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Erotica छाया ( अनचाहे रिश्तों में पनपती कामुकता एव उभरता प्रेम) (completed)

Alok

Well-Known Member
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Atayant Adhbudh Lovely Anand ji.........

Iss kahani ki jitni prashansa ki jaye woh bhi kam hai, bahut samay baad koi aise kahani padh rahe hai jis mein sambhog ka samay bhi pyaar jhalakta hain.........


Aise hi likhte rahiye........ :love3::love3::love3::love3::love3::love3::love3:
 

Lovely Anand

Love is life
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भाग 32
हमें स्पष्ट इशारा मिल चुका था कि वह व्यक्ति छाया के बिल्कुल करीब है। हमारे साथ आए सिपाही ने एक जोरदार लात दरवाजे पर मारी और दरवाजा खुल गया। अंदर मेरी छाया थी और वह आदमी। उसे देख कर मैं हतप्रभ था।
अब आगे.....

वह आदमी अश्विन था, मनोहर चाचा का दामाद। साथ आई टीम ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया। छाया मेरे से सट गयी थी। वह एक छोटे बच्चे को तरह सुबक रही थी। उसके स्तन मेरे सीने पर सट रहे थे और छाया के बच्ची ना होने का एहसास दिला रहे थे। मैं उसकी पीठ सहला रहा था। रोबिन हमें देख कर मुस्कुरा रहे थे।

