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Adultery पिटारा कामुक कल्पनाओ का

Deeply

सवित्रा
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छोटी- छोटी कहनियो का समूह है यह पिटारा जादा बड़ी कहनियाँ नही होगी जिससे कम समय मे अच्छी कहनियाँ दी जा सके इसमे सभी प्रकार की कहनियाँ होगी जो आपके मार्गदर्शन पर आगे बढ़गी अतः आपके प्रोत्साहन पर ही यह कलम आगे बढेगी, आप कहानी का प्लाट वा नाम सुझा सकते है कि अगली कहानी कौन सी हो



सांवली संध्या का सफर
संध्या सांवली गोल चेहरा भरा शरीर कामुक कमसीन उम्र छाती पर उभार आ चुके थे कच्चे अमरूद की तरह चुतड़ गोल उभार लिए जो गॉव के बुडड़ो का लंड भी खड़ा कर दे 32 की कमर उस पर जान डाल देते थे गरीबी ने जादा पढने नही दिया, गॉव का माहौल मे बढी माँ के साथ एक छोटे मकान मे रहती थी बाप मुम्बई मे कमाता था एक छोटी सी चाल मे रहता था अचानक माँ की तबीयत खराब हुई और मृत्यु को प्राप्त हुई बाप ने क्रियाकर्म किया मगर पैसा कमाने तो जाना था अकेले संध्या को गॉव भी नही छोड़ा जा सकता था तो निकल पड़ा संध्या को लेकर मुम्बई की ओर, रेलवे स्टेशन की भीड डरी सहमी संध्या अपने बाप राकेश के साथ ट्रेन की सफर की ओर निकलने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे थे तभी स्पीकर से आवाज आई मुम्बई जाने वाली ट्रेन कुछ देर मे प्लेटफार्म नम्बर दो पर आयेगी
 

malikarman

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छोटी- छोटी कहनियो का समूह है यह पिटारा जादा बड़ी कहनियाँ नही होगी जिससे कम समय मे अच्छी कहनियाँ दी जा सके इसमे सभी प्रकार की कहनियाँ होगी जो आपके मार्गदर्शन पर आगे बढ़गी अतः आपके प्रोत्साहन पर ही यह कलम आगे बढेगी, आप कहानी का प्लाट वा नाम सुझा सकते है कि अगली कहानी कौन सी हो



