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Incest मेरा अतीत और वर्तमान, चूत की अनंत प्यास

mastmast123

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सीमा की दूरदर्शिता और उसकी 'खोज' वाकई चौंकाने वाली है। उसने रेखा के लिए सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि एक ऐसा "भोग-साम्राज्य" खोजा है जहाँ रेखा की इस नई जागृत हुई प्यास को न केवल स्वीकार किया जाएगा, बल्कि उसे पूजा भी जाएगा।
सीमा ने अपनी सहेलियों और पुराने संपर्कों के ज़रिए एक ऐसे खानदान का पता लगाया है, जो बाहर से बेहद संस्कारी और रईस है, लेकिन उनके घर की चारदीवारी के पीछे की कहानी कुछ और ही है।
सीमा की खोज: वह 'विशेष' ससुराल
सीमा ने जिस घर को रेखा के लिए चुना है, उसकी खासियतें कुछ इस प्रकार हैं:
* पति की स्थिति: लड़का (होने वाला पति) दिखने में बहुत सुंदर और शालीन है, लेकिन वह स्वभाव से बहुत ही सीधा और दब्बू है। सीमा ने जान लिया है कि वह रेखा पर अपना हक जमाने के बजाय उसका गुलाम बनकर रहना पसंद करेगा।
* घर की 'मुखिया' (The Real Caretaker): उस घर की बड़ी बहू या सास, बिल्कुल सीमा के स्वभाव की है। वह भी एक ऐसी ही "खिलाड़ी" औरत है जो घर में मर्दों को अपनी उंगलियों पर नचाती है और अपनी देवरानियों/बहुओं के लिए दमदार मर्दों की 'व्यवस्था' करना अपना धर्म समझती है।
* मर्दों की फौज: उस घर में और उसके आस-पास ऐसे कई 'सांड' जैसे कद्दावर मर्द हैं, जो सिर्फ एक इशारे पर रेखा की सेवा (चुदाई) के लिए तैयार रहेंगे।
सीमा का मास्टर प्लान
सीमा ने रेखा को पास बुलाकर धीरे से उसके कान में अपनी इस 'खोज' का खुलासा किया:
> "लाडो, मैंने तेरे लिए जो महल खोजा है, वहाँ तू एक पत्नी नहीं, बल्कि एक 'काम-देवी' बनकर जाएगी। तेरा पति तो सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए होगा, लेकिन तेरी असली प्यास बुझाने के लिए मैंने वहाँ एक 'व्यवस्था' देखी है। वहाँ की बड़ी मालकिन बिल्कुल मेरी जैसी है। वह तुझे देखते ही समझ जाएगी कि मेरी बेटी को किस चीज़ की ज़रूरत है।"
>
रेखा की प्रतिक्रिया
रेखा, जो अभी-अभी अमित के लन्ड की रगड़ाई से शांत हुई थी, सीमा की यह बात सुनकर फिर से रोमांचित हो उठी। उसने सीमा के हाथ चूम लिए और बोली:
> "माँ, आप जो भी करोगी मेरे भले के लिए ही करोगी। मुझे बस उस दिन का इंतज़ार है जब मैं अपनी उस 'असली सुहागरात' पर पहुँचूँगी, जहाँ अमित भैया के साथ-साथ आपके द्वारा चुना गया वो 'नया लन्ड' भी मेरा स्वागत करेगा।"
सीमा की इस 'खोज' ने रेखा की किस्मत के बंद दरवाजे खोल दिए हैं। उसने जिस खानदान को चुना है, उसकी मुखिया यानी रेखा की होने वाली सास का व्यक्तित्व और उसका परिवार रेखा की 'चुदास' को एक नई ऊंचाई देने के लिए ही बना है।
सास का परिचय: श्रीमती मनोरमा देवी
मनोरमा देवी (उम्र 52 वर्ष) दिखने में आज भी किसी ढलती हुई अप्सरा जैसी लगती हैं। भारी शरीर, बड़ी-बड़ी कजरारी आँखें और चेहरे पर एक ऐसी रसूखदार मुस्कान जो सामने वाले का मन पढ़ ले। मनोरमा खुद एक ऐसी औरत हैं जिन्होंने जवानी में कई मर्दों का स्वाद चखा है और अब वे अपने घर की औरतों को 'तृप्त' रखने में ही अपना पुण्य समझती हैं। सीमा ने जब उनसे संपर्क किया, तो मनोरमा ने एक ही नज़र में पहचान लिया कि सीमा अपनी ननंद के लिए क्या चाहती है। दोनों के बीच एक मूक समझौता हो गया—"तुम मुझे एक प्यासी बहू दो, मैं उसे लंडों के समंदर में डुबो दूंगी।"
मनोरमा की तीन बेटियाँ और उनके 'दमदार' पति
मनोरमा की तीन बेटियाँ हैं, जो अक्सर अपने मायके में ही डेरा डाले रहती हैं क्योंकि उन्हें पता है कि असली 'खुराक' यहीं मिलती है। इन तीनों के पति एक से बढ़कर एक हैं:
बड़ी बेटी: वंदना | विक्रम | विक्रम एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर का बेटा है। कद 6 फीट 2 इंच, चौड़ी छाती और पत्थर जैसा सख्त शरीर। विक्रम का लंड पूरे खानदान में अपनी लंबाई के लिए मशहूर है। वह शांत रहता है पर जब चोदने पर आता है तो औरतें पानी मांग उठती हैं। |
| मझली बेटी: पल्लवी | आकाश | आकाश एक जिम चेन का मालिक है। उसके डोले और बाइसेप्स देखकर ही पल्लवी पागल रहती है। आकाश स्वभाव से बहुत ही 'ठरकी' और खुल्लम-खुल्ला बात करने वाला मर्द है। उसे नई-नई औरतों को अपनी उंगलियों पर नचाना पसंद है। |
| छोटी बेटी: ईशा | ऋषि | ऋषि एक बिजनेस क्लास फैमिली से है, दिखने में बहुत ही चॉकलेटी और हैंडसम है, लेकिन उसकी ताकत उसके स्टैमिना में है। वह घंटों तक बिना झड़े चोद सकता है। ईशा कहती है कि ऋषि का 'औजार' जितना सुंदर है, उतना ही बेदर्द भी। |
सीमा और मनोरमा की गुप्त योजना
सीमा ने मनोरमा से मिलकर यह तय किया है कि रेखा की शादी के बाद, ये तीनों दामाद (विक्रम, आकाश और ऋषि) बारी-बारी से रेखा की 'क्लास' लेंगे। मनोरमा ने सीमा को भरोसा दिलाया है:
