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Incest माँ बेटा इक दूजे के सहारे (completed)

netsunil

मैं काग़ज़ बेरंग.. तू रंगरेज़ मेरे अल्फ़ाज़ों का
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Bhanu Pratap Singh

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बहुत ही मस्त और शानदार अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
Hi
 
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dark_devil

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शाम को जब माँ सोफे पर बैठे थी तो मैंने उनसे बात की. मैंने उनसे माफ़ी मांगते हुए कहा- मॉम मुझसे ग़लती हो गई

… आगे से ऐसा नहीं होगा.

माँ चुप रही. वो कुछ सोच में थी.

मैंने माँ के दोनों हाथ अपने हाथों में पकड़ लिए और माँ से कहा.

"माँ मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ. गुस्सा न हो कर प्लीज मेरी बात शांति और ध्यान से सुने. मैं आज के वाकये पर बहुत शर्मिंदा हूँ. मुझे सच में ऐसा नहीं करना चाहिए था. जो भी हुआ गलत हुआ. पर माँ आप ही सोचो मैं भी क्या करूँ. मेरे उम्र ३२ साल हो गयी है. मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं की मैं रोज रोज किसी रंडी से अपना जोश उतार सकूँ. न ही मेरी शादी हो रही है. हम गरीब हैं इस लिए कोई रिश्तेदार मेरी शादी की लिए उत्सुक नहीं है. कोई भी आदमी अपनी बेटी मुझ से ब्याहना है चाहता. पर मेरी भी तो कुछ शारीरिक जरूरतें हैं. मैं क्या करु और जाऊँ तो कहाँ जाऊं। मुझे एक औरत के शरीर की बहुत चाहना होती है. पर गरीब होने के कारन कुछ कर नहीं सकता. "

माँ चुप रही. वो मेरी स्थिति समझ सकती थी पर वो बेचारी भी क्या करती.

मैं फिर बोला

"माँ. मैं जानता हूँ की जैसी मेरी स्थिति है ठीक वैसी ही हालत आप की भी है. आप भी एक मर्द के शरीर के लिए तरस रही है. आप भी अभी बहुत सुन्दर और जवान है. और आप तो पिछले १० साल से विधवा हैं. आप भी मेरी तरह चाहती है की आप की शारीरिक जरूरतों को कोई मर्द पूरा करे. मैंने आप को बहुत बार बाथरूम में अपनी उँगलियों से अपनी काम इच्छा रगड़ते देखा है. मैंने आप को कितनी ही बार खीरे या मूली से अपने आप को शांत करते देखा है. "

माँ की आँखें हैरानी से खुली रह गयी. वो नहीं जानती थी की मुझे उन की इस गुप्त काम क्रियाओँ के बारे में पता है. उन होने मुझे रोकने और न करने के लिए मुँह खोला ही था पर मैंने उन्हें बोलने से पहले ही आगे बोलते हुए कहा.

"माँ इतना ही नहीं मैंने कई बार आप और आप की सहेलियों की बातें भी सुनी हैं. जब आप कहती थी की आप का चुदवाने का बहुत मन कर रहा है. माँ मैं जानता हूँ की जैसे मैं सेक्स के लिए तड़प रहा हूँ. आप भी मेरी तरह ही सेक्स की भूखी है और तड़प रही है. पर हम दोनों के पास अपनी इस समस्या का कोई समाधान नहीं है. न ही मैं किसी औरत को चोद सकता हूँ और अपनी सेक्स की भूख मिटा सकता हूँ और न ही आप किसी बाहर के आदमी से अपनी सेक्स की इच्छा पूरी कर सकती है. और गरीब होने के कारन ऐसा कोई रास्ता भी दिखाई नहीं दे रहा की आने वाले समय में कुछ हो सकेगा. ऐसा लगता है की भगवान ने हमे किसी गहरी खाई में धकेल दिया है. जहां कोई रास्ता नहीं है. हम दोनों जाएं तो जाएँ कहाँ. "

मैं जोश में चुदाई जैसे शब्द बोल गया पर माँ ने शायद उस पर ध्यान ही नहीं दिया. वो तो हैरान और चुप चाप बैठी रही.

