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Romance भंवर (पूर्ण)

Nevil singh

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Update:-139



सजा तय हो चुकी थी और बची खुची जिंदगी अब अंधेरों में गुजरने वाली थी। विक्रम, प्रकाश और लोकेश को जिंदा रखने का सारा इंतजाम वहां पहले से कर दिया गया था, और उन्हें हर हाल में जिंदा रखना था। हर वक़्त अपने मौत कि कामना करे ऐसी ज़िन्दगी देकर, तीनों वहां से निकल गए।


ऐमी:- आरव वीरदोयी की एक छोटी सी टीम के साथ तुम आगे बढ़ो, और उसकी एक टीम के साथ हम आगे बढ़ते हैं।


अपस्यु:- ज्यादा काम सेहत के लिए अच्छा नहीं है स्वीटी, 1 महीने का विश्राम लेंगे।


आरव:- कमिनेपन की हद। जब-जब इसने कहा है हम कुछ दिनों के लिए कोई काम नहीं करेंगे, तब-तब ये अकेले पूरे व्यूह की रचना कर जाता है। मेरे इंगेजमेंट के वक़्त भी इसने सबको स्टैंडबाय में रखा था और किसी को बिना खबर किए सारा खेल रच दिया। मुझे तुमपर विश्वास नहीं।


ऐमी:- और मुझे भी..


अपस्यु:- तुम दोनो थोड़ा धीरज धरो। मैंने तुम दोनों को 1 महीने का विश्राम दिया है। मैं भी विश्राम में ही रहूंगा बस बहुत ही धीमे तरीके से आगे चलेंगे। इस पूरे इवेंट का बॉस मैं हूं, शुरू में ही तय हो गया था, कोई सवाल।


आरव:- बस मरना मत, कोई सवाल नही।


ऐमी:- मै अब तुमसे दूर नहीं रह सकती, बाकी 1 महीने का विश्राम मंजूर है।


अपस्यु:- ठीक है चलो अब मां के पास, 5 बजने ही वाले है।


हेलीकॉप्टर वहीं निमेष गांव के पास ही लैंड हुई, जहां नंदनी रघुवंशी पहले से ही पहुंची हुई थी। सच ही है आज के युग में धन ही धर्म है। कुंवर सिंह के जिस परिवार को लोग अब तक बुरा कहते आ रहे थे, 24 घंटे के अंदर सबके विचार स्वतः ही बदल गए।


ना तो खुद को सच्चा साबित करने की जरूरत हुई और ना ही कोई दलील पेश किए गए, लेकिन फिर भी गांव के लोग कुंवर सिंह राठौड़ जिंदाबाद, नंदनी रघुवंशी जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। एक प्रशिक्षित टीम वहीं खड़ी थी जो गांव वालों को पूरा नक्शा समझा रही थी और कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिए जा रहे थे।


नंदनी गांव के पंचायत भवन में बैठी वहां के लोगों को सुन रही थी, अपनें दोनो बेटे और बहू को देखकर नंदनी मुस्कुराने लगी और धीमे से कुंजल के कान में कुछ कहने लगी। कुंजल, नंदनी की बात सुनकर थोड़ी हैरान हुई और वहां से उठकर दोनो के पास चली आयी…. "मां बोल रही है वो ये सारा काम खुद हैंडल करना चाहती है, वीरभद्र के यहां तबतक तुम लोग रिश्ते की बात शुरू करो।"..


ऐमी, हंसती हुई… "तो तुम क्यों इतना मायूस बनी हुई हो।"..


कुंजल:- सब लोग बाहर आओ, यहां नहीं बात करना मुझे…


चारो बाहर निकल कर आए, कुंजल अपस्यु और ऐमी पर बरसती हुई…. "मैंने तो बस ऐसे ही कही थी, आप लोग तो सीरियसली मेरी शादी वीरे से करवाने पर उतारू हो गए। मां को किसने बताया, इस बारे में।


आरव:- वैसे तेरे और वीरे की शादी होगी तो जुगलबंदी अच्छी सुनने को मिलेगी.. वीरे जी, कुंजल जी..


कुंजल, आरव का कॉलर पकड़ती… "ज्यादा मज़ाक किए तो मैं मुंह तोड़ दूंगी।"


अपस्यु:- हद है, तुझे अरेंज मैरेज भी करना है, लड़का घर जमाई भी चाहिए और जब हम रिश्ते की बात करने जा रहे हैं तब तू गुंडई पर उतर आयी है..


कुंजल:- ऑफ ओ … मैं कही क्या मुझे अभी शादी करनी है, लड़का ढूंढो अभी। देखो मेरा दिमाग मत खराब करो और हां मुझे वीरे पसंद नहीं।


ऐमी:- मतलब कोई और पसंद है..


"हद है यार"… कुंजल नकियाते हुए कहने लगी और चिढ़कर वहां से भाग गई। उसे ऐसे भागते देख तीनों हसने लगे। तकरीबन 1 घंटे बाद नंदनी वहां का सारा काम निपटाकर वीरभद्र के घर चली आयी।


नंदनी के कदम उस घर में क्या परे ऐसा लगा जैसे श्री कृष्ण, सुदामा के यहां पधारे हो। आव भगत और स्वागत में कोई कमी नहीं थी। लेकिन माहौल तब बिगड़ गया जब नंदनी तकरीबन 40 लोगों के बीच में यह बात कहने लगी कि वो उसके घर रिश्ता लेकर आयी है।


जैसे ही यह बात कुंजल के कान में गई वो बौखलाकर नंदनी के ओर जाने लगी किन्तु स्वास्तिका मामले को संभालती हुई उसका हाथ पकड़कर रोकती हुई, उससे बात खत्म होने तक का इंतजार करने के लिए धीमे से कहीं।


इधर वीरभद्र की मां ये बात सुनकर क्या कहे और क्या ना कहे उसे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। वो घबराई सी आवाज़ में पूछने लगी…. "जी आप ये क्या कह रही है।"..


नंदनी:- हां आपने बिल्कुल सही सुना है। मुझे मेरे बेटे पार्थ के लिए आपकी बेटी निम्मी का हाथ चाहिए। दोनो एक दूसरे को देख चुके है। पार्थ को निम्मी बेहद पसंद है, आप चाहे तो निम्मी से पूछ लीजिए, यदि उसे भी पार्थ पसंद हो तो हम दोनों कि सगाई करते हुए चले जाएंगे।


पार्थ जो तब से केवल ख़ामोश बैठा हुआ था, नंदनी की बात सुनकर बिल्कुल हैरान सा हो गया। हालांकि हैरान वहां 2 लोग थे। एक तो कुंजल, जिसका सर दर्द केवल इतनी सी बात को लेकर हो गया, कि वो बस समझाने के लिए वीरे और उसकी शादी की बात कह रही थी और लोगों ने सीरियसली ले लिया।


दूसरे अपने पार्थ भईया जो निम्मी की पजल में डूबे थे कि निम्मी उस शाम किस ओर इशारा कर गई जो अब तक वो समझ नहीं पाया और अगर जल्द ही उसने निम्मी बातों का सही मतलब नहीं निकाल पाया तो वो दृश्य के साथ चली जाएगी।
पार्थ, स्वास्तिका से… "नॉटी, ये आंटी अचानक से रिश्ते की बात करने आ गई"…


स्वास्तिका:- क्यों तुझे अच्छा नहीं लगा। रुक एक मिनट, मां पार्थ कुछ कह रहा है..


नंदनी:- हां बोलो ना पार्थ..


पार्थ:- मैं कहां कुछ बोल रहा था, वो स्वास्तिका को सुनने में कुछ गलतफमियां हुई थी शायद….. (फिर धीमे से स्वास्तिका से) पागल है क्या तू नॉटी..


स्वास्तिका:- डफर कहीं का.. उस दिन निम्मी ने साफ तौर पर तो कही थी कि वो गांव के लोगो और उनकी नजर को जानती है, इसलिए किसी को अपने मुंह नहीं लगने देती। वहीं उसने लोकेश के बारे में भी बताया, जबकि उसे पता था कि तुम यह बात जानते हो..


पार्थ:- कमिने हो तुम सब, छिपकर मेरी बात सुन रहे थे।


स्वास्तिका:- तेरे लिए हमारा बात सुनना मायने रखता है या निम्मी।


पार्थ:- निम्मी…


स्वास्तिका:- हां तो ध्यान से सुन, निम्मी का साफ इशारा था, तुम उससे अच्छे लगते हो, बस दूसरी लड़कियों को ताड़ना बंद कर दो और वो अपना प्यार तुम्हे तब दिखाएगी जब उसकी मां तुम्हारे और उसके रिश्ते के लिए राजी हो जाए।


पार्थ:- पहले प्यार का इजहार करने में क्या परेशानी थी?


स्वास्तिका:- गधा है तू, डफर। यह गांव है। यहां प्यार मतलब सेक्स और शादी मतलब इमोशन।


पार्थ:- अती बेवकूफ हो, प्यार मतलब सेक्स कब से होने लगा..


स्वास्तिका:- तुझे बात की गहराई को जाननी है तो अपस्यु से मिल ले। हद है यार, ये गांव है, यहां जात में शादी होती है, और एक ही गांव लड़का और लड़की की शादी भी नहीं होती। ऐसे में वो किसी से प्यार करके, फिर उसके लिए घरवालों से लड़े, बाद में उसके घरवाले दोनो को कबूल करते है या इमोशनल ब्लैकमेल करके उसकी शादी कहीं और करवा देते है, उतना रिस्क वो नहीं लेना चाहती थी, इसलिए उसने मन बना लिया था कि जिससे शादी होगी, प्यार उसी से कर लेगी और तबतक वो अपने काम में व्यस्त रहेगी। बस ये मेरी समीक्षा है और शायद सारी बातें समझा दी मैंने। अपस्यु को भी पता है ये बात, तभी तो उसने कल लोकेश की कहानी समाप्त करने के बाद भी तेरे लिए सोचा और ना जाने कब मां से बात करके ये सब प्लान कर लिया, वरना देर रात तक तो वो हम सब से बातें ही कर रहा था।


पार्थ:- यार कितना गजब है ना अपस्यु। इतना बड़ा काम करने के बाद तो दिमाग में जीत कि खुशी ही चलती। लेकिन फिर भी उसे मेरा ख्याल रहा।


स्वास्तिका:- ज्यादा इमोशनल ना हो। बात हम सब में से किसी की भी होती तो वो लोकेश का काम भले 4 दिन में समाप्त करता, लेकिन अपना काम पहले कर देता।


दोनो अपनी बात कर रहे थे और दोनो में से किसी का ध्यान वहां के माहौल पर तबतक नहीं गया, जबतक नंदनी ने पार्थ से ये नहीं कह दी कि जाकर तैयार होकर आए, बस कुछ ही देर में उसकी सगाई है। पार्थ को ऐसा लगा जैसे बिन मांगे सब मुराद मिल गई है।


इधर स्वास्तिका खुद गई और निम्मी को तैयार करके लाई। अलहड़ सी दिखने वाली लगी, जब सगाई के लिए तैयार होकर अाई थी, तब पहली बार उसकी खूबसूरती का भी पता लग रहा था। और चेहरे पर आयी वो शर्मो-हया, जो घरवालों के पास होने के कारन निम्मी मेहसूस कर रही थी और लोगों को वो साफ दिख रहा था।


इन दोनों का काम तो हो गया, साथ ही साथ जब सब फुरसत हुए तो कुंजल से क्या बदला लिया गया था। स्वास्तिका और ऐमी ने तो जैसे उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया हो। जबतक वो नंदनी के आंचल में अपना मुंह ना छिपा ली, तबतक सब उसे चिढ़ाते ही चले गए।


सभी कार्यक्रम पूर्ण होने में काफी समय लग चुका था, इसलिए तय यह हुआ कि एक रात वीरभद्र की मेहमान नवाजी स्वीकार करने के बाद कल सुबह सब यहां से निकलेंगे। नंदनी की बात मानते हुए हर कोई वहीं रुक गया सिवाय अपस्यु के जिसके दिमाग में कल रात से ही कुछ और चल रहा था, जिसे वो फिलहाल किसी के साथ साझा नहीं कर सकता था।


थोड़ी सी मेहनत थोड़ी सी झूठ और अपस्यु जिस हेलीकॉप्टर से आया था उसी हेलीकॉप्टर में बैठकर अपने हाई टेक गांव निमेष पहुंच गया था। जैसे ही अपस्यु वहां के महल में दाखिल हुआ, सामने हॉल में ही….. "इतने सारे घर खाली परे हैं फिर भी यहां हॉल में"…


नीलू:- तू चालू रख रे, मज़ा ना खराब करो… उम्म्म ! अभी निकलो यहां से या बैठकर टीवी देखो, लेकिन मज़े को बर्बाद नहीं करो…


अपस्यु अपना सर पीटते हुए वहां से चला गया और नीलू को अपना मज़ा खत्म करके, काया के साथ कमरे में आने के लिए बोल दिया। तकरीबन आधे घंटे बाद दोनो कमरे में पहुंची….


अपस्यु:- हद है, खुले हॉल में सेक्स कौन करता है, यार इतने तो कमरे है यहां..


नीलू:- वो लड़का बेचारा अपनी मां के पास हमेशा के लिए जा रहा था और आज तक यहां किसी लड़की को टच भी नहीं कर पाया था, जबकि उसके सामने कई लोग मज़े लिया करते थे। बेचारे पर दया आ गई और वक़्त कम था, इसलिए उसकी हसरत वहीं पूरी कर दी। अब क्या तुम इस बात को लेकर टोक रहे.. वैसे तुम्हे यहां कौन सी याद खींचकर ले आयी।


अपस्यु:- बस ऐसे ताने की जरूरत नहीं। सेक्स की भूख नहीं खींच लाई मुझे, जो ऐसे पूछ रही हैं मैम। आप सब आदरणीय है और मुझे आपके लाइफ स्टाइल से कोई आपत्ती नहीं, मुझे एक बड़ा काम निपटाना है और उसपर कल से काम शुरू करना है।


काया:- मतलब हमारी मदद चाहिए।


अपस्यु:- हां मदद कि उम्मीद से आया हूं।


नीलू:- इसमें हमारा क्या फायदा होगा..


अपस्यु:- क्या फायदा चाहिए।


नीलू:- सम्मान..

अपस्यु:- मतलब..


नीलू:- जाने अंजाने में हम बहुत गलत कर गए हैं, अब कुछ ऐसा काम चाहिए जो अपने आप में लगे कि इस जीवन में कुछ तो अच्छा किया है।


अपस्यु:- हम्मम ! आज के बाद कभी ऐसा मेहसूस नहीं होगा कि पहले कभी गलत की हो।


नीलू:- मै तैयार हूं।


काया:- तुम्हारे काम के लिए हम सब तैयार है, और आखरी तक तैयार रहेंगे..


अपस्यु:- ठीक है फिर तैयार रहो, किसी की लंका भेदनी है।


काया:- हमे करना क्या होगा।


अपस्यु:- 3 लोगों को पूरी तरह सड़क पर लाना।


काया:- उनकी डिटेल..


अपस्यु कुछ तस्वीरें दिखाते…. "इस तस्वीर में जो लड़की है.."


