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Romance भंवर (पूर्ण)

Nevil singh

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Update:- 112




सुबह के 7.30 बज रहे थे। फ्लैट की बेल जोड़ों से बज रही थी। अपस्यु ने जैसे ही दरवाजा खोला, एसपी के साथ पुलिस की पूरी टीम दरवाजे पर खड़ी थी। अपस्यु पुरा दरवाजा खोलते हुए… "सॉरी मै वो सो रहा था सर, आइये ना अंदर।"


अपस्यु सबको हॉल में बिठाकर, ऐमी को जगा दिया और वापस से उनके बीच चला आया। अपस्यु के आते ही एसपी ने सीधे सवाल करने शुरू कर दिए, मामला था इस अपार्टमेंट में हुए कल रात की वारदात और उसी वारदात का एक लिंक जगदीश राय के घर तक जाता था, क्योंकि चोरी कि गई कार इसी अपार्टमेंट के बाहर से उठाई गई थी और शक था कि जिसने यहां कत्ल किए है वही जगदीश राय के यहां भी गया होगा।


अपस्यु। के चेहरे पर घोर आश्चर्य के भाव थे और वह जिज्ञासावश पूछने लगा कि कल इस अपार्टमेंट में हुआ क्या था, क्योंकि कल शाम शॉपिंग मॉल की घटना से बाद उसकी अभी आंख खुल रही है।


एसपी ने मामले का संज्ञान लेते हुए अपस्यु से उसके साथ हुई कल शाम की घटना के बारे में पूछने लगा। बेहोश होने के पहले तक का अपस्यु ने बता दिया और उसके बाद सीधा उसकी आंख यही खुली।


इतने में ऐमी सबके लिए चाय ले आयी और सबको चाय देने के बाद आगे की घटना का जिक्र करती हुई पूरी बात बताई। कैसे फिर वहां पार्किंग में अजिंक्य और उनके थाने के लोग पहुंचे, सभी हमलावरों को अरेस्ट करने के बाद फिर वहां से अपस्यु को हॉस्पिटल लेकर गए। वहां डॉक्टर ने बताया की घबराने वाली बात नहीं है, बस बेहोश किया गया है, उसी के साथ अजिंक्य सर ने डॉक्टर से अकेले में कुछ बात की और डॉक्टर ने मुझे कुछ दवा लिखकर दी।


अजिंक्य सर खुद यहां आए थे। उनके हवलदार की मदद से हमने अपस्यु को लिटाया और फिर मुझे वो दावा खिलाकर यहां से चले गए। उसके कुछ देर बाद नींद आ गई और अभी जाग रही हूं। एसपी पुरा मामला सुनने के बाद क्रॉस चेक किया और अजिंक्य से पूरे मामले की जानकारी लेकर वहां से चलते बाना।


उनसब के जाते ही अपस्यु ने दरवाजा बंद किया और किचेन में पहुंचकर, ऐमी के कमर में हाथ डालकर उसके गले को चूमने लगा… ऐमी गहरी श्वांस लेती अपने हाथ को किचेन स्लैब से टिका दी और अपनी आखें मूंद ली।


अपस्यु गले को चूमते हुए अपने हाथ धीमे से खिसकाते हुए लोअर के अंदर ले जाने लगा… "अम्मम ! बेबी अभी रुक जाओ ना प्लीज, काम बहुत परे है। खत्म तो कर लेने दो।"….. गले पर हल्के दातों का निशान देते हुए अपस्यु हाथ को धीमे से पैंटी के अंदर खिसकाते उसे चूमने लगा।


श्वांस दोनो की ही चढ़ आयी थी, तभी अपस्यु के फोन की घंटी बज गई। एक पूरी रिंग होकर कट गई लेकिन अपस्यु ने ध्यान नहीं दिया। वो धीरे-धीरे अपने हाथ चलाते, ऐमी की उत्तेजना को बढ़ाने में लगा था। तभी फिर से दोबारा रिंग होना शुरू हुआ।


ऐमी, अपस्यु को धक्का देकर दूर की…. "हद है फोन बज रहा है अपस्यु, उठाओ उसे पहले।"… अपस्यु गुस्से में फोन को घूरा और फोन उठाकर हॉल में चला आया…. "हां बोल भाई"..


आरव:- कहां था, पूरी घंटी हुई फिर भी कॉल नहीं उठाया।


अपस्यु:- कुछ काम कर रहा था। तू सुना कैसी चल रही है छुट्टियां।


आरव:- अरे यार तेरा कल रात का शो हमदोनो ने देखा, अब मैडम को भी इक्छा हो रही है, वैसे ही एक इजहार की।


अपस्यु:- हाहाहाहा.... प्यारी सी ख्वाइश है कर दे पूरी, इसमें इतना सोच क्यों रहा है। वो छोड़ तू आराम से रह और चिंता ना कर, समझा।


आरव:- कामिना, अब कौन मन की भाषा पढ़ रहा?


