• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest माँ और बेटे ने घर बसाया(सच्ची घटनाओं पर आधारित)

Esac

Maa ka diwana
310
1,863
124
d-index-button-click-here-block-text-over-white-background-91877897

Update 44 Posted
Next update soon...


if anyone have any ideas, they want me explore you are allowed to tell them


Note :- "Writer is busy that's why he was not able to update

Updates will be coming as soon as he gets time.
No one other than the writer is allowed to post updates on this thread. If you want to write, or feel you can write better than this writer, start your own thread and post updates there, not here. Everyone is free to write their own stories, but this thread is solely the domain of its writer. "

"लेखक अभी व्यस्त हैं, इसलिए वे अपडेट नहीं दे पाए हैं।
जैसे ही उन्हें समय मिलेगा, अपडेट आ जाएँगे।
इस थ्रेड पर लेखक के अलावा किसी और को अपडेट पोस्ट करने की अनुमति नहीं है। अगर आप लिखना चाहते हैं, या आपको लगता है कि आप इस लेखक से बेहतर लिख सकते हैं, तो अपना अलग थ्रेड शुरू करें और वहाँ अपडेट पोस्ट करें, यहाँ नहीं। हर कोई अपनी कहानियाँ लिखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन यह थ्रेड पूरी तरह से इसके लेखक का ही क्षेत्र है।"
 
Last edited:

kas1709

Well-Known Member
13,249
14,277
228
Update 43




माँ कुछ पलों तक बस मुझे किसी अचरज में डूबी हुई नज़रों से देखती रही। उनकी आँखों में वो सब कुछ लिखा था जो उनके दिल में चल रहा था। फिर भी मैंने मुस्कुराते हुए उनसे पूछा, "क्या?"

उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस अपनी पलकें धीरे से झपकाईं जैसे कह रही हो—'कुछ नहीं'। मैंने फिर छेड़ते हुए पूछा, "पसंद नहीं आया क्या?"

माँ की खामोश नज़रे मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मुझे कह रही हो—'पागल! मुझे ये पसंद ही नहीं बल्कि बहुत पसंद आया है'। पर ज़ुबान से वो सिर्फ इतना ही बोल पाई, "बहुत..."

मैं अपनी मुस्कुराहट नहीं रोक पाया और हल्की आवाज़ में बोला, "तो फिर पहनो इसे।"

वो मुस्कुराई, एक बार मेरी आँखों में आँखें डालीं और फिर अपनी नज़रें झुकाकर फुसफुसाते हुए बोली, "आप पहना दीजिए।"

मेरे चेहरे पर एक चौड़ी मुस्कान आ गई। मैंने बॉक्स से वो चमकता हुआ नेकलेस निकाला और उनके पीछे खड़े होकर, बड़ी नज़ाकत से उनके गले में पहना दिया।


68747470733a2f2f73332e616d617a6f6e6177732e636f6d2f776174747061642d6d656469612d736572766963652f53746f

माँ ने अपनी नज़रें उठाईं और आईने में पहले मुझसे नज़रें मिलाईं, फिर उस नेकलेस को देख ब्लश करने लगी। उन्होंने अपना हाथ उठाकर अपना पल्लू साइड किया और नेकलेस को सेट किया और जिसके कारण उनकी क्लीवेज दिखने लगी और उस नेकलेस को अपनी गोरि और मखमली छाती के बीच, उनकी 'Cleavage line' पर प्यार से रखा।

Picsart-26-04-24-12-04-40-087

मैं उन्हे आईने में निहार रहा था। मैंने अपनी ठुड्डी (Chin) उनके कंधे पर टिकाई और उनके कान के पास धीरे से बोला, "बहुत सुंदर दिख रही हो... और..."

इतना बोलकर मैं रुक गया। माँ खिलखिलाकर हँस पड़ी और अपनी आँखों में ढेर सारा प्यार भरकर बोली, "और क्या?"

मैंने उनके कान के पास अपनी आवाज़ को और भी गहरा और हल्का करते हुए फुसफुसाकर कहा, "और बहुत सेक्सी..."

