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Fantasy गंदी राजनीति

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कहानी कैसी लगी बताइये जरूर

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mis1234

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पार्ट 4
सुबह होते ही सुमित्रा जल्दी जल्दी काम खत्म करके स्कूल चली गई जाते जाते उसने मयंक को भी उठा दिया
सुमित्रा_बेटा उठ जा कॉलेज जाना पहला दिन ही लेटे हो जाएगा तू
मयंक उठा दूध गर्म किया ओर पीके फिर बाथरूम मै घुस गया
बाथरूम मै फ्रेश हुवा फिर कपड़े खोल के स्नान किया ओर निकल गया कॉलेज
ये एक बहुत बड़ा कॉलेज था इसमें वो बचे पड़ सकते थे या तो अमीर बाप की ओलाद हो या फिर किसी की सिफारिश हो तो ही लेकिन यहाँ मयंक अपनी मेरिट के हिसाब से इस कॉलेज मै दाखिला मिला था
क्योंकि 12th मै इसने 99 परसेंट बनाया था
अभी गेट के अंदर गुस्सा ही था कि अभी कुछ सीनियर लड़के उसको अपने पास बुलाया
सीनियर लड़का __ यहां आ क्या नाम है तेरा
मयंक _ मयंक
सीनियर_कौनसा सब्जेक्ट है तेरा
मयंक __ पॉलिटिक्स साइंस
सीनियर__ अरे सुनो रे ये मेरी गर्ल फ्रेंड का भाई है ओर उसके साथ ही पड़ता है
सीनियर जिसका नाम राजू था
राजू __ पैसे कितने है तेरे पास वो सब निकाल
मयंक अभी जेब मै हाथ डाल रहा था कि तभी पीछे आवाज आई
क्या तुम मयंक हो
मयंक जब पीछे मुड़कर देखा तो एक अधेड उम्र का आदमी व्हाइट शर्ट मै खड़ा था
हा मै मयंक ही सर
आदमी__ आदमी मेरे साथ चलो तुम तुम प्रिंसपल ने तुमको बुलाया है
मयंक_ एक बार सभी सीनियर की तरफ देखा तो
सीनियर_ जाओ जाओ हम बाद में बात करेंगे
मयंक प्रिंसपल के ऑफिस मै चला गया ओर
प्रिंसपल _मयंक आज तुम्हारा पहला दिन था वो लड़के थोड़े बदमाश है इसलिए तुम्हे बुलाया गया अगर तुम्हे कुछ भी प्रोलंब हो तो मुझे इन्फॉर्मेशन कर देना एक बार
मयंक से बाहर निकाला और सभी लड़के हो या लड़कियां मयंक अपने गरीबा रही थी सभी की नजर उसक ऊपर ही थी ख्यालों में जा रहा था अपने ही धुन इस सीधा कैंटीन में गया और एक टेबल में जाकर बैठ गया और चाय आर्डर किया है
तभी वहाँ एक लड़की आती है ओर मयंक के सामने वाली टेबल पे बैठ गई ओर वो बहुत उदास लग रही थी ये बात मयंक ने भी नोटिस करी
एक लड़की और आती है ओर पहले वाली लड़के पास बैठ गई

दूसरी लड़की_अब छोड़ना यार कोमल क्या उस कुत्ते की बात को तू इतना सीरियस ले रही है मै आज घर मै पापा को बात करूंगी
कोमल_ नहीं अंजली मत बोलना मेरी वजह से तुम्हारा परिवार उजड़ जाएगा
अंजली _तू अभी भी मेरे परिवार का सोच रही है सोच तू अगर मै नहीं आती तो आज तू किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहती
कोमल_तू आ गई ना
इनकी बाते मयंक भी सुन रहा है

मयंक की मां आज काफी उदास थी क्यों आज 2 साल बाद उसका बेटा गांव से बाहर गया था
उसे कुछ ऐसा डर सता रहा था ऐसी कोई अनहोनी सता रही थी

वहीं कॉलेज में मयंक को उनकी बातें सुनते हुए बहुत टाइम हो गया था
अंजलि-देखो कोमल टाइम क्या हो गया लेट हो गए हम तो आज पहला दिन ओर आज ही लेट
यह बात मयंक ने भी सुन रहा था
और तीनों दौड़ते हुए क्लास की तरफ गये
क्लास शुरू हो गई थी तीनों एक ही क्लास के सामने खड़े हो गए
टीचर ने उनको देखा ओर बोले
टीचर __ क्या टाइम है मेरे सेसन मै टाइम पे आयतों टिक नहीं तो अन्दर नहीं आना ये सेसन खत्म होने के बाद आना
तीनों उदास हो गए ओर फिर चल गए गए कैंटीन मै मयंक आगे आगे चल रहा था
अंजली_ओय सुनो तुम लेट क्यों हो गए
मयंक पीछे देख तो __
अंजली __ तुमको ही पूछ रही हु
मयंक__ तुम दोनों जो बात कर रही थी ना कैंटीन मै को सुनने वाला भी कोई होना चाहिए ना

कोमल उसकी बात सुनके मायूस हो गई ये बात अंजली ने भी नोटिस कि

अंजली __ तुम एक अच्छे लड़के हो किसी को बताना नहीं
मयंक__ मै किसी को नहीं बताऊंगा लेकिन जिस से ज्यादा डरोगे वो आपको ओर डराएगा फिर कुछ नहीं हुआ वो चला गया घर को

दूसरे दिन सुबह मयंक कॉलेज को निकल पड़ा कॉलेज गेट पे पहुंचा ही

था सामने राजू सुनील ओर श्याम सामने ही खड़े थे
घर पे मयंक की मां किसी से बात कर रही थी फोन से
गुरु जी _ अब टाइम आ गया है 2महीने के बाद उसको मेरे पास भेजदो
मां _ गुरु जी आपकी बात मै नहीं ताल सकती लेकिन उसका कॉलेज से आप बात कर लीजिए
गुरु जी__ देखो सुमित्रा उसका जन्म कोई साधारण काम के लिए नहीं हुआ है उसका शरीर कोई आम मनुष्य की तरह नहीं है ये तुमको भी मालूम है
सुमित्रा_जैसा आप कही गरु जी मै भेज दूंगी आप कॉलेज मै बात कर लीजिए
चलो कॉलेज मै चलते है वह पे क्या च रहा
राजू _मयंक इधर आवो

मयंक__ जी हां

राजू_वैसे बॉडी काफी अच्छी बनाई है....

मनीष_अरे नहीं यार ये तो बस ऐसे ह दिखने के लिए होगी.... इसे जरूर अपने कपड़ों के अंडर गुब्बारे भरे होंगे ताकि इसकी भारी हुई बॉडी नजर आए इसकी जैकेट और शर्ट उतरवा तब पता चलेगा....

सुनील_ चल बेटा अब भाई ने कहा है तो फिर तू अपनी बॉडी दिखा दे....

उनकी बात सुन के मयंक मुस्कुराने लगता है


मयंक_ देखो भाई लोग मैं फिर कहता हूं ऐसा मत करो.... एक बार फिर सोच लो बाद में मुझे दोष मत देना....

सुनील_इसकी बात सुन के ये पक्का हो गया है कि ये बस बहार से दिखने में ही ऐसा है अंडर से इसकी बॉडी पूरी पोक्कल है

मनीष की बात सुन के मयंक अपनी जैकेट निकाल के पास ही पड़ी कुर्सी के हैंडल पर टांग देता है फिर एक करके अपनी शर्ट के सारे बटन खोलने लगता है उसकी शर्ट के हर खुले बटन के साथ वहां मौजुद लड़कियों के दिल की धड़कन तेज़ होने लगती है साथ ही उनकी चूत से भी मस्ती में कामरस का जादू होने लगता है

शर्ट के सारे बटन खुलने के बाद मयंक अपनी शर्ट उतार के अपनी जैकेट के ऊपर रख देता है....

मयंक की चौड़ी 46 इंच की चाटी 8 पैक्स अब और डोले देख के लड़कियाँ की मस्ती भरी सिसकियाँ निकल जाती हैं... कुछ तो मस्ती में अपनी पैंटी में झड़ने के बाद शरमाती हुई वॉशरूम की तरफ चल देती है....

मयंक की मस्कुलर बॉडी को देख के राजू सुनील ओर श्याम भी शॉक हो जाते हैं....
श्याम__ साले क्या मस्त बॉडी बनाई है यार इसने

राजू: हां तभी तो कॉलेज की सारी लड़कियां इसे ही देख रही हैं... पहले ही बड़ी मुश्किल से वो हम को देखती थी मगर अब इसकी वजह से वो भी नसीब ना होगा इसकी बॉडी और पर्सनैलिटी के आगे तो हमारी एक नहीं चलने वाली

सुनील: साले तुम दोनों को ही बड़ा शौक था ना इसकी बॉडी देखने का लो अब गलती है तो भुगतना तो पड़ेगा ही

राजू __यार तू ने सच कहा मगर हम अपनी गलती को सुधार भी सकते हैं ना क्यों ना इसे अपना दोस्त बना ले

सुनी__ हां ये ठीक रहेगा....

अभी सुनील श्याम और राजू मयंक को कुछ कहने वाले होते हैं कि तभी वहां कुछ सीनियर लड़कियां भी आ जाती हैं उनमें से एक की नजर जब मयंक पे पड़ती है

वाह... कितना स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम मुंडा है यार.... और क्या गजब की बॉडी बनाई है इसन सोनिया जरा उधर तो देख
सीनियर लड़की__सही कहा यार ये वाकई में डैशिंग और हैंडसम है... साथ ही 8 पैक्स बॉडी भी.... इसका चेहरा देख कितना क्यूट है....
कोमल__देखो तो कमीनी को पहले से ही 5-5 बॉयफ्रेंड घुमा रही है.... और अब कमीनी इसके पीछे पड़ गई है. इस से पहले कि ये हम हैंडसम के साथ कुछ करे कुछ सोच कोमल जल्दी से कुछ सोच.... अगर सोनिया उसे ले उड़ी तो तू सिर्फ हाथ मालती रह जाएगी
कोमल__क्या यार मैं कब से यहां तुम्हारा इंतजार कर रही हूं और तुम हो कि अब आ रहे हो कहां थे इतनी देर से पहले नहीं आ सकते थे आज कल ना ये तुम्हारा हर रोज का ड्रामा हो गया है कल से ऐसा नहीं चलेग कल अगर तुम देर से आए ना तो फिर मैं कभी तुमसे बात नहीं करूंगी फिर मेरा नाम ले के रोते रहना

कोमल की बात से मयंक के साथ वहां मौजूद बाकी सारे सीनियर लड़के और लड़कियां भी शॉक हो जाते हैं....

