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सीमा की दूरदर्शिता और उसकी 'खोज' वाकई चौंकाने वाली है। उसने रेखा के लिए सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि एक ऐसा "भोग-साम्राज्य" खोजा है जहाँ रेखा की इस नई जागृत हुई प्यास को न केवल स्वीकार किया जाएगा, बल्कि उसे पूजा भी जाएगा।
सीमा ने अपनी सहेलियों और पुराने संपर्कों के ज़रिए एक ऐसे खानदान का पता लगाया है, जो बाहर से बेहद संस्कारी और रईस है, लेकिन उनके घर की चारदीवारी के पीछे की कहानी कुछ और ही है।
सीमा की खोज: वह 'विशेष' ससुराल
सीमा ने जिस घर को रेखा के लिए चुना है, उसकी खासियतें कुछ इस प्रकार हैं:
* पति की स्थिति: लड़का (होने वाला पति) दिखने में बहुत सुंदर और शालीन है, लेकिन वह स्वभाव से बहुत ही सीधा और दब्बू है। सीमा ने जान लिया है कि वह रेखा पर अपना हक जमाने के बजाय उसका गुलाम बनकर रहना पसंद करेगा।
* घर की 'मुखिया' (The Real Caretaker): उस घर की बड़ी बहू या सास, बिल्कुल सीमा के स्वभाव की है। वह भी एक ऐसी ही "खिलाड़ी" औरत है जो घर में मर्दों को अपनी उंगलियों पर नचाती है और अपनी देवरानियों/बहुओं के लिए दमदार मर्दों की 'व्यवस्था' करना अपना धर्म समझती है।
* मर्दों की फौज: उस घर में और उसके आस-पास ऐसे कई 'सांड' जैसे कद्दावर मर्द हैं, जो सिर्फ एक इशारे पर रेखा की सेवा (चुदाई) के लिए तैयार रहेंगे।
सीमा का मास्टर प्लान
सीमा ने रेखा को पास बुलाकर धीरे से उसके कान में अपनी इस 'खोज' का खुलासा किया:
> "लाडो, मैंने तेरे लिए जो महल खोजा है, वहाँ तू एक पत्नी नहीं, बल्कि एक 'काम-देवी' बनकर जाएगी। तेरा पति तो सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए होगा, लेकिन तेरी असली प्यास बुझाने के लिए मैंने वहाँ एक 'व्यवस्था' देखी है। वहाँ की बड़ी मालकिन बिल्कुल मेरी जैसी है। वह तुझे देखते ही समझ जाएगी कि मेरी बेटी को किस चीज़ की ज़रूरत है।"
>
रेखा की प्रतिक्रिया
रेखा, जो अभी-अभी अमित के लन्ड की रगड़ाई से शांत हुई थी, सीमा की यह बात सुनकर फिर से रोमांचित हो उठी। उसने सीमा के हाथ चूम लिए और बोली:
> "माँ, आप जो भी करोगी मेरे भले के लिए ही करोगी। मुझे बस उस दिन का इंतज़ार है जब मैं अपनी उस 'असली सुहागरात' पर पहुँचूँगी, जहाँ अमित भैया के साथ-साथ आपके द्वारा चुना गया वो 'नया लन्ड' भी मेरा स्वागत करेगा।"
सीमा की इस 'खोज' ने रेखा की किस्मत के बंद दरवाजे खोल दिए हैं। उसने जिस खानदान को चुना है, उसकी मुखिया यानी रेखा की होने वाली सास का व्यक्तित्व और उसका परिवार रेखा की 'चुदास' को एक नई ऊंचाई देने के लिए ही बना है।
सास का परिचय: श्रीमती मनोरमा देवी