> "सीमा बहन, तुम फिक्र मत करो। मेरी तीनों बेटियाँ भी बहुत दिलदार हैं। वे अपने पतियों को रेखा के पास भेजने में बुरा नहीं मानेंगी, क्योंकि उन्हें पता है कि इस घर में सुख बांटने से बढ़ता है। रेखा यहाँ बहू नहीं, इस घर की 'जान' बनकर रहेगी।"
>
सीमा यह सुनकर गदगद है। उसने मन ही मन सोचा कि जब रेखा इन तीन सांडों और अपने भाई अमित के बीच होगी, तब उसकी चुत का क्या हाल होगा।
मनोरमा का 'स्त्री-चरित्र' और मास्टर प्लान
मनोरमा ने सीमा को करीब बिठाकर बहुत ही गंभीर स्वर में समझाया:
> "सीमा, औरत चाहे कितनी भी उदार हो जाए, अपने पति का लंड किसी और औरत के साथ बांटना उसे कभी बर्दाश्त नहीं होता—चाहे वो उसकी सगी बहन ही क्यों न हो। अगर मेरी बेटियों को पता चला कि उनके पति रेखा की चुत के दीवाने हैं, तो घर में महाभारत मच जाएगी। इसलिए, यह राज सिर्फ तुम्हारे और मेरे बीच रहेगा।"
>
मनोरमा ने अपनी योजना की बारीकियां साझा कीं:
* दोहरी चाल: मनोरमा अपनी बेटियों के सामने यह जताएगी कि रेखा बहुत ही 'सीधी-सादी' और 'पूजा-पाठ' वाली लड़की है, ताकि उन्हें कभी शक ही न हो कि उनके पति इस 'पवित्र' लड़की के पीछे भाग सकते हैं।
* वक्त का चुनाव: मनोरमा ने तय किया कि जब उसकी बेटियाँ सो रही होंगी, या खरीदारी के लिए बाहर जाएँगी, या पार्लर में होंगी—तभी वह अपने दामादों को 'काम' के बहाने रेखा के पास भेजेगी।
* दामादों की मजबूरी: मनोरमा अपने दामादों की कुछ ऐसी कमज़ोरियाँ (या उनके पुराने राज) जानती है, जिनके दम पर वह उन्हें अपनी उंगलियों पर नचाती है। वह उन्हें यह एहसास दिलाएगी कि रेखा के साथ उनका संबंध एक "इनाम" है जो केवल उनकी सास (मनोरमा) की वजह से उन्हें मिल रहा है।
सीमा की सहमति
सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा:
> "दीदी, आप तो वाकई में इस खेल की माहिर खिलाड़ी निकलीं। बेटियों को भी खबर न हो—यही तो असली हुनर है। मेरी रेखा भी बाहर से इतनी भोली बनेगी कि आपकी बेटियाँ खुद उसे अपनी सहेली बना लेंगी, और पीठ पीछे उनके पति रेखा की चुत में अपनी प्यास बुझा रहे होंगे।"
रेखा की नई पहचान: 'गुप्त काम-मोहिनी'
अब रेखा को सीमा ने एक नई शिक्षा देनी शुरू की: 'मौन और छल'।
उसने रेखा को समझाया कि उसे वंदना, पल्लवी और ईशा (मनोरमा की बेटियाँ) का विश्वास जीतना होगा। उसे उनके सामने एक 'नासमझ' लड़की का नाटक करना होगा ताकि वे खुद अपने पतियों को रेखा की मदद करने के लिए कहें।
रेखा: "माँ, आप फिक्र मत करो। मैं उनकी आँखों में धूल झोंकने में भी माहिर हो जाऊंगी। मैं उनकी ऐसी 'बहन' बनूँगी जो उनके पतियों को चूस लेगी और उन्हें पता भी नहीं चलेगा।"
 
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mastmast123

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कमरे के भीतर की उत्तेजना अब उस स्तर पर पहुँच गई थी जहाँ मर्यादा और रिश्तों की हर दीवार ढह चुकी थी। सीमा, जो इस पूरे खेल की सूत्रधार थी, उसने देखा कि मनोरमा की आँखों में रेखा के नग्न शरीर को देखकर कैसी भूख उमड़ रही है।
सीमा का मास्टर स्ट्रोक
सीमा ने मंद मुस्कान के साथ मनोरमा के पीछे जाकर उनके गाउन के बटन खोलने शुरू कर दिए। मनोरमा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि अपनी गर्दन पीछे झुकाकर सीमा के इस सहयोग का आनंद लेने लगीं।
सीमा: "दीदी, जब पारखी ही जौहरी है, तो बीच में यह पर्दा कैसा? आज अपनी होने वाली बहू को वह सुख दीजिए जो उसे आने वाले कल के लिए तैयार कर दे।"
कुछ ही पलों में मनोरमा भी पूरी तरह विवस्त्र होकर रेखा के सामने खड़ी थीं। एक तरफ रेखा की कुंवारी, कसी हुई जवानी थी और दूसरी तरफ मनोरमा का अनुभवी, भरा हुआ और रसूखदार बदन।
सास-बहू का कामुक मिलन
सीमा ने रेखा का हाथ पकड़कर उसे मनोरमा की ओर धकेला। "जा रेखा बेटी, अपनी सास के चरणों से शुरू कर और उन्हें दिखा कि तेरी जीभ में कितना जादू है।"
* जिस्मों की रगड़: रेखा अपनी सास के नग्न बदन से चिपक गई। मनोरमा के भारी और ढीले स्तन जब रेखा के कड़क स्तनों से टकराए, तो कमरे में मांस की रगड़ की एक मदहोश कर देने वाली आवाज़ गूँजी। मनोरमा ने रेखा के कूल्हों को अपनी मज़बूत पकड़ में भर लिया।
* जीभ और होंठों का संगम: मनोरमा ने रेखा के होंठों को चूसना शुरू किया, जैसे वह रेखा की पूरी आत्मा खींच लेना चाहती हों। रेखा की जीभ मनोरमा के मुँह में लड़खड़ा रही थी। सीमा पास ही खड़ी होकर इन दोनों औरतों के जिस्मानी मिलन को देख रही थी और बीच-बीच में रेखा की कमर सहला रही थी।
* लेस्बियन आनंद का चरम: मनोरमा ने रेखा को कालीन पर लेटा दिया और उसकी जांघों के बीच बैठ गईं। "देख रेखा, मेरे घर में लंडों की कमी नहीं है, पर आज तुझे अपनी सास की इस प्यास को शांत करना होगा।"
मनोरमा ने अपनी उँगलियों को रेखा की गीली चुत में उतारा और साथ ही अपनी जीभ से रेखा के निप्पल्स को सहलाने लगीं। रेखा पागलों की तरह कमर उचका रही थी—"आह्ह्ह मम्मी जी... आप तो आग लगा रही हैं... ऊऊऊईईई माँ!"
