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तीनों एक साथ सुलेखा के कमरे से बाहर निकले, अपस्यु और ऐमी वापस से अपने ऊपर चस्मा डालते, पहले के अंदाज में ही अपने कदम बढ़ाते, चल परे। तीनों ही बेहद खुश नजर आ रहे थे। नंदनी अपनी पूरी सभा आरव के कमरे में ही लगाई हुई थी।
दरवाजे पर दस्तक, वीरभद्र ने जब दरवाजा खोला और सामने अपस्यु और ऐमी को खड़ा देखा तो कुछ पल के लिए बस दोनों को देखते रह गया… "क्या वीरे, हमे अंदर नहीं आने दोगे क्या?.. पीछे से स्वस्तिका उससे पूछने लगी।"
वीरभद्र दरवाजे से हटा और तीनों अंदर। तीनों पर पहली नजर कुंजल की पड़ी और वो सिटी बजती हुई अपस्यु के ओर भागी… "क्या भाई, बिल्कुल हीरो बनकर आए हो, बात क्या है।".... "अरे ऐसा कुछ ना है, बस मां ने डरा दिया, ना कोई खबर, ना कोई फोन और सीधा यहां आ गई। ऐसा कौन करता है।"…
कुंजल:- आप को पता भी है कि नहीं कुछ?
अपस्यु, अपना चस्मा वापस सीने पर लगाते… "क्या?"
पीछे से नंदनी बोल उठी…. "नाटक तो देखो इसकी, अपने दोस्तों के साथ आया है और इसे कुछ पता भी नहीं। सब के सब एक से बढ़कर एक नौटंकी है। सबके चेहरे की खुशी से तुम्हे पता नहीं चल रहा की इन्हे उड़ान भरने से पहले सब पता था।
कुंजल:- "कमाल है, इनको किसने बताया, यहां कौन है घर का भेदी"….. कुंजल अपनी बात कहती हुई आरव के ओर देखने लगी..
आरव:- मां देखो ना कैसे शक्की नजर से देख रही कुंजल…
नंदनी उसके बाल पकड़कर सर को गोल-गोल घुमाती कहने लगी…. "कोई बड़ी बात नहीं है कि तुमने ही सोनू (अपस्यु) को बताया होगा, तभी तो सबके साथ पहुंचा है। मै तो चाहती हूं ये दोनों (ऐमी और स्वस्तिका) जाकर लावणी को भी बेलन और झाड़ू का पूरा उपयोग सीखा दे, फिर अच्छा होगा। सुबह शाम जब इसे पड़ेंगी ना तब पता चलेगा…
ऐमी, हंसते हुए… "बिल्कुल आंटी, इस छछूंदर के लिए इतना तो कर ही सकती हूं।"
कुंजल:- अब छोड़ो भी ना मां क्या आप फिर से वही राग आलाप रही। भाई आ गया ना, अब तो बस पार्टी ही पार्टी चलेगी इधर।
अपस्यु:- अरे बिल्कुल… आज से पूरा पार्टी होगा.. और माते श्री को भी डांस सिखाया जाए.. मां का एक सोलों परफॉर्मेंस होगा..
ऐमी:- वो तो मुझ पर छोड़ दो, आंटी के साथ कुंजल को भी डांस सिखाना है।
कुंजल:- वाउ, सच में.. थैंक्स ऐमी। मुझे ना वो "दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड" पर सीखा देना। मस्त डांस की है उसपर दीपिका ने..
ऐमी, उसे आंख मारती… "सीखा तो दूंगी लेकिन तुम्हारा रणवीर कहां है"..…
अपस्यु, आरव को देखते हुए… "एक बात बता उस खड़ूस राजीव मिश्रा को तूने पटाया कैसे, उससे तो तू झगड़ा भी कर चुका है ना"…
आरव, थोड़ा शर्माते हुए… "अब छोड़ ना, कहां गाड़े मुर्दे उखाड़ रहा।"
आरव, उसके चेहरे के हाव भाव देखते हुए…… "ओय होए लड़के के चेहरे की रंगत तो देखो… आय हाय शर्मा भी रहा है ये तो। अब इधर भी आएगा या वहीं बैठा रहेगा।"…. आरव थोड़ा शर्माए, थोड़ा मुस्कुराए अपस्यु के पास पहुंचा.. अपस्यु उसे गले लगाते, चूमते हुए बोला.. "थैंक्स यार ! बहुत दिनों से हमने कोई खुशी नहीं देखी। इसी बहाने हम भी थोड़ा नाच गा लेंगे।"…
पीछे से ऐमी पहुंची, अपस्यु को हटाकर वो भी गले लगी और उसके कानों में कहने लगी…. "छछूंदर, कंग्रॅजुलेशन… तेरे लिए बहुत खुश हूं।"… ऐमी को हटाते स्वस्तिका भी आरव के गले लगी… उसने भी आरव के गाल को चूमा और प्यार से उसे बधाई देने लगी।
नंदनी पहली बार कुछ लोगों के रिश्ते और प्यार को समझ रही थी। वो ना तो ऐमी को अच्छे से जानती थी और स्वस्तिका को तो पहली बार देख रही थी। नंदनी अंदर से खुश थी… "क्यों सोनू (अपस्यु) तुम्हे मां कि चिंता थी और तुम अपने दोस्तों के साथ हीरो की तरह एंट्री मार रहे, ये कैसी चिंता थी जरा मुझे समझाओगे।"..
