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Incest मुझे प्यार करो,,,

rohnny4545

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अरे भाई नाराज क्यों हो रहे हो मैं भी स्टोरी लिखता था पहले,मुझे पता है लोग क्या सोचते हैं. मैं भी एक स्टोरी लिखी थी जो काफी लोगों को पसंद थी पर बाद में लोगों के कमेंट आने लगे की स्टोरी में कुछ नया लिखो क्या हर बार वही मां और बेटा



तुम्हारी बात समझता हूं मुझे भी ऐसी स्टोरी पढ़ना पसंद है पर बार-बार वही कैरक्टर आते रहे तो एक समय आने के बाद स्टोरी अच्छी नहीं लगती इसलिए मैं कह रहा हूं

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rohnny4545

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अरे भाई नाराज क्यों हो रहे हो मैं भी स्टोरी लिखता था पहले मुझे पता है लोग क्या सोचते हैं मैं भी एक स्टोरी लिखी थी जो काफी लोगों को पसंद थी पर बाद में मैंने लोगों के कमेंट आने वालों की स्टोरी में कुछ नया लिखो क्या हर बार वही मां और बेटा



तुम्हारी बात समझता हूं मुझे भी ऐसी स्टोरी पढ़ना पसंद है पर बार-बार वही कैरक्टर आते रहे तो एक समय आने के बाद स्टोरी अच्छी नहीं लगती इसलिए मैं कह रहा हूं

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Sanju@

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सुगंधा के कहने पर अंकित मुव लेने चला गया था और उसके जाते ही सुगंधा मौके का फायदा उठाते हुए जल्दी-जल्दी बिस्तर से नीचे उतरकर अपनी पेंटि उतार दी और उसे बिस्तर के नीचे दबा दी और फिर से उसी तरह से बैठ गई,,, आगे की सोच कर उसके बदन में कसमसाहट बढ़ रही थीक्योंकि आज वह अपने मन में यही सोच रही थी कि आज की रात उसे जरूर कुछ करना होगाताकि दोनों के बीच की शर्म पूरी तरह से खत्म हो जाए और दोनों एक एकाकार हो जाए। बार-बार सुगंधा की नजर दरवाजे पर जा रही थी उसके बदन में गुदगुदाहट हो रही थी,,, और अंकित की भी हालत कुछ ऐसी ही थी मुंह लेने के लिए वह रसोई घर में पहुंच चुका था और थैले में हाथ डालकर वह मूव निकल भी गया था,,, और अपने मन में सोच रहा था कि कशमालिश करने का मौका उसे मिल जाता तो कितना मजा आता है यही सोचता हुआ वह मूव को अपने हाथ में ले लिया और अपनी मां के कमरे की तरफ आगे बढ़ गया,,,, दरवाजे पर पहुंचते ही देखा तो उसकी मां उसी तरह से बैठी हुई थी,,,, अपनी मां को देखते ही वह कमरे के अंदर दाखिल होता हुआ बोला,,,।




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ज्यादा दर्द कर रहा है क्या मम्मी,,,,

हा रे शुरू शुरू में तो कुछ भी महसूस नहीं हुआ था लेकिन इस समय बहुत दर्द कर रहा है,,,,।

गेंद ज्यादा जोर से लगी थी ना,,,।

उस समय तो ऐसा नहीं लग रहा था लेकिन अभी दर्द कर रहा है,,,,।

ठीक है ये लो क्रीम,,, लेकिन क्या यह असर करेगी,,,।

करती होगी तभी तो टीवी पर इसकी एडवर्टाइज आती है,,,।

(अपनी मां की बातें सुनकर उसे थोड़ा तोफिक्र हो रहा था कि अगर सच में दर्द कर रहा होगा तो मुसीबत वाली बात हो जाएगी लेकिन फिर भी वह अपनी मां का मन लेने के लिए बोला)

अच्छा ठीक है मम्मी तुम मालिश करो मैं छत पर जाकर बिस्तर लगा देता हूं,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को गुस्सा आ रहा था अपने बेटे के भोलेपन पर अंदर ही अंदर गुस्सा कर रही थी और अभी इस बात के लिए कीजिसके लिए वह खुद इतना कुछ कर रही है सब कुछ दिखाने के लिए तैयार है वह खुद कुछ भी देखने की सोच भी नहीं रहा है जबकि खुले शब्दों में बोल भी चुकी हूं कि चोट जांघ के ऊपर लगी है,,, फिर भी कितना नादान है,,,अपने बेटे की बात सुनकर वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,)




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कैसा बेटा है रे तू देख रहा है कि मां को चोट लगी है और तु बिस्तर लगाने के बारे में सोच रहा है,,।

नहीं मम्मी ऐसी कोई बात नहीं है,,,मैं तो इसलिए कह रहा था कि तुम जल्दी से मालिश कर लो तब तक मैं बिस्तर लगा देता हूं ताकि तुम्हें बिस्तर लगाना ना पड़े,,,,,।

तुझे बिस्तर लगाने की पड़ी है लेकिन मेरे चोट के बारे में कुछ सोच नहीं रहा है।

तो में अब कर भी क्या सकता हूं मम्मी,,,, इस समय तो दवा खाना भी बंद हो गया होगा। नहीं तो मैं इस समय तुम्हें दवा दिलवा दिया होता,,,,।

दवा दिलवाने की जरूरत नहीं है,,,,।

,, तो फिर,,,

ले तू ही अच्छे से मालिश कर दे,,,,( बिस्तर पर रखी हुई ट्यूब को उठाकर अपने बेटे की तरफ आगे बढ़ाते हुए वह बोली,,,, सुगंधा मूव क्रीम के द्वाराअपना निशाना साधना चाहती थी अपनी मंजिल तक पहुंचाना चाहती थी क्योंकि चोट भी ऐसी जगह लगी थी जिस पर मालिश करते हुए उसके बेटे के द्वाराउसकी गुलाबी गली देखने का उसे भरपूर मौका मिलने वाला था और यह मौका खुद सुगंधा अपने बेटे को देना चाहती थी क्योंकि अभी तक वह अपनी गुलाबी गली को सिर्फ उसे दिखाते आ रही थी लेकिन आज वह सोच रही थी कि उसे गुलाबी गली में वह पूरी तरह से घूमे,,,,अपनी मां की बात सुनकर अंकित की भी आंखों में वासना का तूफान उठने लगा जो कुछ भी वह अपने मन में सोच रहा था वह सच होने वाला था इसलिए बिल्कुल भी देर ना करते हुए वह अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और अपनी मां के हाथ से वह क्रीम लेता हुआ बोला,,,)




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ठीक है इतना तो मैं कर ही सकता हूं तुम्हारी सेवा में,,,, चलो देखु तो सही चोट किस जगह लगी हुई है,,,,।

चोट तो ऐसी जगह लगी है बेटा कि मेरी तो दिखाने की हिम्मत नहीं हो रही है शर्म से मेरी हालत खराब हो रही है,,,,।

तब तो दवा खाने में कैसे दिखाती,,


इसलिए तो मुझे दवा खाने नहीं जाना है मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मालिश से मेरा दर्द ठीक हो जाएगा,,,,।

अगर तुम्हें इतना विश्वास है तो जरूर मैं तुम्हारे विश्वास पर खरा उतरूंगा,जो तुमने मुझे मौका दी हो मे भी इस मौके का पूरा फायदा उठाऊंगा,,,,(अंकित जानबूझकरदो अर्थ में बात कर रहा था और उसकी मां उसके कहने के मतलब को समझ रही थी इसके लिए उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी थी,,,और वह भी अपने मन में कह रही थी कि मैं भी तुझे मौका देना चाहती हूं देखना चाहती हूं कि तू सच में पूरा मर्द बन चुका है कि नहीं,,,, सुगंधा दरवाजे की तरफ देख रही थी यह देखकर अंकित बोला,,,)

वहां क्या देख रही हो,,,?

दरवाजा तो बंद कर दे,,,


लेकिन किस लिए यहां कौन सा हम लोग गलत काम करने जा रहे हैं जो दरवाजा बंद करना पड़े और वैसे भी तुम्हारे और मेरे सिवा घर पर तो कोई है नहीं,,,,।

तुझे बहुत गलत काम करने का मन कर रहा है ना,,,, मैं इसलिए कह रही हूं कि जहां पर मालिश करना है,,, वह थोड़ी ऊपरी जगह पर है इसलिए दरवाजा बंद कर दे,,,
(अंकित अपनी मां की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था,,,औरतों की यही बात सबसे अच्छी होती है कि अगर घर में कोई तीसरा शख्स ना हो तो भी फिर कुछ भी करते समय उन्हें दरवाजा बंद करने की आदत रहती है क्योंकि बंद कमरे में चार दिवारी के अंदर वह कुछ ज्यादा ही खुल जाती हैं,,,, इसलिए अपनी मां की बात मानते हुए वह दरवाजे तक गया और दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिया दरवाजा बंद करते समय और उस पर कड़ी लगाते समय अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि वह जानता था कि किस हालत में इस तरह से दरवाजा बंद किया जाता है अगर कमरे के अंदर एक खूबसूरत औरत हो तो,,, धीरे-धीरे अभी से ही अंकित के पेंट में तंबू बनना शुरू हो गया था,,, अंकित दरवाजा बंद करके वापस आ गया था,,,, और अपनी मां से बोला,,,)





अब लेट जाओ ताकि मैं अच्छे से मालिश कर सकूं,,,,,।

नहीं ऐसे ही मालिश करदे रुक,,,(सुगंधा इस तरह से बैठे हुए ही दोनों हाथों से अपनी साड़ी पकड़ कर ऊपर की तरफ उठने लगी वह बिस्तर पर गांड टीका कर बैठी हुई थी और उसकी गांड के वजन से नरम-दनरम गद्दा भी एकदम अंदर तक धंस गया था,,, सुगंधा का दिल जो रास्ता लग रहा था क्योंकि वह जानती थी कि वह अपने बेटे के सामने क्या करने जा रही हैदेखते-देखते वह बैठी अवस्था में ही अपनी साड़ी को घुटनों तक उठा दी थीऔर यह देखकर अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था वह बड़ी बेसब्री से अपनी मां की हरकत को देख रहा था उसकी गोरी गोरी टांग को देख रहा था,,,, और जानबूझकर सहज बनने के लिए बीच-बीच में बात भी कर रहा था)

कुछ ज्यादा ही ऊपर लग गई थी गेंद ऐसा लग रहा है,,

हां रे,,, बहुत ऊपर लगी है पहले से दर्द नहीं कर रहा था लेकिन अभी बहुत दर्द कर रहा है,,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी साड़ी को दोनों टांग आगे की तरफ किए हुए अपनी ज़ांघो तक साड़ी को उठा दी थी,,, अंकित की आंखें अपनी मां की गहराई जवान देखकर फटी के फटी रहे जा रही थीइस समय वह जिस तरह से बैठी थी उसकी मोटी मोटी जांघें केले के पेड़ के तने की तरह चिकनी चिकनी दिखाई दे रही थी जिसे देखकर पेट के अंदर अंकित का लंड अकड़ने लगा था,,,, अंकित चाहता था कि उसकी मां जल्दी से अपनी जवानी पर से पर्दा हटा दे क्योंकि वह जल्द से जल्द अपनी मां की गुलाबी गुफा को देखना चाहता था अभी उसके मन में यह शंका थी कि उसकी मां साड़ी के अंदर चड्डी पहनी है कि नहीं पहनी है अगर चड्डी पहनी हुई तो सारा मजा कीरकीरा हो जाएगा,,,, इसलिए वह मन ही मन में मना रहा था कि उसकी मां साड़ी के अंदर चड्डी ना पहनी हो,,, देखते देखते सुगंध अपनी साड़ी को जांघों उठा दी थी,,,




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साड़ी उठते समय जिस तरह की उत्सुकता उसे देखने में उसके बेटे की हो रही थी उससे कहीं ज्यादा उत्सुक वह खुद थी अपने बेटे को अपनी गुलाबी बुर दिखाने के लिए,,, उसका दील भी बड़े जोरों से धड़क रहा था और मदहोशी उसकी बुर से मदन रस टपक रहा था,,, आधी जांघों तक साड़ी उठ जाने के बाद अंकित बोला,,,,।

यही लगी है क्या,,?(उंगली के इशारे से अंकित बोला)

नहीं रे थोड़ा और ऊपर लगी है,,,,,(गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बोली,,,, दोनों किस से ऊपर नीचे हो रही थी दोनों मदहोशी की पराकाष्ठा तक पहुंच रहे थे अपने आप को एकदम उत्तेजित अवस्था में देखकर अंकित वही बिस्तर पर बैठ गया..अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देखने की कोशिश करने लगा जो कि इस समय आपस में सटी हुई थी,, जिसे देखकर अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया और अपनी मां से बोला,,,)

थोड़ा टांगों को खोलो तब ना पता चलेगा की कहां लगी है,,,,।






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(अंकित एकदम उत्साहित होता हुआ बोल रहा था और अपने बेटे की यह बात सुनकर सुगंधा भी मन ही मन में मुस्कुराने लगी थीक्योंकि सुगंधा को इस बात का एहसास अच्छी तरह से था कि उसका बेटा उसके जांघों पर लगी चोट को नहीं बल्कि उसके गुलाबी छेद को देखना चाहता हैं,,,, और यही तो खुद वह अपने बेटे को दिखाने के लिए सारा खेल रच रही थी इसलिए अपने बेटे की बात सुनते ही वह तुरंत अपने पर को घुटनों से एकदम से मोड़ ली और एकदम से तकरीबन डेढ़ फीट की दूरी तक उसे खोल दी उसकी दोनों टांगों के बीच डेढ़ फीट की दूरी बनी हुई थी,,, और उसके ऐसा करते हीअंकित की आंखों के सामने उसकी मां की गुलाबी पर जो एकदम उत्तेजना में कचोरी की तरह फूल गई थी वह एकदम से नजर आने लगी अंकित तो सामने बिस्तर पर बैठा बैठा अपनी मां की गदराई जवानी के प्रमुख ढांचे को देखकर पागल हो गया आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया,,, वह पहली बार अपनी मां की बुर नहीं देख रहा था लेकिन फिर भी इस समय वह काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था क्योंकि हालात ही कुछ ऐसे थे,,,वह अपनी मां के कमरे में बैठा हुआ था और एक ही बिस्तर पर दोनों बैठे हुए थे उसकी मां अपनी जांघों की चोट दिखाते दिखाते कब अपनी गुलाबी बुर उजागर कर दी कुछ पता ही नहीं चला।अंकित की हालत यह सोचकर और ज्यादा खराब हो रही थी कि उसकी मां साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनी थी जिसके बारे में वह सोचकर हैरान हो रहा थाअंकित अपने मन में यही चाहता था कि उसकी मां अंदर चड्डी ना पहनी हो ताकि वह सब कुछ अपनी आंखों से देख सके और यही हो भी रहा था इसलिए उसके चेहरे पर उत्तेजना के साथ-साथ प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे

चोट का ख्यालअंकित और उसकी मां के दिमाग से एकदम से निकल गया था क्योंकि इस समय जिस तरह के हालात में वह बैठी हुई थी अपनी दोनों टांगें खोलकर उसे भी अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी गुलाबी बुर एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, और यही तो अपने बेटे को दिखाने के लिए वह मौका देखकर अपनी चड्डी उतार दी थी,,,ताकि उसका बेटा उसकी नंगी बुर को देख सके उसके दर्शन कर सके ना की चड्डी में होने की वजह से वह भी निराश हो जाए क्योंकि उस समय वह अपने बेटे को चोट दिखाते दिखाते अपनी चड्डी तो नहीं उतार सकती थी ना,,,, माहौल पूरी तरह से एक पल में गर्म हो चुका था अंकित की आंखें अपनी मां की दोनों टांगों से बिल्कुल भी नहीं हट रही थी। और सुगंधा खुद अपने बेटे को अपनी बुर दिखाने से पीछे नहीं हट रही थी।अंकित अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देख रहा था और सुगंध अपने बेटे की तरफ देख रही थी दोनों की आंखों में वासना का तूफान उठ रहा था दोनों की आंखों में एक दूसरे को पाने की चाहत दिखाई दे रही थी। अंकित को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर मदन रस से भीगी हुई थी। अपने बेटे की हालत देखकर सुगंधा को बहुत अच्छा लग रहा था वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, लेकिन एक बार फिर से सहज बनते हुए वह अपने बेटे से बोली,,,)




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दिखाई दिया तुझे चोट,,,,,,

नहीं तो,,,,(अंकित एकदम मदहोश सा अपनी मां की बुर देखते हुए बोल रहा था उसे इस समय और कुछ नहीं दिखाई दे रहा था,,,,, और यह सुगंधा के लिए काफी उत्साहित कर देने वाली बातें थी वह अपने बेटे की हालत को देखकर बहुत खुश हो रही थी लेकिन फिर भी उसका ध्यान चोट पर ले जाना बहुत जरूरी था वरनासुगंधा के मन में हो रहा था कि उसका बेटा यही समझेगा कि उसकी मां अपनी बुर दिखाने के लिए सारा खेल रच रही थी इसलिए वहां अपनी टांग के नीचे से अपनी हथेली को अपनी जांघों तक ले गई और जहां पर दर्द कर रहा था वहां पर अपनी उंगली रखते हुए बोली,,,)

तुझे दिखाई दे रहा है देख यहां पर मुझे दर्द हो रहा है,,,,।

(अपनी मां की इस दिशा निर्देश परवह थोड़ा होश में आया और अपनी मां की बात पर ध्यान देने लगा और वह अपनी मां की बुर के निचले हिस्से की जांघ की तरफ देखने लगा जहां पर वह उंगली से दिखआ रही थीअंकित घुटनों के बल चलते हुए अपनी मां की दोनों टांगों की बेहद करीब तक आया और उसे जगह को देखने लगा जहां पर उसकी मां उंगली से दिखा रही थी और फिर उस जगह को देखते हुए बोला,,,)

हां मम्मी यह तो हल्की-हल्की लाल हो गई है,,,,।




बेटा यह तो उस गेंद की चोट की वजह से हल्की-हल्की लाल हो गई है,,, लेकिन जो तूने जो दर्द दिया है उसकी वजह से तो मेरी पूरी बुर गुलाबी हो गई है,,,(अपने बेटे की बात सुनकर वह अपने मन में ही बोली,,,,)

तभी तो दर्द कर रहा है,,,।

तुम अच्छा हुआ मूव खरीद ली इससे तुम्हें आराम मिल जाएगा लाओ लगा दुं,,,,,।

लगा दे अच्छे से,,,,।

थोड़ा लेट जाओ तब अच्छे से लग जाएगा,,,,,(अंकित जानबूझकर अपनी मां को लेट जाने के लिए कह रहा था क्योंकि वह जानता था कि लेटने से उसकी मां की बुर उसे और अच्छे से दिखाई देने लगेगी,,,, और सुगंधा भी अपने बेटे की बात मानते हुए धीरे से लेट गई,,,, और बोली,,,)

अब तो कर लेगा ना अच्छे से मालिश,,,,।

बिल्कुल एकदम साफ दिखाई दे रहा है,,,(अपनी मां की बुर देखते हुए) की कितनी हालत खराब है,,,,(वह अपनी मां की बुर की हालत को देख कर कह रहा था ना की चोट को देखकर और उसकी बात को सुगंधा भी अच्छी तरह से समझ रही थी। और मन ही मन में खुश भी हो रही थी,,, और वह धीरे से क्रीम का ढक्कन खोलने लगा और अपनी मां से बोला,,,)अब तुम इत्मानाम से लेटी रहो थोड़ी देर में तुम्हें आराम मिल जाएगा,,,,(ऐसा कहते हुएअंकित अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देख रहा था जो कि इस समय लेटने की वजह से खुद ही उसकी साड़ी थोड़ा गुलाबी बुर को ढंक ली थी,,, और ऐसा वह जानबूझकर नहीं की थी। जब वह बिस्तर पर पीठ के बल लेट रही थी तभी उसकी साड़ी सरक कर उसके गुलाबी छेंद को ढंक दी थी,,, और अपनी ही साड़ी की यह हरकत सुगंधा को अच्छी नहीं लगी थी,,और वह इस समय अपने हाथों से साड़ी को ऊपर उठा नहीं सकती थी। और यह बात अंकित को भी अच्छी नहीं लगी थी,, लेकिन इस बात से सुगंधा खुश भी थी,,, क्योंकि वह देखना चाहती थी कि अब उसका बेटा क्या करता है,,,अपने हाथों से उसकी साड़ी उठाकर उसकी बुर देखने की कोशिश करता है कि फिर बुद्धू बनकर सिर्फ मालिश ही करता रहेगा,,, फिर भी मौके की नजाकत को समझते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली,,,।




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मेरी हालत को ठीक करना अब तेरी जिम्मेदारी है देखती हूं कि तो क्या कर सकता है।

बिल्कुल भी फिक्र मत करो,,,, मैं अभी हालत में सुधार ला देता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह क्रीम दबाकर उसमें से दवा निकालने लगा,,, ऐसा करते हुए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था।क्योंकि कुछ ही देर में वह चाहता था कि उसकी हथेली उसकी मां की बुर के बेहद करीब हरकत करने वाली थी,,,, देखते ही देखते अंकित एकदम उत्तेजना से भरे हुएअपने दोनों हाथों से अपनी मां के टांग को थोड़ा सा और खोल दिया और ऐसा करने में जो अद्भुत सुख का उसे एहसास हुआ वह वर्णन करने जैसा नहीं था पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था।क्योंकि इस समय उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की चुदाई करने के लिए उसकी टांगों को खोल रहा हूं क्योंकि अक्सर मर्द औरत की टांग इसीलिए खोलने भी हैं वह तो कभी कबार इस तरह से मदद करने के लिए खोल दिया जाता है वरना अक्सर मर्दों का काम यही होता है और जैसा एहसास अंकीत को हो रहा था वैसा एहसास सुगंधा को भी हो रहा था,,, क्योंकि बरसों गुजर गए थे इस एहसास से गुजरे,, पल भर में ही उसे बीते हुए वह दिन याद आने लगे जब ईसी तरह से अंकित के पापा उसे छोड़ने के लिए इसी तरह से उसकी टांगों को खोलते थे,,,,। इस समय के हालात कुछ और थे,,,, सुगंधा का दिल जोरो से डल रहा था और जिस तरह से वहगहरी गहरी सांस ले रही थी उसके चलते हैं उसकी खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में कैद होने के बावजूद भी ऊपर नीचे होकर अपने होने का एहसास कर रही थी जिस पर बार-बार अंकित की नजर चली जा रही थी।





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सुगंधा का गुलाबी छेद जो इस समय उसके ही साड़ी के किनारी से हल्का सा ढंक गया था। उसके बारे में सोच कर अंकित पागल हुआ जा रहा थाक्योंकि कुछ पल पहले ही वह अपनी मां के उसे खूबसूरत अंग को देख चुका था और उसकी खूबसूरती उभर कर उसकी आंखों में वासना का तूफान भर रहा था,,,,, उंगली में हल्के से दवा लगाकर वह अपनी हथेली को अपनी मां की जांघ की तरफ आगे बढ़ाने लगा,,,बिस्तर पर लेटे हुए सुगंधा अपने बेटे को ही देख रही थी उसकी हरकत को देख रही थी,,,हल्का सा लाल रंग सुगंधा की जांघों पर दिखाई दे रहा था जहां पर रबड़ का गेंद लगा था और इस लाल रंग पर मूव क्रीम में से निकली हुई दवा अंकित लगाने लगा ,,, अंकित उंगली के सहारे हल्के हल्के दवा को लग रहा था तब तक सुगंधा को कुछ एहसास नहीं हो रहा था लेकिन जब सुगंधा ने कहीं।

अरे थोड़ा जोर लगा ऐसे कैसे आराम मिलेगा,,,,।

(बस इतना सुनते ही अंकित अपनी पूरी हथेली से उसे लाल रंग के हिस्से को दबोच दिया एकदम मदहोश होकर मानो के जैसे वह अपनी मां के साथ संभोग कर रहा हो और अंकित की इस हरकत पर सुगंध एकदम से उत्तेजित होकर सिहर उठी और एकदम से उसकी आंखें मदहोशी में बंद होने लगीजिस तरह का अनुभव उसे अपने शरीर में महसूस हुआ था उसके चलते हुए अपने लाल रंग के निचले हिस्से को दांत से दबा दी थी,,, और अपनी मां की इस एहसास कोअंकित अपनी आंखों से देख लिया था और समझ गया था कि उसकी मां को मजा आ रहा हैअंकित इस तरह से अपनी मां की जांघों को दबाना शुरू कर दिया और दवा को लगाना शुरू कर दिया अपनी मां की मोटी मोटी जांघ को दबाने में उसे इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत,,,,अंकित पागल हुआ जा रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां अधनंगी हालत में लेटी हुई थी,,,, उसकी गुलाबी पर हल्का सा साड़ी से ढंका हुआ था जिसे अंकित अपने हाथों सेउसकी साड़ी हटा देना चाहता था और उसके गुलाबी बुर को जी भर कर देख लेना चाहता था,,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, और इसके बारे में सोचता होगा वह अपनी मां की जांघ की मालिश कर रहा था।सुगंधा पीठ के बोल लेते हुए अपनी आंखों को बंद करके इस एहसास में धीरे-धीरे डूब रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था जहां पर वह मालिश कर रहा था बस उससे दो-तीन अंगुल की दूरी पर है सुगंधा का गुलाबी छेद था।और इसका एहसास मां बेटे दोनों को पागल कर रहा था अंकित का लंड उसकी पेंट में गदर मचाने को तैयार था और सुगंधा की बुर बार-बार पानी फेंक रही थी।




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अपनी नानी के साथ संबंध लेने के बाद उसे इतना तो पता ही था कि औरत को कैसे मदहोश किया जाता है उसे मजबूर किया जाता है संबंध बनाने के लिए इसलिए वह बार-बार अपनी मां की जांघ को जोर-जोर से दबा रहा था मसल रहा थारह रहे कर सुगंधा के मुंह से सिसकारी भी फूट पड़ रही थी और दर्द से थोड़ा कराह भी ले रही थी लेकिन अपने बेटे से इसकी बिल्कुल भी शिकायत नहीं कर रही थी जिसका मतलब साफ था कि वह भी आगे बढ़ना चाहती थी।अंकित अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी मालिश भी कर रहा था वह देखना चाहता था कि उसकी मां कुछ कहती है कि नहीं क्योंकि वह इस समय अपनी मां की साड़ी को उसकी बुर से थोड़ा सा ऊपर उठाना चाहता था,,,,ताकि वह यह देख सके कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है और वह अपनी मां को इसका एहसास दिला सके कि वह खुद क्या चाहता है लेकिन फिर भी ऐसा करते समय उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था। अपनी मां की जंग को मसल मसल कर वह पूरी तरह से लाल कर दिया,, था,,,,अपनी मां की जान को मालिश करने के बहाने मसलते हुए उसे इतना तो एहसास हो रहा था कि वाकई में औरत के हर एक अंग से अद्भुत आनंद के फुहार फुट दिए जिसमें दुनिया का हर मर्द नहाने के लिए उतावला रहता है और इस समय उस आनंद की फुहार में अंकित अपने आप को भीगता हुआ महसूस कर रहा था।,,,, अंकित अपने मन की करने के लिए अपना मन बना चुका थावह अपनी मां की तरफ देख रहा था जो कि इस समय मदहोश होकर अपनी आंखें बंद करके गहरी गहरी सांस ले रही थी अंकित को इस बात का पता चल रहा था कि उसकी मां के बदन मैं अब बिल्कुल भी दर्द नहीं था बल्कि वह मजा ले रही थी क्योंकि ऐसा एहसास वह अपनी नानी के चेहरे पर देख चुका था।





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ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था रात के 11:00 बज रहे थेवैसे तो यह समय मां बेटे दोनों का बिस्तर पर सोने का था,,, लेकिन इस समयबिस्तर पर तो दोनों था लेकिन सोने के लिए नहीं बल्कि एक दूसरे के साथ सोने के लिए मचल रहे थे नींद दोनों की आंखों में बिल्कुल भी नहीं थीऔर ऐसा ही होता है जब मरद और औरत एक साथ बिस्तर पर होते हैं तो दोनों की आंखों से सबसे पहले नींद भाग जाती है ताकि वह दोनों अकेले रह सके,, और इस समय दोनों की हालत उसी तरह की
थी,, मां बेटे दोनों की आंखों में वासना के साथ-साथ उम्मीद की किरण की नजर आ रही थी,,, अंकित गांधी जोरों से धड़क रहा था दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी मानो कि अंकित से पहले उसे ही मंजिल पर पहुंचने की जल्दबाजी होअपनी मां की सांसों की गति के साथ उठती बैठती ,,चूचियों को देखकर अंकित का मन कर रहा था कि इसी समय हाथ बढ़ाकर अपनी मां की दोनों चूचियों को थाम ले और उनसे जी भरकर खेलें,,, क्योंकि मर्दों के लिए इससे बेहतर खिलौना बना ही नहीं है,,‌ अंकित अपने मन में ठान लिया थावह पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की साड़ी को थोड़ा सा ऊपर उठने के लिए ताकिउसके बदन का सबसे खूबसूरत अंग उसे दिखाई दे सके,,,, लेकिन यह कार्य अंकितसहज रूप से बातों के जरिए करना चाहता था इसलिए वह अपनी मां से बात करना चाहता था और अपनी मां की जांघ को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोला।)

अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,?

