जब हम होली में गए थे तब पहली बार मुझे मेरी माँ पे ध्यान आया और मुझे भी लगा की वो भी थोड़ी बहुत एक आदमी को अपनी ज़िन्दगी में मिस करती है और शायद चाहती है की उसको भी एक आदमी का सहारा मिल जाए तो बहुत अच्छा होगा उसके लिए.

दीपू: अरे ये तो बहुत अच्छी बात है यार... तू भी सही कह रहा है. आंटी की उम्र भी मेरी माँ जितनी है और मैं जानता हूँ की जब से मेरी माँ से शादी हुई है वो कितनी बदल गयी है और अब वो बहुत खुश भी है. तू सही कह रहा है. अगर आंटी फिर से शादी कर ले तो उनकी ज़िन्दगी भी खुशाल हो जायेगी.

दिनेश: तेरी बात भी सही है... लेकिन मैं सोच रहा था की कौन उससे अभी शादी करेगा... और फिर मुझे तेरी याद आयी की वसु आंटी को तुझसे कोई बेहतर आदमी नहीं मिल सकता है तो यही बात माँ पे भी बन सकता है.... और ऐसा कहते हुए दिनेश रुक जाता है.

दोपहर की थोड़ी ठण्डी हवा में ये बात एकदम हवे में ही रह जाती है. पहले तो दीपू को समझ नहीं आता की दिनेश क्या कहना चाहता है.... लेकिन जल्दी ही वो बात समझ जाता है और कहता है... तो जनाब ये बात है.. तू भी मेरी तरह आंटी से शादी करना चाहता है ना... बोल मेरी सोच सही है ना?

दिनेश भी थोड़ा शर्माते हुए हाँ कहता है.

दिनेश: तू क्या सोचता है इसके बारे में?

दीपू: वैसे तेरी बात भी सही है. आंटी के लिए तेरे से अच्छा और कोई लड़का नहीं मिल सकता.

दीपू: सुन भाई... मैं तुझे इतना ही कहूंगा की अगर आंटी राज़ी हो जाए और वो भी बिना किसीके दबाव में और वो खुद कहे ही वो भी तेरे से शादी करने के लिए तैयार है तो बात आगे बढ़ा. लेकिन उससे पहले में यह कहुंगा की तू आंटी से बात करने से पहले निशा से बात कर ले क्यूंकि याद रख. वो तेरी पहली बीवी है. उसके पीछे तू उसे बिना बातये आंटी से बात करेगा तो उसे बड़ा झटका लगेगा और वो अगर नहीं मानी तो फिर बहुत पन्गा हो जाएगा.

(दीपू दिनेश को आंटी के साथ शादी नहीं करने की सलाह नहीं दे सकता था क्यूंकि वो खुद ही तीन शादी किया और वो भी खुद अपनी माँ और रिश्तेदार के साथ)

दिनेश: तू सही कह रहा है यार. निशा से पहले बात करना पड़ेगा और जानना पागेगा की वो क्या सोचेगी इसके बारे में. वैसे मैं सोच रहा था की अगले हफ्ते हम हनीमून जाने का प्लान कर रहे है तो मैं उसे उसी वक़्त इस बात के बारे में बात करता हूँ.

दीपू: हाँ ये सही रहेगा. अगर वो मानती नहीं है तो एक बार मुझे भी बताना. मैं उससे बात करता हूँ. वो मेरी बात कभी नहीं टालती... लेकिन अगर बात यहाँ तक ना आये और वो खुद भी मान जाए तो बहुत अच्छा होगा.

दिनेश: हाँ यार तू सही कह रहा है.

दीपू: लेकिन एक बात याद रख.. आंटी तो तू कैसे मनाएगा वो तुझ पर निर्भर करता है लेकिन कोई ज़ोर ज़बरदस्ती मत करना. अगर वो तेरे दबाव में आकर शादी कर ले तो आगे जा कर बहुत मुश्किल होगा और सब की ज़िन्दगी में परेशानी भी आ सकती है.

दिनेश: तू सही कह रहा है. देखता हूँ की मैं माँ को कैसे मनाऊं. लेकिन उससे पहले मुझे निशा से बात करनी पड़ेगी.

फिर वो दोनों ऐसे ही कुछ और बातें करते है और फिर वहां से ऑफिस के लिए निकल जाते है और शाम को दोनों अपने अपने घर चले जाते है.

यहाँ जब दिनेश और दीपू बात कर रहे होते है तो वहीँ दीपू के घर में तीनो आँगन में बैठे हुए थे.


तीनो की छेड़ छाड़ ....

दिव्या: आज शायद पहली बात इस घर में और कोई नहीं है. पिछले हफ्ते तक तो निशा और मीना भी रहते थे... लेकिन अब घर में हम ही रह गए है.

कविता: हाँ तू सही कह रही है. वैसे तेरे कहना का क्या मतलब है?

दिव्या: यही सोच रही हूँ की दीपू आज हम तीनो के साथ क्या करेगा और यही सोचते हुए में पूरी गीली हो रही हूँ. मेरी पैंटी पूरी गीली हो गयी थी तो अब मैं उसे उतार भी चुकी हूँ.

वसु: तेरे को तो बड़ी ठरक छड़ी हुई है..

दिव्या: क्यों दीदी आप नहीं हो क्या? और ऐसा कहते हुए दिव्या वसु की एक चूची को पकड़ कर मसलते हुए दबा देती है और देखती है की उसके निप्पल्स ब्लाउज में से एकदम तनी हुई है. आप मुझसे कह रहे हो लेकिन आप खुद ही उत्तेजित हो और कविता की तरफ देख कर: देखो कैसे इनके निप्पल्स एकदम तने हुए है.

वसु: चुप कर.. तू कुछ भी बकवास करती रहती है. ये दोनों को देख कर कविता वसु के पास आकर कहती है... तुम्हारी पैंटी भी पूरी गीली है क्या और ऐसा कहते हुए कविता अपना हाथ वसु के साडी के अंदर दाल कर उसकी चूत को छूती है तो अपना हाथ निकल कर बड़ी आँखें करती हुई.. ओह रे...

तू तू हम सब से भी आगे है और अपना गीला हाथ दिव्या को दिखा कर अपनी ऊँगली को चाटते हुए... इसने तो पैंटी पहनी ही नहीं है और देख कैसी इसका रस बह रहा है और कहती है... ये तो बहुत स्वादिष्ट है और फिर से ऊँगली चाट लेती है.

वसु ये देख कर एकदम शर्मा जाती है और आँगन से कमरे में जाने को उठती है तो दिव्या उसे रोक लेती है और वही दीवान में उसे सुला कर... क्यों भाग रही हो दीदी? मेरी पैंटी गीली है तो मैं ठरकी.. तो फिर तुम क्या हो?

वसु शर्मा कर कुछ नहीं कहती तो कविता उसके बगल में बैठ कर उसके होंठ चूमते हुए कहती है.. तू ठरकी है तो ये तो एकदम पूरी चुदासी हो गयी है और फिर तीनो हस देते है.

वसु कविता से: हम दोनों ठरकी और चुदासी है तो हम दोनों से आगे ही बढ़ चुकी है और उसकी गांड को चिमटी काटते हुए.. हम तो यहाँ से कुंवारे है.. तूने तो अपनी गांड भी मरवा ली है.

कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. चिंता मत करो.. जल्दी ही तुम दोनों की गांड का उद्धघाटन जल्दी ही होने वाला है. वो तो गांड का बड़ा दीवाना है और मुझे तो आश्चर्य है की तुम जैसी मस्त बड़ी गांड वाली कैसे अब तक बच गयी.. इस बात पे तीनो हस देते है और ऐसे ही कामुक बातों से तीनो भी गरम हो जाते है लेकिन इससे ज़्यादा वो और कुछ नहीं करते और कमरे में जाकर तीनो ही एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.


दिनेश के घर में पार्टी:

२- ३ दिन बात जैसे ऋतू और दिनेश ने बताया था... वो अपने घर में एक छोटा सा पार्टी रखते है और अपने ऑफिस के कुछ काम करने वाले लोगों को भी बुलाते है. जब दीपू वसु और बाकी लोग उनके घर जाते है तो तीनो पहले ही उनका इंतज़ार कर रहे थे. जहाँ दिनेश कुरता और पयजामा पहन कर स्मार्ट लग रहा था वहीँ निशा और ऋतू भी सज धज कर एकदम सेक्सी लग रही थी.

9dd89b7c5bcd856214024746aaf13a2b.jpg


0-A-Saree31.jpg


IMG-8301.jpg


उन दोनों को देख कर पहली बार दीपू भी डगमगा जाता है क्यूंकि वो दोनों उतनी कामुक और सेक्सी लग रही थी.

वहीँ वसु, दिव्या और कविता भी एकदम मस्त माल लग रही थी. सब ने कपडे ऐसे पहने थे जो छुपा काम रहे थे और दिखा ज़्यादा रहे थे.

6d728c8f79bd6259dbb63d8af986d568.jpg


Teej-0c587a561f244b0481fa68f76e0625f3.jpg


Teej-93e1baf93eb4da92bdcf6a1d50b2e214.jpg


वसु निशा को देख कर एकदम खुश हो जाती है और जाकर उसके गले लग जाती है. निशा भी अपनी माँ को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वैसे ही हाल दोनों दिव्या और कविता का भी था. ऑफिस के कुछ लोग जो आए थे उनमें से १- २ लोग तो वहां की महिलाओं को देख कर अपना लार टपका रहे थे... लेकिन बात वहीँ तक रह जाती है. दीपू भी निशा और दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और जाकर निशा को भी अपनी बाहों में लेकर उसके हाल चाल पूछता है. निशा एकदम खुश नज़र आ रही थी...

(और खुश भी क्यों ना हो.. जब से वो इस घर में आयी है रोज़ दिनेश और निशा रात को मस्त चुदाई करते है और दिनेश तो उसे पूरा थका ही देता है. उसका पूरा चेहरा खिल खिला सा लग रहा था)

दीपू भी दिनेश से गले लगता है और उसे फिर से बधाई देता है.

और ऐसे ही दीपू ऋतू आंटी को भी बधाई देता है और उसके गले भी लग जाता है. गले लगने से ऋतू ही मस्त ठोस चूची भी दीपू के सीने में दब जाती है और आज पहली बार ऐसा होता ही जब उसे उसके और दिनेश की बात याद आती है की वो भी उसकी माँ की तरह अपने जवानी के उत्तम समय में है. वो मन में सोचता है की दिनेश सही कह रहा है की उसे भी एक मर्द की ज़रुरत है और सोचता है की बिस्तर पे वो नंगी कैसे होगी. (जैसा ऊपर में लिखा था... आज वो पहली बार था जब दीपू ऋतू को देख कर उसे ऐसे ख़याल आते है. इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. ये और बात थी की कुछ दिन पहले ही दिनेश और दीपु ने ऋतू के बारे में बात किया था.)… लेकिन फिर वो सब बातें अपने ध्यान से हटा देता है की वो गलत सोच रहा है. वो उसकी दोस्त की माँ है और उसकी बहिन की सास. तो ऐसा सोचना अच्छा नहीं रहेगा… लेकिन आगे कब क्या और कैसे होने वाला है ये किसी को पता नहीं था….

सब लोग उनसे मिलने आते है और उनको बधाई देकर खाना खा कर चले जाते है... लेकिन उनमें से १- २ ऐसे थे जो दिनेश और दीपू को घूरे जा रहे थे. दीपू की नज़र उनपर एक बार पड़ती है तो उसे कुछ ठीक नहीं लगता जैसे शायद कोई अनहोनी होने वाली हो लेकिन इस वक़्त वो ज़्यादा ध्यान नहीं देता क्यूंकि सब ख़ुशी के मूड में थे और सब लोग हस कर अपना वक़्त बिता रहे थे.

ऑफिस के सब लोग चले जाने के बाद सिर्फ घर वाले ही रह जाते है और सब के जाने के बाद जब ऋतू की नज़र कविता पे जाती है तो पूछती है की ये कौन है. (ऋतू को कविता के बारे में पता नहीं था. उसे सिर्फ वसु और दिव्या के बारे में ही पता था).

अब समय आ गया था जब दीपू को ऋतू को अपनी तीसरी शादी की बात बतानी थी. उसकी किस्मत अच्छी थी की उसने दिनेश को पहले ही ये खबर दी थी वरना और मुश्किल हो जाता. जब ऋतू कविता के बारे में पूछती है तो वसु और दिव्या दोनों एक दुसरे की तरफ देख कर कुछ नहीं कह पा रहे थे तो वहीँ दीपू भी सोच रहा था की क्या बोले और वो दिनेश की तरफ देखता है.

दिनेश को समझ आता है की बात को उसे ही संभालना है तो दिनेश कहता है: माँ ये और कोई नहीं दिनेश की तीसरी बीवी है. नाम कविता है .उनकी शादी भी मेरी तरह ही ऐसे हालत में हुई की इन्हे समय ही नहीं मिला की हमें बताएं. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा आश्चर्य हो जाती है लेकिन अपने आप को संभालते हुए वो कविता को उसके पास बुला कर उसके माथे पे प्यार से एक चुम्मा देकर उसे आशीर्वाद देती है. जब ऋतू ऐसा करती है तो सब की जान में जान आती है और दीपू दिनेश को और देख कर एक तरह से उसे धन्यवाद देता है.

ऋतू दीपू की और देख कर... तुम और कितने ऐसे सुरपरिसेस दोगे? और मज़ाक में कहती है की दो काफी नहीं थे क्या.. जो तुमने तीसरी शादी कर ली है. इस बात पर दीपू और वसु कुछ नहीं कहते क्यूंकि उनको पता था आगे और कुछ भी संभव हो सकता है.

ऋतू: वैसे तुम्हारी तीसरी बीवी भी बहुत सुन्दर है और फिर ऐसे ही सब मज़ाक और बातें करते हुए खाना खाते है. खाना खाते वक़्त दीपू चोर नज़रों से अपनी बीवियों को देख रहा था क्यूंकि सब लोग सेक्सी दिख रहे थे और ऋतू की बात से उसे भी ठरकी बना दिया था.

सबसे पहले कविता खाना ख़तम करती है और फिर जब सब बातें करते हुए अपने खाने में मगन थे तो वो कहती है की वो अपना प्लेट किचन में रख के आ जायेगी. ऋतू मना करती है की उसकी कोई ज़रुरत नहीं है. यहीं पे बैठी रहो. जब सब का हो जाएगा तो एक साथ टेबल साफ़ कर देंगे. लेकिन कविता नहीं मानती और वो उठ कर अपनी गांड मटकाते हुए किचन में चली जाती है.

64f0185fcd43457b8ae9841674343ec0.gif


उसको देख कर दीपू भी अपना खाना ख़तम कर लेता है और कविता के पीछे चला जाता है. ऋतू से बात करते हुए वसु एक तिरछी नज़र दीपू पे डालती है और मन में सोचती है की कविता तो गयी.... और फिर नार्मल तरीके से बाकी सब से बात करती रहती है. किचन में कविता अपना प्लेट रख रही होती है तो चुपके से दीपू भी उसके पीछे आ जाता है और उसके साथ अपना हाथ दो कर उसके गले को किस करता है. कविता तो पहले चकमा जाती है और थोड़ा डर भी जाती है लेकिन दीपू को देख कर कहती है की यहाँ क्या कर रहे हो? दूसरों का घर है और कोई भी आ सकता है. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था. वो कविता की मस्त ठोस चूची को दबाते हुए गले को किस करते हुए कहता है...

545c0aa2032d3debfca49d30135f5c9c.gif


तुम आज सब लोग एक से बढ़कर एक माल लग रहे हो. तुम सब एक साथ ऐसे सेक्सी बन कर आओगे तो मेरे बारे में कुछ सोचा नहीं क्या की मेरा क्या होगा? और ऐसे ही उसकी चूची दबाते हुए उसका हाथ अपने लंड पे रखते हुए कहता है... देखो कैसे तन कर तुम्हारी गांड में जाना चाहता है. कविता भी अब बहकने लगती है और कहती है...Pls यहाँ मत करो ना... घर चलो ना... फिर मैं ही तुम्हारे पास आऊँगी और चुदुँगी..

दीपू: वो तो घर की बात है लेकिन पहले मुझे तुम्हारे होंटो का रस चूसने दो...

GIF-20260117-215728-758.gif


और ऐसा कहते हुए वो कविता को दीवार से सत्ता कर उसके होंठ चूसने लग जाता है जिसमें अब कविता भी उसका पूरा साथ देती है.

IMG-20221201-185211.jpg


दीपू उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूचियां भी ब्लाउज के ऊपर से दबाता रहता है. इतने में उन्हें किसीके आने की आहट होती है तो दोनों अलग हो जाते है और फिर अपने आप को ठीक करके पहले दीपू निकल जाता है वहां से और उसके पीछे कविता भी १ Min बाद निकल जाती है.

फिर थोड़ी देर बाद सब लोग खाना खा कर बैठ कर बातें करते रहते है तो वसु सामान लेकर किचन में जाती है रखने. उसके पीछे ऋतू भी आ जाती है और वसु को देखती है तो देखती ही रह जाती है.

IMG-7742.jpg


क्यूंकि उस पोजीशन में वसु की ठोस चूचियां और बहार को निकली हुई गांड एकदम साफ़ नज़र आ रही थी. . उसको देख कर उसके बगल में आकर

ऋतू: १-२ महीनों में तू तो बहुत गदरा गयी है. देख ये तेरी उठी हुई गांड और उसकी गांड पे एक चपत मार देती है.

