• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest मुझे प्यार करो,,,

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,445
82,841
304
Rony bhai kya gajab likhte ho yaar seductive story likhne me tumhara koi jabaab nahi:applause::applause:Agle update ka besabri se intjaar :thank_you:rahega. Bas ek gujarish hai ki update ke fonts thoda bada rakhna.
 
Last edited:

Pradeep paswan

Active Member
791
1,329
138
दरवाजे में सुराख वाली बात करके सुगंधा अपनी तरफ से पासा फेंक चुकी थी वह यह देखना चाहती थी कि उसका बेटा बाथरूम के दरवाजे के सुराख को वाकई में ठीक करता है या उसे सुराख से कुछ देखने की कोशिश करता है,,,। वैसे भी जिस तरह से सुगंधा ने अपने गोलाकार मादकता भरी नितंबो के दर्शन,, कराई थी उसे देखते हुए सुगंधा की हिम्मत धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी,,,। उस पल के बारे में सोचकर बार-बार सुगंधा का बदन उत्तेजना से गनगना जाता था,,,, वाकई में सुगंधा के लिए वह पल अपने जीवन का सबसे मदहोशी भरा पल लगने लगा था क्योंकि उस पल की उत्तेजना और उत्सुकता तो उसे अपनी सुहागरात वाली रात को भी नहीं हुआ था,,,।

1712192675-picsay
दरवाजे में सूराख वाली बात को सुनकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,, अपनी मां को तो उसने कह दिया था कि हां ठीक कर दूंगा लेकिन बाथरूम में सुराख वाली बात से ही उसके दिमाग की बत्ती जलने लगी थी उसके मन में कल्पनाओं का घोड़ा दौड़ने लगा था,,,। वह अपने मन में यह सोचने लगा था कि बाथरूम के दरवाजे की सुराख से उसे सब कुछ देखने को मिलेगा अगर किस्मत सही हुई तो,,,, क्योंकि उसे इतना तो पता ही था कि बाथरूम के अंदर औरतें अपने कपड़े उतार कर नंगी होकर नहाती है अगर कपड़े उतार कर ना भी नहाती होगी तो भी कपड़े तो बदलती ही होगी और कपड़े बदलते समय उसे बहुत कुछ देखने को मिल जाएगा इस बारे में सोचकर ही उसके तन-बदन में उतेजना की लहर उठ रही थी और उसे अपना लंड खड़ा होता हुआ महसूस हो रहा था,,,,।


जिस तरह से सुगंधा सहज रूप से उससे बातें कर रही थी उसे देखते हुए अंकित को लगने ही लगा था कि जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखा था सब कुछ अनजाने में हुआ था इस बारे में उसकी मां को भनक तक नहीं थी तभी तो वह उसके साथ सहज बनी हुई है वरना,,, उस पर गुस्सा दिखाती,,,, अंकित का आकर्षण अपनी मां के लिए बढ़ता जा रहा था और वह भी वह आकर्षण वासना मिश्रित था,,,, अपनी मां की नंगी गांड देखकर अपनी मां के बारे में न जाने कैसे किसी कल्पना करने लगा था और इस कल्पना के चलते ही अंकित जिंदगी में पहली बार मुठ मारने का सुख भी प्राप्त कर लिया था,,,,।

1712083607-picsay
जब जब अंकित बाथरूम के दरवाजे के करीब जाता है या अंदर जाता तब तक उसकी नजर दरवाजे में बने उसे सुराख पर पडती थी,,, और उसे सुराख को देखकर उसके चेहरे पर मादकता भरी मुस्कान बिखरने लगती थी एक दो बार तो वह उस सुराख में से बाथरूम के अंदर झांकने की कोशिश भी किया था कि वाकई में उसे सुराग से सब कुछ दिखाई देता है या नहीं और उसे इस बात से बेहद खुशी हुई थी कि बाथरूम के छोटे से सुराख से उसे अंदर का सब कुछ साफ नजर आता था,,,, लेकिन उसे इंतजार था तो सही समय का सही मौके का और उसे यह मौका नहीं मिल पा रहा था,,,,।




1712032384-picsay
दूसरी तरफ सुगंधा भी सही मौके की ही तलाश में थी क्योंकि जिस दिन से अनजाने में ही उसने अपनी बड़ी-बड़ी गांड के दर्शन अपने बेटे को कराई थी तब से उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी उसे इस बात का भी एहसास हो गया था कि किस तरह से औरतें अपने अंगों को दिखाकर मर्दों को पूरी तरह से पागल बनाते हैं क्योंकि यही हाल अंकित का भी था वह अपने बेटे के चेहरे को बार-बार पढ़ने की कोशिश करती थी उसके नजरों को समझने की कोशिश करती थी और निष्कर्ष यही निकलता था कि,,, वह चोरी छिपे कर नजरों से उसे ही और उसके अंगों को देखने की कोशिश करता था और इस बात से वह अंदर ही अंदर बहुत खुश भी थी लेकिन वह आने वाले पल के लिए उत्सुक थी,जब वो बाथरूम में जाकर अपने बदन से एक करके सारे कपड़ों को उतार कर निर्वस्त्र होगी और उसका बेटा उसके बदन की खूबसूरत अंगों को अपनी आंखों से देखकर मस्त होगा और उसे पाने के लिए ललाईत हो जाएगा,,,, उसे भी उस पल का बेसब्री से इंतजार था,,,, उसे भी सही मौके की तलाश थी,,, लेकिन उसे भी मौका नहीं मिल पा रहा था,,,,।

इस दौरान वह नूपुर से सब्जी मार्केट वाले उसे लड़के के बारे में पूछने की बहुत कोशिश की लेकिन सही मौका उसे भी नहीं मिल पा रहा था उस सवाल को पूछने के लिए वह उसे लड़के के बारे में जानना चाहती थी जो सब्जी मार्केट में उसकी उभरी हुई गांड पर हाथ फेर रहा था और उसकी हरकत पर वह बिल्कुल भी नहीं बोल रही थी बल्कि उसकी हरकत से खुश हो रही थी,,,,,,, वह अपने मन में यही सोच कर परेशान थी कि नूपुर का मासूम चेहरा देखकर बिल्कुल भी नहीं सकता की उसके अंदर दूसरे तरह की औरत छुपी होगी,,,, अपने मन में उठ रहे सवाल के बारे में सोच कर वह अपने बारे में सोचने लगी कि यह सवाल तो उसके ऊपर भी लागू होता है वह भी तो ऐसी बिल्कुल भी नहीं है लेकिन फिर भी अपने ही बेटे के साथ संभोग रत होने के लिए मचल रही है आतुर हो रही है,,,, अपने मन में उठ रहे इस तरह के सवाल का जवाब अपने मन में ही पाकर वह शर्म से पानी पानी हो गई,,,, और वह अपनी जैसी दूसरी औरतों की मजबूरी के बारे में समझने लगी वह नूपुर के पति को देख चुकी थी जो कि नूपुर से कुछ ज्यादा ही उम्र का और मोटी तोंद वाला था,, उसके पति की हालत को देखकर सुगंधा समझ गई थी कि उसका पति किसी भी सूरते हाल में अपनी बीवी को खुश करने लायक बिल्कुल भी नहीं था और इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि नूपुर जैसी खूबसूरत जवान औरत इस तरह के पति को प्राप्त करके बिल्कुल भी खुश नहीं थी ना तो जीवन में और ना ही शरीर सुख में,,, और इसलिए हो सकता है कि अपनी खुशी के लिए अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए उसे जवान लड़की का सहारा लेना पड़ रहा है,,,, इतना तो सुगंध समझ गई थी,,, लेकिन वह उसे लड़की के बारे में जानना चाहती थी कि आखिरकार वह लड़का है कौन उसका कोई रिश्तेदार है पड़ोसी है,,, कौन है जो खुले बाजार में उसके अंगों से इस तरह से छूट ले रहा था और उसे लड़के की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी की सब्जी मार्केट में सब की मौजूदगी में वह लड़का नूपुर की गांड पर हाथ फेर रहा था और वह भी बिना डरे उसे लड़के की हिम्मत को देखकर सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि काश उसका बेटा भी उस लड़के की तरह हिम्मतवाला होता तो आज घर का माहौल कुछ और होता,,,,।

