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Incest पापा का इलाज [Erotica, Romance and Incest]

Do you want all characters of the stories to fuck each other or only Anurag should fuck the ladies?

  • Yes - I love everyone to be fucked by everyone

    Votes: 71 39.7%
  • No - I love the love between Anurag, Naina and Varsha. That should be kept sacred

    Votes: 38 21.2%
  • No- Only the Hero should have all the fun

    Votes: 70 39.1%

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sunoanuj

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tharkiman

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रूबी जब बाथरूम से निकली तो उसने अंदर ब्रा और थोंग के ऊपर से एक गाउन पहन लिया था। गाउन में आगे से चेन लगा हुआ था और उसकी लम्बाई घुटनो तक थी।
लता - मानेगी नहीं।
रूबी - बुआ समझो ना , एक ही बार में सीधे नंगी थोड़े ही चली जाउंगी। कुछ मेहनत तो करवाओ अपने पति से ?
लता हँसते हुए - बड़ी समझदार है। चल अब तक तो चाय भी बन गई होगी ।
दोनों बाहर आ गईं। चाय सचमुच में तैयार थी। रूबी भी किचन में चली गई। वर्षा ने चाय का ट्रे लिया और रूबी ने एक प्लेट में कुछ बिस्किट ले लिए । रूबी अपने पिता के साइड में जा कर बैठ गई। उसी पर दूसरी तरग लता भी थी। शेखर वन सीटर पर रूबी की तरफ बैठा था और वर्षा उसके सामने के वन सीटर पर, लता के बगल में।
चाय देख कर शेखर बोला - चाय में दूध नहीं है
लता दूध तो ताजा पड़ेगा ना। कह कर उसने रूबी की तरफ देखा। रूबी शर्मा गई।
लता - बोल रूबी फूफा से निकलवाएगी या पापा से ?
रूबी बोल पड़ी - पापा से।
लता - पापा की पारी पापा से ही दूध निकलवाएगी। चल भाई , निकाल ले चाय ठंढी हो रही है।
अनुराग थोड़ा सा हिचकते हुए रूबी की तरफ देख रहा था।
शेखर बोल पड़ा - क्या अनु , खुद के लिए भी इतना सोचते हो क्या ? बेटी को मेरे सामने नंगा करने का मन नहीं है तो रहने दो। किसी बात की जबरदस्ती नहीं है।
कह कर शेखर ने चाय का प्याला उठा लिया। तभी रूबी बोल पड़ी - पापा , क्या सोच रहे हो? मैं तैयार हूँ।
ये सु कर रूबी ने खुद ही अपने गाउन का चेन खोल दिया। सामने सफ़ेद नर्सिंग ब्रा में उसके मुम्मे लटक रहे थे।
रूबी - अब ये भी मैं ही खोलूं ?
ये सुनकर अनुराग ने उसके ब्रा के कप का हुक खोल दिया। पैड हटते ही उसके स्तन का सामनेका हिस्सा बाहर आ गया।
रूबी ने अब शेखर की तरफ देखा उसकी तो आँखे चौड़ी हो राखी थी। बड़े बड़े निप्पल से टपकते दूध के बूंदो को देख कर उसका मन बच्चा बन जाने का करने लगा।
रूबी - देखते रहेंगे या कप आगे करेंगे ?
शेखर ने तुरंत अपने कप को उसके स्तनों के सामने कर दिया। अनुराग ने अब उसके स्तन दबाने शुरू कर दिए। उसके स्तन से दूध की एक धार निकल के कप पर पड़ने लगी।
लता - ऐसे तो दूध बर्बाद हो जायेगा। आगे झुक जा और कप निचे रखवा ले।
रूबी आगे झुक गई। अनुराग उसके स्तन दबा रहा था और अब शेखर के कप में धार सीधे पड़ रही थी। पर शेखर को ज्यादा कुछ दिख नहीं रहा था। उससे बर्दास्त नहीं हुआ। रूबी की परमिशन तो थी ही। उसने तुरंत अपने कप को निचे रखा और रूबी के दुसरे मुम्मे को पकड़ कर उसे ब्रा से निकालने लगा। रूबी ने कहा - रुकिए ऐसे दिक्कत हो रही है। दोनों रुक गए।
रूबी ने चेन खोल कर अपने गाउन को उतार दिया। उसने ब्रा से अपने दुसरे स्तन को भी निकाल दिया और फिर से झुक गई। अब अनुराग और शेखर उसके एक एक स्तन को पकड़ कर दबाने लगे। अब चाय तो सिर्फ वर्षा पी रही थी। पी भी क्या रही थी उसकी निगाहें तो रूबी के मान मर्दन पर था। उसके बाप और फूफा रूबी के चूचियों को जबर तरीके से मिस रहे थे और रूबी आँखें बंद करके सिसकारियां ले रही थी। वर्षा ने भी कप निचे रख दिया। उसका एक हाथ अपने स्तन पर और एक अपने चूत पर था। तभी लता उठी और उसके पैरों के पार आकर बैठ गई। वर्षा को पता भी नहीं चला की कब उसकी बुआ उसकी साडी के अंदर घुस चुकी थी । लता पैंटी के ऊपर से ही वर्षा के चूत पर होठ रख चुकी थी। लता के होठों के एहसास करते ही वर्षा बोल पड़ी - उफ्फ्फ , बुआ आराम से।
वर्षा की सिसकारी सुन कर कर शेखर और अनुराग के साथ साथ रूबी का ध्यान भी इधर हो आया। शेखर अपनी चुदास बीवी की हरकत देख कर मुश्कुरा उठा।
रूबी - पापा , आपकी बहन बहुत बड़ी रंडी है। देखो कैसे अपनी भतीजी का चूत चाट रही है।
अनुराग - साली तू क्या कम है।
रूबी - आपकी ही बेटी हूँ। उफ्फ्फ , मेरी चूत भी बह रही है। आप चुसोगे ?
अनुराग - नेकी और पूछ पूछ।