वसु: oooh….oouucchh…क्या कर रही है? कोई देख लेगा ना.

ऋतू: कोई नहीं देखेगा. सब अपने बातों में मगन है. वैसे भी अभी थोड़ी देर पहले दीपू और कविता को यहाँ आते देखा था तो अब कोई नहीं आएगा. उसको देख कर... लगता है तू तो बहुत मजे कर रही है.

वसु ऋतू से बात सुनकर हस देती है और कहती है.. तू ठीक ही कह रही है. वैसे एक बात पूछूं?

ऋतू: पूछ.

वसु: तू भी तो बहुत गदरायी हुई है और ऐसा कहते हुए एक बार बहार देखते हुए जब वहां कोई नहीं था तो आगे आकर उसकी चूची को दबा देती है. तू इतनी मस्त बदन को लेके कैसे रहती है? तेरी इच्छा नहीं होती क्या?

ऋतू: हाँ सही कह रही है. मैं भी आग में जल रही हूँ. मेरी भी इच्छा होती है लेकिन डरती हूँ की दिनेश क्या सोचेगा.

वसु: अरे इसमें डरने की क्या बात है? अब तो उसकी भी शादी हो गयी है. वो भी अब समझ जाएगा. अगर तेरी नज़र में कोई लड़का है तो बोल मैं बात करती हूँ.. और अगर नहीं है तो मैं ही तेरे लिए ढूढ़ देती हूँ और ऐसा कहते हुए ऋतू को आँख मार देती है. दोनों फिर अपना काम करते है और बाहर आने से पहले वसु ऋतू को दीवार से सटा कर... जाने से पहले तेरी आग और थोड़ा भड़काती हूँ ताकि तू भी जल्दी से मेरी तरह और गदरायी बन जा.. और ऐसा कहते हुए वो ऋतू के होंठ चूम लेती है. ऋतू को तो पहले झटका लगता लेकिन वो भी समझ जाती है और वो भी वापिस वसु को चूम लेती है.

porn-gif-magazine-teensex201439.gif


२ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अपने आप को ठीक कर के बाहर आ जाते है और बाकी सब के साथ बात करने लग जाते है.

बाहर जाने से पहले..

ऋतू: वैसे तू मुझे खुश खबर कब दे रही है?

वसु: पता नहीं यार.. दीपू तो हमेशा कहते रहता है की वो भी जल्दी बाप बने.. लेकिन मैं ही मना करती रहती हूँ.

ऋतू: मेरी बात मान तो तू भी जल्दी पेट से हो जा.. अब तेरी उम्र भी हो रही है. अगर और देर हो गया तो फिर मुश्किल भी हो सकता है. वैसे तू खुश तो है ना?

वसु: हाँ यार बहुत खुश हूँ. वो तो मुझे बहुत खुश रकता है. और उसके प्यार करने का तरीका भी बहुत मस्त है.

वो तो उसके बाप से भी एक कदम बढ़ कर है. मुझे तो पूरी तरह थका ही देता है लेकिन वो फिर भी नहीं रुकता. मेरी तो किस्मत अच्छी है की जब मैं थक जाती हूँ तो दिव्या और कविता उस पर टूट पड़ते है तो मुझे थोड़ी राहत मिलती है.

उसके बारे में सोचते हुए ही मैं तो बहुत बार गीली भी हो जाती हूँ.

ऋतू: अरे वाह... तुम सब के तो बड़े मजे हो रहे है फिर . ये तो बहुत अच्छी बात है. जल्दी से अब काम में लग जा और जब हम अगली बार मिलेंगे तो मुझे तुझ से खुश खबर सुन्ना है और फिर से इस बार ऋतू वसु को चूम लेती है और दोनों बाहर आ जाते है.

फिर सब लोग १०- १५ Min और बातें करते है और फिर वसु और बाकी सब भी ऋतू और दिनेश से इज़ाज़त लेते है और अपने घर की और निकल जाते है... दोनों परिवार अपने अपने ख्यालों के बारे में सोचते रहते है... वसु जो कुछ देर पहले ऋतू से बात की थी... और दिनेश जो २- ३ दिन पहले दीपू से अपने मन की बात किया था...
Bahut hi shaandar update diya hai Mass bhai....
Nice and lovely update....
 

Funlover

I am here only for sex stories No personal contact
17,561
27,876
259
28th Update (दिनेश की दिल की बात और पार्टी)

दिनेश: जान ये भी कोई पूछने वाली बात है? और फिर दिनेश निशा को अपनी बाहों में लेकर दोनों सुकून की नींद मं चले जाते है.


अब आगे..

अगली सुबह सब अपने काम में लग जाते है और फिर दीपू भी तैयार हो जाता है और जाने से पहले तीनो को मस्त चूमता है और साथ में गांड भी दबाते हुए अपने काम के लिए निकल जाता है.

वसु अपना काम कर रही थी तो उसे कुछ याद आता है और फिर वो दीपू की बुआ लता को फ़ोन करती है.

वसु लता से: दीदी कैसी हो?

लता: क्या बात है... इतने दिनों बाद हम तुम्हे याद आये? मुझे लगा तुम हम सब को भूल ही गए हो. लगता है शादी के बाद बहुत मजे ले रही हो.

वसु: ऐसा नहीं है दीदी... काम में सब उलझ गए थे और दीपू का बिज़नेस भी बढ़ रहा है तो वो भी बिजी रहता है. वैसे आपसे एक बात बताना था.

लता उसको छेड़ते हुए: कोई खुश खबर है क्या?

वसु ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. बात वो नहीं है.

लता: तो फिर क्या है?

वसु: यही की माँ बाबा गुज़र गए है.

लता ये सुनके एकदम शॉक हो जाती है और कहती है कब कैसे और उन्हें क्यों नहीं बताया?

वसु; दीदी: बात बहुत जल्दी हो गया. उन दोनों की तबियत एकदम बहुत ज़्यादा खराब हो गयी और डॉक्टर्स ने कहा तो की वो दोनों १- २ दिन के मेहमान ही है. इन सब में जब हम वहां घर पहुंचे तो हालत बहुत बिगड़ गयी थी.

लता: सुनकर बहुत दुःख हुआ. वसु, अब बाकी घर वाले कैसे है? मैं जल्दी ही समय निकल कर आती हूँ.

वसु: ठीक है जब भी समय मिलेगा तो आ जाना. हमें भी अच्छा लगेगा. वैसे एक और बात बतानी थी.

लता: अब और क्या?

वसु: थोड़ा झिझकते हुए... बात ये है की जब माँ बाबा अपने अंत के बहुत नज़दीक थे तो उन्होंने इक इच्छा ज़ाहिर की थी.

लता: क्या?

वसु: यही की वो जाने से पहले निशा की शादी देखना चाहते थे. और जैसे आपको पता है निशा और दिनेश की हम शादी अगले महीने ही करने वाले थे. लेकिन इन सब के चलते हमने उन दोनों की शादी माँ बाबा के सामने जल्दी कर दी. बस यही उनकी आखरी इच्छा थी (वो दूसरी इच्छा बताती नहीं है लता को... मीना के बारे में). वो लोग भी निशा की शादी देख कर बहुत खुश हो गए और फिर वो भी भगवान् के घर चले गए.

लता: हम्म...दुःख तो बहुत हुआ लेकिन अच्छा किया की उनकी आखरी इच्छा पूरी कर दी. मैं जल्दी ही वहां आती हूँ और फिर सब से मिल भी लेती हूँ.

वसु: जी... ज़रूर आईये... हम सब को आपके आने का इंतज़ार रहेगा और फिर ऐसे ही कुछ और बातें कर के वसु फ़ोन कट कर देती है.


दिनेश की दिल की बात...

दीपू ऑफिस जाता है और फिर दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और फिर उससे गले लग जाता है.

दीपू: यार तू तो जानता है की हालत कैसे थे. बस नाना नानी की आखरी इच्छा थी... इसीलिए जल्दी ही तुम्हारी शादी कर दी नहीं तो हम सब तुम दोनों की शादी बहुत धूम धाम से करना चाहते थे.

दिनेश: हाँ मैं भी जानता हूँ. माँ भी कह रही थी की वो भी मेरी शादी ऐसे ही करना चाहती थी लेकिन क्या करे. लेकिन कोई दुःख नहीं. उनके चेहरे पे वो ख़ुशी देख कर जब हम दोनों की शादी हो गयी थी तो हमें भी काफी अच्छा लगा.

दीपू ये बात सुनकर फिर से दिनेश से गले लग जाता है.

दिनेश: तू चिंता मत कर. अगले हफ्ते में घर में पार्टी रखता हूँ... सब के लिए. तुम लोग भी सब आना. निशा को भी बहुत अच्छा लगेगा.

दीपू: ज़रूर आएंगे.. वैसे निशा कैसी है? कोई तकलीफ तो नहीं दे रही है ना तुझे और हस देता है.

दिनेश: वो कैसी है देखना है तो आज शाम घर चल... तू ही देख ले.

दीपू: नहीं यार उसकी ज़रुरत नहीं है. हम अगले हफ्ते आने ही वाले है ना तो तब उससे मिल लेंगे.

दोनों फिर अपने काम में लग जाते है. कुछ समय बाद दीपू को याद आता है तो वो दिनेश से कहता है.

दीपू: अरे यार जब तू होली में बहार गया था तो तूने मुझे फ़ोन कर के बताया था की तुझे मुझसे कुछ बात करनी है. दिनेश को वो बात याद आती है तो कहता है... सुन चल हम बाहर कहीं जाते है और वहीँ तुझसे बात करता हूँ. दीपू दिनेश की तरफ सवालिया नज़र से देखता है तो दिनेश कुछ नहीं कहता और कहता ही की वो लोग बाद में बात करेंगे.

फिर दोनों दोपहर को खाना खा कर बाहर चले जाते है. गाँव से थोड़ा दूर वो दोनों एक अच्छे जगे में जाते है और वहां बातें करने के लिए बैठ जाते है.

दीपू: तो बता तू मुझसे क्या बात करना छा रहा था.

दिनेश भी थोड़ा झिझकता है और उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो बात को कैसे आगे बढाए.

दीपू उसकी और देख कर कहता है.. यार हम दोनों बचपन के दोस्त है और अब तो तू मेरा जीजा भी हो गया है तो मुझे कैसे शर्माना. जो भी हो बोल दे... क्या पता शायद मैं तेरी मदत कर दूँ.

दिनेश: फिर से थोड़ा हिचखिचाते हुए.. यार मैं सोच रहा तह की तूने कैसे २ शादियां कर ली है? वो भी अपने माँ और मौसी से?

दीपू ये बात सुनकर हस देता है और कहता है... लगता है तुझे अब और बात बताना पड़ेगा.

दिनेश दीपू की तरफ देख कर: क्या?

दीपू: यही की मेरी तीसरी शादी भी हो गयी है और ये बात निशा को भी पता है.

दिनेश: जब ये बात सुनता है तो वो अपना मुँह खोले आश्चर्य से दीपू को देखता रह जाता है.

दीपू: ज़्यादा सोच मत.. शायद ये मेरी ज़िन्दगी में लिखा था.

दिनेश: अपने आप को थोड़ा संभालते हुए.. वैसे तीसरी बीवी कौन है?

दीपू भी थोड़ा शर्माते हुए: वो मेरी मामी की मम्मी है. मैं ज़्यादा कुछ नहीं बताऊंगा.. लेकिन जो होना था वो हो गया.. अब मैं उसे बदल नहीं सकता. खैर मेरी छोड़. तू बता तू क्या कहना छा रहा था.

दिनेश: मेरी भी कुछ ऐसी ही समस्या है भाई.

दीपू: क्या समस्या है?

दिनेश: जब हम होली में गए थे तब पहली बार मुझे मेरी माँ पे ध्यान आया और मुझे भी लगा की वो भी थोड़ी बहुत एक आदमी को अपनी ज़िन्दगी में मिस करती है और शायद चाहती है की उसको भी एक आदमी का सहारा मिल जाए तो बहुत अच्छा होगा उसके लिए.

दीपू: अरे ये तो बहुत अच्छी बात है यार... तू भी सही कह रहा है. आंटी की उम्र भी मेरी माँ जितनी है और मैं जानता हूँ की जब से मेरी माँ से शादी हुई है वो कितनी बदल गयी है और अब वो बहुत खुश भी है. तू सही कह रहा है. अगर आंटी फिर से शादी कर ले तो उनकी ज़िन्दगी भी खुशाल हो जायेगी.

दिनेश: तेरी बात भी सही है... लेकिन मैं सोच रहा था की कौन उससे अभी शादी करेगा... और फिर मुझे तेरी याद आयी की वसु आंटी को तुझसे कोई बेहतर आदमी नहीं मिल सकता है तो यही बात माँ पे भी बन सकता है.... और ऐसा कहते हुए दिनेश रुक जाता है.

दोपहर की थोड़ी ठण्डी हवा में ये बात एकदम हवे में ही रह जाती है. पहले तो दीपू को समझ नहीं आता की दिनेश क्या कहना चाहता है.... लेकिन जल्दी ही वो बात समझ जाता है और कहता है... तो जनाब ये बात है.. तू भी मेरी तरह आंटी से शादी करना चाहता है ना... बोल मेरी सोच सही है ना?

दिनेश भी थोड़ा शर्माते हुए हाँ कहता है.

दिनेश: तू क्या सोचता है इसके बारे में?

दीपू: वैसे तेरी बात भी सही है. आंटी के लिए तेरे से अच्छा और कोई लड़का नहीं मिल सकता.

दीपू: सुन भाई... मैं तुझे इतना ही कहूंगा की अगर आंटी राज़ी हो जाए और वो भी बिना किसीके दबाव में और वो खुद कहे ही वो भी तेरे से शादी करने के लिए तैयार है तो बात आगे बढ़ा. लेकिन उससे पहले में यह कहुंगा की तू आंटी से बात करने से पहले निशा से बात कर ले क्यूंकि याद रख. वो तेरी पहली बीवी है. उसके पीछे तू उसे बिना बातये आंटी से बात करेगा तो उसे बड़ा झटका लगेगा और वो अगर नहीं मानी तो फिर बहुत पन्गा हो जाएगा.

(दीपू दिनेश को आंटी के साथ शादी नहीं करने की सलाह नहीं दे सकता था क्यूंकि वो खुद ही तीन शादी किया और वो भी खुद अपनी माँ और रिश्तेदार के साथ)

दिनेश: तू सही कह रहा है यार. निशा से पहले बात करना पड़ेगा और जानना पागेगा की वो क्या सोचेगी इसके बारे में. वैसे मैं सोच रहा था की अगले हफ्ते हम हनीमून जाने का प्लान कर रहे है तो मैं उसे उसी वक़्त इस बात के बारे में बात करता हूँ.

दीपू: हाँ ये सही रहेगा. अगर वो मानती नहीं है तो एक बार मुझे भी बताना. मैं उससे बात करता हूँ. वो मेरी बात कभी नहीं टालती... लेकिन अगर बात यहाँ तक ना आये और वो खुद भी मान जाए तो बहुत अच्छा होगा.

दिनेश: हाँ यार तू सही कह रहा है.

दीपू: लेकिन एक बात याद रख.. आंटी तो तू कैसे मनाएगा वो तुझ पर निर्भर करता है लेकिन कोई ज़ोर ज़बरदस्ती मत करना. अगर वो तेरे दबाव में आकर शादी कर ले तो आगे जा कर बहुत मुश्किल होगा और सब की ज़िन्दगी में परेशानी भी आ सकती है.

दिनेश: तू सही कह रहा है. देखता हूँ की मैं माँ को कैसे मनाऊं. लेकिन उससे पहले मुझे निशा से बात करनी पड़ेगी.

फिर वो दोनों ऐसे ही कुछ और बातें करते है और फिर वहां से ऑफिस के लिए निकल जाते है और शाम को दोनों अपने अपने घर चले जाते है.

यहाँ जब दिनेश और दीपू बात कर रहे होते है तो वहीँ दीपू के घर में तीनो आँगन में बैठे हुए थे.


तीनो की छेड़ छाड़ ....

दिव्या: आज शायद पहली बात इस घर में और कोई नहीं है. पिछले हफ्ते तक तो निशा और मीना भी रहते थे... लेकिन अब घर में हम ही रह गए है.

कविता: हाँ तू सही कह रही है. वैसे तेरे कहना का क्या मतलब है?

दिव्या: यही सोच रही हूँ की दीपू आज हम तीनो के साथ क्या करेगा और यही सोचते हुए में पूरी गीली हो रही हूँ. मेरी पैंटी पूरी गीली हो गयी थी तो अब मैं उसे उतार भी चुकी हूँ.

वसु: तेरे को तो बड़ी ठरक छड़ी हुई है..

दिव्या: क्यों दीदी आप नहीं हो क्या? और ऐसा कहते हुए दिव्या वसु की एक चूची को पकड़ कर मसलते हुए दबा देती है और देखती है की उसके निप्पल्स ब्लाउज में से एकदम तनी हुई है. आप मुझसे कह रहे हो लेकिन आप खुद ही उत्तेजित हो और कविता की तरफ देख कर: देखो कैसे इनके निप्पल्स एकदम तने हुए है.