अपस्यु:- जुड़वा तो मरने के बाद भी जुड़वा होते है, फिर तू सोच कैसे लिया कि तेरी बात मै ना समझूं या तू मेरी ना समझेगा।


आरव:- हम्मम ! सो तो है, बस मन ना लग रहा तुम लोगों के बिना। तू और ऐमी यहां होते तो बात ही कुछ और होती।


अपस्यु:- अभी लावणी को समय दे समझा, और ज्यादा बहस नहीं।


आरव:- ठीक है गुरुजी समझ गया। चल मै फोन रखता हूं।


अपस्यु ने सोचा, "ये फोन बार-बार तंग ना करे इसलिए खुद ही सबको फोन लगा दूं"। अपस्यु ने फिर एक तरफ से सबको कॉल लगाना शुरू कर दिया। जब वो कुंजल को कॉल लगाया तब उसका फोन व्यस्त आ रहा था। अपस्यु किचेन में झांककर देखा तो ऐमी फोन पर लगी थी, वह समझ गया दोनो लगे हैं, इसलिए उससे छोड़ बाकी सबसे बात कर लिया।


कुछ देर बाद उखड़ा सा चेहरा बनाती ऐमी हॉल में आयी और टेढ़े मुंह अपस्यु को फोन देती कहने लगी… "कुंजल है लाइन पर बात कर लो"..


अपस्यु इशारों में अपने दोनो कान पकड़ते सॉरी कहने लगा… ऐमी फोन उसके पास रखकर रूम में चली गई। जबतक अपस्यु कुंजल से बात करता, ऐमी नहाकर, तैयार होकर कमरे से बाहर निकली। ऐमी को देखकर ही समझ में आ गया, आज इसका पारा फिर चढ़ा…. "कहीं बाहर जा रहे है क्या बेबी।".. अपस्यु ऐमी का हाथ पकड़ कर खींचते हुए बाहों में लेकर पूछने लगा।


ऐमी:- खाना ऑर्डर कर दिया है, 12.30 बजे तक आ जाएगा। मै घर का रही हूं।


अपस्यु, ऐमी के कानो के नीचे से बाल को किनारे करते चूमते हुए कहने लगा… "सॉरी बाबा, वो कॉल आ गया था।"


ऐमी:- कोई बात नहीं है अपस्यु, मै जा रहीं हूं तुम खाना खा लेना।


अपस्यु, ऐमी से अलग होकर उसको अपनी ओर घुमाया, और अपने दोनो कान पकड़ कर कहने लगा…. "गलती हो गई बाबा, मुझे मान जाना चाहिए था। तुम जब कही तब हट जाना चाहिए था। अब माफ भी करो और गुस्सा शांत करो।"


ऐमी, अपनी आखें शुकुड़ती…. "अगली बार ऐसे जिद तो नहीं करोगे ना, और कहूंगी अभी नहीं, तो मान जाओगे ना।"..


अपस्यु:- हां बाबा सच में। चलो अब गुस्सा छोड़ो और आराम से बैठ जाओ। आज मै तुम्हे अपने हाथों का बना खिलाऊंगा…


ऐमी:- येस ! यह अच्छा विचार है। वो चीज वाली आलू दम जो तुमने मियामी में खिलाई थी, वहीं बनाओ।


अपस्यु:- ठीक है फिर वो रेस्ट्रो के खाने का आर्डर कैंसल कर दो, और जबतक तुम बाजार से चीज ले आओ, मै बाकी का काम करके रखता हूं।


ऐमी:- प्रदीप को भेज दो ना, अब क्या बाजार भी मै ही जाऊं…


अपस्यु:- नाह ! उन गावरों को रहने दो, मुझे और भी कुछ याद आ गया है, मै खुद बाजार जाता हूं, जबतक तुम आलू छिलकर रखना और 8-10 प्याज काट लेना।


ऐमी:- जी सर जैसा आप कहें।


अपस्यु, ऐमी को काम समझकर निकल गया, वो जबतक किचेन में अपना काम समाप्त करती तबतक अपस्यु भी बाजार से लौट आया था। अपस्यु जब लौटकर आया, ऐमी किचेन में ही थी। अपस्यु किचेन में जाकर सारा समान रख दिया और पीछे से ऐमी को गले लगाते, उसके गाल को चूमते हुए…. "चलो अब तुम जाओ मैं सब रेडी करता हूं।


ऐमी मुस्कुराती वहीं किचेन स्लैब पर बैठती हुई कहने लगी…. "नाह ! तुम पकाओ और मै तुम्हे देखती रहूंगी।…


लगभग 8.30 से 10 बजने को आए थे। श्रेया और उसकी पूरी टीम उन दोनो पर नजर बनाए-बनाए पक से गए थे। रात को इतने बड़े काम की अंजाम देने के बाद भी सुबह उठकर एक शब्द की भी चर्चा नहीं। ना ही पुलिस उनके दरवाजे पर थी तो उनके हाव-भाव में कोई बदलाव।


सब के सब अपना सर पटक रहे थे और दोनो के बीच का रोमांस देखकर बस यही सोच रहे थे… "पागल है क्या दोनो, पूरी दिल्ली में पुलिस प्रशासन हिली हुई है। पूरा अपार्टमेंट पागल बना हुआ है, और इन्हे कोई फर्क ही नहीं पर रहा। आपस में ही लगे है।"