माँ को शांत और चुप देख कर मैं फिर से बोला

"माँ इस जीवन में हम दोनों माँ बेटा एक दूजे के सहारे ही है. अब अपना जीवन हम दोनों को इक दूसरे के सहारे और साथ में ही गुजारना है. हमे अपनी समस्याओं का समाधान भी खुद ही ढूंढ़ना होगा. और कोर तीसरा हमारी मदद करने वाला नहीं है.

माँ अब मैं जो कहने जा रहा हूँ, आप प्लीज गुस्सा मत होना और जरा शांति से मेरी बात सुन्ना. और फिर शांति से उस पर विचार करना और फिर कोई निर्णय लेना. मुझे कोई जल्दी नहीं हैं. आप जो भी निर्णय लेंगी मुझे मंजूर होगा. "

माँ चुपचाप मेरी ओर देखती रही. उसे कोई आईडिया नहीं था की मेरे मन में क्या है.

मैं माँ को प्यार से देखते हुए बोलै.

"माँ हम दोनों को भगवान ने एक दूसरे के सहारे ही छोड़ दिया है. अब इस जीवन में हम माँ बेटा हर चीज के लिए एक दुसरे के सहारे हैं. चाहे वो पैसा हो, कोइ काम हो, कहीं आना जाना हो , बीमारी हो या जीवन की कोई भी इच्छा या जरूरत हो तो हम दोनों ही एक दुसरे का सहारा है. और हम दोनों ही सेक्स के लिए तड़प रहे हैं. जब भगवान ने हमे एक दुसरे की मदद करने को रखा है तो शायद भगवान् ही चाहता है की हम दोनों ही सेक्स के लिए भी एक दुसरे का सहारा बने. और एक दुसरे के सेक्स की जरूरत पूरी करें. घर में हम दोनों ही हैं तो किसी को कानो कान पता भी नहीं चलेगा और हम दोनों एक दुसरे से सेक्स भी कर सकेंगे."

माँ मेरी बात सुननते ही गुस्से से भड़क गयी और एकदम गुस्से में खड़ी हो गयी और बोली

"तेरा दिमाग तो खराब नहीं हो गया है. तुजे मालूम भी है की तू यह क्या कह रहा है."

माँ गुस्से से कांप रही थी.

मैंने माँ को शांत करते हुए कहा.

"माँ बैठ जाओ और शांति से मेरी बात सुनो. देखो हमें सब रिश्तेदारों ने छोड़ दिया है. कोई भी हमारी मदद नहीं करता. हर दुःख सुख और जरूरत के लिए हम दोनों को एक दूजे का हे सहारा है. मेरी शादी का कोई चांस नहीं है. मैं कब तक अपने हाथों से मुठ मारता रहूँगा. और आप का तो कुछ भी नहीं हो सकता. आप की तो अब कोई शादी भी नहीं होगी. आप के बातें मैंने सुनी है (सहेलियों के साथ ), आप सेक्स के लिए कितना तड़प रही है. मैं अच्छी तरह जानता हूँ. आप क्या सारी जिंदगी चुदाई के लिए ऐसे ही तड़पती रहोगी. क्या सारी उम्र अपनी उँगलियों या खीरे मूली से ही अपनी तड़प शांत करती रहोगी. क्या आप नहीं चाहती की आप की भी अच्छी तरह से चुदाई हो. आप के पास मेरी इस बात के इलावा क्या कोई और रास्ता है जिस से आप और मेरी काम सेक्स की जरूरत पूरी हो सके। माँ आप शांति से सोच कर कोई निर्णय लें. मुझे आप के निर्णय का इन्तजार रहेगा. एक तरफ है इसी तरह सारी जिंदगी तड़प तड़प कर मुठ मार मार कर जीवन गुजारना और दूसरी तरफ है एक दुसरे का साथ. और जिसमे है रोज की जबरदस्त चुदाई और प्यार. हम दोनों माँ बेटा है तो किसी को शक भी नहीं होगा और हम खुल कर चुदाई कर सकेंगे. मैं आप को मजबूर नहीं कर सकता पर आप शांति से सोच कर अपने निर्णय मेरे को बता देना "

(मैं जोश में चुदाई मुठ मारना जैसे खुले शब्द बोल गया पर माँ ने शायद उस ओर ध्यान ही नहीं दिया और चुप चाप बैठी रही.)

