• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

★☆★ Xforum | Ultimate Story Contest 2026 ~ Reviews Thread ★☆★

JTN

Active Member
1,045
1,308
158
अंजान खूनी

सन 1960 दिल्ली शहर के xxxx एरिया में बने एक होटल में आज एक बड़ी सी पार्टी चल रही थी , ये पार्टी मानव गुप्ता ने दी थी जो हाल ही में दिल्ली शहर के पुलिस कमिश्नर बने थे , इस वक्त पार्टी में कई छोटे बड़े पुलिस की अधिकारी आए हुए थे , और सभी एक एक करके मानव गुप्ता को बधाई दे रहे थे उसी में एक है सूरज , जो कि मुंबई क्राइम ब्रांच से दिल्ली आए हुए थे , अपने दोस्त रोमेश सक्सेना , अब रोमेश सक्सेना के बारे में क्या बताऊं आपको , आप तो अच्छे से जानते हो हमारे रोमेश बाबू को , ये कोई और नहीं बल्कि मेरे अजीज दोस्त Raj_sharma की जासूसी भरे उपन्यास के बहुत ही खास कैरेक्टर है , खेर पार्टी में इस वक्त सूरज और रोमेश जाते है मानव गुप्ता से मिलने तब....

सूरज – (मानव गुप्ता से) Many Many Congratulation सर....

मानव गुप्ता – (मुस्कुरा के) आइए आइए सूरज बाबू , हमारी खुश किस्मती है ये मुंबई से आप हमारे लिए आए....

सूरज – (मुस्कुरा के) कैसी बाते कर रहे हो यार , आज मेरे दोस्त के लिए इतनी बड़ी खुशी का दिन है और मै ना आऊ कैसे हो सकता है , और देखो मै किसे लेके आया हूँ , (रोमेश सक्सेना की तरफ इशार करके) इस मिलो ये है....

मानव गुप्ता – (मुस्कुरा के हाथ मिलते हुए बीच में) अरे यार इन्हें कौन नहीं जानता है मुंबई के जाने माने Detective Mr Romesh Saksena को , भाई बड़ा नाम सुना है मैंने आपका और काम की पूछो मत , भाई आप तो पूरे पुलिस डिपार्टमेंट में फेमस है आप तो....

रोमेश सक्सेना – (हाथ मिला मुस्कुराते हुए) ये तो हमारी खुश किस्मती है कमिश्नर साहब , जो आप जैसी बड़ी हस्ती इस छोटे नाचीज़ को जानती है....

मानव गुप्ता – (हस्ते हुए) मानना पड़ेगा रोमेश बाबू , आप बड़े ही इंट्रेस्टिंग बंदे हो , वैसे हुनर तो काफी अच्छा है आपका गिर अपने पुलिस में ज्वाइन क्यों नहीं किया....

रोमेश सक्सेना – कमिश्नर साहब हम ठहरे आजाद पंछी , आज इधर तो कल उधर बचपन से ही पुलिस बनने बड़ी तम्मन्ना थी मेरी , मजे की बात ये है मैने ट्रेनिंग भी ली थी , लेकिन फिर अपनी घरेलू समस्या के चलते अलविदा करना पड़ा , जैसे घरेलू समस्या से निजात पाई तब कुछ न कुछ तो काम करना था सो मैने खुद की Detective एजेंसी खोल ली....

मानव गुप्ता – हम्मम चलो अच्छा है इस बहाने पुलिस ट्रेनिंग का आपको खूब फायदा मिला...

रोमेश सक्सेना – सो तो है कमिश्नर साहब....

मानव गुप्ता – आइए इस बात पर मै आपको हमारे रिटायर्ड कमिश्नर नरेश बाबू से मिलवाता हूँ....

तीनों एक साथ एक कोने में जाते है जहां कुछ पुलिस कर्मी और कुछ रिटायर्ड पुलिस ऑफिस आपस में बाते कर रहे थे , वहां आते ही....

मानव गुप्ता – (रिटायर्ड कमिश्नर नरेश से) हैलो नरेश सर....

नरेश – (मुस्कुरा के) आइए मानव बाबू , अभी आपकी तारीफे हो रही थी....

मानव गुप्ता – (मुस्कुरा के) शुक्रिया सर , इस मिलिए ये है सूरज मुंबई क्राइम ब्रांच से , ये मेरे बचपन के दोस्त है और ये है , मुंबई के मशहूर Detective रोमेश सक्सेना जी , सूरज के मित्र....

सूरज से मिल के...

नरेश – (रोमश सक्सेना से मिलते हुए) अरे इनकी तारीफे बड़ी सुनते आरहा हूँ मै आज किस्मत से मिलने का मौका मिल गया , कैसे है रोमेश बाबू....


रोमेश सक्सेना – मै बढ़िया हूँ सर , और इतनी तारीफ के लिए शुक्रिया आपका , मुंबई में रह के आपका नाम काफी सुना है मैने , मुंबई में आपके नाम के चर्चे काफी सुने है मैने आपने जिस तरह से दिल्ली क्राइम को आपने काबू किया वाकई तारीफ के काबिल है....

नरेश – (मुस्कुरा के) इस तारीफ का मै अकेले हकदार नहीं हु रोमेश बाबू , ये सब तो हमारे पुलिस भाइयों के सपोर्ट के बिना आसान नहीं था मेरे लिए...

मानव गुप्ता – आप लोग बैठ के बाते करिए मै और मेहमानों से मिल के आता हूँ....

बोल के मानव गुप्ता निकल गया तब....

रोमेश – (नरेश के साथ बैठते हुए) तो नरेश सर क्या आप इसी शहर के रहने वाले है....

नरेश – अरे नहीं रोमेश बाबू , वैसे मै जोधपुर का रहने वाला हूँ , लेकिन रिटायर्ड होने के बाद सोचा कहा जाए , इसीलिए यही दिल्ली में बस गए....

रोमेश – (मुस्कुरा के) हम्मम यहां तो आपके रिश्तेदार होगे इसीलिए न....

नरेश – (मुस्कुरा के) मेरे रिश्तेदार कोई नहीं है , असल में मैने शादी ही नहीं की....

नरेश की बात सुन रोमेश और सूरज हंसने लगे तब....

