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Adultery ब्लू मून क्लब (BMC)

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naag.champa

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ब्लू मून क्लब (BMC)
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अनुक्रमाणिका


अध्याय १ // अध्याय २ // अध्याय ३ // अध्याय ४ // अध्याय ५
अध्याय ६ // अध्याय ७ // अध्याय ८ // अध्याय ९ // अध्याय १०
अध्याय ११ // अध्याय १२ // अध्याय १३ // अध्याय १४ (समाप्ति)

बाबा ठाकुर (ब्लू मून क्लब- भाग 2)


यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक घटनाओं पर आधारित है और इसका जीवित और मृत किसी भी शख्स से कोई वास्ता नहीं। इस कहानी में सभी स्थान और पात्र पूरी तरह से काल्पनिक है, अगर किसी की कहानी इससे मिलती है, तो वो बस एक संयोग मात्र है| इस कहानी को लिखने का उद्देश्य सिर्फ पाठकों का मनोरंजन मात्र है|

~ चंपा नाग
 
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अध्याय १


उस दिन शाम से लेकर देर रात तक काफी बारिश होती रही लेकिन मुझे नींद ही नहीं आ रही थी| क्योंकि मैं एक बैंक के कॉल सेंटर में काम करती थी लेकिन सेल्स टारगेट नहीं बना कर पा रही थी, इसलिए आज करीब 10 दिन हो गए जो मेरी नौकरी छूट गई थी|

नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम डिजनी हॉटस्टार मैं कितने दिन तक देखूं?

अकेले-अकेले घर बैठे मुझे काफी गुस्सा आ रहा था, हमारे घर में पैसों की कमी नहीं है| मेरे पति मर्चेंट नेवी में काम करते हैं- साल या 6 महीने में सिर्फ 10-15 दिनों के लिए ही घर आते हैं इसलिए मैंने फैसला किया था कि मैं भी कोई नौकरी करूं|

काम मिला, तो वह भी एक विदेशी बैंक में और वह थी कॉल सेंटर की नौकरी... अब तो वह भी छूट गई है|

मैंने घड़ी देखी- सुबह के 5:45 बज रहे थे- अकेले-अकेले घर बैठे अच्छा नहीं लग रहा था|खुली खिड़की से ठंडी हवाओं के झोंके मानो मेरी अकेलेपन की आग को मानो बहुत ज़्यादा भड़का कर मेरा बदन झुलसा रहे थे; इसलिए मैंने फैसला किया कि बाहर थोड़ा घूम कर आऊं| नानी कहां करती थी, सूरज उगने से पहले या फिर सूरज डूबने के बाद लड़कियों को खुले बालों में बाहर नहीं निकलना चाहिए| इसकी जैसे तैसे मैंने अपने बालों में एक जुड़ा बनाया और फिर अपना नाईट सूट उतार कर सलवार कमीज पहनी और बाहर निकल पड़ी|

निकलते वक्त मैंने देखा कि बिल्डिंग का चौकीदार खर्राटे मार कर सो रहा था... बेचारा सोता है तो सोने दो|

मुझे नहीं मालूम कि मैं कितनी देर तक इधर-उधर ऐसे ही घूमती रही.. मेरे दिमाग में तरह-तरह की ख्याल आ रहे थे... लेकिन मेरा ध्यान तब जा कर टूटा जब मेरे पैरों से कोई चीज टकराई|

मैं एकदम से रुक गई और मैं नीचे झुक के देखा कि मेरे पैरों के पास एक ब्राउन रंग का लिफाफा पढ़ा हुआ था| मैं अपने आप को रोक नहीं पाई मैंने लिफाफा उठाया और उसके बाद उसे खोलकर देखा- और जो मैंने देखा उसे देखकर मेरी आंखें फटी की फटी रह गई... लिफाफा काफी मोटा और भारी था और उसके अंदर ₹2000 और ₹500 के नोट भरे हुए थे|

जब मैं कॉल सेंटर की नौकरी कर रही थी तब पैसे अच्छे मिलते थे.... मेरा बैंक बैलेंस भी अच्छा था--- लेकिन यह तो मुफ्त के पैसे हैं... मैंने एक बार इधर उधर देखा और फिर ज्यादा दिमागी कसरत किए बगैर पैकेट उठा लिया और मैंने उसे अपनी कमीज की जेब में डाल कर थोड़ा तेज कदमों से अपने फ्लैट की तरफ बढ़ने लगी|

घर जाकर मैंने सबसे पहले उस लिफाफे को कपड़ों की अलमारी खोलकर एकदम पीछे की तरफ छुपा दिया और उसके बाद एक लंबी सी राहत की सांस लेने के बाद अपने सारे कपड़े उतार दिए और सिर्फ नाइटी पहनकर बिस्तर पर लेट गई---


*** टिंग टोंग टिंग टोंग टिंग टोंग ***

कॉलिंग बेल की आवाज सुनकर मेरी नींद खुली दूध वाला आया हुआ था... उसके बगल में मेरी कामवाली गोपा मौसी खड़ी हुई... और अखबार वाला लड़का भी सीढ़ियों से चढ़ता हुआ मुझे दिख गया|

गोपा मौसी ने कहा, "हम लोग करीब आधे घंटे से घंटी बजा रहे हैं... तुम इतना भी क्या सो रही है थी?"

मैंने कुछ नहीं कहा| मैंने दूध वाले दूध लिया और फिर अपने कमरे में चली गई...

गोपा मौसी को मालूम था की घर में क्या काम करना है, घर में झाड़ू लगाना पोछा लगाना उसके बाद बर्तन धोना... उसके बाद खाना बनाना...