यह बोल कर मैं उठ कर अपने कमरे में चला गया और माँ किसी गहरी सोच में डूबी हुई सोफे पर पत्थर की मूर्ती की तरह बैठी रही.

मैं माँ को बोल कर अपने कमरे में चला गया पर माँ किसी पत्थर की मूर्ती की तरह चुपचाप बैठी रही. शायद मेरी बात उनके लिए किसी वज्रपात से कम नहीं थी। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था की उनका अपना बेटा ही उन्हें चोदने और आपस में ही सेक्स भरा जीवन बिताने का ऑफर देगा.

शाम को भी माँ ने मेरे से कोई बात नहीं कृ. बस वो चुपचाप घर का काम करती रही.


खाना खाने के टाइम भी हमारे बीच में कोई बात चीत नहीं हुई. एक भोजल सी ख़ामोशी हमारे दरमियान छाई रही. .
👌
 

sam00023

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खाना खाने के बाद मैं चुपचाप अपने कमरे में जा कर लेट गया। मैंने एक लुंगी पहन रखी थी और ढीला सा कच्छा पहना था ताकि रात में मुझे मुठ मारने में दिक्कत न हो.

माँ भी किचन का काम निबटा कर अपने कमरे में जा कर लेट गयी.

मेरा दिल तो बहुत देर से बहुत तेज तेज धड़क रहा था. पर जब माँ अपने कमरे में जा कर लेट गयी और उनके कमरे की लाइट भी बंद हो गयी तो मेरा दिल भुज गया. मुझे लग रहा था की मैंने अपनी माँ से सेक्स सम्भन्ध बनाने की बात करके गलती कर दी है. मेरा तो आज मुठ मारने का भी मन नहीं कर रहा था.

मुझे नींद नहीं आ रही थी.

इसी तरह रात के ११ बज गए.

मैं सोने ही जा रहा था की अचानक मेरे कमरे के दरवाजे पर कुछ आवाज हुई. मैंने सर घुमा कर देखा तो दरवाजा धीरे धीरे खुल रहा था.

मेरा दिल इतनी जोर से धड़कने लगा की जैसे मेरा तो हार्ट अटैक ही आ जायेगा.

दरवाजे से मेरी माँ जिसने एक ढीला सी मैक्सी पहन रखी थी अंदर आयी.

कमरे में खिड़की से बाहर से थोड़ी रौशनी आ रही थी जिस से सब कुछ ठीक से दिखाई दे रहा था.

माँ ने मेरी तरफ देखा और मेरे बेड के पास आ गयी. मैं भी अपलक माँ की तरफ ही देख रहा था.

मैं माँ की ओर देख रहा था मैने अपनी आँखें अपनी माँ की आँखों की तरफ की और उनकी आँखों में देखा.

माँ की आँखों में बेइंतेहा शर्मा की लाली थी. माँ ने शर्म से अपनी आँखें झुका ली. वो मेरी ओर ज्यादा देर तक न देख सकी.

मैं माँ को देखते हुए मुस्कुरा रहा था. और माँ बहुत ही शर्मा रही थी. मैंने माँ को बैठने या लेटने के लिए कुछ न कहा और आराम से अपने बीएड पर लेटा रहा. तो माँ बेचारी आइए ही कड़ी रही. मैं शरारत से मुस्कुरा रहा था.

माँ भी चुप थी. अब वो वापिस भी नहीं है सकती थी. जब मैंने उन्हें बैठने या लेटने को न कहा तो माँ ने आखिर अपनी चुप्पी तोड़ी और मुझे बोली

माँ ने मुझे देखते हुए कहा।

"थोड़ा परे को तो सरक मुझे भी लेटने के लिए थोड़ी जगह दे. देख कैसे अकेला ही पूरा बेड घेर कर लेटा है. "

कहते हुए माँ के होंठों पर एक शरारती सी मुस्कान थी.