1712032337-picsay
africa by maya angelou summary
धीरे-धीरे करके उस उन्मादक पल के इंतजार में एक-एक दिन गुजर रहे थे,,, लेकिन वह सुहावने पल का मौका मिल नहीं रहा था,,, लेकिन आखिरकार वह पल आ ही गया जिसका दोनों को बेसब्री से इंतजार था,,,, रविवार का दिन था,,,, सुगंधा अंदर ही अंदर उतावली हो रही थी अपने बेटे को अपना जिस्म दिखाने के लिए आखिरकार इस खेल में मजा भी तो उसे बहुत आ रहा था ऐसा पहली बार हुआ था कि उसने खुलकर अपने बेटे को अपनी नंगी गांड के दर्शन कराए थे लेकिन उसे इस बात का एहसास ताकि ऐसा करने में अद्भुत आनंद की प्राप्ति होगी और अभी तक उसे इस तरह का मौका नहीं मिला था लेकिन आज रविवार था और उसे मालूम था कि दोपहर के समय तृप्ति अपनी सहेलियों के घर जाती है और ऐसे में घर में केवल सुगंधा और अंकित ही मौजूद रहते हैं और यही सही मौका था सुगंधा के लिए अपनी जिस्म की नुमाइश करने के लिए,,,,।

दोपहर का समय जैसे-जैसे बीत रहा था वैसे-वैसे सुगंधा के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था,,, क्योंकि दोपहर के 1:00 बज गए थे,,, लेकिन अभी तक त्रप्ती घर से बाहर नहीं गई थी,,,। अंकित को तो एहसास तक नहीं था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है वह सहज रूप से,,, कुर्सी पर बैठकर पढ़ाई कर रहा था लेकिन तिरछी नजर से अपनी मां को भी देख ले रहा था,,,, उसके अंगों के उतार-चढ़ाव को,,, नितंबों के घेराव को,,, और चुचीयों की शोभा बढ़ा रहे दोनों खरबूजे की तरफ चोर नजरों से देख ले रहा था और इस बात को सुगंधा अच्छी तरह से समझ रही थी वह अपने बेटे की चोर नजरों से अच्छी तरह से वाकिफ थी,,, और इस बात से वह काफी खुश भी थी बस उसे इंतजार था अपनी बेटी के घर से बाहर जाने का क्योंकि वह समझ रही थी कि आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी,,, सुगंधा बार-बार बाथरूम के दरवाजे की तरफ भी देख ले रही थी क्योंकि दरवाजे का वह छोटा सा सुराख अभी भी उसी तरह से था उसे बंद करने का कोई भी उपाय नहीं किया गया था और इसी से सुबह समझ गई थी कि उसके बेटे के मन में क्या चल रहा है।

1711780860-picsay
सुगंधा बार-बार अंकित की आंखों के सामने से होकर गुजर रही थी और न जाने कहां से उसने इतनी हिम्मत आ गई थी कि उसके सामने अपनी बड़ी-बड़ी गदराई गांड को कुछ ज्यादा ही मटका कर चल रही थी और अंकित अपनी मां की इस कामुक चाल पर पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी नज़रें बार-बार अपनी मां की गांड पर चली जा रही थी और सुगंध कुछ ज्यादा ही साड़ी को कसके अपनी कमर से बंधी थी जिसे नितंबों का आकार और उभार एकदम साफ नजर आता था,,,,।

बाप रे आज तो कुछ ज्यादा ही गर्मी है ऐसा लगता है नहाना पड़ेगा,,,,
(सुगंधा जानबूझकर साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे पर हवा देते हुए बोल रही थी और अपने बेटे को नहाने की बात कह कर इशारा कर रही थी,,, अंकित भी अपनी मां के मुंह से नहाने वाली बात सुनकर एकदम से गर्म हो गया था लेकिन उसे इस बात का अंदाजा बिल्कुल भी गई था कि उसकी मां जानबूझकर इस तरह की बातें उससे कर रही है ताकि वह बाथरूम के दरवाजे से अंदर झांकने की कोशिश करें उसे तो ऐसा वैसा ही लग रहा था कि जैसे यह सब कुछ सहज रूप से हो रहा है उसे इसमें अपनी मां की कोई भी चाल नजर नहीं आ रही थी,,, लेकिन फिर भी हम अपनी मां की बात को सुनकर जवाब देते हुए बोला,,,)

हां मम्मी तुम ठीक कह रही हो आज कुछ ज्यादा ही गरमी है,,,,,,।


1711780416-picsay
और ऐसी गर्मी में तृप्ति ना जाने क्यों अपनी सहेलियों से मिलने के लिए जाती है शाम को भी तो जा सकती है,,,,(ऐसा कहते हुए वह जान बुझ कर जोर से तृप्ति को आवाज लगाते हुए बोली) तृप्ति बेटा आज बहुत गर्मी है बाहर मत जाना,,,,,(सुगंधा जानबूझकर इस बात को कहकर तृप्ति को याद दिलाना चाह रही थी कि उसे इस समय बाहर जाना होता है और तृप्ति अपनी मां की बात सुनकर अपने कमरे से ही आवाज लगाते हुए बोली,,,)

नहीं मुझे तो जाना ही होगा मम्मी,,,, सहेली के घर जाने के बाद मुझे कोचिंग क्लास भी तो जाना है,,,,।

अरे शाम को चली जाना,,,,

नहीं नहीं मुझे अभी जाना है,,,,(और इतना कहने के साथ ही वहां अपने कमरे में से हाथ में बैग लेकर बाहर आ गई और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) जरूरी है जाना,,,,।

अरे शाम को चली जाना,,,,
(सुगंधा अपनी बेटी को रोकने के लिए ऊपरी मन से बोल रही थी जबकि वहां यही चाहती थी कि उसकी बेटी इस समय चली जाए,,,,, अपनी मां की बात सुनकर तृप्ति बोली,,,)

कोचिंग क्लास अटेंड करना बहुत जरूरी है इसलिए जाना ही होगा,,,

चल ठीक है लेकिन दुपट्टा सर पर रखना धूप बहुत है,,,



1711675248-picsay
ठीक है मम्मी मैं चली जाऊंगी,,,,,(इतना कहने के साथ ही तृप्ति घर से बाहर चली गई और सुगंधा दरवाजे को बंद कर दी,,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि शाम को 6:00 तक का तृप्ति घर पर आने वाली नहीं थी और इस बीच घर में केवल वह और उसका बेटा ही रहने वाले थे बाथरूम में अपना अंग का प्रदर्शन करने का चाहत वह इस समय के दौरान पूरा कर सकती थी इसलिए,,, कुछ देर के लिए वह ड्राइंग रूम में आकर बैठ गई जहां पर उसका बेटा बैठकर पढ़ाई कर रहा था पढ़ाई क्या कर रहा था वह अपनी आंखों से अपनी मां की जवानी भरी अंगों के पन्ने को अपनी आंखों से ही पलट रहा था,,,,। पंखा अपनी गति से चल रहा था लेकिन आज वातावरण से ज्यादा गर्म सुगंधा की जवानी थी जिसकी वजह से उसके माथे से पसीना टपक रहा था ,,,। और वह अपनी साड़ी के आंचल से अपने माथे के पसीने को साफ करते हुए बोली,,,,।

आज तो बिल्कुल भी राहत नहीं है मुझे नहाना ही पड़ेगा,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई अंकित अपनी मां की बातों को सुन रहा था उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी जब वह अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई थी क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि उसकी मां बाथरूम में नहाने के लिए जाएगी,,,,, और इतना कहने के साथ ही सुगंधा,, ड्राइंग रूम से बाहर चली गई लेकिन जाते-जाते तिरछी नजर करके अपने बेटे की हरकत को देखने लगी और उसे इस बात की खुशी थी कि उसे जाते हुए उसका बेटा उसको ही देख रहा था लेकिन सुगंधा के तन बदन में इस बात से और ज्यादा उत्तेजना भारी आग लगने लगी कि उसका बेटा उसे कम लेकिन उसके नितंबों की तरफ कुछ ज्यादा ही घुर कर देख रहा था,,,,, सुगंधा ड्राइंग रूम से बाहर निकल गई थी अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि कुछ ही देर में उसकी मां बाथरूम के अंदर जाने वाली थी और बाथरूम में एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाने वाली थी अंकित को इस बात का डर था कि कहीं उसकी चोरी पकड़ी गई तो क्या होगा लेकिन वह अपनी लालच को दबा भी नहीं पा रहा था आज वह अपनी मां को नंगी होते हुए देखना चाहता था उसके खूबसूरत अंगों को अपनी आंखों से देखना चाहता था और यह सब तभी हो सकता था जब वह खुद बाथरूम के दरवाजे तक जाकर उसे सुराख से अंदर देखने की कोशिश करता तब और इसके लिए उसे हिम्मत की जरूरत थी और जहां वासना का असर होता है वहां हिम्मत अपने आप ही आ जाती है और ऐसा ही अंकित के साथ भी हो रहा था कुछ देर बाहर खड़ी रहने के बाद सुगंधा दरवाजे को इस तरह से खोली कि उसकी आवाज अंकित के कानों तक साफ सुनाई दे,,,, और बाथरूम में प्रवेश करने के बाद दरवाजे को भी इतनी जोर से बंद की ताकि उसकी आवाज भी उसके बेटे के कानो तक आराम से पहुंच जाए,,,, और जैसा वह सोच रही थी ऐसा हुआ भी दरवाजा के खुलने और बंद होने में अंकित का दिन बड़े जोरों से धड़कने लगा मानो के जैसे कोई उसके दिल के दरवाजे को ही बंद कर रहा हो कुछ देर तक बैठे रहने के बाद अंकित से रहा नहीं गया आखिरकार वह अपनी हिम्मत जुटा कर वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,, और धीरे-धीरे दबे कदमों से वह देखते ही देखते बाथरूम के दरवाजे तक पहुंच गया,,,,।