अनुराग भी झुक कर उसके पैरों के बीच में आ गया। शेखर उठ कर लता की सीट पर पहुँच गया। अब नज़ारा बदल गया था दोनों भाई बहन चूत का मजा ले रहे थे। शेखर को रूबी ने अपने गोद में लिटा लिया था और उसे दूध पीला रही थी। उसके ब्रा का कहीं अता पता नहीं था।
कमरे में रूबी और वर्षा की सिसकारियां गूँज रही थी।
रूबी - आह पापा , खा जाओ मेरे चूत को। पी जाओ पानी। उफ्फ्फ मजा आ रहा है। फूफा आपको कैसा लग रहा है। इतने दिनों से इन चुचों पर नजर गड़ाए थे।
शेखर - मस्त चुके हैं तुम्हारे। मजा आ गया। निप्पल तो लग रहा है जैसे खजूर है। तेरे बाप ने खींच खिंच कर बड़ा कर दिया है इन्हे।
रूबी - तो खा जाओ ना उन खजूरों को। चूस के और बड़ा कर दो।
शेखर अब बैठ गया था और झुक्क कर उसके स्तनों को दबाने लगा था और रूबी के गाल और होठो पर जीभ फिर रहा था। अब रूबी के चूत से पानी निकलने वाला था। उसने अनुराग के कंधे पर अपने पेअर रख दिए और उसके सर को पकड़ कर अपने चूत पर रगड़ने लगी। उसका बदन कापने लगा। वही हाल वर्षा का भी था। दोनों बहने कुछ देर में स्खलित हो गईं और वहीँ निढाल हो गईं। लता अब वर्षा के गोद में सर रख कर निचे ही बैठी हुई थी। वर्षा उसके बालों को सहला रही थी। शेखर ने रूबी को अपने गोद में लिटा लिया था। लता ने उसकी तरफ देखते हुए कहा - मजा आया ?
रूबी - हाँ।
लता - अभी तो मजे की शुरुआत हुई है। देख तेरे फूफा का लैंड कैसे खड़ा है
रूबी उठ गई। अनुराग भी उसके बगल में बैठ गया। लता शेखर के पेंट को निकाल देती है। अनुराग तो पहले ही अपने पेंट को उतार चूका था। लता ने शेखर के लंड को पकड़ते हुए कहा - ले चूस ले अपने फूफा का केला।
रूबी झुक कर शेखर के लंड को मुँह में भर लेती है। अनुराग ने अपना लंड अपने हाथ में पकड़ रखा था।
वर्षा बोली - बुआ , जाकर अपने भाई की मदद कर दो। देखो कैसे लंड हिला रहे हैं।
लता - तू क्यों नहीं कर देती। जा बैठ जा उस पर।
वर्षा - बैठ जाउंगी तो फिर ये मत कहना की बेईमानी हुई है।
लता - मैं क्यों भला कहूँगी।
वर्षा उठ जाती है और साडी समेटते हुए अपने पिता के गोद में बैठ जाती है। अनुराग का लंड उसके चूत में बड़े आराम से घुस गया। वर्षा का मुँह अनुराग की तरफ था और वो उसके लंड पर हलके से हिलते हुए चूमने लगी।
लता उठ कर किचन में जाती है और तेल की सीसी लेकर आती है। उसने कुछ इशारा किया तो शेखर ने रूबी के मुँह से लंड हटा दिया।
लता ने अपने हाथो में तेल लिया और शेखर के लंड पर लगाने लगी। रूबी समझ गई की क्या होने वाला है।
अब शेखर ने उसका हाथ पकड़ा और अपने गोद में बिठा लिया। पहले ततो फ़क करके उसका लंड उसके चूत में घुस गया। पर शेखर ने उसे उठा लिया और उसके गांड को फैलाते हुए कहा - दुसरे छेड़ में लो रानी बिटिया।
रूबी - रहने दो न, अभी चूत मार लो।
लता - चुप कर कामिनी। आज तो तेरी गांड ही मारी जाएगी। तेल लगा दिया है आराम से जाएगा ।
रूबी - बुआ , बहुत बड़ा है दर्द होगा।
लता - कुछ नहीं होगा। नखड़े मत कर।
रूबी को पता था कुछ नहीं किया जा सकता है। उसने शेखर के लंड को अपने गांड के छेड़ पर सेट किया और धीरे धीरे बैठने लगी। गांड तो वो पहले भी मरवा चुकी थी। ससुराल के दोनों लंड को सँभालने के लिए उसे गांड मरवाना ही पड़ा था। और अब आज उसके मन में दोबारा लड्डू फूटने लगे थे की जल्दी ही उसके आगे और पीछे के छेड़ में बाप और फूफा ला लंड होगा। पर ख़ुशी दिखाने के बजाय वो नखरे दिखाते हुए बोली - उफ्फ्फफ्फ्फ़ बुआ , नहीं होगा मुझसे।
लता अचानक से खड़ी हुई और उसके कंधे पर हाथ रख कर जोर से दबा दिया और बोली - चुप कर रांड। सौ चूहे खा कर हज करने निकली है।
इधर शेखर का लंड उसकी चूत में गया और उधर वर्षा की उठक बैठक चालू हो गई। लता ने भी अपने ब्लॉउज को खोल दिया और रूबी के मुँह में खड़े खड़े ही अपने स्तन भर दिए। अब रूबी लता के मुम्मे चूसते हुए शेखर से गांड मरवा रही थी। कुछ देर अपने मुम्मे चूसवाने के बाद लता निचे बैठ गई और रूबी के चूत को चाटने लगी। वो अपने हाथों से शेखर के दोनों बॉल्स सहला रही थी। शेखर का हाथ रूबी में मुम्मे पर था। रूबी आनंद के सागर में गोते लगाने लगी। उधर वर्षा के कपडे भी उतर चुके थे और वो अनुराग के उपर तेजी से उछल रही थी थी। पर ये उछाल कूद कितने देर तक चलती। कुछ ही देर में शेखर और अनुराग के लंड ने अपना पानी छोड़ दिया। वर्षा शेखर से लिपट पड़ी। रूबी निचे बैठ गई। लता के चूत में कुछ भी नहीं गया था पर पर उसे लग रहा था ना जाने कितनी बार चुदी हो।
कुछ देर बाद वर्षा और रूबी दोनों उठीं और बाथरूम की तरफ चल पड़ी। लता ऊपर शेखर और अनुराग के बीच में बैठ गई। दोनों के लंड को हाथ में पकड़ कर लता बोली - मजा आया ?
अनुराग - बड़ी कामिनी हो तुम दीदी।
शेखर - साले बेटी चोद कर बहन को कामिनी बोल रहे हो।
ये सुन कर तीनो हंसने लगे।