वसु: चुप कर.. तू कुछ भी बकवास करती रहती है. ये दोनों को देख कर कविता वसु के पास आकर कहती है... तुम्हारी पैंटी भी पूरी गीली है क्या और ऐसा कहते हुए कविता अपना हाथ वसु के साडी के अंदर दाल कर उसकी चूत को छूती है तो अपना हाथ निकल कर बड़ी आँखें करती हुई.. ओह रे...

तू तू हम सब से भी आगे है और अपना गीला हाथ दिव्या को दिखा कर अपनी ऊँगली को चाटते हुए... इसने तो पैंटी पहनी ही नहीं है और देख कैसी इसका रस बह रहा है और कहती है... ये तो बहुत स्वादिष्ट है और फिर से ऊँगली चाट लेती है.

वसु ये देख कर एकदम शर्मा जाती है और आँगन से कमरे में जाने को उठती है तो दिव्या उसे रोक लेती है और वही दीवान में उसे सुला कर... क्यों भाग रही हो दीदी? मेरी पैंटी गीली है तो मैं ठरकी.. तो फिर तुम क्या हो?

वसु शर्मा कर कुछ नहीं कहती तो कविता उसके बगल में बैठ कर उसके होंठ चूमते हुए कहती है.. तू ठरकी है तो ये तो एकदम पूरी चुदासी हो गयी है और फिर तीनो हस देते है.

वसु कविता से: हम दोनों ठरकी और चुदासी है तो हम दोनों से आगे ही बढ़ चुकी है और उसकी गांड को चिमटी काटते हुए.. हम तो यहाँ से कुंवारे है.. तूने तो अपनी गांड भी मरवा ली है.

कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. चिंता मत करो.. जल्दी ही तुम दोनों की गांड का उद्धघाटन जल्दी ही होने वाला है. वो तो गांड का बड़ा दीवाना है और मुझे तो आश्चर्य है की तुम जैसी मस्त बड़ी गांड वाली कैसे अब तक बच गयी.. इस बात पे तीनो हस देते है और ऐसे ही कामुक बातों से तीनो भी गरम हो जाते है लेकिन इससे ज़्यादा वो और कुछ नहीं करते और कमरे में जाकर तीनो ही एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.


दिनेश के घर में पार्टी:

२- ३ दिन बात जैसे ऋतू और दिनेश ने बताया था... वो अपने घर में एक छोटा सा पार्टी रखते है और अपने ऑफिस के कुछ काम करने वाले लोगों को भी बुलाते है. जब दीपू वसु और बाकी लोग उनके घर जाते है तो तीनो पहले ही उनका इंतज़ार कर रहे थे. जहाँ दिनेश कुरता और पयजामा पहन कर स्मार्ट लग रहा था वहीँ निशा और ऋतू भी सज धज कर एकदम सेक्सी लग रही थी.

9dd89b7c5bcd856214024746aaf13a2b.jpg


0-A-Saree31.jpg


IMG-8301.jpg


उन दोनों को देख कर पहली बार दीपू भी डगमगा जाता है क्यूंकि वो दोनों उतनी कामुक और सेक्सी लग रही थी.

वहीँ वसु, दिव्या और कविता भी एकदम मस्त माल लग रही थी. सब ने कपडे ऐसे पहने थे जो छुपा काम रहे थे और दिखा ज़्यादा रहे थे.

6d728c8f79bd6259dbb63d8af986d568.jpg


Teej-0c587a561f244b0481fa68f76e0625f3.jpg


Teej-93e1baf93eb4da92bdcf6a1d50b2e214.jpg


वसु निशा को देख कर एकदम खुश हो जाती है और जाकर उसके गले लग जाती है. निशा भी अपनी माँ को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वैसे ही हाल दोनों दिव्या और कविता का भी था. ऑफिस के कुछ लोग जो आए थे उनमें से १- २ लोग तो वहां की महिलाओं को देख कर अपना लार टपका रहे थे... लेकिन बात वहीँ तक रह जाती है. दीपू भी निशा और दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और जाकर निशा को भी अपनी बाहों में लेकर उसके हाल चाल पूछता है. निशा एकदम खुश नज़र आ रही थी...

(और खुश भी क्यों ना हो.. जब से वो इस घर में आयी है रोज़ दिनेश और निशा रात को मस्त चुदाई करते है और दिनेश तो उसे पूरा थका ही देता है. उसका पूरा चेहरा खिल खिला सा लग रहा था)

दीपू भी दिनेश से गले लगता है और उसे फिर से बधाई देता है.

और ऐसे ही दीपू ऋतू आंटी को भी बधाई देता है और उसके गले भी लग जाता है. गले लगने से ऋतू ही मस्त ठोस चूची भी दीपू के सीने में दब जाती है और आज पहली बार ऐसा होता ही जब उसे उसके और दिनेश की बात याद आती है की वो भी उसकी माँ की तरह अपने जवानी के उत्तम समय में है. वो मन में सोचता है की दिनेश सही कह रहा है की उसे भी एक मर्द की ज़रुरत है और सोचता है की बिस्तर पे वो नंगी कैसे होगी. (जैसा ऊपर में लिखा था... आज वो पहली बार था जब दीपू ऋतू को देख कर उसे ऐसे ख़याल आते है. इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. ये और बात थी की कुछ दिन पहले ही दिनेश और दीपु ने ऋतू के बारे में बात किया था.)… लेकिन फिर वो सब बातें अपने ध्यान से हटा देता है की वो गलत सोच रहा है. वो उसकी दोस्त की माँ है और उसकी बहिन की सास. तो ऐसा सोचना अच्छा नहीं रहेगा… लेकिन आगे कब क्या और कैसे होने वाला है ये किसी को पता नहीं था….

सब लोग उनसे मिलने आते है और उनको बधाई देकर खाना खा कर चले जाते है... लेकिन उनमें से १- २ ऐसे थे जो दिनेश और दीपू को घूरे जा रहे थे. दीपू की नज़र उनपर एक बार पड़ती है तो उसे कुछ ठीक नहीं लगता जैसे शायद कोई अनहोनी होने वाली हो लेकिन इस वक़्त वो ज़्यादा ध्यान नहीं देता क्यूंकि सब ख़ुशी के मूड में थे और सब लोग हस कर अपना वक़्त बिता रहे थे.

ऑफिस के सब लोग चले जाने के बाद सिर्फ घर वाले ही रह जाते है और सब के जाने के बाद जब ऋतू की नज़र कविता पे जाती है तो पूछती है की ये कौन है. (ऋतू को कविता के बारे में पता नहीं था. उसे सिर्फ वसु और दिव्या के बारे में ही पता था).

अब समय आ गया था जब दीपू को ऋतू को अपनी तीसरी शादी की बात बतानी थी. उसकी किस्मत अच्छी थी की उसने दिनेश को पहले ही ये खबर दी थी वरना और मुश्किल हो जाता. जब ऋतू कविता के बारे में पूछती है तो वसु और दिव्या दोनों एक दुसरे की तरफ देख कर कुछ नहीं कह पा रहे थे तो वहीँ दीपू भी सोच रहा था की क्या बोले और वो दिनेश की तरफ देखता है.

दिनेश को समझ आता है की बात को उसे ही संभालना है तो दिनेश कहता है: माँ ये और कोई नहीं दिनेश की तीसरी बीवी है. नाम कविता है .उनकी शादी भी मेरी तरह ही ऐसे हालत में हुई की इन्हे समय ही नहीं मिला की हमें बताएं. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा आश्चर्य हो जाती है लेकिन अपने आप को संभालते हुए वो कविता को उसके पास बुला कर उसके माथे पे प्यार से एक चुम्मा देकर उसे आशीर्वाद देती है. जब ऋतू ऐसा करती है तो सब की जान में जान आती है और दीपू दिनेश को और देख कर एक तरह से उसे धन्यवाद देता है.

ऋतू दीपू की और देख कर... तुम और कितने ऐसे सुरपरिसेस दोगे? और मज़ाक में कहती है की दो काफी नहीं थे क्या.. जो तुमने तीसरी शादी कर ली है. इस बात पर दीपू और वसु कुछ नहीं कहते क्यूंकि उनको पता था आगे और कुछ भी संभव हो सकता है.

ऋतू: वैसे तुम्हारी तीसरी बीवी भी बहुत सुन्दर है और फिर ऐसे ही सब मज़ाक और बातें करते हुए खाना खाते है. खाना खाते वक़्त दीपू चोर नज़रों से अपनी बीवियों को देख रहा था क्यूंकि सब लोग सेक्सी दिख रहे थे और ऋतू की बात से उसे भी ठरकी बना दिया था.

सबसे पहले कविता खाना ख़तम करती है और फिर जब सब बातें करते हुए अपने खाने में मगन थे तो वो कहती है की वो अपना प्लेट किचन में रख के आ जायेगी. ऋतू मना करती है की उसकी कोई ज़रुरत नहीं है. यहीं पे बैठी रहो. जब सब का हो जाएगा तो एक साथ टेबल साफ़ कर देंगे. लेकिन कविता नहीं मानती और वो उठ कर अपनी गांड मटकाते हुए किचन में चली जाती है.

64f0185fcd43457b8ae9841674343ec0.gif


उसको देख कर दीपू भी अपना खाना ख़तम कर लेता है और कविता के पीछे चला जाता है. ऋतू से बात करते हुए वसु एक तिरछी नज़र दीपू पे डालती है और मन में सोचती है की कविता तो गयी.... और फिर नार्मल तरीके से बाकी सब से बात करती रहती है. किचन में कविता अपना प्लेट रख रही होती है तो चुपके से दीपू भी उसके पीछे आ जाता है और उसके साथ अपना हाथ दो कर उसके गले को किस करता है. कविता तो पहले चकमा जाती है और थोड़ा डर भी जाती है लेकिन दीपू को देख कर कहती है की यहाँ क्या कर रहे हो? दूसरों का घर है और कोई भी आ सकता है. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था. वो कविता की मस्त ठोस चूची को दबाते हुए गले को किस करते हुए कहता है...

545c0aa2032d3debfca49d30135f5c9c.gif


तुम आज सब लोग एक से बढ़कर एक माल लग रहे हो. तुम सब एक साथ ऐसे सेक्सी बन कर आओगे तो मेरे बारे में कुछ सोचा नहीं क्या की मेरा क्या होगा? और ऐसे ही उसकी चूची दबाते हुए उसका हाथ अपने लंड पे रखते हुए कहता है... देखो कैसे तन कर तुम्हारी गांड में जाना चाहता है. कविता भी अब बहकने लगती है और कहती है...Pls यहाँ मत करो ना... घर चलो ना... फिर मैं ही तुम्हारे पास आऊँगी और चुदुँगी..

दीपू: वो तो घर की बात है लेकिन पहले मुझे तुम्हारे होंटो का रस चूसने दो...

GIF-20260117-215728-758.gif


और ऐसा कहते हुए वो कविता को दीवार से सत्ता कर उसके होंठ चूसने लग जाता है जिसमें अब कविता भी उसका पूरा साथ देती है.

IMG-20221201-185211.jpg


दीपू उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूचियां भी ब्लाउज के ऊपर से दबाता रहता है. इतने में उन्हें किसीके आने की आहट होती है तो दोनों अलग हो जाते है और फिर अपने आप को ठीक करके पहले दीपू निकल जाता है वहां से और उसके पीछे कविता भी १ Min बाद निकल जाती है.

फिर थोड़ी देर बाद सब लोग खाना खा कर बैठ कर बातें करते रहते है तो वसु सामान लेकर किचन में जाती है रखने. उसके पीछे ऋतू भी आ जाती है और वसु को देखती है तो देखती ही रह जाती है.

IMG-7742.jpg


क्यूंकि उस पोजीशन में वसु की ठोस चूचियां और बहार को निकली हुई गांड एकदम साफ़ नज़र आ रही थी. . उसको देख कर उसके बगल में आकर

ऋतू: १-२ महीनों में तू तो बहुत गदरा गयी है. देख ये तेरी उठी हुई गांड और उसकी गांड पे एक चपत मार देती है.

वसु: oooh….oouucchh…क्या कर रही है? कोई देख लेगा ना.

ऋतू: कोई नहीं देखेगा. सब अपने बातों में मगन है. वैसे भी अभी थोड़ी देर पहले दीपू और कविता को यहाँ आते देखा था तो अब कोई नहीं आएगा. उसको देख कर... लगता है तू तो बहुत मजे कर रही है.

वसु ऋतू से बात सुनकर हस देती है और कहती है.. तू ठीक ही कह रही है. वैसे एक बात पूछूं?

ऋतू: पूछ.

वसु: तू भी तो बहुत गदरायी हुई है और ऐसा कहते हुए एक बार बहार देखते हुए जब वहां कोई नहीं था तो आगे आकर उसकी चूची को दबा देती है. तू इतनी मस्त बदन को लेके कैसे रहती है? तेरी इच्छा नहीं होती क्या?

ऋतू: हाँ सही कह रही है. मैं भी आग में जल रही हूँ. मेरी भी इच्छा होती है लेकिन डरती हूँ की दिनेश क्या सोचेगा.

वसु: अरे इसमें डरने की क्या बात है? अब तो उसकी भी शादी हो गयी है. वो भी अब समझ जाएगा. अगर तेरी नज़र में कोई लड़का है तो बोल मैं बात करती हूँ.. और अगर नहीं है तो मैं ही तेरे लिए ढूढ़ देती हूँ और ऐसा कहते हुए ऋतू को आँख मार देती है. दोनों फिर अपना काम करते है और बाहर आने से पहले वसु ऋतू को दीवार से सटा कर... जाने से पहले तेरी आग और थोड़ा भड़काती हूँ ताकि तू भी जल्दी से मेरी तरह और गदरायी बन जा.. और ऐसा कहते हुए वो ऋतू के होंठ चूम लेती है. ऋतू को तो पहले झटका लगता लेकिन वो भी समझ जाती है और वो भी वापिस वसु को चूम लेती है.

porn-gif-magazine-teensex201439.gif


२ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अपने आप को ठीक कर के बाहर आ जाते है और बाकी सब के साथ बात करने लग जाते है.

बाहर जाने से पहले..

ऋतू: वैसे तू मुझे खुश खबर कब दे रही है?

वसु: पता नहीं यार.. दीपू तो हमेशा कहते रहता है की वो भी जल्दी बाप बने.. लेकिन मैं ही मना करती रहती हूँ.

ऋतू: मेरी बात मान तो तू भी जल्दी पेट से हो जा.. अब तेरी उम्र भी हो रही है. अगर और देर हो गया तो फिर मुश्किल भी हो सकता है. वैसे तू खुश तो है ना?

वसु: हाँ यार बहुत खुश हूँ. वो तो मुझे बहुत खुश रकता है. और उसके प्यार करने का तरीका भी बहुत मस्त है.

वो तो उसके बाप से भी एक कदम बढ़ कर है. मुझे तो पूरी तरह थका ही देता है लेकिन वो फिर भी नहीं रुकता. मेरी तो किस्मत अच्छी है की जब मैं थक जाती हूँ तो दिव्या और कविता उस पर टूट पड़ते है तो मुझे थोड़ी राहत मिलती है.

उसके बारे में सोचते हुए ही मैं तो बहुत बार गीली भी हो जाती हूँ.

ऋतू: अरे वाह... तुम सब के तो बड़े मजे हो रहे है फिर . ये तो बहुत अच्छी बात है. जल्दी से अब काम में लग जा और जब हम अगली बार मिलेंगे तो मुझे तुझ से खुश खबर सुन्ना है और फिर से इस बार ऋतू वसु को चूम लेती है और दोनों बाहर आ जाते है.

फिर सब लोग १०- १५ Min और बातें करते है और फिर वसु और बाकी सब भी ऋतू और दिनेश से इज़ाज़त लेते है और अपने घर की और निकल जाते है... दोनों परिवार अपने अपने ख्यालों के बारे में सोचते रहते है... वसु जो कुछ देर पहले ऋतू से बात की थी... और दिनेश जो २- ३ दिन पहले दीपू से अपने मन की बात किया था...
बढ़िया एपिसोड रहा


तख्ता ऋतू और दिनेश का सेट हो रहा है बढ़िया
 
  • Like
Reactions: Napster and Mass

Dhakad boy

Active Member
1,488
2,613
158
28th Update (दिनेश की दिल की बात और पार्टी)

दिनेश: जान ये भी कोई पूछने वाली बात है? और फिर दिनेश निशा को अपनी बाहों में लेकर दोनों सुकून की नींद मं चले जाते है.


अब आगे..

अगली सुबह सब अपने काम में लग जाते है और फिर दीपू भी तैयार हो जाता है और जाने से पहले तीनो को मस्त चूमता है और साथ में गांड भी दबाते हुए अपने काम के लिए निकल जाता है.

वसु अपना काम कर रही थी तो उसे कुछ याद आता है और फिर वो दीपू की बुआ लता को फ़ोन करती है.

वसु लता से: दीदी कैसी हो?

लता: क्या बात है... इतने दिनों बाद हम तुम्हे याद आये? मुझे लगा तुम हम सब को भूल ही गए हो. लगता है शादी के बाद बहुत मजे ले रही हो.

वसु: ऐसा नहीं है दीदी... काम में सब उलझ गए थे और दीपू का बिज़नेस भी बढ़ रहा है तो वो भी बिजी रहता है. वैसे आपसे एक बात बताना था.

