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"ठीक है बाबा समझ गई.. बस अपनी नीड को जरा संभालो, मै 10 मिनट में पहुंच रही हूं… लव यू स्वीटी।"…
कृपाल सिंह, उन हत्यारों में से एक, जिसने जून 2007 की उस रात कई मासूमों को जिंदा आग में झोंक दिया था, उसी का बेटा था यह नील, जो दिल्ली में रहकर पढ़ाई करता था। नील वहीं लड़का था जो होटल रेडिएशन के डस्को में अपस्यु के हाथों मार खाया था।
कुछ हद तक तो उसका ऐमी को हाथ लगाना अपस्यु को खल गया, लेकिन उससे भी बड़ी वजह यह थी कि अपस्यु….. भूषण और जमील के कत्ल के बाद हर किसी को अपने शिकार पर से ध्यान हटाने और पीछे हटने का संदेश दे चुका था लेकिन ऐमी उसके बावजूद अपने कामों में लगी हुई थी।
उन चार तुचों के कत्ल से उनके सरगना को कोई फर्क तो पड़ना नहीं था, लेकिन उन तूचों के वारिशों के दिल में क्या आग लगी है बस ये जानने के इरादे से ऐमी, नील से मिलने निकल गई।
जैसे ही वो उसके घर के अंदर पहुंची अंदर पूरा अंधेरा था… "नील, नील"..
नील:- यहीं बैठा हूं आ जाओ।
ऐमी:- कुछ रौशनी तो करो, यहां तो पूरा अंधेरा है।
नील:- अब तो ये ज़िन्दगी का हिस्सा बन गया है ऐमी, लेकिन तुम कहती हो तो रौशनी कर देता हूं।
"क्या हुआ ? तुम ऐसी हालत में?"… ऐमी, नील के पास पहुंचती हुई कहने लगी।
नील, रोते हुए कहने लगा… "कितना अभागा हूं मै ऐमी, मेरे पापा एक हादसे में मर गए और लाश तक नहीं मिली उनकी क्रियाक्रम के लिए। उनकी आत्मा को तृप्ति कैसे मिलेगी?"
नील, ऐमी के गोद में सर रखकर रोने लगा और ऐमी उसे सांत्वना देती हुई पूछने लगी…. "लेकिन ये हादसा हुआ कैसे?"
नील:- पापा अपने दोस्तों के साथ किसी कि एंगेजमेंट में यूएसए गए हुए थे। उसी होटल के बाहर 30 माले की बिल्डिंग से जेनरेटर उनकी कार पर गिरा और उनके साथ 3 और लोग मारे गए।
नील:- कितना अजीब है ना नील 30 माले की बिल्डिंग के ऊपर रखा जेनरेटर होटल से नीचे गिर जाता है, जो कि यूएसए जैसी जगह का होटल है, जहां सुरक्षा के सारे पैमाने सही-सही आंकते है। अपने यहां जो सेफ्टी मजर्स पर कोई ध्यान नहीं देते, उनके होटल कि छत से गमला तक नहीं गिरता और वहां पूरा जेनरेटर गिर गया। स्ट्रेंज नहीं…
ऐमी की बात सुनने के बाद नील चौंककर बैठ गया। अपने आखों से आंसू पोंछते हुए ऐमी से कहने लगा… "ठीक है तुम जाओ, मै बाद में मिलता हूं, अभी मुझे कुछ जरूरी काम निपटाने हैं।
ऐमी:- लेकिन बेबी तुम्ही ने यहां पर बुलाया था ना, अचानक से क्या हुआ तुम्हे…
नील:- कहा ना जाओ अभी.. मेरा बाप मरा नहीं मारा गया है। इसका बदला तो मै लेकर रहूंगा।
ऐमी:- नील मैं एक मशहूर वकील की बेटी हूं। एक बात अच्छे से कह सकती हूं, जिसने भी यह किया है वो कोई आम कातिल नहीं, बल्कि बहुत पहुंच वाला होगा। क्योंकि यूएसए में उसने इंडियन एंबेसी मैनेज कर लिया, एक पूरा मर्डर मैनेज कर लिया.. जो भी करना सोचकर करना।
नील:- थैंक्स ऐमी, मै समझ गया कि मुझे क्या करना है और कैसे करना है। बस कभी-कभी मै फसुं तो यूं ही मुझे सही रास्ता बताना। अभी तुम जाओ मुझे अब बहुत से काम करने है..