सांवली संध्या का सफर
संध्या सांवली गोल चेहरा भरा शरीर कामुक कमसीन उम्र छाती पर उभार आ चुके थे कच्चे अमरूद की तरह चुतड़ गोल उभार लिए जो गॉव के बुडड़ो का लंड भी खड़ा कर दे 32 की कमर उस पर जान डाल देते थे गरीबी ने जादा पढने नही दिया, गॉव का माहौल मे बढी माँ के साथ एक छोटे मकान मे रहती थी बाप मुम्बई मे कमाता था एक छोटी सी चाल मे रहता था अचानक माँ की तबीयत खराब हुई और मृत्यु को प्राप्त हुई बाप ने क्रियाकर्म किया मगर पैसा कमाने तो जाना था अकेले संध्या को गॉव भी नही छोड़ा जा सकता था तो निकल पड़ा संध्या को लेकर मुम्बई की ओर, रेलवे स्टेशन की भीड डरी सहमी संध्या अपने बाप राकेश के साथ ट्रेन की सफर की ओर निकलने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे थे तभी स्पीकर से आवाज आई मुम्बई जाने वाली ट्रेन कुछ देर मे प्लेटफार्म नम्बर दो पर आयेगी
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सांवली संध्या का सफर 2
राकेश चल संध्या और एक बोरे को उठा राकेश चल पड़ा रेलेवे पुल की तरफ पीछे पीछे संध्या भूरे रंग की सफेद बिंदी लगी फ्रांक मे नीचे मात्र चड्डी पहनी थी फ्रांक भी घुटने भर थी उसके चहरे इतना कामुक कमसीन था की किसी को भी उससे प्यार हो जाये राकेश एक पुरानी फटी कमीज वा पैजामे मे था चारो तरफ एक भीड़ को झोका आया राकेश ने तुरंत संध्या का हाथ पकड़ लिया भीड़ के बीच दोनो दब से गये तभी किसी ने संध्या के दोनो चुतड़ो को फ्रांक के ऊपर कस के पकड़ लिया,
संध्या ऊईई माँ
उसने पीछे देखा एक बुड्डा तम्बाकू मुँह मे भरे दॉत निकालाते हुये मुस्करा रहा था
संध्या ये दादा हटो पीछे से
तभी अचानक एक धक्का सा लगा क्योंकि ट्रेन आ चुकी थी लोग दौड रहे थे पागलो की तरह
बुडडा तहमद कुरते मे था नाम था रामू कद मे छोटा मगर शरीर से मोटा उम्र 55 के आस पास तहमद के नीचे कुछ ना पहनना उसकी आदत थी
रामू का करे बटिया इतनी भीड़ है सभला ही नही जा रहा
तभी एक भीड़ का एक रेला बॉयी ओर से आया तो पुल की सीढ़िया से उतर रहे थे कि एक मनचले ने बायी ओर से संध्या की चुची कस के मसल कर जल्दी से आगे बढ चला संध्या हाये दईया कह कर मचल उठी
रामू क्या हुआ बिटिया
संध्या उसे घुरती हुई
रामू ने देखा संध्या दर्द से आँखे छलक आई थी उसने संध्या के दोनो चुतड़ो को फैलाते हुये गांड की दरार मे ऊँगली चलाते हुये
रामू साले बड़े हरामी है आजकल के लौडे दूसरो की बेबसी का फयादा उठाते है बिटिया, जादा दर्द हो रहा है
संध्या ने अपने प्रति अपनापन देख प्यार से बोला
संध्या जी अब आराम है चाचा
रामू चाचा शब्द सुनते खुश हो गया और प्यार से उसके चुतड़ सहला दिये तभी एक भीड़ का और रेला आया रमेश ने आचनक जो उसके पीछे हो गया था आगे बढकर उसका हाथ पकड़ किनारे ले आया ट्रेन स्टेशन पर था ट्रेन अभी आधे घंटे खड़ी होने थी मगर भीड़ जम कर थी स्लीपर तक मे लोग भेड़ बकरी की तरह भरे हुये थे रमेश के पास जनरल का टिकट था तो वो जनरल डिब्बे की ओर बढने लगे
 