पोलिस स्टेशन पहुचने के बाद
(मैं अश्विन)
मैंने छाया को पहली बार अपने विवाह में ही देखा था। इतनी सुंदर लड़की मैंने अपने जीवन में आज तक नहीं देखी थी वह मेरी साली थी। उसका चेहरा हमेशा के लिए मेरे दिमाग मे कैद हो गया था। अपने विवाह के दौरान भी।हर समय मेरा ध्यान उस पर ही था.
छाया के प्रति मेरी ललक बढ़ती चली गई. मैं उसे देखने के लिए घंटों उसके कॉलेज के सामने रहता। मुझे उससे मिल पाने की हिम्मत तो नहीं थी पर उसे देखने का सुख में नहीं त्यागना चाहता था. शुरू शुरू में मैं मानस के घर जाया करता जिसका मुख्य कारण छाया को देखना होता था परंतु धीरे-धीरे मेरा उनके घर आना जाना बंद हो गया मेरी पत्नी ने साफ मना कर दिया था. मेरी पत्नी को मेरे छाया के प्रति इस कामुक प्रेम की खबर लग चुकी थी. कई बार संभोग के दौरान मेरे मुंह से छाया शब्द निकल आया था जिसे मेरी पत्नी ने तुरंत ही पकड़ लिया था.
मैंने मानस के विवाह में उसके और छाया के बीच में चल रही छेड़छाड़ को कई बार देखा था। उसी दौरान मैंने छाया की नग्न जाँघों के बीच मानस को उसकी योनि को चूमते देखा। मुझे इस बात का यकीन ही नहीं हो रहा था की छाया और मानस के बीच ऐसे संबंध हो सकते हैं। मुझे यह अत्यंत कामुक लगा था। मेरे मन ही मन में यह उम्मीद जाग गई थी की छाया के साथ आसानी से संबंध बनाए जा सकते हैं। उसे एक से ज्यादा पुरुषों के साथ संबंध बनाने में कोई विशेष समस्या नही होगी ऐसा मेरा अनुमान था. पर यह बात छाया से कर पाने की मेरी हिम्मत कभी नहीं थी और ना ही कभी इसका मौका मिल रहा था।
इस बार जब छाया का विवाह हो रहा था तो मुझे उसे नग्न देखने और उसके साथ संभोग करने की इच्छा जागृत हो गई। उसका होने वाला पति सोमिल मेरे दोस्त लक्ष्मण की कंपनी में काम करता था। मैंने और लक्ष्मण ने मिलकर यह प्लान बनाया। लक्ष्मण ने मुझे पैसों का लालच दिया उसने एक कंप्यूटर हैकर हायर किया।
मैं छाया के विवाह में बढ़-चढ़कर योगदान कर रहा था। विवाह मंडप की व्यवस्था में भी मेरा योगदान था। मैंने छाया के कमरे के बाथरूम में एक स्पाई कैमरा इंस्टॉल कर दिया जिससे मैं बाथरूम में छाया को नग्न अवस्था में देख पाता था।
वह होटल जहां पर छाया और सोमिल की सुहागरात होनी थी वहां पर विवाह में आए कई और गेस्ट भी रुके हुए थे। उनकी व्यवस्था भी मेरे ही जिम्मे थी। मेरा होटल में आना जाना सामान्य बात थी। मैं उस दिन कंप्यूटर हैकर को लेकर शाम 9:00 बजे ही सोमिल के कमरे में घुस गया था। लक्ष्मण ने उस दौरान लॉबी के सीसीटीवी कैमरे पर अपना रुमाल डाल दिया था। ताकि हम सोमिल के कमरे में घुसते हुए ना देखे जा सकें। हम छाया और सोमिल का इंतजार कर रहे थे। वह दोनों लगभग 9:30 बजे कमरे में प्रवेश किये मैं और वह हैकर बाथरूम में इंतजार कर रहे थे। हमने सोचा था कि कमरे में सोमिल और छाया आएंगे पर कमरे में 2 से अधिक व्यक्तियों के होने की आवाज आयी। मुझे मानस की भी आवाज सुनाई दी। फिर अचानक ही कमरे से कुछ लोगों के बाहर जाने की आवाज आई और कमरे में शांति हो गयी।
लक्ष्मण ने फोन करके सोमिलको बाहर बुला लिया।
हमने सोचा था की जब छाया कमरे में अकेले रहेगी मैं और मेरा साथी उसे बेहोश कर देंगे उसके पश्चात कंप्यूटर हैकर सोमिल के अकाउंट को हैक कर ओटीपी की मदद से पैसे ट्रांसफर कर देगा। इसके पश्चात कंप्यूटर हैकर को वहां से चले जाना था और मुझे बेहोश हो चुकी छाया को अपने काबू में कर संभोग करना था और वापस आ जाना था।
लक्ष्मण को सोमिल को बाहर निकलने के बाद सीसीटीवी कैमरे को तोड़ देना था और सोमिल को कुछ दिनों के लिए गायब करना था इसकी व्यवस्था लक्ष्मण ने अपने हाथ में ले ली थी।
हम दोनों छाया का इंतजार कर रहे थे।कुछ देर बाद दरवाजा खुला पर छाया की जगह सीमा ने प्रवेश किया था कंप्यूटर हैकर घबरा गया। उसने उसके सर पर प्रहार कर दिया। वह बेहोश हो गई। हैकर को बेहोशी की दवा सुंघा कर छाया को बेहोश करना था पर उसने सीमा को देखकर हड़बड़ी में गलती कर दी।
छाया को कमरे में ना पाकर मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था। मैं जिस निमित्त यहां तक आया था वह अब संभव नहीं था। तभी कंप्यूटर हैकर ने पैसे ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। सोमिल के फोन पर आया हुआ ओटीपी लक्ष्मण ने मेरे फोन पर भेज दिया। उस ओटीपी की मदद से कंप्यूटर हैकर ने लक्ष्मण के द्वारा बताए गए विदेशी अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए।
तभी मेरे फोन पर एक मैसेज आया जिसमें मेरे खाते में ₹ ₹50 लाख ट्रांसफर रुपए आने की सूचना थी। लक्ष्मण ने मुझे फोन किया मैंने तुम्हारे अकाउंट में मैं ₹50, लाख डाले हैं। तुम उस कंप्यूटर हैकर को गोली मार दो मैं तुम्हें 5 करोड़ रुपए दूंगा। तुम मेरी बात का विश्वास करो कमरे में तकिए के नीचे साइलेंसर लगी हुई बंदूक रखी हुई है।
मुझे पैसों की बहुत आवश्यकता थी मुझे अपनी पैथोलॉजी का विस्तार करना था मुझे यह पता था कि लक्ष्मण ने ज्यादा पैसों का गबन किया है और वह मुझे निश्चय ही 5 करोड़ दे सकता है। मुझे उस पर पूरा विश्वास था मैंने तकिए के नीचे से रिवाल्वर निकाली और उस हैकर को मार दिया। उसे कमरे में छोड़कर मैंने लैपटॉप उसका मोबाइल और वह रिवाल्वर तीनों उसी के बैग में रखा और कमरे से बाहर आ गया।
मैं अपनी छाया के साथ संभोग तो नहीं कर सका था पर मेरी पैसों की चाह पूरी हो गई थी। मैंने छाया के साथ संभोग के सपने को कुछ दिनों के लिए टाल दिया। 2 दिनों के बाद डिसूजा का आदमी मेरे पैथोलॉजी लैब पर आया उसने मुझे फोन किया मैं मानस छाया और सीमा का नाम सुनकर खुश हो गया। वह तीनों मेरी क्लीनिक पर आए थे उन्होंने अपना ब्लड सैंपल दिया और उसकी जांच रिपोर्ट मैन भी देखी। उनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद मैंने डिसूजा से बात की थी मुझे यह बात मालूम चल चुकी थी उस रात दूसरे कमरे में छाया और मानस ने सुहागरात मनाई थी।
मैं एक बार फिर छाया से संभोग करने का प्लान बनाने लगा। छाया की नग्न तस्वीरें मेरे पास पहले से ही थीं। मैने इन्हीं फ़ोटो को दिखाकर छाया को ब्लैकमेल कर सम्भोग के लिए होटल बुलाया था। रॉबिन के सिपाही उसे लातों से मारे जा रहे थे।
लक्ष्मण ने भी अपना अपराध कबूल कर लिया था।