लता उसको छेड़ते हुए: कोई खुश खबर है क्या?

वसु ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. बात वो नहीं है.

लता: तो फिर क्या है?

वसु: यही की माँ बाबा गुज़र गए है.

लता ये सुनके एकदम शॉक हो जाती है और कहती है कब कैसे और उन्हें क्यों नहीं बताया?

वसु; दीदी: बात बहुत जल्दी हो गया. उन दोनों की तबियत एकदम बहुत ज़्यादा खराब हो गयी और डॉक्टर्स ने कहा तो की वो दोनों १- २ दिन के मेहमान ही है. इन सब में जब हम वहां घर पहुंचे तो हालत बहुत बिगड़ गयी थी.

लता: सुनकर बहुत दुःख हुआ. वसु, अब बाकी घर वाले कैसे है? मैं जल्दी ही समय निकल कर आती हूँ.

वसु: ठीक है जब भी समय मिलेगा तो आ जाना. हमें भी अच्छा लगेगा. वैसे एक और बात बतानी थी.

लता: अब और क्या?

वसु: थोड़ा झिझकते हुए... बात ये है की जब माँ बाबा अपने अंत के बहुत नज़दीक थे तो उन्होंने इक इच्छा ज़ाहिर की थी.

लता: क्या?

वसु: यही की वो जाने से पहले निशा की शादी देखना चाहते थे. और जैसे आपको पता है निशा और दिनेश की हम शादी अगले महीने ही करने वाले थे. लेकिन इन सब के चलते हमने उन दोनों की शादी माँ बाबा के सामने जल्दी कर दी. बस यही उनकी आखरी इच्छा थी (वो दूसरी इच्छा बताती नहीं है लता को... मीना के बारे में). वो लोग भी निशा की शादी देख कर बहुत खुश हो गए और फिर वो भी भगवान् के घर चले गए.

लता: हम्म...दुःख तो बहुत हुआ लेकिन अच्छा किया की उनकी आखरी इच्छा पूरी कर दी. मैं जल्दी ही वहां आती हूँ और फिर सब से मिल भी लेती हूँ.

वसु: जी... ज़रूर आईये... हम सब को आपके आने का इंतज़ार रहेगा और फिर ऐसे ही कुछ और बातें कर के वसु फ़ोन कट कर देती है.


दिनेश की दिल की बात...

दीपू ऑफिस जाता है और फिर दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और फिर उससे गले लग जाता है.

दीपू: यार तू तो जानता है की हालत कैसे थे. बस नाना नानी की आखरी इच्छा थी... इसीलिए जल्दी ही तुम्हारी शादी कर दी नहीं तो हम सब तुम दोनों की शादी बहुत धूम धाम से करना चाहते थे.

दिनेश: हाँ मैं भी जानता हूँ. माँ भी कह रही थी की वो भी मेरी शादी ऐसे ही करना चाहती थी लेकिन क्या करे. लेकिन कोई दुःख नहीं. उनके चेहरे पे वो ख़ुशी देख कर जब हम दोनों की शादी हो गयी थी तो हमें भी काफी अच्छा लगा.

दीपू ये बात सुनकर फिर से दिनेश से गले लग जाता है.

दिनेश: तू चिंता मत कर. अगले हफ्ते में घर में पार्टी रखता हूँ... सब के लिए. तुम लोग भी सब आना. निशा को भी बहुत अच्छा लगेगा.

दीपू: ज़रूर आएंगे.. वैसे निशा कैसी है? कोई तकलीफ तो नहीं दे रही है ना तुझे और हस देता है.

दिनेश: वो कैसी है देखना है तो आज शाम घर चल... तू ही देख ले.

दीपू: नहीं यार उसकी ज़रुरत नहीं है. हम अगले हफ्ते आने ही वाले है ना तो तब उससे मिल लेंगे.

दोनों फिर अपने काम में लग जाते है. कुछ समय बाद दीपू को याद आता है तो वो दिनेश से कहता है.

दीपू: अरे यार जब तू होली में बहार गया था तो तूने मुझे फ़ोन कर के बताया था की तुझे मुझसे कुछ बात करनी है. दिनेश को वो बात याद आती है तो कहता है... सुन चल हम बाहर कहीं जाते है और वहीँ तुझसे बात करता हूँ. दीपू दिनेश की तरफ सवालिया नज़र से देखता है तो दिनेश कुछ नहीं कहता और कहता ही की वो लोग बाद में बात करेंगे.

फिर दोनों दोपहर को खाना खा कर बाहर चले जाते है. गाँव से थोड़ा दूर वो दोनों एक अच्छे जगे में जाते है और वहां बातें करने के लिए बैठ जाते है.

दीपू: तो बता तू मुझसे क्या बात करना छा रहा था.

दिनेश भी थोड़ा झिझकता है और उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो बात को कैसे आगे बढाए.

दीपू उसकी और देख कर कहता है.. यार हम दोनों बचपन के दोस्त है और अब तो तू मेरा जीजा भी हो गया है तो मुझे कैसे शर्माना. जो भी हो बोल दे... क्या पता शायद मैं तेरी मदत कर दूँ.

दिनेश: फिर से थोड़ा हिचखिचाते हुए.. यार मैं सोच रहा तह की तूने कैसे २ शादियां कर ली है? वो भी अपने माँ और मौसी से?

दीपू ये बात सुनकर हस देता है और कहता है... लगता है तुझे अब और बात बताना पड़ेगा.

दिनेश दीपू की तरफ देख कर: क्या?

दीपू: यही की मेरी तीसरी शादी भी हो गयी है और ये बात निशा को भी पता है.

दिनेश: जब ये बात सुनता है तो वो अपना मुँह खोले आश्चर्य से दीपू को देखता रह जाता है.

दीपू: ज़्यादा सोच मत.. शायद ये मेरी ज़िन्दगी में लिखा था.

दिनेश: अपने आप को थोड़ा संभालते हुए.. वैसे तीसरी बीवी कौन है?

दीपू भी थोड़ा शर्माते हुए: वो मेरी मामी की मम्मी है. मैं ज़्यादा कुछ नहीं बताऊंगा.. लेकिन जो होना था वो हो गया.. अब मैं उसे बदल नहीं सकता. खैर मेरी छोड़. तू बता तू क्या कहना छा रहा था.

दिनेश: मेरी भी कुछ ऐसी ही समस्या है भाई.

दीपू: क्या समस्या है?

दिनेश: जब हम होली में गए थे तब पहली बार मुझे मेरी माँ पे ध्यान आया और मुझे भी लगा की वो भी थोड़ी बहुत एक आदमी को अपनी ज़िन्दगी में मिस करती है और शायद चाहती है की उसको भी एक आदमी का सहारा मिल जाए तो बहुत अच्छा होगा उसके लिए.

दीपू: अरे ये तो बहुत अच्छी बात है यार... तू भी सही कह रहा है. आंटी की उम्र भी मेरी माँ जितनी है और मैं जानता हूँ की जब से मेरी माँ से शादी हुई है वो कितनी बदल गयी है और अब वो बहुत खुश भी है. तू सही कह रहा है. अगर आंटी फिर से शादी कर ले तो उनकी ज़िन्दगी भी खुशाल हो जायेगी.

दिनेश: तेरी बात भी सही है... लेकिन मैं सोच रहा था की कौन उससे अभी शादी करेगा... और फिर मुझे तेरी याद आयी की वसु आंटी को तुझसे कोई बेहतर आदमी नहीं मिल सकता है तो यही बात माँ पे भी बन सकता है.... और ऐसा कहते हुए दिनेश रुक जाता है.

दोपहर की थोड़ी ठण्डी हवा में ये बात एकदम हवे में ही रह जाती है. पहले तो दीपू को समझ नहीं आता की दिनेश क्या कहना चाहता है.... लेकिन जल्दी ही वो बात समझ जाता है और कहता है... तो जनाब ये बात है.. तू भी मेरी तरह आंटी से शादी करना चाहता है ना... बोल मेरी सोच सही है ना?

दिनेश भी थोड़ा शर्माते हुए हाँ कहता है.

दिनेश: तू क्या सोचता है इसके बारे में?

दीपू: वैसे तेरी बात भी सही है. आंटी के लिए तेरे से अच्छा और कोई लड़का नहीं मिल सकता.

दीपू: सुन भाई... मैं तुझे इतना ही कहूंगा की अगर आंटी राज़ी हो जाए और वो भी बिना किसीके दबाव में और वो खुद कहे ही वो भी तेरे से शादी करने के लिए तैयार है तो बात आगे बढ़ा. लेकिन उससे पहले में यह कहुंगा की तू आंटी से बात करने से पहले निशा से बात कर ले क्यूंकि याद रख. वो तेरी पहली बीवी है. उसके पीछे तू उसे बिना बातये आंटी से बात करेगा तो उसे बड़ा झटका लगेगा और वो अगर नहीं मानी तो फिर बहुत पन्गा हो जाएगा.

(दीपू दिनेश को आंटी के साथ शादी नहीं करने की सलाह नहीं दे सकता था क्यूंकि वो खुद ही तीन शादी किया और वो भी खुद अपनी माँ और रिश्तेदार के साथ)

दिनेश: तू सही कह रहा है यार. निशा से पहले बात करना पड़ेगा और जानना पागेगा की वो क्या सोचेगी इसके बारे में. वैसे मैं सोच रहा था की अगले हफ्ते हम हनीमून जाने का प्लान कर रहे है तो मैं उसे उसी वक़्त इस बात के बारे में बात करता हूँ.

दीपू: हाँ ये सही रहेगा. अगर वो मानती नहीं है तो एक बार मुझे भी बताना. मैं उससे बात करता हूँ. वो मेरी बात कभी नहीं टालती... लेकिन अगर बात यहाँ तक ना आये और वो खुद भी मान जाए तो बहुत अच्छा होगा.

दिनेश: हाँ यार तू सही कह रहा है.

दीपू: लेकिन एक बात याद रख.. आंटी तो तू कैसे मनाएगा वो तुझ पर निर्भर करता है लेकिन कोई ज़ोर ज़बरदस्ती मत करना. अगर वो तेरे दबाव में आकर शादी कर ले तो आगे जा कर बहुत मुश्किल होगा और सब की ज़िन्दगी में परेशानी भी आ सकती है.

दिनेश: तू सही कह रहा है. देखता हूँ की मैं माँ को कैसे मनाऊं. लेकिन उससे पहले मुझे निशा से बात करनी पड़ेगी.

फिर वो दोनों ऐसे ही कुछ और बातें करते है और फिर वहां से ऑफिस के लिए निकल जाते है और शाम को दोनों अपने अपने घर चले जाते है.

यहाँ जब दिनेश और दीपू बात कर रहे होते है तो वहीँ दीपू के घर में तीनो आँगन में बैठे हुए थे.


तीनो की छेड़ छाड़ ....

दिव्या: आज शायद पहली बात इस घर में और कोई नहीं है. पिछले हफ्ते तक तो निशा और मीना भी रहते थे... लेकिन अब घर में हम ही रह गए है.

कविता: हाँ तू सही कह रही है. वैसे तेरे कहना का क्या मतलब है?

दिव्या: यही सोच रही हूँ की दीपू आज हम तीनो के साथ क्या करेगा और यही सोचते हुए में पूरी गीली हो रही हूँ. मेरी पैंटी पूरी गीली हो गयी थी तो अब मैं उसे उतार भी चुकी हूँ.

वसु: तेरे को तो बड़ी ठरक छड़ी हुई है..

दिव्या: क्यों दीदी आप नहीं हो क्या? और ऐसा कहते हुए दिव्या वसु की एक चूची को पकड़ कर मसलते हुए दबा देती है और देखती है की उसके निप्पल्स ब्लाउज में से एकदम तनी हुई है. आप मुझसे कह रहे हो लेकिन आप खुद ही उत्तेजित हो और कविता की तरफ देख कर: देखो कैसे इनके निप्पल्स एकदम तने हुए है.

वसु: चुप कर.. तू कुछ भी बकवास करती रहती है. ये दोनों को देख कर कविता वसु के पास आकर कहती है... तुम्हारी पैंटी भी पूरी गीली है क्या और ऐसा कहते हुए कविता अपना हाथ वसु के साडी के अंदर दाल कर उसकी चूत को छूती है तो अपना हाथ निकल कर बड़ी आँखें करती हुई.. ओह रे...

तू तू हम सब से भी आगे है और अपना गीला हाथ दिव्या को दिखा कर अपनी ऊँगली को चाटते हुए... इसने तो पैंटी पहनी ही नहीं है और देख कैसी इसका रस बह रहा है और कहती है... ये तो बहुत स्वादिष्ट है और फिर से ऊँगली चाट लेती है.

वसु ये देख कर एकदम शर्मा जाती है और आँगन से कमरे में जाने को उठती है तो दिव्या उसे रोक लेती है और वही दीवान में उसे सुला कर... क्यों भाग रही हो दीदी? मेरी पैंटी गीली है तो मैं ठरकी.. तो फिर तुम क्या हो?

वसु शर्मा कर कुछ नहीं कहती तो कविता उसके बगल में बैठ कर उसके होंठ चूमते हुए कहती है.. तू ठरकी है तो ये तो एकदम पूरी चुदासी हो गयी है और फिर तीनो हस देते है.

वसु कविता से: हम दोनों ठरकी और चुदासी है तो हम दोनों से आगे ही बढ़ चुकी है और उसकी गांड को चिमटी काटते हुए.. हम तो यहाँ से कुंवारे है.. तूने तो अपनी गांड भी मरवा ली है.

कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. चिंता मत करो.. जल्दी ही तुम दोनों की गांड का उद्धघाटन जल्दी ही होने वाला है. वो तो गांड का बड़ा दीवाना है और मुझे तो आश्चर्य है की तुम जैसी मस्त बड़ी गांड वाली कैसे अब तक बच गयी.. इस बात पे तीनो हस देते है और ऐसे ही कामुक बातों से तीनो भी गरम हो जाते है लेकिन इससे ज़्यादा वो और कुछ नहीं करते और कमरे में जाकर तीनो ही एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.


दिनेश के घर में पार्टी:

२- ३ दिन बात जैसे ऋतू और दिनेश ने बताया था... वो अपने घर में एक छोटा सा पार्टी रखते है और अपने ऑफिस के कुछ काम करने वाले लोगों को भी बुलाते है. जब दीपू वसु और बाकी लोग उनके घर जाते है तो तीनो पहले ही उनका इंतज़ार कर रहे थे. जहाँ दिनेश कुरता और पयजामा पहन कर स्मार्ट लग रहा था वहीँ निशा और ऋतू भी सज धज कर एकदम सेक्सी लग रही थी.

9dd89b7c5bcd856214024746aaf13a2b.jpg


0-A-Saree31.jpg


IMG-8301.jpg


उन दोनों को देख कर पहली बार दीपू भी डगमगा जाता है क्यूंकि वो दोनों उतनी कामुक और सेक्सी लग रही थी.

वहीँ वसु, दिव्या और कविता भी एकदम मस्त माल लग रही थी. सब ने कपडे ऐसे पहने थे जो छुपा काम रहे थे और दिखा ज़्यादा रहे थे.

6d728c8f79bd6259dbb63d8af986d568.jpg


Teej-0c587a561f244b0481fa68f76e0625f3.jpg


Teej-93e1baf93eb4da92bdcf6a1d50b2e214.jpg


वसु निशा को देख कर एकदम खुश हो जाती है और जाकर उसके गले लग जाती है. निशा भी अपनी माँ को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वैसे ही हाल दोनों दिव्या और कविता का भी था. ऑफिस के कुछ लोग जो आए थे उनमें से १- २ लोग तो वहां की महिलाओं को देख कर अपना लार टपका रहे थे... लेकिन बात वहीँ तक रह जाती है. दीपू भी निशा और दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और जाकर निशा को भी अपनी बाहों में लेकर उसके हाल चाल पूछता है. निशा एकदम खुश नज़र आ रही थी...

(और खुश भी क्यों ना हो.. जब से वो इस घर में आयी है रोज़ दिनेश और निशा रात को मस्त चुदाई करते है और दिनेश तो उसे पूरा थका ही देता है. उसका पूरा चेहरा खिल खिला सा लग रहा था)

दीपू भी दिनेश से गले लगता है और उसे फिर से बधाई देता है.

और ऐसे ही दीपू ऋतू आंटी को भी बधाई देता है और उसके गले भी लग जाता है. गले लगने से ऋतू ही मस्त ठोस चूची भी दीपू के सीने में दब जाती है और आज पहली बार ऐसा होता ही जब उसे उसके और दिनेश की बात याद आती है की वो भी उसकी माँ की तरह अपने जवानी के उत्तम समय में है. वो मन में सोचता है की दिनेश सही कह रहा है की उसे भी एक मर्द की ज़रुरत है और सोचता है की बिस्तर पे वो नंगी कैसे होगी. (जैसा ऊपर में लिखा था... आज वो पहली बार था जब दीपू ऋतू को देख कर उसे ऐसे ख़याल आते है. इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. ये और बात थी की कुछ दिन पहले ही दिनेश और दीपु ने ऋतू के बारे में बात किया था.)… लेकिन फिर वो सब बातें अपने ध्यान से हटा देता है की वो गलत सोच रहा है. वो उसकी दोस्त की माँ है और उसकी बहिन की सास. तो ऐसा सोचना अच्छा नहीं रहेगा… लेकिन आगे कब क्या और कैसे होने वाला है ये किसी को पता नहीं था….

