मैं मुस्कुराते हुए वंदना की तरफ देख कर बोलता हूं खाना खा ली हो ना मैं जैसे ही बोलता हूं कि खाना खाली होना तो वंदना आश्चर् होकर मेरी तरफ देखते हुए बोलती है खाना मतलब तभी मैं फिर से मुस्कुराते हुए बोलता हूं अरे पूछ रहा हूं खाना नहीं खाया है क्या
वंदना: तुमने ही तो बोला था खाना नहीं बनने को कि तुम्हारा कुछ और ही प्रोग्राम है इसलिए मैं खाना नहीं बनाई हूं तभी मैं धीरे से नजदीक जाते हुए बिस्तर के पास में अपनी गांड रख कर बैठ जाती हूं और अचानक से कंबल ऊपर करती हूं तो देखती हूं अशोक पूरा नंगा लेटा हुआ है अंदर मेरे चेहरे के ऊपर मुस्कुराहट आ जाती है।
अशोक: मैं भी मुस्कुरा देता हूं वंदना की तरफ देखते हुए और अपने लोड की तरफ देखते हुए इशारा करता हूं पसंद नहीं आया है क्या
वंदना: मैं धीरे से अपने गर कलाइयों को आगे बढ़ते हुए अशोक के मोटे लोड़े को अपने मुट्ठी में पकड़ लेती हूं अपने नेल पॉलिश लगे हुए हाथों में उसके लौड़े को पकड़ के एक दो बार प्यार से सहलाते हुए अगर पसंद नहीं आती तो तुम्हारे पास क्यों आती रात को मैं अशोक के लोड़े को ऊपर नीचे होले होले प्यार से करते हुए उसके आंखों में देखते हुए मुस्कुराते हुए उसके अंडकोष को धीरे-धीरे सहला रही
अशोक: मैं अपने पैरों को खोल देता हूं अच्छे तरीके से और वंदना से अच्छे से लोड पकड़वाते हुए बोलता हूं मैं बाहर से ही नॉनवेज लेकर के आया हूं वह मजाक कर रहा था ग्लास लेकर नहीं आई हो तुम
वंदना: नहीं गिलास लेकर के नहीं आई हो तुम खुद ही पी लेना मुझे नहीं पीना है मुझे बड़ी अजीब लगती है पीने के बाद में कुछ-कुछ होने लगता है
अशोक: अरे कुछ नहीं होता है पीने से ठीक है ना थोड़ा बहुत पीना ही चाहिए इससे रिलैक्स हो गया अब तुम भी देखो थकावट में रहती हो दिन भर काम करती हो परेशान रहती होगी थोड़ा पियोगे तो रिलैक्स करोगी ना टेंशन फ्री रहोगी और ज्यादा टेंशन मत लिया करो तुम
खाना मैंने मंगवा लिया है होटल से ही तुम जाकर के दो ग्लास लेकर के आ जाओ बस क्या हुआ ऐसे क्या सोच रही हो तभी मैं उठ करके बैठ करके वंदना के कंधे के ऊपर हाथ रख देता हूं और उसे सीने से लगाता हुआ धीरे से अपने हाथ को उसकी बड़ी गांड के ऊपर फिरते हुए बोलता हूं कुछ नहीं होगा ठीक है ना पीने से कुछ नहीं होगा सब संभाल लूंगा मैं भरोसा रखो ठीक है। आज तक कोई दिक्कत हुई है क्या नहीं हुई है ना तुम खाना परेशान होती हो डरती हो इसमें डरने की क्या बात है मैं दो बार प्यार से बंदना के गांड के ऊपर थप थप मारते हुए बोलता हूं मेरे होते हुए मत डरो ठीक है ना जाओ बोतल और ग्लास दोनों ले लेना।। हां ऐसे ही जाओ ना क्या दिक्कत है जरा मैं भी तो देखूं आखिर तुम्हारे अंदर कितनी हिम्मत है।।
वंदना धीरे से उठकर कमरे से ऐसे ही नंगी निकलती है पूरी और जाते वक्त दरवाजा लगा देती है।।
