रात भर गांड मराने के बाद सुगंधा की नींद खुल गई सुबह के 6:00 बजे रहे थे वैसे भी कोई काम नहीं था इसलिए जल्दी उठने का कोई मतलब नहीं था 6:00 बजे आंख खुलने के बावजूद भी वह कुछ देर तक यूं ही बिस्तर पर लेटी रही,,, अंकित अभी भी उसकी बाहों में गहरी नींद में सो रहा था। रात भर जमकर मेहनत जो उसने किया था,,, सुगंधा स्नेह भरी नजरों से अपने बेटे को देख रही थी,,, कुछ महीने पहले उसने कभी सोचा भी नहीं थी कि उसका रिश्ता अपने ही बेटे के साथ इस तरह से गहरा हो जाएगा,,, इस बात को वह भी मानती थी कि वह पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी शर्म का उसकी आंखों में अब नामोनिशान नहीं था क्योंकि वह जानती थी शर्म करने से कोई फायदा नहीं है बेशर्म बनने के बाद ही उसे जीवन का असली सुख प्राप्त हुआ था और इस सुख को वह खोने नहीं देना चाहती थी। रात के बारे में वह सोच रही थी उसका बेटा कितना शैतान हो चुका था उसे जीवन का हर सुख दे भी रहा था और ले भी रहा था,,, वह सोची नहीं थी कि उसके बदन का अनमोल अंग का लेने के बावजूद भी वह इस कदर से उसकी गांड मारेगा,,, उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा है उसके गांड के छेद के लिए जिद करेगा क्योंकि अक्सर मर्द औरत की बुर के लिए ही पागल होते हैं लेकिन अब उसे एहसास होने लगा था कि मर्द की प्यास केवल औरत की बुर से नहीं मिटती,, बल्कि उसे एहसास होने लगा था कि औरत के बदन का हर एक छेद मर्दों के लिए प्यास बुझाने का साधन होता है,,,, अपने बेटे की जीद को देखकर वह इस समय मुस्कुरा रही थी।
देखते ही देखते घड़ी में 6:30 बज चुके थे अभी भी अंकित गहरी नींद में सो रहा था चादर के अंदर मां बेटे दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में थे,,,, सुगंधा को अपनी गांड के छेद में हल्का-हल्का दर्द महसूस हो रहा था इसका कारण वह अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी उसके बेटे का लंड कोई साधारण लंड नहीं था जिसकी वजह से उसे अपनी गांड के छेद में दर्द महसूस हो रहा था इतना तो बुरे में डलवाने पर भी दर्द नहीं हुआ था। वह धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और आईने में अपने आप को देखने लगी नग्न अवस्था में वह रूप की रानी लग रही थी अपनी कमर पर हाथ रखकर अपने बदन को इधर-उधर घूमाकर अच्छी तरह से देख लेने के बाद वह बाथरूम के अंदर घुस गई,,,, और सौच करने लगी अब उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में गांड मराने में कितना दर्द होता है रात को तो उसे भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस समय सौच करते समय उसके गांड में कुछ ज्यादा ही दर्द हो रहा था,,,, जैसे तैसे करके वह काम निपटा ली,,, लेकिन अब उसे दर्द ज्यादा कर रहा था चलने में भी तकलीफ हो रही थी। वह नहा कर अपने नंगे बदन पर टावर लपेटकर बाहर आ गई तब तक अंकित भी जा चुका था अपनी मां को टावल में देखकर वह मुस्कुराते हुए बोला,,,।
गुड मॉर्निंग मम्मी,,,, कैसी गुजरी रात मजा आ गया ना,,,।
हरामजादे मजा तो आ गया लेकिन तूने मेरी गांड की हालत खराब कर दिया है।
क्यों क्याहो गया,,,,?
गांड में बहुत जोर का दर्द हो रहा है चला भी नहीं जा रहा है,,,,।
कोई बात नहीं शुरू शुरू में ऐसा होता है दो-चार घंटे में एकदम सही हो जाएगा रात को फिर गांड मरवाने लायक हो जाओगी,,,।
इस बारे में अब सोचना भी मत,,,, अब तो तुझे गांड के छेद पर हाथ भी लगाने नहीं दूंगी,,,,
यह बात है,,, चेहरे से मत करना नहीं तो अभी फिर से पटक कर गांड मार लूंगा,,,,।
तुझे क्या मैं मजाक कर रही हूं सच में बहुत दर्द कर रहा है,,,,।
अच्छा कोई बात नहीं मेरी जान कुछ दिन तक उस छेंद के बारे में सोचूंगा भी नहीं।
चल जाकर तु भी नहा ले,,
ठीक है,,, (इतना कहकर हुआ अभी बाथरुम में चला गया और थोड़ी देर में नहा कर बाहर आ गया,,,, फोन करके दोनों ने नाश्ता मंगवाया,,,, नाश्ता करने के बाद सुगंधा फिर से बिस्तर पर लेट कर आराम करने लगी,,,, उसे सच में बहुत दर्द कर रहा था ठीक से चला नहीं जा रहा था,,, जिसकी वजह से अभी उसे कहीं जाने की इच्छा नहीं हो रही थी अंकित भी वहीं बैठ रहा और अपनी मां से बातचीत करता है देखते ही देखते फिर से दोनों सो गए तकरीबन 11:00 बजे फिर से अंकित की आंख खुली तो वह देखा उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी,,,, वह धीरे से उठाकर अपनी मां को बिना बताए तैयार होकर कमरे से बाहर निकल गया क्योंकि आज उसे उसे अनजान औरतों से मिलना था जिसने उसे लंच के लिए बलाई अपने होटल से निकाल कर वह सड़क पर चहल कदमी करता हुआ आगे बढ़ गया,,, प्रचंड गर्मी के महीने में भी यहां पर मौसम खुशनुमा था या देखकर अंकित को भी हैरानी हो रही थी लेकिन उसे बहुत अच्छा लग रहा था इस तरह का मौसम उसके शहर में बहुत कम ही देखने को मिलता है,,, आते जाते लोगों से अच्छे लग रहे थे ज्यादातर लोग बाहर के ही थे,,, अंकित की नजर खूबसूरत लड़की हो पर काम खूबसूरत औरतों पर ज्यादा चली जा रही थी क्योंकि उसका मां अक्सर औरतों पर ज्यादा जाता था खास करके अंकित को औरतों की बड़ी-बड़ी गांड आकर्षित करती थी साड़ी में उभार ली हुई बड़ी-बड़ी चूचियां उसके मुंह में पानी ला देती थी और यही हाल था जब वह चाय पीते हुए उसे अंजान औरत को देखा था पल भर में ही उस औरत को भोगने का ख्याल उसके मन में आ गया था,,, और उसकी किस्मत भी इतनी तेज थी कि आज उसके साथ खाना खाने के लिए जा रहा था वैसे तो उसे पक्का यकीन नहीं था कि खाना खाने के बाद उसे औरत के साथ उसका कोई रिश्ता बन पाएगा या नहीं लेकिन फिर भी मन में उम्मीद की किरण बनी हुई थी और यही उम्मीद की किरण लिए हुए वह उसे औरत से मिलने के लिए चला जा रहा था।
उसे औरत ने जिस होटल के बारे में बताया था उसे होटल के सामने अंकित खड़ा हो चुका था पहले इधर-उधर देखने के बाद जब उसे वह औरत कहीं दिखाई नहीं दी तो वह होटल के अंदर प्रवेश करने लगा और उसकी किस्मत अच्छी थी कि सामने ही टेबल पर बैठकर चाय पीते हुए वह औरत उसे दिखाई दे गई और उसे औरत को देखते ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और यही हाल उसे औरत का भी था अंकित को देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी थी शायद वह अंकित का ही इंतजार कर रही थी,,,, वह और जल्दी से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और हाथ दिखा कर उसे अपनी तरफ बुलाने लगी अंकित को पक्का यकीन हो गया कि वह भी उसका इंतजार कर रही थी उसके पास जाते ही वह उसे नमस्ते किया और पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गया,, होटल के रेस्टोरेंट में काफी भीड़ थी क्योंकि यह खाने का समय था और सब लोग अपने-अपने पसंद का खाना खा रहे थे,,,, मुस्कुराते हुए उसे अंजान औरत ने अंकित से बोली।
मुझे तो उम्मीद नहीं था कि तुम इधर आओगे,,,
आटा कैसे नहीं आपने खाने के लिए बुलाई थी और मुझे भूख लगी और आपकी याद आ गई,,,।
(अंकित की हाजिर जवाबी सुनकर वह औरत मुस्कुराने लगे और बोली)
बड़े हाजिर जवाबी हो,,
ऐसा कुछ भी नहीं है बस आपको देखकर इस तरह के जवाब निकल जा रहे हैं।
यह बात है,,,, चलो अच्छा बताओ क्या खाओगे तुम्हारी पसंद का खाना मंगाते हैं,,,,
नहीं नहीं ऐसा कैसे चलेगा आखिरकार अपने आमंत्रित दिया है तो आपके ही पसंद का मैं खाऊंगा मैं अपनी तरफ से कुछ भी नहीं बताने वाला कि मैं क्या खाना चाहता हूं आप जो कुछ भी खिलाओगी मैं खा लूंगा,,।
बात करने में तो उस्ताद हो,,,, बातों में कोई तुम्हें हर नहीं सकता,,,। अच्छा चलो मुझे जो अच्छा लगता है वही मंगा लेती हूं लेकिन यहां नहीं,,,(कुर्सी पर दोनों हाथ रखकर इधर-उधर देखते हुए वह बोली)
फिर कहां,,,,?