रोमेश – (हस्ते हुए) मतलब आप भी सूरज की राह में चल रहे है , इस भी अभी तक शादी नहीं की...

सूरज – (हस्ते हुए नरेश से) बिल्कुल सही किया सर आपने , शादी याने बरबादी , साथ ही हमारी आजादी जेल में हमीद के लिए...

बोलते ही नरेश , रोमेश और सूरज हंसने लगे तब...

नरेश – (मुस्कुरा के) बस जिंदगी भर काम ही करते रहे , जानते हो ये पुलिस की नौकरी का एक अलग ही आकर्ष है...

रोमेश और सूरज एक साथ – (मुस्कुरा हुए) हम्ममम....

नरेश – और जानते हो इस शहर से मेरा एक और लगाव भी है....

सूरज – वो क्या सर....

नरेश – जब मै इंस्पेक्टर बना तो मेरी पहली पोस्टिंग इसी शहर में हुई , फिर कुछ साल बाद मेरा ट्रांसफर होगया , करीबन 20 साल बाद में मेरा ट्रांसफर वापस इस शहर में होगया और जल्द ही मै यहां का कमिश्नर बन गया...

रोमेश – लगता है आपको इस शहर से ज्यादा प्यार हो गया है...

नरेश – (मुस्कुरा के) हम्मम....

रोमेश – तो सर आप कब रिटायर्ड हुए...

नरेश – 4 साल हो गए....

रोमेश – अच्छा...

नरेश – अच्छा रोमेश बाबू , आपने कई केस को सुलझाया है , मैने लगभग आपके सुलझाए कई केसों को अच्छे से स्टडी किया है , आपने इन केसेस में कई जगह समस्याओं का समाधान किया है , मै जानना चाहता क्या कभी कोई ऐसा केस आपके सामने आया हो जिसे आप सुलझा ना पाए हो या गलती कर बैठे हो...

रोमेश – (मुस्कुरा के) सर अब गलती कही नहीं की ये तो नहीं कहूंगा , सत्यन वेशी हूँ , सत्य की खोज करने वाला , और गलतियां तो काफी की है , और ऐसा भी हुआ है अपराधी को पकड़ नहीं पाया , लेकिन सच क्या है इस बात का पता जरूर लगा लिया है , (हस्ते हुए) ये बात और है जितने केस मैने देखे है उससे ज्यादा घटनाओं को आप निपटा चुके होगे...

नरेश – (हस्ते हुए) सो तो है ही , और मैने सारे केस निपटाए भी है सिवाय एक के , मेरी पुलिस की जिंदगी का आखरी केस इसी शहर का है , आज तक लटका हुआ है....

रोमेश – (सोचते हुए) मतलब गुनहगार कौन है इस बात का पता है लेकिन आज तक कोई सबूत नहीं मिला...

नरेश – बिल्कुल यही हुआ , गुनाहगार कौन था ये मै जनता था लेकिन इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं था , और फिर कुछ ऐसा हुआ कि , जिसे में गुनहगार समझता था उसी का खून हो गया...

रोमेश – हम्मम केस तो काफी मजेदार है...

सूरज – सर केस क्या था बताए जरा , क्या पता हमारे रोमेश बाबू कातिल का पता लगा ले....

सूरज की बात पर तीनों हंसने लगे तब...

नरेश – ठीक है मै आपको केस का पूरा बेयोवारा देता हु , देखते है रोमेश बाबू केस को सुलझ पाते है कि नहीं...

रोमेश – (हस्ते हुए) ये कैसी बाते कर रहे है आप सर , जब आप जैसे अनुभवी केस को सुलझा नहीं पाए तो मै क्या कर पाऊंगा...

सूरज – अरे यार एक बार केस सुनने में क्या जात है , (नरेश से) क्यों सर क्या कहते है आप...

नरेश – (हस्ते हुए) बिल्कुल कोशिश करने में क्या हर्ज है....

रोमेश – (मुस्कुरा के) अब आप कह रहे है तो ठीक है बताए कहा से शुरुवात हुई केस की....

नरेश – ये बात मेरे रिटायर होने के लगभग 2 साल पहले की है , तब इस शहर में गैर कानूनी हरकत हुआ करती थी , लेकिन मेरे आने के बाद कम हो गई....

इस बात से सब हंसने लगे तब...

नरेश – (मुस्कुराते हुए) मेरी एक आदत हुआ करती थी , बिना किसी को बताए गश्त पर निकल पड़ता था , अच्छा उस वक्त शहर में लाइट जाने की समस्या अक्सर हुआ करती थी तो मै पिस्तौल के इलावा अपने साथ अक्सर टॉर्च लेके जाया करता था...

उस दिन भी मैने वैसा ही किया लगभग रात के 12 बज रहे थे , लाइट भी नहीं थी उस एरिया में ऊपर से सर्दी की वजह से सन्नाटा कुछ ज्यादा ही था सड़क पर , मै पुलिस स्टेशन से निकल कुछ आधा किलोमीटर के आस पास आया होऊंगा , के तभी मैने देखा 4 लोग अंधेरे में अपने कंधे में उठाए किसी को लेजा रहे थे , तभी मैने उस तरफ टॉर्च डाली....

नरेश – (चिल्ला के) कौन है वहा....

टॉर्च की रोशनी में उन चारों में मैने एक की शकल को देख हल्का सा देख पाया था , लेकिन मेरी आवाज सुन जल्दी बाजी में उन चारों ने लाश को जमीन में रख के भाग गए , जब मै लाश के पास पहुंचा तो देखता हु कि , वो लाश नलिनी की थी , लाश को में देख मैने फौरन वॉकी से पुलिस स्टेशन में संपर्क किया तो कुछ देर में हवलदार आगए , तब एक हवलदार ने लाश का चेहरा देखा तो....

हवलदार – अरे ये तो नलिनी है , रवि की बीवी....

नरेश – तुम कैसे जानते हो इसे....

हवलदार – अरे साहेब मेरे घर से दो घर छोड़ के इनका घर है....

नरेश – हम्मम ठीक है (दो हवलदारों से) एक काम करो , लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो , (दूसरे हवलदार से) तुम मुझे इसके घर ले चलो....

हवलदार के साथ मै नलिनी के घर गया देखा तो दरवाजा खुला था वहां कोई नहीं था तब....