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सांवली संध्या का सफर 3

दोनो लोगे जनरल डब्बे तक पहुंचे मगर देखा तो लोग बुरी तरह से भरे पड़े है लोग गेट पर लटके है ट्रेन सीटी दे रही थी माने ट्रेन चलने वाली थी
रकेश बेटा इसी मे ही चढना पड़ेगा वरना इसके बाद कोई ट्रेन कल तक नही और किसी तरह दोनो घुस गये मगर खड़े होने की जगह तक नही कहाँ घुस रहे हो मादरचोद जगह नही है
राकेश अंदर जाने दो भाई
आदमी बेटीचोद जगह कहाँ है जो घुसेगा अपनी बीबी का भोसड़ा समझा है जो इतनी भीड़ मे घुसा जा रहा है उतर दूसरी ट्रेन पकड़ लेना
राकेश अंदर घुसने द्दो ट्रेन चल पड़ी है
चलती ट्रेन मे संध्या के चुतड़ो को पकड़ अंदर धकेल दिया और अपने दरवाजे का हथ्था पकड़ लहक गया ट्रेन चल पड़ी
आदमी बेटीचोद अंदर आ गया है तो यह मत खड़ा हो अंदर चला जा
दोनो भीड मे अंदर घुसने लगे तिल रखने भर की जगह अंदर ना थी खिसकते खिसकते वो टायलेट के पास पहुंचे वहाँ भी कसमकसा थी रकेश ने देखा उसकी चाल का साथी रामू एक टायलेट के अंदर बैठा है
रकेश अरे रामू तू तू भी आज ही मुम्बई जा रहा है
रामू अरे रकेशवा तू आ इधर आ, ट्रायलेट के तरफ दोनो बढ गये वहाँ तक पहुंचने मे भी बड़ी मशक्कत करनी पड़ी बरहाल ट्रायलेट मे रामू के अलावा कोई नही था संध्या और राकेश को अंदर लेकर रामू ने अबकी ट्रायलेट भी लॉक कर दिया जिससे कोई अब आ ना पाये ट्रेन अपनी स्पीड से चल पड़ी सुपर फास्ट ट्रैन थी जो सीधे शाम तक मुम्बई पहुॅचा देनी थी
रामू बैठो दोनो रकेश ने देखा की ट्रायलेट साफ था नल के पास चादर बिछा के रामू बैठा था रकेश बोरा उठा का ट्रायलेट के बॉसबेसन पर रख देता है वा दरवाजे से सट कर चादर बिछा लेता है संध्या वा राकेश आराम से उस पर बैठ जाते है
रामू यह तेरी बिटिया है
राकेश हाँ यार यही है संध्या, बेचारी बिन माँ की हो गई है
रामू बड़ी हो गई है सच लड़कियाँ जल्दी जवान हो जाती है रामू उसकी छाती को घुरते हुये
राकेश तभी मै इसे अपने साथ ले आया कोई वहाँ अपना है भी नही गांव का माहौल तो तु तो जानता है
रामू सही किया तुने वरना तेरे गाँव मे बड़ा हरामीपना सुना नही तेरे गाँव का हरिया उसकी महरारू को चोद चोद कर गभीन कर देते हरिया बेचारा जब जाता तब उसकी महरारू पेट से होती परेशान हो कर उसने उसकी नशबंदी कर दी
राकेश उस रंडी का नाम ना ले गाँव का हर लंड खा चुकी है
रामू उसकी बिटिया भी कम नही
राकेश अरे नही यार अभी वो छोटी है, अकसर मेरे घर आती है और संध्या की अच्छी सहेली भी है ना संध्या
संध्या जैसे होश मे आई हाँ बापू बड़ी अच्छी लड़की है वो( संध्या का वाप ठरकी था यह तो वो जानती थी मगर इस तरह की बात वो पहली बार सुन रही है वो गर्म हो रही थी यह निशानी उसकी फ्रांक के अंदर की गीली होती )
रामू तेरी संध्या से एक दो साल ही छोटी होगी रज्जू के बाग मे घोड़ी बना कर उसकी गांड मे लंड फसाया था मै गुजरा रहा था तो देखता हूँ हरिया की बिटिया घोड़ी बना प्रधान अपना इतना लंड( अपनी तहमद के ऊपर अपना लंड पकड कर दिखाते हुये) उसकी गांड मे घुसाये हुये था
संध्या रकेश दोनो की निगाह पड़ी रामू तहमद के ऊपर अपना खड़ा लंड पकड़े था ऊपर से ही अहसास देता था की आठ इंच से लंबा लंड है और मुट्ठी मे ना समाये इतना मोटा
संध्या की बुर पानी फेक चुकी थी यह नजारा देख
रकेश बाप रे इतनी चालू थी हरिया की बिटिया