सीमा की भागीदारी
सीमा खुद को रोक नहीं पाई। वह रेखा के सिर की तरफ बैठ गई और अपने स्तन रेखा के मुँह में दे दिए। अब रेखा के ऊपर उसकी सास मनोरमा थी और उसके मुँह में उसकी भाभी सीमा।
> नज़ारा अद्भुत था: तीन नंगी औरतें, जो रिश्तों में सास, बहू और ननंद-भाभी थीं, एक-दूसरे के जिस्म से रस निकाल रही थीं। मनोरमा ने रेखा की चुत को इतना चाटा कि रेखा का पूरा शरीर झटके लेने लगा और उसने अपना सारा काम-रस मनोरमा के मुँह में ही छोड़ दिया।
>
मनोरमा ने उस रस को पीते हुए रेखा की आँखों में देखा और बोली, "अब तू पक्की हुई। अब तेरा शरीर मेरे दामादों के लंडों को झेलने के काबिल बन रहा है।"
खेल का नया मोड़
जब तीनों शांत होकर एक-दूसरे से लिपटी लेटी थीं, तब मनोरमा ने सीमा से कहा, "सीमा, यह लड़की नहीं, यह तो आग का दरिया है। मेरी तीनों बेटियाँ तो इसके सामने फीकी पड़ जाएंगी। अब मुझे डर है कि मेरे दामाद कहीं इसके कमरे से बाहर निकलना ही न भूल जाएं।"
सीमा ने मुस्कुराते हुए रेखा के बिखरे बाल संवारे, "दीदी, इसीलिए तो मैंने इसे आपके पास भेजा है। लगाम आपके हाथ में रहेगी, बस चाबुक चलता रहना चाहिए।"
मनोरमा जब सीमा के घर से वापस अपने आलीशान बंगले पर पहुँची, तो उसके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि और आँखों में एक शैतानी चमक थी। उसने रेखा के उस नंगे, कामुक बदन को अपनी आँखों से देख भी लिया था और अपनी जीभ से चख भी लिया था। अब बारी थी अपने तीनों प्यासे दामादों के मन में उस आग को भड़काने की।
मनोरमा ने एक-एक करके तीनों को अपने निजी कक्ष (Study Room) में बुलाया, जहाँ वह अक्सर गुप्त मशवरे करती थी।
1. बड़े दामाद 'विक्रम' के साथ बातचीत
विक्रम, जो अपनी कद-काठी और अनुशासन के लिए जाना जाता था, जब अंदर आया तो मनोरमा ने बड़ी मासूमियत से रेखा की तस्वीर उसके सामने रख दी।
मनोरमा: "विक्रम, बेटा, आज मैं तुम्हारी होने वाली भाभी (रेखा) को देख कर आई हूँ। बहुत ही भोली और नाजुक लड़की है, डरती बहुत है। मुझे चिंता है कि हमारे इस बड़े परिवार में वह खुद को सुरक्षित महसूस करेगी या नहीं?"
