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Incest माँ और बेटे ने घर बसाया(सच्ची घटनाओं पर आधारित)

Esac

Maa ka diwana
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parkas

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Update 37



हम दोनों के जिस्मों के बीच की दूरियाँ अब मिट चुकी थीं। मैंने उन्हें अपनी बाहों के घेरे में इतनी शिद्दत से भींचा कि उनके जिस्म पे उभरे बूब्स की नरमी को अपनी छाती पर महसूस कर पा रहा था। उस छुअन के असर से मेरा लौड़ा एक बेलगाम घोड़े की तरह मचलने लगा—जैसे जींस के अंदर कोई आतिशबाज़ी हो रही हो। हमारी उंगलियाँ एक दूसरे की पीठ पर एक अनकही इबारत लिख रही थीं।

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मैंने झुककर, उनके कानों के पास अपनी भारी होती आवाज़ में फुसफुसाया, "अब भी वक़्त नहीं आया क्या?"

माँ ने शरमाकर अपना चेहरा मेरी छाती में और गहराई से छुपा लिया। उनकी मद्धम सी आवाज़ आई, "कौन सा वक़्त?"

उनके बदन की गर्माहट मेरे रोम-रोम में उतर रही थी। मैंने उन्हें खुद में और समेटते हुए कहा, "तुम हमेशा हर बात पर कहती थी न—वक़्त आने दीजिये... तो क्या वो वक़्त अब भी दूर है?"

माँ ख़ामोश थी, पर उनकी वह ख़ामोशी हज़ारों शब्द कह रही थी। उन्होंने जवाब देने के बजाय मुझे और कसकर थाम लिया, मानो वह मुझमें ही कहीं विलीन हो जाना चाहती हो।

मैंने उनके अहसास को अपनी रूह तक महसूस करते हुए, प्यार और बेइंतहा जुनून के साथ फिर से पुकारा, "बोलो न मंजु..."

कुछ लम्हों तक वक्त जैसे ठहर सा गया। फिर उन्होंने हौसले जुटाए और अपना चेहरा मेरी छाती से थोड़ा अलग किया। मैं महसूस कर पा रहा था कि उनका पूरा वजूद एक अनजानी सिहरन से काँप रहा है। मेरे भीतर भी भावनाओं का एक तूफ़ान उमड़ रहा था, जिसने मेरे लौड़े को फूला कर एक दम बड़ा कर दिया और उसे गर्मी व उत्तेजना से भर दिया था।


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माँ ने धीरे-धीरे अपनी गर्दन ऊपर उठाई। उनकी पलकें कसकर बंद थीं और साँसें तेज़, जैसे किसी कशमकश में हों। मैं बस एकटक उन्हें निहार रहा था—उनकी वह मासूमियत और वह समर्पण। मेरा शरीर अब जिस्म की गर्मी में तप रहा था। उन्होंने अपना चेहरा धीरे धीरे ऊपर करना शुरू किया, उनके गुलाबी होंठ थरथरा रहे थे।

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उन होंठों पर हया और चाहत की एक अनोखी जंग साफ़ दिख रही थी। उन्होंने मेरे सवाल का लफ्ज़ों में कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि अपना चेहरा मेरी ओर ऊपर उठाकर खुद को पूरी तरह मुझे समर्पित कर दिया।

इस वक्त मेरा दिल किसी हथौड़े की तरह सीने की दीवारों पर चोट कर रहा था। नसों में दौड़ता पूरा खून जैसे मेरे लौड़े में ठहर कर जम गया हो, और उसे किसी लोहे की रोड से भी सख्त बना रहा हो। पूरी दुनिया बस उन थरथराते होंठों पर सिमट आई थी।

माँ अब पूरी तरह मेरे सामने सरेंडर कर चुकी थी। वह सिर्फ मेरी माँ नहीं, अब मेरी बीवी भी थी। मैंने अपना हाथ उनकी पीठ पर टिकाया और उन्हें धीरे से अपनी ओर खींचते हुए अपने होंठ उनके करीब ले जाने लगा। मैने अपने एक हाथ से उनके चेहरे को थाम लिया और अपने अंगूठे उसे उनके गालों से होते हुए उनके होंठो को छूने लगा। जैसे ही हमारे चेहरे एक-दूसरे के एकदम पास आए, हम एक-दूसरे की गर्म साँसों को एक दूसरे के चेहरों पर महसूस कर पा रहे थे।


giphy downsized (1)

