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मालविका:- मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं लेकिन यदि हमारे गुरु के लिए कोई कुछ कहे तो हम चुप नहीं रहेंगे। हम तो डूबेंगे ही, लेकिन उन्हें भी ले डूबेंगे। गलत तरीके से नहीं फसे तो क्या हुआ, मै आश्रम जाकर भक्तों को बताऊंगी ये बात और फिर तमाशा होगा। इसे तो हम किसी भी तरीके से बर्बाद करके है छोड़ेंगे।
अपस्यु अपने मुख से पहला श्लोक बोला….
बहवो गुरवो लोके शिष्य वित्तपहारकाः।
क्वचितु तत्र दृश्यन्ते शिष्यचित्तापहारकाः॥…
अर्थात:- संसार में शिष्य का धन हरण करने वाले गुरु तो बहुत मिल जायेंगे, लेकिन शिष्य का चित्त हरण करने वाले गुरु बहुत ही कम। इसलिए किसी को गुरु कहने से पहले यह सुनिश्चित करें की वो आपके गुरु कहलाने लायक है कि नहीं।… गुरु कैसे होने चाहिए… तो वो भी सुनो…
फिर अपस्यु अपने दूसरे श्लोक से गुरु को परिभाषित करते हुए कहा…
निवर्तयत्यन्यजनं प्रमादतः स्वयं च निष्पापपथे प्रवर्तते । गुणाति तत्त्वं हितमिच्छुरंगिनाम् शिवार्थिनां यः स गुरु र्निगद्यते ॥
गुरु कैसा हो, इस विषय में कहे पहले लाइन का अर्थ है…. "जो दूसरों को प्रमाद करने से रोकते हैं"… प्रमाद का मतलब होता है किसी प्रकार के नशे कि अवस्था, और तुम दोनो सात्त्विक आश्रम और माहीदीपी के नशे में हो।
अब दूसरा लाइन का अर्थ समझो…. "निष्पाप रास्ते से चलते हैं, हित और कल्याण की कामना रखनेवाले को तत्त्वबोध करते हैं, उन्हें गुरु कहते हैं।"… जो हित और कल्याण की कामना रखने वालों को तत्त्वबोध करते है, मतलब ब्रह्म, आत्मा और जगत के विषय में यथार्थ ज्ञान; ब्रह्मज्ञान; तत्वज्ञान; तत्व या किसी अन्य वस्तु की मूल प्रवृत्ति का ज्ञान करवाते है। उन्हें गुरु कहते है।
जब तुम दोनों में ना तो जारा भी चित्त हरण हुआ, ना ही कोई बौद्धिक विकास फिर वो गुरु किस काम का। ना तो तुम्हारे गुरु ने तुम्हे तर्क करने की शक्ति दी है और ना ही दूसरों के मत को सुनने की क्षमता तो किस बात का गुरु। जो तुम्हारे अंदर के नशे को दूर ना कर सका, जो तुम्हे तत्त्वबोध ना करवा सका वो गुरु किस बात का।
आध्यात्म में घुसे हो तो ढंग से आध्यात्म को समझो, यह कोई गुरु वाणी नहीं अपितु जीने के ढंग को अपना नजरिया देता है, लेकिन ऐसा तब होगा जब कहे शब्दों पर चिंतन होगा और उसपर तर्क होंगे। ना की केवल सुनकर ताली बजा दिए और वाह-वाह, कर दिए।
हो सकता है तुम जिसके अनुयाई हो, उन्होंने तुम्हे यह ज्ञान की बात बताई हो, लेकिन इन बातो पर चिंतन और मनन करने के बदले, उन्हें भगवान मानकर चली आयी। अपने मात्र स्त्री होने का फायदा उठाना और एक हंसते खेलते परिवार में जहर घोलने का ज्ञान किस गुरु ने दे दिया तुम्हे।
जाओ यहां से और पहले गुरु और शिष्य की परिभाषा को ठीक से परिभाषित करो। जो तुम्हारे गुरु का अपमान करे उसका विरोध अवश्य करो, किन्तु वो विरोध तर्क से होना चाहिए ना की फुहर तरीकों से। तुम सब जा सकती हो, लेकिन ख्याल रहे आगे से यदि कभी मैंने तुम चारो में से किसी को भी अश्लील हरकत के मामले में टीवी और मीडिया में देख लिया, तो ऐसी धज्जियां उड़ा दूंगा कि तुम भी सोच में पर जाओगी, मैंने इस संसार में जन्म ही क्यों लिया।
दोनो लड़कियां सर झुकाए आलोक से माफी मांगकर वहां से निकल गयी। ऐमी के लिए कोई नई बात तो थी नहीं, लेकिन बाकी के लोग बड़ी हैरानी से उसे सुन रहे थे। अपस्यु इतने प्यार से समझाते हुए अपनी बात रख रहा था, कि सुनने वालों के कान में जैसे वो रस घोल रहा हो। और धीरे-धीरे जब वो अंत में आक्रोशित होना शुरू हुआ, तो हर कोई उस गुस्से को अंदर से मेहसूस कर रहा था…
"यदि आप लोग भी गुरु अपस्यु से ज्ञान लेना चाहते है, तो उनके कहे शब्दो को रिकॉर्ड करके सुनते रहे और जोर से बोले… बाबा अपस्यु की जय।".. लोग थोड़े अचंभे में थे और ऐमी माहौल हल्का करती हुई अपनी बात रखी।
लिसा:- दम है बॉस … दिल्ली यूनिवर्सिटी में ये सब भी पढ़ाई जाती है क्या?
सोमेश चौंकते हुए… "लसिता, तुम तो कह रही थी अपस्यु तुम्हारा दोस्त है, फिर इसके बारे में इतनी तो जानकारी होनी चाहिए थी।
लिसा:- आप भी तो 4-5 साल से इससे जुड़े हो पापा, फिर आपको जानकारी क्यों नहीं? मै तो फिर भी कुछ दिन पहले यूके से यहां लौटी हूं।
अपस्यु:- बस भी करो खिंचाई करना। कल रात मैंने गूगल किया था और कुछ श्लोक को बस यहां फिट कर दिया है।
आलोक:- मैटर पता कहां था जो ये सब गूगल करके फिट करते। तुमने शास्त्र का ज्ञान कहां से लिया है अपस्यु?
ऐमी:- ठीक वैसे ही जैसे अब हम दोनों आपसे फिजिक्स का ज्ञान लेंगे सर। विषय कोई भी हो बस पढ़ने कि रुचि होनी चाहिए। अब हमे चलना चाहिए, क्यों बेबी।
अपस्यु:- हां स्वीटी, वैसे सर से टाइम तो ले लो.. ये कब हमे पढ़ाने वाले है और गुरु दक्षिणा में क्या लेंगे।
आलोक:- कल शाम 7 बजे से, और कोई देर नहीं होनी चाहिए।
अपस्यु:- वो तो हम दोनों के घूमने का समय होता है। कॉलेज में ही पढ़ा दो ना हमे सर, लैब का टेंशन भी नहीं होगा।
आलोक:- कल शाम 7 बजे। बाकी समय ऊपर नीचे मै अपने हिसाब से करूंगा।
ऐमी:- मंजूर है सर, और वो आपकी फ़ी, वो भी बता दीजिए..
आलोक:- वो मै बाद ने बताऊंगा। इतनी सारी बातों में ऐसा उलझा की मै मुख्य बातें ही भुल गया। तुम दोनो को दिल से शुक्रिया। यूं तो मै जाहिर नहीं होने दे रहा था लेकिन कल से मै ठीक से जी नहीं पा रहा था। दिमाग में एक ही बात थी, लोग इन्हीं लड़कियों की सुनेगे और मुझे बदनामी झेलनी पड़ेगी। अपने बीवी बच्चे को कैसे मुंह दिखाऊंगा?
अपस्यु:- अब आप बिल्कुल बेफिक्र रहिए सर। आज ही इन लोगो को मै यहां से कहीं और शिफ्ट करवा देता हूं, लेकिन सबक आपके लिए भी है, दूसरों को ज्ञान तबतक नहीं से जबतक वो आपसे मांगने नहीं आए। अब हम दोनों को इजाज़त दीजिए, अभी एक छोटी सी मुलाकात उन लोगो से भी करनी है।
अपस्यु, प्रिंसिपल का मैटर सॉल्व करके वहां से निकलकर पड़ोस के कमरे में पहुंच गया, जहां उन चार लड़कियों के अलावा 2 लड़के और भी थे, जिसमे से एक, स्टूडेंट यूनियन का लीडर विकास था। अपस्यु विकास से हाथ मिलाते…. "छोटी सी गलतफहमी हो गई थी इसलिए ये सब हो गया। बात यहीं खत्म करे।"..
विकास:- माफ करना दोस्त, साला हम लड़के हमेशा लड़कियों कि इन्हीं अक्लमंदी का शिकार हो जाते हैं। यह भी नहीं देखते की कौन सही है और कौन गलत, हमेशा हमे लड़की ही सही लगती है।
अपस्यु:- हां सो तो है। खैर मैं कविता और मालविका को लीगल में नहीं लेकर जा रहा हूं, लेकिन इन लोगों से बोल दो की ये फ्लैट कल तक खाली करके कहीं और फ्लैट लेले।
उन्हीं चार लड़की में से एक लड़की खुशी उठकर बोलने लगी… "दिल्ली में इतनी जल्दी फ्लैट कैसे चेंज होगी। ऊपर से हमने 2 महीने का एडवांस भी से रखा है।"
विकास:- भाई ये कह तो सही रही है।
अपस्यु, खुशी का नंबर लेते हुए…. "थोड़ी देर से मै तुम्हे फोन करता हूं, फ्लैट अरेंज हो जाएगा, बस तुम लोग अपनी पैकिंग पूरी रखना। तुम्हारे 2 मंथ का एडवांस की टेंशन ना लो वो मै देख लूंगा।"
अपस्यु अपनी बात कहकर वहां से निकल गया। उसके जाते ही विकास ने मालविका और कविता को थप्पड़ जड़ते हुए…. "तुम लोग किसी को ठीक से फसा भी नहीं सकती ना। कामिनी कहीं की, एक छोटा सा काम नहीं हो सका। जानती हो जो लड़का अभी-अभी गया, वो कौन है?"..
सभी लड़कियां एक साथ… "कौन है?"
विकास:- दिल्ली की बहुत बड़ी हस्ती है, लेकिन दिखाता नहीं कभी। और उसके साथ जो उसकी गर्लफ्रेंड खड़ी थी, वो यहां के सुप्रीम कोर्ट के टॉप वकील ने से एक कि बेटी है। साली ढंग से एक काम होता नहीं है और स्टूडेंट पॉलिटिक्स करना है।
उनकी चौथी साथी निशा… "पहले बताना था इस लड़के में बारे में, इसे मै किसी भी तरह से पटा लेती।"..
कविता:- कोशिश भी मत करना, ये तेरे से इस जन्म में नहीं पटेगा।
निशा:- ऐसी बात है क्या, फिर तो हर्लिन को बुलाना पड़ेगा।
विकास:- तुम लोगो को ये लड़का पटाना है या अगले साल होने वाले यूनिवर्सिटी चुनाव पर ध्यान देना है।
खुशी:- सब रणनीति तुम्हारी थी विकास, तुम अपनी गलती के लिए हमे थप्पड़ भी मार चुके। अब हम लड़कियों की अपनी भी कुछ बातें होती है, तुम उसमे अपनी टांग ना अराओ तो बेहतर होगा। जाओ अपने इलेक्शन कैंपेन पर ध्यान दो।
विकास:- यार मै गुस्से में था इसलिए हाथ उठ गया। अपने हाथ से पॉपुलैरिटी और मीडिया कवरेज सब चला गया।
निशा:- अब तू भी चला जा। सुना नहीं वो क्या बोलकर गया है, पैकिंग कर लेने। एक बात याद रखना, आज के बाद मै कोई भी अनैतिक काम में तुम्हारा साथ नहीं देने वाली। कोई सोशल काम हो, कोई प्रोटेस्ट हो तो मै अपनी पढ़ाई के बाद कर दूंगी। मालविका पागल हो चुकी थी जो घटिया सोहरत के पीछे जाने के लिए तैयार हो गई, अच्छा हुआ जो उस लड़के ने बचा लिया।
ऐमी और अपस्यु जैसे ही उस कैंपस से बाहर निकले… "अपस्यु मै पज़ल हुई जा रही हूं। ये हर किसी के काम में तुम इन्वॉल्व होकर, क्या साबित करना चाह रहे हो?"
अपस्यु, ऐमी के गाल को चूमते…. "हां समझ रहा हूं कि तुम क्या सोच रही हो, तुम्हे ऐसा बिल्कुल सोचने की जरूरत नहीं कि मै तुमसे कुछ छिपा रहा हूं। वो तो वक़्त नहीं मिला इसलिए नहीं बता पाया। रही बात प्रिंसिपल की, तो मै कल उनके ऑफिस कुंजल के कहने पर गया था। लेकिन वहां जब पहुंचा तो मामला की कुछ और दिखा। मुझे लगा मदद करनी चाहिए इसलिए मैंने कर दिया।
ऐमी:- हां ठीक है बाबा समझ गई, तुम्हारे प्रधानाध्यापक को तुम्हारी मदद की जरूरत थी। अब वो बात भी लगे हाथ बता ही दो, जो वक़्त ना मिलने के कारन तुम बता नहीं पाए।
अपस्यु:- चाणक्य नीति की शुरवात हो चुकी है, अब बस बाहर बैठकर तमाशा देखते रहो।
ऐमी:- चाणक्य की कौन सी निती अपस्यु, वो तो समझा दो बेबी।
अपस्यु जैसे-जैसे अपनी बात आगे बढ़ता गया, ऐमी का चेहरा खिलता चला गया। और जैसे ही अपस्यु ने अपनी बात समाप्त की, ऐमी, जगह देखकर कार किनारे खड़ी करती हुई, लगभग अपस्यु के ऊपर चढ़कर उसके होंठ चूमती…. "मेरे पास कोई शब्द नहीं लव"… उम्ममआह्हहहहहहहहहहह…… "क्या दिमाग लगाया है"….. उम्ममआह्हहहहहहहहहहह…. "मै हैप्पी हैप्पी हैप्पी"… उम्ममआह्हहहहहहहहहहह
ऐमी अपनी हर लाइन के ऊपर अपस्यु को लगातार चूमती जा रही थी और अपनी आखरी लाइन बोलकर तो उसके होंठ ही चबाने लगी…. "बस भी करो अब स्वीटी, कार चलाओ।"… अपस्यु, ऐमी को अपने ऊपर से हटाते हुए कहने लगा।
ऐमी:- अपस्यु एक बात माननी होगी, शुरवात में तुमने सबको प्लान करने दिया ताकि हर किसी को लगे वो बेस्ट है, लेकिन मुझे अब ऐसा क्यों लगा रहा है कि हर कोई इंडायेक्टली तुम्हारे ही प्लान को तुम्हे सुना रहा था।
अपस्यु:- हम जब साथ है और लक्ष्य एक, तो सोच भी लगभग एक जैसे ही होगी। हां लेकिन किसी को भी डायरेक्टली या इन डायरेक्टली मैंने प्रभावित नहीं किया था, वो उनकी अपनी सोच थी जिसपर हम सहमत हुए थे।
ऐमी:- छोड़ो ये सब लेकिन इतनी बड़ी खुशखबरी के बाद तो एक छोटा सी रिलैक्स पार्टी बनती है ना।
अपस्यु:- हां सो तो है, शाम का प्रोग्राम रख लो। अरे हां एक बात और, मैंने उन लड़कियों को वहां का फ्लैट खाली करने के लिए बोल दिया है। पैसेज के पीछे वाला 312 नंबर वाला वो आखरी का फ्लैट उन्हें रेंट पर देदे क्या?
ऐमी:- कौन सी लड़की और कहां का फ्लैट..
अपस्यु:- उल्लू, अरे वही 4 लड़कियां जिन्होंने हमारे प्रिंसिपल को फंसाया था। तुम्हारे सामने ही तो कहा था उन्हें फ्लैट खाली करने।
ऐमी:- हां दे दो, लेकिन जरा संभलकर। देखना कहीं तुम्हारे जरिए वो मीडिया की सुर्खियों में ना आ जाए।
अपस्यु:- ऐसा भी होगा क्या?