यहां काफी भी है मेरे कमरे में ही चलते हैं वहां आराम से बात करते हुए खाना खाएंगे यहां पर ठीक से बात नहीं कर सकते देख नहीं रहे हो शोर शराब कितना हो रहा है,,,।
आप बात तो सही कह रही हो तो चलिए फिर आपके कमरे पर ही चलते हैं,,,,।
(इतना कहकर दोनों उठकर खड़े हो गए वह अनजान औरतों जल्दी से काउंटर पर गई और अपना आर्डर बोलकर अंकित को साथ लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी वह सीढ़ियां चढ़ रही थी कई हुई साड़ी में उसकी मस्त भराव दार गांड अंकित के होश उड़ा रही थी अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखा ही रह गया था जैसे-जैसे वह कदम उठाकर सीडीओ पर रख रही थी वैसे-वैसे उसकी भारी भरकम गांड का कटाव उसके लंड की अकड़ को बढ़ाना शुरू कर दिया था,,,, अंकित के मुंह में पानी आ रहा था देखते ही देखते दोनों होटल के कमरे के पास पहुंच चुके थे। अंकित के मन में लहर उठ रही थी,, उसे अंजान औरत ने कमरे का दरवाजा खोली और कमरे में प्रवेश करने लगी पीछे-पीछे अंकित भी कमरे में प्रवेश कर गया,,, उसने दरवाजा बंद कर दी,,,, अंकित को इस होटल का कमरा भी काफी खूबसूरत लग रहा था हर एक समान बड़े सलीके से रखी हुई थी किंग साइज बेड था दो कुर्सियां थी एक मैज रखी हुई थी और एक खूबसूरत खिड़की थी जिस पर परदे लगे हुए थे और उसे औरत ने पर्दे को खोलकर कुदरत धूप को कमरे में आने का आमंत्रण दे दी और कुर्सी पर बैठ गई खाली पड़ी कुर्सी पर अंकित भी बैठ गया और दोनों आपस में बातचीत करने लगे,,,, अंकित और वह अनजान औरत दोनों आमने-सामने बैठे हुए थे,,, मैज पर एक छोटा सा गुलदस्ता रखा हुआ था,,,।
बातचीत के दौरान उस औरत ने बताया कि वह बैंक में काम करती है कल वह अपने बारे में पूरी जानकारी नहीं दि थी लेकिन आज सब कुछ बताने लगी थी,,,, अंकित उसकी बातों को कम उसके खूबसूरत चेहरे पर ज्यादा ध्यान दे रहा था लाल-लाल भरे हुए होंठ देखकर ही अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर उसके होठों का रसपान करने के लिए तड़प रहा था,,, आसमानी रंग की साड़ी में वह आसमान से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी,,, लॉ कट ब्लाउज में इसकी भारी भरकम चूचियों की गहरी लकीर किसी झरने की घाटी से काम नहीं लग रही थी जिसमें अंकित का मन डूब जाने को कर रहा था। अंकित की नजर बार-बार उसकी चूचियों पर चली जा रही थी जिसका एहसास उसे अंजान औरत को हो रहा था और वह बार-बार अपनी साड़ी को दुरुस्त करने की कोशिश भी कर रही थी लेकिन पारदर्शी साड़ी में वह ज्यादा कुछ दुरुस्त करने में सामर्थ नहीं थी और उसे इस बात से हैरानी भी हो रही थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसकी चूचियों की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा था। लेकिन इस हैरानी के साथ-साथ उसे अपनी जवानी पर गर्व भी महसूस हो रहा था क्योंकि वह तीन बच्चों की मां थी और तीनों जवानी की दहाने पर कदम रख चुके थे उनमें से एक का तो दो-तीन महीने बाद विवाह तय करना था मतलब की 3 महीने बाद वह सास बन जानी थी और इसके बावजूद भी एक जवान लड़का उसे प्यासी नजरों से घर रहा था भला इससे बड़ी गर्व की बात उसके लिए क्या हो सकती थी
अंकित भी अपने बारे में सब कुछ उसे बताता चला गया लेकिन सच्चाई कम झूठ ज्यादा था वह अपने बारे में कुछ भी सच नहीं बोल रहा था क्योंकि वह अपने चरित्र को परदे मे हीं रखना चाहता था उसने उसे औरत को अभी नहीं बताया था कि यहां पर वह अपनी मां के साथ घूमने आया है क्योंकि,, वह नहीं चाहता था कि वह औरत उसे शंका की नजर से देखें,,,, बातचीत का दौर चल ही रहा था कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी और दस्तक की आवाज सुनकर वह औरत अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,)
लगता है खाना आ गया,,,,,(और इतना कहकर वह दरवाजे की तरफ कदम आगे बढ़ा दी,,, दरवाजा खोली तो सामने बैटरी था जो खाना लेकर खड़ा था और मुस्कुरा था वह कमरे में दाखिल हुआ मैच पर खान की प्लेट रखकर औपचारिकता निभा कर वहां से चला गया,,,,, खाना काफी मसालेदार दिखाई दे रहा था साथ में चपाती थी सलाद था और लस्सी का बड़ा-बड़ा गिलास भी था लेकिन साथ में,,, बियर की बोतल भी थी जिसे देखकर अंकित को हैरानी हुई और वह बियर की बोतल की तरफ देखकर उसे औरत की तरफ देखने लगा जो की कुर्सी पर बैठते हुए मुस्कुराते हुए बोली,,,)
चिंता मत करो यार ज्यादा कुछ नहीं ठंडी बीयर है कभी कबार जब मैं इस तरह से घूमने जाती हूं तो अकेले रहती हूं तो पी लेती हूं बड़ा अच्छा लगता है।
कोई तुम्हें खत नहीं,,,।
किसी को पता ही नहीं है तो रहेगा क्या मैं तुमसे कहीं तो घर पर कभी नहीं पीती बाहर कहीं जाती हूं तभी और अकेले रहती हूं तभी अपना यह शौक पूरा कर लेती हूं,,,,
नशा होता होगा।
ज्यादा खास नहीं बस हल्की सी खुमारी छाने लगती है,,,,।
तुम भी ले सकते हो थोड़ा सा,,,।
नहीं नहीं बिल्कुल नहीं,,,,,।
चलो कोई बात नहीं तो तुम लस्सी पी लेना,,,।
(और इतना कहकर दोनों खाना ,खाना शुरू कर दिए,,, साथ में बातचीत का दौर भी शुरू हो चुका था अंकित को उसे औरत से बातचीत करने में बड़ा मजा आ रहा था वह औरत भी बड़ी खुश मिजाज थी,,, बात करते हुए बीच-बीच में वह बियर के केन को मुंह से लगाकर घूंट भर भर कर बियर भी पी रही थी वैसे तो अंकित को बड़ा अजीब लग रहा था लेकिन वह औरत जिस अंदाज से पी रही थी कुछ पल के लिए तो उसका भी मन मचल उठा कि वह भी एक बार टेस्ट करके देखे लेकिन फिर अपने मन को उसने मना लिया,,,,,, अंकित धीरे-धीरे लस्सी पी रहा था खाना खा रहा था,,,,, उस औरत ने तो लस्सी नहीं पी लेकिन जब देखी थी अंकित की लस्सी खत्म हो चुका है तो वह खुद अपनी लस्सी उसकी तरफ आगे बढ़ा दी,,,, पहले तो अंकित इनकार करता रहा क्योंकि वह उसके हिस्से की लस्सी थी वह उसे बार-बार उसे पीने के लिए कहता था लेकिन वह मना कर रही थी और वह अपने हिस्से की लस्सी अंकित को पिलाना चाहती थी और अंकित का मान रखते हुए वह लस्सी के गिलास को अपने होठों से लगाकर बस एक घूंट लस्सी पीकर वह अंकित की तरफ ग्लास बढ़ाते हुए बोली,,,)
लो बस तुम्हारी बात मान ली लेकिन अब तुम्हें भी मेरी बात माननी नहीं होगी लोग यह भी लस्सी पी जाओ क्योंकि मैं बियर पी रही हूं ना इसलिए लस्सी नहीं पी पाऊंगी,,,,।
(उस औरत का अंदाज देखकर और उसकी झूठी लस्सी को खुद पीने के बारे में सोचकर अंकित का लंड खड़ा होने लगा था वह मदहोश हो रहा था वाकई में वह औरत काफी दिलचस्प खूबसूरती के साथ-साथ काफी सुलझी हुई भी थी अंकित को इस तरह की औरतें काफी पसंद थी,,,, उस औरत की बात मानते हुए मुस्कुरा कर अंकित उसके हाथ से लस्सी का क्लास ले लिया लेकिन इस दौरान उसकी उंगली उसे औरत की उंगली से स्पर्श हो गई जिससे अंकित के बदन में हलचल सी मच गई और यह ऐसा शायद उसे औरत के तन बदन में भी हो गया वह भी शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,, अंकित उसकी झूठी लस्सी को पीने लगा इस बात का अहसास होते ही उसे अनजान औरतों के तन बदन में हलचल सी होने लगी,,,,, क्योंकि वह सोची नहीं थी कि उसकी झूठी लस्सी वह पिएगा लेकिन बियर की खुमारी उसकी आंखों में उसके दिलों दिमाग पर छाने लगी थी और न जाने क्यों उसे इस समय एक जवान लड़के के सामने उत्तेजना महसूस होने लगी थी। बातचीत के दौरान उसने अपना नाम भी बताइ अनामिका,,,, जिसे सुनकर अंकित बोला,,,)