मेरे अंदर एक अजीब सी घबराहट और बेचैनी थी, जिसने मुझे और आगे बढ़ने के लिए उकसाया। और फिर, मैंने अपने होंठ माँ के होठों पर रख दिए।

couple

टच होते ही माँ का पूरा बदन एक झटके के साथ काँप उठा। मेरी बाहों में सिमटे उनके उस कोमल और हल्के शरीर की सिहरन मेरे सीने तक महसूस हो रही थी। मेरे भीतर भी एक तूफ़ान सा उठने लगा। मैंने बहुत आहिस्ता से अपना मुँह खोला और उनके होठों की नमी को चूसने लगा। जब मेरे होठों का गीलापन उनके होठों पे लगा, तो उन्होंने भी धीरे से अपना मुँह खोल दिया और मुझे रास्ता दिया।

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अगले ही पल, हम एक-दूसरे के होठों को अपने होंठो के बीच दबाकर उन्हें बड़े प्यार से पीने लगे। यह अहसास वैसा ही था जैसे शहद की बनी किसी बेहद नाज़ुक चीज़ को होंठो से चूस कर स्वाद लिया जा रहा हो—इतनी सावधानी से कि उनका शेप और साइज़ न बिगड़ जाए, और इतनी शिद्दत से कि कोई भी कतरा छूट न जाए। हम बिल्कुल किसी न्यू लवर्स की तरह एक-दूसरे को चख और चूस कर अपना प्यार जाता रहे थे।

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माँ के हाथ जो अब तक मेरी पीठ पर थे, धीरे-धीरे ऊपर सरककर मेरे कंधों पर जम गए। मैंने अपने लेफ्ट हाथ से उनकी पीठ को सहलाना शुरू किया और राइट हाथ से उनकी कमर को थामकर खुद को बैलेंस किया। जुनून बढ़ रहा था; मैंने अपना मुँह और खोलकर उनके पूरे होठों को अपनी गिरफ़्त में ले लिया और उन्हें चाटने लगा। मेरी जीभ जब उनके होठों से टकराई, तो उन्होंने भी कोई रेजिस्टेंस नहीं दिखाया, बल्कि वह और भी सहज होकर मेरा साथ देने लगी।

french kiss lily mass

माँ जिस तरह मुझे "Kiss" कर रही थी, वह मेरी लाइफ के बेस्ट मोमेंट्स में से एक था। अक्सर लोग समझते हैं कि किस का मतलब सिर्फ होठों का मिलना, उन्हें चूसना या उन्हें दबाना होता है, पर आज समझ आया कि यह उससे कहीं बढ़कर है। मैंने सपनों में न जाने कितनी बार इसे इमेजिन किया था, और सपनों पर तो अपना कंट्रोल होता है, हम उन्हें जैसा चाहें वैसा बना सकते हैं। पर हकीकत में माँ का यह "Kiss", उन हसीन से हसीन सपनों से भी कहीं ज्यादा गहरा और जादुई था।

मैं तो जैसे एक स्टेचू बनकर रह गया था। कभी सोचा नहीं था कि एक 'Kiss' में इतना प्यार और इतनी शिद्दत हो सकती है। अगर माँ के सिर्फ चूमने में इतना जादू है, तो खुदा खैर करे, आगे तो शायद मैं सच में किसी दूसरी दुनिया में पहुँच जाऊँगा। माँ के शांत स्वभाव के पीछे इतना प्यार और इतना जुनून छिपा है, यह आज देखने को मिला।

भले ही उनको बरसों बाद यह मौका मिला था, लेकिन माँ को कोई जल्दबाज़ी नहीं थी। वह जिस 'Softness' के साथ मुझे चूम रही थी, वह किसी की भी जान लेने के लिए काफी था—एक जानलेवा "Kiss"! मेरा दिल जैसे चीख-चीख कर कह रहा था कि अपनी आँखें बंद कर लूँ और बस इस अहसास में डूब जाऊँ।

उनके होंठ मेरे होठों पर मक्खन की तरह फिसल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे हम 'दो जिस्म, एक जान' बन गए हों। आज हमारे शरीर नहीं, बल्कि हमारी आत्माएं एक-दूसरे को प्यार रही थीं। मैंने अपनी ज़बान एक बार उनके मुँह के अंदर डाली, जहाँ वह उनकी ज़बान से जा टकराई। फिर माँ ने अपनी ज़बान मेरे मुँह में सरकाई और मैंने उन्हें अपने होठों के बीच भरकर चूसना शुरू किया।


tongue kiss

उफ़! क्या स्वाद था... जैसे शहद और रूहानी सुकून का कोई मेल हो। काफी देर तक उनकी ज़बान का रस पीने के बाद मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाली। अब माँ की बारी थी, और वह पूरी तरह मग्न होकर चूसचूस कर मेरी ज़बान का स्वाद लेने लगी। फिर मैंने अपनी जीभ निकालकर उनके ऊपर वाले होंठ को चूमना और चूसना शुरू किया। हमारा किस पल-दर-पल और भी गहरा (Intense) होता जा रहा था।

