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Romance भंवर (पूर्ण)

nain11ster

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Update:-45



"कोई एक तो खुश रहे मेरे भाई… मेरा क्या है, बिना अाशरा तब भी थे आगे भी जीते रहेंगे। एक ही दर्द से 2 लोग क्यों पिस्ते रहे।"…

संडे की सुबह.. दिन भी आज तो जैसे पूरा फुर्सत में था। देर से सो कर उठने के बाद लावणी अंगड़ाई लेती रात कि बात पर सोचने लगी। कुछ ही देर में वो साची के पास जाकर बैठ गई। साची अपने स्टडी चेयर पर बैठी किसी ख्यालों में गुम थी। लावणी उसके कानों में तेज चिल्लाई और साची चौंक कर उसके ओर देखने लगी…. "कब आयी"

लावणी:- कोई फर्क पड़ता है क्या इस बात से।

साची:- तू भी ताने मार रही है।

लावणी:- इसे ताने मारना नहीं कहते है अपना हाल-ए-दिल बताना बोलते है।

"किस से हाल-ए-दिल बताने कि बात कर रही हो। अभी उसके पागलपन का तीसरा फेस चल रहा है। अभी वो हर बात का रिएक्शन बस लटके मुंह से देगी।".. कुंजल कमरे में आती हुई बोलने लगी…

साची:- तुम दोनों प्लीज मुझे अकेला छोड़ दो।

कुंजल:- देख लावणी अब ज्यादा जिद करेंगे तो चिल्लाकर कहने लगेगी मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

लावणी:- कितने दिनों से तो छोड़ा ही था इन्हे, लेकिन कोई सुधार ही नहीं है। मै क्या सोच रही हूं कि दी से आज पूरी कहानी सुन ही ले, की उस दिन आखिर हुआ क्या था?

कुंजल:- ये तो तुमने मेरे दिल की बात कह दी।

साची थोड़ा गुस्सा दिखाती हुई… जाकर अपने भाई से पूछना था ना, क्या हुआ था उस दिन।

कुंजल:- ये लो अब इनकी भी सुनो। हम दर्द बाटने आए है और ये मुझ को ही ताने दे रही है।

लावणी:- दी अभी गुस्से में है कुंजल हो सकता है ये भी कह दे की… "हो तो किसी धोखेबाज की ही बहन।"

कुंजल:- हो !!!! … क्या सच में ऐसा किया उसने … धोका दिया साची को।

साची, हार मानती हुई….. "प्लीज मत तंग करो। क्या चाहती हो मुझ से।"…

लावणी और कुंजल दोनों एक साथ….. "तुम्हारे दर्द कि वजह हम जानना चाहते हैं।"

"क्या बताऊं मै, ये बता दूं कि वो किसी के साथ पहले से रिलेशन में है और उसके बाद भी मुझसे प्यार करता है।"… साची गुस्से में अपने दिल की बात कह गई।

कुंजल:- क्या बात कर रही हो.. ये तो दोनों के साथ दगाबाजी हुई ना।

लावणी:- हां ये तो सही है। चलो उसकी खबर ली जाए।

कुंजल:- आज से वो मेरा भाई नहीं रहा… धोखेबाज कहीं का ....

साची:- ऊफ ओ !!! धोखेबाज नहीं है वो।

लावणी:- कैसा कन्फ्यूजन है ये। दूसरे के साथ रिलेशन में होकर भी वो तुम्हारे साथ प्यार करना चाह रहा था, फिर भी वो धोखेबाज नहीं। दी आप ठीक तो है ना।

कुंजल:- ऐसी बात ना है रे लावणी, ये अपस्यु को देवता समझती थी, इसलिए सदमे में कह रही है कि को धोखेबाज नहीं। इसके दिमाग ने धोखेबाज मान लिया है बस दिल नहीं मान रहा।

साची:- चुप हो जाओ तुम दोनों। बिना पूरी बात जाने कुछ भी नहीं बोलो। वो धोखेबाज नहीं।

कुंजल और लावणी कुछ देर तक खामोश रहे और साची के बोलने का इंतजार करने लगे… कुछ समय बीतने के बाद साची खुद से कहने लगी….

"पता नहीं क्या कहूं। मैं बिल्कुल ब्लैंक हो गई हूं। किसी के पास एक्स गर्लफ्रेंड हो तो समझ में आता है वर्कआउट नहीं हुआ होगा। कोई लड़का किसी लड़की को घुरे तो समझ में आता है नजर फिसल गई, रहेगा मेरा ही। किसी से दोस्ती है तो भी फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इनकी ये कैजुअल रिलेशन, मेरे ही सामने एक दूसरे को मुंह से मुंह लगा कर किस्स करते है, एक दूसरे को छोड़ भी नहीं सकते और चाहते है कि, मै उनके इस बेहूदे से मज़ाक के साथ उससे प्यार करूं।

साची की बात सुनकर लावणी का मुंह खुला का खुला रह गया। लावणी आश्चर्य से पूछने लगी…. "ऐसा भी होता है क्या? ये कैसा रिलेशन हुआ। इसे तो पागलपन कहते है। हां तो ठीक ही तो की, जो उसके साथ रिलेशन खत्म कर दी।

कुंजल:- एक मिनट रुको, क्या अपस्यु ने कहा था कि तुम उन दोनों का रिश्ता एक्सेप्ट करो।

साची:- कुंजल तुम्हे क्या लगता है तुम्हारा भाई मेरी तरह बेवकूफ है। उसने बिना किसी प्रस्ताव के ही, मुझे ऐसा फसाया की कुछ ना बोलते हुए भी उसने वो सब कुछ मुझ से उम्मीद की, जो वो मुझे समझना चाहता था।

कुंजल:- हां मै तुम्हारी ये बात मान सकती हूं। वो इस मामले में चतुर तो है। हां लेकिन जब उसने धोका नहीं दिया और अपनी सारी बात कहकर उसने फैसला तुम पर छोड़ दिया, तो तुमने भी तो बिल्कुल फैसला लेते उसे दरकिनार कर दिया। फिर ये उदासी और मायूसी क्यों। क्या तुम्हारी अंधी चाहत ये तो नहीं सोच रही की किसी दिन अपस्यु अाकर तुमसे ये कहे कि मैंने वो रिश्ता तोड़ दिया अब तुम मेरे प्यार को कबूल कर लो।

साची:- उसे अपना ये फालतू रिश्ता तोड़ना ही होता तो मुझे पहले ही कह चुका था हमारे बीच ये कहानी चल रही थी, जो तुम्हारे आने के बाद मैंने खत्म कर दिया। जानती हो सबसे ज्यादा क्या दुखता है, उसे भी मुझसे बेहद प्यार था। जब मैंने उसे धोका दिया था पहली ही मुलाकात मे, उसे ये बातें पहले से पता थी, तब भी उसने मेरे लिए वो किया जो मेरे पिता समान चाचा नहीं कर पाए।