1711589457-picsay
cecil frances alexander
दोनों तरफ से आग बराबर लगी हुई थी,,, जितनी उत्सुकता अंकित कोठी अपनी मां को नग्नावस्था में देखने की उतनी ही ज्यादा उतावली सुगंध भी थी अपने बदन से कपड़े उतार कर नंगी होकर अपने बेटे को अपना अंग दिखाने के लिए,,,, बाथरूम में घुसने के बाद वह कुछ देर तक उसी तरह से खड़ी रह गई थी वह,,, वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा बॉथरूम तक आता है या नहीं और न जाने उसे क्यों अंदर से एहसास हो रहा था कि उसका बेटा बाथरूम के दरवाजे तक जरूर आएगा इसीलिए उसने अभी तक अपने बदन से कपड़े उतारी भी नहीं थी ,,,बस अपने बेटे के करीब आने का इंतजार कर रही थी,,,, इसीलिए वह अपने बेटे की चहल कदमी पर कान गड़ाए खड़ी थी,,, और जैसे ही उसे हल्की सी अपने बेटे के कदमों की आहट सुनाई थी वह एकदम से सतर्क हो गई और उसके कदमों की आहट को बाथरूम के दरवाजे के करीब महसूस करने लगी,,,।

धड़कते दिल के साथ अंकित बाथरूम के दरवाजे के करीब खड़ा हो गया था लेकिन उसे बाथरूम के सुराख से अंदर झांकने की हिम्मत नहीं हो रही थी० उसका दिल बड़ी जोरों से लड़ रहा था एक तरफ वह अपने इस लालच को रोक भी नहीं पा रहा था वहीं दूसरी तरफ उसे डर भी लग रहा था कि कहीं उसकी मां को पता चल गया तो गजब हो जाएगा,,,, वह कुछ देर खड़े होकर इस बारे में सोच रहा था कि,,, वह सुराख में से अंदर झांके या चला जाए,,, उसके अंतर्मन में मन मंथन चल रहा था वह किसी निष्कर्ष पर पहुंच नहीं पा रहा था लेकिन उसके दिलों दिमाग पर वासना पूरी तरह से अपना असर दिख रहा था और आखिरकार उपासना की जीत हुई और वह मजबूर हो गया बाथरूम के सुराख से अंदर झांकने के लिए,,, और वह धीरे से अपने घुटनों के बल बैठ गया वह पूरी तरह से निश्चित था किसी के आने के लिए क्योंकि वह जानता था कि समय घर पर कोई नहीं आने वाला था दरवाजा बंद था और उसकी बड़ी बहन शाम से पहले आने वाली नहीं थी इस समय घर में केवल उसकी मां और वह खुद मौजूद था और उसकी मां बाथरूम के अंदर थी अंदर से उसे किसी भी प्रकार की आहट की आवाज नहीं आ रही थी और अंदर खड़ी सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि जिस तरह की आहट उसे अंदर सुनाई दे रही थी उसे साफ महसूस हो रहा था कि जैसे उसका बेटा अपने घुटनों के बल बैठ रहा हो,,,,।

1711588541-picsay
मां बेटे दोनों अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर लिए थे,,,, अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हुई जा रही थी जिंदगी में पहली बार वह इतनी हिम्मत कर रहा था अपनी मां को नग्न अवस्था में देखने के लिए, उसे अपने बदन से कपड़े उतारते हुए देखने के लिए हालांकि,,,वह पहले भी अपनी मां की गोरी गोरी गांड के दर्शन कर चुका था लेकिन वह अनजाने में हुआ था,,,, उसे समय तो वहां जाने में ही आकर दरवाजे पर खड़ा हो गया था और उसकी आंखों के सामने मदहोश कर देने वाला दृश्य अपने आप ही दिखाई देने लगा था लेकिन यहां तो उसे अपनी मां का गोरा नंगा बदन देखने के लिए हिम्मत दिखाना होगा अपनी मर्दानी ही दिखानी होगी तब जाकर उसे बेहतरीन मदहोश कर देने वाला नजारा देखने को मिलेगा और इसीलिए वह अपने मन को पूरी तरह से तैयार कर चुका था,,,,।

बाथरूम के अंदर खड़ी सुगंध भी बाथरूम के उस छोटे से सुराग की तरफ नजर गडाएं खड़ी थी,, अभी तक वह बाथरूम के अंदर ज्यों की त्यों थी,,, अपने बदन से एक भी कपड़े उसने उतारे नहीं थे,,,, लेकिन जैसे ही उसे महसूस होगा कि बाथरूम का वह छोटा सा सुराख पर हल्की सी परछाई महसूस हो रही है वह समझ गई कि उसके बेटे ने बाथरूम के उस छोटे से सुराख पर अपनी आंखों को जमा दिया है,,, और उसका सोचना सही था धड़कते दिल के साथ अंकित अपनी आंखों को उसे छोटे से सुराख पर जमा दिया था अंदर देखने के लिए,,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था कुछ ही पल में उसे बाथरूम के अंदर का दृश्य एकदम साफ नजर आने लगा बाथरूम थोड़ा लंबाई में ज्यादा नहीं लेकिन फिर भी ठीक-ठाक था उसे,,, अपनी मां संपूर्ण रूप से दिखाई दे रही थी ऊपर से नीचे तक सब कुछ साफ नजर आ रहा था और यही तो वह चाहता था और पहले भी उसे छोटे से सुराख की जांच पड़ताल कर लिया था कि उस छेद से अंदर का कुछ दिखाई देता है कि नहीं,, लेकिन उसकी किस्मत बड़ी तेज थी सबको साथ दिखाई दे रहा था उसे यह दिखाई दे रहा था कि उसकी मां बाथरूम में खड़ी थी और इस बात से हैरान था कि अभी तक उसने अपने कपड़े उतारे क्यों नहीं थे,,,, और इस बात को सुगंधा भी अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि वह काफी देर से बाथरूम के अंदर थी लेकिन अभी तक उसके बदन से एक भी वस्त्र उतरे नहीं थे,,, और इसीलिए वह चाहती थी कि उसके बेटे को जरा भी सपना होगी जो कुछ भी हो रहा है सब उसकी सोच के मुताबिक हो रहा है इसलिए वहां अपने बेटे का ध्यान भटकाने के लिए अपने हाथ में ब्रस ले ली थी और उसे पर टूथपेस्ट लगाकर अपनी दांतों को घिस रही थी और उसकी चालाकी से अंकित को जरा भी शक नहीं हुआ उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां इतनी देर से ब्रश कर रही थी,,,,।

1711515587-picsay
सुगंधा का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था अभी तक उसने अपना प्रदर्शन शुरू भी नहीं किया था लेकिन अंक प्रदर्शन के एहसास से ही वह पूरी तरह से मत भेज रही थी और उसकी इस मस्ती का सागर उसकी दोनों टांगों की पतली दरार से उभर रहा था,,,, उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,, चोरी छुपे अपनी मां को देखने का भी एक अलग सुख था जिसका एहसास अंकित बराबर ले रहा था अपनी मां को बाथरूम में खड़ी होकर ब्रश करता हुआ देखकर भी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी और जिसका आंसर सीधा उसके लंड पर हो रहा था जो कि एकदम से टनटना कर खड़ा हो गया था,,,,,। सुगंधा भी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसके पास भी पर्याप्त समय है इसलिए वह कोई भी जल्दबाजी नहीं करना चाहती थी वह बड़े आराम से अपने बेटे को अपना हर एक अंग दिखाना चाहती थी ताकि उसका बेटा उसके खूबसूरत अंगों को देखकर पूरी तरह से बावला हो जाए और उसे प्राप्त करने के लिए थोड़ी हिम्मत दिखाएं,,,,।