मैंने फटाफट पीछे को हो कर माँ के लेटने के लिए जगह बनाई।

खाली जगह में माँ मेरे साथ लेट गयी.

मेरा दिल धड़क रहा था. लगता था माँ ने कोई निर्णय कर लिया है और हम दोनों माँ बेटे के जिंदगी खुशियों से भरने वाली है.

माँ बिलकुल मेरे साथ ही लेटी थी. हमारे शरीरों के बीच में मुश्किल से ६ इंच का फासला था.

माँ का दिल भी इतने जोर से धड़क रहा था कि उनके दिल के धड़कने की आवाज मुझे साफ सुनाई दे रही थी. शायद मेरे तेज तेज धड़कते दिल की आवाज मेरी माँ को भी सुनाई दे रही हो.

यह हमारे जीवन का एक बहुत ही नाजुक और महत्वपूर्ण क्षण था. जो हमारे आने वाले जीवन की दिशा बदल देने वाला था.

मैंने माँ से प्यार से पूछा

"माँ क्या आप ने मेरी बात पर कुछ गौर किया.? आप ने क्या निर्णय लिया है?"

जवाब में माँ कुछ नहीं बोली. उनकी गालें शर्म से लाल हो रही थी. शर्म से उनसे कुछ कहा नहीं जा रहा था. बस उन्होंने आगे बढ़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूमने लगी.

माँ का उत्तर बिलकुल स्पष्ट था. मैंने भी अपने होंठ खोल दिए और माँ के होंठों को अपने होंठों के बीच दबा कर चूसने लगा.

मैंने फिर अपना चेहरा पीछे किया और शरारती सी मुस्कान में कहा

"माँ बताओ न आप का क्या निर्णय है. क्या मैं आप की हाँ समझूँ ?"

हालाँकि अब सब स्पष्ट ही था. माँ ने मेरे कमरे में आ कर और मेरे होंठों को चूम कर सब बता ही दिया था पर मैं तो शरारत कर रहा था.

पर माँ तो आखिर माँ ही थी. वो मुँह से कुछ बोल कैसे सकती थी.

जब मैंने माँ से दोबारा उन का निर्णय पूछा तो माँ ने शर्म से अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया और मुझसे चिपकते हुए धीरे से अपना हाथ नीचे ले जा कर मेरी लुंगी में डाल दिया और मेरे तने हुए लौड़े को अपने हाथ में पकड़ लिया.

फिर माँ ने धीमे से अपना मुँह मेरे कान के पास किया और मेरे लौड़े को अपने हाथ से आगे पीछे करते हुए, जैसे वो मेरा मुठ मार रही हो, धीरे से बोली

"यह है मेरा निर्णय."

और मेरे लौड़े को जोर से दबा दिया. कि मेरी तो जैसे चीख ही निकल गयी.

माँ अब मेरे लौड़े पर अपने हाथ को तेज तेज आगे पीछे करते हुए मेरे लण्ड को प्यार से सहला रही थी, और फिर मेरे कान में फिर से बोली.

"बेटा मुझे बोलने में बहुत शर्म आ रही है. बस अब कुछ न पूछ. तू खुद ही समझ जा. तू अपना दिल भी बता दे कि तेरे दिल में क्या इच्छा है."

मैंने अपना हाथ नीचे ले जा कर माँ की सलवार मैं घुसेड़ दिया. माँ के कोई पैंटी नहीं पहनी थी. मेरा हाथ सीधा माँ की चूत पर पहुंच गया.

मेरे को एक और झटका सा लगा. माँ की चूत, जिसे मैंने न जाने कितनी बार छुप छुप कर बाथरूम में देखा था की उस पर झांटों का पूरा जंगल ऊगा हुआ था. अब बिलकुल क्लीन शेव थी. लगता था माँ अपनी पहली चुदाई के लिए झांटे साफ करके पूरी तयारी करके आयी थी.