जबतक अपस्यु इतना बोल रहा था तभी बीच में नीलू कहने लगी… "सात्विक आश्रम के संचालक महादीपी की भांजी और अनुप्रिया की बेटी कलकी है। दूसरा उसका छोटा भाई परमहंस और तीसरा सबसे छोटा भाई युक्तेश्वर है। जिल्लत की नई ऊंचाई दिखाई थी इसने मुझे। मेरा चरित्र क्या है इसे अच्छे से समझाया था मुझे। दोनो ही कमिने पन की नई परिभाषा है, बिल्कुल मीठा जहर।
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जबतक अपस्यु इतना बोल रहा था तभी बीच में नीलू कहने लगी… "सात्विक आश्रम के संचालक महादीपी की भांजी और अनुप्रिया की बेटी कलकी है। दूसरा उसका छोटा भाई परमहंस और तीसरा सबसे छोटा भाई युक्तेश्वर है। जिल्लत की नई ऊंचाई दिखाई थी इसने मुझे। मेरा चरित्र क्या है इसे अच्छे से समझाया था मुझे। दोनो ही कमिने पन की नई परिभाषा है, बिल्कुल मीठा जहर।


काया:- बिल्कुल यही अनुभव मेरा भी है। हमारी जिल्लत भरी जिंदगी का राज यही दोनो भाई तो है। नशा देना, ग्रुप सेक्स में मज़े लेना और जब लड़की पिरा से पागल हो रही हो, तो इन्हे वो कामुक आवाज़ समझ में आती है। इसी कमिने की वजह से लोकेश ने अपने क्लाइंट को संभोग की नई दुनिया से अवगत करवाया था। कास अजय की जगह मैंने इन दोनों भाई में से किसी को मांग लिया होता।


नीलू:- जानते हो अपस्यु, जब लोकेश ने इन तीनों भाई बहन को बर्बाद करने कि ठानी थी, तब पहली बार मुझे लोकेश के साथ काम करने में मज़ा आया था। क्योंकि जब वीरदोयी यहां आए लोकेश के पास और इन दोनो भाई का एक बड़ा काम हमारी मदद से लोकेश ने पुरा करवा दिया था, तब इसी दोनो भाई ने लोकेश को बुद्धि दी थी, कि कैसे अपने अच्छे लोगों को और अपने क्लाइंट को खुश रख सकते हैं।

इन्हीं दोनों भाइयों ने लोकेश को समझाया था कि जब दोस्त बनाकर काम अच्छे से होता है तो नए दुश्मन क्यों बनना। और सबको कैसे खुश रखते है उसका डेमो दिया था। हमारे लोगो ने हमे ही भरी सभा में नंगा किया था, हमारे कपड़े उतारे थे। हमारी चींख पर हूटिंग किए थे। हमारी बेबसी का वीडियो बनाकर, क्लाइंट के सामने पेश किया गया था। इनके क्लाइंट भी मस्त हो जाते। इनके क्लाइंट कई लोगो के बीच ग्रुप सेक्स को देखते हुए, अपने लिए यहां सिंगल पार्टनर चुना करते थे और साले मज़े किया करते थे। तुमने वाकई हमे बहुत अच्छा काम दिया है।



अपस्यु:- मतलब इनका भी पुरा चरित्र गया हुआ है। खैर लोकेश इनके धंधा में सेंध लगा रहा था इसलिए यें लोग लोकेश को रास्ते से हटाना चाह रहे थे।


काया:- हां लोकेश को मारने कि इक्छ तो प्रबल थी, लेकिन वीरदोयी के आगे ये घुटने टेक चुके थे। पिछले एक साल से लोकेश ने, इन्हे हमारे दम पर पानी पिलाए हुए था। ..


अपस्यु:- बस यही पानी पिलाना जारी रखना है। लोकेश की कहानी जिंदा रखो यहां और उसी के नाम से सब कुछ ऑपरेट करते रहो… इनके कालाबाजारी को तुम सब सेंध लगाते रहो, इनकी कंपनी को मै डुबोता हूं, मैं चाहता हूं ये तीनों खुद को ऐसा बेबस समझने लगे, जैसे किसी के पास हर चीज होते हुए भी कितने असहाय है इस बात का एहसास होते रहे…


नील, अपना सर अपस्यु के आगे झुकती……. "A man with brain, always dengerous than god"..


अपस्यु, हंसते हुए…. "मैं इसका मतलब नहीं पूछूंगा"..


नील:- लेकिन मुझे तो मेरे सवालों के जवाब चाहिए ना… तुम्हे वीरदोयी का साथ चाहिए था, इसलिए तुमने दृश्य की हेल्प लिये, लोकेश को हटाने के लिए। तुम्हारा काम होते ही दृश्य को जाने दिया, क्योंकि तुम पहले से आगे की योजना में हमे सामिल कर चुके थे…


अपस्यु:- देखो झूठ नहीं कहूंगा, तुम्हारा सोचना बिल्कुल सही है। महादिपी के मैन और ब्रेन पॉवर से निपटने के लिए बहुत पहले से वीरदोयी के साथ टीमअप कि सोच चल रही थी। ठीक वैसे ही जैसे लोकेश और वीरदोयी से निपटने के लिए मैंने अपने भाई के बारे में सोच रखा था।


काया, अपने दोनो हाथ जोड़ती…. "बाबा चमत्कारी पुरुष। दिन का पूरा इस्तमाल और घंटे का पुरा उपयोग कोई इन से सीखे। ये जहां भी रहेंगे चमत्कार करेंगे।"


अपस्यु:- काबिल बनो बच्चा, कामयाबी झक मारकर तुम्हारे पीछे आएगी।।अब ये फिल्मी ताने मुझे दिए जाएंगे। सुनो काया, कभी-कभी अपने स्वार्थ से भी अच्छा हो सकता है, इसका उदहारण मेरा कर्म पथ है। मैं कुछ चंद टूटे लोगों के साथ निकला था, और मुझे रास्ते में कई मेरे जैसे मिल गए।


काया:- ज्यादा इतिहास में नहीं घुसते है, किन्तु अपस्यु तुम केवल दिखने में छोटे लगते हो, लेकिन हो उतने ही बड़े शातिर। दृश्य को जरा भी भनक नहीं लगा कि तुम उसका इस्तमाल कर रहे.. वो शुरू से मामू का मामू ही रह गया..


अपस्यु:- पागल हो तुम काया, ना तो मैंने दृश्य का इस्तमाल किया और ना ही तुम लोगो के बारे में ऐसा विचार है। बस सभी लोगों से एक उम्मीद थी और अपने सोच पर विश्वास था, कि जब लोग एक दूसरे के साथ होते है, तो उनसे उम्मीद लगी ही रहती है।


नीलू:- हम्मम ! मैं सहमत हूं तुम्हारी बातों से। लोग ही लोग के काम आते हैं। खैर तुम्हारी योजना जो भी रही हो हमे लेकर, लेकिन तुमपर आंख मूंद कर एक भरोसा तो है, कि तुम्हारी मनसा कभी गलत नहीं थी। पर हम साथ काम करें इसके लिए जरूरी यह है कि हमे एक दूसरे पर पुरा भरोसा हो।


काया:- मुझे लकेश के बारे में इसलिए इतना पता है, क्योंकि उसका राइट हैंड अजय मेरा दीवाना था। हालांकि मुझे यहां केवल नोचा ही गया, वो भी मेरे अपने लोगों के के कारन, वरना मजाल नहीं था कि कोई मेरी मर्जी के बगैर मुझे छू भी लेता। यहां हमे बस भोगने की वस्तु से ज्यादा कुछ नहीं समझा गया, ये थी मेरी सच्चाई। इमोशन, लव और फैमिली तो जैसे किताब के पन्नों के शब्द बन गए हो, जो हमारे जिंदगी कि सच्चाई से कोसो दूर हो गए।


नील:- मै लोकेश की ऑपरेशन हैंडलर थी, हां लेकिन मुझे ना चाहते हुए भी कितनो के साथ बिस्तर में जाना परा, ये भी एक सच्चाई है। घुटन भरी जिंदगी जो एक बार शुरू हुई, वो अब तक चल रही है। तुम्हारे होने से कुछ अच्छा होने जैसा मेहसूस होता है अपस्यु। तुम मुझसे नहीं भी मिले थे तब भी काया से तुम्हारे बारे में बहुत कुछ सुन रखी थी। इसके अलावा लोकेश के ऑपरेशन हैंडल करती या उसके क्लाइंट के बिस्तर मे जब भी होती, तो अपने कान खुले रखती थी, इसका नतीजा ये हुआ कि हम आने वाले 6 महीने का प्लान कर चुके थे और लोकेश के साथ हम उन लोगो। को भी नाप देते, जो हमे यहां हाई प्रोफाइल वैश्या का दर्जा दिए हुए थे। तुम्हारा और दृश्य का धन्यवाद, जिसने हमारे 6 महीने नरक की जिंदगी को कम कर दिया। ये थी मेरी सच्चाई…


अपस्यु:- मैं विक्रम और अनुप्रिया के पीछे दिल्ली पहुंचा था, पीछे से बहुत सी जानकारियां इकट्ठा किए। दिल्ली आकर मुझे वीरदोयी की एक टीम राठौड़ मेंशन में दिखी थी और मै समझ गया कि जिसके पास वीरदोयी हो, वो किसी से भी पंगे कर सकता था। मेरा शक सही निकला, लोकेश का जरा भी ध्यान हवाले के पैसे पर नहीं था, बल्कि उसकी पूरी नजर अनुप्रिया और माहिदीपी के पूरे साम्राज्य पर थी।


फिर मैंने अपना पूरा फोकस लोकेश पर कर लिया, क्योंकि लोकेश की जगह मुझे मिल गई, तो यहां से मुझे अनुप्रिया को बर्बाद करने का रास्ता मिल जाएगा। कई दिन के कोशिश के बाद, एक जरिया मुझे मिला, जयेश। जयेश को मैंने काया के साथ देखा था, इसलिए उससे बात करना मुझे सेफ लगा। मैंने बस छोटा सा तार छेड़ दिया जयेश के पास और उसी ने अंदर की पूरी जानकारी दी। नील को मैं नहीं जनता था तब, लेकिन काया के बारे में सुनकर मुझे योजना सफल होते दिख गया।


बस जब ये सारी बातों का खुलासा हो गया, फिर मैं पूरी योजना के साथ दिल्ली वापसी किया और लग गया काम पर। मेरा पहला पड़ाव था काया तक पहुंचना और काया के सभी लोगों को सफेली निकालना, ताकि आगे अनुप्रिया और महिदीपी के घर में सेंध लगा सकूं… ये थी मेरे योजना कि पूरी सच्चाई।


काया:- जयेश अब नहीं रहा हमारे बीच। इनके महत्वकांक्षा ने उसे ले डूबा। खैर बीती बातों को हम एक बुरा सपना मान लेते हैं। आगे क्या करना है?


अपस्यु:- कुछ नहीं बस खुद को तैयार रखो, क्योंकि वो तुम्हारी क्षमता को पहचानते हैं, इसलिए वो खुद तुमसे संपर्क करेंगे। उन्हें सामने से आने दो और तबतक उनके साथ खेलने के लिए तैयार हो जाओ।


नील:- हम यहां कुल 60 के आस पास वीरदोयी बचे हुए हैं, जिसमें से 10 केवल है जो अब आगे इन पेचीदा काम के लिए राजी होंगे, बाकी 50 को कोई दिलचस्पी नहीं किसी भी तरह के उल्टे काम से। वो जब लोकेश के आगे नहीं टूटे, तो हम उनकी शांत जीवन में थ्रिल क्यों लाए।


अपस्यु:- और बाकी के 10..


नील:- काया को छोड़कर बाकी के 8 लोग मेरे साथ है जो एक्शन लवर है, बस काम अच्छा होना चाहिए और एक बची काया, तो वो तो तुम्हारी फैन है, तुम्हारे लिए हर जोखिम उठा लेगी।


अपस्यु:- डेविल परिवार में तुम् सब का स्वागत है। नील मैम आप फ़्री हैंड काम करो यहां। आरव के साथ मिलकर इस जगह को डेवलप करो, और उन राधाकृष्ण बंधुओं के संपर्क करने का इंतजार करो। रही बात काया मैम की, तो वो हमारे साथ चल रही है, इनके लिए कुछ अलग ही प्लांनिंग है।


काया:- सूखे-सूखे डेविल परिवार में स्वागत। मुझे भी वैसी मॉडिफाइड कार चाहिए जों गराज में है।


नील:- एक मुझे भी प्लीज।


अपस्यु:- कितने परिवार है यहां वैसे..


काया:- परिवार तो एक भी नहीं है, लेकिन अगर लाने कि इजाज़त मिल जाए तो 200 परिवार तो आ ही जाएंगे।


अपस्यु:- और यहां के मूल निवासी जो यहां इस गांव के थे, जिनकी जमीनों पर ये पुरा हाई टेक गांव खड़ा है?


काया:- इस जगह के 3 किलोमीटर पश्चिम में रहते है, काफी सुदृढ़ गांव है और गांव के माहौल को यहां के हवा से दूर रखा गया था।


अपस्यु:- चलो एक काम तो अच्छा किया उन लोगों ने। यहां कितनी मॉडिफाइड कार है।


काया:- 5 कार है, केवल एक कार में स्वास्तिका और कुंजल गई थी बाकी सब कार यहीं है।


अपस्यु:- ठीक है 4 मॉडिफाइड रख लो तुम लोग, मै 1 लेकर चला जाऊंगा। रह गए 6 और मॉडिफाइड कार देना, तो वो 1 हफ्ते बाद ले लेना। अब खुश।


नीलू:- क्या मै गले लग सकती हूं..


अपस्यु:- हां क्यों नहीं..


नीलू अपस्यु के गले लगती… "वाव ! मै बहुत खुश हूं।"..


नीलू जैसे ही हटी, काया भी उसके गले लगती… "बिल्कुल खुश कर दिया, वैसे लगा नहीं था कि अपनी मॉडिफाइड कार दे दोगो, दिमाग के अंदर यही था कि बहुत ज्यादा से ज्यादा होगा तो एक अल्टो चिपका दोगे।"..


अपस्यु:- डेविल परिवार मतलब परिवार का पुरा हिस्सा। एक बात और केवल एक बार मै फिजूल खर्ची के लिए पैसे देता हूं। 1000 करोड़ कैश लॉकर में रखा है, नीलू वो सारे पैसे तुम्हारे है। तुम्हे यहां के लोगों की खुशियां बढ़ाने के लिए जितने खर्च करने हो कर देना, लेकिन 1 बार। बचे पैसे संभाल कर रखना और अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च करना।


नीलू:- येस बॉस..


अपस्यु:- काया कल सुबह तुम अपनी कार लेकर उन 1000 करोड़ में से 75 करोड़ कैश लेकर चले आना।


नीलू:- ओय छोटी आंख वाले, इस अकेली को 75 करोड़ और मुझे 200 लोगों को 925 करोड़ में देखना है। ऐसी बात है तो इसकी जगह मै ही चलूंगी, इसे यहीं रहने दो।


अपस्यु:- अब ये छोटी आंख वाला क्या है। और इसके 75 करोड़ में से 30 करोड़ के तो तुम्हारे 6 कार में लग जाएंगे और 25 करोड़ में 5 और कार मॉडिफाइड होंगे, जिनकी कार तुम्हे दिया है। उनहे वापस भी करूंगा की नहीं। अब 20 करोड़ की विदाई भी ना इसे यहां से दोगी, तो क्या दोगी।


नीलू:- नो नो नो… गिफ्ट मतलब गिफ्ट, मैं अपने पैसों मै से 1 एक रुपया नहीं दूंगी।


अपस्यु:- उल्लू हो नीलू मैम, अब क्या इन माया के लिए आपस मै लड़ रही है। ठीक है 50 करोड़ दे देना। हां एक बात और, पैसे जरूरत के लिए होता है, कभी पैसे को जरूरत मत बनने देना।


नीलू:- बाबा जी आपके वचन सर आखों पर, लेकिन मैं उन 1000 करोड़ में से 25 करोड़ दूंगी और ये फाइनल है, लेना है तो लो वरना हवा आने दो।


अपस्यु:- हुंह ! कंजर है ये पूरे, मुंह में सिक्का दबा कर पैदा हुई थी। ठीक है जो इक्छा है वहीं देना।


काया:- ये है ही जलकुकरी… ले जाओ इसे ही, मै ही यहां रहती हूं।


नीलू:- बकवास बंद, यहां की हेड मै हूं और तुम लोग मेरा कहा मानोगे।


अपस्यु और काया एक साथ… "जी मैम कहिए"..
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नीलू:- तुम दोनो भागो यहां से और जब हमारे कार मॉडिफाइड हो जाएंगे तब मुझे बुला लेना। यहां के सब लोगो को लेकर हम धमा चौकड़ी मचाने दिल्ली आएंगे.. और अभी के लिए एक पार्टी नाईट… काया सब को बुला लो यहीं उन्हें भी खुशखबरी दे दूं जरा….


अपस्यु:- प्लीज़ मुझे यहां मत रोको, मुझे एमी के साथ होना है..


नीलू, उसे आखें दिखाती…. "आज हम लोगों के बीच रुको, कल तुम और काया यहीं से साथ में चले जाना।"..


अपस्यु:- मरवा दिया तुमने, चलो कोई ना आज यहां की खुशियों में शरीक हो जाते हैं।


पार्टी नाईट यहां शुरू हो चुकी थी और अपस्यु सबकी खुशियों में शरीक होकर झूम रहा था। वहां की खुशियां तब दुगनी हो गई जब उन सब ने नीलू का अनाउंमेंट सुना, जिसे सुनकर सब ऐसा मेहसूस कर रहे थे, मानो एक अच्छी जिंदगी अब यहां शुरू होने वाली है।


पार्टी का माहौल केवल विषेन गांव में ही नहीं बल्कि मुंबई से थोड़ी दूर स्थित लुनावला के एक रिजॉर्ट में भी था, जहां राधाकृष्ण बंधु, यानी कि कलकी, परमहंस और युक्तेश्वर राधाकृष्ण अपने कई करीबी लोगों के साथ पार्टी मना रहे थे।


जाम टोस्ट हुआ और कालकी चिल्लाती हुई कहने लगी…. "प्रभु उन्हें सजा दे ही देते हैं, जो हमारा रास्ता काटने की कोशिश करते हैं।"..