वह आपका नाम तो बेहद खूबसूरत है अनामिका मैं पहली बार इस तरह का नाम सुन रहा हूं मुझे बहुत अच्छा लगा आपका नाम और मेरा नाम अंकित है,,,।
अंकित,,,,, वाकई में तुम्हारा नाम में काफी गहराई है तुमसे मिलने के बाद किसी के मन में भी तुम अंकित हो जाओगे ऐसा तुम्हारा चरित्र है,,, मुझे भी तुम्हारा नाम बहुत अच्छा लगा,,,।
(खाना खत्म हो चुका था दोनों ने पेट भर के खाना खाया था लेकिन इस समय अंकित से ज्यादा खुमारी उसे अंजान औरत की आंखों में और उसके बदन में छाई हुई थी वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और अंकित से बोली,,,)
तुम यही बैठो मैं पेशाब करके आती हूं,,,,।(बेझिझक बिना शर्माए उसऔरत ने पेशाब करने वाली बात बोली थी जिसकी अंकित को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी लेकिन उसके मुझे पेशाब करने वाली बात सुनकर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था बाथरूम भी ठीक कुर्सी के पीछे ही था जैसा कि उसके होटल के कमरे में था वह औरत बाथरूम का दरवाजा खोले और बाथरूम के अंदर घुस गई दरवाजा तो उसने बंद की लेकिन दरवाजे की कड़ी नहीं लगे जो की दरवाजा अपने आप ही हल्का सा फिर से खुल गया अंकित सो रहा था कि दरवाजा बंद हो गया इसलिए दरवाजे की तरफ अपने सर घूमाकर देखने लगा था लेकिन उसकी हालत तब खराब हो गई जब देखा कि दरवाजा तकरीबन आधा फीट जितना खुल चुका था,,, और वह औरत उसे साफ दिखाई दे रही थी,,, अब अंकित के मन में गुदगुदी होने लगी वह औरत अपने ही आप में मस्त थी उसे यह पता भी था कि नहीं के दरवाजा खुला है या बंद है वह अपनी साड़ी दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी थी,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि उसे यह नजारा देखना चाहिए कि नहीं देखना चाहिए बड़े कशमकश में उसका मन भरा पड़ा था,,,, क्योंकि उसे औरत के मन में क्या चल रहा है इस बात को अंकित नहीं जानता था,,,, लेकिन अंकित तो अंकित था औरतों के मन में जगह बनाना उसे अच्छी तरह से आता था,,,, अगले पल के खूबसूरत नजारे को देखे बिना उसका मन मानने वाला भी नहीं था। बाथरूम के अंदर वह औरत का मुंह अभी दरवाजे की तरफ था,,,,, अंकित जानता था कि ईस अवस्था में अगर वह बैठेगी तो उसे ज्यादा कुछ खास दिखाई नहीं देगा,,,, क्योंकि वह कुर्सी पर बैठा हुआ था और वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठेगी, साड़ी की वजह से दोनों टांगों के बीच की उसकी पतली दरार दिखाई देने वाली नहीं थी लेकिन फिर भी अंकित के लिए इतना ही बहुत था कि वह उसकी आंखों के सामने बैठकर पेशाब करने जा रही थी।
अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, उम्र दराज होने के बावजूद भी पल की खूबसूरती लिए हुए थी वह, मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करने का हर एक अंग लाजवाब और उठाव लिए हुए था। वह साड़ी अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे उठा रही थी आंखों में अजीब सी खुमारी छाई हुई थी,,, तभी अचानक वह नजर उठाकर अंकित की तरफ देखने लगी अंकित की नजर उसकी नजर से मिल गई दोनों की नजरे आपस में टकराई अंकित तो घबरा गया लेकिन वह मुस्कुरा दी,,,, उसकी मुस्कुराहट अंकित के लिए हरी बत्ती का संकेत था अंकित मन ही मन एकदम से प्रसन्न हो गया क्योंकि उसकी मुस्कुराहट साफ बता रही थी कि वह क्या चाहती है और मुस्कुराने के बाद वह तुरंत दूसरी तरफ घूम गई साड़ी को इस तरह से पकड़े हुए और उनकी समझ गया कि आप उसे क्या दिखाने वाला है उसकी हालत है तुमसे खराब हो गई उसका मन एकदम से मदहोश होने लगा तकरीबन तीन फीट की दूरी पर ही बाथरूम के अंदर एक जवान खूबसूरत औरत हालांकि जवान तो नहीं कह सकते लेकिन जिस तरह से उसकी कद काठी और बदन की बनावट थी जवान औरतों को पानी पिला दे इस तरह की उसकी जवानी निखरी हुई थी,,,, वह अब पेशाब करनेवाली थी,,,, अंकित की जगह कोई भी होता तो उसका भी मन मदहोश हो जाता उसे औरत को पाने के लिए उसका मन मचल उठता और यही अंकित का भी हाल हो रहा था,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा पहले उसे औरत का मुंह उसकी तरफ था लेकिन अब उसकी पीठ उसकी तरफ हो चुकी थी,,, अंकित समझ गया था कि बियर का नशा उसकी आंखों में पूरी तरह से मदहोशी का रस घोल रहा था वह इस बात से अनजान बिल्कुल भी नहीं है कि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है वरना उसे देखकर मुस्कुराती नहीं।
साड़ी धीरे-धीरे उठने लगी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे खूबसूरत नजारे के ऊपर से पर्दा उठ रहा हूं ताकि दर्शक गण उसे अच्छी तरह से देख सके देखते ही देखते उसकी मोटी मोटी जांघें उजागर हो गई,,,, मक्खन जैसी मोटी मोटी केले के तने की जैसी जांघों को देखकर अंकित का मन मचाने लगा उसका ईमान डोलने लगा,,, सांसों की गति उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं थी यही हालत उस औरत की भी हो रही थी उसकी सांसों की गति भी भारी चल रही थी,,, देखते देखते वह अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठाती और कमर तक साड़ी उठते ही उसकी भारी भरकम गोलाई लिए हुए गांड मरुन रंग की पेंटी में कैद नजर आने लगी,,,, और वह अपनी मरुन रंग की पेंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, अंकित का मन कर रहा था किसी समय बाथरूम में घुस जाए और अपनी मनमानी कर ले लेकिन अभी भी वह अपने आप को संभाले हुए था अपने मां पर काबू किए हुए था क्योंकि उसे पक्का यकीन नहीं था कि वह क्या चाहती है उसे ऐसा लग रहा था कि शायद हो सकता है कि बियर के नशे में हुआ ऐसा कर रही हो और अगर वह अंदर जाएगा तो अगर उसे ऐसा कुछ महसूस ना हो और वह शोर मचा दे तब तो लेने के देने पड़ जाएंगे इसलिए वह अपने मन को नियंत्रण में रखकर वहीं बैठे रहकर उस नजारे को देखने लगा,,, पेंटी धीरे-धीरे उतर रही थी,,,, घुटनों तक आने के बजाय वह पूरी तरह से अपनी टांगों में से पेंटी को उतार कर एक तरफ रख दी थी साड़ी के अंदर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, यह सब अंकित को पूरी तरह से हैरान कर दे रहा था कि आखिरकार उसने अपनी पैंटी पूरी तरह से निकल क्यों दी,,,,। फिर देखते ही देखते हो नीचे बैठ गई पेशाब करने के लिए उसकी गोल-गोल नंगी गांड मक्खन जैसी गोराई लिए हुए पूरे बाथरुम में अपनी आप अभी कह रही थी और अंकित की आंखों की चमक के साथ-साथ उसकी वासना को भी बढ़ा रही थी।