1711305751-picsay
a poem about food
ब्रश कर लेने के बाद सुगंधा साफ पानी से अपना मुंह धो कर साफ कर ली और फिर शुरू की अपना अंग प्रदर्शन का पहला अध्याय वह अपनी साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर से नीचे गिरा दी और उसे अपनी कमर से खोलना शुरू कर दी यह देखकर अंकित की हालत खराब होने लगी वह समझ गया कि उसकी आंखों के सामने उत्तेजना से भरा होगा नाटक शुरू हो गया है जिसकी नायिका इस समय थी उसकी मां जो कि किसी हीरोइन से कम नहीं थी,,,, और इस बात को भी समझ रहा था कि उसका इस तरह से हिम्मत दिखा कर बाथरूम के दरवाजे से अंदर झांकना निरर्थक नहीं था अंदर का दृश्य उसकी हिम्मत को पूरी तरह से सार्थक कर रहा था,,,,। आज तक उसने उसकी जानकारी में कभी भी अपनी मां को इस अवस्था में नहीं देखा था उसे कपड़े उतारते हुए नहीं देखा था लेकिन आज माहौल और समय बदल चुका था आज वह जानबूझकर अपनी मां को इस अवस्था में देखने के लिए मजबूर हो गया था उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,,,। और अंदर खड़ी सुगंध धीरे-धीरे अपनी कमर से बड़ी हुई साड़ी को खोलकर वही बाथरूम में कोने में रख दी और बाथरूम में हुआ केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी इस अवस्था में भी वह बाला की खूबसूरत लग रही थी गोरा बदन बाथरूम के अंदर चमक रहा था,,,, वैसे तो बाथरूम में बल्ब नहीं था लेकिन बाथरूम के अंदर की खिड़की पीछे की तरफ खुलती थी जो कि ऊपर की तरफ से खुली होने की वजह से बाहर की धूप की रोशनी में पूरा बाथरूम जगमगा रहा था और अंकित को सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,,।



1711305638-picsay
अंकित बड़े गौर से अंदर के दृश्य को देख रहा था उसकी सांसे हौले हौले से चल रही थी और वह किसी भी प्रकार की आवाज किए बिना अंदर के नजारे का आनंद लूट रहा था उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां जिस तरह से पेटीकोट को बंधी हुई थी और पेटीकोट में जिस तरह से कमर के हिस्से के बगल में हल्का सा पेटिकोट कटा हुआ होता है वहां का गोरा बदन देखकर उसके लंड की हरकत बढ़ने लगी थी क्योंकि उसे पेटिकोट के उसे हिस्से में से अपनी मां की जांघों को जोड़ने वाला त्रिकोण आकार की हम किसी लकीर दिखाई दे रही थी जो की चड्डी पहने होने के बावजूद भी साफ नजर आ रही थी उसे हल्की सी पतली लकीर को देखकर अंकित का मन मचलने लगा था उसे एहसास होने लगा था कि वह पतली लकीर कौन सी जगह पर जाकर खत्म होती होगी क्योंकि वह औरतों के उसे अंग के बारे में जान चुका था क्योंकि उसके दोस्त ने नंगी गंदी किताब जो दिखा दिया थाऔर वहां अच्छी तरह से जानता था की औरतों की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार कैसी दिखती है लेकिन अभी तक उसने अपनी आंखों से असलियत में उसे अंग को नहीं देखा था लेकिन आज उसे लग रहा था कि आज उसकी मन की मुराद पूरी हो जाएगी,,,,।


1711305589-picsay
अंकित बाथरूम के दरवाजे के पास घुटनों के बाल बैठा हुआ था और सब कुछ बड़ी खामोशी से चल रहा था अंदर सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा अंदर के दृश्य को बराबर देख रहा है क्योंकि उसे हल्की सी परछाई नजर आती थी उस पतले से सुराख से,,,,। सुगंधा भी पहली बार ही इतनी हिम्मत दिखा रही थी क्योंकि पहली बार जिस तरह से उसने अपने बेटे को अपने नितंबो के दर्शन कराए थे वह सब कुछ अनजाने में हुआ था,,,, वह कोई जानबूझकर अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करने नहीं बैठ गई थी वह तो सहज रूप से घर के पीछे गलती दरवाजा बंद करने के लिए लेकिन उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी इसलिए वह अपनी साड़ी कमर तक उठकर उसी कोने में पेशाब करने के लिए बैठ गई थी उसे क्या मालूम था कि उसी समय उसका जवान बेटा उधर आ जाएगा और उसे पेशाब करते हुए देख लेगा,,,,। लेकिन उसे दिन जो कुछ भी अनजाने में हुआ था आज सुगंध जानबूझकर करना चाहती थी और उसे दिन भी उसका बेटा अनजाने में उसे जगह पर पहुंच गया था लेकिन आज वह भी जानबूझकर बाथरूम के दरवाजे के सुराख से उसे देख रहा था इसलिए दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी,,,, सुगंधा की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी,,,, इस तरह की हरकत उसने अपने पति के सामने ही की थी लेकिन आज माहौल ऐसा बन चुका था कि आज उसे अपने बेटे के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी होना पड़ रहा था और वह भी अपनी खुशी से ना कि किसी दबाव से,,,।

1711305436-picsay
सुगंधा का दिल बड़ी जोरों से धड़क रहा था,,,, वह दरवाजे के सामने मुंह करके अपने ब्लाउज का बटन खोल रही थी और जैसे-जैसे उसकी नाचे को उंगलियां ब्लाउज के बटन पर हरकत कर रही थी वैसे-वैसे अंकित की हालत खराब होती जा रही थी उसे बाथरूम के अंदर सब कुछ साफ नजर आ रहा था और वह उतावला हुआ जा रहा था अपनी मां की खूबसूरत अंगों को देखने के लिए उसके दोनों दशहरी आम को देखने के लिए जिसे पकड़ कर दबाने की इच्छा वह न जाने कब से अपने मन में दबे हुए था,,,,।
सुगंधा एक-एक करके अपने ब्लाउज के बटन को खोलती चली जा रही थी अंकित यही समझ रहा था कि उसे क्या मालूम है कि बाहर चोरी छुपे उसका बेटा उसकी हरकत को देख रहा है जबकि उसकी मां को सब कुछ पता था यह सब उसकी मां की ही चाल थी जिसमें वह पूरी तरह से शामिल हो चुका था और उसे पता भी नहीं था,,,,।



1711213514-picsay
देखते ही देखते सुगंधा अपने ब्लाउज के सारे बटन को खोल चुकी थी,,,। ब्लाउज के बटन के खुलते ही उसके पीले रंग की ब्रा एकदम साफ दिखाई दे रही थी गोरा बदन पीले रंग की ब्रा में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था अपनी मां की पीले रंग की ब्रा को देखते ही अंकित की आंखों में वासना का तूफान नजर आने लगा वह अपनी मां की ब्रा को फटी आंखों से देख रहा था पर उसकी मां अपने ब्लाउज के दोनों पत्तों को अपने दोनों हाथों में पड़कर उसे अपनी गोरी बाहों से अलग कर रही थी और देखते ही देखते अपने ब्लाउस को उतार कर वह अपने साड़ी के ऊपर फेंक दी जो की कोने में पड़ी हुई थी,,,,,, सुगंधा की भरी हुई छातिया पीले रंग के छोटे से ब्रा में बिल्कुल भी समा नहीं पा रही थी,,,, वह अपने छोटे से ब्रा में अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों को बड़ी मुश्किल से कैद करती थी और वह अपनी साइज से दो नंबर के कम ही माप के ब्रा को पहनती थी ताकि उसकी चुचियों का कसावपन बरकरार रहे,,,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा ही समय उसकी चूचियों की तरफ देख रहा होगा उसकी ब्रा को देख रहा होगा और मन ही मन मस्त हो रहा होगा क्योंकि वह बिल्कुल भी अपने बेटे से हाथ छुपाना नहीं चाहती थी इसीलिए तो बाथरूम के दरवाजे की तरफ मुंह करके अपने कपड़ों को उतार रही थी और वाकई में बाथरूम के बाहर चोरी चुपके से अंदर का दृश्य देख रहा अंकित पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था अपनी मां को इस रूप में देखकर उसके बटन पर केवल पेटिकोट थी और पीले रंग की ब्रा थी और उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी मां की भारी भरकम दशहरी आम छोटे से ब्रा में बड़ी मुश्किल से कैद थी और वह दोनों उस कैद से बाहर आने के लिए तड़प रहे थे,,,,, अंकित अपने आप से ही बात करते हुए अपने मन में बोल रहा था,,,, जल्दी से उतर अपनी ब्रा मैं तेरी चूचियों को देखना चाहता हूं मैं देखना चाहता हूं कितनी बड़ी-बड़ी है,,,,,।