ऐमी बाहर निकलकर अपने कार में जैसे ही बैठी, जोर-जोर से हंसती हुई खुद से ही कहने लगी…. "लव यू सर, कहां रह गए जल्दी आ जाओ अब दिल नहीं लगता तुम्हारे बिना।"…
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राजस्थान.. वीरभद्र का गांव….
वीरभद्र निम्मी की हरकत पर थोड़ा चिढ़ गया। साथ में कौन आया है, उसका भाई कितने दिनों बाद आया है, ये सब जानने के बदला, अपना बचपना लेकर जिद पर अड़ी थी। खैर निम्मी के रास्ता छोड़ते ही पार्थ और वीरभद्र थोड़ा आगे बढ़े और सकुंतला दोनों की आरती उतार कर स्वागत की।
धूल मिट्टी और थकान से भड़ा सफर। पार्थ सबसे पहले नहाना ही जरूरी समझा। संकुंतला पार्थ को हुसल खाने के ओर ले जाने लगी और वीरभद्र अपनी बहन के कमरे जाते ही… "तुम्हे जरा भी तमीज नहीं है, किस वक़्त कैसे पेश आते है।"
निम्मी:- मुझे कुछ नहीं सुनना है, ये बताओ कि तुम उसका मुंह तोड़ोगे या नहीं।
वीरभद्र:- किससे झगड़ा करके आयी है?
निम्मी:- वृज किशोर और उसकी जोरू से। वृज किशोर की जोरू कमला मुझसे कहती है वो मेरी शादी अपने भाई से करवाएगी। इसपर मैंने भी दोनों को सुना दिया। अब तुम आ गए हो तो मेरा बदला लो।
वीरभद्र खींचकर उसे एक थप्पड लगाते हुए…. "तू भैय्या और भाभी से झगड़ा कर आयी है, और मुझसे उनका मुंह तोड़ने कह रही है। देख निम्मी अपनी ये बचपना बंद कर दे। और कान खोलकर सुन ले मेरे साथ बहुत ही खास मेहमान आए है, जो तुझे अंग्रेजी भी सिखाएंगे, इसलिए उनके सामने जरा अच्छे से पेश अना।
वीरभद्र की बात पर निम्मी अपना गुस्से से भड़ा चेहरा दूसरी ओर घुमा लेती है और वीरभद्र अपनी बात कहते हुए वहां से निकल जाता हैं। दोनों ही थके थे सो वीरभद्र भी चला गया नहाने के लिए। कुछ देर बात करने के बाद वीरभद्र अपने कमरे में चला गया सोने और पार्थ जिद करके बाहर चारपाई पर ही सो गया।
अंधेरी गहरी रात और खामोश इलाका। पार्थ आखें मूंदे सोया हुआ था, तभी उसने अपने ओर बढ़ रहे चाकू वाले हाथ को पकड़ा और कलाई को मोड़कर पीछे कमर तक ले जाते, उसने हमलावर को अपने ऊपर खींच लिया। जैसे ही हमलावर पार्थ के उपर आयी उसे स्त्री के होने का आभास हुआ और वो उठकर बैठ गया।
हमलावर वीरभद्र की बहन निम्मी थी, जिसे पार्थ ने अभी-अभी छोड़ा था और वो भी तेजी के साथ उठकर खड़ी हो गई… "तुम मुझ पर हमला क्यों कर रही थी"… पार्थ निम्मी को देखते पूछने लगा।
निम्मी:- शहरी बाबू यहां कदम कदम पर खतरा है, बेहतर यह होगा कि यहां से भाग जाओ।
पार्थ:- उसके लिए तुम मुझ पर चाकू से वार करने आयी थी।
निम्मी, अपने चाकू के धार पर अपना अंगूठा फेरती हुई…. "अभी तो बस ये एहसास करवाने आयी थी कि थोड़ा सचेत होकर सोया करो, वरना गला भी कट सकता है।
पार्थ उसकी बातों पर हंसते हुए पूछने लगा… "और क्या मै जन सकता हूं कि मेरा गला काटने की तैयारी क्यों हो रही है?