तभी नैना का फ़ोन आया। लता ने फ़ोन उठाया।
नैना - चुदाई का खेल हो गया हो तो घर भी आ जाओ।
लता - तुम्हे कैसे पता ?
नैना - समय देखो क्या हो रहा है? मैं घर पहुँच गई हूँ। तुम लोग यहाँ भी नहीं हो और ना ही कोई फ़ोन आया। मैं समझ गई थी वहां क्या हो रहा होगा । अब आ जाओ। मुझे भूख लगी है।
लता - भूख या प्यार। आजा यहाँ। सैंयां से पेट भरवा ले।
नैना - बस करो माँ। सैयां से तो सुहागरात को ही मुलाकात होगी ।
कुछ देर बाद शेखर और लता अपने घर चले गए।

अगले एक हफ्ते में वर्षा भी अपने ससुराल पहुँच गई। वहां उसके पति ने शुरू में तो अवॉयड किया पर वर्षा को तो उससे चुदना था। उसने अपने पति को सेड्यूस करना शुरू कर दिया। दो तीन रात तो पति से खूब चुदी पर फिर उसके पति ने घर वापस आना छोड़ दिया।
एक रात खाना खा कर वर्षा अपने कमरे में अकेले ही बैठी थी। उसके पति ने बता दिया था की आज वो घर नहीं आएगा।
वो कमरे में बैठी कुछ सोच ही रही थी की उसकी सास वहां आई।
वर्षा - माजी देख रही हैं ना। इनका नाटक फिर से शुरू हो गया। अबकी पापा से कहकर तलाक का पेपर फाइनल करवा ही लेती हूँ।
उसकी सास - पापा के पास रहने का ज्यादा ही मन कर रहा है। जब सब वहां मिल ही रहा था तो यहां वापस आई ही क्यों ?
वर्षा - क्या मतलब ?
सास - देख मैं भी एक औरत हूँ। बिन चुदी औरत कैसी होती है मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता। और तू मुझे एकदम भी वैसी नहीं लग रही है। लगता है बाप का पूरा प्यार मिल रहा है।
वर्षा - आप ये कैसी गन्दी बात बोल रही हैं ? अपने बेटे को संभाल नहीं पा रही हैं और उल्टा मुझ पर इल्जाम लगा रही हैं
उसकी सास ने शांति से कहा - मैं डांट नहीं रही हूँ। ना ही तुझसे नाराज हूँ। जब बेटा नालायक हो तो क्या ही कह सकती हूँ। पर तेरी किस्मत उतनी भी खराब नहीं है। बल्कि कहूं तो अच्छी ही है। पर ये समझ नहीं आ रहा है की तलाक लेना ही था तो आई ही क्यों?
वर्षा समझ गई कि अब छुपाने से कोई फायदा नहीं है। उसने कहा - मुझे माँ बनना है।
सास - पर इस दो तीन दिन के प्यार में क्या ही माँ बनेगी ?
वर्षा कुछ देर चुप रही और फिर बोली - मैं माँ बन चुकी हूँ। बस आपके खानदान का नाम चाहिए था ।
उसकी सास ने गहरी सांस ली और बोली - ओह्ह। अब समझ आया। उसने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा - ऊपरवाला तुझे हमेशा खुश रखे ।
दोनों औरतें कुछ देर चुप रही। फिर अचानक से उसकी सास धीरे से बोली - तेरे पापा में अब भी इतना दम है और मैं यहाँ नामर्दों के बीच फंसी हूँ।
वर्षा ने अपनी सास को देखा और हँसते हुए बोली - इतना दम कि आपको भी माँ बना दें। अभी बात करने आएंगे तो ले लीजियेगा उनका।
सास - भक्क । ऐसा भी कहीं होता है ?
वर्षा हँसते हुए बोली - फक्क , ऐसा ही होता है।
दोनों हंसने लगीं। तभी वर्षा का बेटा दौड़ता हुआ आया और बोला - माँ , नाना के घर चलो ना ?
उसकी दादी - क्यों बेटा यहाँ मन नहीं लगता।
बेटू - दादी यहाँ , पापा भी बात नहीं करते ना ही दादा जी। वहां तो खूब मजा आता है। बुआ दादी मुझे खूब प्यार करती हैं। और रूबी मौसी और नैना मौसी भी बहुत प्यार करती हैं।
उसकी दादी - प्यार तो हम भी करते हैं तुम्हे।
बेटू - हाँ , पर वहां बहुत मजा आता है। आपको पता है नाना कि शादी होने वाली है।
अब उसकी दादी आश्चर्य से वर्षा कि तरफ देखने लगी।
वर्षा हँसते हुए बोली - हाँ। माँ जी पापा और नैना की शादी होने वाली है।
उसकी सास ने अपने हाथ को मुँह पर रख लिया।
वर्षा - इतना आस्चर्य क्यों ? दक्षिण में होता है मामा भांजी में और अन्य जगह भी तो होता है। नैना जवानी के दहलीज पर कदम रखते के साथ ही पापा से प्यार कर बैठी थी। ये सबको पता था। माँ ने जाते जाते वचन लिया था। शुरू में तो बुआ और पापा दोनों नहीं माने। पर प्यार के आगे सब झुक ही जाते हैं।
सास - और तेरा क्या होगा ?
वर्षा - पापा सब संभाल लेंगे।
बेटू मासूमियत से बोला - हाँ , नाना और नैना मौसी सब संभाल लेंगे। आप भी वहां चलिए बहुत मजा आएगा।
उसकी दादी उसके बालों में उँगलियाँ फेरते हुए बोली - काश।
उसकी दादी ने फिर वर्षा से कहा - अभी एक कुछ दिन और रुक जाओ। फिर चली जाना। कुछ दिन अपने पोते के साथ खेल लूँ। तब तक अपने पति को समझाओ।
वर्षा - हम्म्म। पर अबकी फाइनल जाउंगी।
सास - ठीक है।
तभी बेटू ने कहा - मम्मा दूध पिलाओ।
वर्षा ने तुरंत नाइटी के सामने का चेन खोल दिया। बेटू उसके गोद में आ कर उसके दूध पीने लगा। उसकी आँखें बंद होने लगी थी। वर्षा को पता था वो कुछ देर में सो जायेगा। उसकी सास वर्षा के शानदार मुम्मे देख कर अचंभित थीं। उन्हें वर्षा के स्तन अपने स्तनों से भी बड़े लग रहे थे। वो कुछ बोलने जा रही थी की वर्षा ने अपने होठों पर ऊँगली रख कर उन्हें चुप करा दिया।
वर्षा धीरे से - ये अब सो जायेगा।
वर्षा की सास उठ कर जाने लगीं। वर्षा ने उनका हाथ पकड़ लिया और धीरे से बोली - आज यहीं सो जाइये।
उसकी सास - तेरे ससुर को बोल कर आती हूँ।
सास के जाते ही वर्षा लेट गई। उसका बेटा दूध पीते पीते सो गया था। वर्षा ने अपने नाइटी का चेन खुले ही रहने दिया। आअज पति का बदला अपनी सास से लेने का मन था। मगर प्यार से।

उसकी सास जब कमरे में आईं तो वर्षा की कमर बाहर की तरफ थी। उसकी नाइटी ऊपर जांघों तक उठ चुकी थी। वर्षा ने सास के लिए जगह छोड़ रखा था। वर्षा को सोता समझ पहले तो वो वापस जाने का सोचने लगीं। पर अचानक से क्या दिमाग में आया वो उसके बगल में जाकर बैठ गईं। उसके कमर पर हाथ रख कर वो बोली - सो गई क्या ?
वर्षा अपनी सास की आवाज सुनकर सीधा हो गई। उसके स्तन नाइटी से बाहर आ गए थे और उनमे से दूध रिस रहा था। उसके निप्पल एरेक्ट थे । वर्षा की सास जो सिर्फ ब्लॉउज और पेटीकोट में थी वो बोली - तेरा तो दूध निकल रहा है।
वर्षा ने अपने मुम्मे सहलाते हुए कहा - हाँ , अब ये काम पीता है।
सास - उस हिसाब से तो अब दूध आना बंद हो जाना चाहिए था।
फिर वो सोचने लगीं।
वर्षा ने उनका हाथ पकड़ लिया और बोली - आप सही सोच रही हैं। पापा बचा खुचा पी जाते थे।
फिर कुछ सोच कर वो आगे बोली - पापा को आदत लग गई है। वैसे उनके सेहत के लिए जरूरी है। इस लिए तो दूसरा कर रही हूँ।
उसकी सास उसके बगल में बैठी उसके स्तनों को निहार रही थी की वर्षा बोली - वैसे कभी कभी बुआ भी पी जाती थी। आप भी पी सकती हैं।
ये कह कर उसने अपनी सास के हाथ को अपने स्तनों पर रख दिया। उसकी सास धीरे धीरे से उसके स्तन सहलाने लगीं। उनके हाथ लगाते ही उसके स्तनों से दूध की धार बह निकली।

उसने सास से कहा - माँ , इसे वेस्ट क्यों कर रही हो।
इतना सुनते ही उसकी सास झुक गईं और उसके स्तनों पर मुँह लगा दिया।
वर्षा - आराम से , मैं यहीं हूँ।

उसकी सास वही उसके बगल में लेट गईं। उनका सर उसके सीने के बराबर में था और उनके मुँह में उसके मुम्मे। वर्षा एक बच्चे की तरह उनके बाल सहला रही थी। उसकी सास ने उसके दोनों स्तनों से पूरा दूध पी लिया। कुछ देर वैसे ही उसके स्तन चूसने के बाद उन्होंने अपना सर उठाया और वर्षा की आँखों में देखते हुए कहा - कितने खूबसूरत हैं ये।
वर्षा ने उनके गाल को चूमा और फिर उनके स्तनों पर हाथ लगाते हुए बोली - आपके भी तो खूबसूरत हैं।
उसकी सास ने कहा - कहाँ ? तेरे पति ने तो बचपन में ज्यादा पिया नहीं और तेरे ससुर बस सीधे अपना जूस अंदर डाल कर काम ख़त्म कर लिया करते थे।
वर्षा ने सास के ब्लॉउज के हुक्स को खोलते हुए कहा - फिर तो आप कुँवारी ही हैं।
उसकी सास ने वर्षा के बदन को सहलाते हुए कहा - वही समझ ले। गांडू बाप गांडू बेटा।
वर्षा - भोसड़ी वाले ने माँ का दूध पिया होता तो गांडू नहीं होता।
दोनों खिलखिला पड़ीं। सास - तुम गाली कबसे देने लगी ?
वर्षा - आपने भी तो गांडू कहा।
सास - हाहाहाःहाहा

अब तक उसकी सास के बदन से ब्लॉउज उतर चूका था और वर्षा उनके मुम्मे धीरे धीरे सहला रही थी। वर्षा का एक हाथ उनके स्तन पर था तो दूसरा उनके पेट और नाभि के आस पास । उसे कोई जल्दी नहीं थी। पर इतने से ही उसकी सास का बदन कांपने लगा था। जैसे ही वर्षा का हाथ उनके पेटीकोट के अंदर गया उनका शरीर थरथराने लगा। वो तेजी से स्खलित होने लगीं। उन्होंने अपने पैर सिकोड़ लिया और उनके पैरों के बीच में उसका हाथ फंसा हुआ था।

वर्षा समझ गई की इनके शरीर को सालों से किसी ने छुआ नहीं होगा। होश में आते ही उसकी सास उससे लिपट गईं। उनके आँखों से आंसू निकलने लगा। उन्होंने धीरे से कहा - तेरा जाना जरूरी है क्या ?