अब तो बहुत अच्छा लग रहा है ऐसा लग ही नहीं रहा है कि यहां दर्द है,,,, बस थोड़ी देर और मालिश करता रे एकदम से दर्द निकल जाएगा,,,,।

तुम चिंता मत करो तुम कहोगी तो मैं रात भर मालिश करता रहूंगा,,,।

अच्छा यह बात है थकेगा नहीं,,,।

औरतों की सेवा मेरा मतलब है कि तुम्हारी सेवा करने में अगर थक जाऊं तो मैं मर्द किस बात का,,,।

ओहहहह,,,, क्या बात है,,,(अंकित की बात सुनकर सुगंधा एकदम गदगद हो गई थी,,, अच्छी तरह से जानते थे कि उसके बेटे के कहने का मतलब क्या है इसलिए तो उसके कहने का मतलब को समझ कर वह पानी पानी हो रही थी,,,)




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तो क्या ऐसे ही थोड़ी ना कह रहा हूं मैं पहले जैसा अंकित नहीं हूं अब पूरी तरह से बदल गया हूं पूरा मर्द बन चुका हूं,,,,(अंकित जानबूझकर मर्द शब्द कहकर अपनी मां को यह जैसा ना चाहता था कि अब वह पूरी तरह से तुम्हारे लिए तैयार हो गया है चाहे जैसे उसका उपयोग कर सकती हो,,,सुगंधा भी अपने बेटे की बात सुनकर अपने मन में ही बोली यह तो वक्त बताएगा बेटा कि तू पास होता है या फेल होता है,,, क्योंकि अच्छे-अच्छे औरतों की बीच नाली में ही डूब गए,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली,,)

वह तो दिखाई देता है,,, तू बहुत जोर-जोर से मालिश कर रहा है,,,।

तुमको पूरी तरह से आराम मिल जाए इसलिए कर रहा हूं क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा है,,,?(इतना कहने के साथ ही अपनी बीच वाली उंगली को एकदम से अपनी मां की बुर के करीब ले जाते हुए जो कि इस समय साड़ी से ढकी हुई थी)

सहहहहह ,,,,,आहहहहहहह बहुत अच्छा लग रहा है,,,,(अपने बेटे की हरकत से ना चाहते हुए भी उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी थी,,, और अपनी मां की गरमा गरम सिशिकारी की आवाज सुनकर अंकित का लंड पागल हुआ जा रहा था,,,,, अपनी मां की हालत और अपनी चाहत देखकर उसे रहा नहीं गया और वह तुरंत अपनी मां की साड़ी जो हल्का सा उसकी बुर को ढंक ली थी,,, उसे पकड़कर ऊपर की तरफ नहीं बल्कि उसे नीचे की तरफ कमर पर जहां पेटिकोट की डोरी से कई होती है उसे धीरे-धीरे उसके अंदर डाल दिया ताकि दोबारा उसकी साड़ी की कीनारी बुर के ऊपर ना आएऐसा करते हुए उसकी उंगलियां कांप रही थी उसकी अजीब सी हालत हो रही थी उसे ऐसा था कि उसकी हरकत पर उसकी मां जरूर कुछ बोलेगी,,, लेकिन उसके हेरान के बीच उसकी मां उसे कुछ नहीं बोली बस उसी तरह सेआंख बंद करके लेटी रही लेकिन उसे पल का एहसास अंकित को हुआ था जब उसने अपनी मां की साड़ी को उठाकर उसकी पेटिकोट की डोरी के नीचे डाला था तब उसकी मां के बदन में अजीब सी कसमसाहट हुई थी जिसको महसूस करके अंकित को लगने लगा था कि आज की रात जरूर कुछ काम बनने वाला है,,,,, साड़ी केएक बार फिर से बुर की जगह से हटने से एक बार फिर सेवा खूबसूरत अद्भुत नजारा दिखाई देने लगा था,,, बुर की चिकनाहट बता रही थी कि जल्दी में ही उसकी मां ने क्रीम लगाकर उसकी सफाई कीऔर सफाई करने के बाद वाकई में उसकी मां की बुर चमकते चांद की तरह हो गई थी जिसे पाने के लिए दुनिया का हर प्रेमी हर मर्द उत्सुक रहता है,,,,,। एक बार फिर से अंकित अपनी फटी आंखों से अपनी मां की गुलाबी बर को देख रहा था जो पूरी तरह से मदन रस के पानी से लबालब भरी हुई थी और उसे मदन रस की गगरी छलक रही थी जिससेवह कांग्रेस पूरी तरह से उसकी बुर के निचले स्तर को भी होता चला जा रहा था और आलम यह था कि नीचे लगाया गया बिस्तर भी गीला हो रहा था इतना अदभुत और इतना ज्यादा सुगंधा बुर से पानी बहा रही थी यह सुगंधा की स्थिति की गवाही थी कि उसकी हालत क्या हो रही थी किस कदर वह मर्द के साथ के लिए तड़प रही थी।





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सुगंध को भी इस बात का एहसास था कि उसके बेटे ने उसकी साड़ी को एक बार फिर से उसकी बुर पर से हटा दियाहै और इस समय फिर से उसकी गुलाबी बुर उसके बेटे की आंखों के सामने उजागर हो गई होगी जिसे देखकर उसके बेटे के मन में न जाने कैसी कैसी कल्पना हो रही होगी,,,, यही सोच करसुगंधा की सांस फिर से ऊपर नीचे होने लगी थी उसकी हालत फिर से खराब होने लगी थी वह जानती थी कि उसकी बुर से लगातार पानी निकल रहा था जिसकी वजह से नीचे बिछाया गया चादर भी गीला हो रहा था,,,, अपनी मां की नमकीन और पनियाई बुर को देखकर अंकित जानबूझकर अपना भोलापन का नाटक दिखाते हुए बोला,,,,।

बाप रे तुम्हारी यह तो गिली हो गई है,,,,,

क्या गीली हो गई है,,,(सुगंधा जानते हुए भी उसका बेटा किस बारे में बात कर रहा है वह जानबूझकर अनजान करने का नाटक करते हुए बोल रही थी)

अरे यही तुम्हारी देखो तो कितना पानी छोड़ रही है,,,,

तो यही वही क्या कर रहा है नाम लेकर बोल,,,।

धत्,,,,, इसका नाम लेने में शर्म आ रही है,,,।

चल अब रहने दे शर्म का नाटक करने को गंदी किताब मेंन जाने कितनी बार गंदे शब्द आए थे लेकिन तू बेझेक उसे पढ़ना चला जा रहा था मेरे सामने और इस समय नाटक कर रहा है शर्माने का,,,।

अरे वह तो सिर्फ किताब की बात थी,,,।


किताब की बात थी तो क्या हो गया शब्द तो वही थे ना जो आमतौर पर लड़के प्रयोग में लेते हैंऔर इस समय तेरी हालत खराब हो रही है उसका नाम लेने में और अपने आप को कहता है कि पूरा मर्द बन गया हूं,,,,।
(सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे को उपसह रही थी उसकी जवानी की दुहाई दे रही थी उसकी मर्दानगी को ललकार रही थी जिसे सुनकर वाकई में अंकित अपने आप को अपनी मां के सामने लाचार साबित होता हुआ नहीं देखना चाहता था इसलिए वह एकदम से हिम्मत जुटाकर बोला,,,)

बबबबब,,,बुर,,,,,,(अंकित हकलाते हुए बोलावह पहले भी अपनी मां के सामने इस तरह के शब्दों का प्रयोग कर चुका था लेकिन आज की बात को छोड़ता हालत कुछ ओर थे,, आज अंकित को सच में लग रहा था कि आज उसकी मां के साथ उसका जरूर कुछ होने वाला है,,,, अपने बेटेके मुंह से अपने खूबसूरत और संवेदनशील अंग का नाम सुनते ही सुगंध के चेहरे का रंग एकदम से बदलने लगा उसके होठों पर मादक मुस्कान छाने लगी,,,, और फिर वह अपने बेटे का हौसला बढ़ाते हुए बोली,,,)

यह हुई ना बात इसे कहते हैं असली मर्द,,,,,,कुछ दिनों में हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ है जिस तरह से वार्तालाप हो रही है उसे देखते हुए हम दोनों को अभी एक दूसरे से इस तरह की बात करते हुए इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए शर्म नहीं करना चाहिए,,, सच कहूं तो बरसों से मेरी ख्वाहिश थी कि अपने पास भी कोई ऐसा साथी हो जिससे मैं इस तरह के शब्दों का प्रयोग करके बात कर सकूं तेरे पापा के जाने के बाद मेरी एक ख्वाहिश मेरे सीने में ही दब कर रह गई,,,


क्या सच में मम्मी तुम इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना चाहती थी इस तरह से आमतौर पर जिस तरह से हम लड़के लोग बात करते हैं इस तरह से तुम भी बात करना चाहती थी,,,(अपनी मां की जांघों को अपनी हथेली में दबोचते हुए,,)

आहहहह,,,, बहुत जोर से मसलता है तू,,,, तु बिल्कुल सच कह रहा है,,,,ऐसा बिल्कुल भी नहीं है किस तरह के शब्दों का प्रयोग करके जो आपस में बात करते हैं वह गंदे होते हैं गंदे आदमी या गंदी औरत ऐसा कुछ भी नहीं है आमतौर पर मर्द और औरत आपस में इस तरह की बातें करते ही रहते हैं हमारे स्कूल में भी कुछ औरतें हैं जो इस तरह से ही बातें करती है,,,।

तब तुम अभी तुम भी उन लोगों के साथ इस तरह की बात कर सकती थी ,,,,।


कर तो सकती थी लेकिन मैं जानबूझकर ऐसी बातें नहीं करती थीअगर मैं उन लोगों से इस तरह की बातें करती तो सारे दिन लोगों को मेरे बारे में गलत भावना ही जाती वह लोग मेरे बारे में गलत धारणा बांध लेते क्योंकि फिर उन्हें लगने लगता है कि मैं पति के जाने के बाद भी किसी के साथ रिलेशनशिप में हूं तभी इस तरह की बातें करते हैं और इसीलिए मैंने इस तरह की बातें उन औरतों से कभी नहीं की जो कि मेरी सहकर्मी ही है,,,।


नूपुर आंटी से भी नहीं,,,,(अपनी मां की बुर को देखकरअंकित को राहुल की मां याद आने लगी थी इसी तरह से उसकी खुली टांगों के बीच अपना मुंह डालकर वह उसकी बुर को अपनी जीभ से चाटा था,,,, और इस समय भी उसका मन कुछ ऐसा ही करने को कर रहा था इसलिए वह अपनी मां के सामने नूपुर का जिक्र छेड़ दिया था,,,, लेकिन नूपुर की बात आने पर भी उसकी मां सहज बनी रही और बोली।)

नहीं उसके साथ भी ईस तरह की बातें में नहीं करती थी,,, क्योंकि वह अभी सीधी शादी सी थी किसी से ज्यादा बोलती चालती नहीं थी,,,,,,,

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(अपनी मां से बात करने के दौरान भी अंकित की नजर अपनी मां के गुलाबी बुर पर थी जिसे देखकर उसके मुंह से लार टपक रही थी अंकित अपनी मम्मी बहुत सी बातें सोच रहा थाउसे इतना तो एहसास हो रहा था कि उसकी मां क्या चाहती है अगर उसके मन में भी गंदी भावना ना होती तो वह उसके सामने इस तरह से टांग खोल कर लेटी ना होती,,,,इसलिए वह जानता था कि उसे थोड़ी हिम्मत दिखाने की जरूरत है और अगर आज की रात वह भी कुछ नहीं कर पाया तो उसके जैसा बुद्धू इंसान दुनिया में कोई नहीं,,, है।इसलिए वह अपनी मां से बात करने के दौरान तुरंत अपनी हथेली को एकदम से अपनी मां की बुर पर रख दिया और उसके गुलाबी लकीर को अपनी हथेली के नीचे ढक लिया एकदम से अपनी बर पर अपने बेटे की हथेली महसूस करते ही सुगंधा गनगना गई,,, और वह एकदम से उठ कर बैठ गई और अपने बेटे की आंख में आंख मिलाकर बोली,,,)

यह क्या कर रहा है अंकित,,,,(सुगंधा की सांसें उपर नीचे हो रही थी ऐसा कहते हुए वह अपनी टांगों के बीच तो कभी अंकित के चेहरे को देख ले रही थी,,, सुगंधा का चेहरा साफ बता रहा था कि वह क्या चाहती है वह सिर्फ ऊपर से अपने बेटे को जाने की कोशिश कर रही थी जबकि वह अपने बेटे से यही उम्मीद लगा कर बैठी थी,,)
बहुत ही कामुक गरमागरम और उत्तेजना से भरपूर अपडेट है लगता है आज अंकित अपनी मां की इच्छा पूरी कर देगा
 

Sanju@

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ककककक,,,, कुछ नहीं मम्मी यह पूरी गीली हो गई है अगर तुम्हें पेशाब लगा है तो जाकर करके आ जाओ धीरे-धीरे इसमें से पेशाब निकल रही है,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर ही सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

अरे तू सच में बुद्धू है इतना बड़ा हो गया और मर्द बनने का ढोंग कर रहा है यह पैसाब नहीं है यह कुछ और है,,,।

कुछ और मैं कुछ समझा नहीं,,,,(अंकित सब कुछ समझ रहा था जानता था कि उसकी मां की बुर से निकलने वाला तरल पदार्थ क्या है वह अच्छी तरह से जानता था कि यह उसके पेशाब की बूंद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी अनजान बनने का नाटक कर रहा था अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)





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तू सच में अभी छोटा ही है इसलिए तुझे समझ में नहीं आएगा कि यह क्या हैजब तू औरतों को समझने लगेगा तो तुझे खुद में खुद पता चल जाएगा कि यह क्या चीज निकल रहा है,,,,

तुमको तो मैं समझता हूं तो फिर क्यों नहीं समझ में आ रहा है मुझे ,,,,।

अच्छी तरह से नहीं समझता अभी तो मुझे सिर्फ अपनी मां की तरह समझता है जब एक औरत की तरह समझने लगेगा तो तुझे पता चल जाएगा फिर तुझे कुछ भी पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी,,,,

(अंकित अपनी मां के कहने का मतलब कुछ समझ कर पूरी तरह से अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रहा था उत्साहित हो रहा था यह शब्द उसकी मां की तरफ से आगे बढ़ने का इशाराजिसे अंकित समझ गया था और आज की रात अनजान बनने का ढोंग उसे बिल्कुल भी नहीं करना था नहीं तो यह सिलसिला न जाने कब तक चलता ही रहेगा आज खत्म कर देना चाहता था इसलिए वह बोला)

कोई बात नहीं ये भी करके देख लेते हैं तब तो समझ में आ जाएगा ना,,,।

बिल्कुल समझ में आ जाएगा,,,(सुगंधा अपने चेहरे पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली,,,,,)

लेकिन अभी तो लग रहा है कि तुम्हारी इसको साफ करने की जरूरत है,,,

फिर से इसको,,,,

मेरा मतलब है कि तुम्हारी,,,बबबब,बुर को,,,(अंकित का हकलाना देखकर उसे खूबसूरत शब्द को कहते हुए सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,)





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अभी डर के यह शब्द निकल रहा है जब तु मुझे समझने लगेगा तो मजे से यह सब निकलेगा,,,,।
(अंकित अपनी मां की बात सुनकर मदहोश हो रहा था वह उसकी आंखों में वासना का तूफान देख रहा था जिसमें वह डुब जाना चाहता था और फिर धीरे से अपनी हथेली का दबाव अपनी मां की बुर पर बढ़ाने लगा,, जो कि इस समय कचौड़ी की तरह फुल चुकी हैअंकित को मजा आ रहा था उसकी मां को भी मजा आ रहा था,,,, सुगंधा कुछ भी नहीं बोल रही थीक्योंकि वह भी यही चाहते थे और आज पूरी तरह से बहक जाने वाली रात थी आज के दिन वह अपने बेटे को रोकना नहीं चाहती थी वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा अब क्या करता है,,, अंकित की पूरी हथेली उसके कामरस से भीग गई थी। यह देख कर सुगंधा बोली,,)

तेरी हथेली पूरी तरह से गीली हो रही है,,,।

तुम अपनी ही इतना छोड़ रही हो मैं तो दबा कर उसका पानी निकलने से रोक रहा हूं,,,,।

पानी रोक कर क्या करेगा,,,,।

तब तुम्हारी बुर और मेरी हथेली गीली नहीं होगी,,,,।

लेकिन इसे तो रोक नहीं जा सकता इसे तो निकल जाने दिया जाता है जैसे पैसाब को निकल जाने दिया जाता है,,,,।

तभी तुम इसको रोकने की कोशिश नहीं कर रही हो,,,।

नहीं,,,,(गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बोली)





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लेकिन इससे तो कपड़े गीले हो रहे हैं देखो चादर कितने गीली हो गई है अगर तुम्हें समय पैंटी पहनी होती तो वह भी पूरी तरह से भीग गई होती तुम्हारी साड़ी भी गीली हो जाती होगी ऐसे दिन में न जाने कितनी बार तुम अपने कपड़े गीला कर लेती होगी,,,(अंकित इस तरह से अपनी मां की बुर पर अपनी हथेली का दबाव बनाते हुए बोला और हल्के हल्के उसे हथेली से ही सहला रहा था एक तरह से वह अपनी मां को गर्म कर रहा था,,,,)

यह हमेशा थोड़ी ना निकलता है,,,,


फिर कब निकलता है,,,(अंकित अच्छी तरह से जानता था कि औरत की बुर से काम रस कब निकलता है लेकिन वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था वह देखना चाहता था उसकी मां क्या कहती है,,,)

जब औरत को कुछ कुछ होता है जब वह किसी मर्द के करीब होती है और मर्द उसके अंगों को सहलाता है उसका हाथ रखता है तब औरत की ऐसी हालत हो जाती है तब ईसमें से ऐसा रस निकलता है,,,(अपनी बुर की तरफ उंगली से इशारा करते हुए बोली)

तो क्या इस समय तुम्हें ऐसा ही लग रहा है कि तुम किसी मर्द के साथ हो,,,,।

ऐसा तो नहीं लग रहा है लेकिनतेरे में कुछ बात तो है जो मेरी हालत ऐसी हो रही है पूरा मर्द है कि नहीं यह तो बाद में ही पता चलेगा,,,,।

(अपनी मां की तरफ से खुला निमंत्रण पाकर अंकित की भावनाएं भड़क रही थी उसका मन बहक रहा था और वह अपनी हथेली का दबाव एकदम से अपनी मां की बुर पर बढ़ाता हुआ बोला,,)

मम्मी अगर तुम्हें बुरा ना लगे तो एक बात कहूं,,,।

क्या बोल,,,,


हम दोनों की स्थिति भी उस गंदी कहानी के उस परिवार की तरह ही है,,,,।

कैसे,,,?


अब देखो ना मम्मी,,,(अपनी हथेली का दबाव अपनी मां की बुर पर एकदम से बढ़ाते हुए जिसकी वजह से सुगंधा की हालत खराब होने लगी,,) कहानी में उसके बेटे को बाथरूम के अंदर क्या दिखाई दे रहा था,,,।

उसकी मां पेशाब करते हुए दिखाई दे रही थी,,,।

पेशाब करते हुए दिखाई तो दे रही थी लेकिन वह अपनी मां की गांड देख रहा था और अपनी मां की नंगी गांड देखकर उसकी हालत खराब होने लगी थी,,,,।





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और इस समय मेरी आंखों के सामने क्या है,,,?(अपनी मां की तरफ सवालिया नजरों से देखते हुए अंकित बोल तो उसकी मां अपने बेटे की बात समझ कर मुस्कुरा दी और बोली,,,)

तू बहुत शैतान है,,,।

वह तो जब तुम्हारे साथ होता हूं तो न जाने क्यों ऐसा सुझने लगता है,,,, मेरी आंखों के सामने तुम्हारी बुर है उसके सामने उसकी मां की गांड थी नंगी और मेरे सामने मेरी मां की बुर है एकदम नंगी,,,, और वह अपनी मां की नंगी गांड देखकर कैसे-कैसे विचार अपने मन में ला रहा था यह तो तुम सुन ही चुकी हो,,,।

हां वह तो मैं जानती हूं लेकिन क्या तेरे मन में भी उसी तरह के विचार आ रहे हैं क्या,,?(अपनी आंखों को नचाते हुए सुगंधा बोली,,,)

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो उसकी स्थिति में और अपनी स्थिति में कितनी समानता है उस बारे में बता रहा था,,,,,,।

लेकिन इस बात पर भी गौर करना कि उसने अपनी मां को उंगली करते हुए देखा था तब जाकर उसकी उत्तेजना और ज्यादा भड़क गई थी लेकिन मैं यहां पर ऐसा कुछ नहीं कर रही हूं,,,, इसलिए अपनी भावनाओं पर काबू रखना,,,,,(अपनी आंखों को गोल-गोल नचाते हुए वह बोली,,,)

मैं अच्छी तरह से समझ रहा हूं लेकिन न जाने मुझे कुछ अजीब सा हो रहा है,,,,,(हल्के से अपनी बीच वाली उंगली से अपनी मां की बुर की पतली लकीर के गुलाबी पत्तियों को कुरेदते हुए) ऐसा लग रहा है कि कुछ भी मेरे बस में नहीं है.

(अपने बेटे की बात और उसकी हरकत को देखकर सुगंधा पागल हुए जा रही थीक्योंकि इस समय उसका बेटा उसकी बुर के गुलाबी पत्तियों से खेल रहा था जो औरत के उत्तेजना को परम सीमा तक ले जाती हैं उसकी आंखें नशा में बंद होने लगी थी,,,, और वह सिर्फ इतना ही बोल पाई,,)

तु कहना क्या चाहता है,,,,।

हम दोनों उसे कहानी के मां बेटे की तरह तो नहीं लेकिन,,(धीरे से अपने बीच वाली उंगली को अपनी मां की बुर में प्रवेश कराते हुए) इतना तो कर ही सकते हैं ना,,,,,।





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सहहहहह,,,,आहहहहहहह,,,,,,,(अपने बेटे की हरकत से एकदम मदहोश होते हुए) यह क्या कर रहा है अंकित यह गलत है,,,,, मैं उसकी मां की तरह नहीं हूं,,,वह मजबूर थी अपने बदन की प्यास की वजह से लेकिन मैं मजबूर रही हूं मुझे इसकी कोई जरूरत नहीं है,,,,(सुगंधा ऐसा बोल भी जा रही थी और अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लेकर अपनी आंखों को मदहोशी में बंद करके गहरी सांस भी ले रही थी जो कि इस बातको जाहिर कर रहा था कि उसे इस समय किस चीज की जरूरत है और अंकित अच्छी तरह से अपनी मां की प्यास को समझ रहा था इसलिए वह लगातार अपनी उंगली को अंदर बाहर करते हुए अपनी मां को और ज्यादा मदहोश कर रहा था और बोला)

तुम उसे औरत की तरह नहीं हो मम्मी मैं अच्छी तरह से जानता हूं लेकिन मैं ज्यादा कुछ करने को नहीं कह रहा हूं सिर्फ उंगली को अंदर बाहर करने दो तुम सच में बहुत खूबसूरत हो,,,, वह कहानी वाली उसकी मां भी तुम्हारी जैसी खूबसूरत नहीं होगी,,, उसने तो सिर्फ अपनी मां की गांड देखकर उसे चोदने का विचार बना लिया था,,,, तुम जरा सोचो तुम तो सर से पांव तक एकदम क़यामत ही कयामत उसने तो अपनी मां की नंगी गांड देखकर भावनाओं में बह गया था लेकिन तुम पूरी तरह से साड़ी में रहती हो तो भी तुम्हारी कसी हुई गांड साड़ी के ऊपर से देख कर किसी की भी हालत खराब हो जाए,,,(अपनी मां की बुर में अपनी बीच वाली उंगली को अंदर बाहर करते हुए अंकित बोल रहा था उसकी बातें सुनकर मदहोशी के आलम में सुगंधा बोली)

तो यह बात सच कह रहा है या मुझे बहकाने के लिए कह रहा है,,,।

तुम छोटी बच्ची थोड़ी ना हो कि मेरी बातों से बैठ जाओगी अच्छा बुरा सब जानती हो स्कूल की टीचर हो तुम्हें कोई कैसे बहका सकता है मैं तो सिर्फ अपने मन की बात बता रहा हूं,,,,।

तो क्या तुझे उंगली करने में मजा आ रहा है,,,(इस तरह से अपनी आंखों को बंद किए हुए मदहोशी भरे स्वर में बोली)




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सच पूछो तो उस कहानी वाले लड़के को भी मजा नहीं आया होगा जितना मजा मुझे आ रहा हैतुम इससे ज्यादा आगे बढ़ने की इजाजत न भी दो तो भी है मेरे लिए बहुत है,,,सससहहहह कितनी गर्म बर है तुम्हारी अंदर कितनी चल रही है ऐसा लग रहा है कि मैं अपनी उंगली को किसी भट्टी में डाल दिया है,,,,।


सहहहहहह क्या सच में इतनी गरम है,,,,।

तो क्या,,, बहुत ज्यादा गर्म है,,,,, लेकिन मैं एक बात कहना भूल गया,,,,,(धीरे से अपनी मां की उठती बैठी चूचियों पर वह अपनी हथेली रख दिया जो कि इसमें ब्लाउज के अंदर कैद थी अपनी चूचियों पर ब्लाउज के ऊपर से अपने बेटे की हथेली महसूस करते ही सुगंधा पूरी तरह से गनगना गई,,,, और अपने मुंह से एकदम मादक स्वर निकालते हुए बोली,,)

सहहहहहह,,,ं अब यह क्या है अंकित,,,, अब ईससे ज्यादा मत बढ़ हटा ले अपना हाथ,,,

मैंने कोई जानबूझकर नहीं कियातुम्हारी छाती ऊपर नीचे हो रही है मुझे लगा कि तुम्हें तकलीफ हो रही है इसलिए ब्लाउज के ऊपर से मैंने थाम लिया।

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,,

तो फिर कैसा है मम्मी,,,(बातोंके बहाने अंकित अपनी हथेली को अपनी मां की चूची पर से बिल्कुल भी नहीं हटाया जो इसमें ब्लाउज में कैद थी उसकी गर्माहट उसकी नरमाहट पूरी तरह से अंकित की भावनाओं को भड़का रही थी उससे रहा नही गया और वह धीरे-धीरे ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,,, उत्तेजना के मारे सुगंधा का गला सूखने लगा वह अंदर ही अंदर बहुत खुश थी क्योंकि उसका बेटाअपनी हरकत को अंजाम दे रहा था आगे बढ़ रहा था हिम्मत दिखा रहा था और सच में एक मर्द वाला काम कर रहा था,,, उत्तेजना से अपने सूखते हुए गले को अपने थूक से गिला करते हुए वह बोली,,,)

ऊममममम,,,,,, ऐसा मत कर तेरी हरकत से मुझे भी न जाने क्या हो रहा है,,,।

क्या हो रहा है मम्मी मुझे भी तो बताओ तुम्हें अच्छा लग रहा है कि खराब लग रहा है,,,,।





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(अंकित का इतना कहना था कि सुगंधा धीरे से अपनी आंखें खोल कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी,,, मदहोशी उसकी आंखों में पूरी तरह से छाई हुई थी वह पूरी तरह से अपने बस में नहीं थी वह बेकाबू हुए जा रहे थे वह कुछ बोलने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी। क्योंकि उसे पर अंकित दोहरा दबाव बनाए हुए थाएक तरफ से वहां उसकी दोनों टांगों के बीच की पत्ली दरार में अपनी उंगली डालकर अंदर बाहर कर रहा था और ऊपर से वह ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को धीरे-धीरे दबा रहा था,,,,यह दोनों औरतों के लिए उत्तेजना के केंद्र बिंदु होते हैं जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ती जाती है,,, अगर औरत का मरना भी कर रहा हो और मर्द का हाथ उसकी चूची या किसी तरह से उसकी बुर तक पहुंच जाए और वह हल्के हल्के सहला कर उसे मजा देने लगे तो वह तुरंत चुदवासी हो जाती है,,,,और यही हाल ही समय सुगंधा का भी हो रहा था सिर्फ अपने मुंह से बोल नहीं पा रही थी,,,, हालात पूरी तरह से बेकाबू हुए चले जा रहे थे। बुर की गर्मी अंकित अपनी उंगली पर महसूस तो कर रहा था लेकिन उसका सीधा असर उसके लंड पर पड़ रहा था,,,, जो कि इस समय गदर मचाने को तैयार थालेकिन अभी उसे बंदिश में रहना जरूरी था क्योंकि अंकित को मालूम था कि अभी उसकी बारी नहीं आई है,,,,।

अंकित और उसकी मां दोनों खामोश हो चुके थे दोनों एक दूसरों को देख रहे थे,उत्तेजना से लाल हुआ सुगंधा का चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था जो की ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, सुगंधा के काम रस से भरे हुए उसके लाल-लाल होठ एकदम धधक रहे थे,,, और अपनी मां के होठों को देखकर अंकित के मन में प्यास जाग रही थी दो हाथ तो उसके व्यस्त ही थे पहले से ही लेकिन अब वह अपने होठों को भी व्यस्त करना चाहता था। पहले भी दो बार चुंबन हो चुका था इसलिए उसे मालूम था कि इस हरकत पर भी उसकी मां बिल्कुल भी ऐतराज नहीं करेगी जब बुर में उंगली डलवा ली चुची दबवाली तो चुंबन करने से कैसा एतराज,,,, दोनों एक दूसरे को देख ही रहे थेअंकित पूरी तरह से कामवासना से लिप्त हो चुका था और यही हाल उसकी मां का भी था वह भी मदहोशी के हर में डूबने लगी थी वह इस समय अपने बेटे के हाथों की कठपुतली बन जाना चाहती थीक्योंकि उसे ऐसा ही लगता था कि उसका बेटा औरतों के मामले में अभी भी नादान है जबकि वह नहीं जानती थी कि वही नादान बेटा उसकी मां की चुदाई कर चुका था पड़ोस कि उसकी सहेली की भी चुदाई कर चुका था,,,, गहरी गहरी सांस लेते हुए सुगंधा और भी ज्यादा मतवाली घोड़ी लग रही थी,,,, अंकित लगातार अपने बीच वाली उंगली को अपनी मां की बुर के अंदर बाहर कर रहा थासुगंधा पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी अपने बेटे की हरकत से उसकी हिम्मत को देखकर वह गदगद हुई जा रही थीउसे लगने लगा था कि आज उसकी अभिलाषा पूरी होने वाली है वर्षों से जिस चाहत को अपने सीने में दबा कर रखी थी आज उसकी चाहत पूरी होने वाली है,,, अभी तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है आगे भी इसी तरह से चलता रहे तो मजा आ आए सुगंधा अपने मन में ऐसा सोच रही थी और गरम आंहे भर रही थी।





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तभी अंकित एकदम मदहोश होता हुआअपने होठों को तुरंत अपनी मां के लाल लाल होठों पर रख दिया,,,उसे लग रहा था कि उसकी मां अपने होठों को हटा लेंगे लेकिन उसके सोच के विपरीत उसकी मां भी तुरंत अपने लाल-लाल होठों को खोल दी और खुद ही अंकित के होठों को चूसना शुरू कर दी,,,,अंकित एकदम पागल हो गया अपनी मां के लिए शहर का से उसे रहने की और अपने हथेली कादबाव अपनी मां की चूची पर एकदम से बढ़ाना शुरू कर दिया सुगंधा भी मदहोश होने लगी उसकी बुर से लगातार मदन रस का भा हो रहा था जो कि अंकित की उंगलियों को पूरी तरह से अपने रस में डुबो दे रहा था अंकित अपनी मां की चूची को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था जिसका आनंद सुगंधा बड़ी मस्ती के साथ लेते हुए उसके असर को अपने बेटे के होठों को चुस कर दिखा रही थी,,, चुंबन बेहद गहरा होता चला जा रहा था अंकित की उंगलियां लगातार उसकी मां की गुलाबी गली में अंदर बाहर हो रही थी उसकी गर्माहट खुद उसके लंड को पिघलने के करीब ला चुकी थी अपने बेटे की उंगलियों की हरकत से सुगंधा एकदम से चुदवासी हो गई थी,,,, मन तो उसका कर रहा था कि इसी समयअपने बेटे का पेंट खोलकर उसके खड़े लंड को अपनी बुर में ले ले और अपनी प्यास बुझा ले,,, लेकिन सुगंधा बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओं पर काबू किए हुए थीक्योंकि वह बेहद आशावादी थी अपनी किसी भी हरकत से हुआ या नहीं जताना चाहती थी कि वह इसके लिए तड़प रही है क्योंकि अभी तक जो कुछ भी हो रहा था उसके मन का ही हो रहा था और वह यही सोच रही थी कि आगे भी जो कुछ भी होगा इसमें दोनों का ही फायदा होगा । इसलिए वह सब कुछ हालात पर ही छोड़ दी थी और उसे अब अपने बेटे पर पूरा विश्वास हो चुका था कि वही उसकी नैया पार लगाएगा।




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धीरे-धीरे घड़ी में 12 बज चुका थामोहल्ले में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था सब लोग अपने-अपने घरों में चैन के नीचे सो रहे थे लेकिन सुगंधा के घर में मां बेटे दोनों की नींद हराम की दोनों का चैन लूटा हुआ था और मां बेटे दोनों एक दूसरे में अपना चैन सुकून खोज रहे थे सुगंधा अधनंगी हालत में अपने बेटे के साथ मस्ती के सागर में डुबकी लगा रही थीइतने से ही उसे एहसास हो रहा था कि इतने वर्षों में उसने कितना कुछ खो दिया था इतनी अनमोल पल सिर्फ जिम्मेदारी निभाने में वह गुजार दी थी कभी अपने बारे में नहीं सोची थी लेकिन अब वह अपने लिए जीएगी अपने शरीर के लिए उसकी जरूरतों को पूरी करेगी,,, ऐसा अपने मन में सोचकर सुगंधा मदहोश में जा रही थी अपने बेटे की हरकत की पूरी तरह से मजा ले रही थी अब वह उसे रोकने की हालत में बिल्कुल भी नहीं थी,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि इन सब हरकतों के बाद क्या होता है,,। और वह आने वाले पल के लिए बेहद उत्सुक भी थी,,,,