हम दोनों के हाथों की हलचल एक-दूसरे को बता रही थी कि हम कितने उत्तेजित हो चुके हैं। मेरी ज़िंदगी का यह पहला किस था, और वह भी मेरी अपनी माँ के साथ! माँ भी करीब 18 साल बाद किसी मर्द का ऐसा स्पर्श पाकर मेरी बाहों में मोम की तरह पिघल रही थी। हमारे शरीर के बीच अब इतनी भी जगह नहीं बची थी कि हवा गुज़र सके।

मेरा लण्ङ अब उनके बदन पर टकराते हुए उन्हें यह जता रहा था कि मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता। मेरा लौड़ा अपनी उस पसंदीदा जगह पर जाने के लिए बेताब था, जहां से वो दुनिया में आया था।


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जिसकी चाहत हर मर्द हर बेटे को होती है। माँ भी मेरे मन की तड़प और मेरे शरीर की ज़रूरत को बखूबी समझ रही थी। वह अब पूरी तरह, तन और मन से, अपने बेटे और अब पति के सामने सरेंडर करने के लिए तैयार थी।

जुनून अपने चरम पर था कि तभी अचानक मोबाइल की रिंग बजी। पहले तो हम उस नशे में इतने डूबे थे कि सुनाई ही नहीं दिया, पर कुछ देर बाद उस लगातार बजती घंटी ने हमें इस जादुई दुनिया से खींचकर वापस हकीकत की ज़मीन पर पटक दिया।
Bahut hi badhiya update diya hai Esac bhai....
Nice and beautiful update.....
 
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sujatakasantara

लाड़ली 🍑
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ये स्टोरी Satish नाम के एक राइटर की है जो बहुत सी साइट्स पर पोस्टेड है इस कहानी का श्रेय पूरी तरह से उनको जाता है । लेकिन इस कहानी में जो चीज़ें मुझे कम लगी वो थी इसमें पिक्चर्स और gifs का अभाव और लेखन का तरीका जो में पूरा करना चाहता हूं। इसीलिए ये एक remastered version है जिसमे ज्यादा अच्छी लिखाई और pictures और gifs है।

Picsart-24-04-08-18-29-21-878
Update post ka chart कैसे बनाया जाता है.... Plz help
 

Esac

Maa ka diwana
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Esac

Maa ka diwana
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nice update waiting for next one
एक अप्रतिम शानदार लाजवाब और अद्भुत रमणिय अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
Thanks ❣️
 
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park

Well-Known Member
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हम दोनों के जिस्मों के बीच की दूरियाँ अब मिट चुकी थीं। मैंने उन्हें अपनी बाहों के घेरे में इतनी शिद्दत से भींचा कि उनके जिस्म पे उभरे बूब्स की नरमी को अपनी छाती पर महसूस कर पा रहा था। उस छुअन के असर से मेरा लौड़ा एक बेलगाम घोड़े की तरह मचलने लगा—जैसे जींस के अंदर कोई आतिशबाज़ी हो रही हो। हमारी उंगलियाँ एक दूसरे की पीठ पर एक अनकही इबारत लिख रही थीं।

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मैंने झुककर, उनके कानों के पास अपनी भारी होती आवाज़ में फुसफुसाया, "अब भी वक़्त नहीं आया क्या?"

माँ ने शरमाकर अपना चेहरा मेरी छाती में और गहराई से छुपा लिया। उनकी मद्धम सी आवाज़ आई, "कौन सा वक़्त?"

उनके बदन की गर्माहट मेरे रोम-रोम में उतर रही थी। मैंने उन्हें खुद में और समेटते हुए कहा, "तुम हमेशा हर बात पर कहती थी न—वक़्त आने दीजिये... तो क्या वो वक़्त अब भी दूर है?"

माँ ख़ामोश थी, पर उनकी वह ख़ामोशी हज़ारों शब्द कह रही थी। उन्होंने जवाब देने के बजाय मुझे और कसकर थाम लिया, मानो वह मुझमें ही कहीं विलीन हो जाना चाहती हो।

मैंने उनके अहसास को अपनी रूह तक महसूस करते हुए, प्यार और बेइंतहा जुनून के साथ फिर से पुकारा, "बोलो न मंजु..."