रामू और क्या दूसरे धक्के मे प्रधान ने पुरा लंड पेल दिया हरिया के छोरी के, उसकी आवाज पूरे बाग मे गुंज उठी, ध्यान से देखा तो उसका गांड का छल्ला फैल गया था और उसमे खून निकल रहा था
रकेश साला प्रधान है भी हरामी पहली बार था उस बेचारी का लगता है
रामू हाँ ये तो है हर धक्के पर चिल्ला रही थी जब प्रधान खत्म हो ऊठा तो मैने प्रधान को पकड़ लिया तो उसने कहा तु भी चख ले
रकेश तब
रामू हँसते हुये तब क्या वो नंगी पड़ी ही थी मैने उसे फिर घोड़ी बनाया और एक बार अपना यह पहलवान उसकी गांड मे उतार दिया
रामू ने अपना लंड तहमद मे लहराते हुये बताया
रकेश साला तु भी बड़ा हरामी है
संध्या दोनो की बाते सुन गरम हो रही थी बस लज्जा वश वो अपने हाथ से चुत तक नही ले जा पा रही है
रकेश साला प्रधान बड़ा हरामी है इसकी मॉ की बताती थी संध्या की शादी कर दो प्रधान की निगाह है इस पर
रामू वो तो है तेरी संध्या उसके लायक हो गई है अब तक बची वही बड़ी बात है सही किया तुने जो ले आया वरना इसे चोद चोद के जरूर वो गाभिन कर देता
संध्या अब बोल ही पड़ी छि चाचा कैसी गंदी बात करते हो
रामू बेटा यह समाज है समाज मे ऐसा होता है तो जवान होती बेटी इसे जान ले समझे ले तो बच भी सकती है वरना हरिया के बिटिया की तरह चोदी जाती है
रकेश वो तो है तभी मै भी सोचता हूँ इसकी जल्द शादी कर दूँ
रामू मेरा बेटा दीनू कैसा है इसके लिए
रकेश सच यार जे काम हो जाये तो बड़ा बोझ उतरे
रामू यारी रिश्तेदारी मे बदले यही मे चहाता हूँ अगले सोमवार को तेरे चाल इसका रिश्ता लेकर आऊँगा
राकेश बेटी जा अपने ससुर के पैर छु
संध्या उठकर जैसे ही रामू की तरफ बढी
रामू ने दोनो टॉगे फैला दी जिसके फलरूवरूप उसका विकराल लंड तहमद के बीच से निकल पड़ा
संध्या ने जीवन मे पहली बार लंड देखा था वो भी इतना विकराल मोटा इतने पास
संध्या हाये मईया इततत
रकेश संध्या के पीछे था तो जान ना पाया क्या हुआ
रामू देख लो बेटी मेरे घर मे आना है तो सबका ख्याल रखना होगा
रकेश अरे मेरी बेटी बहुत समझदार है सबका ख्याल रखेगी ना बिटिया
संध्या मुस्कराती हुई जी बापू मै इनके सबका का ख्याल रखूंगी
और रामू का लंड पकड़ते हुये
संध्या बस ये खुश रहे और मुझे क्या चाहा
और लंड पकड़कर तहमद के अंदर कर दिया और पैर छुकर वापस अपने जगह बैठ गई
संध्या चुप ही रही और दोनो की बातो के मजे भी लेती रही
रकेश वैसे तेरे लंड की मोटाई तो मेरे लंड से भी मोटा है पजामे के ऊपर से पकड़ते हुये खकेश बोला
संध्या पहली बाप अपने बाप के लंड पर निगाह गई जो रामू जितना ही लम्बा लग रहा था बस मोटाई कुछ कम थी
रामू वो तो है तभी दूसरा धक्का लगाने के लिए लंड बाहार निकाला तो सोनी की टट्टी पुरे लंड पर लगी थी मैने सीधे उसे सोनी के मुँह मे डाला और बोला रंडी साफ कर साली इसे गंदा कर दिया
सोनी रोते हुये बबूजी आपका बहुत मोटा है टट्टी निकल जायेगी बुर मार लो बबूजी
मैने बोला साली नखरा मत कर
सोनी बबूजी छोड़ दो मै आपकी बेटी बहु जैसी हूँ मुझे छोड़ दो
रकेश साली इमोशनल कर रही थी
रामू और क्या साली इमोशनल कर रही थी तो मैने भी बोल दिया बहु होती तो उसकी गांड अपने बेटे के सामने फाड़ता अपना लंड पकड़कर संध्या की तरफ इशारा किया
संध्या छी देखो बापू ससुर जी कैसी गंदी बाते कर रहे है
रकेश बेटा वो तो बस कहानी बता रहे है तेरी गांड थोड़ी मारेगे
रामू वो तो है हीहीहीही कर हँसने लगा
संध्या बापू सू सू लगी है
 