विक्रम का जवाब: तस्वीर देखते ही विक्रम के लंड ने उसकी पैंट के अंदर करवट ली। उसने अपना गला साफ करते हुए कहा:
> "सासू माँ, आप फिक्र न करें। ऐसी नाजुक कलियों को 'विशेष सुरक्षा' की ज़रूरत होती है। मैं खुद इसकी जिम्मेदारी लूँगा। मैं उसे एहसास दिलाऊँगा कि इस घर के मर्द कितने 'मजबूत' हैं। उसे डरा हुआ नहीं, बल्कि मेरे साये में 'तृप्त' रहना सिखा दूँगा।"
>
2. मझले दामाद 'आकाश' के साथ बातचीत
जिम के मालिक और ठरकी स्वभाव वाले आकाश को मनोरमा ने थोड़ा और उकसाया।
मनोरमा: "आकाश, रेखा तो बहुत ही दुबली-पतली और कोमल है। मुझे तो लगता है वह यहाँ के तौर-तरीके और तुम जैसे तंदुरुस्त मर्दों की भीड़ देख कर ही घबरा जाएगी। बेचारी के बदन में तो जैसे जान ही नहीं है।"
आकाश का जवाब: आकाश ने तस्वीर पर अपनी उंगलियाँ फेरीं और एक कुटिल मुस्कान के साथ बोला:
> "मम्मी जी, शरीर में जान डालना तो मेरा पेशा है। आप बस उसे इस घर में ले आइये। उसके उस 'कोमल' बदन की ऐसी मालिश करूँगा और उसे ऐसी 'कसरत' करवाऊँगा कि वह खुद अपनी जवानी पर नाचने लगेगी। आप बेफिक्र रहिये, मैं उसकी रग-रग में 'गर्मी' भर दूँगा।"
>
3. छोटे दामाद 'ऋषि' के साथ बातचीत
चॉकलेटी और लंबे स्टैमिना वाले ऋषि के सामने मनोरमा ने रेखा की 'पवित्रता' का राग अलापा।
मनोरमा: "ऋषि, रेखा बहुत ही पूजा-पाठ वाली लड़की है। उसे दुनियादारी का बिलकुल पता नहीं है। मुझे लगता है उसे कोई ऐसा चाहिए जो उसे प्यार से समझा सके।"
ऋषि का जवाब: ऋषि ने रेखा की आँखों में छिपी उस 'चुदास' को भांप लिया जो सीमा और मनोरमा के मिलन के बाद वहां उभर आई थी। वह धीरे से मुस्कुराया और बोला:
> "मम्मी जी, जो लड़कियां बाहर से जितनी शांत दिखती हैं, उनके अंदर उतनी ही आग दफन होती है। मैं उसे 'मोह-माया' और 'प्रेम' के ऐसे पाठ पढ़ाऊँगा कि वह अपनी सारी मर्यादाएं भूलकर मेरे सामने समर्पित हो जाएगी। आप बस उसे मेरे हवाले कर दीजियेगा, मैं उसकी रूह (और जिस्म) की गहराई नाप लूँगा।"
>
मनोरमा का निष्कर्ष
तीनों दामादों से अलग-अलग बात करने के बाद मनोरमा अपनी कुर्सी पर पीछे झुक गई और अपनी आँखें बंद कर लीं। उसे पता चल गया था कि सीमा का शिकार अब जाल में फँसने के लिए तैयार है। तीनों दामाद अब रेखा के आने का इंतज़ार कर रहे थे, और हर एक को लग रहा था कि सासू माँ ने 'विशेष रूप से' उसे ही रेखा का ध्यान रखने को कहा है।
मनोरमा ने मन ही मन सोचा: "सीमा, तेरी रेखा यहाँ आते ही इन तीन सांडों की चारागाह बन जाएगी, और किसी को कानो-कान खबर नहीं होगी।"
 
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mastmast123

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सीमा और मनोरमा के बीच फोन पर हुई बातचीत में सीमा ने मनोरमा को बताया था कि उसने रेखा को वचन दिया है कि उसकी पहली सुहागरात अमित के साथ ही होगी। सीमा की आवाज़ में अपनी 'बेटी' जैसी ननंद के वादे को पूरा न कर पाने का डर था, लेकिन मनोरमा जैसी मंझी हुई खिलाड़ी के लिए यह कोई बड़ी समस्या नहीं थी।
सीमा और मनोरमा की गुप्त मंत्रणा
सीमा: (घबराते हुए) "दीदी, मैंने रेखा की माँग में अमित से सिंदूर भरवा दिया है, उसे अपनी बेटी मानकर वादा किया है कि उसकी पहली सुहागरात उसके भाई और प्रेमी अमित के साथ ही होगी। पर अब विदाई का वक्त है, वह आपके घर आ रही है... वहाँ यह सब कैसे मुमकिन होगा? अगर किसी को पता चला तो अनर्थ हो जाएगा!"
मनोरमा के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान उभरी। उसने बड़े शांत स्वर में जवाब दिया:
मनोरमा: "सीमा, तू अभी मुझे पूरी तरह जानती नहीं है। मेरे घर में पत्ता भी मेरी मर्ज़ी के बिना नहीं हिलता। तूने अपनी बेटी से वादा किया है, तो उसे पूरा करना अब मेरी इज़्ज़त का सवाल है। तू बस अमित को विदाई के साथ 'भाई' के तौर पर यहाँ भेज, बाकी मैं संभाल लूँगी।"
मनोरमा की 'सुहागरात' योजना
मनोरमा ने सीमा को अपनी वह तरकीब बताई जिससे रेखा और अमित का मिलन भी हो जाएगा और किसी को शक की भनक तक नहीं लगेगी:
* 'भाई' का हक: मनोरमा ने कहा कि वह घर में यह बात फैला देगी कि रेखा अपनी विदाई के बाद बहुत भावुक है और उसे अपने भाई (अमित) की बहुत याद आ रही है। वह अमित को 'नई बहू' के कमरे के बगल वाले गेस्ट रूम में ठहराएगी।
* नशीला प्रसाद: मनोरमा शादी की रस्मों के बाद घर के बाकी सदस्यों और अपनी बेटियों को 'थकान मिटाने' के नाम पर केसर वाला दूध पिलाएगी, जिसमें हल्की नींद की दवा होगी। सब गहरी नींद में होंगे।
* गुप्त दरवाजा: मनोरमा के पुराने बंगले में कमरों के बीच 'गुप्त दरवाजे' या बालकनी से जुड़ा रास्ता है। वह खुद आधी रात को अमित को लेकर रेखा के सुहागरात वाले कमरे में जाएगी।
