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Erotica फागुन के दिन चार

komaalrani

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फागुन के दिन चार

भाग ५० रिपोर्ट पृष्ठ ४८८

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Premkumar65

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स्ट्रिप टीज


मैं उन दोनों के साथ छत के बीच में आ गया जहाँ चंदा भाभी, संध्या और दूबे भाभी बैठी थी। गुड्डी और रीत मेरे दोनों ओर खड़ी थी मुझे शरारत से ताकती। दोनों के अंगूठे मेरे बर्मुडा में फँसे थे और मेरी पीठ चंदा और दूबे भाभी की ओर थी। थोड़ा सा मेरा बर्मुडा उन्होंने नीचे सरका दिया।

“अभी कुछ नहीं दिख रहा है…” संध्या भाभी चिल्लायी।

“साले को पहले निहुराओ…” दूबे भाभी ने हुकुम दिया।

मैं अपने आप झुक गया, और रीत और गुड्डी ने एक झटके में बर्मुडा एक बित्ते नीचे सीधे मेरे नितम्बों के नीचे। दूबे भाभी और चंदा भाभी की आँखें वहीं गड़ी थी। लेकिन दुष्ट रीत ने अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को ढक लिया और शरारत से बोली-

“ऐसे थोड़ी दिखाऊँगी, मुँह दिखाई लगेगी…”

“दिखाओ ना…” संध्या भाभी बोली- “अच्छा थोड़ा सा…”

रीत ने हाथ हटा दिया लेकिन गाण्ड की दरार अभी भी हथेलियों के नीचे थी।

“चल दे दूंगी। माल तो तेरा मस्त लग रहा है…” दूबे और चंदा भाभी एक साथ बोली।

रीत ने हाथ हटा दिया, और दूबे भाभी से बोली-

“चेक करके देख लीजिये एकदम कोरा है। अभी नथ भी नहीं उतरी है। सात शहर के लौंडे पीछे पड़े थे लेकिन मैं आपके लिए पटाकर ले आई।

दूबे भाभी भी। उन्होंने अपनी तर्जनी मुँह में डाली कुछ देर तक उसे थूक में लपेटा और फिर थोड़ी देर तक उसे मेरी पिछवाड़े की दरार पे रगड़ा।

मुझे कैसा-कैसा लग रहा था

चंदा भाभी ने अपने दोनों मजबूत हाथों से मेरे नितम्बों को कसकर फैलाया और दूबे भाभी ने कसकर उंगली घुसेड़ने की कोशिश की। फिर निकालकर वो बोली-


“बड़ी कसी है, इत्ती कसी तो मेरी ननदों की भी नहीं है…”

लेकिन संध्या भाभी तो कुछ और देखना चाहती थी उन्हें अभी भी विश्वास नहीं था, कहा-

" रीत आगे का तो दिखाओ। उतारकर खोल दो ना क्या?”

मैं सीधा खड़ा हो गया। रीत और गुड्डी ने एक साथ मेरा बरमुडा खींच दिया।

वो नीचे तो आया लेकिन बस मेरे तने लण्ड पे अटक गया और रीत और गुड्डी ने फिर उसे अपनी हथेलियों में छिपा लिया, बेचारी भाभियां बेचैन हो रही थी। इस स्ट्रिप शो में।

“दिखाओ ना पूरा…” सब एक साथ बोली।

और अगले झटके में बरमुडा दूर। मैं हाथ से छिपा भी नहीं सकता था। वो तो पहले ही संध्या भाभी की ब्रा में बंधा था। रीत अपने हाथ से उसे छिपा पाती, इसके पहले ही संध्या भाभी ने उसका हाथ पकड़ लिया, और जैसे स्प्रिंगदार चाकू निकलकर बाहर आ जाता है वो झट से स्प्रिंग की तरह उछलकर बाहर।

लम्बा खूब मोटा भुजंग। बीच-बीच में नीले स्पोट, धारियां।

ये उसका असली रंग नहीं था। लेकिन उसको सबसे ज्यादा रगड़ा पकड़ा था रंग लगाया था दूबे भाभी ने और ये उनके हाथ की चमकदार कालिख थी। जिसने उसे गोरे से काला बना दिया था। उसे आखिरी बार पकड़ने वाली संध्या भाभी थी इसलिए उनके हाथ का नीला रंग, उनकी उंगलियों की धारी और स्पोट के रूप में थी।

