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Incest नज़मा का कामुक सफर 2

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Pinky

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ये कहानी मैंने 2019 में शुरू की थी, पर कुछ कारणों से पूरी नहीं कर पायी। इस बार पूरा करने का प्रयास है।
यहाँ भी मैं पूरी कहानी दोबारा डाल रही हूँ

 
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Pinky

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भाग 40-2: दो उँगलियाँ

नज़मा की गांड अब सीधे पापा के तने हुए लंड पर टिकी हुई थी। पतली फ्रॉक कमर तक ऊपर चढ़ी थी। शहजाद की बीच वाली उँगली उसकी गीली चूत में धीरे-धीरे लेकिन गहरी अंदर-बाहर हो रही थी। हर बार उँगली जब पूरा अंदर जाती, नज़मा की कमर हल्की-सी काँप जाती।

शहजाद का बायाँ हाथ फ्रॉक के ऊपर से उसके एक चूचे को पूरी तरह दबोचे हुए था। निप्पल हथेली के बीच में दबकर और कड़क हो गया था। बीच-बीच में वे अंगूठे से निप्पल को गोल-गोल घुमा देते।

नज़मा सिर पीछे करके पापा के कंधे से सटी हुई थी। उसकी साँसें गर्म होकर शहजाद के गाल पर पड़ रही थीं। वह धीरे-धीरे अपनी गांड को गोल-गोल घुमाने लगी। लंड की मोटी, कठोर लकीर उसकी गांड की दरार में रगड़ खा रही थी। हर घुमाव के साथ उसे लग रहा था जैसे पापा का लंड उसकी गांड में घुसने को बेताब हो।

शहजाद की उँगली चूत से बाहर निकलती तो अंगूठा उसके चूत के दाने पर रगड़ने लगता। गीला, सख्त दाना अंगूठे के दबाव में दबता और नज़मा की जाँघें काँप उठतीं।

“पापा… आपकी उँगली… कितनी मोटी है…” नज़मा की आवाज़ टूट रही थी।

शहजाद ने उसके कान में साँस छोड़ते हुए कहा, “मेरा लंब मोटा है बेटी… मेरा मतलब... सब।”

नज़मा और जोर से गांड घुमाने लगी। चूत का रस अब लगातार बह रहा था। पैंट पर बड़ा गीला धब्बा फैल चुका था। शहजाद की उँगली तेजी से अंदर-बाहर हो रही थी। अंगूठा दाने को बेरहमी से रगड़ रहा था। निप्पल हथेली के नीचे मसला जा रहा था।

अचानक नज़मा का शरीर तन गया। उसकी गर्दन पीछे की तरफ लुढ़क गयी और वो जोर से सिसकी। ऑर्गज्म की तेज लहर उसकी चूत से निकलकर पूरी कमर में फैल गई। चूत बार-बार जोर से सिकुड़ रही थी। उँगली को इतनी ताकत से कस रही थी कि शहजाद की उँगली रुक-सी गई। कामरस की धार ने पैंट को पूरा गीला कर दिया।

शहजाद ने उसे कसकर पकड़ रखा। नज़मा अभी काँप ही रही थी, जैसे ही नज़मा थोड़ी शांत हुई कि शहजाद ने नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए। नज़मा की गीली गांड उनके लंड पर जोर-जोर से रगड़ खा रही थी। कुछ ही पल में उनकी साँसें उखड़ गईं। अचानक उन्होंने जोर से कमर उठाई और झड़ने लगे। झड़ने की खुमारी में उन्होंने दूसरी उँगली भी नज़मा की चूत में धकेल दी।

दो मोटी उँगलियाँ एक साथ अंदर घुसते ही नज़मा की आँखें फ़ैल गईं।

“क्या… पापा… फाड़ोगे क्या मेरी चूत?” उसकी आवाज़ में साफ चिढ़ थी। “इतनी मस्ती करते हैं… सब्र नहीं है आपको? अगर ऐसे किया तो फिर कभी नहीं आऊँगी आपके पास।”