सादिक, श्रेया का साथी और जेन के भाई का किरदार निभाने वाले… "यार या तो ये बहुत ज्यादा होशियार है या लापरवाह। इतने बड़े कांड के बाद कुछ तो चर्चा होती ना।"


श्रेया:- यह भी तो हो सकता है कि उनके अनुसार उन लोगों ने पुरा मैटर रात को हो सॉल्व कर लिया हो, इसलिए कल के इजहार के बाद दोनो बस आपस में ही लगे है।


जेन:- हां लेकिन अब हम क्या करें, उनका रोमांस देखकर तो मुझे अंदर से कुछ रोमांटिक और कुछ एग्जॉटिक सी फीलिंग आने लगी है।


सादिक:- मेरा भी वही हाल है।


श्रेया:- हम्मम ! कहीं ऐसा तो नहीं कि इसने मुझे कल रात जित्तू के पास देख लिया था और शक हो की हम उसके घर में घुसपैठ करके उनपर नजर बनाए हुए हूं।


जेन:- प्वाइंट में दम तो है, लेकिन उनके प्रतिक्रिया इतने नेचुरल है कि कुछ समझ पाना नामुमकिन है। वैसे जिस हिसाब से दोनो के बीच का प्यार और रोमांस है, उसे देखकर तो यही लगता है कि, अगर वो तुम्हे कल सबके साथ देख लेता तो वहां 5 की जगह 6 लाश होती।


श्रेया:- हम्मम ! ठीक है, कुछ देर और वॉच पर रहो, मै कुछ सोचती हूं।


इधर ऐमी किचेन स्लैब पर बैठी अपस्यु को प्यार से खाना बनाते हुए देख रही थी। अपस्यु बड़े ही प्रेम से और पुरा ध्यान खाना पकाने पर दिए हुए था… "कुछ बोलो भी ऐमी, पास हो और इतनी ख़ामोश।"..


ऐमी:- नाह तुम्हे देखने का मज़ा ही कुछ और है। अपनी ये शर्ट क्यों नहीं उतार देते। जरा नजर भर तुम्हारे दिलकश बदन को देख लूं।


अपस्यु अपनी नजर ऐमी पर दिया, आंखों में शरारत और होटों पर कातिलाना हंसी… अपस्यु अपने होंठ आगे बढ़ाकर ऐमी के होठों को चूमते… "अब कौन रिझा रहा है।"..


ऐमी:- हीहीहीही… पहले शर्ट उतारो फिर बताती हूं।


अपस्यु:- तुम खाली बैठी हो, इतनी मेहनत तो तुम भी कर सकती हो।


ऐमी:- नाना, आज मै आलसी हूं, सब तुम्हे ही करना होगा…


"उफ्फ ! मार ही डाला।"… अपस्यु आंख मरते हुए अपनी शर्ट उतार लिया और उसे लपेटकर ऐमी के मुंह पर फेंक दिया। ऐमी, अपस्यु की इस हरकत पर हंसती हुई कहने लगी… "नजर ना लगे, इन्ना सोना। चलो अब अपने पैंट उतारो।"


अपस्यु, आश्चर्य में अपनी आखें बड़ी किए….. "क्या?"


ऐमी:- हीहीहीही.. पैंट उतारो।


अपस्यु:- हट पागल, मै कहता हूं तुम अपने ये जीन्स उतारो।


"पहले ही कहीं मै आज आलसी हूं, बाकी तुम्हारी मर्जी है, मुझे कोई ऐतराज नहीं।"… ऐमी हंसती हुई आंख मारते कहने लगी…


अपस्यु, हंसते हुए अपना सर झुका लिया और अपना काम करने लगा।… "बेबी, शर्ट की तरह पैंट भी फेको ना। प्लीज।"..


"आज पागल हो गई हो तुम।" .. अजीब शर्म सी हंसी हंसते हुए अपस्यु ने अपने पैंट उतरकर भी ऐमी के मुंह पर मरा। … "भिंगे होंठ तेरे, प्यासा दिल मेरा… मेरे इमरान हाशमी, अंदर तो काफी सेक्सी बॉक्सर पहन रखी है, कहीं और परफॉरमेंस तो नहीं देने वाले थे।"..


अपस्यु:- बस भी करो, अब खुश तो हो ना..


ऐमी:- नाह ! वो आखरी वस्त्र, बॉक्सर भी उतार कर दो।


अपस्यु:- पागल, सुंबह-सुबह कोई पोर्न तो नहीं देख ली।


ऐमी:- आय हाय लड़का तो शर्मा गया। अच्छा तुम्हारी लाज्जा को देखते हुए छोड़ती हूं। जाओ नहा लो, सब तो लगभग पक गया है।


अपस्यु:- बस 5 मिनट का रह गया है, जबतक ये पकता है, तबतक मैं तुम्हे भी निर्वस्त्र कर दूं।


ऐमी फाटक से किचेन स्लैब से नीचे उतरती…. "अभी कुछ देर पहले ही ना कान पकड़ कर बोल रहे थे, मै मना कर दूंगी तो मना हो जाओगे। तो चलो अब मना हो जाओ।"


अपस्यु खा जाने वाली नज़रों से घूरा .. "बहुत शरारत सूझ रही है मिस ऐमी, अभी बताता हूं तुम्हे।"… अपस्यु दौड़ा, ऐमी भागी.. भागते दौड़ते, सामान गिराते पीछा चालू था। ऐमी की खिल खिलहट पूरे घर में गूंज रही थी और अपस्यु उसके पीछे दौड़कर पकड़ने कि कोशिश में लगा था….