गुड्डी और रीत ने जो लाल गुलाबी रंग लगाये थे, वो दूबे भाभी की लगाई कालिख में दब गए थे। सब लोग ध्यान से देख रहे थे, खासतौर से संध्या भाभी। शायद वो अपने नए नवेले पति से कम्पेयर कर रही थी।

“अरे लाला ससुराल का रंग है वो भी बनारस का, जाकर अपनी छिनार बहना से चुसवाना तब जाकर रंग छूट पायेगा…” दूबे भाभी बोली।

“कोई फायदा नहीं…” ये चंदा भाभी थी- “अरे रंग पंचमी में तो आओगे ही फिर वही हालत हो जायेगी…”
Ufffffff kitna excitement create karti ho app Komal ji.
 

Premkumar65

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रीत


रीत ने एक अंगड़ाई ली और जैसे बोर हो रही हो। बोली-

“भाभी चलो न शो खतम। देख लिया। होली भी हो ली। अब इन्हें जाने दो। ये कल से अपने मायके जाने की रट लगाकर बैठे थे। ये तो भला हो गुड्डी और चंदा भाभी का इन्हें रोक लिया की कहीं रात में ऊँच नीच हो जाय। तो इन्हें क्या? नाक तो हमीं लोगों की कटेगी ना। और सुबह से होली का था तो चलो होली भी हो ली। इन्होंने गुझिया और दहीबड़े भी खा लिए। हम लोग भी नहा धोकर कपड़े बदले वरना, चलो न।

गुड्डी तुम भी तैयार हो जाओ, वरना ये कहेंगे की तुम्हारे कारण देर हुई। जल्दी जाओ वरना देर होने पे फिर इनके मायके में डांट पड़े. मुर्गा बना दिया जाय…”

“मैं आपके बाथरूम में नहा लूं भाभी? कपड़े मैंने पहले से ही निकालकर रख दिए हैं बस। वैसे मुझे आज थोड़ा टाइम भी लगेगा नहाने में सिर धोकर नहाना होगा…”

गुड्डी ने चंदा भाभी से पूछा।

“तो नहा लो ना। इसके पहले कभी नहाई नहीं क्या? गुंजा के साथ कित्ती बार। उसी के कमरे वाले बाथरूम में नहा लेना…” चंदा भाभी बोली।

मुझे बड़ी परेशानी हो रही थी। सब लोग ऐसे बातें कर रहे थे जैसे मैं वहां होऊं ही नहीं। मैंने पूछ ही लिया- “लेकिन मेरा क्या? मैं कैसे नहा, तैयार…”

“तो कोई आपको नहलाएगा, तेल फुलेल लगाएगा, श्रृंगार कराएगा, सोलहों श्रृंगार…” रीत तो जैसे खार खाए बैठी थी।

“अरे जहाँ सुबह नहाया था वहीं नहा लेना। ये भी कोई बात है। मेरे कमरे वाले बाथरूम में…” चंदा भाभी बोली।

“अरे इसकी क्या जरूरत है भाभी। यहीं छत पे नहा लेंगे ये। कहाँ आपका बाथरूम गन्दा होगा रंग वंग से। फिर इनका आगा भी देख लिया पीछा भी देख लिया फिर किससे ये लौंडिया की तरह शर्मा रहे हैं?” कहकर रीत ने और आग लगाई।

“नहीं वो तो ठीक है नहाना वहाना। लेकिन कपड़े। कपड़े क्या मैं। कैसे मेरे तो…” दबी आवाज में मैंने सवाल किया।

“ये कर लो बात कपड़े। किस मुँह से आप कपड़े मांग रहे हो जी? सुबह कितनी चिरौरी विनती करके गुंजा से उसकी टाप और बर्मुडा दिलवाया था, और आपने उसको भी,... आपको अपने कपड़े की पड़ी है और मैं सोच रही हूँ की किस मुँह से मैं जवाब दूंगी उस बिचारी को? कित्ता फेवरिट बर्मुडा था। क्या जरूरत थी उसे पहनकर होली खेलने की?”