अगले ही पल उसकी बुर से सिटी की मधुर आवाज सुनाई देने लगी जिसका मतलब साथ था कि उसके बुरे से पेशाब की धार फूट रही थी अंकित यह मधुर ध्वनि सुनकर पूरी तरह से मचल उठा मदहोश हो गया उसका लंड इस कदर कड़क हो गया कि मानो जैसे पेंट फाड़ कर बाहर आ जाएगा,,, अंकित का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था,,,,, और वह औरत अपने हाथ को अपनी नंगी गांड पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगी और नजर घूमर अंकित की तरफ देखने लगी एक बार फिर से दोनों की नजर आपस में टकराई लेकिन इस बार दोनों की आंखों में वासना दिखाई दे रहा था शर्म बिल्कुल भी नहीं थी,,, दोनों की आंखों में मदहोशी का नशा छाया हुआ था दोनों एक दूसरे की आंखों में डुब जाना चाहते थे,,,, वह अपनी गांड को सहलाते हुए पेशाब कर रही थी और अंकित को अपनी निगाहों से घायल कर रही थी,,, उसकी इस अदाकारी मदहोशी भरी हरकत से अंकित चारों खाने चित हो गया था,,, उसे अब समझ में आ गया था कि वह औरत क्या चाहती है,,, फिर भी वह पहला मौका उस औरत को ही देना चाहता था। दोनों के बीच नैन मटक्का का पूरी तरह से जारी था,,,, देखते ही देखते वह औरत पेशाब कर चुकी थी,, वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई,,,, और फिर बाथरूम से बाहर आ गई,,,, वह मुस्कुरा रही थी उसकी आंखों में चमक दिखाई दे रही थी और यह चमक कोई आम चमक रही थी बल्कि वासना की चमक थी मदहोशी की चमक थी ,किसी को पाने की लालसा थी।
अंकित उसको आजमाना चाहता था देखना चाहता था कि वह क्या करती है इसलिए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और बोला,,,।
खाना खिलाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया अब मुझे चलना चाहिए,,,,,।
बेवकूफ हो क्या,,,,?
बेवकूफ मैं कुछ समझा नहीं,,,!(आश्चर्य जताते हुए अंकित बोला,,,)
इसमें तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है तुम्हारी उम्र का दोस्त है कि तुम कुछ समझ नहीं पा रहे हो अगर थोड़े और बड़े होते तो शायद समझ गए होते,,,।
(अंकीत समझ गया था कि वह किस बारे में बात कर रही है,,, लेकिन फिर भी वह कुछ बोला नहीं,,, और शायद उसने अच्छा ही किया कुछ ना बोलकर क्योंकि वह एकदम से अंकित के कार्यवाही और उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच कर उसके होठों पर अपने होंठ रख दी और एकदम से मस्त हो गई,,,, अंकित तो पहले से ही एकदम उत्तेजित होता वाला था उसे औरत की हरकत को देखा करो अभी कहां पीछे हटने वाला था वह भी तुरंत अपना एक हाथ उसकी कमर में डाला उसे भी कस के अपनी तरफ खींच लिया पेट में बना तंबू साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगा जिसका एहसास उसे पागल बनाने लगा और साथ ही अंकित उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसके होठों का रसपान करने लगा और उसकी चिकनी कमर को दोनों हाथों से कस के पड़कर मसलने लगा,,,,, अपनी बुर पर साड़ी के ऊपर से ही लंड की ठोकर को महसूस करके वह एकदम से मदहोश होने लगी और अपनी कमर को गोल-गोल घूमाकर उस एहसास को और ज्यादा बढ़ाने लगी। अंकित पागलों की तरह उसके होठों का रस पीते हुए,,, अपने दोनों हाथों को उसके गोलाकार नितंबों पर लाकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया उसकी हरकत से वह औरत और ज्यादा मदहोश होने लगी,,,,, वह तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से उसके लंड को पकड़ के और उसकी मोटाई और लंबाई के एहसास को महसूस करके वह बोली,,,)
बाप रे तुम तो पहले से ही तैयार हो गए हो,,,,।
क्या करूं तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा लंड बेकाबू हो गया,,,,(अंकित एकदम से अश्लील शब्दों में बात करते हुए बोला,,,)
मेरा नाम अनामिका है मुझे नाम लेकर बुलाओ,,,,।
ओहहह अनामिका मेरी जान,,,,,।
तुम तो बहुत चालाक हो मैं तो तुम्हें बुद्धू समझ रही थी,,,,।
तुम्हारी गांड देखकर जो बुद्धू बना रहेगा वह सच में बुद्धू ही होगा,,,, तुम्हारा नखरा देखकर ही नहीं समझ गया था कि तुम्हारी बेलगाम जवान को लगाम की जरूरत है,,,,।
और वह लगाम तुम्हारे पास है,,,(इतना कहने के साथ ही हुआ औरत एकदम से घुटनों के बल बैठ गई और अंकित के पेंट का बटन खोलने लगी अंकीत पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था। वह औरत खेली खाई थी कब क्या करना है उसे अच्छी तरह से मालूम था इसलिए वह पल भर में ही उसकी पेंट को खोलकर एकदम घुटनों तक नीचे खींच दी और उसके दमदार लंड को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और वह हैरान होते हुए बोली,,,)
बाप रे इतना मोटा और लंबा मैं तो पहली बार देख रही हूं,,,,। यह तो मेरी बुर फाड़ देगा,,,,।
पहली बार देख रही हो क्या ऐसा,,,।
मैं झूठ नहीं बोलूंगी कसम से अपनी जिंदगी में मैं पहली बार इतना दमदार लंड देख रही हूं आज तो मजा ही आ जाएगा,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिना कुछ सोचे समझे एकदम से लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी अंकित एकदम से मत हो गया अंकित को समझते देर नहीं लगी कि यह औरत कितनी तेज है वह पूरी तरह से बेहतर में बन चुकी थी कल तक वह जिसे सीधी शादी औरत समझ रहा था वह अंदर से पूरी तरह से रंडी थी और सही मायने में देखा जाए तो एक औरत रंडी बनने के बाद ही मर्द को असली मजा देती है,,,, आइसक्रीम कौन की तरह वह गपा गप अपने गले तक अंकित के लंड को लेकर चूस रही थी,,, उसकी चुसाई से अंकित मदहोश हुआ रहा था,,, आंखें बंद हो चुकी थी वह छत की तरफ देखते हुए अपनी कमर को होले होले से आगे पीछे कर रहा था,,,, इस तरह से वह उसे औरत के मुंह को छोड़ रहा था और वह औरत भी अपने लाल-लाल होठों का छल्ला बनाकर होठों का कसाव लंड पर बढ़ा रही थी जिससे अंकित का मजा बढ़ता जा रहा था,,,।
सहहहहह आहहहहह,,,,, अनामिका तुम तो बहुत मस्त हो आज तक ऐसा किसी ने नहीं चूसा तुम तो पूरी खिलाड़ी हो आज बिस्तर पर मजा आएगा आज कोई टक्कर की खिलाड़ी मिली है,,,,ऊममममम आहहहहह पूरा गले तक ले लो,,,आहहहहह बस ऐसे ही मेरी जान,,,,ऊमममममममम,,आहहहहह,,,,,सहहहहहह कसम से तुम बहुत मस्त हो,,,,,ऊमममममममम,,,,
इसी तरह से अंकित मजा लेते रहा पूरे कमरे में सिर्फ इस समय अंकित किसी शिसकारी गुजारी थी वह औरत उसे पूरी तरह से मदहोशी के कगार पर ले आई थी,,,,,, लंड इतना मोटा और लंबा था कि गले तक लेकर उसे औरत की भी हालत खराब हो जा रही थी उसकी आंखों से भी पानी टपक जा रहा था लेकिन फिर भी वह छोड़ने को तैयार नहीं थी शायद वह सच ही कह रही थी कि इतना दमदार लंड उसने अपने जीवन में आज तक नहीं देखी थी इसलिए इतना खेल रही थी,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा फिर वह खुद ही धीरे से लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल दी,,, दोनों की हालत खराब थी दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रही थी अंकित उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और फिर उसे एक बार फिर से कसके अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। और धीरे से उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते ही देखते उसे औरत के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर वह ब्लाउज को अलग कर दिया जिस रंग की वह चड्डी पहनी थी उसी रंग की ब्रा भी पहनी थी ब्रा के ऊपर से ही अंकित उसकी दोनों चूचियों को जोर जोर से दबा रहा था मसल रहा था उस औरत को बहुत मजा आ रहा था,, बरसों के बाद उसे इंसानियत प्राप्त हो रहा था,,,, कुछ देर इसी तरह से दबाने के बाद अंकित एकदम से उसकी बाहों को पकड़ कर उसे दूसरी तरफ घुमा दिया और उसकी पीठ को अपनी छाती से लगाकर कैस के दोनों चूचियों को दबा दबा कर फिर से उसे मजा लेने लगा और फिर ब्रा का होकर खोलकर उसकी ब्रा भी उसके बदन से अलग कर दिया कमर के ऊपर से वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसकी नंगी चूचियां खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी थी लेकिन उम्र के हिसाब से हल्की सी लड़की हुई थी फिर भी इस उम्र में इस तरह की कड़क चूचियां वाकई में एक औरत के लिए गर्व की बात थी।