शहजाद होश में आये। दोनों उँगलियाँ धीरे से बाहर निकालीं। आवाज़ में घबराहट थी।

“अरे बेटी… तू तो बुरा मान गई। वो बस अपने-आप हो गया… आगे से ध्यान रखूँगा। माफ कर दे न।”

नज़मा कुछ पल साँसें लेती रही। फिर धीरे से मुड़ी और उनके सीने से चिपक गई। आवाज़ नरम पड़ गई।

“कोई बात नहीं पापा। आप सबसे अच्छे पापा हो। मेरी किसी दोस्त के पापा अपनी बेटी से इतना प्यार नहीं करते।”

थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने बहुत धीमे स्वर में कहा, “पापा… कुछ पैसे दो ना।”

“बेटी क्यों?”

“मुझे कच्छी लानी है, और अब तो पहली वाली सभी ब्रा छोटी पड़नी लगी हैं। नए लेने हैं।”

शहजाद ने तुरंत पॉकेट से नोट निकाले और नज़मा की हथेली में रख दिए।

“हाँ-हाँ ले आओ। ये लो पाँच हजार। अच्छा सुन… वो लेस वाले लाना। सुना है बहुत अच्छी लगती हैं।”

नज़मा ने नोट समेट लिए “ठीक है पापा।”

गलियारे में परवीन खड़ी थी। उसने पूरी बात सुन ली थी। “ये लो पाँच हजार.... लेस वाले… बेटी के लिए…, मुझे तो कभी इतना प्यार नहीं किया .... मैं भी आपकी बंदी थी ... अपनी चमड़ी की जूती बनवा के पहना देती आपको, कभी मुझे भी तो प्यार से देखते” उसकी रुलाई छूट गयी, आँखों में आँसू छलक आए, गला सूख गया। वह दबे पाँव अपने कमरे में चली गई। आँसू गालों पर बह रहे थे।

नज़मा उठकर अपने कमरे में आई। दरवाज़ा बंद करते ही उसने फ्रॉक उतार फेंकी और नंगी बिस्तर पर गिर गई। चूत अभी भी धड़क रही थी। दो उँगलियों का फैलाव का अहसास बाकी था। गांड में लंड की रगड़ का निशान सा जैसे रह गया था।

थोड़ी देर बाद उसने फोन उठाया और सान्या को कॉल किया। “हैलो सान्या…”

“अरे मेरी रानी! बोल।”

“कल मार्केटिंग करने चलना है।”

सान्या हँसी, “क्या लेना है मेरी बन्नो को? मुझे लगा तू तो अकेली ही जाकर मॉल में अपना माल दिखाएगी।”

नज़मा मुस्कुराई। “हाँ तो क्या है, दिखाऊँगी माल अगर है तो। तू भी दिखा ले, तुझे किसने मना किया है?”

“ना जी, मुझे कोई शौक नहीं। मैं तो भाई को दिखा के ही खुश हूँ। चल कल चलते हैं। मिलते हैं फिर सिटीबेस्ट मॉल में?”

“नहीं। केजी मार्केट चलेंगे।”

सान्या की आवाज़ में हैरानी थी। “अरे इतनी दूर? उस गंदी-सी मार्केट में? कुछ खास प्लान है क्या?”

नज़मा ने धीरे से कहा, “कल मार्केट में मिल… दो बजे। फिर बताती हूँ तुझे प्लान।”

फोन काटने के बाद नज़मा चादर ओढ़कर लेट गई। आँखें बंद करते ही नींद आने लगी। उसके शैतान चेहरे पर शांत मुस्कान थी।

कल नया खेल शुरू होना था।
 

malikarman

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भाग 40-1: उँगली की जगह

अगले दिन शाम को नज़मा ने पूरी तैयारी कर ली थी।

उसने फिर वही ढीली, घुटनों से थोड़ी ऊपर वाली सफेद फ्रॉक पहनी, अंदर कुछ नहीं – न ब्रा, न पैंटी। आईने के सामने खड़ी होकर उसने फ्रॉक उठाई। उसकी चिकनी चूत पहले से चमक रही थी। मुनिया हल्की गुलाबी और गीली थी। उसने उंगली से हल्के से छुआ तो रस चिपक गया।

