जीजा और दो दो सालियाँ
कुछ महुआ का असर, कुछ नए-नए आ रहे जोबन का जोश, आज दोनों बहने खूब गर्म थीं। बुर-जोर जोर से फुदक रही थी और दोनों सोच रही थीं , जीजू किसकी झिल्ली पहले फाड़ेंगे। बस यह सोच रही थीं कि कोमल दीदी जल्दी से आएं और मम्मी को ले जाएँ।
सालियों के जीजू ने खीर खाना शुरू ही किया था, कि सालियों की मम्मी, मिसेज मोइत्रा बाहर निकल कर दरवाजे पर खड़ी हो गयीं, और वहीँ से मंजू को आवाज लगाई,
' हे मंजू जरा ब्लाउज पहनने में हेल्प कर दे, "
और उनकी निगाहें उस बंगाल के जादू पर टिकी रह गईं। दो गोल गोलाइयाँ, जैसे बुला रही हों, चैलेन्ज दे रही हों। चोली कट ब्लाउज, सिर्फ आधा पहना, दोनों हाथ से किसी तरह बड़े बड़े गुदाज जोबन पे टिका, और नीचे, बहुत नीचे, पेटीकोट, नाभी से कम से कम एक बित्ता नीचे बाँधा, गोरा चिकना पेट, गहरी नाभी, कूल्हे सब दावत दे रहे थे।
मंजू और ब्लाउज तो बहाना थे, एक तो उन्हें अपने जुबना दिखा के इस मरद को ललचाना था और उससे भी बड़ी बात ये वो देखना चाहती थीं की उनका मुंहबोला दामाद खीर खा रहा है की नहीं।
आधा दर्जन गाजर, बारी बारी से उन्होंने १५ १५ मिनट न सिर्फ रखी थी अपनी बिल में बल्कि गपागप गपागप कम से कम ७०- ८० बार, जबतक पानी नहीं निकल गया, गाजर लसलस भीग नहीं गयी,
और खीर में भी उन्होंने दसो जड़ी बूटियां मिलाई थी।
उन्हें मंजू की बात पर पूरा विश्वास था की अगर वो ये खीर खा लेगा तो आज रात को ही काण्ड हो जाएगा।
मिसेज मोइत्रा को सिर्फ पेटीकोट ब्लाउज में देख कर उनकी हालत खराब हो गयी, और ब्लाउज भी पूरी तरह से खुला, हुक तो सब खुले ही थे, बस हलके हाथों से उस भरे देह की बंगालन ने अपने उभारों को नीचे से हाथ से पकड़ के और उभार रखा था, गोरे गोरे गोले साफ़ साफ़ झलक रहे थे,
क्या मस्ती चूँचिया हैं, ऊपर से ऐसी जबरदस्त हैं तो, वो सोच रहे थे। मन कर रहा था की उठ के, पेट पे जरा सी गुदगुदी करूँ तो दोनों हाथ अलग हो जाएंगे,, ब्लाउज छटक के नीचे और दोनों संगमरमर के पत्थरों सी कड़ी कड़ी, सफ़ेद गोलाइयाँ बाहर, बस एक बार स्साली की छूने को मिल जाए,
बचपन से उनका मन बड़ी उम्र की औरतों पर लुभाता था, ख़ास तौर से कूल्हे के नीचे पेटीकोट बांधे और छोटा सा ब्लाउज पहने, कभी झुक के अनजाने में गहराई दिखाते, कभी पानी के छींटो से ब्लाउज के अंदर से झलकता, और वही सोच सोच के वो मुट्ठ मारते थे, अक्सर जब सफ़ेद मलाई निकलती तो सोचते की किसी बड़ी उम्र की औरत की चूँचियों पे झड़ रहे हैं, लगता था वो सारी फैंटेसी बचपन से लेकर आज तक की सामने खड़ी है,
उनके पॉर्न कलेक्शन में भी ४० % फिल्मे एम् आई एल ऍफ़ वाली ही हैं, ' मॉम वांट्स टू ब्रीड ' ' हॉट मेच्योर वोमेन' " ऐसी,
उनकी निगाह बस उन दोनों गोलाइयों पे टिकी थीं, किसी तरह एक बार मिल जाए, उनका बस चलता तो मिसेज मोइत्रा की वहीँ चूँचिया चोद देते,
खूंटा मस्त खड़ा हो गया था, जींस पूरी तरह टाइट, बल्ज साफ़ दिख रहा था चेहरे से उनकी बदहाली दिख रही थी, और मिसेज मोइत्रा यही देख रही थीं, यही तो वो चाहती थीं। बार बार उनकी निगाह दामाद की टांगो के बीच जा रही थी, स्साले का कितना बड़ा है। सच में देखने में हाथ में लेने में कितना अच्छा लगेगा, आज कुछ भी हो इसकी लेनी है। उसके चेहरे की हालत बता रही थी की मिसेज मोइत्रा के जोबन का वो सच में दीवाना है
