Update:- 118
कंचन:- अब तुम्हे क्या हुआ, ऐसे भागी क्यों?..
ऐमी:- मासी मेरी कमर लाल हो गई और आप पूछ रही है क्या हुआ। आपका बेटा छेड़खानी कर रहा है।
कंचन, अपस्यु को घूरती हुई…. "एक बात बता, इतनी बड़ी-बड़ी बातें करने वाला इतना बेशर्म कैसे हो सकता है। मै यहां खड़ी हूं और जारा भी लिहाज नहीं।"..
दृश्य और अश्क, दोनो (अपस्यु और ऐमी) को देख रहे थे और इन दोनों को देखते हुए, उन्हें अपने भी पुराने दिन याद आ गए। दोनो एक दूसरे के करीब, और करीब होते चले जा रहे थे। कंचन का इधर अभी पुरा फोकस अपस्यु पर ही था, तभी अपस्यु चिल्लाते हुए कहने लगा…. "मासी वो देखो दोनो को, और आप मुझे डांट रही थी।"…
छोटी छोटी नोक झोंक के बीच हंसी मज़ाक का काफी लंबा दौड़ चलता रहा। इसी बीच आधे घंटे की निजी मुलाकात दृश्य और अपस्यु के बीच भी हुई, जहां एक बार फिर दोनो के रास्ते मिल रहे थे। अपस्यु पूरी बात समझकर एक छोटी सी योजना पर दोनो साथ मिलकर काम करने के लिए राजी हो गए।
एक सुखद मुलाकात थी ये अपस्यु के लिए। जब वो वापस लौटा, तब उसकी मां का पूरा इतिहास उसके सामने था। उसकी खुशी उसके चेहरे से झलक रही थी जिसे ऐमी भी महसूस करते जा रही थी।
कुछ दिन अपस्यु और ऐमी के लिए काफी रोमांस और रोमांच से भड़ा परा था, जिसमें वो दोनो खुलकर जीने के एक अलग ही एहसास में डूबे हुए थे। वहीं श्रेया दोनो को देखकर अजीब ही कस-म-कस में दिख रही थी। श्रेया और उसकी पूरी टीम कितने भी नतीजों पर क्यों ना पहुंचे, लेकिन यह तय नहीं कर पा रहे थे कि अपस्यु को उसकी सच्चाई पता है या नहीं है।
ऊपर से श्रेया पर उसके पापा का प्रेशर बढ़ता जा रहा था, जो जल्द से जल्द अपने दूसरे टारगेट को एलिमिनेट होते देखना चाहता था, जिसके लिए श्रेया और टीम को खुलकर काम करने लिए 50 करोड़ की राशि दी गई थी।
इसी बीच अपस्यु के आमंत्रण पर मेघा भी भारत पहुंच चुकी थी, जो कि विक्रम की मेहमाननवाजी स्वीकार करती हुई राठौड़ मेंशन में अपने भाड़े के सिपाही जेम्स हॉप्स और उसकी टीम के साथ ठहरी हुई थी। उसके दिमाग में भी बहुत गहरी साजिश कहीं दूर से पक रही थी, जिसका नतीजा सोचकर वो अपने पूरी टीम के साथ पहुंची थी।
हर कोई अपने दिमाग पर बोझ दिए बस हर दिन अपने योजना को सुदृढ़ करने में लगे हुए थे। 10 दिनों की छुट्टी में अब मात्र 3 दिन बच गए थे। ऐमी, अपस्यु को रोमांस के चले एक लंबे दौर से जगाती हुई ,अब काम पर ध्यान लगाने की सलाह देने लगी, और अपस्यु के लिए अब वक़्त आ चुका था हर किसी के योजना को समझने का।
12, अगस्त 2014 की सुबह…
अपस्यु और ऐमी दोनो ही सुबह-सुबह मेघा के कॉल पर उससे मिलने राठौड़ मेंशन निकल चुके थे। एक बहुत लंबा इंतजार और फैसले के घड़ी के इतने करीब, ऐमी और आरव जब वीडियो कॉल पर थे तब उनकी एक्साइटमेंट देखने बनती थी। ..
दोनो राठौड़ मेंशन के दरवाजे पर थे, और गार्ड ने उनको बाहर खड़ा कर अंदर कॉल लगा रहे थे। तभी उस वक़्त कुसुम पूजा करके मंदिर से लौट रही थी और जब उसने दरवाजे पर अपस्यु को खड़ा देखी, उत्साह से अपने गाड़ी से बाहर निकली….. "सर आप यहां खड़े क्यों है।"..