अनामिका मेरी रानी तुम्हारी चूचिया कितनी बड़ी-बड़ी है इसे दबाने में तो बहुत मजा आ रहा है,,,।
मुंह में लेकर पियोगे तो और ज्यादा मजा आएगा,,(मदहोशी भरी आवाज में वह बोली तो अंकित से रहने क्या वह तुरंत फिर से उसे दूसरी तरफ घूमा लिया, जिससे उसकी चूचीया उसकी आंखों के सामने हो गई और अंकित बिना देर किए उसकी दोनों चूचियों को बारी बारी से अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया,,,,, अब सिसकारी लेने की बड़ी उसे औरत की थी,,,, अंकित की हरकत से स्तन मर्दन से स्तनपान से हो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी।)
सहहहहह आहहहहह,,,,,ऊमममममममम,ओहहहहह मेरे राजा और जोर-जोर से दबा दबा कर पी,,,ऊमममममम,,,,,, बहुत मजा आ रहा है,,,,आहहहहहहहह,,,,,,(अंकित के बालों को सहलाते हुए उसका हौसला बढ़ाते हुए वह बोल रही थी और अंकित दोनों चूचियों पर टूट पड़ा था,,,,, खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों को पीकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था मदहोश हो चुका था,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से उसकी दोनों चूचियों की सेवा करता रहा और अपने हाथ से उसके कमर में बड़ी साड़ी को खोलना रहा देखते-देखते वह उसकी साड़ी को खोल कर साड़ी को नीचे फर्श पर फेंक दिया था,,,, इस समय कमरे के अंदर वह केवल पेटीकोट में थी और अंकित जानता था कि पेटिकोट के अंदर उसने पेंटिं भी नहीं पहन रखी है,,,, अंकित खुद अपने पैरों के सहारे से अपनी पेंट निकाल दिया था,,,,, कमर के नीचे वह भी नंगा हो चुका था और वह औरत एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अंकित के नंगे लंड को पकड़ कर हिला रही थी उसकी गर्मी उसकी बुर को बार-बार पिघला रही थी,,,, अंकित से रहा नहीं जा रहा था उसकी चूचियों से खेलते खेलते अब वह उसे पुरी तरह से नंगी कर देना चाहता था,, उसकी ईच्छा अब उसे नंगी देखने को कर रही थी, इसलिए वह पेटिकोट की डोरी को पकड़कर खींच दिया,, जिससे उसकी कमर पर कसी हुई पेटिकोट की गिठान खुल गई लेकिन कमर से नीचे सरकी नहीं,, उसे नीचे सरकाने के लिए अंकीत को खुद ही अपनी ऊंगलियो का सहारा लेकर उसे कमर से ढीला कर दिया और फिर अपने हाथों से ही उसे नीचे की तरफ सरकारी लगा क्योंकि अपने आप पेटिकोट सरक कर उसके कदमों में गिरने वाला नहीं थी कारण था उसका उठाव लिया हुआ नितंब,, उसका उभारदार नितंब उसके पेटीकोट को एक खुंटे की तरह अटकाया हुआ था,,,, लेकिन अगले ही पल अंकित ने उसके पेटीकोट को भी उसके कदमों में गिरा दिया और वह पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,।
बंद चारदिवारी के अंदर नग्नता औरत का प्रमुख गहना होता है,,, क्योंकि चारदीवारी के अंदर मर्द औरत के पहने हुए गहने नहीं बल्कि नग्नता का गहना देखना पसंद करता है,,, इसलिए पूरी तरह से उसे औरत को नंगी कर देने के बाद अंकित दो कदम पीछे हट गया और ऊपर से नीचे तक उसकी नंगी जवान को देखने लगा और देख के उसके मुंह से आह निकल गया क्योंकि तीन-तीन जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसके बदन की बनावट 30 साल की औरत को भी पानी भरवा दे इस तरह की थी,,,, अंकित उसकी नंगी जवान देखकर उसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाया।
ओहहहहह क्या बात है मैं आज तक तुमसे ज्यादा खूबसूरत औरत नहीं देखा नंगी होने के बाद तो तुम आसमान से उतरी हुई परी लग रही हो,,, कसम से आज तो मजा ही आ जाएगा,,,,।(अपने खड़े लंड को एक हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए अंकित बोल तो उसकी हरकत और उसकी अश्लील बातों को सुनकर उसे औरत की बुर से पानी की बूंद अमृत की धार की तरह नीचे टपक गई,,,, यह देखकर अंकित के मुंह में पानी आ गया और वह उस औरत को धक्का देकर नरम नरम गद्दे पर गिरा दिया,,,,,, उस औरत को लग रहा था कि अब उसकी चुदाई होगी,,, इसलिए वह बेशर्मी दिखाते हुए अपनी दोनों टांगों को अपने आप ही खोल दी थी और उसका जी भर कर स्वागत कर रही थी लेकिन अंकित अपने बाकी के भी कपड़े को निकाल कर पूरी तरह से नंगा हो गया और घुटनों के बाल बिस्तर पर चढ़कर उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया उत्तेजना और मदहोशी के कारण उसे औरत का गला सूख रहा था जिसे वह अपने थुक से गिला करने की कोशिश कर रही थी,,,, सांसों की गति बढ़ती जा रही थी उसके पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौट रही थी,,,, जिसे देखकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी,,,, माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था,, अंकित की किस्मत बड़ी तेज थी उसे यहां आने से पहले नहीं मालूम था कि तो अनजान औरतों के साथ उसकी तरह से मुलाकात होगी उन्हें भोगने का सुख प्राप्त होगा,,, इसलिए अंकित अपनी किस्मत पर इतरा भी रहा था। अपनी आंखों से वह जी भर कर उसे औरत की नंगी जवान को देख लेना चाहता था इसलिए इस अवस्था में भी ऊपर से नीचे तक उसे घुर रहा था वैसे तो होगा औरत पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी लेकिन जिस तरह से अंकित उसे निहार रहा था उसकी आंखों में शर्म दिखाई दे रहा था और अपनी आंखों को बंद कर ली थी अपनी ही बेटे के उम्र के लड़के के साथ वह अपनी नजर नहीं मिला पा रही थी।