1711213514-picsay
copy and paste signs
और ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंधा अपने बेटे की मां की बात को अच्छी तरह से सुन रही हो और वह जल्दी से अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर के अपनी ब्रा के हकों को खोलने लगी लेकिन इस समय वह अपनी नंगी चिकनी पीठ को बाथरूम के दरवाजे की तरफ कर दी क्योंकि वह जानबूझकर अपने बेटे को दिखाना चाहती थी की औरतों की ब्रा का हो कैसे खोला जाता है और इस समय अंकित अपनी मां की चिकनी मखमली पीठ को देखकर पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था उसके लंड कि ऐंठन बढ़ती जा रही थी,,,,, और उसे हिसाब महसूस हो रहा था कि उसकी मां किस तरह से अपनी उंगलियों को हरकत देते हुए पर जाकर हमको खोल रही थी उसी समय उसे अपनी मां के नितंबों का उभार भी पेटीकोट में एकदम साफ नजर आ रहा था मन तो कर रहा था कि दरवाजा खोलकर वह अंदर घुस जाए और अपनी मां की खूबसूरत बदन से खेलना शुरू कर दे लेकिन इतनी हिम्मत उसमें अभी नहीं थी,,,, और देखते ही देखते अपने बेटे की आंखों के सामने ही सुगंधा अपने पर के हक को खोल दी थी और जैसे ही ब्रा का हक खोली वह तुरंत फिर से दरवाजे की तरह मुंह करके खड़ी हो गई क्योंकि ब्रा का हुक खुलते ही उसकी ब्रा की कटोरी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर से एकदम ढीली हो गई और ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे बड़ी-बड़ी दशहरी आम के ऊपर से उसका छिलका अलग हो रहा हो इस तरह से सुगंधा,, अपनी ब्रा के दोनों कप को अपने हाथों से अपनी चूची पर से हटाकर उसकी डोरियों को अपनी गोरी गोरी बाहों में से बाहर निकाल दी,,,और अपनी ब्रा को बाथरूम के कोने में फेंक दी,,,,। इस समय अंकित की मां जिस अवस्था में बाथरूम के अंदर खड़ी थी इस बारे में कभी अंकित ने कल्पना भी नहीं किया था सच में उसकी मां की चूचियां एकदम पके हुए दशहरी आम की तरह थी,,, जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह उसे पकड़ने के लिए अपनी हथेली में दबोचने के लिए मचल रहा था,,,,,, अंकित अपनी मां को देखा ही रह गया बाथरूम के अंदर का दृश्य इतना गर्म हो जाएगा उसे अहसास तक नहीं था वातावरण की गर्मी से ज्यादा उसे अपनी मां की जवानी की गर्मी परेशान कर रही थी,,,, सुगंधा भी जी भर कर अपने बेटे को अपनी चूचियों के दर्शन करना चाहती थी इसीलिए इस अवस्था में दरवाजे के सामने मुंह करके खड़ी रह गई थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा जो बाथरूम के सुराख से आंखें लगाए हुए बैठा है इस समय उसकी चूचियों को देखकर पागल हो रहा होगा और यह सही भी था,,,,। वास्तव में उसकी हालत खराब हो जा रही थी अपनी मां की नंगी चूची को देखकर उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था उत्तेजना के मारे उसके कान के दोनों पट एकदम लाल हो गए थे,,,,।


1711213209-picsay
सुगंधा भी पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी अपने जवान बेटे की आंखों के सामने अपने कपड़े उतारते हुए उसे अत्यधिक उत्तेजना का एहसास हो रहा था जिसका असर उसे सीधा अपनी बुर की गहराई में महसूस हो रहा था उसे अपनी बुर में खुजली होती हुई महसूस हो रही थी लेकिन वह जानती थी कि यह खुजली खुजलाने से मिटाने वाली नहीं थी इसे मिटाने के लिए मोटा तगड़ा लंड की जरूरत थी जो कि अभी उसके नसीब में नहीं था,,,,। अपने बेटे की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ाने के लिए सुगंधा अपने दोनों हथेलियों को अपनी चूची पर रखकर उसे हल्के से दबा दी,,,, और उत्तेजना के मारे उसके चेहरे के भाव एकदम से बदल गए और यह नजारा देखकर तो अंकित के होश उड़ गए उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी मां एकदम चुदवासी हुए जा रही थी,,,, और औरत का यह भाव उसे पहले नहीं मालूम था लेकिन जब से उसके दोस्त ने नंगी औरतों की गंदी किताब उसे दिखाया था तब से उसे बहुत कुछ समझ में आ गया था क्योंकि इस तरह का हाव-भाव को उसने गंदी किताब में छपी औरतों के चेहरे को देखा था,,,,, और बिल्कुल वैसा ही हाव भाव इस समय उसकी मां के चेहरे पर नजर आ रहा था,,,,

सुगंधा धीरे-धीरे अपनी हथेलियों का कसाव अपनी चूचियों पर बढ़ा रही थी वह जानबूझकर अपने बेटे को यह सब दिख रही थी वह अपने बेटे को जताना चाहती थी कि वह अंदर से कितनी प्यासी है,,, जैसे-जैसे अपनी मां की हथेलियां को उसकी ही चूची पर उसका कसाव बढ़ता हुआ देख रहा था वैसे-वैसे अंकित की हालत खराब होती जा रही थी उसके मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे इससे पहले वह शायद इन सब का मतलब नहीं जानता था अगर वह अपने दोस्त के द्वारा बताई गई गंदी किताब को ना देखता तो अपनी मां के मन की भावना को वह समझ नहीं पता अपनी मां की हरकत को देखकर वह समझ रहा था कि वह अंदर से बहुत ज्यादा मस्त हो रही है,,,, और यह सब सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे को दिखा रही थी,,, अपने बेटे की आंखों के सामने इस तरह की हरकत करने में उसे शर्म तो महसूस हो रही थी लेकिन न जाने की उत्तेजना के महासागर में वह डुबकी भी लग रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से लगातार मदन रस का बहाव हो रहा था,,,।

कुछ देर तक सुगंधा अपनी हरकत को इसी तरह से जारी रखते हुए अपने बेटे की भावना में कामाग्नि का तड़का लगा रही थी,,, और उसकी यह हरकत वाकई में अंकित के तन बदन में आग लग रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था,,,, सुगंधा पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी अगर इस समय उसका बेटा दरवाजे को खोलने के लिए कहता है और यह कहता कि मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं तो सुगंधा इसमें बिल्कुल भी देरी न करती और दरवाजे को खोलकर उसे बाथरूम में ले लेती और फिर उसके कड़क अंग को अपने कोमल अंग में उसकी गहराई में लेकर मस्त हो जाती,,,,।


1710896476-picsay
अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर अपनी प्रसन्नता के भाव को और उत्तेजना के भाव को बिल्कुल भी छुपा नहीं पा रहा था उसके कान के दोनों पट एकदम लाल हो चुके थे,,, लंड की नसों मैं रक्त का प्रवाह इतनी तेजी से हो रहा था कि उसमें अद्भुत अकड़न सी आ गई थी,,,, उत्तेजना के मारे उसकी सांसे गहरी चल रही थी और वह अपनी नजरों को बाथरूम के उसे छोटे से छेद से हटा नहीं पा रहा था क्योंकि उसे मालूम था कि कुछ ही देर में बाथरूम के छेद से उसकी मां का गुलाबी छेद नजर आने वाला है,,,। कुछ देर अपनी चूचियों से खेलने के बाद वह अपने पेटिकोट की डोरी पर अपना हाथ रख दे और अपनी नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए उसकी डोरी को पकड़ ली लेकिन वह अपनी पेटिकोट की डोरी को खींचकर अपनी पेटीकोट को उतार दी इससे पहले पेटिकोट के उस त्रिकोण कटे हुए हिस्से में अपनी दो उंगली डाल दी और फिर उंगली के सहारे से अपनी बुर वाली जगह को हल्के हल्के सहलाना शुरू कर दी,,, हालांकि अंकित को अपनी मां की दो उंगलियां पूरी तरह से नजर नहीं आ रही थी लेकिन पेटिकोट के ऊपरी हिस्से पर उसकी दोनों उंगलियों हरकत करती हुई उभर कर अपनी होने का एहसास कर रही थी और अपनी मां की हरकत पर तो अंकित पूरी तरह से फिदा हो गया,,,,, और उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी मां पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी है,,,,।