अपस्यु भागकर अपने मां के पास पहुंचा और पाऊं छूते हुए कहने लगा…. "चिंता दिखाऊं या खुशी मुझे समझ में नहीं आया। अब चुकी मै कन्फ्यूज था इसलिए आप सबको कंफ्यूज करने ऐसे आया।"…
नदनी:- एक बात बता.. साची, ऐमी, अभी ये लड़की और वहां अपने पड़ोस वाली श्रेया.. तुम्हे केवल लड़कियों से ही दोस्ती होती है क्या? कभी किसी लड़के को नहीं देखी तेरे साथ। ये अपने आप में आश्चर्य है।
अपस्यु:- क्या मां आप भी… वैसे आप को तो मिलवाना ही भूल गया… ये है स्वस्तिका, आपकी दूसरी बेटी।
स्वस्तिका:- मै कुंजल से बड़ी हु, तो पहली बेटी हुई ना।
नंदनी:- एक बात बता जब ऐसा था तब तुमने पहले क्यों ना मिलवाया और ये हमारे साथ क्यों नहीं रहती।
स्वस्तिका, नंदनी के पास जाती हुई कहने लगी… "मां मैंने ही माना किया था अपस्यु को, कुछ नहीं बताने। मै खुद मिलकर बताना चाहती थी। और मै मुंबई मेडिकल कॉलेज में हूं, इसलिए साथ नहीं।"
नंदनी:- ठीक है तुम्हारा समझ में आ गया। अब सिन्हा जी तो कहते है कि आरव उनका बेटा है, इस हिसाब से ऐमी भी…
नंदनी ऐमी पर थी कि अपस्यु बोलने लगा… "मां इंगेजमेंट कब की है।".... इधर स्वस्तिका और आरव दोनों कोना पकड़ लिए, ऐमी, वैभव के पास चली गई और उस जगह पर बस कुंजल और नंदनी ही रह गए थे।
नंदनी:- 30 जून की एंगेजमेंट है। और सुन, ये लड़की वाले ना बहुत ही बेकार लोग है, इसलिए लावणी को छोड़ कर किसी से बहुत ज्यादा मतलब नहीं रखना, समझे…
अपस्यु:- क्या मां आप भी पुराने हिंदी फिल्मों वाले लड़के वाले बन रही हो। अरे आप को किसने परेशान किया है वो बताओ, हम नए युग के लड़के वाले बनेंगे। तरह-तरह के प्रोग्राम रखेंगे और उनमें उनको नीचा दिखाएंगे…
कुंजल:- भाई एक बात बताओ, मां जब ऐमी की बात कर रही थी तब सब भाग क्यों गए और आपने मां को बोलने से बीच में रोक क्यों दिया?