"पूरा दिन बालकनी पर सिर्फ मुझे देखने के लिए खड़ा रहता था। मै ही एकतरफा सोचती रही कि, मैंने कई बार उसकी बे इज्जती मैंने की है, लेकिन इसे वो मेरी नादानियां मानता रहा.. इससे ज्यादा और क्या प्रमाण चाहिए की वो मुझे कितना चाहता था। लेकिन कोई इतना चाहने वाला क्यों.. आखिर क्यों नहीं वो उसको छोड़ पाया, जिसके साथ वो जब जी में आए मस्ती कर सके। जब मै उसका प्यार थी, तो वो लड़की अपस्यु लिए मुझ से बढ़कर कैसे हो गई? मै बर्दास्त नहीं कर पा रही हूं इस बात को।

कुंजल:- एक तुम हो की उसके लिए रोए जा रही हो और एक वो है, उसे किसी बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ा। वो तो अपनी मस्ती में है। शायद अब तो तुम्हे याद भी नहीं करता।

साची:- याद तो जरूर करता होगा वो भी। तभी तो मेरा सामना नहीं कर सके इसलिए कॉलेज नहीं आता।

कुंजल:- बावली कहीं की। वो कोई युग पुरुष नहीं बल्कि इंसान है ऊपर से एक लड़का।

साची:- मतलब…

कुंजल:- मतलब की कल रात भी मैंने उसे देखा व्हाट्स ऐप पर किसी के साथ देर रात तक लगा था। मुझे लगा कि तुम्हारे साथ पैचअप हो रहा होगा लेकिन ये तो अपने ब्रेकअप के बाद किसी और को ढूंढ़ चुका है।

साची:- तुम इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकती हो की कोई दूसरी लड़की थी, वो भी तो हो सकती है जिसके साथ उसका कैजुअल रिलेशन है।

कुंजल:- इसें कहते है जले दिल की उम्मीद… एक बात बताओ क्या कभी उसने एक बार भी इस बात को जानने की कोशिश की, की तुम किस बात पर राजी होगी। क्या एक छोटी सी पहल भी किया हो की साची मुझे माफ़ कर दो मै अब मुड़कर उसे नहीं देखूंगा। तु मेरी और मै तेरा।

साची, मायूसी से… नहीं उसने कोई कोशिश नहीं की।

कुंजल:- क्या जब तुम ऐक्सिडेंट में उससे मिलने आया करती थी तो वो व्हाट्स ऐप पर किसी के साथ लगा रहता था?

साची:- मै जबतक उसके साथ होती तो उसके फोन का मैसेज भी नहीं बजता।

कुंजल:- उसके बताने से पहले क्या तुम्हे भनक भी लगी कि इसका कोई ऐसा रिलेशन भी होगा।

साची:- कभी नहीं।

कुंजल:- तो इसे तुम्हारी जले दिल की उम्मीद ही कहूं ना। वो तो पहले दिन ही मान लिया कि यहां वर्कआउट नहीं हुआ कहीं और कोशिश की जाए। ऐसे तो अपने कॉलेज के बाहर ही कई ऐसे लड़के मिल जाएंगे जो लड़कियों के लिए, सब काम छोड़कर दिन रात फील्डिंग लगाए रहते है। और तो और भिड़ा दो उनमें से किसी को किसी के खिलाफ भी, मज़ाल है पीछे हट जाएंगे…. तो क्या उनमें से सबका प्यार सच्चा हो जाता है।

लावणी:- इसका क्या मतलब समझा जाए…

कुंजल:- बात सिंपल है… देखे पसंद आयी। उसे पाने के लिए दिन-रात एक कर दिए.. नहीं मिली तो आगे बढ़ो, कोई दूसरी मिल जाएगी। कौन दिमाग लगाए अब पिछले पर।

लावणी:- दी बहुत भोली है, इनको दुनियादारी की इतनी समझ कहां।

कुंजल:- और यदि मै प्रूफ कर दूं तो।

साची:- फिर वो मेरे लिए कोई अनजान हो जाएगा, जैसे राह चलता कोई लड़का।

कुंजल:- तो फिर चलो झटपट तैयार हो जाओ अभी प्रूफ कर दूंगी।

लावणी:- मैगी बना रहे हैं क्या, बस 2 मिनट में…

कुंजल:- हां कुछ ऐसा ही समझो.. वो अपनी लंबोर्गिनी से निकला है कुछ देर पहले, जरूर वो या तो फील्डिंग लगाने गया होगा या फिर सेट हो गई होगी तो मिलने गया होगा।

साची:- लेकिन अपस्यु गया कहां होगा हमे क्या पता?

कुंजल:- आसान है। उसके गाड़ी में जीपीएस लगा है और उसका ऐप है मेरे पास।

तीनों अपस्यु की जासूसी करने के लिए तैयार होकर नीकल चुके थे। कुछ ही देर में वो तीनो एक शॉपिंग मॉल में थे जिसके पार्किंग में कार की लोकेशन शो हो रहा था।

उसके तो ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी परी। आखों के सामने जो नजारा था वो साची के आखों में चिंगारी भर रही थी। ग्राउंड फ्लोर पर तीनों खड़ी थी और फर्स्ट फ्लोर पर अपस्यु दिख रहा था। किनारे के फेंसिंग के पास किसी लड़की के साथ आइसक्रीम खाते हुए…..

"मुझे पक्का यकीन हो गया इसे बस टाइमपास वाली लड़की चाहिए। इसे किसी से सच्चा प्यार हो ही नहीं सकता।… साची अपनी दिल की भड़ास निकलती हुई बोली।

लावणी:- लेकिन कोई पुरानी जान पहचान या फिर कोई कॉमन फ्रैंड भी तो हो सकती है।

साची:- जैसा कि मैंने कहा था अभी से वो मेरे लिए ठीक वैसे ही लड़के के बराबर है जैसे इस मॉल में अन्य लड़के घूम रहे। बाकी किसी को अपने डाउट्स क्लियर करने हो तो वो कर सकती है।

कुंजल:- दोनों का ब्रेकअप पहले से है अब वो आगे बढ़ना चाह रही है। इसमें और ज्यादा डाउटस क्लियर करना जैसा क्या है? हां, लेकिन अब इतनी दूर अा ही गए है तो चलकर कुछ शॉपिंग ही कर ली जाए, यदि साची को कुछ विशेष प्रॉबलम ना हो तो।

"अब कोई परेशानी नहीं है कुंजल।" … साची मुस्कुराते हुए जवाब दी और वहीं से तीनों शॉपिंग करने चल दिए। शॉपिंग के दौरान 2 ऐसे मौके आए जब साची अपस्यु के कुछ करीब से गुजरी लेकिन साची ने ना तो कोई प्रतिक्रिया दी और ना ही उसने अपस्यु के ओर ध्यान दिया। एक बार तो दोनों आमने-सामने थे, लेकिन अपस्यु भी साची पर बिना ध्यान दिए कुंजल और लावणी से बात करके निकल गया। वहीं साची भी बिना किसी आपत्ति के वहीं खड़ी रही।