“मेरी मुनिया..., आज तो पापा ही करेंगे तुझे प्यार,” उसने फुसफुसाया।

शहजाद ऑफिस से लौटे और सीधे टीवी वाले सोफे पर बैठ गए। नज़मा बिना ट्रे के ही आई। आज कोई बहाना नहीं। वह सीधे उनके पास गई और उनकी गोद में बैठ गई – इस बार पापा की तरफ मुँह करके। दोनों पैर उनके कमर के दोनों तरफ फैला दिए। फ्रॉक तुरंत कमर तक खिसक गई। उसकी नंगी, गरम और पहले से गीली चूत पापा की पैंट पर पूरा दबाव डाल रही थी। चूत के होंठ फैलकर लंड की मोटी लकीर पर चिपक गए।

शहजाद की साँस एकदम रुक गई। उन्होंने कुछ नहीं कहा।

“पापा, क्या हुआ, आज आप चुप क्यों हो?” नज़मा ने मासूमियत से पूछा। “थके हुए हो क्या?”

शहजाद की आवाज़ भारी निकली। “नहीं… बस… तू… मेरी प्यारी बेटी…”

नज़मा ने उनके कंधों पर दोनों हाथ रख दिए। चेहरा बिल्कुल सामान्य। “पापा, टीवी देख रहे हो? कौन सा चैनल लगाऊँ?”

शहजाद की आँखें नीचे फिसल रही थीं। “जो मरज़ी लगा दे बेटी… मेरा इंटरेस्ट तो सिर्फ अपनी प्यारी बेटी में है। अच्छा चल, वो लगा दे जिसमें घोड़ा और हिरनी एक साथ खेलते हैं।”

नज़मा हँसते हुए “ऐसा कोई चैनल नहीं है पापा, नेशनल ज्योग्राफिक लगा देती हूँ।”

मन ही मन सोचा – बड़ा आए घोड़े वाले… लौड़े ने पानी तो दस मिनट में छोड़ दिया था।

वह धीरे-धीरे कमर हिलाने लगी। चूत पैंट पर रगड़ खा रही थी। हर हिलने पर चूत के होंठ लंड को सहला रहे थे। कामरस धीरे-धीरे कपड़े को गीला करने लगा। शहजाद का लंड तेजी से सख्त हो गया। पैंट में तंबू सा बनने लगा। नज़मा महसूस कर सकती थी – उसकी नंगी चूत के नीचे वह गर्म, कठोर, धड़कती हुई चीज़।

शहजाद के दोनों हाथ उसकी गाँड पर आ गए। उन्होंने दोनों फाँकों को भर लिया और आटे की तरह गूँथने लगे। उंगलियाँ दरार में घूम रही थीं। एक उँगली धीरे से गाँड के छेद पर रुक गई और हल्का दबाव बनाते हुए अंदर सरक गई।

नज़मा की कमर लचक गई। “आह… पापा…”

वह और करीब सिमट गई। दोनों हाथों से उनके गले में बाँहें डाल लीं और कसकर चिपक गई। चेहरा उनके कंधे में छुपा लिया।

“पापा… आप अच्छे से प्यार नहीं करते,” उसने फुसफुसाया। “कल भी जल्दी भगा दिया मुझे। आज जल्दी नहीं जाने दूँगी…”

शहजाद ने कहा “अरे क्यों चिंता करती है, आज मैं भी कमर कस के आया हूँ।”

उनकी उँगली गाँड में धीरे-धीरे अंदर-बाहर होने लगी। दूसरा हाथ अभी भी चूतड़ मसल रहा था। नज़मा की चूत पैंट पर लगातार रगड़ खा रही थी। हर रगड़ के साथ लंड और सख्त होता जा रहा था। चूत का रस पैंट को भिगो रहा था।

तभी गलियारे में कदमों की आवाज़ आई। परवीन पानी का जग लेकर आई। उसने देखा – बेटी बाप की गोद में सवारी की पोजीशन में, फ्रॉक कमर तक, नंगी गाँड दोनों हाथों में, एक उँगली अंदर।