गुड्डी किसी बात में रीत से पीछे रहने वाली नहीं थी।

“अरे ऐसे ही चले जाइए ना। बस आगे हाथ से थोड़ा ढक लीजियेगा। और किसी दुकान से गुड्डी से कहियेगा तो मेरी सहेली ऐसी नहीं है, चड्ढी बनयान दिलवा देगी…” रीत बोली।

“सही आइडिया है सर जी…” गुड्डी और संध्या भाभी साथ-साथ बोली।

“नहीं ये नहीं हो सकता…” चंदा भाभी बोली-

“अरे तुम सब अभी बच्ची हो तुम्हें मालूम नहीं इसी गली के कोने पे सारे बनारस के एक से एक लौंडेबाज रहते हैं और ये इत्ते चिकने हैं। बिना गाण्ड मारे सब छोड़ेंगे नहीं, इसीलिए तो इन्हें रात में नहीं जाने दिया। और अगर दिन दहाड़े तो इनकी गाण्ड शर्तिया मारी जायेगी।



रीत बोली- “भाभी आप भी ना बिना बात की बात पे परेशान। गाण्ड मारी जायेगी तो मरवा लेंगे इसमें कौन सी परेशानी की बात है? कौन सा ये गाण्ड मरवाने से गाभिन हो जायेंगे? फिर कुछ पैसा वैसा मिलेगा तो अपनी माल कम बहना के लिए लालीपाप ले लेंगे। वो साली भी मन भर चाटेगी चूसेगी, गाण्ड मारने वाले को धन्यवाद देगी…”

“नहीं ये सब नहीं हो सकता…” अब दूबे भाभी मैदान में आ गईं।

मैं जानता था की उनकी बात कोई नहीं टाल सकता।

“अरे छिनारों। आज मैंने इसे किसलिए छोड़ दिया। इसलिए ना की जब ये रंग पंचमी में आएगा तो हम सब इसकी नथ उतारेंगे। लेकिन इससे ज्यादा जरूरी बात। अगर ये लौंडेबाजों के चक्कर में पड़ गया ना तो इसकी गाण्ड का भोंसड़ा बन जाएगा। तो फिर ये क्या अपनी बहन को ले आएगा? तुम सब सालियां अपने भाइयों का ही नहीं सारे बनारस के लड़कों का घाटा करवाने पे तुली हो। कुछ तो इसके कपड़े का इंतजाम करना होगा…”

अब फैसला हो गया था। लेकिन सजा सुनाई जानी बाकी थी। होगा क्या मेरा?

जैसे मोहल्ले की भी क्रिकेट टीमेंm जैसे वर्ड कप के फाइनल में टीमें मैच के पहले सिर झुका के न जाने क्या करती हैं, उसी तरह सिर मिलावन कराती हैं, बस उसी अंदाज में सारी लड़कियां महिलाये सिर झुका के। और फिर फैसला आया। रीत अधिकारिक प्रवक्ता थी।



रीत बोली-

“देखिये मैं क्या चाहती थी ये तो मैंने आपको बता ही दिया था। लेकिन दूबे भाभी और सब लोगों ने ये तय किया है की मैं भी उसमें शामिल हूँ की आपको कपड़े,... लेकिन लड़कों के कपड़े तो हमारे पास हैं नहीं। इसलिए लड़कियों के कपड़े। इसमें शर्माने की कोई बात नहीं है। कित्ती पिक्चरों में हीरो लड़कियों के कपड़े पहनते हैं तो। हाँ अगर आपको ना पसंद हो तो फिर तो बिना कपड़े के…”
Bahut hi mast update diya hai Komal ji apace bas majaaa aa gaya.
 

komaalrani

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Chanda Bhabhi ka jadu ab bhi chalu hai

Meri bhi Didi hai unke sasural jata hai toh full hasi mazak hota hai

Aapne wo sab yaad dila diya & Specially Didi

Thank U
आपने एकदम सही कहा, यह कहानी जिंदगी के आसपास मंडराती है, फैंटेसी की चाशनी तो है, लेकिन माहौल घर का, ससुराल का है। ढक्कन भले ही इरोटिका का हो लेकिन अंदर रोमांस और रोजाना की जिंदगी ही है, और चंदा भाभी तो सच में आनंद बाबू की गुरुआनी हैं और गुड्डी की सहेली भी राजदार भी।