मुझे यह समझते देर नहीं लगी की छाया ने अपना कौमार्य मानस को ही समर्पित किया था वह इसका हकदार भी था. मुझे महर्षि की बातों पर यकीन हो चला था. छाया को आने वाले दिनों में कई उतार-चढ़ाव देखने थे . नियति के खेल को प्रभावित करने की मेरी हैसियत नहीं थी. मैंने मन ही मन महर्षि और भगवान को प्रणाम किया। छाया की योनि के होंठ पर तिल का निशान यह आश्चयर्जनक था उसे देखने की बात छाया से नहीं कर पाई आखिर मैं उसकी मां थी।

इतना सब सोचते हुए मेरी रानी लार टपकाने लगी और मैं शर्मा जी से अपने मिलन का इंतजार करने लगी।

(मैं सीमा)

सोमिल अपने घरवालों से मिलने के पश्चात देर शाम हमारे घर पर ही आ गए थे। हम सब उनके आने से बहुत खुश थे। हम चारों मेरे घर में पिछले दिनों हुई घटनाओं के बारे में बातें कर रहे थे। सोमिल मुझे बार-बार कातर निगाहों से देख रहा था। उसके वजन की लाज मुझे रखनी थी। चूंकि आज हम सब थके हुए थे मैंने यह कार्यक्रम कल के लिए निर्धारित कर दिया। वैसे भी मेरी रानी अभी रजस्वला थी वह युद्ध के लिए तैयार नहीं थी।

यह एक संयोग ही था उस दिन भी रविवार था और कल भी रविवार ही था। मैं और मेरी रानी भी रजस्वला होने के बाद नई ऊर्जा और स्फूर्ति के साथ संभोग के लिए तैयार हो रही थी।