हालांकि अपस्यु जब आगे बढ़ गया तो उसे देखकर एक बार लावणी ने कहा भी… "अपस्यु के चेहरे के हाव-भाव तक नहीं बदले। इतनी भी घबराहट नहीं हुई की साची सामने है अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर चुपके से निकल जाए।"… इसपर साची बस इतना कहती आगे बढ़ गई… "सब की अपनी अपनी लाइफ है लावणी। दुनिया में एकलौती मै ही लड़की नहीं और ना ही वो इकलौता लड़का है। वो अपने में खुश, हम अपने में खुश।"


उसी रात जब तीनों भाई बहन हॉल में में बातें कर रहे थे और कुंजल बस ये सुनिश्चित करने में लगी थी कि नंदनी सोई की नहीं। जैसे ही वो सुनिश्चित हो गई कुंजल अपस्यु से पूछने लगी…. "क्या मिल गया ये फिल्मी ड्रामा करके।"

अपस्यु:- उसके दर्द शायद कम ना हो पर जिंदगी में आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा।

कुंजल:- सुनो भाई मै ना कुछ दिनों के ड्रामे से पक गई हूं, मुझे थोड़ा माहौल बदलना है।

आरव:- मुझे भी ब्रेक चाहिए…

अपस्यु:- मतलब दोनों पहले से कुछ ना कुछ सोच कर आए हो। इस बंदर का तो पता है, इसे यूएस जाना होगा। तू कहां जाएगी?

कुंजल:- तुम्हे कैसे पता ये यूएस जाएगा?

आरव:- इसे साची ने बताया होगा कि कॉलेज के छुट्टियों में वो यूएस जा रही है। और जहां तक मुझे लगता है कि इसने तेरा पासपोर्ट भी रेन्यू करवा दिया होगा, और ये भी पता है कि ये हमारे साथ नहीं आएगा, चाहे कुछ भी कर लो।

अपस्यु:- कमीना जुड़वा कहीं का.. फिर से मेरे दिमाग में झांका…

आरव:- थू !! ये तेरा गोबर वाला दिमाग… कौन झकेगा?

कुंजल:- मुझ गरीब को भूल गए, कुछ निंजा तकनीक मुझे भी सीखा देते।

दोनों भाई अपने बाहें फैला कर…. "तुम तो हमारी पूरी दुनिया हो।"…

कुंजल:- भाई एक बात पूछूं … तुम तो पहले प्यार में डूबे रहे, बाद में दर्द में डूबे। फिर इतनी छोटी-छोटी बात भी तुम्हारे दिमाग से कैसे नहीं उतरी? …

आरव:- गम तुझसे है, दर्द तूने दिए, फिर मुरझाए सबके चेहरे क्यों?

अपस्यु:- जे बात…. तुझे याद थी ये…

आरव:- तुमने प्रैक्टिस जो करवाई थी, याद कैसे ना होता…

कुंजल:- जा रही हूं मै सोने… खेलते रहो तुम दोनों पजल।

अपस्यु:- पागल बिल्कुल सीधी तो बात है ये … दो लोगों के बीच के दर्द के किस्से में अन्य किसी के खुशी का ख्याल नहीं रखना ये तो बेईमानी है ना।

कुंजल:- वह बाबा रंछोड़ दास छांचर…

आरव:- तीनों लग भी तो रहे है थ्री इडियट्स की तरह…

देर रात तक तीनों की बातें चलती रही… बात करते-करते कब सो गए किसी को पता भी नहीं चला…..
 

rgcrazyboy

:dazed:
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jo rayata felaya hai usko samet ne ki koshish ki jaa rahe hai :D
lage raho.

ab ye bhi bata do ki dono vapis se mile ge ki in dono ka yaha end ho gaya.

vese tum ne story ko fear se ek jagah lake brack laga diya hai :dazed:
 

Indrajeet

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"कोई एक तो खुश रहे मेरे भाई… मेरा क्या है, बिना अाशरा तब भी थे आगे भी जीते रहेंगे। एक ही दर्द से 2 लोग क्यों पिस्ते रहे।"…

संडे की सुबह.. दिन भी आज तो जैसे पूरा फुर्सत में था। देर से सो कर उठने के बाद लावणी अंगड़ाई लेती रात कि बात पर सोचने लगी। कुछ ही देर में वो साची के पास जाकर बैठ गई। साची अपने स्टडी चेयर पर बैठी किसी ख्यालों में गुम थी। लावणी उसके कानों में तेज चिल्लाई और साची चौंक कर उसके ओर देखने लगी…. "कब आयी"

लावणी:- कोई फर्क पड़ता है क्या इस बात से।

साची:- तू भी ताने मार रही है।

लावणी:- इसे ताने मारना नहीं कहते है अपना हाल-ए-दिल बताना बोलते है।

"किस से हाल-ए-दिल बताने कि बात कर रही हो। अभी उसके पागलपन का तीसरा फेस चल रहा है। अभी वो हर बात का रिएक्शन बस लटके मुंह से देगी।".. कुंजल कमरे में आती हुई बोलने लगी…

साची:- तुम दोनों प्लीज मुझे अकेला छोड़ दो।

कुंजल:- देख लावणी अब ज्यादा जिद करेंगे तो चिल्लाकर कहने लगेगी मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

लावणी:- कितने दिनों से तो छोड़ा ही था इन्हे, लेकिन कोई सुधार ही नहीं है। मै क्या सोच रही हूं कि दी से आज पूरी कहानी सुन ही ले, की उस दिन आखिर हुआ क्या था?

कुंजल:- ये तो तुमने मेरे दिल की बात कह दी।

साची थोड़ा गुस्सा दिखाती हुई… जाकर अपने भाई से पूछना था ना, क्या हुआ था उस दिन।

कुंजल:- ये लो अब इनकी भी सुनो। हम दर्द बाटने आए है और ये मुझ को ही ताने दे रही है।

लावणी:- दी अभी गुस्से में है कुंजल हो सकता है ये भी कह दे की… "हो तो किसी धोखेबाज की ही बहन।"

कुंजल:- हो !!!! … क्या सच में ऐसा किया उसने … धोका दिया साची को।

साची, हार मानती हुई….. "प्लीज मत तंग करो। क्या चाहती हो मुझ से।"…

लावणी और कुंजल दोनों एक साथ….. "तुम्हारे दर्द कि वजह हम जानना चाहते हैं।"

"क्या बताऊं मै, ये बता दूं कि वो किसी के साथ पहले से रिलेशन में है और उसके बाद भी मुझसे प्यार करता है।"… साची गुस्से में अपने दिल की बात कह गई।

कुंजल:- क्या बात कर रही हो.. ये तो दोनों के साथ दगाबाजी हुई ना।

लावणी:- हां ये तो सही है। चलो उसकी खबर ली जाए।

कुंजल:- आज से वो मेरा भाई नहीं रहा… धोखेबाज कहीं का ....