थोड़ी ही देर में गोपा मौसी मेरे लिए चाय की प्याली लेकर आई और फिर मुझसे कहने लगी, " तुम रात भर सोई नहीं थी क्या? और दूध वाले के सामने ऐसे कैसे चली गई थी? तुमने तो अंदर कुछ नहीं पहन रखा था... तुम्हारी दुदुओं (स्तनों) की चूचियाँ नाइटी के नीचे से साफ-साफ उभर रही थी... और दूधवाला आंखें फाड़ फाड़ कर तुमको देख रहा था... मैं तुम्हारे घर काम करने आती हूं.. लेकिन तुम एक जवान लड़की हो, थोड़ा सा तो लिहाज किया करो… और वैसे भी जब तुम कॉल सेंटर में काम करती थी तब कभी कबार तो तुम बहुत ही टाइट टाइट गंजी (T-Shirt) और जींस पहन के जाया करती थी... मुझे तुम्हारी काफी फिक्र लगी रही थी... क्योंकि शायद तुम नहीं जानती कि यहां कितने लोगों की नजरें तुम पर है... जरा सोचो- जब तक दूधवाला तुम्हें सुबह देख नहीं लेता, मुझे ऐसा लगता है कि उसका रात का खाना हजम नहीं होता... और आज तो तुम उनके सामने ऐसे ही चली गई कि दूध वाले की बांछें ही खिल गई और अखबार वाला भी अपने सड़े हुए दांतो को ताड़ कर मुस्कुरा रहा था..."

हां यह सही बात है- गोपा मौसी, मेरी नौकरानी है लेकिन वह मेरे से उम्र में बड़ी है| इसलिए मैंने सर झुका कर और मुस्कुरा कर कहा "मौसी, मुझे माफ कर दो"

गोपा मौसी को भी शायद ऐसा लगा होगा उसने कुछ ज्यादा ही बोल दिया इसलिए उन्होंने कहा, " बुरा ना मानना... मेरी भी 4 बेटियां है... मुझे लगता है तुम भी मेरी बेटी जैसी हो... इसलिए मैंने ऐसा कुछ कह दिया... जब मैं तुम्हारी उम्र की थी तब तक तो मेरी तीसरी बेटी मेरे पेट में थी... आज अगर तुम्हारा भी कोई बच्चा कच्चा होता तो शायद बात ही कुछ और होती"

अब मुझे गुस्सा आ गया मैंने कहा, " इसी बात से मुझे काफी चिढ़ है गोपा मौसी, सभी बड़े बूढ़े लोग यही कहते हैं- लड़की है इसकी जल्दी से शादी करा दो वरना बिगड़ जाएगी... एक बार शादी हो गई है, तो लोग बाग यही चिंता करते रहते हैं कि बच्चा कब होगा? अरे भई मेरी अभी उम्र ही क्या है??"

मैंने गौर किया कि उनकी आंखें नम हो गई है... मैंने उनकी नजरों की भाषा पकड़ ली मुझे उस वक्त ऊपर से नीचे तक नाप रही थी| शायद मैंने अंदाजा लगा लिया क्या सोच रही है... मेरी उम्र सिर्फ 26 साल की है लेकिन लोग कहते हैं मैं 20 से 22 से ज्यादा की नहीं दिखती हूँ| मैं करीब 5 फुट 6 इंच लंबी हूँ, मेरी आंखों की पुतलियां किसी विदेशी की तरह भूरी भूरी हैं... मेरे बाल काले रेशमी घुंघराले और करीब-करीब कमर तक लंबे है... और लोग बाग़ यह भी कहते हैं कि मेरा फिगर भी अच्छा है... और मैं ३४ सी-सी की ब्रा पहनती हूँ...

जब मैं कॉल सेंटर में काम किया करती थी तब न जाने कितने लोगों ने मुझसे पूछा था कि क्या मैं एंग्लो इंडियन हूं? क्या यहां मेरी कोई रिश्तेदार रहती है? कुछ लोगों का मानना था कि मेरी शक्ल एक बहुत ही मशहूर औरत से काफी मिलती-जुलती है अगर हम दोनों को साथ देख ले तो कोई भी यह सोचेगा कि हम लोग मां बेटी है|

गोपा मौसी ने कहा, "मैं किचन में जाती हूं… लेकिन मैं कभी कबार यह भी सोचती रहती हूँ कि तुम तो पाँक पाड़ा गाँव की लड़की हो; तो तुम थोड़ा बहुत लेचारी क्यों नहीं करती हो, कौन पूछेगा तुमसे?... यहां कौन देखने को जा रहा है? तुम इतनी सुंदर हो सारी जिंदगी तुम अपने गूद से पेशाब करती रहोगी क्या?"

अगर आप गांव की भाषा समझे हैं, तो आप जानते होंगे कि गूद का मतलब होता है लड़कियों का यौनांग….

वैसे गोपा मौसी ने जो कहा था वह सही है, मेरा मायका पाँक पाड़ा गांव है, और वहां अंग्रेजों के जमाने से एक सिलसिला चलता रहा है-

जिसे कहते हैं, लेचारी- हमारे गांव और उसके आसपास के ईलाकों में ज्यादातर मर्द लोग काम के सिलसिले गाँव से दूर शहर में ही काम किया करते थे और वहीँ रहते थे और जैसे मेरे पति भी साल या छह महीने में एक आध बार घर आतें हैं ठीक वैसे ही उन लोगों का भी यह ही हाल था… इसकी बदौलत अच्छे-अच्छे घरों की लड़कियां, बहुएं या फिर औरतें अक्सर दूसरे मर्दो के साथ संबंध बना लेती थी...