माँ बुरी तरह ब्लश कर गई और अपनी नज़रें झुकाकर एक प्यारी सी अदा में बोली, "धत्!"

मैं हँसने लगा और अपनी गर्दन उनके कंधे के ऊपर से थोड़ा और आगे बढ़ाकर, अपना चेहरा उनके चेहरे के करीब ले गया। जैसे ही मैं उन्हे किस करने के लिए बढ़ा, माँ अचानक कातिलाना अदा और अपनी उस मीठी आवाज़ में बोली—

"उऊंम्मम्... पसीना है, जाइए जाकर नहाइए पहले!"

माँ की ये बात सुनते ही मेरा मन जैसे हवा में उछल पड़ा।

हाँ, मेरा पूरा बदन पसीने से तर-बतर था। एक तो सुबह से नहाने का मौका नहीं मिला था और ऊपर से इस चिलचिलाती गर्मी में बाज़ार की भाग-दौड़। माँ का "पहले नहा लीजिए" कहना मुझे बुरा नहीं लगा, बल्कि मैं तो अंदर ही अंदर झूम उठा। उनके इस कहने के अंदाज़ में एक इशारा था—कि उन्हे अब मेरे करीब आने में कोई झिझक नहीं है, और वो आज खुद को मुझे सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मैं बस माँ को, मेरी बीवी को, मेरी मंजु को निहारता रहा।

"जाइए न, नहा लीजिए..." उन्होंने फिर से टोकते हुए कहा।

मेरे होंठों पर एक शरारती मुस्कान फैल गई। मैंने झुककर मज़ाक में कहा, "जो हुक्म सरकार!" और बाथरूम की तरफ मुड़ गया।

"रुकिए!"

माँ की उस कोमल और मखमली आवाज़ ने जैसे मेरे कदमों में ज़ंजीरें डाल दीं। ऐसा लगा जैसे कानों में किसी ने मिश्री घोल दी हो। ये वही आवाज़ थी जो कभी मुझे लोरियाँ सुनाकर सुलाती थी, जो मुझे अच्छे-बुरे का फर्क समझाती थी। और आज, ये आवाज़ मेरी अपनी 'धरोहर' बन चुकी थी। अब ये हर पल मेरे पास रहेगी, हर पल मुझे सुकून देगी।

मैंने मुड़कर देखा, तो मेरी माँ मेरे लिए एक नया 'Night Suit' निकाल रही थी। वो धीरे-धीरे चलते हुए मेरे पास आई। उनके पैरों की वो पायल... उनकी वो 'रुनझुन' मेरे जिस्म में संगीत की लहरें पैदा कर रही थी। मेरा पूरा ध्यान उनकी पायल की उस आवाज़ में खो गया। वो आवाज़ जैसे मुझसे धीरे से कह रही थी— "यह संगीत सिर्फ आपका इंतज़ार कर रहा है... जल्दी से नहाकर आइए।"


माँ जैसे ही मेरे करीब आई, उनके बदन की वो भीनी सी खुशबू फिर से मेरी साँसों में बस गई। उस नज़दीकी ने मेरे दिल की धड़कनों को इस कदर तेज़ कर दिया कि मेरा लौड़ा जैसे अकड़ कर फटने को था और मेरी पेन्ट का उभर इतना था कि मुझे यकीन था कि माँ ने उसे देख लिया होगा और मेरी आँखों की उस भूख को ज़रूर पढ़ लिया होगा।


IMG 20260424 121257

माँ ने वो नाइट सूट मेरे हाथों में थमाया। जैसे ही उनकी नाजूक उँगलियाँ मेरे हाथ से छुईं, मेरे पूरे जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया। मुझे लगा शायद माँ का भी वही हाल था—उनके हाथ में भी एक हल्की सी कंपकंपी थी। मैं हाथ में सूट थामे बस उनकी उस 'मोहिनी' सूरत को निहारे जा रहा था, मानो उन्हे अपनी आँखों में कैद कर लेना चाहता हूँ। शर्म के मारे माँ ने अपनी नज़रें झुका लीं और फिर वही मखमली आवाज़ मेरे कानों में पड़ी—

"जाइए न अब..."