दोनों के बीच अब किसी भी प्रकार की वार्तालाप की सत्यता बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि दोनों के होंठ एक दूसरे के होठों में चपे हुए थे,,,, दोनों मदहोश हो रही थीसुगंधा का मन भर-भर कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़कर पेंट के ऊपर से अपने बेटे के लंड को थाम ले लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,वह केवल चुंबन करते समय अपने बेटे के चेहरे को दोनों हाथों से थामे हुए थे उसके बालों को सहला रही थी और उत्तेजना से खींच रही थी।जिसकी वजह से अंकित की उत्तेजना की ओर ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी वह बारी बारी से एक ही हाथ से अपनी मां की दोनों चूचियों से खेल रहा था ब्लाउज पहने होने केबावजूद भी अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और उसकी मां को भी,,,,यह पहला मौका था जब ब्लाउज के ऊपर से अंकित अपनी मां की चूचियों को खुले तौर पर दबा रहा था। इसलिए तो वह ज्यादा उत्तेजित और आनंदित नजर आ रही थीउसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन अंकित की उंगलियों का कमल बढ़ता जा रहा था वह अपनी उंगली को अपनी मां की बुर में डालकर गोल गोल घूमा रहा था,जिसकी वजह से वह अपनी चरम सुख के करीब पहुंचने की कगार पर आ चुकी थी,,,,सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही है उसकी हालत खराब हो रही थी क्योंकि वह झढ़ने वाली थी और अंकित भी अपनी मां के बदन में बढ़ रही हलचल को पहचान चुका था,,,वह और तेजी से अपने बीच वाली मेरे को अपनी मां की बुर की गहराई में अंदर बाहर कर रहा था एक तरह से वह अपनी मां की बुर में अपने लंड के लिए जगह बना रहा था।




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सुगंधा की सांसें फुल रही थी, उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारियां निकालने को तैयार थी लेकिन अपने बेटे के होंठों के बीच अपने होंठ देकर वह सिसकारी भी नहीं ले सकती थी,,लेकिन उसकी चूचियां बहुत तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी जो एहसास दिला रही थी कि अब वह झड़ने वाली है,,,, और फिर एकदम से उसकी बुर से मदन रस का फव्वारा फुट पड़ा अंकितबड़ी तेजी से अपनी उंगली के अंदर बाहर कर रहा था वह अपनी मां को जो मजा दे रहा था उसमें उसका भी सुख छुपा हुआ था वह जानता था कि औरत की बुर में उंगली से ज्यादा लंड डालने में मजा आता है,,,,और वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि जब उसकी मां इस समय उसे अपनी बुर में उंगली डालने दिए तो उसके समझाने पर जरूर लंड भी डालने देगीभले ही वह अपने मुंह से कुछ ना बोल रही हो लेकिन अंदर ही अंदर वह भी यही चाहती है क्योंकि औरतों के मन के बारे में उनकी जरूरत के बारे में वह अच्छी तरह से जानता था । अंकित पागल हुआ जा रहा था सुनैना की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी और लगातार उसका शरीर झटका मार रहा था और हर झटका के साथ उसकी बुर से मदन रस बाहर झटक दे रहा था,,,,

उनकी धीरे से अपने होठों से अपनी मां के होठों को अलग किया औरनशीली आंखों से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देखने लगा इसके अंदर अभी भी उसकी उंगली खुशी हुई थी और उसकी पूरी हथेली उसके मदन रस से भीगी हुई थी अंकित जानता था कि उसकी बुर से निकलने वाला द्रव्य क्या है लेकिन फिर भी वह जानबूझकर अनजान बनता हुआ अपनी मां से बोला,,,।





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सससससहहहह,,, ओहहहहह मम्मी तुम तो मुतने लगी,,,(अंकित यह शब्द अपनी मां से एकदम से अश्लील भाषा में बोला थाजिसे सुनकर सुगंधा के भी तन बदन में आग लग गई थी उसे अपने बेटे के मुंह से मुतना शब्द सुनकर बेहद उत्तेजित कर देने वाला लग रहा था,,,, सुगंधा अंकित की तरफ नशीली आंखों से देख रही थी और उसकी बात पर मुस्कुराते हुए बोली,,)

अरे बुद्धु यह मुत नहीं है,,,,।

मुत नहीं है तो फिर क्या है,,,?(जानबूझकर अनजान बनता हुआ अंकित बोला)

और जब ऐसे हालात में मर्द के साथ होती है और जब उसे अच्छा लगने लगता है तो इसी तरह से निकलता है,,,,।

ओहहहह,,,,आज तो मैं बिल्कुल नई बात सुन रहा हूं मुझे तो इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था मुझे तो लगता था कि सिर्फ इसमें से पेशाब निकलती है,,,,,।

धीरे-धीरे औरतों के बारे में तु सब कुछ सीख जाएगा,,,,(सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)

लेकिन मम्मी जो कुछ भी है बहुत ढेर सारा निकला है देखो तो सही मेरी पूरी हथेली गीली हो गई,,,(धीरे से अपनी मां की बुर में से उंगली को बाहर निकाल कर वह अपनी मां के मदन रस में डूबी हुई पूरी हथेली को थोड़ा सा ऊपर करके अपनी मां को दिखाने लगा जिसमें से उसका मदन रस उसकी उंगलियों से उसकी हथेलियां से नीचे टपक रहा था यह देखकर सुगंधा शर्म से लाल हो गई, शर्म से लाल हुआ अपनी मां का चेहरा देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,) देखो तो सही तुम्हारी जांघें भी पूरी तरह से गीली हो गई है,,,,
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा अपनी जांघों की तरफ देखने लगी वाकई में वह पूरी गीली हो चुकी थी और नीचे बिस्तर पर बिछी चादर भी गीली हो चुकी थी,,,, चादर पर अपनी मदन रस का धब्बा देखकर सुगंधा शर्म से गड़ी जा रही थी,,,, उसे बड़े जोरों की पेशाब भी लगी थी इसलिए वह धीरे से बोली,,,)

मैं अभी आती हूं,,,(इतना कहते हुए वह घुटनों के बाल वेट करें लेकिन साड़ी को अपने हाथ से पकड़ कर कमर तक उठाए हुए थे और घुटनों से चलते हुए वह बिस्तर से नीचे उतर रही थी यह देखकर अंकित की हालत खराब हो रही थी एक तो पहले से ही उसका लंड पूरी तरह से बेहाल हो चुका था,,,,अपनी उंगली और अपनी हरकतों से उसने अपनी मां को तो ठंडा कर दिया था लेकिन खुदगर्म होकर तड़प रहा था इसका इलाज उसकी मां के पास ही था लेकिन कब हुआ इसका इलाज करेगी या अंकित जानता नहीं था लेकिन उसे उम्मीद थी कि आज की रात को ही जो होना ही हो जाएगा,,,सुगंधा कमर तक साड़ी अपने हाथ में पड़े वह बिस्तर से नीचे उतर चुकी थी ऐसे हालात में कमर से नीचे वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड ट्यूबलाइट की दुधिया रोशनी में चमक रही थी,,,, वह दरवाजे की तरफ जा रही थी अपनी गांड मटका कर यह देखकर अंकित देखना चाहता था कि उसकी मां के मन में अब क्या चल रहा है इसलिए वह बोला,,,)

ऐसे में कहां जा रही हो,,,।




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मुझे बड़े जोरों की पेशाब आई है,,,,
(अंकित बहुत खुश था क्योंकि उसकी मां खुले शब्दों में पेशाब करने की बात कर रही थी और उसकी बात सुनकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला)

मैं यही रुकूं की छत पर बिस्तर लेकर चलु,,,(ऐसा कहकर वह अपनी मां का मन टटोलना चाहता था,,, वह देखना चाहता था कि उसकी मां अब क्या चाहती हैं,,,, अपने बेटे का सवाल सुनकर सुगंधा भी कुछ देर के लिए असमंजस में पड़ गई थी कि अब वह अपने बेटे से क्या बोले,,,,,लेकिन फिर थोड़ा हिम्मत दिखा कर वह अपने मन में सोची कि जो कुछ भी होगा देखा जाएगा इतना कुछ तो मां बेटे के बीच हो चुका हैजो कि नहीं होना चाहिए और जब इतना होकर आए तो थोड़ा और होने में क्या दिक्कत है इसलिए वहां दरवाजा खोलकर कमरे से बाहर जाते हुए बोली,,,)

अभी यही रूक में आती हूं,,,,।

(इतना कहकर हुआ कमरे से बाहर निकल गई थी लेकिन अपने बेटे के लिए खुशखबरी छोड़ गई थी क्योंकि उसकी मां की तरफ से यह है खुला आमंत्रण था कि आज की रात बहुत खास थी मर्यादा की दीवार गिरा देने की रात थी अपने संस्कारों का पर्दा हटा देने की रात थी अपनी मां का जवाब सुनकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था।)
बहुत ही शानदार और लाजवाब अपडेट है इतना सब कुछ होने के बाद भी अंकित अनाड़ी बन रहा है वह अनाड़ी बनकर अपनी मां की प्यास को और बढ़ा रहा है
 

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अंकित बहुत खुश था क्योंकि जिस तरह से उसे अंजान औरत ने अच्छे तरीके से उससे बात की थी उसे लगने लगा था कि उसका काम जरूर बन जाएगा वैसे तो उसे उम्मीद नहीं थी लेकिन फिर भी वह कोशिश करने में मानता था और अब तक वह कोशिश करके ही इस मुकाम तक पहुंचा था। उस औरत की सादगी उसका भोलापन अंकित को भाग गया था दो-चार साल वह औरत उसकी मां से बड़ी ही थी लेकिन फिर भी उसका बदन काफी कसा हुआ था थोड़ा सा भारी बदन भले ही था पर आकर्षक पूरा था तभी तो पहली नजर में ही वह औरत अंकित को पूरी तरह से भा गई थी और उसे पूरा उम्मीद था कि बिस्तर पर वह उसे संतुष्ट करने में समर्थ है। उस अंजान औरत से मुलाकात के बाद वह अपने होटल लौट आया।




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अपने कमरे में दाखिल हुआ तो उसकी मां नहाने की तैयारी कर रही थी यह देखकर वह बोला।

इस समय क्यों नहाने जा रही हो,,,?

पहाड़ी पर बड़े से पर्वत पर नंगी ही लेटा दिया था धूल मिट्टी लगी हुई है,,,।

ओहहह तब तो नहा लो अच्छा ही है रात को बिस्तर पर धूल मिट्टी नहीं लगेगी,,, (अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,, उसकी बात सुनकर सुगंधा बोली)


तेरी वजह से ही धूल मिट्टी लगी है मुझे क्या मालूम था कि तु मेरे सारे कपड़े उतार कर नंगी कर देगा,,, वैसे मानना पड़े तो कहीं भी कभी भी शुरू पड़ जाता है देखा नहीं है कि कौन सी जगह परहै।


इसमें मेरी गलती नहीं है सारा दोश तुम्हारा ही है।

अच्छा यह तो वही हो गया कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे,,,,।

अरे सच कह रहा हूं उसमें तुम्हारी गलती है पहाड़ियों पर चढने से पहले मेरा कोई ऐसा इरादा नहीं था तुम्हारी गांड ही इतनी खूबसूरत है कसी हुई जिसे देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा,,, और मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाया। वैसे भी तुम्हें मेरी आंखों के सामने पेशाब करने नहीं बैठना चाहिए था,,,।

अब ऐसा क्यों मुझे लगेगी तो पेशाब तो करना ही होगा ना,,, तुझे अपनी नजर घूमा लेना चाहिए था।




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अच्छा भला ऐसा हो सकता है की आंखों के सामने इतना खूबसूरत नजारा दिखाई दे रहा और मेरे जैसा जवान लड़का अपनी नजर दूसरी तरफ घूमा ले,, सच कहूं तो तुम्हें पेशाब करता हुआ देखकर ही मेरा लंड खड़ा हुआ था,,,, तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हारा बेटा तुम्हें हर तरीके का सुख दे रहा है। घर की चार दिवारी में छत के ऊपर दर्जी की दुकान में और यहां पहाड़ी के ऊपर तुम तो सच में गंदी फिल्मों की हीरोइन हो गई हो।
(अंकित की यह बातें सुगंधा को बहुत अच्छी लग रही थी वह मन ही मन उसकी बातें सुनकर प्रसन्न हो रही थी वह बाथरूम के दरवाजे के पास खड़ी थी,,,, बाथरूम में जाने से पहले वह एकदम से अपनी टी शर्ट को उतारती हुई बोली,,,)

तेरे कपड़ों पर भी धूल मिट्टी लगी है तु भी आकर नहा ले,तभी बिस्तर पर तुझे आने दूंगी वरना नीचे ही सोना पड़ेगा,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित समझ गया कि उसकी मां क्या चाहती है इसलिए मुस्कुराने लगा और वह बाथरूम के अंदर प्रवेश कर पाती ईससे पहले ही वह फुर्ती दिखाते हुए अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया और यह देखकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बाथरूम के अंदर घुस गई,,, बाथरूम इतना बड़ा था कि बार-बार मां बेटे दोनों बाथरूम के अंदर ही मजा ले रहे हैं इस समय भी सुगंधा टॉयलेट पोट पर बैठ गई और अपनी दोनों टांगें खोल दी क्योंकि बाथरूम में प्रवेश करते ही वह अपने बाकी के कपड़े भी उतार करना नहीं हो गई थी और अंकित अपनी मां का यही सर अच्छी तरह से समझता था मुस्कुराता हुआ वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच गया और अगले ही पल वह अपनी मां की बुर में समा गया,,,,। थोड़ी देर बाद दोनों मां बेटे नहा कर बाथरूम से बाहर आ गए थे और अपने अपने कपड़े पहन कर बिस्तर पर बैठकर इधर-उधर की बातें कर रही थी देखते ही देखते घड़ी में 9:00 बज गया था अब उन दोनों के खाने का समय हो रहा था,,, इसलिए दोनों अपने कमरे से निकाल कर बाहर आ गए क्योंकि होटल में ही रेस्टोरेंट भी था। जब वह दोनों नीचे उतर कर आए तो देख सड़क पर रोशनी ही रोशनी थी रात का नजारा ही कुछ और था और वह दोनों कुछ देर के लिए होटल से बाहर आ गए मुख्य सड़क पर।




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यहां की चकाचौंध मां बेटे दोनों को अच्छी लग रही थी। सभी होटल रोशनी से सजी हुई थी और यह शायद हमेशा का नजारा था क्योंकि इस तरह की खूबसूरत लाईटे ही बाहर से आने वाले प्रवासी लोग को आकर्षित करती हैं वैसे भी मां बेटे दोनों के लिए यह पहली रात थी इसलिए दोनों यहां की चकाचौंध से काफी प्रभावित हुए थे दोनों को अच्छा लग रहा था लोग सड़क पर आ जा रहे थे गाड़ियां चल रही थी नव युगल हाथ में हाथ डालकर घूम रहे थे,,, मां बेटे कुछ ऐसे जोड़े को भी देखे थे जिनमें उम्र का काफी अंतर था जैसा कि उन दोनों के बीच यह देखकर दोनों का एहसास हो रहा था कि उनकी तरह ही बहुत से लोग हैं जो इस तरह के रिश्ते से आनंद लेते हैं। कुछ देर तक वहां खड़े रहने के बाद वह दोनों वापस होटल के रेस्टोरेंट मेंआ गए,,, वहां पर भी काफी लोग बैठे हुए थे कुछ लोग होटल में रुके हुए थे वह भी थे और जो नहीं रुके थे वह लोग भी खाना खाने के लिए आए थे। टेबल पर दोनों बैठे ही थे कि सुबह वाला वेटर मुस्कुराता हुआ उन दोनों के पास है और बोला।)





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बोले होते तो मैं कमरे में ही खाना पहुंचा दिया होता,,,(सुगंधा की तरफ देखते हुए वह बोला तो सुगंधा शर्म के मारे अपनी नजरे नीचे झुका ली,, अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था कि वह ऐसा क्यों बोल रहा है इसलिए वह भी चुटकी लेता हुआ बोला,,,)

क्यों सुबह जो नजारा देखे थे फिर से देखना है क्या,,,?
(अंकित की बात का वह कुछ जवाब नहीं दे पाया बस मुस्कुरा दिया उसके चेहरे से ही लग रहा था कि वह बहुत कुछ देखना चाहता था,,,,, उसकी हालत को देखकरअंकित धीरे से उसे अपने पास बुलाया और उसके कान में बोला,,,)

मुठ मार कि नहीं इसके नाम की,,,,।
(अंकित की बात सुनकर वह बेटर एकदम से चौक किया और आश्चर्य से अंकित की तरफ देखने लगा तो अंकित मुस्कुराते हुए बोला) मैं समझ सकता हूं तुम्हारी हालत अच्छा यह बताओ तुम्हें कैसी लगी,,,






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बहुत गजब की है मेरी आंखों के सामने से वह नजारा हट ही नहीं रहा है,,,,।

चिंता मत करो जब तक मैं इस होटल में हूं तब तक तो यह मेरे साथ रहेगी जाते-जाते में तुम्हारी मुलाकात इससे करा दूंगा लेकिन इसका चार्ज कुछ ज्यादा है,,,,।

कितना,,,,?(हैरानी से सुगंधा की तरफ देखते हुए बोला सुगंधा शर्म के मारे अपनी नज़रें उठा नहीं रही थी,,,)


यह मान लो कि तुम्हारी तनख्वाह चली जाएगी इसका मजा लेने में,,,।

बाप रे,,,,,।

कोई ज्यादा थोड़ी है यार सुबह जलवा तो तुमने देख ही लिया है जब जलवा देखकर तुम्हारी हालत हो गई है तो सोचो इस अवस्था में पूरी तरह से तुम्हारी बाहों में आएगी तब तुम्हारी क्या हालत होगी,,,,।

बात तो तुम सच कह रहे हो,,,,,।

तो फिर क्या इंतजाम करके रखना तुम्हारी बात करवा दूंगा यहां से जाने से पहले,,,,।

जरूर करके रखूंगा,,,,,।




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पहले जाकर हमारे लिए कुछ खाने के लिए लेकर आओ बहुत भूख लगी है,,,,,।


ठीक है सर मैं अभी लेकर आता हूं,,,,(इतना कहकर वह सुगंधा की तरफ देखते हुए वहां से चला गया,,,, वेटर के जाते ही सुगंधा अपने बेटे को आंख दिखाते हुए बोली,,,)

कितना बेशर्म हो गया है रे तू अपनी ही मां का सौदा कर रहा है,,,,।

तुम्हें तो खुश होना चाहिए देख नहीं रहे हो अपनी पूरी तनख्वाह देने को तैयार हो गया है बस एक रात के लिए,,,,।

तू ही जाकर सो के साथ और ले ले पूरी तनख्वाह,,,।

मुझे थोड़ी ना अपनी पूरी तनख्वाह देगा मेरे पास बुर नहीं है ना उसे तो तुम्हारी बुर चाहिए दोनों चुचीया चाहिए जिसे देखकर वह पागल हो गया था,,,,।

बाप रे बहुत बेशर्म हो गया है तू जल्द ही तेरा इलाज करना होगा नहीं तो सच में तु मेरा सौदा कर देगा,,,,






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लोग तुम्हारी मुंह मांगी कीमत देने को तैयार है,,,,

चल अब रहने दे बंद कर अपनी बकवास वह खाना लेकर आ रहा है,,,, (तिरछी नजर से वेटर की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली,,,, ओर वह वेटर टेबल पर खाना रखकर वहीं खड़ा हो गया टेबल छोड़कर उसका जाने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था लेकिन तभी मैनेजर ने उसका नाम लेकर बुलाया और उसे जाना पड़ा,,, उसकी हालत देखकर मां बेटे दोनों खुश हो रहे थे सुगंधा को तो कुछ ज्यादा ही खुशी थी उसे इस बात पर गर्व हो रहा था कि इस उम्र में भी लोग उसे पाने के लिए तरस रहे थे,,,, थोड़ी देर में मां बेटे दोनों ने खाना खाकर खाने का बिल चुका दिया और अपने कमरे की तरफ आगे बढ़ गए रात के 10:30 बज चुके थे कमरे में प्रवेश करते हैं अंकित दरवाजा बंद किया और अपनी मां को एकदम से अपनी गोद में उठा दिया और उसे ले जाकर के बिस्तर पर पटक दिया सुगंधा भी यही चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा थकान से कर होकर सो जाएं वह चाहती थी कि उसका बेटा जी भर कर उसकी चुदाई करके थक कर सो जाएं,,,,।




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बिस्तर पर जाने से पहले वह अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया और उसकी मां के बदन पर अभी भी सारे वस्त्र थे इस समय वह साड़ी पहनी हुई थी और देखते ही देखते नग्न अवस्था में अंकित बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी मां को अपनी बाहों में भरकर उसके लाल लाल होठों का रसपान करने लगा वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था कमरे की लाइट जल रही थी इसलिए ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, सुगंधा के तन बदन में मदहोशी जा रही थी वह भी अपने बेटे का पूरी तरह से साथ दे रही थी। वह खुद अपने हाथों से अपने ब्लाउज का बटन खोल रही थी क्योंकि वह जल्दी से जल्द अपने दोनों खरबूजा को अपने बेटे के मुंह में डाल देना चाहती थी और ऐसा ही की ब्लाउज का बटन खोलने के साथ ही वह अपनी ब्रा को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे खोल भी नहीं ऊपर की तरफ खींच दी जिससे उसके दोनों कबूतर पंख फड़फड़ाने लगे और अपनी मां की हरकत को देखकर अंकित से भी रहा नहीं गया और वह तुरंत अपने मुंह में उसकी एक चूची को भरकर पीना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,, बिस्तर पर मां बेटे दोनों पागल हो जा रहे थे अंकित का मोटा तगड़ा लंड साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था। और यह सुगंधआ से बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अपने बेटे के लंड को पकड़ कर जोर-जोर से दबा रही थी।




बिस्तर पर घमासान मचा हुआ था चुदाई से पहले काम क्रीड़ा का खेल पूरे जोर पर था। सुगंधा पागल हो जा रही थी इस समय वह पूरी तरह से चुदास से भरी हुई थी वह अपने बेटे के लंड को छोड़ कर दोनों हाथों से साड़ी पकड़कर उसे ऊपर की तरफ खींच रही थी क्योंकि उसके बेटे का लंड बार-बार उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था जिससे उसकी बुर पानी पानी हो रही थी,,, इस समय अपनी बुर की गर्मी उसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही है वैसे भी दिन भर जो कुछ भी हुआ था उसे उसके बाद में उत्तेजना का तूफान उठा हुआ था खास करके उसे वेटर के सामने जिस तरह से उसका बेटा बात कर रहा था वह उसके दिमाग पर पूरी तरह से छप चुका था और उसे कुछ पल के लिए ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह वास्तव में एक धंधे वाली है और जिसका डिमांड बहुत ज्यादा है। अंकित भी अपनी मां की हरकत को समझ गया था इसलिए वह भी अपना वजन अपनी मां के ऊपर से थोड़ा सा हल्का कर दे रहा था जिससे उसकी मां अपनी साड़ी को देखते-देखते अपनी कमर तक उठा दी थी और कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी हो गई थी उसके नंगेपन का एहसास अंकित को तब हुआ जब उसके लंड का सुपाड़ा उसकी मां की गुलाबी छेद पर रगड खाने लगा यह गरम एहसास अंकित के तन-बदन में आग लगाने लगा,,, और वह पल भर के लिए अपनी मां की चूची को अपने मुंह से बाहर निकालते हुए बोला,,,)







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चड्डी नहीं पहनी हो क्या मेरी जान,,,,।

सहहहह ,,,,, नहीं मेरे राजा मुझे मालूम था इसलिए चड्डी नहीं पहनी थी,,,, (इतना कहने के साथ ही वह अपने दोनों हाथों को अपने बेटे की गांड पर रखकर हल्का सा दबाव बनाने लगे जिससे लंड का सुपाड़ा बुर की चिकनाहट पाकर अंदर की तरफ से सरकने लगा,,,, इस बार अपनी मां की हरकत और उसके इस तरह के जवाब से अंकित अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाया और अपनी कमर का दबाव अपनी मां की बुर पर बढ़ाने लगा जिससे उसका मोटा तगड़ा लंड बुर में प्रवेश करने लगा और देखते ही देखते, अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में घुस गया और अंकित अपनी मां की चूची को फिर से मुंह में भरकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया। यह चुदाई बड़ी जल्दबाजी में शुरू हुई थी अंकित इतनी जल्दबाजी दिखाने नहीं चाहता था और ना ही कभी दिखाया था लेकिन आज उसकी मां शायद अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई थी जिसके चलते अंकित को भी उसकी भावनाओं की कदर करके इतनी जल्दी उसकी चुदाई करना पड़ रहा था लेकिन फिर भी इस जल्दबाजी में भी एक अलग ही मजा था अंकित अपनी मां की चूचियों को बारी-बारी से पीता हुआ अपनी कमर को जोर-जोर से हिला रहा था नीचे से उसकी मां भी पूरा जोर लगा रही थी धक्के लगाने में,,,,, पूरा मौका माहौल होने के बावजूद भी इस समय बिस्तर पर अंकित पूरी तरह से नंगा था बल्कि उसकी मां अर्धनग्न अवस्था में थी उसके बदन पर अभी भी उसके सारे कपड़े थे बस उठे हुए थे। बदन में जितने की जरूरत थी उतना अंग खुला हुआ था उसकी चूची नंगी थी और उसकी बुर में लंड घुसा हुआ था भला एक औरत और एक मर्द को इससे ज्यादा क्या चाहिए।





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अंकित बड़ी-भारी से अपनी मां की दोनों चूचियों को मुंह में भरकर पीता हुआ उसे जोर-जोर से दबाता हुआ अपनी कमर को हिला रहा था अंकित भी अपने दोनों हथेलियां को अपने बेटे की नंगी गांड पर रखकर इसका दबाव बना रही थी उसकी शिसकारी की आवाज पूरे कमरे में घुस रही थी वैसे भी इस समय वह अपनी शिसकारी की आवाज को दबाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि वह दोनों होटल के कमरे में थे और इस होटल के कमरे में अक्सर यही काम होता है जिस मां बेटे दोनों निश्चिंत थे अंकित भी अपनी मां की सिसकारी की मदहोश कर देने वाली आवाज को सुनकर और भी ज्यादा मस्त हो जा रहा था,,, अंकित का मोटा तगड़ा लंड हर धक्के के साथ उसके बच्चेदानी पर ठोकर लग रहा था और सुगंध भी हर धक्के के साथ हर किसी आह की आवाज निकाल देती थी जिससे वातावरण और भी ज्यादा मदहोश हो जाता था। देखते ही देखते दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी सुगंधा का वादा न करने लगा तो अंकित तुरंत अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर के उसे करके अपने सीने से लगा लिया और अपने धक्कों को बेहद तेज गति से चलने लगा झड़ते समय सुगंधा को अपने बेटे का हर धक्का स्वर्ग का सुख दे रहा था उसकी बुर से मदन रस की पिचकारी फुट पड़ी थी और दो-चार धक्को के साथ अंकित भी अपनी मां की बुर में झड़ने लगा था।




दोनों झड़ चुके थे दोनों मस्त हो चुके थे दोनों एक दूसरे की बाहों में असीम सुख का एहसास लिए हुए एक दूसरे के अंगों को सहला रहे थे। थोड़ी देर बाद अंकित अपनी मां के ऊपर से उठने लगा तो धीरे से उसका लंड उसकी मां की बुर से बाहर आ गया लेकिन अभी भी उसमें ज्यादा फर्क नहीं था अभी भी वह कड़क ही था धीरे से वह बिस्तर पर बैठ गया उसकी मां भी अपनी साड़ी को सिधी करने की शुध में नहीं थी वैसे भी सुगंधा अपने बेटे के साथ इस तरह का सुख भोग कर पूरी तरह से रंडी बन चुकी थी उसकी आंखों में आप अपने बेटे के सामने शर्म बिल्कुल भी नहीं रह गई थी। अंकित अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर बोला।


बहुत मजा देती हो मेरी जान,,,,, तुम्हें चोदकर तो जो मजा मुझे मिलता है पूछो मत।




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मुझे भी तो बहुत सुख देता है,,,, मेरे जीवन का सपना था कि मैं अपने पति के साथ इसी तरह से कहीं घूमने जाऊंगा और जिंदगी का मजा लूटुं,,, लेकिन मेरा वह सपना सपना ही रह गया था।

लेकिन अब तो तुम्हारा सपना पूरा हो गया है ना मेरे साथ आकर,,,,।

हां तु सच कह रहा है,,, मैं कभी सोचा भी नहीं थी कि तेरे साथ मुझे यहां आना पड़ेगा,,, लेकिन तेरे साथ आकर मुझे असली सुख मिल रहा है बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा,,,,।

(इतना सुनकर मुस्कुराता हुआ अंकित बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और नंगा ही बालकनी में आकर कुर्सी पर बैठ गया और बाहर करने जा रहा देखने लगा बाहर सड़क सुनसान हो चुकी थी. बस इक्का दुक्का वाहन हीं गुजर रहा था। ठंडी ठंडी हवा चल रही है अपनी मां की चुदाई करने पर जिस तरह की गर्मी का एहसास उसे बिस्तर पर हो रहा था,,, यहां बालकनी में उसकी मां की जवानी की गर्मी धीरे-धीरे वातावरण की ठंडी शीतल हवा में फुर्र हो रही थी थोड़ी ही देर में सुगंध भी अपने बदन पर चादर लपेटे उसके पास आकर कुर्सी पर बैठ गई,,,, अंकित ने देखा तो उसकी मां के बदन पर ना तो साड़ी था ना तो ब्लाउज वह पूरी तरह से नंगी थी बस चादर लपेटे हुए थी। यह देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला।)




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क्या हुआ कपड़े उतार कर नंगी हो गई,,,।

तो क्या कपड़े पहन कर मजा नहीं आ रहा था,,,।

तो यह चादर क्यों लपेटी हो,,, इसे भी हटा दो तो ज्यादा मजा आएगा,,,,।

धत् कोई देख लेगा तो,,,,


12:00 बजने वाले हैं देख रही हो सड़क सुनसान हो चुका है कोई देखने वाला नहीं है।

चलेगा कोई बात नहीं मैं ऐसे ही ठीक हूं,,,

जैसी तुम्हारी मर्जी मुझे तो ऐसा ही अच्छा लग रहा है,,, (ऐसा कहते हुए अंकित कुर्सी पर बैठे अपनी दोनों टांगों को हल्के से खोल दिया, चुदाई करने के बाद,, उसका लंड हल्का सा मुरझा गया था लेकिन फिर भी टांगों के बीच लटका हुआ उसका हथियार बेहद शानदार लग रहा था जिस पर सुगंधा की नजर बार-बार चली जा रही थी। और यही वह हथियार था जिसे देखकर वह अपने सारे हथियार रख दी थी और घुटने के बल हो गई थी एक तरह से वह अपने बेटे की मर्दानगी के आगे घुटने टेक दी थी। बातों का दौर यूं ही चल रहा था मां बेटे दोनों आपस में बात करते हुए सुनसान सड़क को देख रहे थे ठंडी ठंडी हवा चल रही थी पहाड़ी इलाका होने की वजह से वातावरण में धुंध सा फैला हुआ था।बेहद आहलादक मौसम था। सुगंधा की नजर बार बार अंकीत के लटके हुए लंड पर चली जा रही थी। जिसे देखकर फिर से सुगंधा की आंखों में खुमारी छाने लगी थी और वह बात करते हुए अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेट की मुरझाए लंड को थाम ली और उसे हिलाने लगी,,, यह देखकर अंकित मुस्कुराने लगा और वह भी अपना हाथ चादर में डालकर अपनी मां की कचोरी जैसी हुई बुर को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा दोनों एक दूसरे के अंगों से खेलना शुरू कर दिए थे दोनों की आंखों में खुमारी छाने लगी थी,,,, अद्भुत सौंदर्यात्मक वातावरण में मां बेटे फिर से मदहोश हो रहे थे सड़क पूरी तरह से सुनसान हो चुकी थी क्योंकि धीरे-धीरे घड़ी में पौने एक का समय हो रहा था,,,,