* असली दूल्हे का इंतज़ाम: रेखा का असली पति (मनोरमा का बेटा) बहुत सीधा है। मनोरमा उसे पहले ही पिला-खिलाकर गहरी नींद सुला देगी या किसी रस्म के बहाने उसे कमरे से बाहर रखेगी।
मनोरमा का अंतिम शब्द
मनोरमा: "सीमा, तू चिंता मत कर। मैं खुद उस कमरे के बाहर पहरा दूँगी जहाँ भाई-बहन अपनी इस 'अनोखी सुहागरात' को मनाएंगे। रेखा की सील अमित ही तोड़ेगा और रेखा की रूह को शांत अमित ही करेगा। और सुन... मेरे तीनों दामादों को भी लगेगा कि रेखा अपने पति के साथ है, जबकि असल में वह अपने भाई के लंड का स्वाद ले रही होगी।"
सीमा ने चैन की सांस ली। उसे अब पक्का यकीन हो गया था कि रेखा ने अपनी 'असली माँ' तो उसे माना ही था, पर अब उसे एक ऐसी 'सास' मिली है जो उसकी वासना की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
 
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mastmast123

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कैसी है अब ये दास्तान, यदि आपका सहयोग रहेगा तो और भी दिलचस्प किस्से जुड़ेंगे इसमें, हौसला बढ़ाते रहिए, वरना लिखना हो नहीं पाता है
 
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mastmast123

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किसी को इंट्रेस्ट नहीं है इस किस्से में
बकवास लिख दिया, माफी की गुजारिश है पाठकों माफ कीजियेगा।
दोबारा शुरू कर के गलती कर दी मैने।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
 
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mastmast123

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विदाई का यह दृश्य जितना भावुक था, उससे कहीं अधिक कामुक और रहस्यों से भरा था। सीमा ने अपनी चतुराई और दुस्साहस की सारी हदें पार कर दी थीं। बाहर दुनिया की नज़रों में रेखा एक भारी लाल जोड़े में सजी दुल्हन थी, लेकिन हकीकत में सीमा ने उसे विदाई के ठीक पहले कमरे में ले जाकर पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया था।
विदाई का खामोश मंजर
सीमा ने रेखा के नंगे बदन पर सिर्फ़ एक बेशकीमती पश्मीना शॉल लपेटी और उसे इस तरह बांधा कि बाहर से देखने वाले को लगे कि दुल्हन को ठंड लग रही है या वह शर्म के मारे सिमटी हुई है। सीमा ने रेखा को मनोरमा के हाथों में सौंपा और कान में फुसफुसाया, "दीदी, आपकी अमानत पूरी तरह 'खुली' और तैयार है, अब इसे संभालना आपका काम है।"
कार के भीतर का रोमांच
कार के भीतर का नज़ारा किसी फिल्म के सस्पेंस सीन जैसा था:
* आगे की सीट: ड्राइवर के बगल में रेखा का नया पति (दूल्हा) बैठा था। वह अपनी ही धुन में था, शायद आने वाली रात के सुनहरे सपनों और थकान के बीच झूल रहा था। उसे ज़रा भी अंदाज़ नहीं था कि उसके ठीक पीछे उसकी पत्नी किस हाल में बैठी है।
* पीछे की सीट: बीच में रेखा बैठी थी और उसके एक तरफ उसकी सास मनोरमा। शॉल के अंदर रेखा पूरी तरह नग्न थी। कार के हिलने के साथ ही शॉल के रेशमी रेशे उसके संवेदनशील अंगों को छू रहे थे, जिससे रेखा की कामुकता और बढ़ रही थी।
मनोरमा का गुप्त स्पर्श
अंधेरी रात में कार तेज़ी से अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही थी। मनोरमा ने मौका पाकर शॉल के अंदर अपना हाथ डाल दिया।
> मनोरमा का हाथ सीधे रेखा की रेशमी जांघों पर गया। रेखा ने सिहर कर अपनी आँखें बंद कर लीं। मनोरमा का अनुभवी हाथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा और रेखा की उस 'फूली हुई रोटी' जैसी चुत को सहलाने लगा जो अभी भी अमित की याद में गीली थी।
कार की पिछली सीट पर चल रहा वह गुप्त खेल अब रेखा के बर्दाश्त के बाहर होता जा रहा था। बाहर सड़क की पीली रोशनी खिड़कियों से छनकर कभी-कभी अंदर आती, तो रेखा के चेहरे पर छाई उत्तेजना साफ दिखाई देती। आगे बैठा दूल्हा अपनी थकान और नींद में खोया हुआ था, उसे भनक भी नहीं थी कि पीछे उसकी माँ और उसकी नई पत्नी के बीच कामुकता का कैसा तांडव चल रहा है।
शॉल के भीतर का तूफान
मनोरमा का हाथ शॉल के अंदर रेखा के कड़क और उभरे हुए स्तनों पर पहुँच चुका था। उसने रेखा की निप्पल को अपने अंगूठे और पहली उंगली के बीच फंसाया और उसे बड़ी बेरहमी से उमेठना शुरू कर दिया।
* रेखा की सिसकी: निप्पल पर उस अचानक और बेदर्द मरोड़ से रेखा का शरीर कमान की तरह तन गया। उसने अपनी सिसकी दबाने के लिए अपने होंठों को दांतों तले दबा लिया, लेकिन उसकी आँखों से पानी निकल आया।
* मम्मी जी से गुहार: रेखा ने अपना चेहरा मनोरमा के कंधे पर टिका दिया और उसके कान में कांपती हुई आवाज़ में फुसफुसाने लगी:
> "आह्ह्ह... मम्मी जी... मम्म... मर जाऊंगी! क्या कर रही हो... मेरा बुरा हाल है मम्मी जी। नीचे से नदी बह रही है... अमित भैया की याद आ रही है। मेरा क्या होगा? ये रात कैसे बीतेगी मम्मी जी... मैं फट जाऊंगी!"
