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"मां आपको पता नहीं, केवल इस अपस्यु ने ही नहीं, बल्कि इस ऐमी की बच्ची ने भी हमे बहुत दर्द दिए है। एक किस्से हो इनके परेशान करने के तो मै बताऊं ना। जब भी मौका मिला है हमे ऐसे उलझकर बेबस कर देते जिसकी कोई सीमा नहीं। और हमे फसाकर दोनो बाहर बैठकर मज़े लेते रहते थे… आज मौका मिला है.. मै तो सोच रही हूं दोनो ने जब अपनी फीलिंग जाहिर कर दी है, उसके बाद तो हमेशा साथ ही दिखने वाले है… अब तो किसी के कहने से भी रुकने कहा वाले। मै तो कहती हूं 1 महीना दोनो को रूम म पैक कर दो और वो भी मोबाइल के बिना"..
नंदनी:- जो पहले से सजा झेल रहे हो उन्हें और कितनी सजा दोगे। जहां ये इतने लंबे अरसे से पराए नजर आ रहे थे, वहां इनके लिए महीने तो क्या साल भर अलग रख दो घूट लेंगे, लेकिन कुछ कहेंगे नहीं। मेरे हिसाब से दोनो की शादी ही बेहतर सजा होगी। हमेशा दोनो साथ रहेंगे…
अपस्यु:- आप लोगों को हमारे बारे में जानना था, आपने जान लिया। लेकिन अभी हम शादी नहीं कर सकते।
ऐमी:- येस.. अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है।
नंदनी:- एक चोरी छिपे शादी, जिसमें घर के ही लोग होंगे बस। तुम्हे बाहर जो और जैसा मेंटेन करना हो कर लो, हम में से कोई कुछ नहीं बोलेगा।
कुंजल:- नाह ! ऐसे कैसे मात्र कुछ लोग की के बीच शादी होगी… हम बारात लेकर जाएंगे। पूरे बाजे-गाजे के साथ, एक रॉयल वेडिंग होगी।
अपस्यु:- बहना बिल्कुल सही बोली, पहले आपस में तो फैसला कर लो कि करना क्या है, जबतक हम घूमकर आते है। चलो ऐमी…
ऐमी:- हां ये भी सही है, अब इन्हीं को फैसला कर लेने दो…
अपस्यु अपने चेयर से खड़ा हुआ और अपना एक हाथ ऐमी के ओर बढ़ा दिया। ऐमी मुस्कुराती हुई वह हाथ थाम ली और दोनो सबके सामने से वहां से जाने लगे… "वाह मतलब दोनो सामने से रोमांस पर निकल रहे है और आप सब बैठकर सोचते रहो। यही मुझे लावणी को देखने की भी सजा मिल जाती है।"..
आरव की बात सुनकर सभी हसने लगे और इधर दोनो सबको अनदेखा करके निकल गए। जैसे ही बाहर आए ऐमी मुस्कुराती हुई कहने कहीं… "मैं बहुत बकबक करती हूं।"…. "बहुत नहीं, बहुत से भी ज्यादा.. और उतनी ही प्यारी भी"
ऐमी अपना सर अपस्यु के सीने से टिकाकर उसके कंधे में दोनो हाथ फसा दी और अपस्यु ऐमी की कमर में हाथ डालकर, दोनो खुले एहसासों में डूबे, बस खुशी से मुसकुराते चल रहे थे। कार दिल्ली-देहरादून के हाईवे पर थी और कुछ देर की ड्राइविंग के बाद दोनो घाटी में पहुंचे, कार को सड़क से नीचे उतारकर, दोनो कुछ दूर अंदर पेड़ों के बीच जाकर, एक पेड़ के नीचे बैठ गए, कुछ दूर आगे ही पहाड़ का किनारा था और नीचे खाई।
अपस्यु पेड़ से टिककर बैठा था और ऐमी उसके गोद में सर रखकर आखें मुंदी बस खो सी गई। अपस्यु उसके सर पर धीरे-धीरे हाथ फेरते हुए, उसके चेहरे को देखकर आंनद ले रहा था… "यहां सुलाने लाए थे क्या? कुछ कहो ना"..………. "मन नहीं, जब तुम नहीं होती तो बहुत कुछ होता है कहने को"……... ऐमी उठकर अपना सर अपस्यु के सीने से टीकाती, खुद को सिकोड़कर अपस्यु में पूरी तरह सिमटती, प्यारी सी धीमी आवाज़ में कहने लगी… "मै पूरी होना चाहती हुई, मेरी भी शादी की इक्छा है अपस्यु।"..