नरेश – नलिनी का पति कहा होगा इस वक्त , (हवलदार से) क्या तुम्हे कुछ मालूम है...

हवलदार – नहीं साहेब , रवि से मेरी कुछ खास मुलाकात नहीं होती बस कभी कभी दुआ सलाम के इलावा...

नरेश – फिर कौन बताएगया...

हवलदार – मै पड़ोस से किसी को बुला लाता हूँ...

थोड़ी देर बाद पड़ोस से एक आदमी आया तब पूछ ताछ के बाद पता चला रवि अक्सर हर शनिवार अपने दोस्त अमन के पास जाता है उसके घर में जहां चारों दोस्त मिल के शराब पीते और जूवा खेलते थे कई घंटों तक....

बात का पता चलते ही मै हवलदार के साथ अमन के घर पहुंचा , दरवाजा खट खटाते ही चारों तो पहले चौक गए , की इतनी रात गए कौन होगा तब....

अमन – कौन है...

नरेश – पुलिस दरवाजा खोलो जल्दी...

दरवाजा खुलते ही सामने पुलिस को देख...

अमन – कहिए साहेब क्या बात है...

नरेश – तुम्हारा नाम अमन है...

अमन – जी साहेब....

नरेश – ये तुम्हारा ही घर है....

अमन – जी साहेब लेकिन बात क्या है...

नरेश – सब बताता हूँ , कौन कौन है घर में तुम्हारे....

अमन – जी मै और मेरे तीन दोस्त है....

नरेश – चलो जरा अन्दर मिलाओ मुझे दोस्त से....

बोल के नरेश , अमन और हवलदार घर के अन्दर आगए तब बाकी के तीनों दोस्त पुलिस को घर में देख चौक गए....

नरेश – (तीनों से) तुम तीनों में रवि कौन है....

रवि – मै हूँ रवि बताए बात क्या है साहेब...

नरेश – तुम चारों मिल के आधी रात एक लाश ले जा रहे थे मरघट की तरफ , सोचा होगा एक बार लाश को जला दोगे तो किसी को पता नहीं चलेगा....

रवि – (हैरानी से) लाश ये क्या कह रहे है आप साहेब....

नरेश – ज़्यादा बनो मत , जिस लाश को चार लोग ले जा रहे थे उनमें से एक तुम थे मैं खुद देखा था तुम्हे...

रवि – कब की बात कर रहे है आप...

नरेश – आज रात 12 बजे...

रवि – (तुरंत जवाब देते हुए) बिल्कुल गलत , आज रात 8 बजे से लेके अब तक हम यही है दोस्तो के साथ , एक मिनट के लिए कोई घर से बाहर नहीं गया...

नरेश – अच्छा क्या कर रहे है आप चारों यहां पर...

अमन – साहेब शनिवार की रात हम चारों दोस्त एक साथ ताश खेलते है साथ में....

नरेश – हम्मम मतलब जुवा खेल रहे हो...

रवि – जी साहेब...

नरेश – मतलब आप लोग यू नहीं मानोगे , ठीक है मै आप लोगों को जूंवा खेलने के अपराध में गिरफ्तार करता हूँ...

रवि – ये तो सरा सर ज्यादती है साहेब , देखिए हम यहां प्राइवेट में जूंवा खेल रहे थे न कि सड़क या पार्क पर...

नरेश – ये सब सफाई जज के सामने देना....

तभी रवि का तीसरा दोस्त उसके कान में धीरे से कुछ कहता है तब...

रघु – (पुलिस वाले से) देखिए साहेब हम आपके साथ पुलिस स्टेशन चलते है बस आप हमें अपने वकील से बात करने दीजिएगा ताकि हम अपनी जमानत दे सके....

नरेश – अब जो भी बात करनी है जज के सामने करना...

रवि – (बीच में) अरे साहेब आप किसी लाश के बारे में बात कर रहे थे , लड़ थी किसकी...

नरेश – ज्यादा बनो मत , लड़ तुम्हारी पत्नी की थी...

रवि – (चौक के हड़बड़ाते हुए) क्या मेरी पत्नी , ये क्या कह रहे है आप , नलिनी मेरी पत्नी मर गई , मुझे आपकी बात पर यकीन नहीं मै अभी अपने घर जाऊंगा....

नरेश – घर जाने का कोई फायदा नहीं लाश को अस्पताल पहुंचा दिया गया है पोस्टमार्टम के लिए , (हवलदार से) ले चलो इन्हें पुलिस स्टेशन....

कुछ समय बाद पुलिस स्टेशन में...

नरेश अपनी कुर्सी में बैठते हुए रवि को सम बैठता है जबकि बाकी तीनों दोस्त एक कोने में बैठे थे तब...

नरेश – (रवि से) क्या काम करते हो...

रवि – मेरे कई बिजनेस है , जैसे होलसेल...

नरेश – कितना कमा लेते हो....

रवि – यही कोई 50 से 60 हजार...

नरेश – मकान तुम्हारा है...

रवि – जी...

नरेश – कब बनवाया....

रवि – बनवाया नहीं खरीदा , 5 , 6 साल पहले पूरे 30 हजार में...

नरेश – अपने रुपए की बात मत करो समझे जितना पूछा जाए उसका जवाब दो...

नरेश – शादी कब की....

रवि – 9 साल हो गए...

नरेश – ससुराल कहा है...

रवि – इसी शहर में....

नरेश – ससुर का नाम क्या है...

रवि – धरम...

नरेश – कहा है...

रवि – होगा जेल में...

नरेश – (चौक के) जेल में...

रवि – अक्सर जेल में होता है किसी न किसी जुर्म में....

नरेश – हम्मम , ससुर के साथ संबंध कैसे है...

रवि – मै उसकी सूरत तक देखना नहीं चाहता...

नरेश – अच्छा , और पत्नी के साथ संबंध कैसे थे...

रवि – शादी के 9 साल बाद जैसे होने चाहिए...

नरेश – बाल बच्चे है...

रवि – नलिनी बांझ थी....

नरेश – हम्ममम , आज रात 12 बजे अंधेरे में तुम और तुम्हारे दोस्त मिल के तुम्हारी पत्नी की लाश ले जा रहे थे , मैने टॉर्च की रोशनी में देखा था तुम्हे...