अंततः अपस्यु ऐमी को पकड़कर कमर से उठाया और तेजी से गोल घूमते हुए उसके कान के नीचे गले पर अपने दांत जोड़ से गड़ाते हुए कहने लगा… "मेरे तो सीधे-सीधे इमोशंस थे, लेकिन ये सुबह से जो तुम मुझे परेशान कर रही हो ना, अभी बताता हूं।"..


एमी:- क्या करोगे नहीं मानूंगी तो, रेप ही करोगे ना, और क्या.. हीहीहीही।


अपस्यु, ऐमी को उठाकर डायनिंग टेबल पर बिठाते हुए… "तुमने वो सुना है"..

ऐमी:- क्या ?


अपस्यु:- बोंडेज एंड डिसिप्लिन (Bondage and Discipline), डमिनेंस एंड सबमिशन (Dominance and Submission) सदोचिज्म एंड मसोचिज्म (Sadochism and Masochism).


ऐमी, अपनी दोनो आखें फाड़े अपस्यु को देखती हुई… "क्या बीडीएसएम (BDSM)"


अपस्यु:- येस । बिल्कुल यही, सही सुन रही हो।


ऐमी, अपस्यु के बालों पर प्यार से हांथ फेरती…. "बेबी ऐसा ना करो ना, प्लीज। एक बार और सोच लो ना बेबी। मूड तो मेरा भी बहुत हो रहा है, लेकिन ये…."

अपस्यु:- ई.. हा.. हा.. हा… अब तो यही फाइनल है।


ऐमी:- ठीक है फिर हंटर खाने तैयार रहना, मेरी तैयारी पूरी है। सबमिसिव और डिसिपिलन बनकर रहना।


इधर श्रेया के घर में….. चल रहे रोमांस को देखकर सभी पागल हुए जा रहे थे। जेन तो पानी-पीते और बाथरूम जाते-जाते परेशान थी, वही हाल बाकियों का भी था। श्रेया से जब रहा नहीं गया तब वो कहने लगी…. "ये तो अपनी रास लीला में लगता है लीन रहेंगे और कुछ बात करने वाले नहीं। इनके रंग में भंग मै ही डालती हूं। जाती हूं अभी दोनो के पास।"
Atiutam update hai mitr.
 

Aakash.

ꜱᴡᴇᴇᴛ ᴀꜱ ꜰᴜᴄᴋ
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एक तरफ आखें है जिनमे नींद भरी है,
दूजी पलके है जो अपडेट के इन्तज़ार मे अड़ी है...

???
 

Jimmy83

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सबसे पहले तो नैन भाई बधाई आपको पांच सौ पेज पुरे होने पर......... लेकिन आपके कहानी का प्लाट हजार पेज से भी ऊपर का होना चाहिए ।

आप को एक बार और धन्यवाद कहना चाहता हूं..... कहानी के प्रति आपका समर्पण और लगन......... एक साथ दो दो कहानियां लिखना और हर दो चार दिनों में कंटिन्यू अपडेट करना ।........ और कल तो आपने एक बार में ही चार अपडेट भी दे दिए । आपके मेहनत को मेरा हार्दिक नमन।

अब मैं कुछ कहानी के लिए कहना चाहता हूं..........

अमेरिका में जिंदल फेमिली ने प्राइवेट आर्मी संचालित फर्म को बहुत ही बड़ी कीमत पर हाॅयर किया था । एक बार तो मुझे लगा कि शायद श्रेया और उसकी टीम सार्जेंट जेम्स होप्स के ही प्यादे हों...... लेकिन श्रेया एंड टीम तो यहां महीनों से अपस्यू के पड़ोसी है जबकि शिकागो में कुछेक दिन ही हुए हैं नवीन , कृपाल , मुर्तुजा आदि को मारे हुए ।

इसका मतलब श्रेया एंड कंपनी के साथ कुछ और ही कहानी हो सकती है ?

लेकिन सार्जेंट होप्स कुछ न कुछ तो कर ही रहा होगा । कैसे अपस्यू ने वो हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया ?

सालों पहले एक आश्रम में १६० बच्चों के साथ साथ कई लोगों को जिंदा जला दिया गया...... हत्यारे सौ लोग थे । लेकिन अंततः वहां से पन्द्रह ही हत्यारे सही सलामत बच कर वापस आएं । उन पन्द्रह लोगों ने बाकी के अपने पचासी साथियों को वहीं पर समाधी बनवा दिया........ कैसे ? ....
वैसे तो मुर्तुजा टीम के साथ ही उन सभी पन्द्रह की जीवनलीला समाप्त हो गई ।

एक सवाल और भी है...... जहां पर ये जघन्य कृत्य हुआ था... क्या वो गुरूकुल था ?....
क्योंकि पार्थ , स्वस्तिका , ऐमी , ऐमी की मां और भाई , अपस्यू की मां और भाई आरव...... एक साथ गुरुकुल में ही मिल सकते थे ।

इस कांड में चंद्रभान के अलावा मनीष , राजीव के अलावा भी कुछ लोग शामिल हो सकते हैं । शायद जिंदल के अलावा विक्रम सिंह ?