इससे उनका अकेलापन भी दूर हो जाता था और फिर घर खर्च या फिर इधर-उधर की जरूरतों के लिए मुझे पैसे या फिर उनकी जरूरतें मैं पूरी हो जाती थी|

अंग्रेज तो देश को आजाद करके चले गए; लेकिन यह प्रथा आज भी प्रचलित है... और गौर करने वाली बात है भले ही यह व्यभिचार हो लेकिन इस प्रथा को चुपके चुपके हमारे समाज में स्वीकृति भी दी गई है....

मुझे भी ऐसा लग रहा था कि शायद मैं बेवजह उनके ऊपर चिल्ला उठी इसलिए मैंने भी कहा," ठीक है मैं भी नहा कर आती हूं लेकिन आज मेरे बालों में कंघी आप कर देना"

मैंने देखा की गोपा मौसी की बांछें खिल गई, वह बोली "ठीक है लड़की... नहाने के बाद मैं तेरी बालों में कंघी भीकर दूंगी… और वैसे भी मुझे चैन नहीं है मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि भगवान तुझे भी लेचारी का मौका दें... मुझे तो कभी कबार बड़ी फिक्र लगी रहती है- तू जवान है इतनी खूबसूरत है और सबसे बड़ी बात जब भगवान ने तेरे को एक गूद (यौनांग) दिया है-- उससे तो सारी जिंदगी पेशाब ही करती रहेगी क्या??"

मैंने अलमारी की तरफ देखा जहां मैंने नोटों से भरा हुआ लिफाफा छुपा कर रखा था... टीवी चल रहा था, न्यूज़ चैनल पर पंडित जी फिलहाल आज के दिन का पंचांग पढ़ रहे थे... मिथुन राशि का राशिफल आने में अभी देर था| मैं सोफे पर बैठ कर अभी तक गोपा मौसी से बातें कर रही थी| सामने के सेंटर टेबल पर अखबार रखा हुआ था और उसके पहले ही पन्ने पर ब्लू मून क्लब का विज्ञापन छपा हुआ था... यह विज्ञापन करीब करीब एक चौथाई पन्ने का था का था... और उसी के अंदर ब्लू मून क्लब के ब्यूटी पार्लर... लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) का भी जिक्र था... और नीचे छोटे अक्षरों में लिखा हुआ था कि अगर आप विशेष तरह की सर्विस चाहते हैं तो कोड नंबर BMCMFFM इस नंबर पर व्हाट्सएप (WhatsApp) करें... और फिर मैं गोपा मौसी से बोली, "इस बारे में हम लोग बाद में बात करेंगे; मौसी जी... आप काम कर लो"

क्रमशः
 
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naag.champa

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अध्याय २


गोपा मौसी को अपना काम निपटाने में ज्यादा देर नहीं लगती| देखते ही देखते करीब 2 घंटे में ही घर के सारे काम निपटा लिए और अब तक तो खाना भी बन चुका था|

गोपा मौसी अपना काम खत्म करके चली गई थी और इतनी ही देर में उत्सुकता वश अलमारी से नोटों से भरे हुए लिफाफे को निकालकर उसके अंदर के नोटों को गिन रही थी..

मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था- इसलिए मैंने पक्का करने के लिए चार चार बार शुरू से लेकर आखिर तक नोटों को गिना- टू लेक्स फिफ्टी सिक्स थाउजेंड यानी के दो लाख छप्पन हजार रुपये...

टीवी पर पंडित जी की भविष्यवाणी भी मेरे कानों में गूंज रही थी- "मिथुन राशि... अचानक धन लाभ के योग है... और जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ आने के योग है... वगैरा-वगैरा आदि इत्यादि…"

मैंने डर के मारे नोटों को दोबारा लिफाफे में डाल कर फिर से अलमारी में छुपा दिया… और फिर मैंने ब्लू मून क्लब के विज्ञापन में दिए हुए नंबर पर कोड नंबर BMCMFFM भी व्हाट्सएप WhtasApp कर दिया था... और न जाने क्यों अंदर ही अंदर मेरा मन थोड़ा गूदगुदा रहा था... मैं सोच रही थी कि ब्लू मून क्लब की विशिष्ट और महंगी लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) ब्यूटी पार्लर में क्या-क्या 'विशेष' सेवाएं मिलने वाली हैं- बॉडी मसाज? हेयर स्पा? सुबह-सुबह तो कुछ मुफ्त के पैसे मिल ही गए थे- तो क्यों ना उसे मैं अपने ऊपर ही थोड़ा सा खर्च करूं?

इतने में मेरा मोबाइल फोन बज उठा|

"हेलो?" किसी महिला ने एक अनजान नंबर से मुझे फोन किया था|

"जी, हां?"

"मैं ब्लू मून क्लब की लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) ब्यूटी पार्लर से बोल रही हूं... हमें आपका व्हाट्सएप (WhatsApp) मैसेज मिला है क्या इस बारे में मैं आपसे दो मिनट बात कर सकती हूं?”

"जी हां, कहिए"

"आपने हमारी स्पेशल सर्विस के लिए व्हाट्सएप(WhatsApp) किया था| स्पेशल सर्विस में हम लोग बिल्कुल में फुल सर्विस (Full Service) देते हैं| फुल सर्विस का मतलब- फुल बॉडी मसाज, हेयर स्पा.. फुल रिलैक्सेशन और कंप्लीट सेटिस्फेक्शन... मतलब फुल पैकेज- लेकिन हमारे स्लॉट्स बहुत ही लिमिटेड है तो क्या मैं आपके लिए एक स्लॉट कंफर्म कर दूँ?"