साची:- ऊफ ओ !!! धोखेबाज नहीं है वो।

लावणी:- कैसा कन्फ्यूजन है ये। दूसरे के साथ रिलेशन में होकर भी वो तुम्हारे साथ प्यार करना चाह रहा था, फिर भी वो धोखेबाज नहीं। दी आप ठीक तो है ना।

कुंजल:- ऐसी बात ना है रे लावणी, ये अपस्यु को देवता समझती थी, इसलिए सदमे में कह रही है कि को धोखेबाज नहीं। इसके दिमाग ने धोखेबाज मान लिया है बस दिल नहीं मान रहा।

साची:- चुप हो जाओ तुम दोनों। बिना पूरी बात जाने कुछ भी नहीं बोलो। वो धोखेबाज नहीं।

कुंजल और लावणी कुछ देर तक खामोश रहे और साची के बोलने का इंतजार करने लगे… कुछ समय बीतने के बाद साची खुद से कहने लगी….

"पता नहीं क्या कहूं। मैं बिल्कुल ब्लैंक हो गई हूं। किसी के पास एक्स गर्लफ्रेंड हो तो समझ में आता है वर्कआउट नहीं हुआ होगा। कोई लड़का किसी लड़की को घुरे तो समझ में आता है नजर फिसल गई, रहेगा मेरा ही। किसी से दोस्ती है तो भी फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इनकी ये कैजुअल रिलेशन, मेरे ही सामने एक दूसरे को मुंह से मुंह लगा कर किस्स करते है, एक दूसरे को छोड़ भी नहीं सकते और चाहते है कि, मै उनके इस बेहूदे से मज़ाक के साथ उससे प्यार करूं।

साची की बात सुनकर लावणी का मुंह खुला का खुला रह गया। लावणी आश्चर्य से पूछने लगी…. "ऐसा भी होता है क्या? ये कैसा रिलेशन हुआ। इसे तो पागलपन कहते है। हां तो ठीक ही तो की, जो उसके साथ रिलेशन खत्म कर दी।

कुंजल:- एक मिनट रुको, क्या अपस्यु ने कहा था कि तुम उन दोनों का रिश्ता एक्सेप्ट करो।

साची:- कुंजल तुम्हे क्या लगता है तुम्हारा भाई मेरी तरह बेवकूफ है। उसने बिना किसी प्रस्ताव के ही, मुझे ऐसा फसाया की कुछ ना बोलते हुए भी उसने वो सब कुछ मुझ से उम्मीद की, जो वो मुझे समझना चाहता था।

कुंजल:- हां मै तुम्हारी ये बात मान सकती हूं। वो इस मामले में चतुर तो है। हां लेकिन जब उसने धोका नहीं दिया और अपनी सारी बात कहकर उसने फैसला तुम पर छोड़ दिया, तो तुमने भी तो बिल्कुल फैसला लेते उसे दरकिनार कर दिया। फिर ये उदासी और मायूसी क्यों। क्या तुम्हारी अंधी चाहत ये तो नहीं सोच रही की किसी दिन अपस्यु अाकर तुमसे ये कहे कि मैंने वो रिश्ता तोड़ दिया अब तुम मेरे प्यार को कबूल कर लो।

साची:- उसे अपना ये फालतू रिश्ता तोड़ना ही होता तो मुझे पहले ही कह चुका था हमारे बीच ये कहानी चल रही थी, जो तुम्हारे आने के बाद मैंने खत्म कर दिया। जानती हो सबसे ज्यादा क्या दुखता है, उसे भी मुझसे बेहद प्यार था। जब मैंने उसे धोका दिया था पहली ही मुलाकात मे, उसे ये बातें पहले से पता थी, तब भी उसने मेरे लिए वो किया जो मेरे पिता समान चाचा नहीं कर पाए।

"पूरा दिन बालकनी पर सिर्फ मुझे देखने के लिए खड़ा रहता था। मै ही एकतरफा सोचती रही कि, मैंने कई बार उसकी बे इज्जती मैंने की है, लेकिन इसे वो मेरी नादानियां मानता रहा.. इससे ज्यादा और क्या प्रमाण चाहिए की वो मुझे कितना चाहता था। लेकिन कोई इतना चाहने वाला क्यों.. आखिर क्यों नहीं वो उसको छोड़ पाया, जिसके साथ वो जब जी में आए मस्ती कर सके। जब मै उसका प्यार थी, तो वो लड़की अपस्यु लिए मुझ से बढ़कर कैसे हो गई? मै बर्दास्त नहीं कर पा रही हूं इस बात को।

कुंजल:- एक तुम हो की उसके लिए रोए जा रही हो और एक वो है, उसे किसी बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ा। वो तो अपनी मस्ती में है। शायद अब तो तुम्हे याद भी नहीं करता।

साची:- याद तो जरूर करता होगा वो भी। तभी तो मेरा सामना नहीं कर सके इसलिए कॉलेज नहीं आता।

कुंजल:- बावली कहीं की। वो कोई युग पुरुष नहीं बल्कि इंसान है ऊपर से एक लड़का।

साची:- मतलब…

कुंजल:- मतलब की कल रात भी मैंने उसे देखा व्हाट्स ऐप पर किसी के साथ देर रात तक लगा था। मुझे लगा कि तुम्हारे साथ पैचअप हो रहा होगा लेकिन ये तो अपने ब्रेकअप के बाद किसी और को ढूंढ़ चुका है।

साची:- तुम इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकती हो की कोई दूसरी लड़की थी, वो भी तो हो सकती है जिसके साथ उसका कैजुअल रिलेशन है।

कुंजल:- इसें कहते है जले दिल की उम्मीद… एक बात बताओ क्या कभी उसने एक बार भी इस बात को जानने की कोशिश की, की तुम किस बात पर राजी होगी। क्या एक छोटी सी पहल भी किया हो की साची मुझे माफ़ कर दो मै अब मुड़कर उसे नहीं देखूंगा। तु मेरी और मै तेरा।

साची, मायूसी से… नहीं उसने कोई कोशिश नहीं की।

कुंजल:- क्या जब तुम ऐक्सिडेंट में उससे मिलने आया करती थी तो वो व्हाट्स ऐप पर किसी के साथ लगा रहता था?