युक्तेश्वर:- लोकेश जैसे कीड़े को साफ करने और दिल्ली का सारा मामला सुलझाने के लिए, मै श्रेया को बधाई देता हूं। ये श्रेया और उसकी टीम का कमाल ही था, जो दिल्ली में हमारा पुरा मामला सैटल कर आयी।


श्रेया:- नहीं मै इसके पीछे नहीं थी। हां जगदीश राय की कहानी का सेहरा मेरे सर दे सकते हो, लेकिन लोकेश के पीछे तो स्वयं काल लगा हुआ था, मायलो ग्रुप के मालिक का लड़का अपस्यु। लोकेश को तो प्रभु भी नहीं बचा सकते थे। यहां इस महफिल में कहना ग़लत नहीं होगा कि अपस्यु यदि आपके पीछे है, तो बुद्धिमानी इसी में है कि आप उससे रहम की भीख मांग ले और अपनी बची हुई जिंदगी उसके हिसाब से जी ले।


परमहंस:- इतने पहुंच वाले और क्षमता वाले ग्रुप के सामने, जब श्रेया उस लड़के अपस्यु की तारीफ कर रही है, मतलब उसके अंदर जरूर कुछ बात रही होगी। इसलिए जैसा की श्रेया ने कहा, वो बहुत क्षमता वाला है, इसलिए मै अपने भाई बहन के ओर से ये अनाउंसमेंट करता हूं कि लोकेश ने मायलो ग्रुप के साथ, हमारे सात्विक ट्रस्ट की कंपनी, वेरिएंट ग्रुप के बीच जो एक जंग छेड़ी थी, उसे मैं विराम देते हुए, हम नए मालिकों के साथ साफ-सुथरी प्रतियोगिता रखेंगे और प्रोफिट के लिए मार्केट के दूसरे सेक्टर्स में उतरेंगे, ताकि हमारा कभी आमना-सामना ना हो।

यदि भविष्य में आमना सामना होता भी है तो हम टेबल पर बैठकर मुद्दे को सुलझा लेंगे, क्योंकि बुद्धिमानी इसी में है कि ईगो के चक्कर में नए दुश्मन नहीं पाले जाए। तुम सब का क्या कहना है।


कलकि:- मै तो परम की बात का परम भक्त हूं, बिल्कुल सही कहा परम।

युक्तेश्वर:- हां सही है, जब दोस्त बनाकर काम होता है तो दुश्मन क्यों बनना। चलो पार्टी एन्जॉय किया जाए।


देर रात 1 बजे तक उनकी पार्टी चलती रही। सभी लोगों के जाने के बाद, तीनों भाई बहन एक टेबल पर बैठ गए। जहां अपस्यु और उसके क्षमता को लेकर चर्चा होने लगी। इस संदर्व में उन्होंने होम मिनिस्टर के ऑफिस के कुछ लोगों से बात भी किए और पूरे मामले की जानकारी भी लिया, की आखिर कैसे 15 अगस्त की रात अरेस्ट हुए इतने मजबूत लोग बाहर नहीं आ पाये। फिर जो उनको कहानी पता चली, होम मिनिस्टर के पीए शुक्ला से, उसपर तो तीनों स्तब्ध रह गए। जिन लोगों लोग को अपस्यु ने फंसाया था, उन्हीं के पैसे से उनको सजा दिलवा दिया।


सभी बातों पर गौर करती हुई कलकि कहने लगी…… "परम, युक्ते, क्या कहना है इसके बारे में।


युक्तेश्वर:- दीदी, इसमें बहुत गहराई है। हम इससे दुश्मनी नहीं करने का फैसला तो कर चुके हैं, अच्छा फैसला है, लेकिन..


परमहंस:- छोटे लेकिन क्या ?


युक्तेश्वर:- लेकिन इसके कुछ लोगों को करप्ट करना होगा, ताकि इसके अंदर की इंफॉर्मेशन मिलती रहे। मायलो ग्रुप हमारा डायरेक्ट कॉम्पिटीटर है, हम ब्लैक और व्हाइट दोनो घंधे में जितना नुकसान पिछले 1 साल से उठा रहे हैं, उतना तो हमने 4 साल में नहीं कमाया था। अब अगर ये मायलो से हमे टारगेट करता है और अपने बेस से हमारे ब्लैक को टारगेट करेगा तो अगले एक साल में हम बर्बाद हो जाएंगे।


परमहंस:- बात तो सही है दीदी, और पैसा किसे प्यारे नहीं। भले ही ब्लैक मनी का छोटा हिस्सा देकर उसने लोकेश और उसके कॉन्टैक्ट को खत्म किया हो। लेकिन जैसे ही उसे धंधे के बारे में पता चलेगा, वो उसमे हाथ जरूर डालेगा। और जिस हिसाब से पैसे खर्च करके उसने सबको सजा दिलवाया है, एक बात तो साफ है कि वो लोगों की सही कीमत जानता है और कौन कैसे टूटेगा उसका पूरा ज्ञान है। ऐसे लोग जब हमारे ब्लैक और व्हाइट दोनो धंधे को टारगेट करेगा, तब हमे बर्बाद होने ने महीना भी नहीं लगेगा।


कलिका:- "कभी-कभी जितने से ज्यादा हारना जरूरी होता है। कभी-कभी खुद को बलवान साबित करने से ज्यादा अच्छा, खुद को बेवकूफ और कमजोर दिखाना ज्यादा अच्छा है। बस नजर रखो और उसका एक भी आदमी, फिर चाहे वो लोकेश के गैंग का हो या फिर इससे जुड़ा हुआ कोई भी, अपने आस पास भी मंडराए तो समझ लेना वो हमे टारगेट कर रहा है।"

"वो अपनी रक्षा कर सकता है, अपने फैमिली कि रक्षा कर सकता है, लेकिन हर किसी पर नजर रख पाए संभव नहीं। उसे जितने दो, हमे नुकसान पहुंचाने दो और हम एक साथ पहला 10 टारगेट लेंगे। ऐसा मरेंगे उसे, की वो बौखलाकर पागल हो जाएगा। परेशान हो जाएगा कि पैसे बढ़ाए या परिवार बचाए और तब हम आमने-सामने बैठकर बातें करेंगे।"

"पैसे वो कमाये या हम अंत में आने तो हमारे पास ही है। वैसे भी वो लोकेश हमे 40000 करोड़ का नुकसान दे चुका था, अग्ला 100000 करोड़ का भी ये हमे नुकसान देदे, तब भी ये केवल हमारे हिस्से को ही बर्बाद करेगा, हमे नहीं। कर लेने दो इसे हमे बर्बाद, जीत लेने दो इसे अगर ये हमसे जितना चाह रहा है तो। अनुकूल टक्कर भी देते रहो, ताकि उसे लगे नहीं की जीत आसानी से मिल रही। पंगे करने का शौक है तो कर लेने दो पंगा… हम तीनो अंत में खेलना शुरू करेंगे।"


शतरंज की विषाद बिछ चुकी थी और दोनो ही पक्षों ने अपनी पहली चाल चल दी थी। शायद इस बार दोनो ही पक्ष एक जैसा खेल दिखाने के इरादे से उतरे थे। अपनी चाल चलकर बस सामने वाले पर नजर दिए रहना और दोनो को कोई भी हड़बड़ी नहीं थी कि सामने वाला चाल अगली चाल चलने में कितनी देर लगाने वाला है।


बहरहाल तकरीबन डेढ़ बजे तीनों भाई बहन ने अपने सभा को समाप्त किया और सोने चले गए। वहीं अपस्यु की सभा भी लगभग उतने ही बजे खत्म हुई, लेकिन वो सोने के बजाय, कार निकाला और ऐमी के पास चल दिया।


अंधेरी रात और लगभग सब सोए हुए। अपस्यु कार खड़ी करके अपने आंख मूंदकर आकलन करने लगा कि ऐमी कहां होगी। और जैसे ही उसे ऐमी का ख्याल आया, उसी के साथ प्यारी सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। वो समझ चुका था कि ऐमी इस वक़्त कहां होगी, लेकिन इससे पहले कि ऊपर छत पर जाता, पीछे से उसके कंधे पर हाथ पड़ा और अपस्यु पीछे मुड़कर देखने लगा..


"निम्मी तुम, नींद नहीं आ रही थी क्या?"… अपस्यु पीछे मुड़ते हुए पूछने लगा..


निम्मी:- मैंने सुना था आप हर वक़्त चौकन्ने रहते है। इसे चौकन्ना कहेंगे। जितने लापरवाह आप अभी हुए हैं, इतने में तो पिस्तौल की पूरी मैग्जीन खाली हो जाती।


अपस्यु:- हा हा हा हा… मुझे माफ़ कीजिए मिस, आगे से इस बात का खास ख्याल रखूंगा।


निम्मी:- मुझे समझने के लिए आप का शुक्रिया। मुझे यकीन था आप जरूर आएंगे, इसलिए इंतजार कर रही थी।


अपस्यु:- लोकेश का क्या हुआ यही जानना है ना?


निम्मी:- आप को कैसे पता?


अपस्यु:- ये सीने कि आग ही कुछ ऐसी होती है। रुको दिखता हूं।


अपस्यु ने अपने मोबाइल का स्क्रीन ऑन किया और वहां लगे नाईट विजन कैमरे में वो लोकेश को देख पा रही थी जो नीचे लेटा काफी छटपटा रहा था। … "इसे कही कैद कर दिया है।"


अपस्यु:- केवल कैद ही नहीं किया है बल्कि जिंदगी में अंधेरा भी भर दिया है। बस दिन के कुल 1 घंटे की रौशनी इसके हिस्से में है जो इसके खाना पहुंचने के वक़्त होगा, बाकी 23 घंटे अंधेरे में जिएगा।


निम्मी:- आह ! सुकून मिला सुनकर। 4 दिन बाद मै निकल रही हूं, दृश्य भईया के साथ, क्या पार्थ भी चल सकता है हमारे साथ?


अपस्यु:- जब उसे चाहती हो फिर इतनी दूरी क्यों बनाई हुई थी।


निम्मी:- खुलकर चाहने का अवसर तो अब मिला है पहले तो शंका थी कि वो मुझे चाहता है, या मेरे जिस्म को। और बस इसी ख्याल से अपनी चाहत को समेटी थी क्योंकि पता ना अपनी नादानी में एक और बड़ी गलती कहीं ना कर जाती। वैसे भी सच कहूं तो प्यार जैसे कोई बात नहीं है, बस उसके साथ अब अच्छा लगने लगा है।


अपस्यु:- इसी को तो चाहत कहते हैं। खैर तुम उसे आराम से ले जाओ और दोनो एक दूसरे का ख्याल रखना। अब जाओ तुम आराम करो।


निम्मी:- ऐमी छत पर सो रही है लेकिन..


अपस्यु:- हां लेकिन तुम सब को आश्चर्य तब हो गया होगा जब मेरी मां पहले उसके साथ सोई होगी और देखते ही देखते मेरा पूरा खानदान वहीं सो गया होगा।


निम्मी हंसती हुई…. "आप सब पूरे मेंटल हो। मैं पहली बात इतने जिंदा लोगों को देख रही हूं। और हां आप लोगो की संगति में मेरा भाई भी सुधर गया है। अब पहले की तरह उसका व्यवहार नहीं रहा। मैं जा रही हूं, सुभ रात्रि।


निम्मी के साथ अपस्यु भी अंदर गया। छत पर जब वो पहुंचा तब वहां का नजारा ही कुछ और था। सब लोगो के बीच में ऐमी लेटी हुई थी।… "जब हमे ही परेशान करना है तो हम क्यों ना परेशान करें?"..


अपस्यु अपनी बात सोचकर मुस्कुराया। जुगाड भिड़ाया और नकली बारिश का खेल शुरू हो गया। कच्चे पक्के से सभी आंख मिंजते हुए हड़बड़ा कर उठे और तेजी में नीचे भागने लगे। सभी जम्हाई लेते हुए नीचे आ गए। कुछ वक़्त लगा सामान्य होने में, जबतक वीरभद्र, उसकी मां और निम्मी भी उनके पास पहुंच गई।


सब थोड़े से परेशान होते हुए, बारिश के बारे में कह ही रहे थे कि तभी उनका ध्यान निम्मी पर गया जो हंस रही थी… "ये कमीना अपस्यु, उसका सर फोड़ दूंगा मै".. आरव थोड़े गुस्से में कहने लगा….


नंदनी:- भाई को ऐसा बोलता है, थप्पड़ खाएगा क्या?


कुंजल:- और तक रात के 2.30 बजे आकर जिसने हमारे ऊपर पानी डाला और अपनी होने वाली को ले उड़ा, उसका कुछ नहीं। उसके नाम पर तो आपकी जुबान भी नही खुलती।


नंदनी भिड़ पर गौर करती…. "ऐमी कहां है।"..


स्वास्तिका:- तब से सब क्या कोरियन भाषा में समझा रहे थे। आपका चहेता अपनी बीवी के लिए हमे परेशान करके उसे ले गया। खुद तो एक दूसरे के साथ गुटुर-गुटूर कर रहे होंगे और फालतू में हमारी नींद खराब कर दिया।


इधर लोगों की जब भगदड़ मची थी, तब सब सीढ़ियों कि ओर जा रहे थे और ऐमी मुस्कुराती हुई पानी टंकी के ओर। दोनो की नजर जब एक दूसरे से मिली, दोनो मुसकुराते हुए एक दूसरे को चूमने लगे और चोर की तरह नीचे उतर गए। गाड़ी तेज रफ्तार में चल रही थी और दोनो एक दूसरे को देखकर हंसते हुए घरवालों के रिएक्शन के बारे में सोच रहे थे।
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इधर लोगों की जब भगदड़ मची थी, तब सब सीढ़ियों कि ओर जा रहे थे और ऐमी मुस्कुराती हुई पानी टंकी के ओर। दोनो की नजर जब एक दूसरे से मिली, दोनो मुसकुराते हुए एक दूसरे को चूमने लगे और चोर की तरह नीचे उतर गए। गाड़ी तेज रफ्तार में चल रही थी और दोनो एक दूसरे को देखकर हंसते हुए घरवालों के रिएक्शन के बारे में सोच रहे थे।


ऐमी:- अपस्यु बहुत गलत किये, तुम्हारी मां हम दोनों को उल्टा टांग देगी।


अपस्यु:- वापस मोड़ लू कार..


ऐमी:- अब जब आ ही गए है तो वापस क्या जाना, चलो मासी को परेशान करते हैं।


अपस्यु:- ऐसा क्या, चलो फिर चला जाए।


दोनो रात को 2.30 बजे चले थे और 430 किलोमीटर की दूरी लगभग 2 घंटे में तय करके, प्रताप महल के पास पहुंच गए थे… "बेबी अगली तैयारी क्या फार्मूला वन की है।"..


"ऐसे इंजन के और नट्रॉक्स सस्पेंशन के साथ तो, मुझ जैसे कई फार्मूला इन रेसर मिल जाएंगे, जिसे थोक के भाव से वो लोग डिसक्वालिफाई कर देते है।'… अपस्यु कार को प्रताप महल के ठीक सामने लगाते हुए कहने लगा।


"साइड से रास्ता है, वहां से चोरों कि तरह जाया जा सकता है।" ऐमी अपने लैपटॉप निकलकर प्रताप महल के सिक्योरिटी सिस्टम को हैक करके बोलने लगी।


दोनो फिर उसी रास्ते से, बड़े सफाई के साथ प्रताप महल में दाखिल हो गए। दोनो की खुसुर-फुसुर भी महल में पहुंचने के साथ ही शुरू हो गई।… "मै रूम में नहीं जाऊंगी, तुम सैतनी करोगे, यहीं हॉल में लेटते है।"…. "पागल हो कैसा अजीब लगेगा हॉल में लेटना, कुछ देर बाद सब जाग जाएंगे और हमे फिर सोने नहीं देंगे, पंचायत होगी सो अलग। रूम में ही चलते है।"..


काफी देर समझाने के बाद भी जब ऐमी नहीं मानी तो अपस्यु ने उसका हाथ पकड़ कर खींच लिया और अपने गोद में उठाकर कमरे में ले गया। कमरे में जाते के साथ ही अपस्यु ने ऐमी को बेड पर पटक दिया और जाकर दरवाजे की कुण्डी बंद कर आया।


जबतक वो दरवाजा लगाकर वापस लौटा ऐमी अपने ऊपर के कपड़े उतारकर, केवल ब्रा और पैंटी में बैठ गई। उसे देखते ही… "काफी हॉट लग रही हो।"..