परवीन की आँखें जल उठीं। मन में चीख उठी – या अल्लाह, ये गुनाह देखने से पहले मैं मर क्यों नहीं गई।

नज़मा ने बेशर्मी से मुस्कुराते हुए कहा, “माँ, गर्मी बहुत है। मेरे लिए और पापा के लिए रूहअफज़ा बना के ला दो ना।”

परवीन की साँस थम-सी गई। उसने जग टेबल पर रखा, लंबी निगाह नज़मा पर डाली। वह एक ज़ोरदार चटाका नज़मा के गाल पर मारना चाहती थी, लेकिन न जाने कौन-सी बेबसी थी कि बिना एक भी शब्द कहे रसोई की तरफ चली गई। कदम डगमगा रहे थे।

जैसे ही माँ गई, शहजाद ने दूसरा हाथ नज़मा की चूत की तरफ बढ़ाया। उँगलियाँ गीले होंठों पर घूमने लगीं। लेकिन नज़मा इतनी कसकर चिपक हुई थी कि जगह पूरी नहीं बन पा रही थी। उँगली अंदर तक नहीं जा पा रही थी।

नज़मा ने महसूस किया। जगह पूरी नहीं है। इस पोजीशन में पापा की उँगली ठीक से अंदर नहीं जा सकती।

“मैं तो टीवी देख ही नहीं पा रही हूँ,” उसने धीरे से कहा। फिर कमर उठाई और पोजीशन बदल ली। अब वह पापा की तरफ पीठ करके बैठ गई। गाँड सीधे उनके तने हुए लंड पर टिक गई। फ्रॉक और ऊपर खिसक गई।

अब उँगली की जगह बन गई थी।

शहजाद भी तुरंत नज़मा के मन की बात भाँप गए। उन्होंने बेटी की पीठ को अपने सीने से चिपकाते हुए अपना गाल, बेटी के मुलायम गाल के साथ गाल सटा दिया। “हाँ, ऐसा हम दोनों को टीवी सही से दिखाई देगा।”

यह बोलते हुए शहजाद ने अपने दायें हाथ की बीच वाली उँगली नज़मा की चूत में सरका दी। नज़मा के मुँह से सिसकी निकली। शहजाद ने मौका देखते हुए, फ्रॉक के ऊपर से ही बायें हाथ की पूरी हथेली बेटी के चूचे पर रख दी। निप्पल कड़क था। हथेली के नीचे गोल, नरम मांस दब रहा था। अब एक उँगली चूत में अंदर-बाहर हो रही थी, दूसरा हाथ चूचे मसल रहा था, और गाँड तने हुए लंड पर रगड़ खा रही थी। नज़मा की साँसें तेज हो गईं। वह सिर पीछे करके पापा के कंधे से सट गई। चूत की दीवारें उँगली को कस रही थीं। अब नज़मा की चूत से रस लगातार बह रहा था।

परवीन दो गिलास रूहअफज़ा लेकर वापस आई। उसने देखा – बेटी अब उल्टी बैठी है, गाँड लंड पर, एक उँगली चूत में तेजी से अंदर-बाहर, दूसरा हाथ फ्रॉक के ऊपर चूचे पर। उसने गिलास टेबल पर रखे। आँखें फटी हुईं। साँसें तेज। गले में कुछ अटक गया। फिर बिना कुछ बोले चली गई। दरवाज़ा बंद करते समय हल्की सिसकी सुनाई दी।

शहजाद की उँगली अब आराम से अंदर-बाहर हो रही थी। नज़मा की चूत पूरी तरह खुल चुकी थी। चूचे हथेली के नीचे दब-दबकर फूल रहे थे। गाँड लंड पर रगड़ खा रही थी। पैंट पर बड़ा गीला धब्बा फैल चुका था।