सब लोग उनसे मिलने आते है और उनको बधाई देकर खाना खा कर चले जाते है... लेकिन उनमें से १- २ ऐसे थे जो दिनेश और दीपू को घूरे जा रहे थे. दीपू की नज़र उनपर एक बार पड़ती है तो उसे कुछ ठीक नहीं लगता जैसे शायद कोई अनहोनी होने वाली हो लेकिन इस वक़्त वो ज़्यादा ध्यान नहीं देता क्यूंकि सब ख़ुशी के मूड में थे और सब लोग हस कर अपना वक़्त बिता रहे थे.

ऑफिस के सब लोग चले जाने के बाद सिर्फ घर वाले ही रह जाते है और सब के जाने के बाद जब ऋतू की नज़र कविता पे जाती है तो पूछती है की ये कौन है. (ऋतू को कविता के बारे में पता नहीं था. उसे सिर्फ वसु और दिव्या के बारे में ही पता था).

अब समय आ गया था जब दीपू को ऋतू को अपनी तीसरी शादी की बात बतानी थी. उसकी किस्मत अच्छी थी की उसने दिनेश को पहले ही ये खबर दी थी वरना और मुश्किल हो जाता. जब ऋतू कविता के बारे में पूछती है तो वसु और दिव्या दोनों एक दुसरे की तरफ देख कर कुछ नहीं कह पा रहे थे तो वहीँ दीपू भी सोच रहा था की क्या बोले और वो दिनेश की तरफ देखता है.

दिनेश को समझ आता है की बात को उसे ही संभालना है तो दिनेश कहता है: माँ ये और कोई नहीं दिनेश की तीसरी बीवी है. नाम कविता है .उनकी शादी भी मेरी तरह ही ऐसे हालत में हुई की इन्हे समय ही नहीं मिला की हमें बताएं. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा आश्चर्य हो जाती है लेकिन अपने आप को संभालते हुए वो कविता को उसके पास बुला कर उसके माथे पे प्यार से एक चुम्मा देकर उसे आशीर्वाद देती है. जब ऋतू ऐसा करती है तो सब की जान में जान आती है और दीपू दिनेश को और देख कर एक तरह से उसे धन्यवाद देता है.

ऋतू दीपू की और देख कर... तुम और कितने ऐसे सुरपरिसेस दोगे? और मज़ाक में कहती है की दो काफी नहीं थे क्या.. जो तुमने तीसरी शादी कर ली है. इस बात पर दीपू और वसु कुछ नहीं कहते क्यूंकि उनको पता था आगे और कुछ भी संभव हो सकता है.

ऋतू: वैसे तुम्हारी तीसरी बीवी भी बहुत सुन्दर है और फिर ऐसे ही सब मज़ाक और बातें करते हुए खाना खाते है. खाना खाते वक़्त दीपू चोर नज़रों से अपनी बीवियों को देख रहा था क्यूंकि सब लोग सेक्सी दिख रहे थे और ऋतू की बात से उसे भी ठरकी बना दिया था.

सबसे पहले कविता खाना ख़तम करती है और फिर जब सब बातें करते हुए अपने खाने में मगन थे तो वो कहती है की वो अपना प्लेट किचन में रख के आ जायेगी. ऋतू मना करती है की उसकी कोई ज़रुरत नहीं है. यहीं पे बैठी रहो. जब सब का हो जाएगा तो एक साथ टेबल साफ़ कर देंगे. लेकिन कविता नहीं मानती और वो उठ कर अपनी गांड मटकाते हुए किचन में चली जाती है.

64f0185fcd43457b8ae9841674343ec0.gif


उसको देख कर दीपू भी अपना खाना ख़तम कर लेता है और कविता के पीछे चला जाता है. ऋतू से बात करते हुए वसु एक तिरछी नज़र दीपू पे डालती है और मन में सोचती है की कविता तो गयी.... और फिर नार्मल तरीके से बाकी सब से बात करती रहती है. किचन में कविता अपना प्लेट रख रही होती है तो चुपके से दीपू भी उसके पीछे आ जाता है और उसके साथ अपना हाथ दो कर उसके गले को किस करता है. कविता तो पहले चकमा जाती है और थोड़ा डर भी जाती है लेकिन दीपू को देख कर कहती है की यहाँ क्या कर रहे हो? दूसरों का घर है और कोई भी आ सकता है. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था. वो कविता की मस्त ठोस चूची को दबाते हुए गले को किस करते हुए कहता है...

545c0aa2032d3debfca49d30135f5c9c.gif


तुम आज सब लोग एक से बढ़कर एक माल लग रहे हो. तुम सब एक साथ ऐसे सेक्सी बन कर आओगे तो मेरे बारे में कुछ सोचा नहीं क्या की मेरा क्या होगा? और ऐसे ही उसकी चूची दबाते हुए उसका हाथ अपने लंड पे रखते हुए कहता है... देखो कैसे तन कर तुम्हारी गांड में जाना चाहता है. कविता भी अब बहकने लगती है और कहती है...Pls यहाँ मत करो ना... घर चलो ना... फिर मैं ही तुम्हारे पास आऊँगी और चुदुँगी..

दीपू: वो तो घर की बात है लेकिन पहले मुझे तुम्हारे होंटो का रस चूसने दो...

GIF-20260117-215728-758.gif


और ऐसा कहते हुए वो कविता को दीवार से सत्ता कर उसके होंठ चूसने लग जाता है जिसमें अब कविता भी उसका पूरा साथ देती है.

IMG-20221201-185211.jpg


दीपू उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूचियां भी ब्लाउज के ऊपर से दबाता रहता है. इतने में उन्हें किसीके आने की आहट होती है तो दोनों अलग हो जाते है और फिर अपने आप को ठीक करके पहले दीपू निकल जाता है वहां से और उसके पीछे कविता भी १ Min बाद निकल जाती है.

फिर थोड़ी देर बाद सब लोग खाना खा कर बैठ कर बातें करते रहते है तो वसु सामान लेकर किचन में जाती है रखने. उसके पीछे ऋतू भी आ जाती है और वसु को देखती है तो देखती ही रह जाती है.

IMG-7742.jpg


क्यूंकि उस पोजीशन में वसु की ठोस चूचियां और बहार को निकली हुई गांड एकदम साफ़ नज़र आ रही थी. . उसको देख कर उसके बगल में आकर

ऋतू: १-२ महीनों में तू तो बहुत गदरा गयी है. देख ये तेरी उठी हुई गांड और उसकी गांड पे एक चपत मार देती है.

वसु: oooh….oouucchh…क्या कर रही है? कोई देख लेगा ना.

ऋतू: कोई नहीं देखेगा. सब अपने बातों में मगन है. वैसे भी अभी थोड़ी देर पहले दीपू और कविता को यहाँ आते देखा था तो अब कोई नहीं आएगा. उसको देख कर... लगता है तू तो बहुत मजे कर रही है.

वसु ऋतू से बात सुनकर हस देती है और कहती है.. तू ठीक ही कह रही है. वैसे एक बात पूछूं?

ऋतू: पूछ.

वसु: तू भी तो बहुत गदरायी हुई है और ऐसा कहते हुए एक बार बहार देखते हुए जब वहां कोई नहीं था तो आगे आकर उसकी चूची को दबा देती है. तू इतनी मस्त बदन को लेके कैसे रहती है? तेरी इच्छा नहीं होती क्या?

ऋतू: हाँ सही कह रही है. मैं भी आग में जल रही हूँ. मेरी भी इच्छा होती है लेकिन डरती हूँ की दिनेश क्या सोचेगा.

वसु: अरे इसमें डरने की क्या बात है? अब तो उसकी भी शादी हो गयी है. वो भी अब समझ जाएगा. अगर तेरी नज़र में कोई लड़का है तो बोल मैं बात करती हूँ.. और अगर नहीं है तो मैं ही तेरे लिए ढूढ़ देती हूँ और ऐसा कहते हुए ऋतू को आँख मार देती है. दोनों फिर अपना काम करते है और बाहर आने से पहले वसु ऋतू को दीवार से सटा कर... जाने से पहले तेरी आग और थोड़ा भड़काती हूँ ताकि तू भी जल्दी से मेरी तरह और गदरायी बन जा.. और ऐसा कहते हुए वो ऋतू के होंठ चूम लेती है. ऋतू को तो पहले झटका लगता लेकिन वो भी समझ जाती है और वो भी वापिस वसु को चूम लेती है.

porn-gif-magazine-teensex201439.gif


२ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अपने आप को ठीक कर के बाहर आ जाते है और बाकी सब के साथ बात करने लग जाते है.

बाहर जाने से पहले..

ऋतू: वैसे तू मुझे खुश खबर कब दे रही है?

वसु: पता नहीं यार.. दीपू तो हमेशा कहते रहता है की वो भी जल्दी बाप बने.. लेकिन मैं ही मना करती रहती हूँ.

ऋतू: मेरी बात मान तो तू भी जल्दी पेट से हो जा.. अब तेरी उम्र भी हो रही है. अगर और देर हो गया तो फिर मुश्किल भी हो सकता है. वैसे तू खुश तो है ना?

वसु: हाँ यार बहुत खुश हूँ. वो तो मुझे बहुत खुश रकता है. और उसके प्यार करने का तरीका भी बहुत मस्त है.

वो तो उसके बाप से भी एक कदम बढ़ कर है. मुझे तो पूरी तरह थका ही देता है लेकिन वो फिर भी नहीं रुकता. मेरी तो किस्मत अच्छी है की जब मैं थक जाती हूँ तो दिव्या और कविता उस पर टूट पड़ते है तो मुझे थोड़ी राहत मिलती है.

उसके बारे में सोचते हुए ही मैं तो बहुत बार गीली भी हो जाती हूँ.

ऋतू: अरे वाह... तुम सब के तो बड़े मजे हो रहे है फिर . ये तो बहुत अच्छी बात है. जल्दी से अब काम में लग जा और जब हम अगली बार मिलेंगे तो मुझे तुझ से खुश खबर सुन्ना है और फिर से इस बार ऋतू वसु को चूम लेती है और दोनों बाहर आ जाते है.

फिर सब लोग १०- १५ Min और बातें करते है और फिर वसु और बाकी सब भी ऋतू और दिनेश से इज़ाज़त लेते है और अपने घर की और निकल जाते है... दोनों परिवार अपने अपने ख्यालों के बारे में सोचते रहते है... वसु जो कुछ देर पहले ऋतू से बात की थी... और दिनेश जो २- ३ दिन पहले दीपू से अपने मन की बात किया था...
Bhut hi badhiya update Bhai
Dinesh ne apni baat dipu ko bata Di hai
Dhekte hai ab dinesh aur nisha ke honeymoon par kya baate hoti hai
 
  • Like
Reactions: Napster

dhparikh

Well-Known Member
13,705
15,833
228
28th Update (दिनेश की दिल की बात और पार्टी)

दिनेश: जान ये भी कोई पूछने वाली बात है? और फिर दिनेश निशा को अपनी बाहों में लेकर दोनों सुकून की नींद मं चले जाते है.


अब आगे..

अगली सुबह सब अपने काम में लग जाते है और फिर दीपू भी तैयार हो जाता है और जाने से पहले तीनो को मस्त चूमता है और साथ में गांड भी दबाते हुए अपने काम के लिए निकल जाता है.

वसु अपना काम कर रही थी तो उसे कुछ याद आता है और फिर वो दीपू की बुआ लता को फ़ोन करती है.

वसु लता से: दीदी कैसी हो?

लता: क्या बात है... इतने दिनों बाद हम तुम्हे याद आये? मुझे लगा तुम हम सब को भूल ही गए हो. लगता है शादी के बाद बहुत मजे ले रही हो.

वसु: ऐसा नहीं है दीदी... काम में सब उलझ गए थे और दीपू का बिज़नेस भी बढ़ रहा है तो वो भी बिजी रहता है. वैसे आपसे एक बात बताना था.

लता उसको छेड़ते हुए: कोई खुश खबर है क्या?

वसु ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. बात वो नहीं है.

लता: तो फिर क्या है?

वसु: यही की माँ बाबा गुज़र गए है.

लता ये सुनके एकदम शॉक हो जाती है और कहती है कब कैसे और उन्हें क्यों नहीं बताया?

वसु; दीदी: बात बहुत जल्दी हो गया. उन दोनों की तबियत एकदम बहुत ज़्यादा खराब हो गयी और डॉक्टर्स ने कहा तो की वो दोनों १- २ दिन के मेहमान ही है. इन सब में जब हम वहां घर पहुंचे तो हालत बहुत बिगड़ गयी थी.

लता: सुनकर बहुत दुःख हुआ. वसु, अब बाकी घर वाले कैसे है? मैं जल्दी ही समय निकल कर आती हूँ.

वसु: ठीक है जब भी समय मिलेगा तो आ जाना. हमें भी अच्छा लगेगा. वैसे एक और बात बतानी थी.

लता: अब और क्या?

वसु: थोड़ा झिझकते हुए... बात ये है की जब माँ बाबा अपने अंत के बहुत नज़दीक थे तो उन्होंने इक इच्छा ज़ाहिर की थी.

लता: क्या?

वसु: यही की वो जाने से पहले निशा की शादी देखना चाहते थे. और जैसे आपको पता है निशा और दिनेश की हम शादी अगले महीने ही करने वाले थे. लेकिन इन सब के चलते हमने उन दोनों की शादी माँ बाबा के सामने जल्दी कर दी. बस यही उनकी आखरी इच्छा थी (वो दूसरी इच्छा बताती नहीं है लता को... मीना के बारे में). वो लोग भी निशा की शादी देख कर बहुत खुश हो गए और फिर वो भी भगवान् के घर चले गए.

लता: हम्म...दुःख तो बहुत हुआ लेकिन अच्छा किया की उनकी आखरी इच्छा पूरी कर दी. मैं जल्दी ही वहां आती हूँ और फिर सब से मिल भी लेती हूँ.

वसु: जी... ज़रूर आईये... हम सब को आपके आने का इंतज़ार रहेगा और फिर ऐसे ही कुछ और बातें कर के वसु फ़ोन कट कर देती है.


दिनेश की दिल की बात...

दीपू ऑफिस जाता है और फिर दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और फिर उससे गले लग जाता है.

दीपू: यार तू तो जानता है की हालत कैसे थे. बस नाना नानी की आखरी इच्छा थी... इसीलिए जल्दी ही तुम्हारी शादी कर दी नहीं तो हम सब तुम दोनों की शादी बहुत धूम धाम से करना चाहते थे.

दिनेश: हाँ मैं भी जानता हूँ. माँ भी कह रही थी की वो भी मेरी शादी ऐसे ही करना चाहती थी लेकिन क्या करे. लेकिन कोई दुःख नहीं. उनके चेहरे पे वो ख़ुशी देख कर जब हम दोनों की शादी हो गयी थी तो हमें भी काफी अच्छा लगा.

दीपू ये बात सुनकर फिर से दिनेश से गले लग जाता है.

दिनेश: तू चिंता मत कर. अगले हफ्ते में घर में पार्टी रखता हूँ... सब के लिए. तुम लोग भी सब आना. निशा को भी बहुत अच्छा लगेगा.

दीपू: ज़रूर आएंगे.. वैसे निशा कैसी है? कोई तकलीफ तो नहीं दे रही है ना तुझे और हस देता है.

दिनेश: वो कैसी है देखना है तो आज शाम घर चल... तू ही देख ले.

दीपू: नहीं यार उसकी ज़रुरत नहीं है. हम अगले हफ्ते आने ही वाले है ना तो तब उससे मिल लेंगे.

दोनों फिर अपने काम में लग जाते है. कुछ समय बाद दीपू को याद आता है तो वो दिनेश से कहता है.

दीपू: अरे यार जब तू होली में बहार गया था तो तूने मुझे फ़ोन कर के बताया था की तुझे मुझसे कुछ बात करनी है. दिनेश को वो बात याद आती है तो कहता है... सुन चल हम बाहर कहीं जाते है और वहीँ तुझसे बात करता हूँ. दीपू दिनेश की तरफ सवालिया नज़र से देखता है तो दिनेश कुछ नहीं कहता और कहता ही की वो लोग बाद में बात करेंगे.

फिर दोनों दोपहर को खाना खा कर बाहर चले जाते है. गाँव से थोड़ा दूर वो दोनों एक अच्छे जगे में जाते है और वहां बातें करने के लिए बैठ जाते है.

दीपू: तो बता तू मुझसे क्या बात करना छा रहा था.

दिनेश भी थोड़ा झिझकता है और उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो बात को कैसे आगे बढाए.

दीपू उसकी और देख कर कहता है.. यार हम दोनों बचपन के दोस्त है और अब तो तू मेरा जीजा भी हो गया है तो मुझे कैसे शर्माना. जो भी हो बोल दे... क्या पता शायद मैं तेरी मदत कर दूँ.

दिनेश: फिर से थोड़ा हिचखिचाते हुए.. यार मैं सोच रहा तह की तूने कैसे २ शादियां कर ली है? वो भी अपने माँ और मौसी से?

दीपू ये बात सुनकर हस देता है और कहता है... लगता है तुझे अब और बात बताना पड़ेगा.

दिनेश दीपू की तरफ देख कर: क्या?

दीपू: यही की मेरी तीसरी शादी भी हो गयी है और ये बात निशा को भी पता है.