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सांवली संध्या का सफर 4
संध्या बापू सू-सू लगी है
रामू ने खिड़की से देखा तो ट्रेन आपनी रफ्तार से चल रही थी बेटा अभी ट्रेन तो लगभग 3 घंटे बाद ही किसी स्टेशन पर रुकेगी
संध्या हाये बापू बहुत तेज लगी है
रामू बेटा यह टायलेट सीट पर कर लो
मगर बापू वो वो
अरे बेटा मै तो तेरा बाप हूँ बाप से कैसा सरमाना
मगर ससुर जी
रामू क्या हुआ यार
रकेश वो यार संध्या मूतना चहाती है
रामू अरे बेटा हमसे कैसा सरमाना हम तो तेरे बाप जैसे है अब ससुर वैसे भी ससुर बाप ही होता है
मूत लो वरना मूत निकल जायेगा और कपड़े भी खराब होगे मुझे भी पेशाब लग रही है और यह कहते हुये उसने तहमद हटा दिया और अपना विकराल मोटा जो संध्या की कलाई से भी मोटा था उस पकड़ कर मूतने लगा
संध्या ध्यान से उस विकराल लंड को मूतते देख रही थी
 
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सांवली संध्या का सफर 4
संध्या बापू सू-सू लगी है
रामू ने खिड़की से देखा तो ट्रेन आपनी रफ्तार से चल रही थी बेटा अभी ट्रेन तो लगभग 3 घंटे बाद ही किसी स्टेशन पर रुकेगी
संध्या हाये बापू बहुत तेज लगी है
रामू बेटा यह टायलेट सीट पर कर लो
मगर बापू वो वो
अरे बेटा मै तो तेरा बाप हूँ बाप से कैसा सरमाना
मगर ससुर जी
रामू क्या हुआ यार
रकेश वो यार संध्या मूतना चहाती है
रामू अरे बेटा हमसे कैसा सरमाना हम तो तेरे बाप जैसे है अब ससुर वैसे भी ससुर बाप ही होता है
मूत लो वरना मूत निकल जायेगा और कपड़े भी खराब होगे मुझे भी पेशाब लग रही है और यह कहते हुये उसने तहमद हटा दिया और अपना विकराल मोटा जो संध्या की कलाई से भी मोटा था उस पकड़ कर मूतने लगा
संध्या ध्यान से उस विकराल लंड को मूतते देख रही थी
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सांवली संध्या का सफर 5
रामू ने मूतने के बाद अपने काले विकराल लंड को नेकर के अंदर कर लिए
संध्या डरी सी सहमी सी कोने मे बैठे उस लंड की विकरालता भाप रही थी समझ गई थी जिसकी सेवा का वादा किया है वो उसे बढा कष्ट देने वाला है डर से उसका हाथ एक बुर के ऊपर था डर से शायद कही यह मूत से साथ उसकी बुर का भौसड़ा ना बना दे
रामू क्या सोच रही हो बेटा तुम भी मूत लो शरमाओ मत बाप ससुर के सामने तो बेटी बहू नंगी होती ही है एक पाल पोस के बढा करता है तो एक चोद कर हाहाहह
उसकी हॅसी किसी शैतान से कम ना थी
तभी दरवाजे पर तेजी से दस्तक देता है कोई
आदमी खोल वे कौन अंदर खोल दरवाजा
मादरचोद अपने बाप की ट्रेन समझ ली है खोल दरवाजा
राजू गाली सुनते ही गुस्से मे दरवाजा खोलता है
राकेश संध्या देखते है तो यह वही आदमी है जो दरवाजे पर गाड़ी पर चढते समय नही चढने दे रहा था और गाली बक रहा था बाद मे पता चला उसका नाम राजन है