और मिसेज मोइत्रा बाहर आयी भी इसलिए इस हालत में आयी थीं।
उनकी बेटियां खीर का कटोरा ले कर अपने जीजू को खिलाने के लिए खड़ी थीं
उन्होंने अपने दामाद की लिबराती, ललचाती निगाह, अपने गदराये अधखुले जोबन पे देख ली और, जरा सा उसे उचका के, मुस्करा के बेटियों को चिढ़ाते, प्यार से हड़काते बोलीं,
" कैसी सालियाँ हो, अरे जीजू को भूखा रखना है क्या ? गोद में बैठ के, जरा प्यार से, अपने हाथ से खिलाओ "
इरादा उनका साफ़ था, एक तो ये बेटियों से थोड़ा खुल जाएगा तो उनका भी रास्ता साफ़ हो जाएगा और दूसरे किसी भी हालत में इस टोटके वाली खीर को इसे पूरा खाना है, तभी असली असर होगा।
छुटकी ठसके से बैठ गयी और अपने हाथ से, अपने जीजू को खिलाने लगी पर अब मंजू मैदान में आ गयी और उन्हें हड़काते बोली,
" अरे कैसे तेरे जीजू हैं, ये भी नहीं मालूम है की स्साली को पकड़ते कैसे हैं " और सीधे उनका हाथ छुटकी के उभार पर रख दिया,
ललचा तो ये पहले से रहे थे, टेनिस की बाल साइज कड़े कड़े, टीन उभार, टॉप फाड़ते, और ब्रा का बंधन भी नहीं तो कबूतर की चौंच की तरह दोनों घुंडीया भी साफ़ साफ़ दिख रहे थे,, ऊपर से छुटकी ने उनका हाथ पकड़ के अपने उभार पे कस के खुल के दबाते हुए उकसाया,
" ठीक से पकड़ो न जीजू "
मिसेज मोइत्रा देख रही थीं, मुस्करा रही थीं। तबतक मंजू आके बोल,
" हे चलो, पहनाती हूँ, लेकिन बहुत दामाद दामाद करती हो, उसी से काहें नहीं ब्लाउज पहन लेती, "
" कह दूंगी कह दूंगी, घबड़ाती हूँ क्या उससे, "
कह कर बड़ी मीठी निगाह से अपने दामाद को देखा और मंजू को खींच के अंदर, लेकिन कमरे का दरवाजा बस आधा उठँगा दिया।
मंजू ने जोर से इन्हे हड़काया,
" अरे स्साली को पकड़ना है उसका टॉप थोड़े, और उनका हाथ बड़ी वाली के टॉप के अंदर सीधे उसके चूजों पे, और बड़ी वाली मुस्करा के छोटी को जलाते हुए जैसे बिन बोले कहा हो , देख जीजू मुझे जीजू ज्यादा मानते हैं तभी सीधे मेरा, और छुटकी ने सीधे जीजू का हाथ पकड़ के अपने टॉप के अंदर करते हुए हड़काया, " जीजू बेईमानी नहीं चलेगी, दो बहनों के बीच अंतर् ये "
" एकदम नहीं " वो बोले और कस के खुल के छुटकी के टॉप के अंदर घुसे हाथ से छुटकी के चूजे को कस के दबा दिया,
मंजू अंदर चली गयी, दोनों लड़कियां खूब गरमाई थीं, वो सोच रही थी मम्मी तो अंदर हैं और उन्हें आधे घंटे से कम क्या लगेगा तैयार होने में, छुटकी ने स्टेचू बोल दिया और जीजू से कहा मतलब सोच लो जब तक मैं नहीं कहूंगी, आप दोनों हाथ वहां से हटा नहीं सकते,
" और क्या हम लोग तो है न खिलाने को , ऐसे भी क्या जल्दी बाजी , न कहि खीर भागी जा रही है न सालिया" हँसते हुए खीर खिलाते बड़ी वाली बोली।
इनकी हालत खराब हो रही थी, पहली बार उगते हुए टकोरों पर हाथ पड़ा था, जितने छोटे उतने ही खतनाक, स्कूल टॉप से रोज देख देख के ही मन मचलता था और आज उन दोनों ने खुद खिंच के अपनी हवा मिठाई हाथ में पकड़ा दी, तो मजा न लेने से बढ़ कर बेवकूफी नहीं। अब वह खुल के दोनों दर्जा नौ वालियों की एक साथ दबा रहे थे, सहला रहे थे, कभी बस आते हुए निपल को फ्लिक कर दे रहे थे,