अपस्यू का बाप चंद्रभान.....जो इस विभत्स कांड का सरगना था.....उसे उस आश्रम से क्या स्वार्थ था ?
प्रकाश जिंदल..... शायद इस पुरे कांड का मास्टरमाइंड होगा ?


अपस्यू की मां के साथ क्या हुआ था ? सुलेखा के साथ दोस्ती थी , ये तो समझ में आया लेकिन उनके बारे में अभी कोई भी जानकारी नहीं है ।

नंदनी राजस्थान के राजपरिवार से है लेकिन उसके चचेरे भाई विक्रम सिंह के कारण उसके पिता कुंवर सिंह को लोग घृणा की दृष्टि से देखते हैं...... विक्रम सिंह ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नंदनी की सारी संपत्ति हड़प ली ।...... कैसे ?
और वहीं पार्थ , वीरभद्र और निम्मी के साथ धमाल मचायेगा ।.... शायद !

कहने को तो बहुत कुछ है... अब पुरा कहानी पढ़ लिया है तो धीरे-धीरे अगले अपडेट में कहता जाऊंगा ।

अपस्यू....आरव....ऐमी.... लावणी....साची....कुंजल..... स्वस्तिका.... पार्थ.... वीरभद्र.... निम्मी.... नंदनी.... एडवोकेट सिन्हा....दीपेश... निर्मल....

प्रकाश जिंदल...मेघा....धृव...हाडविक... विक्रम सिंह... कंवल...लोकेश.... दोनों की पत्नियां... कुसुम....
मनीष... अनुपमा... राजीव... सुलेखा.... नीरज.... कबीर...
श्रेया और कम्पनी....
होम मिनिस्टर...
मेम्बर आफ पार्लियामेंट.... उनकी बेटी....

और चंद्रभान रघुवंशी । ( मुझे लगता है ये शख्स अभी भी जिंदा है )

बहुत सारे कैरेक्टर हैं...... वैसे मुझे ऐमी और अपस्यू ज्यादा पसंद हैं ।

बहुत बहुत ही सुन्दर कहानी और आपके डायलॉग के बारे में तो पहले ही कह चुका हूं...... अद्भुत ।
Dusri kahani konsi he bhai ki? Link share kijiye...plzzz
 

Chutiyadr

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Update:-104




श्रेया की बात पर सभी हसने लगे। तभी श्रेया सब लोगों से इजाजत मांगती हुई, अपस्यु को 2 मिनट बाहर आने के लिए कहने लगी… "एक छोटी सी हेल्प चाहिए।"..


अपस्यु:- कैसी हेल्प श्रेया।


श्रेया:- बस 1 दिन के लिए मेरे बॉयफ्रेंड बन जाओ, मेरे पीछे भूत परा है और उसी से पीछा छुड़ाना है।


अपस्यु:- कौन सा भूत पड़ा है।


श्रेया:- पहले बताओ हेल्प करोगे की नहीं।


अपस्यु:- मै फ्री सर्विस नहीं देता पता है कि नहीं।


श्रेया:- हां ठीक है चाय समोसे की पार्टी दे दूंगी। अब खुश।


अपस्यु:- नाह ! मै एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल पीने वाला हूं, उसी की पार्टी चाहिए।


श्रेया:- एक ड्रिंक कि कॉस्ट क्या पड़ती होगी..


अपस्यु:- हर जगह का अलग अलग है मै जहां पीता हूं वहां शायद 2500 रुपए लेता है।


श्रेया:- और कितनी ड्रिंक में तुम्हारा कोटा पुरा हो जाता है?


अपस्यु:- यही कोई 20 से 25 के बीच..


श्रेया:- पागल हो गए हो। हम जो पीती है वहीं पिलाएंगे.. 400 से 500 का फूल वोदका, और ये फाइनल है। नो बारगेनिंग..


अपस्यु:- ठीक है मंजूर है तुम बताओ कब चलना है।


श्रेया:- जल्द ही जब तुम्हे फ्री टाइम मिल जाए।


अपस्यु:- ठीक है, २-३ दिन थोड़ा व्यस्त हूं कल मै कॉल करके बता दूं तो चलेगा क्या?


श्रेया:- हां बिल्कुल.. और थैंक्स ए लौट .. ये एहसान रहा।


अपस्यु:- काम होने के बाद थैंक्स कहना। गुड नाईट..


श्रेया अपने कमरे चली गई और अपस्यु अंदर आ गया… "क्या कह रही थी वो".. नंदनी जिज्ञासावश पूछने लगी..


अपस्यु;- कोई लड़का उसे परेशान कर रहा है उसी के बारे में हेल्प मांग रही थी।


कुंजल:- अपनी परेशानी काम है क्या, जो दूसरे के फटे में जाओगे। मना कर दो, उसके भी तो भाई है, दोस्त है और भी कई सारे लोग हैं।


अपस्यु:- जी दीदी जी, और कोई आदेश..