इस से पहले कि मयंक हमसे कुछ पूछता है कोमल धीरे से उसके कान में कहती है

कोमल: यार मुझे गलत मत समझना... ये सब ड्रामा मैं तुम्हें यहां से बाहर निकालने के लिए कर रही हूं. अगर इस सब से बचना चाहते हो तो इसमें मेरा साथ दो

कोमल की बात सुन के मयंक ओके कह के


मयंक: सॉरी कोमल माय लव.... प्लीज़ अपने मयंक को माफ़ कर दो तुम्हारी नाराज़गी मुझसे सहें नहीं होगी बस इसे आखिरी बार समझ के भूल जाओ मयंक अपनी कोमल से ये वादा करता है कि वो अपनी जान को कभी नाराज़ नहीं करेगा....
 
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poorangyan

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पार्ट 2
N K शर्मा अपने ऑफिस मै वर्मा से बात कर रहा था ऐसे तो ये लोग जनता को लड़ा सकते है लेकिन ये लोग कभी लड़ते नहीं


N k शर्मा -- लाइव देख रहा है ना
M K वर्मा - देख रहा हु (फिर कुछ सोच कर )तेरे भांजे का 100करोड़ का प्रोजक्ट शुरू हुआ
शर्मा_अब क्या बताऊ छोटी सी साइन करनी थी cm साहब चल बस काम तो हुआ ही नहीं
वर्मा__ उसे प्रोजक्ट पर cm ने एक वीक पहले ही साइन कर दिए थे ये साबित करने के लिए उस डेट का स्तम्भ भी मरवा के रखा है मैंने
शर्मा__ये बात पहले बतानी चाहिए थी ना वर्मा जी धन्यवाद आपका बहुत बहुत
वर्मा__ धन्यवाद को बती बनाके के तेरी गांद मै डाल ले तेरा पार्टनर हु मै
शर्मा -- ठीक है ठीक है और मेरी बेटी के नाम के अब यही एक प्रॉपटी बची है बंद करावो यार ये सब
वर्मा__ बस तुम्हारा पुतला जलाना बाकी है फिर बंद करवाता हु ठीक है ना
शर्मा_ओ हो बस यही करना बाकी है बड़ा वाला जलाना

वर्मा फोन कट करके वापस एक फोन ओर लगता है इसकी बेटी का हॉस्पिटल है देखो कैसी दिखती है अभी अभी आई है u s से फोटो भेज ना मुझे भी देखे तो सही एक बार
न्यूज _
एंकर _ हॉस्पिटल के सामने S K शर्मा का पुतला जलाया गया ओर जनता जोर जोर से शोर कर रही थी
S k शर्मा मुर्दाबाद
S k शर्मा मुर्दाबाद
S k शर्मा मुर्दाबाद

पार्टी ऑफिस में बैठा वर्मा sp को फोन लगाया
वर्मा__ सुनो sp डंड चलाने का टाइम आ गया है हमें है ना मीडिया मै कवरेज ओर पब्लिकसिटी मै माइलेज एक दम भर भर के चाहिए
Sp__ यस सर जैसा आप बोलो
sp मन मै ये कोनसी पार्टी है साला एक भी लड़की नहीं है
फिर वो माइक हाथ मै लेके बोलता है चार्ज
ओर इस के साथ पुलिस ओर आर्मी टूट पड़ते को लोगों के ऊपर
तभी वहाँ सहदेव की एंट्री होती है गाडिया एक पीछे एक विधानसभा के सामने खड़ी होती है उसमें उतरता है
सहदेव cm S k का बड़ी बेटी का पति था ओर सहदेव देख ने से तो लगता है इससे अच्छा इंसान तो हो नहीं सकता एक बहुत बड़ा भ्रष्टाचारी है रियल स्टेट हवाला सभी काम यही कर सकता है बाकी किसी की हिम्मत नहीं है
तभी वहाँ चार गड़िया आती है और उसमें उतरती है cm की बड़ी बेटी सरोज ओर छोटी बेटी कोमल
आज पहली बार वो पार्टी के कार्यक्रम आई थी क्योंकि उसके पिता जी को श्रद्धांजलि देने अब उसके मन मै क्या किसी को पता नहीं लेकिन सहदेव ओर ये दोनों मैं उम्र का भी बहुत फर्क था
वर्मा__आगे बढ़कर बेटी sk साहब का अंतिम दर्शन के लिए बहुत भीड़ लगी है तुम कहो तो बुला लु
सरोज_मीडिया को मना कर दो यह कोई नहीं आना चाहिए
वर्मा__ कर दिया बेटी नहीं आएंगे
वर्मा का पिए पास आता है बोलता साहब pm सर आ रह है

वर्मा _₹ बेटी वो पीएम सर आ रह है
सरोज_कौन आये या कौन नहीं आए मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता बस वो नहीं आना चाहिए
वर्मा __ कौन बेटी कौन ओह समझ गया बेटी मै देख लूंगा
तभी वहाँ sp वर्मा के पास जाता है सर पीएम सर एयरपोर्ट पे आ गए है m g रोड पे पार्टी अध्यक्ष सजन जी आ गये है
वर्मा__पीएम प्रोटोकॉल बोल के अध्यक्ष को मत आने दो
तभी गाड़ियां आती हुई दिखी तो sp सामने जाके खड़ा हो गया
सजन एक ऐसा नेता था जो cm पूरी पार्टी में उसके ऊपर भरोसा करते थे
लेकिन सरोज ओर सजन के बीच कुछ भी बनती नहीं सरोज उसका मुंह तक देखना नहीं चाहती पता नहीं क्या हुवा आगे चल के पता चेलगप जब कि cm तो उसका बेटा मानता था ओर उसका वारिस भी
Sp __साहब प्रोटोकॉल है पीएम साहब का इस रोड से आप कोई गाड़ी लेके नहीं जा सकते
सजन गाड़ी से उतरकर पैदल ही चलना लगा तभी लोगों की नजर उसके ऊपर पड़ी
सजन भैया जिंदा बाद
सजन भैया जिंदाबाद
सजन भैया जिंदाबाद
सजन __ sp सर गाड़ियां बंद है लेकिन पैदल तो जा सकते है ना
वर्मा भागा भागा सरोज के पास गया ओर बोला
वर्मा__बेटी बहुत कोशिश करी लेकिन इस नहीं रोक पाए
सरोज एक बार उसको देखती है ओर कुछ बोलती नहीं
सजन वहां आता ओर श्रद्धांजलि देता है cm को साहब

न्यूज __cm s k साहब को अंतिम विदाई उनको बेटी ने दी देश के जाने माने नेता सभी वहां मौजूद थे लेकिन cm साहब चेहत नेता वहां नहीं थे सजन इस दुख की गड़ी मै ये आश्चर्य की बात हैकौन

शर्मा सी म साहब को अंतिम विदाई कौन देगा

वर्मा__कौन देगा से क्या मतलब सहदेव या सरोज देंगे ओर कौन देगा

सहदेव _नहीं मै नहीं उनका बेटा ओर बेटी देगी सजन या सरोज

सरोज__ मै दूंगी ओर कोई नहीं
सजन कुछ सोचता है ओर दिल धाम के वहां निकल जाता है
कहानियां काल्पनिक होती हैं पर इतनी काल्पनिक भी नहीं होनी चाहिए कि एक पुलिस का एस. पी. आर्मी को आर्डर दे और आर्मी लोगों पर टूट पड़े!
 

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कहानियां काल्पनिक होती हैं पर इतनी काल्पनिक भी नहीं होनी चाहिए कि एक पुलिस का एस. पी. आर्मी को आर्डर दे और आर्मी लोगों पर टूट पड़े!
धन्यवाद आपको बहुत बहुत अपने इतनी बड़ी गलती पकड़ी
 

mis1234

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पार्ट 5
इतना कहके मयंक कोमल को कस
के अपने सीने से लगा लेता है जैसे ही दोनों के जिस्म आपस में लिपटते हैं दोनों के दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है दोनों को अपने सीने से एहसास होने लगता है ऐसा लगता है नहीं कि आज पहली बार मिल रहे हो बाल्की ये महसुस होने लगता है जैसे कि वो जन्मो से एक दूसरे को जानते हो दोनों अलग नहीं बाल्की दो जिस्म एक जान हो एक दूसरे की आंखों में खोटे हुए कब उनके होंठ आपस में जुड़ जाते हैं साथ ही मदहोशी में उनकी आंखें बंद हो जाती हैं उन्हें पता ही नहीं चलता


ये नजारा अंजली के साथ साथ वहां मौजुद सभी आंखें फाड़े बस उन दोनों को हाय देखे जा रहे हैं कोमल को एक अलग ही मदहोशी सी चाहने लगती है कब उसके होंठ खुल जाते हैं उसे पता ही नहीं चलता मयंक भी इस अनोखे एहसास में खोए हुए हैं कोमल के नीचे होंठ को अपने मुंह में ले के उसे चूसने लगता है दोनों प्यार से एक दूसरे के होठों को चूसते हुए मदहोश से इस पल को जीने लगते हैं.... इस किस में ना कोई वासना थी ना ही कोई जल्दीबाजी बस कुछ था तो वो था एक अनोखा प्यार जो अनजाने में ही इनमें एक दूसरे के करीब ले आया था.... जब 5 मिनट तक दोनों अलग नहीं होते तब अंजली ने कोमल को लगभाग खींचते हुए उसे मयंक से अलग कर के कहती ह

तभी घंटी बजती है और अंजली कोमल को अपने साथ ले के वहां से चली जाती है क्लास मै
दोनों क्लास मै जा रही थी अंजली कोमल को गुरे जा रही थीं
कोमल__ क्या ऐसे क्यों देख रही है
अंजली_तू पूछ रही है क्या हुआ क्यों तुझे मालूम नहीं कि क्या हुआ कल तक तू कितनी सरीफ बन रही थी आज
कोमल_मुझे कुछ पता नहीं चला एकदम कैसे हो गया
प्लीज़ किसी को भी इस बारे बात नहीं करना घर पे भी नहीं

शाम को मयंक घर गया तो उसके मुंह पे एक अलग ही खुशी थी उसको खुश देख के सुमित्रा ने पूछा भी लिया
सुमित्रा__ क्या बात है आज पहला दिन ओर आज ही इतनी खुशी क्या हुआ ऐसा कॉलेज मै
मयंक__ कुछ नहीं मां बस ऐसे ही
सुमित्रा_मेरे से छिपाएगा अब तू इतना बड़ा हो गया
मयंक _ कैसे मां आप को कैसे मालूम हो जाता है मै खुश हु कि दुखी हु कैसे माँ
सुमित्रा_तेरी मां हु बेटा तेरे जन्म से आज तक देखती आई हंकी तू खुश है या दुखी

फिर आज जो भी बात हुई कॉलेज मै पूरी अपनी मां को बता दिया किस को छोड़ के
सुमित्रा_बेटा एक बात का याद रखना कभी भी किसी के साथ गलत मत करना या किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करना
सुमित्रा__तू हाथ मुँहे ढोले मै खाना बनाती हु
मयंक हाथ मुँहे थोक थोड़ा रेस्ट किया फिर सुमित्रा ने खाना को बोला
दोनों मां बेटे साथ मै बैठ के खाना खाने लगे मयंक कुछ असमंजस में था
सुमित्रा_क्या बात है बेटे अभी भी कोमल दिमाग से नहीं निकली
मयंक__ नहीं मां ऐसी बात नहीं है क्या मां प्यार करना गलत है किसी से
मां _नहीं बेटा कुछ गलत नहीं है बट जो भी करो सोच समाज के करना जिस्से भी वादा करो सोच समाज के करना
(सुमित्रा मन मै हे भगवान मेरे बेटे को अपने बाप जैसा मत बनाना है तो उसकी दादा जैसा बनाना जो गरीबों के लिए भगवान हो)
मयंक_मां एक बात पूछ
सुमित्रा_हा हा पूछो बेटा
मयंक_आप कभी भी कुछ पूछता हु तो क्या सोचने लग जाती हो आप

सुमित्रा_कुछ नहीं बेटा बस ऐसे (बात घुमाते हुए ) बेटा गुरु जी का फोन आया था तुझे उनके पास जाना है 2 महीन के बाद 1 तारीख को
मयंक __ ठीक है मां चला जाऊंगा मां
दोनों ने खाना खा लिया था इनका घर गांव के बाहर था इसलिए गांव का कोई भी इनके घर नही आते नहीं थे
पूरे गांव मै एक ही घर था जहाँ मयंक ओर उसकी मां जात थे है शांति के घर शांति के घर मै वो ओर उसकी बेटी मंजू रहती थी उसका पति राजेश

रात के करीब 12बजे शांति के घर पे एक गाड़ी आती है जिसमें सरपंच उतरता है गांव का
गाड़ी की आवाज सुनके शांति का पति राजेश बाहर आता है
राजेश सरपंच को देख डर जाता है आज सरपंच हमारे घर कैसे
राजेश -_ हा सरपंच साहब आज आप हमारे घर कैसे हमारे तो किस्मत खुल गई
सरपंच__ राजेश तुम को मेरे साथ चलना होगा कुछ काम है
राजेश _साहब 5 मिनट दो कपड़े पहने के चलता हु वो अभी लूंगी मै था
राजेश अंदर गया ओर कपड़े पहन के जाने लगा तो
शांति__ कहा जा रह हो
राजेश_ वो सरपंच साहब को कुछ काम है उनके साथ जा रहा हु
राजेश को देखने लगती है लेकिन बोलती कुछ नही
मयंक _सो जाइए कल सुबह जल्दी भी उठना है ओर मुझे कॉलेज भी जाना है ।
सुमित्रा कुछ नहीं बोलती बस मयंक के बांहों में आराम से सो जाती है ।एक टांग सुमित्रा के ऊपर रख देता है
सुमित्रा - (मन में )अब मुझे अच्छी नींद आएगी ।

दोनो मा बेटे सो जाते है इस वक्त दोनों मा बेटे ऐसे लग रहे थे जैसे नए दुलहा दुल्हन सो रहे हो ।

अगली सुबह।।

अगली सुबह सुमित्रा की नींद अपने टाइम खुल जाती है । सुमित्रा जब अपने आप को देखती है तो उसे हंसी आ जाती है क्योंकि सुमित्रा मयंक के ऊपर सोई थी । सुमित्रा प्यार से मयंक को देखती है ।
सुमित्रा - ( मन में) ये क्या जादू कर दिया है तूने मयंक जब तक तू मुझे बांहों में भर कर नहीं सोता मुझे नींद नहीं आती । मेरा मन तो ऐसा कर रहा है जैसे बस तेरे बांहों में सोई रहूं ।
लेकिन अगले ही पल सुमित्रा को अपने पेट पर कुछ चुभता है ।
सुमित्रा जल्दी से खड़ी होती है ओर देखती है तो सुमित्रा को हंसी आ जाती है । मयंक का सुबह सुबह लन्ड खड़ा था जो कि हर लड़के के साथ होता है
सुमित्रा - लगता है लड़का जवान हो गया है ।

सुमित्रा उठ कर नहाने चली जाती है । सुमित्रा फ्रेश होती है ओर नहा कर सुमित्रा एक सुंदर सी साड़ी पहन कर मयंक को उठने चली जाती है ।
मयंक - उठ जा बेटा कब तक सोया रहेगा ।
मयंक उठ जाता है ओर जब अपनी आंखे खोलता है तो मयंक का मुंह खुला का खुला ही रह जाता है साड़ी मै उसकी मां आज बहुत सुंदर लग रही थी उसमें ही उनकी पेट से उसको ही देख रही उनकी नाभि

सुमित्रा बहुत ही हॉट एंड सेक्सी लग रही थी
गोल चेहरा गुलाबी रसीले होंठ हिरणी जैसी आँखें छोड़ी छाती ओर उस पर दो गोल गोल बारी भरकम बूब्स नीचे सपाट पेट उस पर थोड़ी चर्बी । उसके बीच में गोल एक गहरी नाभि । जिसे जो भी देखे बस चूसने का मन करे ।
सिला इस समय बहुत ही जान लेवा लग रही थी जो भी एक बार देखे बस देखता ही रह जाए । वही हाल इस समय मयंक का था
सुमित्रा जब देखती है कि मयंक उसी की तरफ देख रहा है तो सुमित्रा को थोड़ी शर्म आती है
सुमित्रा - ऐसे क्या देख रहा है पहले मुझे कभी देखा नहीं क्या ।

सरपंच राजेश को लेकर गांव से बहुत दूर एक फार्म हाउस बना हुआ वहां लेके गया
फार्म हाउस के सामने दो गार्ड खड़े थे सरपंच को सलाम किया
दोनों अन्दर चले गये
राजेश अन्दर गया तो देखा सामने एक औरत खड़ी थी सिर्फ ब्रा ओर पेंटी मै राजेश उसको देखते ही पहचान गया ओर हकबका रह गया
राजेश_संजना तुम यहां
औरत कुछ बोलती उसके पहले ही सरपंच बोला
सरपंच __ अरे राजेश ये मेरे लिए आई है उसको कुछ काम है
फिर सरपंच ओर राजेश दोनों बैठ गए ओर संजना पेग बनाने लगी संजना ने दो ही पेग बनाए थे
सरपंच__ ये संजना मेरी जान दो ही पेग क्यों तुम्हारे लिए क्यों नहीं
संजना__नहीं साहब आज मुझे घर जाना है मेरी मां आई हुई है
सरपंच_कोई बात नहीं चले जाना लेकिन पेग तू तीन बना मै बोल रहा समझी
सरपंच ओर राजेश दोनों लगे ओर संजना भी हल्का पेग बना के पीने लगी अभी मुंह पे लगाया है था कि उसका शराब की इस्माइल आई वो पीना नहीं चाहती लेकिन उसकी मजबूरी थी
एक साथ पूरा ग्लास खाली कर दिया
अब तीनों दो दो पेग खत्म कर चुक थे राजेश को भी अब नशा होना लगा
सरपंच_संजना आवो यहां (अपनी गोद में इशारा किया )
संजना_नहीं सरपंच साहब राजेश जी भी है यहां
सरपंच__रण्डी बोला उतना कर समझी नहीं तो मालूम मै क्या करूंगा
संजना डरते हुए उसकी गोद में बैठ गई
सरपंच_एक एक ओर बना क्यों राजेश ओर लोगे ना
राजेश_अरे सरपंच जी लेना तो पड़ेगा ही ना संजना जो पेग बना रही है
सरपंच_(मन मै_ अब इसको चढ़ गई है अब मैं बोलूंगा वैसा ही करेगा ये साला)अरे संजना एक एक पेग सभी लिए ओर बनावो
तीनों के विस्की की बोतल खाली हो गया था
सरपंच _संजना डार्लिंग अब खाना लगादे आज मजा आ गया
क्यों राजेश मजा आया ना
राजेश सरपंच ओर संजना ने खाना खाया उसके बाद हाथ मुँहे धोक बैठ गए
संजना __सरपंच जी अब मुझे छोड़ दो घर पे बच्चे भी अकले है
सरपंच _अरे तुम टेंशन मत लो मैने तेरे गर पे उस पूजा को भेज दिया तुम हमारे लिए सोने की व्यवस्था करो ओर सुना तीन ग्लास मै दूध लेकेर आ जाओ
आज हम यही सोएंगे तीनों भी क्यों राजेश
राजेश को भी नशा तो फूल हो गया था
राजेश__ हा हा सरपंची इधर ही सोयग

संजना तीन ग्लास मै दूध लेकर आई
सरपंच_ संजना पानी पिलवा
ना डार्लिंग ओर सुनो एक पानी की बोतल भी लेके आ जाओ फ्रिज से
संजना पानी लेने चली गई थी
सरपंच ने दो ग्लास मै एक एक टेबलेट डाल दी ओर एक ग्लास उठा के दूध पीने लगा तब तक संजना भी आ गई
सरपंच _संजना ये दूध तुम ओर राजेश पीलो मै तो पी लिया ओर
राजेश सुनो पास के कमरे बेड पड़ा है वहां सो जाओ तुम
राजेश चला गया उसके कमरे में एक मुकम्मल का बेड रूम के बीचों बीच ओर उसमें भी ऐसी लगी हुई थी ओर बेड पे गिर गया आज तो नींद जबरदस्त ही आएगी
क्यों कि राजेश गर पे ऐसा बेड नहीं था न ही एसी थी इसलिए वो बहुत खुश हुवे

वही अब सरपंच संजना को बोलता है चल कपड़े खोल ओर नंगी हो जा मेरी रण्डी
संजना ब्रा ओर पेंटी मै ही थी उनको भी खोल दिया ओर उसके बूब्स मसलने लगा
सरपंच _क्या जिस्म है तेरा मेरी रखैल
संजना _(शराब का नशा ओर ऊपर से सरपंच ने वो टेबलेट दे दी अब वो भी बेकाबू हो गई) है सरपंच में तेरी रखैल हु तू हु तेरी रण्डी आजा चोद मुझे
सरपंच के कपड़े खोलने लगी नहीं
सरपंच_सरपंच जी बोल रण्डी ओर उसके गांड़ पे चांटा मारा दिया जिस से संजना की चिक निकल गई
संजना ने लन्ड पे हाथ रख दिया ओर ऊपर नीच करने लगी ओर मुंह मै लेने लगी जैसे आइस्क्रीम चूस रही हो
अभी तीन मिनट ही हुए के सरपंच बोला
सरपंच_चल रण्डी गोडी बन जा आज तेरी गांड़ मारनी है मुझे
संजना__ मेरे चुत मैं डालो ना गांड़ मै तो किसी सूरत में अंदर नही जाएगा.. .. मेरी गांड फट जाएगी.. खुजली चुत में हो रही है तो वहाँ घुसावो ना... !! गांड पर क्यों जुल्म कर रह हो!! आप समझो जरा.. जियो के सिमकार्ड पर एयरटेल का रिचार्ज मत करो ... ऊईईई माँ...मर गई !!!" बिलखते हुए संजना ने कहा

सरपंच ने एक झटके में उसका ६ इंच जितना लंड गांड के छेद में घुसेड़ दिया.. संजना के मुंह से चीख निकल गई... उसकी चीख सुनकर पास के कमरे मै सो रहा राजेश की नींद उस गई. कहीं !! राजेश बाहर आया ओर सरपंच के कमर मै देख तो गेट खुला ही था ओर सामने संजना गोड़ी बन हुई सरपंच का लन्ड गांड़ ले रही थी वो भी वही खड़े खड़े देखना लगा ओर लन्ड बाहर निकल के मूट मरने लगा.


दूसरा दमदार धक्का लगाया.. और संजना की गांड में अपना पूरा लोडा कील की तरह ठोक दिया..

"अममम... अघहगहह.. उम्ममम.. " संजना के लंड ठूँसे मुंह से ऐसी विचित्र आवाज़ें निकल रही थी। सरपंच ने संजना की गांड में लगातार फटके लगाने शुरू कर दिए.. .. सरपंच का लंड गांड में अंधाधुन चोद रहे था.
सरपंच की मर्दानगी पर संजना फिदा हो गई.. उसकी गाँड़ अचानक सरपंच के गरमागरम वीर्य से भर गई.. और गांड के छेद से छलक कर वीर्य की धाराए, चुत के होंठों के बीच से गुजरते हुए नीचे बिस्तर पर नीचे टपकने लगी.. सरपंच थककर संजना की पीठ के ऊपर ढह गया.. और हांफने लगा..
थोड़े टाइम बाद संजना की चुत मै खुजली होने लगी क्योंकि अभी सरपंच ने चुत तो चोदी ही नहीं इसलिए वो वही सरपंच के मुरझाये लन्ड को फिर ऊपर नीचे करने लगी
सरपंच _नहीं अब नहीं अब सो जाओ
संजना को गोली का असर हो गया तो था उस अब लन्ड अपनी चुत मै चाहिए ही था
संजना __सरपंच जी ऐसा मत करो मै मर जाऊं प्लीज़
सरपंच__एक काम करो मै राजेश को बोलता हु वो तुझे चोद देगा
संजना कुछ नहीं दिख रहा था इस टाइम इसलीय वो मान गई
सरपंच चिल्ला के राजेश को बोलता है राजेश अभी तक गेट के पास ही खड़ा था भाग के आया
सरपंच __ सुन राजेश तेरा लन्ड हाथ से नहीं होगा इसको लेके जा तेरे रूम में ओर मजा करे लेकिन याद रखना अगर इसकी गांड़ हाथ भी लगा दिया तो मै तेरी घर दोनों रंडीयो की गांड़ मरूँगा समझा
सरपंच__तू भी सुनले रण्डी इसको गान्ड के तो हाथ लगाने दिया तो तेरी भी बेटी की गांड़ मरूँगा समझी
दोनों सरपंच की बात सुनके दूसरे रूम में चले गए थे अपनी रात रंगीन करने लेकिन इनको ये पता नहीं आज वो कितनी बड़ी गलती कर रह है
अभी तो शराब ओर गोलिया का असर ओर पूरे शबाब मै चल गए

सरपंच वहां निकल के घर जाना लगे जो उसके गांव मै था सामने खड़े गार्ड को कुछ बात समझाई ओर निकल गया
 
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sunoanuj

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बहुत ही शानदार शुरुआत ! नई कहानी के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ !!
 
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mis1234

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सुमित्रा- अच्छा ठीक है मान ली मैने तेरी बात अब तू नहाने जा में तेरी लिए चाय बनाती हु ।
मयंक - ठीक है मा
सुमित्रा चाय बनाती है लेकिन मन ही मन
सुमित्रा - क्या में आज भी इतनी खूबसूरत लगती हूं। क्या में मयंक को इतनी पसंद हु ।



मयंक नहा कर आता है सुमित्रा उसे चाय का गिलास दिती है ओर मयंक चाय पीने लग लगता है । ओर सुमित्रा नाश्ता तैयार करने लग जाती है इस बीच मयंक सुमित्रा से हंसी मजाक कर रहा था जो कि सुमित्रा को भी अच्छा लग रहा था । दोनो मा बेटे थोड़े थोड़े खुल रहे थे ।
सुमित्रा - अच्छा मा में चलता हु ।
सुमित्रा - ठीक है ध्यान से जाना ।
मयंक - आप कुछ भूल रही है ।
सुमित्रा - मुझे पता था तू यही कहेगा ।
मयंक - इतनी मीठी चीज कैसे भूल सकता है
सुमित्रा - ये तो मुझे भी पता है ।
सुमित्रा मयंक के गाल पर एक हल्का सा किस कर देती है
मयंक - ये क्या था
सुमित्रा - किस था जो तुमने मांगा था
मयंक- इसे किस थोड़ी कहते है किस ऐसे किया जाता है
मयंक सुमित्रा के गाल पर जोर से किस करता है जो सुमित्रा को बहुत अच्छा है
सुमित्रा- अब हो गया ना चल जा बिगड़ता जा रहा है तू आजकल
मयंक- हा अब सही है आप के गाल बड़े मीठे है ।
सुमित्रा -( शर्मा जाती है )गाल भी किसे के मीठे होते है क्या ।
मयंक - ओर का तो पता नहीं लेकिन आप के बहुत मीठे है ।
सुमित्रा - हंस कर अच्छा ठीक है अब तू जा तुझे लेट हो रहा होगा ।
मयंक चला जाता है । मयंक आज बहुत खुश था मां से पहली किस जो मिली थी सुमित्रा अब पहले से खुश रहने लगी थी । जाने अनजाने में दोनो मा बेटे धीरे धीरे करीब आते जा रहे थे ।
सुमित्रा घर का काम करने लगती है ओर मन ही न कुछ सोच भी रही थी ।
सुमित्रा__(मन में ) खेती भी मयंक ने संभल रखी है घर की जिम्मेदारी भी मयंक के कंधे पर है । अगर मयंक नहीं होता तो में कैसे ये सब अकेले संभालती । घर का इकलौता मर्द मयंक है
सोनिया__वो देख कोमल तेरा बॉयफ्रेंड आज जल्दी आ के तेरा इंतज़ार कर रहा है जा जाके उसे गले लगा के किस कर ले.... यार जल्दी आने का उसे कुछ इनाम तो मिलना ही चाहिए


सोनिया की बात सुन के जब कोमल सामने बैठी मयंक को देखती है तब...


कोमल मन मैं__ यार ये मैं कहां फंस गई... ये तो बात संभालने के बाद बढ़ती ही जा रही है... अगर मैं अभी उसके पास नहीं गई तो सोनिया को पता चल जाएगा कि वो मेरा बॉयफ्रेंड नहीं है... और फिर यहां सब के सामने ये मेरी इज्जत का फालूदा बना देगी और साथ ही मयंक को ले उड़ेगी.... ऐसा करती हूं मयंक के पास जा के उसे पूरी बात बताती हूं... मौजूदा हालत को समझ के शायद वो मेरी बात मान ले... हां यहीं ठीक रहेगा....


कोमल को यूं खोया देख सोनिया को अजीब सा लगता है... वो कोमल को हिला के उसकी तंत्र टूटते हुए कहते हैं....


सोनिया_अरे क्या हुआ तुझे अपने बॉयफ्रेंड के पास जाने के बजाये तू यहाँ खादी क्या सोच रही है.... वो तेरा बॉयफ्रेंड तो है ना अगर ऐसा नहीं है तो अभी बोल दे मैं अभी जा के उसे पता लेती हूं.... वैसे भी तू उसके टाइप की नहीं है ये तो मेरे जैसी बोल्ड स्टाइलिश और हसीन लड़की को ही मालूम है


सोनिया की बात सुन के कोमल को गुस्सा तो बहुत आता है मगर वो अपने गुस्से को दबा के कहती है...


कोमल_ कमीनी वो मेरा बॉयफ्रेंड है... उसकी तरफ देखना भी नहीं बड़ी आई हसीन लड़की हुंह


मरती क्या न करती कोमल को मयंक के पास जाना ही पड़ा है सोनिया की बात सुन ने के बाद वो मयंक की तरफ बढ़ जाती है


कोमल को इस तरफ आते देख सुनील मयंक को उसकी तरफ इशारा करके कहता है....


सुनील__लो जी वो देखो वो सामने से आ रही है हमारे मयंक की जान कोमल मैडम


मयंक__अबे तू फिर से शुरू हो गया...


सुनील__तू प्यार कर सकता है और मैं बोल भी नहीं सकता वो देख उधर वो आ रही है तेरी जान


मयंक__यार ये यहाँ क्यों आ रही है


सुनील__ अपनी जान से मिलने और क्या


सुनील__क्या राजू एक ये सुनील क्या काम था जो तू भी शुरू हो गया


रेनू _अरे यार मैंने कहां कुछ कहा वो तो बस मैं मजाक कर रही थी... और वैसे भी तुझे हमसे बात करनी थी ना लो अब वो खुद यहां आ रही है तो उससे बात कर लेना


रेनू के इतना कहते ही कोमल वहां तक आ चुकी थी


कोमल__वो मयंक मुझे तुमसे ना


इतना कह के वो मयंक की तरफ बढ़ती ही थी कि तभी उसका पैर रेनू की पैर से टकरा जाता है और वो लड़खड़ा के सीधा सामने बैठा ह मयंक की बाहों में जा गिरती है मयंक फोरन उसे अपनी बाहों में थाम लेता है दोनों की नजरें एक बार फिर से टकरा जाती है और वो एक दूसरे की आँखों में खो से जाते हैं.... देखते ही देखते दोनों का चेहरा और एक दूसरे के होठों के बेहद करीब आ जाता है और उनके होंठ आपस में मिल जाते हैं.... दोनों का दिल इस एहसास को महसुस करके मदहोश सा होने लगता है.... कब दोनो के एक दूसरे से मिलते हैं उन्हें पता ही नहीं चलता दोनों प्यार से एक दूसरे के होठों को चूमने लगते हैं उन्हें यूं किस करते देख जहां सोनिया गुस्से से वहां से चली जाती है वहां सुनील अपना सर पीट लेता है.


सुनील__ ले देख ले रेनू ये दोनों फिर शुरू हो गए देख ले कमीने को कैसे कह रहा था कि मैं तो उसे जानता नहीं वो सब तो गलती से हुआ था अगर वो गलती थी तो ये क्या है गलता


रेनू __गलता मतलब


सुनील__ एक बार की जाए वो गलती और दोबारा कि जाए तो गलता मतलब ये पक्की बात है की ये दोनों लवर्स हैं तभी तो दिन दहाड़े सब के सामने यूं एक दूसरे को किस कर रहे हैं


करीब 5 मिनट तक जब दोनों अलग नहीं होते तब रेणु दोनों को अलग करती है


रेणु __अरे यार बस भी कर पूरा खा ही जाएगी क्या उसको


रेनू की बात सुन के कोमल शर्माते हुए मयंक की बाहों से उठ के जाने लगती है कि तभी रेनू उसे रोक के कहती है


रेनू__अरे रुको कल भी तुम बिना कुछ कहे भाग गई थी आज पूरी बात बता के जाओ क्या तुम दोनों मुझे एक दूसरे से प्यार करते हो


रेनू की बात सुन के कोमल पलट के मयंक को देखती है फिर शरमाते हुए हां मैं अपना गर्दन हिला के मुस्कुराती हुई वहां से अपनी क्लास की तरफ भाग जाती है
सुबह होते ही जब राजेश ओर संजना की नींद खुली तो वो दोनों एकदम नंगे पड़े थे ओर राजेश उसकी ओर देखना लगा संजना शर्माती हुई कपड़े ढूंढने लगी लेकिन कपड़े वहां नहीं थे तभी उसको याद आया कपड़े तो सरपंच के रूम में खोले
थे
राजेश__ संजना तुम्हारे कपड़े उस रूम है तुम फ्रेस हो लो बाथरूम मै मै लेके आता हु कपड़े
संजना बाथरूम मै चली जाती है राजेश अपने कपड़े पहने ओर बाहर गया तो सरपंच का रूम लॉक था
राजेश गार्ड को बुलाता है
राजेश__अरे भाई वो कपड़े उस रूम में रह गए
गार्ड_आप दोनों फ्रेश हो जाइए चाय ओर कपड़े दोनों आपको मिल जाएंगे अभी दस मिनट मै ओर गाड़ी भी आ गई है जब भी आप बोलोगे आप को छोड़ दिया जाएगा आपके घर पे
अन्दर संजना फ्रेश होके फिर अच्छे से स्नान किया तभी राजेश भी अन्दर आ गया
संजना_राजेश जी मेरे कपड़े दे दो
राजेश_संजना अभी दस मिनट लगेगे तुम बाहर आ जाओ मुझे भी बाथरूम जाना है
संजना रात को शराब ओर गोली का असर से इतनी शर्म नहीं आई लेकिन अब शरमा रही थी
दूसरा रास्ता नहीं देख के वो बाहर आ गई


बैडरूम में बैठे-बैठे बाथरूम का खुला दरवाजा दिख रहा था क्योंकि बाथरूम बैडरूम के अंदर ही था।


राजेश रूम में बैठे-बैठे यही सोच रहा था कि क्यों ना संजना के साथ बाथरूम में मजे कर लूं एक बार ओर पता नहीं फिर कब मिलेगी
राजेश फट से अपने सारे कपड़े उतारे और बाथरूम में जाते ही संजना के मस्त चुच्चों को पीछे से दबोच लिया। मुझे बाथरूम में देखकर संजना बहुत खुश हुई। राजेश और संजना दोनों एक-दूसरे को साबुन से नहला रहे थे।


नहलाते समय राजेश ने संजना के एक चुच्चे को मुंह में लेकर चुसने लगा और दूसरे चुच्चे की निप्पल को हाथ से दबाने लगा।
संजना अपने चुच्चे चुसवाते हुए बोल रही थी-__और जोर से मेरे राजा … ओह … आह … और जोर से … सारा … सारा निचोड़ दे दोनों को!


अब संजना ने राजेश लंड को सहलाया और बड़े प्यार से राजेशके लंड को चूसने लगी. जैसे ही राजेश लंड को उसने अपने मुंह में लिया राजेश तो सातवें आसमान की सैर करने लग गया.


थोड़ी देर चुसवाने के बाद राजेश अपना सारा माल संजना के मुख में छोड़ दिया, वो भी बड़े प्यार से राजेशके माल को बूंद बूंद तक गटक गई।


दोबारा दोनों एक दूसरे को सहलाने में मस्त हो गये और राजेश ने दोबारा से उसे लंड चूसने के लिए कहा तो वो बिना कोई देरी किए राजेश के लंड को चूसने लग गई
5 मिनट बाद राजेश का लंड टाईट हो गया तो राजेश ने उसे बाथरूम के फर्श पर लिटा दिया और अपना लंड संजना की चुत में डाल दिया. चुत में एक झटके से राजेश का लंड चला गया क्योंकि सरपंच ने बहुत बार चोद चुका था इसकी चुत को खोल चुका कितनी ही बार
और उसने कहा- जोर से … जोर से मेरे राजा!


चोदते समय संजना के चुच्चे ऐसे लटक रहे थे जैसे पेड़ की टहनी पर आम लटक रहे हों। राजेश उसके एक चुच्चे को मुंह में डालकर चूस रहा था और दूसरे चुच्चे को दूसरे हाथ से दबा रहा था। संजना भी सिसकारी ले रही थी- आह … आह … आह … जोर से … फाड़ दे मेरी चुत को … आह!


करीब दस मिनट बाद उसकी चुत में अपना सारा माल छोड़ दिया।
तभी वहाँ पे गार्ड आ जाता है चाय बिस्किट के साथ संजना के कपड़े लेकर
जैसे ही ये बाहर निकले सामने गार्ड खड़ा था दोनों नंगे ही थे
गार्ड __ ये आपकी चाय ओर कपड़े भी इसमें अंडरगार्मनेटस भी है
गार्ड को उनसे कुछ फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उसका डेली का काम था ओर संजना भी उसके सामने कई बार नंगी सरपंच के सामने रह चुकी थी ओर एक बार वो पेग बना रहा था संजना नंगी सरपंच का लन्ड चूस रही थी
गार्ड चला गया ओर अभी भी नंगे ही थे दोनों ने चाय पी फिर कपड़े पहने
संजना__राजेश गांव मै किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए
राजेश_संजना तुम इस गांव की सबसे संस्कारी औरत थी तूम ऐसी होगी पता नहीं था
संजना__ क्या बताऊं आपको राजेश मेरी किस्मत ही ऐसी ही है
फिर दोनों वो वहां से बाहर आए ओर गार्ड ने सामने पड़ी गाड़ी की इशारा किया
गार्ड__ आप दोनों को ये गाड़ी गांव तक छोड़ देगी आपको को कुछ भी चाहिए तो सरपंच जी से बात कर लेना
वो दोनों गाड़ी मै बैठ गए ओर निकल गए गांव की ओर
सरपंच किसी से फोन पर बात कर रहा
सरपंच__मै कोई कम ऐसा नहीं करता मै अपने तरीके से करता इसलिए इस पंचायत पर आज तीसरी बार का सरपंच हु मै
सामने से कुछ कहा गया
सरपंच__मै जाल बिछाना शुरू कर दिया है 10 15 का का टाइम दो कौन है कहा से आई है पता करके बताता हु


सामने से ओर कुछ कहा गया
सरपंच__आप कहते हो मन लेता हु लेकिन मुझे नहीं लगता कि वो एक बच्चे की मां है साली के बूब्स देखो तो एक दम कड़क है उसका बेटा भी उसके उसका भाई दिखता है साला


सरपंच__ मुझे भी यही समझ मै नहीं आया उसका पंचायत मै कोई रिकॉर्ड मै कागज भी तो नहीं साली के
सामने से कुछ ओर कहा था


सरपंच __अरे उस कनिका की तो मां चोद साली तीन बार हरा दिया उसको अब खड़ी भी नहीं होगी साली अब उसका पति का बिजनेस भी अच्छा नहीं चल रहा है उसका पहले वाला जो मैनजर को भी मैं छुड़वा दिया साले की कमजोरी मिल गई थी
तभी वहाँ एक लड़की आती है पापा मै कॉलेज जा रही हु
5000 हजार रुपये दो मुझे आते टाइम शॉपिंग करनी है
सरपंच फोन रख देता है जेब से 500 के 10 नोट निकाल के दे देता है
सरपंच__ ले बेटी ओर कुछ चाहिए तो बोल ओर हा ये सब तेरा ही है बेटा


राजेश जब घर पहुंचा तो शांति ग़ुस्से मै थी
शांति__आ गए आप आज ओर रुक जाते है ना दिन भर ओर मजे करते सरपंच के साथ
राजेश_अरे वो सरपंच साहब को कुछ काम था इसलिए उनके साथ चला गया था इतना क्यों गुस्सा करती ही
शांति__ मुझे मालूम है सरपंच को क्या काम होता है उसकी रग रग से वाकिफ हु मै समझे आप
मालूम नहीं आपको क्या हुआ था राशन मै नाम जुड़वाने गए थे क्या किया उस नीच ने आपके सामने मुझे क्या बोला था
ओर उसकी आंखों में पानी आ जाता है
संजना जब घर पहुंचती है तो उसकी सास उसको बहुत गुस्सा करती है
सास__ वहां क्यों गई सरपंच यही बुला लेती यही सो जाती उसके साथ
संजना__ क्या करूं मै आप बेटा तो पैसे देता नहीं ओर घर के कागज सरपंच के पास है
बाप का कर्जा कब उतरेगा पता नहीं ओर आप ही ने ही तो सरपंच को अपना बताया था
आप ही बोलती थी कि सरपंच धनंजय सिंह अच्छा आदमी है ये वही सरपंच है
सास__ क्या करे बेटी हमारे घर हालात भी ऐसी है कि चाह कर भी उस का कुछ नहीं कर सकते है
संजना__ मैं अपने सौक के लिये जाती सासू मां मै भी अब धक गई हु इस सरपंच को खुश करते करते
सासू _अबकी बार बेटा को गांव आने दे फिर हम भी गांव छोड़ के चले जाएंगे
ऐसे ही 5 दिन बाद 15 अगस्त आ गया मयंक सुबह उठा ओर आज कॉलेज पढ़ाई तो होनी नहीं थी इसलिए गांव की स्कूल मै जाने का मन बना लिया


मयंक मां के पास रसोई में गया__मां आज कॉलेज नहीं जा रहा तिरंगा है। गांव की स्कूल मै जा रहा हु वही स्कूल जहां 8वीं तक पढ़ा था। झंडा फहराना देखूंगा
सुमित्रा__जा बेटा। अपने स्कूल की तिरंगा को सलाम कर आना शाम को जल्दी आ जाना।
गांव की सरकारी स्कूल सुबह 9 बजे **वां स्वतंत्रता दिवस बच्चे लाइन में हाथ में कागज के तिरंगे


मंच पर सरपंच धनराज सिंह बैठ थे। सफेद कुर्ता, कंधे पर तिरंगा ओर उनके पास प्रधानाचार्य ओर प्रधानाचार्य के पास पूर्व सरपंच कनिका चौधरी बैठी थी
प्रधानाचार्य __ अब अपने दो शब्द माननीय सरपंच साहब बोलंंगे


मेरे प्यारे बच्चों, आजादी का दिन है। आजादी का मतलब है - अपने गांव को बेहतर बनाना
पिछले 9 साल में गांव ने तरक्की की है। ये स्कूल देखो - नई पुताई हुई है। हैंडपंप भी लग गया है।
स्कूल की छत भी ठीक करवा देंगे। टेंडर पास हो गया है। बस कागज की कार्रवाई बाकी है।
मैं धनराज सिंह, तुम्हारा सरपंच, तुम्हारे साथ खड़ा हूं। जय हिंद!"


तालियां गूंजीं। "सरपंच जी जिंदाबाद!"


प्रधानाचार्य __ अब आपके बीच पूर्व सरपंच माननीय श्री मति कनिका चौधरी अपने शब्द रखेंगे


मयंक सबसे पीछे खड़ा था। सरपंच जी का भाषण सुन रहा था। पुरानी क्लासरूम देखकर आंखें भर आईं। यहीं ब्लैकबोर्ड पर "भारत माता की जय" लिखा करता था


मंच पर माइक थामे कनिका चौधरी 35 साल की उम्र। केसरिया हरि ओर सफेद साड़ी ओर आवाज में 5 साल सरपंच रहने का रौब


2 सेकंड खामोशी। पूरा मैदान सन्न बच्चे, मास्टर जी किसान औरतें सबकी सांसें थम गईं


कनिका चौधरी बोलती हैं__माननीय सरपंच साहब प्रधानाचार्य जी अध्यापक गण ओर गांव से आए ग्रामवासियों ओर प्यारे बच्चों आपको सबको स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं सरपंच जी, पहले तो आपको सलाम। भाषण बहुत अच्छा दिया आपने। 'सेवक हूं, घमंड नहीं है'... 'एक-एक रुपया मिट्टी पर लगाया'... सुनकर मेरी आंख भर आई सरपंच जी। काश ये बात सच होती सरपंच जी।


सरपंच जी, मैं कनिका चौधरी हु। इसी गांव की बेटी। इसी मिट्टी में खेली, इसी स्कूल में पढ़ी। 5 साल इस पंचायत की सरपंच रही हूं सरपंच जी।


सरपंच जी, ****तक का हिसाब है इसमें सरपंच जी। एक-एक रुपए का। मेरी सरपंची में स्कूल की छत बनी थी सरपंच जी। हैंडपंप लगा था सरपंच जी।


सरपंच जी, आपने कहा स्कूल की छत ठीक करवा देंगे। टेंडर पास हो गया है। बस कागज की कार्रवाई बाकी है।
सरपंच जी, मैं पूछती हूं - ****में टेंडर पास हुआ था सरपंच जी। फाइल नंबर *******। आज **** है सरपंच जी। 2 साल 3 महीने 7 दिन हो गए सरपंच जी।


सरपंच जी, कागज की कार्रवाई में बच्चा 8वीं से 10वीं में पहुंच जाता है सरपंच जी। पर स्कूल की छत नहीं बनती सरपंच जी?
सरपंच जी, कौन सी कार्रवाई है जो 2 साल मांगती है सरपंच जी? ईंट-गारा की कार्रवाई या पैसा पचाने की कार्रवाई सरपंच जी?


सरपंच जी, आपने कहा एक-एक रुपया मिट्टी पर लगाया। सरपंच जी, स्कूल के लिए 2 लाख का बजट आया था सरपंच जी। जनपद से। **** में।
सरपंच जी, वो 2 लाख की मिट्टी कहां लगी सरपंच जी? मुझे दिखा दो सरपंच जी। मैं अंधी नहीं हूं सरपंच जी।
ऊपर देखो सरपंच जी - जाले लगे हैं। सरिया दिख रहा है। बारिश में बच्चे कॉपी बचाकर बैठते हैं सरपंच जी।
सरपंच जी, ये 2 लाख की मिट्टी है या 2 लाख का झूठ है सरपंच जी?


सरपंच जी, आपने कहा दरवाजा 24 घंटे खुला है। सेवक हूं।
तो सरपंच जी मैं आई हूं दरवाजे पर। खाली हाथ नहीं आई सरपंच जी। सवाल लेकर आई हूं सरपंच जी।


सरपंच जी, कुर्सी आपको मिली है सेवा करने के लिए। मेवा खाने के लिए नहीं
सरपंच जी, सरपंची का मतलब माला पहनना नहीं होता सरपंच जी। सरपंची का मतलब जवाब देना होता है सरपंच जी।


सरपंच जी, अगर छत नहीं बन सकती तो माइक पर बोल दो सरपंच जी - 'मैं नहीं बना पाऊंगा'। इस्तीफा दे दो सरपंच जी।
पर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ मत करो सरपंच जी। छत के नीचे बैठा बच्चा आपका बेटा हो सकता था सरपंच जी।


सरपंच जी, मेरी लड़ाई आखिरी लड़ाई नहीं है सरपंच जी मेरी लड़ाई गांव की लड़ाई है
पर सरपंच जी, मैं अकेली नहीं हूं। मेरे पीछे पूरा गांव खड़ा है सरपंच जी। वो किसान खड़ा है जिसका बेटा भीगता है। वो मां खड़ी है जिसका बच्चा अंधेरे में पढ़ता है।


बच्चों, तुम डरो मत। सवाल पूछो। क्योंकि सवाल पूछना गुनाह नहीं है सरपंच जी।
गुनाह तो झूठ बोलना है सरपंच जी। गुनाह तो जनता का पैसा खाना है सरपंच जी।


हमें अंग्रेजों से आजादी मिली थी सरपंच जी। अब हमें झूठ से आजादी चाहिए सरपंच जी। हिसाब से आजादी चाहिए सरपंच जी


जवाब दीजिए सरपंच जी। जय हिंद सरपंच जी। भारत माता की जय!"


माइक रखकर कनिका चौधरी वापस अपनी सीट पे बैठ गई


पूरा मैदान 10 सेकंड तक सन्न रहा। फिर पीछे से एक बूढ़ी अम्मा रोते हुए बोली: "कनिका बिटिया, तूने तो हमारी छाती का बोझ उतार दिया।"


सरपंच जी का चेहरा सफेद। चमचे भी आंखें चुरा रहे थे।
प्रधानाचार्य__अब मै इसी स्कूल से निकले लड़के मयंक को बोलने का मौका देना चाहता हु क्यों कि इसने हमारी स्कूल का नाम पूरे जिले मै किया है 8थे 10थे टॉप करके


धनराज सिंह___ ये राजनीति करने की जगह नहीं है कनिका चौधरी की तरफ देख के


मयंक __आदरणीय सरपंच जी, पूर्व सरपंच महोदया ओर प्रधानाचार्य जी नमस्कार
सरपंच जी, ये मेरी स्कूल है। मैं यहीं 8वीं ओर 10थ तक पढ़ा हूं। मां ने कहा सरपंच जी - 'स्कूल की मिट्टी को सलाम करना'।
सरपंच जी, आपका भाषण बहुत अच्छा था। 'सेवक हूं,घमंडी नहीं' - दिल छू गया सरपंच जी।
इसलिए तो सवाल पूछ रहा हूं सरपंच जी। सेवक हिसाब देता है ना?
सरपंच जी, आपने कहा छत का टेंडर पास है। सरपंच जी ऊपर देखो - जाले लगे हैं, सरिया दिख रहा है। मां ने कहा था सलाम करना। तो सरपंच जी, 2 लाख की छत को सलाम कैसे करूं सरपंच जी? वो तो है ही नहीं।


सरपंच जी, मैं मां से पूछकर आया हूं। अब आपसे पूछ रहा हूं सरपंच जी। जय हिंद सरपंच जी!"


पूरा मैदान सन्न। फिर पीछे से एक किसान बोला "मां से पूछकर आया है छोरा। सही पूछा है।"


धनराज का चेहरा लाल हो गया


मयंक माइक रखकर उतर गया
कनिका चौधरी मयंक का भाषण सुन के खुश हो गई ओर एक पेपर मै कुछ लिखा ओर उसको500 के दो नोट के बीच डाल के मयंक को जेब मै डाल दिया
मयंक ने कनिका चौधरी के पैर छुए: ऐसे ही बोलते रहना बेटे तो ही आगे बढ़ोगे
शाम को सुमित्रा के पास वापस शाम 6 बजे मयंक घर लौटा सुमित्रा ने पूछा: "कैसा रहा बेटा स्कूल?"
मयंक ने मां के पैर छुए: "मां, स्कूल की मिट्टी को सलाम कर आया। और सरपंच जी से हिसाब भी मांग आया।"
मां मुस्कुराईं: "शाबाश बेटा। तिरंगे के दिन सच बोलना ही सबसे बड़ी देशभक्ति है।
 

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पार्ट 7
मयंक __ मां मै कनिका आंटी के घर जाके आता हु उन्होंने बुलाया था
सुमित्रा__क्यों बेटा उनको तेरे से क्या काम है
मयंक__ पता नहीं वहां जाके ही पता चलेगा क्या काम
सुमित्रा__ जल्दी आ जाना जाके
शाम को मयंक करीब 6 बजे कनिका चौधरी के घर पे गया
पीछे का डोर खटखटाया तो एक आदमी ने डोर खोला
आदमी__ कौन हो भाई तुम ओर क्या काम है
मयंक_सर वो कनिका मेंडम ने बुलाया था मै मयंक हु


तभी पीछे से आवाज आई अरे मयंक तुम आ गए
कनिका__ आवो अंडर ओर आप डोर बंद करदो जो ये मेरे पति मोहन जी है "****शहर मै बिजनेस करते है तुम बेठो मै चाय लेके आती हु
मोहन__कनिका कह रही थी तू जमीर वाला लड़का है। सच बता बेटा - वो भाषण देने का मकसद क्या था तुम्हारा सच सच बताना


मयंक__अंकल जी मै कनिका मैडम की वो चार लाइन सुनके मुझे अच्छा लगा ओर अंकल जी। मैं अपने गांव के लिए लड़ रहा हूं।*मेडम जी ने वो स्कूल के लिए तो कहा इसमें उन्होंने गलत कुछ नहीं किया सरपंच ने पैसे भी उठा लिए है तो ये गलत है ना


मयंक ---जिन गलियों में खेला, उन्हीं गलियों के बच्चे आज छतरी तानकर पढ़ रहे हैं ये भी शर्म की बात है अंकल जी।


*मोहन जी:* उठकर मयंक को गले लगाया बेटा तुम वो जिगरा है लड़ने का तुम लड़ सकते हो
आज से तू मेरा भतीजा है। पैसा मै लगाऊंगा अब लेकिन वो सही जगह लगे इसलिए तुझे देखना है


मोहन जी:* सुन ले बेटा। सैलरी मैं दूंगा "मोहन ट्रेडर्स" मेरी कंपनी है तुझे मैनजर की पोस्ट भी वहां से मिलेगी ओर कल एक बार आ जाना वहां पे


मोहनू__25,000 महीना अभी के लिए बाद मै ओर बड़ा दूंगा काम देख के
चाय लेके आती हुए कनिका चौधरी बोली


कनिका जी__बेटा, दुनिया को बस इतना बताना कि "मोहन ट्रेडर्स मुझे सोशल वर्क के लिए स्टाइपेंड देती है
कल ऑफिस जाके एग्रीमेंट पे साइन कर देना


*मोहन जी:* जाते समय... याद रख मयंक मेरा नाम "मोहन ट्रेडर्स" है। आदमी का नाम मत लेना कंपनी का नाम लेगा तो सरपंच जी को लगेगा "शहर की कंपनी मै काम कर रहा है है"।तुम्हे गांव मै कोई प्रोलंब भी नहीं होगी


सरपंच सुबह से तिलमिलाया हुवा था उसके दिमाग में एक बात चल रही थी ये मयंक कौन है पता लगावो
हो गया सर धनंजय सिंह ने "पता करो" का आदेश दे दिया*
मंच पर बेइज्जती के बाद सरपंच का अगला वार शुरू।


सरपंच इस पीले की कुंडली निकालनी पड़ेगी मयंक कौन है ये साला


धनंजय सिंह गुस्से में जीप लेकर अपने बंगले आ गया
AC चल रहा टेबल पर ठंडा पानी। माथे पर पसीना गुस्से मै तिलमिलाया हुवा था


धनंजय सिंह__ टेबल ठोककर... राजू!
उस कॉलेज वाले मयंक ने मेरा तमाशा बना दिया गांव वाले "हिसाब दो चिल्ला रहे।
अब तू पता कर - ये मयंक है कौन? बाप कौन? मां कौन? कमजोरी क्या है?


कालू__ हां सर। अभी पता लगाता हूं। उसके कॉलेज, मोहल्ले, दोस्त सब 2 घंटे में फाइल आपके टेबल पर।


सरपंच __दांत पीसकर... कुंडली चाहिए मुझे।
अगर गरीब है तो पैसे से खरीद लूंगा अगर दाग है तो बदनाम कर दूंगा।
अगर शरीफ है तो डरा दूंगा मयंक को झुकाना है कालू किसी भी कीमत पर।


कालू फोन लेकर बाहर निकल गया।


कालू फाइल लेकर हाजिर। धनंजय सिंह ने चश्मा लगाया।


कालू __साहब नाम मयंक मा सुमित्रा देवी घर का काम करती है पता नहीं घर का खर्च कैसे चलता है
कॉलेज 1st year। फीस टाइम पर देता है।
दोस्ती गांव मै तो किसी से नहीं कॉलेज मै अभी अभी तो तीन दोस्त बन है एक गर्ल फ्रेंड भी है जिसका नाम कोमल है कोई क्रिमिनल केस नहीं। स्कूल टॉपर है अब कॉलेज जाता है


धनंजय सिंह__. हम्म न क्रिमिनल केस, न शराब, न लड़ाई-झगड़ा सीधा लड़का है स्कूल का टॉपर है अब कॉलेज मै भी अच्छा लड़का बना हुवा है


*धनंजय सिंह:* मुस्कुराकर.. कालू सीधे लड़के को तोड़ना सबसे आसान होता है।

सरपंच --डराओ बोलो कॉलेज से नाम कटवा दूंगा। प्रिंसिपल मेरा आदमी है।


कालू __सर, फिर क्या प्लान है?
धनंजय सिंह __प्लान ये - आज रात ** बजे मयंक को मेरे बंगले बुलाओ।
सरपंच जी आपसे अकेले में बात करना चाहते हैं" बोलना


सरपंच मन मै
मैं खुद समझाऊंगा इसे। प्यार से नहीं माना तो डर से मान जाएगा
मयंक कनिका के घर से निकल कर घर जा रहा था तभी घर के पास उसको कालू मिल गया


धनंजय सिंह मन मै पैसे का लालच दूंगा मन जाएगा नहीं तो कॉलेज से निकालने का डर दिखाऊंगा साले को


कालू__ मयंक भाई आपको सरपंच जी ने बुलाया है
रात ** बजे बंगले आ जाना। अकेले में बात करेंगे।
इनाम देंगे तुझे
मयंक__ कालू से... काका **बजे पहुंच जाऊंगा।


कालू हंसकर चला गया। मयंक की मां का हाथ कांपने लगा
मयंक___मां मै सरपंच के घर जाके आता हु आता हु बुलाया है सरपंच जी ने
मयंक मां की तरफ देखा
मां बोली - बेटा, सरपंच बुला रहा है, चले जाओ पर लेकिन सुमित्रा की आंखों में डर था


ड्राइंग रूम मै बैठे थे सरपंच धनंजय सिंह ओर सामने उसका चमचा कालू खड़ा था
तभी दरवाजे पे नोक होता है
सरपंच __मयंक अन्दर आ जाओ तुम्हारा ही घर समझो अपने घर मै घुसने के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं
धनंजय सिंह__आओ मयंक बेटा। बैठो। भाषण अच्छा दिया मंच पर। ऐसा लगा रहा जैसे सरपंच बना ना है तुम्हें भी हा हा हा हा हा हा हा हा हा
मयंक__नहीं सरपंच साहब मुझे राजनीति करनी ही नहीं हैं
मै तो इतना चाहता हु हमारा छोटा सा गांव मै सभी खुश रह ओर उनको सारी सुविधा मिले
सरपंच __देखो मै पिछले 7 साल से सरपंच हु मै अभी जो भी काम किया उसमें गांव के अच्छे के लिए किया है अब स्कूल मैं भी टेंडर पास तो हो गया काम भी जल्दी शुरू भी हो जाएगा ये लो तुम्हारा भाषण सुन कर अच्छा लगा ये लो ये लिफाफा इसमें 50000 हजार रूपये है मजा करो
धनंजय सिंह__ बस एक काम करना है। इस बात यही खत्म करते है उस कनिका के दूर वो दूसरों के कंधे पे बंदूक रख के राजनीति करती है तुम उस कनिका चौधरी को छोड़ दो
नहीं तो तुम्हारा भविष्य करब कर देगी
सरपंच __वो पूर्व सरपंच है खुद तो कुछ काम किया नहीं इसलिए तो कुर्सी गई। अब सिर्फ भाषण देती है।
तुम मेरे साथ आ जाओ। 5 साल बाद तुम सरपंच मैं वादा करता हूं तुम्हारा भविष्य बना दूंगा मयंक।


*मयंक:* खड़े होकर... सरपंच जी, धन्यवाद मुझे नहीं तो सरपंच बनना है नहीं ही मुझे ये पैसे चाहिए ओर चाहिए
मेरे पापा बोलते थे - "ये राजनीति बड़ी गंदी चीज होती है
मयंक__ में कोई कनिका चौधरी को जनता भी नहीं ओर शायद आपसे भी अब पहली बार मिला हु आपको क्या प्रोलम्ब है क्योंकि वो सच के साथ खड़ी हैं।


मयंक दरवाजा खोलकर वापस देख __ मुझे खरीदना ओर डराना ये आप से नहीं हों पाएगा


धनंजय सिंह__कल सुबह प्रिंसिपल को फोन बोलो मयंक अनुशासन तोड़ रहा है।
गांव में अफवाह उड़ाओ - "मयंक ने पैसे मांगे थे, सरपंच ने मना कर दिया
बदनाम करो इसे। कनिका के साथ रहेगा तो बर्बाद हो जाएगा


मयंक अब और मजबूत। क्योंकि उसके पास खोने को कुछ नहीं सिर्फ पाने को सच है


मयंक वहां निकल के वो सीधा गांव के अंदर से एक कपड़े की दुकान देख के कुछ याद आता वो अंदर जाता है ओर लेके निकल जाता है अपनी बाइक लेके घर की ओर
सुमित्रा __ आ गया बेटा हाथ मुहे धोले मै खाना लगाती हु बाकी की बात बाद मै। करेंगे
मयंक __अपने जेब में से एक थैली निकलता है ओर सुमित्रा को देता है
सुमित्रा__इसमें क्या है
सुमित्रा__ इसे पहन के आइए ।
सुमित्रा__लेकिन है क्या इस में बता तो सही
मयंक सुमित्रा को गौर से देखता
सुमित्रा__हंस कर मेरा राजा ले कर आया है तो कुछ तो खास होगा
मयंक अपनी मां के लिए मेक्सी लेककर आता था ताकि रात को सोते समय सुमित्रा को आराम मिल सके
जब सुमित्रा मैक्सी पहने आई तो मयंक
मयंक अपनी फटी आंखों से सुमित्रा को देखे जा रहा था सुमित्रा इस समय गांव की ठंडी रात ओर चांद की रोशनी में कयामत लग रही थी सुमित्रा को उस तरह देख कर मयंक के मुंह में पानी आ जाता है
सुमित्रा जब ये देखती है मयंक उसे ऐसे देख रहा है तो सुमित्रा शर्म से लाल हो जाती है


सुमित्रा _ मयंक के पास आ कर अब देख लिया हो तो अपना मुंह बंद कर
सुमित्रा- अपने होस में आते हुए वा मा क्या लग रही हो आप इस मैक्सी में



मयंक के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर सुमित्रा को अच्छा लगता है।
सुमित्रा मयंक के पास आ कर बैठ जाती है नाइट गाउन में सुमित्रा को अजीब सा फील हो रहा था जैसे उसने कुछ पहना ही ना हो सुमित्रा अंदर से बिल्कुल नंगी थी जिसके कारण सिला के चलने से सुमित्रा के बड़े बड़े बूब्स ऊपर नीचे हो रहे थे
मयंक__ कैसा लगा मेरा गिफ्ट
सुमित्रा __गिफ्ट तो अच्छा है लेकिन मुझे इसमें बड़ा अजीब सा लग रहा है ।
सुमित्रा कुछ नहीं होगा मा आप रोजाना नहीं पहनती ना तब आप को ऐसा लगता है जब आप रोजाना पहने लगोगी तो सब सही हो जाएगा
सुमित्रा को कोमल याद आ जाती है मयंक ने बताया एक ऐसी हैंजी दो बार मुझे किस किया था
सुमित्रा मयंक की तरफ सीरियस हो कर देखती है जिससे मयंक डर जाता है ।
मयंक __ये मा मुझे ऐसे क्यों देख रही है ।
मा क्या हुआ आप मुझे ऐसे क्यों देख रही हो ।


सुमित्रा__ तेरा ओर कोमल का क्या प्यार कहा तक पहुंचा
मयंक हैरान हो कर - मा को ये क्या हो गया कहा कि बात कहा लेकर चली गई
शीला आंखों में आंसू लिए ___मेरे से कभी दूर नहीं जाना मेरे बच्चे
मयंक (अपना माथा पकड़ते हुए मा )__मां क्या आपके प्यार पर इतना ही भरोसा नहीं आपकी ममता पे इतना भी भरोसा नहीं