और अब तड़पने की सिसकने की बारी उन दोनों की थी,
लेकिन छोटी भी कम नहीं थी, जुबना का जवाब उसने जीजा के पेंट पे दिया, जीजा का बल्ज साफ़ साफ़ दिख रहा था, बस पहले तो एक बार छू दिया ,
वो तड़प के रहा गया,
फिर छोटी ने कस के ऊँगली से इनके तने खूंटे के किनारे किनारे लाइन सी खोंची, और जब नहीं रह गया तो सीधे अपनी कोमल कोमल हथेली रख के दबा दिया,
उनकी हालत खराब हो रही थी और जवाब उनके हाथ ने दिया, कस के छुटकी की कच्ची अमिया दबा के, कस कस के वो रगड़ने मसलने लगे
अगर अभी ऐसे मजा आ रहा है तो उस बंगालन के बाद जब ये दोनों मिल जाएंगी तो सच में कितना मजा आएगा, वो सोच रहे थे छोटी छोटी चूँची मसल रहे थे,
" हे तुझसे नहीं जा रहा है ठीक से " मिसेज मोइत्रा ने मंजू से शिकायत की,
" अरे तो बुलवा ले अपने यार को, अपने दामाद को वो ठीक से पहना देगा "
जीजू को हाथ से खिलाते छुटकी ने धीमे से कहा, " दामाद लोग ब्लाउज उतारते ज्यादा है”
बोला तो उसने धीरे से लेकिन मिसेज मोइत्रा ने सुन लिया और अंदर से ही खिखिलाती बोलीं,
" अच्छा जीजू के साथ तेरी बहुत हिम्मत बढ़ रही है, पिटेगी तू मेरे हाथ से कस के एक दिन "
"आप की आवाज सुन के ही आपके दामाद का पैंट टाइट हो गया है" बड़ी बोली।
" तो उतार दे न, कैसी सालिया हों, दो दो सालिया मिल के अकेले मेरे दामाद का पैंट भी नहीं उतार पा रही हो " अंदर से ही हँसते हुए चिढ़ाते हुए मिसेज मोइत्रा ने बेटियों को उकसाया,
और दोनों बेटियां बचपन की आज्ञाकारी, जीजू की बेल्ट खुली, पैंट खुला और सररर फर्श पर
लेकिन अंदर मोटे कपडे की टाइट चड्ढी की जगह एक एकदम ट्र्रांसपेरेंट बॉक्सर शार्ट, सब कुछ दिखता है वाली स्टाइल का और सब दिख रहा था , शार्ट एक बित्ता हवा में तना था,
मुंह उनका बंद था, दोनों खीर खिला रही थीं और हाथ दोनों सालियो की छोटी छोटी चूँचियों पे, पैंट बिचारा अलग हो गया।
बड़की ने छुटकी को उकसाया।
सही बात थी , जीजू का हाथ तो टॉप के अंदर से मजे ले रहा था और सालियाँ सिर्फ ऊपर ऊपर से, बस छुटकी ने हाथ शार्ट के अंदर, पहले तो उसकी हिम्मत नहीं पड़ी, सिर्फ खूंटे के बेस पे फिर धीरे धीरे हिचकते हुए छुआ। इतना मोटा। दीदी जो वीडियो भेजती थीं उससे भी ज्यादा, पर छुटकी थी हिम्मती, कस के उसने पकड़ लिया,
अब उनकी सिसकी निकल गयी और फिर दूसरी स्साली भी मैदान में आ गयी। एक सहलाती, एक दबाती, एक पकड़ती, एक रगड़ती, दो यंग टीनेजर्स,
जो वो कर सकते थे कर रहे थे,
दरवाजा उठँगा था, दोनों को उनकी मम्मी नहीं दिख रही थीं , न मम्मी को बेटियां, पर सामने एक ड्रेसिंग टेबल थी, उसके आदमकद शीशे में थोड़ा थोड़ा दिख रहा था, बेटियों का शार्ट में घुसा हाथ,
मिसेज मोइत्रा जोर से मुस्करायीं, सही है, ये स्साला ऐसे ही काबू में आएगा, खोल के पकड़ना पडेगा,
" हे सुनो , जरा अपने जीजू को ...." मिसेज मोइत्रा ने अंदर से आवाज लगाई, और छुटकी ने सास का हुकुम सुना दिया लेकिन वहीँ से मिसेज मोइत्रा बोलीं " पहले खीर खत्तम करा दे "
"अभी तो बहुत बची है, बड़की बुदबुदायी "
"अरे घबड़ा न खिलाती हूँ अभी, इनकी सब बदमाशी का इलाज है मेरे पास, छोटी स्साली तो मैं ही हूँ " और कटोरे से पूरी खीर छुटकी ने अपने मुंह में, और बड़की ने जीजू का सिर पकड़ लिया,। छुटकी का चुम्मा सीधे होंठ पे और साली के मुंह में उसके मुझ रस से लिपटी खीर जीजा के मुंह में