वर्षा चुप ही रही। अगले कुछ दिनों के अंदर वर्षा ने अपनी सास का पूरा ख्याल रखा। दोनों एक दुसरे के नजदीक आ गईं। उसकी सास का चेहरा खिल गया था। पर वर्षा का पति नहीं बदला। वो अक्सर बाहर ही रहता। कभी आता तो वर्षा उससे जबरदस्ती चुद लेती। आखिर प्लान के मुताबिक़ वर्षा ने उससे लड़ना शुरू कर दिया और लड़ाई में ही उससे तलाक की मांग करने लगी। एक दिन उसके पति और ससुर ने गुस्से में हाँ भी कह दिया। वर्षा ने अपने पिता को बता दिया। उस रात उसका पति घर नहीं आया। वर्षा और उसकी सास एक साथ सोये थे।
उस रात जब वर्षा उनके चूत को चाट रही थी तो उसकी सास बोल पड़ी - अब इसका ख्याल कौन रखेगा।
वर्षा ऊपर देखते हुए बोली - पर मुझे जाना तो होगा ना।
उसकी सास ने उसके बाल सहलाते हुए कहा - हम्म्म। अभी कुछ दिन और रह ले। मेरी मुनिया का साथ दे दे।
वर्षा सास की चूत चाटने में लग गई।

इधर वर्षा के सम्बन्ध अपने सास से बन गए थे और उधर रूबी के दोनों छेड़ रोज चुद रहे थे। शेखर रोज ऑफिस के बाद सीधे अनुराग के यहाँ ही आता। लता पहले से वहां होती थी। अनुराग और शेखर कभी रूबी को सैंडविच बना कर चोदते तो कभी लता को। कई बार सोफे पर शेखर के गोद में रूबी उछाल रही होती तो अनुराग के गोद में लता। वर्षा तो थी नहीं तो अनुराग रूबी के कमरे में ही सोता था। अब रूबी घर में अक्सर नंगी ही रहती थी। अनुराग अब तक उसे घर के हर कोने में चोद चूका था। शेखर भी कमी बेसी हर जगह चोद चूका था। एक दिन शाम को रूबी नंगे ही सोफे पर टीवी देख रही थी।

तभी स्मार्ट टीवी पर वीडियो कॉल आने लगी। वो कॉल उसके भाई अविनाश के यहाँ से आ रही थी। अनुराग ने कहा - अरे कुछ कपडे तो पहन लो।
रूबी - क्या फायदा। देख लेने दो उन दोनों को भी। उन्हें सब पता तो है।

अनुराग ने खुद लुंगी पहन लिया और ऊपर से एक बनियान डाल लिया। फिर भी उसे कुछ अजीब लग रहा था। उसने सोचाकी उठ कर चला ही जाए। रूबी ने उसका हाथ पकड़ लिया और कॉल रिसीव कर लिया। उधर से अविनाश और उसकी बीवी तृप्ति कॉल पर थे।
रूबी को उस हालत में देख कर तृप्ति के मुँह से सीटी निकल पड़ी।

तृप्ति - वह पापा , आपके तो मजे हैं।
अनुराग फिर उठने लगा तो रूबी बोल पड़ी - बैठिये न। शर्मा क्यों रहे हैं। अभी आपको तृप्ति की चूत का भी भोसड़ा बनाना है।
तृप्ति - चूत का भोसडा तो तुम्हारा है बना ही रहा है। मुझे तो बस एक बच्चा चाहिए।
रूबी - बोल तो ऐसे रही हो जैसे एक बार गर्भ ठहर गया तो छुड़ेगी नहीं। क्यों अवि ?
अविनाश - दी तुम भी ना।
तृप्ति - बात पूरी करो। दी तुम भी न सेक्सी हो।
ये सुन सब हंस पड़े। अविनाश - सेक्सी तो है ही।
तृप्ति की बेबाकी देख कर अनुराग भी बोल पड़ा - वैसे बात क्या है ? जब अविनाश तुम्हे अच्छे से संतुष्ट कर पा रहा है तो बच्चा मुझसे क्यों चाहिए ?
तृप्ति - दरअसल पापा , अवि के लैंड में जोर तो बहुत है। पर वीर्य में बच्चा बनाने की छमता नहीं है।
अनुराग - तुम लोग अमेरिका में हो इलाज करवा लो। वहां तो डॉक्टर अच्छे हैं।
अविनाश - पापा , इसका कोई इलाज नहीं है। अब किसी और का वीर्य लेकर ये माँ तो बन ही सकती है पर इसने जिद्द लगा राखी है की आपसे ही करेगी। और हमें पता है की आप दीदी लोगों और बुआ से सम्बन्ध बना चुके हो तो आपका इसके साथ सम्बन्ध बनाना भी गलत नहीं है। वैसे भी ये जवान होने के बाद से ही आपसे चुदने का सपना देख रही है। कई बार तो मुझे पापा बना कर चुदती है।
अनुराग - तुम्हे बुरा नहीं लगता ?
अविनाश - नहीं। ये आपसे जितना प्यार करती है उतना ही मुझसे भी करती है।
तृप्ति - ज्यादा ही प्यार करती हूँ।
अनुराग कुछ नहीं बोला।
तृप्ति - वर्षा दी कब आ रही है ?
रूबी - अब तक तो आ जाना था पर पता नहीं क्यों लम्बा रुक गई ?
तृप्ति - कहीं जीजा जी सुधर तो नहीं गए ?
अनुराग - सुधर जाए तो बढ़िया है। उसकी जिंदगी अच्छी हो जाएगी। उसकी ख़ुशी से ज्यादा मुझे क्या चाहिए।
तृप्ति - जाने दीजिये पापा। दुखी मत होइए।
रूबी - दुखी क्यों होंगे। अगले हफ्ते आ रही है। जीजा नहीं सुधरे हैं।
तृप्ति - वाउ , अब तो फाइनल आ रही है न ?
रूबी - हम्म्म
अविनाश - पापा हम भी दस दिन में वहां पहुँच जायेंगे।
रूबी - फिर तो पापा को तीसरी चूत भी मिल जाएगी। तेराक्या होगा अवि ?
तृप्ति - आप तीनो तो हो ना। जानती हो ये कई बार तो बहन बना के चोद चुके हैं मुझे।
रूबी - वाह रे बहनचोद , ये तो पता ही नहीं था हमें। हमें तो लगता था की तू बस इसी का दीवाना है।
तृप्ति - आपको पता ही नहीं है। माँ ने मौका नहीं दिया वार्ना ये मादरचोद बन चुके होते।
रूबी हँसते हुए - हाहाहाःहाहा , देख रहे हो पापा। आपके माल पर ही हाथ साफ़ करने का इरादा था।
अनुराग - तेरी माँ थी ही ऐसी।
रूबी - कोई नहीं बेटा , असली बहनचोद हम बना देंगे , बाकी बुआ को माँ समझ कर चोद लेना।
तृप्ति - दी वैसे फूफा को दिया की नहीं अभी तक ?
अनुराग हँसते हुए - वो तो रोज इसकी बजा जाते हैं।
रूबी ने तुनक कर कहा - आप भी तो उनके साथ लग जाते हो। दोनों मेरे गांड और चूत में ही घुसे रहते हैं।
तृप्ति - आपके तो मजे हैं।
रूबी - तू भी ले लेना। मस्त मजा आता है सैंडविच बन कर।
तृप्ति - ना बाबा ना। मुझे नहीं बनाना सैंडविच।
रूबी - बुआ को अगर अविनाश से चुदवाने का इरादा है तो तुझे फूफा को देने के लिए तैयार रहना होगा। बुआ बड़ी कामिनी हैं। फूफा से बहुत प्यार करती हैं। बस वर्षा दी की नहीं दिलवा पाईं हैं।
अविनाश - मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।
रूबी हँसते हुए - भोसड़ी के तुझे क्या प्रॉब्लम होगी। तुझे तो बुआ की चूत चाहिए।
सब हंसने लगे।
अविनाश - ओके , ऑफिस भी जाना है । सब फॉर्मलिटीज फाइनल करनी है। आप लोगों से जल्दी ही मुलाकात होगी।
फ़ोन कट गया। टीवी पर सीरियल चालू था पर रूबी इतनी गरम हो चुकी थी की उसने अनुराग की चढ़ाई शुरू कर दी थी। चुदाई का खेल शुरू हो गया था। पर अनुराग के मन में इस समय तृप्ति थी। उसे जल्दी ही तृप्ति की चूत मिलने वाली थी।
 