मैं जैसे ख्यालों की दुनिया से हकीकत में वापस लौटा। मुस्कुराते हुए मैं बाथरूम की तरफ बढ़ा, पर मेरी नज़रें अब भी तिरछी होकर माँ पर ही टिकी थीं। उनके होंठों पर वो चंचल सी मुस्कान मुझे अपनी तरफ खींच रही थी। खुद को किसी तरह संभालते हुए मैं बाथरूम के अंदर घुसा, पर एक शरारत के तहत मैंने दरवाज़ा खुला ही रहने दिया।

माँ मेरी इस हरकत को तुरंत भाँप गई। उन्होंने आगे बढ़कर खुद ही दरवाज़ा बंद किया, और मुझे यकीन है कि उनके होंठों ने गुनगुनाकर ज़रूर कहा होगा— "बहुत बेशर्म बन गए हैं आप!"

मैं शावर के नीचे खड़ा मन ही मन मुस्कुरा कर सोच रहा था—बेशर्मी तो अभी दिखानी बाकी है। पानी की ठंडी बूंदें बदन पर गिर रही थीं, पर अंदर की आग ठंडी होने का नाम नहीं ले रही थी। मैं आने वाले पलों के बारे में सोचकर ही रोमांचित हो उठा। जो बेचैनी मुझे महसूस हो रही थी, यकीनन माँ भी उसी दौर से गुज़र रही होगी।

वो पल अब बस कुछ ही दूर था जब माँ मेरी बाँहों में होगी... एक बीवी के रूप में, एक प्रेमिका के रूप में। मैं उन्हे हर जगह छू सकूँगा, उन्हे जी भरकर चूम सकूँगा। ये वो अहसास था जिसे शब्दों में बयाँ करना नामुमकिन है। वो भी यही सोच रही होगी कि आज की ये रात हमारे प्यार को एक ऐसी परवानगी पर ले जाएगी, जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा।
Nice update.....
 
  • Like
Reactions: Napster

Napster

Well-Known Member
8,368
20,588
188
Update 43




माँ कुछ पलों तक बस मुझे किसी अचरज में डूबी हुई नज़रों से देखती रही। उनकी आँखों में वो सब कुछ लिखा था जो उनके दिल में चल रहा था। फिर भी मैंने मुस्कुराते हुए उनसे पूछा, "क्या?"

उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस अपनी पलकें धीरे से झपकाईं जैसे कह रही हो—'कुछ नहीं'। मैंने फिर छेड़ते हुए पूछा, "पसंद नहीं आया क्या?"

माँ की खामोश नज़रे मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मुझे कह रही हो—'पागल! मुझे ये पसंद ही नहीं बल्कि बहुत पसंद आया है'। पर ज़ुबान से वो सिर्फ इतना ही बोल पाई, "बहुत..."

मैं अपनी मुस्कुराहट नहीं रोक पाया और हल्की आवाज़ में बोला, "तो फिर पहनो इसे।"

वो मुस्कुराई, एक बार मेरी आँखों में आँखें डालीं और फिर अपनी नज़रें झुकाकर फुसफुसाते हुए बोली, "आप पहना दीजिए।"

मेरे चेहरे पर एक चौड़ी मुस्कान आ गई। मैंने बॉक्स से वो चमकता हुआ नेकलेस निकाला और उनके पीछे खड़े होकर, बड़ी नज़ाकत से उनके गले में पहना दिया।


68747470733a2f2f73332e616d617a6f6e6177732e636f6d2f776174747061642d6d656469612d736572766963652f53746f

माँ ने अपनी नज़रें उठाईं और आईने में पहले मुझसे नज़रें मिलाईं, फिर उस नेकलेस को देख ब्लश करने लगी। उन्होंने अपना हाथ उठाकर अपना पल्लू साइड किया और नेकलेस को सेट किया और जिसके कारण उनकी क्लीवेज दिखने लगी और उस नेकलेस को अपनी गोरि और मखमली छाती के बीच, उनकी 'Cleavage line' पर प्यार से रखा।

Picsart-26-04-24-12-04-40-087

मैं उन्हे आईने में निहार रहा था। मैंने अपनी ठुड्डी (Chin) उनके कंधे पर टिकाई और उनके कान के पास धीरे से बोला, "बहुत सुंदर दिख रही हो... और..."