कुंजल:- भाई देखो मेरी बात की मज़ाक में मत लो, जो कही वो सुनो।


नंदनी:- जाने दे, अब देखी तो मै भी थी, बेचारी की नानी मरी थी तब तो अकेली ही सब कर रही थी, अब नहीं होगा कोई उस लायक इसलिए जिसे लायक समझी उसे कह दी।


कुंजल:- हुंह ! पुलिस और प्रशासन क्यों है फिर…


अपस्यु:- कुंजल तेरा भाई समझदार है, अब तू चिंता मतकर और ये बता की तुम और स्वास्तिका कब निकल रहे हो मुंबई?।


कुंजल:- हम दोनों कल जा रहे है।


"कहां जाने की बात हो रही है।"…. पीछे से आरव आते हुए पूछने लगा।…


स्वास्तिका:- डफर वो हमारे जाने के बारे में पूछ रहा होगा.. क्यों अपस्यु..


अपस्यु:- तू एक बात बता आरव, गुप्ता ब्रदर्स वाला काम कब तक अटका कर रखेगा, जब काम नहीं करना था तो काम क्यों लिया।


आरव:- यार वो एंगेजमेंट और बाकी सब कामों में फसा रह गया, ध्यान ही नहीं दे पाया।

अपस्यु:- हम्मम ! कल ही गोवा जाओ और उनका काम खत्म करो।


आरव:- हम्मम ! ठीक है मै काम खत्म कर आता हूं।


अपस्यु:- एक काम कर, लावणी को भी ले जाना, तुमलोग भी थोड़ा घूम फिर लोगे….


आरव:- अब उसके लिए तो लंबा प्रोसीजर लगेगा। इसकी परमिशन उसकी परमिशन..


अपस्यु:- गर्लफ्रेंड् को घुमाने नहीं ले जा रहा है। अपनी होने वाली बीवी को घुमाने ले जा रहा है, और अगर किसी को ऐतराज होता है तो कल ही कोर्ट मैरिज करवा दूं क्या?


नंदनी:- मेरे दोनो बेटे कमाल के है। इस आरव को अपनी होने वाली के साथ घूमने जाना है और काम का बहाना ये दूसरा वाला बना रहा है। कमाल है.. और मै तो यहां बेवकूफ बैठी हूं जो कुछ समझ भी ना पाऊं। क्यों ?


अपस्यु:- ठीक है आरव गुप्ता ब्रूदर्स की फाइल मुझे देदे मै ही ये काम कर लूंगा, खुश मां..


नंदनी:- हां खुश..


अपस्यु:- अच्छा मां कल आप भी इन दोनों के साथ मुंबई चली जाना, वहां दीपेश से भी मिल लेना और 10 दिनों में सबको लेकर चली आना। स्वास्तिका का काम हो गया है। उसे बस वहां अब अपना एग्जाम देना है।


नंदनी:- क्या सच में ?


अपस्यु:- हां बाबा सच.. आरव तू वो फाइल ले आ, मै मुक्ता अपार्टमेंट जा रहा हूं बचे लोगों के काम के साथ इसे भी पुरा कर लूंगा।


कुछ ही देर में आरव वो फाइल लेकर चला आया.. नंदनी ने क्रॉस चेक के लिए वो फाइल सच में देखी और देखने के बाद…. "तू सच जह रहा था क्या?"


अपस्यु:- छोड़ो ना मां, अब मैंने काम अपने जिम्मे के लिए है ना.. वैसे भी जिसके साथ शादी होनी है, उसके साथ 4-5 दिन घूमने नहीं जा सकते, इससे अच्छा तो गर्लफ्रंड ही बनाए रखते। लड़की उधर से झूट बोलकर निकलती और लड़का उधर से। बेसिकली गार्डियन को झूट ही ज्यादा पसंद आता है।


नंदनी:- इधर आ तू..


अपस्यु:- नहीं आना मुझे..


नंदनी:- तू इधर आता है या मै वहां आऊं..


अपस्यु अपने दोनो गाल पर हाथ रखे नंदनी के पास आया.. "गाल से हाथ हटा और थोड़ा झुक जाओ।"… "सॉरी वो भावनाओ में निकल गया।"… "हाथ हटाओ अभी।"… अपस्यु हाथ हटाकर थोड़ा नीचे झुका और नंदनी खींचकर उसे 2 तमाचा मारती हुई… "जाकर बैठ जा, और ज्यादा ज्ञान मत दिया कर की गार्डियन को क्या करना चाहिए या क्या नहीं। ठीक है आरव, तू ये गुप्ता ब्रिदर्स के फाइल को निपटा बेटा और लावणी को भी साथ लिए जाना।"


अपस्यु सबसे बात करने के बाद खाना खाकर मुक्ता अपार्टमेंट निकला। हॉल में चेयर पर बैठकर ऐमी कुछ फाइल चेक कर रही थी। अपस्यु पीछे से उसे गले से लगाया, उसके गर्दन पर किस्स किया और सामने के पन्नों को देखकर कहने लगा… "इसका समय नजदीक आ रहा है। फाइल डंप कर दो"


ऐमी अपने हाथ ऊपर ले जाकर अपस्यु के गालों को सहलाती हुई… "हां सही कह रहे इस विक्रम में दम नहीं है। लेकिन आज कल संयोग भी कम नहीं। तुम्हे याद है वो डोनेशन वाली लड़की कुसुम।"..