वंदना: पहली बार मुझे ऐसा महसूस हो रहा होता है जैसे मानो कि मैं कोई चोरी कर रही हूं अशोक की बातों से थोड़ी हिम्मत तो मिलती है और मैं हिम्मत रख करके धीरे से कमरे से बाहर पूरी नंगी निकल जाती है और अपने कमरे की तरफ धीरे से बढ़ते हुए एक बार कमरे की तरह बढ़ती हैं और एक बार फिर से चेक कर लेती हूं मोनू अभी भी सो रहा होता है मेरा दिल जोरो से धड़क रहा होता है जैसे मानो कि मैं कोई गलती कर रही हूं और पकड़े जाने का डर है जैसे मानो कि मैं कहीं चोरी करने के लिए आई हूं।।
तभी मैं धीरे से फ्रिज की ऊपर वाली डोर चाबी से खोल करके उसमें से शराब की बोतल निकाल देती है और दो शीशे की गिलास लेते हुए किचन से प्लेट लेकर के निकल जाती है और मैं जैसे ही अशोक के कमरे की तरफ बढ़ती हूं मेरे एक हाथों में शराब की बोतल और दूसरे हाथों में प्लेट और ग्लास होते हैं। लेकिन जैसे ही मैं कमरे के दरवाजे को जैसे ही अपने हाथों से खोलता हूं अंदर से गाने बजाने की आवाज आ रहे होते हैं।। मैं दरवाजे को वापस अंदर से बंद करने के बाद केवल के ऊपर सब कुछ लगा देती है और अंदर में गाने बज रहे होते हैं अशोक के हाथों में मोबाइल फोन होता है वह कुछ कर रहा होता है मोबाइल फोन में और दूसरी तरफ गाने
(वंदना और अशोक दोनों कमरे में पूरी तरीके से नंगे होते हैं वंदना की गांड अशोक की तरफ होती है पूरी नंगी वंदना टेबल के ऊपर सब कुछ खाने पीने का लगा रही होती है और अशोक आराम से आराम फरमाते हुए गाने का आनंद ले रहा होता है गाने के बोल बज रहे होते हैं लाल दुपट्टे वाली तेरा नाम तो बता काले कुत्ते वाली तेरा नाम तो बता)
अशोक: मेरी नजर मोबाइल के ऊपर होती है मैं मोबाइल चलाता हुआ वंदना की तरफ बिना देखे ही पूछता हूं लग गया क्या सब कुछ वंदना और जैसे ही वंदना बोलती है कि हो गया सब कुछ मै बिस्तर के ऊपर लेते हुए ऐसे ही मोबाइल में कुछ कर रहा होता हूं कि तभी अचानक से वंदना मेरे नजदीक आते पर मेरे मोबाइल को पकड़ लेती है
वन्दना: नहीं नहीं अशोक प्लीज वीडियो मत बनाओ कोई देख लेगा तो बदनामी हो जाएगी मुझे ध्यान ही नहीं रहा था कि मैं जब कमरे के अंदर आई थी तो अशोक मेरा वीडियो बना रहा था मेरे हाथों में शराब की बोतल और उसके लिए खाना लगाना शीशे के गिलास में सब कुछ लगाना लेकिन मैं जब अशोक से बोलता हूं अशोक मुझे बोल पड़ता है भरोसा नहीं है क्या मैं अशोक के सीने के ऊपर हाथ रखकर उसके मरदाने बालों के ऊपर हाथ फेरते हुए भरोसा है मगर कहीं फोन खो गया या किसी के हाथों में लग गया तो बस संभाल के रखना मैं इतना ही बोलते हो अशोक को फिर खाने बोलती
अशोक: मैं उठ करके हाथ धो करके वापस एक सिंगल सोफे के ऊपर बैठ जाता हूं और सामने सब कुछ लगा हुआ होता है और मैं जब हाथ धोकर आता हूं तो देखता हूं वंदना की गांड मेरी तरफ होती है और वह कुछ लग रही होती है शायद वह सलाद कट रही थी मैं धीरे से बंदना की गांड में लौड़े को दबा करके उसे बाहों में भर लेता हूं अच्छे से और वंदना सलाद काटती हुई मुस्कुरा देती है पीछे देखकर
मैं वंदना को अच्छे से बाहों में भरता है वह बोलता हूं इतना टेंशन मत लिया करो और ज्यादा सोच मत करो और खुश रहा करो मैं चाहता हूं कि तुम हमेशा खुश रहो घर की जिम्मेदारियां के अलावा भी तुम्हारी अपनी निजी जिंदगी भी है और अपने लिए सोचा अपनी जिंदगी को जीने में कोई बुराई नहीं और जिस चीज में कोई बुराई नहीं