>
मनोरमा का जवाब और बढ़ती बेचैनी
मनोरमा ने निप्पल को और तेज़ उमेठा और रेखा की दूसरी छाती को अपनी हथेली से भींचते हुए उसके कान के पास गर्म सांसें छोड़ीं:
> "चुप रह लाडो... ये तड़प ही तेरा जेवर है। तेरा पति आगे बैठा है, उसे पता भी नहीं कि उसकी दुल्हन शॉल के अंदर नंगी होकर अपनी सास के हाथों से झड़ना चाहती है। अभी तो सिर्फ ये निप्पल उमे
ठे हैं,

> मनोरमा का यह दांव वाकई बहुत गहरा और शातिराना था। कार जैसे ही शहर के बाहरी इलाके में स्थित उनके पुश्तैनी "बड़े मंदिर" के पास पहुँची, मनोरमा ने योजना के अनुसार अपनी चाल चली। यह मंदिर काफी एकांत में था और वहाँ का वातावरण बहुत ही शांत और रहस्यमयी था।
मनोरमा ने कार रुकवाई और अपने बेटे (दूल्हे) से बहुत ही गंभीर और धार्मिक स्वर में कहा:
"बेटा, हमारे खानदान की एक पुरानी मन्नत है कि घर की कुलवधू को पहली रात इस बड़े मंदिर के गर्भगृह में माँ की प्रतिमा के सामने अकेले गुजारनी होती है। इससे वंश की वृद्धि होती है और पति-पत्नी का रिश्ता अटूट रहता है। तू जा, तू घर पहुँच और मेहमानों को संभाल, मैं रेखा को यहाँ की रस्म पूरी करवाकर सुबह तक आ जाऊँगी।"
बेचारा सीधा-सादा बेटा अपनी माँ की बात कैसे टालता? उसने सिर झुकाया और रेखा की ओर देखा, जो अभी भी उसी शॉल में लिपटी हुई थरथरा रही थी। बेटे को लगा कि रेखा डर की वजह से कांप रही है, जबकि हकीकत में उसकी जांघों के बीच मनोरमा के हाथ ने उसे पागल कर रखा था।
अगला दृश्य:
बेटा कार लेकर घर की ओर निकल गया। अब उस सुनसान मंदिर की सीढ़ियों पर मनोरमा और पूर्ण रूप से नग्न रेखा (जो सिर्फ़ शॉल में थी) अकेली थीं।
मनोरमा: "देख रेखा, मैंने तेरे लिए पूरा मैदान खाली कर दिया है। अब इस मंदिर के पीछे वाले गेस्ट रूम में तेरा 'सच्चा पति' अमित पहुँच चुका है। यहाँ कोई देखनी वाली आँख नहीं है।"
मनोरमा ने रेखा का हाथ पकड़ा और उसे मंदिर के पीछे वाले हिस्से में ले गई। जैसे ही कमरे का दरवाजा खुला, अंदर मध्यम रोशनी में अमित खड़ा था। अमित ने जैसे ही देखा कि रेखा सिर्फ़ एक शॉल में है, उसका लन्ड झटके मारने लगा।
रेखा की सिसकी:
शॉल को वहीं फर्श पर गिराते हुए रेखा ने अमित की बाहों में खुद को झोंक दिया। मनोरमा वहीं दरवाजे पर खड़ी होकर उन दोनों के मिलन को देखने लगी। रेखा नंगी हालत में ही अमित के कानों में फुसफुसाने लगी:
"भैय्या... अमित... देखो आपकी रेखा मंदिर में आपकी 'भेंट' बनने आई है। जल्दी करो, वरना मैं फट जाऊँगी! मम्मी जी ने रास्ते भर मेरा जो हाल किया है, उसे अब सिर्फ़ आपका लन्ड ही शांत कर सकता है।"
मनोरमा ने मुस्कुराते हुए बाहर से कुंडी लगा दी और खिड़की के पास से इस 'पवित्र' सुहागरात का नज़ारा देखने के लिए तैयार हो गई।
मंदिर के उस एकांत गेस्ट रूम का नज़ारा किसी कामुक स्वप्न जैसा था। मनोरमा ने इसे किसी मंदिर के गर्भगृह की तरह नहीं, बल्कि एक आलीशान काम-महल की तरह सजाया था। चारों तरफ चमेली के फूलों के गजरे लटके थे और फर्श पर मखमली गद्दे बिछे थे। कमरे के कोने में पीतल के दीयों की मद्धम रोशनी रेखा के गोरे बदन पर पड़कर उसे सोने जैसा चमका रही थी।
एक चांदी की थाली में विशेष जड़ी-बूटी युक्त तेल रखा था, जिसे मनोरमा ने खास तौर पर अमित के लिए तैयार करवाया था ताकि रेखा की 'अमिट चुदास' को सहलाया जा सके।
कामुक मालिश की शुरुआत
रेखा उस गद्दे पर बिल्कुल नंगी चित लेट गई। उसकी देह उत्तेजना के मारे धनुष की तरह कमान हो रही थी। उसकी चुत से निकलता रस फर्श तक पहुँचने को बेताब था। वह उन .001% औरतों में से थी जिनके रोम-रोम में सिर्फ और सिर्फ 'लंड' की भूख बसी थी।
अमित: "रेखा, आज तू मेरी बहन नहीं, मेरी देवी है। और इस तेल से मैं तेरी उस आग की पूजा करूँगा जो सीमा दीदी ने तेरे अंदर जगाई है।"
अमित ने अपनी हथेलियों में वह गर्म तेल लिया और रेखा के उन विशाल पहाड़ों (Bobs) पर फेरना शुरू किया। तेल के स्पर्श से रेखा की त्वचा और भी चिकनी और कामुक हो गई।
* मर्दन का जादू: अमित ने तेल भरी उंगलियों से रेखा की कड़क हो चुकी निप्पल्स को पकड़कर उन्हें गोल-गोल घुमाना शुरू किया। रेखा का पूरा बदन ऊपर को उचका—"आह्ह्ह अमित... अमित भैय्या... ये तेल... ये हाथ... उफ्फ! मैं मर जाऊंगी, इसे और मसलो!"
चुत की पूजा और बेइंतहा प्यास
अमित धीरे-धीरे नीचे उतरा। उसने तेल की कुछ बूंदें रेखा की नाभि में डालीं और फिर अपनी तेल से लथपथ हथेलियों को रेखा की फूली हुई चुत के मुहाने पर रख दिया।
रेखा की सिसकी: "मम्मी जी... देखो अमित भैया क्या कर रहे हैं!"
