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Romance भंवर (पूर्ण)

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Update:- 151






घर वापस आकर अपस्यु ने एक नींद लेने के बाद अभ्यास में जुट गया। अलग अलग तरह के मूव्स को प्रैक्टिस करते हुए अपस्यु अपनी पूरी योजना पर गौर करने लगा। हर चीज अपनी जगह बिल्कुल सही थी और वक़्त के साथ बस उन्हें आराम से आगे बढ़ने देना था। … फिर अचानक ही उसे काया का ख्याल आया।


अपस्यु अपना अभ्यास रोककर, कॉल लगाया। उधर से काया… "हां अपस्यु बोलो ना।"..


अपस्यु:- फ्री हो क्या?


काया:- हां फ्री ही हूं, तुम्हे बताया तो था, 12 से 3 की क्लास है उसके बाद फ्री।


अपस्यु:- ठीक है कहीं जाना मत, लिसा से मिलवाने का वक़्त आ गया है। तुम अपने हिसाब से देख लेना।


काया:- हम्मम ! ठीक है। एक काम करो उसे फ्लैट ही बुला लो। जब वो आ जाए तो मुझे बस मैसेज कर देना।


काया का कॉल डिस्कनेक्ट होते ही अपस्यु ने लिसा से संपर्क किया। वो भी फ्री ही थी, और मन तो उसका भी नहीं लग रहा था, इसलिए वो भी मिलने चली आयी। घर की घंटी बाजी, और अपस्यु दरवाजा खोलते…. "उफ्फ ! ये हुस्न ये अदा, कहीं हम हो ना जाए फिदा।"..


लिसा:- फ्लर्टिंग हां । तुम्हारा फ्लैट तो काफी शानदार है अपस्यु।


अपस्यु:- जी शुक्रिया मिस, वैसे इतना बन संवर कर कहां बिजली गिराने निकली हो।


लिसा, सिगरेट निकालती…. "तुम्हे आपत्ति ना हो तो"..


अपस्यु:- इट्स ओके..


लिसा, सिगरेट के कश फूंकती…. "सब कुछ होते हुए भी इंसान कितना तन्हा हो जाता है ना। सब कुछ अपने हिसाब से होता तो कितना अच्छा होता ना।"..


अपस्यु:- तुम यूके से वापस क्यों आयी लिसा?


लिसा:- कुछ बातें याद करने से सेहत खराब हो जाती है अपस्यु। अब ऐसा मत सोचना कि वहां कुछ बहुत बुरा हुए था, या गोरों ने मेरा चिर हरण कर दिया था। बस अपने लोगों के बीच वहां नहीं थी और यहां अपनो को ढूंढने आयी तो पता चला कि सब व्यस्त है।


अपस्यु:- इतना गंभीर नहीं होते। जब लगे जिंदगी में केवल तन्हाई है, तब समझ लेना की ये सही वक़्त है अपना पूरा फोकस उस काम पर देने के लिए जिसकी ख्वाहिश कभी तुमने की थी।


लिसा:- और जिसने कभी कुछ करने की कोई ख्वाइश ही ना की हो..


अपस्यु:- तो कौन सा जिंदगी खत्म हो गई है। सोशल साइट पर जाओ और झगड़े करो, भड़ास निकालते रहो।


लिसा:- हिहिहीहिही… आइडिया बुरा नहीं है, आज ही करके देखती हूं।


तभी फ्लैट की बेल बाजी और अपस्यु दरवाजा खोलते…. "काया, आओ अंदर"..


काया भी उन दोनों के पास बैठती…. "अपस्यु मैंने आज केट वॉक सीखा है, मैं तुम्हे करके दिखती हूं, तुम बताना कैसा है।"


अपस्यु:- लेकिन मै कैसे बता सकता हूं।


काया:- अरे यूट्यूब लगाकर देख लो ना।


लिसा:- आप कीजिए, मै देखकर बताती हूं।


काया:- ये सुंदर बाला कौन है अपस्यु?


अपस्यु:- ये सोमेश अंकल की बेटी और मेरी प्यारी दोस्त लिसा है।


लिसा मुस्कुराकर अपस्यु को उसे प्यारी दोस्त कहने के लिए थैंक्स कहीं, फिर काया से…. "हाय मै हूं लिसा।"..


काया:- मै हूं काया, अपस्यु की रिलेटिव।


लिसा:- सो आप मॉडल है।


काया:- नहीं बस मॉडलिंग का सपना था और उसे है पुरा करने के लिए दिल्ली आयी हूं।


अपस्यु:- तुम दोनो एक काम क्यों नहीं करती, काया इसे अपने फ्लैट में ही ले जाओ, वहां केट वॉक भी दिखा देना, मै जबतक कुछ काम कर लेता हूं।


लिसा:- यें क्या बात हुई, मुझे यहां बुलाकर तुम भी बिज़ी हो रहे हो।


अपस्यु:- बुलाया ही था कि तुम्हे साथ ले चलता, काम के साथ बातें भी हो जाती। लेकिन शायद काया को तुम्हारी ज्यादा जरूरत है।


काया:- थैंक्स अपस्यु। लिसा अगर तुम्हे कोई ऐतराज ना हो तो क्या तुम मेरी हेल्प कर दोगी।


लिसा:- ठीक है चलो चलते हैं। अब अपस्यु ने कहा दिया तो तुम्हारी मदद करना तो बनता है ना।


काया:- बहुत ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है, ठीक पास वाला मेरा फ्लैट है।


लिसा अपस्यु को बाय कहती हुई काया के साथ चली गई और अपस्यु वापस से अपने मूव्स और अभ्यास पर कन्सन्ट्रेट करते हुए खुद से ही कहने लगा… "अब सब अपने लय में है पूरी तरह से।"…


शाम के 7 बजे अपस्यु के फिजिक्स का क्लास शुरू हो गया। ऐमी और अपस्यु दोनो ने पहले तो फिजिक्स के टेस्ट दिए ताकि आलोक को उनका केवल पता हो। 5 स्टेप के टेस्ट से जो बसिक्स से शुरू होकर ऊपर के लेवल तक जाते। अपस्यु ने 3 लेवल तक क्लियर किया जबकि ऐमी ने 4 लेवल क्लियर कर लिया था।


दोनो के फिजिक्स में रुचि को देखते हुए आलोक काफी खुश हुआ और दोनो को कल के लिए टॉपिक देकर वहां से भेज दिया। ज़िन्दगी अब बिल्कुल रूटीन की तरह हो चली थी, जिसमें जायका डालने के लिए कभी-कभी उस स्टूडेंट लीडर विकास की एंट्री हो जाती, तो कभी वो 4 लड़कियां आ जाती। इसके अलावा लिसा और रुनझुन भी थी जो कभी-कभी सुप्राइज दे जाती। बाकी फैमिली ड्रामे तो थे ही, जो अपस्यु के खाली समय को पूरा भर देते।


2 महीने हो चुके थे उस बड़ी घटना के जिसमे एक बड़ा सा नाम पुरा डूब गया था। शाम का वक्त था और सात्विक आश्रम में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन हो रहा था। भक्तो की भीड़ में बहुत से लोग अनुप्रिया और महिदिपी के अनुयायि थे। बड़े-बड़े आैहदे और बड़े-बड़े नाम वाले लोग उन्हीं भिड़ में बैठे हुए थे।


सामने से अनुप्रिया अपने चेलों के साथ प्रवचन दे रही थी और एक किनारे से महिदीपी कुछ भक्तों कि आर्थिक मदद कर रहा था। ठीक बड़े से प्रवचन मैदान के पीछे एक आलीशान महल बाना हुआ था और उस महल के दिखावे वाले जगह जहां सब अच्छे काम हुए करते थे, ठीक उसी ग्राउंड फ्लोर के नीचे बड़ी सी महफिल सज रही थी।


उस बड़ी सी महफिल में केवल कुछ लोग आमंत्रित थे जिन्हें बुलाया गया था। मंत्र मुग्ध करने वाला माहौल था और चारो ओर केवल खूबसूरत से चेहरे नजर आ रहे थे। उसी महफिल के बड़े से हॉल के पीछे कई गुप्त कमरे थे जिसके एक कमरे में कलिका और होम मिनिस्टर का बेटा सौरव था।


कलिका, रेड वाइन का छोटा सा ड्रिंक सौरव के ओर बढ़ाती… "मुझे भी किसी ना किसी से शादी करनी ही है, तुम भी कब तक कुंवारे रहोगे, हम दोनों एक हो गए तो यूं समझ लो 2 पॉवर एक हो जाएगी, हम मिलकर धमाल मचा सकते है।"


सौरव:- लेकिन तुम मुझसे उम्र में बड़ी हो..


कलिका उसकी बात पर मुस्कुराकर उसके करीब आकर उसके हाथ से जाम लेकर… "मैंने चेक कर लिया है, आओ साथ खड़े होकर देख लो क्या मै बड़ी दिखती हूं।"


सौरव कलिका के साथ खड़े होकर, सामने लगे फुल साइज मिरर में दोनो को देख रहा था। छोटा सा आकर्षक चेहरा, जिसको देखकर उम्र का पता नहीं लगाया जा सके। नजर नीचे फिसलती, पल्लू के नीचे चोली के अंदर के कसे हुए उरोज काफी मादक लग रहे थे।


कमर पर बंधी साड़ी के ऊपर, कमर के दोनो किनारे देखने का वो नजारा, उफ्फ नजर ठहर जाए। सौरव बड़े गौर से कलिका के फिगर को एनालिसिस कर रहा था… "क्या हुआ पुरा फिगर चेक कर लिए, दोनो जब साथ खड़े होंगे तो परफेक्ट जोड़ी लगेंगे ना।"


सौरव, कुटिल नजरो से देखते, साथ जब खड़े होंगे तो बड़े छोटे जैसे बिल्कुल नहीं दिखेंगे, लेकिन तुम्हारी फिगर साड़ी के ऊपर से नजर नहीं आ रही।


कलिका:- ये तो तुम्हारे लिए हमेशा कि समस्या बनी रहेगी, क्योंकि मै ज्यादातर साड़ी ही पहनती हूं। थोड़ी मेहनत करके पूरे फिगर क्यों नहीं चेक कर लेते..


कलिका के बात सुनकर सौरव का जोश पुरा उफान पर था। नीचे पैंट कि हलचल तूफान पर थी। वो कलिका के पीछे आया, पल्लू को नीचे गिराकर चोली में बंद उसके उरोज को आइने में देखते हुए नजारे ले रहा था।… "साइज क्या है।"… "36"..


सौरव गरदन के नीचे खुशबू लेते, अपने हाथ आगे ले जाकर उसके स्तन को दबाने लगा। आज तक किसी के स्तन को दबाने में वो मज़ा नहीं आया, जो चोली के नीचे कलिका के कसे उरोज को दबाने में मिल रहा था।


तेजी के साथ उसने चोली के डोर को खोलना शुरू किया, धीरे धीरे चोली ढीली होती चली गई और पूरे डोर खुलते ही सौरव उसके स्तन देखने के लिए पागल हो गया। कलिका हंसती हुई बड़ी अदा से वो चोली अपने खुले बहन से निकाल दी।


कमर तक बंधे साड़ी के ऊपर 36 के साइज के उसके गोरे स्तन कमाल के लगा रहे थे। ऐसा लग रहा था आइने के सामने रती खड़ी है, और सौरव उसके बड़े बड़े खुले स्तन देखकर पागल हुआ जा रहा था। वो कलिका के बांह के नीचे से अपने दोनो हाथ बढ़ाकर, उसके दोनो स्तन को पर जितना अपनी मुट्ठी की पकड़ बना सकता था, पकड़ बनाकर उसके निप्पल को अंगूठे से दबाकर मिजने लगा।


आइने के सामने क्या कामुक नजारा था, कलिका के दोनो स्तन के ऊपर फैले पंजे और अंगूठे से मीजते निप्पल, कलिका अपने होंठ को दातों तले दबाए, मादक अंगड़ाई ले रही थी और अपने दोनो हाथ पीछे करके, जैसे ही उसने अपने दोनो हाथ सौरव के ऊपर रखी, सौरव बेचैनी में स्तन से हाथ हटाकर, उठे हुए पूर्ण उभार को देखकर वो पागल हो गया।


वो आइने में देखते हुए नीचे बैठा और उसके कमर को चूमते हुए हाथ आगे ले जाकर साड़ी को कमर से खोलकर, उसके पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया। सौरव से बर्दास्त कर पाना मुश्किल हो गया उसने तुरंत ही कलिका की पैंटी निकालकर अपना मुंह दरारों के बीच घुसा लिया और जीभ से उसके योनि को गीला करने लगा।


कलिका आगे के ओर झुककर टेबल को पकड़ ली और अपने दोनो पाऊं को खोल कर फैला दी। कलिका के पीछे की मादक बनावट और दरार के बीच उसके योनि को देख सौरव पागल हो गया। दरार पर वो पुरा जीभ लगाकर कलिका के गुदा मार्ग से लेकर उसके योनि को चाटने लगा।


जल्द ही कलिका अपनी कमर हिलाकर उसे आगे बढ़ने का इशारा करने लगी। कलिका भी इस वक़्त पूरी जोश में थी और जल्द से जल्द उसका लिंग अपने योनि में मेहसूस करना चाहती थी। सौरव अपने पैंट को जल्दी से नीचे करके अपने आधे खड़े लिंग को योनि से घिसने लगा और जैसे ही लिंग खड़ा हुआ, पुरा धक्का मारकर अपना लिंग कलिका के योनि में उतार दिया।


कलिका का पूरा बदन हिलने लगा। आइने में उसके हिलते बड़े स्तन, काफी मनमोहक लग रहे थे, सौरव उसके स्तन को अपने दोनो हाथो में भरकर तेज-तेज धक्के लगाने लगा। दोनो पूरे मस्ती में चूर सेक्स की दुनिया में डूब गए। अचानक ही सौरव के धक्कों कि गति बढ़ गई और दोनो ही अपने कमर जोर-जोर से हिलाने लगे।


जैसे ही सौरव छुटने को आया कलिका पलट गई और उसके लिंग को जोड़-जोड़ से हिलाने लगी। बस 2 ही बार हिलाई होगी और उसका पूरा वीर्य कलिका के बड़े बड़े स्तन पर था, जिसे देखकर सौरव और भी पागल हो गया।


5 मिनट बाद, सौरव दोनो स्तन को मुंह में लिए चूस रहा था… "ये सब तुम्हारा ही है, अब चोली बांधो, हमे अपने शादी के अनाउंसमेंट के बाद अपना भविष्य भी तय करना है।"..