मैंने माँ की फूली हुई चूत को अपनी मुठी में भर लिया और उसे मुट्ठी में मसलते हुए बोला।

"माँ आपका बहुत बहुत धन्यवाद कि आपने मेरी बात पर सहानुभूति पूर्वक फैसला किया। अब आपको कभी भी चुदाई के लिए तड़पना नहीं पड़ेगा और न ही मेरे जीवन में कोई कमी रहेगी. हम दोनों माँ बेटा एक दूजे का सहारा बनेंगे और एक दुसरे की हर तरह से इच्छा पूर्ती करेंगे. आज से दुनिया की नजरों में हम माँ बेटा है पर घर के अंदर हम दोनों एक मर्द और औरत है. दोनों एक दूजे की सेक्स की जरूरत पूरी करेंगे. आज के बाद न ही मेरे को मुठ मारना पड़ेगा और न ही आपको अपनी उँगलियों से या किसी खीरे गाजर आदि से अपनी इच्छा पूरी करने की जरूरत रहेगी. आज से इस बेड पर रोज माँ बेटे की चुदाई होगी. ठीक है न ?"

माँ ने फिर शर्म से अपना मुँह मेरे सीने में छुपा लिया और अपने हाथ में पकडे मेरे लौड़े को प्यार से मसलती हुई बोली

"ठीक है बेटा. शायद भगवान को यही मंजूर है. अगर उसकी यही इच्छा है तो ऐसे ही सही. आज से हम दोनों एक दुसरे की सेक्स की जरूरत भी पूरी करेंगे. और सच में एक दूजे का सहारा बनेंगे."

यह कहते हुए माँ मेरे से लिपट गयी , पर उसने हाथ में पकड़ा हुआ मेरा लौड़ा नहीं छोड़ा और उसे धीरे धीरे मुठियाती रही. शायद माँ को १० साल बाद एक असली लौड़ा पकड़ने का मौका मिला था तो वो लण्ड को छोड़ना नहीं चाहती थी. मैंने भी माँ की चूत को अपने हाथ में भरे रखा और धीरे से एक ऊँगली माँ की चूत , जो की अब उसके बह रहे काम रस से गीली हो गयी थी, में घुसेड़ दी.

माँ ने एक आह की आवाज करी पर मेरी ऊँगली को अपनी चूत में से निकलने की कोशिश भी न करि. बल्कि आगे को खिसक कर ऊँगली को और पूरा अंदर तक लेने की कोशिश की।

मैं बहुत खुश था.

भगवान ने हम माँ बेटे की सुन ली थी.
Maa maxi pehen k aai aur bete ne shalwar me hath dal kar chut ko pakad liya????
Nice update

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sam00023

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“....ओह्ह्ह्हह...ओह....” माँ के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे .

होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी माँ के स्तन पर पहुँच गया .
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यहाँ पर अभी भी माँ के हाथ थे . मेरा चेहरा जैसे ही माँ के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है . मैं फिर से माँ के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था .
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माँ मेरे बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी .

अपनी चूत चटवाई के उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी माँ अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी .

तकरीबन दस सालो के बाद माँ ने यह परम संतुष्टी प्राप्त की थी इतना मजा माँ को पहली बार मिल रहा था इस आनंद को तो वह भूल ही चुकी थी मगर इतने सालों बाद उनके बेटे ने यह सुख उसे दिया.

निप्पलों को चूसते चूसते मैंने अपनी नज़र अपनी माँ पर डाली जो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए मुझे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी.

हम दोनों माँ बेटे की नज़रें मिलती हैं और मैं आगे अपनी माँ के चेहरे की और बढ़ता हु .

माँ भी मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है . मेरा चेहरा सीधा अपनी माँ के चेहरे पर झुक जाता है

और हमदोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं . दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे . कभी माँ मेरे तो कभी मैं माँ के होंठों को चूस रहा था .
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उधर माँ को अपनी जांघों पर मेरा लण्ड ठोकरें मारता महसूस होता है .