खिड़की के पास खड़ी मनोरमा यह सब देख कर खुद को सहला रही थी। उसने वहीं से फुसफुसाते हुए कहा—"देखती रह लाडो, अभी तो सिर्फ तेल लगा है, असली खेल तो अभी बाकी है।"
अमित ने रेखा की जांघों को पूरी तरह चौड़ा कर दिया और उस जादुई तेल से उसकी चुत की फांकों की मालिश करने लगा। रेखा पागलों की तरह अपने कूल्हे पटकने लगी। उसकी चुत के अंदरूनी होंठ तेल और काम-रस के संगम से इतने चिकने हो गए थे कि अमित की उंगलियां उनमें संगीत पैदा कर रही थीं।
सुहागरात का चरम रोमांच
रेखा की 'चुदक्कड़' फितरत अब बेकाबू हो रही थी। उसने अमित के हाथ पकड़ लिए और उन्हें अपनी चुत पर और ज़ोर से दबाते हुए बोली:
> "अमित... अब और नहीं! ये मालिश मुझे पागल कर देगी। तुम्हारा वो गोरा और लेप लगा हुआ लंड कहाँ है? उसे मेरी इस प्यासी गुफा के द्वार पर लाओ। मुझे उसे महसूस करना है... मुझे उसे चूसना है! देखो मेरी चुत कैसे धड़क रही है, यह सिर्फ तुम्हारे लंड का स्वाद मांग रही है!"
>
अमित खड़ा हुआ, उसका लंड मंदिर के उस दीये की रोशनी में किसी खंभे की तरह तना हुआ और चमक रहा था। रेखा ने झुककर उस लंड को अपने दोनों हाथों में भर लिया और उसे अपनी आँखों, गालों और फिर अपने मुँह के करीब ले गई।
मनोरमा (खिड़की से): "हाँ रेखा, चूस ले इसे! आज कोई मर्यादा नहीं, आज सिर्फ वासना का साम्राज्य है। अमित, अपनी इस प्यासी बहन को दिखा दे कि इस मंदिर में कौन किसकी बलि चढ़ाता है!"
कमरे का तापमान अब उस स्तर पर था जहाँ हवा में भी कामुकता की गंध तैर रही थी। मनोरमा खिड़की से यह सब देख रही थी और मन ही मन उन तमाम सासुओं के बारे में सोच रही थी जो अपनी बहुओं की जवानी को चूल्हों की आग में झोंक देती हैं। उसने सोचा, 'अगर हर सास मेरी तरह अपनी बहू की चुदास को समझे, तो दुनिया की हर चुत को उसका मनपसंद लंड नसीब हो।'
मंदिर की रात और चुत की पुकार
अमित का लंड तेल और जड़ी-बूटियों के लेप से चमक रहा था। रेखा, जो साक्षात् 'काम-पिपासा' का रूप बन चुकी थी, उसने अमित के लंड को मुट्ठी में भींचा और उसे अपनी गुलाबी चुत के मुहाने पर सटा लिया।
रेखा: (सिसकते हुए) "मम्मी जी... देखो इसे, ये कितना गर्म और सख्त है! अमित भैया, अब और तरसाना पाप होगा... मेरी इस प्यासी चुत की गहराइयों को नाप लो, वरना ये आग मंदिर की दीवारों को पिघला देगी!"
अमित: "रेखा, आज ये लंड तेरी हर सिसकी का हिसाब लेगा। सासु माँ ने जो तेल लगाया है, वो तुझे रात भर झड़ने नहीं देगा, सिर्फ तड़पाएगा।"
लंड की अंतिम रगड़ाई और घर्षण का संगीत
अमित ने रेखा की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख लिया, जिससे रेखा की चुत बिल्कुल फूलकर सामने आ गई। उसने लंड की टोपी को रेखा के दाने (Clitoris) पर रखा और उसे गोल-गोल घुमाने लगा।
* चुत की थरथराहट: रेखा के पूरे शरीर में करंट दौड़ गया। वह अपनी उंगलियों से गद्दे को फाड़ने लगी। अमित लंड को अंदर नहीं डाल रहा था, बल्कि उसे चुत की फांकों के बीच बड़ी तेज़ी से ऊपर-नीचे घिस रहा था।
* रस का सैलाब: रगड़ इतनी तीव्र थी कि तेल और चुत-रस मिलकर सफेद झाग बनाने लगे। रेखा की सिसकियां अब चीखों में बदल रही थीं—"भैयाआआ... आह्ह्ह मम्मी जी... ये मरवा देगा मुझे... उहहहह! इतना मज़ा... इतना घर्षण... मेरी चुत फटी जा रही है!"
मनोरमा की हिदायत:
मनोरमा बाहर से उत्तेजित होकर बोली, "अमित, रुकना मत! इसकी चुत की हर नस को हिला दे। रेखा, देख तेरा भाई कैसे तुझे एक 'असली औरत' बना रहा है। सासुओं को सीख लेनी चाहिए कि बहू की असली सेवा उसके बदन की आग बुझाना है!"
तड़प का चरम
रेखा का चेहरा पसीने से भीग चुका था, उसकी आँखें चढ़ी हुई थीं। वह उस .001% श्रेणी की औरत थी जिसकी भूख लंड की एक-दो रगड़ से नहीं बुझती।
रेखा: "अमित भैया... इसे और ज़ोर से घिसो... मेरी पूरी चुत को इस लंड से लाल कर दो! माँ सीमा ने वादा किया था कि आप मुझे जन्नत दिखाओगे... आज दिखा दो वो जन्नत! आआआह्ह्ह्ह मम्मी जी... मैं झड़ने वाली हूँ... मैं फट जाऊंगी!"
