सांवली संध्या का सफर 3
दोनो लोगे जनरल डब्बे तक पहुंचे मगर देखा तो लोग बुरी तरह से भरे पड़े है लोग गेट पर लटके है ट्रेन सीटी दे रही थी माने ट्रेन चलने वाली थी
रकेश बेटा इसी मे ही चढना पड़ेगा वरना इसके बाद कोई ट्रेन कल तक नही और किसी तरह दोनो घुस गये मगर खड़े होने की जगह तक नही कहाँ घुस रहे हो मादरचोद जगह नही है
राकेश अंदर जाने दो भाई
आदमी बेटीचोद जगह कहाँ है जो घुसेगा अपनी बीबी का भोसड़ा समझा है जो इतनी भीड़ मे घुसा जा रहा है उतर दूसरी ट्रेन पकड़ लेना
राकेश अंदर घुसने द्दो ट्रेन चल पड़ी है
चलती ट्रेन मे संध्या के चुतड़ो को पकड़ अंदर धकेल दिया और अपने दरवाजे का हथ्था पकड़ लहक गया ट्रेन चल पड़ी
आदमी बेटीचोद अंदर आ गया है तो यह मत खड़ा हो अंदर चला जा
दोनो भीड मे अंदर घुसने लगे तिल रखने भर की जगह अंदर ना थी खिसकते खिसकते वो टायलेट के पास पहुंचे वहाँ भी कसमकसा थी रकेश ने देखा उसकी चाल का साथी रामू एक टायलेट के अंदर बैठा है
रकेश अरे रामू तू तू भी आज ही मुम्बई जा रहा है
रामू अरे रकेशवा तू आ इधर आ, ट्रायलेट के तरफ दोनो बढ गये वहाँ तक पहुंचने मे भी बड़ी मशक्कत करनी पड़ी बरहाल ट्रायलेट मे रामू के अलावा कोई नही था संध्या और राकेश को अंदर लेकर रामू ने अबकी ट्रायलेट भी लॉक कर दिया जिससे कोई अब आ ना पाये ट्रेन अपनी स्पीड से चल पड़ी सुपर फास्ट ट्रैन थी जो सीधे शाम तक मुम्बई पहुॅचा देनी थी
रामू बैठो दोनो रकेश ने देखा की ट्रायलेट साफ था नल के पास चादर बिछा के रामू बैठा था रकेश बोरा उठा का ट्रायलेट के बॉसबेसन पर रख देता है वा दरवाजे से सट कर चादर बिछा लेता है संध्या वा राकेश आराम से उस पर बैठ जाते है
रामू यह तेरी बिटिया है
राकेश हाँ यार यही है संध्या, बेचारी बिन माँ की हो गई है
रामू बड़ी हो गई है सच लड़कियाँ जल्दी जवान हो जाती है रामू उसकी छाती को घुरते हुये
राकेश तभी मै इसे अपने साथ ले आया कोई वहाँ अपना है भी नही गांव का माहौल तो तु तो जानता है
रामू सही किया तुने वरना तेरे गाँव मे बड़ा हरामीपना सुना नही तेरे गाँव का हरिया उसकी महरारू को चोद चोद कर गभीन कर देते हरिया बेचारा जब जाता तब उसकी महरारू पेट से होती परेशान हो कर उसने उसकी नशबंदी कर दी
राकेश उस रंडी का नाम ना ले गाँव का हर लंड खा चुकी है
रामू उसकी बिटिया भी कम नही
राकेश अरे नही यार अभी वो छोटी है, अकसर मेरे घर आती है और संध्या की अच्छी सहेली भी है ना संध्या
संध्या जैसे होश मे आई हाँ बापू बड़ी अच्छी लड़की है वो( संध्या का वाप ठरकी था यह तो वो जानती थी मगर इस तरह की बात वो पहली बार सुन रही है वो गर्म हो रही थी यह निशानी उसकी फ्रांक के अंदर की गीली होती )
रामू तेरी संध्या से एक दो साल ही छोटी होगी रज्जू के बाग मे घोड़ी बना कर उसकी गांड मे लंड फसाया था मै गुजरा रहा था तो देखता हूँ हरिया की बिटिया घोड़ी बना प्रधान अपना इतना लंड( अपनी तहमद के ऊपर अपना लंड पकड कर दिखाते हुये) उसकी गांड मे घुसाये हुये था
संध्या रकेश दोनो की निगाह पड़ी रामू तहमद के ऊपर अपना खड़ा लंड पकड़े था ऊपर से ही अहसास देता था की आठ इंच से लंबा लंड है और मुट्ठी मे ना समाये इतना मोटा
संध्या की बुर पानी फेक चुकी थी यह नजारा देख
रकेश बाप रे इतनी चालू थी हरिया की बिटिया