खेल अभी शुरू ही हुआ था।
Nice update 👍🏻
 

malikarman

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भाग 40-2: दो उँगलियाँ

नज़मा की गांड अब सीधे पापा के तने हुए लंड पर टिकी हुई थी। पतली फ्रॉक कमर तक ऊपर चढ़ी थी। शहजाद की बीच वाली उँगली उसकी गीली चूत में धीरे-धीरे लेकिन गहरी अंदर-बाहर हो रही थी। हर बार उँगली जब पूरा अंदर जाती, नज़मा की कमर हल्की-सी काँप जाती।

शहजाद का बायाँ हाथ फ्रॉक के ऊपर से उसके एक चूचे को पूरी तरह दबोचे हुए था। निप्पल हथेली के बीच में दबकर और कड़क हो गया था। बीच-बीच में वे अंगूठे से निप्पल को गोल-गोल घुमा देते।

नज़मा सिर पीछे करके पापा के कंधे से सटी हुई थी। उसकी साँसें गर्म होकर शहजाद के गाल पर पड़ रही थीं। वह धीरे-धीरे अपनी गांड को गोल-गोल घुमाने लगी। लंड की मोटी, कठोर लकीर उसकी गांड की दरार में रगड़ खा रही थी। हर घुमाव के साथ उसे लग रहा था जैसे पापा का लंड उसकी गांड में घुसने को बेताब हो।

शहजाद की उँगली चूत से बाहर निकलती तो अंगूठा उसके चूत के दाने पर रगड़ने लगता। गीला, सख्त दाना अंगूठे के दबाव में दबता और नज़मा की जाँघें काँप उठतीं।

“पापा… आपकी उँगली… कितनी मोटी है…” नज़मा की आवाज़ टूट रही थी।

शहजाद ने उसके कान में साँस छोड़ते हुए कहा, “मेरा लंब मोटा है बेटी… मेरा मतलब... सब।”

नज़मा और जोर से गांड घुमाने लगी। चूत का रस अब लगातार बह रहा था। पैंट पर बड़ा गीला धब्बा फैल चुका था। शहजाद की उँगली तेजी से अंदर-बाहर हो रही थी। अंगूठा दाने को बेरहमी से रगड़ रहा था। निप्पल हथेली के नीचे मसला जा रहा था।

अचानक नज़मा का शरीर तन गया। उसकी गर्दन पीछे की तरफ लुढ़क गयी और वो जोर से सिसकी। ऑर्गज्म की तेज लहर उसकी चूत से निकलकर पूरी कमर में फैल गई। चूत बार-बार जोर से सिकुड़ रही थी। उँगली को इतनी ताकत से कस रही थी कि शहजाद की उँगली रुक-सी गई। कामरस की धार ने पैंट को पूरा गीला कर दिया।

शहजाद ने उसे कसकर पकड़ रखा। नज़मा अभी काँप ही रही थी, जैसे ही नज़मा थोड़ी शांत हुई कि शहजाद ने नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए। नज़मा की गीली गांड उनके लंड पर जोर-जोर से रगड़ खा रही थी। कुछ ही पल में उनकी साँसें उखड़ गईं। अचानक उन्होंने जोर से कमर उठाई और झड़ने लगे। झड़ने की खुमारी में उन्होंने दूसरी उँगली भी नज़मा की चूत में धकेल दी।

दो मोटी उँगलियाँ एक साथ अंदर घुसते ही नज़मा की आँखें फ़ैल गईं।

“क्या… पापा… फाड़ोगे क्या मेरी चूत?” उसकी आवाज़ में साफ चिढ़ थी। “इतनी मस्ती करते हैं… सब्र नहीं है आपको? अगर ऐसे किया तो फिर कभी नहीं आऊँगी आपके पास।”

शहजाद होश में आये। दोनों उँगलियाँ धीरे से बाहर निकालीं। आवाज़ में घबराहट थी।

“अरे बेटी… तू तो बुरा मान गई। वो बस अपने-आप हो गया… आगे से ध्यान रखूँगा। माफ कर दे न।”

नज़मा कुछ पल साँसें लेती रही। फिर धीरे से मुड़ी और उनके सीने से चिपक गई। आवाज़ नरम पड़ गई।

“कोई बात नहीं पापा। आप सबसे अच्छे पापा हो। मेरी किसी दोस्त के पापा अपनी बेटी से इतना प्यार नहीं करते।”

थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने बहुत धीमे स्वर में कहा, “पापा… कुछ पैसे दो ना।”

“बेटी क्यों?”