अमित ने रगड़ की रफ़्तार और बढ़ा दी। कमरे में 'चप-चप' की आवाज़ गूँज रही थी। रेखा के कूल्हे हवा में झटके मार रहे थे। अचानक रेखा का शरीर बिल्कुल पत्थर की तरह कड़ा हो गया, उसकी आँखें उलट गईं और उसकी चुत ने गर्म रस की ऐसी पिचकारी मारी कि अमित का पूरा पेट और लंड उस रस से नहा गया।
लेकिन मज़ा देखिए—झड़ने के बावजूद रेखा की प्यास कम नहीं हुई। वह हाँफते हुए फिर से अमित के लंड की ओर हाथ बढ़ाने लगी।
मंदिर के उस गेस्ट रूम की दीवारों ने शायद ही पहले कभी ऐसी वासना देखी होगी। अमित का सब्र अब जवाब दे चुका था और रेखा की 'चुदक्कड़' आत्मा उसके शरीर के हर पोर से बाहर निकलने को बेताब थी। मनोरमा ने खिड़की से इशारा किया, "अमित, अब इसे और मत तड़पा, इसकी सील का असली हकदार तू ही है। डाल दे इसे पूरा!"
सुहागरात का असली महा-मिलन
रेखा ने अपनी दोनों टांगें पूरी तरह फैला दीं और अपने हाथों से अपनी चुत की फांकों को और चौड़ा कर लिया ताकि अमित के लन्ड के लिए रास्ता बिल्कुल साफ हो जाए।
रेखा: (गहरी सांसें लेते हुए) "अमित भैया... अब और नहीं सहा जाता। डाल दो इसे... पूरा उतार दो अपनी इस बहन की गहराई में! फाड़ दो मुझे... मैं आपकी और सिर्फ आपकी होना चाहती हूँ। आज ये मंदिर गवाह रहेगा कि आपकी रेखा कितनी बड़ी लन्ड-खोर है!"
अमित ने अपने भारी और तेल से चिकने लन्ड की टोपी को रेखा के चुत-द्वार पर टिकाया। उसने एक हाथ से रेखा का गला हल्के से भींचा और दूसरे हाथ से उसके कूल्हों को ऊपर उठाया।
पूर्ण प्रवेश और रेखा की पुकार
जैसे ही अमित ने एक जोरदार धक्का मारा, उसका आधा लन्ड रेखा की कसी हुई गुफा के अंदर धंस गया।
रेखा: "आह्ह्ह्ह्ह... उईईईईई माँ! अमित भैयाआआ!" रेखा के मुँह से एक चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा मजे का मिश्रण थी। उसकी आँखों से आंसू निकल आए लेकिन होंठों पर एक शैतानी मुस्कान थी।
अमित रुका नहीं, उसने दूसरा धक्का और भी ताकत से मारा और उसका पूरा का पूरा 8 इंच का लन्ड रेखा की बच्चेदानी की दीवार से जा टकराया। रेखा का पूरा बदन कांप उठा।
* अमित का प्रहार: अमित अब किसी जंगली सांड की तरह रेखा के ऊपर टूट पड़ा था। वह हर धक्के के साथ अपना पूरा वजन रेखा पर डाल रहा था। 'चपा-चप... चपा-चप' की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँजने लगीं।
* रेखा का उकसाना: रेखा अपनी कमर को ऊपर उचका-उचका कर अमित के हर वार का स्वागत कर रही थी। "हाँ... और ज़ोर से! अमित भैया, क्या बस इतना ही दम है? अपनी इस बहन की चूत को आज अपना गुलाम बना लो। और अंदर तक मारो... मुझे अपनी औलाद का बीज दे दो भैया, सीमा माँ बहुत खुश होंगी!"
मनोरमा का निर्देशन और वासना का सावन
मनोरमा बाहर से यह मंजर देख कर पागल हो रही थी। उसने अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डाल रखी थीं और नज़ारे का लुत्फ ले रही थी।
मनोरमा: "साबाश अमित! इसकी चीखें रुकनी नहीं चाहिए। रेखा, देख तेरी सासू माँ तेरे लिए कितनी खुश है। ऐसी चुदाई की व्यवस्था हर माँ को अपनी बहू के लिए करनी चाहिए ताकि घर की औरतें बाहर मुँह न मारें और अपनों के लन्ड से ही तृप्त रहें।"
रेखा अब पूरी तरह से 'पशुवत' हो चुकी थी। उसने अमित के पीठ पर अपने नाखूनों से निशान बना दिए थे। वह बार-बार अमित के होठों को काट रही थी और चिल्ला रही थी—"मारो मुझे... और ज़ोर से चोदो! मैं आपकी रखैल हूँ भैया... अपनी सगी बहन को अपनी रखैल बना लो!"
अमित ने रेखा को पलटाकर 'डोगी स्टाइल' में कर दिया। पीछे से जब अमित का काला और सख्त लन्ड रेखा की गोरी और गोल गांड़ के बीच से उसकी चुत में समाया, तो रेखा ने घुटनों के बल होकर बेड पर अपना सिर टिका दिया और पागलों की तरह झूलने लगी।
महा-झड़न (The Ultimate Climax)
अमित के लन्ड की रफ्तार अब इतनी तेज थी कि रेखा को लग रहा था जैसे उसके अंदर कोई मशीन चल रही हो। अंततः, अमित का शरीर कांपने लगा और रेखा की चुत के अंदरूनी हिस्से फिर से सिकुड़ने लगे।
रेखा: "मैं गई... अमित भैया... मैं मर गई! डाल दो अपना सारा गरम पानी मेरे अंदर! मम्मी जीईईईई..."
अमित ने एक आखिरी और सबसे गहरा धक्का मारा और अपना सारा वीर्य रेखा की कोख में खाली कर दिया। रेखा भी उसी पल झड़ी और उसका रस और अमित का पानी मिलकर उसकी जांघों से नीचे बहने लगा। दोनों निढाल होकर एक-दूसरे पर गिर पड़े।
मनोरमा: (पसीने पोंछते हुए) "अद्भुत! अब तुम दोनों आराम करो। सुबह होते ही हमें घर निकलना है, जहाँ तुम्हारे तीन 'नंदोई' इस नई नवेली भाभी की अगवानी के लिए बेताब खड़े होंगे।"
 
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