अपस्यु:- क्या करे बड़े लोगों की हवेली है, कुछ देर तो इंतजार करना ही पड़ता है।
"यहां आप से बड़ा कौन है।".. कुसुम जैसे अपस्यु के अभिवादन में अपने शब्द कहीं हो और खुशी से चिल्लाती हुई कहने लगी, जल्दी से दरवाजा खोला जाए। गार्ड ने तुरंत दरवाजा खोला और कुसुम अपस्यु का हाथ पकड़कर वहां के हर चीज का इतिहास बताती हुई उसे लेकर आगे बढ़ने लगी।
पीछे से ऐमी कार को पार्क करती, वो भी उनके साथ हो गई। ऐमी पर नजर पड़ते ही कुसुम मुस्कुराती हुई कहने लगी…. "क्या सर जब से इन्हे परपोज किया है, हर जगह साथ लेकर ही जाते हो।"..
ऐमी:- कुसुम, तुम सर के बदले अपस्यु को भईया कह सकती हो और मुझे भाभी। चलेगा ना।
कुसुम, अपना प्यारा सा चेहरा बनाती….. "बहुत दिन के बाद मै दिल से खुश हुई हूं। मै बयान नहीं कर सकती की मै कितनी खुश हूं भईया। आप को यहां देखना मतलब, ऐसा लग रहा है किसी भक्त के घर भगवान स्वयं चलकर आए है।"
अपस्यु उसकी बातें सुनकर हंसते हुए कहने लगा…. "पहले ठीक से इंसान तो बन जाऊं, और तुम मुझे भगवान बाना रही हो।"
तीनों बात करते हुये, राठौड़ मेंशन पहुंचे। हॉल में पहुंचते ही कुसुम चिल्लाती हुई सबको इकठा करते, सबको अपस्यु से मिलवाने लगी। हर किसी को लगा कि अपस्यु कुसुम के साथ आया है, लेकिन तभी मेघा बीच में आती हुई दोबारा सब को अपस्यु का परिचय कराते हुए कहने लगी कि यह वही लड़का है जो रुकी फैक्टरी का काम आगे बढाने का काम अपने जिम्मे लिया है।
कुछ देर अपस्यु से मिलकर सब चले गए। कुसुम के आग्रह पर ऐमी उसके साथ जाकर उसका घर देखने लगी। वहीं अपस्यु डियनीग टेबल पर अपना मोबाइल रखकर मेघा और लोकेश से प्रोजेक्ट क्लीयरेंस संबंधित बातें करने लगा।
इसी बीच नंदनी का कॉल अपस्यु के मोबाइल पर आया और उसी के साथ नंदनी की तस्वीर भी स्क्रीन पर दिखने लगी। रिंग बजते ही लोकेश और मेघा का ध्यान भी फोन पर गया। फोन पर फ़्लैश होती फैमिली फोटो पर जैसे ही लोकेश की नजर गई वो दोबारा तस्वीर देखने पर विवश हो गया।
अपस्यु फोन काटकर फोन को साइलेंट पर डाला और प्रोजेक्ट के अन्य परेशानी के बारे में समझाने लगा। इस बीच नंदनी के 2-3 कॉल आए। हर बार लोकेश का ध्यान अपस्यु के फोन पर ही रहता। अपस्यु अपनी बात खत्म करते हुए नंदनी का कॉल पिक किया और कुछ देर के बाद वापस हॉल में आया।
लोकेश:- प्रोजेक्ट पर अच्छा काम किया है तुमने। वैसे तुम्हारे पापा क्या करते है अपस्यु।
अपस्यु:- वो एक हादसे में मर गए थे।
लोकेश:- ओह माफ करना। वैसे तुम्हारे पापा का क्या नाम है?
अपस्यु:- जी स्वर्गीय भूषण रहुवशी।
लोकेश:- और तुम्हारी मां का नाम?
अपस्यु:- नंदनी रघुवंशी।
"अपस्यु एक काम करना तुम अपना बायोडेटा इसे दे देना, फिलहाल तुमसे कुछ सीरियस डिस्कस करना है, उम्मीद है तुम्हारे पास वक़्त हो।"… मेघा अपस्यु को साइड ले जाकर पूछने लगी।
अपस्यु:- हाहाहाहा… आज शाम से लेकर पूरी रात फ्री ही हूं, बस तुम कहीं बिज़ी नहीं हो जाना।
मेघा:- बिल्कुल नहीं डार्लिंग, शाम को मिलती हु, तैयार रहना…..