ऐमी:- मेरी जारा भी इकछा नहीं है अपस्यु, लेकिन तुम मानने तो वाले हो नहीं, इसलिए जल्दी करो, मुझे सोना भी है।


"वाह! चढ़ गया भूत तुम्हे। शुभ रात्रि, मैं चला सोने।"… अपस्यु बिस्तर पर जाकर करवट लेकर सो गया। ऐमी पीछे से उसके पीठ से चिपककर, अपना हाथ आगे करके उसके सीने पर चलाती हुई, उसके गर्दन पर किस्स करती हुई… "बेबी थक गए क्या?"


अपस्यु:- हां थका हूं, और सोने दो प्लीज..


ऐमी:- अब जब मैंने कपड़े निकाल ही लिए है तो चलो ना करते हैं।


अपस्यु, ऐमी के ओर मुड़ते हुए…. "कान पकड़ कर माफी मांगता हूं, मुझसे गलती हुई जो तुम्हे कमरे में लेकर आया। मै तो रेपिस्ट हूं ना, जो तुम्हारे साथ जबरदस्ती करता हूं।"


ऐमी, अपस्यु के आखों में झांकती हुई, होंठ हिलाकर सॉरी कहती हुई मुस्कुराने लगी और अपस्यु को बाहों में भींचकर, उसके होंठ से होंठ लगाकर चूमती हुई सो गई।


सुबह के 7 बज रहे होंगे… दृश्य के माता पिता, वीर प्रताप और कंचन दोनो टहलने के लिए निकले। अपने महल के बाहर कार पार्क देखकर… "ये दृश्य सुबह-सुबह कहां गया था।"… दोनो बाहर लगी कार को देखकर यह समझ बैठे की अपस्यु ने कुछ मॉडिफाइड कार जो दृश्य को दी थी, उन्हीं में से एक कार में दृश्य कहीं बाहर गया हुआ था।


उन्हीं के पीछे दृश्य और अश्क भी निकली। दोनो हाथों में हाथ डाले आगे बढ़ ही रहे थे कि दृश्य, अश्क के कमर में हाथ डालकर खुद से चिपका लिया और उसके गले पर किस्स करने लगा….. "अति बेशर्मी कहते हैं इसे।" .. अश्क खुष्फुसती हुई अपनी प्रतिक्रिया दी और दृश्य को आखें दिखाने लगी।


अश्क अभी दृश्य का हाथ छुड़ाकर अलग ही हुई थी कि पीछे से दृश्य की दीदी पायल और उसके जीजू आकाश, दोनो को "गुड मॉर्निंग" विश किया और दोनो को देखकर हंसते हुए आगे बढ़ गए।


अश्क:- लव आप भी ना हुंह। ना वक़्त देखते हो ना जगह, बस शुरू हो जाते है। भईया और भाभी ने लगता है देख लिया।


दृश्य:- अच्छा सॉरी बाबा, प्लीज अब सुबह-सुबह अपना मूड ऑफ ना करो।


दृश्य और अश्क फुसफुसाई सी आवाज़ में निकझोंक करते हुए जैसे ही बाहर निकले…. "दोनो रात को कहां बाहर गए थे।"… पायल, दृश्य घूरती हुई पूछने लगी।


दृश्य:- हम कहीं नहीं गए थे दीदी सच कह रहे है।


पायल:- दृश्य मै क्या करूं तुम्हारा। आंटी मुझे ताने दे रही है कि "देखा तेरा भाई 24 घंटे घर पर रहने की बात नहीं मान सका।"


अश्क, दृश्य को घूरती…. "सच सच बताओ लव कहां गए थे। कम से कम मुझे तो साथ ले चलते।"..


पायल, अश्क का कान पकड़ती…. "मुझे पता है इस पूरी कांड की रचायता तुम ही हो।"..


"ऑफ ओ, पता नहीं कब ये बड़े लोग सुधरेंगे। जूनियर तुम मेरे साथ ही रहना हमेशा, इन लोगों के साथ नहीं रहना।"… जूनियर ऐमी, यानी कि पायल की बेटी उन सबको एक जगह खड़े होकर बातें करते देख, अपनी प्रतिक्रिया देती हुई, अपने साथ जूनियर दृश्य को लेकर बाहर निकल गई।


अश्क:- छोटी है पर प्वाइंट की बात कह गई। कुछ सीखो इन जूनियर्स से। चलो लव मॉर्निंग वॉक करके आते हैं, इन्हे तो हर वक़्त यही लगता है कि हम इनकी सुनते ही नहीं है।


दृश्य की मां कंचन…. क्या बात है अश्क, बहुत खूब। लगता है कुछ क्लासिकल हिंदी मूवी देखकर मुझे 60 के दशक की सास का रोल निभाना ही पड़ेगा। अब तुम दोनों जारा बताओगे की कहीं घूमने नहीं गए तो ये कार कैसे बाहर आयी। वो भी स्पेशल कार। पायल जरा इनका वो डायलॉग दोहराना तो..


पायल:- ये कोई आम कार नहीं है, मेरे भाई ने जेम्स बॉन्ड वाली कार मुझे गिफ्ट की है।


दृश्य और अश्क की नजर भी कार पर गई, दोनो एक दूसरे का चेहरा देखकर मानो इशारे में पूछ रही हो… "ये कार बाहर कैसे आयी।"


दृश्य और अश्क दोनो ने अपना हथेली चिपकाकर कार को खोलने की कोशिश करी, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। 1,2 कोशिश के बाद दृश्य और अश्क दोनो एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे और उन्हें हैरान देखकर आकाश पूछने लगा…. "क्या हुआ दोनो हैरान क्यों हो।"..


अश्क:- आकाश भईया ये हमारी कार नहीं है।


कंचन, उत्सुकता से…. "क्या ये अपस्यु और ऐमी की कार है। या आरव की।"..


दृश्य:- एक बार ही तो दोनो से मिली हो, कभी मेरे लिए तो इतनी खुश नहीं हुई मां।


वीर प्रताप:- मुझे तो आजकल देखती भी नहीं, खुश होना तो दूर की बात है।


कंचन:- ख़ामोश हो जाओ सब, वो लोग यहां आए है तो गए कहां। कब आए?


कंचन की बात सुनकर हर किसी ने ढूंढ़ना शुरू किया। वहीं गांव के कुछ लोगों का कहना था कि सुबह 4 बजे के आस पास उनके यहां कार खड़ी हुई, उन्हें लगा दृश्य आया होगा।


1 घंटे तक गांव में ढूंढ लिया हर किसी ने, लेकिन यह तक पता नहीं चल पाया कि अपस्यु आया था या आरव। अंत में दृश्य ने पहले अपस्यु को कॉल लगाया, फिर ऐमी को और अंत में आरव को।


आरव कॉल उठाते हुए…. "थैंक्स भईया आपने कॉल कर दिया।"..


दृश्य:- क्या हुआ आरव..


आरव:- भईया ऐसे अनजान बनकर मत पूछो। अपस्यु ने ही कॉल लगवाया है ना यहां का हाल जानने। उससे कह देना दोनो जब दिल्ली पहुंचेंगे तो उनका जबरदस्त स्वागत होगा।


दृश्य, हंसते हुए…. "हुआ क्या वो तो बताओ।"


आरव:- कमिने ने कल रात हमारी नींद खराब करके, सबके बीच से ऐमी को लेकर भाग गया। सब बहुत गुस्सा है।


दृश्य:- अब सबके बीच में ऐमी को फसाकर रखोगे उसे परेशान करने के लिए, तो यही सब दिन देखने होंगे ना।


आरव:- हां उसने अपना काम कर दिया अब हमारी बारी है। उससे कहना हम दिल्ली के लिए अभी निकल रहे है, और अपना ख्याल रखे। जब भगोड़े हो ही गए हैं तो कहना आराम से घूमकर आ जाए। उसका स्वागत के लिए हम इंतजार कर लेंगे।


दृश्य:- हां ठीक है आरव सर, और कुछ संदेश देना है दोनो को…


आरव:- नहीं आप को संदेश देना है। दोनो से बचकर रहना, नहीं तो अपने रोमांस के चक्कर में, आपके सुखी जीवन में कब आग लगा दे आपको पता भी नहीं चलेगा। वैधानिक सूचना थी मैंने दे दिया, अब आपको मानना है तो मानो वरना आज दिन भर में तो आपके बुद्धि का विकास हो ही जाना है।


आरव की बात सुनकर दृश्य हंसते हुए कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया और सभी लोगों को यहां अपस्यु और ऐमी कैसे पहुंचे उसका पुरा विवरण बता दिया। दोनो के यहां पहुंचने की कहानी जानकर सबकी हंसी निकल गई। कुछ साल पहले की वो हसीन कहानी ताज़ा हो गई, जब दृश्य और अश्क के ऊपर भी पहरा लगा होता था और दोनो ऐसा ही कुछ हरकत कर बैठते थे।


अपस्यु और ऐमी के बहाने ही सही, लेकिन हर कोई दृश्य और अश्क की एक बार फिर खिंचाई करने बैठ गया। प्रताप महल में पहले से बहुत से लोग पहुंचे थे। बीती बातों का दौड़ ऐसा चला की एक-एक करके सभी लोग आते चले गए और महफिल को ज्वाइन करते चले गए।


एक बड़ी सी महफिल, जहां 4 कपल बैठे थे जो दृश्य के लंबे सफर के शुरू के साथी रहे थे। 6 बच्चे जिनकी गैंग लीडर जूनियर ऐमी थी, वो भी वहां खेल रहे थे। कुछ अभिभावक भी उस महफिल में मौजूद थे, जिसमें एक तो कंचन और वीर प्रताप थे जो स्थाई रूप से प्रताप महल में रहा करते थे और साथ में आयी थी कंचन कि जिगरी सहेली चंद्रिका देवी और अश्क की मां। कुल मिलाकर पूरी पंचायत सुबह-सुबह लग चुकी थी और जब बीते दोनो की बात शुरू हुई, समय का पता ही नहीं चला।


सुबह के 10 बज चुके थे। ऐमी मीठी अंगड़ाई लेकर जागी और अपस्यु के बदन को अपने हाथों में समेटकर, उसके गाल पर अपनी जीभ चलाने लगी। अपस्यु भी अपने आंख मूंदे ऐमी के ओर मुर गया और उसे अपनी बाहों में समेटकर अपनी आखें खोलते हुए… "हर सुबह ऐसे ही जागता रहूं।"..


ऐमी प्यार से अपस्यु के होंठ पर अपने होंठ फिराति…. "बस कुछ दिन और बेबी, फिर हमारी शादी होगी और हमारी रोज ऐसी ही सुबह होगी।"..


अपस्यु अपना हाथ ऐमी के पीठ पर धीरे-धीरे चलाते हुए उसके ब्रा के स्ट्रिप को खोल दिया। "हिहिहिहिहिही, बेबी प्लीज अभी उक्साओ नहीं, वरना मै भी मूड में आ जाऊंगी।"..


अपस्यु, ऐमी को खुद में भींचते… "ऐसा क्यों लगता है कि आज कल तुम बहुत शरारती होती जा रही जो स्वीटी।"..


ऐमी:- मेरी सारी शरारतें तो तुम से ही है, और मुझे पुरा हक है कि मैं तुम्हे तंग करूं।


अपस्यु:- ओह हो इरादे तो बहुत खतरनाक हैं। अच्छा जाओ तैयार हो जाओ, मासी से मिलकर निकलते है।


ऐमी:- नाह, ऐसे ही कुछ देर मुझे समेटे रहो ना।


अपस्यु:- ऐमी, उठो भी, अब जाओ भी।


ऐमी:- प्लीज कुछ देर आराम करने दो ना..


अपस्यु ऐमी को छोड़कर खड़ा हो गया और अपनी आखें दिखाते… "अब तुम उठ रही हो या नहीं स्वीटी।"..


ऐमी:- नहीं उठती मै… जाओ तुम्हे जो करना है कर लो।


अपस्यु तेजी के साथ बिस्तर पर लपका और ऐमी को उल्टा घूमकर उसके कमर पर बैठ गया। अपने दोनो हाथ से ऐमी के पीठ पर मजबूत हाथ का दवाब डालते उसके पीठ दबाते हुए… "खुमारी मिटी या और बदन दबाऊं।"..


ऐमी:- आह ! बेबी मज़ा आ रहा है, ऐसे ही दबाते रहो ना। और हां थोड़े पाऊं भी दबा देना ना।


अपस्यु उसकी बात सुनकर हसने लगा। पहले ऊपर फिर नीचे। जैसे ही हाथ ऐमी के घुटनों के ओर बढ़ने लगे.. "बेबी एक मिनट उठोगे।"..


अपस्यु, ऐमी के ऊपर से हटा, ऐमी अपनी ब्रा पहनकर खड़ी हुई और अपस्यु के बाल बिखेरती हुई….. "तुम्हारा साथ होना ही जिंदगी है, लव"… कहती हुई ऐमी अपने होंठ से अपस्यु के होंठ को प्यार से स्पर्श करती… "तुम मेरी हंसी हो, तुम मेरी खुशी हो। आती हूं फ्रेश होकर।"…


ऐमी की बातों पर हंसते हुए अपस्यु लेट गया। ख्यालों में वो ऐसे डूबा कि उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी आंख लग गई। पानी की छींटें चेहरे पर पड़ने से अपस्यु की आंख खुली। ऐमी सूखे तौलिए से अपनी बाल झटक रही थी और अपस्यु को देखकर मुस्कुरा रही थी।…. "अब उठो भी, साढ़े 10 बज गए हैं और मुझे भूख सी लगने लगी है।"..


दोनो लगभग 11 बजे तक तैयार होकर, मासी से मिलने के लिए कमरे के बाहर आए। जैसे ही कमरे के बाहर निकले, बच्चे उन्हें देखकर डर से सब अपने माता पिता के पास आ गए, सिवाय जूनियर ऐमी के। वो अपस्यु और ऐमी को गौर से देख ही रही थी, तभी पूरी सभा कि नजर भी इन दोनों पर चली गई।
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ऐमी, अपस्यु को देखती…. "बेबी लगता है लग गए अपने। यहां से भी भाग चले क्या?"

अपस्यु:- अच्छा सुझाव है। तुम शुरू हो जाओ।


ऐमी बिना किसी पर ध्यान दिए सीधे कंचन के पास पहुंच गई और उसके पाऊं छूती… "वाह मासी आप तो बिल्कुल चमक रही है, ब्यूटीपार्लर गई थी या ये कोई नेचरल तरीका है खुद को मेंटेन रखने का।"..


कंचन:- मै क्या करूंगी ब्यूटीपार्लर जाकर। ये सब छोड़ तुम दोनो कब आए।


"सब सो रहे थे तो बिना दिस्ट्रूब किए हम आराम कर रहे थे। जयपुर में हमे कुछ काम था, तो सोचा काम भी कर लेंगे और पुरा दिन मेरी प्यारी मासी के पास बिताएंगे।"… अपस्यु, कंजन के गाल खिंचते अपनी बात कहा और दोनो उठकर वहां से जाने लगे।


कंचन:- पूरे दिन के लिए आए थे तो अब कहां चल दिए।


ऐमी:- मासी वो अपस्यु ने बताया ना, हमे जयपुर में कुछ काम है, वहीं निपटाकर आ रहे हैं।


दोनो एक एक करके आए, अपनी बात रखी और बिना कंचन की सुने, बड़ी तेजी में वहां से निकल गए। जितनी तेजी में वहां से बाहर गए थे, उससे दुगनी तेजी में अंदर आते…. "किसने उस आरव के कहने पर हमारी गाड़ी को बुलडोजर से ब्लॉक किया है।"… ऐमी अंदर आकर गुस्से से अपनी बात कही।


उसकी बात सुनकर दृश्य और अश्क हसने लगे। ऐमी आकर वापस कंचन के पास बैठ गई। कंचन, ऐमी के दोनो गाल खींचती…. "मुझे छोड़कर कहां जा रही थी। मुझसे मिलने आयी थी ना, हां।".


ऐमी:- हां, आपसे मिलने ही आयी थी, लेकिन इतने सारे लोगों को देखकर समझ में आ गया कि आधा दिन ताना सुनने में और आधा दिन सवाल के जवाब में निकल जाएंगे, फिर आपसे बात कब होगी।


पायल:- ये तो बहुत बदतमीज लड़की है, जब हम तुम्हे जानते ही नहीं फिर तुमसे सवाल क्यों करने लगे, और भला हम तुम्हे ताने क्यों देने लगे?


ऐमी गहरी श्वांस लेती अपने चेहरे पर मुस्कान लायि…. "माफ कीजिएगा पायल दीदी, वो तो मैंने मासी और दृश्य भईया के लिए कही थी।"..