सुगंधा चाहती तो दीवाल की तरफ मुंह करके खड़ी हो जाती लेकिन इस तरह से वह अपनी जवानी का प्रदर्शन पूरी तरह से नहीं कर पाती क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा बाथरूम के दरवाजे के बाहर बैठकर उसके हसीन हुस्न को देख रहा है और इसीलिए सुगंधा अपने बेटे को अपनी जवानी के जाल में फंसाने का कोई भी मौका गवाना नहीं चाहती थी,,,, कुछ देर तक वह अपनी बर वाले हिस्से को पेटिकोट के कटे त्रिकोण वाले हिस्से में अपनी उंगली को डालकर उसे सहलाती रही और फिर धीरे से अपनी पेटिकोट की डोरी को एक झटके से खींचकर उसकी गिठान को खोल दी,,, उसकी कमर पर कई हुई पेटिकोट एकदम से ढीली हो गई लेकिन पेटिकोट कमर पर टंगी भी रह गई क्योंकि नितंबों का उभार उसे टिकने का सहारा दिया हुआ था जिसे सुगंधा खुद अपने दोनों हाथों की उंगलियां से ढीली करते हुए उसे कमर के ऊपर से ही उसे अपनी ऊंगलियो से नीचे छोड़ दिया और किसी नाटक के परदे की तरह उसका पेटिकोट भरभरा कर उसके कदमों में जाकर गिर गया,,, और सुगंधा संपूर्ण रूप से नंगी हो गई केवल उसकी बेस कीमती का जाने को छुपाने के लिए उसके बदन पर पीले रंग की पेटी टिकी हुई थी और वह भी आगे से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी क्योंकि उसकी बुर से लगातार मदन रस बह रहा था,,,,।

1710896251-picsay
अंकित के कोमल मन पर बार-बार उसकी मां का हुस्न उसकी गर्म जवानी छुरिया चला रही है,,, पहली बार वह अपनी मां को इस तरह से नग्नावस्था में देख रहा था पहली बार हमसे इस बात का एहसास हो रहा था की साड़ी में जितनी खूबसूरत उसकी मां दिखाई देती है उसे भी ज्यादा खूबसूरत कपड़े उतार देने के बाद नंगी हो जाने के बाद दिखाई देती है ऐसा लगता है कि जैसे स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा बाथरूम के अंदर नहाने की तैयारी कर रही हो,,,, छोटी सी पीले रंग की चड्डी में अपनी मां का खुश ना देख कर उसका गोरा बदन देखकर अंकित से रहा नहीं जा रहा था पेट के अंदर उसका लंड दर्द करने लगा था और वह पेंट के ऊपर से अपने लंड को जोर-जोर से दबा रहा था,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड़ को देखकर वह मूठ मारना सीख गया था,,,, और इस समय तो उसकी आंखों के सामने उसकी मां पूरी तरह से नंगी होने जा रही थी ऐसे में अंकित को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करेगा,,,,,। सुगंधा दरवाजे की तरफ मुंह करके खड़ी थी अपने बेटे को वह पूरी तरह से अपने नंगे बदन के दर्शन कर रही थी और वह अपने बेटे की हालत को और ज्यादा खराब करते हुए अपनी हथेली को पूरी तरह से पीले रंग की पेंटी पर रख दी और अपनी बुर को अपनी हथेली से दबाते हुए मसलना शुरू कर दी,,,। अंकित को अपनी मां की हरकत और उसके चेहरे का हाव-भाव एकदम साफ दिखाई दे रहा था उसके हवा में और गंदी किताब की हीरोइन के हाव भाव में बिल्कुल भी अंतर नहीं था आज चोरी छिपे अंकित अपनी मां का एक नया रूप देख रहा था,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि उसकी मां इस तरह की हरकत करती होगी लेकिन आज उसकी आंखों के सामने उसका भ्रम टूटता हुआ नजर आ रहा था,,,,।

सब कुछ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे जल्दबाजी की इच्छा दोनों में नहीं है दोनों हौले हौले से इस मदहोशी भरे पल का आनंद लूट रहे थे लेकिन अब समय आ गया था सुगंधा को नंगी होकर अपने बेटे की जवानी पर कब्जा करने का,,, सुगंधा इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा दूसरे लड़कों से बिल्कुल विपरीत था वह इन सब मामलों में बिल्कुल भी रुचि नहीं लेता था लेकिन उसकी ही वजह से आज उसका बेटा उसके हुस्न का कायल हुआ जा रहा था,,,, सुगंधा कोई समय महसूस हो रहा था कि वाकई में औरत की जवानी उसका नंगा बदन किसी भी मर्द को घुटनों पर लाने के लिए सक्षम होता है और इस समय यही हो भी रहा था वह अपने सीधे-साधे बेटे को एक जवान मर्द बनाने की ओर लिए जा रही थी,,,। और इसीलिए वह अपनी पीली चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर धीरे-धीरे नीचे सरकाना शुरू कर दी,,,, इस तरह की हरकत उसने मदहोशी भरे पल में भी अपने पति के सामने नहीं की थी हालांकि वह अपने वस्त्र उतार कर अपने पति के सामने नंगी जरूर होती थी लेकिन इतनी मदहोशी से कभी नहीं,,,, लेकिन आज अपने बेटे के सामने वह सब कुछ करने पर मजबूर हो चुकी थी,,,, ।

अपने दोनों हाथों में अपनी चड्डी के दोनों छोर को पकड़ कर वह उसे नीचे सरकाने की पूरी तैयारी में थी,,, थोड़ा सा वह नीचे सरका भी दी थी,,,, बाहर से देख रहा हूं अंकित पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डुबकी लगा रहा था उसका मुंह खुला का खुला था वह सांस को मुंह से ले रहा था उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी उसका लंड पेट के अंदर से मचल रहा था बाहर आने के लिए सुगंधा अपने बेटे को अपनी बुर बड़े अच्छे से दिखाना चाहती थी,,,। इसलिए बाथरूम में टंगी टावल को अपने हाथ में लेकर वह थोड़ा दरवाजे के और करीब आई और उसे दूसरी तरफ टांग दी वह सिर्फ एक बहाने से अपने बेटे की और करीब आना चाहती थी वह अपनी बुर को अपने बेटे को और अच्छे से दिखाना चाहती थी,,, क्योंकि सुगंध का मन कहता था कि अब तक उसके बेटे ने बुरे के दर्शन नहीं किए होंगे,,, और यह बात सच ही थी गदी किताब में वह ढेर सारी हीरोइन की बुर को देखा था लेकिन हकीकत में वह पहली बार अपनी मां की बुर को देखने जा रहा था,, जैसे ही उसकी मां दरवाजे के करीब आई अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे भी इस बात का एहसास हो गया कि इतनी करीब से उसकी मां की बुर और अच्छे से दिखाई देगी,,,,,।