छाया रविवार का दिन सुनकर थोड़ा घबरा गई पर हम सब ने उसे समझा लिया था।

रात को बालकनी में मुझे सोमिल ने शांति के बारे में खुलकर बताया। मुझे सोमिल पर बहुत प्यार आ रहा था। उसने मुझे दिए वचन की खातिर उस सुंदरी से संभोग सुख का परित्याग कर दिया था। मुझे लगता था वह निश्चय ही मुझे प्यार करता था। मैं भी खुशी खुशी उसे उसके प्रथम संभोग का आनंद देना चाहती थी। बातों ही बातों में उसने शांति द्वारा दिये गए वियाग्रा का भी जिक्र कर दिया था। मेरे मन में शैतानी आ गयी।

रविवार
(मैं छाया)

स्नान करने के बाद मैं स्वयं को आईने में निहार रही थी आज एक बार फिर हमारी सुहाग रात थी. सीमा भाभी भी अपने कमरे में तैयार हो रही थी. हमें पार्लर जाना था. प्रकृति ने यह कैसा संयोग बनाया था हम सभी अपने अपने साथी का इंतजार कर रहे थे. सोमिल के दिए हुए वचन ने मुझे भी उस दिन मेरी सुहागरात का तोहफा दे दिया था। उनके वचन की वजह से ही मेरा मानस भैया से मिलन हो पाया था. मुझे नहीं पता सीमा भाभी अपने मन में क्या सोचती थी पर यह तय था कि मैं मानस और सोमिल अपनी अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर रहे थे. ऐसा कतई नहीं था कि मैं सोमिल से प्यार नहीं करती थी. सोमिल अब मेरे दिलो-दिमाग पर छा चुके थे उस रात मैं मानस भैया को भूलकर पूर्ण समर्पण के साथ सुहागरात के लिए निकली थी पर भगवान ने मेरे दिल का साथ दिया था.

मानस भैया ने मेरे शरीर और दिलोदिमाग में ऐसी जगह बनाई थी जिसे मिटाया नहीं जा सकता. वह मेरी आत्मा में रच बस गए थे. मेरा ध्यान अपने स्तनों पर गया यह वही स्तन थे जो पहले मेरी छोटी हथेलियों में आ जाया करते थे. मानस भैया ने अपनी हथेलियों से जाने कितनी बार इनकी मालिश की और इन्हें इस आकार में लाया जो अब स्पष्ट रूप से वस्त्रों का आवरण भेदकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं तथा मेरे नारी सुलभ सौंदर्य में चार चांद लगाते हैं. जब वह स्तनों को अपने हाथों से मालिश किया करते वह बार-बार कहते थे "मेरी छाया के स्तन इस दुनिया के सबसे खूबसूरत स्तन बनेंगे." वह अपनी दोनों हथेलियों से उनका नाप लेते उनके निप्पलों को सहलाते अपनी उंगलियों से गोल-गोल घुमाते और ऊपर की तरफ खींचते. उधर मेरी राजकुमारी उनके प्रेम रस में लार टपकाते हुए अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रही होती. उनके हाथों ने मेरे शरीर के हर अंग को संवारा था मेरे नितंबों को मालिश करते वक्त भी वह उनके आकार पर विशेष ध्यान देते. मेरी जाँघों और मेरे पैरों को भी आकार में लाने का श्रेय उनको ही है. अपने जिम में ट्रेनिंग करते वक्त वह मेरा विशेष ध्यान रखते तथा मेरे शरीर को एक सुडौलआकार में बनाए रखने के लिए सदैव प्रोत्साहित करते.