Ek number

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9,792
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रूबी जब बाथरूम से निकली तो उसने अंदर ब्रा और थोंग के ऊपर से एक गाउन पहन लिया था। गाउन में आगे से चेन लगा हुआ था और उसकी लम्बाई घुटनो तक थी।
लता - मानेगी नहीं।
रूबी - बुआ समझो ना , एक ही बार में सीधे नंगी थोड़े ही चली जाउंगी। कुछ मेहनत तो करवाओ अपने पति से ?
लता हँसते हुए - बड़ी समझदार है। चल अब तक तो चाय भी बन गई होगी ।
दोनों बाहर आ गईं। चाय सचमुच में तैयार थी। रूबी भी किचन में चली गई। वर्षा ने चाय का ट्रे लिया और रूबी ने एक प्लेट में कुछ बिस्किट ले लिए । रूबी अपने पिता के साइड में जा कर बैठ गई। उसी पर दूसरी तरग लता भी थी। शेखर वन सीटर पर रूबी की तरफ बैठा था और वर्षा उसके सामने के वन सीटर पर, लता के बगल में।
चाय देख कर शेखर बोला - चाय में दूध नहीं है
लता दूध तो ताजा पड़ेगा ना। कह कर उसने रूबी की तरफ देखा। रूबी शर्मा गई।
लता - बोल रूबी फूफा से निकलवाएगी या पापा से ?
रूबी बोल पड़ी - पापा से।
लता - पापा की पारी पापा से ही दूध निकलवाएगी। चल भाई , निकाल ले चाय ठंढी हो रही है।
अनुराग थोड़ा सा हिचकते हुए रूबी की तरफ देख रहा था।
शेखर बोल पड़ा - क्या अनु , खुद के लिए भी इतना सोचते हो क्या ? बेटी को मेरे सामने नंगा करने का मन नहीं है तो रहने दो। किसी बात की जबरदस्ती नहीं है।
कह कर शेखर ने चाय का प्याला उठा लिया। तभी रूबी बोल पड़ी - पापा , क्या सोच रहे हो? मैं तैयार हूँ।
ये सु कर रूबी ने खुद ही अपने गाउन का चेन खोल दिया। सामने सफ़ेद नर्सिंग ब्रा में उसके मुम्मे लटक रहे थे।
रूबी - अब ये भी मैं ही खोलूं ?
ये सुनकर अनुराग ने उसके ब्रा के कप का हुक खोल दिया। पैड हटते ही उसके स्तन का सामनेका हिस्सा बाहर आ गया।
रूबी ने अब शेखर की तरफ देखा उसकी तो आँखे चौड़ी हो राखी थी। बड़े बड़े निप्पल से टपकते दूध के बूंदो को देख कर उसका मन बच्चा बन जाने का करने लगा।
रूबी - देखते रहेंगे या कप आगे करेंगे ?
शेखर ने तुरंत अपने कप को उसके स्तनों के सामने कर दिया। अनुराग ने अब उसके स्तन दबाने शुरू कर दिए। उसके स्तन से दूध की एक धार निकल के कप पर पड़ने लगी।
लता - ऐसे तो दूध बर्बाद हो जायेगा। आगे झुक जा और कप निचे रखवा ले।
रूबी आगे झुक गई। अनुराग उसके स्तन दबा रहा था और अब शेखर के कप में धार सीधे पड़ रही थी। पर शेखर को ज्यादा कुछ दिख नहीं रहा था। उससे बर्दास्त नहीं हुआ। रूबी की परमिशन तो थी ही। उसने तुरंत अपने कप को निचे रखा और रूबी के दुसरे मुम्मे को पकड़ कर उसे ब्रा से निकालने लगा। रूबी ने कहा - रुकिए ऐसे दिक्कत हो रही है। दोनों रुक गए।
रूबी ने चेन खोल कर अपने गाउन को उतार दिया। उसने ब्रा से अपने दुसरे स्तन को भी निकाल दिया और फिर से झुक गई। अब अनुराग और शेखर उसके एक एक स्तन को पकड़ कर दबाने लगे। अब चाय तो सिर्फ वर्षा पी रही थी। पी भी क्या रही थी उसकी निगाहें तो रूबी के मान मर्दन पर था। उसके बाप और फूफा रूबी के चूचियों को जबर तरीके से मिस रहे थे और रूबी आँखें बंद करके सिसकारियां ले रही थी। वर्षा ने भी कप निचे रख दिया। उसका एक हाथ अपने स्तन पर और एक अपने चूत पर था। तभी लता उठी और उसके पैरों के पार आकर बैठ गई। वर्षा को पता भी नहीं चला की कब उसकी बुआ उसकी साडी के अंदर घुस चुकी थी । लता पैंटी के ऊपर से ही वर्षा के चूत पर होठ रख चुकी थी। लता के होठों के एहसास करते ही वर्षा बोल पड़ी - उफ्फ्फ , बुआ आराम से।
वर्षा की सिसकारी सुन कर कर शेखर और अनुराग के साथ साथ रूबी का ध्यान भी इधर हो आया। शेखर अपनी चुदास बीवी की हरकत देख कर मुश्कुरा उठा।
रूबी - पापा , आपकी बहन बहुत बड़ी रंडी है। देखो कैसे अपनी भतीजी का चूत चाट रही है।
अनुराग - साली तू क्या कम है।
रूबी - आपकी ही बेटी हूँ। उफ्फ्फ , मेरी चूत भी बह रही है। आप चुसोगे ?
अनुराग - नेकी और पूछ पूछ।
अनुराग भी झुक कर उसके पैरों के बीच में आ गया। शेखर उठ कर लता की सीट पर पहुँच गया। अब नज़ारा बदल गया था दोनों भाई बहन चूत का मजा ले रहे थे। शेखर को रूबी ने अपने गोद में लिटा लिया था और उसे दूध पीला रही थी। उसके ब्रा का कहीं अता पता नहीं था।
कमरे में रूबी और वर्षा की सिसकारियां गूँज रही थी।
रूबी - आह पापा , खा जाओ मेरे चूत को। पी जाओ पानी। उफ्फ्फ मजा आ रहा है। फूफा आपको कैसा लग रहा है। इतने दिनों से इन चुचों पर नजर गड़ाए थे।
शेखर - मस्त चुके हैं तुम्हारे। मजा आ गया। निप्पल तो लग रहा है जैसे खजूर है। तेरे बाप ने खींच खिंच कर बड़ा कर दिया है इन्हे।
रूबी - तो खा जाओ ना उन खजूरों को। चूस के और बड़ा कर दो।
शेखर अब बैठ गया था और झुक्क कर उसके स्तनों को दबाने लगा था और रूबी के गाल और होठो पर जीभ फिर रहा था। अब रूबी के चूत से पानी निकलने वाला था। उसने अनुराग के कंधे पर अपने पेअर रख दिए और उसके सर को पकड़ कर अपने चूत पर रगड़ने लगी। उसका बदन कापने लगा। वही हाल वर्षा का भी था। दोनों बहने कुछ देर में स्खलित हो गईं और वहीँ निढाल हो गईं। लता अब वर्षा के गोद में सर रख कर निचे ही बैठी हुई थी। वर्षा उसके बालों को सहला रही थी। शेखर ने रूबी को अपने गोद में लिटा लिया था। लता ने उसकी तरफ देखते हुए कहा - मजा आया ?
रूबी - हाँ।
लता - अभी तो मजे की शुरुआत हुई है। देख तेरे फूफा का लैंड कैसे खड़ा है
रूबी उठ गई। अनुराग भी उसके बगल में बैठ गया। लता शेखर के पेंट को निकाल देती है। अनुराग तो पहले ही अपने पेंट को उतार चूका था। लता ने शेखर के लंड को पकड़ते हुए कहा - ले चूस ले अपने फूफा का केला।
रूबी झुक कर शेखर के लंड को मुँह में भर लेती है। अनुराग ने अपना लंड अपने हाथ में पकड़ रखा था।
वर्षा बोली - बुआ , जाकर अपने भाई की मदद कर दो। देखो कैसे लंड हिला रहे हैं।
लता - तू क्यों नहीं कर देती। जा बैठ जा उस पर।
वर्षा - बैठ जाउंगी तो फिर ये मत कहना की बेईमानी हुई है।
लता - मैं क्यों भला कहूँगी।
वर्षा उठ जाती है और साडी समेटते हुए अपने पिता के गोद में बैठ जाती है। अनुराग का लंड उसके चूत में बड़े आराम से घुस गया। वर्षा का मुँह अनुराग की तरफ था और वो उसके लंड पर हलके से हिलते हुए चूमने लगी।
लता उठ कर किचन में जाती है और तेल की सीसी लेकर आती है। उसने कुछ इशारा किया तो शेखर ने रूबी के मुँह से लंड हटा दिया।
लता ने अपने हाथो में तेल लिया और शेखर के लंड पर लगाने लगी। रूबी समझ गई की क्या होने वाला है।
अब शेखर ने उसका हाथ पकड़ा और अपने गोद में बिठा लिया। पहले ततो फ़क करके उसका लंड उसके चूत में घुस गया। पर शेखर ने उसे उठा लिया और उसके गांड को फैलाते हुए कहा - दुसरे छेड़ में लो रानी बिटिया।
रूबी - रहने दो न, अभी चूत मार लो।
लता - चुप कर कामिनी। आज तो तेरी गांड ही मारी जाएगी। तेल लगा दिया है आराम से जाएगा ।
रूबी - बुआ , बहुत बड़ा है दर्द होगा।
लता - कुछ नहीं होगा। नखड़े मत कर।
रूबी को पता था कुछ नहीं किया जा सकता है। उसने शेखर के लंड को अपने गांड के छेड़ पर सेट किया और धीरे धीरे बैठने लगी। गांड तो वो पहले भी मरवा चुकी थी। ससुराल के दोनों लंड को सँभालने के लिए उसे गांड मरवाना ही पड़ा था। और अब आज उसके मन में दोबारा लड्डू फूटने लगे थे की जल्दी ही उसके आगे और पीछे के छेड़ में बाप और फूफा ला लंड होगा। पर ख़ुशी दिखाने के बजाय वो नखरे दिखाते हुए बोली - उफ्फ्फफ्फ्फ़ बुआ , नहीं होगा मुझसे।
लता अचानक से खड़ी हुई और उसके कंधे पर हाथ रख कर जोर से दबा दिया और बोली - चुप कर रांड। सौ चूहे खा कर हज करने निकली है।
इधर शेखर का लंड उसकी चूत में गया और उधर वर्षा की उठक बैठक चालू हो गई। लता ने भी अपने ब्लॉउज को खोल दिया और रूबी के मुँह में खड़े खड़े ही अपने स्तन भर दिए। अब रूबी लता के मुम्मे चूसते हुए शेखर से गांड मरवा रही थी। कुछ देर अपने मुम्मे चूसवाने के बाद लता निचे बैठ गई और रूबी के चूत को चाटने लगी। वो अपने हाथों से शेखर के दोनों बॉल्स सहला रही थी। शेखर का हाथ रूबी में मुम्मे पर था। रूबी आनंद के सागर में गोते लगाने लगी। उधर वर्षा के कपडे भी उतर चुके थे और वो अनुराग के उपर तेजी से उछल रही थी थी। पर ये उछाल कूद कितने देर तक चलती। कुछ ही देर में शेखर और अनुराग के लंड ने अपना पानी छोड़ दिया। वर्षा शेखर से लिपट पड़ी। रूबी निचे बैठ गई। लता के चूत में कुछ भी नहीं गया था पर पर उसे लग रहा था ना जाने कितनी बार चुदी हो।
कुछ देर बाद वर्षा और रूबी दोनों उठीं और बाथरूम की तरफ चल पड़ी। लता ऊपर शेखर और अनुराग के बीच में बैठ गई। दोनों के लंड को हाथ में पकड़ कर लता बोली - मजा आया ?
अनुराग - बड़ी कामिनी हो तुम दीदी।
शेखर - साले बेटी चोद कर बहन को कामिनी बोल रहे हो।
ये सुन कर तीनो हंसने लगे।

