ji jarurAap meri story bhi padh kar dekhna kabhi please
"Rishton Me Haseen Badlav-part 2 started"
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Beautiful update and nice storyभाग ३२
रश्मि पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और अपनी आंखें बंद करके जोर जोर से अपने हाथों की उंगलियो को अपने बूर में अन्दर बाहर करने लगी थी उसे पता ही नहीं चला था की मैं ये सब देख रहा हूं
मेरी पत्नी की अपने हाथों से चूचियों को भींचते हुए सिसकारी भरने लगी थी
रश्मि - उफ्फ...... अअह्ह्ह्ह.......
मैं समझ गया था की जीजू के मोटे लन्ड को देख वो कामवासना से भर गई थी उसे केवल बूर की ठुकाई चाहिए थी पर वो अभी किससे चुदाती उसे तो लगा की मेरा लन्ड खडा ही भी होता है
कुछ देर तक बूर में उंगली करने से वो अब झड़ने वाली थी तो मैं वहा से खिसक गया ताकि उसे पता ना चले और हॉल में आ कर बैठ गया
कुछ देर बाद पिताजी बाजार से आ गए और जीजू भी दीदी के साथ में हॉल में आ गए जबकि रश्मि अपने कमरे में ही थी
पापा सीधे अपने रूम में गए और किसी को फ़ोन करते हुए रुम में कुछ ढूंढ रहे थे
अचानक उसकी आवाज तेज हो गई और फ़ोन पर ही चिलाते हुए हॉल की तरफ़ आने लगे फिर कॉल कट कर दिया
पापा बहुत परेशान से लग रहे थे
मैं - पापा जी क्या हुआ
पापा - बहुत लफड़ा हो गया है गांव में
कविता दीदी - कुछ बताइए तो हुआ क्या है
पापा - अरे शंकर का फ़ोन आया था मैं तो बाजार में ही था बोला की घर आ कर बात करता हूं
(जैसा कि आपलोगो ने भाग -०८ में पढ़ा था की शंकर हमारे गांव की जमीन की रखवाली करता है)
मैं - हां तो क्या बोला उसने
पापा (गंभीर हो कर)- कह रहा था कि सरपंच ने नहर वाली जमीन पर केस दर्ज कर दिया है और कल कोर्ट बुलाया गया है वकील के द्वारा
मैं - तो क्या हुआ पापा आप इतना चिंतित क्यों है उसका पेपर तो हमारे पास ही है ना कुछ नहीं कर पाएगा सरपंच
पापा - वही तो मिल नही रहा
मैं - आप टेंशन छोड़ दिजिए शायद मां ने अपनी अलमारी में रखी होगी और उसकी चाभी रश्मि को दी थी
पापा - जा बेटा एक बार देख ले
मैं अपने कमरे मे आया तो रश्मी तबतक अपने बदन को ठंडा कर चुकी थी और ऐसे बैठ कर मोबाइल पर कुछ कर रही थी
रश्मि ने अभी भी पैंटी नहीं पहनी थी और उसका कामुक बूर दूर से दिख रहा था
मैं - रूम में जाकर रश्मि को पुरी बात बताई
रश्मि - ये तो बड़ा बुरा हुआ
मैं - अच्छा मां की अलमारी की चाभी कहां है
रश्मि - मेरे पास
मैं - चलो मां के रुम में वो कागजात खोजना है
रश्मि - ऐसे ही, रुको मैं साड़ी पहन लेती हूं
मैं - तो क्या हुआ
रश्मि - पगला गए हो क्या, अभी सब लोग नीचे हैं और मैं ऐसे ही जाऊ
मैं - ठीक है
फिर रश्मि ने तुरंत एक ग्रीन रंग की साड़ी पहन ली
फिर मैं और रश्मि चाभी लेकर नीचे आए और मम्मी के रुम की तरफ़ चल रहे थे तो गौर किया कि मेरे जीजू रश्मि की कामुक चूतड़ों को ताड़ रहे थे
पर रश्मि जान चुकी थी की दीपक जीजू उसके बदन को घूर रहे हैं तो वो पलटी और दोनों की नजरे मिली तो जीजू झेप गए
हम दोनो मां के रुम में वो कागजात खोजना शुरू किया और फिर मिल ही गया
और वो पेपर लाकर पापा को दिया
पापा - रोशन, कल सुबह हम दोनों को गांव जाना होगा
मैं - ठीक है पापा
कविता - पापा मैं भी चलू साथ में
पापा - तुम क्या करोगी जा कर
जीजू - पापा अगर एक दो दिन रुकना पड़ा तो कम से कम कविता खाना बना देगी
पापा - ठीक कह रहे हो दीपक बेटा
ये सब डिस्कस होने के बाद डिनर हुआ और सब अपने अपने कमरे में चले गए
रश्मि तो तुरंत सो गई पर मुझे नींद नहीं आ रही थी मुझे लगा कि जीजू और दीदी आज तो खूब मजे कर रहे होंगे तो देखने की इच्छा से अपने कमरे से बाहर निकल कर दीदी के रुम के पास गया और खिड़की से देखने लगा
दीदी केवल ब्रा और पैंटी में खड़ी थी उसकी आंखें एकदम नशीली लग रही थी और अपने पति को अपने ओर आने का इशारा किया
जीजू ने भी दीदी को अपनी बांहों में भर लिया और लिप टू लिप किस करने लगा
दोनों आली आलिंगन में बंध गए थे और एक दूसरे के शरीर को प्यार करने लगे थे
धीरे धीरे से जीजू ने दीदी को पूरा नंगा कर दिया दीदी और लिपट गई फिर जीजू के लन्ड को पकड़ लिया फिर मुंह में भर कर चूसने लगी
जीजू का मोटा लन्ड दीदी के थूक से पूरा गीला हो चुका था
जीजू ने फिर दीदी को बेड पर लिटा दिया और सामने आ कर दीदी की मुंह में अपना लन्ड उतार दिया और दीदी के मुंह चोदने लगा
दीदी - उम्मम्म...........
जीजू -अअह्ह्ह्ह..........
दोनों की सिसकारी अब कमरे में गूंजने लगी थी
फिर जीजू ने दीदी को बूर में लन्ड अड़ा कर पेल दिया और
दीदी - आऊओआऊ............. अअह्ह्ह्हह............
और दीदी बूर में धक्का मरना शुरू किया
दोनो मस्ती के आगोश में चले गए धुवाधार दीदी की चूदाई हो रही थी
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करीब एक घंटे तक जीजू ने दीदी की चूदाई की फिर दोनो झड़ गए
जीजू ने दीदी के बूर पर अपना ढेर सारा वीर्य गिरा दिया
और फिर दोनों नंगे बदन ही सो गए और मैं भी रुम में जाने लगा तो देखा की पापा के रुम की बत्ती जल रही है देखा तो पापा मोबाइल देखते हुए मूठ मार रहे थे और फिर सारा माल फर्श पर गिर पड़ा
ओह.... लगता है अपनी बहू के नाम की मुठ मार रहे थे
फिर मैं सोने चला गया