अपस्यु, फिर से उसके गर्दन को चूमते हुए अपने हाथ उसके पेट पर ले जाते… "हां याद है ना कुसुम, परसो ही तो बाजार में मिली थी।"..


ऐमी अपस्यु में बढ़ते हाथों को दबोच कर पकड़ती… "वो तुम्हारी दूर कि कजिन हुई और विक्रम राठौड़ की छोटी बेटी।"..


अपस्यु, आश्चर्य होकर सामने लगे बड़े से राउंड टेबल पर बैठकर फैमिली डिटेल देखने लगा… "अरे यार ये भगवान को भी दुश्मनी है क्या.. ये जिंदल के यहां ध्रुव और अब ये विक्रम के यहां कुसुम। हर परिवार में ऐसे लोग है जिसके कारन हमे सोचना पड़ता है।"


ऐमी:- कमाल है अपस्यु ये सोचते-सोचते तुम्हारे पाऊं कहां चला आया?


अपस्यु, राउंड टेबल से उतर कर सीधा चेयर पर। अपने दोनो पाऊं फैलाकर ऐमी के उपर बैठकर उसके गर्दन पर चूमते… "लो पाऊं से परेशानी थी ना, अब तो कोई समस्या नहीं है ना।"


ऐमी अपस्यु को धक्के देकर टेबल से गिराती हुई… "5 दिन बोली वो नहीं तुमसे बर्दाश्त हो रहा। क्या करूं मै तुम्हारा कुछ समझ में नहीं आ रहा।"


अपस्यु:- एक किस्स तो कर लेने दो कम से कम..


ऐमी:- नाह ! अच्छी किस्स के बाद क्या होता है वो हम दोनों को पता है। इसलिए नो। अब आराम से बैठो क्योंकि पुरा रायता फैला है और कुछ समझ में नहीं आ रहा।


अपस्यु, ऐमी के पीछे जाते उसके गर्दन के नीचे चूमते हुए धीरे-धीरे कंधों से नीचे अपने हाथ के जाते… "रायता मै समेट लूंगा, अभी तुम मेरे अरमान समेटो।


बेल बजी और नजर सीसी टीवी पर गई तो बाहर आरव खड़ा था.. "हीहीहीही.. मज़ा आ गया".. ऐमी खिलखिलाकर हंसती हुई भागी और दरवाजा खोल दी। जैसे ही आरव अंदर आया ऐमी उसके गले लगती हुई कहने लगी.. "थैंक गॉड आ गए, वरना परेशान कर रखा था इसने।"..


आरव, दोनो को घूरते हुए… "तुम दोनो मुझे बस एक बात समझाओ अपने अपार्टमेंट में कुछ गड़बड़ी चल रही है क्या?"


तीनों ही आकर बैठे… "तुझे क्या लगा पहले वो बताओ"..


आरव:- नहीं, पहले तुम मेरे सवाल का जवाब दो, क्योंकि मुझे उस श्रेया एंड कंपनी पर शक तो पहले से था, लेकिन इतनी सारी रैंडम घटना एक साथ नहीं हो सकता।


अपस्यु:- कुछ घटना बताओ..


आरव:- "पहला तो ये की जिस दिन मै आया पूरी कॉलोनी का हमारे यहां आकर झगड़ा की, जबकि कुछ लोगो को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो दरअसल है कुछ और, और दिखा कुछ और रहे है। उसके अलावा आज अपस्यु ने कहा ना कार के बारे में, तब बातें दिमाग में और भी स्ट्राइक कर गई, मां का कार ऐक्सिडेंट बैंक टू बैंक।"

"फिर ये गुफरान और प्रदीप को देख लो.. कुंजल भी कह रही थी ये बात… "दोनो का व्यव्हार ड्राइवर जैसा नहीं है, बल्कि किसी ऑफिस का हाई क्लास ऑफिसर जैसा ऐटिट्यूड है। उसकी वो गर्लफ्रेंड देखो, जेन और लिसा। एक दिन में उनसे पट भी गई और पड़ोस में जो उसका बॉयफ्रेंड रहता है श्रेया का भाई, उसे कोई फर्क ही नहीं परा।"

"और सबसे ज्यादा गुस्सा तो तुम दोनो पर आ रहा है, ऐसा हो नहीं सकता कि तुम दोनो के पास उसकी डिटेल ना हो। बजाय इसके कि साथ बैठकर डिस्कस करो तो कितनी चालाकी से हम सबको दूर भेज दिया। तुम दोनो के दिमाग में पहले चल क्या रहा है वो बताओ। और हां मुझे सच जानना है।"


अपस्यु, ऐमी की आंखों में झाकने लगा। ऐमी उसका हाथ थामती अपने पलकें झुकाकर सहमति दी… "जिंदल और विक्रम सेकंड लास्ट टारगेट है।"


आरव ये सुनकर जैसे झटका खाया हो। आरव ने जाकर विष्की की बॉटल निकाली और जैसे ही बॉटल में मुंह लगाने लगा, अपस्यु बॉटल हाथ से पकड़कर उसके मुंह से अलग किया… "तू पागल है, ये बियर, वाइन या शैम्पेन नहीं है.. विष्की है, आराम से पेग बनाकर ले"