बेटे के लण्ड को अपनी योनि के इतने नजदीक पाकर उनके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है

और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है .
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माँ की जिव्हा मेरे होंठो को चाटने लगती है और वो उसे मेरे मुंह में धकेलती है . मैं अपना मुंह खोल देता हु और माँ की जिव्हा मेरे मुख में प्रवेश कर जाती है .

माँ मेरी जीभ को अपनी जीभ से सहलाती है .

मगर मैंने एकदम से उसकी जीभ को अपने होंठो में दबाकर उसे चूसने लगा क्या शहद के जैसा स्वाद था.

“उन्न्न्गग्घ्ह्ह......” माँ मेरे मुंह में सिसकने लगी और वो अपनी कमर इधर उधर हिलाने लगी.

मैं यह समझकर कि माँ क्या चाहती है अपनी कमर को थोडा सा हिलाता डुलाता हु और फिर हम दोनों एकदम से सिसक उठते हैं .

माँ योनि दरार में लण्ड के एहसास को पाकर ठिठक गई थी वो मेरे चेहरे की और देखती है मैं उसी की और देख रहा था मैं सोच मैं पड गया इतनी छोटी योनि में मेरा लण्ड कैसे जाएगा जो ना सिर्फ नौ इंचलम्बा था बल्कि चार इंच मोटा भी था और उनका आगे का टोपा बहोत बडा किसी जंगली आलू की तरह.
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वह इस संकरी जगह में कैसे जाएगा.

माँ को बहोत दर्द होगा क्या वह झेल पाएगी मैं अपनी माँ को कोई दर्द नही देना चाहता. अब मैं गहरे सोच मैं पड़ गया

माँ ने मेरी तरफ देखा मुझे किसी सोच में पड़ा देखकर मुझे हिलाकर नजरोसे कहा

“क्या हुआ”?

मैने उन्हें सब बताया तब वह हस पड़ी और उन्होंने कहा

“बेटा कुछ नही होता तुम कुछ मत सोचो , जो होता है वह हो जाने दो ”

पर मैन कहा “आपको बहुत दर्द होगा कैसे सह पाओगी तुम”

तब माँ ने कहा “हर औरत यही चाहती है की उनका प्यार करने वाला उसे बहोत सारा प्यार करे, हर नारी को यह दर्द सहना ही पड़ता है, जीवन मे सिर्फ एक बार, हालाँकि मैं तुम्हारी माँ हूँ और बहुत बार तुम्हारे पापा के साथ सेक्स कर चुकी हूँ, पर ठीक है की अब मुझे किसी मर्द के साथ यह सब किये १० साल हो चुके हैं, पर मैं खीरा या मूली आदि से अपना काम चला ही लेती थी तो मुझे अभी भी आदत है. कुछ नहीं होगा इसलिए तुम कोई चिंता मत करो ”

मैंने उनकी और देखा तो माँ धीरे से हल्के से सर हिलाती है जैसे मेरे किसी सवाल का जवाब दे रही हो .

मैं माँ के इशारे को पाकर वापिस उठ गया

जब मैं ने माँ की जाँघो पर किस करना शुरू किया तब धीरे धीरे माँ अपने पैर को अलग कर रही थी.
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जैसे मैं उपर जाता वैसे उनके पैर एक दूसरे से अलग हो रहे थे.

अब माँ की योनि मेरे सामने थी. माँ की स्मॉल योनि जिसके लिप्स अंदर की तरफ थे सिर्फ एक लकीर दिख रही थी किसी छोटी बच्ची की योनि की तरह थी बिना बालो की गुलाबी रंगत लिए हुये

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मैंने उँगलिसे लिप्स अलग करके देख तो अंदर से पूरी लाल थी मानो अंदर लिपस्टिक लगाई हो बहोत छोटा सा होल था इसमें मेरा इतना बड़ा लिंग कैसे जाएगा मेरा लिंग तो पूरी तबाही मचाएगा

माँ की योनि पूरी गीली हो चुकी थी. माँ की योनि चमक रही थी.
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वो चमक मेरे आँखो को अपनी तरफ अट्रॅक्ट कर रही थी.

...मैं तो आँखो से माँ की चुदाई करने लगा.