तभी नैना का फ़ोन आया। लता ने फ़ोन उठाया।
नैना - चुदाई का खेल हो गया हो तो घर भी आ जाओ।
लता - तुम्हे कैसे पता ?
नैना - समय देखो क्या हो रहा है? मैं घर पहुँच गई हूँ। तुम लोग यहाँ भी नहीं हो और ना ही कोई फ़ोन आया। मैं समझ गई थी वहां क्या हो रहा होगा । अब आ जाओ। मुझे भूख लगी है।
लता - भूख या प्यार। आजा यहाँ। सैंयां से पेट भरवा ले।
नैना - बस करो माँ। सैयां से तो सुहागरात को ही मुलाकात होगी ।
कुछ देर बाद शेखर और लता अपने घर चले गए।

अगले एक हफ्ते में वर्षा भी अपने ससुराल पहुँच गई। वहां उसके पति ने शुरू में तो अवॉयड किया पर वर्षा को तो उससे चुदना था। उसने अपने पति को सेड्यूस करना शुरू कर दिया। दो तीन रात तो पति से खूब चुदी पर फिर उसके पति ने घर वापस आना छोड़ दिया।
एक रात खाना खा कर वर्षा अपने कमरे में अकेले ही बैठी थी। उसके पति ने बता दिया था की आज वो घर नहीं आएगा।
वो कमरे में बैठी कुछ सोच ही रही थी की उसकी सास वहां आई।
वर्षा - माजी देख रही हैं ना। इनका नाटक फिर से शुरू हो गया। अबकी पापा से कहकर तलाक का पेपर फाइनल करवा ही लेती हूँ।
उसकी सास - पापा के पास रहने का ज्यादा ही मन कर रहा है। जब सब वहां मिल ही रहा था तो यहां वापस आई ही क्यों ?
वर्षा - क्या मतलब ?
सास - देख मैं भी एक औरत हूँ। बिन चुदी औरत कैसी होती है मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता। और तू मुझे एकदम भी वैसी नहीं लग रही है। लगता है बाप का पूरा प्यार मिल रहा है।
वर्षा - आप ये कैसी गन्दी बात बोल रही हैं ? अपने बेटे को संभाल नहीं पा रही हैं और उल्टा मुझ पर इल्जाम लगा रही हैं
उसकी सास ने शांति से कहा - मैं डांट नहीं रही हूँ। ना ही तुझसे नाराज हूँ। जब बेटा नालायक हो तो क्या ही कह सकती हूँ। पर तेरी किस्मत उतनी भी खराब नहीं है। बल्कि कहूं तो अच्छी ही है। पर ये समझ नहीं आ रहा है की तलाक लेना ही था तो आई ही क्यों?
वर्षा समझ गई कि अब छुपाने से कोई फायदा नहीं है। उसने कहा - मुझे माँ बनना है।
सास - पर इस दो तीन दिन के प्यार में क्या ही माँ बनेगी ?
वर्षा कुछ देर चुप रही और फिर बोली - मैं माँ बन चुकी हूँ। बस आपके खानदान का नाम चाहिए था ।
उसकी सास ने गहरी सांस ली और बोली - ओह्ह। अब समझ आया। उसने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा - ऊपरवाला तुझे हमेशा खुश रखे ।
दोनों औरतें कुछ देर चुप रही। फिर अचानक से उसकी सास धीरे से बोली - तेरे पापा में अब भी इतना दम है और मैं यहाँ नामर्दों के बीच फंसी हूँ।
वर्षा ने अपनी सास को देखा और हँसते हुए बोली - इतना दम कि आपको भी माँ बना दें। अभी बात करने आएंगे तो ले लीजियेगा उनका।
सास - भक्क । ऐसा भी कहीं होता है ?
वर्षा हँसते हुए बोली - फक्क , ऐसा ही होता है।
दोनों हंसने लगीं। तभी वर्षा का बेटा दौड़ता हुआ आया और बोला - माँ , नाना के घर चलो ना ?
उसकी दादी - क्यों बेटा यहाँ मन नहीं लगता।
बेटू - दादी यहाँ , पापा भी बात नहीं करते ना ही दादा जी। वहां तो खूब मजा आता है। बुआ दादी मुझे खूब प्यार करती हैं। और रूबी मौसी और नैना मौसी भी बहुत प्यार करती हैं।
उसकी दादी - प्यार तो हम भी करते हैं तुम्हे।
बेटू - हाँ , पर वहां बहुत मजा आता है। आपको पता है नाना कि शादी होने वाली है।
अब उसकी दादी आश्चर्य से वर्षा कि तरफ देखने लगी।
वर्षा हँसते हुए बोली - हाँ। माँ जी पापा और नैना की शादी होने वाली है।
उसकी सास ने अपने हाथ को मुँह पर रख लिया।
वर्षा - इतना आस्चर्य क्यों ? दक्षिण में होता है मामा भांजी में और अन्य जगह भी तो होता है। नैना जवानी के दहलीज पर कदम रखते के साथ ही पापा से प्यार कर बैठी थी। ये सबको पता था। माँ ने जाते जाते वचन लिया था। शुरू में तो बुआ और पापा दोनों नहीं माने। पर प्यार के आगे सब झुक ही जाते हैं।
सास - और तेरा क्या होगा ?
वर्षा - पापा सब संभाल लेंगे।
बेटू मासूमियत से बोला - हाँ , नाना और नैना मौसी सब संभाल लेंगे। आप भी वहां चलिए बहुत मजा आएगा।
उसकी दादी उसके बालों में उँगलियाँ फेरते हुए बोली - काश।
उसकी दादी ने फिर वर्षा से कहा - अभी एक कुछ दिन और रुक जाओ। फिर चली जाना। कुछ दिन अपने पोते के साथ खेल लूँ। तब तक अपने पति को समझाओ।
वर्षा - हम्म्म। पर अबकी फाइनल जाउंगी।
सास - ठीक है।
तभी बेटू ने कहा - मम्मा दूध पिलाओ।
वर्षा ने तुरंत नाइटी के सामने का चेन खोल दिया। बेटू उसके गोद में आ कर उसके दूध पीने लगा। उसकी आँखें बंद होने लगी थी। वर्षा को पता था वो कुछ देर में सो जायेगा। उसकी सास वर्षा के शानदार मुम्मे देख कर अचंभित थीं। उन्हें वर्षा के स्तन अपने स्तनों से भी बड़े लग रहे थे। वो कुछ बोलने जा रही थी की वर्षा ने अपने होठों पर ऊँगली रख कर उन्हें चुप करा दिया।
वर्षा धीरे से - ये अब सो जायेगा।
वर्षा की सास उठ कर जाने लगीं। वर्षा ने उनका हाथ पकड़ लिया और धीरे से बोली - आज यहीं सो जाइये।
उसकी सास - तेरे ससुर को बोल कर आती हूँ।
सास के जाते ही वर्षा लेट गई। उसका बेटा दूध पीते पीते सो गया था। वर्षा ने अपने नाइटी का चेन खुले ही रहने दिया। आअज पति का बदला अपनी सास से लेने का मन था। मगर प्यार से।