रवि – आपको जरूर कोई गलतफहमी हुई है साहेब , रात 8 बजे से लेके मै और मेरे दोस्त , अमन के घर में ताश खेल रहे थे...

नरेश – हम्मम , खेर तुम्हारी पत्नी का चाल चलन कैसा था...

रवि – अब चाल चलन के लिए कौन क्या कह सकता है साहेब , पड़ोस में वो वैसे भी बहुत बदनाम थी...

नरेश – कैसी बदनामी...

रवि – देखिए मै रात को अक्सर देर से आता हूँ , और पिछले कुछ 1 महीने से नलिनी से कोई मिलने आया था...

नरेश – आपने अपनी पत्नी से पूछ ताछ कि...

रवि – की थी उसने जितने जवाब दिए सब झूठ थे...

नरेश – हम्मम और कुछ...

रवि – और क्या , हा एक दिन मैने नलिनी की अलमारी में कुछ गहने देखे , जो मैने उसे नहीं दिए थे...

नरेश – गहने कहा से आए क्या आपने अपनी पत्नी से पूछा था...

रवि – इस्म पूछना क्या है साहेब , औरत एक बार बिगड़ने की ठान ले तो उसे कोई नहीं रोक सकता है...

नरेश – हम्मम पूछा नहीं जा सकता लेकिन खून किया जा सकता है...

रवि – मैने किसी का खून नहीं किया...

नरेश – तो किसी से कराया...

रवि – मै क्यों करवाने चला...

नरेश – इसीलिए तुम्हे सुनी सुनाई पता चला तुम्हारी पत्नी बदचलन है...

रवि – लेकिन इससे कही साबित नहीं होता कि मैने उसका खून किया है या किसी से कराया है...

नरेश – तुम्हारी पत्नी गुजर गई है इससे क्या तुम खुश हो...

रवि – खुश तो नहीं हूँ , लेकिन मुझे कोई अफसोस भी नहीं है , क्योंकि जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा...

नरेश – (कुछ देर रवि को देखता है फिर) ठीक है जाके बैठो तुम , (हवलदार से) अमन को भेजो...

अमन आके बैठता है तब...

अमन – जी साहेब...

नरेश – रवि को कब से जानते हो...

अमन – जी हम बचपन के दोस्त है , एक ही स्कूल में पढ़ते थे तब से हमारी पहचान हुई...

नरेश – तुम्हारी घर में ये ताश कब से खेली जा रही है...

अमन – करीब 12 साल से...

नरेश – रोज खेलते हो...

अमन – नहीं साहेब पहले रोज खेलते थे फिर करीबन 8 या 9 साल से शनिवार को या छुट्टी के दिन खेलते थे उसके बाद फिर सिर्फ शनिवार को खेलते आरहे है...

नरेश – क्या रवि हमेशा से तुम्हारे साथ ताश खेलता था...

अमन – नहीं साहेब पहले रवि का धंधा अच्छा नहीं चलता था , तब नहीं आता था , फिर बहुत पैसा कमाया क्योंकि धंधा अच्छा चलने लगा उसका , अब तो बहुत अच्छ है इसीलिए तफरी के लिए कभी कभी आ जाया करता है...

नरेश – उसकी पत्नी को जानते थे...

अमन – जानू गा क्यों नहीं , मै तो उसकी शादी में भी गया था , शादी के वक्त रवि एक तरह से बहुत गरीब था मैने और दोस्तो ने उसे बहुत मना किया शादी न करे लेकिन रवि नहीं माना , हमेशा से जिद्दी है...

नरेश – तुमने रवि को शादी से मना क्यों किया...

अमन – नलिनी के परिवार को मै जनता था , उसके मां बाप दोनों खराब थे , इसी शहर के है , उसके बाप का कोई खास काम नहीं था , ऊपर से बेवकूफ था , तोड़ बहुत जो पैसे कमाता था उसे शराब में उड़ा देता था , फिर चोरी चमरी करता था कई बार पकड़ा गया जेल भी गया , ऊपर से नलिनी को मा भी बदनाम थी , बस्ती में रहने से अच्छे घरों की लड़की भी बढ़ने हो जाती है , नलिनी का बाप जब जेल में था , तब सुन है उसकी मां देर रात तक अपने यार के साथ हंसी मजाक किया करती थी , इसीलिए हमने रवि से कहा शादी न करे , लेकिन वो नहीं माना , क्योंकि वो गरीब था उसने सोचा बस्ती की लड़की ही उसके लिए सही होगी...

नरेश – हम्मम , अच्छा रवि और उसकी पत्नी के आपसी संबंध अच्छे नहीं थे क्या तुम्हे मालूम है...

अमन – धंधा करने के दौरान रवि ने पैसे बहुत कमाया , उसका धंधा अच्छे से जमाया , घर खरीदा , जैसे जैसे उसका धंधा जन्म लगा , रवि का उसकी पत्नी का आपसी संबंध में तनाव आने लगा , तब उसे ऐसा लगा उसे ये शादी नहीं करनी चाहिए थी , घर से बाहर रहने लगा , हमारे यहां रात भर उसके रहने की यही वजह है...

नरेश – और इसी वजह से रवि ने अपनी पत्नी से तंग आ कर रवि ने अपनी पत्नी का खून कर दिया...

अमन – मै ये नहीं मान सकता साहेब , रवि ऐसा आदमी बिल्कुल नहीं है , उसने जिंदी में काफी दुख झेले है लेकिन उसका मन बहुत उदार है , उसमें सहम शक्ति है , वो खुद दुख झेल लेगा लेकिन किसी और को दुख कभी नहीं दे सकता...

नरेश – लेकिन रात रवि अपनी पत्नी की लाश को तीन साथियों के साथ ले जाता नजर आया है मुझे...

अमन – बिल्कुल नहीं रात 8 से 12 : 30 बजे तक रवि हमारे साथ था , जैसा आपने खुद आकर देखा...

नरेश – रवि का ससुर आज कल कहा है...

अमन – कुछ कह नहीं सकता , करीबन 2 साल पहले रवि का ससुर जेल से छूत के यहां आया था , तब नलिनी की मां गुजर चुकी थी , अपनी लड़की दामाद के साथ कुछ दिन रहा , फिर एक दिन रवि के साथ उसका कुछ झगड़ा हो गया था , उसके बाद वो यहां से चला गया , क्या मालूम उसकी उम्र भी हो चुकी थी जेल जा जा के उसका शरीर टूट चुका था , हो सकता हो वो गुजर गया हो...