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उत्तेजना के मारे सुगंधा थूक से अपनी सूखे हुए गले को गिला करने की कोशिश कर रही थी और अंकित अपनी मां की बुर से हालाते सहलाती है अपनी एक उंगली को उसके अंदर प्रवेश कर कर अंदर बाहर करने लगा था अंकित को महसूस हो रहा था कि उसकी मां की बुर में अभी भी गर्मी बरकरार थी अंकित को अपनी ऊंगलियो में बुर के अंदर की तपन महसूस हो रही थी,,,,, उत्तेजना के हमारे सुगंधा का चेहरा लाल हो चुका था वह कुर्सी पर बैठे-बैठे ही अपने होठों को अपने बेटे के चेहरे की तरफ आगे बढ़ाने लगी तो अंकित भी अपनी होठों को अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा दिया और अगले पल दोनों के होंठ आपस में मिल गए और दोनों एक दूसरे के होठों का रसपान करना शुरू कर दिए धीरे-धीरे अंकित का लंड फिर से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था,,,, जिसकी गर्माहट सुगंधा को अपनी हथेलियां में महसूस हो रही थी और इसका सीधा असर उसे अपनी गुलाबी गली में महसूस हो रही थी जो की बार-बार मदन रस छोड़ रही थी। कुछ देर तक मां बेटे इसी तरह से खेलते रहे और चुंबन का आनंद लेते रहे। दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि यही सुख भोगने के लिए तो वह लोग कितनी दूर यहां पर आए थे और अगर इस अनमोल समय को सोकर गुजार देंगे तो यहां आने का उनका कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा।




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अंकित धीरे-धीरे अपनी मां के बदन पर से चादर को हटा रहा था और देखते-देखते कुर्सी पर वह पूरी तरह से नंगी हो गई थी मां बेटे दोनों बालकनी में नंगे थे किसी के देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि बालकनी में अंधेरा था वह लोग सब कुछ देख सकते थे लेकिन कोई और उन्हें नहीं देख सकता था इसी मौके का फायदा उठाते हुए अंकित अपनी मां को कुर्सी पर से उठाने लगा उसकी मां भी उसका इशारा पाकर कुर्सी पर से उठकर खड़ी हो गई थी,,, अंकित अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ठीक अपने सामने खड़ी कर दिया और उसके नितंबों की लकीर के ऊपरी हिस्से पर चुंबनों की बारिश कर दिया उसके चुंबन से मदहोश होकर सुगंधा खुद-ब-खुद अपनी गांड को उसके सामने परोसती और आगे की तरफ झुक कर बालकनी की रेलिंग पकड़कर खड़ी हो गई,,,, अंकित पागलों की तरह अपनी मां की गांड पर इधर-उधर चुंबनों की बारिश करने लगा गोरी गोरी गांड पर अंकित अपने होठों से मोहर लगा रहा था सुगंधा का मन बहक रहा था वह पागल हो जा रही थी अब उसे भी बिल्कुल भी डर नहीं था की बालकनी पर इस अवस्था में खड़ी होने पर कोई उसे देख लेगा तो क्या होगा वैसे भी वह निश्चित हो गई थी उसे भी इस बात का एहसास हो गया था की बालकनी में जहां पर वह खड़ी है वहां पर पूरी तरह से अंधेरा था और वहां पर कोई देख नहीं सकता था इसलिए तो वह खुलकर मजा ले रही थी वह थोड़ा सा और झुककर अपने टांगों को फैला दी थी ताकि उसकी गुलाबी बुर को उसका बेटा आराम से देख सके और उस पर भी अपने होठों से मोहर लगा सके,,,, और ऐसा ही हुआ अंकित अपनी मां की गुलाबी छत पर अपने होंठ ट रखकर उसे चाटने लगा यह जानते हुए भी की उसकी बुर से अभी भी उसका ही लावा टपक रहा था,,, जो कि उसकी मां की मदन रस से मिला हुआ था।




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अंकित अपनी मां की गांड की दोनों फांकों को दोनों हाथों से पकड़कर उसकी बुर चाट रहा था उसे मजा आ रहा था और धीरे-धीरे सुगंध भी शिसकारी ले रही थी,,,, लेकिन तभी अंकित शरारत करते हुए अपनी जीभ को उसकी गांड के भुरे रंग के छेद पर रखकर उसे अपनी जीभ से कुरेदने लगा और सुगंधा को अपने बेटे बेटी की यह हरकत इतनी लाजवाब लगी कि वह पूरी तरह से मचलने लगी मत होने लगी मदहोशी उसके नसों में पूरी तरह से छाने लगी,,,, वह मदहोश होकर अपनी गांड को पूरी तरह से एकदम कड़क कर दे रही थी,,, उसे अपनी उत्तेजना संभाले नहीं संभाल रही थी वह अपनी गांड को गोल-गोल घूमाते हुए अपने बेटे के चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दी थी और अंकित पागलों की तरह अपनी मां की गांड का छेद चाट रहा था उसमें से निकलने वाली मादक खुशबू उसे मदहोश कर रही थी उसे और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी वह एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर जोर-जोर से हिला रहा था क्योंकि इस हरकत की वजह से उससे भी अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,,,,,।




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सहहहहह,,,, आहहहहह क्या मस्त गांड है रे तेरी कसम से ऐसी कहा तो मैं आज तक नहीं देखा इतनी खूबसूरत है इसे चाटने में मुझे और ज्यादा मजा आ रहा है,,,,, ऊमममममम,,,,,, ऊमममममम,,,,

तो चाट हरामजादे तुझे रोका किसने है घुस जा मेरी गांड के अंदर,,,,, आहहहहहह सहहहहहहहह बहुत मजा आ रहा है जीभ घूमा घूमा कर चाट,,, ऊमममममममम।

(सुगंधा पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी बालकनी की रेलिंग पड़े वह पीछे नजर घुमाए अपने बेटे की हरकत को देखते हुए अपनी बड़ी-बड़ी गांड को गोल-गोल घूमा रही थी उसके चेहरे पर रगड़ रही थी और अंकित पागलों की तरह अपनी मां की गांड के छेद को चाट रहा था। अंकित दोनों हाथों से अपनी मां की भारी भरकम गांड को पकड़े हुए था वह भी पूरी तरह से मत हो गया था उसका लंड बगावत पर उतारू हो गया था कुछ देर तक किसी तरह से अपनी मां की गांड की चटाई करता रहा क्योंकि अब उसके मन में कुछ और चल रहा था फिर धीरे से वह अपनी एक उंगली को अपनी मां की गांड के छेद में डालने की कोशिश करने लगा यह देखकर उसकी मां गांड को आगे की तरफ ले ली और उसे बोली।)





यह क्या कर रहा है,,,?

बहुत मजा आ रहा है मैं भी देखना चाहता हूं गांड का छेद कितना मजा देता है,,,,।

धत् ,,,,, इसमें कौन सा मजा आएगा,,,,।

मजा तो आ रहा है डालने दो,,,,,,(इतना कहने के साथ ही हुआ है अपनी आधी उंगली अपनी मां की गांड के छेद में डाल दिया सुगंधा को अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन वह भी इनकार नहीं कर पाई और तब तक अपने बेटे की हरकत से उसे भी मजा आने लगा अंकित अपनी उंगली को उसकी गांड के छेद में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,,,,)

कैसा लग रहा है मेरी रानी,,,,,


सहहहहह अच्छा लग रहा है मेरे राजा,,,,ऊममममम तू तो मुझे पागलकर देगा,,,,,।

पागल तो तू मुझे कर दी,,,, गुलाबी बुर के साथ-साथ तेरी गांड का छेद भी लाजवाब है,,,,,आहहहहह कितना गरम है अंदर से,,,,,

ठंडी ठंडी हवा में गर्माहट दे रही है ना मेरी गांड,,,,




तु है ही इतनी गर्म चीज के बर्फ भी गिरने लगेगी तो भी तू मुझे गरम कर देगी,,,,,आहहहहह दूसरी उंगली डालकर देखता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह दूसरी उंगली को भी अंदर प्रवेश कराने की कोशिश करने लगा यह देख कर सुगंधा बोली)

तू भी घुस जा अंदर ले ले मजा पूरा,,,,


घुसने जैसा होता तो मैं कब का घुस गया होता,,,, लेकिन इसमें तो मैं अपना लंड डालूंगा,,,,।
(लंड डालने वाली बात सुनकर वह एकदम से घबरा गई और बोली,,)


नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी मत करना मेरी गांड का छेद छोटा है और तेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है घुस नहीं पाएगा,,,,,।

लेकिन उंगली तो आराम से चली गई देखो मेरी दो उंगली तुम्हारी गांड में है,,,,,आहहहहहह कितने आराम से अंदर बाहर हो रही है मजा आ रहा है ना तुमको,,,,।




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मजा तो आ रहा है लेकिन तेरा लंड अंदर डालकर कहीं मजा सजा ना बन जाए,,,,।

ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा,,,, आज नया अनुभव ले लेते हैं जैसे कहते हैं ना गाली देते समय तेरी गांड मार लूंगा तो आज मैं तेरी गांड मारना चाहता हूं,,,,,।

मुझे डर लग रहा है,,,,

डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है आज तक मेरे लंड में तुम्हें दुनिया का हर सुख दिया है तो तुम्हारी गांड मारने में भी सुख देगा,,,, तुम ही सोचो यहां से नया अनुभव लेकर जाओगे गांड मरवाने का,,,,आहहहहह कितना मजा आएगा ना जब मैं तुम्हें खाऊंगा की आज मैं तुम्हारी गांड मारूंगा,,,,,ऊमममममम देखो तो सही इतना कह कर ही मेरे लंड की हालत खराब हो रही है,,,, और वैसे भी आज तुम्हारी मदहोश कर देने वाली जवानी की एक तरह से परीक्षा है अगर तुम गांड मरवाने में सफल हो गई तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत के साथ-साथ बहादुर हो जाओगी।


मुझे नहीं बनना बहादुर औरत मुझे गांड नहीं मरवाना,,,,।




ऐसा कैसे हो सकता है मेरी जान अब तो तुम मुझे पागल कर रही हो,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी दोनों गलियों को गोल-गोल घूमता हुआ अपनी मां की गांड के छेद नहीं अपने लंड के लिए जगह बना रहा था सुगंधा चाहे कितना भी इंकार कर ले लेकिन अपने बेटे की हरकत से उसे भी मजा आ रहा था,,,, वह भी पल में जा रही थी तभी तो अपनी गांड कौन-कौन घूमा रही थी और उंगली का मजा ले रही थी,,,,, अंकित धीरे से अपनी उंगली को अपनी मां की गांड के छेद से बाहर निकाल और फिर उसके पीछे खड़ा हो गया अपने मोटे तगड़े लंड को हाथ में लेकर और उसके सुपाड़े पर ढेर सारा थद चुपड दिया,,,,, सुगंधा जानती थी कि आप उसका बेटा क्या करने वाला है और वह यह भी जानती थी कि इनकार करने का कोई मतलब नहीं है जब कोई बात उसके बेटे के मन में आ जाती है तो उसे पूरा करके ही मानता है और इसमें भी कोई शक नहीं था कि उसके बेटे की हर हरकत से उसे आज तक आनंद ही मिलता रहा था इसलिए वह भी इनकार नहीं कर पाई और जैसे ही लंड का मोटा सुपाड़ा सुगंधा को अपनी गांड के छोटे से छेद पर महसूस हुआ वह पूरी तरह से गनगना गई,,,,,

ऊमममममममम,,,,सहहहहह मत कर मेरे राजा,,,,





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मुझे मत रोको मेरी रानी मुझे आज करने तो मनमानी इसमें तुम्हारा ही भला है,,,, मैं जानता हूं इस बारे में तुम कभी सोची भी नहीं थी और अभी तक तो मैं भी नहीं सोचा था लेकिन तुम्हारी गांड का छेद इतना लाजवाब है कि आज इसमें डालने का मन कर रहा है,,, (सुपाड़े को अपनी मां की गांड के छेद से सटाए हुए ही वह बोला,,,)


मेरी गांड फट जाएगी तेरे लंड से,,,,


बिल्कुल भी नहीं एकदम आराम से डालूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही हुआ अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर उसके सुपाड़े को अपनी मां की गांड के छेद में डालने की कोशिश करने लगा,,,, थूक कि चिकनाहट पाकर लंड का सुपड़ा धीरे-धीरे सरकने लगा लेकिन सुगंधा को अपनी गांड के छेंद में बहुत दर्द महसूस हो रहा था इसलिए उसकी गांड को आगे की तरफ लेने की कोशिश करने लगी लेकिन अंकित एक हाथ से उसकी कमर को पकड़ कर फिर से अपनी तरफ खींच लिया,,,,, जो की एक तरह से उसकी मां के लिए जा रहा था कि आज वहां बिना गांड मरवाए जा नहीं पाएगी,,,, अंकित पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन उसे भी एहसास हो गया था कि वाकई में उसकी मां की गांड का छेद सुपाड़े के मुकाबले छोटा था,,,, बार-बार अंकित थूक लगा रहा था ढीला करने की कोशिश कर रहा था और उसकी एक कोशिश रंगला रही थी आधा लंड का सुपाडा सुगंधा की गांड के छेद में प्रवेश कर चुका था,,,, यह देखकर अंकित का हौसला बढ़ने लगा था लेकिन सुगंधा को बहुत दर्द हो रहा था,,,, वह बार-बार उसे निकालने के लिए कह रही थी लेकिन अंकित टस से मस नहीं हो रहा था। और फिर से जोर लगाने लगा और इस बार उसके लंड का सुपाड़ा उसकी मां की गांड के छेद के छल्ले में प्रवेश कर चुका था,,,, यह अंकित के लिए विजय की शुरुआत थी उसके माथे पर पसीने की बूंदे ऊपर आई थी वाकई में इस कार्य में कुछ ज्यादा ही मेहनत लग रही थी इस बात का एहसास अंकित को अच्छी तरह से हो रहा था जो कि इस ठंडी हवा में भी उसके पसीने छुड़ा दे रही थी।





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बहुत दर्द कर रहा है अंकित,,,,।

चिंता मत करो मेरी जान मुंह घुस गया है तो बाकी का अंग घुस ही जाएगा‌।

लेकिन मेरी जान चली जाएगी इतना दर्द कर रहा है,,,

पागल हो गई हो क्या अभी देखना कितना मजा आएगा और इस बार अंकित बाकी बचे लंड पर फिर से थूक लगाने लगा और फिर से जोर लगाकर उसे अंदर की तरफ डालने लगा धीरे-धीरे लंड सरक रहा था गांड का छल्ला काफी कसा हुआ था लेकिन फिर भी थूक की चिकनाहट उसे अंदर सरकने में मदद कर रही थी,,, सुगंधा अपने दर्द को अच्छे लेने के लिए बालकनी की रेलिंग को बड़े कस के पकड़ी हुई थी,,,, अपने दांतों को दबाई हुई थी ताकि उसके मुंह से चीख ना निकल जाए और मन ही मन में अपने बेटे को गाली दे रही थी कि हरामजादे को आज गांड मारने का मन कैसे करने लगा,,,, देखते-ही-देखते अंकित की मेहनत रंग ला रही थी उसका आधा लंड उसकी मां की गांड में घुस चुका था और अब अंकित समझदारी दिखाते हुए आधे लंड से ही अपनी मां की गांड मारना शुरू कर दिया था,,, वैसे भी अंकित का लंड इतना लंबा तो था ही की आधा लंड भी उसकी मां को पूरा लंड का मजा दे रहा था ,,,, अंकित धीरे-धीरे अपने लंड को बाहर निकलता है और उसे अंदर की तरफ धीरे से ही डालता और सिर्फ आधा ही लंड क्योंकि वह जानता था कि पूरा जाने में उसकी मां को ज्यादा दर्द करने लगेगा अंकित को बहुत मजा आ रहा था वाकई में गांड के छेद का कसाव उसके आनंद को और भी ज्यादा बढ़ा दिया था। अंकित अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से थामे अपनी कमर को हिला रहा था बालकनी के अंदर मां बेटे पूरी तरह से निर्वस्त्र थे और वह भी एकदम खुले में लेकिन घड़ी में 2:00 बज रहे थे और इस समय पूरा मोहल्ला सुनसान था सड़क पर कुत्ता भी दिखाई नहीं दे रहा था क्योंकि पहाड़ी इलाका होने की वजह से ठंडक बढ़ने लगी थी। लेकिन ऐसे ठंडे माहौल में भी अंकित अपनी मां के पसीने छुड़ा रहा था।




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अंकित को मजा आ रहा था आदि लंड से ही वह अपनी मां की गांड मारने में सफल हो चुका था एक तरह से अंकित के लिए यह ऐतिहासिक जीत की शुरुआत थी,,, क्योंकि वह जानता था कि इससे पहले उसकी मां कभी गांड मरवाने का सपना भी नहीं देखी थी और आज वह हकीकत में इन पहाड़ों की वादियों में टांग फैलाए गांड मरवा रही थी,,,,,।

अब कैसा लग रहा है मेरी जान,,,,,।

अब थोड़ा ठीक लग रहा है,,,,,ऊमममममम।

थोड़ा नहीं बहुत ज्यादा तुम्हारी गांड का छल्ला कुछ ज्यादा ही कसा हुआ है मेरा लंड एकदम दब दब के अंदर की तरफ जा रहा है मेरी जगह कोई और होता तो गांड के छेद के मुहाने पर ही झड़ जाता,,,।

अच्छा होता काम से कम यह दर्द तो नहीं झेलना पड़ता,,,।

दर्द के आगे ही तो असली मजा है शुरू-शुरू में बुर में लेने में भी तुम्हें दर्द होता था याद है ना लेकिन कितने आराम से अब ले लेती हो ऐसे ही गांड के छेद में भी होगा,,,, बहुत मजा आएगा अभी तो आधा गया है,,,।
(इतना सुनते ही सुगंधा चौंकते हुए बोली)

क्या,,,?





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हां मेरी जान क्योंकि तेरे बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा है,,,(और इतना कहने के साथ ही कच कचा के अंकित अपने आधे बचे लंड को भी अपनी मां की गांड में ठुंस दिया,,,, एकदम से उसके मुंह से चीख निकल गई लेकिन जल्द ही वह अपने आप पर काबू कर ली क्योंकि जोर से चीख निकालने का मतलब था कि किसी को उसकी चीख सुनाई दे देती मौके की नजाकत को अंकित अच्छी तरह से समझता था इसलिए अपने लंड को उसकी गांड में डालकर उसी स्थिति में एकदम से रुक गया। और अपनी मां के दर्द को कम करने के लिए उसकी गर्दन पर चुंबनों की बौछार करने लगा साथ नहीं दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर उसके दोनों चूचियों को थाम लिया और उसे हल्के हल्के मसलने लगा,,,,,, अंकित बहुत मदहोश हो चुका था आनंदित हो गया था उसके बदन में उत्तेजना परम शिखर पर थी वह पूरी तरह से पागल हो गया था अपनी मां की गांड मार कर,,,,,, और उसकी मां कोई सुन ना ले इसलिए धीरे से अपनी भड़ास निकालते हुए बोली,,,)

मादरचोद रंडी की औलाद ,,,, मैं तुझसे कह रही हूं कि मुझे दर्द हो रहा है इसलिए एक साथ अपना पूरा लंड डाल दिया,,,,।




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पूरा नहीं जानेमन आधा तो पहले ही डाल चुका था बस आधा डाल दिया,,, और मुझे रंडी की औलाद क्यों कह रही हो क्या तुम रंडी हो,,,।

तूने बना दिया जो कसर बाकी थी तूने पूरा कर लिया गांड मार कर,,,,,


यह तो तुम्हें मजा देने के लिए किया हूं,,,,।

मेरे पास लंड होता तो तेरी गांड में डाल देती और पता चला की गांड मरवाने में कितना दर्द होता है।

लेकिन ऐसा हो नहीं सकता क्योंकि तुम्हारे पास मखमली बुर है जिसका मैं दीवाना हुं,,,,।

तो बुर चोदना चाहिए था ना गांड क्यों मार रहा है।

तुम्हारे बदन का कोई भी छेद मेरे लिए अनमोल है,,,, मैं सब छेद में डालकर देखना चाहता हूं।( अपनी बातों के जादू में अपनी मां को फंसाते हुए वह अपनी मां की चूचियों को धीरे-धीरे से मसल कर उसकी उत्तेजना को पटाने की कोशिश कर रहा था और उसकी मेहनत रंग ला रही थी धीरे-धीरे दर्द से कराहने की आवाज मस्ती की शिसकारी में बदलने लगी,,,,, अंकित फिर से अपने लंड को बाहर निकाल कर धीरे से अंदर की तरफ डालने लगा थोड़ा सा दिक्कत हो रहा था लेकिन धीरे-धीरे यह दिक्कत भी खत्म हो गई अब बड़े आराम से अंकित का लंड उसकी मां की गांड में अंदर बाहर हो रहा था अभी वह धीरे-धीरे अपनी मां की गांड चुदाई कर रहा था लेकिन जैसे ही सुगंधा की शिसकारी की आवाज बढ़ने लगी वह अपनी कमर की रफ्तार को बढ़ाने लगा,,,,, अपनी मां की दोनों चूचियों को थाने वह बालकनी में अपनी मां की गांड मारना शुरू कर दिया था उसे बहुत मजा आ रहा था गांड का छल्ला काफी कसा हुआ था जिससे उसका मजा बढ़ता ही जा रहा था,,। मां बेटे दोनों कभी सोचा नहीं थे कि अपने घर से इतनी दूर पहाड़ियों में आकर वाला खुले में इस तरह से चुदाई का मजा लूटेंगे,,,, वाकई मे ईस जगह पर किसी का भी डर नहीं था किसी के भी देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी अगर देख भी लेता तो उन दोनों का क्या बिगाड़ देता क्योंकि यहां पर उन दोनों को कोई जानता ही नहीं था इसलिए तो दोनों खुलकर मजा लूट रहे थे।




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अब कैसा लग रहा है मेरी रानी,,,।


बहुत मजा आ रहा है,,,,,आहहहहह तूने मेरी गांड के सारे तार खोल दिए हैं,,,।

तार खुल गए तभी तो मजा लूट रही हो,,,,आहहहहह आहहहहह अब देखो कितने आराम से मेरा लंड अंदरघुस रहा है,,,,।


मैं कभी सोचा भी नहीं थी कि मेरी गांड के छोटे से छेद में तेरा मोटा लंड घुस जाएगा,,,,,,आहहहहहह लेकिन इसकी रगड़ा रह रहकर थोड़ा सा दर्द जरूर देती है।

दर्द थोड़ा सा लेकिन मजा ढेर सारा,,, और तुम्हें क्या चाहिए,,,,,आहहहहहह आहहहहहहहह देखो तो सही चोदते समय मेरे भी मुंह से यह सब निकल जा रहा है। सच में बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी गांड मारने में अब तक तो मैंने सुना ही था लेकिन आज मार कर भी देख लिया,,,,,आहहहहहह (अंकित पूरी तरह से मत हो चुका था इससे पहले अंकित ने राहुल की मां की गांड मरा था लेकिन उससे भी ज्यादा मजा आज उसे अपनी मां की गांड मारने में आ रहा था, गांड मारने का भी अनुभव दिलचस्प होता जा रहा था अंकित के लिए,,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से बालकनी में खड़े होकर अपनी मां की गांड मारता रहा काफी देर से खड़े होने के कारण उसकी मां की टांगे दर्द करने लगी थी और वह अपने बेटे से बोली,,,)

खड़े-खड़े तो मेरी टांगे दर्द करने लगी,,,,,,।

यह बात है चलो फिर अंदर बिस्तर पर तुम्हारी गांड मारता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपने लंड को अपनी मां की गांड के छेद से बाहरनिकाल लिया और फिर अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे कमरे के अंदर ले आया कमरे के अंदर आते ही सुगंध को मालूम था कि उसे क्या करना है वह जल्दी से बिस्तर पर घोड़ी बन गई और अपनी बारी भर काम करने को हवा में उठा दे अंकित बिस्तर के नीचे ही खड़ा रह गया क्योंकि यही पोजीशन सही भी थी,वह बिस्तर के नीचे खड़े होकर फिर से अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की गांड में छेद में डाल दिया इस बार बिना दिक्कत के उसका पूरा लंड गांड के छेद में प्रवेश कर गया यह देखकर अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह फिर से अपनी मां की कमर पकड़कर उसकी गांड मारना शुरू कर दिया अपनी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाने के लिए सुगंध अपने हाथ को नीचे की तरफ लाकर अपनी बुर में अपनी एक उंगली डालकर उसे अंदर बाहर कर रही थी,,,, तकरीबन 20 मिनट की और गांड मराई के बाद अंकित के लंड से वीर्य का फव्वारा फुट पड़ा जो उसकी मां की गांड के छेद को भरने लगा,,,,, अंकित अपनी मां की गांड के छोटे से छेद पर भी विजय प्राप्त कर चुका था।




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मां बेटे दोनों काफी थक चुके थे क्योंकि घड़ी में तीन बज चुके थे सुगंधा नंगी ही बाथरूम में गई और बैठकर पेशाब करने लगी उसे अपनी खबर में दर्द महसूस हो रहा था क्योंकि आज उसके बेटे ने कुछ ज्यादा ही मेहनत कर दिया था गांड के छेद में भी दर्द महसूस हो रहा था जिसका कारण वह अच्छी तरह से जानती थी। मां बेटे दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर बिस्तर पर लेटे हुए थे यहां पर मां बेटे दोनों का पहला दिन और पहली रात थी जो की पूरी तरह से सफल हो चुकी थी इसके बाद वह दोनों नींद की आगोस में चले गए।
Bahut hi sundar aur mast update!
 
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Kumarshiva

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अरे भाई नाराज क्यों हो रहे हो मैं भी स्टोरी लिखता था पहले मुझे पता है लोग क्या सोचते हैं मैं भी एक स्टोरी लिखी थी जो काफी लोगों को पसंद थी पर बाद में मैंने लोगों के कमेंट आने वालों की स्टोरी में कुछ नया लिखो क्या हर बार वही मां और बेटा



तुम्हारी बात समझता हूं मुझे भी ऐसी स्टोरी पढ़ना पसंद है पर बार-बार वही कैरक्टर आते रहे तो एक समय आने के बाद स्टोरी अच्छी नहीं लगती इसलिए मैं कह रहा हूं
Agar story incest (mon and son) hai to mom aur beta ke physical relationship ho jane pr story ka ek achchha sa end kr do,faltu ka strech mat kro new charector add karne ki jarurat hi nhi padegi
 

rohnny4545

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रात भर गांड मराने के बाद सुगंधा की नींद खुल गई सुबह के 6:00 बजे रहे थे वैसे भी कोई काम नहीं था इसलिए जल्दी उठने का कोई मतलब नहीं था 6:00 बजे आंख खुलने के बावजूद भी वह कुछ देर तक यूं ही बिस्तर पर लेटी रही,,, अंकित अभी भी उसकी बाहों में गहरी नींद में सो रहा था। रात भर जमकर मेहनत जो उसने किया था,,, सुगंधा स्नेह भरी नजरों से अपने बेटे को देख रही थी,,, कुछ महीने पहले उसने कभी सोचा भी नहीं थी कि उसका रिश्ता अपने ही बेटे के साथ इस तरह से गहरा हो जाएगा,,, इस बात को वह भी मानती थी कि वह पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी शर्म का उसकी आंखों में अब नामोनिशान नहीं था क्योंकि वह जानती थी शर्म करने से कोई फायदा नहीं है बेशर्म बनने के बाद ही उसे जीवन का असली सुख प्राप्त हुआ था और इस सुख को वह खोने नहीं देना चाहती थी। रात के बारे में वह सोच रही थी उसका बेटा कितना शैतान हो चुका था उसे जीवन का हर सुख दे भी रहा था और ले भी रहा था,,, वह सोची नहीं थी कि उसके बदन का अनमोल अंग का लेने के बावजूद भी वह इस कदर से उसकी गांड मारेगा,,, उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा है उसके गांड के छेद के लिए जिद करेगा क्योंकि अक्सर मर्द औरत की बुर के लिए ही पागल होते हैं लेकिन अब उसे एहसास होने लगा था कि मर्द की प्यास केवल औरत की बुर से नहीं मिटती,, बल्कि उसे एहसास होने लगा था कि औरत के बदन का हर एक छेद मर्दों के लिए प्यास बुझाने का साधन होता है,,,, अपने बेटे की जीद को देखकर वह इस समय मुस्कुरा रही थी।




देखते ही देखते घड़ी में 6:30 बज चुके थे अभी भी अंकित गहरी नींद में सो रहा था चादर के अंदर मां बेटे दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में थे,,,, सुगंधा को अपनी गांड के छेद में हल्का-हल्का दर्द महसूस हो रहा था इसका कारण वह अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी उसके बेटे का लंड कोई साधारण लंड नहीं था जिसकी वजह से उसे अपनी गांड के छेद में दर्द महसूस हो रहा था इतना तो बुरे में डलवाने पर भी दर्द नहीं हुआ था। वह धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और आईने में अपने आप को देखने लगी नग्न अवस्था में वह रूप की रानी लग रही थी अपनी कमर पर हाथ रखकर अपने बदन को इधर-उधर घूमाकर अच्छी तरह से देख लेने के बाद वह बाथरूम के अंदर घुस गई,,,, और सौच करने लगी अब उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में गांड मराने में कितना दर्द होता है रात को तो उसे भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस समय सौच करते समय उसके गांड में कुछ ज्यादा ही दर्द हो रहा था,,,, जैसे तैसे करके वह काम निपटा ली,,, लेकिन अब उसे दर्द ज्यादा कर रहा था चलने में भी तकलीफ हो रही थी। वह नहा कर अपने नंगे बदन पर टावर लपेटकर बाहर आ गई तब तक अंकित भी जा चुका था अपनी मां को टावल में देखकर वह मुस्कुराते हुए बोला,,,।




गुड मॉर्निंग मम्मी,,,, कैसी गुजरी रात मजा आ गया ना,,,।

हरामजादे मजा तो आ गया लेकिन तूने मेरी गांड की हालत खराब कर दिया है।

क्यों क्याहो गया,,,,?