सौरव:- हम एक महीने के लिए हनीमून पर जाएंगे और दिन रात मैं तुम्हारे बदन से खेलता रहूंगा।


कलिका:- हाहाहाहा.. फिर उनका क्या होगा..


सौरव:- किनका..


कलिका बैठती हुई… तुम चोली को अच्छे से बांधो, फिर मै तुम्हे दिखती हूं।


चोली के बांधते ही कलिका अपने पल्लू को ठीक की और बेल बजाई। एक कमसिन लड़की अंदर आयी, उसने एक झलक वहां के माहौल को देखा और कलिका को तैयार करने लगी। उसके जाते ही… "शादी के बाद सुहागरात में हर पति को एक वर्जिन लड़की चाहिए होती है ना, इसलिए वो तुम्हारे लिए। और फिक्र मत करो शारीरिक सुख तुम्हे यहां उम्र भर मिलता रहेगा। बस ये जगह फलता फूलता रहना चाहिए।


सौरव पागल होकर कलिका के होंठ चूमते… "तुमने तो मेरी लाइफ बाना दी।"..


कलिका:- मै जा रही हूं, कुछ देर बाद तुम मुझे ज्वाइन करने बाहर आ जाना।


रात के लगभग 9 बजे, अनुप्रिया का पूरा परिवार टेबल पर बैठा हुआ था। साथ में 4 गेस्ट भी पहुंचे हुए थे। 2 पक्ष और विपक्ष के अध्यक्ष, होम मिनिस्टर और उसका बेटा।


सब लोग बैठे ही थे कि कलिका एक बड़ा सा अनाउंसमेंट करती हुई कहने लगी… "मैंने और मंत्री जी के बेटे सौरव ने शादी करने का फैसला किया है। क्यों सौरव।"…


सौरव:- हां पापा मुझे कलिका बहुत पसंद है, अब आप भी जल्दी से हां कह दो।


होम मिनिस्टर:- मुझे तो दूसरी मीटिंग के लिए बुलाया गया था, यहां मेरे बेटे की शादी तय हो गई। अनुप्रिया जी आपका क्या कहना है।


अनुप्रिया:- कलिका एक समझदार लड़की है मंत्री जी, आपके बेटे के कैरियर ग्राफ को नई ऊंचाई देगी।


होम मिनिस्टर:- हां सो तो है। मुझे मंजूर है।


रुद्रा:- अगर ये सब बातें हो गई हो तो हम अपने एक अहम मुद्दे पर बात कर ले। पिछले हफ्ते भर में जो भी कुछ हुआ है आश्रम में।


माहिदिपी:- हम गुरु निशी के शिष्य है। ना जाने कितने आचार्य इस आश्रम में आए और हमारे ज्ञान को चैलेंज किया। हमने ढोंग करके फर्जी नहीं किया, बल्कि हमारे पास क्षमता थी और हमने अपनी बुद्धि का परिचय दिया, इसलिए तो ये सात्त्विक आश्रम कभी भी टीवी या पेपर की न्यूज नहीं रही।


"लेकिन एक लड़की ने जिस हिसाब से गुरु और शिष्य के ऊपर सवाल जवाब किए, मै एक पल के लिए हैरान हो गया कि गुरु निशी का कोई शिष्य तो हमारे बीच नहीं बैठा। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता था, ना तो गुरु निशी है इस दुनिया में और ना ही हमारे अलावा उनका कोई शिष्य।"


पहली बार हमारे ज्ञान को चैलेंज करके हमे टारगेट किया गया। लोगों के बीच बातचित का विषय बना और अंत में मुझे कहना पर गया कि उसने हमारी बात को सुनकर मान लिया, जबकि हमारी बातें सुनने के लिए नहीं बल्कि सुनकर उसपर सोचने और तर्क करने के लिए होती है।
 

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Update:- 152





विपक्ष अध्यक्ष:- हां तो मामला संभाल लिया ना..


अनुप्रिया:- अध्यक्ष महोदय जी हम गुलाम बनाते है, ना कि सवाल जवाब करने वाले मुक्त व्यक्ति, जो हमारे ही अस्तित्व को चुनौती दे। पिछले कई दिनों से प्रवचन कम और युवाओं के सवाल ज्यादा होते है। हर कहे शब्द का अर्थ और भावार्थ के पीछे पड़ जाते है। और ये सब बस हुआ है आप लोगो के वजह से।


दोनो अध्यक्ष एक साथ… "हम समझे नहीं?"


रुद्रा:- जैसे आप लोग अपने प्रचार के लिए पहले दंगे फसाते हो और फिर खुद वहां पहुंचकर सुर्खियां बटोरते हो, वैसे ही स्टूडेंट पॉलिटिक्स कर रहे कुछ छात्र और छात्राओं ने मिलकर मीडिया आटेंशन पाने के लिए, एक प्रिंसिपल को घेरने का प्लान किया था, और वहां बीच में आ गया मंत्री जी का मुंह बोला बेटा, अपस्यु।


होम मिनिस्टर:- मै अपने बेटे को तो आज तक कहीं पहुंचने से रोक नहीं पाया, फिर वो तो सौरव से कहीं ऊंची चीज है। कहना ग़लत नहीं होगा कि कलिका अगर अपस्यु से शादी का प्रस्ताव रखती तो वो अकेला तुम सब के कैरियर ग्राफ को ऊंचाई पर पहुंचा देता, वो भी बिना एक भी क्राइम और गैर कानूनी गतिविधियों में हाथ डाले।


होम मिनिस्टर की बात सुनकर सभी हसने लगे। अनुप्रिया हंसती हुई कहने लगी… "शायद आपको पता नहीं मंत्री जी, कलिका उसकी सौतेली बहन है, और मै उसकी सौतेली मां। एक बात तो है, चन्द्रभान कि बुद्धि उसके बच्चो में कुट कूटकर भरी है, हां लेकिन उस लड़के का अभिभावक गुरु निशी था, इसलिए हमारे काम में बाधा बनने की सोच रहा है।


इस सच्चाई के बाद तो वहां मौजूद सारे अतिथि बिल्कुल दंग रह गए। अनुप्रिया सच्चाई से पर्दा उठती हुई सारी बातें बता दी, वो भी ऑडियो विजुअल प्रूफ के साथ जहां अनुप्रिया अपने सभी पुराने पार्टनर्स के ऊपर सर्विलेंस रखी हुई थी। इसी के साथ इस सच का भी उसने खुलासा कर दिया की क्यों वो केवल लोकेश राठौड़ को मारना चाह रही थी और बाकियों को नहीं, क्योंकि उनके पुराने साथी ने कभी अनुप्रिया और महिदीपि का रास्ता नहीं काटा।


अंत में महिडीपि…. "अब जब हमे उसकी योजना के बारे में पता है कि वो 2 लाख करोड़ के हवाले में हमसे डील करेगा, तो उसके ड्रीम प्रोजेक्ट को हम टेकओवर करते है। 4 लाख करोड़ रुपया लगभग 55000 मिलियन डॉलर, ये कुबेर का खजाना हमारे हाथ लगने वाला है। उसे सोचने दो की वो प्लान कर रहा है और यहां हम उसके प्लान को टेकओवर करेंगे। मंत्री जी आपकी पॉलिटिक्स क्या कहती है, आप तो उसके बहुत बड़े फैन है।


होम मिनिस्टर:- मै उसका फैन हूं और वो बहुत बड़ा ज्ञानी भी है। लेकिन राजनीति शास्त्र का थोड़ा कम ज्ञान है। मेरा फर्ज बनता है कि उसे इस ज्ञान में भी पारंगत करवा दू।


रुद्रा:- हम्मम ! फिलहाल तो वो अभी मियामी में है और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बचे हुए अमाउंट के लिए हाथ पाऊं मरेगा। देखते है कब तक वो रकम जमा करते है? उसे अपना प्लान करने देते है और हम बस आराम से उन पर नजर बनाए रखते है। आप सबका बहुत बहुत शुक्रिया, जीत की रकम का आधा हिस्सा हमारा होगा, और आधे हिस्से आप लोगों का।


सभा उसी के साथ समाप्त हो गई। जाते-जाते बावरा सौरव एक बार फिर कलिका के होंठ चूमते हुए पूछने लगा… "कल फ्री हो क्या?"


कलिका:- नीचे ज्यादा जोश मार रहा है तो यहां बहुत से व्यवस्था है, आओ और एन्जॉय कर लेना, शर्माना नहीं।


सौरव:- नाह तुम्हारे बिना दिल को चैन नहीं मिलेगा।


कलिका हंसती हुई… "दिल को या नीचे तुम्हारे.. खैर थोड़ा इंतजार करो इंगेजनेंट की डेट फिक्स करो, उस रात हम पुरा एन्जॉय करेंगे, वो भी विदेशियों को टक्कर देने वाले स्टाइल में।"..


सौरव उतावला होकर वहां से निकला और कलिका वापस आकर बैठ गई, अपनी फैमिली मीटिंग में। सबसे पहले तो सबने उसे शादी की बधाइयां दी फिर आगे की बात शुरू हो गई…


कलिका:- हमने जल्दबाजी तो नहीं कि ना इन लोगो को सामिल करके।


रुद्रा:- नहीं, इनकी मनसा जानने के लिए हमे वक़्त चाहिए था। सौरव से शादी का डिसीजन मास्टर स्ट्रोक है, होम मिनिस्टर शायद अपने रिश्तेदारी को ही मजबूत करे लेकिन पैसा का मतलब पॉवर होता है, इसलिए योजना के अंत में उसे यदि लेते और वो कहीं हम दोनों (अपस्यु और अनुप्रिया की टीम) को किनारे करके सारा माल हड़प कर जाता, तो हम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते थे। अभी तो 24 घाटे सर्विलेंस है उन सबके ऊपर।


युक्तेश्वर:- उसका भाई आरव जो मायलो ग्रुप देख रहा है, वो हमारे कंपनी को एक परसेंट भी टारगेट नहीं कर रहा, बल्कि अपना पूरा ध्यान नए नए टेंडर में दे रहा है जिसमें उसकी मदद उसका शसुर कर रहा है।


महिदीपु:- जल्दी से 2 लाख करोड़ जमा करने है ना इसलिए कंपीटेशन करने के बदले पुरा फोकस वहीं दिया है। एक तरह से ठीक भी है, हमारे लिए ही कर रहा है। हो सके तो उस ओर के सारे काम तुम लोग छोड़ दो और प्रोफिट के लिए सेंट्रल के टेंडर के बदले राज्यो के टेंडर उठाओ। रेगुलर मैन्युफैक्चरिंग को प्रमोट करो।


रुद्रा:- सात्विक आश्रम की ब्रांच ना खोल ले पिताश्री। (हॉल में सभी लोगो के हसने की आवाज) .. बस बस.. बिजनेस का आईडिया नहीं है और ज्ञान देते है लंबा चौड़ा। हम बिजनेस देख लेंगे, आप पहले आश्रम का कहिए, वहां जो उस सौतेले ने हंगामा करवाया है उसपर क्या एक्शन लिया जाए।


कलिका:- "भईया वो प्रायोजित एक्शन नहीं है। मैं लगातर उसके आस पास नजर बनाए हूं। उल्टा अपस्यु ने उन लड़कियों के ग्रुप को अपने फ्लैट में ही रखा है ताकि मीडिया आटेंशन पाने के लिए, वो चिप हरकत ना कर सके। अपस्यु के कई सारे कॉन्टैक्ट्स, उसके यहां दिल्ली आने के पूर्व से आश्रम आते है, इसका मतलब ये तो नहीं कि हम सब पर शक करते रहे।"


"वैसे भी मां और मामा का दिमाग मेहनत पर नहीं लगता, इन्हे फ्री में पैसा चाहिए। दोनो को बोलो भक्तो के सवाल का पूर्ण निराकरण करे, ताकि लोगो की आस्था बनी रहे। और किसी भी कीमत पर स्टूडेंट को ना छेड़े, क्योंकि उन्हें भनक भी लगी कि सात्त्विक आश्रम के कारन उन्हें मीडिया आटेशन मिल रहा है, फिर यहां पहले नए स्टूडेंट्स आएंगे और बाद में नए नए बखेरे। और विश्वास मानो हम एक स्टूडेंट को गायब करेंगे, तो अगले दिन एक पुरा कॉलेज यहां घेराव कर देगा।"


"एक बात और हम ये मानकर चलेंगे की अब से जो भी स्टूडेंट आ रहे है, उसे अपस्यु भेज रहा है, एक छोटी सी भुल और हम लाइमलाइट में। इसलिए अपने ठरकी चलो को संभाल लेना आप लोग। आज कल बाबा और उनके चेलों के एमएमएस बहुत लीक हो रहे है।


अनुप्रिया:- इस बात से मै सहमत हूं, सब शांत दिखता है इसका ये मतलब की लोग शांत बैठे है। हर किसी पर हम नजर दिए है इसका ये मतलब नहीं कि वो हमसे नजर बचाकर अपनी योजना नहीं बना रहा होगा। जबतक अपस्यु के साथ डील नहीं हो जाता और डील के बाद उसे और उसके साथियों को मारकर हम एक बड़ा सबूत नहीं मिटा देते, तबतक कोई गलती नहीं करेगा। भले वो लड़का अपस्यु हमारे खिलाफ प्लान करे या ना करे।