मैंने पूछा. "फुल पैकेज से आपका क्या मतलब है?"

और मुझे लग गया था कि वह औरत अब फोन पर पूरी जानकारी देने में थोड़ा हिचकिचा रही थी "पूरे पैकेज में आप, बॉडी मसाज, हेयर स्पा, बॉडी स्पा... और उसमें सब कुछ शामिल है..."

"क्या? सब कुछ मतलब है आपका?"

इस बार फोन पर बात करने वाली महिला मनो थोड़ा चिढ़ गई थी - मुझे लगता है कि उसे मुझ जैसी लड़कियों को आज सुबह से फोन कर चुकी है लेकिन उसके हाथ कुछ भी नहीं लगा है, "आपको फुल पैकेज में फिजिकल रिलेशन (शारीरिक संबंध) भी मिल रहा है..."

मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा… लगता है भगवान ने गोपा मौसी की प्रार्थना सुन ली थी- मुझे लेचारी का मौका मिल रहा था और साथ ही गूद(यौनांग) मराने का मौका भी…

"फिजिकल रिलेशन यानी कि शारीरिक संबंध?... मतलब मेल टू फीमेल (पुरुष से महिला)...?"

"जब आप महिला है, तो आपको मेल (पुरुष) द्वारा पूरा पैकेज दिया जाएगा... क्या मैं आपके लिए स्लॉट बुक कर दूँ?"

मैं सोचने लगी- मैं एक विवाहित महिला हूँ ... मैं तो सिर्फ अपना बॉडी मसाज करवाना चाहती थी। मैंने सोचा था कि एक दक्षिण भारतीय महिला मुझे एक पारंपरिक आयुर्वेदिक मालिश देगी... लेकिन यह तो एक अलग कहानी है।

फोन पर उस महिला ने दोबारा कहा, "मिस, अगर आप फोन पर स्लॉट बुक करना चाहती हैं, तो मैं अभी कर सकती हूं... हम आपको देंगे पूरे पैकेज विशेष छूट के साथ..."

"लेकिन..."

"मिस, हमारे यहां आकर अपना मनपसंद प्रोफाइल चुन सकती है...”, फोन वाली महिला सुबह-सुबह ग्राहक को छोड़ना नहीं चाहती थी।

पता नहीं क्यों मैंने मन ही मन बात मान ली और मैंने घड़ी की ओर देखा, "फिर आप मेरे लिए एक स्लॉट बुक कर दीजिए ..." मैंने दोबारा अलमारी की तरफ भी देखा था मैंने नोटों से भरे हुए लिफाफे को छुपा कर रखा था और फिर मैंने कहा, "लेकिन मैं, नगद पैसे दूंगी- क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या फिर UPI का इस्तेमाल नहीं करूंगी"

"हाँ मिस! कोई बात नहीं| आपका नाम?"

मैंने कहा, "पियाली दास ... और आपका नाम?", मेरा असली नाम शीला चौधरी है लेकिन मैंने जान बूझकर उस महिला को एक काल्पनिक नाम बताया।

"जी मेरा नाम मुन्नी है, मैं रिसेप्शनिस्ट हूँ... तो पियाली मिस, आपका स्लॉट बुक हो गया है, कृपया समय पर हमारे पास आएँ। मैं बाकी डीटेल्स आपको व्हाट्सएप (WhatsApp) पर भेज दूंगी- आपका ब्लू मून क्लब की लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) ब्यूटी पार्लर में स्वागत है"

क्रमशः
 

naag.champa

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अध्याय ३


गोपा मौसी बड़े प्यार से मेरे बालों में कंघी करके एक चोटी कसकर गई थी|

उनके जाने के बाद मैंने जल्दी-जल्दी अपने बाल खोले और मेरे बालों को सामने की ओर फ़्लिप किया और बड़े दांत वाली कंघी से अपने बालों को काढ़ा और जैसे तैसे मैंने एक पोनीटेल बनाई|

उसके बाद बाथरूम में जाकर जल्दी-जल्दी अपने बगलों पर लेडीज़ रेजर मारकर वहां के बालों को साफ किया और फिर अलमारी में से एक नई ब्रा और पेंटी का सेट निकाला और फिर अपनी लाल रंग की स्लीवलेस टीशर्ट और लो कट जींस भी निकाली... आखिरकार मैं ब्लू मून क्लब की लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) ब्यूटी पार्लर जाने वाली थी- वहां तो मैं सिर्फ एक चुटिया कसी हुई 'बहन जी' बनकर नहीं जा सकती थी- वहां जाने के लिए मुझे शहर की आम लड़कियों की तरह जाना था|

तैयार होने के बाद मैंने अलमारी में से नोटों के लिफाफे को निकाला और अंदाज से नोटों का एक गुच्छा उसमें से निकाल लिया और अपने पर्स में डाल लिया| हो ना हो मैंने कम से कम 30 या ₹40 हजार रुपए नोटों की गड्डी में से निकाल लिए थे|

मुझे बाहर निकलने की जल्दी थी क्योंकि मेरे अंदर एक अनजानी सी उकसाहट भड़क रही थी, लेकिन फिर भी मैंने पूरा कर चेक किया और देख लिया कि सारे खिड़की दरवाजे बंद है कि नहीं और बेवजह कोई बिजली का स्विच और तो ऑन नहीं रह गया| टेबल पर रखे खाने को मैंने एक एक करके फ्रिज में डाल दिया| और फिर बाहर निकलने से पहले मैंने आईने में अपनी शक्ल एक बार देखी और देख कर दंग रह गई|

मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं आईने में खुद को नहीं किसी और को देख रही हूं और मैंने गौर किया कि सुबह नहाते वक्त मैंने शैंपू किया था जिसकी वजह से मैं अपनी मांग में जो हल्का सा सिंदूर लगाती थी वह भी पूरी तरह धूल चुका था...