गांड में बहुत जोर का दर्द हो रहा है चला भी नहीं जा रहा है,,,,।

कोई बात नहीं शुरू शुरू में ऐसा होता है दो-चार घंटे में एकदम सही हो जाएगा रात को फिर गांड मरवाने लायक हो जाओगी,,,।

इस बारे में अब सोचना भी मत,,,, अब तो तुझे गांड के छेद पर हाथ भी लगाने नहीं दूंगी,,,,

यह बात है,,, चेहरे से मत करना नहीं तो अभी फिर से पटक कर गांड मार लूंगा,,,,।

तुझे क्या मैं मजाक कर रही हूं सच में बहुत दर्द कर रहा है,,,,।

अच्छा कोई बात नहीं मेरी जान कुछ दिन तक उस छेंद के बारे में सोचूंगा भी नहीं।

चल जाकर तु भी नहा ले,,





ठीक है,,, (इतना कहकर हुआ अभी बाथरुम में चला गया और थोड़ी देर में नहा कर बाहर आ गया,,,, फोन करके दोनों ने नाश्ता मंगवाया,,,, नाश्ता करने के बाद सुगंधा फिर से बिस्तर पर लेट कर आराम करने लगी,,,, उसे सच में बहुत दर्द कर रहा था ठीक से चला नहीं जा रहा था,,, जिसकी वजह से अभी उसे कहीं जाने की इच्छा नहीं हो रही थी अंकित भी वहीं बैठ रहा और अपनी मां से बातचीत करता है देखते ही देखते फिर से दोनों सो गए तकरीबन 11:00 बजे फिर से अंकित की आंख खुली तो वह देखा उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी,,,, वह धीरे से उठाकर अपनी मां को बिना बताए तैयार होकर कमरे से बाहर निकल गया क्योंकि आज उसे उसे अनजान औरतों से मिलना था जिसने उसे लंच के लिए बलाई अपने होटल से निकाल कर वह सड़क पर चहल कदमी करता हुआ आगे बढ़ गया,,, प्रचंड गर्मी के महीने में भी यहां पर मौसम खुशनुमा था या देखकर अंकित को भी हैरानी हो रही थी लेकिन उसे बहुत अच्छा लग रहा था इस तरह का मौसम उसके शहर में बहुत कम ही देखने को मिलता है,,, आते जाते लोगों से अच्छे लग रहे थे ज्यादातर लोग बाहर के ही थे,,, अंकित की नजर खूबसूरत लड़की हो पर काम खूबसूरत औरतों पर ज्यादा चली जा रही थी क्योंकि उसका मां अक्सर औरतों पर ज्यादा जाता था खास करके अंकित को औरतों की बड़ी-बड़ी गांड आकर्षित करती थी साड़ी में उभार ली हुई बड़ी-बड़ी चूचियां उसके मुंह में पानी ला देती थी और यही हाल था जब वह चाय पीते हुए उसे अंजान औरत को देखा था पल भर में ही उस औरत को भोगने का ख्याल उसके मन में आ गया था,,, और उसकी किस्मत भी इतनी तेज थी कि आज उसके साथ खाना खाने के लिए जा रहा था वैसे तो उसे पक्का यकीन नहीं था कि खाना खाने के बाद उसे औरत के साथ उसका कोई रिश्ता बन पाएगा या नहीं लेकिन फिर भी मन में उम्मीद की किरण बनी हुई थी और यही उम्मीद की किरण लिए हुए वह उसे औरत से मिलने के लिए चला जा रहा था।

उसे औरत ने जिस होटल के बारे में बताया था उसे होटल के सामने अंकित खड़ा हो चुका था पहले इधर-उधर देखने के बाद जब उसे वह औरत कहीं दिखाई नहीं दी तो वह होटल के अंदर प्रवेश करने लगा और उसकी किस्मत अच्छी थी कि सामने ही टेबल पर बैठकर चाय पीते हुए वह औरत उसे दिखाई दे गई और उसे औरत को देखते ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और यही हाल उसे औरत का भी था अंकित को देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी थी शायद वह अंकित का ही इंतजार कर रही थी,,,, वह और जल्दी से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और हाथ दिखा कर उसे अपनी तरफ बुलाने लगी अंकित को पक्का यकीन हो गया कि वह भी उसका इंतजार कर रही थी उसके पास जाते ही वह उसे नमस्ते किया और पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गया,, होटल के रेस्टोरेंट में काफी भीड़ थी क्योंकि यह खाने का समय था और सब लोग अपने-अपने पसंद का खाना खा रहे थे,,,, मुस्कुराते हुए उसे अंजान औरत ने अंकित से बोली।

मुझे तो उम्मीद नहीं था कि तुम इधर आओगे,,,


आटा कैसे नहीं आपने खाने के लिए बुलाई थी और मुझे भूख लगी और आपकी याद आ गई,,,।
(अंकित की हाजिर जवाबी सुनकर वह औरत मुस्कुराने लगे और बोली)

बड़े हाजिर जवाबी हो,,

ऐसा कुछ भी नहीं है बस आपको देखकर इस तरह के जवाब निकल जा रहे हैं।

यह बात है,,,, चलो अच्छा बताओ क्या खाओगे तुम्हारी पसंद का खाना मंगाते हैं,,,,

नहीं नहीं ऐसा कैसे चलेगा आखिरकार अपने आमंत्रित दिया है तो आपके ही पसंद का मैं खाऊंगा मैं अपनी तरफ से कुछ भी नहीं बताने वाला कि मैं क्या खाना चाहता हूं आप जो कुछ भी खिलाओगी मैं खा लूंगा,,।

बात करने में तो उस्ताद हो,,,, बातों में कोई तुम्हें हर नहीं सकता,,,। अच्छा चलो मुझे जो अच्छा लगता है वही मंगा लेती हूं लेकिन यहां नहीं,,,(कुर्सी पर दोनों हाथ रखकर इधर-उधर देखते हुए वह बोली)

फिर कहां,,,,?


यहां काफी भी है मेरे कमरे में ही चलते हैं वहां आराम से बात करते हुए खाना खाएंगे यहां पर ठीक से बात नहीं कर सकते देख नहीं रहे हो शोर शराब कितना हो रहा है,,,।

आप बात तो सही कह रही हो तो चलिए फिर आपके कमरे पर ही चलते हैं,,,,।
(इतना कहकर दोनों उठकर खड़े हो गए वह अनजान औरतों जल्दी से काउंटर पर गई और अपना आर्डर बोलकर अंकित को साथ लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी वह सीढ़ियां चढ़ रही थी कई हुई साड़ी में उसकी मस्त भराव दार गांड अंकित के होश उड़ा रही थी अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखा ही रह गया था जैसे-जैसे वह कदम उठाकर सीडीओ पर रख रही थी वैसे-वैसे उसकी भारी भरकम गांड का कटाव उसके लंड की अकड़ को बढ़ाना शुरू कर दिया था,,,, अंकित के मुंह में पानी आ रहा था देखते ही देखते दोनों होटल के कमरे के पास पहुंच चुके थे। अंकित के मन में लहर उठ रही थी,, उसे अंजान औरत ने कमरे का दरवाजा खोली और कमरे में प्रवेश करने लगी पीछे-पीछे अंकित भी कमरे में प्रवेश कर गया,,, उसने दरवाजा बंद कर दी,,,, अंकित को इस होटल का कमरा भी काफी खूबसूरत लग रहा था हर एक समान बड़े सलीके से रखी हुई थी किंग साइज बेड था दो कुर्सियां थी एक मैज रखी हुई थी और एक खूबसूरत खिड़की थी जिस पर परदे लगे हुए थे और उसे औरत ने पर्दे को खोलकर कुदरत धूप को कमरे में आने का आमंत्रण दे दी और कुर्सी पर बैठ गई खाली पड़ी कुर्सी पर अंकित भी बैठ गया और दोनों आपस में बातचीत करने लगे,,,, अंकित और वह अनजान औरत दोनों आमने-सामने बैठे हुए थे,,, मैज पर एक छोटा सा गुलदस्ता रखा हुआ था,,,।

बातचीत के दौरान उस औरत ने बताया कि वह बैंक में काम करती है कल वह अपने बारे में पूरी जानकारी नहीं दि थी लेकिन आज सब कुछ बताने लगी थी,,,, अंकित उसकी बातों को कम उसके खूबसूरत चेहरे पर ज्यादा ध्यान दे रहा था लाल-लाल भरे हुए होंठ देखकर ही अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर उसके होठों का रसपान करने के लिए तड़प रहा था,,, आसमानी रंग की साड़ी में वह आसमान से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी,,, लॉ कट ब्लाउज में इसकी भारी भरकम चूचियों की गहरी लकीर किसी झरने की घाटी से काम नहीं लग रही थी जिसमें अंकित का मन डूब जाने को कर रहा था। अंकित की नजर बार-बार उसकी चूचियों पर चली जा रही थी जिसका एहसास उसे अंजान औरत को हो रहा था और वह बार-बार अपनी साड़ी को दुरुस्त करने की कोशिश भी कर रही थी लेकिन पारदर्शी साड़ी में वह ज्यादा कुछ दुरुस्त करने में सामर्थ नहीं थी और उसे इस बात से हैरानी भी हो रही थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसकी चूचियों की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा था। लेकिन इस हैरानी के साथ-साथ उसे अपनी जवानी पर गर्व भी महसूस हो रहा था क्योंकि वह तीन बच्चों की मां थी और तीनों जवानी की दहाने पर कदम रख चुके थे उनमें से एक का तो दो-तीन महीने बाद विवाह तय करना था मतलब की 3 महीने बाद वह सास बन जानी थी और इसके बावजूद भी एक जवान लड़का उसे प्यासी नजरों से घर रहा था भला इससे बड़ी गर्व की बात उसके लिए क्या हो सकती थी ‌

अंकित भी अपने बारे में सब कुछ उसे बताता चला गया लेकिन सच्चाई कम झूठ ज्यादा था वह अपने बारे में कुछ भी सच नहीं बोल रहा था क्योंकि वह अपने चरित्र को परदे मे हीं रखना चाहता था उसने उसे औरत को अभी नहीं बताया था कि यहां पर वह अपनी मां के साथ घूमने आया है क्योंकि,, वह नहीं चाहता था कि वह औरत उसे शंका की नजर से देखें,,,, बातचीत का दौर चल ही रहा था कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी और दस्तक की आवाज सुनकर वह औरत अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

लगता है खाना आ गया,,,,,(और इतना कहकर वह दरवाजे की तरफ कदम आगे बढ़ा दी,,, दरवाजा खोली तो सामने बैटरी था जो खाना लेकर खड़ा था और मुस्कुरा था वह कमरे में दाखिल हुआ मैच पर खान की प्लेट रखकर औपचारिकता निभा कर वहां से चला गया,,,,, खाना काफी मसालेदार दिखाई दे रहा था साथ में चपाती थी सलाद था और लस्सी का बड़ा-बड़ा गिलास भी था लेकिन साथ में,,, बियर की बोतल भी थी जिसे देखकर अंकित को हैरानी हुई और वह बियर की बोतल की तरफ देखकर उसे औरत की तरफ देखने लगा जो की कुर्सी पर बैठते हुए मुस्कुराते हुए बोली,,,)

चिंता मत करो यार ज्यादा कुछ नहीं ठंडी बीयर है कभी कबार जब मैं इस तरह से घूमने जाती हूं तो अकेले रहती हूं तो पी लेती हूं बड़ा अच्छा लगता है।

कोई तुम्हें खत नहीं,,,।

किसी को पता ही नहीं है तो रहेगा क्या मैं तुमसे कहीं तो घर पर कभी नहीं पीती बाहर कहीं जाती हूं तभी और अकेले रहती हूं तभी अपना यह शौक पूरा कर लेती हूं,,,,‌


नशा होता होगा।

ज्यादा खास नहीं बस हल्की सी खुमारी छाने लगती है,,,,।

तुम भी ले सकते हो थोड़ा सा,,,।

नहीं नहीं बिल्कुल नहीं,,,,,।

चलो कोई बात नहीं तो तुम लस्सी पी लेना,,,।
(और इतना कहकर दोनों खाना ,खाना शुरू कर दिए,,, साथ में बातचीत का दौर भी शुरू हो चुका था अंकित को उसे औरत से बातचीत करने में बड़ा मजा आ रहा था वह औरत भी बड़ी खुश मिजाज थी,,, बात करते हुए बीच-बीच में वह बियर के केन को मुंह से लगाकर घूंट भर भर कर बियर भी पी रही थी वैसे तो अंकित को बड़ा अजीब लग रहा था लेकिन वह औरत जिस अंदाज से पी रही थी कुछ पल के लिए तो उसका भी मन मचल उठा कि वह भी एक बार टेस्ट करके देखे लेकिन फिर अपने मन को उसने मना लिया,,,,,, अंकित धीरे-धीरे लस्सी पी रहा था खाना खा रहा था,,,,, उस औरत ने तो लस्सी नहीं पी लेकिन जब देखी थी अंकित की लस्सी खत्म हो चुका है तो वह खुद अपनी लस्सी उसकी तरफ आगे बढ़ा दी,,,, पहले तो अंकित इनकार करता रहा क्योंकि वह उसके हिस्से की लस्सी थी वह उसे बार-बार उसे पीने के लिए कहता था लेकिन वह मना कर रही थी और वह अपने हिस्से की लस्सी अंकित को पिलाना चाहती थी और अंकित का मान रखते हुए वह लस्सी के गिलास को अपने होठों से लगाकर बस एक घूंट लस्सी पीकर वह अंकित की तरफ ग्लास बढ़ाते हुए बोली,,,)

लो बस तुम्हारी बात मान ली लेकिन अब तुम्हें भी मेरी बात माननी नहीं होगी लोग यह भी लस्सी पी जाओ क्योंकि मैं बियर पी रही हूं ना इसलिए लस्सी नहीं पी पाऊंगी,,,,।
(उस औरत का अंदाज देखकर और उसकी झूठी लस्सी को खुद पीने के बारे में सोचकर अंकित का लंड खड़ा होने लगा था वह मदहोश हो रहा था वाकई में वह औरत काफी दिलचस्प खूबसूरती के साथ-साथ काफी सुलझी हुई भी थी अंकित को इस तरह की औरतें काफी पसंद थी,,,, उस औरत की बात मानते हुए मुस्कुरा कर अंकित उसके हाथ से लस्सी का क्लास ले लिया लेकिन इस दौरान उसकी उंगली उसे औरत की उंगली से स्पर्श हो गई जिससे अंकित के बदन में हलचल सी मच गई और यह ऐसा शायद उसे औरत के तन बदन में भी हो गया वह भी शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,, अंकित उसकी झूठी लस्सी को पीने लगा इस बात का अहसास होते ही उसे अनजान औरतों के तन बदन में हलचल सी होने लगी,,,,, क्योंकि वह सोची नहीं थी कि उसकी झूठी लस्सी वह पिएगा लेकिन बियर की खुमारी उसकी आंखों में उसके दिलों दिमाग पर छाने लगी थी और न जाने क्यों उसे इस समय एक जवान लड़के के सामने उत्तेजना महसूस होने लगी थी। बातचीत के दौरान उसने अपना नाम भी बताइ अनामिका,,,, जिसे सुनकर अंकित बोला,,,)

वह आपका नाम तो बेहद खूबसूरत है अनामिका मैं पहली बार इस तरह का नाम सुन रहा हूं मुझे बहुत अच्छा लगा आपका नाम और मेरा नाम अंकित है,,,।

अंकित,,,,, वाकई में तुम्हारा नाम में काफी गहराई है तुमसे मिलने के बाद किसी के मन में भी तुम अंकित हो जाओगे ऐसा तुम्हारा चरित्र है,,, मुझे भी तुम्हारा नाम बहुत अच्छा लगा,,,।
(खाना खत्म हो चुका था दोनों ने पेट भर के खाना खाया था लेकिन इस समय अंकित से ज्यादा खुमारी उसे अंजान औरत की आंखों में और उसके बदन में छाई हुई थी वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और अंकित से बोली,,,)


तुम यही बैठो मैं पेशाब करके आती हूं,,,,।(बेझिझक बिना शर्माए उसऔरत ने पेशाब करने वाली बात बोली थी जिसकी अंकित को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी लेकिन उसके मुझे पेशाब करने वाली बात सुनकर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था बाथरूम भी ठीक कुर्सी के पीछे ही था जैसा कि उसके होटल के कमरे में था वह औरत बाथरूम का दरवाजा खोले और बाथरूम के अंदर घुस गई दरवाजा तो उसने बंद की लेकिन दरवाजे की कड़ी नहीं लगे जो की दरवाजा अपने आप ही हल्का सा फिर से खुल गया अंकित सो रहा था कि दरवाजा बंद हो गया इसलिए दरवाजे की तरफ अपने सर घूमाकर देखने लगा था लेकिन उसकी हालत तब खराब हो गई जब देखा कि दरवाजा तकरीबन आधा फीट जितना खुल चुका था,,, और वह औरत उसे साफ दिखाई दे रही थी,,, अब अंकित के मन में गुदगुदी होने लगी वह औरत अपने ही आप में मस्त थी उसे यह पता भी था कि नहीं के दरवाजा खुला है या बंद है वह अपनी साड़ी दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी थी,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि उसे यह नजारा देखना चाहिए कि नहीं देखना चाहिए बड़े कशमकश में उसका मन भरा पड़ा था,,,, क्योंकि उसे औरत के मन में क्या चल रहा है इस बात को अंकित नहीं जानता था,,,, लेकिन अंकित तो अंकित था औरतों के मन में जगह बनाना उसे अच्छी तरह से आता था,,,, अगले पल के खूबसूरत नजारे को देखे बिना उसका मन मानने वाला भी नहीं था। बाथरूम के अंदर वह औरत का मुंह अभी दरवाजे की तरफ था,,,,, अंकित जानता था कि ईस अवस्था में अगर वह बैठेगी तो उसे ज्यादा कुछ खास दिखाई नहीं देगा,,,, क्योंकि वह कुर्सी पर बैठा हुआ था और वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठेगी, साड़ी की वजह से दोनों टांगों के बीच की उसकी पतली दरार दिखाई देने वाली नहीं थी लेकिन फिर भी अंकित के लिए इतना ही बहुत था कि वह उसकी आंखों के सामने बैठकर पेशाब करने जा रही थी।

अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, उम्र दराज होने के बावजूद भी पल की खूबसूरती लिए हुए थी वह, मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करने का हर एक अंग लाजवाब और उठाव लिए हुए था। वह साड़ी अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे उठा रही थी आंखों में अजीब सी खुमारी छाई हुई थी,,, तभी अचानक वह नजर उठाकर अंकित की तरफ देखने लगी अंकित की नजर उसकी नजर से मिल गई दोनों की नजरे आपस में टकराई अंकित तो घबरा गया लेकिन वह मुस्कुरा दी,,,, उसकी मुस्कुराहट अंकित के लिए हरी बत्ती का संकेत था अंकित मन ही मन एकदम से प्रसन्न हो गया क्योंकि उसकी मुस्कुराहट साफ बता रही थी कि वह क्या चाहती है और मुस्कुराने के बाद वह तुरंत दूसरी तरफ घूम गई साड़ी को इस तरह से पकड़े हुए और उनकी समझ गया कि आप उसे क्या दिखाने वाला है उसकी हालत है तुमसे खराब हो गई उसका मन एकदम से मदहोश होने लगा तकरीबन तीन फीट की दूरी पर ही बाथरूम के अंदर एक जवान खूबसूरत औरत हालांकि जवान तो नहीं कह सकते लेकिन जिस तरह से उसकी कद काठी और बदन की बनावट थी जवान औरतों को पानी पिला दे इस तरह की उसकी जवानी निखरी हुई थी,,,, वह अब पेशाब करनेवाली थी,,,, अंकित की जगह कोई भी होता तो उसका भी मन मदहोश हो जाता उसे औरत को पाने के लिए उसका मन मचल उठता और यही अंकित का भी हाल हो रहा था,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा पहले उसे औरत का मुंह उसकी तरफ था लेकिन अब उसकी पीठ उसकी तरफ हो चुकी थी,,, अंकित समझ गया था कि बियर का नशा उसकी आंखों में पूरी तरह से मदहोशी का रस घोल रहा था वह इस बात से अनजान बिल्कुल भी नहीं है कि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है वरना उसे देखकर मुस्कुराती नहीं।

साड़ी धीरे-धीरे उठने लगी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे खूबसूरत नजारे के ऊपर से पर्दा उठ रहा हूं ताकि दर्शक गण उसे अच्छी तरह से देख सके देखते ही देखते उसकी मोटी मोटी जांघें उजागर हो गई,,,, मक्खन जैसी मोटी मोटी केले के तने की जैसी जांघों को देखकर अंकित का मन मचाने लगा उसका ईमान डोलने लगा,,, सांसों की गति उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं थी यही हालत उस औरत की भी हो रही थी उसकी सांसों की गति भी भारी चल रही थी,,, देखते देखते वह अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठाती और कमर तक साड़ी उठते ही उसकी भारी भरकम गोलाई लिए हुए गांड मरुन रंग की पेंटी में कैद नजर आने लगी,,,, और वह अपनी मरुन रंग की पेंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, अंकित का मन कर रहा था किसी समय बाथरूम में घुस जाए और अपनी मनमानी कर ले लेकिन अभी भी वह अपने आप को संभाले हुए था अपने मां पर काबू किए हुए था क्योंकि उसे पक्का यकीन नहीं था कि वह क्या चाहती है उसे ऐसा लग रहा था कि शायद हो सकता है कि बियर के नशे में हुआ ऐसा कर रही हो और अगर वह अंदर जाएगा तो अगर उसे ऐसा कुछ महसूस ना हो और वह शोर मचा दे तब तो लेने के देने पड़ जाएंगे इसलिए वह अपने मन को नियंत्रण में रखकर वहीं बैठे रहकर उस नजारे को देखने लगा,,, पेंटी धीरे-धीरे उतर रही थी,,,, घुटनों तक आने के बजाय वह पूरी तरह से अपनी टांगों में से पेंटी को उतार कर एक तरफ रख दी थी साड़ी के अंदर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, यह सब अंकित को पूरी तरह से हैरान कर दे रहा था कि आखिरकार उसने अपनी पैंटी पूरी तरह से निकल क्यों दी,,,,। फिर देखते ही देखते हो नीचे बैठ गई पेशाब करने के लिए उसकी गोल-गोल नंगी गांड मक्खन जैसी गोराई लिए हुए पूरे बाथरुम में अपनी आप अभी कह रही थी और अंकित की आंखों की चमक के साथ-साथ उसकी वासना को भी बढ़ा रही थी।

अगले ही पल उसकी बुर से सिटी की मधुर आवाज सुनाई देने लगी जिसका मतलब साथ था कि उसके बुरे से पेशाब की धार फूट रही थी अंकित यह मधुर ध्वनि सुनकर पूरी तरह से मचल उठा मदहोश हो गया उसका लंड इस कदर कड़क हो गया कि मानो जैसे पेंट फाड़ कर बाहर आ जाएगा,,, अंकित का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था,,,,, और वह औरत अपने हाथ को अपनी नंगी गांड पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगी और नजर घूमर अंकित की तरफ देखने लगी एक बार फिर से दोनों की नजर आपस में टकराई लेकिन इस बार दोनों की आंखों में वासना दिखाई दे रहा था शर्म बिल्कुल भी नहीं थी,,, दोनों की आंखों में मदहोशी का नशा छाया हुआ था दोनों एक दूसरे की आंखों में डुब जाना चाहते थे,,,, वह अपनी गांड को सहलाते हुए पेशाब कर रही थी और अंकित को अपनी निगाहों से घायल कर रही थी,,, उसकी इस अदाकारी मदहोशी भरी हरकत से अंकित चारों खाने चित हो गया था,,, उसे अब समझ में आ गया था कि वह औरत क्या चाहती है,,, फिर भी वह पहला मौका उस औरत को ही देना चाहता था। दोनों के बीच नैन मटक्का का पूरी तरह से जारी था,,,, देखते ही देखते वह औरत पेशाब कर चुकी थी,, वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई,,,, और फिर बाथरूम से बाहर आ गई,,,, वह मुस्कुरा रही थी उसकी आंखों में चमक दिखाई दे रही थी और यह चमक कोई आम चमक रही थी बल्कि वासना की चमक थी मदहोशी की चमक थी ,किसी को पाने की लालसा थी।

अंकित उसको आजमाना चाहता था देखना चाहता था कि वह क्या करती है इसलिए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और बोला,,,।

खाना खिलाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया अब मुझे चलना चाहिए,,,,,।

बेवकूफ हो क्या,,,,?


बेवकूफ मैं कुछ समझा नहीं,,,!(आश्चर्य जताते हुए अंकित बोला,,,)

इसमें तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है तुम्हारी उम्र का दोस्त है कि तुम कुछ समझ नहीं पा रहे हो अगर थोड़े और बड़े होते तो शायद समझ गए होते,,,।
(अंकीत समझ गया था कि वह किस बारे में बात कर रही है,,, लेकिन फिर भी वह कुछ बोला नहीं,,, और शायद उसने अच्छा ही किया कुछ ना बोलकर क्योंकि वह एकदम से अंकित के कार्यवाही और उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच कर उसके होठों पर अपने होंठ रख दी और एकदम से मस्त हो गई,,,, अंकित तो पहले से ही एकदम उत्तेजित होता वाला था उसे औरत की हरकत को देखा करो अभी कहां पीछे हटने वाला था वह भी तुरंत अपना एक हाथ उसकी कमर में डाला उसे भी कस के अपनी तरफ खींच लिया पेट में बना तंबू साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगा जिसका एहसास उसे पागल बनाने लगा और साथ ही अंकित उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसके होठों का रसपान करने लगा और उसकी चिकनी कमर को दोनों हाथों से कस के पड़कर मसलने लगा,,,,, अपनी बुर पर साड़ी के ऊपर से ही लंड की ठोकर को महसूस करके वह एकदम से मदहोश होने लगी और अपनी कमर को गोल-गोल घूमाकर उस एहसास को और ज्यादा बढ़ाने लगी। अंकित पागलों की तरह उसके होठों का रस पीते हुए,,, अपने दोनों हाथों को उसके गोलाकार नितंबों पर लाकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया उसकी हरकत से वह औरत और ज्यादा मदहोश होने लगी,,,,, वह तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से उसके लंड को पकड़ के और उसकी मोटाई और लंबाई के एहसास को महसूस करके वह बोली,,,)


बाप रे तुम तो पहले से ही तैयार हो गए हो,,,,।

क्या करूं तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा लंड बेकाबू हो गया,,,,(अंकित एकदम से अश्लील शब्दों में बात करते हुए बोला,,,)

मेरा नाम अनामिका है मुझे नाम लेकर बुलाओ,,,,।

ओहहह अनामिका मेरी जान,,,,,।

तुम तो बहुत चालाक हो मैं तो तुम्हें बुद्धू समझ रही थी,,,,।

तुम्हारी गांड देखकर जो बुद्धू बना रहेगा वह सच में बुद्धू ही होगा,,,, तुम्हारा नखरा देखकर ही नहीं समझ गया था कि तुम्हारी बेलगाम जवान को लगाम की जरूरत है,,,,।

और वह लगाम तुम्हारे पास है,,,(इतना कहने के साथ ही हुआ औरत एकदम से घुटनों के बल बैठ गई और अंकित के पेंट का बटन खोलने लगी अंकीत पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था। वह औरत खेली खाई थी कब क्या करना है उसे अच्छी तरह से मालूम था इसलिए वह पल भर में ही उसकी पेंट को खोलकर एकदम घुटनों तक नीचे खींच दी और उसके दमदार लंड को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और वह हैरान होते हुए बोली,,,)

बाप रे इतना मोटा और लंबा मैं तो पहली बार देख रही हूं,,,,। यह तो मेरी बुर फाड़ देगा,,,,।

पहली बार देख रही हो क्या ऐसा,,,।

मैं झूठ नहीं बोलूंगी कसम से अपनी जिंदगी में मैं पहली बार इतना दमदार लंड देख रही हूं आज तो मजा ही आ जाएगा,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिना कुछ सोचे समझे एकदम से लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी अंकित एकदम से मत हो गया अंकित को समझते देर नहीं लगी कि यह औरत कितनी तेज है वह पूरी तरह से बेहतर में बन चुकी थी कल तक वह जिसे सीधी शादी औरत समझ रहा था वह अंदर से पूरी तरह से रंडी थी और सही मायने में देखा जाए तो एक औरत रंडी बनने के बाद ही मर्द को असली मजा देती है,,,, आइसक्रीम कौन की तरह वह गपा गप अपने गले तक अंकित के लंड को लेकर चूस रही थी,,, उसकी चुसाई से अंकित मदहोश हुआ रहा था,,, आंखें बंद हो चुकी थी वह छत की तरफ देखते हुए अपनी कमर को होले होले से आगे पीछे कर रहा था,,,, इस तरह से वह उसे औरत के मुंह को छोड़ रहा था और वह औरत भी अपने लाल-लाल होठों का छल्ला बनाकर होठों का कसाव लंड पर बढ़ा रही थी जिससे अंकित का मजा बढ़ता जा रहा था,,,।

सहहहहह आहहहहह,,,,, अनामिका तुम तो बहुत मस्त हो आज तक ऐसा किसी ने नहीं चूसा तुम तो पूरी खिलाड़ी हो आज बिस्तर पर मजा आएगा आज कोई टक्कर की खिलाड़ी मिली है,,,,ऊममममम आहहहहह पूरा गले तक ले लो,,,आहहहहह बस ऐसे ही मेरी जान,,,,ऊमममममममम,,आहहहहह,,,,,सहहहहहह कसम से तुम बहुत मस्त हो,,,,,ऊमममममममम,,,,


इसी तरह से अंकित मजा लेते रहा पूरे कमरे में सिर्फ इस समय अंकित किसी शिसकारी गुजारी थी वह औरत उसे पूरी तरह से मदहोशी के कगार पर ले आई थी,,,,,, लंड इतना मोटा और लंबा था कि गले तक लेकर उसे औरत की भी हालत खराब हो जा रही थी उसकी आंखों से भी पानी टपक जा रहा था लेकिन फिर भी वह छोड़ने को तैयार नहीं थी शायद वह सच ही कह रही थी कि इतना दमदार लंड उसने अपने जीवन में आज तक नहीं देखी थी इसलिए इतना खेल रही थी,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा फिर वह खुद ही धीरे से लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल दी,,, दोनों की हालत खराब थी दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रही थी अंकित उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और फिर उसे एक बार फिर से कसके अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। और धीरे से उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते ही देखते उसे औरत के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर वह ब्लाउज को अलग कर दिया जिस रंग की वह चड्डी पहनी थी उसी रंग की ब्रा भी पहनी थी ब्रा के ऊपर से ही अंकित उसकी दोनों चूचियों को जोर जोर से दबा रहा था मसल रहा था उस औरत को बहुत मजा आ रहा था,, बरसों के बाद उसे इंसानियत प्राप्त हो रहा था,,,, कुछ देर इसी तरह से दबाने के बाद अंकित एकदम से उसकी बाहों को पकड़ कर उसे दूसरी तरफ घुमा दिया और उसकी पीठ को अपनी छाती से लगाकर कैस के दोनों चूचियों को दबा दबा कर फिर से उसे मजा लेने लगा और फिर ब्रा का होकर खोलकर उसकी ब्रा भी उसके बदन से अलग कर दिया कमर के ऊपर से वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसकी नंगी चूचियां खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी थी लेकिन उम्र के हिसाब से हल्की सी लड़की हुई थी फिर भी इस उम्र में इस तरह की कड़क चूचियां वाकई में एक औरत के लिए गर्व की बात थी।


अनामिका मेरी रानी तुम्हारी चूचिया कितनी बड़ी-बड़ी है इसे दबाने में तो बहुत मजा आ रहा है,,,।

मुंह में लेकर पियोगे तो और ज्यादा मजा आएगा,,(मदहोशी भरी आवाज में वह बोली तो अंकित से रहने क्या वह तुरंत फिर से उसे दूसरी तरफ घूमा लिया, जिससे उसकी चूचीया उसकी आंखों के सामने हो गई और अंकित बिना देर किए उसकी दोनों चूचियों को बारी बारी से अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया,,,,, अब सिसकारी लेने की बड़ी उसे औरत की थी,,,, अंकित की हरकत से स्तन मर्दन से स्तनपान से हो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी।)

सहहहहह आहहहहह,,,,,ऊमममममममम,ओहहहहह मेरे राजा और जोर-जोर से दबा दबा कर पी,,,ऊमममममम,,,,,, बहुत मजा आ रहा है,,,,आहहहहहहहह,,,,,,(अंकित के बालों को सहलाते हुए उसका हौसला बढ़ाते हुए वह बोल रही थी और अंकित दोनों चूचियों पर टूट पड़ा था,,,,, खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों को पीकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था मदहोश हो चुका था,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से उसकी दोनों चूचियों की सेवा करता रहा और अपने हाथ से उसके कमर में बड़ी साड़ी को खोलना रहा देखते-देखते वह उसकी साड़ी को खोल कर साड़ी को नीचे फर्श पर फेंक दिया था,,,, इस समय कमरे के अंदर वह केवल पेटीकोट में थी और अंकित जानता था कि पेटिकोट के अंदर उसने पेंटिं भी नहीं पहन रखी है,,,, अंकित खुद अपने पैरों के सहारे से अपनी पेंट निकाल दिया था,,,,, कमर के नीचे वह भी नंगा हो चुका था और वह औरत एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अंकित के नंगे लंड को पकड़ कर हिला रही थी उसकी गर्मी उसकी बुर को बार-बार पिघला रही थी,,,, अंकित से रहा नहीं जा रहा था उसकी चूचियों से खेलते खेलते अब वह उसे पुरी तरह से नंगी कर देना चाहता था,, उसकी ईच्छा अब उसे नंगी देखने को कर रही थी, इसलिए वह पेटिकोट की डोरी को पकड़कर खींच दिया,, जिससे उसकी कमर पर कसी हुई पेटिकोट की गिठान खुल गई लेकिन कमर से नीचे सरकी नहीं,, उसे नीचे सरकाने के लिए अंकीत को खुद ही अपनी ऊंगलियो का सहारा लेकर उसे कमर से ढीला कर दिया और फिर अपने हाथों से ही उसे नीचे की तरफ सरकारी लगा क्योंकि अपने आप पेटिकोट सरक कर उसके कदमों में गिरने वाला नहीं थी कारण था उसका उठाव लिया हुआ नितंब,, उसका उभारदार नितंब उसके पेटीकोट को एक खुंटे की तरह अटकाया हुआ था,,,, लेकिन अगले ही पल अंकित ने उसके पेटीकोट को भी उसके कदमों में गिरा दिया और वह पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,।