अपस्यु:- क्या मै यहां पर एक ग्रेट साइंटिस्ट को देख रहा हूं, जिनका नाम वैदेही अग्रवाल है। जेनेटिक इंजीनियरिंग की महान डॉक्टर, जिन्होंने पिछले साल अपना एक आर्टिकल लिखा था, जिसमें उन्होंने बताया था कि पैतृक बीमारी जैसे की डायबिटीज, हृदय रोग इत्यादि को रोका जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि जब आप बच्चा प्लान कर रहे हो तो उस वक़्त एक प्रकार का सप्रेशर इस्तमाल करे। इस आर्टिकल के बाद तो मेडिकल वर्ल्ड में आप ही छाई रही थी।


वैदेही उर्फ वैली आश्चर्य से अपस्यु को देखती हुई…. "क्या तुम मेडिकल के स्टूडेंट हो।"..


ऐमी:- नहीं मैम अपस्यु को पढ़ने की बीमारी है और उसे जिस विषय में रुचि हो वो पुरा पढ़ लेता है।


दृश्य:- वैली, दिल्ली तुम इन्हीं के पास रहोगी। ये है मेरा मौसेरा भाई अपस्यु, जो साहित्य का छात्र है, लेकिन ये हर सब्जेक्ट को पढ़ सकता है। और ये क्यूट सी लड़की जो दिख रही है, वो है म्यूज़िक की स्टूडेंट, लेकिन ये कंप्यूटर साइंस इसके नशों में दौड़ता है।


अपस्यु की बहन स्वास्तिका जो मेडिकल 4th ईयर पुरा करेगी, अपने यूनिवर्सिटी कि टॉपर है और हां उसने दिल्ली ऐम्स को छोड़कर पता नहीं क्यों मुंबई मेडिकल ज्वाइन कि। हां लेकिन उसका ज्ञान भी इन्हीं दोनों की तरह अव्वल दर्जे का है।


वीर प्रताप:- लगता है विद्वानों को महफिल में आ गए है, अब मै तो बचपन से ही कंचन के साथ इश्कबाजी करता रहा हूं, तो भाई अपना पढ़ाई-लिखाई केवल इतना ही रहा जितना हम बता सके कि हां अपने पास ये डिग्री है वो डिग्री है।


पायल:- फिर मैं तो और भी जीरो ही गई अंकल। मैंने तो पढ़ाई केवल शादी के लिए की थी। ऐसा लग रहा है अब हम इस महफिल में इनके मुंह देखते रह जाएंगे।


अपस्यु, वीर प्रताप के करीब बैठ गया और ऐमी पायल से चिपक गई…. "मौसा जी फिर तो एक किस्स हो ही जाए, आपने मौसी को कैसे पटाया था।"..


इधर ऐमी… "पायल दीदी जब केवल शादी के लिए पढ़ाई कर रही थी तो उस वक़्त के कुछ किस्से कहानी भी बता दो, कि आपको कैसा लड़का चाहिए था और आकाश जीजू में आपको ऐसा क्या दिख गया जो आपने इन्हे पसंद कर लिया।


अपस्यु:- ऐमी हद है, पुरा सवाल ही कॉपी कर दी।


पायल:- इसका भी नाम ऐमी है।


दृश्य:- जी हां इसका भी नाम ऐमी है और जिसे आपने आत गौर समझकर बहुत कुछ सुना दिया।


पायल:- गौर ही तो हैं। केवल नाम ऐमी होने से क्या अपने हो जाएंगे। तुम्हारी मम्मी ने जिसे इतना सहयोग किया। जिस बहन को इतना पैसे दिए, की उसने यूरोप में पुरा व्यवसाय जमा लिया, वो तुम्हारे साथ हुए इतने बड़े कांड के बाद देखने तक नहीं आए। तुम्हारे बारे में एक खोज खबर भी लिए होते तो तुम्हे नौकरों की तरह पलना नहीं पड़ता।

यहां बैठे हर एक शक्स से ज्यादा तुम में क्षमता है दृश्य, लेकिन क्या फायदा हुआ इतनी क्षमता का जब तुम्हे पढ़ने ही नहीं दिया गया। जब तुम्हे कुछ सीखने ही नहीं दिया गया। अंकल, आंटी ने जिन्हे अपनो की तरह रखा था, उन्होंने तो तुम्हारे बुरे वक़्त में एक खबर तक लेने नहीं आए। आंटी की बहन का बेटा है, तुम्हारा भाई है तुम्हे मुबारक हो, मेरे लिए है गैर ही रहेंगे और मुझे समझाने की कोई जरूरत नहीं।


पायल की बात सुनकर ऐमी उसके पास से उठ गई। चेहरे पर कोई सिकन नहीं और ना ही तीर से चुभने वाले शब्दों के लिए कोई विकार था मन में। बिल्कुल सामान्य रही और आराम से आकर अपस्यु के पास बैठ गई। अपस्यु पायल की सारी बातों को बड़े ध्यान से सुन रहा था और अपने मुख पर वही चिर परिचित मुस्कान लिए बस पायल की बात के समाप्त होने की प्रतीक्षा करता रहा…. जैसे ही पायल की बात समाप्त हुई..


अपस्यु:- मैंने काफी वक़्त लिया, लेकिन अपने मौसा और मौसी के परिवार को ढूंढने यहां आया था। मै ज्यादा सफाई देने में विश्वास नहीं रखता, हां किन्तु बात मेरी मां से जुड़ी है और लांछन उन पर लगा है, तो मै एक ही बात कहूंगा, उन्होंने आज तक जो भी किया वो निहस्वार्थ भावना से किया। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार से आपने दृश्य भईया के लिए किया या फिर मेरी मौसी ने अपनी बहन के लिए किया।"


"पूरे मामले में मै एक ही बात कहूंगा, उन्हें यदि जानकारी होती की यहां कुछ ऐसी घटना हुई है तो वो अवश्य ही यहां आती, लेकिन जब उन्हें सूचना ही गलत दी गई हो, तो वो भी क्या कर सकती थी। इसका बहुत ही बेहतरीन उदाहरण देता हूं। हमारी छोटी मां, नंदनी रघुवंशी, उनके पूरे परिवार का यहां कत्ल हो गया 2006-07 में और उन्हें ये जानकारी 2014 में हुई। जानकारी बहुत ही अहम कड़ी होती है।"


"मैं अपनी मां के संदर्व में इतना ही कहूंगा, इसके अलावा इतिहास में यदि जाएंगे तो हर दौर की कहानी में जहां बहुत कुछ बहुत बुरा हो रहा होता है, वहां कुछ अच्छा भी होता है, और मै सदा अच्छे पक्ष को याद रखता हूं और बुरे पक्ष को भूलना ही बेहतर समझता हूं, क्योंकि वो विकार पैदा करते हैं। यदि मेरी मां ने दृश्य भईया की खबर रखी होती तो शायद आपको वो कभी नहीं मिलते।"


"मानता हूं दृश्य भईया के अंदर बल और बुद्धि का कमाल का मिश्रण है, लेकिन क्या फायदा होता यदि वो अपने बल और बुद्धि में इतना आगे निकल जाते की फिर ये अपने जीवन की सबसे पेंचीदा गुत्थी ही नहीं सुलझा सकते और ज़िन्दगी एक बड़े से एसी ऑफिस में गुजर लेते। ये पूरी शृष्ठी श्रेणी क्रम में जुड़ी है। किसी एक वक़्त में होने वाली घटना कई बातों को प्रभावित करती है। इसलिए इतिहास कि गलती में झांक कर देखने के बाद कभी नहीं कहना चाहिए कि काश ऐसा हो जाता, क्योंकि आप की ये कल्पना भविष्य में होने वाली कई घटना को प्रभावित कर जाती है।"…


ऐमी:- पायल दीदी, कुछ चीजें निश्चित होती है जैसे की सिंडीकेट के अस्तित्व के पीछे की सोच, बस कुछ ऐसी घटनाएं हुई और उस जाल में मौसा जी फस गए। आकाश जीजू के प्रारंभिक जीवन, और कुछ ऐसी घटना हुई और आप उनके जीवन में चली आयी। डॉक्टर शांतनु का जेनेटिक प्रयोग और कुछ ऐसी घटना हुई और उसका हिस्सा दृश्य भईया हो गए। ऐसा नहीं है कि हमारे काश बोल देने से इतिहास कि घटना नहीं होती, वो घटना तो होकर रहती, बस फर्क इतना होता की हमारी जगह इस बात को अलग लोग चर्चा कर रहे होते।


अपस्यु:- लगता है माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया है। पायल दीदी आपकी बात चुभी जरूर है लेकिन कोई मलाल नहीं, क्योंकि आपके विकार में दृश्य भईया के लिए प्यार नजर आता है।


पायल:- कितने नाटक करते है ना ये लोग। अपनी भोली बातों से किसी और का दिल बहला लेना। तुम्हे दृश्य की जरूरत थी क्योंकि तुम्हे पता था कि वीरदोयी से तुम अकेले नहीं जीत पाओगे, इसलिए दृश्य के पीछे आए। तुम्हारा अनाथालय में बच्चो का होना भी एक साजिश का ही नतीजा है, जिसके आधार पर तुमने दृश्य का भरोसा जीता। और जितनी जानकारी तुम्हे वैली के बारे में है, अब तो मुझे यकीन हो गया है कि किसी साजिश के तहत तुम इसे अपने यहां प्रयोग करवाना चाहते हो। मैंने अपने जीवन में कई सारी घटनाएं देखी है, बातों से ये लोग पिघल सकते है मै नहीं। तुम तो इतने शातिर हो की खुद सामने से दृश्य को यह कहने पर मजबूर करवा दिए की वो प्रताप ग्रुप को मायलो ग्रुप के साथ मर्ज कर ले। अपनी बातों से इन लोगों को फसाओ मै नहीं फसने वाली।


कंचन:- अपस्यु और ऐमी नाटक अपने मासी के पास करने आए थे ना पायल, तुम्हे तो परेशानी नहीं होना चाहिए था। हां ऐमी से गलती हुई की उसने बिना जाने यह सोच लिया कि यहां पर मौजूद लोग उसकी खिंचाई करेंगे, उससे सवाल जवाब करेंगे। नहीं जानती थी ना वो भी की यहां सिर्फ उसके मासी और मौसा है बाकी सब से उनका कोई रिश्ता नहीं..


दृश्य:- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मां पायल दीदी तो बस..


कंचन:- एक दम चुप, बीच में मत बोलना। जब पायल इतना कुछ कह रही थी, तब बीच में क्यों नहीं बोले। हां तो मैं कह रही थी पहले ऐमी ने गलती की और उसे सुना दिया गया, कोई बात नहीं है, उसने भी सुन लिया कोई जवाब नहीं दिया। मैंने भी सुन लिया और कोई जवाब ना दी, यह सोचकर कि अपस्यु और एमी को आगे से ख्याल रहे इन बातों का।

लेकिन उसके बाद जब दृश्य ने तुमसे (पायल) कुछ कहा और उसकी बात पर प्रतिक्रिया देती हुई तुमने दोनो (अपस्यु और ऐमी) को सुना दिया। तुम्हे नहीं विश्वास था तो पहले दृश्य को मना कर देती, मत करो अपस्यु का काम। मत जाओ उन लोगो के फालतू के काम में टांग अड़ाने। लेकिन तुमने मना नहीं किया क्यों, क्योंकि तुम्हे भी पता था कि दृश्य तो पहले से लोकेश को मारने कि सोच रहा है, और अपस्यु भी साथ में होगा तो चिंता कम होगी। क्या केवल अपस्यु का ही स्वार्थ था उस काम के पीछे।

उसके बाद जितनी भी बातें हुई, उसका प्रस्ताव खुद दृश्य ने दिया था। तुम्हे इन दोनों को जली-कटी सुनाने से अच्छा होता की दृश्य को हर काम के लिए मना कर देती। बोल देती कोई कंपनी मर्जर नहीं होगा, वैली कहीं नहीं जाएगी। यदि दृश्य से नहीं बोला जाता, तो मुझसे कह देते, मै अपस्यु से बात कर लेती। तुमने लेकिन गलत तरीका अपनाया है पायल। चलो यहां से अपस्यु चलो ऐमी…


कंचन काफी गुस्से में नजर आ रही थी। वो ऐमी और अपस्यु को लेकर ऊपर अपने कमरे में चली गई और नीचे लोग एक दूसरे का मुंह देख रहे थे। बात शायद कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी अपने ही लोगों के बीच कंचन, पायल को सुनाकर चली गई और उसे ये बात अखर गई। ऐसा नहीं था कि पायल के भी कुछ गलत इरादे हो, वो तो अपने बीते हुए दिनो के बारे में सोचकर, किसी पर विश्वास नहीं करना चाहती थी। कुछ बहुत ही करीबी लोग थे जो खून के रिश्ते में थे और उन्होंने ही एक दर्द भरी कहानी उनके जीवन में रच दी थी, शायद यही वजह रही थी कि पायल अब किसी पर भरोसा नहीं करना चाहती थी। बात जो भी हो लेकिन माहौल तनावपूर्ण था।
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तीनों कंचन के कमरे में बैठे थे और कुछ पल की खामोशी के बाद…. "क्या हुआ मासी, इतनी टेंशन में रहोगी तो कैसे काम चलेगा।".. अपस्यु ने बात शुरू की..


कंचन:- हुंह ! अपने बच्चे से मै ठीक से मिली भी नहीं और उसे फालतू में इतना सुना दिया, ये भी ना देखे मेरी बहू आयी है। एक लड़की के लिए वो सबसे बुरा पल होता है जब उसके सामने उसके पति को उल्टा सीधा सुनाया जाए, इतनी भी अक्ल नहीं थी उनमें।


ऐमी:- मासी तो आपने भी तो उन्हें सुनाने में कोई कसर थोड़े ना छोड़ी। हमारे ओर से तो आपने भी बोल ही दिया। अब छोड़ो भी बात को, इतना पकड़ कर रखोगी बात को, तो आपको ब्लड प्रेशर हो जाना है।


कंचन:- मुझे नॉर्मल करने कि कोशिश ना करो, वरना मै चपेट लगा दूंगी ऐमी। अभी मै बहुत गुस्से में हूं।


अपस्यु:- आप का गुस्सा भरा मुंह देखने आए थे हम। सोचा था थोड़े मस्ती मज़ाक और हंगामा करेंगे आपके साथ। अब आप ऐसे गुस्से में रहोगी तो हम चले जाएंगे। मासी भूख भी लगी है हमे।


कंचन:- कहीं ना मुझे नॉर्मल करने की कोशिश ना कर। चल जयपुर घूम आते है, और बाहर ही कुछ खा लेंगे। वैसे भी यहां रहूंगी तो मेरा सर दर्द करने लगेगा। रह-रह कर बातें दिमाग़ में आती रहेगी।


ऐमी:- मासी दिल्ली चलो ना, प्लीज प्लीज प्लीज…


अपस्यु:- हां मासी चलो ना…


कंचन:- में वहां जाकर क्या करूंगी…


ऐमी:- मतलब हमारे पास रहकर क्या करेगी ऐसा कहना है.. हुंह ! मुझे बुरा लगा..


कंचन, कुछ सोचती हुई…. "अच्छा चल ठीक है, चलते है दिल्ली अब तो दोनो खुश ना।"


ऐमी और अपस्यु…. "हां बहुत खुश है मासी"…


कंचन हां बोलकर अपने पैकिंग करने में लग गई, लेकिन तभी ऐमी उसका हाथ पकड़ते… "नाना, कोई पैकिंग नहीं, बल्कि हम आपके लिए शॉपिंग करेंगे।"..


कंचन:- मतलब ऐसे ही खाली हाथ चलूं…


अपस्यु:- कितने सवाल पूछती है। हर चीज में फॉर्मेलिटी। सिर्फ साथ चल दो आप, बाकी आगे क्या होता है वो हम पर छोड़ दो।


कंचन:- पता नहीं तुम दोनो के मन में क्या चल रहा है। ठीक है खाली हाथ ही चलती हूं…


कंचन को तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि वो इन दोनों की बात पर क्या कहे। ज़िन्दगी में पहली बार बिना पैकिंग के बाहर जा रही थी। कंचन ने अपने साथ जूनियर ऐमी और जूनियर दृश्य को लेती हुई, वीर प्रताप को अपने जाने के बारे में बताकर, उन दोनों के साथ निकल गई।


लगभग 2 बजे के करीब सब दिल्ली पहुंचे। ऐमी और अपस्यु ने जब खरीदारी की प्लांनिंग बताई, वो हंसती हुई दोनो के गाल थपथपाती शॉपिंग में लग गई। इधर ऐमी ने कंचन के लिए बहुत सारी चीजें शॉपिंग कर ली और अपस्यु जूनियर्स के साथ शॉपिंग कर रहा था।


कंचन साड़ी और ज्वेलरी की शॉपिंग करके ऐमी के पास पहुंचती…. "तू ना मुझसे काम करवा ले। थका दी है मुझे, आज रात मेरे पाऊं दबाने आ जाना।"


ऐमी:- रात का इंतजार काहे, अभी ही मसाज सेंटर चल दो ना।


कंचन:- क्यों तू रात में मेहंदी लगाएगी क्या?