निम्मी:- क्योंकि वीरे बहुत बदल गया है। उसकी भाषा बदल गई, उसकी चाल बदल गई और तो और उसकी आदत को भी बदल गई तुम्हारे यहां होने की वजह से। खून बहने वाला मेरा भाई, आज मुझ पर ही गुस्सा होकर हाथ उठा दिया।
पार्थ, निम्मी को उसके बातों से भटकाते हुए पूछने लगा…. "तुमने खाना खाया?"
निम्मी:- मजाल है जो कोई खाना खिला दे मुझे, जबतक उस वृज किशोर का मुंह ना तोड़ दूं, तबतक खाना नहीं खाने वाली।
पार्थ:- ठीक है चलो।
निम्मी:- कहां
पार्थ:- मुंह तोड़ने..
निम्मी:- रहने दो सहरि बाबू, तुमलोग कांच के बने होते हो। पकड़े गए ना तो ऐसा तोड़ेंगे की फेवीक्विक से भी ना जोड़े जाओगे।
पार्थ:- हां तो अच्छा ही है ना, तुम्हे मारने कि जरूरत नहीं होगी। लेकिन कहीं मै उसका मुंह तोड़ने में कामयाब हो गया फिर..
निम्मी:- फिर क्या आराम से वापस आकर चारपाई पर सो जाना, समझो खतरा टल गया।
पार्थ:- नाह ये प्रस्ताव मुझे पसंद नहीं आया कुछ और ऐसा बताओ जो मुझे सच में पसंद आए..
निम्मी:- मै खूब समझती हूं साहरी बाबू.. सुनो मै कोई ऐसी वैसी लड़की नहीं जो तुम्हारे बातों के जाल में फांस जाऊं। वैसे भी तुमसे मैंने मदद नहीं मांगी है लेकिन करोगे तो मना भी नहीं करूंगी। बस बात खत्म।
निम्मी की बात सुनकर पार्थ की हंसी बंद नहीं हो रही थी। पार्थ ने निम्मी को आगे का रास्ता दिखाने कहा, और निम्मी उसे लेकर अपने चचरे भाई के दरवाजे पर पहुंच गई। वृज बाहर ही चारपाई पर सो रहा था, निम्मी इशारों में पार्थ को बता दी और पीछे अपने घर के रास्ते पर खड़ी होकर पार्थ के एक्शन का इंतजार करने लगी।
पार्थ ने भी बिना आगे की सोचो वृज के मुंह पर एक घुसा जड़ते हुए उसका मुंह तोड़ दिया। इधर जैसे ही उसका मुंह टूटा निम्मी कल्टि होकर सीधा गई और खाने पर टूट गई। इधर वृज दर्द से छटपटाते हुए उठा और अपना मुंह पकड़ कर बैठ गया। उसकी पत्नी जो अंदर सो रही थी बड़े ही अचेत अवस्था में कमरे से भागकर बाहर आयी और सामने किसी मर्द को देखकर वापस अपने कमरे में भागकर खुद के कपड़े ठीक करने लगी।
वृज काफी गुस्से में पार्थ को घूरते हुए उसे मारने के लिए बढ़ने लगा तभी पार्थ अपने दूसरे हाथ में रखे सांप को दिखाते हुए कहने लगा… "जान बच गई तुम्हारी वरना आज तो गए थे काम से।"..
