- 1,721
- 7,911
- 159
Thanks Komaal BhabhiCongrats for the new story and startling start , just superb
Aapko yaha dekhkar dil se khushi hui
love
Thanks Komaal BhabhiCongrats for the new story and startling start , just superb






Nice updateक्लब का म्यूज़िक बंद हो चूका था,
पुलिस यूनिफॉर्म में कोई एकदम से डॅन्स फ्लोर पर आ जाए तो अच्छे अच्छों की हवा टाइट हो जाती है
क्लब के स्टाफ का भी यही हाल था
मैं जल्दी से श्रुति और दूसरी फ्रेंड्स के साथ बाहर निकल गयी
श्रुति जानती थी मेरे पापा और उनके गुस्से के बारे में
इसलिए उसे भी अब मेरी चिंता हो रही थी
मैने वॉशरूम में जाकर अपने कपड़े चेंज किए और कैब पकड़ कर जल्दी से घर की तरफ निकल गयी
आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन होने वाला था
*********
आगे
**********
घर पहुँची तो मामला कुछ और ही निकला
माँ ने दरवाजा खोला
उनके चेहरे पर पहले से बारह बज रहे थे, हवाइयाँ उड़ रही थी
मैं समझ गयी की उन्हे भी पता है की पापा ने मुझे क्लब में देख लिया है
मैं अंदर आई, मेरे मुँह से घबराहट के मारे कुछ नही निकल रहा था
माँ : “बेटा….वो ..... वो……आ ........ आज तेरे पापा घर जल्दी आ गये थे…..और तब तक तो तू भी कॉलेज से आ ही जाती है….घर पर तू नही मिली तो…तो..उन्होने मुझे बहुत डांटा और मजबूरन मुझे बताना ही पड़ा की तू कहाँ गयी है….आई एम् सॉरी मेरी बच्ची ….ये सब…ये सब…मेरी वजह से हुआ है….”
इतना कहकर वो फफक -2 कर रोने लगी….
मैने गोर से देखा तो उनके चेहरे पर उंगलियो के निशान थे…..
यानी पापा ने उन्हे मारा भी था…
ये वहशी इंसान…..
मन तो करता है उनपर एफ आई आर कर दूँ …
फिर सड़ते रहेंगे पूरी लाइफ जेल में
ऐसे और भी विचार मेरे दिमाग़ में पहले भी कई बार आ चुके थे
पर मैं कितनी डरपोक थी ये सब करने में, ये मुझे भी पता था
अब जैसे भी उन्हे पता चला, खैर तो मेरी नही थी इन सबमे..
सच कहूं तो आज जितना डर मुझे अपनी लाइफ में कभी नही लगा था
हालाँकि आज के जमाने में इतना तो चलता ही है
कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चे अपने दोस्तो के साथ मूवी और क्लब्बिंग के लिए जाते है
ये तो आम बात है
पर पता नही मेरे पापा को ही इसमें इतनी दिक्कत क्यों है
माँ भी तो मेरा साथ देती है, उन्हे तो ये सब बुरा नही लगता
उन्हे तो पता है की मैं अगर ये काम कर भी रही हूँ तो समझदारी से कर रही हूँ
पता नही पापा को ही क्यो दिक्कत है
मेरी आँखो से आँसू निकल आए ये सोचते-2
माँ ने लपककर मुझे अपने गले से लगा लिया और बोली
“मत रो सलोनी….तू अपने रूम में जा …और पापा के आने पर भी बाहर मत आना, मैं बोल दूँगी की तू सो रही है….बाकी मैं देख लूँगी….पर किसी भी हालत में बाहर मत आना”
माँ का यही प्यार मुझे एक सुरक्षा कवच का एहसास देता था
पर मुझे क्या पता था की मुझे तो सुरक्षा मिल रही है माँ से, माँ को कौन सुरक्षा देगा उस राक्षस से…
मैं अपने रूम में गयी और कपड़े बदल कर बेड पर लेट गयी
रह रहकर मुझे क्लब की बातें और पापा का गुस्से से भरा चेहरा नज़र आ रहा था
करीब 1 घंटे बाद बाहर की बेल बजी
मेरे दिल की धड़कन एकदम से बढ़ गयी
बाहर पापा ही थे
अंदर आते ही उनकी और माँ की तेज आवाज़ें आने लगी
पापा गुस्से में गालियां दिए जा रहे थे
और वो मेरे बारे में ही बोल रहे थे
ऐसे शब्द जो मैने आज से पहले अपने बारे में उनके मुँह से कभी नही सुने थे
“कहाँ है वो रंडी साली….क्लब में छोटे कपड़े पहन कर लड़को के साथ डांस कर रही थी…आज तो उसकी गांड मैं लाल करूँगा….बाहर निकाल उसे…आज उसे पता चलेगा की पुलिस वाले का डंडा जब चलता है तो कैसे फट जाती है….निकाल उस हरामजादी को बाहर…”
माँ : “कुछ तो शर्मा करो, जवान बेटी को ऐसे कौन गालियां देता है….मानती हूँ उस से ग़लती हो गयी, मैने समझा दिया है, आगे से वो ऐसा कुछ नही करेगी, तुमसे पूछ कर ही करेगी वो सब…”
चटाख की एक जोरदार आवाज़ से पापा ने माँ को चुप करा दिया और बोले : “साली…..ये तेरी सरपरस्ती में ही बिगड़ रही है….कॉलेज शुरू होते ही इसे चाचा जी के पास भेज देना था, वो इसका सही से इलाज करते…”
पापा के चाचा जी, यानी रंजीत अंकल, वो पंजाब में रहते है, आर्मी से रिटाइर्ड है और अपने घर को भी उन्होने आर्मी केंट की तरह अनुशासन में बाँध कर रखा हुआ है, उनके बच्चे, बहु, नाती पोते सब उनसे डरते है, कोई उनके खिलाफ जाने की जुर्रत नही करता
पापा ने अपने पिताजी के गुजर जाने के बाद उन्ही को अपना आदर्श माना था
और परिणामस्वरूप वो भी उन्ही की तरह बन गये थे
और उनके घर का माहौल अपने घर पर लागू करने की फिराक में हमेशा रहते थे
यही कारण था की मेरे उपर इतनी पाबंदिया थी, ये तो माँ थी वरना उन्होने मुझे सच में अपने चाचा के पास भेज देना था
और वहां की लाइफ सोचकर ही मैं काँप उठती थी
पापा गुस्से में गालियां देते हुए मेरे कमरे की तरफ आ ही रहे थे की अचानक पता नही क्या हुआ की उनकी आवाज़ निकलना ही बंद हो गयी
माँ की भी कोई आवाज़ नही आ रही थी
मैने कान लगाकर सुनने की कोशिश की पर कुछ सुनाई नही दिया…
थोड़ी देर बाद बहुत धीरे से पापा के कराहने की आवाज़ सुनाई दी
ओह्ह माय गॉड
कहीं माँ ने उनके सिर पर तो कुछ नही दे मारा…
मैं झट्ट से उठी और दरवाजे का हेंडल खोलने के लिए लपकी
पर हेंडल तक मेरा हाथ जाने से पहले ही मुझे पापा की एक आवाज़ सुनाई दी
ये एक लंबी सिसकारी थी
“आआआआआआहह………सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…….”
ये…..ये सिसकारी तो मैं पहचानती हूँ
ये ठीक वैसी ही थी जैसे श्रुति के मुंह से निकल रही थी जब उसका बाय्फ्रेंड किस्स कर रहा था और उसके बूब को दबा रहा था
यानी……यानी….मॉम इस वक़्त पापा के साथ
मेरा तो दिमाग़ ठनक सा गया
मैं दबे पाँव दरवाजे तक आई
और कान लगाकर सुना
मेरा अंदाज़ा सही था
ये वही सिसकारी थी
पिताजी के मुँह से निकल रही थी ये..
“ओह्ह साआआली…..अपनी बेटी को बचाने का सही तरीका ढूँढ निकाला है तूने भेंन की लोड़ी …..आआहह….चूस ज़ोर से मादरचोद ….और ज़ोर से चूस मेरा लॅंड”
पिताजी के मुँह से आख़िरी शब्द “लॅंड” सुनकर मेरा पूरा शरीर झनझना उठा
यानी इस वक़्त माँ मेरे रूम के बाहर बैठकर पिताजी का लॅंड चूस रही थी…
हे भगवान् …
पर अगले ही पल मेरे दिल में माँ के प्रति एकदम से प्यार उभर आया
मुझे बचाने के लिए उन्हे पिताजी के साथ….उनके…उनके….लॅंड की सकिंग करनी पड़ रही है…
मैं जानती थी की उनकी उम्र की औरतों में पहले शायद ये सब नही होता था
श्रुति ने भी मुझे कई बार ऐसी ज्ञान की बाते बताई थी की पहले की औरतों को डिक सकिंग करना अच्छा नही लगता था
ये तो आजकल के नोजवानों का कल्चर सा बन चूका है
पहले उपर के होंठ चूस्टे है और फिर दोनो एक दूसरे के नीचे के हिस्से को
पर माँ ऐसा कर रही थी तो सिर्फ़ मेरे लिए…हां, मुझे बचाने के लिए..
क्योंकि श्रुति ने बताया था की मर्द चाहे आज का हो या पहले का, उसे लॅंड चुसवाना बहुत पसंद आता है
पहले के जमाने में लॅंड चुसाई होती नही थी इसलिए अपनी बिबियो से उन्हे ये सुख मिल नही पाया मर्दों को
पर आजकल की एडल्ट मूवीस में ये सब देखकर उन्हे भी ये इच्छा होती है की उनका भी कोई चूसे…
और शायद इसी वजह से आज पिताजी को जब ये सुख मिला तो वो अपनी सुध बुध खोकर उस मज़े का लुत्फ़ ले रहे थे
मैं तो अंदर थी पर मेरे दिमाग़ ने पिक्चर बनानी शुरू कर दी की कैसे पिताजी जब गुस्से में अंदर आ रहे होंगे तो एकदम से माँ उनके सामने आकर बैठ गयी…उनकी जीप खोलकर उनका लॅंड बाहर निकाला और उसे चूसने लगी
ठीक मेरे रूम के बाहर
उफफफ्फ़
मेरे निप्पल्स एकदम से टाइट हो गये
बूब्स में थोड़ी और हवा भर गयी
ये वही एहसास था जो मैने मूवी हाल में महसूस किया था
जब श्रुति और नितिन एक दूसरे को स्मूच कर रहे थे
Behtreen updateहााआआययययी
ये एक ही दिन में मेरे साथ क्या-2 हो रहा है
पहले वो देखा और अब ये…
पहले वाला सीन तो मेरी आँखो के सामने चल रहा था और वो ग़लत भी नही था
मेरी सहेली अपने बाय्फ्रेंड के साथ मज़े कर रही थी
पर ये….
ये तो मेरी नज़रों के सामने भी नही था
और मेरे खुद के माँ बाप मेरे रूम के बाहर वो सब कर रहे थे
जो सरासर ग़लत था
उनका मेरे रूम के बाहर इस तरह से खुलेआम सकिंग करना और मेरा इस तरह से उनकी आवाज़ें सुनना
ये दोनों गलत था
पर फिर भी मेरे अंदर पहले से ज़्यादा उत्तेना का संचार हो रहा था
एक ग़लत चीज़ के लिए मेरी बॉडी इस तरह से क्यो रिएक्ट कर रही थी
ये तो सरासर ग़लत है
मैने अपने कानो पर हाथ रखकर बाहर से आ रही आवाज़ों को दबा दिया और फिर से वापिस अपने बेड पर जाकर लेट गयी
मेरा सीना उपर नीचे हो रहा था
मेरी 36 साइज़ के बूब्स फूलकर 38 के हो चुके थे
मेरा हाथ फिर से उनकी तरफ सरक गया और मैने उन्हे ज़ोर से दबा दिया
और परिणाम स्वरूप फिर से वही मूवी हाल वाली सिसकारी मेरे मुँह से निकल गयी
“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…………….आआआआआआआआअहह”
मैं एकदम से चोंक कर बैठ गयी
कहीं मेरी आवाज़ बाहर ना चली जाए
कुछ देर तक तो मैं वैसे ही लेटी रही पर बाहर से आ रही आवाज़ों से पता चल रहा था की उन्हे कुछ सुनाई नही दिया है
या फिर वो अपने में कुछ ज़्यादा ही मस्त है इसलिए
अब मेरे अंदर की शैतान भी जाग रही थी
बाहर पिताजी मेरी माँ यानी अपनी बीबी के साथ जिस रासलीला में लगे हुए थे
वही जो कुछ देर पहले तक मेरी कुटाई करने को तैयार थे
ये सैक्स भी साला क्या बड़िया चीज़ है
इंसान को पत्थर से मोम बना देता है
मैने डरते-2 धीरे से दरवाजा खोलकर बाहर झाँका
और बाहर का सीन देखकर मेरे तो होश ही उड़ गये
बाहर पिताजी पूरे नंगे खड़े थे और सामने बैठी माँ उनका मोटा लॅंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी
उनके भी कपड़े कब उतर गये थे शायद इसका अंदाज़ा उन्हे भी नही था
]
पहली बार मैं किसी को ऐसे करता देख रही थी….
श्रुति ने ही मुझे एक-2 बार पॉर्न में ऐसे सीन दिखाए थे
जिसे देखकर मुझे तो घिन्न सी आ गयी थी की कोई कैसे किसी का पेनिस चूस सकता है….
पर यहाँ माँ को देखकर लग रहा था की जैसे इस से अच्छी कोई चीज़ ही नही है…
भले ही वो आजकल के जमाने की नही थी पर चुसाई में किसी पॉर्न स्टार को भी पीछे छोड़ रही थी…
और पिताजी की तो बात ही अलग थी…
ऊँचा और भारी भरकम शरीर
और करीब 9 इंच का लंबा और मोटा लॅंड…
एकदम काला भुसन्ड
जिसे देखकर पहली बार में तो उबकाई आ जाए,
पर माँ जिस तरह से उसे चूस रही थी उसे देखकर लग रहा था की उसमें से शहद निकल रहा है शायद
पिताजी अपनी आँखे बंद किए उपर मुँह करके धीरे-2 हुंकार भर रहे थे…
उनका हाथ माँ के सिर पर था,
जिसे वो आगे पीछे करके अपने पेनिस को अंदर स्लाइड कर रहे थे…
माँ के मुँह से ढेर सारी लार निकल कर उनके मोटे मुम्मो पर गिर रही थी..
जो उन्हे और भी सैक्सी बना रही थी
याआआर…..
माँ के बूब्स देखकर पता नही क्यों मेरे मुँह में पानी आ रहा था
मुझे याद है, मैं करीब 10 साल तक माँ के बूब्स चूसती रही थी,
ऐसी गंदी आदत बनी थी मेरी की मैं उन्हे बिना चूसे सो ही नही पाती थी
माँ ने बड़ी मुश्किल से उनपर लाल मिर्च लगा कर मेरी ये आदत छुड़वाई थी
आज फिर से उन्हे देखकर मेरा उन्हे चूसने का मन कर रहा था
पर इस वक़्त तो पिताजी के वश में थी माँ
पता नही आज से पहले भी माँ ने उनका पेनिस चूसा था के नही
या आज मुझे बचाने के लिए उन्होने ऐसा किया
पर जो भी था,
आज उन्होने मुझे पापा के प्रकोप से बचा लिया था
मेरा पूरा बदन जलने सा लगा था उन दोनो को नंगा देखकर
मन तो कर रहा था की मैं भी कूद जाऊं उनके बीच
जो होगा देखा जाएगा
पर सोचने और करने मे काफ़ी फ़र्क है
पर इस जिस्म की जलन का कुछ तो करना ही पड़ेगा ना
मैने आनन फानन में अपने सारे कपड़े निकाल फेंके
और पूरी नंगी हो गयी
मेरा कच्ची जवानी से भरा जिस्म अँधेरे कमरे में भी चमक रहा था
]
अब मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था
मैने अपनी 2 उंगलिया मुँह में डालकर ढेर सारी थूक में डुबोई और उसे लेजाकर सीधा अपनी चूत में घुसेड दिया
चर्र मर्र करती हुई मेरी दोनो उंगलिया उस संकरी सी गुफा में फिसलती चली गयी
और मेरे मुँह से एक धीमी सी हिसिसाहट निकल कर पूरे कमरे में फैल गयी
और साथ ही निकली लार
जो सीधा मेरे निप्पल को भिगोती हुई मेरे पेट पर आ गिरी
मेरी आँखे बंद होती चली गयी
और मेरी उंगलिया किसी पिस्टन की तरह अंदर बाहर होने लगी मेरी नन्ही सी पुसी के
मैने बाहर देखा
माँ अब और ज़ोर से पापा का लॅंड चूस रही थी
शायद वो ऑर्गॅज़म के निकट थे
क्योंकि वो अपने पंजो पर खड़े होकर धीरे-2 कुछ बुदबुदा रहे थे
पता नही क्या पर मैने सिर्फ़ चोद दूँगा…रंडी साली…ये शब्द ही सुने
और अगले ही पल उनके शरीर ने काँपते हुए अपना हिस्से के बच्चे माँ के मुँह में निकालने शुरू कर दिए
यही उनकी चूत में जाते तो मेरे 2-4 भाई बन जाते आने वाले समय में
और ये गाड़ी मलाई देखकर मेरे हाथ भी और तेज़ी से चलने लगे
और जल्द ही मैने अपने हिस्से के बच्चे अपनी चूत से निकालने शुरू कर दिए
अअअअअहह
एक शरारत भरी बात अचानक मेरे दिमाग़ में आई की पापा और मेरा कम अगर मिल जाता तो वो 2-4 बच्चे मैं ही पैदा कर देती
अपनी बात पर मुझे ही हँसी आ गयी
चल पागल, ऐसा थोड़े ही होता है
अब सब शांत हो चूका था
मैं भी
पापा भी
और माँ भी
पिताजी लड़खड़ाते कदमो से बाथरूम में जाकर नहाने लगे
पीछे-2 माँ ने भी अपने और पापा के कपड़े इकट्ठे किए और अपने बेडरूम की तरफ चल दी
उनकी चाल मे एक अलग ही लचक थी आज
शायद अपनी बेटी को बचाने का रोब था उनकी कमर में
आज तो बचा लिया था माँ ने मुझे पापा से,
पर अगले दिन जब मैं उनके सामने जाउंगी तो पता नही क्या होगा