नरेश – ठीक है तुम जाओ , (हवलदार से) आदित्य को भेजो...

नरेश साथ बैठते ही...

नरेश – तुम्हारे कोयले और लकड़ी के टाल काफी अच्छा कारोबार है फिर तुम जूंवा खेलने क्यों जाते हो....

आदित्य – साहेब मै , रवि और अमन बचपन के दोस्त है सुख दुख में हमेशा एक दूसरे के साथ रहे है , थोड़ा मन बहलाने , गपशप मरने हम अक्सर हर शनिवार को मिलते है , जूंवा खेलने का एक बहाना है साहेब...

नरेश – अपनी ये बकवास बंद करो , रवि ने अपनी पत्नी का कत्ल किया है इसमें तुम्हारे और तुम्हारे दोस्तो का पूरा हाथ है , रात के अंधेरे में नलिनी की लाश को जला देना चाहते थे , लेकिन तुमलोग पकड़े गए...

आदित्य – कहा पकड़े गए और किसान हमे पकड़ा साहेब , रवि ने जब अपनी पत्नी का खून ही नहीं किया तो लड़ उठाने का सवाल कहा से उठता है , ये तो सरा सर झूठा इल्जाम है साहेब...

नरेश – रवि और नलिनी में नहीं बनती थी ये तुम्हें मालूम है...

आदित्य – जी मुझे नहीं मालूम है , मै एक बार ही उनके घर गया था बस बाकी रवि से मेरी मुलाकात अमन के घर में अक्सर होती थी...

नरेश – रवि का कहना है कि नलिनी का चाल चलन खराब था , इस बात में तुम क्या कहना है...

आदित्य – इस बारे में मुझे नहीं पता , हा उसके पिता ने मुझसे कई बार पैसा उधार लिया कभी नहीं लौटाया...

नरेश – अच्छा ये बताओ श्मशान घाट में लकड़ी का टाल है वो तुम्हारा ही है न...

आदित्य – हा साहेब...

नरेश – (गुस्से में) तो अब सच बताओगे , क्या ये साजिश नहीं थी कि रवि आप पत्नी का कत्ल करेगा और तुम सब मिल के उसकी लाश को शमशान लेक जाओगे जलाने के लिए , जहां लकड़ी तुमने पहले से तैयार करके रखी थी...

आदित्य – ये क्या कह रहे है आप रात के 8 बजे से ही रवि हमारे साथ अमन के घर में था जहां सब मिल के जूवा खेल रहे थे , जैसा आपने देखा था....

नरेश – (गुस्से में) ठीक है अब तुम जाओ , (हवलदार से) रघु को भेजो...

रघु के आते ही...

नरेश – क्या कम करते हो...

रघु – ठेकेदारी का काम है अपना साहेब...

नरेश – रवि को कब से जानते हो...

रघु – यही कोई 5 साल से , वो अमन के घर में एक बार हमारी मुलाकात हुई थी...

नरेश – अच्छा रात में कब से जूवा खेलना शुरू किया था...

रघु – मै वहा पर साढ़े आठ बजे आया था...

नरेश – (बीच में) और फिर साढ़े ग्यारह बजे रवि के घर गए...

रघु – घर कौन गया...

नरेश – वो तुम बताओ , रवि अकेला गया था या तुम सब लोग गए थे...

रघु – हम लोग कहा गए थे हम तो अमन के घर जूवा खेल रह थे , फिर आपने आके बंद करा दिया...

नरेश – इसका मतलब रवि अकेला गया था घर में...

रघु – नहीं साहेब रवि तो वही हमारे साथ खेल रहा था , क्या रवि कहा आपको साढ़े ग्यारह बजे गया था...

नरेश – क्या तुमने रवि की पत्नी को देखा था...

रघु – जी साहेब , वो क्या है न साहेब जब पहली बार मैने उसे देखा था तो उस म आंख मारी थी...

नरेश – हम्मम , मतलब रवि की तरह तुम भी नलिनी को बदचलन बता चाहते हो...

रघु – (घबरा कर) अरे नहीं नहीं साहेब...

नरेश – (गुस्से में) बहुत बोल लिया तुम चारों ने अब जेल की हवा खाओ मिल कर...

उसके बाद मैने उन चारों को जेल में डाल दिया , अगले दिन दोपहर के वक्त वकील ने आके उनकी जमानत करवा दी , जिसके बाद चारों अपने घर निकल गए , अगले दिन मै रवि के घर पहुंचा हवलदारों के साथ तलाशी के लिए शायद कोई ठोस सबूत हाथ आजाए मेरे , लेकिन ऐसा कुछ न हुआ उल्टा रवि आराम फरमा रहा था , जैसे उसे कोई अफसोस ही न हो अपनी पत्नी की मौत का , जब मैने उससे पूछा तुम्हें कोई अफसोस नहीं हैती कहत है....

रवि – देखिए साहेब नलिनी की लाश अस्पताल में है पोस्टमार्टम के लिए जब तक वो नहीं हो जाता तब तक क्रय कर्म होने से रहा , जब मिल जायेगी तो कर दूंगा क्रिया कर्म...

नरेश – मुझे तुम्हारी पत्नी के गहने देखने है...

रवि – (अलमारी से गहने दिखाते हुए) ये रहे...

नरेश – ये सारे गहने तुमने दिए थे...

रवि – (कुछ गहने दिखाते हुए) ये वाले मैने दिए थे नलिनी को...

नरेश – ठीक है इन्हें फिलहाल मै पुलिस के कब्जे में रख देता हु बाद में वापस कर दूंगा....

तभी बाकी के हवलदार आगए तब उन्हें कुछ हाथ नहीं लगा रवि के घर से , तब मै गहने लेकर मै रवि के घर से निकल गया , दो दिन बाद मै डॉक्टर से मिला तब उन्होंने मुझे नलिनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी , तब डॉक्टर ने बताया नलिनी की शरीर पर किसी तरह का कोई घाव नहीं था , लेकिन गले की एक खास नली जिसे थायराइड काटीनस कहते है , उसपर वार करने से इंसान की मौत तुरंत हो जाती है , डॉक्टर की बात सुन मुझे बड़ा अजीब लगी ये बात तब , डॉक्टर ने आगे बताया मारने का ये तरीका ज्यादा तर मिलिट्री वालो को सिखाया जाता है...