“मुझे कच्छी लानी है, और अब तो पहली वाली सभी ब्रा छोटी पड़नी लगी हैं। नए लेने हैं।”

शहजाद ने तुरंत पॉकेट से नोट निकाले और नज़मा की हथेली में रख दिए।

“हाँ-हाँ ले आओ। ये लो पाँच हजार। अच्छा सुन… वो लेस वाले लाना। सुना है बहुत अच्छी लगती हैं।”

नज़मा ने नोट समेट लिए “ठीक है पापा।”

गलियारे में परवीन खड़ी थी। उसने पूरी बात सुन ली थी। “ये लो पाँच हजार.... लेस वाले… बेटी के लिए…, मुझे तो कभी इतना प्यार नहीं किया .... मैं भी आपकी बंदी थी ... अपनी चमड़ी की जूती बनवा के पहना देती आपको, कभी मुझे भी तो प्यार से देखते” उसकी रुलाई छूट गयी, आँखों में आँसू छलक आए, गला सूख गया। वह दबे पाँव अपने कमरे में चली गई। आँसू गालों पर बह रहे थे।

नज़मा उठकर अपने कमरे में आई। दरवाज़ा बंद करते ही उसने फ्रॉक उतार फेंकी और नंगी बिस्तर पर गिर गई। चूत अभी भी धड़क रही थी। दो उँगलियों का फैलाव का अहसास बाकी था। गांड में लंड की रगड़ का निशान सा जैसे रह गया था।

थोड़ी देर बाद उसने फोन उठाया और सान्या को कॉल किया। “हैलो सान्या…”

“अरे मेरी रानी! बोल।”

“कल मार्केटिंग करने चलना है।”

सान्या हँसी, “क्या लेना है मेरी बन्नो को? मुझे लगा तू तो अकेली ही जाकर मॉल में अपना माल दिखाएगी।”

नज़मा मुस्कुराई। “हाँ तो क्या है, दिखाऊँगी माल अगर है तो। तू भी दिखा ले, तुझे किसने मना किया है?”

“ना जी, मुझे कोई शौक नहीं। मैं तो भाई को दिखा के ही खुश हूँ। चल कल चलते हैं। मिलते हैं फिर सिटीबेस्ट मॉल में?”

“नहीं। केजी मार्केट चलेंगे।”

सान्या की आवाज़ में हैरानी थी। “अरे इतनी दूर? उस गंदी-सी मार्केट में? कुछ खास प्लान है क्या?”

नज़मा ने धीरे से कहा, “कल मार्केट में मिल… दो बजे। फिर बताती हूँ तुझे प्लान।”

फोन काटने के बाद नज़मा चादर ओढ़कर लेट गई। आँखें बंद करते ही नींद आने लगी। उसके शैतान चेहरे पर शांत मुस्कान थी।

कल नया खेल शुरू होना था।
Good one
 

Pinky

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Ek mast incest story ko adultary banane chah rakhne wale gobar admi, adultary hi padhni hai to jaker adultary category me adultary story padh bahut sari story hai maa bahen par based adultary story
Incest ko incest hi rahne do,suru me hi writer ne iss incest story me thodi adultary gusaya tha mujhe to whi kharab lag rha tha incest story ko adultary kya bnaya ja rha hai
Plz 🙏🙏 is story ko incest hi rahne do
बेफिक्र रहिये, घर का पूरा मज़ा मिलेगा
 
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Mass

Well-Known Member
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Hot update Madam....good one...

Pinky
 
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Mass

Well-Known Member
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Thanks for the appriciation.
Madam,
मेरा भी एक कहानी चालु है. मुझे बहुत ख़ुशी होगी अगर आप मेरी कहानी भी पढ़े और कमैंट्स दे. इंतज़ार रहेगा. बहुत धन्यवाद.
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It is also there in my signature as well. Look forward to your comments. Thanks.

Pinky
 
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