अपस्यु:- कुंजल तुमने अपने भाभी के लिए शॉपिंग कि, और तुमने अपने लिए क्या लिया है वो ना दिखाई.. वैसे मां, मै अभी-अभी पहुंचा हूं, तो थोड़ा फ्रेश होकर आ जाऊं, भूख भी काफी लगी है, जबतक आप कुछ खाने के लिए मंगवा लो ना।
इतना कहकर अपस्यु भी निकला वहां से। नंदनी सिन्हा जी को देखती हुई पूछने लगी…. "क्यों अनिरुद्ध जी, आप ही कुछ इन दोनों के बारे में बता दीजिए।"
सिन्हा जी भी वहां से निकलने में ही अपनी भलाई समझे। वो बहना बनाते हुए कहने लगे… "आरव मेरा पहला इकलौता बच्चा है, उसके बाद जबसे वो मुझे छोड़ कर गया, उसका गम को कम करने के लिए, वैभव को ले आया। वैभव अब मेरा दूसरा बच्चा है। बाकी मुझे ना तो कभी उतना ज्यादा ऐमी से लगाव रहा और ना ही अपस्यु से। मै आता हूं थोड़ा अपने काम निपटाकर।
कुंजल पीछे से नंदनी के कंधे पर अपना चेहरा टीका कर कहने लगी…. "मां मुझे ना इन दोनों पर कुछ-कुछ शक हो रहा है।"
नंदनी:- शक तो मुझे भी है बेटा, लगता है दोनों के बीच कुछ चल रहा है। वैसे ऐमी को देखी, कितनी खूबसूरत लग रही थी और जब दोनों साथ थे तब ऐसा लग रहा था यहां बस वही दोनों है।
कुंजल:- सो तो मैंने भी देखा मां। लेकिन आप जैसा सोच रही है वैसा नहीं है दोनों के बीच।
नंदनी:- तुम कहना क्या चाहती हो कुंजल, साफ-साफ बोल ना बेटा।
कुंजल:- मां लगता है दोनों बहुत करीबी है, पर एक दूसरे से प्यार नहीं करते। शायद भाई और ऐमी को देखकर, इन सबने पहले गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड ही समझा हो, आपकी तरह। लेकिन उन्होंने आपस में कभी ऐसा रिश्ता रखा ही ना हो, और बार-बार इनके टोकने पर, दोनों ने उन सब को ऐसा सुनाया की कोई भी अपना मुंह नहीं खोल रहा। इसलिए तो भाई और ऐमी के मैटर में सबने कन्नी काट लिया।
नंदनी:- पता ना तुम क्या कहना चाह रही हो। मुझे कुछ समझ में नहीं आया। अब बात जो भी हो, मेरा बेटा खुद किसी दिन बता देगा, उसके लिए मुझे कुछ नहीं सोचना। हां बस दोनों साथ में कमाल के लगते है, किसी की नजर ना लगे।
रात के तकरीबन 1 बजे, अपस्यु बार में अकेले बैठकर अपनी फेवरेट कॉकटेल की चुस्कियां ले रहा था। आरव भी अाकर अपस्यु के पास बैठ गया।…. "कैसा है अभी।"
अपस्यु:- बिल्कुल पहले जैसा हूं, पूरा रिकवर।
आरव:- तू बहुत परेशान है ना मेरे कारण। मुझे शायद ये फैसला सबसे पूछकर लेना चाहिए था। लेकिन मै भी क्या करता, अचानक ही माहौल ऐसा बना कि मै कुछ कर नहीं पाया।
अपस्यु:- आए पागल, तुझे मै परेशान दिख रहा हूं। गधा है तू, मैं बेहद खुश हूं। तू देखेगा, देखेगा तू मै कितना खुश हू…… रुक अभी..
अपस्यु ने वहीं एक टोस्ट करते हुए, वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। सबके लिए बार से 4 पेग फ्री करवाते हुए जाम के ग्लास को अपने सर पर डाल कर नाचने लगा… बिल्कुल सुद्घ देसी स्टाइल में, जैसे कोई बड़ा भाई खुश होकर अपने भाई के शादी में डीजे पर झूमता है।
आरव, अपस्यु की खुशी को देखकर हंस भी रहा था और उसके आशु भी निकल आए… आरव अपने भाई को खुशी से झूमते देखकर, वह भी अाकर ठुमके लगाने लगा.. दोनों भाई ने एक दूसरे को देखा और दोनों गले लगकर, अपनी खुशी का इजहार करते हुए फिर नाचने लगे… आरव जोड़ से चिल्लाते हुए कहने लगा… "द डेविल ब्रदर्स इज़ हेयर।"..…
सुबह के 4 बज रहे थे। दोनों की एनर्जी देखकर तो वो बार वाले भी हैरान थे। लगभग 3 घंटे से दोनों भाई पी रहे थे और नाच रहे थे। उनका नाचना देखकर वहां मौजूद कर्मचारियों के आखें थक गई लेकिन इन दोनों के पाऊं नहीं थके। .. दोनों झूमते हुए बाहर निकले। बार से निकलकर, होटल की लॉबी से लेकर कमरे में जाने तक दोनों भाई नाचते ही गए।