खुली खिड़की से शीतल हवा पूरे कमरे को ठंडक प्रदान करने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसे औरत की गर्म कर देने वाली जवानी वातावरण की ठंडक को ऊष्मा में बदल दे रही थी,,, अंकित धीरे से उसकी दोनों टांगों के बीच से अपने दोनों हाथ को लेकर और उसकी कमर को पकड़ कर थोड़ा आगे की तरफ खींच लिया और दोनों हाथों के सहारे से उसके नितंबों को पड़कर उसे हल्का सा ऊपर की तरफ उठा लिया ताकि अपनी क्रिया को वह बड़े आराम से अंजाम तक ले जा सके और देखते ही देखते अपने प्यास होठों को उसकी कचोरी जैसी पूरी हुई बुर पर रख दिया वह औरत एकदम से मचल उठी और अपने आप ही उसकी कमर हल्के से ऊपर की तरफ उठ गई,, उसकी हरकत से साफ पता चल रहा था कि उसे कितना मजा आया था कितना मदहोशी उसके बदन पर छाई थी और अंकित पागलों की तरह उसकी गुलाबी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,, बुर की पतली दरार से बाहर जाती हुई गुलाबी पत्तियों को वह अपनी होठों के बीच लेकर पागलों की तरह चाट रहा था चूस रहा था और वह पत्तियां उसे औरत को अत्यधिक आनंद दे रही थी वह मचल रही थी तड़प रही थी दोनों हाथों से बिस्तर पर बिजी चादर को पड़कर अपनी उद्देश्य न को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह तो बेलगाम घोड़ी थी बेलगाम जवानी की मालकिन थी,,, लाख कोशिश करने के बावजूद भी वह अपनी मदहोशी औरत देखने को काबू में नहीं कर पा रही थी जिसकी वजह से पूरे कमरे में उसकी सिसकारी की आवाज गुंज रही थी और अंकित थकी उसकी तड़प और सिसकारी की आवाज को सुनकर अपनी हरकतों को और ज्यादा बढ़ा दे रहा था जितना हो सकता था उतनी जीभ अंदर की तरफ डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था,,,। उसे औरत का बदन सुगंधा से थोड़ा सा ज्यादा था,,, उसकी चूचियों के साथ-साथ उसकी गांड भी थोड़ी सी बड़ी थी जिसका भोग लेने में अंकित को ज्यादा मजा आ रहा था।
सहहहहह आहहहहह ऊमममममममम,,,,ओहहहहह मेरे राजा तूने तो मुझे पागल कर दिया रे,,,,आहहहहहह कितना मजा आ रहा है बुर चटवाने में,,,,आहहहहहह और अंदर जीभ डाल दे मैं कभी सोचा नहीं थी कि इस उम्र में भी कोई मेरी बुर इस तरह से चाटेगा,,,,,आहहहहहहहह आजीवन का असली मजा ले रही हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के सर पर रख दिया और उसके चेहरे का दबाव अपनी बुर पर बढ़ाने लगी उसकी हरकत से मस्त होकर अंकित पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया चाट चाट कर उसके गुलाबी बुर को लाल कर दिया था,,, उसका मदन रस अंकित के होठों से टपक रहा था उसकी नाक पर लग चुका था उसका चेहरा उसके बदन से भेज चुका था लेकिन फिर भी अंकित पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था शायद इस क्रिया में अंकित को भी ज्यादा मजा आ रहा था और उसे औरत को भी वह औरत रहने कर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी,,,, भारी भरकम शरीर होने के बावजूद भी उसे औरत की स्फूर्ति और ताकत को देखकर अंकित का जोश और ज्यादा बढ़ रहा था। और देखते ही देखते हो उसने अपनी तो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करके हिलना चालू कर दिया और साथ में उसकी चटाई भी जारी रखा। बिस्तर पर घमासान मचा हुआ था। शायद इस औरत ने इस तरह का सुख कभी प्राप्त नहीं की थी ,इसलिए तो अपनी मोटी मोटी जांघों को खोलकर पागल हुई जा रही थी,,,, अंकित उसकी कचोरी जैसी खुली हुई बुर को इसलिए भी पागलों की तरह चाट रहा था क्योंकि उसे पर बल का रेशा तक नहीं था शायद आज ही उसने क्रीम लगाकर अपनी बुर के बाल को साफ की थी,,,, इस उम्र में भी वह सफाई का इतना ध्यान रखती है यह जानकर अंकित का दिल अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था। अंकीत की हरकत के कारण उस औरत का सब्र खोता चला जा रहा था, अपनी जवानी की गर्मी को वह जल्द से जल्द शांत करना चाहती थी इसलिए वह अंकित से मिन्नतें करते हुए बोली।
सहहहहह आहहहहह मेरे राजा मुझसे बर्दाश्त नहीं होता जल्दी से अपना लंड मेरी बुर में डाल दे मेरी बुर की गर्मी बढ़ती जा रही है अब यह तेरी उंगली से शांत होने वाली नहीं है,,,,ऊमममममम,आहहहहहह जल्दी से चोद मुझे,,,,,,,आहहहहहहहह,,,,.
(उस औरत की तडप देखकर अंकित की भी हालत खराब हो रही थी वह भी जल्द से जल्द अपने मोटे तगड़े लंड को औरत की गुलाबी बुर में डाल देना चाहता था,,,,, और वैसे भी लोहा गर्म हो चुका था बस हथौड़ा मारने की देरी थी,,,,, अंकित भी धीरे से उसके बुर के मदन रस से सने हुए अपने चेहरे को उसकी बुर से अलग किया,,,और उस औरत की तरफ प्यासी नजरों से देखने लगा उसके चेहरे पर अपनी बुर की मलाई लगी हुई देखकर वह शर्म से पानी पानी हो गई उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और अंकित भी उसके लाल-लाल होठों को देखकर एक बार फिर से उसकी तरफ झुका और उसकी ही मलाई से सने अपने होठों को उसके होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,, उसे औरत ने भी अपनी बुर की मलाई को चाटना शुरू कर दी उसके होठों को पीना शुरू कर दी अंकित का लंड बार-बार उसकी बुर पर फिसल रहा था,,, जिससे अंकित को तो मजा आ रहा था लेकिन वह औरत तड़प जा रही थी क्योंकि उसके लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी गुलाबी पत्तियों से रगड़कर दूसरी तरफ फिसल जा रहा था जबकि वह जाती थी कि उसका लंड उसकी बुर में घुस जाए चार-पांच बार जब इस तरह से उसका लंड अपने आप फिसल कर इधर-उधर भागने लगा तो उसे रहा नहीं गया और वह अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ कर उसके बैगनी सुपाड़े को अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी अंकित को उसकी बुर का कसाव एकदम साफ महसूस हो रहा था,,, और शायद ऐसा भी हो सकता था की पहली बार इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में प्रवेश कर रहा था,,, लेकिन अंकित को मजा आ रहा था। लंड बुर की अंदरूनी दीवारों में रगड़ता हुआ अंदर की तरफ जा रहा था और यह रगड़ अंकित और उस औरत को दोनों को बेहद आनंदित कर दे रही थी,,, औरत तो जीवन में पहली बार इतनी मोटी और लंबे लंड को अपनी बुर में लेकर मदहोश सी हो गई थी पहली बार उसे ऐसा लग रहा था कि वाकई में कोई मर्दाना लंड उसकी बुर में जा रहा था,,,,।
आंखों को बंद करके हुआ इस पल का मजा लूट रही थी इस एहसास को अपने अंदर बटोर रही थी और अंकित उसकी मदहोश कर देने वाली पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों पर लेटे हुए अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में उतार चुका था और फिर धीरे से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठकर फिर से धप्प से नीचे मार दिया था एक बार फिर से अंकित का लंड उसकी बुर में घुस गया था ऐसी क्रिया वह बार-बार लेकिन धीरे-धीरे कर रहा था उसे औरत की तड़प और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी उसकी गुलाबी पतली दरार छल्ला नुमा हो चुकी थी,,,, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि आज उम्र के इस पड़ाव पर उसके गुलाबी बुर का द्वारा पूरी तरह से खुल चुका था,,,, उसकी गर्दन पर चुंबनों की बारिश करता हुआ धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ा रहा था और वह औरत अपनी मोटी मोटी जांघों को फैलाए हुए उसके हर एक धक्के को सह रही थी। धीरे-धीरे कमरे में फचार फचार की आवाज गूंजने लगी यह आवाज उसे औरत की ओर से निकले हुए मदन रस और अंकित के लंड के गुत्थमगुत्था होने से निकल रही थी। इस तरह की आवाज काफी हद तक दोनों को मदहोश कर रही थी। अंकित उसकी आंखों में देखते हुए धीरे से बोला।
अब कैसा लग रहा है मेरी जान,,,,(अपने बेटे की उम्र से अपने लिए जान शब्द सुनकर वह पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन जिस एहसास में वह डूबी हुई थी उसे एहसास को बताना भी जरूरी था इसलिए वह जवाब देते हुए बोली)