खैर कोई बात नहीं.. मैं तो ब्लू मून क्लब की लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) ब्यूटी पार्लर जाने वाली थी- और वहां एक बहन जी बनकर जाने की कोई जरूरत नहीं है|

अपनी बिल्डिंग से निकलकर जैसे ही मैं सड़क पार करके फुटपाथ पर खड़ी हुई; न जाने कहां से एक ऑटो वाला सीधे मेरे सामने अपना ऑटो ले आकर रुका| पिछली सीट पर एक परिवार पहले से ही बैठा हुआ था एक अधेड़ उम्र का आदमी, उसकी बीवी और एक लड़की जिसकी उम्र लगभग 14 या 15 साल की होगी|

मैं बेहिचक सामने ऑटो वाले की बगल में चिपक कर बैठ गई और बोली, "बिग सिटी मॉल..."

बिग सिटी मॉल- जहां ब्लू मून क्लब है और उसका लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) ब्यूटी पार्लर|

ऑटो वाला भी मेरी छुअन पाकर और मेरे परफ्यूम की खुशबू से बहुत ही खुश होकर एक बड़ी सी मुस्कान लेकर ऑटो लेकर चल पड़ा|

***

आज मौसम बहुत ही सुहाना था| आसमान पर बादल छाए हुए थे ठंडी ठंडी हवाएं चल रही थी| तेज बारिश आने का अंदाजा था लेकिन मैंने देखा कि फिर भी बाहर सड़क पर काफी लोग बाग और युवक युवतियां- जैसे किसी अनजानी खुशी के माहौल में डूब कर घूम रहे थे|

शहर की बीचोबीच बहुत ही रिहायशी इलाके में बना हुआ था बिग सिटी मॉल|

बिग सिटी मॉल किसी दूसरी तरफ एक बड़ी सी बहुमंजिला बिल्डिंग है- और उस बिल्डिंग के सबसे ऊपरी मंजिल पर एक बड़ा सा साइन बोर्ड लगा हुआ है- जिसमें लिखा हुआ है- ब्लू मून क्लब|

उसी बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर एक लग्जरी (luxary) रेस्तरां है- जिसका नाम है, रंग दे बसंती ढाबा (जो कि किसी पांच सितारा होटल के रेस्तरां से कम नहीं है... उसके ऊपर वाले फ्लोर पर ब्लू मून क्लब का लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) ब्यूटी पार्लर है|

मेरा दिल बड़े जोर जोर से धड़क रहा था, लेकिन अब जब ओखली में सर दे ही दिया है तो मूसल का क्या डर?

रंग दे बसंती ढाबा के बगल से लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) ब्यूटी पार्लर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है| मैंने जैसे ही अंदर कदम रखा तो चौकीदार ने उठकर मेरे को सलाम किया मैंने गौर किया कि वह मुझे बड़ी अजीब निगाहों से देख रहा था, ऐसा लग रहा था शायद उसने मुझे पहले भी कहीं देखा है और अब को याद करने की कोशिश कर रहा है कि कहां?

और फिर जब मैं लूनर डैज़ी (Lunar Daisy) ब्यूटी पार्लर के अंदर गई तब रिसेप्शन में बैठी हुई लड़की मुझे देख कर मानो हक्की बक्की से रह गई और वह सीधे खड़ी होकर मुझसे बोली, "गुड मॉर्निंग, मिस"

मैंने गौर किया उसके स्वर में एक अजीब तरह का आश्चर्य भरा हुआ था|

क्या मैं बहुत ही ज्यादा नर्वस हो रही थी? क्या मेरे चेहरे के हाव भाव अजीब से लग रहे थे? या फिर मेरे कपड़े या बाल बिगड़े हुए थे? पता नहीं...

मैंने उस लड़की से कहा, "जी मुझे मिस मुन्नी से मिलना है- मेरी आप सुबह मुझसे फोन पर बात हुई थी, मेरा नाम- शीला... मेरा मतलब है कि पीयाली दास है मेरी यहां बुकिंग है"

"जी हां जी हां मैं ही मुन्नी हूं...” न जाने क्यों लड़की मुझे देख कर थोड़ा घबरा सी गई थी और हकला भी रही थी| उसने जल्दी-जल्दी अपने सामने रखे कंप्यूटर के कीबोर्ड पर अपनी उंगलिया चलाई और बोली, "अब ठीक समय पर आई है आप प्लीज मुझे अपना कोई आईडी कार्ड (ID Card) दीजिए और आप सोफे पर थोड़ी देर बैठिए मैं थोड़ी देर में आपको खबर करती हूं..."

मैंने अपने पर्स में से अपना स्कूटी का टू व्हीलर ड्राइवर लाइसेंस निकाल कर उसके हाथ में थमा दिया और फिर सोफे में जाकर बैठ गई|

आज सुबह से बड़ी अजीब सी घटनाएं मेरे साथ घट रही है- इसलिए आईडी कार्ड देते वक्त मुझे यह ध्यान नहीं रहा कि उस पर मेरा असली नाम शीला चौधरी ही छपा हुआ है|

मैंने रिसेप्शन के सामने सोफे पर बैठ कर एक गहरी सांस ली ही थी- कि तभी मेरा माथा टनका- आईडी कार्ड पर तो मेरा नाम- शीला चौधरी है और यहां बुकिंग है पीयाली दास के नाम से... मर गए! अब क्या होगा?