हंस:- वैसे वो अभी कहां प्लान कर रहे है…



लगभग 10000 फिट की ऊंचाई, शयं श्यां हवा को चिड़ने की आवाज। गुरुत्वाकर्षण के वेग से नीचे गिरते अपस्यु और ऐमी। दोनो हाथ से हाथ पकड़े तेजी के साथ नीचे आ रहे थे।


हेलमेट में लगा मीटर ऊंचाई मानक बता रहा था। 4000, 2000, 1000, 800, 700, 600, 500, 400, 300.. और ये खुला पैराशूट और दोनो फिर भी काफी तेजी के साथ नीचे आए जो कंट्रोल होते होते जमीन तक को छू ही गया और दोनो धराम से मुंह के बल नीचे…


ऐमी कपड़ों से घुल झारते हुए खड़ी हुई… "मज़ा आ गया बेबी, लेकिन ये 300 फिट पैराशूट को कंट्रोल नहीं कर पाता, थोड़ा और ऊपर खोलना होगा।"…


अपस्यु:- हां सही कही.. वैसे मैं सोच रहा था 20000 फिट की ऊंचाई से कूदेंगे और पैराशूट ऊपर ही खोल लेंगे तो हम कहां पहुंचेंगे…


ऐमी:- पैराशूट में खाना अटकाने की भी व्यवस्था कर लेना, क्योंकि पता ना हम कितने दिन हवा में ही रह जाए।


अपस्यु:- हा हा हा हा हा… हां ये सही कहा तुमने। चलो चला जाए।


दोनो एक दूसरे के होंठ से होंठ मिलाते हुए चूमे और पैदल ही वहां से निकल गए।….. "आह मियामी बीच देख लो तो मन हरा भरा हो जाता है।".. अपस्यु साथ चलते हुए कहने लगा…


"अच्छा, और यहां का नज़ारा कैसा है फिर।"… ऐमी अपने शरीर के ऊपर बांधी पतली सी ड्रेस उतारती हुई कहने लगी, जो उसने ऊपर पहन रखा था।


"उफ्फ क्या फिगर है। मार डाला तुमने तो। अब जल्दी से ढक लो, वरना दूसरे भी देख लेंगे"… बीच पर बिकनी सेट में देखकर अपस्यु के होश उड़े।..


"नाह मै कितनी सेक्सी दिखती हूं, ये लोगो के नजरो और एक्सप्रेशन को काउंट करके तुम्हे बताउंगी।"…


"मै तो बस छेड़ रहा था तुम्हे, मेरी नजर फिसल सकती है क्या?"… अपस्यु वो ड्रेस उठाकर उसपर से धूल झारकर ऐमी के ओर बढ़ाते हुए कहने लगा।


"निकल गई होशियारी।"… ऐमी ड्रेस को वापस पहनती हुई कहने लगी।


"वैसे ये पतली सी सिफोन की ड्रेस जब तुम पहने रहती हो तब अंदर इतना हॉट फिगर छिपा होगा पता नहीं चलता।"..


"तुम भी तो अपने टी-शर्ट और जीन्स जब निकालते हो, फिर पता चलता है कि अंदर कैसी अथेलीट बॉडी छिपा रखी है।"


"मै क्या सोच रहा था चलकर क्यों ना एक दूसरे कि बॉडी को देखा जाए की कितना मेंटल करके रखा है हमने।"..


"बेबी अभी घर चलो, आज हमे कुछ और भी काम है।"…


दोनो मियामी बीच से अपने घर लौट आए, आते ही अपस्यु आराम से हॉल में बैठा और कंप्यूटर स्क्रीन को देखते… "ऐमी, इस जगह के सिक्योरिटी ब्रिज से किसी ने छेड़छाड़ की है, ऐसा लगता है।"..


ऐमी भागकर वाशरूम से बाहर आयी और लैपटॉप देखने लगी… "तुम्हारे ही रिश्तेदार लोग है, जो अंदर के सिक्योरिटी सिस्टम में घुसना चाह रहे है।"..


अपस्यु:- हम्मम ! जैसा सोचा था वैसा ही हो रहा है। चलो फिर इनको इनका काम करने दो, हम अपने काम पर फोकस करते है।


ऐमी:- उतावले कहीं के, अभी सुबह सुबह कौन सेक्स करता है। चलो ना वेगास चलते है, थोड़ा जुआ खेल कर आया जाए।


"जुआ खोलेगी.. पागल लड़की... कुछ और कहो"… अपस्यु पीछे से बाहों मै दबोचकर कहने लगा।


"अम्म्म्म ! तो हॉलीवुड चलें, मुझे एमा वाटसन से मिलना है।"..


"हां समझ गया काम पर फोकस करना है कामसूत्र पर नहीं।"..


"काफी समझदार हो गए हो बेबी"..


दोनो बैठ गए बहुत सारे खूबसूरत बिल्डिंग्स की तस्वीर को लेकर। इधर जबतक ऐमी का कंप्यूटर हैक हो चुका था और जबतक वो तस्वीर को टेबल पर फैलाते, उनके घर का बेल बजने लगा, ऐमी ने तुरंत सारी तस्वीरों के ऊपर एक कपड़ा फैला दिया। उधर कलिका खुद इस मामले को देख रही थी, इसलिए जैसे ही कंप्यूटर हैक हुआ कलिका खुद अपस्यु के घर की सीसी टीवी को बैठकर देखने लगी।


उसके साथ उसके दोनो भाई, हंस और युक्तेश्वर भी बैठे हुए थे।… "दोनो देख लो अपने छोटे भाई और बहू को। जोड़ी तो शानदार मिलाई है। मानना पड़ेगा बहू तो काफी हॉट और खूबसूरत ढूंढी है।"..


युक्तेश्वर:- दीदी वैसे भाई ने भी अपने आप को पूरा उसके लायक मैच बनाया है। काफी मजबूत और फुर्तीला शरीर लगता है इसका।


हंस:- पहली बार देख रहे है, जारा आवाज़ तो सुना दो इनकी।


तीनों के ठीक पीछे बैठी सर्विलेंस इंचार्ज श्रेया… "इन दोनों को ना ही सुनो तो हमारी सेहत के लिए अच्छा है।


कलिका:- वो क्यों श्रेया ?


श्रेया:- दोनों की रोमांटिक बातें सुनकर ऐसा मेहसूस होगा कि हमने तो जिंदगी में कुछ भी हासिल नहीं किया। ऐसा मेहसूस होगा जैसे कोई ऐसा चाहने वाला मिल जाता तो उसके लिए सबकुछ छोड़कर चले जाते।


तीनों एक साथ श्रेया को देखते हुए…. "तुम तो सर्वर छोड़कर नहीं भगोगी ना, वरना यहां विश्वास पात्र लोग ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है।"


कलिका:- लो इनका माईक भी पहुंच गया, अच्छा से ट्यून कर दो, इनकी आवाज साफ पता चलना चलिए।


अपस्यु और ऐमी तस्वीर को फैला रहे थे तभी हॉल की घंटी बजी। ऐमी ने सारी तस्वीरों को कवर किया और अपस्यु बाहर दरवाजा खोलने चला गया। जैसे ही दरवाजा खुला, कुछ लोग खड़े हुए थे।… "हां कहिए।"


एक व्यक्ति:- सर कुछ ऑर्डर्स आपने किया था। वहीं डिलीवरी के लिए आया हूं।


अपस्यु:- स्वीटी कुछ ऑर्डर किया था क्या तुमने..


ऐमी:- हां, हॉल में जिम्नास्टिक सेटअप लगाना है, और किचेन बगैरा के समान है। कुछ छोटे मोटे एक्सरसाइज के समान, ये सब सेटअप करवा लो जबतक मै नहाकर आती हूं।


"हुंह ! जबसे इजहार किया हूं इसके तो नखरे ही बढ़ गए है। आओ भाई जल्दी से सेटअप करो सामान।"


10 मिनट का काम था उन सबके लिए। फटाफट किया और चलते बने। जैसे ही वो लोग बाहर निकले अपस्यु भागकर बेडरूम में आया और तबतक ऐमी आइने के सामने अपने बाल सवार रही थी…. "क्या हुआ ऐसे भागकर क्यों आ रहे हो?".
ऐमी ने आइने में अपस्यु को आते देख पूछा।
 

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मालविका:- मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं लेकिन यदि हमारे गुरु के लिए कोई कुछ कहे तो हम चुप नहीं रहेंगे। हम तो डूबेंगे ही, लेकिन उन्हें भी ले डूबेंगे। गलत तरीके से नहीं फसे तो क्या हुआ, मै आश्रम जाकर भक्तों को बताऊंगी ये बात और फिर तमाशा होगा। इसे तो हम किसी भी तरीके से बर्बाद करके है छोड़ेंगे।


अपस्यु अपने मुख से पहला श्लोक बोला….

बहवो गुरवो लोके शिष्य वित्तपहारकाः।
क्वचितु तत्र दृश्यन्ते शिष्यचित्तापहारकाः॥…



अर्थात:- संसार में शिष्य का धन हरण करने वाले गुरु तो बहुत मिल जायेंगे, लेकिन शिष्य का चित्त हरण करने वाले गुरु बहुत ही कम। इसलिए किसी को गुरु कहने से पहले यह सुनिश्चित करें की वो आपके गुरु कहलाने लायक है कि नहीं।… गुरु कैसे होने चाहिए… तो वो भी सुनो…


फिर अपस्यु अपने दूसरे श्लोक से गुरु को परिभाषित करते हुए कहा…

निवर्तयत्यन्यजनं प्रमादतः स्वयं च निष्पापपथे प्रवर्तते । गुणाति तत्त्वं हितमिच्छुरंगिनाम् शिवार्थिनां यः स गुरु र्निगद्यते ॥


गुरु कैसा हो, इस विषय में कहे पहले लाइन का अर्थ है…. "जो दूसरों को प्रमाद करने से रोकते हैं"… प्रमाद का मतलब होता है किसी प्रकार के नशे कि अवस्था, और तुम दोनो सात्त्विक आश्रम और माहीदीपी के नशे में हो।

अब दूसरा लाइन का अर्थ समझो…. "निष्पाप रास्ते से चलते हैं, हित और कल्याण की कामना रखनेवाले को तत्त्वबोध करते हैं, उन्हें गुरु कहते हैं।"… जो हित और कल्याण की कामना रखने वालों को तत्त्वबोध करते है, मतलब ब्रह्म, आत्मा और जगत के विषय में यथार्थ ज्ञान; ब्रह्मज्ञान; तत्वज्ञान; तत्व या किसी अन्य वस्तु की मूल प्रवृत्ति का ज्ञान करवाते है। उन्हें गुरु कहते है।


जब तुम दोनों में ना तो जारा भी चित्त हरण हुआ, ना ही कोई बौद्धिक विकास फिर वो गुरु किस काम का। ना तो तुम्हारे गुरु ने तुम्हे तर्क करने की शक्ति दी है और ना ही दूसरों के मत को सुनने की क्षमता तो किस बात का गुरु। जो तुम्हारे अंदर के नशे को दूर ना कर सका, जो तुम्हे तत्त्वबोध ना करवा सका वो गुरु किस बात का।


आध्यात्म में घुसे हो तो ढंग से आध्यात्म को समझो, यह कोई गुरु वाणी नहीं अपितु जीने के ढंग को अपना नजरिया देता है, लेकिन ऐसा तब होगा जब कहे शब्दों पर चिंतन होगा और उसपर तर्क होंगे। ना की केवल सुनकर ताली बजा दिए और वाह-वाह, कर दिए।


हो सकता है तुम जिसके अनुयाई हो, उन्होंने तुम्हे यह ज्ञान की बात बताई हो, लेकिन इन बातो पर चिंतन और मनन करने के बदले, उन्हें भगवान मानकर चली आयी। अपने मात्र स्त्री होने का फायदा उठाना और एक हंसते खेलते परिवार में जहर घोलने का ज्ञान किस गुरु ने दे दिया तुम्हे।


जाओ यहां से और पहले गुरु और शिष्य की परिभाषा को ठीक से परिभाषित करो। जो तुम्हारे गुरु का अपमान करे उसका विरोध अवश्य करो, किन्तु वो विरोध तर्क से होना चाहिए ना की फुहर तरीकों से। तुम सब जा सकती हो, लेकिन ख्याल रहे आगे से यदि कभी मैंने तुम चारो में से किसी को भी अश्लील हरकत के मामले में टीवी और मीडिया में देख लिया, तो ऐसी धज्जियां उड़ा दूंगा कि तुम भी सोच में पर जाओगी, मैंने इस संसार में जन्म ही क्यों लिया।


दोनो लड़कियां सर झुकाए आलोक से माफी मांगकर वहां से निकल गयी। ऐमी के लिए कोई नई बात तो थी नहीं, लेकिन बाकी के लोग बड़ी हैरानी से उसे सुन रहे थे। अपस्यु इतने प्यार से समझाते हुए अपनी बात रख रहा था, कि सुनने वालों के कान में जैसे वो रस घोल रहा हो। और धीरे-धीरे जब वो अंत में आक्रोशित होना शुरू हुआ, तो हर कोई उस गुस्से को अंदर से मेहसूस कर रहा था…


"यदि आप लोग भी गुरु अपस्यु से ज्ञान लेना चाहते है, तो उनके कहे शब्दो को रिकॉर्ड करके सुनते रहे और जोर से बोले… बाबा अपस्यु की जय।".. लोग थोड़े अचंभे में थे और ऐमी माहौल हल्का करती हुई अपनी बात रखी।


लिसा:- दम है बॉस … दिल्ली यूनिवर्सिटी में ये सब भी पढ़ाई जाती है क्या?