दिन के 2 बज रहे होंगे, ऐमी, अपस्यु को जगाकर उसे जल्दी से तैयार होने कहीं। अपस्यु के तैयार होकर आते ही, दोनों आरव के कमरे में पहुंचे। इससे पहले की कोई कुछ बोलता, अपस्यु कहने लगा… "मां चलो, तू भी चल कुंजल।"
नंदनी:- मै तुम लोगों के साथ कहां जाऊंगी, तुम लोग को जहां जाना है वहां जाओ।
ऐमी नंदनी का हाथ थामती हुई कहने लगी…. "आप आएं हमारे साथ, कुछ ऐसा जो कल आप हम दोनों से पूछ रही थी और उसका जवाब आप को नहीं मिला, उसपर ही कुछ बातें करनी है।
नंदनी:- हां तो यहीं बता दो ना।
ऐमी:- छोटी सी गुजारिश है बस मान लीजिए और हमारे साथ आएये…
नंदनी फिर मना नहीं कर पाई। चारों समुद्र किनारे पहुंचे, वहां छोटे से प्राइवेट शिप में चारों समुद्र कि कुछ दूरियों को तय किया… अपस्यु शिप को रोककर पहुंचा तीनों के पास। अपस्यु नीचे बैठकर नंदनी के हाथ को अपने हाथ में लिया और उसे देखते हुए कहने लगा….. "कुंजल को पिछले कुछ दिनों से मैंने खुद उसे तैयार किया है, हो सकता है वो आने वाले चीजों को जल्दी काबू कर सके, क्या आप अपनी पूरी परिपक्वता (maturity) से चीजों को आकलन करने की कोशिश करेंगी।"
नंदनी, अपस्यु को हैरानी से देखते हुए पूछने लगी….. "बात क्या है बेटा, क्या तुम पिछली कोई बात बताने वाले हो।"
अपस्यु:- हां आप ने सही सोचा।
नंदनी:- बेटा खुशियां घर में आयी है, छोड़ दे उन बातों को। हम सब खुश हैं और तू भी खुश रह।
कुंजल:- भईया मां सही कह रही हैं। जाने दो ..
अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है, पर क्या मेरे लिए कुछ कर सकती हैं?
नंदनी अपस्यु के सर पर हाथ फेरती… "तू बेटा है या कोई अनजान जो ऐसे पूछ रहा।
अपस्यु:- मां अपने परिवार के कुछ कातिल वहां उस माहौल में है, मै चाहता हूं आप अपने मायके से लेकर सरुराल पक्ष की पूरी पहचान गुप्त रखे…
नंदनी और कुंजल को जैसे झटका लगा हो। कुंजल को तो ऐमी ने संभाल लिया और कुछ भी बोलने से रोक ली, लेकिन नंदनी, उसके आखों में गुस्सा साफ झलक रहा था।….
अपस्यु:- मां कुछ तो कहिए…
नंदनी:- मै कौन होती हूं कहने वाली। आखिर तुम शुरू से ही बदले कि राह पर थे, और मुझसे झूठ कहा।
अपस्यु:- आप का गुस्सा मै समझ सकता हूं। लेकिन मैं अब भी कहूंगा की मै बदले कि राह पर नहीं हूं, मै न्याय के मार्ग पर हूं।
नंदनी:- मुझे इतनी सफाई देने की जरूरत नहीं है, यहां से लौटकर हम तुम्हारे साथ नहीं रहेंगे।
कुंजल:- मां ये क्या कह रही हो… भाई को बोलने तो दो।
नंदनी चिल्लाई…. "मै ही क्यों सुनूं, ये क्यों नहीं समझता मेरी बात को। क्या गलती थी भूषण की जो लोगों ने उन्हें मार दिया। क्या तुझे तेरे पापा के जाने का दर्द नहीं मेहसूस होता? क्या गलती थी एक छोटे से मासूम लड़के कि, जरा भी दया नहीं आयी जब उसका गला घोंटा रहे थे? किस दिल के बने थे लोग, जो उसकी मासूमियत नहीं दिखी? जब उनके चेहरे सामने आते है एक पल काटना मुश्किल होता है। अब और क्या चाहते हो, अपने बचे परिवार का भी मरा हुआ मुंह देखूं? क्या तू अपने दोनो भाई का मारा हुआ मुंह देखना चाहती है?"
नंदनी तेज तेज चिल्लाती अपनी बात कहते गई। गुस्से के साथ दर्द भी निकलता जा रहा था, जो समुद्र का सिना चिर रही थी। नंदनी चुप होकर अब भी हांफ रही थी, और कुंजल अपनी मां की बात को सुनकर बस आखों में आशु लिए अपने भाई को ही देख रही थी।
अपस्यु अब भी मुस्कुरा रहा था। वो अपने एक हाथ से कुंजल के आशु पोछने लगा तो दूसरे हाथ से नंदनी का चेहरा ऊपर करके उससे कहने लगा…
"आप दोनों का दर्द मै अच्छे से समझ सकता हूं। मै एक छोटी सी कहानी बताता हूं, आप दोनों ध्यान से सुनना और फिर मेरे कुछ सवाल होंगे, उन सवालों का जवाब देना।"