मनोरमा देवी (उम्र 52 वर्ष) दिखने में आज भी किसी ढलती हुई अप्सरा जैसी लगती हैं। भारी शरीर, बड़ी-बड़ी कजरारी आँखें और चेहरे पर एक ऐसी रसूखदार मुस्कान जो सामने वाले का मन पढ़ ले। मनोरमा खुद एक ऐसी औरत हैं जिन्होंने जवानी में कई मर्दों का स्वाद चखा है और अब वे अपने घर की औरतों को 'तृप्त' रखने में ही अपना पुण्य समझती हैं। सीमा ने जब उनसे संपर्क किया, तो मनोरमा ने एक ही नज़र में पहचान लिया कि सीमा अपनी ननंद के लिए क्या चाहती है। दोनों के बीच एक मूक समझौता हो गया—"तुम मुझे एक प्यासी बहू दो, मैं उसे लंडों के समंदर में डुबो दूंगी।"
मनोरमा की तीन बेटियाँ और उनके 'दमदार' पति
मनोरमा की तीन बेटियाँ हैं, जो अक्सर अपने मायके में ही डेरा डाले रहती हैं क्योंकि उन्हें पता है कि असली 'खुराक' यहीं मिलती है। इन तीनों के पति एक से बढ़कर एक हैं:
बड़ी बेटी: वंदना | विक्रम | विक्रम एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर का बेटा है। कद 6 फीट 2 इंच, चौड़ी छाती और पत्थर जैसा सख्त शरीर। विक्रम का लंड पूरे खानदान में अपनी लंबाई के लिए मशहूर है। वह शांत रहता है पर जब चोदने पर आता है तो औरतें पानी मांग उठती हैं। |
| मझली बेटी: पल्लवी | आकाश | आकाश एक जिम चेन का मालिक है। उसके डोले और बाइसेप्स देखकर ही पल्लवी पागल रहती है। आकाश स्वभाव से बहुत ही 'ठरकी' और खुल्लम-खुल्ला बात करने वाला मर्द है। उसे नई-नई औरतों को अपनी उंगलियों पर नचाना पसंद है। |
| छोटी बेटी: ईशा | ऋषि | ऋषि एक बिजनेस क्लास फैमिली से है, दिखने में बहुत ही चॉकलेटी और हैंडसम है, लेकिन उसकी ताकत उसके स्टैमिना में है। वह घंटों तक बिना झड़े चोद सकता है। ईशा कहती है कि ऋषि का 'औजार' जितना सुंदर है, उतना ही बेदर्द भी। |
सीमा और मनोरमा की गुप्त योजना
सीमा ने मनोरमा से मिलकर यह तय किया है कि रेखा की शादी के बाद, ये तीनों दामाद (विक्रम, आकाश और ऋषि) बारी-बारी से रेखा की 'क्लास' लेंगे। मनोरमा ने सीमा को भरोसा दिलाया है:
> "सीमा बहन, तुम फिक्र मत करो। मेरी तीनों बेटियाँ भी बहुत दिलदार हैं। वे अपने पतियों को रेखा के पास भेजने में बुरा नहीं मानेंगी, क्योंकि उन्हें पता है कि इस घर में सुख बांटने से बढ़ता है। रेखा यहाँ बहू नहीं, इस घर की 'जान' बनकर रहेगी।"
>
सीमा यह सुनकर गदगद है। उसने मन ही मन सोचा कि जब रेखा इन तीन सांडों और अपने भाई अमित के बीच होगी, तब उसकी चुत का क्या हाल होगा।
मनोरमा का 'स्त्री-चरित्र' और मास्टर प्लान
मनोरमा ने सीमा को करीब बिठाकर बहुत ही गंभीर स्वर में समझाया:
> "सीमा, औरत चाहे कितनी भी उदार हो जाए, अपने पति का लंड किसी और औरत के साथ बांटना उसे कभी बर्दाश्त नहीं होता—चाहे वो उसकी सगी बहन ही क्यों न हो। अगर मेरी बेटियों को पता चला कि उनके पति रेखा की चुत के दीवाने हैं, तो घर में महाभारत मच जाएगी। इसलिए, यह राज सिर्फ तुम्हारे और मेरे बीच रहेगा।"
>
मनोरमा ने अपनी योजना की बारीकियां साझा कीं:
* दोहरी चाल: मनोरमा अपनी बेटियों के सामने यह जताएगी कि रेखा बहुत ही 'सीधी-सादी' और 'पूजा-पाठ' वाली लड़की है, ताकि उन्हें कभी शक ही न हो कि उनके पति इस 'पवित्र' लड़की के पीछे भाग सकते हैं।
* वक्त का चुनाव: मनोरमा ने तय किया कि जब उसकी बेटियाँ सो रही होंगी, या खरीदारी के लिए बाहर जाएँगी, या पार्लर में होंगी—तभी वह अपने दामादों को 'काम' के बहाने रेखा के पास भेजेगी।
* दामादों की मजबूरी: मनोरमा अपने दामादों की कुछ ऐसी कमज़ोरियाँ (या उनके पुराने राज) जानती है, जिनके दम पर वह उन्हें अपनी उंगलियों पर नचाती है। वह उन्हें यह एहसास दिलाएगी कि रेखा के साथ उनका संबंध एक "इनाम" है जो केवल उनकी सास (मनोरमा) की वजह से उन्हें मिल रहा है।
सीमा की सहमति
सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा:
> "दीदी, आप तो वाकई में इस खेल की माहिर खिलाड़ी निकलीं। बेटियों को भी खबर न हो—यही तो असली हुनर है। मेरी रेखा भी बाहर से इतनी भोली बनेगी कि आपकी बेटियाँ खुद उसे अपनी सहेली बना लेंगी, और पीठ पीछे उनके पति रेखा की चुत में अपनी प्यास बुझा रहे होंगे।"
रेखा की नई पहचान: 'गुप्त काम-मोहिनी'
अब रेखा को सीमा ने एक नई शिक्षा देनी शुरू की: 'मौन और छल'।
उसने रेखा को समझाया कि उसे वंदना, पल्लवी और ईशा (मनोरमा की बेटियाँ) का विश्वास जीतना होगा। उसे उनके सामने एक 'नासमझ' लड़की का नाटक करना होगा ताकि वे खुद अपने पतियों को रेखा की मदद करने के लिए कहें।
रेखा: "माँ, आप फिक्र मत करो। मैं उनकी आँखों में धूल झोंकने में भी माहिर हो जाऊंगी। मैं उनकी ऐसी 'बहन' बनूँगी जो उनके पतियों को चूस लेगी और उन्हें पता भी नहीं चलेगा।"
सीमा ने अपनी सहेलियों और पुराने संपर्कों के ज़रिए एक ऐसे खानदान का पता लगाया है, जो बाहर से बेहद संस्कारी और रईस है, लेकिन उनके घर की चारदीवारी के पीछे की कहानी कुछ और ही है।
सीमा की खोज: वह 'विशेष' ससुराल
सीमा ने जिस घर को रेखा के लिए चुना है, उसकी खासियतें कुछ इस प्रकार हैं:
* पति की स्थिति: लड़का (होने वाला पति) दिखने में बहुत सुंदर और शालीन है, लेकिन वह स्वभाव से बहुत ही सीधा और दब्बू है। सीमा ने जान लिया है कि वह रेखा पर अपना हक जमाने के बजाय उसका गुलाम बनकर रहना पसंद करेगा।
* घर की 'मुखिया' (The Real Caretaker): उस घर की बड़ी बहू या सास, बिल्कुल सीमा के स्वभाव की है। वह भी एक ऐसी ही "खिलाड़ी" औरत है जो घर में मर्दों को अपनी उंगलियों पर नचाती है और अपनी देवरानियों/बहुओं के लिए दमदार मर्दों की 'व्यवस्था' करना अपना धर्म समझती है।
* मर्दों की फौज: उस घर में और उसके आस-पास ऐसे कई 'सांड' जैसे कद्दावर मर्द हैं, जो सिर्फ एक इशारे पर रेखा की सेवा (चुदाई) के लिए तैयार रहेंगे।
सीमा का मास्टर प्लान
सीमा ने रेखा को पास बुलाकर धीरे से उसके कान में अपनी इस 'खोज' का खुलासा किया:
> "लाडो, मैंने तेरे लिए जो महल खोजा है, वहाँ तू एक पत्नी नहीं, बल्कि एक 'काम-देवी' बनकर जाएगी। तेरा पति तो सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए होगा, लेकिन तेरी असली प्यास बुझाने के लिए मैंने वहाँ एक 'व्यवस्था' देखी है। वहाँ की बड़ी मालकिन बिल्कुल मेरी जैसी है। वह तुझे देखते ही समझ जाएगी कि मेरी बेटी को किस चीज़ की ज़रूरत है।"
>
रेखा की प्रतिक्रिया
रेखा, जो अभी-अभी अमित के लन्ड की रगड़ाई से शांत हुई थी, सीमा की यह बात सुनकर फिर से रोमांचित हो उठी। उसने सीमा के हाथ चूम लिए और बोली:
> "माँ, आप जो भी करोगी मेरे भले के लिए ही करोगी। मुझे बस उस दिन का इंतज़ार है जब मैं अपनी उस 'असली सुहागरात' पर पहुँचूँगी, जहाँ अमित भैया के साथ-साथ आपके द्वारा चुना गया वो 'नया लन्ड' भी मेरा स्वागत करेगा।"
सीमा की इस 'खोज' ने रेखा की किस्मत के बंद दरवाजे खोल दिए हैं। उसने जिस खानदान को चुना है, उसकी मुखिया यानी रेखा की होने वाली सास का व्यक्तित्व और उसका परिवार रेखा की 'चुदास' को एक नई ऊंचाई देने के लिए ही बना है।
सास का परिचय: श्रीमती मनोरमा देवी
मनोरमा देवी (उम्र 52 वर्ष) दिखने में आज भी किसी ढलती हुई अप्सरा जैसी लगती हैं। भारी शरीर, बड़ी-बड़ी कजरारी आँखें और चेहरे पर एक ऐसी रसूखदार मुस्कान जो सामने वाले का मन पढ़ ले। मनोरमा खुद एक ऐसी औरत हैं जिन्होंने जवानी में कई मर्दों का स्वाद चखा है और अब वे अपने घर की औरतों को 'तृप्त' रखने में ही अपना पुण्य समझती हैं। सीमा ने जब उनसे संपर्क किया, तो मनोरमा ने एक ही नज़र में पहचान लिया कि सीमा अपनी ननंद के लिए क्या चाहती है। दोनों के बीच एक मूक समझौता हो गया—"तुम मुझे एक प्यासी बहू दो, मैं उसे लंडों के समंदर में डुबो दूंगी।"
मनोरमा की तीन बेटियाँ और उनके 'दमदार' पति
मनोरमा की तीन बेटियाँ हैं, जो अक्सर अपने मायके में ही डेरा डाले रहती हैं क्योंकि उन्हें पता है कि असली 'खुराक' यहीं मिलती है। इन तीनों के पति एक से बढ़कर एक हैं:
बड़ी बेटी: वंदना | विक्रम | विक्रम एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर का बेटा है। कद 6 फीट 2 इंच, चौड़ी छाती और पत्थर जैसा सख्त शरीर। विक्रम का लंड पूरे खानदान में अपनी लंबाई के लिए मशहूर है। वह शांत रहता है पर जब चोदने पर आता है तो औरतें पानी मांग उठती हैं। |
| मझली बेटी: पल्लवी | आकाश | आकाश एक जिम चेन का मालिक है। उसके डोले और बाइसेप्स देखकर ही पल्लवी पागल रहती है। आकाश स्वभाव से बहुत ही 'ठरकी' और खुल्लम-खुल्ला बात करने वाला मर्द है। उसे नई-नई औरतों को अपनी उंगलियों पर नचाना पसंद है। |
| छोटी बेटी: ईशा | ऋषि | ऋषि एक बिजनेस क्लास फैमिली से है, दिखने में बहुत ही चॉकलेटी और हैंडसम है, लेकिन उसकी ताकत उसके स्टैमिना में है। वह घंटों तक बिना झड़े चोद सकता है। ईशा कहती है कि ऋषि का 'औजार' जितना सुंदर है, उतना ही बेदर्द भी। |