ऐमी:- हां समझ गई, मुझे ही पाऊं दबाने होंगे।


शॉपिंग खत्म करके सभी पहुंच गए फ्लैट। अपस्यु और ऐमी आगे और कंचन जूनियर्स के साथ पीछे खड़ी थी। जैसे ही दोनो की पहली झलक मिली, कुंजल जोड़ से चिल्लाती हुई… "मां ने कहा है जबतक वो आ नहीं जाती, तबतक आप दोनो बाहर ही रहेंगे।"..


अपस्यु:- और मासी जो साथ आयी है, उनका क्या करना है, उन्हें भी बाहर खड़ा कर दूं क्या?


कुंजल दोनो के पास पहुंचती…. "कहां है मासी"..


अपस्यु और ऐमी दोनो किनारे हुए और सामने उसे कंचन दिखने लगी…. "ये दृश्य भईया की मां है। और ये दोनो क्यूट जूनियर्स दृश्य भईया के बच्चे है।"..


कंचन:- मुझे बाहर ही खड़ी रखोगी या अंदर भी आने दोगी…


कुंजल, सबको अंदर बिठाते…. "मासी आप बहुत अच्छे वक़्त में आयी है। देखो ना भैया अपनी मनमानी पर उतर आए हैं।"..


कंचन:- आज रहने दे बेटा, आज इसे कुछ सुनाओगी तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। कल पंचायत लगाएंगे और दोनो को सजा देंगे।


कुंजल, अपस्यु और ऐमी को देखते हुए…. "हिहिहिही, क्या हुआ मासी, आपको तंग करने गए थे और उल्टा इन्हे सुना दिया किसी ने"…


कंचन:- छोड़ो इसे, ये मुझे बोलकर लाया है कि दिल्ली मै खूब मस्ती करेंगे, क्या सच बोलकर लाया है या मुझे यहां बोर होना पड़ेगा।


कंचन अपनी बात कह ही रही थी कि बाहर से नंदनी, आरव और स्वास्तिका के साथ घर पहुंची। नंदनी कंचन को देखकर एक बार अचंभे में पर गई, फिर तेजी के साथ उसके पास पहुंचती… "मुझे यकीन नहीं हो रहा दीदी, आप यहां आयी है।"


कंचन:- हां यकीन कैसे होगा, याद होती तो ना कभी बुलाती।


नंदनी:- राठौड़ मेंशन में कल गृह प्रवेश का कार्यक्रम है, तो उसी सिलसिले में आज मै आपसे बात करती दीदी।


कंचन:- ओह इसलिए ये दोनो पहुंच गए मुझे लेने। लगता है तुम्हारी दिल की बात को भांप लेते हैं ये दोनो नंदनी।


नंदनी, अपस्यु के कान पकड़ती…. "दीदी, तुम जानती हो, अपस्यु बिल्कुल सुनंदा दीदी कि कॉपी है, शांत, गंभीर और उन्हीं की तरह बिल्कुल शरारती भी।"


अपस्यु:- आपने मां के बारे में ये बातें कभी नहीं बताया मुझे।


नंदनी:- हां इसलिए नहीं बताई, ताकि तुम्हारी शरारतें और ना बढ़ जाए। वैसे दीदी साथ आयी है इसलिए बच भी गए वरना तुम दोनो की खैर नहीं थी। अब जाओ तुम लोग अपना काम देखो, हम जरा गप्पे लड़ाते हैं।


सभी वहां से निकल गए और उन दोनों को अकेले बात करने के लिए छोड़ दिया गया। 1,2 घंटे घर पर बिताने के बाद अपस्यु ऐमी को लेकर जैसे ही सिन्हा जी के यहां छोड़ने जाने लगा, कुंजल भी उसके साथ हो ली।


ऐमी के घर से लौटते वक़्त… "भाई, वहां मासी के घर क्या हुआ था, किसी ने कुछ कहा था क्या?"


अपस्यु:- ना रे बाबा, बस छोटी सी गलतफहमी हो गई है। वो छोड़ ये बता अब तो दिल नहीं जलेगा ना, तू खुश है ना अब।


कुंजल:- आपने कमाल ही ऐसा किया है कि खुश ना रहूं, बेहद खुश हूं। अब सारे दुश्मन खत्म और फैमिली टाइम शुरू। अच्छा सुनो मै सोच रही थी कल से कॉलेज शुरू कर दू।


अपस्यु:- हां तो परेशानी किस बात की आ रही है?


कुंजल:- वो कॉलेज में स्पोर्ट्स शुरू हो रहे है और मै भी हिस्सा लेना चाहती हूं।


अपस्यु:- बॉक्सिंग में हिस्सा लेगी या कुस्ती में।


कुंजल:- सीट पर बैठकर सिटी बजाने में हिस्सा लुंगी।


अपस्यु, झटके से ब्रेक लगाकर कुंजल को घूरते हुए…. "अब ये मत कहना कि तुमने मेरा नाम प्रतियोगिता में डाल दिया है।"


कुंजल इधर-उधर देखती, धीमी सिटी बजाती हुई….. "बहुत ज्यादा नहीं केवल एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, डांसिंग, और जिम्नास्टिक में नाम डाला है।


अपस्यु:- एथलेटिक्स को जरा एक्सप्लेन करेंगी मैम।


कुंजल:- ऑफ ओ एथलेटिक्स मतलब एथलेटिक्स। तरह तरह की रनिंग, तरह तरह के थ्रो, लोग जंप, हाई जंप, सिर्फ इतना ही।


"सिर्फ इतना ही"… अपस्यु गुस्से में उसे घूरते हुए कहने लगा..


कुंजल:- अपना ये लुक बाद में देना, मुझे बस तुम्हे जीतते हुए देखना है।


अपस्यु:- अब मै कुछ कहूंगा तो तुम गुस्सा कर भाग जाओगी। फिर मै मनाऊंगा और तुम रोने लग जाओगी, क्योंकि मेरी बात तुम्हे बुरी लगी होगी और तुम्हे मनाने के लिए अंत में मुझे कमिटमेंट करना ही होगा। ऐसा ही है ना।


कुंजल:- वाह भईया आपके साथ एक बात कि समस्या नहीं होती, ज्यादा ड्रामा नहीं करना पड़ता।


अपस्यु:- मुझे ऐसा क्यों लग रहा है, मुझे तुम्हारी शादी करवा देनी चाहिए।


कुंजल:- तो भी मै तुम्हारे पास ही रहने वाली हूं, ये क्यों भुल जाते हो।


अपस्यु:- हां ठीक है समझ गया। दुश्मन कहीं की, जब देखो तब बॉम्ब फोड़ देती है।


कुंजल:- मुझे जीत कि सिटी बजानी है और किसी भी खेल में हारे तो देख लेना।


अपस्यु:- हां ठीक है मै पूरी कोशिश करूंगा। अच्छा सुनो अभी हम राठौड़ मेंशन चल रहे है। वहां के लोगों को थोड़ा समझा ले और उसकी भी सुन ले।


कुंजल:- ठीक है गाड़ी रोक दो, मै टैक्सी लेकर यहां से घर चली जाऊंगी।


अपस्यु कार की स्पीड बढाते…. "ऐसे कैसे अकेली भाग जाएगी। वहां बिल्कुल शांत रहना और मेरी मदद करना।"..


दोनो कुछ देर में राठौड़ मेशन पहुंच गए। अपस्यु को देखकर वहां के लोग बहुत ज्यादा खुश नहीं नजर आ रहे थे। 15 अगस्त के के बुरे झटके अब तक वहां मातम की तरह पसरा हुआ था।


लगभग घंटे भर की माथा-पच्ची के बाद ,वहां के लोग कुछ शांत हुए। हालांकि उन लोगों को अपस्यु से कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन गम में डूबा हुआ मन कुछ शिकायतें तो जरूर करता है।


एक बात तो यह भी सत्य थी कि लोकेश और कंवल की पत्नी को 2500 करोड़ की धन राशि सौगात में मिली थी और वो दोनो उन पैसों के साथ दिल्ली छोड़ने का मन बना चुकी थी। वहीं कुसुम और उसकी मां, राठौड़ मेंशन से कहीं और शिफ्ट होने का सोच रही थी। अपस्यु ने बहुत समझाने कि कोशिश की दोनो यहीं रुक जाए, लेकिन कुसुम नहीं मानी।


अंत में यही तय हुआ कि अपस्यु उन्हें घर देगा और ये फाइनल था। कुसुम ना चाहते हुए भी हां कह दी। अगले सुबह ही राठौड़ मेंशन पुरा खाली हो चुका था और शाम तक हर कोई राठौड़ मेंशन में शिफ्ट कर चुके थे। राठौड़ मेंशन में उसके असली मालिको की वापसी हो चुकी थी, पुरा मेंशन दुल्हन की तरह चमक रही थी। हर कोई खुश थे और अपने अपने पसंद के कमरे चुन रहे थे।


अगली सुबह सब अपने-अपने काम में लगे हुए थे और अपस्यु अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए काया से मिलने चल दिया। काया कल से एक होटल मै रुकी हुई थी, बेल बाजी और काया दरवाजा खोलती…. "अपस्यु सर आपको आज फुर्सत मिली है।"..


अपस्यु:- चलो चलकर पहले तुम्हारा नया घर दिखाया जाए।


अपस्यु, काया को लेकर अपने फ्लैट ले आया… "काया मैम, चुन लीजिए ऊपर के फ्लोर से कोई भी फ्लैट, जो आपको पसंद हो।"..


अपस्यु:- कोई भी देदो, रहना ही तो है यहां..


अपस्यु, उसे अपने फ्लैट में बिठाते… "ठीक है, 301 और 302 मेरा है, 303 तुम ले लो।"..


काया:- तुम सब तो राठौड़ मेंशन में शिफ्ट कर गए हो ना, मुझे ये घर दे दो।


अपस्यु:- वो शिफ्ट किए है मै नहीं। मुझे अपना काम खत्म होने तक यहीं रहना होगा।


काया:- कल शाम तुम्हारे पुरा परिवार को देखी थी, वो तुम्हे यहां रहने को लेकर राजी नहीं होंगे।


अपस्यु:- इसी बात की चिंता तो मुझे भी है। खैर थोड़ा काम की बात हो जाए..


काया:- हां बिल्कुल, बताओ किसे फसाना है।


अपस्यु:- मतलब…


काया:- मतलब सारे वीरदोयी में मुझे यहां लेकर आए हो, इसका साफ मतलब है किसी को रूप जाल में फंसाना है ना। बस तुम भी दूसरों की तरह कपड़े उतारने मत कह देना, वरना विश्वास टूट जाएगा।


अपस्यु:- हां मुझे पता है विश्वास टूट जाएगा, लेकिन मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं है, मैं मजबूर हूं।


काया, निराशा भरी मुस्कान देती…. "तुमने भी फर्क ना समझा अपस्यु। खैर तुम्हारी ऋणी हूं, इसलिए मै तुम्हारा काम करूंगी।


अपस्यु:- ऐसे मायूस ना हो, पहले बात सुन लो, मै इतना मजबूर नहीं की किसी कमिने को फसाने के लिए तुम्हे कपड़े उतारने कह दूं। और कोई अच्छा है तो उसके लिए तुम्हे क्यों लेकर आऊंगा।


काया:- पहेली बुझाना बंद करो और सीधा-सीधा मुद्दा बताओ।


अपस्यु:- यहां के एक एमपी है सोमेश, उसकी बेटी लिसा को पटाना है।


काया, चौंकती हुई…. "क्या?"


अपस्यु:- हां तुमने सही सुना, अब समझ सकती हो, मै क्यों मजबूर हूं।


काया:- हद है तुम्हरे कहने का मतलब है कि मै एक लड़की को पटाऊं, वो क्या वैसी वाली है।


अपस्यु:- हां लिसा लेस्बियन है, और तुम्हे उसी को पटाना है। हम अपने लक्ष्य की ओर बहुत ही धीमे बढ़ेंगे इसलिए कह नहीं सकते कि तुम्हे उसके साथ… तुम समझ रही हो ना।


काया:- ईईईईईईईईईईईईई… मै लड़की होकर लड़की को चुमुं। मुझ से नहीं होगा, तुम ऐमी से कह दो ये करने। कोई लड़का तो नहीं जो तुम्हारे दिल को चोट पहुंचे।


अपस्यु:- जब हम काम में होते है तो बस अपने लक्ष्य को साधने की कोशिश करते है। फिर उसमे हमारे पर्सनल इमोशंस बीच में नहीं आते। लेकिन ऐमी ये काम नहीं कर सकती।


काया:- कारन..


अपस्यु:- उसका पिताजी, सोमेश मेरा करीबी कॉन्टैक्ट में से है, और लिसा हम सब को जानती है। इसलिए वो ऐमी से पटेगी नहीं और ताज़ा-ताज़ा अभी उसका ब्रेकउप हुआ है, तो हमारे पास अच्छा मौका है।


काया:- पता होता कि ऐसा कुछ होने वाला है तो मै नीलू को भेज देती। मुझे पूरी बात समझाओ की तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है? उसी के बाद मै हां कहूंगी।


तकरीबन आधे घंटे तक अपस्यु ने अपने योजना कि लगभग सारी बातें बता दिया। काया पूरी बात ध्यान से सुनने के बाद… "ठीक है, समझ गई, उस लिसा के साथ मुझे लेस्बो होना पड़ेगा। बाकी उसे पटाने का पूरा बैकग्राउंड तो तुम ही तय करोगे।"


अपस्यु:- हां लिसा और तुम्हारी नजदीकियां का पूरा पटकथा हम लिख देंगे, बस तुम उसका और अपना पूरा ध्यान रखना। कोई हीरो बनने की जरूरत नहीं है, खतरा दिखे तो पीछे हट जाना।


काया:- तुम भुल क्यों जाते हो मै एक वीरदोयी हूं और मुझमें आम इंसानों से 20 गुना ज्यादा क्षमता है।


अपस्यु:- वेरी फनी, भले तुम 4-5 साल सीनियर हो मुझ से लेकिन यहां का बॉस मैं हूं। इसलिए बोल दिया ना कोई हीरो बनने की जरूरत नहीं है, मतलब नहीं है।


काया:- मेरे एक्शन से तुम टेंशन में क्यों आ गए अपस्यु?


अपस्यु:- क्योंकि जो कमजोर दिखते है वो दरअसल कमजोर होते नहीं है। पूर्व आकलन हमे परेशानी में डाल सकती है। मै एक ही बात जानता हूं, ऐसे सफल मिशन का क्या फायदा, जिसमें आपके साथी कहीं खो जाते है। समझी मैम।"


अपस्यु अपनी बात कहकर काया की ओर देखने लगा। काया भी अपस्यु की बातों का अभिवादन करती हुई मुस्कुराई और अपस्यु के कहे अनुसार काम करने का वादा करती हुई, अपने फ्लैट को देखने चल दी।
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अपस्यु अपनी बात कहकर काया की ओर देखने लगा। काया भी अपस्यु की बातों का अभिवादन करती हुई मुस्कुराई और अपस्यु के कहे अनुसार काम करने का वादा करती हुई, अपने फ्लैट को देखने चल दी।


अपस्यु उसे 303 नंबर की फ्लैट दिखाने लगा। सारा सामान सब कुछ पहले से उस फ्लैट में मौजूद था। काया फ्लैट को देखती हुई… "यहां तो सारा सामान पहले से है।"


अपस्यु:- मेरे तो हर फ्लैट में ऐसे ही जरूरत के सारे समान मिल जाएंगे।


काया:- हम्मम ! अच्छा है लेकिन अपस्यु पुरा दिन घर में रहकर मै बोर नहीं हो जाऊंगी।


अपस्यु:- हां पता है इसलिए मैं 2 ऑप्शन सोच रखा था। या तो मायलो का ऑफिस ज्वाइन कर लो और वहां एक अच्छा सा लड़का देखकर उसे से शादी कर लो, या फिर अपना कोई काम शुरू कर दो, जिसमें तुम्हे रुचि हो। एक बढ़िया सा लड़का देखो और परिवार संग खुशियां बांटो।


काया:- मेरी एक ड्रीम जॉब है, मदद करोगे।


अपस्यु:- कौन सा ड्रीम जॉब..