सोमेश चौंकते हुए… "लसिता, तुम तो कह रही थी अपस्यु तुम्हारा दोस्त है, फिर इसके बारे में इतनी तो जानकारी होनी चाहिए थी।


लिसा:- आप भी तो 4-5 साल से इससे जुड़े हो पापा, फिर आपको जानकारी क्यों नहीं? मै तो फिर भी कुछ दिन पहले यूके से यहां लौटी हूं।


अपस्यु:- बस भी करो खिंचाई करना। कल रात मैंने गूगल किया था और कुछ श्लोक को बस यहां फिट कर दिया है।


आलोक:- मैटर पता कहां था जो ये सब गूगल करके फिट करते। तुमने शास्त्र का ज्ञान कहां से लिया है अपस्यु?


ऐमी:- ठीक वैसे ही जैसे अब हम दोनों आपसे फिजिक्स का ज्ञान लेंगे सर। विषय कोई भी हो बस पढ़ने कि रुचि होनी चाहिए। अब हमे चलना चाहिए, क्यों बेबी।


अपस्यु:- हां स्वीटी, वैसे सर से टाइम तो ले लो.. ये कब हमे पढ़ाने वाले है और गुरु दक्षिणा में क्या लेंगे।


आलोक:- कल शाम 7 बजे से, और कोई देर नहीं होनी चाहिए।


अपस्यु:- वो तो हम दोनों के घूमने का समय होता है। कॉलेज में ही पढ़ा दो ना हमे सर, लैब का टेंशन भी नहीं होगा।


आलोक:- कल शाम 7 बजे। बाकी समय ऊपर नीचे मै अपने हिसाब से करूंगा।


ऐमी:- मंजूर है सर, और वो आपकी फ़ी, वो भी बता दीजिए..


आलोक:- वो मै बाद ने बताऊंगा। इतनी सारी बातों में ऐसा उलझा की मै मुख्य बातें ही भुल गया। तुम दोनो को दिल से शुक्रिया। यूं तो मै जाहिर नहीं होने दे रहा था लेकिन कल से मै ठीक से जी नहीं पा रहा था। दिमाग में एक ही बात थी, लोग इन्हीं लड़कियों की सुनेगे और मुझे बदनामी झेलनी पड़ेगी। अपने बीवी बच्चे को कैसे मुंह दिखाऊंगा?


अपस्यु:- अब आप बिल्कुल बेफिक्र रहिए सर। आज ही इन लोगो को मै यहां से कहीं और शिफ्ट करवा देता हूं, लेकिन सबक आपके लिए भी है, दूसरों को ज्ञान तबतक नहीं से जबतक वो आपसे मांगने नहीं आए। अब हम दोनों को इजाज़त दीजिए, अभी एक छोटी सी मुलाकात उन लोगो से भी करनी है।


अपस्यु, प्रिंसिपल का मैटर सॉल्व करके वहां से निकलकर पड़ोस के कमरे में पहुंच गया, जहां उन चार लड़कियों के अलावा 2 लड़के और भी थे, जिसमे से एक, स्टूडेंट यूनियन का लीडर विकास था। अपस्यु विकास से हाथ मिलाते…. "छोटी सी गलतफहमी हो गई थी इसलिए ये सब हो गया। बात यहीं खत्म करे।"..


विकास:- माफ करना दोस्त, साला हम लड़के हमेशा लड़कियों कि इन्हीं अक्लमंदी का शिकार हो जाते हैं। यह भी नहीं देखते की कौन सही है और कौन गलत, हमेशा हमे लड़की ही सही लगती है।


अपस्यु:- हां सो तो है। खैर मैं कविता और मालविका को लीगल में नहीं लेकर जा रहा हूं, लेकिन इन लोगों से बोल दो की ये फ्लैट कल तक खाली करके कहीं और फ्लैट लेले।


उन्हीं चार लड़की में से एक लड़की खुशी उठकर बोलने लगी… "दिल्ली में इतनी जल्दी फ्लैट कैसे चेंज होगी। ऊपर से हमने 2 महीने का एडवांस भी से रखा है।"


विकास:- भाई ये कह तो सही रही है।


अपस्यु, खुशी का नंबर लेते हुए…. "थोड़ी देर से मै तुम्हे फोन करता हूं, फ्लैट अरेंज हो जाएगा, बस तुम लोग अपनी पैकिंग पूरी रखना। तुम्हारे 2 मंथ का एडवांस की टेंशन ना लो वो मै देख लूंगा।"


अपस्यु अपनी बात कहकर वहां से निकल गया। उसके जाते ही विकास ने मालविका और कविता को थप्पड़ जड़ते हुए…. "तुम लोग किसी को ठीक से फसा भी नहीं सकती ना। कामिनी कहीं की, एक छोटा सा काम नहीं हो सका। जानती हो जो लड़का अभी-अभी गया, वो कौन है?"..


सभी लड़कियां एक साथ… "कौन है?"


विकास:- दिल्ली की बहुत बड़ी हस्ती है, लेकिन दिखाता नहीं कभी। और उसके साथ जो उसकी गर्लफ्रेंड खड़ी थी, वो यहां के सुप्रीम कोर्ट के टॉप वकील ने से एक कि बेटी है। साली ढंग से एक काम होता नहीं है और स्टूडेंट पॉलिटिक्स करना है।


उनकी चौथी साथी निशा… "पहले बताना था इस लड़के में बारे में, इसे मै किसी भी तरह से पटा लेती।"..


कविता:- कोशिश भी मत करना, ये तेरे से इस जन्म में नहीं पटेगा।


निशा:- ऐसी बात है क्या, फिर तो हर्लिन को बुलाना पड़ेगा।


विकास:- तुम लोगो को ये लड़का पटाना है या अगले साल होने वाले यूनिवर्सिटी चुनाव पर ध्यान देना है।


खुशी:- सब रणनीति तुम्हारी थी विकास, तुम अपनी गलती के लिए हमे थप्पड़ भी मार चुके। अब हम लड़कियों की अपनी भी कुछ बातें होती है, तुम उसमे अपनी टांग ना अराओ तो बेहतर होगा। जाओ अपने इलेक्शन कैंपेन पर ध्यान दो।


विकास:- यार मै गुस्से में था इसलिए हाथ उठ गया। अपने हाथ से पॉपुलैरिटी और मीडिया कवरेज सब चला गया।


निशा:- अब तू भी चला जा। सुना नहीं वो क्या बोलकर गया है, पैकिंग कर लेने। एक बात याद रखना, आज के बाद मै कोई भी अनैतिक काम में तुम्हारा साथ नहीं देने वाली। कोई सोशल काम हो, कोई प्रोटेस्ट हो तो मै अपनी पढ़ाई के बाद कर दूंगी। मालविका पागल हो चुकी थी जो घटिया सोहरत के पीछे जाने के लिए तैयार हो गई, अच्छा हुआ जो उस लड़के ने बचा लिया।


ऐमी और अपस्यु जैसे ही उस कैंपस से बाहर निकले… "अपस्यु मै पज़ल हुई जा रही हूं। ये हर किसी के काम में तुम इन्वॉल्व होकर, क्या साबित करना चाह रहे हो?"


अपस्यु, ऐमी के गाल को चूमते…. "हां समझ रहा हूं कि तुम क्या सोच रही हो, तुम्हे ऐसा बिल्कुल सोचने की जरूरत नहीं कि मै तुमसे कुछ छिपा रहा हूं। वो तो वक़्त नहीं मिला इसलिए नहीं बता पाया। रही बात प्रिंसिपल की, तो मै कल उनके ऑफिस कुंजल के कहने पर गया था। लेकिन वहां जब पहुंचा तो मामला की कुछ और दिखा। मुझे लगा मदद करनी चाहिए इसलिए मैंने कर दिया।


ऐमी:- हां ठीक है बाबा समझ गई, तुम्हारे प्रधानाध्यापक को तुम्हारी मदद की जरूरत थी। अब वो बात भी लगे हाथ बता ही दो, जो वक़्त ना मिलने के कारन तुम बता नहीं पाए।


अपस्यु:- चाणक्य नीति की शुरवात हो चुकी है, अब बस बाहर बैठकर तमाशा देखते रहो।


ऐमी:- चाणक्य की कौन सी निती अपस्यु, वो तो समझा दो बेबी।


अपस्यु जैसे-जैसे अपनी बात आगे बढ़ता गया, ऐमी का चेहरा खिलता चला गया। और जैसे ही अपस्यु ने अपनी बात समाप्त की, ऐमी, जगह देखकर कार किनारे खड़ी करती हुई, लगभग अपस्यु के ऊपर चढ़कर उसके होंठ चूमती…. "मेरे पास कोई शब्द नहीं लव"… उम्ममआह्हहहहहहहहहहह…… "क्या दिमाग लगाया है"….. उम्ममआह्हहहहहहहहहहह…. "मै हैप्पी हैप्पी हैप्पी"… उम्ममआह्हहहहहहहहहहह


ऐमी अपनी हर लाइन के ऊपर अपस्यु को लगातार चूमती जा रही थी और अपनी आखरी लाइन बोलकर तो उसके होंठ ही चबाने लगी…. "बस भी करो अब स्वीटी, कार चलाओ।"… अपस्यु, ऐमी को अपने ऊपर से हटाते हुए कहने लगा।


ऐमी:- अपस्यु एक बात माननी होगी, शुरवात में तुमने सबको प्लान करने दिया ताकि हर किसी को लगे वो बेस्ट है, लेकिन मुझे अब ऐसा क्यों लगा रहा है कि हर कोई इंडायेक्टली तुम्हारे ही प्लान को तुम्हे सुना रहा था।


अपस्यु:- हम जब साथ है और लक्ष्य एक, तो सोच भी लगभग एक जैसे ही होगी। हां लेकिन किसी को भी डायरेक्टली या इन डायरेक्टली मैंने प्रभावित नहीं किया था, वो उनकी अपनी सोच थी जिसपर हम सहमत हुए थे।


ऐमी:- छोड़ो ये सब लेकिन इतनी बड़ी खुशखबरी के बाद तो एक छोटा सी रिलैक्स पार्टी बनती है ना।


अपस्यु:- हां सो तो है, शाम का प्रोग्राम रख लो। अरे हां एक बात और, मैंने उन लड़कियों को वहां का फ्लैट खाली करने के लिए बोल दिया है। पैसेज के पीछे वाला 312 नंबर वाला वो आखरी का फ्लैट उन्हें रेंट पर देदे क्या?


ऐमी:- कौन सी लड़की और कहां का फ्लैट..


अपस्यु:- उल्लू, अरे वही 4 लड़कियां जिन्होंने हमारे प्रिंसिपल को फंसाया था। तुम्हारे सामने ही तो कहा था उन्हें फ्लैट खाली करने।


ऐमी:- हां दे दो, लेकिन जरा संभलकर। देखना कहीं तुम्हारे जरिए वो मीडिया की सुर्खियों में ना आ जाए।


अपस्यु:- ऐसा भी होगा क्या?


ऐमी:- अगर उन्हें अपना वर्तमान और भविष्य की चिंता ना होगी और सनी की साढ़े साती उनके दिमाग में चढ़ी होगी, तभी ऐसा कर सकती है। वरना नहीं। अभी फिलहाल हम तो चले।


दिन के लगभग 3 बज रहे थे। अपस्यु अपने फ्लैट में आराम से मस्त नींद ले रहा था, तभी उसके घर की घंटी बाजी… दरवाजे पर साची और ध्रुव खड़े थे। दोनो को देखकर अपस्यु ने उन्हें अंदर बिठाया।… "चाय या कॉफी चलेगी।"…


साची:- मै तो चाय लूंगी।


ध्रुव:- और मै भी…


"साची किचेन भुल गई हो क्या। जाओ और 3 कप चाय बना लाओ।"… अपस्यु अपनी बात कहते हुए, ध्रुव के ओर हाथ बढ़ा दिया और दोनो ताली देते हुए हसने लगे। साची जला भूना सा अपना रिएक्शन देती चाय बनाने चली गई।


चाय पर तकरीबन आधे घंटे की चर्चा के बाद दोनो अपने फ्लैट 304 में जाने के लिए जैसे ही बाहर हुए, 15, 20 लड़के लड़कियां अपस्यु के फ्लैट तरफ ही आ रहे थे… साची और ध्रुव वापस अंदर आती… "ये इतने सारे लोग, इनमे से तो कुछ कल वाले लड़के है अपस्यु, यहां मार करने तो नहीं आ रहे।"..


अपस्यु:- अरे ना रे, लंबी कहानी है, तुम दोनो जबतक फ्लैट में शिफ्ट करो, रात के खाने पर बताता हूं।


साची:- रात का खाने से क्या मतलब है तुम्हारा..


अपस्यु:- जब ध्रुव के लिए खाना लाओगी तो मेरे और काया के लिए भी खाना लेती चली आना।


"एक्सक्यूज मी सर"… खुशी पीछे से बोली… "आप लोग 2 मिनट के लिए बैठ जाओ, हम जारा बात कर रहे है। अपस्यु ये काया कौन है और खाने का क्या चक्कर है।"..


अपस्यु:- कल तेरे सामने ही तो वो थी कोर्ट में, फिर भी तुम्हे पता नहीं काया कौन है।


साची:- अरे डफर, हां देखा है कौन है, लेकिन तुम कैसे जानते हो वो बताओ।


अपस्यु:- वो ऐमी के ओर से है। मुझे ऑर्डर मिला और मैंने कर दिया। अब जान गई ना तो आज रात हम सब साथ खाएंगे। लावणी को भी ले आना।


साची:- पागल समझ रखा है क्या? तुम सब रात को घर ही चले आना, और यही फाइनल है। और अब बताओगे ये लोग यहां क्या कर रहे है? हमारे प्रिंसिपल वाला घटना इन्हीं लोगों का रचा हुआ था ना?


अपस्यु:- वो छोटी सी कहानी है, कहा तो रात को बताऊंगा खाने पर। यहां फ्लैट खाली था, मैंने रेंट पर लगा दिया। अब जा ना, ध्रुव को शिफ्ट नहीं करना क्या?


साची:- अकडू कहीं का, जा ही रही हूं। चलो ध्रुव..