आरव गुस्से में उससे सीधा एक पंच दे दिया… "पागल मारने से पहले बता तो देता, ऐसे कौन मारता है यार।".. अपस्यु अपना नाक पकड़ते बोला।


"हां तो ठीक है बच, मै एक बार और मार रहा हूं"…. कहते हुए अपस्यु को एक लात जमा दिया और अपस्यु झटका खाकर पीछे हटा। इन दोनों के झगड़े के बीच ऐमी कब वो विश्की की बॉटल उड़ाई किसी को पता भी नहीं चला। वो आराम से तीनों के लिए पेग बनाई और अपना पेग उठाकर कहने लगी… "मार आरव मार.. तू बिना रहम किए मार. अपस्यु माय लव .. बेबी मार मत खाना बस बचते रहो।"…


दोनो अपना ध्यान ऐमी पर जमाते… "बेवरी कहीं की हमे उलझकर पीने भी लगी।"


ऐमी:- दारू जब बाहर आ जाए तो इंतजार नहीं करवाना चाहिए, वरना दारू बुरा मान जाती है।

ऐमी की बात सुनकर दोनो भाई हंसते हुए फिर से बैठ गए और टोस्ट करते हुए अपना-अपना जाम खींचने लगे…. "दिल तोड़ा है तुम दोनो ने। मतलब मुझे साइड करके तुम दोनो अलग ही प्लांनिंग में थे।"


ऐमी:- तुझे बताने के बाद भी तुझे साथ नहीं लेंगे, ये तो तय है। हां जानने का हक है और हम बताते भी। फर्क यही बस तुझे वक़्त से पहले बताना पड़ रहा है वो भी उस कामिनी श्रेया की वजह से।


आरव:- तुम दोनो पागल हो गए हो क्या। जानते हो ना 1 से भले 2 और 2 से भले 3।


अपस्यु:- आरव…. मां है, 120 बच्चे है, कुंजल है, स्वास्तिका है, लावणी है। हम तो सोच चुके है, तुझे सोचना है।


आरव:- यहां हर कोई अपनी किस्मत जीता है और अपनी मेहनत से अपनी किस्मत लिखता है। हर किसी को एक ना एक दिन मारना है। इसके साथ यह भी सत्य है कि सब एक साथ मर जाए ये भी संभव नहीं। जो बचते है वो अपनो की अच्छी-बुरी यादों के साथ आगे बढ़ते है।


ऐमी, अपस्यु के ओर देखने लगी.. आरव भी अपस्यु के ओर देखने लगा.. दोनो को अपने ओर देखते हुए…. "क्या? मुझे ऐसे क्यों घुर रहे हो दोनो।"


ऐमी:- आरव साथ है..


अपस्यु:- हां ठीक है अब तीन लोगों के बीच क्या वोटिंग कर रहे हो।


आरव:- कमिने हो दोनो.. कितनी दूर से खेल जाते हो अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल होता है। पहले तो मुझे लगा था कि तुम दोनो पार्थ और स्वास्तिका को लेकर परेशान होगे और विक्रम का केस को भी हैंडल कर रहे होगे, मै तो यही सोचकर आया था.. लेकिन आज अगर मै नहीं आता यहां तो तुम दोनो सबकुछ प्लान करके निकल लेते और मुझे पता तक नहीं चलता।


अपस्यु:- वैसे ये सब मामला नहीं भी होता तो भी मै तुझे लावणी के साथ भेजता ही। आज दिन में मेरे कान में कह रही थी, हमारी शादी करवा दो जल्दी भईया।


आरव:- क्या बात कर रहा है। वैसे अरमान मेरे भी कुछ ऐसे ही थे। क्या है कुछ वक़्त उसे भी दे दूं.. कभी वक़्त ही नहीं दे पता। फिर ये भी रहता है कि दोनो परिवार इतने नजदीक है कि कुछ छिपता ही नहीं।


ऐमी:- कोई नहीं आराम से 10 दिन घूम आओ जबतक यहां सब क्लियर करते है। तुम लोग जबतक लौटोगे उससे पहले हम राठौड़ मेंशन में घुसने का प्लान कर चुके होंगे। लेकिन फिलहाल हमारे हर काम के बीच में ये श्रेया और उसकी टीम आ रही है। वो हमारे इतने अंदर तक घुस चुकी है कि दूर बैठकर वो लावणी के बेस्ट फ्रेंड को हमारे ही एक क्लोज कॉन्टैक्ट के हाथों उलझा दी।


"नाह ! तुम जैसा सोच रही हो वैसा नहीं है ऐमी। हां परिस्थिति उलझी जरूर है लेकिन इन परिस्थितियों को मैंने है उलझने दिया है। क्यों होने दिया वो मै तुम्हे बताऊंगा… क्या करना है वो तुम दोनो मुझे बताओगे।"
sab to thik hai lekin 400 se 500 me vodaka ki puri botle kaha milti hai :bat:
ham to yanha 1000 rs le ke jate hai aur fir bhi ek gandi si wishky lakar pina padta hai :verysad:
 
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