वह स्वयं भी एक आदर्श पुरुष की भांति रहते. मेरी राजकुमारी को उन्होंने हमेशा फूल की तरह रखा अपनी उंगलियों के स्पर्श से ज्यादा भरोसा उन्हें अपनी जिह्वा पर था वह कभी भी मेरी राजकुमारी को अत्यधिक दबाव से नहीं छूते थे कभी-कभी मैं खुद इसकी प्रतीक्षारत रहती की वह दबाव बढ़ाएं परंतु वो हमेशा उसे कोमलता से ही छूते. मेरे स्खलन मैं लगने वाला समय बढ़ जाता पर वह अपना दबाव नहीं बढ़ाते वह बार-बार कहते "छाया तुम्हारी राजकुमारी तुम्हारे दिल की तरह पवित्र और कोमल है"

उस दिन मुझे इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था की सीमा दीदी उस दिन मेरी और मानस भैया की सुहागरात होगी. उस दिन भगवान स्वयं सीमा भाभी के रूप में आए थे और मेरे अंतर्मन की इच्छा को पूर्ण किया था.

मेरा ध्यान आईने पर गया, आज मुझे अपनी रात मानस की बांहों में गुजारनी है यह निश्चित था. मैं अपने कामदेव के लिए तन मन से तैयार हो रही थी. रानी के होठों पर आए प्रेम रस को मैंने अपनी उंगलियों से महसूस किया और उसे शाम तक प्रतीक्षारत रहने के लिए थपथपाया और नाइटी पहन कर बाहर आ गई.

मेरा रोम रोम खिला हुआ था मैं बहुत खुश थी. सीमा भाभी के लिए मेरे दिल में अथाह सम्मान और प्रेम उमड़ आया था. मैं उनके प्रति कृतज्ञ थी मैंने मन ही मन में उन्हें हमेशा खुश रखने की ठान ली थी. वह भी मेरा जी जान से ख्याल रखतीं थीं मैं सच में उनकी छोटी बहन थी.

यही बातें सोचते हुए मैं खयालों में गुम थी तभी सीमा दीदी मेरे कमरे में आ गयीं और मुझे अपने आलिंगन में ले लिया.

"अरे छाया आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो सोमिल तो खुश हो जाएगा?"

"सोमिल?"

"क्यों सोमिल के पास नहीं जाना है?"

"पर उनके वचन का क्या?"

वह मेरी मंशा पढ़ चुकी थीं वह मुस्कुराने लगी.

उन्होंने एक बार फिर मुझे आलिंगन में लिया और कहा

"मैंने मेरी प्यारी छाया की इच्छा जान ली है. वचन का पालन आधी रात में ही होगा कह कर हंसने लगी"

उन्होंने मुझे शीघ्र तैयार होने के लिए कहा और हंसते हुए कमरे से बाहर चली गई मेरे मन में अचानक आया संशय गायब हो गया था और मैं फिर से मुस्कुराने लगी थी
.
 
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Lutgaya

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Lutgaya

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लवली जी ये त्रिकालदर्शी वाला सीन यहां जम नही रहा
कुछ कर सकते हो तो करो
 

odin chacha

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nice update
 

juhi gupta

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story bahut achhi ja rahi thi ,lekin part 32 kuch jama nhi ,maharshi wala seen ki koi jarurat nhi thi ,jab sab achha ho gaya tha to manas seema chaya somil ke bich apsi sex sambandho ko aage badaya ja sakta he ,maharshi dwara chaya ko ye kahna ki uske 4 or logo se sex sambandh banenge kahani ko us level par le jayega janha or story chal rahi he ,aapne 31 part tak is kahani ko bahut khubsurat andaz me likhe he meri ray to ye hi he ki kahani ko aap isi tarah chalne de .....vese aap bahut guni or samajhdaar writer he jese jese aap kahani ko aap aage likhenge ,ham padenge ,nhi achhi lagi to apko bye bye kah denge
 