दिनेश: जब ये बात सुनता है तो वो अपना मुँह खोले आश्चर्य से दीपू को देखता रह जाता है.

दीपू: ज़्यादा सोच मत.. शायद ये मेरी ज़िन्दगी में लिखा था.

दिनेश: अपने आप को थोड़ा संभालते हुए.. वैसे तीसरी बीवी कौन है?

दीपू भी थोड़ा शर्माते हुए: वो मेरी मामी की मम्मी है. मैं ज़्यादा कुछ नहीं बताऊंगा.. लेकिन जो होना था वो हो गया.. अब मैं उसे बदल नहीं सकता. खैर मेरी छोड़. तू बता तू क्या कहना छा रहा था.

दिनेश: मेरी भी कुछ ऐसी ही समस्या है भाई.

दीपू: क्या समस्या है?

दिनेश: जब हम होली में गए थे तब पहली बार मुझे मेरी माँ पे ध्यान आया और मुझे भी लगा की वो भी थोड़ी बहुत एक आदमी को अपनी ज़िन्दगी में मिस करती है और शायद चाहती है की उसको भी एक आदमी का सहारा मिल जाए तो बहुत अच्छा होगा उसके लिए.

दीपू: अरे ये तो बहुत अच्छी बात है यार... तू भी सही कह रहा है. आंटी की उम्र भी मेरी माँ जितनी है और मैं जानता हूँ की जब से मेरी माँ से शादी हुई है वो कितनी बदल गयी है और अब वो बहुत खुश भी है. तू सही कह रहा है. अगर आंटी फिर से शादी कर ले तो उनकी ज़िन्दगी भी खुशाल हो जायेगी.

दिनेश: तेरी बात भी सही है... लेकिन मैं सोच रहा था की कौन उससे अभी शादी करेगा... और फिर मुझे तेरी याद आयी की वसु आंटी को तुझसे कोई बेहतर आदमी नहीं मिल सकता है तो यही बात माँ पे भी बन सकता है.... और ऐसा कहते हुए दिनेश रुक जाता है.

दोपहर की थोड़ी ठण्डी हवा में ये बात एकदम हवे में ही रह जाती है. पहले तो दीपू को समझ नहीं आता की दिनेश क्या कहना चाहता है.... लेकिन जल्दी ही वो बात समझ जाता है और कहता है... तो जनाब ये बात है.. तू भी मेरी तरह आंटी से शादी करना चाहता है ना... बोल मेरी सोच सही है ना?

दिनेश भी थोड़ा शर्माते हुए हाँ कहता है.

दिनेश: तू क्या सोचता है इसके बारे में?

दीपू: वैसे तेरी बात भी सही है. आंटी के लिए तेरे से अच्छा और कोई लड़का नहीं मिल सकता.

दीपू: सुन भाई... मैं तुझे इतना ही कहूंगा की अगर आंटी राज़ी हो जाए और वो भी बिना किसीके दबाव में और वो खुद कहे ही वो भी तेरे से शादी करने के लिए तैयार है तो बात आगे बढ़ा. लेकिन उससे पहले में यह कहुंगा की तू आंटी से बात करने से पहले निशा से बात कर ले क्यूंकि याद रख. वो तेरी पहली बीवी है. उसके पीछे तू उसे बिना बातये आंटी से बात करेगा तो उसे बड़ा झटका लगेगा और वो अगर नहीं मानी तो फिर बहुत पन्गा हो जाएगा.

(दीपू दिनेश को आंटी के साथ शादी नहीं करने की सलाह नहीं दे सकता था क्यूंकि वो खुद ही तीन शादी किया और वो भी खुद अपनी माँ और रिश्तेदार के साथ)

दिनेश: तू सही कह रहा है यार. निशा से पहले बात करना पड़ेगा और जानना पागेगा की वो क्या सोचेगी इसके बारे में. वैसे मैं सोच रहा था की अगले हफ्ते हम हनीमून जाने का प्लान कर रहे है तो मैं उसे उसी वक़्त इस बात के बारे में बात करता हूँ.

दीपू: हाँ ये सही रहेगा. अगर वो मानती नहीं है तो एक बार मुझे भी बताना. मैं उससे बात करता हूँ. वो मेरी बात कभी नहीं टालती... लेकिन अगर बात यहाँ तक ना आये और वो खुद भी मान जाए तो बहुत अच्छा होगा.

दिनेश: हाँ यार तू सही कह रहा है.

दीपू: लेकिन एक बात याद रख.. आंटी तो तू कैसे मनाएगा वो तुझ पर निर्भर करता है लेकिन कोई ज़ोर ज़बरदस्ती मत करना. अगर वो तेरे दबाव में आकर शादी कर ले तो आगे जा कर बहुत मुश्किल होगा और सब की ज़िन्दगी में परेशानी भी आ सकती है.

दिनेश: तू सही कह रहा है. देखता हूँ की मैं माँ को कैसे मनाऊं. लेकिन उससे पहले मुझे निशा से बात करनी पड़ेगी.

फिर वो दोनों ऐसे ही कुछ और बातें करते है और फिर वहां से ऑफिस के लिए निकल जाते है और शाम को दोनों अपने अपने घर चले जाते है.

यहाँ जब दिनेश और दीपू बात कर रहे होते है तो वहीँ दीपू के घर में तीनो आँगन में बैठे हुए थे.


तीनो की छेड़ छाड़ ....

दिव्या: आज शायद पहली बात इस घर में और कोई नहीं है. पिछले हफ्ते तक तो निशा और मीना भी रहते थे... लेकिन अब घर में हम ही रह गए है.

कविता: हाँ तू सही कह रही है. वैसे तेरे कहना का क्या मतलब है?

दिव्या: यही सोच रही हूँ की दीपू आज हम तीनो के साथ क्या करेगा और यही सोचते हुए में पूरी गीली हो रही हूँ. मेरी पैंटी पूरी गीली हो गयी थी तो अब मैं उसे उतार भी चुकी हूँ.

वसु: तेरे को तो बड़ी ठरक छड़ी हुई है..

दिव्या: क्यों दीदी आप नहीं हो क्या? और ऐसा कहते हुए दिव्या वसु की एक चूची को पकड़ कर मसलते हुए दबा देती है और देखती है की उसके निप्पल्स ब्लाउज में से एकदम तनी हुई है. आप मुझसे कह रहे हो लेकिन आप खुद ही उत्तेजित हो और कविता की तरफ देख कर: देखो कैसे इनके निप्पल्स एकदम तने हुए है.

वसु: चुप कर.. तू कुछ भी बकवास करती रहती है. ये दोनों को देख कर कविता वसु के पास आकर कहती है... तुम्हारी पैंटी भी पूरी गीली है क्या और ऐसा कहते हुए कविता अपना हाथ वसु के साडी के अंदर दाल कर उसकी चूत को छूती है तो अपना हाथ निकल कर बड़ी आँखें करती हुई.. ओह रे...

तू तू हम सब से भी आगे है और अपना गीला हाथ दिव्या को दिखा कर अपनी ऊँगली को चाटते हुए... इसने तो पैंटी पहनी ही नहीं है और देख कैसी इसका रस बह रहा है और कहती है... ये तो बहुत स्वादिष्ट है और फिर से ऊँगली चाट लेती है.

वसु ये देख कर एकदम शर्मा जाती है और आँगन से कमरे में जाने को उठती है तो दिव्या उसे रोक लेती है और वही दीवान में उसे सुला कर... क्यों भाग रही हो दीदी? मेरी पैंटी गीली है तो मैं ठरकी.. तो फिर तुम क्या हो?

वसु शर्मा कर कुछ नहीं कहती तो कविता उसके बगल में बैठ कर उसके होंठ चूमते हुए कहती है.. तू ठरकी है तो ये तो एकदम पूरी चुदासी हो गयी है और फिर तीनो हस देते है.

वसु कविता से: हम दोनों ठरकी और चुदासी है तो हम दोनों से आगे ही बढ़ चुकी है और उसकी गांड को चिमटी काटते हुए.. हम तो यहाँ से कुंवारे है.. तूने तो अपनी गांड भी मरवा ली है.

कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. चिंता मत करो.. जल्दी ही तुम दोनों की गांड का उद्धघाटन जल्दी ही होने वाला है. वो तो गांड का बड़ा दीवाना है और मुझे तो आश्चर्य है की तुम जैसी मस्त बड़ी गांड वाली कैसे अब तक बच गयी.. इस बात पे तीनो हस देते है और ऐसे ही कामुक बातों से तीनो भी गरम हो जाते है लेकिन इससे ज़्यादा वो और कुछ नहीं करते और कमरे में जाकर तीनो ही एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.


दिनेश के घर में पार्टी:

२- ३ दिन बात जैसे ऋतू और दिनेश ने बताया था... वो अपने घर में एक छोटा सा पार्टी रखते है और अपने ऑफिस के कुछ काम करने वाले लोगों को भी बुलाते है. जब दीपू वसु और बाकी लोग उनके घर जाते है तो तीनो पहले ही उनका इंतज़ार कर रहे थे. जहाँ दिनेश कुरता और पयजामा पहन कर स्मार्ट लग रहा था वहीँ निशा और ऋतू भी सज धज कर एकदम सेक्सी लग रही थी.

9dd89b7c5bcd856214024746aaf13a2b.jpg


0-A-Saree31.jpg


IMG-8301.jpg


उन दोनों को देख कर पहली बार दीपू भी डगमगा जाता है क्यूंकि वो दोनों उतनी कामुक और सेक्सी लग रही थी.

वहीँ वसु, दिव्या और कविता भी एकदम मस्त माल लग रही थी. सब ने कपडे ऐसे पहने थे जो छुपा काम रहे थे और दिखा ज़्यादा रहे थे.

6d728c8f79bd6259dbb63d8af986d568.jpg


Teej-0c587a561f244b0481fa68f76e0625f3.jpg


Teej-93e1baf93eb4da92bdcf6a1d50b2e214.jpg


वसु निशा को देख कर एकदम खुश हो जाती है और जाकर उसके गले लग जाती है. निशा भी अपनी माँ को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वैसे ही हाल दोनों दिव्या और कविता का भी था. ऑफिस के कुछ लोग जो आए थे उनमें से १- २ लोग तो वहां की महिलाओं को देख कर अपना लार टपका रहे थे... लेकिन बात वहीँ तक रह जाती है. दीपू भी निशा और दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और जाकर निशा को भी अपनी बाहों में लेकर उसके हाल चाल पूछता है. निशा एकदम खुश नज़र आ रही थी...

(और खुश भी क्यों ना हो.. जब से वो इस घर में आयी है रोज़ दिनेश और निशा रात को मस्त चुदाई करते है और दिनेश तो उसे पूरा थका ही देता है. उसका पूरा चेहरा खिल खिला सा लग रहा था)

दीपू भी दिनेश से गले लगता है और उसे फिर से बधाई देता है.

और ऐसे ही दीपू ऋतू आंटी को भी बधाई देता है और उसके गले भी लग जाता है. गले लगने से ऋतू ही मस्त ठोस चूची भी दीपू के सीने में दब जाती है और आज पहली बार ऐसा होता ही जब उसे उसके और दिनेश की बात याद आती है की वो भी उसकी माँ की तरह अपने जवानी के उत्तम समय में है. वो मन में सोचता है की दिनेश सही कह रहा है की उसे भी एक मर्द की ज़रुरत है और सोचता है की बिस्तर पे वो नंगी कैसे होगी. (जैसा ऊपर में लिखा था... आज वो पहली बार था जब दीपू ऋतू को देख कर उसे ऐसे ख़याल आते है. इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. ये और बात थी की कुछ दिन पहले ही दिनेश और दीपु ने ऋतू के बारे में बात किया था.)… लेकिन फिर वो सब बातें अपने ध्यान से हटा देता है की वो गलत सोच रहा है. वो उसकी दोस्त की माँ है और उसकी बहिन की सास. तो ऐसा सोचना अच्छा नहीं रहेगा… लेकिन आगे कब क्या और कैसे होने वाला है ये किसी को पता नहीं था….

सब लोग उनसे मिलने आते है और उनको बधाई देकर खाना खा कर चले जाते है... लेकिन उनमें से १- २ ऐसे थे जो दिनेश और दीपू को घूरे जा रहे थे. दीपू की नज़र उनपर एक बार पड़ती है तो उसे कुछ ठीक नहीं लगता जैसे शायद कोई अनहोनी होने वाली हो लेकिन इस वक़्त वो ज़्यादा ध्यान नहीं देता क्यूंकि सब ख़ुशी के मूड में थे और सब लोग हस कर अपना वक़्त बिता रहे थे.

ऑफिस के सब लोग चले जाने के बाद सिर्फ घर वाले ही रह जाते है और सब के जाने के बाद जब ऋतू की नज़र कविता पे जाती है तो पूछती है की ये कौन है. (ऋतू को कविता के बारे में पता नहीं था. उसे सिर्फ वसु और दिव्या के बारे में ही पता था).

अब समय आ गया था जब दीपू को ऋतू को अपनी तीसरी शादी की बात बतानी थी. उसकी किस्मत अच्छी थी की उसने दिनेश को पहले ही ये खबर दी थी वरना और मुश्किल हो जाता. जब ऋतू कविता के बारे में पूछती है तो वसु और दिव्या दोनों एक दुसरे की तरफ देख कर कुछ नहीं कह पा रहे थे तो वहीँ दीपू भी सोच रहा था की क्या बोले और वो दिनेश की तरफ देखता है.

दिनेश को समझ आता है की बात को उसे ही संभालना है तो दिनेश कहता है: माँ ये और कोई नहीं दिनेश की तीसरी बीवी है. नाम कविता है .उनकी शादी भी मेरी तरह ही ऐसे हालत में हुई की इन्हे समय ही नहीं मिला की हमें बताएं. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा आश्चर्य हो जाती है लेकिन अपने आप को संभालते हुए वो कविता को उसके पास बुला कर उसके माथे पे प्यार से एक चुम्मा देकर उसे आशीर्वाद देती है. जब ऋतू ऐसा करती है तो सब की जान में जान आती है और दीपू दिनेश को और देख कर एक तरह से उसे धन्यवाद देता है.

ऋतू दीपू की और देख कर... तुम और कितने ऐसे सुरपरिसेस दोगे? और मज़ाक में कहती है की दो काफी नहीं थे क्या.. जो तुमने तीसरी शादी कर ली है. इस बात पर दीपू और वसु कुछ नहीं कहते क्यूंकि उनको पता था आगे और कुछ भी संभव हो सकता है.

ऋतू: वैसे तुम्हारी तीसरी बीवी भी बहुत सुन्दर है और फिर ऐसे ही सब मज़ाक और बातें करते हुए खाना खाते है. खाना खाते वक़्त दीपू चोर नज़रों से अपनी बीवियों को देख रहा था क्यूंकि सब लोग सेक्सी दिख रहे थे और ऋतू की बात से उसे भी ठरकी बना दिया था.

सबसे पहले कविता खाना ख़तम करती है और फिर जब सब बातें करते हुए अपने खाने में मगन थे तो वो कहती है की वो अपना प्लेट किचन में रख के आ जायेगी. ऋतू मना करती है की उसकी कोई ज़रुरत नहीं है. यहीं पे बैठी रहो. जब सब का हो जाएगा तो एक साथ टेबल साफ़ कर देंगे. लेकिन कविता नहीं मानती और वो उठ कर अपनी गांड मटकाते हुए किचन में चली जाती है.

64f0185fcd43457b8ae9841674343ec0.gif


उसको देख कर दीपू भी अपना खाना ख़तम कर लेता है और कविता के पीछे चला जाता है. ऋतू से बात करते हुए वसु एक तिरछी नज़र दीपू पे डालती है और मन में सोचती है की कविता तो गयी.... और फिर नार्मल तरीके से बाकी सब से बात करती रहती है. किचन में कविता अपना प्लेट रख रही होती है तो चुपके से दीपू भी उसके पीछे आ जाता है और उसके साथ अपना हाथ दो कर उसके गले को किस करता है. कविता तो पहले चकमा जाती है और थोड़ा डर भी जाती है लेकिन दीपू को देख कर कहती है की यहाँ क्या कर रहे हो? दूसरों का घर है और कोई भी आ सकता है. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था. वो कविता की मस्त ठोस चूची को दबाते हुए गले को किस करते हुए कहता है...

545c0aa2032d3debfca49d30135f5c9c.gif


तुम आज सब लोग एक से बढ़कर एक माल लग रहे हो. तुम सब एक साथ ऐसे सेक्सी बन कर आओगे तो मेरे बारे में कुछ सोचा नहीं क्या की मेरा क्या होगा? और ऐसे ही उसकी चूची दबाते हुए उसका हाथ अपने लंड पे रखते हुए कहता है... देखो कैसे तन कर तुम्हारी गांड में जाना चाहता है. कविता भी अब बहकने लगती है और कहती है...Pls यहाँ मत करो ना... घर चलो ना... फिर मैं ही तुम्हारे पास आऊँगी और चुदुँगी..

दीपू: वो तो घर की बात है लेकिन पहले मुझे तुम्हारे होंटो का रस चूसने दो...

GIF-20260117-215728-758.gif


और ऐसा कहते हुए वो कविता को दीवार से सत्ता कर उसके होंठ चूसने लग जाता है जिसमें अब कविता भी उसका पूरा साथ देती है.