जिसके बाद मैने रवि के बारे में आगे की जांच पड़ताल की , तो पता चला रवि का कपड़ों का व्यापार है ज्यादा तर मिलिट्री में सप्लाई देता था वर्दी बना के , वही से रवि की दोस्ती मिलिट्री के एक अफसर से हुई थी , जिसके साथ रवि का उठना बैठना होता रहता था , यहां तक रवि अपनी पत्नी को लेके कई बार गया था उनके घर , तभी मुझे यकीन हो गया के रवि ने ही नलिनी का कत्ल किया है , तभी मै हवलदारों के साथ रवि के घर जा पहुंचा , मैने देखा रवि के घर का दरवाजा खुला हुआ है , जैसे ही कमरे में नजर पड़ी तो देख के हैरान हो गया में , क्योंकि रवि की लाश जमीन में पड़ी हुई थी...

और जब रवि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो पता चला नलिनी की तरह रवि की मौत भी थायराइड काटीनस के टूटने की वजह से हुई है , मै जिसे मुजरिम समझ रहा था वो खुद ही शिकार हो गया , (रोमेश और सूरज से) तो ये है वो केस....

नरेश – (मुस्कुरा के रोमेश सक्सेना से) भाई एक बात तो पक्की है कोनी एक ही इंसान है , लेकिन मै उसे आज तक पकड़ नहीं पाया , तो आप बता सकते है खूनी कौन हो सकता है....

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुराते हुए) आप कह रहे है तो चलिए एक कोशिश करता हूँ मै , लेकिन उससे पहले आपको मेरे कुछ सवालों का जवाब देना होगा...

नरेश – (हस्ते हुए) जवाब मालूम होगा तो जरूर दूंगा...

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुरा के) अच्छा ये बताइए कि रवि का वारिस कौन है....

नरेश – रवि ने कोई वसीयत नहीं बनाई थी , उसकी एक चचेरी बहन है उसे ही सब मिला , वो बेचारी गरीब विधवा औरत थी बेचारी....

रोमेश सक्सेना – हम्मम , अच्छा जिस रात रवि का खून हुआ था उस रात उसके तीन दोस्त कहा थे...

नरेश – वो तीनों रात भर अमन के घर में थे , क्योंकि नलिनी की मौत के बाद मैने अपने गुप्त चर लगाए थे उनके पीछे , उनकी गति विधियों से जो पता चल उस हिसाब से वो खोनी नहीं होस सकते....

रोमेश सक्सेना – हम्ममम , और जिस समय रवि का खून हुआ था उस वक्त उसका ससुर , क्या नाम था उसका धरम , वो कहा था पता लगाया आपने...

नरेश – हा पता लगाया उसका , उस वक्त धरम शहर से कुछ 50 मिल दूर था गांव में , पेचिश की वजह से खाट पकड़े हुए था , कही आने जाने लायक नहीं था , और फिर जिस तरह से उनका खून हुआ है ऐसा कौशल वो कैसे जान सकता है...

रोमेश सक्सेना – अच्छा एक बात बताइए , आपको क्या लगता है नलिनी का चरित्र खराब था...

नरेश – नहीं बिल्कुल नहीं , मै यकीन के साथ कह सकता हूँ , नलिनी अच्छे स्वभाव की लड़की थी...

रोमेश सक्सेना – (सोचते हुए) हम्मम , लेकिन उसका खून तो गंदा था , उसकी मां , क्या नाम था उसकी मां का...

नरेश – मेघा....

नरेश का जवाब सुन रोमेश सक्सेना हल्का मुस्कुराते हुए कुर्सी में टेक लगा के बैठ गया तब...

नरेश – (मुस्कुरा के) और कुछ जानना चाहते है आप...

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुरा के) और कुछ जानने की जरूरत ही नहीं है अब...

नरेश – कुछ समझ में आया आपको...

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुरा के) समझने के लिए और कुछ बाकी ही नहीं...

नरेश – मतलब सब समझ में आगया आपको....

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुरा के) बिल्कुल...

नरेश – (मुस्कुरा के) तो बताए नलिनी का खून किसने किया....

रोमेश सक्सेना – उसके पति रवि ने....

नरेश – तो रवि को किसने मारा....

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुरा के) नलिनी के पिता ने...

नरेश – (हस्ते हुए) नलिनी के बाप ने , अरे धरम तो उस वक्त शहर से 50 मील दूर गांव में था....

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुरा के) ना ना , मै धरम की बात नहीं कर रहा हूँ , मै नलिनी के पिता की बात कर रहा हूँ , नलिनी के जन्म दाता की...

नरेश – (हड़बड़ाते हुए) जनम देने वाला पिता , आप किसकी बात कर रहे....

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुरात हुए) किसकी बात कर रहा हूँ , ये तो मुझे मालूम चल गया है नरेश सर , आप मुझे ये कहानी न बताए तो अच्छा है...

रोमेश सक्सेना की बात सुन नरेश के चेहरे पर घबराहट और डर दिखने लगा इससे पहले आगे कोई कुछ बोलता तभी मानव गुप्ता आ गए वहा पर तब...

मानव गुप्ता – (मुस्कुराते हुए) अरे भाई अभी तक यही महफिल लगी हुई है आप सबकी , चलिए खाना खा लीजिए , (नरेश से) आईये नरेश सर मै आपको ले चलता हूँ....

मानव गुप्ता की बात सुन नरेश चढ़ी का सहारा लेके कुर्सी से उठते हुए....

नरेश – (जल्दी बाजी में) मुझे भूख नहीं है , चलता हूँ कुछ जरूरी काम है मुझे....

नरेश तुरंत निकल गया पार्टी से बाकी सब खाने को चले गए साथ में रोमेश और सूरज भी खाने के बाद...

सूरज – (रोमेश से) यार एक बात समझ नहीं आई , अचानक से नरेश सर को क्या हो गया भाग क्यों गए , मामला क्या है....

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुराते हुए) हम्मम , नरेश सर की बातों से पता लगा , वो नलिनी की तरफदारी जरूरत से ज्यादा ही कर रहे थे समझे सूरज बाबू....