काया:- रैंप वॉक का। मै एक मॉडल बनना चाहती थी।


अपस्यु:- हां तो बन जाओ। मै स्वास्तिका से बात कर लेता हूं, वो तुम्हे प्रोफेशनली तैयार होना सीखा देगी। यहां पता कर लो कि कौन मॉडलिंग सिखाता है, वहां जाकर ट्रेनिंग ले लेना। बाकी अपनी कंपनी के ब्रांड प्रमोशन के लिए तुम्हे ही ले लिया जाएगा। हैप्पी ना।


काया:- वेरी हैप्पी, और हां थैंक्स.. तुम वाकई बहुत प्यारे हो।


कुछ देर और काया से बात करने अपस्यु जैसे ही वहां से निकलने लगा, कुंजल में उसे तुरंत कॉलेज पहुंचने के लिए बोल दी। यूं तो अपस्यु का मन थोड़ा मिश्रा परिवार घूमकर आने का हो रहा था, लेकिन कुंजल के बुलावे के कारन उसे दौलतराम कॉलेज पहुंचना परा।


"कैसी हो लावणी। और कुंजल दीदी जी क्यों याद किया आपने।"… अपस्यु, कुंजल और लावणी के पास बैठते हुए कहने लगा।


लावणी:- आरव नहीं आया कॉलेज।


अपस्यु:- कल से शायद वो भी आ जाए।


कुंजल:- लावणी अभी जिस काम के लिए बुलाया है उसे तो कह दो।


अपस्यु:- लावणी, लेकिन तू तो भाभी कहती थी ना।


कुंजल:- हिहिहिहिही… कॉलेज है भईया, यहां थोड़े ना भाभी कहूंगी, वरना बेचारी शरमाई, शरमाई सी घूमेगी।


अपस्यु:- ओह ऐसी बात है क्या। वैसे ये टेबल खाली क्यों है? सुनो सुमित भाई, 3 कॉफी देना।


लावणी:- हां कॉफी भी पी लेंगे, लेकिन पहले हमारी भी तो सुन लीजिए।


अपस्यु:- हां बोलिए मिस लवली, आपको देख लो तो अपने आप मुस्कान आ जाती है।


लावणी:- प्रिंसिपल को मैनेज करना है, उन्होंने हमारे कॉलेज से गायब होने के कारन नोटिस दे दिया है।


अपस्यु:- हां ठीक है वो मैनेज हो जाएंगे। और कुछ।


"हां, मुझे क्लास करने में मज़ा नहीं आ रहा, कल से चुपचाप क्लास अटेंड करने आ जाना।"… पीछे से साची उसके कंधे पर हाथ देती हुई कहने लगी।


अपस्यु:- हां ठीक है कल से क्लास अटेंड करने आ जाऊंगा। वैसे कुछ नया ताज़ा।


साची:- हां सुनैना मैम तुम्हारे बारे में अक्सर पूछती रहती है।


अपस्यु:- हां ठीक है कल से आ जाऊंगा, ज्यादा फिरकी लेने की जरूरत नहीं है। पहले चलो प्रिंसिपल ऑफिस, वहां उन्हें मैनेज करना है, बिना छुट्टी के गायब रहे है तो बहुत ही ज्यादा खफा है।


साची:- पर मै क्यों जाऊं?


अपस्यु, साची का हांथ पकड़कर खिंचते हुए बाहर ले जाते…. "नौटंकी मत करो ज्यादा, बस जो बोला वो करो।"….


दोनो को यूं एक दूसरे के साथ जाते देख, लावणी गहरी श्वांस लेती हुई कहने लगी… "ऐसा लग रहा है अब सब नॉर्मल हो गया है दोनो के बीच।"..


कुंजल:- हां सही कही। बहुत बुरे दौर से गुजरना पड़ा था साची को भी। ..


इधर अपस्यु, साची का हाथ खिंचते प्रिंसिपल ऑफिस के ओर बढ़ रहा था… "अरे हाथ तो छोड़ो मेरा, वरना कलाई तुम्हारे हाथ में रह जाएगी। वैसे भी मै ही उल्टा तुम्हे खींचकर लाने वाली थी, बहुत सी बातें करनी है तुमसे।


अपस्यु, साची की कलाई छोड़कर उसकी ओर मुड़ते हुए… "हां जनता हूं, इसलिए खींचकर लाना पड़ा, वरना तुम फटी ढोल कैंटीन में ही पूछना शुरू कर देती।"..


दोनो साथ चलते हुए पार्किंग में पहुंचे और अपस्यु उसे कार में बिठाया…. "फिर से पागलपन वाले राइड पर चल रहे हो क्या?"..


अपस्यु:- नहीं रे बाबा, ये कार साउंड प्रूफ है इसलिए लेकर आया। तुम कुछ पूछो उससे पहले ही बता दूं, 15 अगस्त की रात तुम्हारे पापा भी उसी महफिल में थे और इंटेलिजेंस की पूरी टीम थी वहां पर।


साची, अपस्यु के गले लगती…. "तुम्हारा धन्यवाद, मै अपने पापा से बहुत प्यार करती हूं। तुमने जो भी मेरे लिए किया उसका शुक्रिया।"..


अपस्यु:- अरे झल्ली कार में गले ना लगो, लोग गलत समझ लेंगे।


साची:- जिसे जो सोचना है सोचे, लेकिन जो कुछ भी तुमने मेरे पापा के लिए किया है, उसका शुक्रिया।


अपस्यु:- हां ठीक है, वैसे ध्रुव का क्या हाल है?


साची:- आज कल थोड़े टेंशन में रहता है, बोल रहा था यूएस वापस चला जाएगा।


अपस्यु:- हां बुरा वक़्त उसके लिए भी चल रहा है। लेकिन मै भी क्या कर सकता हूं, प्रकाश जिंदल मुख्य अभियुक्त था।


साची:- छोड़ ये, मै संभाल लुंगी उसे, बस मेरा एक छोटा सा काम कर देना।


अपस्यु:- हां बोलो ना..


साची:- मेरे घर का माहौल ठीक नहीं है। पापा और छोटे पापा में आए दिन किसी ना किसी बात को लेकर बहस होते रहती हैं। अब तुम लोग राठौड़ मेंशन शिफ्ट कर गए हो, तो कुछ दिनों के लिए अपना फ्लैट ध्रुव को दे देते, जबतक दिल्ली में वो अपना कोई स्थाई ठिकाना नहीं ढूंढ लेता।


अपस्यु:- पागल हो तुम भी, एक कॉल कर देती तो अब तक सब हो भी गया होता। तुम क्या मूहर्त का इंतजार कर रही थी, या मेरे कॉलेज आने का।


साची:- बात वो नहीं है अपस्यु। ध्रुव पुरा लीगल मामले में फसा हुआ है। ध्रुव अपने पिता के बिजनेस को आगे बढ़ा रहा था और प्रकाश अंकल के नाम की जितनी भी चीजें थी, उसपर स्टे लग गया है। यहां तक कि अकाउंट पर भी। ध्रुव पुरा सड़क पर आ चुका है। मेघा दीदी हालांकि अपने हिस्से के आधे पैसे दे रही थी, लेकिन ध्रुव ने नहीं लिया। पता नहीं उसके दिमाग में क्या चल रहा है।


अपस्यु ने उसी वक़्त काया से बात करके उसे कुछ समझाया और कुछ पेपर्स लेकर सिन्हा जी के ऑफिस पहुंचने के लिए कहने लगा। और इधर से अपस्यु ने भी अपना कार स्टार्ट कर लिया।… "अभी तो कहे थे कोई ड्राइव नहीं, सिर्फ बात करनी है।"..


अपस्यु:- तब सिचुएशन ऐसी नहीं बनी थी ना, अब बन गई है।


साची:- मतलब मै समझी नहीं।


"एक मिनट होल्ड करो।"…. साची को रोककर उसने ऐमी को कॉल लगा दिया..


ऐमी:- जी सर कहिए..


"बापू के ऑफिस पहुंचो, एक ऑफिशियल मीटिंग के लिए।"… कहकर अपस्यु ने फोन काट दिया और साची को लेकर सिन्हा जी के ऑफिस पहुंच गया। ऑफिस के रिसेप्शन में बैठकर 2 मिनट भी नहीं हुए होंगे, ऐमी पहुंच गई… "हेल्लो साची कैसी हो।"..


साची:- अच्छी हूं, तुम बताओ।


ऐमी:- मै भी अच्छी हूं। अपस्यु डैड कोर्ट गए है। अगर छोटा काम है तो उन्होंने बोला है हाई कोर्ट से करवा लेने के लिए, और बहुत जरूर है तो 2 बजे में एक बार बात कर लेने, नहीं तो रविवार की सुबह आराम से बात कर लेंगे।


अपस्यु:- नहीं बहुत ज्यादा इमरजेंसी नहीं है। रात को बस बापू के कान में डाल देना ध्रुव की कंपनी लीगल में फस गई है, उसे निकालना है। और अभी चलते हैं, एक फ्लैट काया के नाम पर रजिस्टर करना है और दूसरा साची के नाम पर।


ऐमी:- ठीक है चलो चला जाए।


अपस्यु:- क्या हुआ कुछ कर रही थी क्या?


ऐमी:- नहीं वैभव के स्कूल जाना था वहां से कॉल आया था।


अपस्यु:- कितने बजे जाना है।


ऐमी:- नहीं तुम रहने दो मै चली जाऊंगी। तुम इनका काम करवा दो।


अपस्यु:- ठीक है, तुम जाओ मैं फ्री होकर तुमसे बात करता हूं।


साची:- अरे ये तुम दोनों आपस में ही क्या बातें कर गए, कुछ मुझे भी समझने दो। अपस्यु तुम यहां मुझे क्यों लेकर आए हो, और ये फ्लैट रजिस्ट्रेशन का क्या चक्कर है? प्लीज ऐसे कंफ्यूज मत किया करो।


अपस्यु:- मै एक फ्लैट तुम्हारे नाम से रजिस्ट्रेशन करवा रहा हूं, तुम उसे ध्रुव को गिफ्ट कर देना।


साची:- पागल हो क्या, मै नहीं ले सकती।


अपस्यु:- एहसान नहीं कर रहा मै। उसकी कंपनी लीगल में फसी है, मै क्लीन चिट दिलवाकर जब काम शुरू करवा दूंगा, तब अपना घर खरीदने के बाद मुझे वो फ्लैट वापस कर देना।


साची:- तो इतना चक्कर क्यों घूमना, जबतक काम नहीं शुरू हो जाता तबतक रह लेने दो, बाद में वो शिफ्ट कर जाएगा।


ऐमी:- नाह ! ऐसा नहीं होगा और तुम ज्यादा मुंह मत खोलो। जैसा अपस्यु ने कहा वैसा ही होगा।


लगभग 15 मिनट की मशक्कत के बाद साची राजी हुई। इस बीच काया भी पहुंच गई थी। अपस्यु ने फ्लैट 303 और 304 का रजिस्ट्रेशन दोनो के नाम पर करके वहां से वापस कॉलेज निकल आया। अपस्यु कॉलेज लौटते ही, लावणी और कुंजल के काम से सीधा प्रिंसिपल ऑफिस पहुंच गया।


लेकिन प्रिंसिपल ऑफिस के बाहर भारी भिड़ थी और वहां मौजूद छात्र काफी गुस्से में नजर आ रहे थे।…. "क्या हुआ यहां, किसी का मर्डर तो नहीं हो गया साची।"..


"रुको पता करके बताती हूं।"…. साची इतना कहकर एक विदर्थी को टोकती… "सुनिए यहां इतने स्टूडेंट क्यों जमा हो हुए है।"..


स्टूडेंट:- आज इस साले प्रिंसिपल का जुलूस निकालना है।


साची:- मैटर क्या है दोस्त..


स्टूडेंट:- हाय पहली मुलाकात में ही दोस्ती। मेरा नाम सुभाष है, बी टेक थर्ड ईयर।


अपस्यु:- भाई दौलतराम कॉलेज में बी टेक स्टूडेंट क्या कर रहे है? ये तो हम जैसे नॉर्मल स्टूडेंट का नॉर्मल डिग्री कॉलेज है।


स्टूडेंट:- तू कौन है बे जो इतनी इंक्वायरी कर रहा है। चल पीछे हट..


अपस्यु:- वाह दोस्त मेरे कॉलेज में आकर मुझे ही पीछे हटने कह रहा है। अब जल्दी मैटर बताएगा, हमारे प्रिंसिपल की घेराबंदी क्यों कर रहा है?


स्टूडेंट:- तेरे प्रिंसिपल ने हमारे एक दोस्त को छेड़ा है, उसे तो आज सबक सीखा कर जाएंगे। थोड़ी देर में पूरी मीडिया यहां होगी, फिर हम तेरे प्रिंसिपल की धज्जियां उड़ा देंगे।


अपस्यु:- चल अपने लीडर को बुला, वरना कहीं मैंने गेट बंद करवा दिया तो यहां से टूटी-फूटी हालात में जाओगे।


स्टूडेंट, अपस्यु का कॉलर पकड़ते… "साले तू मुझे धमाका रहा है। चल भाग यहां से मादारचो..."… कहते हुए उस स्टूडेंट ने धक्का दे दिया। साची बौखलाई आगे बढ़ी ही थी कि अपस्यु उसे रोकते हुए भिड़ से दूर लाया और कहने लगा… "जाकर क्रिश से कहना मेन गेट बंद कर दे और जिसको भी फ्री का एक्शन देखना हो, बोल देना प्रिंसिपल ऑफिस पहुंच जाए।"..


अपस्यु, ने साची को वहां से भेज दिया और तुरंत कार में से अपना 4 फिट वाला 2 रॉड निकलकर, प्रिंसिपल ऑफिस के पास वापस आया। इस बार कोई बात नहीं, अपस्यु ने एक रॉड उस लड़के के पाऊं पर मरा और वो दर्द से चिल्लाते हुए वहीं बैठ गया। उसे दर्द में चिल्लाते देख, कुछ और स्टूडेंट पीछे मुरे। लेकिन इससे पहले वो कुछ बोलते या करते, अपस्यु के रॉड चल रहे थे और छात्र पाऊं पकड़कर नीचे बैठते जा रहे थे।


तकरीबन 10 स्टूडेंट को जब अपस्यु नीचे बिठा दिया तब आक्रोशित स्टूडेंट ने अपस्यु को चारो ओर से घेर लिया। अपस्यु अपना रॉड वहीं नीचे सड़क पर पटकते हुए चिल्लाया… "जिस-जिस को लगता है कि हमारे कॉलेज में आकर हमे ही गुंडई दिखा सकते हैं, वो आगे बढ़े। वरना अपने लीडर को भेज।"..



लेकिन कुछ लड़कों के नसीब में मार खाना लिखा था। वो अपस्यु पर झपटने की कोशिश करने लगे। अपस्यु बड़े आराम से नीचे बैठकर हर किसी के पाऊं को अपने रॉड का शिकार बनाता जा रहा था। 2 मिनट और गुजरे होंगे, वहां 20 लड़के जमीन पर बैठकर बाप बाप चिल्ला रहे थे।… "जिस-जिस को आज मार खाने का भूत सवार है वो आ जाए।".. अपस्यु की मार से घबराए विधार्थी ने बीच से जगह बना दी। इधर अपस्यु का भिर के अंदर से चिल्लाना सुनकर, कुंजल चिल्लाई… "भाई बीच में तुम फसे हो क्या?"..


अपस्यु:- मै क्यों फसने लगा कुंजल, यही लोग मुझे मारने का मुहरत निकाल रहे है। तू भी रॉड लेकर आयी हैं क्या?


कुंजल:- हां थोड़े एक्शन मै भी कर लेती अगर तुम बात करने के मूड में ना आओ तो।


अपस्यु:- अरे इनका लीडर ना आ रहा है। मैं बीच में आराम से बैठ हूं, तू रास्ता बना कर आ जा। आज दोनो साथ में एक्शन करेंगे।


भयभीत छात्र जो अपस्यु से थोड़ी दूरी बनाकर उसे घेरे थे, सबके एक दूसरे को आगे भेजकर खुद पीछे रहना चाह रहे थे और इसी चक्कर में कोई भी हमला नहीं कर रहा था। लेकिन इधर जैसे ही कुंजल को हरी झंडी मिली, वो भी अपना रॉड उठाकर एक्शन में मूड में आ गई। तभी लड़के एक किनारे होते…. "हम सब स्टूडेंट है, आपस में क्यों एक्शन करना दीदी.. आप जाओ भईया के पास।"..
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भिड़ ने डर से रास्ता छोड़ दिया और कुंजल अपस्यु के पास पहुंच गई। अपस्यु अपने रॉड को जमीन में पटकते… "देखो मुझे प्रिंसिपल सर से भी मिलना है, उनसे कुछ बात करनी है। अब तुमलोग में से कोई यहां आकर मैटर बताएगा, या मै सबकी चमरी उधेड़ दूं।


"मेरा नाम विकास है, और मै अपने कॉलेज के स्टूडेंट संघ का प्रेसिडेंट हूं। देखो हम स्टूडेंट के बीच में लफड़ा नहीं चाहते है। तुम हमें शांति से काम करने दो। आपस में बैर अच्छी नहीं। अभी हम भले 200 है, लेकिन कब ये 200 लोग 2 लाख में बदल जाएंगे, पता भी नहीं चलेगा।"..