मैं कभी सोची भी नहीं थी कि किसी का लंड इतना लंबा और मोटा भी हो सकता है,,, मैं तो सच में धन्य हो गई तेरे लंड को अपनी बुर में लेकर,,,आहहहह आहहहहह ,,,(उसकी ऐसी मदहोशी भरी बात को सुनकर अंकित से रहा नहीं जा रहा था और वह जल्दी-जल्दी धक्का मारना शुरू कर दिया जिससे उसकी आह निकल जा रही थी,, उसकी बात सुनकर अंकित भी बोला,,,)
सच कहूं तो मैं भी कभी सोचा नहीं था कि तीन-तीन बच्चों की मां का बदन इतना खूबसूरत हो सकता है सच में तुम्हें कोई देख ले तो उसका लंड खड़ा हो जाए नंगी होने के बाद तो तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो तभी तो आज मेरी हालत खराब हो गई और तुम्हारी बुर किस उम्र में भी अंदर से कितनी गर्म है ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं बुर में नहीं बल्कि किसी भट्टी में अपना लंड डाल रहा हूं,,,, मेरी जगह कोई और होता तो अह तक उसका पानी निकल गया होता,,,,
तू बिल्कुल सच कह रहा है मैं भी हैरान हूं कि तेरा तक पानी नहीं निकला कसम से तू ही असली मर्द है जिसकी भी तेरी शादी होगी वह तो तुझे पाकर एकदम धन्य हो जाएगी,,,।
तुम धन्य हुई क्या मेरी जान,,,।
पूछ मत मेरे राजा की आज मैं कितनी खुश हूं अच्छा हुआ तेरे से मुलाकात होगी वरना असली सुख में कभी अपने जीवन में भोग ही नहीं पाती,,,,,आहहहहह आहहहहह ऊमममममम आहहहहहह मेरे राजा,,,,,
यह बात है तब तो तुम आज की चुदाई जिंदगी भर याद रखोगी,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित उसे करके अपनी बाहों में भरकर जोर-जोर से धक्के पर धक्का लगना शुरू कर दिया अब तो उसे औरत की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी उसके तेज धकको को वह सह नहीं पा रही थी उसके मुंह से आह आहहह की आवाज निकल रही थी और इस तरह की आवाज इस बात का सबूत था कि उसे बहुत मजा आ रहा था भले ही वह अंकित के धक्को को सह नहीं पा रही थी लेकिन जो आनंद उसे प्राप्त हो रहा था वह उसे पूरी तरह से मदहोश कर रहा था। यह चुदाई अंकित को भी जिंदगी भर याद रहने वाली थी वह कभी सोचा नहीं था किस तरह से किसी औरत को छोड़ने का सबसे प्राप्त होगा और वह भी बैंक कर्मचारी की,,,बुर का कसाव अंकित को भी मदहोश बना रहा था अंकित बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था मोटी मोटी जांघों से उसकी जांघें टकरा रही थी,,। कुछ देर तक किसी अवस्था में चुदाई करने के बाद धीरे से अंकित घुटनों के बल बैठ गया हालांकि अभी भी उसका लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था वह अपने लंड को बिल्कुल भी उसकी बुर से निकल नहीं रहा था और फिर आने पर रखा हुआ तकिया उठाकर वह उसकी गांड के नीचे लगाने लगा तो वह भी अपनी गांड को ऊपर उठा ले उसकी गांड थोड़ी सी ऊपर आ गई और इस अवस्था में अंकित उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर से लपेटकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, वह औरत अंकित के अद्भुत काम शैली को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी,,, आज तक उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह अच्छे-अच्छे का पानी निकाल देती है लेकिन आज उसके ही बेटे के उम्र का लड़का उसका पानी नीचोड़ रहा था। खिड़की से ठंडी ठंडी हवा कमरे में बराबर आ रही थी लेकिन फिर भी दोनों के बदन से पसीना टपक रहा था।
अंकित खेल में अच्छी तरह से माहिर हो चुका था इसलिए वह जानता था कि औरत को कैसे सुख दिया जाता है बिना थके बिना हारे,,,, तभी तो एक औरत मर्द की दीवानी हो जाती है,,,, तभी अंकित के धक्को को अपनी बुर की गहराई में महसूस करके उसका बदन मचलने लगा,,,,, उसकी आंखें बड़ी-बड़ी होने लगी और उसके चेहरे का रंग एकदम लाल होने लगा और वह बोली,,,,।
आहहहह आहहहहहह और जोर से जोर-जोर से धक्के लगा मेरे राजा मेरा निकलने वाला है मेरा होने वाला है मैं कभी सोचा नहीं था कि कोई जवान लड़का इस तरह से मेरी चुदाई करेगा मैं तो पागल हो जाऊंगी मेरा पानी निकलने वाला है,,,,,आहहहहहहहह जोर-जोर से मेरे राजा और जोर-जोर से फाड़ दे मेरी बुर को ,,भोसड़ा बना दे,,,आहहहहहहहह,,,
(अंकित समझ गया था किसका पानी निकलने वाला है यह झड़ने वाली है इसलिए उसका साथ देते हुए वह फिर से अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ के नीचे लेकर और उसे करके अपनी बाहों में भरकर अपनी कमर को जोर-जोर से उसकी बुर पर पटकने लगा और देखते ही देखे उसका बदन अंकीत की बाहों में अकड़ने लगा,,, और वह झड़ने लगी,,,,,, झड़ते समय वहां बेहद मासूम लग रही थी अंकित को उसे पर और ज्यादा प्यार आ रहा था वह उसके होठों पर अपने होठकर उसके फोटो का रसपान करते हुए उसके स्खलन का मजा ले रहा था,,,, हालांकि अंकित अपने धक्कों की गति को बिल्कुल भी कम नहीं किया था,,,, थोड़ी देर में उसका बदन एकदम तुमसे ढीला पड़ने लगा,,,, वह पूरी तरह से झड़ चुकी थी उसके बटन में दम नहीं रह गया,,, और झड़ने की वजह से उसकी बुर की चिकनाहट बढ़ चुकी थी और रगड़ का एहसास थोड़ा काम हो रहा था इसलिए अंकित भी कुछ पल के लिए अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाला और उसके ही पेटीकोट से उसकी बुर की मलाई को साफ करने लगा ताकि दोबारा लंड जाए तो रगड़ महसूस हो,,,, वह औरत अंकित की काबिलियत को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी एक औरत को खुश करने का तरीका वह अच्छी तरह से जानता था,,, इससे ज्यादा भला एक औरत मर्द से क्या चाहत रख सकती है,,, जो मर्द खुद ही एक औरत को अच्छी तरह से खुश करना जानता हो हर सुख देना जानता हो। अंकित पेटीकोट से अच्छे से उसकी बुर की मलाई साफ करने के बाद मुस्कुराता हुआ उसकी तरफ देख कर बोला।)
बस मेरी रानी अब पलट जाओ पीछे से तुम्हारी चुदाई करूंगा,,,,।
(अंकित की बात सुनकर उसे औरत को थोड़ा शंका हुआ कि वह पीछे से उसे अच्छी तरह से नहीं चोद पाएगा क्योंकि पीछे से उसकी गांड बड़ी-बड़ी होने के कारण लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई तक नहीं पहुंच पाता था अब तक तो उसके साथ ऐसा ही हो रहा था लेकिन वह कुछ बोली नहीं वह भी देखना चाहती थी कि अंकित क्या कर लेता है क्योंकि पीछे से करवाने में उसे भी बहुत मजा आता था लेकिन वह आज तक पीछे से असली सुख प्राप्त नहीं कर पाई थी और अंकित के कहते ही वह बिस्तर पर पलट गई और घोड़ी बन गई बिस्तर के किनारे अपनी दोनों टांग नीचे लटका कर वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में ऊपर उठा दी थी ,,,, इसकी भारी भरकम गोल-गोल गांड को तोप की तरह उठी हुई देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह उसकी गोरी गोरी गांड पर दो-चार शपथ लगाकर उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,, वह औरत अंकित की हरकत पर कुछ बोल नहीं पाई और अंकित अपने लंड पर अपना थूक लगाकर उसे गीला कर लिया और थोड़ा सा थुक उसके गुलाबी छेद पर भी लगा दिया,,,, और एक नए अनुभव के लिए पीछे से वह अपने लंड को उसकी गुलाबी बुर में डालने लगा लंड फिर से धीरे-धीरे अंदर की तरफ सड़क गया और अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर फिर से धक्का लगना शुरू कर दिया वह औरत एकदम से हैरान हो गई क्योंकि पीछे से भी बड़े आराम से उसका लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा था बल्कि हर एक धक्का उसके बच्चेदानी से टकरा रहा था,,,, उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि आज उसके बरसों की अभिलाषा भी पूरी होने वाली थी वह फिर से मदहोश और उत्तेजित होने लगी,,,,।