इतना बोलकर मैं रुक गया। माँ खिलखिलाकर हँस पड़ी और अपनी आँखों में ढेर सारा प्यार भरकर बोली, "और क्या?"

मैंने उनके कान के पास अपनी आवाज़ को और भी गहरा और हल्का करते हुए फुसफुसाकर कहा, "और बहुत सेक्सी..."

माँ बुरी तरह ब्लश कर गई और अपनी नज़रें झुकाकर एक प्यारी सी अदा में बोली, "धत्!"

मैं हँसने लगा और अपनी गर्दन उनके कंधे के ऊपर से थोड़ा और आगे बढ़ाकर, अपना चेहरा उनके चेहरे के करीब ले गया। जैसे ही मैं उन्हे किस करने के लिए बढ़ा, माँ अचानक कातिलाना अदा और अपनी उस मीठी आवाज़ में बोली—

"उऊंम्मम्... पसीना है, जाइए जाकर नहाइए पहले!"

माँ की ये बात सुनते ही मेरा मन जैसे हवा में उछल पड़ा।

हाँ, मेरा पूरा बदन पसीने से तर-बतर था। एक तो सुबह से नहाने का मौका नहीं मिला था और ऊपर से इस चिलचिलाती गर्मी में बाज़ार की भाग-दौड़। माँ का "पहले नहा लीजिए" कहना मुझे बुरा नहीं लगा, बल्कि मैं तो अंदर ही अंदर झूम उठा। उनके इस कहने के अंदाज़ में एक इशारा था—कि उन्हे अब मेरे करीब आने में कोई झिझक नहीं है, और वो आज खुद को मुझे सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मैं बस माँ को, मेरी बीवी को, मेरी मंजु को निहारता रहा।

"जाइए न, नहा लीजिए..." उन्होंने फिर से टोकते हुए कहा।

मेरे होंठों पर एक शरारती मुस्कान फैल गई। मैंने झुककर मज़ाक में कहा, "जो हुक्म सरकार!" और बाथरूम की तरफ मुड़ गया।

"रुकिए!"

माँ की उस कोमल और मखमली आवाज़ ने जैसे मेरे कदमों में ज़ंजीरें डाल दीं। ऐसा लगा जैसे कानों में किसी ने मिश्री घोल दी हो। ये वही आवाज़ थी जो कभी मुझे लोरियाँ सुनाकर सुलाती थी, जो मुझे अच्छे-बुरे का फर्क समझाती थी। और आज, ये आवाज़ मेरी अपनी 'धरोहर' बन चुकी थी। अब ये हर पल मेरे पास रहेगी, हर पल मुझे सुकून देगी।

मैंने मुड़कर देखा, तो मेरी माँ मेरे लिए एक नया 'Night Suit' निकाल रही थी। वो धीरे-धीरे चलते हुए मेरे पास आई। उनके पैरों की वो पायल... उनकी वो 'रुनझुन' मेरे जिस्म में संगीत की लहरें पैदा कर रही थी। मेरा पूरा ध्यान उनकी पायल की उस आवाज़ में खो गया। वो आवाज़ जैसे मुझसे धीरे से कह रही थी— "यह संगीत सिर्फ आपका इंतज़ार कर रहा है... जल्दी से नहाकर आइए।"