IMG-20221201-185211.jpg


दीपू उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूचियां भी ब्लाउज के ऊपर से दबाता रहता है. इतने में उन्हें किसीके आने की आहट होती है तो दोनों अलग हो जाते है और फिर अपने आप को ठीक करके पहले दीपू निकल जाता है वहां से और उसके पीछे कविता भी १ Min बाद निकल जाती है.

फिर थोड़ी देर बाद सब लोग खाना खा कर बैठ कर बातें करते रहते है तो वसु सामान लेकर किचन में जाती है रखने. उसके पीछे ऋतू भी आ जाती है और वसु को देखती है तो देखती ही रह जाती है.

IMG-7742.jpg


क्यूंकि उस पोजीशन में वसु की ठोस चूचियां और बहार को निकली हुई गांड एकदम साफ़ नज़र आ रही थी. . उसको देख कर उसके बगल में आकर

ऋतू: १-२ महीनों में तू तो बहुत गदरा गयी है. देख ये तेरी उठी हुई गांड और उसकी गांड पे एक चपत मार देती है.

वसु: oooh….oouucchh…क्या कर रही है? कोई देख लेगा ना.

ऋतू: कोई नहीं देखेगा. सब अपने बातों में मगन है. वैसे भी अभी थोड़ी देर पहले दीपू और कविता को यहाँ आते देखा था तो अब कोई नहीं आएगा. उसको देख कर... लगता है तू तो बहुत मजे कर रही है.

वसु ऋतू से बात सुनकर हस देती है और कहती है.. तू ठीक ही कह रही है. वैसे एक बात पूछूं?

ऋतू: पूछ.

वसु: तू भी तो बहुत गदरायी हुई है और ऐसा कहते हुए एक बार बहार देखते हुए जब वहां कोई नहीं था तो आगे आकर उसकी चूची को दबा देती है. तू इतनी मस्त बदन को लेके कैसे रहती है? तेरी इच्छा नहीं होती क्या?

ऋतू: हाँ सही कह रही है. मैं भी आग में जल रही हूँ. मेरी भी इच्छा होती है लेकिन डरती हूँ की दिनेश क्या सोचेगा.

वसु: अरे इसमें डरने की क्या बात है? अब तो उसकी भी शादी हो गयी है. वो भी अब समझ जाएगा. अगर तेरी नज़र में कोई लड़का है तो बोल मैं बात करती हूँ.. और अगर नहीं है तो मैं ही तेरे लिए ढूढ़ देती हूँ और ऐसा कहते हुए ऋतू को आँख मार देती है. दोनों फिर अपना काम करते है और बाहर आने से पहले वसु ऋतू को दीवार से सटा कर... जाने से पहले तेरी आग और थोड़ा भड़काती हूँ ताकि तू भी जल्दी से मेरी तरह और गदरायी बन जा.. और ऐसा कहते हुए वो ऋतू के होंठ चूम लेती है. ऋतू को तो पहले झटका लगता लेकिन वो भी समझ जाती है और वो भी वापिस वसु को चूम लेती है.

porn-gif-magazine-teensex201439.gif


२ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अपने आप को ठीक कर के बाहर आ जाते है और बाकी सब के साथ बात करने लग जाते है.

बाहर जाने से पहले..

ऋतू: वैसे तू मुझे खुश खबर कब दे रही है?

वसु: पता नहीं यार.. दीपू तो हमेशा कहते रहता है की वो भी जल्दी बाप बने.. लेकिन मैं ही मना करती रहती हूँ.

ऋतू: मेरी बात मान तो तू भी जल्दी पेट से हो जा.. अब तेरी उम्र भी हो रही है. अगर और देर हो गया तो फिर मुश्किल भी हो सकता है. वैसे तू खुश तो है ना?

वसु: हाँ यार बहुत खुश हूँ. वो तो मुझे बहुत खुश रकता है. और उसके प्यार करने का तरीका भी बहुत मस्त है.

वो तो उसके बाप से भी एक कदम बढ़ कर है. मुझे तो पूरी तरह थका ही देता है लेकिन वो फिर भी नहीं रुकता. मेरी तो किस्मत अच्छी है की जब मैं थक जाती हूँ तो दिव्या और कविता उस पर टूट पड़ते है तो मुझे थोड़ी राहत मिलती है.

उसके बारे में सोचते हुए ही मैं तो बहुत बार गीली भी हो जाती हूँ.

ऋतू: अरे वाह... तुम सब के तो बड़े मजे हो रहे है फिर . ये तो बहुत अच्छी बात है. जल्दी से अब काम में लग जा और जब हम अगली बार मिलेंगे तो मुझे तुझ से खुश खबर सुन्ना है और फिर से इस बार ऋतू वसु को चूम लेती है और दोनों बाहर आ जाते है.

फिर सब लोग १०- १५ Min और बातें करते है और फिर वसु और बाकी सब भी ऋतू और दिनेश से इज़ाज़त लेते है और अपने घर की और निकल जाते है... दोनों परिवार अपने अपने ख्यालों के बारे में सोचते रहते है... वसु जो कुछ देर पहले ऋतू से बात की थी... और दिनेश जो २- ३ दिन पहले दीपू से अपने मन की बात किया था...
Nice update....
 
  • Like
Reactions: Napster

rajeev13

Active Member
1,951
2,584
159
कहानी में दिनेश-दीपू का अपनी माँ के साथ पलंग तोड़ कुश्ती वकाई मजेदार हो सकती है। :freak:

अब देखना है दिनेश अपनी माँ ऋतू को कैसे राजी करेगा ! :what1:
 

Rajizexy

Punjabi Doc💊
Supreme
53,940
55,225
354
28th Update (दिनेश की दिल की बात और पार्टी)

दिनेश: जान ये भी कोई पूछने वाली बात है? और फिर दिनेश निशा को अपनी बाहों में लेकर दोनों सुकून की नींद मं चले जाते है.


अब आगे..

अगली सुबह सब अपने काम में लग जाते है और फिर दीपू भी तैयार हो जाता है और जाने से पहले तीनो को मस्त चूमता है और साथ में गांड भी दबाते हुए अपने काम के लिए निकल जाता है.

वसु अपना काम कर रही थी तो उसे कुछ याद आता है और फिर वो दीपू की बुआ लता को फ़ोन करती है.

वसु लता से: दीदी कैसी हो?

लता: क्या बात है... इतने दिनों बाद हम तुम्हे याद आये? मुझे लगा तुम हम सब को भूल ही गए हो. लगता है शादी के बाद बहुत मजे ले रही हो.

वसु: ऐसा नहीं है दीदी... काम में सब उलझ गए थे और दीपू का बिज़नेस भी बढ़ रहा है तो वो भी बिजी रहता है. वैसे आपसे एक बात बताना था.

लता उसको छेड़ते हुए: कोई खुश खबर है क्या?

वसु ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. बात वो नहीं है.

लता: तो फिर क्या है?

वसु: यही की माँ बाबा गुज़र गए है.

लता ये सुनके एकदम शॉक हो जाती है और कहती है कब कैसे और उन्हें क्यों नहीं बताया?

वसु; दीदी: बात बहुत जल्दी हो गया. उन दोनों की तबियत एकदम बहुत ज़्यादा खराब हो गयी और डॉक्टर्स ने कहा तो की वो दोनों १- २ दिन के मेहमान ही है. इन सब में जब हम वहां घर पहुंचे तो हालत बहुत बिगड़ गयी थी.

लता: सुनकर बहुत दुःख हुआ. वसु, अब बाकी घर वाले कैसे है? मैं जल्दी ही समय निकल कर आती हूँ.

वसु: ठीक है जब भी समय मिलेगा तो आ जाना. हमें भी अच्छा लगेगा. वैसे एक और बात बतानी थी.

लता: अब और क्या?

वसु: थोड़ा झिझकते हुए... बात ये है की जब माँ बाबा अपने अंत के बहुत नज़दीक थे तो उन्होंने इक इच्छा ज़ाहिर की थी.

लता: क्या?

वसु: यही की वो जाने से पहले निशा की शादी देखना चाहते थे. और जैसे आपको पता है निशा और दिनेश की हम शादी अगले महीने ही करने वाले थे. लेकिन इन सब के चलते हमने उन दोनों की शादी माँ बाबा के सामने जल्दी कर दी. बस यही उनकी आखरी इच्छा थी (वो दूसरी इच्छा बताती नहीं है लता को... मीना के बारे में). वो लोग भी निशा की शादी देख कर बहुत खुश हो गए और फिर वो भी भगवान् के घर चले गए.

लता: हम्म...दुःख तो बहुत हुआ लेकिन अच्छा किया की उनकी आखरी इच्छा पूरी कर दी. मैं जल्दी ही वहां आती हूँ और फिर सब से मिल भी लेती हूँ.

वसु: जी... ज़रूर आईये... हम सब को आपके आने का इंतज़ार रहेगा और फिर ऐसे ही कुछ और बातें कर के वसु फ़ोन कट कर देती है.


दिनेश की दिल की बात...

दीपू ऑफिस जाता है और फिर दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और फिर उससे गले लग जाता है.

दीपू: यार तू तो जानता है की हालत कैसे थे. बस नाना नानी की आखरी इच्छा थी... इसीलिए जल्दी ही तुम्हारी शादी कर दी नहीं तो हम सब तुम दोनों की शादी बहुत धूम धाम से करना चाहते थे.

दिनेश: हाँ मैं भी जानता हूँ. माँ भी कह रही थी की वो भी मेरी शादी ऐसे ही करना चाहती थी लेकिन क्या करे. लेकिन कोई दुःख नहीं. उनके चेहरे पे वो ख़ुशी देख कर जब हम दोनों की शादी हो गयी थी तो हमें भी काफी अच्छा लगा.

दीपू ये बात सुनकर फिर से दिनेश से गले लग जाता है.

दिनेश: तू चिंता मत कर. अगले हफ्ते में घर में पार्टी रखता हूँ... सब के लिए. तुम लोग भी सब आना. निशा को भी बहुत अच्छा लगेगा.

दीपू: ज़रूर आएंगे.. वैसे निशा कैसी है? कोई तकलीफ तो नहीं दे रही है ना तुझे और हस देता है.

दिनेश: वो कैसी है देखना है तो आज शाम घर चल... तू ही देख ले.

दीपू: नहीं यार उसकी ज़रुरत नहीं है. हम अगले हफ्ते आने ही वाले है ना तो तब उससे मिल लेंगे.

दोनों फिर अपने काम में लग जाते है. कुछ समय बाद दीपू को याद आता है तो वो दिनेश से कहता है.

दीपू: अरे यार जब तू होली में बहार गया था तो तूने मुझे फ़ोन कर के बताया था की तुझे मुझसे कुछ बात करनी है. दिनेश को वो बात याद आती है तो कहता है... सुन चल हम बाहर कहीं जाते है और वहीँ तुझसे बात करता हूँ. दीपू दिनेश की तरफ सवालिया नज़र से देखता है तो दिनेश कुछ नहीं कहता और कहता ही की वो लोग बाद में बात करेंगे.

फिर दोनों दोपहर को खाना खा कर बाहर चले जाते है. गाँव से थोड़ा दूर वो दोनों एक अच्छे जगे में जाते है और वहां बातें करने के लिए बैठ जाते है.

दीपू: तो बता तू मुझसे क्या बात करना छा रहा था.

दिनेश भी थोड़ा झिझकता है और उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो बात को कैसे आगे बढाए.

दीपू उसकी और देख कर कहता है.. यार हम दोनों बचपन के दोस्त है और अब तो तू मेरा जीजा भी हो गया है तो मुझे कैसे शर्माना. जो भी हो बोल दे... क्या पता शायद मैं तेरी मदत कर दूँ.

दिनेश: फिर से थोड़ा हिचखिचाते हुए.. यार मैं सोच रहा तह की तूने कैसे २ शादियां कर ली है? वो भी अपने माँ और मौसी से?

दीपू ये बात सुनकर हस देता है और कहता है... लगता है तुझे अब और बात बताना पड़ेगा.

दिनेश दीपू की तरफ देख कर: क्या?

दीपू: यही की मेरी तीसरी शादी भी हो गयी है और ये बात निशा को भी पता है.

दिनेश: जब ये बात सुनता है तो वो अपना मुँह खोले आश्चर्य से दीपू को देखता रह जाता है.

दीपू: ज़्यादा सोच मत.. शायद ये मेरी ज़िन्दगी में लिखा था.

दिनेश: अपने आप को थोड़ा संभालते हुए.. वैसे तीसरी बीवी कौन है?

दीपू भी थोड़ा शर्माते हुए: वो मेरी मामी की मम्मी है. मैं ज़्यादा कुछ नहीं बताऊंगा.. लेकिन जो होना था वो हो गया.. अब मैं उसे बदल नहीं सकता. खैर मेरी छोड़. तू बता तू क्या कहना छा रहा था.

दिनेश: मेरी भी कुछ ऐसी ही समस्या है भाई.

दीपू: क्या समस्या है?

दिनेश: जब हम होली में गए थे तब पहली बार मुझे मेरी माँ पे ध्यान आया और मुझे भी लगा की वो भी थोड़ी बहुत एक आदमी को अपनी ज़िन्दगी में मिस करती है और शायद चाहती है की उसको भी एक आदमी का सहारा मिल जाए तो बहुत अच्छा होगा उसके लिए.

दीपू: अरे ये तो बहुत अच्छी बात है यार... तू भी सही कह रहा है. आंटी की उम्र भी मेरी माँ जितनी है और मैं जानता हूँ की जब से मेरी माँ से शादी हुई है वो कितनी बदल गयी है और अब वो बहुत खुश भी है. तू सही कह रहा है. अगर आंटी फिर से शादी कर ले तो उनकी ज़िन्दगी भी खुशाल हो जायेगी.

दिनेश: तेरी बात भी सही है... लेकिन मैं सोच रहा था की कौन उससे अभी शादी करेगा... और फिर मुझे तेरी याद आयी की वसु आंटी को तुझसे कोई बेहतर आदमी नहीं मिल सकता है तो यही बात माँ पे भी बन सकता है.... और ऐसा कहते हुए दिनेश रुक जाता है.

दोपहर की थोड़ी ठण्डी हवा में ये बात एकदम हवे में ही रह जाती है. पहले तो दीपू को समझ नहीं आता की दिनेश क्या कहना चाहता है.... लेकिन जल्दी ही वो बात समझ जाता है और कहता है... तो जनाब ये बात है.. तू भी मेरी तरह आंटी से शादी करना चाहता है ना... बोल मेरी सोच सही है ना?

दिनेश भी थोड़ा शर्माते हुए हाँ कहता है.

दिनेश: तू क्या सोचता है इसके बारे में?

दीपू: वैसे तेरी बात भी सही है. आंटी के लिए तेरे से अच्छा और कोई लड़का नहीं मिल सकता.

दीपू: सुन भाई... मैं तुझे इतना ही कहूंगा की अगर आंटी राज़ी हो जाए और वो भी बिना किसीके दबाव में और वो खुद कहे ही वो भी तेरे से शादी करने के लिए तैयार है तो बात आगे बढ़ा. लेकिन उससे पहले में यह कहुंगा की तू आंटी से बात करने से पहले निशा से बात कर ले क्यूंकि याद रख. वो तेरी पहली बीवी है. उसके पीछे तू उसे बिना बातये आंटी से बात करेगा तो उसे बड़ा झटका लगेगा और वो अगर नहीं मानी तो फिर बहुत पन्गा हो जाएगा.

(दीपू दिनेश को आंटी के साथ शादी नहीं करने की सलाह नहीं दे सकता था क्यूंकि वो खुद ही तीन शादी किया और वो भी खुद अपनी माँ और रिश्तेदार के साथ)

दिनेश: तू सही कह रहा है यार. निशा से पहले बात करना पड़ेगा और जानना पागेगा की वो क्या सोचेगी इसके बारे में. वैसे मैं सोच रहा था की अगले हफ्ते हम हनीमून जाने का प्लान कर रहे है तो मैं उसे उसी वक़्त इस बात के बारे में बात करता हूँ.

दीपू: हाँ ये सही रहेगा. अगर वो मानती नहीं है तो एक बार मुझे भी बताना. मैं उससे बात करता हूँ. वो मेरी बात कभी नहीं टालती... लेकिन अगर बात यहाँ तक ना आये और वो खुद भी मान जाए तो बहुत अच्छा होगा.

दिनेश: हाँ यार तू सही कह रहा है.

दीपू: लेकिन एक बात याद रख.. आंटी तो तू कैसे मनाएगा वो तुझ पर निर्भर करता है लेकिन कोई ज़ोर ज़बरदस्ती मत करना. अगर वो तेरे दबाव में आकर शादी कर ले तो आगे जा कर बहुत मुश्किल होगा और सब की ज़िन्दगी में परेशानी भी आ सकती है.

दिनेश: तू सही कह रहा है. देखता हूँ की मैं माँ को कैसे मनाऊं. लेकिन उससे पहले मुझे निशा से बात करनी पड़ेगी.

फिर वो दोनों ऐसे ही कुछ और बातें करते है और फिर वहां से ऑफिस के लिए निकल जाते है और शाम को दोनों अपने अपने घर चले जाते है.

यहाँ जब दिनेश और दीपू बात कर रहे होते है तो वहीँ दीपू के घर में तीनो आँगन में बैठे हुए थे.


तीनो की छेड़ छाड़ ....