बंद चारदिवारी के अंदर नग्नता औरत का प्रमुख गहना होता है,,, क्योंकि चारदीवारी के अंदर मर्द औरत के पहने हुए गहने नहीं बल्कि नग्नता का गहना देखना पसंद करता है,,, इसलिए पूरी तरह से उसे औरत को नंगी कर देने के बाद अंकित दो कदम पीछे हट गया और ऊपर से नीचे तक उसकी नंगी जवान को देखने लगा और देख के उसके मुंह से आह निकल गया क्योंकि तीन-तीन जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसके बदन की बनावट 30 साल की औरत को भी पानी भरवा दे इस तरह की थी,,,, अंकित उसकी नंगी जवान देखकर उसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाया।


ओहहहहह क्या बात है मैं आज तक तुमसे ज्यादा खूबसूरत औरत नहीं देखा नंगी होने के बाद तो तुम आसमान से उतरी हुई परी लग रही हो,,, कसम से आज तो मजा ही आ जाएगा,,,,।(अपने खड़े लंड को एक हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए अंकित बोल तो उसकी हरकत और उसकी अश्लील बातों को सुनकर उसे औरत की बुर से पानी की बूंद अमृत की धार की तरह नीचे टपक गई,,,, यह देखकर अंकित के मुंह में पानी आ गया और वह उस औरत को धक्का देकर नरम नरम गद्दे पर गिरा दिया,,,,,, उस औरत को लग रहा था कि अब उसकी चुदाई होगी,,, इसलिए वह बेशर्मी दिखाते हुए अपनी दोनों टांगों को अपने आप ही खोल दी थी और उसका जी भर कर स्वागत कर रही थी लेकिन अंकित अपने बाकी के भी कपड़े को निकाल कर पूरी तरह से नंगा हो गया और घुटनों के बाल बिस्तर पर चढ़कर उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया उत्तेजना और मदहोशी के कारण उसे औरत का गला सूख रहा था जिसे वह अपने थुक से गिला करने की कोशिश कर रही थी,,,, सांसों की गति बढ़ती जा रही थी उसके पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौट रही थी,,,, जिसे देखकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी,,,, माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था,, अंकित की किस्मत बड़ी तेज थी उसे यहां आने से पहले नहीं मालूम था कि तो अनजान औरतों के साथ उसकी तरह से मुलाकात होगी उन्हें भोगने का सुख प्राप्त होगा,,, इसलिए अंकित अपनी किस्मत पर इतरा भी रहा था। अपनी आंखों से वह जी भर कर उसे औरत की नंगी जवान को देख लेना चाहता था इसलिए इस अवस्था में भी ऊपर से नीचे तक उसे घुर रहा था वैसे तो होगा औरत पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी लेकिन जिस तरह से अंकित उसे निहार रहा था उसकी आंखों में शर्म दिखाई दे रहा था और अपनी आंखों को बंद कर ली थी अपनी ही बेटे के उम्र के लड़के के साथ वह अपनी नजर नहीं मिला पा रही थी।

खुली खिड़की से शीतल हवा पूरे कमरे को ठंडक प्रदान करने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसे औरत की गर्म कर देने वाली जवानी वातावरण की ठंडक को ऊष्मा में बदल दे रही थी,,, अंकित धीरे से उसकी दोनों टांगों के बीच से अपने दोनों हाथ को लेकर और उसकी कमर को पकड़ कर थोड़ा आगे की तरफ खींच लिया और दोनों हाथों के सहारे से उसके नितंबों को पड़कर उसे हल्का सा ऊपर की तरफ उठा लिया ताकि अपनी क्रिया को वह बड़े आराम से अंजाम तक ले जा सके और देखते ही देखते अपने प्यास होठों को उसकी कचोरी जैसी पूरी हुई बुर पर रख दिया वह औरत एकदम से मचल उठी और अपने आप ही उसकी कमर हल्के से ऊपर की तरफ उठ गई,, उसकी हरकत से साफ पता चल रहा था कि उसे कितना मजा आया था कितना मदहोशी उसके बदन पर छाई थी और अंकित पागलों की तरह उसकी गुलाबी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,, बुर की पतली दरार से बाहर जाती हुई गुलाबी पत्तियों को वह अपनी होठों के बीच लेकर पागलों की तरह चाट रहा था चूस रहा था और वह पत्तियां उसे औरत को अत्यधिक आनंद दे रही थी वह मचल रही थी तड़प रही थी दोनों हाथों से बिस्तर पर बिजी चादर को पड़कर अपनी उद्देश्य न को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह तो बेलगाम घोड़ी थी बेलगाम जवानी की मालकिन थी,,, लाख कोशिश करने के बावजूद भी वह अपनी मदहोशी औरत देखने को काबू में नहीं कर पा रही थी जिसकी वजह से पूरे कमरे में उसकी सिसकारी की आवाज गुंज रही थी और अंकित थकी उसकी तड़प और सिसकारी की आवाज को सुनकर अपनी हरकतों को और ज्यादा बढ़ा दे रहा था जितना हो सकता था उतनी जीभ अंदर की तरफ डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था,,,। उसे औरत का बदन सुगंधा से थोड़ा सा ज्यादा था,,, उसकी चूचियों के साथ-साथ उसकी गांड भी थोड़ी सी बड़ी थी जिसका भोग लेने में अंकित को ज्यादा मजा आ रहा था।

सहहहहह आहहहहह ऊमममममममम,,,,ओहहहहह मेरे राजा तूने तो मुझे पागल कर दिया रे,,,,आहहहहहह कितना मजा आ रहा है बुर चटवाने में,,,,आहहहहहह और अंदर जीभ डाल दे मैं कभी सोचा नहीं थी कि इस उम्र में भी कोई मेरी बुर इस तरह से चाटेगा,,,,,आहहहहहहहह आजीवन का असली मजा ले रही हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के सर पर रख दिया और उसके चेहरे का दबाव अपनी बुर पर बढ़ाने लगी उसकी हरकत से मस्त होकर अंकित पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया चाट चाट कर उसके गुलाबी बुर को लाल कर दिया था,,, उसका मदन रस अंकित के होठों से टपक रहा था उसकी नाक पर लग चुका था उसका चेहरा उसके बदन से भेज चुका था लेकिन फिर भी अंकित पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था शायद इस क्रिया में अंकित को भी ज्यादा मजा आ रहा था और उसे औरत को भी वह औरत रहने कर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी,,,, भारी भरकम शरीर होने के बावजूद भी उसे औरत की स्फूर्ति और ताकत को देखकर अंकित का जोश और ज्यादा बढ़ रहा था। और देखते ही देखते हो उसने अपनी तो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करके हिलना चालू कर दिया और साथ में उसकी चटाई भी जारी रखा। बिस्तर पर घमासान मचा हुआ था। शायद इस औरत ने इस तरह का सुख कभी प्राप्त नहीं की थी ,इसलिए तो अपनी मोटी मोटी जांघों को खोलकर पागल हुई जा रही थी,,,, अंकित उसकी कचोरी जैसी खुली हुई बुर को इसलिए भी पागलों की तरह चाट रहा था क्योंकि उसे पर बल का रेशा तक नहीं था शायद आज ही उसने क्रीम लगाकर अपनी बुर के बाल को साफ की थी,,,, इस उम्र में भी वह सफाई का इतना ध्यान रखती है यह जानकर अंकित का दिल अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था। अंकीत की हरकत के कारण उस औरत का सब्र खोता चला जा रहा था, अपनी जवानी की गर्मी को वह जल्द से जल्द शांत करना चाहती थी इसलिए वह अंकित से मिन्नतें करते हुए बोली।


सहहहहह आहहहहह मेरे राजा मुझसे बर्दाश्त नहीं होता जल्दी से अपना लंड मेरी बुर में डाल दे मेरी बुर की गर्मी बढ़ती जा रही है अब यह तेरी उंगली से शांत होने वाली नहीं है,,,,ऊमममममम,आहहहहहह जल्दी से चोद मुझे,,,,,,,आहहहहहहहह,,,,.

(उस औरत की तडप देखकर अंकित की भी हालत खराब हो रही थी वह भी जल्द से जल्द अपने मोटे तगड़े लंड को औरत की गुलाबी बुर में डाल देना चाहता था,,,,, और वैसे भी लोहा गर्म हो चुका था बस हथौड़ा मारने की देरी थी,,,,, अंकित भी धीरे से उसके बुर के मदन रस से सने हुए अपने चेहरे को उसकी बुर से अलग किया,,,और उस औरत की तरफ प्यासी नजरों से देखने लगा उसके चेहरे पर अपनी बुर की मलाई लगी हुई देखकर वह शर्म से पानी पानी हो गई उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और अंकित भी उसके लाल-लाल होठों को देखकर एक बार फिर से उसकी तरफ झुका और उसकी ही मलाई से सने अपने होठों को उसके होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,, उसे औरत ने भी अपनी बुर की मलाई को चाटना शुरू कर दी उसके होठों को पीना शुरू कर दी अंकित का लंड बार-बार उसकी बुर पर फिसल रहा था,,, जिससे अंकित को तो मजा आ रहा था लेकिन वह औरत तड़प जा रही थी क्योंकि उसके लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी गुलाबी पत्तियों से रगड़कर दूसरी तरफ फिसल जा रहा था जबकि वह जाती थी कि उसका लंड उसकी बुर में घुस जाए चार-पांच बार जब इस तरह से उसका लंड अपने आप फिसल कर इधर-उधर भागने लगा तो उसे रहा नहीं गया और वह अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ कर उसके बैगनी सुपाड़े को अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी अंकित को उसकी बुर का कसाव एकदम साफ महसूस हो रहा था,,, और शायद ऐसा भी हो सकता था की पहली बार इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में प्रवेश कर रहा था,,, लेकिन अंकित को मजा आ रहा था। लंड बुर की अंदरूनी दीवारों में रगड़ता हुआ अंदर की तरफ जा रहा था और यह रगड़ अंकित और उस औरत को दोनों को बेहद आनंदित कर दे रही थी,,, औरत तो जीवन में पहली बार इतनी मोटी और लंबे लंड को अपनी बुर में लेकर मदहोश सी हो गई थी पहली बार उसे ऐसा लग रहा था कि वाकई में कोई मर्दाना लंड उसकी बुर में जा रहा था,,,,।

आंखों को बंद करके हुआ इस पल का मजा लूट रही थी इस एहसास को अपने अंदर बटोर रही थी और अंकित उसकी मदहोश कर देने वाली पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों पर लेटे हुए अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में उतार चुका था और फिर धीरे से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठकर फिर से धप्प से नीचे मार दिया था एक बार फिर से अंकित का लंड उसकी बुर में घुस गया था ऐसी क्रिया वह बार-बार लेकिन धीरे-धीरे कर रहा था उसे औरत की तड़प और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी उसकी गुलाबी पतली दरार छल्ला नुमा हो चुकी थी,,,, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि आज उम्र के इस पड़ाव पर उसके गुलाबी बुर का द्वारा पूरी तरह से खुल चुका था,,,, उसकी गर्दन पर चुंबनों की बारिश करता हुआ धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ा रहा था और वह औरत अपनी मोटी मोटी जांघों को फैलाए हुए उसके हर एक धक्के को सह रही थी। धीरे-धीरे कमरे में फचार फचार की आवाज गूंजने लगी यह आवाज उसे औरत की ओर से निकले हुए मदन रस और अंकित के लंड के गुत्थमगुत्था होने से निकल रही थी। इस तरह की आवाज काफी हद तक दोनों को मदहोश कर रही थी। अंकित उसकी आंखों में देखते हुए धीरे से बोला।

अब कैसा लग रहा है मेरी जान,,,,(अपने बेटे की उम्र से अपने लिए जान शब्द सुनकर वह पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन जिस एहसास में वह डूबी हुई थी उसे एहसास को बताना भी जरूरी था इसलिए वह जवाब देते हुए बोली)

मैं कभी सोची भी नहीं थी कि किसी का लंड इतना लंबा और मोटा भी हो सकता है,,, मैं तो सच में धन्य हो गई तेरे लंड को अपनी बुर में लेकर,,,आहहहह आहहहहह ,,,(उसकी ऐसी मदहोशी भरी बात को सुनकर अंकित से रहा नहीं जा रहा था और वह जल्दी-जल्दी धक्का मारना शुरू कर दिया जिससे उसकी आह निकल जा रही थी,, उसकी बात सुनकर अंकित भी बोला,,,)

सच कहूं तो मैं भी कभी सोचा नहीं था कि तीन-तीन बच्चों की मां का बदन इतना खूबसूरत हो सकता है सच में तुम्हें कोई देख ले तो उसका लंड खड़ा हो जाए नंगी होने के बाद तो तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो तभी तो आज मेरी हालत खराब हो गई और तुम्हारी बुर किस उम्र में भी अंदर से कितनी गर्म है ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं बुर में नहीं बल्कि किसी भट्टी में अपना लंड डाल रहा हूं,,,, मेरी जगह कोई और होता तो अह तक उसका पानी निकल गया होता,,,,



तू बिल्कुल सच कह रहा है मैं भी हैरान हूं कि तेरा तक पानी नहीं निकला कसम से तू ही असली मर्द है जिसकी भी तेरी शादी होगी वह तो तुझे पाकर एकदम धन्य हो जाएगी,,,।

तुम धन्य हुई क्या मेरी जान,,,।

पूछ मत मेरे राजा की आज मैं कितनी खुश हूं अच्छा हुआ तेरे से मुलाकात होगी वरना असली सुख में कभी अपने जीवन में भोग ही नहीं पाती,,,,,आहहहहह आहहहहह ऊमममममम आहहहहहह मेरे राजा,,,,,


यह बात है तब तो तुम आज की चुदाई जिंदगी भर याद रखोगी,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित उसे करके अपनी बाहों में भरकर जोर-जोर से धक्के पर धक्का लगना शुरू कर दिया अब तो उसे औरत की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी उसके तेज धकको को वह सह नहीं पा रही थी उसके मुंह से आह आहहह की आवाज निकल रही थी और इस तरह की आवाज इस बात का सबूत था कि उसे बहुत मजा आ रहा था भले ही वह अंकित के धक्को को सह नहीं पा रही थी लेकिन जो आनंद उसे प्राप्त हो रहा था वह उसे पूरी तरह से मदहोश कर रहा था। यह चुदाई अंकित को भी जिंदगी भर याद रहने वाली थी वह कभी सोचा नहीं था किस तरह से किसी औरत को छोड़ने का सबसे प्राप्त होगा और वह भी बैंक कर्मचारी की,,,बुर का कसाव अंकित को भी मदहोश बना रहा था अंकित बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था मोटी मोटी जांघों से उसकी जांघें टकरा रही थी,,। कुछ देर तक किसी अवस्था में चुदाई करने के बाद धीरे से अंकित घुटनों के बल बैठ गया हालांकि अभी भी उसका लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था वह अपने लंड को बिल्कुल भी उसकी बुर से निकल नहीं रहा था और फिर आने पर रखा हुआ तकिया उठाकर वह उसकी गांड के नीचे लगाने लगा तो वह भी अपनी गांड को ऊपर उठा ले उसकी गांड थोड़ी सी ऊपर आ गई और इस अवस्था में अंकित उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर से लपेटकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, वह औरत अंकित के अद्भुत काम शैली को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी,,, आज तक उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह अच्छे-अच्छे का पानी निकाल देती है लेकिन आज उसके ही बेटे के उम्र का लड़का उसका पानी नीचोड़ रहा था। खिड़की से ठंडी ठंडी हवा कमरे में बराबर आ रही थी लेकिन फिर भी दोनों के बदन से पसीना टपक रहा था।

अंकित खेल में अच्छी तरह से माहिर हो चुका था इसलिए वह जानता था कि औरत को कैसे सुख दिया जाता है बिना थके बिना हारे,,,, तभी तो एक औरत मर्द की दीवानी हो जाती है,,,, तभी अंकित के धक्को को अपनी बुर की गहराई में महसूस करके उसका बदन मचलने लगा,,,,, उसकी आंखें बड़ी-बड़ी होने लगी और उसके चेहरे का रंग एकदम लाल होने लगा और वह बोली,,,,।

आहहहह आहहहहहह और जोर से जोर-जोर से धक्के लगा मेरे राजा मेरा निकलने वाला है मेरा होने वाला है मैं कभी सोचा नहीं था कि कोई जवान लड़का इस तरह से मेरी चुदाई करेगा मैं तो पागल हो जाऊंगी मेरा पानी निकलने वाला है,,,,,आहहहहहहहह जोर-जोर से मेरे राजा और जोर-जोर से फाड़ दे मेरी बुर को ,,भोसड़ा बना दे,,,आहहहहहहहह,,,
(अंकित समझ गया था किसका पानी निकलने वाला है यह झड़ने वाली है इसलिए उसका साथ देते हुए वह फिर से अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ के नीचे लेकर और उसे करके अपनी बाहों में भरकर अपनी कमर को जोर-जोर से उसकी बुर पर पटकने लगा और देखते ही देखे उसका बदन अंकीत की बाहों में अकड़ने लगा,,, और वह झड़ने लगी,,,,,, झड़ते समय वहां बेहद मासूम लग रही थी अंकित को उसे पर और ज्यादा प्यार आ रहा था वह उसके होठों पर अपने होठकर उसके फोटो का रसपान करते हुए उसके स्खलन का मजा ले रहा था,,,, हालांकि अंकित अपने धक्कों की गति को बिल्कुल भी कम नहीं किया था,,,, थोड़ी देर में उसका बदन एकदम तुमसे ढीला पड़ने लगा,,,, वह पूरी तरह से झड़ चुकी थी उसके बटन में दम नहीं रह गया,,, और झड़ने की वजह से उसकी बुर की चिकनाहट बढ़ चुकी थी और रगड़ का एहसास थोड़ा काम हो रहा था इसलिए अंकित भी कुछ पल के लिए अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाला और उसके ही पेटीकोट से उसकी बुर की मलाई को साफ करने लगा ताकि दोबारा लंड जाए तो रगड़ महसूस हो,,,, वह औरत अंकित की काबिलियत को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी एक औरत को खुश करने का तरीका वह अच्छी तरह से जानता था,,, इससे ज्यादा भला एक औरत मर्द से क्या चाहत रख सकती है,,, जो मर्द खुद ही एक औरत को अच्छी तरह से खुश करना जानता हो हर सुख देना जानता हो। अंकित पेटीकोट से अच्छे से उसकी बुर की मलाई साफ करने के बाद मुस्कुराता हुआ उसकी तरफ देख कर बोला।)


बस मेरी रानी अब पलट जाओ पीछे से तुम्हारी चुदाई करूंगा,,,,।
(अंकित की बात सुनकर उसे औरत को थोड़ा शंका हुआ कि वह पीछे से उसे अच्छी तरह से नहीं चोद पाएगा क्योंकि पीछे से उसकी गांड बड़ी-बड़ी होने के कारण लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई तक नहीं पहुंच पाता था अब तक तो उसके साथ ऐसा ही हो रहा था लेकिन वह कुछ बोली नहीं वह भी देखना चाहती थी कि अंकित क्या कर लेता है क्योंकि पीछे से करवाने में उसे भी बहुत मजा आता था लेकिन वह आज तक पीछे से असली सुख प्राप्त नहीं कर पाई थी और अंकित के कहते ही वह बिस्तर पर पलट गई और घोड़ी बन गई बिस्तर के किनारे अपनी दोनों टांग नीचे लटका कर वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में ऊपर उठा दी थी ,,,, इसकी भारी भरकम गोल-गोल गांड को तोप की तरह उठी हुई देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह उसकी गोरी गोरी गांड पर दो-चार शपथ लगाकर उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,, वह औरत अंकित की हरकत पर कुछ बोल नहीं पाई और अंकित अपने लंड पर अपना थूक लगाकर उसे गीला कर लिया और थोड़ा सा थुक उसके गुलाबी छेद पर भी लगा दिया,,,, और एक नए अनुभव के लिए पीछे से वह अपने लंड को उसकी गुलाबी बुर में डालने लगा लंड फिर से धीरे-धीरे अंदर की तरफ सड़क गया और अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर फिर से धक्का लगना शुरू कर दिया वह औरत एकदम से हैरान हो गई क्योंकि पीछे से भी बड़े आराम से उसका लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा था बल्कि हर एक धक्का उसके बच्चेदानी से टकरा रहा था,,,, उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि आज उसके बरसों की अभिलाषा भी पूरी होने वाली थी वह फिर से मदहोश और उत्तेजित होने लगी,,,,।

उसे खुश करने में अंकित कोई भी कसर बाकी नहीं रख रहा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर चउत लगाता हुआ वह आगे बढ़ रहा था,,,, वह रह रहकर धीरे से अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और इस समय इस अवस्था में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां लगाम का काम कर रही थी और उसे औरत को भी मजा आ रहा था,,,,, देखते ही देखते घड़ी में तीन का समय हो चुका था समय इतनी जल्दी कैसे गुजर गया दोनों को पता ही नहीं चल रहा था वाकई में चुदाई का जो आनंद है वह किसी और चीज में नहीं मिलता जिसमें इंसान अपना पूरा वक्त भूल जाता है और बस सुख प्राप्त करने में लगा रहता है और यही इस समय अंकित और वह औरत कर रही थी। अंकित पीछे से पूरी तरह से उस औरत पर छा चुका था दोनों को देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे घोड़ी के ऊपर घोड़ा चढ़ गया हो,,, गरमा गरम शिसकारी की आवाज फिर से कमरे में गुंजने लगी,,,, तकरीबन इस अवस्था में 25 मिनट की और जमकर चुदाई करने के बाद अंकित और वह औरत एक साथ झड़ने लगे,,,,, झड़ने के बाद अंकित भी पस्त हो चुका था और उसके ऊपर ही पसर गया,,,,,,,, उसे औरत ने तो जिंदगी में आज अद्भुत सुख की प्राप्ति की थी वह कभी सोचा नहीं थी कि चुदवाने में वाकई में इतना अत्यधिक आनंद मिलता है आज कुछ ज्यादा ही उसे मजा मिल गया था,,,,,।

थोड़ी देर बाद अंकित अपने लंड को उसकी बुर में से बाहर निकाला जो कि अभी भी खड़ा ही था ज्यादा लचक पन उसमें नहीं आया था यह देखकर तो वह और भी ज्यादा हैरान हो गई थी,,, अंकित धीरे से बाथरूम में चला गया और पेशाब करने लगा तब तक वह सीधी हुई और पीठ के बल लेट कर गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,, पेशाब करने के बाद अंकित बाथरूम के दरवाजे तक आया और दीवार का सहारा लेकर मुस्कुरा कर उसे औरत की तरफ देखने लगा वह भी अंकित की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी,,, अंकित अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा और बोला।

बताओ ऐसा मजा कभी मिला था?

बिल्कुल भी नहीं,,, मैं तो कभी सोचा भी नहीं थी कि इसमें इतना ज्यादा मजा भी आता होगा जितना मजा आता था बस उसने ही लेती थी लेकिन आज शायद मेरी औकात से ज्यादा मुझे आनंद मिल रहा है,,,।

समय नहीं है नहीं तो आज एक ही दिन में तुम्हें चांद तारे सब दिखा देता,,,(ऐसा कहते हुए वह बिस्तर के पास आया और पीठ के बल लेट गया,,, मौका देखकर उसे औरत ने भी हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ली और उसे हल्के हल्के हिलाते हुए बोली,,,)

तुम सच कह रहे हो हमें थोड़ा और पहले मिलना चाहिए था 5:00 बजे तो मैं यहां से चली जाऊंगी और 3:30 बज चुके हैं,,,।

तुम ही सोचो में 11:00 बजे यहां पर आया हूं और 3:30 बज चुके हैं इस बीच सिर्फ तुम्हारी एक ही बार चुदाई हुई है,,, और एक ही बार में तुम पूरी तरह से मस्त हो गई हो अगर पूरा दिन मिले तो सोचो क्या हो जाएगा,,,,।

मैं भी यही सोच रही हूं। और पछता भी रही हूं इतना अच्छा मौका मिला है और आज ही मुझे जाना भी है,,,।

आज रात तक नहीं रुक सकती,,,

बिल्कुल भी नहीं,,,(लंड को हल्के हल्के हिलाने से वह पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था एकदम कड़क हो गया था,,,, उसकी गर्मी और उसके कडप्पन को अपनी हथेली में महसूस करके एक बार फिर से वह मदहोश होने लगी और इससे आगे कुछ बोले बिना ही वह एकदम से उठकर बैठ गई और झुक कर लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, अंकित फिर से मस्त होने लगा और वह हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,, दोनों फिर से मदहोश होने लगे लेकिन इस बार वह औरत पूरी तरह से कमान संभाल लेना चाहती थी,,, और वह खुद अंकित के लंड पर सवार होके और उसके कंधे पर हाथ रखकर अपनी गांड को जोर-जोर से उसके लंड पर पटकना शुरू कर दी,,, अंकित को इससे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता था तरबूज चाकू पर गिरे या चाकू की तरबूज पर,कटने वाला तो तरबूज ही था और इसके बाद मजा ही मजा उसे औरत की इस क्रिया से भी अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी अंकित उसकी कमर पकड़ लेता था तो कभी उसकी चूची दबा देता था तो कभी उसे अपनी तरफ झुक कर उसके होठों को चूमने लगता था और यह सिलसिला तकरीबन 15 मिनट तक और चला और दोनों एक बार फिर से झड़ गए,,, समय भी काफी हो चुका था अंकित को अपने होटल पहुंचना था वरना उसकी मां परेशान हो जाती क्योंकि वह तीन-चार घंटे से अपने होटल से गायब था बिना बताए,,,।

वह औरत बाथरूम में चली गई और पेशाब करने लगी उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज अंकित को साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर वह मुस्कुरा रहा था इसके बाद वह बाहर निकली और कपड़े पहने लगी अंकित तब तक कपड़े पहन चुका था,,,, अंकित बात ही बात में उससे पूछा,,,।

यहां पर कोई अच्छी जगह है घूमने लायक,,,,।

हां जरूर है यहां से तकरीबन पांच छः किलोमीटर की दूरी पर एक झरना है जिसे देखने के लिए लोग ऊपर तक जाते हैं वहां से खूबसूरत नजारा दिखाते हैं बहुत खूबसूरत जगह भी है तुम घूमना चाहो तो वहां घूम सकते हो मुझे तो आज जाना है वरना मैं तुम्हें घुमा देती,,,।


कोई बात नहीं,,,, तुमने तो मुझे स्वर्ग का सुख प्रदान की हो,,,,।
(यह सुनकर वह मुस्कुराने लगी अंकित गई मुस्कुरा दिया और फिर जाते-जाते उसे एक बार फिर से अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का चुंबन किया और वहां से निकल गया,,, जब अपने होटल के कमरे में पहुंचा तो उसकी मां बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी उसे देखते ही सवालों की झड़ी लगा दी अंकित एकदम शांत होकर जवाब देते हुए बोला,,,)

तुम सो रही थी इसलिए मैं तुम्हें जगाना ठीक नहीं समझा और इधर-उधर घूमता रहा मुझे एक नहीं बताया कि यहां से 5 से 6 किमी की दूरी पर एक खूबसूरत चलना है वहां पर लोग घूमने के लिए जाते हैं हम लोगों को भी वही चलना चाहिए घूमने के लिए,,,।

अब आज तो नहीं हो पाएगा कल चलते हैं,,,।

कोई बात नहीं चल चलेंगे,,, तुम खाना खाई कि नहीं,,,।

खाना नहीं खाए बस चाय नाश्ता की हुं,,,।

अभी खाना है तो मंगवा लो,,,।

नहीं नहीं ऐसे भी मुझे अभी भूख नहीं है अब रात को ही खाएंगे,,,,।
(इतना कहकर बा बालकनी में आकर कुर्सी पर बैठकर बाहर का नजारा देखने लगी और अंकित भी पास में ही पड़ी कुर्सी पर जाकर बैठ गया उसकी मां को सख्त नहीं हुआ कि यह तीन-चार घंटे से कहां था किसके साथ था,)
 
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Ajju Landwalia

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रात भर गांड मराने के बाद सुगंधा की नींद खुल गई सुबह के 6:00 बजे रहे थे वैसे भी कोई काम नहीं था इसलिए जल्दी उठने का कोई मतलब नहीं था 6:00 बजे आंख खुलने के बावजूद भी वह कुछ देर तक यूं ही बिस्तर पर लेटी रही,,, अंकित अभी भी उसकी बाहों में गहरी नींद में सो रहा था। रात भर जमकर मेहनत जो उसने किया था,,, सुगंधा स्नेह भरी नजरों से अपने बेटे को देख रही थी,,, कुछ महीने पहले उसने कभी सोचा भी नहीं थी कि उसका रिश्ता अपने ही बेटे के साथ इस तरह से गहरा हो जाएगा,,, इस बात को वह भी मानती थी कि वह पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी शर्म का उसकी आंखों में अब नामोनिशान नहीं था क्योंकि वह जानती थी शर्म करने से कोई फायदा नहीं है बेशर्म बनने के बाद ही उसे जीवन का असली सुख प्राप्त हुआ था और इस सुख को वह खोने नहीं देना चाहती थी। रात के बारे में वह सोच रही थी उसका बेटा कितना शैतान हो चुका था उसे जीवन का हर सुख दे भी रहा था और ले भी रहा था,,, वह सोची नहीं थी कि उसके बदन का अनमोल अंग का लेने के बावजूद भी वह इस कदर से उसकी गांड मारेगा,,, उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा है उसके गांड के छेद के लिए जिद करेगा क्योंकि अक्सर मर्द औरत की बुर के लिए ही पागल होते हैं लेकिन अब उसे एहसास होने लगा था कि मर्द की प्यास केवल औरत की बुर से नहीं मिटती,, बल्कि उसे एहसास होने लगा था कि औरत के बदन का हर एक छेद मर्दों के लिए प्यास बुझाने का साधन होता है,,,, अपने बेटे की जीद को देखकर वह इस समय मुस्कुरा रही थी।

देखते ही देखते घड़ी में 6:30 बज चुके थे अभी भी अंकित गहरी नींद में सो रहा था चादर के अंदर मां बेटे दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में थे,,,, सुगंधा को अपनी गांड के छेद में हल्का-हल्का दर्द महसूस हो रहा था इसका कारण वह अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी उसके बेटे का लंड कोई साधारण लंड नहीं था जिसकी वजह से उसे अपनी गांड के छेद में दर्द महसूस हो रहा था इतना तो बुरे में डलवाने पर भी दर्द नहीं हुआ था। वह धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और आईने में अपने आप को देखने लगी नग्न अवस्था में वह रूप की रानी लग रही थी अपनी कमर पर हाथ रखकर अपने बदन को इधर-उधर घूमाकर अच्छी तरह से देख लेने के बाद वह बाथरूम के अंदर घुस गई,,,, और सौच करने लगी अब उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में गांड मराने में कितना दर्द होता है रात को तो उसे भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस समय सौच करते समय उसके गांड में कुछ ज्यादा ही दर्द हो रहा था,,,, जैसे तैसे करके वह काम निपटा ली,,, लेकिन अब उसे दर्द ज्यादा कर रहा था चलने में भी तकलीफ हो रही थी। वह नहा कर अपने नंगे बदन पर टावर लपेटकर बाहर आ गई तब तक अंकित भी जा चुका था अपनी मां को टावल में देखकर वह मुस्कुराते हुए बोला,,,।

गुड मॉर्निंग मम्मी,,,, कैसी गुजरी रात मजा आ गया ना,,,।

हरामजादे मजा तो आ गया लेकिन तूने मेरी गांड की हालत खराब कर दिया है।

क्यों क्याहो गया,,,,?