रामू क्या बे क्या दिक्कत है जो चिल्ला रहा है
राजन पेशाब करना है खाली करो ट्रायलेट यह बैठने की जगह है
रामू कही बैठने की जगह दे तो खाली कर दे
राजन अरे मै कहाँ से दूँ जगह
रामू तो हम यही बैठेंगे
राजन ओये हटेगा तो तेरा बाप भी पेशाब करनी है सुना नही
रामू तो सामने वाले मे कर ले
राजन उसमे पॉच लोग बैठे है
रामू तो
राजन तो क्या पेशाब करनी है कहाँ जाऊ
रामू देख यह तेरी समस्या है तु जान, हम नही निकलेने के जो तु उखाड़ सकता है उखाड़ ले
राजन नरम होते
राजन देखे भाई तु भी मुम्बई जा रहा है मै भी हम इस नाते भाई ही हुये समझ यार मेरी यह बेटी है इसको पेशाब लगी है
रामू की नजर उस ओर ऊठी एक गोरी ससुरा दूध भी उसके आगे हलका लगे दुबली सी काया पर स्तन इतने बड़े अश्चर्य था गांड भी उसकी कमर के औसत मे काफी बड़ी थी नाम था पूनम फेस का कट सोनाक्षी से कम क्या होगा पूनम दोनो हाथो से अपनी बुर को दबाई तो कोई भी जान सकता था उसे बड़े जोरो से पेशाब लगी है
रामू देख भाई बाहर खड़े होने की जगह तक नही है तेरी बेटी तक तुझसे सहारा लेकर खड़ी है हम तीन कैसे बाहर आयेगे
पूनम पापा जल्दी करो ना बहुत तेज लगी है
राजन यार कुछ कर बेचारी राहत पाये
रामू तो कर ले पेशाब मना किसने किया है राकेश थोड़ी देर के लिए चादर हटा लो बेचारी पेशाब कर ले तो फिर बिछा देना पानी मार कर
राजन तो तुम लोग भी यही रहोगे
रामू हँसते हुये भौसड़ी के हम कहाँ जायेंगे
पूनम हाये पापा अब बरदास्त नही हो रहा
राजन ठीक है मगर दरवाजा बंद कर लो वरना पूरी ट्रेन....
रामू अंदर आ चिंता ना कर तेरी बेटी मेरी बेटी
और दरवाजा बंद कर लेता है राजन और पूनम दोनो अंदर होते है
राजन को शायद मजबूरी वश आना पड़ा क्योंकि अंदर दो अनजान मर्द अकेली उसकी बेटी
रामू रुको बेटी थोड़ा समान किनारे कर ले वरना यहाँ तक छिटा जायेगा, वैसे तुम मुम्बई मे कहाँ रहते है
राजन चाल है भरोसे की दुकान के पीछे
रामू अरे हम भी वही के है नम्बर क्या है
राजन जी 140
रामू अरे वो तो गोली का था
राजन हाँ मै उसी का भाई हूँ
रामू हाँ बेटी कर लो
पूनम अपने बाप के चेहरे की ओर देखने लगी
राजन अरे भले लोग है फिर तुम्हारे चाचा लगेगे इनकी भी देखो एक बिटिया है तुम्हारी उम्र की क्या नाम है तुम्हारा
संध्या जी अंकल संध्या
तभी पूनम ने संकोचते हुये नाड़ा खोला चड्डी खिसका दी एक दम गोरे गोरे चुतड़ राकेश के सामने नंगे हो गये जिसे देख कर उसका लंड पैजामे मे ही खड़ा हो गया सामने रामू बैठा था पूनम जैसी ही बैठी उसने देखा रामू उसकी बुर को बड़े गोर से देख रहा है पूनम शर्म से उसके गोरे गाल लाल पड़ गये
तभी जोरो की सीटी की आवाज के साथ पेशाब की धार बह निकली रामू का लंड फनफना उठा तहमद मे यह बात पूनम ने भी नोट की
 