रामू और क्या दूसरे धक्के मे प्रधान ने पुरा लंड पेल दिया हरिया के छोरी के, उसकी आवाज पूरे बाग मे गुंज उठी, ध्यान से देखा तो उसका गांड का छल्ला फैल गया था और उसमे खून निकल रहा था
रकेश साला प्रधान है भी हरामी पहली बार था उस बेचारी का लगता है
रामू हाँ ये तो है हर धक्के पर चिल्ला रही थी जब प्रधान खत्म हो ऊठा तो मैने प्रधान को पकड़ लिया तो उसने कहा तु भी चख ले
रकेश तब
रामू हँसते हुये तब क्या वो नंगी पड़ी ही थी मैने उसे फिर घोड़ी बनाया और एक बार अपना यह पहलवान उसकी गांड मे उतार दिया
रामू ने अपना लंड तहमद मे लहराते हुये बताया
रकेश साला तु भी बड़ा हरामी है
संध्या दोनो की बाते सुन गरम हो रही थी बस लज्जा वश वो अपने हाथ से चुत तक नही ले जा पा रही है
रकेश साला प्रधान बड़ा हरामी है इसकी मॉ की बताती थी संध्या की शादी कर दो प्रधान की निगाह है इस पर
रामू वो तो है तेरी संध्या उसके लायक हो गई है अब तक बची वही बड़ी बात है सही किया तुने जो ले आया वरना इसे चोद चोद के जरूर वो गाभिन कर देता
संध्या अब बोल ही पड़ी छि चाचा कैसी गंदी बात करते हो
रामू बेटा यह समाज है समाज मे ऐसा होता है तो जवान होती बेटी इसे जान ले समझे ले तो बच भी सकती है वरना हरिया के बिटिया की तरह चोदी जाती है
रकेश वो तो है तभी मै भी सोचता हूँ इसकी जल्द शादी कर दूँ
रामू मेरा बेटा दीनू कैसा है इसके लिए
रकेश सच यार जे काम हो जाये तो बड़ा बोझ उतरे
रामू यारी रिश्तेदारी मे बदले यही मे चहाता हूँ अगले सोमवार को तेरे चाल इसका रिश्ता लेकर आऊँगा
राकेश बेटी जा अपने ससुर के पैर छु
संध्या उठकर जैसे ही रामू की तरफ बढी
रामू ने दोनो टॉगे फैला दी जिसके फलरूवरूप उसका विकराल लंड तहमद के बीच से निकल पड़ा
संध्या ने जीवन मे पहली बार लंड देखा था वो भी इतना विकराल मोटा इतने पास
संध्या हाये मईया इततत
रकेश संध्या के पीछे था तो जान ना पाया क्या हुआ
रामू देख लो बेटी मेरे घर मे आना है तो सबका ख्याल रखना होगा
रकेश अरे मेरी बेटी बहुत समझदार है सबका ख्याल रखेगी ना बिटिया
संध्या मुस्कराती हुई जी बापू मै इनके सबका का ख्याल रखूंगी
और रामू का लंड पकड़ते हुये
संध्या बस ये खुश रहे और मुझे क्या चाहा
और लंड पकड़कर तहमद के अंदर कर दिया और पैर छुकर वापस अपने जगह बैठ गई
संध्या चुप ही रही और दोनो की बातो के मजे भी लेती रही
रकेश वैसे तेरे लंड की मोटाई तो मेरे लंड से भी मोटा है पजामे के ऊपर से पकड़ते हुये खकेश बोला
संध्या पहली बाप अपने बाप के लंड पर निगाह गई जो रामू जितना ही लम्बा लग रहा था बस मोटाई कुछ कम थी
रामू वो तो है तभी दूसरा धक्का लगाने के लिए लंड बाहार निकाला तो सोनी की टट्टी पुरे लंड पर लगी थी मैने सीधे उसे सोनी के मुँह मे डाला और बोला रंडी साफ कर साली इसे गंदा कर दिया
सोनी रोते हुये बबूजी आपका बहुत मोटा है टट्टी निकल जायेगी बुर मार लो बबूजी
मैने बोला साली नखरा मत कर
सोनी बबूजी छोड़ दो मै आपकी बेटी बहु जैसी हूँ मुझे छोड़ दो
रकेश साली इमोशनल कर रही थी
रामू और क्या साली इमोशनल कर रही थी तो मैने भी बोल दिया बहु होती तो उसकी गांड अपने बेटे के सामने फाड़ता अपना लंड पकड़कर संध्या की तरफ इशारा किया
संध्या छी देखो बापू ससुर जी कैसी गंदी बाते कर रहे है
रकेश बेटा वो तो बस कहानी बता रहे है तेरी गांड थोड़ी मारेगे
रामू वो तो है हीहीहीही कर हँसने लगा
संध्या बापू सू सू लगी है