"हां जनता हूं ऐमी"… अपस्यु, ऐमी को बाहों में समेटकर उसके सर पर चूमते हुए कहने लगा और अपना चेहरा उसके सर पर टिका कर अपनी आखें मूंद लिया। धीमी-धीमी चलती श्वांस की चलने कि मधुर ध्वनि और धड़कनों को महसूस करना, खोए से आलम में प्रेम रस घोल रहे थे।
दोनो पहली बार बेफिक्र होकर एक दूसरे को महसूस कर रहे थे और ना जाने कब से इस पल को जीने की एक चाहत अंदर कहीं दबी सी थी।…. "अपस्यु मेरी एक छोटी सी इक्छा है।"………….. "जो तुम्हारी इक्छा है वहीं मेरी भी इक्छा है।"….……….. "ठीक है पहले तुम अपनी इक्छा बताओ।"….……… "नाह तुमने शुरू किया है पहले तुम, बस उसके जवाब में मैं इतना ही कहूंगा इंडिया गेट पर मेरी प्लांनिंग है, वो भी फुल डीजे साउंड और अपना पसंदीदा मूव"…
ऐमी, अपस्यु से अलग होती हुई उसके आखे मुंदे, खोए से चेहरे को देखने लगी। ऐमी के उठने के बाद, अपस्यु के चेहरे पर खुशी और भी फ़ैल गई थी। ऐमी उसके गाल को हाथो में थामती अपने होंठ को उसके होंठ के करीब ले गई। दोनो के होंठ स्पर्श करते ही एक दूसरे में गुम हो जाने कि अनुभूति होने लगी।
अपस्यु अपनी बाहें फैलाकर ऐमी को अपने बाहों के घेरे में ले लिया, और ऐमी अपने दोनो पाऊं, अपस्यु के पाऊं के दोनो ओर करती आराम से उसके गोद में बैतकर होठों के स्पर्श को और गहरा, और मादक बनाती होंठ से होंठ लगाकर चूमने लगी।
अपस्यु भी अपने हाथ के घेरे की पकड़ को थोड़ा और मजबूत करते, ऐमी को खुद में समेटकर चूमना शुरू कर दिया। दोनो बिल्कुल खोकर एक दूसरे को चूम रहे थे। बीच में दोनो की आखें खुलती होंठ अलग होते, लंबी और गहरी श्वांस दोनो अंदर खिंचते, मुसकुराते हुए एक दूसरे को देखते और बेकरारी में वापस होंठ से होंठ लगाकर चूमने लगते। ।
दोनो किस्स में खोए हुए थे, तभी दोनो के कंधे पर हाथ पड़ा, किसी के हाथ होने का एहसास हुआ और दोनो अपने प्यार में लिप्त किस्स को तोड़ते अपनी आखें खोलकर देखने लगे… दोनो एक दूसरे से अलग होते खड़े हो गए और सामने वही पुलिस वाला अजिंक्य और उसकी बहन विन्नी को देखकर थोड़े हैरान थे।
थोड़ा असमंजस सी स्तिथि पैदा हो गई। दोनो सामने अजिंक्य को देखकर क्या कहे कुछ समझ नहीं पा रहे थे… "पब्लिक प्लेस पर रोमांस करोगे तो ऐसे ही सिचुएशन फेस करना पड़ता है। विन्नी तो राखी बांधने आयी थी तुम्हे, लेकिन ऐसा लगता है कि तुम्हारे लिए आज का दिन भी अपनी गर्लफ्रेंड के लिए ही है।"..