बात सुन सूरज हंसने लगा तब....

रोमेश सक्सेना – नलिनी का चाल चलन उसके जो सबूत देखे , हम ये नहीं कह सकते कि , वो पतिव्रता या सती सावित्री थी , वो लोगों से हस्ती बोलती थी तू तराक करके बात करती थी रात रात को अजनबियों से मिलती थी , और फिर उसका पति भी उसपर शक करता था...

लेकिन नरेश उसकी तरफदारी किए जा रहे थे , नलिनी की मां मेघा भी कोई सीता या सावित्री नहीं थी , उसका बाप भी अक्सर जेल में रहता था , और जानते हो नरेश की बात से मुझे ये समझ आगया कि जब उनकी पुलिस की नौकरी लगी तो उसकी पोस्टिंग यही हुई थी , धरम तो पेशेवर चोर था...

और नरेश जरूर उसे पकड़ने के चक्कर में रहे होगे , अक्सर धरम के घर भी आना जाना लगा होगा और उसी बीच नरेश का नैन मटक्का होगया मेघा से , उस वक्त नरेश भी जवान था , चंचल मेगा के मोह जाल में फंस गया , जब धरम जेल की हवा खा रहे थे उस बीच मेघा और नरेश अपने आपसी संबंध में आगे बढ़ गए , और करीबन दो साल बाद जब नरेश का ट्रांसफर हुआ , तब उन्हें पता चला होगा मेगा के लड़की होने का , यहां से जाने के बाद मेगा की खोज खबर रखते थे , अब नरेश ने शादी तो की नहीं , इस दुनिया में केवल नलिनी ही उनके खून की रिश्तेदार थी...

अपनी ड्यूटी के आखिरी दिनों में नरेश यही आगए ,एगा गुजर चुकी थी , नलिनी को शादी हो चुकी थी , और जैसा कि नरेश ने बताया उन्हें आदत थी आधी रात को अकेले गस्त के लिए निकल जाते थे , और नलिनी से मिलते भी थे , साथ में उपहार के तौर पर नलिनी को जेवर देते थे , मै ये तो नहीं कह सकता कि नरेश ने अपना परिचय नलिनी दिया था के नहीं...

लेकिन मुझे लगता है कि नलिनी सब कुछ जानती थी , अब कत्ल की बात करे तो कुछ ऐसा हुआ होगा , की जिस रात नलिनी का कत्ल हुआ उस रात भी नरेश गश्त के बहाने नलिनी से मिलने निकले होगे , लेकिन उससे पहले रवि भी जब अपने दोस्तो के साथ बैठा था तब वो बीच में उठ के अपने घर गया होगा , और जैसे ही घर के अन्दर गया रवि , तभी उसने पीछे से नलिनी की गर्दन में वार किया होगा जिस वजह से थायराइड काटीनस टूटने के कारण नलिनी को मौत हो गई...

जिसके बाद रवि ने अपने दोस्तो की मदद मांगी , चुकी सर्दी का वक्त लाइट तक नहीं थी इलाके में ऊपर से आधी रात का वक्त , गहरे सन्नाटे में चारों मिल।के नलिनी की लाश को ठिकाने ले जा रहे थे तभी बीच रस्ते में नरेश ने देख लिया , उसके बाद नरेश ने चारों से पूछ ताछ कि लेकिन सिर्फ दिखावे के लिए...

क्योंकि उन्होंने फैसला कर लिया था बदला लेने का , लेकिन नरेश ये बात जानना चाहता था आखिर वो कौन सा तरीका था , शरीर पर बिना किसी घाव के नलिनी की मौत हुई , और ये बात पोस्टमार्टम में साबित हो गई साथ में नरेश को तरीका भी मिल गया , बिना किसी हथियार के इस्तमाल के रवि को मारने का जिससे कोई सबूत नहीं मिले किसी को , उसी रात को नरेश ने रवि के घर जाके उसका खून वैसे ही किया जैसे नलिनी का हुआ था , और दिखावे के लिए अगले दिन अपने साथ हवलदारों को साथ ले गए जिससे ऐसा लगे पुलिस पूछ ताछ के लिए आई थी रवि से मिलने लेकिन रवि की लाश मिली.....

सूरज – यहां तक तो समझ आगया यार लेकिन तुम ये कैसे कह सकते हो , की नलिनी ही नरेश की बेटी है....

रोमेश सक्सेना – (हस्ते हुए) इसके लिए मैने एक चाल चली बात के बीच मैने नरेश से नलिनी की मां का नाम पूछ लिया और नरेश ने मेघा का नाम लेके जवाब तुरंत दिया , अब सोचने वाली बात ये है कि नरेश , नलिनी की मां का नाम कैसे जानते थे , क्योंकि मेघा को मरे 10 साल हो गए थे , और केस के बारे में बताते वक्त नलिनी की मां का नाम बताया भी नहीं था किसी ने भी , फिर नरेश को कैसे पता चला नाम ,उसी बीच नरेश को एहसास हो गया बातों बातों में कुछ गलती कर बैठे है , उनकी शकल देखते ही मै समझ गया मेरी चाल सफल रही....

बोल के दोनों हंसने लगे तब....

सूरज – अच्छा एक बात तो बताओ तुम चाहते तो नरेश को अभी जेल में डलवा सकते थे , फिर तुमने ऐसा क्यों नहीं किया....

रोमेश सक्सेना – (मुस्कुराते हुए) नरेश बेचारा वैसे भी अकेला है , रिश्ते नाते डर कोई है नहीं उनका , ऊपर से लाठी के सहारे चलते है , उनका अकेले जीवन ही उनकी सबसे बड़ी सजा है , ऐसे में अब और क्या सजा दी जाए उन्हें , अकेले पछताने के सिवा कुछ नहीं कर सकते है नरेश अब , और तुम भी जाग जाओ सूरज बाबू कर लो शादी वर्ना अकेले ऐसी हालत न हो जाए तुम्हारी भी....

इसका साथ दोनों की हसी गूंजने लगी....

समाप्त
THE END
Suspense story.
Shuruat me laga ki koi hawaldar hoga katil fir laga ki uska koi dost hoga, par romesh ne beech me jaise jaan boojh kar galat sawal kiya jiska sahi jawab mila or vahi par unhe shaq ho gaya. Vaise reader ko vaha bhi pata nahi chala jab tak ki khud romesh babu ne nahi bata diya suraj ko.
Bahut achhi suspense kahani hai.
 