जहरीली नस्ल के सांप को देखकर उसकी पत्नी और वृज दोनों चौंक गए… "तुम कौन हो परदेशी और यहां क्या कर रहे हो।"
पार्थ:- मै वीरभद्र के साथ आया हूं, शायद उस सभा में देखा हो तुमने मुझे, जहां वीरभद्र पंचायत के लिए पैसे दे रहा था।
कमला:- बाबूजी उस घर में एक एक पागल लड़की है आप जरा बचकर रहिएगा, पूरा गांव को सर पर उठाए रहती है पागल।
वृज:- कमला तू पागल हो गई क्या? नहीं बाबूजी ऐसी कोई बात नहीं है, वो तो हम सबकी लाडली है इसलिए थोड़ा बचपना है अभी। उसी से तो इस जगह की रौनक है।
राधिका:- हां दूध ही पीती बच्ची है अबतक। जब वीरे आएगा मुंह तोड़ने तब पता चलेगा। जैसी बहन वैसा भाई।
वृज:- तू लगाई बुझाई में मत रह। जाकर बाबूजी के लिए कुछ लेकर आ।
पार्थ उन दोनों को माना करके वहां से निकल तो आया लेकिन रात के अंधेरे में वो रास्ता भटक गया। बहुत ढूंढ़ने के बाद भी उसे घर की गली नहीं मिली, अतः मजबूरन उसे वापस फिर वृज के पास आना परा। जब वो वापस आया तब वृज घोड़े बेचकर सो रहा था और कमला अपने दरवाजे के बाहर बैठी हुई थी… "क्या हुआ बाबूजी"…
पार्थ:- कुछ नहीं बस वो रास्ता भूल गया था इसलिए इन्हे साथ चलने कहने आया था।
कमला:- आइए बाबूजी मेरे पीछे।
कमला आगे-आगे चल रही थी और छोटे-छोटे सवाल पार्थ से पूछ रही थी, जिसका जवाब वो भी देते चल रहा था। जैसे ही पतली गाली आयी, कमला ने पार्थ को दीवार से सटा दिया और उसके ऊपर लदती हुई अपने छाती को पूरा पार्थ के सीने से चिपकते कहने लगी… "मुझे पता है बाबूजी की वहां कोई सांप नहीं था, आप वो कुतिया निम्मी के कहने पर मेरे मरद का मुंह तोड़े हो।"
पार्थ, उसे अपने ऊपर से हटाते हुए कहने लगा…. "ये तुम क्या कर रही हो, तुम जाओ यहां से मै चला जाऊंगा।"
कमला:- अभी तो जा रही हूं लेकिन कल रात 12 बजे के बाद मुझे यहीं मिलना, एक काम तुमने निम्मी के लिए किया, अब एक काम कल मेरे लिए करना होगा?
पार्थ बड़े ही आश्चर्य से पूछने लगा… "कैसा काम"..
कमला हंसती हुई कहने लगी.. "वही मर्दों वाला काम".. और हंसती हुई वहां से वापस लौट गई। पार्थ थोड़ी देर तक वहीं घोर आश्चर्य में खड़े रहने के बाद खुद से ही कहने लगा… "इतनी शॉर्ट मुलाकात में अमेरिकन ना पटे, कमाल है… यहां का गांव तो काफी तरक्की में है। मुझे क्या, ख्वाहिश है, पूरी कर देंगे।"…
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रात के तकरीबन 1.30 बज रहे थे, आरव लावणी के कॉल पर बस सबके सोने का इंतजार कर रहा था। कुंजल और स्वस्तिका के बीच का नोक झोंक कुछ लंबा ही खींच गया, और देर हो गई। तकरीबन 1.30 बजें लावणी से मिलने आरव चोरी से निकला।
छिपते-छिपाते लावणी के कमरे में पहुंचा। अंदर का माहौल काफी डरावना था। अंधेरा कमरा और कम्बल को सर पर ओढ़े लावणी, बैठकर टीवी पर हॉरर फिल्म देख रही थी। वो इतना मगन थी कि कब दरवाजा खुला और कब आरव अंदर पहुंचा पता भी नहीं चला। आरव उसके करीब बैठते कम्बल समेत अपने बाहों में जैसे ही समेटा, सामने हॉरर पिक्चर ऊपर से स्क्रीन पर पूरा थ्रिलिंग माहौल, बाहों में लेने के साथ ही जोर कि चींख निकल गई। चींख सुनते ही बाथरूम का दरवाजा खुला और अंदर की रौशनी में पता चला लावणी तो उधर है।
आरव झटके से बिस्तर से खड़ा होकर नजर उस ओर दिया जहां अबतक वो कम्बल में लावणी को बैठे समझ रहा था, कम्बल हटा तो पता चला साची बैठी हुई है, और साची के तेज चींख के साथ ही बाहर के हॉल में भी लोगों कि चहल कदमी शुरू हो चुकी थी….