अपस्यु:- हेय विन्नी कैसी हो ?
विन्नी:- कल मिलती हूं अपस्यु अभी बिज़ी हो शायद।
ऐमी:- नहीं हम 4 बजे तक घर पर ही थे और वहीं से, सबके परमिशन के साथ निकले थे। हमे जरा भी आइडिया नहीं था। वी आर सॉरी।
अजिंक्य:- हम जैसे छोटे लोगों के सर पर तो बेवकूफ का टैग, पैदा होने के साथ ही लग जाता है ना। चल विन्नी।
अपस्यु:- क्या भैय्या, हमेशा आवेश में गलत सोच लेते हो, और बाद में सॉरी-सॉरी करते रहते हो। अब हमे 12 साल बाद प्यार मिला था, सो थोड़े एक दूसरे में खो गए थे.. अब क्या इसी पर डिस्कस करते रहोगे.. और क्या विन्नी भाई बोली है तो अपने भाई और भाभी को ऐसे कोई शर्मिंदा करता है क्या?
अजिंक्य:- 12 साल पुराना प्यार.. यार तू कुछ भी निर्मल करता है कि नहीं.. खैर बांध दे राखी इसे विन्नी और जी लेने दे छोड़े को भी कुछ पल अपने प्यार के साथ…
विन्नी, दोनो को देखकर हंसती हुई अपस्यु के हाथ पर राखी बांध दी। जैसे ही दोनो जाने के लिए पलट रहे थे तभी अपस्यु अजिंक्य को रोकते… "भैय्या आप वो लड़का क्रिश को जानते हो क्या?"
अजिंक्य:- कौन वो रेस्टुरेंट को दुकान बोलने वाला लड़का, जो विन्नी के साथ पढ़ता है।
विन्नी:- चलो भईया, इन्हे आज अकेला छोड़ दो, बचपन का प्यार मिला है। कल बात कर लेना।
अजिंक्य:- तू रुक एक मिनट… क्या हुआ अपस्यु वो लड़का फिर मेरी बहन के चक्कर काटता है क्या?
अपस्यु:- हां वो चक्कर काटता है, और "फिर" जैसी कोई बात नहीं है, वो लगातार चक्कर काटता है। मै चाहता हूं कल आप जाकर उसके परिवार से मिले और दोनो को फाइनल चक्कर कटवा कर एक कर दीजिए।
अजिंक्य कुछ सोच में पड़ गया… "क्या हुआ भईया, इतना क्या सोच रहे हैं। मैंने घर परिवार और लड़का सबके विषय में पाता करवा चुका हूं। 2 दिन पहले ही यूएसए से लौटा हूं तो उधर आने का मौका नहीं मिला, वरना घर तो आता ही ये बात करने।"..
अजिंक्य:- बात वो नहीं है अपस्यु। गांव और रिश्तेदारों से क्या कहेंगे वो सोच रहा हूं।
अपस्यु:- कौन ईमानदार पुलिस वाला है। और कौन अब अपने बहन के अधिकारों का हनन बस दक्यानुषी सोच से कर रहा है।
अजिंक्य:- लेकिन समाज के बनाए नियम।
अपस्यु:- यदि समाज डाका डालने के नियम को बना दे तो क्या कानूनन जायज है?