बहुत बहुत आभार इन सटीक कमेंट्स के लिए , आगे भी इन्तजार रहेगा, जिन जिन पार्ट को आप पढ़ेंगे उनकी प्रतिक्रिया जानने का

:thanks: :thanks:
 

komaalrani

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Gudiya or Anand ki ye mastiya
New Love main aaye couples ka perfect example hai special chote sehro se

Amazing Mam
एकदम आपने पते की बात कही, छोटे शहरों का रोमांस, कोई रिश्ते की, जान पहचान की लड़की हो ( इंसेस्टिया नहीं ) और जाने अनजाने, बिना किसी प्रयास के बात बढ़ती जाए, कई बार वो बात देह तक पहुँचती हैं तो कई बार नहीं भी, कई बार किताबों में रखे सूखे फूलों की तरह अतीत की यादें, मन को साल देती हैं, पर वह कुछ पल ही, कितनी बार धूप भरी, बिना छाँह वाली जिंदगी की यात्रा के पाथेय बन के साथ रहते हैं, और १०० में १ बार शायद वो जान पहचान जिंदगी का रिश्ता भी बन जाती है,

क्या होगा, गुड्डी और आनंद बाबू का बस साथ बने रहिये

मेरी कहानियों में हर पोस्ट में, हर पार्ट में देह संबंध शायद न मिले, लेकिन सुख मिलेगा, कई बार जो सुंख आँख भर देख लेने का मुंह भर के बतिया लेने का होता है, वो चलताऊ यांत्रिक सेक्स में नहीं मिल पाता।

मुझे विश्वास है इस थ्रेड को अपनी लगातार उपस्थिति से आप अनुग्रहित करते रहेंगे।

पुन: आभार
 

komaalrani

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Bechare Anand ki toh sabne milkar maar li, wo bhi bina thook lagaye 😄
ससुराल है वो भी बनारस की और माहौल में फागुन रचा बसा है,

तो ये तो होना ही था।
 

komaalrani

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komaalrani

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Best part tha jab chutki sach main belan le aayi

Us time padte hue main bhi hasi nahi rok paaya

Amazing
😂 😂 😂 😂एकदम सही कहा आपने, छुटकी बीच बीच में कहानी में आती रहेगी, छोटी है लेकिन इतनी छोटी भी नहीं।
 

komaalrani

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Definitely Bahut acha likhti hai
Thanks Thank You GIF by 大姚Dayao
 
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एकदम आपने पते की बात कही, छोटे शहरों का रोमांस, कोई रिश्ते की, जान पहचान की लड़की हो ( इंसेस्टिया नहीं ) और जाने अनजाने, बिना किसी प्रयास के बात बढ़ती जाए, कई बार वो बात देह तक पहुँचती हैं तो कई बार नहीं भी, कई बार किताबों में रखे सूखे फूलों की तरह अतीत की यादें, मन को साल देती हैं, पर वह कुछ पल ही, कितनी बार धूप भरी, बिना छाँह वाली जिंदगी की यात्रा के पाथेय बन के साथ रहते हैं, और १०० में १ बार शायद वो जान पहचान जिंदगी का रिश्ता भी बन जाती है,

क्या होगा, गुड्डी और आनंद बाबू का बस साथ बने रहिये

मेरी कहानियों में हर पोस्ट में, हर पार्ट में देह संबंध शायद न मिले, लेकिन सुख मिलेगा, कई बार जो सुंख आँख भर देख लेने का मुंह भर के बतिया लेने का होता है, वो चलताऊ यांत्रिक सेक्स में नहीं मिल पाता।

मुझे विश्वास है इस थ्रेड को अपनी लगातार उपस्थिति से आप अनुग्रहित करते रहेंगे।

पुन: आभार
Har post main agar sex hi padna ho toh sidha Porn dekh le hum, kahani ka asli maza us sex se pehle ki excitement aur usse judi Bhavanon ka hai

Aur aap waisa hi khubsurat likhti hai

Mujhe aapse bahut kuch seekhne ko milega
 

komaalrani

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