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story bahut achhi ja rahi thi ,lekin part 32 kuch jama nhi ,maharshi wala seen ki koi jarurat nhi thi ,jab sab achha ho gaya tha to manas seema chaya somil ke bich apsi sex sambandho ko aage badaya ja sakta he ,maharshi dwara chaya ko ye kahna ki uske 4 or logo se sex sambandh banenge kahani ko us level par le jayega janha or story chal rahi he ,aapne 31 part tak is kahani ko bahut khubsurat andaz me likhe he meri ray to ye hi he ki kahani ko aap isi tarah chalne de .....vese aap bahut guni or samajhdaar writer he jese jese aap kahani ko aap aage likhenge ,ham padenge ,nhi achhi lagi to apko bye bye kah denge
जूही जी धन्यवाद। इतना विश्वास रखिए की छाया कभी भी व्यभिचारिणी नहीं थी वह सामान्य अतिसुन्दर युवती थी। जिसमें कामेच्छा कूट-कूट कर भरी हुई थी। वह कभी भी कोई ऐसा कार्य नहीं करेगी जो पूर्णरूप से अनुचित हो। महर्षि की बातों में उसके जीवन के उत्तरार्ध का जिक्र है जो कहानी के अंतिम भाग में दिखाई पड़ेगा अभी तो उससे अपने पति और प्रेमी के बीच सामंजस्य बिठाना है और मर्यादा में रहते हुए अपनी और अपने आसपास कामुकता जीवित रखनी है।
महर्षि की बातों का असर आपको बाद में दिखाई देगा। वैसे कहानियां कल्पना की देन होती हैं जो निश्चय ही हर व्यक्ति की अलग अलग हो सकती हैं। दोनों पाठकों ( u and lutgaya) के सुझाव मेरे जेहन में हैं. पर निश्चिंत रहिए आप सब निराश नहीं होंगे साहित्यिक कामुकता जारी रहेगी.

नए पाठकों के लिए मैंने अब तक कि कहानी का सारांश लिखा है जो इस प्रकार है।
(अब तक की कहानी का सारांश)
माया और उनकी पुत्री छाया को मानस के पिता अपने घर दूसरी पत्नी के रूप में ले आए थे। यद्यपि वह मानस की सौतेली माँ थी परंतु मानस ने कभी भी माया और छाया से संबंध नहीं रखा। छाया जब बड़ी हो गई तो मानस और छाया के बीच प्यार जन्म ले लिया। वह दोनों प्रेमी प्रेमिका की भांति रहने लगे पिता की मृत्यु के बाद मानस छाया और माया को अपने शहर बेंगलुरु ले आया और वह एक ही छत के नीचे प्रेमी प्रेमिका की भांति रहते। कुछ दिनों पश्चात माया ने अपनी पुत्री छाया और मानस को एक दूसरे की बाहों में नग्न अवस्था में देख लिया। मानस और छाया के बीच चल रहा प्रेम संबंध अद्भुत और पावन था। दो-तीन वर्षों तक एक दूसरे के यौन अंगों से खेलने के बावजूद मानस ने छाया का कौमार्य भंग नहीं किया था।
उन दोनों के अगाध प्रेम को देखकर माया ने उनके प्रेम संबंधों को स्वीकार कर लिया तथा इस अनचाहे भाई बहन के रिश्ते को ताक पर रख दिया। वह दोनों खुशी खुशी प्रेमी प्रेमिका की भांति रहते और छाया की पढ़ाई का खत्म होने का इंतजार करते जिसके पश्चात उन दोनों का विवाह होना था।
अचानक एक कार्यक्रम में उनके भाई बहन के रिश्ते पर सब की नजर पड़ गई सामाजिक दबाव से उन दोनों का विवाह होना कठिन हो गया। भाई बहन का यह अनचाहा रिश्ता उनके प्रेम पर भारी भारी पड़ गया और दोनों का बिछोह हो गया।
बाद में मानस की शादी छाया अपनी अंतरंग सहेली सीमा से करा देती है और कुछ ही दिनों में छाया और उसकी सहेली दोनो मानस के साथ फिर अंतरंग हो जाती है। तीनों के बीच त्रिकोणीय प्रेम जारी रहता है। छाया की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद छाया का विवाह सीमा के पुराने बॉयफ्रेंड सोमिल से हो जाता हैम नाटकीय घटनाक्रम में छाया की सुहागरात के दिन मानस ही उसका कौमार्य भंग करता है। छाया और मानस एक दूसरे के लिए ही बने थे परंतु उनका विवाह नहीं हो पाया था इस भाई बहन के रिश्ते से उन्हें चिढ़ हो चली थी उनका प्रेम अभी भी कायम था। मानस की पत्नी सीमा और छाया के पति सोमिल को भी मानस और छाया के प्रेम के बारे में पता था सोमिल और सीमा भी पुराने प्रेमी थे।
मानस जब युवा हो रहा था तो किसी न किसी रूप में माया ने भी उसे एक पुरूष के रूप में देखा था और उसमें भी संभोग की इच्छा जागृत हुई थी। मानस को अपनी पुत्री के साथ नग्न देखने के पश्चात माया में कामुकता जाग उठी थी उनका प्रेम संबंध शर्मा जी जो उनके पड़ोसी थे और विधुर थे से हो चला था। मानस ने भी शर्मा जी को अपने घर में जगह दे दी थी। शर्मा जी और माया दोनों में कामुकता जागृत थी। माया जी कभी-कभी अपनी कल्पना में मानस को ले आती और अपने संभोग सुख को बढ़ातीं यही कार्य शर्मा जी छाया को याद करते हुए करते।