कुछ लम्हों तक वक्त जैसे ठहर सा गया। फिर उन्होंने हौसले जुटाए और अपना चेहरा मेरी छाती से थोड़ा अलग किया। मैं महसूस कर पा रहा था कि उनका पूरा वजूद एक अनजानी सिहरन से काँप रहा है। मेरे भीतर भी भावनाओं का एक तूफ़ान उमड़ रहा था, जिसने मेरे लौड़े को फूला कर एक दम बड़ा कर दिया और उसे गर्मी व उत्तेजना से भर दिया था।


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माँ ने धीरे-धीरे अपनी गर्दन ऊपर उठाई। उनकी पलकें कसकर बंद थीं और साँसें तेज़, जैसे किसी कशमकश में हों। मैं बस एकटक उन्हें निहार रहा था—उनकी वह मासूमियत और वह समर्पण। मेरा शरीर अब जिस्म की गर्मी में तप रहा था। उन्होंने अपना चेहरा धीरे धीरे ऊपर करना शुरू किया, उनके गुलाबी होंठ थरथरा रहे थे।

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उन होंठों पर हया और चाहत की एक अनोखी जंग साफ़ दिख रही थी। उन्होंने मेरे सवाल का लफ्ज़ों में कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि अपना चेहरा मेरी ओर ऊपर उठाकर खुद को पूरी तरह मुझे समर्पित कर दिया।

इस वक्त मेरा दिल किसी हथौड़े की तरह सीने की दीवारों पर चोट कर रहा था। नसों में दौड़ता पूरा खून जैसे मेरे लौड़े में ठहर कर जम गया हो, और उसे किसी लोहे की रोड से भी सख्त बना रहा हो। पूरी दुनिया बस उन थरथराते होंठों पर सिमट आई थी।

माँ अब पूरी तरह मेरे सामने सरेंडर कर चुकी थी। वह सिर्फ मेरी माँ नहीं, अब मेरी बीवी भी थी। मैंने अपना हाथ उनकी पीठ पर टिकाया और उन्हें धीरे से अपनी ओर खींचते हुए अपने होंठ उनके करीब ले जाने लगा। मैने अपने एक हाथ से उनके चेहरे को थाम लिया और अपने अंगूठे उसे उनके गालों से होते हुए उनके होंठो को छूने लगा। जैसे ही हमारे चेहरे एक-दूसरे के एकदम पास आए, हम एक-दूसरे की गर्म साँसों को एक दूसरे के चेहरों पर महसूस कर पा रहे थे।


giphy downsized (1)

मेरे अंदर एक अजीब सी घबराहट और बेचैनी थी, जिसने मुझे और आगे बढ़ने के लिए उकसाया। और फिर, मैंने अपने होंठ माँ के होठों पर रख दिए।

couple

टच होते ही माँ का पूरा बदन एक झटके के साथ काँप उठा। मेरी बाहों में सिमटे उनके उस कोमल और हल्के शरीर की सिहरन मेरे सीने तक महसूस हो रही थी। मेरे भीतर भी एक तूफ़ान सा उठने लगा। मैंने बहुत आहिस्ता से अपना मुँह खोला और उनके होठों की नमी को चूसने लगा। जब मेरे होठों का गीलापन उनके होठों पे लगा, तो उन्होंने भी धीरे से अपना मुँह खोल दिया और मुझे रास्ता दिया।

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अगले ही पल, हम एक-दूसरे के होठों को अपने होंठो के बीच दबाकर उन्हें बड़े प्यार से पीने लगे। यह अहसास वैसा ही था जैसे शहद की बनी किसी बेहद नाज़ुक चीज़ को होंठो से चूस कर स्वाद लिया जा रहा हो—इतनी सावधानी से कि उनका शेप और साइज़ न बिगड़ जाए, और इतनी शिद्दत से कि कोई भी कतरा छूट न जाए। हम बिल्कुल किसी न्यू लवर्स की तरह एक-दूसरे को चख और चूस कर अपना प्यार जाता रहे थे।