उनके जाते ही अपस्यु… "312 नंबर का फ्लैट तुम लोगों का है, बीच में पैसेज से पीछे चले जाना, वहां से दूसरा नंबर का फ्लैट है। जिनको रहना है वो अपनी आईडी दो, और एग्रीमेंट को पढ़कर साइन कर दो।"..


खुशी 4 आईडी उसे देकर एग्रीमेंट पढ़ने लगी। अपस्यु ने एक फोटो खींचा और चारो आईडी की तस्वीर लेकर किसी को भेज दिया। उसे ऐसा करता देख एक लड़का पूछने लगा… "ये तस्वीर किसे भेज रहे।"..


अपस्यु:- थानेदार को भेजा है, वेरिफिकेशन प्रूफ और अन्य प्रूफ के लिए। बाकी यहां कोई हंगामा या ऐसा काम मत करना जिससे मुझे मजबूर होना परे। अब तुम लोग जा सकते हो।


सभी लोग वहां से निकल गए। अपस्यु दरवाजा बंद करके वहां के चीजों को देखने लगा। अपने ट्रेनिंग रूम में जाकर काफी देर तक अभ्यास करने के बाद पसीने से तर होकर वो बाहर निकला, स्नान करने के बाद वो फिजिक्स की एक पुस्तक निकालकर पढ़ने लगा। काफी गहन अध्यन कर रहा था, तभी अचानक वो तेजी के साथ उठा और ऐमी को कॉल लगा दिया…
Awesome fantastic update
Yahan Bikash to media ko apne aur aakarshit karke University election jitne keliye principal ko fasa raha tha ya uske piche bhi koi aur raaz hai?
 

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ऐमी:- कुछ पढ़ रहे थे क्या?..


अपस्यु:- कॉल की थी क्या?


ऐमी:- राठौड़ मेंशन में थी वहीं से कॉल लगाया था।


अपस्यु:- हद है, तुम्हे नहीं पता कि जब मेरा फोन बंद है तो कैसे संपर्क करना चाहिए।


ऐमी:- मुझे क्या, घर में सबको पता था, लेकिन तुम पढ़ रहे थे इसलिए किसी ने तुम्हे डिस्ट्रब करना जरूरी नहीं समझा। अब बात क्या है वो बताओगे?


अपस्यु:- अभी आओ मिलकर बात करते है।


ऐमी:- पढ़ने बैठते हो तो जब उठा करो तो घड़ी देख लिया करो, रात के 12 बज रहे है।


अपस्यु:- सॉरी इस बात को मै क्यों भुल जाता हूं। अच्छा सुनो हमे पारा डाइविंग सीखनी है, सब पता कर लेना।


ऐमी:- पारा डाइविंग… क्या बात है बेबी, लगता है जल्द ही एक्शन शुरू होगा।


अपस्यु:- नहीं अभी फिलहाल कोई एक्शन नहीं होगा, बस यूं ही ख्याल आया कि बहुत दिनों से हमने कुछ नया ट्राय नहीं किया तो ये नया करते है।


ऐमी:- मुझे भी एक ख्याल आया है, मैंने हॉलीवुड कि एक मूव वांटेड देखी, उसमें एक ट्रेन वाला स्टंट है, मुझे वो सीखना है।


अपस्यु, ऐमी को 2 मिनट होल्ड पर रखते हुए, उस सीन को देखने के बाद… "पागल कहीं की ट्रेन का स्टंट किस बेवकूफ की उपज है, वहां 12000 वोल्ट की वायर लगी रहती है। सीधा राम नाम सत्य हो जाएगा।"


ऐमी:- ठीक है फिर पारा डाइविंग ही करते है, मै सब पता लगा लूंगी। अच्छा सुनो ना बेबी, जल्दी से मेरे पास आओ ना, तुम्हे बाहों मे समेटने का दिल कर रहा है।


अपस्यु:- पागल हो क्या, बापू होंगे बाकी सब लोग है, और आज से मैंने अभ्यास भी शुरू कर दिया है।


ऐमी:- हम्मम ! ठीक है जाओ सो जाओ, और हां सोने से पहले खाना खा लेना, भूखे मत सो जाना।


अपस्यु:- हां ठीक है, कल मिलता हूं मै तुमसे, फिर आज वाली उधार पार्टी कल करेंगे।


ऐमी:- सुभ रात्रि। ..


"आह्हहहह.. अब कुछ अच्छा लग रहा है। कोई नहीं आपसे हम कल प्यार जता लेंगे जनाब, आज आप आराम कीजिए।"….. ऐमी अपना फोन रखती, खुद से ही कहने लगी। फिर अपने दिल पर हाथ रखती…. "ए तू ज्यादा दुखी ना हो समझी, दिमाग की तरह मजबूत और समझदार बाना कर। मेरे वो अभी नहीं आ सकते समझी। ख्याल ना रहा होगा रे बाबा, भुल गए होंगे। अच्छा ठीक है कल अलग से और अच्छे से समझा दूंगी कि.. देखो बेबी, दिमाग की खुराकी तो तुम्हारी बात से चल जाती है, लेकिन मेरी इस बेईमान दिल को बिना तुम्हारे दुलार, प्यार के चैन नहीं मिलता, इसलिए कम से कम 1 घंटा इसे प्यार जताया करो, फिर फोन रखा करो।"…


ऐमी खुद से बातें करती हुई अपने तकिए को अपने सीने से टिकाए, अपस्यु के साथ कुछ हसीन लम्हों को याद करके मुस्कुरा रही थी।


"यादों के झरोखे में ऐसे ना डूब जाओ, की मै सामने खड़ा रहूं, और तुम मुझे ख्यालों में ढूंढती रहो।"….. ख्यालों से जब बाहर आयी, सामने अपस्यु खड़ा था। ऐमी खुशी से लपक कर दौड़ी और झपक कर अपस्यु के गोद में और उसके होंठ से अपने होंठ लगाकर चूमने लगी।.. "बस भी करो बाबा, क्या चूमकर ही पेट भरना है, या चलकर कुछ खा भी ले।"


ऐमी, नीचे उतरते… "तुम्हे कैसे पता मैंने भी अब तक नहीं खाया है।"..


अपस्यु:- तुम तो मेरी रिसर्च सब्जेक्ट हो, तुम्हारे बारे में नहीं पता होगा, तो किसके बारे में पता रहेगा।


ऐमी मुस्कुराती हुई फिर से अपस्यु के ओर बढ़ी ही थी कि अपस्यु अपना हाथ आगे बढाकर, उसके सीने पर रखकर रोकते हुए… "चलकर खाना खाए, या फिर तुम चूमना शुरू करोगी।


ऐमी अपनी आखें दिखती… "तुम मुझे रोक रहे चूमने से, हां।"…


"हां रोक रहा हूं, अब नौटंकी बाद में कर लेना पहले चलकर खाना खाते है।"…. "ठीक है तुम नीचे जाओ मै मीना को बुला लेती हूं।"…. "अरे रहने दो क्यों इतनी रात को उसे परेशान कर रही हो। वैसे भी तुम दोनो के बीच बात तो हो नहीं रही।"…. "ओय, कितनी बार कहना होगा, ये मेरा और उसका आपस का मामला है, तुम्हे बीच में ना पड़ने। या शायद मै ये बात ठीक से समझा नहीं पाई।"… "हां समझ गया, जो करना है वो करो।"..


अपस्यु नीचे जाकर डियनिग टेबल पर आराम से बैठ गया, थोड़ी देर बाद ऐमी भी नीचे आ गई। थाली लग गई, खाना सज गया, शायद मीना ने भी नहीं खाया था इसलिए वो भी साथ बैठ गई खाने। अपस्यु एक निवाला अपने मुंह में लेते… "आज खाना तुमने बनाया है ऐमी"..


ऐमी:- मुझे थोड़े ना पता था तुम भी यहीं आने वाले हो, इसलिए थोड़ा तीखा बाना दी।


अपस्यु:- पहले पता होता तो मै खाना पैक करवा कर ले आता।


मीना:- दीदी झूठ बोल रही है, इनसे पूछो आपके बारे में नहीं पता था, तो ये 3 लोगों का खाना कहां से लग गया अभी। दीदी तो आपके लिए गुनगुनाती हुई खाना पका रही थी और कह भी रही थी, पार्टी से लौटकर हम साथ डिनर करेंगे। मैंने पहले ही कहा था दीदी से ज्यादा तीखा मत करो, उन्हें खाना अच्छा नहीं लगेगा।


"उन्हें अच्छा नहीं लगेगा।".. सुनकर ही अपस्यु का खाना अटक गया, और वो खांसने लगा। ऐमी उसके ओर पानी बढ़ाती… "इसी बात पर हम दोनों में कोल्ड वार चल रहा है बेबी।"..


अपस्यु:- मीना ये इन्हे उन्हें क्या कर रही हो?


मीना:- अब दीदी मुझसे बार-बार कहती है आपको जीजू कहने और मै अंदर से हसिटेट हो जाती हूं।


ऐमी:- पागल तो क्या अब भी मुझे दीदी और इसे भईया ही कहती रहेगी।


मीना:- हुंह ! अब शुरू से मै भईया कहती आ रही हूं, तो एकदम से थोड़ा अजीब लग रहा है ना दीदी। आप समझती क्यों नहीं।


ऐमी:- देख अब तू फिर से बहस शुरू मत कर वरना मेरा दिमाग खराब हो जायेगा।


मीना:- चैन से खाना तो खा लेने दो या कहो तो उठकर चली जाऊं।


ऐमी:- सॉरी तू खाना खा, गुस्सा मत हो।


मीना:- अब प्लीज ऐसे मुंह तो नहीं बनाओ दीदी, मै कोशिश कार रही हूं ना।


ऐमी:- छोड़ हटा जाने दे बात खत्म कर।


मीना:- जीजू आप खाना खाओ हम दोनों का चलता रहेगा।


ऐमी:- हिहिहिहीही.. अब सुकून मिला मुझे.. बता तुझे क्या चाहिए।


मीना:- मुझे स्कूटी चाहिए।


ऐमी:- लो एक टॉपिक गया नहीं दूसरा शुरू। स्कूटी के लिए तुझे शर्त पता है।


मीना:- हुंह ! कमिटमेंट नाम की कोई चीज ही नहीं है। फिर ऐसे मत पूछा करो कि क्या चाहिए।


अपस्यु:- ऐमी, स्कूटी देने में क्या परेशानी है?


ऐमी:- स्कूटी क्या कार दिलवा दूंगी, पहले इसको कहो अपना 12th क्लियर करने। एक बार फेल होकर मेरी नाक कटवा चुकी है, डैड के सामने। कितना जलील किया था उन्होंने मुझे, लेकिन इस कम अक्ल को कुछ फर्क परे तब ना। बस इससे फिल्म और वेब सीरीज के बारे में पूछ लो पुरा ज्ञान है। 150 तो यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब की हुई है।


मीना:- अपस्यु भईया आप बताओ..


ऐमी:- मतलब फ्लो में भुल ही जा क्या कहना है..


मीना:- कहीं तो धीरे-धीरे आदत चली जाएगी। सुनो जीजू मुझे पढ़ने में कोई इंट्रेस्ट नहीं है। काम चलाओ लायक पढ़ चुकी हूं अब ये किताबों का टर्चेर झेला नहीं जाता।


ऐमी:- फिर मै देखती हूं तेरी स्कूटी कैसे आती है।


मीना:- दीदी चिंता ना करो, आपकी जब शादी तय होगी तो मेरा मालामाल हफ्ता शुरू हो जाएगा। और जीजू के जूता चोरी में तो कोई हिस्सेदार भी नहीं है।


ऐमी:- ठीक है तू कर ले अपनी मन की, इस बार फेल हुई ना तो गांव भेज दूंगी। वैसे भी तेरी मां का फोन आते रहता है। मुझसे कहते रहती है 2 दिन के लिए मीना को भेज दो, लड़के वाले आ रहे है। वो तो मै हूं कि उन्हें ये कहकर रोक देती हूं कि मीना कि जबतक पढ़ाई पूरी नहीं होती, तबतक उसकी शादी नहीं होगी, और आप लोग उसकी शादी की चिंता छोड़ दीजिए। देख मीना मै साफ शब्दों में कहें देती हूं, नहीं पढ़ेगी कोई बात नहीं, मत पढ़। लेकिन इतना तो पढ़ लिया कर की पास हो जाए, नहीं तो फिर मुझे मजबूरन तुम्हे गांव भेजना होगा।


मीना:- ठीक है मै कोशिश करती हूं। मुझे होम ट्यूशन लगवा दो, वहां बहुत सारे स्टूडेंट के भिड़ में मुझे सर की बात समझ में नहीं आती।


ऐमी:- ये हुई ना बात। ठीक है तेरा ये काम अपस्यु कल तक कर देंगे। और कोई डिमांड है, या बस इतना ही।


मीना:- एक स्कूटी दिला दो ना, मै पक्का पास हो जाऊंगी.. पक्का से भी वाला पक्का दीदी।


ऐमी:- ठीक है कल वो भी दिला दूंगी, लेकिन वादा किया है तोड़ना मत।


मीना, ऐमी की बात सुनकर वहीं खुशी से झूमने लगी। कुछ देर में सबका खाना समाप्त हो गया, मीना दोनो को गुड नाईट बोलकर वहां से निकल गई। कुछ देर अपस्यु से प्यार भरी बातें करने के बाद ऐमी ने अपस्यु को भी वापस जाने के लिए बोल बोल दिया।


अपस्यु मुसकुराते हुए वहां से निकल गया। सुबह के 8 बजे होंगे जब ऐमी का कॉल अपस्यु के पास आया। वो पारा ड्राइविंग के विषय में कुछ बातें करने लगी। अंत में यही फैसला हुआ कि पारा डाइविंग और अन्य चीजों को सीखने के लिए एक बार फिर मियामी के ओर रुख किया जाएगा।


अपस्यु को यह प्रस्ताव सही लगा। नीलू के साथ उसके सभी लोगों को पूर्व सूचना दे दी गई की उन्हें तैयार रहने के लिए, कुछ दिन में वो लोगो एक हॉलिडे लेंगे। बाकी की बातें बाद में होगी।


ऐमी से बात करने के बाद अपस्यु रस्सी कूदने में लीन हो गया। तभी वहां फ्लैट का दरवाजा खुला और दोनो बहने (लावणी और साची) अंदर आयी। दोनो उसे अभ्यास करते देख वहीं सोफे पर बैठ गई। अपस्यु कुछ देर और रस्सी कूदने के बाद उनके पास बैठते… "माफ करना कल वो मै"..