गांड में बहुत जोर का दर्द हो रहा है चला भी नहीं जा रहा है,,,,।

कोई बात नहीं शुरू शुरू में ऐसा होता है दो-चार घंटे में एकदम सही हो जाएगा रात को फिर गांड मरवाने लायक हो जाओगी,,,।

इस बारे में अब सोचना भी मत,,,, अब तो तुझे गांड के छेद पर हाथ भी लगाने नहीं दूंगी,,,,

यह बात है,,, चेहरे से मत करना नहीं तो अभी फिर से पटक कर गांड मार लूंगा,,,,।

तुझे क्या मैं मजाक कर रही हूं सच में बहुत दर्द कर रहा है,,,,।

अच्छा कोई बात नहीं मेरी जान कुछ दिन तक उस छेंद के बारे में सोचूंगा भी नहीं।

चल जाकर तु भी नहा ले,,

ठीक है,,, (इतना कहकर हुआ अभी बाथरुम में चला गया और थोड़ी देर में नहा कर बाहर आ गया,,,, फोन करके दोनों ने नाश्ता मंगवाया,,,, नाश्ता करने के बाद सुगंधा फिर से बिस्तर पर लेट कर आराम करने लगी,,,, उसे सच में बहुत दर्द कर रहा था ठीक से चला नहीं जा रहा था,,, जिसकी वजह से अभी उसे कहीं जाने की इच्छा नहीं हो रही थी अंकित भी वहीं बैठ रहा और अपनी मां से बातचीत करता है देखते ही देखते फिर से दोनों सो गए तकरीबन 11:00 बजे फिर से अंकित की आंख खुली तो वह देखा उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी,,,, वह धीरे से उठाकर अपनी मां को बिना बताए तैयार होकर कमरे से बाहर निकल गया क्योंकि आज उसे उसे अनजान औरतों से मिलना था जिसने उसे लंच के लिए बलाई अपने होटल से निकाल कर वह सड़क पर चहल कदमी करता हुआ आगे बढ़ गया,,, प्रचंड गर्मी के महीने में भी यहां पर मौसम खुशनुमा था या देखकर अंकित को भी हैरानी हो रही थी लेकिन उसे बहुत अच्छा लग रहा था इस तरह का मौसम उसके शहर में बहुत कम ही देखने को मिलता है,,, आते जाते लोगों से अच्छे लग रहे थे ज्यादातर लोग बाहर के ही थे,,, अंकित की नजर खूबसूरत लड़की हो पर काम खूबसूरत औरतों पर ज्यादा चली जा रही थी क्योंकि उसका मां अक्सर औरतों पर ज्यादा जाता था खास करके अंकित को औरतों की बड़ी-बड़ी गांड आकर्षित करती थी साड़ी में उभार ली हुई बड़ी-बड़ी चूचियां उसके मुंह में पानी ला देती थी और यही हाल था जब वह चाय पीते हुए उसे अंजान औरत को देखा था पल भर में ही उस औरत को भोगने का ख्याल उसके मन में आ गया था,,, और उसकी किस्मत भी इतनी तेज थी कि आज उसके साथ खाना खाने के लिए जा रहा था वैसे तो उसे पक्का यकीन नहीं था कि खाना खाने के बाद उसे औरत के साथ उसका कोई रिश्ता बन पाएगा या नहीं लेकिन फिर भी मन में उम्मीद की किरण बनी हुई थी और यही उम्मीद की किरण लिए हुए वह उसे औरत से मिलने के लिए चला जा रहा था।

उसे औरत ने जिस होटल के बारे में बताया था उसे होटल के सामने अंकित खड़ा हो चुका था पहले इधर-उधर देखने के बाद जब उसे वह औरत कहीं दिखाई नहीं दी तो वह होटल के अंदर प्रवेश करने लगा और उसकी किस्मत अच्छी थी कि सामने ही टेबल पर बैठकर चाय पीते हुए वह औरत उसे दिखाई दे गई और उसे औरत को देखते ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और यही हाल उसे औरत का भी था अंकित को देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी थी शायद वह अंकित का ही इंतजार कर रही थी,,,, वह और जल्दी से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और हाथ दिखा कर उसे अपनी तरफ बुलाने लगी अंकित को पक्का यकीन हो गया कि वह भी उसका इंतजार कर रही थी उसके पास जाते ही वह उसे नमस्ते किया और पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गया,, होटल के रेस्टोरेंट में काफी भीड़ थी क्योंकि यह खाने का समय था और सब लोग अपने-अपने पसंद का खाना खा रहे थे,,,, मुस्कुराते हुए उसे अंजान औरत ने अंकित से बोली।

मुझे तो उम्मीद नहीं था कि तुम इधर आओगे,,,


आटा कैसे नहीं आपने खाने के लिए बुलाई थी और मुझे भूख लगी और आपकी याद आ गई,,,।
(अंकित की हाजिर जवाबी सुनकर वह औरत मुस्कुराने लगे और बोली)

बड़े हाजिर जवाबी हो,,

ऐसा कुछ भी नहीं है बस आपको देखकर इस तरह के जवाब निकल जा रहे हैं।

यह बात है,,,, चलो अच्छा बताओ क्या खाओगे तुम्हारी पसंद का खाना मंगाते हैं,,,,

नहीं नहीं ऐसा कैसे चलेगा आखिरकार अपने आमंत्रित दिया है तो आपके ही पसंद का मैं खाऊंगा मैं अपनी तरफ से कुछ भी नहीं बताने वाला कि मैं क्या खाना चाहता हूं आप जो कुछ भी खिलाओगी मैं खा लूंगा,,।

बात करने में तो उस्ताद हो,,,, बातों में कोई तुम्हें हर नहीं सकता,,,। अच्छा चलो मुझे जो अच्छा लगता है वही मंगा लेती हूं लेकिन यहां नहीं,,,(कुर्सी पर दोनों हाथ रखकर इधर-उधर देखते हुए वह बोली)

फिर कहां,,,,?


यहां काफी भी है मेरे कमरे में ही चलते हैं वहां आराम से बात करते हुए खाना खाएंगे यहां पर ठीक से बात नहीं कर सकते देख नहीं रहे हो शोर शराब कितना हो रहा है,,,।

आप बात तो सही कह रही हो तो चलिए फिर आपके कमरे पर ही चलते हैं,,,,।
(इतना कहकर दोनों उठकर खड़े हो गए वह अनजान औरतों जल्दी से काउंटर पर गई और अपना आर्डर बोलकर अंकित को साथ लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी वह सीढ़ियां चढ़ रही थी कई हुई साड़ी में उसकी मस्त भराव दार गांड अंकित के होश उड़ा रही थी अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखा ही रह गया था जैसे-जैसे वह कदम उठाकर सीडीओ पर रख रही थी वैसे-वैसे उसकी भारी भरकम गांड का कटाव उसके लंड की अकड़ को बढ़ाना शुरू कर दिया था,,,, अंकित के मुंह में पानी आ रहा था देखते ही देखते दोनों होटल के कमरे के पास पहुंच चुके थे। अंकित के मन में लहर उठ रही थी,, उसे अंजान औरत ने कमरे का दरवाजा खोली और कमरे में प्रवेश करने लगी पीछे-पीछे अंकित भी कमरे में प्रवेश कर गया,,, उसने दरवाजा बंद कर दी,,,, अंकित को इस होटल का कमरा भी काफी खूबसूरत लग रहा था हर एक समान बड़े सलीके से रखी हुई थी किंग साइज बेड था दो कुर्सियां थी एक मैज रखी हुई थी और एक खूबसूरत खिड़की थी जिस पर परदे लगे हुए थे और उसे औरत ने पर्दे को खोलकर कुदरत धूप को कमरे में आने का आमंत्रण दे दी और कुर्सी पर बैठ गई खाली पड़ी कुर्सी पर अंकित भी बैठ गया और दोनों आपस में बातचीत करने लगे,,,, अंकित और वह अनजान औरत दोनों आमने-सामने बैठे हुए थे,,, मैज पर एक छोटा सा गुलदस्ता रखा हुआ था,,,।

बातचीत के दौरान उस औरत ने बताया कि वह बैंक में काम करती है कल वह अपने बारे में पूरी जानकारी नहीं दि थी लेकिन आज सब कुछ बताने लगी थी,,,, अंकित उसकी बातों को कम उसके खूबसूरत चेहरे पर ज्यादा ध्यान दे रहा था लाल-लाल भरे हुए होंठ देखकर ही अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर उसके होठों का रसपान करने के लिए तड़प रहा था,,, आसमानी रंग की साड़ी में वह आसमान से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी,,, लॉ कट ब्लाउज में इसकी भारी भरकम चूचियों की गहरी लकीर किसी झरने की घाटी से काम नहीं लग रही थी जिसमें अंकित का मन डूब जाने को कर रहा था। अंकित की नजर बार-बार उसकी चूचियों पर चली जा रही थी जिसका एहसास उसे अंजान औरत को हो रहा था और वह बार-बार अपनी साड़ी को दुरुस्त करने की कोशिश भी कर रही थी लेकिन पारदर्शी साड़ी में वह ज्यादा कुछ दुरुस्त करने में सामर्थ नहीं थी और उसे इस बात से हैरानी भी हो रही थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसकी चूचियों की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा था। लेकिन इस हैरानी के साथ-साथ उसे अपनी जवानी पर गर्व भी महसूस हो रहा था क्योंकि वह तीन बच्चों की मां थी और तीनों जवानी की दहाने पर कदम रख चुके थे उनमें से एक का तो दो-तीन महीने बाद विवाह तय करना था मतलब की 3 महीने बाद वह सास बन जानी थी और इसके बावजूद भी एक जवान लड़का उसे प्यासी नजरों से घर रहा था भला इससे बड़ी गर्व की बात उसके लिए क्या हो सकती थी ‌

अंकित भी अपने बारे में सब कुछ उसे बताता चला गया लेकिन सच्चाई कम झूठ ज्यादा था वह अपने बारे में कुछ भी सच नहीं बोल रहा था क्योंकि वह अपने चरित्र को परदे मे हीं रखना चाहता था उसने उसे औरत को अभी नहीं बताया था कि यहां पर वह अपनी मां के साथ घूमने आया है क्योंकि,, वह नहीं चाहता था कि वह औरत उसे शंका की नजर से देखें,,,, बातचीत का दौर चल ही रहा था कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी और दस्तक की आवाज सुनकर वह औरत अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

लगता है खाना आ गया,,,,,(और इतना कहकर वह दरवाजे की तरफ कदम आगे बढ़ा दी,,, दरवाजा खोली तो सामने बैटरी था जो खाना लेकर खड़ा था और मुस्कुरा था वह कमरे में दाखिल हुआ मैच पर खान की प्लेट रखकर औपचारिकता निभा कर वहां से चला गया,,,,, खाना काफी मसालेदार दिखाई दे रहा था साथ में चपाती थी सलाद था और लस्सी का बड़ा-बड़ा गिलास भी था लेकिन साथ में,,, बियर की बोतल भी थी जिसे देखकर अंकित को हैरानी हुई और वह बियर की बोतल की तरफ देखकर उसे औरत की तरफ देखने लगा जो की कुर्सी पर बैठते हुए मुस्कुराते हुए बोली,,,)

चिंता मत करो यार ज्यादा कुछ नहीं ठंडी बीयर है कभी कबार जब मैं इस तरह से घूमने जाती हूं तो अकेले रहती हूं तो पी लेती हूं बड़ा अच्छा लगता है।

कोई तुम्हें खत नहीं,,,।

किसी को पता ही नहीं है तो रहेगा क्या मैं तुमसे कहीं तो घर पर कभी नहीं पीती बाहर कहीं जाती हूं तभी और अकेले रहती हूं तभी अपना यह शौक पूरा कर लेती हूं,,,,‌


नशा होता होगा।

ज्यादा खास नहीं बस हल्की सी खुमारी छाने लगती है,,,,।

तुम भी ले सकते हो थोड़ा सा,,,।

नहीं नहीं बिल्कुल नहीं,,,,,।

चलो कोई बात नहीं तो तुम लस्सी पी लेना,,,।
(और इतना कहकर दोनों खाना ,खाना शुरू कर दिए,,, साथ में बातचीत का दौर भी शुरू हो चुका था अंकित को उसे औरत से बातचीत करने में बड़ा मजा आ रहा था वह औरत भी बड़ी खुश मिजाज थी,,, बात करते हुए बीच-बीच में वह बियर के केन को मुंह से लगाकर घूंट भर भर कर बियर भी पी रही थी वैसे तो अंकित को बड़ा अजीब लग रहा था लेकिन वह औरत जिस अंदाज से पी रही थी कुछ पल के लिए तो उसका भी मन मचल उठा कि वह भी एक बार टेस्ट करके देखे लेकिन फिर अपने मन को उसने मना लिया,,,,,, अंकित धीरे-धीरे लस्सी पी रहा था खाना खा रहा था,,,,, उस औरत ने तो लस्सी नहीं पी लेकिन जब देखी थी अंकित की लस्सी खत्म हो चुका है तो वह खुद अपनी लस्सी उसकी तरफ आगे बढ़ा दी,,,, पहले तो अंकित इनकार करता रहा क्योंकि वह उसके हिस्से की लस्सी थी वह उसे बार-बार उसे पीने के लिए कहता था लेकिन वह मना कर रही थी और वह अपने हिस्से की लस्सी अंकित को पिलाना चाहती थी और अंकित का मान रखते हुए वह लस्सी के गिलास को अपने होठों से लगाकर बस एक घूंट लस्सी पीकर वह अंकित की तरफ ग्लास बढ़ाते हुए बोली,,,)

लो बस तुम्हारी बात मान ली लेकिन अब तुम्हें भी मेरी बात माननी नहीं होगी लोग यह भी लस्सी पी जाओ क्योंकि मैं बियर पी रही हूं ना इसलिए लस्सी नहीं पी पाऊंगी,,,,।
(उस औरत का अंदाज देखकर और उसकी झूठी लस्सी को खुद पीने के बारे में सोचकर अंकित का लंड खड़ा होने लगा था वह मदहोश हो रहा था वाकई में वह औरत काफी दिलचस्प खूबसूरती के साथ-साथ काफी सुलझी हुई भी थी अंकित को इस तरह की औरतें काफी पसंद थी,,,, उस औरत की बात मानते हुए मुस्कुरा कर अंकित उसके हाथ से लस्सी का क्लास ले लिया लेकिन इस दौरान उसकी उंगली उसे औरत की उंगली से स्पर्श हो गई जिससे अंकित के बदन में हलचल सी मच गई और यह ऐसा शायद उसे औरत के तन बदन में भी हो गया वह भी शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,, अंकित उसकी झूठी लस्सी को पीने लगा इस बात का अहसास होते ही उसे अनजान औरतों के तन बदन में हलचल सी होने लगी,,,,, क्योंकि वह सोची नहीं थी कि उसकी झूठी लस्सी वह पिएगा लेकिन बियर की खुमारी उसकी आंखों में उसके दिलों दिमाग पर छाने लगी थी और न जाने क्यों उसे इस समय एक जवान लड़के के सामने उत्तेजना महसूस होने लगी थी। बातचीत के दौरान उसने अपना नाम भी बताइ अनामिका,,,, जिसे सुनकर अंकित बोला,,,)

वह आपका नाम तो बेहद खूबसूरत है अनामिका मैं पहली बार इस तरह का नाम सुन रहा हूं मुझे बहुत अच्छा लगा आपका नाम और मेरा नाम अंकित है,,,।

अंकित,,,,, वाकई में तुम्हारा नाम में काफी गहराई है तुमसे मिलने के बाद किसी के मन में भी तुम अंकित हो जाओगे ऐसा तुम्हारा चरित्र है,,, मुझे भी तुम्हारा नाम बहुत अच्छा लगा,,,।
(खाना खत्म हो चुका था दोनों ने पेट भर के खाना खाया था लेकिन इस समय अंकित से ज्यादा खुमारी उसे अंजान औरत की आंखों में और उसके बदन में छाई हुई थी वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और अंकित से बोली,,,)


तुम यही बैठो मैं पेशाब करके आती हूं,,,,।(बेझिझक बिना शर्माए उसऔरत ने पेशाब करने वाली बात बोली थी जिसकी अंकित को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी लेकिन उसके मुझे पेशाब करने वाली बात सुनकर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था बाथरूम भी ठीक कुर्सी के पीछे ही था जैसा कि उसके होटल के कमरे में था वह औरत बाथरूम का दरवाजा खोले और बाथरूम के अंदर घुस गई दरवाजा तो उसने बंद की लेकिन दरवाजे की कड़ी नहीं लगे जो की दरवाजा अपने आप ही हल्का सा फिर से खुल गया अंकित सो रहा था कि दरवाजा बंद हो गया इसलिए दरवाजे की तरफ अपने सर घूमाकर देखने लगा था लेकिन उसकी हालत तब खराब हो गई जब देखा कि दरवाजा तकरीबन आधा फीट जितना खुल चुका था,,, और वह औरत उसे साफ दिखाई दे रही थी,,, अब अंकित के मन में गुदगुदी होने लगी वह औरत अपने ही आप में मस्त थी उसे यह पता भी था कि नहीं के दरवाजा खुला है या बंद है वह अपनी साड़ी दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी थी,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि उसे यह नजारा देखना चाहिए कि नहीं देखना चाहिए बड़े कशमकश में उसका मन भरा पड़ा था,,,, क्योंकि उसे औरत के मन में क्या चल रहा है इस बात को अंकित नहीं जानता था,,,, लेकिन अंकित तो अंकित था औरतों के मन में जगह बनाना उसे अच्छी तरह से आता था,,,, अगले पल के खूबसूरत नजारे को देखे बिना उसका मन मानने वाला भी नहीं था। बाथरूम के अंदर वह औरत का मुंह अभी दरवाजे की तरफ था,,,,, अंकित जानता था कि ईस अवस्था में अगर वह बैठेगी तो उसे ज्यादा कुछ खास दिखाई नहीं देगा,,,, क्योंकि वह कुर्सी पर बैठा हुआ था और वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठेगी, साड़ी की वजह से दोनों टांगों के बीच की उसकी पतली दरार दिखाई देने वाली नहीं थी लेकिन फिर भी अंकित के लिए इतना ही बहुत था कि वह उसकी आंखों के सामने बैठकर पेशाब करने जा रही थी।

अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, उम्र दराज होने के बावजूद भी पल की खूबसूरती लिए हुए थी वह, मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करने का हर एक अंग लाजवाब और उठाव लिए हुए था। वह साड़ी अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे उठा रही थी आंखों में अजीब सी खुमारी छाई हुई थी,,, तभी अचानक वह नजर उठाकर अंकित की तरफ देखने लगी अंकित की नजर उसकी नजर से मिल गई दोनों की नजरे आपस में टकराई अंकित तो घबरा गया लेकिन वह मुस्कुरा दी,,,, उसकी मुस्कुराहट अंकित के लिए हरी बत्ती का संकेत था अंकित मन ही मन एकदम से प्रसन्न हो गया क्योंकि उसकी मुस्कुराहट साफ बता रही थी कि वह क्या चाहती है और मुस्कुराने के बाद वह तुरंत दूसरी तरफ घूम गई साड़ी को इस तरह से पकड़े हुए और उनकी समझ गया कि आप उसे क्या दिखाने वाला है उसकी हालत है तुमसे खराब हो गई उसका मन एकदम से मदहोश होने लगा तकरीबन तीन फीट की दूरी पर ही बाथरूम के अंदर एक जवान खूबसूरत औरत हालांकि जवान तो नहीं कह सकते लेकिन जिस तरह से उसकी कद काठी और बदन की बनावट थी जवान औरतों को पानी पिला दे इस तरह की उसकी जवानी निखरी हुई थी,,,, वह अब पेशाब करनेवाली थी,,,, अंकित की जगह कोई भी होता तो उसका भी मन मदहोश हो जाता उसे औरत को पाने के लिए उसका मन मचल उठता और यही अंकित का भी हाल हो रहा था,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा पहले उसे औरत का मुंह उसकी तरफ था लेकिन अब उसकी पीठ उसकी तरफ हो चुकी थी,,, अंकित समझ गया था कि बियर का नशा उसकी आंखों में पूरी तरह से मदहोशी का रस घोल रहा था वह इस बात से अनजान बिल्कुल भी नहीं है कि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है वरना उसे देखकर मुस्कुराती नहीं।

साड़ी धीरे-धीरे उठने लगी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे खूबसूरत नजारे के ऊपर से पर्दा उठ रहा हूं ताकि दर्शक गण उसे अच्छी तरह से देख सके देखते ही देखते उसकी मोटी मोटी जांघें उजागर हो गई,,,, मक्खन जैसी मोटी मोटी केले के तने की जैसी जांघों को देखकर अंकित का मन मचाने लगा उसका ईमान डोलने लगा,,, सांसों की गति उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं थी यही हालत उस औरत की भी हो रही थी उसकी सांसों की गति भी भारी चल रही थी,,, देखते देखते वह अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठाती और कमर तक साड़ी उठते ही उसकी भारी भरकम गोलाई लिए हुए गांड मरुन रंग की पेंटी में कैद नजर आने लगी,,,, और वह अपनी मरुन रंग की पेंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, अंकित का मन कर रहा था किसी समय बाथरूम में घुस जाए और अपनी मनमानी कर ले लेकिन अभी भी वह अपने आप को संभाले हुए था अपने मां पर काबू किए हुए था क्योंकि उसे पक्का यकीन नहीं था कि वह क्या चाहती है उसे ऐसा लग रहा था कि शायद हो सकता है कि बियर के नशे में हुआ ऐसा कर रही हो और अगर वह अंदर जाएगा तो अगर उसे ऐसा कुछ महसूस ना हो और वह शोर मचा दे तब तो लेने के देने पड़ जाएंगे इसलिए वह अपने मन को नियंत्रण में रखकर वहीं बैठे रहकर उस नजारे को देखने लगा,,, पेंटी धीरे-धीरे उतर रही थी,,,, घुटनों तक आने के बजाय वह पूरी तरह से अपनी टांगों में से पेंटी को उतार कर एक तरफ रख दी थी साड़ी के अंदर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, यह सब अंकित को पूरी तरह से हैरान कर दे रहा था कि आखिरकार उसने अपनी पैंटी पूरी तरह से निकल क्यों दी,,,,। फिर देखते ही देखते हो नीचे बैठ गई पेशाब करने के लिए उसकी गोल-गोल नंगी गांड मक्खन जैसी गोराई लिए हुए पूरे बाथरुम में अपनी आप अभी कह रही थी और अंकित की आंखों की चमक के साथ-साथ उसकी वासना को भी बढ़ा रही थी।

अगले ही पल उसकी बुर से सिटी की मधुर आवाज सुनाई देने लगी जिसका मतलब साथ था कि उसके बुरे से पेशाब की धार फूट रही थी अंकित यह मधुर ध्वनि सुनकर पूरी तरह से मचल उठा मदहोश हो गया उसका लंड इस कदर कड़क हो गया कि मानो जैसे पेंट फाड़ कर बाहर आ जाएगा,,, अंकित का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था,,,,, और वह औरत अपने हाथ को अपनी नंगी गांड पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगी और नजर घूमर अंकित की तरफ देखने लगी एक बार फिर से दोनों की नजर आपस में टकराई लेकिन इस बार दोनों की आंखों में वासना दिखाई दे रहा था शर्म बिल्कुल भी नहीं थी,,, दोनों की आंखों में मदहोशी का नशा छाया हुआ था दोनों एक दूसरे की आंखों में डुब जाना चाहते थे,,,, वह अपनी गांड को सहलाते हुए पेशाब कर रही थी और अंकित को अपनी निगाहों से घायल कर रही थी,,, उसकी इस अदाकारी मदहोशी भरी हरकत से अंकित चारों खाने चित हो गया था,,, उसे अब समझ में आ गया था कि वह औरत क्या चाहती है,,, फिर भी वह पहला मौका उस औरत को ही देना चाहता था। दोनों के बीच नैन मटक्का का पूरी तरह से जारी था,,,, देखते ही देखते वह औरत पेशाब कर चुकी थी,, वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई,,,, और फिर बाथरूम से बाहर आ गई,,,, वह मुस्कुरा रही थी उसकी आंखों में चमक दिखाई दे रही थी और यह चमक कोई आम चमक रही थी बल्कि वासना की चमक थी मदहोशी की चमक थी ,किसी को पाने की लालसा थी।

अंकित उसको आजमाना चाहता था देखना चाहता था कि वह क्या करती है इसलिए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और बोला,,,।

खाना खिलाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया अब मुझे चलना चाहिए,,,,,।

बेवकूफ हो क्या,,,,?


बेवकूफ मैं कुछ समझा नहीं,,,!(आश्चर्य जताते हुए अंकित बोला,,,)

इसमें तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है तुम्हारी उम्र का दोस्त है कि तुम कुछ समझ नहीं पा रहे हो अगर थोड़े और बड़े होते तो शायद समझ गए होते,,,।
(अंकीत समझ गया था कि वह किस बारे में बात कर रही है,,, लेकिन फिर भी वह कुछ बोला नहीं,,, और शायद उसने अच्छा ही किया कुछ ना बोलकर क्योंकि वह एकदम से अंकित के कार्यवाही और उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच कर उसके होठों पर अपने होंठ रख दी और एकदम से मस्त हो गई,,,, अंकित तो पहले से ही एकदम उत्तेजित होता वाला था उसे औरत की हरकत को देखा करो अभी कहां पीछे हटने वाला था वह भी तुरंत अपना एक हाथ उसकी कमर में डाला उसे भी कस के अपनी तरफ खींच लिया पेट में बना तंबू साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगा जिसका एहसास उसे पागल बनाने लगा और साथ ही अंकित उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसके होठों का रसपान करने लगा और उसकी चिकनी कमर को दोनों हाथों से कस के पड़कर मसलने लगा,,,,, अपनी बुर पर साड़ी के ऊपर से ही लंड की ठोकर को महसूस करके वह एकदम से मदहोश होने लगी और अपनी कमर को गोल-गोल घूमाकर उस एहसास को और ज्यादा बढ़ाने लगी। अंकित पागलों की तरह उसके होठों का रस पीते हुए,,, अपने दोनों हाथों को उसके गोलाकार नितंबों पर लाकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया उसकी हरकत से वह औरत और ज्यादा मदहोश होने लगी,,,,, वह तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से उसके लंड को पकड़ के और उसकी मोटाई और लंबाई के एहसास को महसूस करके वह बोली,,,)


बाप रे तुम तो पहले से ही तैयार हो गए हो,,,,।

क्या करूं तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा लंड बेकाबू हो गया,,,,(अंकित एकदम से अश्लील शब्दों में बात करते हुए बोला,,,)

मेरा नाम अनामिका है मुझे नाम लेकर बुलाओ,,,,।

ओहहह अनामिका मेरी जान,,,,,।

तुम तो बहुत चालाक हो मैं तो तुम्हें बुद्धू समझ रही थी,,,,।

तुम्हारी गांड देखकर जो बुद्धू बना रहेगा वह सच में बुद्धू ही होगा,,,, तुम्हारा नखरा देखकर ही नहीं समझ गया था कि तुम्हारी बेलगाम जवान को लगाम की जरूरत है,,,,।

और वह लगाम तुम्हारे पास है,,,(इतना कहने के साथ ही हुआ औरत एकदम से घुटनों के बल बैठ गई और अंकित के पेंट का बटन खोलने लगी अंकीत पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था। वह औरत खेली खाई थी कब क्या करना है उसे अच्छी तरह से मालूम था इसलिए वह पल भर में ही उसकी पेंट को खोलकर एकदम घुटनों तक नीचे खींच दी और उसके दमदार लंड को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और वह हैरान होते हुए बोली,,,)

बाप रे इतना मोटा और लंबा मैं तो पहली बार देख रही हूं,,,,। यह तो मेरी बुर फाड़ देगा,,,,।

पहली बार देख रही हो क्या ऐसा,,,।

मैं झूठ नहीं बोलूंगी कसम से अपनी जिंदगी में मैं पहली बार इतना दमदार लंड देख रही हूं आज तो मजा ही आ जाएगा,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिना कुछ सोचे समझे एकदम से लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी अंकित एकदम से मत हो गया अंकित को समझते देर नहीं लगी कि यह औरत कितनी तेज है वह पूरी तरह से बेहतर में बन चुकी थी कल तक वह जिसे सीधी शादी औरत समझ रहा था वह अंदर से पूरी तरह से रंडी थी और सही मायने में देखा जाए तो एक औरत रंडी बनने के बाद ही मर्द को असली मजा देती है,,,, आइसक्रीम कौन की तरह वह गपा गप अपने गले तक अंकित के लंड को लेकर चूस रही थी,,, उसकी चुसाई से अंकित मदहोश हुआ रहा था,,, आंखें बंद हो चुकी थी वह छत की तरफ देखते हुए अपनी कमर को होले होले से आगे पीछे कर रहा था,,,, इस तरह से वह उसे औरत के मुंह को छोड़ रहा था और वह औरत भी अपने लाल-लाल होठों का छल्ला बनाकर होठों का कसाव लंड पर बढ़ा रही थी जिससे अंकित का मजा बढ़ता जा रहा था,,,।

सहहहहह आहहहहह,,,,, अनामिका तुम तो बहुत मस्त हो आज तक ऐसा किसी ने नहीं चूसा तुम तो पूरी खिलाड़ी हो आज बिस्तर पर मजा आएगा आज कोई टक्कर की खिलाड़ी मिली है,,,,ऊममममम आहहहहह पूरा गले तक ले लो,,,आहहहहह बस ऐसे ही मेरी जान,,,,ऊमममममममम,,आहहहहह,,,,,सहहहहहह कसम से तुम बहुत मस्त हो,,,,,ऊमममममममम,,,,


इसी तरह से अंकित मजा लेते रहा पूरे कमरे में सिर्फ इस समय अंकित किसी शिसकारी गुजारी थी वह औरत उसे पूरी तरह से मदहोशी के कगार पर ले आई थी,,,,,, लंड इतना मोटा और लंबा था कि गले तक लेकर उसे औरत की भी हालत खराब हो जा रही थी उसकी आंखों से भी पानी टपक जा रहा था लेकिन फिर भी वह छोड़ने को तैयार नहीं थी शायद वह सच ही कह रही थी कि इतना दमदार लंड उसने अपने जीवन में आज तक नहीं देखी थी इसलिए इतना खेल रही थी,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा फिर वह खुद ही धीरे से लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल दी,,, दोनों की हालत खराब थी दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रही थी अंकित उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और फिर उसे एक बार फिर से कसके अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। और धीरे से उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते ही देखते उसे औरत के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर वह ब्लाउज को अलग कर दिया जिस रंग की वह चड्डी पहनी थी उसी रंग की ब्रा भी पहनी थी ब्रा के ऊपर से ही अंकित उसकी दोनों चूचियों को जोर जोर से दबा रहा था मसल रहा था उस औरत को बहुत मजा आ रहा था,, बरसों के बाद उसे इंसानियत प्राप्त हो रहा था,,,, कुछ देर इसी तरह से दबाने के बाद अंकित एकदम से उसकी बाहों को पकड़ कर उसे दूसरी तरफ घुमा दिया और उसकी पीठ को अपनी छाती से लगाकर कैस के दोनों चूचियों को दबा दबा कर फिर से उसे मजा लेने लगा और फिर ब्रा का होकर खोलकर उसकी ब्रा भी उसके बदन से अलग कर दिया कमर के ऊपर से वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसकी नंगी चूचियां खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी थी लेकिन उम्र के हिसाब से हल्की सी लड़की हुई थी फिर भी इस उम्र में इस तरह की कड़क चूचियां वाकई में एक औरत के लिए गर्व की बात थी।