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माँ के हाथ जो अब तक मेरी पीठ पर थे, धीरे-धीरे ऊपर सरककर मेरे कंधों पर जम गए। मैंने अपने लेफ्ट हाथ से उनकी पीठ को सहलाना शुरू किया और राइट हाथ से उनकी कमर को थामकर खुद को बैलेंस किया। जुनून बढ़ रहा था; मैंने अपना मुँह और खोलकर उनके पूरे होठों को अपनी गिरफ़्त में ले लिया और उन्हें चाटने लगा। मेरी जीभ जब उनके होठों से टकराई, तो उन्होंने भी कोई रेजिस्टेंस नहीं दिखाया, बल्कि वह और भी सहज होकर मेरा साथ देने लगी।

french kiss lily mass

माँ जिस तरह मुझे "Kiss" कर रही थी, वह मेरी लाइफ के बेस्ट मोमेंट्स में से एक था। अक्सर लोग समझते हैं कि किस का मतलब सिर्फ होठों का मिलना, उन्हें चूसना या उन्हें दबाना होता है, पर आज समझ आया कि यह उससे कहीं बढ़कर है। मैंने सपनों में न जाने कितनी बार इसे इमेजिन किया था, और सपनों पर तो अपना कंट्रोल होता है, हम उन्हें जैसा चाहें वैसा बना सकते हैं। पर हकीकत में माँ का यह "Kiss", उन हसीन से हसीन सपनों से भी कहीं ज्यादा गहरा और जादुई था।

मैं तो जैसे एक स्टेचू बनकर रह गया था। कभी सोचा नहीं था कि एक 'Kiss' में इतना प्यार और इतनी शिद्दत हो सकती है। अगर माँ के सिर्फ चूमने में इतना जादू है, तो खुदा खैर करे, आगे तो शायद मैं सच में किसी दूसरी दुनिया में पहुँच जाऊँगा। माँ के शांत स्वभाव के पीछे इतना प्यार और इतना जुनून छिपा है, यह आज देखने को मिला।

भले ही उनको बरसों बाद यह मौका मिला था, लेकिन माँ को कोई जल्दबाज़ी नहीं थी। वह जिस 'Softness' के साथ मुझे चूम रही थी, वह किसी की भी जान लेने के लिए काफी था—एक जानलेवा "Kiss"! मेरा दिल जैसे चीख-चीख कर कह रहा था कि अपनी आँखें बंद कर लूँ और बस इस अहसास में डूब जाऊँ।

उनके होंठ मेरे होठों पर मक्खन की तरह फिसल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे हम 'दो जिस्म, एक जान' बन गए हों। आज हमारे शरीर नहीं, बल्कि हमारी आत्माएं एक-दूसरे को प्यार रही थीं। मैंने अपनी ज़बान एक बार उनके मुँह के अंदर डाली, जहाँ वह उनकी ज़बान से जा टकराई। फिर माँ ने अपनी ज़बान मेरे मुँह में सरकाई और मैंने उन्हें अपने होठों के बीच भरकर चूसना शुरू किया।


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उफ़! क्या स्वाद था... जैसे शहद और रूहानी सुकून का कोई मेल हो। काफी देर तक उनकी ज़बान का रस पीने के बाद मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाली। अब माँ की बारी थी, और वह पूरी तरह मग्न होकर चूसचूस कर मेरी ज़बान का स्वाद लेने लगी। फिर मैंने अपनी जीभ निकालकर उनके ऊपर वाले होंठ को चूमना और चूसना शुरू किया। हमारा किस पल-दर-पल और भी गहरा (Intense) होता जा रहा था।

हम दोनों के हाथों की हलचल एक-दूसरे को बता रही थी कि हम कितने उत्तेजित हो चुके हैं। मेरी ज़िंदगी का यह पहला किस था, और वह भी मेरी अपनी माँ के साथ! माँ भी करीब 18 साल बाद किसी मर्द का ऐसा स्पर्श पाकर मेरी बाहों में मोम की तरह पिघल रही थी। हमारे शरीर के बीच अब इतनी भी जगह नहीं बची थी कि हवा गुज़र सके।

मेरा लण्ङ अब उनके बदन पर टकराते हुए उन्हें यह जता रहा था कि मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता। मेरा लौड़ा अपनी उस पसंदीदा जगह पर जाने के लिए बेताब था, जहां से वो दुनिया में आया था।


GIF 20260131 142611 495

जिसकी चाहत हर मर्द हर बेटे को होती है। माँ भी मेरे मन की तड़प और मेरे शरीर की ज़रूरत को बखूबी समझ रही थी। वह अब पूरी तरह, तन और मन से, अपने बेटे और अब पति के सामने सरेंडर करने के लिए तैयार थी।

जुनून अपने चरम पर था कि तभी अचानक मोबाइल की रिंग बजी। पहले तो हम उस नशे में इतने डूबे थे कि सुनाई ही नहीं दिया, पर कुछ देर बाद उस लगातार बजती घंटी ने हमें इस जादुई दुनिया से खींचकर वापस हकीकत की ज़मीन पर पटक दिया।
Nice and superb update.....
 
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