अपस्यु:- पूरे दिल्ली में एक तू ही स्टूडेंट नेता है या यहां और भी लोग है खजूर। तू अकेला नहीं जो भिड़ जुटा सकता है, इसलिए पहले अपनी टोन बदल, और आराम से बात करना सीख।


विकाश:- हम्मम ! देख भाई हम यहां तेरे प्रिंसिपल से मिलने आए हैं, उसने हमारे साथ पढ़ने वाली एक लड़की के साथ अश्लील हरकत की है।


अपस्यु:- लड़की का वीडियो वाइरल हो गया क्या?


विकास:- नहीं वीडियो वाइरल नहीं हुआ है। बस हमे अपने दोस्तो से पता चला। तेरे प्रिंसिपल के बाजू वाले फ्लैट में 4 लड़कियां रहती है, उन्हीं में से 1 के साथ उसने ये अश्लील हरकत की है और बाकी 3 ने कन्फर्म किया हैं। देख दोस्त हम अपने जायज मांग पर है और तूने यहां कईयों को तोड़ दिया।


अपस्यु, कुंजल के कान में कुछ कहा और कार की चाभी उसे देते हुए, विकास से कहने लगा… "देख विकास मुझे 3 दिन का समय दे, यदि बात में सच्चाई निकली तो मैं उसके अगले 2 दिन में अपने प्रिंसिपल को लीगल लेकर जाऊंगा और सजा दिलवाऊंगा। यदि मै ऐसा ना कर पाया, फिर तुम्हे जो सही लगे वो करना, हम में से कोई बीच में नहीं आयेगा।"..


विकास:- ठीक है दोस्त हम 5 दिन रुक लेंगे और वादा रहा यदि वो लोग लड़की गलत निकली तो उन्हें तुम लीगल में लेकर जाना, हम में से कोई भी बीच में नहीं आएगा।


इतने में कुंजल भी वहां आ गई। उसके हाथ में 5 लाख रुपए थे, जो उसने अपस्यु को थमा दिए। अपस्यु उन पैसों को विकास के हाथ में देते हुए… "30 लोग टूटे है, उन्हें 15000 दे देना इलाज के लिए"..


विकास:- बाकी के 50000..


अपस्यु:- इतने सारे मेरे बाहर के दोस्त आए हैं, उन सबके के लिए एक छोटी सी पार्टी अरेंज कर देना।


विकास:- दे रहा है तो पुरा दे ना, फिर दारू तू देगा, चखना हम अरेंज करे।


अपस्यु:- काउंटी पार्टी है मेरे भाई, बाकी के काउंटी कर लेना… और हां विकास बाहर शायद पुलिस आयी हो तो बोल देना मैटर सैटल हो गया है, अंदर आने की जरूरत नहीं है। यहां प्रिंसिपल से मै फोन करवा दूंगा


विकास, अपस्यु की बात सुनकर हंसने लगा और वहां से अपने साथियों को लेकर चला गया। अपस्यु ने भी अपना रॉड कुंजल को दे दिया और जैसे ही खड़ा हुआ, प्रिंसिपल दौड़ते हुए उसके पास पहुंचे।… "तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया, तुम आओ मेरे साथ।"


प्रिंसिपल उसे अपने साथ चेंबर में लाते…. "तुम्हारा धन्यवाद मै कैसे कहूं, मुझे समझ में नहीं आ रहा।"


अपस्यु:- सर बूढ़े हो गए हो लेकिन दिमाग से हवस मिटती नहीं।


प्रिंसीपल:- हाहाहाहा, सीधा इल्ज़ाम। वैसे तुम्हारा नाम क्या है?


अपस्यु:- जी अपस्यु…


प्रिंसिपल:- ओह हो तो तुम हो अपस्यु। तुम्हे तो लगभग हमने कॉलेज से निकाल दिया है, केवल सुनैना के कारन तुम बचे हुए हो।


अपस्यु:- काम की बात कर ले सर…


प्रिंसिपल:- हां काम कि बात। देखो घटना 2 लोगों के बीच की है और सबूत कुछ नहीं।


अपस्यु:- हां लेकिन आप दोषी है। ये मै दाबे के साथ कह सकता हूं।


प्रिंसिपल:- और तुम्हारे ऐसा कहने का आधार..


अपस्यु:- सुनीता नायर, लालनी मिश्रा, अरुणा नामदेव, जसप्रीत कौर, उत्तमरीत डिल्लो.. और भी नाम गिनवा दूं क्या?


प्रिंसिपल:- भाई तुम जासूस हो क्या। हां सबके नाम सही है लेकिन इतने अंदर की खबर तुम कहां से निकाल लाए।


अपस्यु:- आप के दोस्त सोमेश से, कहो तो फोन लगा दूं..


प्रिंसिपल:- मदर.. सॉरी, उसे लगाओ फोन और मेरी बात करवाओ..


अपस्यु ने तुरंत वहीं से सोमेश को कॉल लगा दिया। सोमेश कॉल उठाते ही… "देख अपस्यु मै बहुत बिजी हूं, अगर किसी बात को लेकर भेजा खाओगे तो मै फोन काट दूंगा।"..


अपस्यु:- आपके मित्र आलोक अवस्थी जी है मेरे साथ, और उनके चर्चे आम होने से मैंने अभी के लिए बचा लिया है।


प्रिंसिपल:- तुम मामूली लड़के नहीं हो अपस्यु, फोन स्पीकर पर डालो…


जैसे ही फोन स्पीकर पर हुआ… "सोमेश तूने इस बच्चे से मेरे कॉलेज की कहानी बताई।"..


सोमेश:- वो तो मेरा बाप है, कुछ देर में तू भी ये बात मान लेगा। ये बताओ ये क्या कह रहा है, तुम्हारे चर्चे आम होने से क्या मतलब था उसका।


प्रिंसिपल:- मुझ पर फिर से वही इल्ज़ाम लगा है, लेकिन यार इस बार मै दुखी हूं, बहुत दुखी। 22-23 की बच्ची है यार और मै अचंभे में हूं।


सोमेश:- अपस्यु, आलोक क्लीन है। मैंने जितनी भी लड़कियों के नाम बोले थे, उन सब के साथ बहुत फ्रेंडली रिलेशन था आलोक का। तुम ये समझ लो कि उस समय में जब एक लड़का-लड़की का साथ देखा जाना चर्चा का विषय बन जाता था, उस वक़्त आलोक पूरी रात उनके साथ पढ़ता था। और पढ़ना मतलब केवल पढ़ना। वो अपने समय का फिजिक्स में गोल्डमेडलिस्ट था। वो यूएस, यूके, जर्मनी में कहीं भी हो सकता था, लेकिन उसने अपना घर चुना।

आलोक आईआईटी में पढ़ा सकता था, लेकिन उसने डिग्री कॉलेज चुना और यहां के छात्रों को फिजिक्स पढाता है। इसके कई सारे स्टूडेंट विदेशों में है। इसके लिखे कई सारे टॉपिक टेक्स्ट बुक में है। यूं समझ लो इसकी तारीफ में मेरा पूरा दिन निकल जाएगा लेकिन चर्चा खत्म नहीं होगी। मुझे नहीं पता उस लड़की ने ऐसा क्यों किया, लेकिन मेरा दोस्त क्लीन है।


अपस्यु:- बहुत गहरी दोस्ती लगती है। चलो मै फोन रखता हूं, कल आऊंगा मिलने।


सोमेश:- नाना बिल्कुल मत आना, मै बाहर जा रहा हूं कुछ महीनों के लिए।


अपस्यु, फोन काटते हुए….. "ठीक है सर आप क्लीन है अब मै मान गया। मै आपका काम कर दूंगा लेकिन उसके बदले में मुझे कुछ चाहिए।"..


सोमेश:- हाहाहाहा.. बदले में क्या चाहिए वो भी बता ही दो।


अपस्यु:- आप मुझे फिजिक्स पढ़ाएंगे।


सोमेश:- क्या ? लेकिन तुम तो..


अपस्यु:- हां मै तो हिन्दी का छात्र हूं। लेकिन आपके लिए 30 लड़कों की टांग तोड़ी ना, अब आपका केस भी सॉल्व करूंगा। तो क्या ये सब मेरा विषय है।


प्रिंसिपल:- हम्मम ! ठीक है मै तुम्हे पढ़ा दूंगा, बस इस मामले को सुलझा दो। मै तो अब भी नहीं समझ पा रहा की हुआ क्या? सुबह तक तो सब नॉर्मल ही था।

अपस्यु:- सर एक बात और थी, मेरी बहन कुंजल और मेरी होने वाली भाभी लावणी कुछ दिनों के लिए कॉलेज नहीं आए थे और आपने उन्हें नोटिस भिजवा दिया।


प्रिंसिपल:- वो लड़की साची और आरव तुम्हारे रिश्ते में नहीं है क्या?


अपस्यु:- है ना सर, साची मेरी एक्स गर्लफ्रेंड है और मेरी होने वाली भाभी की चचेरी बहन। और आरव मेरा भाई है, जिसकी शादी लावणी से होने वाली है।


प्रिंसिपल:- कमाल है, पुरा खानदान ही यहां कॉलेज में है। वैसे वो तुम्ही हो ना जिसने होम मिनिस्टर के बेटे को मार खिलवाया था इन्हीं दोनों बहनों के हाथो।


अपस्यु:- हां वो नाचीज़ मै ही हूं। चलता हूं सर, कल मुलाकात करेंगे।


अपस्यु अपनी बात कहकर जैसे ही प्रिंसिपल ऑफिस से बाहर निकला, कुंजल समेत सब लोग वहीं मौजूद थे। जैसे ही अपस्यु बाहर आया सब लोग हूटिंग करने लगे। उन्हें हूटिंग करते देख प्रिंसिपल बाहर आ गया और घूरती नज़रों से सबको देखने लगा। प्रिंसिपल को देखकर हर कोई वहां से भागने में ही भलाई समझे।


पूरे कॉलेज में आज अपस्यु के एक्शन की ही चर्चा हो रही थी। कुंजल तो जैसे खुद में प्राउड टाइप फील कर रही थी और अपने आसपास महफिल सजाए अपस्यु की कहानी बता रही थी। वहीं अपस्यु जब प्रिंसिपल ऑफिस से बाहर आया उसी वक़्त कंचन का संदेश उसके पास पहुंच गया और वो उसे तुरंत घर आने के लिए कह रही थी।


अपस्यु जैसे ही घर पहुंचा, वहां का माहौल काफी टेंशन भरा था, और कंचन का उड़ा चेहरा देखकर लग रहा था बहुत रोई है। जैसे ही वो अपस्यु को देखी, हिचकियां लेती वो लिपट गई। हिचकियां लेती बस किसी तरह एक ही बात रटती रही।…. "किसी तरह दिल को सुकून दिया की ऐक्सिडेंट में मरी थी मेरी बहन लेकिन उसे तो वक़्त से पहले किसी ने छीन लिया।"


कंचन सच बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, और अपस्यु उसे किसी तरह शांत करवा रहा था। काफी वक़्त लगा तब कहीं जाकर वो शांत हुई। किन्तु जब शांत हुई तो बिल्कुल ही शांत थी, शायद अपनी बहन के कत्ल के बारे में सुनकर सदमे में चली गई थी, ठीक वैसे ही जैसे यहां हर किसी का हाल पहली बार का था।


कंचन जब शांत हुई तब उसे रह-रह कर ये बात भी अखरती रही की प्रताप महल में इतने ताने सुनने के बाद भी अपस्यु ने किसी को अपने दर्द कि दास्तां नहीं सुनाई। अपनी मां के लिए सफाई पेश करता रहा, लेकिन यह किसी को नहीं कहा को दृश्य के लड़ाई में तो वो ना होकर भी साथ था, लेकिन उसकी लड़ाई में तो हम कभी थे ही नहीं, और ना ही उसने दृश्य से कभी मदद मांगी।


कंचन, राठौड़ मेंशन में शाम तक रुकी, फिर दृश्य को बुलाकर वो वापस प्रताप महल चली गई, क्योंकि कुछ लोगों को ये कहानी सुनानी जरूरी थी, जिसने भी अपस्यु पर सवाल उठाए थे। रात का वक़्त था, खाना खाने के बाद अपस्यु नंदनी के कमरे में ही आ गया और उसके गोद में सर रखकर लेट गया।


नंदनी उसके बालो में हाथ डाल कर धीरे-धीरे सर को दबाती हुई… "हम्मम ! मेरा बेटा आज चिंता में है क्या?"


अपस्यु:- हां थोड़ी सी मां। वैसे अभी तो मासी का ख्याल आ रहा है। ऊपर से आप पर गुस्सा भी। उन्हें सब बता दिया।


नंदनी:- मुझे लगा सब खत्म हो गया तो मैंने बता दिया। आखिर सच जानने का हक उन्हें भी है।


अपस्यु:- चलो छोड़ो उन्हें, मैंने दृश्य भईया से कह दिया है अभी इस बात को पूरा राज ही रखे। गलती हो गई सबके तरह आपको भी समझा देना चाहिए था अभी बीते बातों की चर्चा किसी से नहीं करने..


नंदनी:- लेकिन क्यों, अब तो सब खत्म है ना?


अपस्यु:- पहली बात… अभी मैंने सबको मना किया है, अपनी बीती कहानी किसी को नहीं बताने और पुरा राज रखने, क्योंकि हमारी पूरी कहानी टीवी पर आएगी। दूसरी बात जिसे हमने खत्म किया वो एक हिस्सा था, दूसरा हिस्सा बाकी है। और चौंकना मत।


नंदनी ऊपर से ही एक चमाट लगाते… "जी तो कर रहा है तबीयत से पिटाई करूं। जरूर यहां कुछ ऐसा कहने आया है जिससे मेरे दिल में छेद होने वाला होगा।"


अपस्यु, उठकर बैठ गया और नंदनी को समझाते हुए कहने लगा…. "मां आप मेरी बात सुनो। मै ये काम खामोशी से करना चाहता हूं और परिवार से अभी किसी को सामिल नहीं कर सकता। मैंने अपने जरूरत के लोगों को साथ ले लिया है। बस आखरी तमाशा जब होगा तब संबको सामिल करूंगा और उसमे आप भी होंगी।


नंदनी:- हम्मम ! तेरी बहुत फिक्र होती है कभी कभी। अब वो बात बताओ जो मुझे परेशान करने वाली है।


अपस्यु:- मै ज्यादातर वक़्त बाहर ही रहने वाला हूं। यूं समझ लो मेरा यहां रहना कभी-कभी होगा। ज्यादातर वक़्त फ्लैट में ही बीतेगा।


नंदनी:- साफ साफ क्यों नहीं कह देता हमारे साथ नहीं रहेगा।


अपस्यु:- मां, ऐसे इमोशनल करोगी तो मै कुछ नहीं कर पाऊंगा। उनकी मां कैसे रहती है जिनके बच्चे बॉर्डर पर होते हैं।


नंदनी:- हां तो उनके बच्चे बॉर्डर पर जाने से पहले कई साल तक अपनी मां के पास रहते है। तू उड़ता-फिरता रहता है। अपस्यु अपने सारे काम यहां से नही कर सकता क्या?


अपस्यु, नंदनी के गाल को चूमते… "मां मै तुम्हारे पास ही तो हूं। एक बात और कल से आप कंपनी का भी कुछ काम देख लो, क्योंकि आरव की अभी डिग्री तो कंप्लीट होने दो, इसी बहाने आप कम के कम सास-बहू सीरियल से तो दूर रहोगी।


नंदनी:- घर में जब इतने थ्रिल और सस्पेंस चल रहे हो फिर टीवी देखने की क्या जरूरत। वैसे तुम्हारा सुझाव अच्छा है, थोड़ा थ्रिल मै ऑफिस में भी बटोर लूंगी, वैसे भी अभी तो पुरा स्टाफ उनका ही होगा। लोगों की ठीक से पहचान करनी भी जरूरी है। एक बात और बेफिक्र होकर आगे बढ़ो पूरी हिम्मत से, यहां पुरा मै अकेले संभालेंगी, सभी को।


एक सुकून भरी रात थी। अपस्यु वापस से नंदनी के गोद में लेट गया। लेटे-लेटे उसने काफी सालों बाद वहीं सुकून की नीद मिली जो कभी अपनी मां के गोद में लेटकर मिलता था। अपस्यु कर्म पथ पर बढ़ चुका था। मार्ग तैयार था और सफर की शुरवात वो कर चुका था…
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