दिव्या: आज शायद पहली बात इस घर में और कोई नहीं है. पिछले हफ्ते तक तो निशा और मीना भी रहते थे... लेकिन अब घर में हम ही रह गए है.

कविता: हाँ तू सही कह रही है. वैसे तेरे कहना का क्या मतलब है?

दिव्या: यही सोच रही हूँ की दीपू आज हम तीनो के साथ क्या करेगा और यही सोचते हुए में पूरी गीली हो रही हूँ. मेरी पैंटी पूरी गीली हो गयी थी तो अब मैं उसे उतार भी चुकी हूँ.

वसु: तेरे को तो बड़ी ठरक छड़ी हुई है..

दिव्या: क्यों दीदी आप नहीं हो क्या? और ऐसा कहते हुए दिव्या वसु की एक चूची को पकड़ कर मसलते हुए दबा देती है और देखती है की उसके निप्पल्स ब्लाउज में से एकदम तनी हुई है. आप मुझसे कह रहे हो लेकिन आप खुद ही उत्तेजित हो और कविता की तरफ देख कर: देखो कैसे इनके निप्पल्स एकदम तने हुए है.

वसु: चुप कर.. तू कुछ भी बकवास करती रहती है. ये दोनों को देख कर कविता वसु के पास आकर कहती है... तुम्हारी पैंटी भी पूरी गीली है क्या और ऐसा कहते हुए कविता अपना हाथ वसु के साडी के अंदर दाल कर उसकी चूत को छूती है तो अपना हाथ निकल कर बड़ी आँखें करती हुई.. ओह रे...

तू तू हम सब से भी आगे है और अपना गीला हाथ दिव्या को दिखा कर अपनी ऊँगली को चाटते हुए... इसने तो पैंटी पहनी ही नहीं है और देख कैसी इसका रस बह रहा है और कहती है... ये तो बहुत स्वादिष्ट है और फिर से ऊँगली चाट लेती है.

वसु ये देख कर एकदम शर्मा जाती है और आँगन से कमरे में जाने को उठती है तो दिव्या उसे रोक लेती है और वही दीवान में उसे सुला कर... क्यों भाग रही हो दीदी? मेरी पैंटी गीली है तो मैं ठरकी.. तो फिर तुम क्या हो?

वसु शर्मा कर कुछ नहीं कहती तो कविता उसके बगल में बैठ कर उसके होंठ चूमते हुए कहती है.. तू ठरकी है तो ये तो एकदम पूरी चुदासी हो गयी है और फिर तीनो हस देते है.

वसु कविता से: हम दोनों ठरकी और चुदासी है तो हम दोनों से आगे ही बढ़ चुकी है और उसकी गांड को चिमटी काटते हुए.. हम तो यहाँ से कुंवारे है.. तूने तो अपनी गांड भी मरवा ली है.

कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है.. चिंता मत करो.. जल्दी ही तुम दोनों की गांड का उद्धघाटन जल्दी ही होने वाला है. वो तो गांड का बड़ा दीवाना है और मुझे तो आश्चर्य है की तुम जैसी मस्त बड़ी गांड वाली कैसे अब तक बच गयी.. इस बात पे तीनो हस देते है और ऐसे ही कामुक बातों से तीनो भी गरम हो जाते है लेकिन इससे ज़्यादा वो और कुछ नहीं करते और कमरे में जाकर तीनो ही एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.


दिनेश के घर में पार्टी:

२- ३ दिन बात जैसे ऋतू और दिनेश ने बताया था... वो अपने घर में एक छोटा सा पार्टी रखते है और अपने ऑफिस के कुछ काम करने वाले लोगों को भी बुलाते है. जब दीपू वसु और बाकी लोग उनके घर जाते है तो तीनो पहले ही उनका इंतज़ार कर रहे थे. जहाँ दिनेश कुरता और पयजामा पहन कर स्मार्ट लग रहा था वहीँ निशा और ऋतू भी सज धज कर एकदम सेक्सी लग रही थी.

9dd89b7c5bcd856214024746aaf13a2b.jpg


0-A-Saree31.jpg


IMG-8301.jpg


उन दोनों को देख कर पहली बार दीपू भी डगमगा जाता है क्यूंकि वो दोनों उतनी कामुक और सेक्सी लग रही थी.

वहीँ वसु, दिव्या और कविता भी एकदम मस्त माल लग रही थी. सब ने कपडे ऐसे पहने थे जो छुपा काम रहे थे और दिखा ज़्यादा रहे थे.

6d728c8f79bd6259dbb63d8af986d568.jpg


Teej-0c587a561f244b0481fa68f76e0625f3.jpg


Teej-93e1baf93eb4da92bdcf6a1d50b2e214.jpg


वसु निशा को देख कर एकदम खुश हो जाती है और जाकर उसके गले लग जाती है. निशा भी अपनी माँ को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वैसे ही हाल दोनों दिव्या और कविता का भी था. ऑफिस के कुछ लोग जो आए थे उनमें से १- २ लोग तो वहां की महिलाओं को देख कर अपना लार टपका रहे थे... लेकिन बात वहीँ तक रह जाती है. दीपू भी निशा और दिनेश को देख कर एकदम खुश हो जाता है और जाकर निशा को भी अपनी बाहों में लेकर उसके हाल चाल पूछता है. निशा एकदम खुश नज़र आ रही थी...

(और खुश भी क्यों ना हो.. जब से वो इस घर में आयी है रोज़ दिनेश और निशा रात को मस्त चुदाई करते है और दिनेश तो उसे पूरा थका ही देता है. उसका पूरा चेहरा खिल खिला सा लग रहा था)

दीपू भी दिनेश से गले लगता है और उसे फिर से बधाई देता है.

और ऐसे ही दीपू ऋतू आंटी को भी बधाई देता है और उसके गले भी लग जाता है. गले लगने से ऋतू ही मस्त ठोस चूची भी दीपू के सीने में दब जाती है और आज पहली बार ऐसा होता ही जब उसे उसके और दिनेश की बात याद आती है की वो भी उसकी माँ की तरह अपने जवानी के उत्तम समय में है. वो मन में सोचता है की दिनेश सही कह रहा है की उसे भी एक मर्द की ज़रुरत है और सोचता है की बिस्तर पे वो नंगी कैसे होगी. (जैसा ऊपर में लिखा था... आज वो पहली बार था जब दीपू ऋतू को देख कर उसे ऐसे ख़याल आते है. इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. ये और बात थी की कुछ दिन पहले ही दिनेश और दीपु ने ऋतू के बारे में बात किया था.)… लेकिन फिर वो सब बातें अपने ध्यान से हटा देता है की वो गलत सोच रहा है. वो उसकी दोस्त की माँ है और उसकी बहिन की सास. तो ऐसा सोचना अच्छा नहीं रहेगा… लेकिन आगे कब क्या और कैसे होने वाला है ये किसी को पता नहीं था….

सब लोग उनसे मिलने आते है और उनको बधाई देकर खाना खा कर चले जाते है... लेकिन उनमें से १- २ ऐसे थे जो दिनेश और दीपू को घूरे जा रहे थे. दीपू की नज़र उनपर एक बार पड़ती है तो उसे कुछ ठीक नहीं लगता जैसे शायद कोई अनहोनी होने वाली हो लेकिन इस वक़्त वो ज़्यादा ध्यान नहीं देता क्यूंकि सब ख़ुशी के मूड में थे और सब लोग हस कर अपना वक़्त बिता रहे थे.

ऑफिस के सब लोग चले जाने के बाद सिर्फ घर वाले ही रह जाते है और सब के जाने के बाद जब ऋतू की नज़र कविता पे जाती है तो पूछती है की ये कौन है. (ऋतू को कविता के बारे में पता नहीं था. उसे सिर्फ वसु और दिव्या के बारे में ही पता था).

अब समय आ गया था जब दीपू को ऋतू को अपनी तीसरी शादी की बात बतानी थी. उसकी किस्मत अच्छी थी की उसने दिनेश को पहले ही ये खबर दी थी वरना और मुश्किल हो जाता. जब ऋतू कविता के बारे में पूछती है तो वसु और दिव्या दोनों एक दुसरे की तरफ देख कर कुछ नहीं कह पा रहे थे तो वहीँ दीपू भी सोच रहा था की क्या बोले और वो दिनेश की तरफ देखता है.

दिनेश को समझ आता है की बात को उसे ही संभालना है तो दिनेश कहता है: माँ ये और कोई नहीं दिनेश की तीसरी बीवी है. नाम कविता है .उनकी शादी भी मेरी तरह ही ऐसे हालत में हुई की इन्हे समय ही नहीं मिला की हमें बताएं. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा आश्चर्य हो जाती है लेकिन अपने आप को संभालते हुए वो कविता को उसके पास बुला कर उसके माथे पे प्यार से एक चुम्मा देकर उसे आशीर्वाद देती है. जब ऋतू ऐसा करती है तो सब की जान में जान आती है और दीपू दिनेश को और देख कर एक तरह से उसे धन्यवाद देता है.

ऋतू दीपू की और देख कर... तुम और कितने ऐसे सुरपरिसेस दोगे? और मज़ाक में कहती है की दो काफी नहीं थे क्या.. जो तुमने तीसरी शादी कर ली है. इस बात पर दीपू और वसु कुछ नहीं कहते क्यूंकि उनको पता था आगे और कुछ भी संभव हो सकता है.

ऋतू: वैसे तुम्हारी तीसरी बीवी भी बहुत सुन्दर है और फिर ऐसे ही सब मज़ाक और बातें करते हुए खाना खाते है. खाना खाते वक़्त दीपू चोर नज़रों से अपनी बीवियों को देख रहा था क्यूंकि सब लोग सेक्सी दिख रहे थे और ऋतू की बात से उसे भी ठरकी बना दिया था.

सबसे पहले कविता खाना ख़तम करती है और फिर जब सब बातें करते हुए अपने खाने में मगन थे तो वो कहती है की वो अपना प्लेट किचन में रख के आ जायेगी. ऋतू मना करती है की उसकी कोई ज़रुरत नहीं है. यहीं पे बैठी रहो. जब सब का हो जाएगा तो एक साथ टेबल साफ़ कर देंगे. लेकिन कविता नहीं मानती और वो उठ कर अपनी गांड मटकाते हुए किचन में चली जाती है.

64f0185fcd43457b8ae9841674343ec0.gif


उसको देख कर दीपू भी अपना खाना ख़तम कर लेता है और कविता के पीछे चला जाता है. ऋतू से बात करते हुए वसु एक तिरछी नज़र दीपू पे डालती है और मन में सोचती है की कविता तो गयी.... और फिर नार्मल तरीके से बाकी सब से बात करती रहती है. किचन में कविता अपना प्लेट रख रही होती है तो चुपके से दीपू भी उसके पीछे आ जाता है और उसके साथ अपना हाथ दो कर उसके गले को किस करता है. कविता तो पहले चकमा जाती है और थोड़ा डर भी जाती है लेकिन दीपू को देख कर कहती है की यहाँ क्या कर रहे हो? दूसरों का घर है और कोई भी आ सकता है. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था. वो कविता की मस्त ठोस चूची को दबाते हुए गले को किस करते हुए कहता है...

545c0aa2032d3debfca49d30135f5c9c.gif


तुम आज सब लोग एक से बढ़कर एक माल लग रहे हो. तुम सब एक साथ ऐसे सेक्सी बन कर आओगे तो मेरे बारे में कुछ सोचा नहीं क्या की मेरा क्या होगा? और ऐसे ही उसकी चूची दबाते हुए उसका हाथ अपने लंड पे रखते हुए कहता है... देखो कैसे तन कर तुम्हारी गांड में जाना चाहता है. कविता भी अब बहकने लगती है और कहती है...Pls यहाँ मत करो ना... घर चलो ना... फिर मैं ही तुम्हारे पास आऊँगी और चुदुँगी..

दीपू: वो तो घर की बात है लेकिन पहले मुझे तुम्हारे होंटो का रस चूसने दो...

GIF-20260117-215728-758.gif


और ऐसा कहते हुए वो कविता को दीवार से सत्ता कर उसके होंठ चूसने लग जाता है जिसमें अब कविता भी उसका पूरा साथ देती है.

IMG-20221201-185211.jpg


दीपू उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूचियां भी ब्लाउज के ऊपर से दबाता रहता है. इतने में उन्हें किसीके आने की आहट होती है तो दोनों अलग हो जाते है और फिर अपने आप को ठीक करके पहले दीपू निकल जाता है वहां से और उसके पीछे कविता भी १ Min बाद निकल जाती है.

फिर थोड़ी देर बाद सब लोग खाना खा कर बैठ कर बातें करते रहते है तो वसु सामान लेकर किचन में जाती है रखने. उसके पीछे ऋतू भी आ जाती है और वसु को देखती है तो देखती ही रह जाती है.

IMG-7742.jpg


क्यूंकि उस पोजीशन में वसु की ठोस चूचियां और बहार को निकली हुई गांड एकदम साफ़ नज़र आ रही थी. . उसको देख कर उसके बगल में आकर

ऋतू: १-२ महीनों में तू तो बहुत गदरा गयी है. देख ये तेरी उठी हुई गांड और उसकी गांड पे एक चपत मार देती है.

वसु: oooh….oouucchh…क्या कर रही है? कोई देख लेगा ना.

ऋतू: कोई नहीं देखेगा. सब अपने बातों में मगन है. वैसे भी अभी थोड़ी देर पहले दीपू और कविता को यहाँ आते देखा था तो अब कोई नहीं आएगा. उसको देख कर... लगता है तू तो बहुत मजे कर रही है.

वसु ऋतू से बात सुनकर हस देती है और कहती है.. तू ठीक ही कह रही है. वैसे एक बात पूछूं?

ऋतू: पूछ.

वसु: तू भी तो बहुत गदरायी हुई है और ऐसा कहते हुए एक बार बहार देखते हुए जब वहां कोई नहीं था तो आगे आकर उसकी चूची को दबा देती है. तू इतनी मस्त बदन को लेके कैसे रहती है? तेरी इच्छा नहीं होती क्या?

ऋतू: हाँ सही कह रही है. मैं भी आग में जल रही हूँ. मेरी भी इच्छा होती है लेकिन डरती हूँ की दिनेश क्या सोचेगा.

वसु: अरे इसमें डरने की क्या बात है? अब तो उसकी भी शादी हो गयी है. वो भी अब समझ जाएगा. अगर तेरी नज़र में कोई लड़का है तो बोल मैं बात करती हूँ.. और अगर नहीं है तो मैं ही तेरे लिए ढूढ़ देती हूँ और ऐसा कहते हुए ऋतू को आँख मार देती है. दोनों फिर अपना काम करते है और बाहर आने से पहले वसु ऋतू को दीवार से सटा कर... जाने से पहले तेरी आग और थोड़ा भड़काती हूँ ताकि तू भी जल्दी से मेरी तरह और गदरायी बन जा.. और ऐसा कहते हुए वो ऋतू के होंठ चूम लेती है. ऋतू को तो पहले झटका लगता लेकिन वो भी समझ जाती है और वो भी वापिस वसु को चूम लेती है.

porn-gif-magazine-teensex201439.gif


२ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अपने आप को ठीक कर के बाहर आ जाते है और बाकी सब के साथ बात करने लग जाते है.

बाहर जाने से पहले..

ऋतू: वैसे तू मुझे खुश खबर कब दे रही है?

वसु: पता नहीं यार.. दीपू तो हमेशा कहते रहता है की वो भी जल्दी बाप बने.. लेकिन मैं ही मना करती रहती हूँ.

ऋतू: मेरी बात मान तो तू भी जल्दी पेट से हो जा.. अब तेरी उम्र भी हो रही है. अगर और देर हो गया तो फिर मुश्किल भी हो सकता है. वैसे तू खुश तो है ना?

वसु: हाँ यार बहुत खुश हूँ. वो तो मुझे बहुत खुश रकता है. और उसके प्यार करने का तरीका भी बहुत मस्त है.

वो तो उसके बाप से भी एक कदम बढ़ कर है. मुझे तो पूरी तरह थका ही देता है लेकिन वो फिर भी नहीं रुकता. मेरी तो किस्मत अच्छी है की जब मैं थक जाती हूँ तो दिव्या और कविता उस पर टूट पड़ते है तो मुझे थोड़ी राहत मिलती है.

उसके बारे में सोचते हुए ही मैं तो बहुत बार गीली भी हो जाती हूँ.

ऋतू: अरे वाह... तुम सब के तो बड़े मजे हो रहे है फिर . ये तो बहुत अच्छी बात है. जल्दी से अब काम में लग जा और जब हम अगली बार मिलेंगे तो मुझे तुझ से खुश खबर सुन्ना है और फिर से इस बार ऋतू वसु को चूम लेती है और दोनों बाहर आ जाते है.

फिर सब लोग १०- १५ Min और बातें करते है और फिर वसु और बाकी सब भी ऋतू और दिनेश से इज़ाज़त लेते है और अपने घर की और निकल जाते है... दोनों परिवार अपने अपने ख्यालों के बारे में सोचते रहते है... वसु जो कुछ देर पहले ऋतू से बात की थी... और दिनेश जो २- ३ दिन पहले दीपू से अपने मन की बात किया था...
शानदार और कामुक अपडेट। लाजवाब लेखन कौशल। आप पाठकों को उत्तेजित कर रहे हैं।
👌👌👌👌👌👌👌

🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️
💦💦💦💦💦💦💦💦
 
Top