है उसमें डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए
वंदना: तुमने ही तो बोला था खाना नहीं बनने को कि तुम्हारा कुछ और ही प्रोग्राम है इसलिए मैं खाना नहीं बनाई हूं तभी मैं धीरे से नजदीक जाते हुए बिस्तर के पास में अपनी गांड रख कर बैठ जाती हूं और अचानक से कंबल ऊपर करती हूं तो देखती हूं अशोक पूरा नंगा लेटा हुआ है अंदर मेरे चेहरे के ऊपर मुस्कुराहट आ जाती है।
अशोक: मैं भी मुस्कुरा देता हूं वंदना की तरफ देखते हुए और अपने लोड की तरफ देखते हुए इशारा करता हूं पसंद नहीं आया है क्या
वंदना: मैं धीरे से अपने गर कलाइयों को आगे बढ़ते हुए अशोक के मोटे लोड़े को अपने मुट्ठी में पकड़ लेती हूं अपने नेल पॉलिश लगे हुए हाथों में उसके लौड़े को पकड़ के एक दो बार प्यार से सहलाते हुए अगर पसंद नहीं आती तो तुम्हारे पास क्यों आती रात को मैं अशोक के लोड़े को ऊपर नीचे होले होले प्यार से करते हुए उसके आंखों में देखते हुए मुस्कुराते हुए उसके अंडकोष को धीरे-धीरे सहला रही
अशोक: मैं अपने पैरों को खोल देता हूं अच्छे तरीके से और वंदना से अच्छे से लोड पकड़वाते हुए बोलता हूं मैं बाहर से ही नॉनवेज लेकर के आया हूं वह मजाक कर रहा था ग्लास लेकर नहीं आई हो तुम
वंदना: नहीं गिलास लेकर के नहीं आई हो तुम खुद ही पी लेना मुझे नहीं पीना है मुझे बड़ी अजीब लगती है पीने के बाद में कुछ-कुछ होने लगता है
अशोक: अरे कुछ नहीं होता है पीने से ठीक है ना थोड़ा बहुत पीना ही चाहिए इससे रिलैक्स हो गया अब तुम भी देखो थकावट में रहती हो दिन भर काम करती हो परेशान रहती होगी थोड़ा पियोगे तो रिलैक्स करोगी ना टेंशन फ्री रहोगी और ज्यादा टेंशन मत लिया करो तुम
खाना मैंने मंगवा लिया है होटल से ही तुम जाकर के दो ग्लास लेकर के आ जाओ बस क्या हुआ ऐसे क्या सोच रही हो तभी मैं उठ करके बैठ करके वंदना के कंधे के ऊपर हाथ रख देता हूं और उसे सीने से लगाता हुआ धीरे से अपने हाथ को उसकी बड़ी गांड के ऊपर फिरते हुए बोलता हूं कुछ नहीं होगा ठीक है ना पीने से कुछ नहीं होगा सब संभाल लूंगा मैं भरोसा रखो ठीक है। आज तक कोई दिक्कत हुई है क्या नहीं हुई है ना तुम खाना परेशान होती हो डरती हो इसमें डरने की क्या बात है मैं दो बार प्यार से बंदना के गांड के ऊपर थप थप मारते हुए बोलता हूं मेरे होते हुए मत डरो ठीक है ना जाओ बोतल और ग्लास दोनों ले लेना।। हां ऐसे ही जाओ ना क्या दिक्कत है जरा मैं भी तो देखूं आखिर तुम्हारे अंदर कितनी हिम्मत है।।
वंदना धीरे से उठकर कमरे से ऐसे ही नंगी निकलती है पूरी और जाते वक्त दरवाजा लगा देती है।।
वंदना: पहली बार मुझे ऐसा महसूस हो रहा होता है जैसे मानो कि मैं कोई चोरी कर रही हूं अशोक की बातों से थोड़ी हिम्मत तो मिलती है और मैं हिम्मत रख करके धीरे से कमरे से बाहर पूरी नंगी निकल जाती है और अपने कमरे की तरफ धीरे से बढ़ते हुए एक बार कमरे की तरह बढ़ती हैं और एक बार फिर से चेक कर लेती हूं मोनू अभी भी सो रहा होता है मेरा दिल जोरो से धड़क रहा होता है जैसे मानो कि मैं कोई गलती कर रही हूं और पकड़े जाने का डर है जैसे मानो कि मैं कहीं चोरी करने के लिए आई हूं।।