साची:- हां ऐमी ने बताया गुरुजी पढ़ाई में लीन होंगे इसलिए वो दुनिया से कट गए है। जब तुम्हारा यह प्लान था तो बता देते ना। कितना कॉल लगाई तुम्हे?


अपस्यु:- हां तो लावणी के पास जाना चाहिए था ना, उसके पास फ्लैट की चाभी थी।


साची:- मुझे क्या पता अब ये ही मालकिन है, वो भी ऐमी से ही पता चला। खैर कोई बात नहीं, मै भी यहां से शिफ्ट कर रही हूं?


अपस्यु:- क्या हुआ दोनो भाई के झगड़े बंद नहीं हुए क्या?


लावणी:- पता नहीं दोनो ऐसे लड़कर क्या हासिल कर लेंगे। ना तो लड़ने कि वजह बताते है और ना ही लड़ाई बंद करते है। इस वक़्त तो घर रहने लायक नहीं रह गया है।


अपस्यु:- ठीक है चलो सुलह करवाया जाए।


लावणी:- जाने दो भईया, मत पड़ो इनके बीच में। मां और बड़ी मां ने बहुत कोशिश की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।


अपस्यु:- बच्चा, दोनो भाई की मति भ्रमित है अभी, जबतक उन्हें गुरु ज्ञान नहीं मिलेगा, तबतक वो दोनो सुधर नहीं सकते।


साची:- ऐसी बात है तो फिर चलिए ना गुरुदेव, वरना ये दोनो भाई तो पुरा घर तोड़ देंगे।


अपस्यु उन दोनों के साथ मिश्रा भवन में पहुंचा। बहुत दिनों बाद वो आ रहा था। अनुपमा उसे देखकर फीकी मुस्कान दी और उसका हाल चाल लेने लगी। किन्तु अपस्यु सीधे मुद्दे पर आते हुए कहने लगा… "आंटी बातें बाद में होगी, मनीष अंकल को बोलो मै आया हूं, बाहर आने।"..


अनुपमा:- इन दोनों ने तुम्हे सब कुछ बता दिया।


अपस्यु:- हां तो मै आपका बेटा नहीं क्या जो घर में शांति लाए..


अनुपमा:- बातों में तो तुमसे मै जितने से रही, लेकिन एक बात मै अभी बता देती हूं, दोनो भाई के बीच में पीस गए तो मुझे बुरा लगेगा।


अपस्यु:- मै गेहूं नहीं हूं आंटी, पहले से पीस कर आटा बना हुआ हूं, मुझे पीस कर भी कोई फायदा नहीं होगा।


अनुपमा:- हा हा हा.. ठीक है भेजती हूं।


अनुपमा कमरे में गई और मनीष मिश्रा कमरे के बाहर। अपस्यु ने सिर्फ उसे अपने पीछे आने कहा और मनीष मिश्रा शांति से ऊपर के कमरे के ओर चल दिया। अपस्यु ने राजीव मिश्रा के कमरे का दरवाजा खटखटाया, वो अपस्यु को देखकर तो खुश हुआ लेकिन मनीष को देखते ही…. "मै इसके साथ बात नहीं करूंगा।"
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अपस्यु, राजीव मिश्रा को देखते…. "पाप की कमाई हराम में गवाई फिर बैर किस बात का"…. फिर मनीष मिश्रा को देखते….. "जब चोरी ही कर गए फिर सीनाजोरी किस बात की। अब दोनो भाई आराम से बैठ जाइए कमरे में, जारा मै अपनी बात रख लूं फिर निकलेंगे यहां से, एक मजबूत परिवार के रूप में।"..


अपस्यु की बात की गहराई को समझते हुए दोनो भाई ख़ामोश होकर आमने सामने बैठ गए। बहुत सारी बातें निकलकर सामने आयी। आरोप-प्रत्यारोप दोनो एक दूसरे पर लगाते है। एक दूसरे से बैर होने का कारन भी समझ में आ गया। मनीष बड़ा भाई था और लावणी के एंगेजमेंट में राजीव का उसका साथ ना देकर, नंदनी का साथ देना, उसे अखर गया था। मनीष मिश्रा को अच्छा नहीं लग रहा था कि उसके बेटे को मारने वाले को राजीव अपना दामाद बनाए।


और राजीव यह बात सुनकर एक बार और भड़क गया। छोटा सा मामला था अपस्यु ने समझदारी दिखाते हुए दोनो भाई के बीच जो बातों को लेकर थोड़ी सी दुरीया आ गई थी, उसे इतनी सी बात से मिटा दिया कि…. अब मनीष मिश्रा को रघुवंशी परिवार से बैर है या नहीं। यदि अब भी बैर है तो वो लावणी और आरव का रिश्ता ही खत्म कर देगा।


कितने भी कमिने क्यों ना हो दोनो भाई, लेकिन सभी बच्चो के लिए प्यार एक जैसा था। मनीष चिल्लाते हुए ना कहने लगा। उसका मानना था लावणी का खिला चेहरा इतना प्यार है कि उसके सारे गम दूर हो जाते है, आरव के उसके जिंदगी से जाने से मेरी बच्ची की खुशी भी चली जाएगी, हमारे झगड़े में उसे दर्द मत दो।


प्रति उत्तर तैयार था जो दोनो भाई को पता था। यदि झगड़ा बंद नहीं हुआ तो वो लावणी को ही झगड़े की वजह बता देगा। फिर क्या था दोनो भाई के आखों से आशु फुट परे और एक दूसरे के गले लग गए।…


अपस्यु:- आप दोनो का काम तो हो गया लेकिन मुझे भी आपसे एक काम है।


राजीव और मनीष एक साथ…. "कैसा काम।"..


अपस्यु:- मेरा अगला निशाना सात्त्विक आश्रम और दोनो भाई बहन (महिदिपी और अनुप्रिया) है मुझे उसे गिराने में मदद चाहिए।


मनीष:- हमने साथ काम शुरू किया था, लेकिन कई सालों से वो और हम अलग काम करते है।


अपस्यु:- कोई नहीं आप की छोटी सी जानकारी भी, मुझे आगे की योजना बनाने में सफल बनाएगी…


राजीव:- अपस्यु विश्वास से काम होता है। तुम्हारा हर कहा हम मान लेंगे, लेकिन अभी भी मेरे दिमाग में एक दुविधा है। कहीं तुम हमे साथ मिलाकर पुरा सिंडिकेट साफ करके खुद बॉस बनने के इरादे से तो नहीं। क्योंकि तुम्हारे कॉन्टैक्ट्स और काम के लोगों को तुम ऐसे साथ चल रहे हो, कि यदि तुम अपने काम में सफल रहे तो सबसे ऊपर तुम ही होगे।


अपस्यु:- ठीक है दोनो मिश्रा बंधु को सच सुनना है तो आज मै सच से अवगत करवाता हूं। और सच सुनने के बाद साची के पाऊं धोने कर पी लेना, क्योंकि माफी सिर्फ तुम दोनो को मिली है। मै तुम दोनों के ग्रुप के संस्थापक चन्द्रभान रघुवंशी का बेटा हूं।


राजीव और मनीष दोनो एक साथ झटके खाते… "क्या.. मतलब तुम सुनंदा रघुवंशी के बेटे हो?"..


राजीव:- लेकिन यह कैसे हो सकता है, तुम तो गुरुकुल में पढ़े हो और वो लोग यूरोप में थे। सबने आखों देखा जो हमे बताया गया था उसके हिसाब से तो चन्द्रभान अपने बीवी और बच्चे के साथ भारत आया था और अपने परिवार को निशी के आश्रम की आग में झोंक दिया। हां लेकिन उस घटना के बाद चन्द्रभान भी कहीं गायब हो गया।


मनीष:- हां और चन्द्रभान जैसे इंसान का गायब होने का मतलब हम समझ चुके थे…. अंतिम वक़्त में अपने परिवार से प्यार जाग गया होगा और वो अपने दूसरी बीवी और बच्चे के साथ कहीं गुमनाम जिंदगी जी रहा है, इसलिए कभी उसके परिवार की हमने खबर नहीं ली, और ना ही ये कभी ख्याल गया। और देखो हमारा सोचना बिल्कुल सही निकला।


अपस्यु:- फिर जिन्होंने आखों से देखा था कि मेरी मां और मेरे भाई को जला दिया गया उसका क्या?


राजीव:- किसी ने आखों से कितना भी सच क्यों ना देखा हो, लेकिन चन्द्रभान के गायब होने का मतलब ही था वो अपने परिवार के साथ गुमनाम हो गया है।


अपस्यु:- चलो मै वो राज से भी पर्दा उठा देता हूं। चन्द्रभान ने सबसे यह बात छिपाई थी कि उसका बेटा यूरोप में है, जबकि उसकी मनसा बहुत पहले से थी कि वो अपनी दूसरी पत्नी और बच्चों को खत्म कार दे। इसलिए मुझे बचपन से ही आश्रम में रखा, ताकि जब भी आश्रम को मिटाए, उसके साथ हमे भी मिटा दे। अब सोच सकते हो तुम दोनो मै किस बात का बदला के रहा हूं।


बचपन से मै जिनके साथ पलकर बरा हुआ, मेरे उन 160 साथी, गुरु निशी और मेरी मां की मौत का बदला। मुझे कोई रुचि नहीं पैसे और पॉवर में, लेकिन जिन लोगों ने इन सब के लिए खेल रचा है उन्हें सजा तो मै दिलवाकर रहूंगा। इसकी पहली शुरवात चन्द्रभान से ही हुई थी, जिसे मैंने खुद अपने हाथ से फांसी लगाई थी। 160 चिता के साथ कई और लोग मारे गए थे जिसके जिम्मेदार कहीं ना कहीं तुम दोनो भाई भी थे, एक ओर तो साफ कर दिया, दूसरी ओर का अभी पुरा बाकी हैं। मेरी मदद करो और अपने पाप धो लो।


मनीष:- हां ये सही है कहीं ना कहीं हम दोनों भाई उस घटना से जुड़े थे लेकिन हमे भनक तक नहीं थी कि उन लोगों ने ऐसा कुछ योजना बनाई है। वैसे भी हमारा काम तो केवल उनके लिए कॉन्टैक्ट ढूंढ़ना था। लेकिन फिर भी थे तो उस वक़्त उनके साथ ही। खैर हम क्या तुम्हारी मदद कर सकते है, तुम्हारे पास लोकेश की पूरी टीम है, तुम चाहो तो उसे पूरा बर्बाद कर सकते हो।


अपस्यु:- नहीं उसकी पूरी टीम खत्म हो गई है और जो बचे है वो मामूली मुलाजिम है, मै दूसरों कि जान के बदले अपना काम नहीं निकालता। आपने तो उस पार्टी में उसकी पूरी टीम को खत्म होते देखे ही थे मनीष अंकल।


मनीष:- आज तक बहुत बुरा किया है हम दोनों भाई ने, कुछ अच्छा करने का मौका मिल रहा है, हम तुम्हारा साथ जरूर देंगे। योजना क्या है वो बताओ।


अपस्यु:- पहले मुझे महिदीप की फैमिली डिटेल दीजिए…


मनीष:- महिदिप का केवल एक बेटा है रुद्रा महीदीपि, बाकी नाजायज तो बहुत होंगे, जिसका डिटेल वो नहीं रखता। इनके पूरे धंधे 2 पार्ट में चलते हैं। पहला हिस्सा सात्त्विक आश्रम ट्रस्ट से चलने वाली इंडस्ट्री, जो अनुप्रिया के बच्चे यानी की तुम्हारे सौतेली भाई बहन कलिका, परमहंस और युक्तेश्वर देखते है। धंधे का दूसरा और पुराने पीपल के तरह मजबूत खड़ा हिस्सा अनुप्रिया और महिडिपी देखते है, आश्रम का पूरा काम।


अपस्यु:- फिर ये रुद्रा क्या करता है?