1710378810-picsay
दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी,,, अंकित बाहर से किसी भी प्रकार की आहट नहीं कर रहा था क्योंकि वह अपनी मां को बिल्कुल भी एहसास दिलाना नहीं चाहता था कि बाथरूम के बाहर वह बैठ कर सब कुछ देख रहा है जबकि उसकी मां को सब कुछ मालूम था,,,। सुगंधा से भी अब रहा नहीं जा रहा था वह जल्दी से अपनी चड्डी को उतार कर पूरी तरह से नंगी हो जाना चाहती थी ताकि वह अपने बेटे को अपनी नंगी जवानी दिखा सके और इसीलिए वह एक झटके से अपनी चड्डी को घुटनों तक खींच दी और उसके इस हरकत पर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई अंकित को सब कुछ दिखाई दे रहा था,,,, लेकिन वह देख कर कुछ समझ पाता है इससे पहले उसकी मां थोड़ा सा और नीचे झुक गई और अपनी पैंटी को अपने पैरों में से निकलने लगी और उसके भी हरकत पर उसके दोनों दशहरी आम एकदम से झूल गए,,, मानो की जैसे पेड़ पर लटक रहे हो,,, अपनी मां की चूचियों को देखकर अंकित के मुंह में पानी आ गया,,,,। अंकित का मन कर रहा था कि दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ ले उसे जोर-जोर से दबाए,,,, लेकिन इस समय ऐसा मुमकिन बिल्कुल भी नहीं था,,,, थोड़ी ही देर में उसकी मां अपनी पैंटी को निकाल कर पूरी तरह से नंगी हो गई और खड़ी हो गई,,,, अंकित और उसकी मां के बीच केवल 2 फुट की ही दुरी थी कहने के तो यह दूरी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन बाथरूम का दरवाजा इस दूरी को बनाए रखे हुए था क्योंकि हकीकत में अगर दो फीट की दूरी इस अवस्था में होती तो शायद इस समय हालात और नजारा पूरी तरह से बदल गया होता क्योंकि तब ना तो मां को सब्र होता और ना ही बेटा अपने आप पर काबू कर पाता और न जाने कब से उसकी दोनों टांगें फैला कर अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया होता,,,,।


सुगंधा बिल्कुल दरवाजे के पास खड़ी थी उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार देखकर अंकित की हालत खराब हो रही थी और उसकी बुर के इर्द-गिर्द हल्के हल्के रेशमी बालों के हुए थे,,, अंकित तो इस नजारे को देख कर पूरी तरह से पागल बज रहा था पहली बार हुआ किसी औरत की बुर को देख रहा था और वह भी किसी गैर की नहीं बल्कि अपनी ही मां की बुर को देख रहा था इसलिए उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसकी उत्तेजना उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से अपना काबू जमा रखे थे वह बिल्कुल अपने होश में नहीं था उसकी आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था क्योंकि बाथरूम के अंदर जो औरत इस समय खड़ी थी वह उसकी मां थी लेकिन इस समय उसके देखने का रवैया पूरी तरह से बदल चुका था बाथरूम में खड़ी उसकी मां उसे अपनी मां नहीं बल्कि एक खूबसूरत औरत नजर आ रही थी,,,,, गहरी सांस लेते हुए अंकित को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर की बहार मोतियों के दाने की तरह चमक रहा उसका नमकीन पानी उभरा हुआ था हालांकि औरत की बुरी में से निकल रहे मदन रस के बारे में अंकित कुछ भी नहीं जानता था उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां की बुर की ऊपरी हिस्से पर उसकी पेशाब की बुंद लगी हुई है जो कि इस समय मोती के दाने की तरह चमक रही थी और उसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था,,,, अपने बेटे की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए सुगंधा बेशर्मी दिखाते हुए अपनी हथेली को पूरी तरह से अपनी गरमा गरम बर पर रख दी और उसे अपनी हथेली के नीचे दबा ली और फिर उसे हल्के हल्के मसाला शुरू कर दी और उसकी हरकत पर उसके मुंह से गरमा गरम सिशिकारी की आवाज हल्के हल्के से निकल रही थी जो की अंकित के कानों में पहुंच रही थी,,,।

1709428393-picsay
how to write exponent on keyboard
सससहहहह आहहहहहहह,,,,,ऊमममममममम ,,

(सुगंधा इस तरह की आवाज अपने मुंह से निकल रही थी हां ना कि वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी क्योंकि इस तरह की आवाज तो उसे संभोग करते समय भी उसके मुंह से नहीं निकली थी लेकिन आज वह पूरी तरह से हद से गुजर जाना चाहती थी अपनी मां के मुंह से इस तरह की आवाजों को सुनकर अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था उसके मुंह से निकले हुई सिसकारी की आवाज उत्तेजना के बादल को और भी ज्यादा गहरा बना रहे थे,,,,,,, उत्तेजना के सागर में डूबती हुई सुगंधा पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी वह अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी उसका भी मन कर रहा था कि बाथरूम का दरवाजा खोल दे और अपने बेटे को अंदर बुला ले,,, लेकिन यह उचित नहीं था क्योंकि वह इस खेल में धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहती थी ताकि इसमें उसकी तरफ से किसी भी प्रकार की गलती की गुंजाइश नजर ना आए जो कुछ भी हो हालात के मुताबिक हो,,,, थोड़ी देर में सुगंधा अपनी हथेली को अपनी बर पर से हटाई तो उसकी बुर कचोरी की तरह फूली हुई नजर आ रही थी और अंकित आंख फाड़े अपनी मां की बुर को देख रहा था,,, वैसे तो देखने लायक सुगंधा का संपूर्ण बदन था लेकिन इस समय उसके बेटे की नजर केवल उसकी बुर पर टीकी हुई थी क्योंकि मर्दों का सबसे ज्यादा आकर्षक औरतों का यह छोटा सा गुलाबी छेद ही होता है जिसमें वह पूरी दुनिया को भूलकर डूब जाना चाहता है,,,,,। सुगंधा धीरे से घूम गई और फिर वह सामने की दीवार की तरफ दो कदम आगे बढ़कर साबुन लेने लगी और उसकी हरकत पर उसकी गोल-गोल गदराई गांड एकदम से अंकित की आंखों के सामने नाच उठी और वह एक बार फिर से अपनी मां की नंगी गांड के दर्शन करके धन्य हो गया इस समय वह अपनी मां की गांड को बेहद करीब से देख रहा था वाकई में उसकी गांड बेहद खूबसूरत एकदम मक्खन मलाई की तरह उसे पर बिल्कुल भी दाग नहीं था एकदम गोरी चमक रही थी और बीच का फांक उसके नितंबों की खूबसूरती को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था,,,, अंकित से बिल्कुल भी रहा नहीं क्या वह अपनी मां की गांड देखकर एकदम पागल हो गया और वही समय झुककर साबुन उठा रही थी और झुकाने की वजह से उसकी गोल-गोल गांड और भी ज्यादा बाहर की तरफ निकली हुई थी जिससे वह अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाया और धीरे से अपनी पेंट का बटन खोल कर वह जांघ के नीचे तक अपनी पेंट को उतार दिया,,,, और उसका खड़ा लंड एकदम से हवा में लहरा उठा जिसे वह तुरंत अपने हाथ में पकड़ कर थाम लिया,,,।

दरवाजे की दूसरी तरफ अपने हाथ में साबुन लेकर सुगंधा फिर से दरवाजे के करीब आ गई और फिर उसे साबुन को हल्का सा अपनी अपनी बुर पर डालकर उसे साबुन से धोना शुरू कर दी,, उस पर अच्छे से साबुन को रगड़ना शुरू कर दी,,, क्या सब कुछ अंकित के लिए बिल्कुल नया था और सही मायने में सुगंधा के लिए भी इस तरह की हरकत पहली बार ही थी हालांकि वह कभी-कभार अपनी बुर पर साबुन लगाकर उसे साफ जरूर करती थी लेकिन सफाई के लिए लेकिन इस समय वह अपनी बुर पर साबुन लगा रही थी केवल अपने बेटे पर अपनी जवानी का जलवा बिखेरने के लिए,,,,,। वह जानती थी कि अभी भी उसका बेटा बाथरूम के दरवाजे पर बैठा हुआ है और अंदर उसकी हरकत को देखकर पागल हो रहा है अगर उसे हिसाब अच्छा नहीं लगता तो उठ कर चला गया होता लेकिन वह जानती थी कि दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो औरत को नंगी नहीं देखना पसंद करेगा और उसकी तरह की हरकत का आनंद नहीं देगा उनमें से उसका बेटा भी था इस बात को अच्छी तरह से जानती थी इसीलिए तो वह अपनी हरकत को जारी रखे हुए थे।

अंकित अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया था,,, और इस हरकत को भी वह अपनी मां की वजह से ही सीखा था उसे नहीं मालूम था कि इस तरह की हरकत करने में बेहद आनंदकी प्राप्ति होती है,,, अनजाने में ही वह इस तरह की हरकत किया था और उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और इस समय भी वह अपनी मां के नंगे बदन को देखकर इस हरकत को दोहरा रहा था जिसमें उसे मजा आ रहा था साबुन लगा लेने के बाद सुगंधा भी पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी उसे भी अपनी जवानी की गर्मी बाहर निकलनी थी,,, इसलिए वह एक साथ अपनी दो उंगली को अपनी बुर के अंदर डाल दी लेकिन ऐसा करने से पहले वह अपनी एक काम को उठाकर बाल्टी पर रख दी ताकि उसका बेटा सब कुछ एकदम साफ तरीके से देख सके,,,, अंकित तो अपनी मां की हरकत पर पूरी तरह से पागल हो गया वह एकदम से बावला हो गया अभी तक उसे सब कुछ,,, थोड़ा सहज लग रहा था लेकिन अपनी मां की हरकत पर वह समझ गया कि उसकी मां एकदम चुदवासी है उसकी मां को भी मोटा तगड़ा लंड चाहिए जैसा की किताब वाली गंदी औरतें ले रही थी,,,,,, अपनी मां की हरकत देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था की मौसम की गर्मी से उसकी मां ज्यादा परेशान है कि अपने बदन की गर्मी से उसकी हालत को देखकर तो अंकित को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां अपनी जवानी की गर्मी से कुछ ज्यादा ही परेशान है,,,,,।