मैंने अपनी नजरों को उठा कर रिसेप्शन पर कंप्यूटर के कीबोर्ड पर उंगलियां चलाती हुई मुन्नी की तरफ देखा और मैं समझ गई कि उसने देख लिया है की आईडी कार्ड पर और बुकिंग पर नाम अलग-अलग है|

उसने मेरी तरफ एक बार नजरों को उठाकर देखा और फिर मेरा ड्राइवर लाइसेंस लेकर रिसेप्शन के बगल में एक दरवाजे से होकर कहीं अंदर चली गई|

क्या वह लड़की सिक्योरिटी को बुलाने गई है? या फिर पुलिस को? मैं क्या करूं... यहां से उठकर भागूँ? लेकिन भागने से तो कोई फायदा नहीं होगा- क्योंकि मेरा ड्राइवर्स लाइसेंस इन लोगों के पास है... अगर इन्होंने पुलिस को खबर की, तो पुलिस सीधे मेरे घर पहुंच जाएगी...

हे भगवान अब क्या होगा? खैर देखते हैं-

इतने में मेरी नजर रिसेप्शन पर पहले से बैठे हुए एक अधेड़ उम्र के आदमी पर पड़ी| उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि वह काफी पैसे वाला है और शायद वह यहां यौन सेवा यानी सर्विस लेने के लिए आया है| उसके हाथ में एक एल्बम था जिसमें कई सारी लड़कियों की तस्वीरें भरी हुई थी| मुझे याद आया रिसेप्शनिस्ट मुन्नी ने मुझे फोन पर कहा था कि मैं सर्विस के लिए अपना प्रोफाइल चुन सकती हूं; वह आदमी भी शायद यही कर रहा था- अपने लिए प्रोफाइल चुन रहा था|

लेकिन उस वक्त उसकी निगाहें मुझ पर ही टिकी हुई थी और वह मुझे ऊपर से नीचे तक नाप रहा था- शायद वह सोच रहा होगा क्या मैं सर्विस लेने आई हूं या फिर देने? और शायद इसीलिए अनजाने में ही उसका दूसरा हाथ उसके दो टांगों के बीच के हिस्से को सहला रहा था| मुझे यकीन हो गया कि अगर उससे किसी ने यह बताया होता कि मैं यहां सर्विस देती हूं- मैं यहां की कर्मचारी हूं, तो शायद वह सर्विस के लिए मुझे ही पसंद करता|

शायद इसीलिए मेरे पति और गोपा मौसी मेरा जींस और टीशर्ट पहनना पसंद नहीं करते| क्योंकि उनका मानना है कि जींस और टीशर्ट पहनने से मैं काफी अवांछित ध्यान आकर्षित करती हूं|

क्योंकि इस पहनावे में मेरा फिगर अच्छी तरह उभर कर आता है और मैं और भी सुंदर और मैं यौन रूप से बहुत आकर्षक दिखती हूं...

मुन्नी को रिसेप्शन से उठकर अंदर कमरे में जाने के शायद चंद ही मिनट गुजरे होंगे लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि न जाने क्यों काफी देर हो गई- पता नहीं सुबह-सुबह मेरे दिमाग में क्या भूत सवार हुआ था कि मैं गोपा मौसी की बातों में आ गई और मैंने सोचा कि जब मैं पाँक पाड़ा की लड़की हूं तो लेचारी करना- यानी कि पति के रहते हुए भी दूसरे मर्दों के साथ संबंध बनाना मेरा हक बनता है- तभी तो मैं यहां तक चली आई--- अब ना जाने कौन सी मुसीबत मेरे सर आने वाली है....

कि इतने में रिसेप्शन के बगल वाला दरवाजा खुला और उसमें से रिसेप्शनिस्ट मुन्नी मुस्कुराती हुई अंदर दाखिल हुई| रिसेप्शन की कुर्सी पर बैठकर उसने उस अधेड़ उम्र के आदमी से कहा, "सर? क्या आपने प्रोफाइल का चुनाव कर लिया है?"

उस आदमी ने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, "जी हां" फिर उसने मेरी तरफ एक बार देखा और फिर हाथ में वह वाला एल्बम लिए हुए रिसेप्शनिस्ट मुन्नी की तरफ गया और एल्बम खोलकर उसने एक तस्वीर पर अपनी उंगली रखी और फिर दोबारा उसने मेरी तरफ देखा|

अब तब तो मैं समझ गई थी कि अगर उस एल्बम में मेरी तस्वीर लगी हुई होती तो शायद वह मेरा ही चुनाव करता|

मुन्नी ने उस आदमी से कहा, "गुड चॉइस सर" यह कहकर उसने अपने टेबल पर लगे हुए एक स्विच को दबाया, और एक गुलाबी सलवार कमीज पहनी परिचारिका सी दिखने वाली औरत रिसेप्शन में आई|

मुन्नी ने दोबारा उस आदमी से कहा, "सर आप इनके साथ जाइए, यह आपको अपने कमरे तक ले जाएंगे- हैव ए नाइस टाइम, सर (एक अच्छा समय गुज़रिये, सर)"

उसके बाद मुन्नी ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और फिर बोलिए, "मिस, आपको मैडम ने अंदर बुलाया है---"

मैंने मन ही मन सोचा, मर गए! मैडम ने अंदर बुलाया है? मतलब मैं फंस गई, लेकिन अब कोई चारा भी तो नहीं है- मैडम ने बुलाया है तो अंदर जाना ही पड़ेगा|

रिसेप्शन में AC चल रहा था, लेकिन घबराहट के मारे मैं पसीना पसीना हो रही थी... पर मुझे क्या मालूम था कि मेरे लिए इससे भी बड़ा आश्चर्य इंतजार कर रहा था|

मैं जब रिसेप्शन के बगल वाले दरवाजे से अंदर एक ऑफिस रूम जैसे कमरे में दाखिल हुई तो मैंने देखा कि बड़े से टेबल के पीछे एक शानदार सी कुर्सी पर बैठी हुई है एक अति सुंदर 45 या 50 साल की औरत बैठी हुई है और जैसे ही उसने नजर उठाकर मेरी तरफ देखा... बाहर बड़े जोर से बदल गरजे पर मानो बिजली मेरे ऊपर गिरी...