मनीष:- रुद्रा दोनो धंधों को एडवांस करता है, यूं समझ लो कि ये पूरे धंधे का प्रमोशनल टीम है। फिर चाहे वो आश्रम के लिए फेक प्रचार के नए आइडिया लाना हो, या किसी मंत्री या सरकारी मुलाजिम को अपने साथ मिलाकर कंपनी के लिए गवर्नमेंट के बड़े-बड़े टेंडर लेना हो, रुद्रा और उसकी टीम ही मैनेज करती है। इसके पास खुद की अपनी एक छोटी सी आर्मी और अत्याधुनिक हथियार तो आश्रम के नीचे बने अंडरग्राउंड बेस में रखे है।

पूरे आश्रम में ना जाने कितने, ना दिखने वाले आधुनिक हथियार लगे होंगे। दुश्मन जबतक एक्शन का सोचेंगे, तबतक तो उन्हें खामोशी से साफ कर दिया जाएगा, और किसी को कनोकान भनक तक नहीं होगी। रुद्रा अपने कजिन, बुआ और पिता के लिए ढाल की तरह काम करता है। ये लोग कहीं भी रहे रुद्रा की पूरी टीम इनपर हर वक़्त सर्विलेंस रखती थी। केवल लोकेश की ही टीम थी जो इनसे सीधे पंगे लेकर भी जिंदा बची हुई थी और तुमने उस टीम को भी खत्म कर दिया।


अपस्यु:- प्रोफाइल तो बहुत धासू है। खैर कोई नहीं, इसे भी अंजाम तक पहुंचा दूंगा।


राजीव:- अपस्यु नहीं, ये विशाल पीपल का वृक्ष है जो ऊपर से पुरा हरा भरा और जरें ना जाने कहां तक गहरी है। तुम अपनी योग्यता से खुद की जान बचा लोगे, किन्तु यदि तुम इनकी नज़रों में आए, तो तुम्हारा पुरा परिवार खतरे में आ जाएगा।


अपस्यु:- जब परिवार ही मेरा पास नहीं रहेगा तो मै 50 हजार करोड़ खर्च करके केवल मिसाइल खरीदूंगा और इनके ऊपर तबतक गिरता रहूंगा जबतक ये साफ नहीं हो जाते। एक सिम्पल थेओरी काम करती है, मेरे परिवार के लिए मै जीता हूं, मेरे जीने की वजह गई तो उनको भी साफ करके फिर चैन से मर जाऊंगा।


मनीष:- और तुम जो उन्हें मारने कि योजना बना रहे हो।


अपस्यु:- मैंने तो लोकेश, प्रकाश और विक्रम को नहीं मारा फिर उन्हें क्यों मारने लगा। हां सही सुना आप लोगों ने, उस रात केवल और केवल लोकेश की टीम मरी थी, बाकी के लोग जेल में है। और ये तीनों भी जेल में होते, लेकिन मुझे सात्विक आश्रम की डिटेल लेनी थी और उन तीनों को भी माहीदीपी के साथ जेल भेजना था, इसलिए छिपाकर रखा है। मै तो सजा दिलवाने के इरादे से हूं, लेकिन यदि ये लोग खून खराबे पर आते है तो भुल जाऊंगा की वो लोग मेरे परिवार का हिस्सा है।


राजीव:- फिर तुम्हारा योजना क्या है।


अपस्यु:- कुल 4 लाख करोड़ की डील है। मेरे पास अभी 50 हजार करोड़ है। कुछ दिन बाद मै यूएस निकालनेवाला हूं, इस 50 हजार करोड़ को 2 लाख करोड़ में बदलने। मुझे पूरे पैसे मेरे अकाउंट में चाहिए बदले में मै उन्हें कैश में पैसे दूंगा, कब और कहां पैसों की डिलीवरी होगी वो मै बता दूंगा। इस डील के लिए मैं 25% कमीसन दूंगा यानी की 50 हजार करोड़। इतने रकम के लिए वो पागलों की तरह डील में कूदेंगे। उनके 2 लाख प्लस मेरे 2 लाख .. हो गए ना 4 लाख करोड़। आप बस आराम से खेल का मज़ा लीजिए।


मनीष:- तुम तो सब खुद प्लान कर ही चुके हो फिर हमारी क्या जरूरत?


अपस्यु:- जरूरत है ना… अभी हमने अपनी कंपनी शुरू की है, और लोकेश के टॉप कनेक्शन को तो मैंने तोड़ दिया सबको जेल भेजकर। नए कॉन्टैक्ट और टेंडर तो आप ही दिलवाओ ना। कुछ फेयर कंपिटेशन मै कंपनी से भी से दूं। एक भाई के पास होम मिनिस्ट्री ऑफिस है और दूसरे भाई 4 दिन बाद अर्बन डेवलपमेंट के चीफ सेक्रेटरी होने वाले हो, इतना तो फायदा दे ही सकते हो। और घबराओ नहीं इस अच्छे काम के लिए आप दोनो को वन टाइम सेटलमेंट भी दूंगा, इतना की फिर कभी काम करने की जरूरत महसूस नहीं होगी। बोलो मंजूर है।


राजीव मिश्रा:- मै पैसे में इंटरेस्ट नहीं रखता अब। मुझे कुछ अच्छा करना था और वो मौका देने के लिए धन्यवाद।


मनीष:- बुरे काम में बहुत पैसे बनाए है, मेरे पास 1600 करोड़ है वो मै पुरा तुम्हे देता हूं, काले और घिनौने पैसे। मुझे तुम साफ सुथरा पैसे देना, जो भी तुम्हारी इक्छा हो।


अपस्यु:- पुरा साफ पैसा ही मिलेगा वो भी सरकारी नियम के हिसाब से। पूरे ब्लैक मनी भारतीय सरकार को सौंपने पर 40000 करोड़ मिलेंगे, पता ना टीडीएस कितना कटेगा, लेकिन उसके बाद जितना भी बचेगा, उसमे से आधे हिस्सा का आधा-आधा आप दोनो भाई का। और इसपर कोई बहस नहीं होगी।


मनीष:- मुझे मंजूर है।


राजीव:- मै भी साथ हूं। चलो मिलकर इनकी बैंड बजाते है। इन्हे अब हम अपनी ब्रेन क्षमता दिखाएंगे।


अपस्यु:- इसी खुशी में आज रात टल्ली पार्टी मेरे फ्लैट में, और रात को सोने की पूरी व्यवस्था वहीं।


तीनों जब बाहर आए तो दोनो भाई गले में हाथ डाले बाहर निकले। उन दोनों को एक बार फिर साथ देखकर पूरे घरवाले खुश थे। साची और लावणी के सर से तो जैसे बोझ ही उतर गया हो। अपस्यु ऊपर से नीचे उतरते हुए कहने लगा… "दोनो भाई खुश नजर आ रहे है, अब हम कॉलेज चले क्या?"..


लावणी दौड़कर अपस्यु से लिपटकर रोती हुई कहने लगी… "आप साथ है तो कुछ भी कर पाना मुमकिन है।"..


अपस्यु उसके आशु पोछते… "तुम ऐसे हर छोटे बात पर आशु बहाती रही, तो इस जालिम दुनिया को फेस कैसे करोगी।"..


लावणी:- उस जालिम दुनिया को देखने के लिए दरवाजे के बाहर अपस्यु और आरव खड़े है ना और पीछे हम सब अपनी छोटी सी इमोशनल दुनिया में मस्त।


लावणी की बात सुनकर हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ गई। तीनों आज साथ ही कॉलेज पहुंचे। थोड़ा लेट हो गए थे, पहले क्लास के लिए इसलिए टाइम पास करने सीधा कैंटीन पहुंच गए।…. "हर वक़्त तू कैंटीन में परी रहती है, क्लास नहीं करना होता क्या तुम्हे।".. अपस्यु ने कुंजल के सर पर एक हाथ मारते हुए पूछा। ..


कुंजल:- क्या है, ऐसे पीछे से मारा मत करो। वैसे भी मै गुस्सा हूं आपसे।


अपस्यु, इससे पहले कि कुछ और बोलता, वहां कई छात्राओं ने उसे घेर ली और अपनी दिल की भावना जताते हुए, उसे प्रेम पत्र देने लगी। अपस्यु चारो ओर का नजारा देखते हुए…. "तुम लोग ग्रुप बनाकर मुझे प्रेम पत्र देने आयी हो। लेकिन ये तो व्हाट्स ऐप और फेसबुक का जमाना है कन्याओं।"


साची:- इन कन्याओं को तुम ना तो एफबी पर मिले और ना ही व्हाट्स ऐप पर, इसलिए ये पत्री देकर आगे का पता पूछने आयी है।


अपस्यु:- तुम सब अब तक खाली थी क्या, कोई बॉयफ्रेंड नहीं बनायी?


भीड़ में आगे पीछे से एक ही आवाज़ आती रही… "हमने ब्रेक उप कर लिया है।"..


अपस्यु:- देवियों, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, लेकिन मै पहले से एंगेज्ड हूं और बहुत सारे लोगों ने मेरे लव परपोजल वाला शो देखा भी होगा।


सभी लड़कियां वेटिंग एप्लिकेशन डालती हुई कहने लगी… "अगर इरादा बदले तो मुझे चुन लेना।"…


अपस्यु इतनी भरी भरकम भीर देखकर कुंजल को देखने लगा। वो भी हंसती हुई अपने पास परे कई लेटर अपस्यु को दिखाते… "इन लोगों को पता चल गया है की हम दोनों मायलो ग्रुप के मालिक के बच्चे है।"..


साची:- चल लावणी अब इन दोनों सेलेब्रिटी भाई-बहन को यहीं छोड़ दो।


अपस्यु:- वेरी फनी, बैठ जाओ चुपचाप। हां तू कुछ गुस्से के बारे में कह रही थी।


कुंजल:- हा गुस्सा, स्पोर्ट्स टीचर से जाकर मिलो, इससे पहले कि वो टीम अनाउंस कर दे। और सुनो भईया कम से कम 4-5 प्रतियोगिता में तो जरूर भाग लेना।


अपस्यु:- क्यों तुम साथ नहीं चल रही।


कुंजल:- नाह ! क्रिश को लिए जाओ, मै और विन्नी जरा शॉपिंग के लिए जा रहे है।


अपस्यु:- अभी शॉपिंग कौन करता है दिन में।


साची:- पहले मूवी फिर लंच और उसके बाद शॉपिंग, समझे बुद्धू..


अपस्यु:- हां तेरे चेहरे पर भी लिखा है की तुम भी अब क्लास नहीं ही जाओगी।


साची:- जा स्पोर्ट्स में हिस्सा ले, हम चले घूमने। चल लावणी..


लड़कियां अपने काम से निकल गई और अपस्यु अपने स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने। 2 बजे के लगभग जब अपस्यु ने ऐमी से संपर्क किया तो पता चला वो भी पूरे गैंग के साथ मस्ती मार रही है। आरव और मां कंपनी में और स्वास्तिका, अपने नए कॉलेज के साथ-साथ दीपेश के दिल्ली में सैटल होने यानी की अपना खुद का हॉस्पिटल के बनाने के काम को देख रही थी।


घर वापस आकर अपस्यु ने एक नींद लेने के बाद अभ्यास में जुट गया। अलग अलग तरह के मूव्स को प्रैक्टिस करते हुए अपस्यु अपनी पूरी योजना पर गौर करने लगा। हर चीज अपनी जगह बिल्कुल सही थी और वक़्त के साथ बस उन्हें आराम से आगे बढ़ने देना था। … फिर अचानक ही उसे काया का ख्याल आया।
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To Apasyu apna pate bichaye jaraha hai ab ye dekhna hai ki kab wo pate ke jariye dhoom machayega
 

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विपक्ष अध्यक्ष:- हां तो मामला संभाल लिया ना..


अनुप्रिया:- अध्यक्ष महोदय जी हम गुलाम बनाते है, ना कि सवाल जवाब करने वाले मुक्त व्यक्ति, जो हमारे ही अस्तित्व को चुनौती दे। पिछले कई दिनों से प्रवचन कम और युवाओं के सवाल ज्यादा होते है। हर कहे शब्द का अर्थ और भावार्थ के पीछे पड़ जाते है। और ये सब बस हुआ है आप लोगो के वजह से।


दोनो अध्यक्ष एक साथ… "हम समझे नहीं?"


रुद्रा:- जैसे आप लोग अपने प्रचार के लिए पहले दंगे फसाते हो और फिर खुद वहां पहुंचकर सुर्खियां बटोरते हो, वैसे ही स्टूडेंट पॉलिटिक्स कर रहे कुछ छात्र और छात्राओं ने मिलकर मीडिया आटेंशन पाने के लिए, एक प्रिंसिपल को घेरने का प्लान किया था, और वहां बीच में आ गया मंत्री जी का मुंह बोला बेटा, अपस्यु।


होम मिनिस्टर:- मै अपने बेटे को तो आज तक कहीं पहुंचने से रोक नहीं पाया, फिर वो तो सौरव से कहीं ऊंची चीज है। कहना ग़लत नहीं होगा कि कलिका अगर अपस्यु से शादी का प्रस्ताव रखती तो वो अकेला तुम सब के कैरियर ग्राफ को ऊंचाई पर पहुंचा देता, वो भी बिना एक भी क्राइम और गैर कानूनी गतिविधियों में हाथ डाले।


होम मिनिस्टर की बात सुनकर सभी हसने लगे। अनुप्रिया हंसती हुई कहने लगी… "शायद आपको पता नहीं मंत्री जी, कलिका उसकी सौतेली बहन है, और मै उसकी सौतेली मां। एक बात तो है, चन्द्रभान कि बुद्धि उसके बच्चो में कुट कूटकर भरी है, हां लेकिन उस लड़के का अभिभावक गुरु निशी था, इसलिए हमारे काम में बाधा बनने की सोच रहा है।


इस सच्चाई के बाद तो वहां मौजूद सारे अतिथि बिल्कुल दंग रह गए। अनुप्रिया सच्चाई से पर्दा उठती हुई सारी बातें बता दी, वो भी ऑडियो विजुअल प्रूफ के साथ जहां अनुप्रिया अपने सभी पुराने पार्टनर्स के ऊपर सर्विलेंस रखी हुई थी। इसी के साथ इस सच का भी उसने खुलासा कर दिया की क्यों वो केवल लोकेश राठौड़ को मारना चाह रही थी और बाकियों को नहीं, क्योंकि उनके पुराने साथी ने कभी अनुप्रिया और महिदीपि का रास्ता नहीं काटा।


अंत में महिडीपि…. "अब जब हमे उसकी योजना के बारे में पता है कि वो 2 लाख करोड़ के हवाले में हमसे डील करेगा, तो उसके ड्रीम प्रोजेक्ट को हम टेकओवर करते है। 4 लाख करोड़ रुपया लगभग 55000 मिलियन डॉलर, ये कुबेर का खजाना हमारे हाथ लगने वाला है। उसे सोचने दो की वो प्लान कर रहा है और यहां हम उसके प्लान को टेकओवर करेंगे। मंत्री जी आपकी पॉलिटिक्स क्या कहती है, आप तो उसके बहुत बड़े फैन है।


होम मिनिस्टर:- मै उसका फैन हूं और वो बहुत बड़ा ज्ञानी भी है। लेकिन राजनीति शास्त्र का थोड़ा कम ज्ञान है। मेरा फर्ज बनता है कि उसे इस ज्ञान में भी पारंगत करवा दू।


रुद्रा:- हम्मम ! फिलहाल तो वो अभी मियामी में है और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बचे हुए अमाउंट के लिए हाथ पाऊं मरेगा। देखते है कब तक वो रकम जमा करते है? उसे अपना प्लान करने देते है और हम बस आराम से उन पर नजर बनाए रखते है। आप सबका बहुत बहुत शुक्रिया, जीत की रकम का आधा हिस्सा हमारा होगा, और आधे हिस्से आप लोगों का।


सभा उसी के साथ समाप्त हो गई। जाते-जाते बावरा सौरव एक बार फिर कलिका के होंठ चूमते हुए पूछने लगा… "कल फ्री हो क्या?"