साची:- मै जबतक उसके साथ होती तो उसके फोन का मैसेज भी नहीं बजता।

कुंजल:- उसके बताने से पहले क्या तुम्हे भनक भी लगी कि इसका कोई ऐसा रिलेशन भी होगा।

साची:- कभी नहीं।

कुंजल:- तो इसे तुम्हारी जले दिल की उम्मीद ही कहूं ना। वो तो पहले दिन ही मान लिया कि यहां वर्कआउट नहीं हुआ कहीं और कोशिश की जाए। ऐसे तो अपने कॉलेज के बाहर ही कई ऐसे लड़के मिल जाएंगे जो लड़कियों के लिए, सब काम छोड़कर दिन रात फील्डिंग लगाए रहते है। और तो और भिड़ा दो उनमें से किसी को किसी के खिलाफ भी, मज़ाल है पीछे हट जाएंगे…. तो क्या उनमें से सबका प्यार सच्चा हो जाता है।

लावणी:- इसका क्या मतलब समझा जाए…

कुंजल:- बात सिंपल है… देखे पसंद आयी। उसे पाने के लिए दिन-रात एक कर दिए.. नहीं मिली तो आगे बढ़ो, कोई दूसरी मिल जाएगी। कौन दिमाग लगाए अब पिछले पर।

लावणी:- दी बहुत भोली है, इनको दुनियादारी की इतनी समझ कहां।

कुंजल:- और यदि मै प्रूफ कर दूं तो।

साची:- फिर वो मेरे लिए कोई अनजान हो जाएगा, जैसे राह चलता कोई लड़का।

कुंजल:- तो फिर चलो झटपट तैयार हो जाओ अभी प्रूफ कर दूंगी।

लावणी:- मैगी बना रहे हैं क्या, बस 2 मिनट में…

कुंजल:- हां कुछ ऐसा ही समझो.. वो अपनी लंबोर्गिनी से निकला है कुछ देर पहले, जरूर वो या तो फील्डिंग लगाने गया होगा या फिर सेट हो गई होगी तो मिलने गया होगा।

साची:- लेकिन अपस्यु गया कहां होगा हमे क्या पता?

कुंजल:- आसान है। उसके गाड़ी में जीपीएस लगा है और उसका ऐप है मेरे पास।

तीनों अपस्यु की जासूसी करने के लिए तैयार होकर नीकल चुके थे। कुछ ही देर में वो तीनो एक शॉपिंग मॉल में थे जिसके पार्किंग में कार की लोकेशन शो हो रहा था।

उसके तो ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी परी। आखों के सामने जो नजारा था वो साची के आखों में चिंगारी भर रही थी। ग्राउंड फ्लोर पर तीनों खड़ी थी और फर्स्ट फ्लोर पर अपस्यु दिख रहा था। किनारे के फेंसिंग के पास किसी लड़की के साथ आइसक्रीम खाते हुए…..

"मुझे पक्का यकीन हो गया इसे बस टाइमपास वाली लड़की चाहिए। इसे किसी से सच्चा प्यार हो ही नहीं सकता।… साची अपनी दिल की भड़ास निकलती हुई बोली।

लावणी:- लेकिन कोई पुरानी जान पहचान या फिर कोई कॉमन फ्रैंड भी तो हो सकती है।

साची:- जैसा कि मैंने कहा था अभी से वो मेरे लिए ठीक वैसे ही लड़के के बराबर है जैसे इस मॉल में अन्य लड़के घूम रहे। बाकी किसी को अपने डाउट्स क्लियर करने हो तो वो कर सकती है।

कुंजल:- दोनों का ब्रेकअप पहले से है अब वो आगे बढ़ना चाह रही है। इसमें और ज्यादा डाउटस क्लियर करना जैसा क्या है? हां, लेकिन अब इतनी दूर अा ही गए है तो चलकर कुछ शॉपिंग ही कर ली जाए, यदि साची को कुछ विशेष प्रॉबलम ना हो तो।

"अब कोई परेशानी नहीं है कुंजल।" … साची मुस्कुराते हुए जवाब दी और वहीं से तीनों शॉपिंग करने चल दिए। शॉपिंग के दौरान 2 ऐसे मौके आए जब साची अपस्यु के कुछ करीब से गुजरी लेकिन साची ने ना तो कोई प्रतिक्रिया दी और ना ही उसने अपस्यु के ओर ध्यान दिया। एक बार तो दोनों आमने-सामने थे, लेकिन अपस्यु भी साची पर बिना ध्यान दिए कुंजल और लावणी से बात करके निकल गया। वहीं साची भी बिना किसी आपत्ति के वहीं खड़ी रही।

हालांकि अपस्यु जब आगे बढ़ गया तो उसे देखकर एक बार लावणी ने कहा भी… "अपस्यु के चेहरे के हाव-भाव तक नहीं बदले। इतनी भी घबराहट नहीं हुई की साची सामने है अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर चुपके से निकल जाए।"… इसपर साची बस इतना कहती आगे बढ़ गई… "सब की अपनी अपनी लाइफ है लावणी। दुनिया में एकलौती मै ही लड़की नहीं और ना ही वो इकलौता लड़का है। वो अपने में खुश, हम अपने में खुश।"


उसी रात जब तीनों भाई बहन हॉल में में बातें कर रहे थे और कुंजल बस ये सुनिश्चित करने में लगी थी कि नंदनी सोई की नहीं। जैसे ही वो सुनिश्चित हो गई कुंजल अपस्यु से पूछने लगी…. "क्या मिल गया ये फिल्मी ड्रामा करके।"

अपस्यु:- उसके दर्द शायद कम ना हो पर जिंदगी में आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा।

कुंजल:- सुनो भाई मै ना कुछ दिनों के ड्रामे से पक गई हूं, मुझे थोड़ा माहौल बदलना है।

आरव:- मुझे भी ब्रेक चाहिए…

अपस्यु:- मतलब दोनों पहले से कुछ ना कुछ सोच कर आए हो। इस बंदर का तो पता है, इसे यूएस जाना होगा। तू कहां जाएगी?

कुंजल:- तुम्हे कैसे पता ये यूएस जाएगा?

आरव:- इसे साची ने बताया होगा कि कॉलेज के छुट्टियों में वो यूएस जा रही है। और जहां तक मुझे लगता है कि इसने तेरा पासपोर्ट भी रेन्यू करवा दिया होगा, और ये भी पता है कि ये हमारे साथ नहीं आएगा, चाहे कुछ भी कर लो।

अपस्यु:- कमीना जुड़वा कहीं का.. फिर से मेरे दिमाग में झांका…

आरव:- थू !! ये तेरा गोबर वाला दिमाग… कौन झकेगा?

कुंजल:- मुझ गरीब को भूल गए, कुछ निंजा तकनीक मुझे भी सीखा देते।

दोनों भाई अपने बाहें फैला कर…. "तुम तो हमारी पूरी दुनिया हो।"…

कुंजल:- भाई एक बात पूछूं … तुम तो पहले प्यार में डूबे रहे, बाद में दर्द में डूबे। फिर इतनी छोटी-छोटी बात भी तुम्हारे दिमाग से कैसे नहीं उतरी? …

आरव:- गम तुझसे है, दर्द तूने दिए, फिर मुरझाए सबके चेहरे क्यों?

अपस्यु:- जे बात…. तुझे याद थी ये…

आरव:- तुमने प्रैक्टिस जो करवाई थी, याद कैसे ना होता…

कुंजल:- जा रही हूं मै सोने… खेलते रहो तुम दोनों पजल।

अपस्यु:- पागल बिल्कुल सीधी तो बात है ये … दो लोगों के बीच के दर्द के किस्से में अन्य किसी के खुशी का ख्याल नहीं रखना ये तो बेईमानी है ना।

कुंजल:- वह बाबा रंछोड़ दास छांचर…

आरव:- तीनों लग भी तो रहे है थ्री इडियट्स की तरह…

देर रात तक तीनों की बातें चलती रही… बात करते-करते कब सो गए किसी को पता भी नहीं चला…..
Wo drd hi kya jo aankho se bayan n ho.....
Acting karna bhi ek kala h
Kisi ko pata hi na chalne do tumhare andar kya chal rha..
Bahut sandr update nain bhai
 

Chinturocky

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Agar Saanchi ne Sach me Apasyu ko pyar kiya hoga to jarur samjhegi.
Aur apasyu wo to hai hi chutiya.
Are usako manana chahiye passion dikhana chahiye Per nahi hame to tyag Karna hai samane wale ko confuse Karna hai jisase na wo chain se rah paaye na hi khud chain se raho.
Aise log Bilkul pasand nahi,
 

Mbindas

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Achchha hua dono alag hi ho gaye to pura dimag ka dahi karke rakh diya tha :D . Ab jab bhi in dono ko milana ho to bata dijiyega mahoday to pehle se hi dimagi tor par mazbut ban kar aa jayenge ? kyo ki Apasyu rahe or dimag na gumae esa to ho hi nahi sakta. Dono ki jodi bohot hi chhat ke banai hai aapne to :D
 
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Naina

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पता नहीं क्या कहूं। मैं बिल्कुल ब्लैंक हो गई हूं। किसी के पास एक्स गर्लफ्रेंड हो तो समझ में आता है वर्कआउट नहीं हुआ होगा। कोई लड़का किसी लड़की को घुरे तो समझ में आता है नजर फिसल गई, रहेगा मेरा ही। किसी से दोस्ती है तो भी फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इनकी ये कैजुअल रिलेशन, मेरे ही सामने एक दूसरे को मुंह से मुंह लगा कर किस्स करते है, एक दूसरे को छोड़ भी नहीं सकते और चाहते है कि, मै उनके इस बेहूदे से मज़ाक के साथ उससे प्यार करूं।
are ab bhi ushi baat pe atki hai :D
bhool jao aur aage badho...
साची:- जैसा कि मैंने कहा था अभी से वो मेरे लिए ठीक वैसे ही लड़के के बराबर है जैसे इस मॉल में अन्य लड़के घूम रहे। बाकी किसी को अपने डाउट्स क्लियर करने हो तो वो कर सकती है।
Yeh huyi naa baat..saachi ne bilkul sahi decision li hai... . ab saachi aur crazy boy ek hone se koi nahi rok sakta.... :D

Khair.. let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill nainu ji :yourock: :yourock:
 
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Naina

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jo rayata felaya hai usko samet ne ki koshish ki jaa rahe hai :D
lage raho.

ab ye bhi bata do ki dono vapis se mile ge ki in dono ka yaha end ho gaya.

vese tum ne story ko fear se ek jagah lake brack laga diya hai :dazed:
apsyu ka pata nahi par saachi ki zindagi mein ek nayi mod aane ko hai.. ek nayi suruwaat crazy boy ke sath :D
 

THE FIGHTER

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ज़िन्दगी एक साजिश है और आने वाला वक़्त उसका सस्पेंस
Bahot khoob
Agar casual relationship kya hai updates me batane wale hi the to waise batana tha na age pata chal jayega lekin nahi aapko to hum tang karna hai
Puri story hi bata di
2000 se lekar 2011
Chalobdekhte hai age sachi kaise react karti hai
 

Chutiyadr

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Update:-45



"कोई एक तो खुश रहे मेरे भाई… मेरा क्या है, बिना अाशरा तब भी थे आगे भी जीते रहेंगे। एक ही दर्द से 2 लोग क्यों पिस्ते रहे।"…

संडे की सुबह.. दिन भी आज तो जैसे पूरा फुर्सत में था। देर से सो कर उठने के बाद लावणी अंगड़ाई लेती रात कि बात पर सोचने लगी। कुछ ही देर में वो साची के पास जाकर बैठ गई। साची अपने स्टडी चेयर पर बैठी किसी ख्यालों में गुम थी। लावणी उसके कानों में तेज चिल्लाई और साची चौंक कर उसके ओर देखने लगी…. "कब आयी"

लावणी:- कोई फर्क पड़ता है क्या इस बात से।

साची:- तू भी ताने मार रही है।

लावणी:- इसे ताने मारना नहीं कहते है अपना हाल-ए-दिल बताना बोलते है।

"किस से हाल-ए-दिल बताने कि बात कर रही हो। अभी उसके पागलपन का तीसरा फेस चल रहा है। अभी वो हर बात का रिएक्शन बस लटके मुंह से देगी।".. कुंजल कमरे में आती हुई बोलने लगी…

साची:- तुम दोनों प्लीज मुझे अकेला छोड़ दो।

कुंजल:- देख लावणी अब ज्यादा जिद करेंगे तो चिल्लाकर कहने लगेगी मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

लावणी:- कितने दिनों से तो छोड़ा ही था इन्हे, लेकिन कोई सुधार ही नहीं है। मै क्या सोच रही हूं कि दी से आज पूरी कहानी सुन ही ले, की उस दिन आखिर हुआ क्या था?

कुंजल:- ये तो तुमने मेरे दिल की बात कह दी।

साची थोड़ा गुस्सा दिखाती हुई… जाकर अपने भाई से पूछना था ना, क्या हुआ था उस दिन।

कुंजल:- ये लो अब इनकी भी सुनो। हम दर्द बाटने आए है और ये मुझ को ही ताने दे रही है।

लावणी:- दी अभी गुस्से में है कुंजल हो सकता है ये भी कह दे की… "हो तो किसी धोखेबाज की ही बहन।"

कुंजल:- हो !!!! … क्या सच में ऐसा किया उसने … धोका दिया साची को।

साची, हार मानती हुई….. "प्लीज मत तंग करो। क्या चाहती हो मुझ से।"…

लावणी और कुंजल दोनों एक साथ….. "तुम्हारे दर्द कि वजह हम जानना चाहते हैं।"

"क्या बताऊं मै, ये बता दूं कि वो किसी के साथ पहले से रिलेशन में है और उसके बाद भी मुझसे प्यार करता है।"… साची गुस्से में अपने दिल की बात कह गई।

कुंजल:- क्या बात कर रही हो.. ये तो दोनों के साथ दगाबाजी हुई ना।

लावणी:- हां ये तो सही है। चलो उसकी खबर ली जाए।

कुंजल:- आज से वो मेरा भाई नहीं रहा… धोखेबाज कहीं का ....

साची:- ऊफ ओ !!! धोखेबाज नहीं है वो।

लावणी:- कैसा कन्फ्यूजन है ये। दूसरे के साथ रिलेशन में होकर भी वो तुम्हारे साथ प्यार करना चाह रहा था, फिर भी वो धोखेबाज नहीं। दी आप ठीक तो है ना।

कुंजल:- ऐसी बात ना है रे लावणी, ये अपस्यु को देवता समझती थी, इसलिए सदमे में कह रही है कि को धोखेबाज नहीं। इसके दिमाग ने धोखेबाज मान लिया है बस दिल नहीं मान रहा।

साची:- चुप हो जाओ तुम दोनों। बिना पूरी बात जाने कुछ भी नहीं बोलो। वो धोखेबाज नहीं।

कुंजल और लावणी कुछ देर तक खामोश रहे और साची के बोलने का इंतजार करने लगे… कुछ समय बीतने के बाद साची खुद से कहने लगी….

"पता नहीं क्या कहूं। मैं बिल्कुल ब्लैंक हो गई हूं। किसी के पास एक्स गर्लफ्रेंड हो तो समझ में आता है वर्कआउट नहीं हुआ होगा। कोई लड़का किसी लड़की को घुरे तो समझ में आता है नजर फिसल गई, रहेगा मेरा ही। किसी से दोस्ती है तो भी फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इनकी ये कैजुअल रिलेशन, मेरे ही सामने एक दूसरे को मुंह से मुंह लगा कर किस्स करते है, एक दूसरे को छोड़ भी नहीं सकते और चाहते है कि, मै उनके इस बेहूदे से मज़ाक के साथ उससे प्यार करूं।

साची की बात सुनकर लावणी का मुंह खुला का खुला रह गया। लावणी आश्चर्य से पूछने लगी…. "ऐसा भी होता है क्या? ये कैसा रिलेशन हुआ। इसे तो पागलपन कहते है। हां तो ठीक ही तो की, जो उसके साथ रिलेशन खत्म कर दी।

कुंजल:- एक मिनट रुको, क्या अपस्यु ने कहा था कि तुम उन दोनों का रिश्ता एक्सेप्ट करो।

साची:- कुंजल तुम्हे क्या लगता है तुम्हारा भाई मेरी तरह बेवकूफ है। उसने बिना किसी प्रस्ताव के ही, मुझे ऐसा फसाया की कुछ ना बोलते हुए भी उसने वो सब कुछ मुझ से उम्मीद की, जो वो मुझे समझना चाहता था।

कुंजल:- हां मै तुम्हारी ये बात मान सकती हूं। वो इस मामले में चतुर तो है। हां लेकिन जब उसने धोका नहीं दिया और अपनी सारी बात कहकर उसने फैसला तुम पर छोड़ दिया, तो तुमने भी तो बिल्कुल फैसला लेते उसे दरकिनार कर दिया। फिर ये उदासी और मायूसी क्यों। क्या तुम्हारी अंधी चाहत ये तो नहीं सोच रही की किसी दिन अपस्यु अाकर तुमसे ये कहे कि मैंने वो रिश्ता तोड़ दिया अब तुम मेरे प्यार को कबूल कर लो।

साची:- उसे अपना ये फालतू रिश्ता तोड़ना ही होता तो मुझे पहले ही कह चुका था हमारे बीच ये कहानी चल रही थी, जो तुम्हारे आने के बाद मैंने खत्म कर दिया। जानती हो सबसे ज्यादा क्या दुखता है, उसे भी मुझसे बेहद प्यार था। जब मैंने उसे धोका दिया था पहली ही मुलाकात मे, उसे ये बातें पहले से पता थी, तब भी उसने मेरे लिए वो किया जो मेरे पिता समान चाचा नहीं कर पाए।

"पूरा दिन बालकनी पर सिर्फ मुझे देखने के लिए खड़ा रहता था। मै ही एकतरफा सोचती रही कि, मैंने कई बार उसकी बे इज्जती मैंने की है, लेकिन इसे वो मेरी नादानियां मानता रहा.. इससे ज्यादा और क्या प्रमाण चाहिए की वो मुझे कितना चाहता था। लेकिन कोई इतना चाहने वाला क्यों.. आखिर क्यों नहीं वो उसको छोड़ पाया, जिसके साथ वो जब जी में आए मस्ती कर सके। जब मै उसका प्यार थी, तो वो लड़की अपस्यु लिए मुझ से बढ़कर कैसे हो गई? मै बर्दास्त नहीं कर पा रही हूं इस बात को।

कुंजल:- एक तुम हो की उसके लिए रोए जा रही हो और एक वो है, उसे किसी बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ा। वो तो अपनी मस्ती में है। शायद अब तो तुम्हे याद भी नहीं करता।

साची:- याद तो जरूर करता होगा वो भी। तभी तो मेरा सामना नहीं कर सके इसलिए कॉलेज नहीं आता।

कुंजल:- बावली कहीं की। वो कोई युग पुरुष नहीं बल्कि इंसान है ऊपर से एक लड़का।

साची:- मतलब…

कुंजल:- मतलब की कल रात भी मैंने उसे देखा व्हाट्स ऐप पर किसी के साथ देर रात तक लगा था। मुझे लगा कि तुम्हारे साथ पैचअप हो रहा होगा लेकिन ये तो अपने ब्रेकअप के बाद किसी और को ढूंढ़ चुका है।

साची:- तुम इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकती हो की कोई दूसरी लड़की थी, वो भी तो हो सकती है जिसके साथ उसका कैजुअल रिलेशन है।

कुंजल:- इसें कहते है जले दिल की उम्मीद… एक बात बताओ क्या कभी उसने एक बार भी इस बात को जानने की कोशिश की, की तुम किस बात पर राजी होगी। क्या एक छोटी सी पहल भी किया हो की साची मुझे माफ़ कर दो मै अब मुड़कर उसे नहीं देखूंगा। तु मेरी और मै तेरा।

साची, मायूसी से… नहीं उसने कोई कोशिश नहीं की।

कुंजल:- क्या जब तुम ऐक्सिडेंट में उससे मिलने आया करती थी तो वो व्हाट्स ऐप पर किसी के साथ लगा रहता था?

साची:- मै जबतक उसके साथ होती तो उसके फोन का मैसेज भी नहीं बजता।

कुंजल:- उसके बताने से पहले क्या तुम्हे भनक भी लगी कि इसका कोई ऐसा रिलेशन भी होगा।

साची:- कभी नहीं।

कुंजल:- तो इसे तुम्हारी जले दिल की उम्मीद ही कहूं ना। वो तो पहले दिन ही मान लिया कि यहां वर्कआउट नहीं हुआ कहीं और कोशिश की जाए। ऐसे तो अपने कॉलेज के बाहर ही कई ऐसे लड़के मिल जाएंगे जो लड़कियों के लिए, सब काम छोड़कर दिन रात फील्डिंग लगाए रहते है। और तो और भिड़ा दो उनमें से किसी को किसी के खिलाफ भी, मज़ाल है पीछे हट जाएंगे…. तो क्या उनमें से सबका प्यार सच्चा हो जाता है।

लावणी:- इसका क्या मतलब समझा जाए…

कुंजल:- बात सिंपल है… देखे पसंद आयी। उसे पाने के लिए दिन-रात एक कर दिए.. नहीं मिली तो आगे बढ़ो, कोई दूसरी मिल जाएगी। कौन दिमाग लगाए अब पिछले पर।

लावणी:- दी बहुत भोली है, इनको दुनियादारी की इतनी समझ कहां।

कुंजल:- और यदि मै प्रूफ कर दूं तो।

साची:- फिर वो मेरे लिए कोई अनजान हो जाएगा, जैसे राह चलता कोई लड़का।

कुंजल:- तो फिर चलो झटपट तैयार हो जाओ अभी प्रूफ कर दूंगी।

लावणी:- मैगी बना रहे हैं क्या, बस 2 मिनट में…

कुंजल:- हां कुछ ऐसा ही समझो.. वो अपनी लंबोर्गिनी से निकला है कुछ देर पहले, जरूर वो या तो फील्डिंग लगाने गया होगा या फिर सेट हो गई होगी तो मिलने गया होगा।

साची:- लेकिन अपस्यु गया कहां होगा हमे क्या पता?