क्रमशः
 

naag.champa

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अध्याय ४


यह ऑफिस रूम जहां में खड़ी थी वह काफी बड़ा कमरा था| कमरे में घुसते ही एकदम आखरी छोर पर एक बड़ा सा टेबल था जिसके पीछे एक बहुत ही महंगी लेदर की कुर्सी थी| कमरे की बांई तरफ दीवार पर एक बड़ा सा शोकेस था जहां सजावट की काफी सारी वस्तुएं रखी हुई थी और वह दिखने में बहुत ही महंगी लग रही थी|

उस कमरे की दाहिनी तरफ की दीवार पर एक बड़ा सा फ्लैट स्क्रीन टीवी लगा हुआ था| जिससे पूरी बिल्डिंग की सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी जा सकती थी|

मुन्नी मुझे कमरे में छोड़कर बड़े ही अदब के साथ सर नीचे करके ऑफिस रूम का दरवाजा बंद करती हुई कमरे से बाहर चली गई|

मेरे सामने बैठी थी एक एंग्लो इंडियन अधेड़ उम्र की औरत- उन्होंने एक बहुत ही महंगे गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी पहन राखी थी, जिसमें एक मोटा चौड़ा बार्डर था और उसमें बहुत ही बारीकी का ज़री डिज़ाइन सजा हुआ था और एक मैचिंग ब्लाउज जिसमें पतली - पतली कंधे की पट्टियाँ थीं जो कि आकर्षक रूप से उनके कंधों, उसकी बाहों को और निश्चित रूप से उनके स्तनों के विभाजन (क्लीवेज) के अधिकांश हिस्से को यौन आकर्षक तरीके से दर्शा रहा था। उसने अपने बालों को अपने सिर के पीछे बड़े करीने से एक जूड़े में बांध रखा था।

उन्होंने भी चंद लम्हों तक हैरानी से मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और फिर वह खुद ही मुस्कुरा कर अपनी कुर्सी से उठ कर मेरे पास आकर आ कर उसने मेरी तरफ हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया और फिर एक बहुत ही प्यारी मुस्कान के साथ उसने उससे कहा, " हेलो माय नेम इज मैरी डिसूजा... आई एम द प्रेसिडेंट एंड सीईओ ऑफ़ ब्लू मून क्लब (हैलो मेरा नाम मैरी डिसूजा है मैं ब्लू मून क्लब की प्रेसिडेंट और सीईओ हूं)"

मैंने भी डरते डरते अपना हाथ उनकी तरफ बढ़ाया और हाथ मिलाती हुई मैं बोली, "जी मेरा नाम शीला चौधरी है... मेरा मतलब... पीयाली दास... मतलब... मैं... जी... वह..."

एक तो पहले से ही मुझे इस बात का डर लगा हुआ था कि एक तो मैंने अपना नाम गलत बताया था न जाने अब क्या होने वाला था और मैरी डिसूजा को देखने के बाद मुझे जो झटका लगा था उस समय अभी तक उबर नहीं पाई थी|

"हा हा हा हा हा”, मैरी डिसूजा ठहाका मारकर हंस पड़ी, "क्या तुम इस बात से घबरा रही हो कि तुमने अपना नाम गलत बताया था? मैं समझ सकती हूं| ब्लू मून क्लब एक सेक्सुअली ओरिएंटेड एंटरटेनमेंट (यौन उन्मुख मनोरंजन क्लब) क्लब है... यहां आने वाले लोग अक्सर अपनी पहचान छुपाते हैं| यह बहुत ही आम बात है- लेकिन नियम और रिकॉर्ड के लिए हम उनका असली नाम और पता अपने पास हमेशा रखते हैं... यहां के सदस्य पुरुष और महिला दोनों है| हमारे इस क्लब का एक ही उद्देश्य है- हम एक दूसरे को आपस में मिलवा देते हैं ताकि उनका मेलजोल बढ़े और उनका मनोरंजन भी हो... और हां तुमने बिल्कुल सही सोचा, इन सब में कामुकता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वैसे मैं तो सही मानो तो तुमको देखकर मैं भी बहुत ही हैरान हो गई थी… आओ मेरे साथ..."

यह कहकर मैरी डिसूजा मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे सीसीटीवी कैमरे वाले टीवी के बगल में लगे हुए एक बड़े से आईने के सामने ली गई और फिर बोली, "बहुत दिनों से मेरे जान पहचान वाले कुछ लोग मुझसे पूछा करते थे कि क्या कोई मेरी बेटी भी शहर में रहती है या नहीं... इनमें से कुछ लड़कियां तो यहां कॉल सेंटर में भी काम करती हैं... हो सकता है तुम भी उसी कॉल सेंटर में काम करती होगी... उनकी बातें सुनकर पहले तो मुझे यकीन नहीं आया लेकिन आज तुमको आमने सामने देखकर मैं भी हैरान रह गई... वैसे तो हम दोनों के बीच कोई खून का रिश्ता नहीं है, लेकिन तुम इसे कुदरत का करिश्मा ही मान लो कि तुम्हारी और और मेरी शक्ल काफी हद तक मिलती-जुलती है... यहां तक की हमारी आंखों की पुतलियों का रंग भी भूरा-भूरा है अगर कोई अनजान आदमी हम दोनों को साथ साथ देख लेगा तो शायद यही सोचेगा कि हम लोग मां बेटी हैं"