तभी मैं धीरे से फ्रिज की ऊपर वाली डोर चाबी से खोल करके उसमें से शराब की बोतल निकाल देती है और दो शीशे की गिलास लेते हुए किचन से प्लेट लेकर के निकल जाती है और मैं जैसे ही अशोक के कमरे की तरफ बढ़ती हूं मेरे एक हाथों में शराब की बोतल और दूसरे हाथों में प्लेट और ग्लास होते हैं। लेकिन जैसे ही मैं कमरे के दरवाजे को जैसे ही अपने हाथों से खोलता हूं अंदर से गाने बजाने की आवाज आ रहे होते हैं।। मैं दरवाजे को वापस अंदर से बंद करने के बाद केवल के ऊपर सब कुछ लगा देती है और अंदर में गाने बज रहे होते हैं अशोक के हाथों में मोबाइल फोन होता है वह कुछ कर रहा होता है मोबाइल फोन में और दूसरी तरफ गाने
(वंदना और अशोक दोनों कमरे में पूरी तरीके से नंगे होते हैं वंदना की गांड अशोक की तरफ होती है पूरी नंगी वंदना टेबल के ऊपर सब कुछ खाने पीने का लगा रही होती है और अशोक आराम से आराम फरमाते हुए गाने का आनंद ले रहा होता है गाने के बोल बज रहे होते हैं लाल दुपट्टे वाली तेरा नाम तो बता काले कुत्ते वाली तेरा नाम तो बता)
अशोक: मेरी नजर मोबाइल के ऊपर होती है मैं मोबाइल चलाता हुआ वंदना की तरफ बिना देखे ही पूछता हूं लग गया क्या सब कुछ वंदना और जैसे ही वंदना बोलती है कि हो गया सब कुछ मै बिस्तर के ऊपर लेते हुए ऐसे ही मोबाइल में कुछ कर रहा होता हूं कि तभी अचानक से वंदना मेरे नजदीक आते पर मेरे मोबाइल को पकड़ लेती है
वन्दना: नहीं नहीं अशोक प्लीज वीडियो मत बनाओ कोई देख लेगा तो बदनामी हो जाएगी मुझे ध्यान ही नहीं रहा था कि मैं जब कमरे के अंदर आई थी तो अशोक मेरा वीडियो बना रहा था मेरे हाथों में शराब की बोतल और उसके लिए खाना लगाना शीशे के गिलास में सब कुछ लगाना लेकिन मैं जब अशोक से बोलता हूं अशोक मुझे बोल पड़ता है भरोसा नहीं है क्या मैं अशोक के सीने के ऊपर हाथ रखकर उसके मरदाने बालों के ऊपर हाथ फेरते हुए भरोसा है मगर कहीं फोन खो गया या किसी के हाथों में लग गया तो बस संभाल के रखना मैं इतना ही बोलते हो अशोक को फिर खाने बोलती
अशोक: मैं उठ करके हाथ धो करके वापस एक सिंगल सोफे के ऊपर बैठ जाता हूं और सामने सब कुछ लगा हुआ होता है और मैं जब हाथ धोकर आता हूं तो देखता हूं वंदना की गांड मेरी तरफ होती है और वह कुछ लग रही होती है शायद वह सलाद कट रही थी मैं धीरे से बंदना की गांड में लौड़े को दबा करके उसे बाहों में भर लेता हूं अच्छे से और वंदना सलाद काटती हुई मुस्कुरा देती है पीछे देखकर
मैं वंदना को अच्छे से बाहों में भरता है वह बोलता हूं इतना टेंशन मत लिया करो और ज्यादा सोच मत करो और खुश रहा करो मैं चाहता हूं कि तुम हमेशा खुश रहो घर की जिम्मेदारियां के अलावा भी तुम्हारी अपनी निजी जिंदगी भी है और अपने लिए सोचा अपनी जिंदगी को जीने में कोई बुराई नहीं और जिस चीज में कोई बुराई नहीं
है उसमें डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए