Superb updateअपडेट १०
(सहेली के घर पार्टी में)
जयश्री सज धज कर पार्टी में गयी. खूब हसी मजाक में पार्टी चल रही थी. खाना खाने से पहल जयश्री ने सबको बताया की उसको आज एक गिफ्ट मिला है. जयश्री को पहले शो-ऑफ करने की आदत नहीं थी पर जब से वो जॉब करने लगी उसके अंदर यह स्वाभाव आने लगा. अपनी चीज़े दिखाना, अपने को कॉम्पिटिशन में आगे रखना सीखा था. सभी सहेलियों ने बॉक्स को गौर से देखा. कुछ सहेली ने कहा की जरूर कुछ बोहोत कीमती और ढांसू सरप्राइज होगा अंदर. जयश्री ने व्रपार हटाया बॉक्स ओपन किया और अंदर एक वेलवेट कवर का बॉक्स था. अब औरते जल्द समझ सकती है बॉक्स से ही की अंदर १००% ज्वेलरी है. जयश्री और सहेली ख़ुशी से कूदने लगी और जैसे ही बॉक्स खोला वो ग्रीटिंग कार्ड जो सतीश ने डाला था वो दिख गया. जयश्री ने ग्रीटिंग को हाथ में रखते उस बॉक्स का ढक्कन खोला तोह वो उसे देख कर ख़ुशी के मारे तितली की तरग उड़ने लगी. अंदर सोने के के ए१ डिज़ाइन के कंगन देख कर मनो सभी सहेलिया मन्त्रमुघ्ध हो गयी.
१ सहेली- वाव, मिस्टर कितना प्यार करते है ओह माय गॉड क्या खूबसूरत कंगन दिए है जयश्री तुम्हे वाव
अब जयश्री का ध्यान ग्रीटिंग कार्ड पर गया और उसके चेहरे पे अजीब सवाल चालू हुए
वो पढ़ ही रही जो ग्रीटिंग्स पे लिखा था -
'टू माय डिअर डॉटर जयश्री, लव फ्रॉम पापा'
ये अनुभव जयश्री के लिए नया था उसके मन में १००० सवाल चल रहे थे तब तक उसकी सहेलिया हाथ में कंगन ले ले कर उसको सराह रही थी तभी बाजूवाली सहेली ने जयश्री के हाथ का कार्ड छीन लिया
सहेली २- दिखाओ तोह मिस्टर ने क्या लिखा है!
सहेली ने पढ़ा.
सहेली २- ये क्या यह तोहफा तुम्हारे पापा ने दी है, ये तुम्हारे मिस्टर का नहीं है ... वाव यार तुम्हारे पापा तोह एकदम तूफ़ान निकले!
तब सब सहेली वो कार्ड छीन कर उसपे का मैसेज पढ़ने लगी और सब ने जयश्री की तारीफ करने लगी
सहेली एक साथ जयश्री के पापा की तारीफ करने लगी
सहेली ३- वाह यार क्या बात है जयश्री की आज भी उसके पापा उसको गिफ्ट देते है, कमाल की किस्मत पाए है यार तुमने तो! एक हम है न तोह हमारे बाप कभी हमको गिफ्ट दिए न ही हमारे पति अब कोई गिफ्ट देते है (सब हसने लगी)
जयश्री सोच में पड़ गयी.
जयश्री- वो क्या है न पिछले महीने पापा का बर्थडे था न तो मैंने उनको गिफ्ट दिया था तोह मैंने उनसे कहा था की मुझे रीटर्न गिफ्ट भी चाहिए तोह शायद पापा का ये रीटर्न गिफ्ट हो!
(जयश्री अब झूठ भी बोलने लगी थी)
सहेली ४- वाव यार कितने खूबसूरत कंगन है यार, कितनी सजीली डिज़ाइन है और नाजुक डिज़ाइन है. हाय काश ये कंगन मेरे होते, ये लो पापा की पारी पहनो अपने कंगन
तभी दूसरी सहेली ने वो कंगन देखने को लिए
सहेली ५- यह क्या. इस पे तोह कुछ मार्क है. यह कोई दुकान का मार्क है या कुछ और. किसी इंग्लिश लेटर जैसा लग रहा है. पता नहीं
जयश्री ने हड़बड़ी में वो कंगन उनसे लिए और वो देखने लगी उसको शक भी हुआ की वो इंग्लिश का लेटर 'बी' है पर कुछ बोली नहीं
जयश्री- अरे छोड़ो न
और वो कंगन पहनने लगी
सहेली १- पहने ले पेहेन ले पापा की लाड़ली
सब हसने लगी , और जयश्री भी हसने लगी
तभी जयश्री के मोबाइल पे मैसेज की घंटी बजी
उसने मैसेज खोला तोह वो चौक गयी. बलदेव का मैसेज. वो घर के एक कोने में जा कर मैसेज देखने लगी.
मैसेज- 'जयश्री, बेटी कैसा लगा सरप्राइज! मेरी तरफ से मेरी प्यारी बिटिया रानी को गिफ्ट. तुमको प्यार करनेवाले तुम्हारे पापा'
जयश्री कभी इतना कन्फ्यूज्ड नहीं होती पर आज थी उसको कुछ समझ न आ रहा था.
सहेली ४- ए जयश्री तू वह क्या कर रही है कोने में यहाँ आ न. नए कंगन क्या मिल गए तुम तोह हमसे दूर चली गयी. क्या हुआ क्या है मोबाइल में. ओह समझ गयी अपने पापा को थैंकयू का मेसैज कर रही हो क्या? बेटी को रहा नहीं जा रहा अपने पापा को थैंक्स बोलने के लिए. अरे बाद में कर लेना थैंक्स. ये पापा लोग कही भागे थोड़ी जा रहे है. आजा यह केक खा ले जल्दी.
जयश्री उसकी तरफ स्माइल करते हुए हंसने लगी. वो बोहोत खुश थी क्यों की आज उस पार्टी में सब उसकी तारीफ कर रहे थे. वो कंगन जयश्री की खूबसूरती में ४ चाँद न सही पर २ चाँद तोह जरूर लगा रहे थे. उसके कंगन और उसके पापा के प्यार की चर्चा थी. पर वो थोड़ी सी चुप थी.
सब ने खाना खाया और पार्टी खत्म हुई .
(सतीश के घर)
पार्टी ख़त्म होने के बाद वो सीधा घर गयी. सतीश अभी तक नहीं लौटा था. रात के ९ बजे थे. बंगलो सब तरफ से लॉक कर दिया. और जा के हॉल के सोफे पर धड़ाम से बैठ गयी और उसके दिमाग में आज की पार्टी के किस्से ही चल रहे थे. उसने लेते लेते ही अपना एक हाथ ऊपर उठाया और बाये हाथ के कंगन को देखने लगी. फिर दूसरा हाथ उठाया और दोनों कंगन देखने लगी. वो कंगन बाकि कांचवाले कंगन से खनकते थे और उस में से मधुर किन-किन की आवाज आने लगी. जयश्री वैसे शर्माती कम है वो अपने पिता की तरह बेख़ौफ़ थी पर आज वो कंगन देख शर्मा गयी. वो उठी और उसने वो कंगन निकल दिए और वार्डरॉब में एक बक्से में संभल के रखे. वो फ्रेश हो कर नाईट सूट पहनकर सोच रही थी की ऊपर छत पर हवा में जाये. वो ऊपर छत पर चली गयी. कॉलोनी के सब सो रहे थे. बंगलो के एक तरफ खेत था. आसमान साफ़ था. और सुनसान कॉलोनी. उसने अपना मोबाइल लिया और सामने उसके पापा का मैसेज अभी भी टॉप पे दिखाई दिया था. उसने पापा को रिप्लाई करने की सोची छत के कोने में वह एक छोटा चबूतरा बनाया था कपडे वगेरा रखने के लिए .वो वह बैठ गयी. उसने कॉल करने की सोची पर वो उसने सोचा की पहले रिप्लाई करे.
जयश्री - हेलो पापा, आप हो वहां
वह से कोई रिप्लाई न आया. हाला की बलदेव आज जंगल वाले खेत के फार्महाउस वाले छज्जे वाले हॉल में ही टीवी देखते बैठा था. उसको जयश्री का मैसेज का नोटिफिकेशन भी देखा था पर उसने थोड़ी देर रुकने की सोची. बलदेव भले ही गाओं का रहेनेवाला था पर उसको अपने फायदे की सोच और लोगो को परखने का दिमाग बोहोत सॉलिड था.
जयश्री स्क्रीन पे आंखे गड़ाए बैठी थी की बलदेव उसे रिप्लाई करेगा. ५ मिनट हुए वो बेचैन होने लगी. बेचैनी में वो अपने होठ एक साइड से अपने दातों से हलके से दबाने लगी. मनो कोई प्रेमिका अपने प्रेमी के पत्र का इंतजार कर रही हो. तभी मोबाइल स्क्रीन पे मैसेज आया.
बलदेव- जयश्री कैसी हो बिटिया! मेरा मैसेज देखा?
जयश्री- हाँ पापा
बलदेव- तोह कैसा लगा मेरा सरप्राइज मेरी रानी बिटिया को
जयश्री ने एक बात गौर की की बलदेव पहल कभी उसे रानी कह कर नहीं बुलाता था. पहल सिर्फ बीटाया या बेटी या जयश्री कह कर बुलाता था अब ये बदलाव उसे काफी सवाल खड़ा कर रहा था पर जयश्री भी उनसे बोहोत प्यार करती थी. खास कर उसकी माँ के गुजर जाने के बाद वो उनका काफी ख्याल रखती थी. पर पिछले १ दो महीने में उस से गलती हुई थी. जब से वो रुद्रप्रताप से मिली थी तब से उसका बलदेव के प्रति ध्यान काम हुआ था ये बात का उसे अफ़सोस भी होने लगा.
जयश्री- पापा पहले आप बताओ आप ने खाना खाया के नहीं? आप ठीक तोह है? आप खाना अगर ठीक से नहीं खा रहे तोह मुझे आना पड़ेगा आप को खाना खिलने के लिए.
बलदेव- अरे मैं तोह बस जैसे तैसे जी रहा हूँ जयश्री. जब तक तुम्हारी माँ थी वो तब भी उसने उतना ख्याल न रखा जितना रखना चाहिए था. मै चुप था उस वक़्त. पर अब खली सा लग रहा है बेटी. खैर मै तोह ठीक हूँ मेरी लाड़ली. तू बता कैसी है. आज १५ दिन हुए हम नहीं मिले. देख अभी अभी बकवास खाना खाया सुभाष के हाथ का चिकन मसाला. कुछ स्वाद नहीं बेटी. मटन तोह बस तुम ही बना सकती हो लाजवाब वाह क्या खुशबु क्या स्वाद आता है तुम्हारे हाथ का बनाया हुआ मटन. उफ़... मैंने आज तक तुम्हारे हाथ का मटन जैसा कही स्वाद नहीं देखा. अब तो जब भी मटन को देखता हूँ तुम्हारी याद आती है. बोहोत दिन हुए तुम्हारे हाथ का बनाया मटन खाये. अब मै कही बहार जाता हूँ न बेटी, तोह मटन खाता ही नहीं. मुझे मटन तुमने बनाया हुआ ही पसंद है. बाकि सब बकवास.
जयश्री को पहल से पता था की बलदेव सिर्फ उसके हाथ का बनाया मटन ही खता है.
जयश्री - ओह पापा मुझे माफ़ कर दो ,अब आउंगी न मै आप को भरपेट मटन खिलाऊंगी. पापा पता है मैंने मटन की एक और रेसिपी सीखी है, आप बताना खा कर कैसी थी.
बलदेव- वाह बिटिया वाह, बेटी हो तोह तेरी जैसी वार्ना न हो , कितना ख्याल करती हो मेरा. इतना प्यार करती हो.
जयश्री- पापा प्यार तोह आप मुझ से जितना करते है उतना तोह शायद कोई पिता अपनी बेटी सा न करता हो, मैंने देखा आज आप ने क्या किया.
बलदेव- ओह मै तोह भूल गया. कैसा था मेरा गिफ्ट बताओ.
जयश्री शरमाई.
बलदेव- बोलो कैसा लगा मेरा गिफ्ट.
जयश्री- पापा (थोड़ा उदास होते हुए) आपको पता है! सतीश ने मुझे जिंदगी में मुझे कभी एक बार भी गिफ्ट नहीं दिया. गहने में तोह मंगल सूत्र छोड़ कर एक भी गेहेना नहीं दिया. पापा आपने जो आज गिफ्ट दिया न वो मेरी जिंदगी का सबसे बेहतर तोहफा है
बलदेव- अ अ अभी नहीं, बहेतर तोहफा तोह आगे है मेरी रानी बिटिया
जयश्री- नहीं पापा मुझे बोलने दीजिये, आज का गिफ्ट कोई आम गिफ्ट नहीं पापा, मुझे अफ़सोस हो रहा है की आप मुझे इतना प्यार करते है और मै आपके लिए कुछ नहीं कर सकती, यहाँ इस नल्ले के साथ ..
अपनी जिसभ काटती हुई रुक जाती है...
बलदेव- मै समझता हूँ बेटी तुम क्या कहना चाहती हो, सतीश सिर्फ तुम्हारी गलती नहीं है, वो मेरी ही गलती है सब.
जयश्री- नहीं पापा , आप खुद को क्यों कोस रहे हो .आप ने वही किया जो एक बाप अपनी लाड़ली बेटी के लिए करता है. अब ये मेरी किस्मत है पापा. पर आप डरना मत मै इस से भी लड़ूंगी पापा.
बलदेव- अरे पगली, मै और डर! हां हां हां तुम जानती नहीं हो अपने पापा को पूरी तरह से (अपने मुछो पर तांवमरते हुए बोला)
जयश्री- जी नहीं मिस्टर बलदेव जी ,मै आपको खूब जानती हु. (जयश्री इस बार अपने पापा पर इतराते हुए उनका नाम ले ली है). पापा पता है वो कॉलेज में एक टपोरी मुझे छेड़ता था . मुझे आज भी वो दिन याद है. आपने उसे कैसे सबक सिखाया था. (हँसने लगी) बाद में तोह वो टपोरी मुझ से राखी बंधवाने की गुहार कर रहा था.
बलदेव- नहीं तोह क्या, घोंचू कही का मेरी लाड़ली को मुझ से छीन ना चाहता था वो टपोरी, मेरी बेटी सिर्फ मेरी है
जयश्री को अब बलदेव पे बोहोत गर्व होने लगा. उसे लगने लगा की उसके पापा उसको दुनिया के किसी भी मुसीबत से बाहर ला सकते है तभी अचानक से उसे अपनी कांड की याद आती है
जयश्री- पापा...
बलदेव- हं बोलो बिटिया
जयश्री- अगर मुझे से कोई गलती हुई तोह आप अब मुझे माफ़ कर सकते हो?
बलदेव समझ गया की जयश्री का इशारा कहा है.
बलदेव- क्या हुआ बेटी तुम ऐसा क्यों बोल रही हो
जयश्री- कुछ नहीं पापा आप बस बताओ न!
बलदेव- देखो यह तो गलती पे निर्भर करता है न! गलती की सजा तोह होनी चाहिए. पर बेटा इंसानी हालत, मजबूरिया को ध्यान में रख कर सोचा जा सकता है. तुम तो मेरी लाड़ली बिटिया हो तोह हो सकता है की मै तुम्हे माफ़ कर दूँ.
जयश्री- ओह पापा थैंक यू थैंक यू पापा, आय लव यू.
जयश्री ने फिर से जीभ काटते हुए सोच में पड़ गयी.
बलदेव- क्या कहा तुमने अभी?
जयश्री- नहीं पापा कुछ नहीं बस कह रही थी की थैंक यू .
बलदेव समाज गया.
बलदेव- कोई बात नहीं बेटा.
जयश्री- पापा एक बात बोलूं?
बलदेव- हाँ बोलो न
जयश्री- वो कंगन पे एक मार्क है वो क्या है? दुकानदार का मार्क तोह नहीं लगता वो!
बलदेव- हम्म.. . अब मैंने गिफ्ट दिया है तोह तुम पता करो क्या है और क्या नहीं मै क्यों बताऊँ?
बताओ! गिफ्ट भी मै दूँ और सरप्राइज भी मै ही बताऊँ! कमाल है आज कल की लड़किया इतनी भी मेहनत करना नहीं जानती
जयश्री- नहीं नहीं... पापा मै बोहोत मेंहनत कर सकती हु. आप शायद नहीं जानते चाहे तोह आप बॉस अंकल से पूछ लीजिये. और पापा मेंहनत क्या होती है मैंने आप से ही तोह सीखा है जिंदगी में. पर किस्मत देखो पापा निठल्ला साथी मिला मुझे, पापा माफ़ करना पर निठल्ला है आपका दामाद एकदम
बलदेव खुश था की उसकी बेटी भी उसके जैसी मुँहफट है बोलने में बेख़ौफ़.
बलदेव- वो तोह मै जनता हु मेरी लाडो, तुम फिक्र मत करो. मै उसे लाइन पे लाऊंगा .तुम बस खुश रेहान मेरी रानी बिटिया
जयश्री- पापा मै कुछ कहु? आप बुरा तोह नहीं मानोगे?
बलदेव- हाँ बोलो न
जयश्री- आपने आपकी ड्रिंकिंग कम की या नहीं, और सुट्टा भी बोहोत पिने लगे हो. मैंने देखा पिछले बार जब आई थी तोह पूरा छत का कोना और डस्ट बिन सिगरेट के फ़िल्टर से भरा हुआ था. जब से माँ गयी है आपकी आदते बिगड़ गयी है. जब माँ थी तोह कण्ट्रोल था आप पर. अब तोह आप हवा के तरह हो गए हो आज़ाद है न!
बलदेव- अरे बेटी, दारू सिगरेट तोह मर्दानगी की निशानी है जिंदगी का मज़ा नहीं उठाया तोह क्या ही किया तुमने. एक दिन तुमको भी ये बात समझ आएगी. वो न कल ही मैंने टीवी पे एक फिल्म का गाना सुना उसके बोल थे 'अपना हर पल ऐसे जिओ जैसे के आखरी हो'
जयश्री बलदेव की चलाखी समझ गयी.
जयश्री- पता है पता है मिस्टर बलदेव मै सब समझती हूँ आपको आप बातो के महारथी है
बलदेवव को जयश्री का यह बदलाव बोहोत भा गया. आज तक उस ने कभी अपने पापा को नाम से नहीं बुलाया जिंदगी में. अब एक ही कॉल में उसने दो बार उनका नाम लिया. बलदेव खुश था.
बलदेव- अ हं ... तुम नहीं समझी मेरी लाडो हम सिर्फ बातो के नहीं 'काम' के भी महारथी है. तुम नहीं जानती.
बलदेव ने जानबुज़ कर 'काम' शब्द पे जोर दे कर कहा. जयश्री को भी मज़ा आ रहा था.
जयश्री- अच्छा, तोह कभी जान लुंगी आपके 'काम' की महारथ (कर हसने लगी)
बलदेव- अच्छा एक बात कहु
जयश्री- जी पापा बोलिये
बलदेव- तूने वो कंगन अभी पेहेन रखे है?
जयश्री अब सख्ते में आ गयी. वो अब सोच में पड़ गयी की क्या जवाब दे.
जयश्री- वो क्या है न पापा मै अभी अभी आयी थी न! तो फ्रेश होने के लिए वो कंगन मैंने सेफ रख दिए है. आपने दिया है न तोह संभल के रखे है. मै नहीं चाहती वो ख़राब हो या उसका मोल कम हो. पापा आप नाराज़ हो क्या! क्यों की अभी वो मैंने पहने नहीं इसलिए
बलदेव थोड़ी देर चुप रहा वो कुछ न बोला
जयश्री- पापा प्लीज बोलिये न
बलदेव फिर भी कुछ न बोला. पूरा सन्नाटा था रात का .जयश्री अकेले अपने बंगलो के छत पर अंधेरे में अपने बाप से बात कर रही थी. उसको डर भी नहीं था की कोई उसकी बाते चुप के से सुन लेगा.
जयश्री- पापा प्लीज, आय एम् सॉरी पापा प्लीज कुछ बोलो न!
२ पल के लिए उसे लगा की उसने अपने पापा को नाराज़ कर दिया और उसे लगा की वो कितनी बेवकूफ है. जिसने गहने दिए उसको थैंक्स बोलने तक वो गहने भी नहीं पेहेन सकती.
जयश्री- पापा प्लीज...
बलदेव- अरी मेरी बिटिया रानी ऐस कुछ नहीं वो बस ...
जयश्री- पापा मुझे पता है आपको बुरा लगा. आपने मेरे लिए इतना कीमती तोहफा लाया और मुझे उसकी कदर नहीं, रुको पापा १ मिनट
वो फटाक से उठी और वो जीने से निचे गयी. फोन चालू ही था. उसने तुरंत वो वार्डरोब निकाला और डिब्बा खोल कर वो कंगन पहने लगी
जयश्री कंगन पेहेनते हुए
जयश्री- पापा बस एक मिनट
उसने कंगन पहने और फिर से छत पर आ गयी और वही बैठ गयी आराम से और बात करने लगी
जसिहरी- पापा अब बोलिये मैंने क्या पहना है?
बलदेव- क्या पहना है बेटी?
जयश्री- वही जो अपने मुझे गिफ्ट दिया है.
बलदेव जानबूजकर
बलदेव- पर मुझे कैसे पता की तुमने कंगन पहने है. तुम झूठ बोल रही हो.
जयश्री- नहीं पापा , सच में पहनी है
बलदेव- नहीं तुम झूठ बोल रही हो
हाला की बलदेव को पता चल गया था की जयश्री ने कंगन पहने है अभी.
जयश्री- पापा.. पहने है
बलदेव- मै कैसे मान लू?
जयश्री- रुको
जयश्री ने फ़ोन चालू रखा और अपने मोबाइल से एक हाथ से दूसरे हाथ की कलाई की फोटो ली और बलदेव को भेज दी
जयश्री- पापा देखा?
बलदेव- क्या?
जयश्री- ओह पापा आप भी न अपना मोबाइल चेक करो कुछ भेजा है, सिर्फ बात न करो
बलदेव ने मैसेज देखा. जयश्री ने फोटो भेजी थी. उसकी कलाई पे वही उसने दिए हुए कंगन
उसको विश्वास नहीं हुआ की एक दिन उसके दिए हुए कंगन उसकी बेटी इतनी शान से पहनेगी.
बलदेव- ओह मेरी गुड़िया रानी, कितनी प्यारी दिख रही है कंगन तुम्हारे कलाई पर
जयश्री- जी पापा आपने दिए हुए है प्यारे क्यों नहीं लगेंगे
जयश्री- पापा आप मेरा एक काम करो न! आपने रूद्र अंकल से बात की कुछ
बलदेव- नहीं वो बिजी था तोह नहीं कर पाया
जयश्री- पापा मै ऐसे घर में नहीं बैठ सकती मुझे आदत नहीं है. मुझे कुछ कर दिखना है.
बलदेव- नहीं बेटी कितना काम करोगी, अब तुम सिर्फ ऐश करोगी, समझी मेरी लाडो
जयश्री- ठीक है पर किसी भी इंसांन का वजूद उसके काम से ही होता है पापा प्लीज आप बात करो न
बलदेव- सुनो जयश्री तुम रूद्र के साथ काम मत करो
जयश्री को पहेली बार शक हुआ की कही बलदेव को उसके अफेयर के बारे में पता तोह नहीं चल होगा! अगर चला होता तोह वो मुझ से नाराज़ होते और गिफ्ट देने की बात ही दूर थी फिर.
बलदेव- सुनो ,तुमको काम करना है, ठीक है मै कुछ सोचता हूँ और सतीश को बोल दूंगा क्या कर सकती हो तुम , ठीक है!
जयश्री- थैंक यू पापा
जयश्री- पापा और एक बात करूँ, वैसे भी काम कर के बाद में भी बोहोत समय बाकि बचता है. बोर हो जाती हूँ मै. मै चाहती हूँ की मै ज़ुम्बा ज्वाइन कर लूँ प्लीज और जिम ज्वाइन कर लूँ या दोनों
बलदेव- अरे बेटा उसकी क्या ही जरुरत है , तू खा पि ऐश कर बस
जयश्री- पापा प्लीज मै फिट रहना चाहती हूँ
बलदेव- ओके बेटी, अब तुमसे तोह मै जित नहीं सकता, सुनो मै सतीश को बोल दूंगा की वो तुम्हरा सुभे श्याम का क्लास लगाए और हाँ मै भी सोच रहा हूँ की
बलदेव- देहाती कसरत बोहोत कर ली अब थोड़ा मॉडर्न कसरत कर लू
जयश्री- अरे वाह मिस्टर बलदेव जी, क्या बात है. वैसे आपको कोई जरुरत ही न है फिट रहने की आप से फिट इस पुरे इलाके में कोई न है पापा! आपके देहाती अखाड़े के पैतरे तोह पुरे बिरादरी में फैले है पापा
बलदेव अपनी बेटी के मुँह से अपनी फिटनेस की तारीफ सुन कर खुश हुआ.
बलदेव- वो तोह बस ऐसे ही बेटी, सुनो मै सोच रहा था की यहाँ भी एक जिम बना लू! क्या केहेती हो
और घर पर भी एक जिम बना लूँ
जयश्री- वाव पापा, आप कमाल हो. क्या धांसू आईडिया है आपकी
बलदेव- हाँ जरुरी सामान मंगवा लेता हूँ
बलदेव- सुनो कल से ही तुम ज्वाइन करो जिम वह की कुछ दिन मै सतीश को बोल दूंगा कल वो तुम्हे सुभे लेके जाये जिम को
जयश्री- वाह क्या बात है , थैंक्स पापा
बलदेव- अच्छा तोह फ़ोन रखु
जयश्री- नाय पापा अभी नाय
बलदेव- अरे सो जाओ आनेवाले दिनों में तुम्हे बोहोत मेंहनत करनी है
जयश्री -हाँ पापा आप मुझ पे भरोसा रखे
बलदेव- शाब्बास मेरी शेरनी. एक बात कहु
बलदेव- मुझे गुड नाईट किश दोगी?
जयश्री- क्या? आप यह क्या कह रहे है
बलदेव- हं अब अपनी प्यारी बेटी से गिफ्ट के बदले इतना भी नहीं मिल सकता मुझे .अपने बाप को ऐसी ही छोड़ दोगी हवा में
जयश्री- ऐसी बात नहीं पापा पर बस ऐसे ही सोच रही थी. इस से पहल तोह कभी अपने ऐसा कुछ माँगा नहीं
बलदेव- अब तुम भी मॉडर्न हो गयी हो तोह मुझे भी तोह थोड़ा मॉडर्न बनना पड़ेगा न!
जयश्री- अच्छा जी!
अब जयश्री के पास कोई जवाब न था. उसने उ कर के अपने होटो से किस फेका और
जयश्री- गुड नाईट. चलो आप भी एक गुड नाईट किस दो
बलदेव- नहीं मै क्यों दूँ, वाह रे मेरी शेरनी, मतलब गिफ्ट भी हम ही दे और गुड नाईट किस्सी भी हम ही दे यह बात कुछ हजम न हुई
जयश्री- पापा .. ये बात ठीक नहीं. मैंने दी न किस्सी तोह आपको भी देनी पड़ेगी
बलदेव- देखा बेटी हम मर्दो का किस्सी देने का तरीका अलग होता है और मै तुम्हरा बाप हूँ तोह मै तय करूँगा की कैसे देना है समझी मेरी राजकुमारी!
जयश्री- (मुँह बनाते हुए) ठीक है मिस्टर. बलदेव जी आप की ये किस्सी उधर रही हम पर.
दोनों हसने लगे और बलदेव ने फ़ोन काट दिया. अब जयश्री के दिलो दिमाग पे बलदेव पूरी तहर से हावी था. उस रात के सन्नाटे में उसे ध्यान भी नहीं रहा की क्या कोई उसकी बाते सुन भी सकता है. वो अब चबूतरे पे और छज्जे की दिवार पे सर रख कर खुले आसमान को देखने लगी. आज बोहोत दिन बाद वो खुश थी. आज उसका दिन बोहोत आनंदी गया था. और इसी के चलते उसने अपना मोबाइल निकाला और फोटो एल्बम में गयी और न जाने कैसे उसकी उंगलिया उन्ही फोटो पर टिकने लगी जिस में बलदेव है. फोटो देखते देखते उसकी नज़र उन फोट ऊपर भी गयी जो हल ही में बलदेव के जन्मदिन पर सतीश ने खींची थी. वो थोड़ी सि हस भी रही थी. उसने वो फोटो देखि जहा वो उसको केक खिला रही थी और दोनों हंस रहे थे, उसने देकः की बलदेव का एक हाथ उसके पीछे से आकर उसकी कमर को पकड़ लिया था. वो हाथ जहा था वह टॉप कवर नहीं करता था. टॉप शार्ट था काफी. उसकी नाभि भी दिख रही थी. उसने देखा की उसके पापा कितने स्ट्रांग आदमी है. वो तोह उसके सामने कोई चुइमुई सी लग रही थी पर एकदम हड्डी हड्डी भी नहीं. बोहोत शेप में भी थी वो. उसको अब एक अजीब सिहरन पैदा हुई थी. उसने देखा उसकी ऊंचाई तोह उसके पापा के सीने तक भी नहीं थी क्यों की बलदेव बोहोत ऊँचा आदमी था. अब वो बलदेव पे मोहित हो चुकी थी. और अब वो एक एक कर के फोटो देखने लगी. उसे वो बलदेव के जन्मदिन की वो फोट अच्छी लगी बोहोत जिसमे बलदेव उसे एक साइड से कमर में हाथ दाल के चिपक के कड़ी थी. उसको अचानक से एक आईडिया आयी. उसने उस फोटो को क्लिक किया और अपने मोबिल एक वॉलपेपर सेट किया. वो खुश हुई थी. और अपने पापा के खयालो में फोटो देखते देखते वही उसकी आंख लग गयी और वो सो गयी.
सतीश रात में १ बजे आया. वो अपनी चाबी से अंदर आया. वो हैरान था की घर में कोई नहीं. उसने जयश्री को हर जगह ढूंढा. पर वो कही नहीं दिखाई दी. थी बाकि उसकी चप्पल सामान पर्स वही था. तोह वो समझ गया की जयश्री कहा होगी. दोनों बाप-बेटी को छत पर रहना पसंद था. वो सीधा छत पर गया. और देखा जयश्री आराम से सो रही थी एक तरफ अपना सर छज्जे की दिवार पर रख कर. उसने वो कंगन पहने थे जो बलदेव ने उसे दिए थे. वो बोहोत खूबसूरत दिख रही थी आज. और वो ऐसे ही निहारता रहा तोह अचानक से जयश्री का मैसेज पे एक अलर्ट आया और वो अब उसकी मोबाइल स्क्रीन देख कर हक्काबक्का रह जाता है. जहा पहले जयश्री के स्क्रीन के वॉलपेपर पे सतीश जयश्री की जोड़ी का फोटो था अब वहां उसकी और उसके पिता बलदेव की जोड़ी से फोटो की वॉलपेपर लगी हुई थी. अब सतीश समझ गया की जयश्री पर उसके पिता के प्यार का नशा चढ़ रहा था.
Superb updateअपडेट १३
(बलदेव के घर)
बलदेव कुछ देर बाद दोपहर को छत पर गया. वो व्हिस्की का स्टॉक देख रहा था तभी. उसकी नज़र सोई हुए जयश्री पर गयी. आज उसे मौका मिला था अपनी जवान बेटी की जवानी देखने का. वो धीरे से उसके किंग साइज पलंग के पास गया. उसने देखा उसकी प्यारी बेटी नींद में इतनी खूबसूरत दिख रही थी की उसका मन हुआ की वो उसे वही चुम ले. पर अब वो उसके बेटी का जवानी का खजाना देखने को ललायत था. उसने धीरे से उसकी चद्दर को हवा में उठाया. तभी बलदेव के मुँह देखने लायक हुआ था. उसको विश्वास नहीं हो रह था की ऐसी भी जवानी होती है. उस ने तोह सिर्फ टीवी या मूवीज में ही इतनी जबरदस्त अनछुई फ्रेश जवानी देखि थी. बीवी के मोटापे से थका हरा आदमी जब ऐसी कमसिन जवानी का दीदार करे तोह उसको तोह स्वर्ग का आनंद अभी मिले! जयश्री सिर्फ बलदेव के शर्ट पे सोयी हुए थी. एक साइड से लेती हुई थी शांत. और उसका शर्ट काफी निचे खिसका हुआ था. बलदेव ने देखा उसकी छोटी और सख्त पहाड़ी के बिच की वो सुन्दर घाटी का दर्शन किया. वो थोड़ा टेढ़ा सो गयी थी तोह उसके जंघा के ऊपर का शर्ट का हिस्सा ऊपर चला गया था. और अब उसकी पूरी नंगी टांगे बलदेव के आँखों को सामने थी. उसका आधा पिछवाड़ा दिखने लगा था. जयश्री की स्किन किसी मछली की तरह चमक रही थी. अब सगी बेटी की जवानी को अपनी ही आँखों से पि रहा था बलदेव. उसका मन हुआ की अभी वो उसकी शर्ट खोल कर उसके पुरे बदन का दीदार करे पर वो सब्र रखना चाहता था. खिड़की से आते हवा के झोंके से उसकी एक छोटी लट गलो पे ही घूम रही थी. उसने कभी सोचा नहीं था की उसकी बेटी इतनी खूबसूरत है. उसका मन हुआ की उसको गलो पे किस करे पर वो रुक गया और चुपचाप चद्दर को धीरे से उसके ऊपर रख कर बहार छत पर चला गया. अब उसको दारू से ज्यादा अपनी जवान बेटी के जवानी का नशा करने की सोच रहा था. उसने सतीश को फोन लगाया.
बलदेव- सुनो दामादजी एक काम करना आते आते तुम एक बार में जा कर दा''रु एक स्टॉक लेके आना. और एक स्टेशनरी किराना के दुकारन का एड्रेस भी दे रहा हूँ. वहा से पूरा १ महीने का सिगरेट का स्टॉक ले आना. में तुमको लिस्ट भेजता हूँ. और हाँ साथ में चकना भी ले आना खूब. और हं मैं तुम्हे एक एड्रेस भेजता हूँ जाके पता करना की मैंने जो जिम के सामान का आर्डर दिया है वो कब तक आएगा.
अब श्याम के ५:३० बज गए थे. सूरज डूबने की रह पर था. पुरे फार्म पे एक मंद सी लाली छाई हुए थी. जयश्री भी उठ चुकी थी जब वो उठी तब उसकी नजर अपने खेत की फसल पर गयी. उसको इतनी शांति और खेतो की लेहलाते फसलों का मिजाज बोहोत भा गया. उसे लग रहा था जैसे जोई रानी अपने छोटे महल में हो. पर वो काफी संभल कर इधर उधर जा रही थी. बलदेव ने सुभाष को कहा की वो दोनों बाप-बेटी के लिए चाय बनाये. बलदेव वैसे चाय नहीं पिता था पर अब जयश्री के लिए कुछ आदत बदलने को तैयार था. बलदेव चाय लेकर ऊपर गया.
बलदेव- उठ गयी मेरी राजकुमारी बिटिया, कैसी लगी नींद.
उसकी आवाज सुन ते ही जयश्री फिर से चद्दर के अंदर घुस गयी और घबरा गयी.
बलदेव- ओह मेरी रानी बिटिया अब कितने टाइम तुम चद्दर के अंदर रहोगी. और मुझ से क्या शर्माना! और वैसे भी तुमने कपडे पहने हुए है उठो और गरमा गरम चाय पि लो ठंडी हो जाएगी.
जयश्री- पापा , क्या प्लीज आप मुझे चाय यहाँ बेड पे ला के देंगे?
उसको लगा की चाय अगर यहाँ मिलती है तोह शायद वो चद्दर के अंदर बैठकर ही चाय पीयेगी.
बलदेव- लो जी, ये क्या बात हुए, अपने पापा ने अपने लिए निचे से यहाँ ऊपर चाय ले आये उसका धन्यवाद् तोह दूर उल्टा पापा से सेवा करवा रही है, बिलकुल नहीं बिटिया, ये गलत है. बेटी आज कल तोह कभी मौका मिलता नहीं हमे अपनी प्यारी बिटिया के साथ खाना खाने का या फिर चाय नाश्ता एक साथ करने का तोह अब ये हक़ भी तुम हम से छीन रही हो! आजाओ यहाँ मै चाय बनाके रखता हूँ आओ और चाय खुद उठा के पि लो!
अब जयश्री भी मजबूर थी. वैसे उसे बलदेव की एक बात पर बहुत उदास हुई. उसे लगा की उसके पिता उसके माँ के गुजरने के बाद किनते अकेले महसूस कर रहे है. पहल जब जयश्री की माँ जिन्दा थी और जब जयश्री की शादी नहीं हुई थी तोह सब एक साथ खाना खाते थे. अब वो दिन सोच कर उसकी आँखों में आंसू आ गए.
जयश्री थोड़ा अचरज से चद्दर के बहार आई. वो साबित करना चाहती थी की वो अपने पिता का ध्यान रख सकती है.
जयश्री- पापा, आप ऐसा मत बोलिये. मै हु न आपको कभी अकेला महसूस न होने दूंगी. लाइये मै बनाती हु चाय. आप प्लीज वहा बैठिये.
उसने अपन हेअर बैंड लिया और अपने जुल्फे को बैंड में रख दिया. जयश्रीसे और भी स्टाइलिश दिखने लगी. तब तक बलदेव ने फिर से जयश्री की जितनी टांगे खुली थी उसके दर्शन कर लिए. जयश्री ने अभी एक बता गौर की की उसके पिताजी उसकी बदन पे गौर कर रहे थे. पर अब वो पीछे नहीं हैट सकती थी. वो चाय देने बाप के पास गयी पर अब. अब जब वो चाय देने को झुक गयी तोह फिर से कमाल दिख गया. बलदेव ने फिर से दो सख्त चुचे देख ली और अब उसके पैंट में तम्बू होने लगा. वो अपना पैंट ठीक कर के ठीक बैठने लगा. जयश्री भी ये सब होता देख रही थी. उसके पता चला की बलदेव के नज़र उसके सीने पर है तोह उसने एक हाथ से कमीज को सेट करने की कोशिश की.
बलदेव- यही चाय पिए? चलो न बहार छज्जे पे बड़े से छत के उस सोफे पे जेक चाय पीते है !
जयश्री ये बात सुन कर ही घबरा गयी.
जयश्री- पर मै बहार इस हालत में!
बलदेव- कोनसी हलाकत, तुम क्या बात कर रही हो! आज कल तोह लोग हाफ चड्डी और आधे टॉप पहन कर खुले आम सड़को पे घूम रही है और तुम भी ये सब में कहा पड़ गयी. कभी कभी मै सोचता हूँ की रुद्रप्रताप का नसीब बोहोत अच्छा है. उसको कम से कम एक मॉडर्न लड़की का साथ तोह मिला. और देखा हम यहाँ एक फुल लम्बा शर्ट पहनने को भी दिक्कत हो रही है. और वैसी भी इस खेत वाले फार्महाउस में आस पास कोई माकन है नै. सब तरफ खेत है कोई क्या ही देख लेगा छत पे वो भी अपने ही घर के छत पे है हम किसी और घर के खेत पर नहीं!
अब तीर सही निशाने पे लगा था. पर जयश्री सोच रही थी की आखिर वो उसका बाप है. और बाप के सामन येह सब पाप होता है ऐसा समाज कहता है. पर वो ये भी समझती थी की उसके पापा को वो हर वो आनंद देगी जो एक बेटी दे सकती है.
जयश्री- ठीक है पापा, आपको लगता है न मै मॉडर्न ही राहु, चलो फिर बाहर.
दोनों एक साथ चाय की चुस्की लेते हुई बहार आये. जयश्री को एक अजीब आनंद आ रहा था. इतने खुले आसमान में बिना अंडरगार्मेंट्स के वो घर के छत पर सिर्फ एक पतले शर्ट पर बैठी थी. दोनों चाय पि रहे थे एक साथ. तभी
जयश्री- पापा अपने उनको, सामान लेन को बोलै है न!
बलदेव- हाँ क्यों क्या बात है...
जयश्री- पापा मेरा फ़ोन अंदर ही रह गया क्या आप उनको फ़ोन लगा सकते है! मुझे बात करनी है...
बलदेव ने फ़ोन लगाया और स्पीकर मोड पर डाला... सतीश ने उठाया ..
सतीश- हं ससुर जी बोलिये क्या बात है! सब ला रहा हूँ साड़ी वाड़ी छोड़ कर
सत्यानास कर दिया दामाद जी ने. सोच रहा था बलदेव.
जयश्री- क्या? तुम क्या बात कर रहे हो! साडिया क्यों नहीं जी! सुनो तुम सब कपडे ले कर आओ... और हं वो मेरा मेकअप किट और वह सेफ लाकर में मेरा वेलवेट का बड़ा बॉक्स है वो भी साथ में लेके आना समझे और हाथ हिलाते मत आना. मेरे जूते भी ले आना सभी.
बलदेव को लगा उसकी चोरी पकड़ी गयी. उसने सतीश को सिर्फ मॉडर्न ड्रेस लेन को कहा था . उधर जयश्री भी सोच में पड़ गयी की क्या सतीश को उसके पापा ने आदेश दिया था की साडिया मत लेके आना! क्या पापा उसे मॉडर्न ड्रेस में ही देखना चाहते है आज कल! बोहोत सरे सवाल थे जो वो बाद में सोचना चाहती थी.
जयश्री- पापा एक बात कहु?
बलदेव- हाँ हं बोलो न
जयश्री- सुभाष ये क्या बनाता है, ऐसी चाय तोह हमारे ऑफिस का चपरासी भी न पिए. ऐसी घटिया चाय नाश्ता पानी कैसे कर रहे है आप. ऐसे तोह आप दुबले पतले हो जाओगे.
बलदेव ने सिगरट जला कर सोचने लगा. तभी जयश्री ने उसके मुँह से सिगरेट छीन ली.
बलदेव- यह क्या अब एक ही तोह सहारा है मेरा, दा"रू और सिगरेट और वो भी तुम मुझ से छीनना चाहती हो.
जयश्री को बुरा लगा.
जयश्री- यह आप के लिए ठीक नहीं है आप ऐस खुद को क्यों सजा दे रहे है... अब माँ भी नहीं है आपको समझाने के लिए .अब मै आपको माँ की जगह तोह नहीं ले सकती.
यह कह कर जयश्री अब बलदेव एक बिलकुल बगल में करीब आ गयी और बलदेव का चेहरा दोनों हाथ के अंजुली में लेके
जयश्री- पापा मुझे माफ़ कर दो, आप जिस हालत से जा रहे है उसको मै समझ नहीं पायी
बलदेव- छोड़ो न जयश्री इसमें तुम्हारी क्या गलती है, तुमने तोह अपनी खुशियों का रास्ता ढूंढ लिया था पर फिर भी मेरे लिए उस शान शौकत की आराम की शहरी जिंदगी छोड़ कर मेरे लिए यहाँ आयी हो. अब बताओ जिस के पास इतना प्यार करनेवाली प्यारी बेटी हो उसकी हालात कैसे हो सकती है. मै तोह खुशनसीब हूँ.
जयश्री- बस पापा अब बोहतो हो गया. अब आप का ध्यान मै रखूंगी... आप फ़िक्र न करो पापा... आज से जो चाहिए मै आप को दूंगी पापा .. मुझे माफ़ कर दो पापा मै आपको हमेशा ड्रिंक्स और स्मोक के लिए रोकती हूँ पर मुझे आपकी ख़ुशी से बढ़ कर कुछ नहीं है.. आप जैसा जीना चाहते है जिए मै आपका साथ दूंगी पापा.. पर आप खुश रहिये प्लीज ... पर हाँ मै चाहती हूँ की आप लिमिट में ही ड्रिं"क्स और सिगरेट ले.. बस एक बिनती है..
बलदेव अपनी बेटी की सिर्फ खूबसूरती पे ही फ़िदा नहीं था पर उसका मन एक दम निडर और बोल्ड था ...
जयश्री- पापा सतीश को फ़ोन लगाओ न ...
बलदेव- अब क्या , अभी तोह बात हुई थी न उसके साथ..
जयश्री- पापा प्लीज लगाओ ..
बलदेव ने फ़ोन लगाया.
सतीश- जी ससुर जी बोलिये. पर इस बार भी उसको उसकी पत्नी की आवाज सुनाई दी.
जयश्री- सुनो, वो आते वक़्त जो समीर के दुकान है वहां से मस्त फ्रेश मटन ले आना!
जयश्री को पता था की मटन सुनते ही उसका बाप तोह दौड़ पड़ेगा. बलदेव ने अपने हाथ से जयश्री के गाल तक ले गया और हाथ से चुम्मी की तरह लेके खुद के होंठो तक ले आया और हवा में किस करते हुए खुश हुआ...
जयश्री- और सुनो, तुम तोह खाते नहीं हो कुछ, तोह ठीक से सुनो ... ध्यान से मै जो बोल रही हूँ ...
उसको पूछो मटन ताज़ा है के नहीं, एक दम ताज़ा होना चाहिए वो भी धो कर मस्त.. और हाँ १ किलो मटन ले आना... उसको बोलो की बड़े पीसेस में दे और थोड़ा चर्बी वाला देने को बोलो ... सुनो बोनवाले लाना.. पापा को बोहोत पसंद है. कुछ पीसेस बोनलेस भी लाना.
सतीश अपनी पत्नी की बाटे सुनकर भोचक्का हो गया.
सतीश- जी मैडम जी और कुछ ...
जयश्री- कुछ नहीं.. पर ध्यान रखना मटन एकदम फ्रेश चाहिए समझे.. वर्ना मै तुमको दौड़ाउंगी समझे (धमकी की सुरताल में बोल रही थी और फ़ोन रख देती है)
बलदेव अपनी बेटी की यही धांसू ऐडा पे फ़िदा था.
जयश्री- मिस्टर बलदेव जी आज आप अपनी बेटी का जलवा देख ही लीजिये. अगर आज के खानमें खुद की उंगलिया नहीं चभाई तोह आपकी बेटी का नाम भी जयश्री नहीं ...
बलदेव- वाह मेरी राजकुमारी , मेरी सोनी प्यारी बेटी वाह
बलदेव ने फिर से उसे गले लगाया. इस बार जयश्री अंदर से कुछ भी नहीं डाला था और सिर्फ एक पतला शर्ट था जो न के बारे बार था ... बलदेव को ऐसा लग रहा था की वो अपनी नंगी बेटी को ही बहो में ले रहा है. इस बार जयश्री का मंगलसूत्र शर्ट के बहार था तोह वो बलदेव को सीने पर चुभ रहा था. पर उसके साथ साथ अपनी बेटी के सख्त बॉल भी उसके सीने पर दबे थे. जयश्री भी अपने पापा को खुश देख कर खुश थी. बलदेव ने मीठी छोड़ दी और जयश्री को प्यार से कपोल पर चुम्मा लिया. जयश्री भी रही थी की बाप-बेटी का यह गलबहियां कोई देख न ले. पर उसे ये भी पता था की बलदेव किसी भी मुसीबत से निपट सकते है.
जयश्री- मै जाती हूँ निचे.. वो मटन ले कर आएंगे मै मटन बनाने के लिए बर्तन और निचे जाकर खेत वाले गेट के बगीचे के पास चूल्हा बनाती हु...
जयश्री जैसे ही जाने लगी तोह बलदेव से रहा न गया, तोह जयश्री जाने के लिए जैसे कड़ी हुई बलदेव ने उसका दायां हाथ झट से पकड़ लिया और अपनी तरफ खींच लिया और जयश्री ने थोड़ा पीछे मूड कर देखा तोह सँभालने के लिए पांव अटक गया और उसका वजन बलदेव की तरफ गिर गया और अचानक से उसके होंठ १ सेकंड के लिए बलदेव के होंठो छू गए और बलदेव ने उसे सँभालने के लिए उसकी कमर को थाम लिया. उसकी सख्त पर पतली सी मांसल कमर को पकड़ लिया था. अब दोनों एक दूसरे को देखने लगे अब दोनों के होठो में २ इंच का फैसला होगा... तभी वही से जा रहे एक मजदूर का रेडियो पर एक गाना चल पड़ा.. (रंग भरे बदल से, तेरे नैनो के काजल से, मैंने इसे दिल पे लिख दिया तेरा नाम..) जयश्री को अपने बाप के मुँह से सिगरेट का भी स्मेल आ रहा था... जो उनके एक दूसरे के प्रति प्यार में ४ चाँद लगा रहा था... अब जयश्री भी ठिकाने आ गयी...
जयश्री ने धीरे से अपने शर्ट को थोड़ा सा ऊपर कर के अपनी छाती ढकने का असफल प्रयास किया और शर्मा गयी...
जयश्री- छोड़िये न ...
बलदेव- हं ...
जयश्री- छोड़िये न... कोई देख लेगा...
बलदेव को लगा अभी के अभी जयश्री को मुख चुम्बन दे दे पर उसने ऐसा नहीं किया , दोनों छत पर थे ...
बलदेव ने उसे छोड़ दिया और जयश्री हस्ते हुई अंदर भाग गयी...
बलदेव- और सुनो, तुम चूल्हा का इंतजाम मत करना ... सतीश को बोल दूंगा चुला खेत के कोने में बनाने को तुम सिर्फ मटन पे ध्यान देना ....
रात के ८ बज गए. जयश्री फ्रेश हो कर तैयार हुई थी. तभी सतीश की कार की आवाज सुनाई दी. साथ में और एक गाडी आई थी... सतीश आ चूका था. उस ने सब सामान जयश्री के नीचेवाले कमरे में रख दिया. जयश्री ने जब उसके कपडे देखे तोह उसकी जान में जान आ गयी. ये देख कर...
बलदेव- (सतीश से पूछा) और कोई आया है क्या?
सतीश- जी ससुर जी वो, फ़िटबालेन्स कंपनी से आये है आप ने आर्डर दी थी न जिम के सामान की वो सामान को फिटिंग करा के १ घंटे में आपकी जिम रेडी कर देंगे. मैंने उनसे कहा की कल सुबह भी काम कर देंगे तोह भी चल जायेगा पर कंपनी वाले ने बोलै की कस्टमर को जल्द से जल्दी सामान देना उनका काम है. इसलिए वो अभी चले ए..
बलदेव- क्या बात है दामाद जी , बोहोत शातिर हो गए हो... चलो इस ख़ुशी में हम आज साथ खाना खाते है... तुम बोल दो सुभाष को की वो तुम्हरे लिए खाना बनाये और घर चले जाये अब एक दो दिन के लिए उसे छुट्टी दे दो.. तुम हो ही यहाँ... और सुनो तुम्हरा सामान अब सुभाष के रूम में के पीछे के कोने में लगा दो तुम वही रहोगे.. और हं ऊपर छत पर जाना नहीं है मेरे इजाजत के बिना.. ओके!
और एक बात वह खेत के घुसनेवाले गेट पे यहाँ घर के उस खुले कोने में एक चूल्हा बना देना और अंदर के बड़े बर्तन और सब होते मोठे बर्तन डिब्बे लगा दो मसाले के.. और है वही पे आम के पेड़ के निचे अपना खटिया लगा दो और आगे टेबल वगेरा लगा दो... खाना खाने..
सतीश उदास हो गया क्यों की अब उसे नोकरो के रूम में रहना था...
सतीश- जी ससुर जी में सुभाष को बोल देता हूँ की वो अभी निकले घर उसके और २-३ दिन न ए ... छुट्टी ले ले. में अपना खाना खुद बना लूंगा और हं कपडे धोनेवाली को भी कल सुभे आने को बता दूंगा. और मै चूल्हा लगवा दूंगा पर ससुर जी वो २ बिगा जमीं का क्या हुआ?
बलदेव- हं हाँ कल मै सब बात करूँगा तुम आ जाना अपना खाना खाने आज में कॉल करूँगा.. सतीश चला गया अपना सामान लगाने.
अब जयश्री घर के निचे के उसके कमरे में कपडे बदल कर आई. बलदेव भी ऊपर गया फ्रेश होने को फ्रेश होकर एक बनियान और लुंगी पहन कर वापस आया तोह देखा जयश्री ने कपडे बदल कर आयी थी. बलदेव ही कुर्सी पे आंख लगाए पड़ा था की जयश्री ने आके बलदेव के आंख अपने हाथो से दबाई और बैंड कर दी...
जयश्री- बताइये में आपको क्या सरप्राइज देनेवाली हूँ!
बलदेव- और क्या सरप्राइज होगा मेरी रानी लाडो ...
जयशेरी- देखो मै जब तक नहीं बोलूंगी आप आंख मत खोलना...
बलदेव वैसा ही करता है...
जयश्री- अब खोलो आंख पापा
जब वो आंख खोलता है तोह पता है की सामने जयश्री की कलाई है और उस पर वो ही चुडिया पहनी ही है जो बलदेव ने दी थी.
जयश्री- अब खुश पापा!
बलदेव- बोहोत खुश मेरी रानी बिटिया.. (कह कर उसके हाथ और कलाई को चूमने लगे)
फिर बलदेव ने देखा उसने अब फीके लाल रंग की साडी पेहेन राखी थी और अब वो चूल्हे के पास बैठक की तरह बैठ गई और मटन का सब सामन वामन तैयारी कर मटन करी बनाने में व्यस्त हो गयी . उसने कुछ मटन अलग रखा और उसको स्टार्टर बनाने के लिए रखा.
बलदेव अब उसको पीछे से देख कर बलदेव होश खो बैठा. उसकी पतली कमर और उसक मेक उप उसके पैंट में हलचल करने लगे. फिर अपने पतले सुन्दर होठो से चूल्हे में छौक लगा रही थी...
बलदेव ने सतीश को बुलाया.
सतीश- ससुर जी वो जिम का सब सामान फिट हुआ. उन्होंने कहा की आप कल से फिटनेस चालू कर सकते हो.
बलदेव- दामाद जी जरा नए वाले स्टॉक से 'बीसी' वाला व्हिस्की ले आना और मेरे लिए लार्ज पेग बनाना
तभी बलदेव को रुद्रप्रताप का फ़ोन आता है.. उसका नाम फ़ोन पर देखते ही उसके होश उड़ जाते है.. पिहकले २-३ दिन से बलदेव ने एक भी बार रुद्रप्रात्प को खुद से फ़ोन नहीं किया जब की बलदेव काम से काम दिन में एक बार तोह फ़ोन जरूर करता है उसने फ़ोन उठाया.
रुद्रप्रताप- क्या बात है भाईलोग.. कहा हो... कैसे हो... क्या बात है साहेब... बेटी मिलते ही तुम कोण और मै कोण? तोह क्या बात है बताओ यार... बाप-बेटी के इश्क़ की गाड़ी कहा तक आगे बढ़ी.. कुछ अता न पता है तुम्हारा.. क्या चल रहा है क्या नहीं कोई खबर बात भी तोह नहीं दी
बलदेव- नहीं रूद्र ऐसा कुछ नहीं ... यही खेत में बैठ है.. यार थैंक्स तुम न होते तोह आज ये दिन न अत. .. पता है तुम्हरी राय मेरे बोहोत काम आयी.. मैंने उसे कंगन गिफ्ट किये थे.. बोहोत खुश है यार.. आज जयश्री आयी है पता है आज कितने दिनों बाद उसके हाथ का मटन खाने को मिलेगा..
रुद्रप्रताप- क्या बात है यार, वाह , हमे नहीं बुलाया! अकेले अकेले...
बलदेव- तोह क्या हुआ , तुमने भी तोह हमारा माल चखा न अकेले अकेले में..
दोनों हंसने लगे...
तब तक सतीश एक लार्ज पेग बना चूका था और जैसे ही बलदेव ने सिगरेट मुँह में रखा सतीश ने तुरंत उसकी सिगरेट जला दी
बलदेव- अच्छ चल मै तुझे बाद में बात करता हूँ
रुद्रप्रताप- अच्छा सुन तुमने निचे भी कभी शेव या क्लीनिंग की है?
बलदेव- नहीं तोह ऐसा क्यों बोल रहे हो?
रुद्रप्रताप- जयश्री को साद सफाई बोहतो पसंद है. सुनो मेरी बात कम से कम निचे कुछ कैची चलाओ और बाल कम कर दो
तब जयश्री ने मटन बना लिया था. सामने मटन स्टार्टर देख कर बलदेव के मुँह में पानी आ गया और उस मटन करि की खुशबु आई है , बलदेव सातवे आसमान पर था...
जयश्री- किस का फ़ोन था! आवाज से तोह बॉस अंकल का लग रहा था.. क्या बोले वो?
बलदेव- कुछ नहीं बस ऐसे ही कुछ
सतीश भी अपना थाली ले कर साथ खाने खाने आया.. जयश्री बलदेव को खाना परोसते रही थी.. की अचानक से बलदेव ने उसकी तरफ देखा क्यों की सतीश नजदीक वाले सोफे पे बैठ रहा था सतीश समझ गया की वो जगह उसकी नहीं. सतीश फिर सामने दूर के एक कुर्सी पर बैठ गया. और खाना चालू किया तभी जयश्री ने सतीश की तरफ देख रही थी.. वो सतीश के पास आई और सतीश को एक जोरदार थप्पड़ गाल पर जड़ गया..
जयश्री- तुम्हे शर्म नहीं आती , जिस ससुर जी ने तुम्हे मौका दिया, तुम्हे एक इज्जत की जिंदगी दी तुम्हारे अन्नदाता बने.. और तोह तुम उनके पहले अपना भोजन स्टार्ट करोगे!
सतीश- (गाल को सहलाता) माफ़ करना ,
वो रुक गया
जयश्री- लीजिये मिस्टर बलदेव जी आपकी फेवरिट रेसिपी , अब मार लो तांव
ऐसा कह कर जयश्री झुक कर नजदीक से मटन करि परोसने लगी तभी बलदेव ने अपना सिगरेट का धुआँ जयश्री के मुँह पर फेकता है. जयश्री को ये बोहतो अजीब भी लगा और उनसे इम्प्रेस भी हुए. तभी खाना परोसते परोसते जयश्री एक बार झुकी तोह उसके साड़ी का पल्लू उसके बाप के सामने ही गिर गया और फिर दिखे ब्लाउज के अंदर के घने तंग बॉल. को देखने लगा... तब जयश्री की पीठ सतीश की तरफ थी उसे पता नहीं चल रहा था उस साइड क्या हो रहा है... जैसे ही जयश्री का पल्लू गिरा बलदेव ने उसका पल्लू पकड़ लिया और खींचने लगा.. जयश्री डर गयी आज उसके पिता उसके पति के सामने ही उसक दामन खींच रहे थे. जयश्रीने उसे आँखों से ही बिनती की.. फिर उन्होंने छोड़ दिया... जयश्री हसने लगी..
अब बलदेव खाना चालू करनेवाला था तभी..
जयश्री- न न न न न न ...अभी नहीं पापा, ये लो आपके लिए स्पेशल मटन सूप
बलदेव- अह्ह्ह्ह वह मेरी राजकुमारी वह क्या बात है ....
सतीश को अपनी ही पत्नी की अपने ही ससुर के प्रति लगाव देख कर हैरानी हुई.
बलदेव (जयश्री से) - बेटा तुम भी खाऊ न!
जयश्री- नहीं नै , पापा मै तोह खा लुंगी पर पहले पापा का पेट थोड़ा भर जाये फिर बाद में
ऐसा कह कर जयश्री ने मटन स्टार्टर का एक पीस उठाकर बलदेव को खिला दिया. बलदेव मनो किसी आसमान पर था...
बलदेव- उम्म्म्म अहह...
आज वो कितने दिनों बाद ऐसा स्वाद चखा था..
उसने जयश्री की उंगलिया चटनी शुरू की पर सामने सतीश भी था तोह वो शर्माने लगी.
अब रात हो चुकी थी, सब कीड़े गुर्रा रहे थे..
जयश्री (सतीश को)- सुनो खाना खाने के बाद यह सब अंदर रख देना. सब साफ़ सफाई कर लेना. कल बर्तन वाली आंटी को सब बर्तन धोने दे देना. ठीक है!
सतीश- जी मालकिन.
अब जयश्री भी बलदेव के गाल पर एक किश करने गयी और बलदेव ने जयश्री को खींच लिया और अपनी गोदी में बिठा लिया. अब जयश्री बोहतो शर्मा गयी क्यों की यहाँ अब उसका पति सतीश भी था.
जयश्री- (धीमी आवाज में) पापा...यह क्या कर रहे है आप.. आपका दामाद यही है..
बलदेव- क्या कर रह हूँ , क्या एक बेटी अपने बाप के गोद में नहीं बैठ सकती?
बलदेव जयश्री को कमर को सदी के अंदर से सेहला रहा था. जयश्री हसने लगी थोड़ी सी.
जयश्री- (बलदेव के तकले पर हाथ घूमते हुई) पापा .. मुझे काम करने की आदत है , कुछ सोचो न जॉब का प्लीज
बलदेव- मेरी रानी बिटिया सुनो, एक बात कहु?
जयश्री- रुद्रप्रताप ने तुम्हरी बोहतो तारीफ की थी मेरे पास. उन्होंने तुम्हे नौकरी पे नहीं रखा तोह क्या हुआ. मेरे पास तुम्हरे लिए एक जॉब है करोगी?
जयश्री ख़ुशी के मरे फूले नहीं समाई.
जयश्री- कोनसी जॉब? कोण देगा? कहा पे करनी है जॉब?
बलदेव-(मुस्कुराते हुए) सेक्रेटरी वाली जॉब
जयश्री- हं पर किसकी सेक्रेटरी कहा की सेक्रेटरी , क्या आप मुझे फिर से बॉस अंकल के पास भेजोगे
बलदेव- नहीं
जयश्री- फिर ?
बलदेव- मेरी सेक्रेटरी बनो मेरा धंदा तुम सम्भालो और आगे भी यह तुम्हरा ही होगा...
जयश्री सोचने लगी की ऑफर तोह अच्छ है.. पर अब सबके सामने यह कारनामे करने होंगे.. उसने सोचा की जो पिता अपनी बेटी को इतना फ्रेंडली रख सकता है उसके साथ कितना मज़ा आएगा काम करने में.
और वो सोचते सोचते लज्जा गयी और वह से भाग गयी.
बलदेव- आरी क्या हुआ , मेरी लड़ो, मंजूर है? बोलो मेरी सेक्रेटरी बनोगी?
बलदेव को जवाब नहीं मिला. और वो फिर से सुट्टा मारते मारते आसमान को देखते हुए अपनी बेटी के खयालो में खो गया...
Funtastic updatesअपडेट १५
(बलदेव अपने गेराज में)
बलदेव ने जो पांसा फेका था वो उतना न चला जितना उसने सोचा था. जयश्री बलदेव की बेटी है और वो चाहता है की जयश्री उसकी और कोई और न बन के रहे. बस बेटी बन कर ही रहे पर उसके कोई नियम कानून न हो. यह बोहोत असंभव सा सवाल था. बलदेव जानता था की जयश्री के लिए उसे अपने पिता को दोस्त से भी आगे जा कर उस रूप में देखने शायद उस ने कभी सोचा ही न हो. जयश्री अभी तक तोह पिता को एक क्लोज फ्रेंड की तरह समझ रही थी पर बलदेव तोह काफी आगे निकल चूका था. पर उसे जयश्री को सिर्फ हासिल नहीं करना था बल्कि उसको जयश्री उसी कशिश और मिठास के साथ जीवन संगिनी चाहिए थी. बलदेव ने अब इस चैप्टर को क्लोज करने की सोची. बलदेव ने सतीश को फ़ोन लगाया..
बलदेव- सुनो, जयश्री को तुम कल लेके जाना उसके ससुराल.. उसका अच्छे से ख्याल रखना.. मै रूद्र को बोल दूंगा की वो उसे फिर से ज्वाइन करा ले.. और हं उसे कहना की उसके पापा उसे ढेर सारा प्यार करते है.. उसे कहना की उसे किसी भी कुछ भी चीज़ की जरुरत हो तोह अपने पापा से मांग ले.. और सुनो मेरा एक काम करो गए? अब आखरी वाला.. मैंने तुमको कुछ भेजता हु उसे खरीद कर जयश्री बिटिया को दे देना.. और तुम्हे अभी कुछ पैसे भेज रहा हूँ..
सतीश- पर ससुर जी क्या हुआ अचानक से.. और आप ऐसी क्यों बात कर रहे हो.. और मेरा क्या होगा .. आप मुझे वो २ बईगा ज़मीं देने वाले थे..
बलदेव- हाँ मै वो कर दूंगा काम मै अभी बद्री को बोल देता हूँ की कल को जाके उस जमींन के डील का ड्राफ्ट एक बार देख ले..
सतीश- पे ससुर पर .. में ये..
इस से पहले कुछ बोल पता बलदेव ने फोन कट कर दिया.. और बद्री को फ़ोन लगाया.
(बलदेव के घर खेतवाले फार्महाउस पे)
जयश्री वापस आकर फ्रेश हो गयी और स्ट्रेपवाला सिल्की नाईट ड्रेस पहनी थी. वो अपने कमरे में सोचती हुई पड़ी थी.. तभी सतीश आया अब सतीश भी खाना बनाया और जयश्री को बताने गया की खाना कहा लगाए..
बलदेव- जयश्री , वो खाना तैयार है तुम कहा खाओगी?
जयश्री- बहार निचे वाले गार्डन में खाना लगवा दो और हं तुम भी आ जाओ खाना खाने
सतीश को लगा की अब जयश्री कभी उसको पति वाला बर्ताव नहीं करेगी पर थोड़ी देर बाद दोनों गार्डन वाले कुर्सी टेबल पर खाना खाने बैठ गए.. अब दोनों खाना खाने लगे. सतीश ने टॉपिक छेड़ा.
सतीश- वो ससुर जी का फ़ोन आया था , कहा की मै तुम्हे अपने साथ ससुराल ले जाऊं कल सुबह अब उधर ही रहने को बोला है और कहा की तुम रुद्रप्रताप के ऑफिस ज्वाइन कर सकती हो..
जयश्री को समझ नहीं आ रहा था की बलदेव क्या सोच रहे है और क्या चाहते है एक्साक्ट्ली
जयश्री- पर मै तोह आज एक सेक्रेटरी के नाते अच्छा काम किया.. पर पता नहीं पापा को मुझ से क्या उम्मीद है..
सतीश ने अब अपना निवाला प्लेट में रख दिया और बोलने लगा.
सतीश- जयश्री तुम्हे पता है तुम्हारे पापाने ये इतना बड़ा साम्राज्य किस लिए बनाया? तुम्हे पता है की तुम्हारी माँ के गुजर जाने के बाद वो किस तरह जी रहे है? तुम्हे पता है तुम उनके सामने नहीं रहती हो तो भी वो तुम्हारे बारे में कितनी चिंता करते है? ये खेत खलियान, ये फार्महाउसेस ये बंगलो और बाकि प्रॉपर्टी बताओ ये वो किस लिए कर रहे है? इस उम्र में भी वो कितनी मेहनत करते है वो किस लिए? किसके लिए? तुमने कभी सोचा है की जिस उम्र में लोग अपनी नाती-पोती के साथ खेलते रमते है उस उम्र में वे आज भी खेती बाढ़ि अपना कारोबार और तुम्हारा इतना ख्याल कितनी शिद्दत से करते है? कभी तुमने सोचा की तुम्हे जब शारीरिक जरुरत थी तोह तुमने क्या किया? और अब जब तुम्हारी माँ को चल बसे २ साल हो गए तोह कभी अपने पिताजी के बारे में सोचा की वो किस तरह अपनी इच्छाओ के दफन कर तुह्मरे लिए जीते है? क्यों? तुम बस अपनी सोचती हो, अपनी चालचलन, रंग ढंग, फैशन, पार्टीज.. और पहल वाले बॉस के बारे में ही सोचती हो. पर जो आदमी तुम को जान से भी ज्यादा प्यार करता है उसके प्रेम को एक पल भी नहीं समझ पाती तुम? जिन्होंने तुम्हे अफेयर के बदनामी से बाहर निकाला उसको तुम यह सिला दे रही हो? तुम्हे पता है की तुम्हरे अफेयर की वजह से मेरी कितनी बदनामी होती, रुद्रप्रताप की कितनी बदनामी होती, ऊपर से सोचो की तुम्हरे पापा की क्या ही इज्जत होती पुरे समाज के सामने? तुम्हे पता है की वो आज कल कितना पि रहे है? तुम्हे पता है आज कल उनके सिगरेट का स्टॉक कितना हुआ है? तुम्हे पता है वो हर महीने गाओं के बाहर के गुरुपुर के रस्ते के 'हनी लॉज' में क्यों जाते है? तुम्हे पता है की आज उनको एक चद्दरबदलू बढ़िया लॉज में जाने की क्या जरुरत है? और उनको ये लॉज का एरेंजमेंट रुद्रप्रताप करता है? तुमको पता है वो वहा जाते तोह है पर वह कोई सम्बन्ध नही बनाते ? वो वहा एक साथी ढूंढने जाते है या सिर्फ औरत? तुम जानती हो की अगर उनको कोई पसंद आई और उनके दिल पर राज करेगी तोह तुम्हारा क्या होगा? इस पुरे साम्राज्य का वारिस कोण होगा? तुम होगी या आनेवाली तुम्हारी माँ की सौतन होगी इस साम्राज्य की वारिस? तुम्हे पता है की वो मुझ से अच्छा बर्ताव करते है इसलिए मुझ से खुश हो कर मुझे अपने कुछ जमीन का मालिक बना रहे है? क्या तुम्हे पता है की कल वो जामवंत नगर की रास्तेवाली जंगल फार्महॉउस के खेत वाली जमीन का २ बिगा जमीन मेरे नाम करवा रहे है? अगर ऐसा ही चलता रहा तोह क्या वो मुझे अपनी पूरी जायदाद का मालिक बना दे? और तुमको क्या लगता है की अगर वो ऐसा करेंगे तोह मै तुम्हारे साथ रहुंगा या तुम्हारे पिताजी के साथ? मै उनकी सेवा में आजीवन रहूँगा?
जयश्री अब झट से खुर्सी से उठ गयी उसका खाना लगभग हो चूक था.. अब उसके दिमाग में हजारो सवालों ने घर कर दिया था.. वो उठी और उसे पता नहीं चला की उसने कब हाथ धो लिए और पानी भी पि ली. वो थोड़ी दूर चली गयी जहा इमली के बड़े से पेड़ का बरगद था.. वो सोच सोच कर निचे बैठ गयी और घुटनो को ऊपर मोड़ कर बैठ गयी.. और उसके ऊपर अपनी ठुड्डी रख कर अब जयश्री को बलदेव की याद में एक एक घटनाये याद आने लगी. की कैसे बलदेव ने उसे वो प्यारे कंगन दिलाये थे.. कैसे उन्होंने रुद्रप्रताप जैसे बिज़नेस माइंड और कमीने आदमी से उसको प्रोटेक्ट किया.. रुद्रप्रताप से पीछा छुड़ाना किसी ऐरेगैरे की बात नहीं थी.. वो यह जान गयी की दुनिया में उसके पिता से बढ़ कर कोई पावरफुल इंसान नहीं है.. उसने महसूस किया की कैसे बलदेव ने उसके पति सतीश के गलती को भी जगह दे कर पुरे परिवार को बदनामी के बाहर निकला. तभी उसे वो बात याद आई जो सतीश ने बताई थी..
जयश्री - तुमने क्या कह वो तुमको जमीन दे रहे है? और अगर वो तुम्हे थोड़ी जायदाद दे तोह तुम मुझे छोड़ कर यहाँ रहोगे उनके साथ?
सतीश- वो मुझे नहीं पता पर जो मुझे मेरे सपने दे सकता है मै बिलकुल उसी को अपना साथ दूंगा.. कल देख लेना जमीन पे मेरा नाम..
जयश्री- माय फुट.. जमीन और तुम्हे.. (धीरे आवाज में बोली)
जयश्री- एक बात पुछु सतीश?
सतीश- हं बोलो..
जयश्री- तुम जानते हो की पापा मुझे से सेक्रेटरी या कुछ और बनाना नहीं चाहते, वो मुझे चाहते है, अपनी ही बेटी को.. तुम्हे ये अजीब नहीं लगता?
satish- अजीब? जयश्री मुझे एक बात बताओ, की अगर तुम २ महीने लगातार रुद्रप्रताप के साथ अकेले ही अगर १ ही घर में रहोगी तोह समाज क्या सोचेगा तुम्हारे बारे में..
जयश्री- ओह्ह ..
सतीश- अब, अगर तुम अपने पिता के साथ, उसी घर में अकेले लगातार २ महीने रहोगी तोह समाज क्या सोचेगा तुम्हारे बारे में?
जयश्री- पर उनके पास हम दोनों बाप-बेटी पर शक करने की कोई वजह ही न...
अब जयश्री के दिमाग में फाटक से एक बल्ब जल गया..
जयश्री- ओह्ह्ह्हह्ह , पापा आप क्या दिमाग चलते हो..
सतीश भी अब उसकी तरफ देख कर हल्का स्माइल करने लगा.. जयश्री का चेहरा अचानक से गंभीर हुआ और
जयश्री- सतीश, मतलब अब पापा की मंशा के बारे में बॉस अंकल रूद्र जी को भी पता है?
सतीश ने जवाब नहीं दिया और सतीश ने कंधे उठा के ऑब्वियस का सिग्नल दे दिया..
अब जयश्री को पूरा मैटर अब आईने जैसा साफ़ हुआ था..
उसको विश्वास नहीं हुआ की उसके बाप ने कितनी आसानी से सब समस्याओं का हल निकला... लोग एक तीर से दो पंछी मार देते है पर उसने सोचा की उसके बाप ने तोह एक तीर में ४ पंछी मार गिराए थे...
जयश्री- पर सतीश उन्होंने मुझे सीधा सीधा क्यों नहीं कहा!
सतीश- तुम भी न! आरी पगली माना के ससुर जी मॉडर्न बनने की कोशिश करते है पर है तोह वो देहाती और, वो शहरोवालो तरीको से इजहार करेंगे.. सब?
जयश्री थोड़ी शरमाई.
जयश्री- और तुम क्या कहे रहे थे.. की उनकी अब नाती-पोती के साथ खेलने के दिन है! (जयश्री ने मिश्किल हँसते हुए बोलै)
सतीश- हं, नहीं तोह क्या? (खाना ख़तम करते हुए)
जयश्री (लज्जा कर)- मुझे तोह नहीं लगता है की अब उनके नाती-पोती से खेलने के दिन है. मुझे तोह लगता है की उनके अब अपनी ही बेटी के साथ खेलने कूदने के दिन है!
उसने अपना चेहरा अंजुली में छुपाया..
सतीश- अब वो तुम पर है मैडम जी.. (सतीश सब बर्तन और खाना समेटते हुए चला गया.)
जयश्री अब बगीचे में सोचते सोचते घूमने लगी.. और अपने आप में ही अचानक से बिच बिच में लज्जा होने लगी.. उसको सतीश की एक बात यद् आई की उसके पिताजी को नए ज़माने के तोर तरीके से बोलने की कोई आदत नहीं थी, अपने पर का इजहार करने की कोई अनुभव भी न था.. जयश्री ने झट से टेबल से अपना फोन उठाया और रुद्रप्रताप को फ़ोन लगाया..
रुद्रप्रताप- बोलिये मैडम जी, अब जाके अपने पुराने आशिक़ की याद आयी? सुना है बड़ी सेक्रेटरी बन क घूम रही हो बलदेव जी की, कमाल की किस्मत पायी है उसने .. अपनी ही बेटी को सेक्रेटरी बनाने का नसीब लाखो में एक ही मैनेजर को मिलता होगा.. मैडम जी बोलो हमे कैसे याद किया.. कही अभी आप हम पर हुस्न का जाल बिछानेवाली हो क्या?
जयश्री हंस कर - ऐसा कुछ नहीं बॉस अंकल , मुझे आपकी एक हेल्प चाहिए थी..
रुद्रप्रताप- हं हं बोलो क्या हेल्प चाहिए..
और जयश्री रुद्रप्रताप से कुछ देर बात करने लगी.. कुछ देर उनसे बात करने के बाद फ़ोन उसने टेबल पे रख दिया और अब वो अपने पापा के सपनो में खोने लगी.. और वो वही गार्डन के सोफे पर लेट गयी.. अब वो अपने घर को देख रही थी, ये वही घर था जिस में उसका बचपन गुजरा पर अब वो बेटी के साथ साथ दूसरे फ़र्ज़ भी अदा करनेवाली थी. वो शरमाई.. उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की जिस घर से वो एक कन्या के रूप में बाहर निकली थी आज उसी घर में प्रेमिका के रूप मे वापिस आ गयी है.. सुन्दर खयालो में सोचते सोचते उसको वही नींद लग गयी..
सतीश और सुभाष दोनों अब सो गए थे.. और जयश्री बगीचे में सोफे पे ही सो गयी थी, रात के १२ बजे थे.. सब सन्नाटा था और रत के कीड़ो की कीर कीर आवाजे थी.. गर्मी के दिन थे तोह जयश्री को मस्त नींद आ गयी थी.. बलदेव की एसयूवी ने आवाज करते हुए थोड़ी सी गाड़ी अंदर लगाई. और उसके गाड़ी के लैंप चालू थे.. तोह उसने देखा की बगीचे के सोफे पे कोई है.. उसने झट से गाड़ी का दरवाजा बंद करते हुए गाड़ी लॉक की और वो वहा गया.. तोह देखा की जयश्री बोहोत आराम से सो रही थी वही, उसके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान भी थी.. अब बलदेव ने इधर उधर देखा .. उसे अजीब लगा की जयश्री अपने कमरे में न हो कर यहाँ अकेले घनी रात में बगीचे के सोफे पर सो गयी थी. उसने देखा की जयश्री के नाईट ड्रेस का स्ट्रैप की गांठ खुल चुकी थी, अगर वो चाहे तोह उसका गलत फायदा उठा लेता पर उसने ऐसा नहीं किया. उसने जयश्री का मोबाइल लिया और जेब में डाला. और जयश्री को किसी फूल की तरह अल्हड से आराम से बिना किसी कोशिश के और बिना जोर लगाए उठाया और जयश्री के कमरे में जाकर उसे बेड पर आराम से रख दिया.. जब वो अपना बाया हाथ उसके अंग के निचे से निकालने लगा तोह अचानक से जयश्री ने नींद में पलट गयी और बलदेव का बाया हाथ की कलाई पकड़ कर अपने सर के निचे तकिये की तरह रख दिया और उसी पर सर रख कर सो गयी. अब बलदेव अटक गया था. वो अपनी प्यारी सी फूल से राजकुमारी को उठाना नहीं चाहता था. और वो वही फर्श पर बैठ गया क्यों की वो अपना हाथ नहीं हटा सकता था. जो इंसान आज तक सिर्फ अखाड़े की मिट्टी के सिवा कही कभी निचे नहीं बैठा था आज वो अपनी बेटी के प्यार में फर्श पर था.. वो बैठे बैठे अपनी बेटी को गौर से देखने लगा था जो अब उसकी तरफ मुँह कर के सो रही थी.. अब उन दोनों के चेहरे में बस आधे फुट का अंतर रहा होगा.. बलदेव ने देखा उसकी प्यारी बेटी के मुलायम केश कंधे पे थे. और दो प्यारी छोटी केश की लटें उसके गाल पर प्यार से आगे पीछे घूम रही थी अहवा से.. और उसके प्यारे नाजुक होंठ मनो समुन्दर की रस भरा हो, बलदेव आज अपनी बेटी की खूबसूरती को देख कर मन में सोच रहा था की सच में भगवान् ने जयश्री को फुर्सत से बनाया होगा.. उसक मन हुआ की वो अपनी फूल से प्यारी राजकुमारी के होंठ चुम ले जहा उसके होठों के ऊपर के हिस्से में पसीने से चमक रहे थे.. पर वो ऐसा नहीं चाहता था. वो अपने इरादों का पक्का था. और वो वही बैठ गया. आधे घंटे बाद जब जयश्री ने करवट बदली तोह उसके हाथ को आराम मिला. वो उठा और जयश्री का मोबाइल वही रख दिया टेबल पर.. और वो उसी कमरे से ऊपर जानेवाली सीढ़ी से ऊपर के छत के अपने हॉल में गया और एक पेग बना कर.. छत के गार्डन के छज्जे पर जा कर झूले पर बैठकर सतीश को मेसेज किया की ...
बलदेव (मैसेज) - सतीश तुम कल सुबहे चले जाना जयश्री को लेके ,अपनी गाड़ी में जाना जो मैंने तुमको दी है, अब वो परमानेंटली तुम्हरी और जयश्री की गाड़ी है. और सुनो जितना हो सके उतना मेरी रानी बिटिया को खुश रखना नहीं तोह मेरे से पल्ला है तुम्हरा.. और हं कल श्याम को वो मैंने जो चीज़ तुमको देने को बोला है तुम वो जयश्री को दे देना.. जयश्री से कहना की उसके पापा उसे बोहतो यार करते है.. फिर उसने एक लास्ट व्हिस्की गटक ली और सोने चला गया.