माँ जैसे ही मेरे करीब आई, उनके बदन की वो भीनी सी खुशबू फिर से मेरी साँसों में बस गई। उस नज़दीकी ने मेरे दिल की धड़कनों को इस कदर तेज़ कर दिया कि मेरा लौड़ा जैसे अकड़ कर फटने को था और मेरी पेन्ट का उभर इतना था कि मुझे यकीन था कि माँ ने उसे देख लिया होगा और मेरी आँखों की उस भूख को ज़रूर पढ़ लिया होगा।


IMG 20260424 121257

माँ ने वो नाइट सूट मेरे हाथों में थमाया। जैसे ही उनकी नाजूक उँगलियाँ मेरे हाथ से छुईं, मेरे पूरे जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया। मुझे लगा शायद माँ का भी वही हाल था—उनके हाथ में भी एक हल्की सी कंपकंपी थी। मैं हाथ में सूट थामे बस उनकी उस 'मोहिनी' सूरत को निहारे जा रहा था, मानो उन्हे अपनी आँखों में कैद कर लेना चाहता हूँ। शर्म के मारे माँ ने अपनी नज़रें झुका लीं और फिर वही मखमली आवाज़ मेरे कानों में पड़ी—

"जाइए न अब..."

मैं जैसे ख्यालों की दुनिया से हकीकत में वापस लौटा। मुस्कुराते हुए मैं बाथरूम की तरफ बढ़ा, पर मेरी नज़रें अब भी तिरछी होकर माँ पर ही टिकी थीं। उनके होंठों पर वो चंचल सी मुस्कान मुझे अपनी तरफ खींच रही थी। खुद को किसी तरह संभालते हुए मैं बाथरूम के अंदर घुसा, पर एक शरारत के तहत मैंने दरवाज़ा खुला ही रहने दिया।

माँ मेरी इस हरकत को तुरंत भाँप गई। उन्होंने आगे बढ़कर खुद ही दरवाज़ा बंद किया, और मुझे यकीन है कि उनके होंठों ने गुनगुनाकर ज़रूर कहा होगा— "बहुत बेशर्म बन गए हैं आप!"

मैं शावर के नीचे खड़ा मन ही मन मुस्कुरा कर सोच रहा था—बेशर्मी तो अभी दिखानी बाकी है। पानी की ठंडी बूंदें बदन पर गिर रही थीं, पर अंदर की आग ठंडी होने का नाम नहीं ले रही थी। मैं आने वाले पलों के बारे में सोचकर ही रोमांचित हो उठा। जो बेचैनी मुझे महसूस हो रही थी, यकीनन माँ भी उसी दौर से गुज़र रही होगी।

वो पल अब बस कुछ ही दूर था जब माँ मेरी बाँहों में होगी... एक बीवी के रूप में, एक प्रेमिका के रूप में। मैं उन्हे हर जगह छू सकूँगा, उन्हे जी भरकर चूम सकूँगा। ये वो अहसास था जिसे शब्दों में बयाँ करना नामुमकिन है। वो भी यही सोच रही होगी कि आज की ये रात हमारे प्यार को एक ऐसी परवानगी पर ले जाएगी, जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा।
बहुत ही खुबसुरत शानदार लाजवाब और अद्भुत मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 
  • Like
Reactions: parkas

dark_devil

dArc_dEvil
252
176
43
Update 43




माँ कुछ पलों तक बस मुझे किसी अचरज में डूबी हुई नज़रों से देखती रही। उनकी आँखों में वो सब कुछ लिखा था जो उनके दिल में चल रहा था। फिर भी मैंने मुस्कुराते हुए उनसे पूछा, "क्या?"

उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस अपनी पलकें धीरे से झपकाईं जैसे कह रही हो—'कुछ नहीं'। मैंने फिर छेड़ते हुए पूछा, "पसंद नहीं आया क्या?"

माँ की खामोश नज़रे मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मुझे कह रही हो—'पागल! मुझे ये पसंद ही नहीं बल्कि बहुत पसंद आया है'। पर ज़ुबान से वो सिर्फ इतना ही बोल पाई, "बहुत..."