तब मैंने भी नजरें उठाकर आईने की तरफ देखा- हां, मैरी डिसूजा का कहना बिल्कुल सही था|

यह कुदरत का करिश्मा और एक अदभुत संयोग ही था जो हम दोनों की शक्लें इतनी मिलती-जुलती है- हालांकि परिवार वालों का यह कहना है कि मैं अपने बाप पर गई हूं... और मेरी अपनी मां से मेरी शक्ल बिल्कुल भी नहीं मिलती... लेकिन यह आश्चर्य की बात है कि मेरी और मैरी डिसूजा की शक्ल में इतनी समानताएं हैं|

और इस बार में कोई दो राय नहीं कि अगर कोई अनजान आदमी हम दोनों को साथ साथ देख लेगा तो शायद यही सोचेगा कि हम लोग मां बेटी हैं|

अब मुझे समझ में आया जब मैं कॉल सेंटर में काम किया करती थी तब लोग बाग क्यों यह पूछा करते थे कि क्या मैं एंग्लो इंडियन हूं? क्या यहां मेरी कोई रिश्तेदार रहती है? कुछ लोगों का मानना था कि मेरी शक्ल एक बहुत ही मशहूर औरत से काफी मिलती-जुलती है…

मैरी डिसूजा ने कहा, “तुम्हारे अंदर अभी तक घबराहट भरी हुई है- मैं जानती हूं कि तुमने अपनी जिंदगी में पहली बार ऐसा कदम उठाया है”

इतने में एक परिचारिका एक ट्रे में बड़े-बड़े कांच के गिलास में भरी हुई शरबत लेकर ऑफिस रूम में दाखिल हुई|

मैं और मैरी डिसूजा उनके ऑफिस में लगे सोफे पर बैठकर शरबत की चुस्कियां लेने लगी और थोड़ी इधर-उधर की बातें करने लगे|

बातों बातों में मैंने उन्हें यह बता दिया कि मेरा मायका पाँक पाड़ा गांव में है और यह सुनकर मैरी डिसूजा बहुत खुश हूं जैसा कि मैंने कहा था वहां लेचारी प्रथा (मनोरंजन और फायदे के लिए पराए मर्दों के साथ संबंध बनाना) एक फैशन है|

अभी मैंने आधा गिलास शरबत पिया ही था, कि मुझे बहुत ही हल्का हल्का महसूस होने लगा|

ऐसा लग रहा था कि मानो मेरी सारी घबराहट और तनाव जैसे दूर हो गए है... अचानक मुझे एक अजीब तरह खुशी महसूस होने लगी और मैं धीरे-धीरे मुस्कुराने और हंसने लगी... शायद उस शरबत में कुछ ऐसा था जिससे मुझे हल्का हल्का नशा सा होने लगा था|

और सबसे बड़ी बात मेरी और मैरी डिसूजा के बीच करीब 15 या 20 मिनट तक की ही बातचीत हुई होगी लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं उनको बरसों से जानती हूं; इसलिए मैं उसे काफी घुलमिल गई थी|

ब्लू मून क्लब की मालकिन मैरी डिसूजा एक बहुत ही तजुर्बेदार औरत थी| वह बातें तो मुझसे कर रही थी लेकिन साथ ही वह मेरी हालत का जायजा भी ले रही थी और शायद मन ही मन उन्होंने भाँप लिया कि अब मैं अपना अगला कदम लेने के लिए तैयार हूं, इसलिए उन्होंने मुझसे कहा, "तुमने यहां अपना नाम पीयाली दास बताया था- आज के बाद मैं तुम्हें इसी नाम से पुकारऊंगी... तुम यहां सर्विस के लिए आई हो और हमारे उसूलों के मुताबिक तुम्हें यहां अपना प्रोफाइल चुनने की आजादी है- लेकिन मैंने तुम्हारे लिए प्रोफाइल चुन लिया है और वह शायद अब तक आ चुका होगा इसलिए तुम मेरे साथ लॉकर रूम में चलो मैं तुमको वहां सर्विस के लिए तैयार कर दूंगी”

मैंने दो-तीन और बड़े-बड़े घूंट लिए और बाकी का शरबत पूरा का पूरा पी गई|

क्रमशः
 

naag.champa

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आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

आशा है आपको इस कहानी के बाकी के अध्याय भी अच्छे लगेंगे
 

SANJU ( V. R. )

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Congratulations for new story madam.
Starting kafi acchi ki hai aapne. Ladki ka naam , place ka naam aur ladies ke private part ka naam pure Bengali hai 😅

Dekhte hai Piyali Das ka full body massage kis tarah se hota hai. Hope Erotic hi hona chahiye.
 

Sanjay dham

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आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

आशा है आपको इस कहानी के बाकी के अध्याय भी अच्छे लगेंगे
काफी दिन पहले आपकी एक स्टोरी आई थी। इसी ग्रुप पर। लेचारी के ऊपर। जो आपने बीच में छोड़ दी थी। दो औरते मंत्री जी के फार्म हाउस पर जाति है। इस टाइप की। वो पूरी करो ना। प्लीज
 

Sanjay dham

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दोनो देवरानी और जेठानी होती है। एक कॉलेज गर्ल बन कर और दूसरी स्कूल गर्ल बन कर जाति है
 
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