कुंजल:- आसान है। उसके गाड़ी में जीपीएस लगा है और उसका ऐप है मेरे पास।

तीनों अपस्यु की जासूसी करने के लिए तैयार होकर नीकल चुके थे। कुछ ही देर में वो तीनो एक शॉपिंग मॉल में थे जिसके पार्किंग में कार की लोकेशन शो हो रहा था।

उसके तो ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी परी। आखों के सामने जो नजारा था वो साची के आखों में चिंगारी भर रही थी। ग्राउंड फ्लोर पर तीनों खड़ी थी और फर्स्ट फ्लोर पर अपस्यु दिख रहा था। किनारे के फेंसिंग के पास किसी लड़की के साथ आइसक्रीम खाते हुए…..

"मुझे पक्का यकीन हो गया इसे बस टाइमपास वाली लड़की चाहिए। इसे किसी से सच्चा प्यार हो ही नहीं सकता।… साची अपनी दिल की भड़ास निकलती हुई बोली।

लावणी:- लेकिन कोई पुरानी जान पहचान या फिर कोई कॉमन फ्रैंड भी तो हो सकती है।

साची:- जैसा कि मैंने कहा था अभी से वो मेरे लिए ठीक वैसे ही लड़के के बराबर है जैसे इस मॉल में अन्य लड़के घूम रहे। बाकी किसी को अपने डाउट्स क्लियर करने हो तो वो कर सकती है।

कुंजल:- दोनों का ब्रेकअप पहले से है अब वो आगे बढ़ना चाह रही है। इसमें और ज्यादा डाउटस क्लियर करना जैसा क्या है? हां, लेकिन अब इतनी दूर अा ही गए है तो चलकर कुछ शॉपिंग ही कर ली जाए, यदि साची को कुछ विशेष प्रॉबलम ना हो तो।

"अब कोई परेशानी नहीं है कुंजल।" … साची मुस्कुराते हुए जवाब दी और वहीं से तीनों शॉपिंग करने चल दिए। शॉपिंग के दौरान 2 ऐसे मौके आए जब साची अपस्यु के कुछ करीब से गुजरी लेकिन साची ने ना तो कोई प्रतिक्रिया दी और ना ही उसने अपस्यु के ओर ध्यान दिया। एक बार तो दोनों आमने-सामने थे, लेकिन अपस्यु भी साची पर बिना ध्यान दिए कुंजल और लावणी से बात करके निकल गया। वहीं साची भी बिना किसी आपत्ति के वहीं खड़ी रही।

हालांकि अपस्यु जब आगे बढ़ गया तो उसे देखकर एक बार लावणी ने कहा भी… "अपस्यु के चेहरे के हाव-भाव तक नहीं बदले। इतनी भी घबराहट नहीं हुई की साची सामने है अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर चुपके से निकल जाए।"… इसपर साची बस इतना कहती आगे बढ़ गई… "सब की अपनी अपनी लाइफ है लावणी। दुनिया में एकलौती मै ही लड़की नहीं और ना ही वो इकलौता लड़का है। वो अपने में खुश, हम अपने में खुश।"


उसी रात जब तीनों भाई बहन हॉल में में बातें कर रहे थे और कुंजल बस ये सुनिश्चित करने में लगी थी कि नंदनी सोई की नहीं। जैसे ही वो सुनिश्चित हो गई कुंजल अपस्यु से पूछने लगी…. "क्या मिल गया ये फिल्मी ड्रामा करके।"

अपस्यु:- उसके दर्द शायद कम ना हो पर जिंदगी में आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा।

कुंजल:- सुनो भाई मै ना कुछ दिनों के ड्रामे से पक गई हूं, मुझे थोड़ा माहौल बदलना है।

आरव:- मुझे भी ब्रेक चाहिए…

अपस्यु:- मतलब दोनों पहले से कुछ ना कुछ सोच कर आए हो। इस बंदर का तो पता है, इसे यूएस जाना होगा। तू कहां जाएगी?

कुंजल:- तुम्हे कैसे पता ये यूएस जाएगा?

आरव:- इसे साची ने बताया होगा कि कॉलेज के छुट्टियों में वो यूएस जा रही है। और जहां तक मुझे लगता है कि इसने तेरा पासपोर्ट भी रेन्यू करवा दिया होगा, और ये भी पता है कि ये हमारे साथ नहीं आएगा, चाहे कुछ भी कर लो।

अपस्यु:- कमीना जुड़वा कहीं का.. फिर से मेरे दिमाग में झांका…

आरव:- थू !! ये तेरा गोबर वाला दिमाग… कौन झकेगा?

कुंजल:- मुझ गरीब को भूल गए, कुछ निंजा तकनीक मुझे भी सीखा देते।

दोनों भाई अपने बाहें फैला कर…. "तुम तो हमारी पूरी दुनिया हो।"…

कुंजल:- भाई एक बात पूछूं … तुम तो पहले प्यार में डूबे रहे, बाद में दर्द में डूबे। फिर इतनी छोटी-छोटी बात भी तुम्हारे दिमाग से कैसे नहीं उतरी? …

आरव:- गम तुझसे है, दर्द तूने दिए, फिर मुरझाए सबके चेहरे क्यों?

अपस्यु:- जे बात…. तुझे याद थी ये…

आरव:- तुमने प्रैक्टिस जो करवाई थी, याद कैसे ना होता…

कुंजल:- जा रही हूं मै सोने… खेलते रहो तुम दोनों पजल।

अपस्यु:- पागल बिल्कुल सीधी तो बात है ये … दो लोगों के बीच के दर्द के किस्से में अन्य किसी के खुशी का ख्याल नहीं रखना ये तो बेईमानी है ना।

कुंजल:- वह बाबा रंछोड़ दास छांचर…

आरव:- तीनों लग भी तो रहे है थ्री इडियट्स की तरह…

देर रात तक तीनों की बातें चलती रही… बात करते-करते कब सो गए किसी को पता भी नहीं चला…..
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To sanchi ko to khush rakhane ke liye apyasu ne game khel diya ..
Ab jab use manana hoga to bechare ko gana padega ..
"Sanchi re sanchi se prit meri sachi ,ruka ja na ja dil todke " :yikes:
 
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