उसे खुश करने में अंकित कोई भी कसर बाकी नहीं रख रहा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर चउत लगाता हुआ वह आगे बढ़ रहा था,,,, वह रह रहकर धीरे से अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और इस समय इस अवस्था में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां लगाम का काम कर रही थी और उसे औरत को भी मजा आ रहा था,,,,, देखते ही देखते घड़ी में तीन का समय हो चुका था समय इतनी जल्दी कैसे गुजर गया दोनों को पता ही नहीं चल रहा था वाकई में चुदाई का जो आनंद है वह किसी और चीज में नहीं मिलता जिसमें इंसान अपना पूरा वक्त भूल जाता है और बस सुख प्राप्त करने में लगा रहता है और यही इस समय अंकित और वह औरत कर रही थी। अंकित पीछे से पूरी तरह से उस औरत पर छा चुका था दोनों को देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे घोड़ी के ऊपर घोड़ा चढ़ गया हो,,, गरमा गरम शिसकारी की आवाज फिर से कमरे में गुंजने लगी,,,, तकरीबन इस अवस्था में 25 मिनट की और जमकर चुदाई करने के बाद अंकित और वह औरत एक साथ झड़ने लगे,,,,, झड़ने के बाद अंकित भी पस्त हो चुका था और उसके ऊपर ही पसर गया,,,,,,,, उसे औरत ने तो जिंदगी में आज अद्भुत सुख की प्राप्ति की थी वह कभी सोचा नहीं थी कि चुदवाने में वाकई में इतना अत्यधिक आनंद मिलता है आज कुछ ज्यादा ही उसे मजा मिल गया था,,,,,।
थोड़ी देर बाद अंकित अपने लंड को उसकी बुर में से बाहर निकाला जो कि अभी भी खड़ा ही था ज्यादा लचक पन उसमें नहीं आया था यह देखकर तो वह और भी ज्यादा हैरान हो गई थी,,, अंकित धीरे से बाथरूम में चला गया और पेशाब करने लगा तब तक वह सीधी हुई और पीठ के बल लेट कर गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,, पेशाब करने के बाद अंकित बाथरूम के दरवाजे तक आया और दीवार का सहारा लेकर मुस्कुरा कर उसे औरत की तरफ देखने लगा वह भी अंकित की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी,,, अंकित अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा और बोला।
बताओ ऐसा मजा कभी मिला था?
बिल्कुल भी नहीं,,, मैं तो कभी सोचा भी नहीं थी कि इसमें इतना ज्यादा मजा भी आता होगा जितना मजा आता था बस उसने ही लेती थी लेकिन आज शायद मेरी औकात से ज्यादा मुझे आनंद मिल रहा है,,,।
समय नहीं है नहीं तो आज एक ही दिन में तुम्हें चांद तारे सब दिखा देता,,,(ऐसा कहते हुए वह बिस्तर के पास आया और पीठ के बल लेट गया,,, मौका देखकर उसे औरत ने भी हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ली और उसे हल्के हल्के हिलाते हुए बोली,,,)
तुम सच कह रहे हो हमें थोड़ा और पहले मिलना चाहिए था 5:00 बजे तो मैं यहां से चली जाऊंगी और 3:30 बज चुके हैं,,,।
तुम ही सोचो में 11:00 बजे यहां पर आया हूं और 3:30 बज चुके हैं इस बीच सिर्फ तुम्हारी एक ही बार चुदाई हुई है,,, और एक ही बार में तुम पूरी तरह से मस्त हो गई हो अगर पूरा दिन मिले तो सोचो क्या हो जाएगा,,,,।
मैं भी यही सोच रही हूं। और पछता भी रही हूं इतना अच्छा मौका मिला है और आज ही मुझे जाना भी है,,,।
आज रात तक नहीं रुक सकती,,,
बिल्कुल भी नहीं,,,(लंड को हल्के हल्के हिलाने से वह पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था एकदम कड़क हो गया था,,,, उसकी गर्मी और उसके कडप्पन को अपनी हथेली में महसूस करके एक बार फिर से वह मदहोश होने लगी और इससे आगे कुछ बोले बिना ही वह एकदम से उठकर बैठ गई और झुक कर लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, अंकित फिर से मस्त होने लगा और वह हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,, दोनों फिर से मदहोश होने लगे लेकिन इस बार वह औरत पूरी तरह से कमान संभाल लेना चाहती थी,,, और वह खुद अंकित के लंड पर सवार होके और उसके कंधे पर हाथ रखकर अपनी गांड को जोर-जोर से उसके लंड पर पटकना शुरू कर दी,,, अंकित को इससे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता था तरबूज चाकू पर गिरे या चाकू की तरबूज पर,कटने वाला तो तरबूज ही था और इसके बाद मजा ही मजा उसे औरत की इस क्रिया से भी अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी अंकित उसकी कमर पकड़ लेता था तो कभी उसकी चूची दबा देता था तो कभी उसे अपनी तरफ झुक कर उसके होठों को चूमने लगता था और यह सिलसिला तकरीबन 15 मिनट तक और चला और दोनों एक बार फिर से झड़ गए,,, समय भी काफी हो चुका था अंकित को अपने होटल पहुंचना था वरना उसकी मां परेशान हो जाती क्योंकि वह तीन-चार घंटे से अपने होटल से गायब था बिना बताए,,,।
वह औरत बाथरूम में चली गई और पेशाब करने लगी उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज अंकित को साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर वह मुस्कुरा रहा था इसके बाद वह बाहर निकली और कपड़े पहने लगी अंकित तब तक कपड़े पहन चुका था,,,, अंकित बात ही बात में उससे पूछा,,,।
यहां पर कोई अच्छी जगह है घूमने लायक,,,,।
हां जरूर है यहां से तकरीबन पांच छः किलोमीटर की दूरी पर एक झरना है जिसे देखने के लिए लोग ऊपर तक जाते हैं वहां से खूबसूरत नजारा दिखाते हैं बहुत खूबसूरत जगह भी है तुम घूमना चाहो तो वहां घूम सकते हो मुझे तो आज जाना है वरना मैं तुम्हें घुमा देती,,,।
कोई बात नहीं,,,, तुमने तो मुझे स्वर्ग का सुख प्रदान की हो,,,,।
(यह सुनकर वह मुस्कुराने लगी अंकित गई मुस्कुरा दिया और फिर जाते-जाते उसे एक बार फिर से अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का चुंबन किया और वहां से निकल गया,,, जब अपने होटल के कमरे में पहुंचा तो उसकी मां बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी उसे देखते ही सवालों की झड़ी लगा दी अंकित एकदम शांत होकर जवाब देते हुए बोला,,,)
तुम सो रही थी इसलिए मैं तुम्हें जगाना ठीक नहीं समझा और इधर-उधर घूमता रहा मुझे एक नहीं बताया कि यहां से 5 से 6 किमी की दूरी पर एक खूबसूरत चलना है वहां पर लोग घूमने के लिए जाते हैं हम लोगों को भी वही चलना चाहिए घूमने के लिए,,,।
अब आज तो नहीं हो पाएगा कल चलते हैं,,,।
कोई बात नहीं चल चलेंगे,,, तुम खाना खाई कि नहीं,,,।
खाना नहीं खाए बस चाय नाश्ता की हुं,,,।
अभी खाना है तो मंगवा लो,,,।
नहीं नहीं ऐसे भी मुझे अभी भूख नहीं है अब रात को ही खाएंगे,,,,।
(इतना कहकर बा बालकनी में आकर कुर्सी पर बैठकर बाहर का नजारा देखने लगी और अंकित भी पास में ही पड़ी कुर्सी पर जाकर बैठ गया उसकी मां को सख्त नहीं हुआ कि यह तीन-चार घंटे से कहां था किसके साथ था,)