कलिका:- नीचे ज्यादा जोश मार रहा है तो यहां बहुत से व्यवस्था है, आओ और एन्जॉय कर लेना, शर्माना नहीं।


सौरव:- नाह तुम्हारे बिना दिल को चैन नहीं मिलेगा।


कलिका हंसती हुई… "दिल को या नीचे तुम्हारे.. खैर थोड़ा इंतजार करो इंगेजनेंट की डेट फिक्स करो, उस रात हम पुरा एन्जॉय करेंगे, वो भी विदेशियों को टक्कर देने वाले स्टाइल में।"..


सौरव उतावला होकर वहां से निकला और कलिका वापस आकर बैठ गई, अपनी फैमिली मीटिंग में। सबसे पहले तो सबने उसे शादी की बधाइयां दी फिर आगे की बात शुरू हो गई…


कलिका:- हमने जल्दबाजी तो नहीं कि ना इन लोगो को सामिल करके।


रुद्रा:- नहीं, इनकी मनसा जानने के लिए हमे वक़्त चाहिए था। सौरव से शादी का डिसीजन मास्टर स्ट्रोक है, होम मिनिस्टर शायद अपने रिश्तेदारी को ही मजबूत करे लेकिन पैसा का मतलब पॉवर होता है, इसलिए योजना के अंत में उसे यदि लेते और वो कहीं हम दोनों (अपस्यु और अनुप्रिया की टीम) को किनारे करके सारा माल हड़प कर जाता, तो हम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते थे। अभी तो 24 घाटे सर्विलेंस है उन सबके ऊपर।


युक्तेश्वर:- उसका भाई आरव जो मायलो ग्रुप देख रहा है, वो हमारे कंपनी को एक परसेंट भी टारगेट नहीं कर रहा, बल्कि अपना पूरा ध्यान नए नए टेंडर में दे रहा है जिसमें उसकी मदद उसका शसुर कर रहा है।


महिदीपु:- जल्दी से 2 लाख करोड़ जमा करने है ना इसलिए कंपीटेशन करने के बदले पुरा फोकस वहीं दिया है। एक तरह से ठीक भी है, हमारे लिए ही कर रहा है। हो सके तो उस ओर के सारे काम तुम लोग छोड़ दो और प्रोफिट के लिए सेंट्रल के टेंडर के बदले राज्यो के टेंडर उठाओ। रेगुलर मैन्युफैक्चरिंग को प्रमोट करो।


रुद्रा:- सात्विक आश्रम की ब्रांच ना खोल ले पिताश्री। (हॉल में सभी लोगो के हसने की आवाज) .. बस बस.. बिजनेस का आईडिया नहीं है और ज्ञान देते है लंबा चौड़ा। हम बिजनेस देख लेंगे, आप पहले आश्रम का कहिए, वहां जो उस सौतेले ने हंगामा करवाया है उसपर क्या एक्शन लिया जाए।


कलिका:- "भईया वो प्रायोजित एक्शन नहीं है। मैं लगातर उसके आस पास नजर बनाए हूं। उल्टा अपस्यु ने उन लड़कियों के ग्रुप को अपने फ्लैट में ही रखा है ताकि मीडिया आटेंशन पाने के लिए, वो चिप हरकत ना कर सके। अपस्यु के कई सारे कॉन्टैक्ट्स, उसके यहां दिल्ली आने के पूर्व से आश्रम आते है, इसका मतलब ये तो नहीं कि हम सब पर शक करते रहे।"


"वैसे भी मां और मामा का दिमाग मेहनत पर नहीं लगता, इन्हे फ्री में पैसा चाहिए। दोनो को बोलो भक्तो के सवाल का पूर्ण निराकरण करे, ताकि लोगो की आस्था बनी रहे। और किसी भी कीमत पर स्टूडेंट को ना छेड़े, क्योंकि उन्हें भनक भी लगी कि सात्त्विक आश्रम के कारन उन्हें मीडिया आटेशन मिल रहा है, फिर यहां पहले नए स्टूडेंट्स आएंगे और बाद में नए नए बखेरे। और विश्वास मानो हम एक स्टूडेंट को गायब करेंगे, तो अगले दिन एक पुरा कॉलेज यहां घेराव कर देगा।"


"एक बात और हम ये मानकर चलेंगे की अब से जो भी स्टूडेंट आ रहे है, उसे अपस्यु भेज रहा है, एक छोटी सी भुल और हम लाइमलाइट में। इसलिए अपने ठरकी चलो को संभाल लेना आप लोग। आज कल बाबा और उनके चेलों के एमएमएस बहुत लीक हो रहे है।


अनुप्रिया:- इस बात से मै सहमत हूं, सब शांत दिखता है इसका ये मतलब की लोग शांत बैठे है। हर किसी पर हम नजर दिए है इसका ये मतलब नहीं कि वो हमसे नजर बचाकर अपनी योजना नहीं बना रहा होगा। जबतक अपस्यु के साथ डील नहीं हो जाता और डील के बाद उसे और उसके साथियों को मारकर हम एक बड़ा सबूत नहीं मिटा देते, तबतक कोई गलती नहीं करेगा। भले वो लड़का अपस्यु हमारे खिलाफ प्लान करे या ना करे।

हंस:- वैसे वो अभी कहां प्लान कर रहे है…



लगभग 10000 फिट की ऊंचाई, शयं श्यां हवा को चिड़ने की आवाज। गुरुत्वाकर्षण के वेग से नीचे गिरते अपस्यु और ऐमी। दोनो हाथ से हाथ पकड़े तेजी के साथ नीचे आ रहे थे।


हेलमेट में लगा मीटर ऊंचाई मानक बता रहा था। 4000, 2000, 1000, 800, 700, 600, 500, 400, 300.. और ये खुला पैराशूट और दोनो फिर भी काफी तेजी के साथ नीचे आए जो कंट्रोल होते होते जमीन तक को छू ही गया और दोनो धराम से मुंह के बल नीचे…


ऐमी कपड़ों से घुल झारते हुए खड़ी हुई… "मज़ा आ गया बेबी, लेकिन ये 300 फिट पैराशूट को कंट्रोल नहीं कर पाता, थोड़ा और ऊपर खोलना होगा।"…


अपस्यु:- हां सही कही.. वैसे मैं सोच रहा था 20000 फिट की ऊंचाई से कूदेंगे और पैराशूट ऊपर ही खोल लेंगे तो हम कहां पहुंचेंगे…


ऐमी:- पैराशूट में खाना अटकाने की भी व्यवस्था कर लेना, क्योंकि पता ना हम कितने दिन हवा में ही रह जाए।


अपस्यु:- हा हा हा हा हा… हां ये सही कहा तुमने। चलो चला जाए।


दोनो एक दूसरे के होंठ से होंठ मिलाते हुए चूमे और पैदल ही वहां से निकल गए।….. "आह मियामी बीच देख लो तो मन हरा भरा हो जाता है।".. अपस्यु साथ चलते हुए कहने लगा…


"अच्छा, और यहां का नज़ारा कैसा है फिर।"… ऐमी अपने शरीर के ऊपर बांधी पतली सी ड्रेस उतारती हुई कहने लगी, जो उसने ऊपर पहन रखा था।


"उफ्फ क्या फिगर है। मार डाला तुमने तो। अब जल्दी से ढक लो, वरना दूसरे भी देख लेंगे"… बीच पर बिकनी सेट में देखकर अपस्यु के होश उड़े।..


"नाह मै कितनी सेक्सी दिखती हूं, ये लोगो के नजरो और एक्सप्रेशन को काउंट करके तुम्हे बताउंगी।"…


"मै तो बस छेड़ रहा था तुम्हे, मेरी नजर फिसल सकती है क्या?"… अपस्यु वो ड्रेस उठाकर उसपर से धूल झारकर ऐमी के ओर बढ़ाते हुए कहने लगा।


"निकल गई होशियारी।"… ऐमी ड्रेस को वापस पहनती हुई कहने लगी।


"वैसे ये पतली सी सिफोन की ड्रेस जब तुम पहने रहती हो तब अंदर इतना हॉट फिगर छिपा होगा पता नहीं चलता।"..


"तुम भी तो अपने टी-शर्ट और जीन्स जब निकालते हो, फिर पता चलता है कि अंदर कैसी अथेलीट बॉडी छिपा रखी है।"


"मै क्या सोच रहा था चलकर क्यों ना एक दूसरे कि बॉडी को देखा जाए की कितना मेंटल करके रखा है हमने।"..


"बेबी अभी घर चलो, आज हमे कुछ और भी काम है।"…


दोनो मियामी बीच से अपने घर लौट आए, आते ही अपस्यु आराम से हॉल में बैठा और कंप्यूटर स्क्रीन को देखते… "ऐमी, इस जगह के सिक्योरिटी ब्रिज से किसी ने छेड़छाड़ की है, ऐसा लगता है।"..


ऐमी भागकर वाशरूम से बाहर आयी और लैपटॉप देखने लगी… "तुम्हारे ही रिश्तेदार लोग है, जो अंदर के सिक्योरिटी सिस्टम में घुसना चाह रहे है।"..


अपस्यु:- हम्मम ! जैसा सोचा था वैसा ही हो रहा है। चलो फिर इनको इनका काम करने दो, हम अपने काम पर फोकस करते है।


ऐमी:- उतावले कहीं के, अभी सुबह सुबह कौन सेक्स करता है। चलो ना वेगास चलते है, थोड़ा जुआ खेल कर आया जाए।


"जुआ खोलेगी.. पागल लड़की... कुछ और कहो"… अपस्यु पीछे से बाहों मै दबोचकर कहने लगा।


"अम्म्म्म ! तो हॉलीवुड चलें, मुझे एमा वाटसन से मिलना है।"..


"हां समझ गया काम पर फोकस करना है कामसूत्र पर नहीं।"..


"काफी समझदार हो गए हो बेबी"..


दोनो बैठ गए बहुत सारे खूबसूरत बिल्डिंग्स की तस्वीर को लेकर। इधर जबतक ऐमी का कंप्यूटर हैक हो चुका था और जबतक वो तस्वीर को टेबल पर फैलाते, उनके घर का बेल बजने लगा, ऐमी ने तुरंत सारी तस्वीरों के ऊपर एक कपड़ा फैला दिया। उधर कलिका खुद इस मामले को देख रही थी, इसलिए जैसे ही कंप्यूटर हैक हुआ कलिका खुद अपस्यु के घर की सीसी टीवी को बैठकर देखने लगी।


उसके साथ उसके दोनो भाई, हंस और युक्तेश्वर भी बैठे हुए थे।… "दोनो देख लो अपने छोटे भाई और बहू को। जोड़ी तो शानदार मिलाई है। मानना पड़ेगा बहू तो काफी हॉट और खूबसूरत ढूंढी है।"..


युक्तेश्वर:- दीदी वैसे भाई ने भी अपने आप को पूरा उसके लायक मैच बनाया है। काफी मजबूत और फुर्तीला शरीर लगता है इसका।


हंस:- पहली बार देख रहे है, जारा आवाज़ तो सुना दो इनकी।


तीनों के ठीक पीछे बैठी सर्विलेंस इंचार्ज श्रेया… "इन दोनों को ना ही सुनो तो हमारी सेहत के लिए अच्छा है।


कलिका:- वो क्यों श्रेया ?


श्रेया:- दोनों की रोमांटिक बातें सुनकर ऐसा मेहसूस होगा कि हमने तो जिंदगी में कुछ भी हासिल नहीं किया। ऐसा मेहसूस होगा जैसे कोई ऐसा चाहने वाला मिल जाता तो उसके लिए सबकुछ छोड़कर चले जाते।


तीनों एक साथ श्रेया को देखते हुए…. "तुम तो सर्वर छोड़कर नहीं भगोगी ना, वरना यहां विश्वास पात्र लोग ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है।"


कलिका:- लो इनका माईक भी पहुंच गया, अच्छा से ट्यून कर दो, इनकी आवाज साफ पता चलना चलिए।


अपस्यु और ऐमी तस्वीर को फैला रहे थे तभी हॉल की घंटी बजी। ऐमी ने सारी तस्वीरों को कवर किया और अपस्यु बाहर दरवाजा खोलने चला गया। जैसे ही दरवाजा खुला, कुछ लोग खड़े हुए थे।… "हां कहिए।"


एक व्यक्ति:- सर कुछ ऑर्डर्स आपने किया था। वहीं डिलीवरी के लिए आया हूं।


अपस्यु:- स्वीटी कुछ ऑर्डर किया था क्या तुमने..


ऐमी:- हां, हॉल में जिम्नास्टिक सेटअप लगाना है, और किचेन बगैरा के समान है। कुछ छोटे मोटे एक्सरसाइज के समान, ये सब सेटअप करवा लो जबतक मै नहाकर आती हूं।


"हुंह ! जबसे इजहार किया हूं इसके तो नखरे ही बढ़ गए है। आओ भाई जल्दी से सेटअप करो सामान।"


10 मिनट का काम था उन सबके लिए। फटाफट किया और चलते बने। जैसे ही वो लोग बाहर निकले अपस्यु भागकर बेडरूम में आया और तबतक ऐमी आइने के सामने अपने बाल सवार रही थी…. "क्या हुआ ऐसे भागकर क्यों आ रहे हो?".
ऐमी ने आइने में अपस्यु को आते देख पूछा।
Khoobsurat update bhai
 
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