उसकी सास जब कमरे में आईं तो वर्षा की कमर बाहर की तरफ थी। उसकी नाइटी ऊपर जांघों तक उठ चुकी थी। वर्षा ने सास के लिए जगह छोड़ रखा था। वर्षा को सोता समझ पहले तो वो वापस जाने का सोचने लगीं। पर अचानक से क्या दिमाग में आया वो उसके बगल में जाकर बैठ गईं। उसके कमर पर हाथ रख कर वो बोली - सो गई क्या ?
वर्षा अपनी सास की आवाज सुनकर सीधा हो गई। उसके स्तन नाइटी से बाहर आ गए थे और उनमे से दूध रिस रहा था। उसके निप्पल एरेक्ट थे । वर्षा की सास जो सिर्फ ब्लॉउज और पेटीकोट में थी वो बोली - तेरा तो दूध निकल रहा है।
वर्षा ने अपने मुम्मे सहलाते हुए कहा - हाँ , अब ये काम पीता है।
सास - उस हिसाब से तो अब दूध आना बंद हो जाना चाहिए था।
फिर वो सोचने लगीं।
वर्षा ने उनका हाथ पकड़ लिया और बोली - आप सही सोच रही हैं। पापा बचा खुचा पी जाते थे।
फिर कुछ सोच कर वो आगे बोली - पापा को आदत लग गई है। वैसे उनके सेहत के लिए जरूरी है। इस लिए तो दूसरा कर रही हूँ।
उसकी सास उसके बगल में बैठी उसके स्तनों को निहार रही थी की वर्षा बोली - वैसे कभी कभी बुआ भी पी जाती थी। आप भी पी सकती हैं।
ये कह कर उसने अपनी सास के हाथ को अपने स्तनों पर रख दिया। उसकी सास धीरे धीरे से उसके स्तन सहलाने लगीं। उनके हाथ लगाते ही उसके स्तनों से दूध की धार बह निकली।

उसने सास से कहा - माँ , इसे वेस्ट क्यों कर रही हो।
इतना सुनते ही उसकी सास झुक गईं और उसके स्तनों पर मुँह लगा दिया।
वर्षा - आराम से , मैं यहीं हूँ।

उसकी सास वही उसके बगल में लेट गईं। उनका सर उसके सीने के बराबर में था और उनके मुँह में उसके मुम्मे। वर्षा एक बच्चे की तरह उनके बाल सहला रही थी। उसकी सास ने उसके दोनों स्तनों से पूरा दूध पी लिया। कुछ देर वैसे ही उसके स्तन चूसने के बाद उन्होंने अपना सर उठाया और वर्षा की आँखों में देखते हुए कहा - कितने खूबसूरत हैं ये।
वर्षा ने उनके गाल को चूमा और फिर उनके स्तनों पर हाथ लगाते हुए बोली - आपके भी तो खूबसूरत हैं।
उसकी सास ने कहा - कहाँ ? तेरे पति ने तो बचपन में ज्यादा पिया नहीं और तेरे ससुर बस सीधे अपना जूस अंदर डाल कर काम ख़त्म कर लिया करते थे।
वर्षा ने सास के ब्लॉउज के हुक्स को खोलते हुए कहा - फिर तो आप कुँवारी ही हैं।
उसकी सास ने वर्षा के बदन को सहलाते हुए कहा - वही समझ ले। गांडू बाप गांडू बेटा।
वर्षा - भोसड़ी वाले ने माँ का दूध पिया होता तो गांडू नहीं होता।
दोनों खिलखिला पड़ीं। सास - तुम गाली कबसे देने लगी ?
वर्षा - आपने भी तो गांडू कहा।
सास - हाहाहाःहाहा

अब तक उसकी सास के बदन से ब्लॉउज उतर चूका था और वर्षा उनके मुम्मे धीरे धीरे सहला रही थी। वर्षा का एक हाथ उनके स्तन पर था तो दूसरा उनके पेट और नाभि के आस पास । उसे कोई जल्दी नहीं थी। पर इतने से ही उसकी सास का बदन कांपने लगा था। जैसे ही वर्षा का हाथ उनके पेटीकोट के अंदर गया उनका शरीर थरथराने लगा। वो तेजी से स्खलित होने लगीं। उन्होंने अपने पैर सिकोड़ लिया और उनके पैरों के बीच में उसका हाथ फंसा हुआ था।

वर्षा समझ गई की इनके शरीर को सालों से किसी ने छुआ नहीं होगा। होश में आते ही उसकी सास उससे लिपट गईं। उनके आँखों से आंसू निकलने लगा। उन्होंने धीरे से कहा - तेरा जाना जरूरी है क्या ?