अजिंक्य:- लेकिन समाज में ऐसा कोई नियम कहां है। भ्रमाओ नहीं मुझे।
अपस्यु:- किसी की खुशियों पर, नियम के नाम से डाका डालना आपको अपराध नहीं लग रहा क्या? वैसे भी शास्त्र में जहां कभी वर्ण था ही नहीं फिर आज विवाह के लिए एक ही जात का नियम कहां से आ गया। जाकर पहले शास्त्र उलट आइए.. फिर बात करते हैं। या नहीं तो कल प्रवचन के लिए पहुंचता हूं।
अजिंक्य:- रहने दीजिए बाबा जी मै सहमत हो गया आपकी बातों से। तू ही मेडिएटर होगा और कल ही रिश्ते की बात करने चलेंगे..
"ये हुई ना बात भैय्या".. अपस्यु अपनी बात कहते हुए विन्नी के ओर देखने लगा। विन्नी की आखें उसे धन्यवाद कह रही थी और चेहरा खिला हुआ था। दोनो के वहां से जाते ही ऐमी, अपस्यु के सीने से लगती हुई कहने लगी… "सबने मिलकर हमसे बदला लिया है।"
अपस्यु:- छोड़ो उसको, कल से काम शुरू होगा, ध्रुव कल आ रहा है।
ऐमी:- हम्मम ! इधर कोई तैयार नहीं है। यदि आरव को छोड़ दिया जाए तो बाकी सब दम तोड़ देंगे। पार्थ को हुआ क्या है अपस्यु, उसकी प्रशिक्षण स्तर बढ़ने के बदले धीरे-धीरे नीचे आ रहा है।
अपस्यु:- मतलब साफ है वो अतीत भूलता जा रहा है। चलो ये भी अच्छा है। खैर समस्या ना तो प्रकाश है और ना ही विक्रम। इन दोनों के पास अतुलनीय बल है लेकिन छल नहीं।
ऐमी:- 3 महीने का वक्त ज्यादा लग रहा है, आंटी को जल्द ही मायलो ग्रुप का चार्ज दिलवा दो।
अपस्यु:- नहीं शेड्यूल से चलने दो। मै एक उलझन में हूं बस उसपर विचार शुरू करना है।
ऐमी:- मस्क एंड हायड थेओरी ना। उसी की बात पर सोच रहे ना।
अपस्यु:- एग्जैक्टली। उसी पर सोच तो रहा हूं, लेकिन लूप बहुत ज्यादा है, किसी एक क्लू से सब सामने होगा।
ऐमी:- मुझे ये बकवास आइडिया लग रहा है और प्रैक्टिकली संभव भी नहीं। ऐसा रील लाइफ में ही सब कुछ चलता है कि…. मर गए, छिप गए और फिर एक दम से सामने आ गए। आज कल इंटरनेट है, मोबाइल है, और फिर आप का बॉडी स्कैन है। सारा डेटा कहीं ना कहीं स्टोर होते रहता है। ऐसे छिपने के लिए जितने फुल प्रूफ प्लान और कंडीशंन की जरूरत पड़ेगी, उससे कहीं कम कोशिश में उस शार्क के झुंड को धर दबोचेंगे जो खुद को सबसे बड़ा छलिया समझता है।..
अपस्यु ऐमी की आंखों में देखते हुए हसने लगा और उसके कमर में हाथ डालकर, खुद में पुरा समेटते हुए उसके होठ को चूमते…. "मतलब तुमने सब प्लान कर लिया है।"
ऐमी:- तुम यहां थे नहीं, करने को कोई काम भी नहीं था और सच कहूं तो इस बार तुम्हे देखने की कभी-कभी इक्छा ऐसे जोड़ करती की खुद कर काबू करना मुश्किल हो जाता था। दिमाग को थोड़ा उलझाना था इसलिए अपने आखिरी शिकार पर पुरा प्लान कर लिया।
जैसा की हमने तय किया था, हालांकि प्लान में पहले तो प्रकाश ही था, विक्रम तो अब जुड़ा है, फिर भी, जैसा हमने तय किया था इनको एक अज्ञात मौत देने के बाद, सबको उनके सामन्य जीवन जीने के लिए अलग कर देंगे।
अपस्यु:- और प्लान एक्जीक्यूशन टाइम..