अनामिका मेरी रानी तुम्हारी चूचिया कितनी बड़ी-बड़ी है इसे दबाने में तो बहुत मजा आ रहा है,,,।

मुंह में लेकर पियोगे तो और ज्यादा मजा आएगा,,(मदहोशी भरी आवाज में वह बोली तो अंकित से रहने क्या वह तुरंत फिर से उसे दूसरी तरफ घूमा लिया, जिससे उसकी चूचीया उसकी आंखों के सामने हो गई और अंकित बिना देर किए उसकी दोनों चूचियों को बारी बारी से अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया,,,,, अब सिसकारी लेने की बड़ी उसे औरत की थी,,,, अंकित की हरकत से स्तन मर्दन से स्तनपान से हो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी।)

सहहहहह आहहहहह,,,,,ऊमममममममम,ओहहहहह मेरे राजा और जोर-जोर से दबा दबा कर पी,,,ऊमममममम,,,,,, बहुत मजा आ रहा है,,,,आहहहहहहहह,,,,,,(अंकित के बालों को सहलाते हुए उसका हौसला बढ़ाते हुए वह बोल रही थी और अंकित दोनों चूचियों पर टूट पड़ा था,,,,, खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों को पीकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था मदहोश हो चुका था,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से उसकी दोनों चूचियों की सेवा करता रहा और अपने हाथ से उसके कमर में बड़ी साड़ी को खोलना रहा देखते-देखते वह उसकी साड़ी को खोल कर साड़ी को नीचे फर्श पर फेंक दिया था,,,, इस समय कमरे के अंदर वह केवल पेटीकोट में थी और अंकित जानता था कि पेटिकोट के अंदर उसने पेंटिं भी नहीं पहन रखी है,,,, अंकित खुद अपने पैरों के सहारे से अपनी पेंट निकाल दिया था,,,,, कमर के नीचे वह भी नंगा हो चुका था और वह औरत एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अंकित के नंगे लंड को पकड़ कर हिला रही थी उसकी गर्मी उसकी बुर को बार-बार पिघला रही थी,,,, अंकित से रहा नहीं जा रहा था उसकी चूचियों से खेलते खेलते अब वह उसे पुरी तरह से नंगी कर देना चाहता था,, उसकी ईच्छा अब उसे नंगी देखने को कर रही थी, इसलिए वह पेटिकोट की डोरी को पकड़कर खींच दिया,, जिससे उसकी कमर पर कसी हुई पेटिकोट की गिठान खुल गई लेकिन कमर से नीचे सरकी नहीं,, उसे नीचे सरकाने के लिए अंकीत को खुद ही अपनी ऊंगलियो का सहारा लेकर उसे कमर से ढीला कर दिया और फिर अपने हाथों से ही उसे नीचे की तरफ सरकारी लगा क्योंकि अपने आप पेटिकोट सरक कर उसके कदमों में गिरने वाला नहीं थी कारण था उसका उठाव लिया हुआ नितंब,, उसका उभारदार नितंब उसके पेटीकोट को एक खुंटे की तरह अटकाया हुआ था,,,, लेकिन अगले ही पल अंकित ने उसके पेटीकोट को भी उसके कदमों में गिरा दिया और वह पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,।


बंद चारदिवारी के अंदर नग्नता औरत का प्रमुख गहना होता है,,, क्योंकि चारदीवारी के अंदर मर्द औरत के पहने हुए गहने नहीं बल्कि नग्नता का गहना देखना पसंद करता है,,, इसलिए पूरी तरह से उसे औरत को नंगी कर देने के बाद अंकित दो कदम पीछे हट गया और ऊपर से नीचे तक उसकी नंगी जवान को देखने लगा और देख के उसके मुंह से आह निकल गया क्योंकि तीन-तीन जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसके बदन की बनावट 30 साल की औरत को भी पानी भरवा दे इस तरह की थी,,,, अंकित उसकी नंगी जवान देखकर उसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाया।


ओहहहहह क्या बात है मैं आज तक तुमसे ज्यादा खूबसूरत औरत नहीं देखा नंगी होने के बाद तो तुम आसमान से उतरी हुई परी लग रही हो,,, कसम से आज तो मजा ही आ जाएगा,,,,।(अपने खड़े लंड को एक हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए अंकित बोल तो उसकी हरकत और उसकी अश्लील बातों को सुनकर उसे औरत की बुर से पानी की बूंद अमृत की धार की तरह नीचे टपक गई,,,, यह देखकर अंकित के मुंह में पानी आ गया और वह उस औरत को धक्का देकर नरम नरम गद्दे पर गिरा दिया,,,,,, उस औरत को लग रहा था कि अब उसकी चुदाई होगी,,, इसलिए वह बेशर्मी दिखाते हुए अपनी दोनों टांगों को अपने आप ही खोल दी थी और उसका जी भर कर स्वागत कर रही थी लेकिन अंकित अपने बाकी के भी कपड़े को निकाल कर पूरी तरह से नंगा हो गया और घुटनों के बाल बिस्तर पर चढ़कर उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया उत्तेजना और मदहोशी के कारण उसे औरत का गला सूख रहा था जिसे वह अपने थुक से गिला करने की कोशिश कर रही थी,,,, सांसों की गति बढ़ती जा रही थी उसके पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौट रही थी,,,, जिसे देखकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी,,,, माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था,, अंकित की किस्मत बड़ी तेज थी उसे यहां आने से पहले नहीं मालूम था कि तो अनजान औरतों के साथ उसकी तरह से मुलाकात होगी उन्हें भोगने का सुख प्राप्त होगा,,, इसलिए अंकित अपनी किस्मत पर इतरा भी रहा था। अपनी आंखों से वह जी भर कर उसे औरत की नंगी जवान को देख लेना चाहता था इसलिए इस अवस्था में भी ऊपर से नीचे तक उसे घुर रहा था वैसे तो होगा औरत पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी लेकिन जिस तरह से अंकित उसे निहार रहा था उसकी आंखों में शर्म दिखाई दे रहा था और अपनी आंखों को बंद कर ली थी अपनी ही बेटे के उम्र के लड़के के साथ वह अपनी नजर नहीं मिला पा रही थी।

खुली खिड़की से शीतल हवा पूरे कमरे को ठंडक प्रदान करने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसे औरत की गर्म कर देने वाली जवानी वातावरण की ठंडक को ऊष्मा में बदल दे रही थी,,, अंकित धीरे से उसकी दोनों टांगों के बीच से अपने दोनों हाथ को लेकर और उसकी कमर को पकड़ कर थोड़ा आगे की तरफ खींच लिया और दोनों हाथों के सहारे से उसके नितंबों को पड़कर उसे हल्का सा ऊपर की तरफ उठा लिया ताकि अपनी क्रिया को वह बड़े आराम से अंजाम तक ले जा सके और देखते ही देखते अपने प्यास होठों को उसकी कचोरी जैसी पूरी हुई बुर पर रख दिया वह औरत एकदम से मचल उठी और अपने आप ही उसकी कमर हल्के से ऊपर की तरफ उठ गई,, उसकी हरकत से साफ पता चल रहा था कि उसे कितना मजा आया था कितना मदहोशी उसके बदन पर छाई थी और अंकित पागलों की तरह उसकी गुलाबी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,, बुर की पतली दरार से बाहर जाती हुई गुलाबी पत्तियों को वह अपनी होठों के बीच लेकर पागलों की तरह चाट रहा था चूस रहा था और वह पत्तियां उसे औरत को अत्यधिक आनंद दे रही थी वह मचल रही थी तड़प रही थी दोनों हाथों से बिस्तर पर बिजी चादर को पड़कर अपनी उद्देश्य न को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह तो बेलगाम घोड़ी थी बेलगाम जवानी की मालकिन थी,,, लाख कोशिश करने के बावजूद भी वह अपनी मदहोशी औरत देखने को काबू में नहीं कर पा रही थी जिसकी वजह से पूरे कमरे में उसकी सिसकारी की आवाज गुंज रही थी और अंकित थकी उसकी तड़प और सिसकारी की आवाज को सुनकर अपनी हरकतों को और ज्यादा बढ़ा दे रहा था जितना हो सकता था उतनी जीभ अंदर की तरफ डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था,,,। उसे औरत का बदन सुगंधा से थोड़ा सा ज्यादा था,,, उसकी चूचियों के साथ-साथ उसकी गांड भी थोड़ी सी बड़ी थी जिसका भोग लेने में अंकित को ज्यादा मजा आ रहा था।

सहहहहह आहहहहह ऊमममममममम,,,,ओहहहहह मेरे राजा तूने तो मुझे पागल कर दिया रे,,,,आहहहहहह कितना मजा आ रहा है बुर चटवाने में,,,,आहहहहहह और अंदर जीभ डाल दे मैं कभी सोचा नहीं थी कि इस उम्र में भी कोई मेरी बुर इस तरह से चाटेगा,,,,,आहहहहहहहह आजीवन का असली मजा ले रही हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के सर पर रख दिया और उसके चेहरे का दबाव अपनी बुर पर बढ़ाने लगी उसकी हरकत से मस्त होकर अंकित पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया चाट चाट कर उसके गुलाबी बुर को लाल कर दिया था,,, उसका मदन रस अंकित के होठों से टपक रहा था उसकी नाक पर लग चुका था उसका चेहरा उसके बदन से भेज चुका था लेकिन फिर भी अंकित पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था शायद इस क्रिया में अंकित को भी ज्यादा मजा आ रहा था और उसे औरत को भी वह औरत रहने कर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी,,,, भारी भरकम शरीर होने के बावजूद भी उसे औरत की स्फूर्ति और ताकत को देखकर अंकित का जोश और ज्यादा बढ़ रहा था। और देखते ही देखते हो उसने अपनी तो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करके हिलना चालू कर दिया और साथ में उसकी चटाई भी जारी रखा। बिस्तर पर घमासान मचा हुआ था। शायद इस औरत ने इस तरह का सुख कभी प्राप्त नहीं की थी ,इसलिए तो अपनी मोटी मोटी जांघों को खोलकर पागल हुई जा रही थी,,,, अंकित उसकी कचोरी जैसी खुली हुई बुर को इसलिए भी पागलों की तरह चाट रहा था क्योंकि उसे पर बल का रेशा तक नहीं था शायद आज ही उसने क्रीम लगाकर अपनी बुर के बाल को साफ की थी,,,, इस उम्र में भी वह सफाई का इतना ध्यान रखती है यह जानकर अंकित का दिल अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था। अंकीत की हरकत के कारण उस औरत का सब्र खोता चला जा रहा था, अपनी जवानी की गर्मी को वह जल्द से जल्द शांत करना चाहती थी इसलिए वह अंकित से मिन्नतें करते हुए बोली।


सहहहहह आहहहहह मेरे राजा मुझसे बर्दाश्त नहीं होता जल्दी से अपना लंड मेरी बुर में डाल दे मेरी बुर की गर्मी बढ़ती जा रही है अब यह तेरी उंगली से शांत होने वाली नहीं है,,,,ऊमममममम,आहहहहहह जल्दी से चोद मुझे,,,,,,,आहहहहहहहह,,,,.

(उस औरत की तडप देखकर अंकित की भी हालत खराब हो रही थी वह भी जल्द से जल्द अपने मोटे तगड़े लंड को औरत की गुलाबी बुर में डाल देना चाहता था,,,,, और वैसे भी लोहा गर्म हो चुका था बस हथौड़ा मारने की देरी थी,,,,, अंकित भी धीरे से उसके बुर के मदन रस से सने हुए अपने चेहरे को उसकी बुर से अलग किया,,,और उस औरत की तरफ प्यासी नजरों से देखने लगा उसके चेहरे पर अपनी बुर की मलाई लगी हुई देखकर वह शर्म से पानी पानी हो गई उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और अंकित भी उसके लाल-लाल होठों को देखकर एक बार फिर से उसकी तरफ झुका और उसकी ही मलाई से सने अपने होठों को उसके होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,, उसे औरत ने भी अपनी बुर की मलाई को चाटना शुरू कर दी उसके होठों को पीना शुरू कर दी अंकित का लंड बार-बार उसकी बुर पर फिसल रहा था,,, जिससे अंकित को तो मजा आ रहा था लेकिन वह औरत तड़प जा रही थी क्योंकि उसके लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी गुलाबी पत्तियों से रगड़कर दूसरी तरफ फिसल जा रहा था जबकि वह जाती थी कि उसका लंड उसकी बुर में घुस जाए चार-पांच बार जब इस तरह से उसका लंड अपने आप फिसल कर इधर-उधर भागने लगा तो उसे रहा नहीं गया और वह अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ कर उसके बैगनी सुपाड़े को अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी अंकित को उसकी बुर का कसाव एकदम साफ महसूस हो रहा था,,, और शायद ऐसा भी हो सकता था की पहली बार इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में प्रवेश कर रहा था,,, लेकिन अंकित को मजा आ रहा था। लंड बुर की अंदरूनी दीवारों में रगड़ता हुआ अंदर की तरफ जा रहा था और यह रगड़ अंकित और उस औरत को दोनों को बेहद आनंदित कर दे रही थी,,, औरत तो जीवन में पहली बार इतनी मोटी और लंबे लंड को अपनी बुर में लेकर मदहोश सी हो गई थी पहली बार उसे ऐसा लग रहा था कि वाकई में कोई मर्दाना लंड उसकी बुर में जा रहा था,,,,।

आंखों को बंद करके हुआ इस पल का मजा लूट रही थी इस एहसास को अपने अंदर बटोर रही थी और अंकित उसकी मदहोश कर देने वाली पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों पर लेटे हुए अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में उतार चुका था और फिर धीरे से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठकर फिर से धप्प से नीचे मार दिया था एक बार फिर से अंकित का लंड उसकी बुर में घुस गया था ऐसी क्रिया वह बार-बार लेकिन धीरे-धीरे कर रहा था उसे औरत की तड़प और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी उसकी गुलाबी पतली दरार छल्ला नुमा हो चुकी थी,,,, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि आज उम्र के इस पड़ाव पर उसके गुलाबी बुर का द्वारा पूरी तरह से खुल चुका था,,,, उसकी गर्दन पर चुंबनों की बारिश करता हुआ धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ा रहा था और वह औरत अपनी मोटी मोटी जांघों को फैलाए हुए उसके हर एक धक्के को सह रही थी। धीरे-धीरे कमरे में फचार फचार की आवाज गूंजने लगी यह आवाज उसे औरत की ओर से निकले हुए मदन रस और अंकित के लंड के गुत्थमगुत्था होने से निकल रही थी। इस तरह की आवाज काफी हद तक दोनों को मदहोश कर रही थी। अंकित उसकी आंखों में देखते हुए धीरे से बोला।

अब कैसा लग रहा है मेरी जान,,,,(अपने बेटे की उम्र से अपने लिए जान शब्द सुनकर वह पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन जिस एहसास में वह डूबी हुई थी उसे एहसास को बताना भी जरूरी था इसलिए वह जवाब देते हुए बोली)

मैं कभी सोची भी नहीं थी कि किसी का लंड इतना लंबा और मोटा भी हो सकता है,,, मैं तो सच में धन्य हो गई तेरे लंड को अपनी बुर में लेकर,,,आहहहह आहहहहह ,,,(उसकी ऐसी मदहोशी भरी बात को सुनकर अंकित से रहा नहीं जा रहा था और वह जल्दी-जल्दी धक्का मारना शुरू कर दिया जिससे उसकी आह निकल जा रही थी,, उसकी बात सुनकर अंकित भी बोला,,,)

सच कहूं तो मैं भी कभी सोचा नहीं था कि तीन-तीन बच्चों की मां का बदन इतना खूबसूरत हो सकता है सच में तुम्हें कोई देख ले तो उसका लंड खड़ा हो जाए नंगी होने के बाद तो तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो तभी तो आज मेरी हालत खराब हो गई और तुम्हारी बुर किस उम्र में भी अंदर से कितनी गर्म है ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं बुर में नहीं बल्कि किसी भट्टी में अपना लंड डाल रहा हूं,,,, मेरी जगह कोई और होता तो अह तक उसका पानी निकल गया होता,,,,



तू बिल्कुल सच कह रहा है मैं भी हैरान हूं कि तेरा तक पानी नहीं निकला कसम से तू ही असली मर्द है जिसकी भी तेरी शादी होगी वह तो तुझे पाकर एकदम धन्य हो जाएगी,,,।

तुम धन्य हुई क्या मेरी जान,,,।

पूछ मत मेरे राजा की आज मैं कितनी खुश हूं अच्छा हुआ तेरे से मुलाकात होगी वरना असली सुख में कभी अपने जीवन में भोग ही नहीं पाती,,,,,आहहहहह आहहहहह ऊमममममम आहहहहहह मेरे राजा,,,,,


यह बात है तब तो तुम आज की चुदाई जिंदगी भर याद रखोगी,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित उसे करके अपनी बाहों में भरकर जोर-जोर से धक्के पर धक्का लगना शुरू कर दिया अब तो उसे औरत की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी उसके तेज धकको को वह सह नहीं पा रही थी उसके मुंह से आह आहहह की आवाज निकल रही थी और इस तरह की आवाज इस बात का सबूत था कि उसे बहुत मजा आ रहा था भले ही वह अंकित के धक्को को सह नहीं पा रही थी लेकिन जो आनंद उसे प्राप्त हो रहा था वह उसे पूरी तरह से मदहोश कर रहा था। यह चुदाई अंकित को भी जिंदगी भर याद रहने वाली थी वह कभी सोचा नहीं था किस तरह से किसी औरत को छोड़ने का सबसे प्राप्त होगा और वह भी बैंक कर्मचारी की,,,बुर का कसाव अंकित को भी मदहोश बना रहा था अंकित बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था मोटी मोटी जांघों से उसकी जांघें टकरा रही थी,,। कुछ देर तक किसी अवस्था में चुदाई करने के बाद धीरे से अंकित घुटनों के बल बैठ गया हालांकि अभी भी उसका लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था वह अपने लंड को बिल्कुल भी उसकी बुर से निकल नहीं रहा था और फिर आने पर रखा हुआ तकिया उठाकर वह उसकी गांड के नीचे लगाने लगा तो वह भी अपनी गांड को ऊपर उठा ले उसकी गांड थोड़ी सी ऊपर आ गई और इस अवस्था में अंकित उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर से लपेटकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, वह औरत अंकित के अद्भुत काम शैली को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी,,, आज तक उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह अच्छे-अच्छे का पानी निकाल देती है लेकिन आज उसके ही बेटे के उम्र का लड़का उसका पानी नीचोड़ रहा था। खिड़की से ठंडी ठंडी हवा कमरे में बराबर आ रही थी लेकिन फिर भी दोनों के बदन से पसीना टपक रहा था।

अंकित खेल में अच्छी तरह से माहिर हो चुका था इसलिए वह जानता था कि औरत को कैसे सुख दिया जाता है बिना थके बिना हारे,,,, तभी तो एक औरत मर्द की दीवानी हो जाती है,,,, तभी अंकित के धक्को को अपनी बुर की गहराई में महसूस करके उसका बदन मचलने लगा,,,,, उसकी आंखें बड़ी-बड़ी होने लगी और उसके चेहरे का रंग एकदम लाल होने लगा और वह बोली,,,,।

आहहहह आहहहहहह और जोर से जोर-जोर से धक्के लगा मेरे राजा मेरा निकलने वाला है मेरा होने वाला है मैं कभी सोचा नहीं था कि कोई जवान लड़का इस तरह से मेरी चुदाई करेगा मैं तो पागल हो जाऊंगी मेरा पानी निकलने वाला है,,,,,आहहहहहहहह जोर-जोर से मेरे राजा और जोर-जोर से फाड़ दे मेरी बुर को ,,भोसड़ा बना दे,,,आहहहहहहहह,,,
(अंकित समझ गया था किसका पानी निकलने वाला है यह झड़ने वाली है इसलिए उसका साथ देते हुए वह फिर से अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ के नीचे लेकर और उसे करके अपनी बाहों में भरकर अपनी कमर को जोर-जोर से उसकी बुर पर पटकने लगा और देखते ही देखे उसका बदन अंकीत की बाहों में अकड़ने लगा,,, और वह झड़ने लगी,,,,,, झड़ते समय वहां बेहद मासूम लग रही थी अंकित को उसे पर और ज्यादा प्यार आ रहा था वह उसके होठों पर अपने होठकर उसके फोटो का रसपान करते हुए उसके स्खलन का मजा ले रहा था,,,, हालांकि अंकित अपने धक्कों की गति को बिल्कुल भी कम नहीं किया था,,,, थोड़ी देर में उसका बदन एकदम तुमसे ढीला पड़ने लगा,,,, वह पूरी तरह से झड़ चुकी थी उसके बटन में दम नहीं रह गया,,, और झड़ने की वजह से उसकी बुर की चिकनाहट बढ़ चुकी थी और रगड़ का एहसास थोड़ा काम हो रहा था इसलिए अंकित भी कुछ पल के लिए अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाला और उसके ही पेटीकोट से उसकी बुर की मलाई को साफ करने लगा ताकि दोबारा लंड जाए तो रगड़ महसूस हो,,,, वह औरत अंकित की काबिलियत को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी एक औरत को खुश करने का तरीका वह अच्छी तरह से जानता था,,, इससे ज्यादा भला एक औरत मर्द से क्या चाहत रख सकती है,,, जो मर्द खुद ही एक औरत को अच्छी तरह से खुश करना जानता हो हर सुख देना जानता हो। अंकित पेटीकोट से अच्छे से उसकी बुर की मलाई साफ करने के बाद मुस्कुराता हुआ उसकी तरफ देख कर बोला।)


बस मेरी रानी अब पलट जाओ पीछे से तुम्हारी चुदाई करूंगा,,,,।
(अंकित की बात सुनकर उसे औरत को थोड़ा शंका हुआ कि वह पीछे से उसे अच्छी तरह से नहीं चोद पाएगा क्योंकि पीछे से उसकी गांड बड़ी-बड़ी होने के कारण लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई तक नहीं पहुंच पाता था अब तक तो उसके साथ ऐसा ही हो रहा था लेकिन वह कुछ बोली नहीं वह भी देखना चाहती थी कि अंकित क्या कर लेता है क्योंकि पीछे से करवाने में उसे भी बहुत मजा आता था लेकिन वह आज तक पीछे से असली सुख प्राप्त नहीं कर पाई थी और अंकित के कहते ही वह बिस्तर पर पलट गई और घोड़ी बन गई बिस्तर के किनारे अपनी दोनों टांग नीचे लटका कर वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में ऊपर उठा दी थी ,,,, इसकी भारी भरकम गोल-गोल गांड को तोप की तरह उठी हुई देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह उसकी गोरी गोरी गांड पर दो-चार शपथ लगाकर उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,, वह औरत अंकित की हरकत पर कुछ बोल नहीं पाई और अंकित अपने लंड पर अपना थूक लगाकर उसे गीला कर लिया और थोड़ा सा थुक उसके गुलाबी छेद पर भी लगा दिया,,,, और एक नए अनुभव के लिए पीछे से वह अपने लंड को उसकी गुलाबी बुर में डालने लगा लंड फिर से धीरे-धीरे अंदर की तरफ सड़क गया और अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर फिर से धक्का लगना शुरू कर दिया वह औरत एकदम से हैरान हो गई क्योंकि पीछे से भी बड़े आराम से उसका लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा था बल्कि हर एक धक्का उसके बच्चेदानी से टकरा रहा था,,,, उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि आज उसके बरसों की अभिलाषा भी पूरी होने वाली थी वह फिर से मदहोश और उत्तेजित होने लगी,,,,।

उसे खुश करने में अंकित कोई भी कसर बाकी नहीं रख रहा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर चउत लगाता हुआ वह आगे बढ़ रहा था,,,, वह रह रहकर धीरे से अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और इस समय इस अवस्था में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां लगाम का काम कर रही थी और उसे औरत को भी मजा आ रहा था,,,,, देखते ही देखते घड़ी में तीन का समय हो चुका था समय इतनी जल्दी कैसे गुजर गया दोनों को पता ही नहीं चल रहा था वाकई में चुदाई का जो आनंद है वह किसी और चीज में नहीं मिलता जिसमें इंसान अपना पूरा वक्त भूल जाता है और बस सुख प्राप्त करने में लगा रहता है और यही इस समय अंकित और वह औरत कर रही थी। अंकित पीछे से पूरी तरह से उस औरत पर छा चुका था दोनों को देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे घोड़ी के ऊपर घोड़ा चढ़ गया हो,,, गरमा गरम शिसकारी की आवाज फिर से कमरे में गुंजने लगी,,,, तकरीबन इस अवस्था में 25 मिनट की और जमकर चुदाई करने के बाद अंकित और वह औरत एक साथ झड़ने लगे,,,,, झड़ने के बाद अंकित भी पस्त हो चुका था और उसके ऊपर ही पसर गया,,,,,,,, उसे औरत ने तो जिंदगी में आज अद्भुत सुख की प्राप्ति की थी वह कभी सोचा नहीं थी कि चुदवाने में वाकई में इतना अत्यधिक आनंद मिलता है आज कुछ ज्यादा ही उसे मजा मिल गया था,,,,,।

थोड़ी देर बाद अंकित अपने लंड को उसकी बुर में से बाहर निकाला जो कि अभी भी खड़ा ही था ज्यादा लचक पन उसमें नहीं आया था यह देखकर तो वह और भी ज्यादा हैरान हो गई थी,,, अंकित धीरे से बाथरूम में चला गया और पेशाब करने लगा तब तक वह सीधी हुई और पीठ के बल लेट कर गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,, पेशाब करने के बाद अंकित बाथरूम के दरवाजे तक आया और दीवार का सहारा लेकर मुस्कुरा कर उसे औरत की तरफ देखने लगा वह भी अंकित की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी,,, अंकित अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा और बोला।

बताओ ऐसा मजा कभी मिला था?

बिल्कुल भी नहीं,,, मैं तो कभी सोचा भी नहीं थी कि इसमें इतना ज्यादा मजा भी आता होगा जितना मजा आता था बस उसने ही लेती थी लेकिन आज शायद मेरी औकात से ज्यादा मुझे आनंद मिल रहा है,,,।

समय नहीं है नहीं तो आज एक ही दिन में तुम्हें चांद तारे सब दिखा देता,,,(ऐसा कहते हुए वह बिस्तर के पास आया और पीठ के बल लेट गया,,, मौका देखकर उसे औरत ने भी हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ली और उसे हल्के हल्के हिलाते हुए बोली,,,)

तुम सच कह रहे हो हमें थोड़ा और पहले मिलना चाहिए था 5:00 बजे तो मैं यहां से चली जाऊंगी और 3:30 बज चुके हैं,,,।

तुम ही सोचो में 11:00 बजे यहां पर आया हूं और 3:30 बज चुके हैं इस बीच सिर्फ तुम्हारी एक ही बार चुदाई हुई है,,, और एक ही बार में तुम पूरी तरह से मस्त हो गई हो अगर पूरा दिन मिले तो सोचो क्या हो जाएगा,,,,।

मैं भी यही सोच रही हूं। और पछता भी रही हूं इतना अच्छा मौका मिला है और आज ही मुझे जाना भी है,,,।

आज रात तक नहीं रुक सकती,,,

बिल्कुल भी नहीं,,,(लंड को हल्के हल्के हिलाने से वह पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था एकदम कड़क हो गया था,,,, उसकी गर्मी और उसके कडप्पन को अपनी हथेली में महसूस करके एक बार फिर से वह मदहोश होने लगी और इससे आगे कुछ बोले बिना ही वह एकदम से उठकर बैठ गई और झुक कर लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, अंकित फिर से मस्त होने लगा और वह हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,, दोनों फिर से मदहोश होने लगे लेकिन इस बार वह औरत पूरी तरह से कमान संभाल लेना चाहती थी,,, और वह खुद अंकित के लंड पर सवार होके और उसके कंधे पर हाथ रखकर अपनी गांड को जोर-जोर से उसके लंड पर पटकना शुरू कर दी,,, अंकित को इससे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता था तरबूज चाकू पर गिरे या चाकू की तरबूज पर,कटने वाला तो तरबूज ही था और इसके बाद मजा ही मजा उसे औरत की इस क्रिया से भी अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी अंकित उसकी कमर पकड़ लेता था तो कभी उसकी चूची दबा देता था तो कभी उसे अपनी तरफ झुक कर उसके होठों को चूमने लगता था और यह सिलसिला तकरीबन 15 मिनट तक और चला और दोनों एक बार फिर से झड़ गए,,, समय भी काफी हो चुका था अंकित को अपने होटल पहुंचना था वरना उसकी मां परेशान हो जाती क्योंकि वह तीन-चार घंटे से अपने होटल से गायब था बिना बताए,,,।

वह औरत बाथरूम में चली गई और पेशाब करने लगी उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज अंकित को साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर वह मुस्कुरा रहा था इसके बाद वह बाहर निकली और कपड़े पहने लगी अंकित तब तक कपड़े पहन चुका था,,,, अंकित बात ही बात में उससे पूछा,,,।

यहां पर कोई अच्छी जगह है घूमने लायक,,,,।

हां जरूर है यहां से तकरीबन पांच छः किलोमीटर की दूरी पर एक झरना है जिसे देखने के लिए लोग ऊपर तक जाते हैं वहां से खूबसूरत नजारा दिखाते हैं बहुत खूबसूरत जगह भी है तुम घूमना चाहो तो वहां घूम सकते हो मुझे तो आज जाना है वरना मैं तुम्हें घुमा देती,,,।


कोई बात नहीं,,,, तुमने तो मुझे स्वर्ग का सुख प्रदान की हो,,,,।
(यह सुनकर वह मुस्कुराने लगी अंकित गई मुस्कुरा दिया और फिर जाते-जाते उसे एक बार फिर से अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का चुंबन किया और वहां से निकल गया,,, जब अपने होटल के कमरे में पहुंचा तो उसकी मां बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी उसे देखते ही सवालों की झड़ी लगा दी अंकित एकदम शांत होकर जवाब देते हुए बोला,,,)

तुम सो रही थी इसलिए मैं तुम्हें जगाना ठीक नहीं समझा और इधर-उधर घूमता रहा मुझे एक नहीं बताया कि यहां से 5 से 6 किमी की दूरी पर एक खूबसूरत चलना है वहां पर लोग घूमने के लिए जाते हैं हम लोगों को भी वही चलना चाहिए घूमने के लिए,,,।

अब आज तो नहीं हो पाएगा कल चलते हैं,,,।

कोई बात नहीं चल चलेंगे,,, तुम खाना खाई कि नहीं,,,।

खाना नहीं खाए बस चाय नाश्ता की हुं,,,।

अभी खाना है तो मंगवा लो,,,।

नहीं नहीं ऐसे भी मुझे अभी भूख नहीं है अब रात को ही खाएंगे,,,,।
(इतना कहकर बा बालकनी में आकर कुर्सी पर बैठकर बाहर का नजारा देखने लगी और अंकित भी पास में ही पड़ी कुर्सी पर जाकर बैठ गया उसकी मां को सख्त नहीं हुआ कि यह तीन-चार घंटे से कहां था किसके साथ था,)

Bahut hi behtareen update he rohnny4545 Bhai

Ankit ki kismat ke to kya kehne.......

Pehle bus ke safar me ek najan aurat ko dhod diya.......

Aur ab is anamika ko jannat ki sair karwa di.........

Maja aa gaya Bro

Keep rocking
 
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