वर्षा चुप ही रही। अगले कुछ दिनों के अंदर वर्षा ने अपनी सास का पूरा ख्याल रखा। दोनों एक दुसरे के नजदीक आ गईं। उसकी सास का चेहरा खिल गया था। पर वर्षा का पति नहीं बदला। वो अक्सर बाहर ही रहता। कभी आता तो वर्षा उससे जबरदस्ती चुद लेती। आखिर प्लान के मुताबिक़ वर्षा ने उससे लड़ना शुरू कर दिया और लड़ाई में ही उससे तलाक की मांग करने लगी। एक दिन उसके पति और ससुर ने गुस्से में हाँ भी कह दिया। वर्षा ने अपने पिता को बता दिया। उस रात उसका पति घर नहीं आया। वर्षा और उसकी सास एक साथ सोये थे।
उस रात जब वर्षा उनके चूत को चाट रही थी तो उसकी सास बोल पड़ी - अब इसका ख्याल कौन रखेगा।
वर्षा ऊपर देखते हुए बोली - पर मुझे जाना तो होगा ना।
उसकी सास ने उसके बाल सहलाते हुए कहा - हम्म्म। अभी कुछ दिन और रह ले। मेरी मुनिया का साथ दे दे।
वर्षा सास की चूत चाटने में लग गई।

इधर वर्षा के सम्बन्ध अपने सास से बन गए थे और उधर रूबी के दोनों छेड़ रोज चुद रहे थे। शेखर रोज ऑफिस के बाद सीधे अनुराग के यहाँ ही आता। लता पहले से वहां होती थी। अनुराग और शेखर कभी रूबी को सैंडविच बना कर चोदते तो कभी लता को। कई बार सोफे पर शेखर के गोद में रूबी उछाल रही होती तो अनुराग के गोद में लता। वर्षा तो थी नहीं तो अनुराग रूबी के कमरे में ही सोता था। अब रूबी घर में अक्सर नंगी ही रहती थी। अनुराग अब तक उसे घर के हर कोने में चोद चूका था। शेखर भी कमी बेसी हर जगह चोद चूका था। एक दिन शाम को रूबी नंगे ही सोफे पर टीवी देख रही थी।

तभी स्मार्ट टीवी पर वीडियो कॉल आने लगी। वो कॉल उसके भाई अविनाश के यहाँ से आ रही थी। अनुराग ने कहा - अरे कुछ कपडे तो पहन लो।
रूबी - क्या फायदा। देख लेने दो उन दोनों को भी। उन्हें सब पता तो है।

अनुराग ने खुद लुंगी पहन लिया और ऊपर से एक बनियान डाल लिया। फिर भी उसे कुछ अजीब लग रहा था। उसने सोचाकी उठ कर चला ही जाए। रूबी ने उसका हाथ पकड़ लिया और कॉल रिसीव कर लिया। उधर से अविनाश और उसकी बीवी तृप्ति कॉल पर थे।
रूबी को उस हालत में देख कर तृप्ति के मुँह से सीटी निकल पड़ी।

तृप्ति - वह पापा , आपके तो मजे हैं।
अनुराग फिर उठने लगा तो रूबी बोल पड़ी - बैठिये न। शर्मा क्यों रहे हैं। अभी आपको तृप्ति की चूत का भी भोसड़ा बनाना है।
तृप्ति - चूत का भोसडा तो तुम्हारा है बना ही रहा है। मुझे तो बस एक बच्चा चाहिए।
रूबी - बोल तो ऐसे रही हो जैसे एक बार गर्भ ठहर गया तो छुड़ेगी नहीं। क्यों अवि ?
अविनाश - दी तुम भी ना।
तृप्ति - बात पूरी करो। दी तुम भी न सेक्सी हो।
ये सुन सब हंस पड़े। अविनाश - सेक्सी तो है ही।
तृप्ति की बेबाकी देख कर अनुराग भी बोल पड़ा - वैसे बात क्या है ? जब अविनाश तुम्हे अच्छे से संतुष्ट कर पा रहा है तो बच्चा मुझसे क्यों चाहिए ?
तृप्ति - दरअसल पापा , अवि के लैंड में जोर तो बहुत है। पर वीर्य में बच्चा बनाने की छमता नहीं है।
अनुराग - तुम लोग अमेरिका में हो इलाज करवा लो। वहां तो डॉक्टर अच्छे हैं।
अविनाश - पापा , इसका कोई इलाज नहीं है। अब किसी और का वीर्य लेकर ये माँ तो बन ही सकती है पर इसने जिद्द लगा राखी है की आपसे ही करेगी। और हमें पता है की आप दीदी लोगों और बुआ से सम्बन्ध बना चुके हो तो आपका इसके साथ सम्बन्ध बनाना भी गलत नहीं है। वैसे भी ये जवान होने के बाद से ही आपसे चुदने का सपना देख रही है। कई बार तो मुझे पापा बना कर चुदती है।
अनुराग - तुम्हे बुरा नहीं लगता ?
अविनाश - नहीं। ये आपसे जितना प्यार करती है उतना ही मुझसे भी करती है।
तृप्ति - ज्यादा ही प्यार करती हूँ।
अनुराग कुछ नहीं बोला।
तृप्ति - वर्षा दी कब आ रही है ?
रूबी - अब तक तो आ जाना था पर पता नहीं क्यों लम्बा रुक गई ?
तृप्ति - कहीं जीजा जी सुधर तो नहीं गए ?
अनुराग - सुधर जाए तो बढ़िया है। उसकी जिंदगी अच्छी हो जाएगी। उसकी ख़ुशी से ज्यादा मुझे क्या चाहिए।
तृप्ति - जाने दीजिये पापा। दुखी मत होइए।
रूबी - दुखी क्यों होंगे। अगले हफ्ते आ रही है। जीजा नहीं सुधरे हैं।
तृप्ति - वाउ , अब तो फाइनल आ रही है न ?
रूबी - हम्म्म
अविनाश - पापा हम भी दस दिन में वहां पहुँच जायेंगे।
रूबी - फिर तो पापा को तीसरी चूत भी मिल जाएगी। तेराक्या होगा अवि ?
तृप्ति - आप तीनो तो हो ना। जानती हो ये कई बार तो बहन बना के चोद चुके हैं मुझे।
रूबी - वाह रे बहनचोद , ये तो पता ही नहीं था हमें। हमें तो लगता था की तू बस इसी का दीवाना है।
तृप्ति - आपको पता ही नहीं है। माँ ने मौका नहीं दिया वार्ना ये मादरचोद बन चुके होते।
रूबी हँसते हुए - हाहाहाःहाहा , देख रहे हो पापा। आपके माल पर ही हाथ साफ़ करने का इरादा था।
अनुराग - तेरी माँ थी ही ऐसी।
रूबी - कोई नहीं बेटा , असली बहनचोद हम बना देंगे , बाकी बुआ को माँ समझ कर चोद लेना।
तृप्ति - दी वैसे फूफा को दिया की नहीं अभी तक ?
अनुराग हँसते हुए - वो तो रोज इसकी बजा जाते हैं।
रूबी ने तुनक कर कहा - आप भी तो उनके साथ लग जाते हो। दोनों मेरे गांड और चूत में ही घुसे रहते हैं।
तृप्ति - आपके तो मजे हैं।
रूबी - तू भी ले लेना। मस्त मजा आता है सैंडविच बन कर।
तृप्ति - ना बाबा ना। मुझे नहीं बनाना सैंडविच।
रूबी - बुआ को अगर अविनाश से चुदवाने का इरादा है तो तुझे फूफा को देने के लिए तैयार रहना होगा। बुआ बड़ी कामिनी हैं। फूफा से बहुत प्यार करती हैं। बस वर्षा दी की नहीं दिलवा पाईं हैं।
अविनाश - मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।
रूबी हँसते हुए - भोसड़ी के तुझे क्या प्रॉब्लम होगी। तुझे तो बुआ की चूत चाहिए।
सब हंसने लगे।
अविनाश - ओके , ऑफिस भी जाना है । सब फॉर्मलिटीज फाइनल करनी है। आप लोगों से जल्दी ही मुलाकात होगी।
फ़ोन कट गया। टीवी पर सीरियल चालू था पर रूबी इतनी गरम हो चुकी थी की उसने अनुराग की चढ़ाई शुरू कर दी थी। चुदाई का खेल शुरू हो गया था। पर अनुराग के मन में इस समय तृप्ति थी। उसे जल्दी ही तृप्ति की चूत मिलने वाली थी।
After too long time update to aaya
Nice update
 
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