ऐमी:- लोकसभा चुनाव .. जून 2016।
अपस्यु:- कमाल कर दिया ऐमी। वैसे जब मै यूएसए में था तब तुम मुझे मिस भी कर रही थी या फिर प्लान पर ही वर्कआउट कर रही थी।
ऐमी:- मूझेसे दूर तुम इन्हीं की वजह से तो हो। इनको जितनी जल्दी और जितनी सावधानी से साफ कर दूं, उतनी ही जल्दी हम साथ होंगे…
ऐमी अपनी बात समाप्त करती अपस्यु के होटों को चूमती वहां से चलने के लिए कहने लगी। दोनो ऐमी के बंगलो में पहुंचे और वर्क सेक्शन वाले कमरे में पहुंचते ही… अपस्यु हसरत भरी नजरों से देखते हुए कहने लगा…. "आज भी कुछ नहीं होगा क्या?"
ऐमी:- ऑफ ओ.. मुझे गुस्सा मत दिलाओ अपस्यु, यहां से काम करके निकलेंगे। तुम मेरे ही घर में ऐसा सोच भी कैसे सकते हो। ऊपर से वहां पुरा परिवार इंतजार कर रहा होगा। पता नहीं डैड और वैभव को आ जाना चाहिए, अब तक वहीं है।
अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है पूरी आउटलाइन समझाओ मुझे, फिर चलते है।
तकरीबन एक घंटे तक नई योजना पर पूरी चर्चा चली। हर बड़िकियों और पहलू पर गौर करने के बाद अपस्यु..… "यहां कुछ तो कमी लग रही है मुझे ऐमी, 3 दिन बाद हम मुक्ता अपार्टमेंट में ही एक बार और चर्चा करते है।"
ऐमी, अपस्यु की हालत पर हंसती हुई कहने लगी…. "सरियसली अपस्यु, तुम्हे नहीं लगता आज कल कुछ ज्यादा ही एडवांटेज लेने की कोशिश करते हो।"
अपस्यु:- और तुम्हे नहीं लगता कि आजकल कुछ ज्यादा ही तुम मुझे, मेरी खुशियों से मशरूम रखने की लगातार कोशिश करती हो। रियली, 2-3 महीने में कभी एक मौका.. जस्टिफाई है क्या?
ऐमी:- सारी इक्छाओं को वश में करना सीखो बच्चा, तभी जीवन सुखी होगा..
अपस्यु:- हाहाहाहाहा.. ठीक है बाबा समझ गया.. अब नहीं करता परेशान। नऊ हैप्पी..
ऐमी:- बिल्कुल नहीं सर.. परेशान करते रहिए.. मूड-मूड पर डिपेंड करता है।
अपस्यु:- ज्यादा भावनाओ को बढ़ावा ना दो, वरना नतीजे के लिए तैयार रहना।
ऐमी:- मैं तो शुरू से तैयार हूं.. पहले टेस्ट तो हो जाने दो, फिर नतीजों को भी समझ लेंगे।
अपस्यु:- रहने दो कोई फाइटिंग टेस्ट के मूड से नहीं हूं मै। सभी बात हो गई हो तो चले यहां से।
"बस एक बात, ध्यान से सुनो। श्रेया और मेघा के साथ तुम्हे कंप्लीट इंगेज होना पड़ेगा। समझ लो इस प्लान के दो मुख्य बिंदु तुम्हारे हिस्से में है, जिसके बिना हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे। जो भी उन्हें चाहिए उन्हें दो। दोनो को जितना पसंद है, तो जिताओ। दोनो अगर सोचती है कि तुम्हारा वो इस्तमाल अच्छे से कर सकती है, तो उन्हें करने दो तुम्हारा इस्तमाल। इस बार भी हम वहीं खेल रचेंगे.. बिल्कुल उनके सामने होंगे, लेकिन कभी नजर नहीं आएंगे।"…