इन सभी पात्रों में सिर्फ छाया और माया के बीच पवित्र मां बेटी का रिश्ता था बाकी सारे रिश्ते परिस्थितियों वश बने थे।
आगे कहानी जारी है...
 
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juhi gupta

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जूही जी धन्यवाद। इतना विश्वास रखिए की छाया कभी भी व्यभिचारिणी नहीं थी वह आदर्श युवती थी। जिसमें कामेच्छा कूट-कूट कर भरी हुई थी वह कभी भी कोई ऐसा कार्य नहीं करेगी जो पूर्णरूप से अनुचित हो। महर्षि की बातों में
उसके जीवन के उत्तरार्ध का जिक्र है जो कहानी के अंतिम भाग में दिखाई पड़ेगा अभी तो उससे अपने पति और प्रेमी के बीच सामंजस्य बिठाना है और मर्यादा में रहते हुए अपनी और अपने आसपास कामुकता जीवित रखनी है।
महर्षि की बातों का असर आपको बाद में दिखाई देगा। वैसे कहानियां कल्पना की देन होती हैं जो निश्चय ही हर व्यक्ति की अलग अलग हो सकती हैं। दोनों पाठकों ( u and lutgaya) के सुझाव मेरे जेहन में हैं. पर निश्चिंत रहिए आप सब निराश नहीं होंगे साहित्यिक कामुकता जारी रहेगी.