मैं अपनी मुस्कुराहट नहीं रोक पाया और हल्की आवाज़ में बोला, "तो फिर पहनो इसे।"

वो मुस्कुराई, एक बार मेरी आँखों में आँखें डालीं और फिर अपनी नज़रें झुकाकर फुसफुसाते हुए बोली, "आप पहना दीजिए।"

मेरे चेहरे पर एक चौड़ी मुस्कान आ गई। मैंने बॉक्स से वो चमकता हुआ नेकलेस निकाला और उनके पीछे खड़े होकर, बड़ी नज़ाकत से उनके गले में पहना दिया।


68747470733a2f2f73332e616d617a6f6e6177732e636f6d2f776174747061642d6d656469612d736572766963652f53746f

माँ ने अपनी नज़रें उठाईं और आईने में पहले मुझसे नज़रें मिलाईं, फिर उस नेकलेस को देख ब्लश करने लगी। उन्होंने अपना हाथ उठाकर अपना पल्लू साइड किया और नेकलेस को सेट किया और जिसके कारण उनकी क्लीवेज दिखने लगी और उस नेकलेस को अपनी गोरि और मखमली छाती के बीच, उनकी 'Cleavage line' पर प्यार से रखा।

Picsart-26-04-24-12-04-40-087

मैं उन्हे आईने में निहार रहा था। मैंने अपनी ठुड्डी (Chin) उनके कंधे पर टिकाई और उनके कान के पास धीरे से बोला, "बहुत सुंदर दिख रही हो... और..."

इतना बोलकर मैं रुक गया। माँ खिलखिलाकर हँस पड़ी और अपनी आँखों में ढेर सारा प्यार भरकर बोली, "और क्या?"

मैंने उनके कान के पास अपनी आवाज़ को और भी गहरा और हल्का करते हुए फुसफुसाकर कहा, "और बहुत सेक्सी..."

माँ बुरी तरह ब्लश कर गई और अपनी नज़रें झुकाकर एक प्यारी सी अदा में बोली, "धत्!"

मैं हँसने लगा और अपनी गर्दन उनके कंधे के ऊपर से थोड़ा और आगे बढ़ाकर, अपना चेहरा उनके चेहरे के करीब ले गया। जैसे ही मैं उन्हे किस करने के लिए बढ़ा, माँ अचानक कातिलाना अदा और अपनी उस मीठी आवाज़ में बोली—

"उऊंम्मम्... पसीना है, जाइए जाकर नहाइए पहले!"

माँ की ये बात सुनते ही मेरा मन जैसे हवा में उछल पड़ा।

हाँ, मेरा पूरा बदन पसीने से तर-बतर था। एक तो सुबह से नहाने का मौका नहीं मिला था और ऊपर से इस चिलचिलाती गर्मी में बाज़ार की भाग-दौड़। माँ का "पहले नहा लीजिए" कहना मुझे बुरा नहीं लगा, बल्कि मैं तो अंदर ही अंदर झूम उठा। उनके इस कहने के अंदाज़ में एक इशारा था—कि उन्हे अब मेरे करीब आने में कोई झिझक नहीं है, और वो आज खुद को मुझे सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मैं बस माँ को, मेरी बीवी को, मेरी मंजु को निहारता रहा।

"जाइए न, नहा लीजिए..." उन्होंने फिर से टोकते हुए कहा।

मेरे होंठों पर एक शरारती मुस्कान फैल गई। मैंने झुककर मज़ाक में कहा, "जो हुक्म सरकार!" और बाथरूम की तरफ मुड़ गया।

"रुकिए!"