वो अंदर सास के पास पहुंचेऔर अबकी ब्लाउज बस जरा सा जोबन पे अटका, और मिसेज मोइत्रा ने उनसे कहा जरा सा पकड़ो न, लेकिन जब तक वो पकड़े, मिसेज मोइत्रा ने मारे बदमाशी के ब्लाउज छोड़ दिया और सर्ररर
दोनों ३६ डी डी कैद से बाहर, दूधिया रोशनी में दूध के गोले, पूरी टाउनशिप में उस साइज का कोई नहीं था यह तो लेडीज क्लब में चेक ही हो चूका था।
और बेचारे उनके दामाद की हालत खराब और ऊपर से मंजू ने हड़काया, " कैसे दामाद हो, सास कह रहे हो पकड़ो पकड़ो, और तुम मुंह देख रहे हो, ऐसे मस्त जोबन की बेइज्जती है "
और उन्होंने पकड़ लिया, हलके से जैसे अभी डांट पड़ेगी, और डांट पड़ गयी, और किसकी उस मस्त बंगालन की, उनकी मुंहबोली सास की,
" अबे, तेरी सालियों के ऐसे छोटे छोटे नहीं है की रुई के फाहे की तरह पकडे हो, अरे मरद की तरह पकड़ो "
बस क्या था कस के जोबन मर्दन चालू हो गया। कब से उनका मन कर रहा था,
" बस ऐसे ही पकडे रहना इस छिनार का जरा कस के दबाओ, मैं दूसरा ब्लाउज ला रही हूँ, मिल के पहना देंगे " मंजू उन्हें आँख मार के बाहर निकल गयी,
तबतक बाहर से छुटकी बोली, " दी का मेसेज आया है बस वो निकल रही है, पांच मिनट में पहुँच जाएंगी। "
इस मस्ती के बीच एक बात तो रह ही गयी थी, जब दोनों लड़कियां किचेन में थी और मिसेज मोइत्रा तैयार होने गयी थीं, ये ऊपर दोनों कबुतरियों के कमरे में गए और निधि ने जो दोनों स्पाई कैमरे दिए थे वो न सिर्फ फिट कर दिए बल्कि निधि के साथ टेस्ट भी कर लिए, पूरे बिस्तर का कवरेज दोनों कैमरे अच्छी तरह से कर रहे थे और हर ऐंगल पकड़ा जा सकता था।
अब असली काम ये था की आज रात को उन्हें कुछ जुगाड़ कर के मिसेज मोइत्रा के पास ही रुकना था, और इस कमरे का इस्तेमाल भी करना था। आज ही वो सेंसटिव रिपोर्ट अमेरिका में ११-१२ बजे दिन में आएगी तो यहाँ के हिसाब से रात होगी। रिपोर्ट डाउनलोड करके पढ़ने के लिए ये कमरा ठीक रहेगा। उन्होंने अपने कीड़ा पकडक यंत्र ( बग डिटेक्टर ) से अच्छी तरह जांच कर लिया की कोई भी बग या सर्वेलेंस डिवाइस इस कमरे में नहीं है। वैसे तो डार्क वेब के जरिये ही वो जुड़ते, लेकिन उसके लिए भी सेफ्टी चाहिए थी। मिसेज मोइत्रा के यहाँ लड़कियों के लिए एकअलग ब्रांड बैंड था, और नीचे कम्पनी का इंटरनेट कनेक्शन था, फिर उन दोनों बालिकाओ के मोबाइल से हॉट स्पॉट क्रिएट कर के वो टीन अलग अलग आई पी एड्ड्रेस इस्तेमाल कर सकते थे।
घड़ी में अभी १० बजकर चालीस मिनट हुए थे, मिसेज मोइत्रा को १० बजकर ५५ मिनट पर क्लब में होना था।
सुजाता आधे घंटे पहले क्लब पहुंच गयी थी।
कोमल बस घर बंद कर के निकलने वाली थी।
निधि कम्यूटर कुछ ठीक ठाक कर रही थी।
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Bohot hai kaamuk.
Chukylti mouth feed kar rahi hai.
Or ye sath main dono saaliyo ke kabutar ka aanand le rahe hai.
Bohot hi rochak update komal g.
Par sayad kuch kami thi.
Sayad ye update jaldi Dene ke chalte .
Aap jyada samajh sakti hai.
Is update main aapka jhalak nahi aaya