मयंक__ मा में आप की कसम लेता ही कि आप के अलाव मेरे दिल में कोई नहीं है अभी कोमल भी नहीं


सुमित्रा को अब पका विश्वास हो गया है कि मयंक कभी उससे दूर नहीं जाएगा नहीं वो उससे कुछ छुपाएगा


मयंक__ क्या हुआ आप को आप अचानक से ऐसी बात क्यों कर रही है
सुमित्रा- वो एक लड़का था जो मेरे साथ पड़ता था वो भी तेरी तरह सहर में कॉलेज मै पढ़ने गया उसने उधर किसी लड़की से शादी करके गांव। आया किसी लड़की से ओर उस लड़की ने उसकी मां को घर से बाहर निकाल दिया । तो मुझे लगा कि ...
सुमित्रा __ तो आप को लगा कि में भी ऐसा ही करूंगा है ना
सुमित्र थोड़ा डर जाती है कि कही मयंक फिर से नाराज ना जो जाए
सुमित्रा __ नहीं वो मैने तो ऐसे ही पूछ लिया
मयंक __मा में आप से प्यार करता हु आप को छोड़ कर कहा जाऊंगा ओर आप का लाल तो वैसे भी आप के हुस्न का दीवाना है
सुमित्रा मयंक से ऐसी बात सुन कर शर्म से लाल हो जाती है
सुमित्रा__हा ये बात तो है
चलो अब खाना खाते है आपकी बातों मै टाइम हीं ज्यादा हो गया पता ही नहीं चला
दोनों मां बैठ खाना खाते है फिर सोने चल देता है
मयंक सुमित्रा को बिस्तर पर लीटा देता है
खुद भी पास मै लेट जाता


मयंक__ आप बहुत खूबसूरत हो मां
सुमित्रा__मुझे पता है तू मेरी तारीफ क्यों कर रहा है में नहीं आने वाली तेरी इन झूठी बातों में ।
मयंक__ उठ कर बैठ जाता है - आप को उस कोमल से जलन हो रही है ना
सुमित्रा- मुझे क्यों होगी जलन में कोई तेरी लुगाई थोड़ी हु जो मुझे जलन होगी
सुमित्रा बोल तो गई है लेकिन जब सिला को अहसास होता कि वो बात ही बात में क्या बोल गई है


मयंक हैरानी से सुमित्रा को देखे जा रहा था कि सुमित्रा ने क्या बोल दिया
सुमित्रा ने जल्दी से अपनी बात को संभाल ते हुए


सुमित्रा __नहीं वो मेरा मतलब था कि जलन तेरी लुगाई को होनी चाहिए मुझे क्यों में तो तेरी मां ।
मयंक जब देखता है कि सुमित्रा अपनी बात को संभाल नहीं पा रही है तो मयंक को मन ही मन हंसी आ रही थी । सुमित्रा अपनी बात से शर्म से लाल हो जाती है जिसे देख मयंक बात बदल देता है
मयंक सुमित्रा को बांहों में भर कर - सो जाइए
कोई बात नहीं ऐसा आप ने कुछ नहीं कहा कि आप को शर्मिंदा होने बड़े
मयंक सुमित्रा को बांहों में भर कर माथे पर चूमी देता है



सुमित्रा न भी ऊपर होकर मयंक का सिर पे किस कर लिया जिससे मयंक के मुहे से सुमित्रा की बूब्स पर रगड़ गया इससे मयंक को कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन सुमित्र की सिसके निकलते निकलते रे गई उसने खुद को संभल नीचे होकर लेट गई
मयंक ने सुमित्रा
मयंक ने सुमित्रा कों पीछे से बाहों में भर लिया और उसे पूरी चिपक गया मयंक का हाथ सुमित्रा के बड़े बड़े बूब्स दब गए मयंक पहला आदमी था जो उसके के हाथों मै सुमित्रा के बूब्स थे ये अहसास सुमित्रा को भी हुवा पीछे से मयंक उसेके चिपका हुवा तब मयंक बोडि की गर्मी बड़ा रह थी सुमित्रा की गांड़ मयांक के लन्ड चिपका हुवा था लेकिन मयंक तो सो गया उसको तो कुछ भी फर्क नहीं पड़ता सुमित्रा की चुत में तो खुजली बढ़ती ही जा रही थी उसने उसका एक हाथ मैक्सी के ऊपर ही चुत को रगड़ा रहा यहां ना जाने कब सुमित्रा को हाथ मैक्सी को ऊपर करके चुत पर चला गया ओर चुत को
इस
इस रगड़ने में सुमित्रा इतना खो गई कि वो अपने बेटे की बाहों में सो हुई है उसकी गांड़ जो चुत रगड़ने स हिल रही थी वो हिल हिल कर उसी के बेटे के लन्ड पर रगड़ रही थी जिससे उसका लन्ड खड़ा होने लगा और कुछ ही देर मयंक का लन्ड औकात मै आ गय सुमित्रा को इसका अहसास तब जब वो अपनी चुत मैं अंगुली डालने की कोशिश की तो अपनी गेंद के पीछेकी तरफ दबाई टोल मयंक का खड़ा हुवा मूसल गांड़ मै घुसने लगा
सुमित्रा एक दम चौंक गई उसने तुरंत अपना हाथ बाहर निकाल लिया
सुमित्रा एक दम घबरा गई इतना मोटा है भगवान इसका इतना मोटा है किसी का भी इतना मोटा कैसे हो सकता है वही लन्ड को किसी औरत के हाथ का अहसास मिल चुका था उसने तुरन्त एक झटका मारा और मयंक ने सुमित्रा को का बाहों में भर लिया लन्ड का दबाव ओर बढ़ने लगा सुमित्रा के गांड़ पर वो चाह कर भी नही उठ पायी उसके मन में बहुत उथल पुथल चल रही थी


ऐसे ही उधेड़ बुन मै कब सुमित्रा फिर अपनी चुत रगड़ने ने लगी उसे भी पता नहीं चला और चुत रगड़ने से उसकी गांड़ आगे पीछे हील रही थी जिससे मयंक शायद किसी सपने में पहुंच चुका था और इस कन्डिशन में सपने मैं इस उम्र के लड़के क्या करते है ये तो सब आप जानते ही होंगे मयंक के लन्ड ने भी ज़ोर दिखाना शुरू कर दिया मयंक के हाथ में सुमित्रा की चूची आ गई जिसे मैक ने बहुत जोर से भींच दिया ओर इसके साथ मयंक का वीर्य उसकी पेंट में निकल गया वही सुमित्रा के मुहे से चिक सी निकल गई उसने तुरन्त अपने मुंह पर हाथ रखा मयंक का हमला इतना जबरदस्त था कि सुमित्रा भी उसके साथ ही जड़ गई


ये क्या हुआ एक मां बेटा एक दूसरे के अंगोंसे खुद को रगड़ कर ठंडे हुए थे
क्या तूने ये ठीक किया सुमित्रा खुद से ही बात करने लगी
ये दिमाग मै मयंक के चल रहा था


मयंक ओर सुमित्रा ने अपनी सोच को झटका दिया ओर दोनों ही सो गए


रात को सरपंच के फार्महाउस पर सरपंच संजना ओर राजेश थे
राजेश नीचे बेटा था सरपंच कुर्सी पर संजना सरपंच के पेग बना रही थी
धनंजय सिंह लैपटॉप चालू करता है उसमें शुरू होती है रासलिला राजेश ओर संजना की दोनों ही वो वीडियो देखने लगते है
सरपंच मन हीं मन बहुत खुश हो रहा उनके चेहरे के हावभाव देख के


धनंजय सिंह ने लैपटॉप बंद कर दिया
सरपंच__हा तो राजेश जैसा मै बोलूंगा वैसा तुम्हे करना होगा मुझे हा या ना मै जवाब चाहिए
राजेश कुछ नहीं बोला तो फिर सरपंच बोला
धनंजय सिंह__ चश्मा उतारकर... बोल राजेश। हां या ना
वीडियो वायरल करूं या डिलीट? ये फैसला तुझे लेना है
राजेश क्या ही बोलता मजबूर हो गया राजेश की आंख के सामने शांति का चेहरा आया। बेटी का स्कूल आया। पंचायत की भीड़ आई राजेश के घुटने कांप रहे थे। माथे से पसीना टपक रहा


राजेश__बहुत धीमी, टूटी आवाज में... हां... सरपंच जी।
मैं... मैं आप जैसा बोलोगे वैसा करूंगा बस... बस ये क्लिप डिलीट कर दो सरपंच जी। मेरी इज्जत रख लो मेरे परिवार के का भविष्य मत खराब करो।


कहते-कहते राजेश की आंख से आंसू गिर पड़ा। उसने सर झुका लिया।


धनंजय सिंह__मुस्कुराकर ताली बजाकर... शाबाश राजेश!
यही चाहिए था। डर के आगे जीत है।


धनंजय सिंह __***हजार का बंडल टेबल पर रखकर... ये लेले ये ओर पहला काम तू तेरी पत्नी को एक रात के लिए यहां लाना होगा समझा ओर दूसरा काम ये कि इस मयंक पर नज़र रख क्या करता है क्या नहीं समझा और ये बोल देना सरपंच कर्ज लेके हु वो मांग रह


राजेश-- कांपते हाथों से पैसे उठाए आंख जमीन पर थी
जी करता था पैसा फेंक दे। लेकिन परिवार की इज्जत का सवाल ओर गांव मै इज़्ज़त ही सबकुछ होती है


राजेश घर आया शांति ने पूछा - "क्या बोला सरपंच ने
राजेश ने झूठ बोल दिया।


*राजेश:* आंख चुराकर... कुछ नहीं। बोले मयंक को टोका-टाकी मत करो पंगा मत लो। चुपचाप रहो


शांति को शक हुआ पर राजेश ने बात टाल दी


राजेश ने सोचो कुछ ओर शाम को संजना से मिलने का मन बना लिया


सुबह सुमित्रा जल्दी उठ गई ओर घर का काम करने लगी मयंक उठा सुमित्रा ने उसको चाय दी
दोनों मै कोई दूसरी बात नहीं हुई ओर मयंक कॉलेज रवाना हो गया अपनी बाइक लेके
अभी गांव से बाहर ही निकला कि सामने उसको रेनू मिल गई
रेनू__अरे मयंक मेरी आज बस निकल गई मुझे भी साथ ले चलो ना
मयंक__ हां क्यों नहीं आ जाओ
रेनू दोनों पैर एक एक साइड मै करके बैठ गई
मयंक बाइक स्पीड से चल रहा था तभी सामने एक खड़ा आ जाता ओर ब्रेक मारता है तो रेनू के बूब्स दब जाते है
रेनू__आह क्या कर रह जानबूझ के या फिर चलनी भी आती
मयंक__अरे यार खड़ा आ गया था इसलिये उसको छेड़ते हुए क्यों क्या हुआ
रेनू__क्यों तुम पता नहीं कि क्या हुआ
 
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