मेघा अपनी बात कहती हुई निकल गई। अपस्यु एक बार फिर लोकेश के पास पहुंचा…. "सॉरी सर वो मेघा मैम ने बीच में टोक दिया। आप कुछ पूछ रहे थे।"..
लोकेश:- नहीं, मै बस ऐसे ही पूछ रहा था, अच्छा लगा तुमसे मिलकर।
लोकेश आगे कोई भी बात ना करते हुए, तेजी के साथ वहां से निकलकर विक्रम के कमरे में पहुंच गया और इधर ऐमी भी घूमकर लौट आई थी। दोनो वापस निकले राठौड़ मेंशन से। कार थोड़ी दूर आगे बढ़ी होगी, ऐमी अपस्यु के जांघ पर अपना हाथ फेरती उसे पैंट कि जीप तक बढ़ाने लगी… "अरे, अरे अरे.. ये क्या जर रही हो स्वीटी"..
"फीलिंग हॉर्नी बेबी, इसलिए तुम्हे रिझा रही हूं।"… ऐमी बड़ी अदा से कहने लगी।
"आज मज़ा तो मुझे भी आ रहा है, और एक अंदर से उमंग तो है, लेकिन कार में"… अपस्यु बोलते बोलते रुका…
"बेबी जल्दी से मेरी ओर देखो ना।" … जैसे ही अपस्यु मुड़ा, ऐमी उसके होठों को चूमती…. "जल्दी से कार मुक्ता अपार्टमेंट लगाओ।".. इतना कहती ऐमी नीचे झुकी और अपस्यु के पैंट के बटन को खोलती उसके जीप को नीचे की। अपस्यु अपने कमर को हल्का ऊपर किया और ऐमी पैंट को सरकाती हुई उसके पाऊं में ले आयी।
जल्द ही उसके पूरे बाल अपस्यु के जांघ पर फैले हुए थे और अपस्यु का चेहरा ऊपर अजीब ही मादक एहसाह में डूबा हुआ था। थोड़े ही देर में वो मुक्ता अपार्टमेंट में थे। दोनो एक दूसरे को देखकर हंसते हुए, तेजी से कदम बढ़ाते फ्लैट के ओर चल रहे थे।
जैसे ही दोनो फ्लैट के अंदर हुए, अपस्यु ने दरवाजा बंद किया और ऐमी उसे खींचकर अपने ऊपर लेती, होंठ से होंठ लगाकर चूसने लगी। अपस्यु भी होंठ को चूमते हुए उसके जीन्स के बटन खोलने लगा। ऐमी, अपस्यु को चूमती हुई अपने हाथ नीचे ले गई और जीन्स खोलने में अपस्यु की मदद करती, तुरंत जीन्स को पैंटी सहित निकलकर बाहर फेंक दी।
अपस्यु भी ऐमी के जीभ को अपने जीभ से लगाए उसे लगातार चूमते हुए अपने हाथ को नीचे ले जाकर फोरप्ले करने लगा। चुम्बन के बीच में ही ऐमी ठंडी आहें लेती, अपने पंजे को अपस्यु के पीठ से जकड़कर, किस्स को तोड़ती हुई बदहवासी में कहने लगाई…. "बेबी ये दीवाल मज़ा नहीं से रहा, बिस्तर पर चलो।"..
अपस्यु अपने होंठ ऐमी के गले से लगाकर उसके चूमते हुए हटा और अपने बदन से कपड़े निकालते बिस्तर तक पहुंचा, ऐमी भी पीछे-पीछे वैसे ही पहुंचीं। जैसे ही बिस्तर के पास दोनो पहुंचे, ऐमी ने धक्का देकर अपस्यु को बिस्तर पर लिटाया और उछलकर उसके कमर पर बैठती, पूर्ण मज़ा के ओर बढ़ने लगी।
ऐमी लिंग को योनि में डालकर, धीरे-धीरे अपने कमर हिलती, अपस्यु का हांथ पकड़ कर अपने स्तन पर डाली और धीरे-धीरे मज़े लेने लगी। अपस्यु भी कुछ देर स्लो मोशन धक्के का मज़ा लेते हुए बैठ गया और ऐमी के होंठ को अपने होठ से लगाते हुए, पूर्ण जोश की रफ्तार शुरू कर चुका था। जोश ऐसा की दीवाना बना दे।
ऐमी का नरम और गोरा बदन, हर धक्के की थाप पर बड़ी ही मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रहा था। उत्साह से ऐमी, अपस्यु के पूरे होंठ को चूस रही थी और अपने दोनो पंजे अपस्यु के पीठ में पूरे घुसे हुए थे। एक कामुक पल पुरा मस्ती में बिताने के बाद, दोनो निढाल बिस्तर पर गिर गए और ऐमी अपस्यु के सीने में घुसकर खामोशी से बस उसकी धड़कने सुनने लगी…
"बेबी, बहुत लंबा साल इंतजार किया है। अब बस इसे अंजाम तक पहुंचाओ।"… ऐमी, अपस्यु में कुछ और सिमटती हुई कहने लगी।
"तुम जैसा चाहोगी वहीं होगा ऐमी। हम एक साथ बिजली गिराने वाले हैं पहले इन्हे झटकों का मज़ा तो लेने दो।"…
"हम्मम ! उस सार्जेंट जेम्स हॉप्स का क्या करोगे।"…
"जेके और पल्लवी से थोड़े देर बाद मुलाकात होने वाली है, वहीं देखते है इनका बारे में क्या निष्कर्ष निकला है।"…
"अपस्यु, बेईमान तुम्हे पता चल गया ना श्रेया के पीछे कौन है।"…
"ज्यादा बोझ क्यों लेती हो, श्रेया और उसकी टीम तो बेचारे बेकार में पीस गए हमारे बीच। टीम तो उनकी अच्छी है, लेकिन नवसिखियों की टीम है, जो ट्रेनिंग के बाद सीधा हमारे पीछे आ गए। लेकिन तुम सही कही थी, उसके साथ रहा तो हमारा भविष्य योजना काफी मजबूत होगा। जिस हिसाब से उसकी बेचैनी मै आजकल देख रहा हूं, उस हिसाब से तो लगता है कि आज से कल तक में वो अपने दूसरे टारगेट से भी भिड़ा देगी।"…
"हम्मम ! यहां हर किसी की प्लैनिंग चल रही है, और मै बेकार में आज एक्साइटेड हो गई। ये वक़्त फोकस बनाए रहने का था। बेबी, इतने दिन से रोमांस कर रहे है फिर भी आज मैंने तुम्हे फसा दिया। मुझे ये स्टेप नहीं लेना चाहिए था।"…
"पागल कहीं की। लगता है तुम्हे मज़ा नहीं आया क्या, यदि ना है तो बोल दो, मैं दूसरे राउंड के लिए तैयार हूं।"
"मुझे ना लगता है सुबह सुबह तुम्हारी वाली बेशर्मी ही घुस गई थी जो मै इतनी हॉर्नी हो गई। चलिए उठिए सर, चलकर जरा माहौल का जायजा लिया जाए।"..
इधर राठौड़ मेंशन में नंदनी की तस्वीर देखने के बाद तो जैसे लोकेश खुद में अब जीता हुआ महसूस कर रहा था। हर खींचती श्वांस में वो अपने अंदर आने वाले ताकत को महसूस करने लगा था। उसके कई सालों की योजना अब सफल होने वाली थी। लोकेश तुरंत ही अपने पिता विक्रम और मेघा के साथ प्राइवेट प्लेन में उदयपुर स्थित अपने छोटे से लंका में पहुंचा।
एक पुरा इलाका जो लोकेश के नियंत्रण में था। जहां हर तरह के अंतरराष्ट्रीय हथियार से लेकर, दुनियाभर कि नई तकनीक दिन रात लोकेश के इशारे पर काम कर रही थीं। अपनी जगह पर खड़ा होकर लोकेश अट्टहास भरी हंसते हुए विक्रम से कहने लगा….
"पापा इतने दिनों से आपको इसी दिन के लिए रोक रखा था। यें पूरी तैयारी बस जैसे आज का ही इंतजार कर रही थी। बस 2 दिन और दे दो, और मुझे जारा अपनी बुआ के बारे में छानबीन करने दो। जैसे ही यह सुनिश्चित हुआ की वही नंदनी रघुवंशी है, सबसे पहले बिजली उस राजीव मिश्रा और उसके समस्त परिवार पर गिरेगी, जो हमसे मिलकर काम करने की बजाय हमारे पार्टनर के झांसे में आकर, मेरे ही खिलाफ कार्यवाही कर रहा था। राजीव मिश्रा के साथ ही जाने वाले की लिस्ट में है होम मिनिस्टर जिसने बहुत दर्द दिए है और फिर एक बार खत्म हो जाएगा नंदनी के पुरा वंश और इस बार भी वो केवल अकेली जिंदा बचेगी।"