सीमा और मनोरमा की गुप्त योजना
सीमा ने मनोरमा से मिलकर यह तय किया है कि रेखा की शादी के बाद, ये तीनों दामाद (विक्रम, आकाश और ऋषि) बारी-बारी से रेखा की 'क्लास' लेंगे। मनोरमा ने सीमा को भरोसा दिलाया है:
> "सीमा बहन, तुम फिक्र मत करो। मेरी तीनों बेटियाँ भी बहुत दिलदार हैं। वे अपने पतियों को रेखा के पास भेजने में बुरा नहीं मानेंगी, क्योंकि उन्हें पता है कि इस घर में सुख बांटने से बढ़ता है। रेखा यहाँ बहू नहीं, इस घर की 'जान' बनकर रहेगी।"
>
सीमा यह सुनकर गदगद है। उसने मन ही मन सोचा कि जब रेखा इन तीन सांडों और अपने भाई अमित के बीच होगी, तब उसकी चुत का क्या हाल होगा।
मनोरमा का 'स्त्री-चरित्र' और मास्टर प्लान
मनोरमा ने सीमा को करीब बिठाकर बहुत ही गंभीर स्वर में समझाया:
> "सीमा, औरत चाहे कितनी भी उदार हो जाए, अपने पति का लंड किसी और औरत के साथ बांटना उसे कभी बर्दाश्त नहीं होता—चाहे वो उसकी सगी बहन ही क्यों न हो। अगर मेरी बेटियों को पता चला कि उनके पति रेखा की चुत के दीवाने हैं, तो घर में महाभारत मच जाएगी। इसलिए, यह राज सिर्फ तुम्हारे और मेरे बीच रहेगा।"
>
मनोरमा ने अपनी योजना की बारीकियां साझा कीं:
* दोहरी चाल: मनोरमा अपनी बेटियों के सामने यह जताएगी कि रेखा बहुत ही 'सीधी-सादी' और 'पूजा-पाठ' वाली लड़की है, ताकि उन्हें कभी शक ही न हो कि उनके पति इस 'पवित्र' लड़की के पीछे भाग सकते हैं।
* वक्त का चुनाव: मनोरमा ने तय किया कि जब उसकी बेटियाँ सो रही होंगी, या खरीदारी के लिए बाहर जाएँगी, या पार्लर में होंगी—तभी वह अपने दामादों को 'काम' के बहाने रेखा के पास भेजेगी।
* दामादों की मजबूरी: मनोरमा अपने दामादों की कुछ ऐसी कमज़ोरियाँ (या उनके पुराने राज) जानती है, जिनके दम पर वह उन्हें अपनी उंगलियों पर नचाती है। वह उन्हें यह एहसास दिलाएगी कि रेखा के साथ उनका संबंध एक "इनाम" है जो केवल उनकी सास (मनोरमा) की वजह से उन्हें मिल रहा है।
सीमा की सहमति
सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा:
> "दीदी, आप तो वाकई में इस खेल की माहिर खिलाड़ी निकलीं। बेटियों को भी खबर न हो—यही तो असली हुनर है। मेरी रेखा भी बाहर से इतनी भोली बनेगी कि आपकी बेटियाँ खुद उसे अपनी सहेली बना लेंगी, और पीठ पीछे उनके पति रेखा की चुत में अपनी प्यास बुझा रहे होंगे।"
रेखा की नई पहचान: 'गुप्त काम-मोहिनी'
अब रेखा को सीमा ने एक नई शिक्षा देनी शुरू की: 'मौन और छल'।
उसने रेखा को समझाया कि उसे वंदना, पल्लवी और ईशा (मनोरमा की बेटियाँ) का विश्वास जीतना होगा। उसे उनके सामने एक 'नासमझ' लड़की का नाटक करना होगा ताकि वे खुद अपने पतियों को रेखा की मदद करने के लिए कहें।
रेखा: "माँ, आप फिक्र मत करो। मैं उनकी आँखों में धूल झोंकने में भी माहिर हो जाऊंगी। मैं उनकी ऐसी 'बहन' बनूँगी जो उनके पतियों को चूस लेगी और उन्हें पता भी नहीं चलेगा।"