नए पाठकों के लिए मैंने अब तक कि कहानी का सारांश लिखा है जो इस प्रकार है।
(अब तक की कहानी का सारांश)
माया और उनकी पुत्री छाया को मानस के पिता अपने घर दूसरी पत्नी के रूप में ले आए थे। यद्यपि वह मानस की सौतेली माँ थी परंतु मानस ने कभी भी माया और छाया से संबंध नहीं रखा। छाया जब बड़ी हो गई तो मानस और छाया के बीच प्यार जन्म ले लिया। वह दोनों प्रेमी प्रेमिका की भांति रहने लगे पिता की मृत्यु के बाद मानस छाया और माया को अपने शहर बेंगलुरु ले आया और वह एक ही छत के नीचे प्रेमी प्रेमिका की भांति रहते। कुछ दिनों पश्चात माया ने अपनी पुत्री छाया और मानस को एक दूसरे की बाहों में नग्न अवस्था में देख लिया। मानस और छाया के बीच चल रहा प्रेम संबंध अद्भुत और पावन था। दो-तीन वर्षों तक एक दूसरे के यौन अंगों से खेलने के बावजूद मानस ने छाया का कौमार्य भंग नहीं किया था।
उन दोनों के अगाध प्रेम को देखकर माया ने उनके प्रेम संबंधों को स्वीकार कर लिया तथा इस अनचाहे भाई बहन के रिश्ते को ताक पर रख दिया। वह दोनों खुशी खुशी प्रेमी प्रेमिका की भांति रहते और छाया की पढ़ाई का खत्म होने का इंतजार करते जिसके पश्चात उन दोनों का विवाह होना था।
अचानक एक कार्यक्रम में उनके भाई बहन के रिश्ते पर सब की नजर पड़ गई सामाजिक दबाव से उन दोनों का विवाह होना कठिन हो गया। भाई बहन का यह अनचाहा रिश्ता उनके प्रेम पर भारी भारी पड़ गया और दोनों का बिछोह हो गया।
बाद में मानस की शादी छाया अपनी अंतरंग सहेली सीमा से करा देती है और कुछ ही दिनों में छाया और उसकी सहेली दोनो मानस के साथ फिर अंतरंग हो जाती है। तीनों के बीच त्रिकोणीय प्रेम जारी रहता है। छाया की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद छाया का विवाह सीमा के पुराने बॉयफ्रेंड सोमिल से हो जाता हैम नाटकीय घटनाक्रम में छाया की सुहागरात के दिन मानस ही उसका कौमार्य भंग करता है। छाया और मानस एक दूसरे के लिए ही बने थे परंतु उनका विवाह नहीं हो पाया था इस भाई बहन के रिश्ते से उन्हें चिढ़ हो चली थी उनका प्रेम अभी भी कायम था। मानस की पत्नी सीमा और छाया के पति सोमिल को भी मानस और छाया के प्रेम के बारे में पता था सोमिल और सीमा भी पुराने प्रेमी थे। उन चारों के बीच कोई पर्दा नहीं था पर मानस और सोमिल एक दूसरे के सामने संभोग नहीं करते थे जबकि छाया और सीमा कभी-कभी एक साथ मानस या सोमिल को खुश करती रहती थीं।
मानस जब युवा हो रहा था तो किसी न किसी रूप में माया ने भी उसे एक पुरूष के रूप में देखा था और उसमें भी संभोग की इच्छा जागृत हुई थी। मानस को अपनी पुत्री के साथ नग्न देखने के पश्चात माया में कामुकता जाग उठी थी उनका प्रेम संबंध शर्मा जी जो उनके पड़ोसी थे और विधुर थे से हो चला था। मानस ने भी शर्मा जी को अपने घर में जगह दे दी थी। शर्मा जी और माया दोनों में कामुकता जागृत थी। माया जी कभी-कभी अपनी कल्पना में मानस को ले आती और अपने संभोग सुख को बढ़ातीं यही कार्य शर्मा जी छाया को याद करते हुए करते।

इन सभी पात्रों में सिर्फ छाया और माया के बीच पवित्र मां बेटी का रिश्ता था बाकी सारे रिश्ते परिस्थितियों बस बने थे।
आगे कहानी जारी है...
bahut bahut shukriya ,aapki yahi baat bahut achhi he ki aap pathko ki feelings ka pura dhayan rakhte he ,jese mene pahle bhi likha tha aapne chaya or manas ki chavi ko esa bana diya he ki vo kabhi chichore ho hi nhi sakte ,or ye apki hi khubi he ki part 32 aa gaya he ,page 27 ho gaye he lakho view ho chuke he or aapne story me abhi tak rajkumari rani ya rajkumar jese shabdo se hi kam chalaya he
 

Lutgaya

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Thanks lovely bhai
Aapne hamari baat ka samman kiya , ummid h aap kahani se pura nayay krenge
 
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