माँ की उस कोमल और मखमली आवाज़ ने जैसे मेरे कदमों में ज़ंजीरें डाल दीं। ऐसा लगा जैसे कानों में किसी ने मिश्री घोल दी हो। ये वही आवाज़ थी जो कभी मुझे लोरियाँ सुनाकर सुलाती थी, जो मुझे अच्छे-बुरे का फर्क समझाती थी। और आज, ये आवाज़ मेरी अपनी 'धरोहर' बन चुकी थी। अब ये हर पल मेरे पास रहेगी, हर पल मुझे सुकून देगी।

मैंने मुड़कर देखा, तो मेरी माँ मेरे लिए एक नया 'Night Suit' निकाल रही थी। वो धीरे-धीरे चलते हुए मेरे पास आई। उनके पैरों की वो पायल... उनकी वो 'रुनझुन' मेरे जिस्म में संगीत की लहरें पैदा कर रही थी। मेरा पूरा ध्यान उनकी पायल की उस आवाज़ में खो गया। वो आवाज़ जैसे मुझसे धीरे से कह रही थी— "यह संगीत सिर्फ आपका इंतज़ार कर रहा है... जल्दी से नहाकर आइए।"


माँ जैसे ही मेरे करीब आई, उनके बदन की वो भीनी सी खुशबू फिर से मेरी साँसों में बस गई। उस नज़दीकी ने मेरे दिल की धड़कनों को इस कदर तेज़ कर दिया कि मेरा लौड़ा जैसे अकड़ कर फटने को था और मेरी पेन्ट का उभर इतना था कि मुझे यकीन था कि माँ ने उसे देख लिया होगा और मेरी आँखों की उस भूख को ज़रूर पढ़ लिया होगा।


IMG 20260424 121257

माँ ने वो नाइट सूट मेरे हाथों में थमाया। जैसे ही उनकी नाजूक उँगलियाँ मेरे हाथ से छुईं, मेरे पूरे जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया। मुझे लगा शायद माँ का भी वही हाल था—उनके हाथ में भी एक हल्की सी कंपकंपी थी। मैं हाथ में सूट थामे बस उनकी उस 'मोहिनी' सूरत को निहारे जा रहा था, मानो उन्हे अपनी आँखों में कैद कर लेना चाहता हूँ। शर्म के मारे माँ ने अपनी नज़रें झुका लीं और फिर वही मखमली आवाज़ मेरे कानों में पड़ी—

"जाइए न अब..."

मैं जैसे ख्यालों की दुनिया से हकीकत में वापस लौटा। मुस्कुराते हुए मैं बाथरूम की तरफ बढ़ा, पर मेरी नज़रें अब भी तिरछी होकर माँ पर ही टिकी थीं। उनके होंठों पर वो चंचल सी मुस्कान मुझे अपनी तरफ खींच रही थी। खुद को किसी तरह संभालते हुए मैं बाथरूम के अंदर घुसा, पर एक शरारत के तहत मैंने दरवाज़ा खुला ही रहने दिया।

माँ मेरी इस हरकत को तुरंत भाँप गई। उन्होंने आगे बढ़कर खुद ही दरवाज़ा बंद किया, और मुझे यकीन है कि उनके होंठों ने गुनगुनाकर ज़रूर कहा होगा— "बहुत बेशर्म बन गए हैं आप!"

मैं शावर के नीचे खड़ा मन ही मन मुस्कुरा कर सोच रहा था—बेशर्मी तो अभी दिखानी बाकी है। पानी की ठंडी बूंदें बदन पर गिर रही थीं, पर अंदर की आग ठंडी होने का नाम नहीं ले रही थी। मैं आने वाले पलों के बारे में सोचकर ही रोमांचित हो उठा। जो बेचैनी मुझे महसूस हो रही थी, यकीनन माँ भी उसी दौर से गुज़र रही होगी।

वो पल अब बस कुछ ही दूर था जब माँ मेरी बाँहों में होगी... एक बीवी के रूप में, एक प्रेमिका के रूप में। मैं उन्हे हर जगह छू सकूँगा, उन्हे जी भरकर चूम सकूँगा। ये वो अहसास था जिसे शब्दों में बयाँ करना नामुमकिन है। वो भी यही सोच रही होगी कि आज की ये रात हमारे प्यार को एक ऐसी परवानगी पर ले जाएगी, जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा।
✍️👌
 
  • Like
Reactions: Napster
Top