ऐमी:- अगर उन्हें अपना वर्तमान और भविष्य की चिंता ना होगी और सनी की साढ़े साती उनके दिमाग में चढ़ी होगी, तभी ऐसा कर सकती है। वरना नहीं। अभी फिलहाल हम तो चले।
दिन के लगभग 3 बज रहे थे। अपस्यु अपने फ्लैट में आराम से मस्त नींद ले रहा था, तभी उसके घर की घंटी बाजी… दरवाजे पर साची और ध्रुव खड़े थे। दोनो को देखकर अपस्यु ने उन्हें अंदर बिठाया।… "चाय या कॉफी चलेगी।"…
साची:- मै तो चाय लूंगी।
ध्रुव:- और मै भी…
"साची किचेन भुल गई हो क्या। जाओ और 3 कप चाय बना लाओ।"… अपस्यु अपनी बात कहते हुए, ध्रुव के ओर हाथ बढ़ा दिया और दोनो ताली देते हुए हसने लगे। साची जला भूना सा अपना रिएक्शन देती चाय बनाने चली गई।
चाय पर तकरीबन आधे घंटे की चर्चा के बाद दोनो अपने फ्लैट 304 में जाने के लिए जैसे ही बाहर हुए, 15, 20 लड़के लड़कियां अपस्यु के फ्लैट तरफ ही आ रहे थे… साची और ध्रुव वापस अंदर आती… "ये इतने सारे लोग, इनमे से तो कुछ कल वाले लड़के है अपस्यु, यहां मार करने तो नहीं आ रहे।"..
अपस्यु:- अरे ना रे, लंबी कहानी है, तुम दोनो जबतक फ्लैट में शिफ्ट करो, रात के खाने पर बताता हूं।
साची:- रात का खाने से क्या मतलब है तुम्हारा..
अपस्यु:- जब ध्रुव के लिए खाना लाओगी तो मेरे और काया के लिए भी खाना लेती चली आना।
"एक्सक्यूज मी सर"… खुशी पीछे से बोली… "आप लोग 2 मिनट के लिए बैठ जाओ, हम जारा बात कर रहे है। अपस्यु ये काया कौन है और खाने का क्या चक्कर है।"..
अपस्यु:- कल तेरे सामने ही तो वो थी कोर्ट में, फिर भी तुम्हे पता नहीं काया कौन है।
साची:- अरे डफर, हां देखा है कौन है, लेकिन तुम कैसे जानते हो वो बताओ।
अपस्यु:- वो ऐमी के ओर से है। मुझे ऑर्डर मिला और मैंने कर दिया। अब जान गई ना तो आज रात हम सब साथ खाएंगे। लावणी को भी ले आना।
साची:- पागल समझ रखा है क्या? तुम सब रात को घर ही चले आना, और यही फाइनल है। और अब बताओगे ये लोग यहां क्या कर रहे है? हमारे प्रिंसिपल वाला घटना इन्हीं लोगों का रचा हुआ था ना?
अपस्यु:- वो छोटी सी कहानी है, कहा तो रात को बताऊंगा खाने पर। यहां फ्लैट खाली था, मैंने रेंट पर लगा दिया। अब जा ना, ध्रुव को शिफ्ट नहीं करना क्या?
साची:- अकडू कहीं का, जा ही रही हूं। चलो ध्रुव..
उनके जाते ही अपस्यु… "312 नंबर का फ्लैट तुम लोगों का है, बीच में पैसेज से पीछे चले जाना, वहां से दूसरा नंबर का फ्लैट है। जिनको रहना है वो अपनी आईडी दो, और एग्रीमेंट को पढ़कर साइन कर दो।"..
खुशी 4 आईडी उसे देकर एग्रीमेंट पढ़ने लगी। अपस्यु ने एक फोटो खींचा और चारो आईडी की तस्वीर लेकर किसी को भेज दिया। उसे ऐसा करता देख एक लड़का पूछने लगा… "ये तस्वीर किसे भेज रहे।"..
अपस्यु:- थानेदार को भेजा है, वेरिफिकेशन प्रूफ और अन्य प्रूफ के लिए। बाकी यहां कोई हंगामा या ऐसा काम मत करना जिससे मुझे मजबूर होना परे। अब तुम लोग जा सकते हो।
सभी लोग वहां से निकल गए। अपस्यु दरवाजा बंद करके वहां के चीजों को देखने लगा। अपने ट्रेनिंग रूम में जाकर काफी देर तक अभ्यास करने के बाद पसीने से तर होकर वो बाहर निकला, स्नान करने के बाद वो फिजिक्स की एक पुस्तक निकालकर पढ़ने लगा। काफी गहन अध्यन कर रहा था, तभी अचानक वो तेजी के साथ उठा और ऐमी को कॉल लगा दिया…