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सांवली संध्या का सफर 6

तभी पूनम ने संकोचते हुये नाड़ा खोला चड्डी खिसका दी एक दम गोरे गोरे चुतड़ राकेश के सामने नंगे हो गये जिसे देख कर उसका लंड पैजामे मे ही खड़ा हो गया सामने रामू बैठा था पूनम जैसी ही बैठी उसने देखा रामू उसकी बुर को बड़े गोर से देख रहा है पूनम शर्म से उसके गोरे गाल लाल पड़ गये
तभी जोरो की सीटी की आवाज के साथ पेशाब की धार बह निकली रामू का लंड फनफना उठा तहमद मे यह बात पूनम ने भी नोट की
राजन बेबस नंगी बेटी को गैर मर्दो के सामने मूतते हुये देख रहा था
संध्या हाये ससुरजी आपके टिफिन तक छिटे जा रहे है और टिफिन खुला भी थोड़ा
रामू अरे कोई बात नही बेटी बहू का मूत पाक होता है वैसे बड़ी श्यानी हो गई है तेरी बेटी
राजन हाँ मेरे कंधे तक हो गई है
राजू मै कद नही इसकी बुर देख के बोल रहा हूँ
राजन को जैसे काटो तो खून नही
पूनम मूत की तेजी कम हो चुकी थी अब धार हल्की हो कर बूंद बूंद टपक रहा था
रामू होठो पर जीभ फेरते हुये
इसकी बुर के फैले होठ बताते है चुदी है तो चोदता है या कोई और चोद कर जाता है
राजन का गुस्से से गाल वा कान लाल हो गये
राजन मादरचोद सभल कर जुबान चला
रामू अरे भाई गुस्सा क्यो हो रहा है बस मन करा तो पूछ लिया वैसे तु ही देख कैसे इसके होठ बाहर निकले है और यह कहते ही अचानक से हाथ बढा पुनम की नंगी बुर पर हाथ फेर दिया पुनम सिहर गई
पुनम हाये दईया पापा
राजन ने गुस्से से रामू को एक लात कस के मारी अचानक छाती पर पड़ी लात से रामू सभल ना सका ओर पीछे की ओर गिर पड़ा इससे उसकी जेब मे पड़ा किपेड मोबाइल गिरते लुढकते टायलेट के रास्ते ट्रेन के बाहर गिर गया ट्रेन अपनी तेज रफ्तार से आगे बढ रही थी रामू ने तेजी लेटे लेटे लात तेजी से घुमाई कि राजन धाड़म से नीचे गिरा अचानक से रामू तेजी से पलटा और घुटने को राजन की गर्दन पर रखकर एक मुक्का तेजी पेट पर मारा कि राजन की चीख निकल पड़ी इतने मे एक घुसा नाक पे दे मारा कि उसकी नाक से खून की धारा बह निकली
यह घटना इतनी तेजी से हुई की तीनो पलक झपकये देखते रहे
रामू बेटीचोद मेरा तीन हजार का मोबईल अब तेरा बाप लयेगा
पूनम अभी भी मूतने वाली पोजीशन मे थी उसने तुरंत रामू के पांव पकड़ लिये
पूनम चाचा गलती हो गई माफ कर दो पापा को
रामू एक थप्पड़ पूनम को मारता है बता कुत्तिया किससे चुदवाती है
पूनम इस प्रश्न से शन् रह जाती है
तभी एक मुक्का फिर राजन के पेट पर मारता है राजन कराह उठता है
पूनम नही चाया नही मत मारो हमे जाने दो
रामू कुत्तिया मैने पूछा किससे चुदवाती है
पूनम पापा चोदते है चाचा , उन्होंने ही इस बुर को फैलाया है
रामू राजन का गिरेवान पकड़ते हुये
रामू तो बता बेटीचोद मैने क्या गलत कहा चोद तु चुदे तेरी बिटिया मोबाइल गिरे मेरे बता अब मेरा मोबाईल कौन देगा मादरचोद तभी एक लात कस कर राजन के घुटनो के बीच मारी राजन दर्द से कराह उठा और धड़ाम से नीचे गिर पड़ा उसने दोनो हाथ रामू की तरफ जोड़ के उठा लिए
पुनम चाचा छोड़ दो पापा को आप जो कहोगे हम करेंगे
रामू सारे कपड़े उतार कुत्तिया
पुनम सन रह गई रामू के यह शब्द सुनकर
 
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