अंकित को सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था अंकित को एकदम साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां अपनी बर के अंदर दो उंगली को अंदर बाहर करके मजा ले रही थी और उसके मुंह से गरमा गरम से शिकारी की आवाज फूट रही थी और बाहर दरवाजे के बाहर बैठा अंकित भी कुछ कर नहीं था वह भी अपने लंड को बाहर निकाल कर जोर-जोर से मुठ मारना शुरू कर दिया था वह अपनी मां के गोरे बदन को देखकर उसकी गुलाबी बुर को देखकर और अपनी मां की हरकत को देखकर कुछ ज्यादा ही पागल हो गया था,,,,।

अपनी मां की बुर में उसकी दो उंगली को अंदर बाहर होता हुआ देखकर अनजाने में ही अंकित के कल्पना का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ने लगा और उसे ऐसा एहसास होने लगा कि मानो जैसे उसकी मां की बुर में घुसने वाली उसकी उंगली नहीं बल्कि उसका मोटा तगड़ा लंड है,,, और वह कल्पना करने लगा कि जैसे वह भी बाथरुम के अंदर है और वह अपनी मां के नंगेबदन को पीछे से अपनी बाहों में भरकर अपने मोटे तगड़े लंड को पीछे से उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करके उसकी चुदाई कर रहा है और इस तरह की कल्पना करके वह पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबने लगा वह मस्त होने लगा उसे आनंद आने लगा।


सहहहह आहहहह आहहहहहह ऊमममममम ,,, ओहहहहहहहह ,,,, (सुगंधा जानबूझकर ईस तरह की आवाज निकाल रही थी,, वह अपने बेटे को पागल बना देना चाहती थी और ऐसा हो भी रहा था अपनी मां के मुंह से निकलने वाली इस तरह की शिसकारी की आवाज से वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और वह जोर-जोर से अपना लंड हिला रहा था,,, अंकित को इस समय इस बात का एहसास हो रहा था कि अपनी मां को नंगी देखकर लंड मुठीयाने में और ज्यादा मजा आता है,,,,,,, दोनों मां बेटे की हालत खराब होती जा रही थी सुगंध अपनी जवानी के गर्मी शांत करने के लिए अपनी उंगली का सहारा ले रही थी और उसका बेटा अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने के लिए अपनी मुट्ठियों का सहारा ले रहा था,,,।

अपनी मां की गर्म जवानी देखकर अंकीत का लंड और ज्यादा कड़क मोटा और लंबा हो गया था,,, जिसे मुठीयाने में अंकित को और ज्यादा मजा आ रहा था,,,
अपनी मां की मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर उसकी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी,,, अंकित अपने मन में कल्पना कर रहा था कि जैसे उसकी मां की बुर में उसका लंड अंदर बाहर हो रहा है और उसे इस तरह की कल्पना करने में मजा भी आ रहा था एक तरह से वह इस समय कल्पना करते हुए अपनी मां की चुदाई कर रहा था और हकीकत तो ये भी था कि इस समय उसकी मां भी अपने ही बेटे की कल्पना कर रही थी जो कि बाहर बैठकर उसकी जवानी को देख रहा था वह भी कल्पना कर रही थी कि जैसे उसकी बुर में उसकी उंगली नहीं बल्कि उसके बेटे का मोटा लंड अंदर बाहर हो रहा हो इसीलिए तो उसकी उत्तेजना ओर बढ़ती जा रही थी,,,,।

अंकित को अपनी मां के हाव भाव एकदम साफ नजर आ रहे थे अपनी मां के चेहरे पर उसे गंदी किताब वाली हीरोइन दिखाई दे रही थी जो की लंड लेने के लिए मचल रही थी और लंड को अपनी बुर में लेकर मदहोश हुए जा रही थी,,,,। अंकित को इस समय अपनी मां गंदी किताब वाली हीरोइन नजर आ रही थी जिसे देखकर कर वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था,,, थोड़ी देर में उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां के मुंह से निकलने वाली सिसकारी की आवाज और ज्यादा तेज हो गई थी और उसकी उंगलियां भी बड़ी तेजी से बुर के अंदर बाहर हो रही थी यह सब देखकर अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी और तभी एक हल्की सी चीज की आवाज के साथ उसकी मां की बुर से मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी जिसे अंकित उसकी मां से निकलने वाली पिचकारी को पेशाब की धार समझ रहा था,,,,, और यह नजारा देखकर खुद उसके लंड से पिचकारी फूट पड़ी जो कि तकरीबन 1 मीटर की दूरी तक जाकर गिर रही थी अंकित पूरी तरह से मदहोश हो चुका था मस्त हो चुका था और अपने चरम सुख को प्राप्त कर चुका था।,,, लेकिन जिस झटका के साथ उसके लंड से पिचकारी निकली थी उसकी सांस एकदम से ऊपर नीचे हो गई थी वह एकदम मदहोश हो चुका था और ऐसा आनंद उसे मिल रहा था कि जैसे वह स्वर्ग में शेर कर रहा हो,,,,,।

GIF-240404-164738
सुगंधा का भी पानी निकल चुका था उसकी सांसे भी धीरे-धीरे झटका खा रही थी उसकी उंगलियां उसकी बुर से बाहर आ गई थी सुगंधा अपने बेटे को अपनी बर से निकलने वाली पिचकारी को बड़े अच्छे से दिखाई थी बस इस बात की उसे शंका थी की उसका बेटा निकलने वाली पिचकारी के बारे में कुछ समझ पाया या नहीं,,,, और हकीकत तो यही था कि वाकई में अंकित औरतों की बुर में से निकलने वाली पिचकारी के बारे में समझ नहीं पाया था क्योंकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे उसकी मां की बुर से पेशाब की धार फूट पड़ी हो क्योंकि उत्तेजना में निकलने वाले मदन रस के बारे में अंकित कुछ भी नहीं जानता था,,,,।

थोड़ी ही देर में सब कुछ शांत हो चुका था और सुगंधा नहाना शुरू कर दी थी और अपने बदन पर साबुन लगाना शुरू कर दी थी एक बार वासना का तूफान सर से उतर जाने के बाद अंकित का भी मन शांत हो चुका था लेकिन इस समय भी वह । मां के गोरे नंगे बदन को देख कर उत्तेजित हो रहा था लंड से पानी की पिचकारी निकल जाने के बावजूद भी उसका लंड अभी भी पूरी तरह से उत्तेजना में खड़ा था उसकी उत्तेजना बरकरार थी इसलिए वह अभी भी धीरे-धीरे से उसे हिला रहा था और अभी भी वह छोटे से सुराख से अंदर देख रहा था लेकिन अपनी मां को नहाते हुए देखकर वह समझ गया था कि उसकी मां किसी भी समय नहा कर बाथरूम से बाहर आ जाएगी और उसकी चोरी पकड़ी जाएगी इसलिए उसका वहां और ज्यादा ठहरना उचित नहीं था,,,। इसलिए वह धीरे से उठकर खड़ा हो गया और अपनी पेट को ऊपर चढ़ा कर अपने खड़े लंड को बड़ी मस्सकत करने के बाद उसे अपनी पेंट के अंदर डाल दिया,,,। और धीरे से अपने कमरे में जाने की जगह वह घर से बाहर चला गया क्योंकि वह अपनी मां से नजर मिलाने में झिझक महसूस कर रहा था।
Wonderful update
Ab Sugandha ko Ankit se chudwa bhi do
Bada maja aaega jab beta apni maa Ko chodega 🔥🔥🔥🔥🔥🔥
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,445
82,841
304

sunoanuj

Well-Known Member
5,020
12,674
189
Bahut kamuk updates… ek dum aag laga dii… jabardast 👏🏻👏🏻👏🏻
 
Top