माँ की योनि गीली थी

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जिस से मुझे पहले माँ की योनि को साफ करना था .

मैं ने अपनी जीभ से माँ की योनि को साफ करना शुरू किया.

जब भी मैं माँ के किसी पार्ट को अपने जीभ से टच करता तब मुझे क्या हो जाता

मैं अपने होश खो बैठता. मुझे ऐसा लगता कि इस दुनिया मे माँ और मैं,सिर्फ़ हम दोनो ही हो ,जो सिर्फ़ प्यार करना जानते है.

मैं अपनी जीभ से माँ की योनि चाटने लगा. माँ बस एक काम कर रही थी वो था सिसकिया लेना .
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एक पत्नी जैसे सुहागरात के दिन अपने पति के साथ चुदाई करते हुए शरमा कर खुल कर सिसकिया नही लेती उसी तरह माँ भी मुझसे शरमा कर सिसकारियों पर कंट्रोल रख रही थी.

पर जो भी था उसमे मुझे एक अलग ही आनंद मिल रहा था.

माँ की बिना बालो वाली गुलाबी योनि अब मैं ने चाट कर साफ कर दी थी.

फिर मैं ने अपनी जीभ को माँ की योनि मे डाल कर माँ को भी आनंद देने लगा. माँ भी अपना पानी छोड़ कर मेरी प्यास बुज़ा रही थी.

मैं ने हाथो से माँ की योनि के होंठ खोल दिए.
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फिर मैं आराम से अपनी जीभ माँ की योनि मे डाल कर चाटने लगा खेलने लगा .

माँ की योनि मे मैं जितनी ज़ोर से अपनी जीभ अंदर डालता उतनी ज़ोर से माँ की योनि जीभ को बाहर फेक देती .

जैसे कह रही थी कि मुझे जीभ नही तुम्हारा लण्ड चाहिए. देना है तो लण्ड दो जीभ से मेरा क्या होगा.

जीभ से तो मेरी आग भड़क जाएगी. पर मैं भी कहा हार मानने वाला था ,मैं ने भी उसकी योनि मे जीभ डालना जारी रखा.
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उसकी टाइट योनि मेरी जीभ को बाहर धकेल देती इस खेल मे मुझे अपना ही आनंद मिल रहा था. साथ मे माँ को भी.

माँ इतनी गरम हो चुकी थी की उसको कुछ भी करना बर्दास्त नही हो रहा था .

फिर ज़्यादा देर करना ठीक नही होता.

मैं ने माँ को आँखो खोलने के लिए कहा . उसने आँखो खोल दी.मैं ने लण्ड को माँ के हाथो मे दिया.

माँ ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर लण्ड की तरफ . फिर लण्ड पे एक किस कर के लण्ड को छोड़ दिया और गर्दन हिला दी.
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मतलब अब बस एक काम बाकी था. वो था ...ढेर सारी चुदाई

फिर मैं ने माँ के नितम्बो के नीचे पिल्लो रख दिया.

फिर मैं माँ के टाँगो के बीच मे आ गया.

मैं ने लण्ड पे थूक लगा दी. और लण्ड को योनि पर रख दिया. मेरा लण्ड माँ की योनि को प्यार करना चाहता था.
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उसको फील करना चाहता था. मैं ने लण्ड वैसे ही रहने दिया . लण्ड और योनि का मिलन होने वाला था.

उस मिलन मे दर्द होने वाला था पर मेरा लण्ड योनि को दर्द देने से पहले उसको प्यार कर रहा था.

दर्द से पहले प्यार...
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मुझे कुछ ना करते हुए देख कर माँ ने आँखें खोल कर मुझे आगे बढ़ने को कहा.

इसका मतलब था की मेरे जीवन का वो स्वर्णिम क्षण आ गया था जिस की मैं न जाने कब से इन्तजार कर रहा था.

मैं ने फिर से लण्ड पर थूक लगाया और लण्ड को योनि पर रखा .


और माँ के उपर आ गया.
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Maa se kaho, thoda dehati bhasha me galiya bhi de de apni nigodi chut ko, jiska thodi der me bhosda banne wala hai...
 
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