  • Like
Reactions: Raj_sharma

JTN

Active Member
1,045
1,308
158
मृत्यु रहस्य की चाबी



दिल्ली शहर के 1956 , xxx एरिया में कई घर है जिसमें से एक घर है हमारे रोमेश सक्सेना का , अब बताने की जरूरत नहीं है रोमेश सक्सेना के बारे में , सब पहले से जानते है ये जाने माने मशहूर Detective है , अपने जीवन काल में इन्होंने कई केस को सॉल्व किया , हा गलती इनसे भी होती है , कभी मुजरिम बच के निकल गया हो , उसके बावजूद केस चाहे जैसा भी हो उसकी सच्चाई को सामने लाके रहते है , हमारे रोमेश बाबू , खेर आज रोमेश बाबू अपने घर में बैठे है जहा इनकी जीवन संगिनी , श्री मति रागिनी सक्सेना जी आज अपने पति के सामने अपनी फरमाइश की जिद को लेकर बैठी है , चलिए देखते है.

रागिनी – (गुस्से में रोमेश को चाय का कप देते हुए) ये लीजिए चाय पी लीजिए.

रोमेश सक्सेना – (चौंकते हुए) क्या बात है आज हमारी श्री मति जी , इतना गुस्से में क्यों है.

रागिनी – (रोमेश को घूरते हुए) होना क्या है , आपको जब जासूसी करने से फुर्सत मिले तब तो समझोगे आप.

रोमेश – (कुछ न समझते हुए) अरे धर्मपत्नी जी , आखिर आपके रूठने का कारण क्या है बताए तो सही.

रागिनी – (रोमेश के बगल में बैठते हुए) अगले हफ्ते क्या है.

रोमेश – क्या है अगले हफ्ते , कोई मेहमान आरहा है क्या , या मेरे ससुर वाले आरहे है.

रागिनी – (गुस्से से घूरते हुए) पुलिस वालो के सामने तो बड़े जासूस बनते हो आप , इतना भी नहीं पता अगले हफ्ते क्या है , अरे बोलने से पहलेे कम से कम ये तो सोच लेते , अगले हफ्ते से दिसंबर का महीना शुरू हो रहा है.

रोमेश – (हस्ते हुए) ओह हो , वो दिन मैं कैसे भूल सकता हूँ , मेरी धर्मपत्नी जी , 1 दिसंबर को ही तो हम एक से दो हुए थे.

रागिनी – चलो याद तो आया आपको.

रोमेश – (मुस्कुराते हुए) भूला कौन था , खेर लेकिन तुम क्यों नाराज हो ये बताओ.

रागिनी – पिछले साल आपने वादा किया था , इस साल हमारे शादी की सालगिरह में हम कश्मीर घूमने चलेंगे , अगले हफ्ते हमारी शादी की सालगिरह है लेकिन आपने अभी तक कश्मीर जाने की कोई तैयारी नहीं की.

रोमेश – (मुस्कुराते हुए) अरे मेरी धर्मपत्नी जी पता है आपको , कश्मीर जाने के लिए से कम एक हजार चाहिए.

रागिनी – (मू बना के) वो मुझे नहीं पता , मुझे कश्मीर घूमने जाना आपके साथ वो भी , अगले हफ्ते बाकी कैसे होगा वो आप जानो.

इससे पहले रोमेश आगे कुछ बोलता तभी दरवाजे पर किसी के खट खटाने की आवाज आई , जिसे सुन के.

रागिनी – मै देखती हु.

बोलते हि रागिनी ने दरवाजा खोला तो सामने दो आदमी खड़े थे तब.

रागिनी – अरे सूरज भैया आप.

पहला आदमी – (हाथ जोड़ के) प्रणाम भाभी कैसे है आप.

रागिनी – मै अच्छी हूँ भईया , (सूरज के साथ दूसरे आदमी को देख सूरज से) ये कौन है भईया.

सूरज – इन्हें रोमेश बाबू से मिलना है.

रागिनी – आप लोग बैठिए मै इन्हें बुला के लाती हु.

कुछ देर में रोमेश कमरे से निकल के हाल में आता है जहां सूरज और दूसरा आदमी बैठे होते है तब.

रोमेश – (सूरज को देख मुस्कुराते हुए) अरे भाई क्या बात है , आज सुबह सुबह इंस्पेक्टर साहब हमारे द्वारे , सब खैरियत तो है न.

सूरज – (हस्ते हुए) भाई हम तो खैरियत से है , बस इनसे मिलवाने आए थे आपको , कुछ काम है इन्हें आपसे.

रोमेश – (दूसरे आदमी को देख) तो बताइए क्या काम है आपको.

दूसरा आदमी – (अपनी जेब से 5000 रुपए रोमेश के हाथ में देते हुए) ये रही आपकी फीस , मेरा काम कुछ अजीब सा है , इसीलिए अगर मेरी मौत हो जाए , तो मेरी मौत क्यों और कैसे कि इसके बारे में आप तहकीकात करेंगे , अब मरने के बाद ये मुमकिन नहीं होगा इसीलिए पैसे मै पेजगी दे रहा हूँ , गिन लीजिए पूरे 5000 है.

रोमेश – (दूसरे आदमी को गौर से देखते हुए) आपसे कुछ सवाल करूंगा , लेकिन आपका काम करूंगा कि नहीं ये आपके जवाब पर निर्भर करेगा , और तब तक (5000 रुपय आदमी के हाथ में वापस देते हुए) ये रुपए अपने पास ही रखो तो ज्यादा अच्छा रहेगा.

दूसरा आदमी – (मुस्कुरा के) ठीक है पूछिए सवाल , हो सकता है आपके सारे सवालों का जवाब शायद ना दे सकू लेकिन मेरा काम आप ही करेंगे.

रोमेश – हम्मम , आपका नाम क्या है.

आदमी – ओह माफ करिएगा मैने तो अपना नाम ही नहीं बताया आपको , जी मेरा नाम प्रमोद कुमार है.

रोमेश – अच्छा , कहा रहते है आप.

प्रमोद – जी यही दिल्ली में रहता हु मै **** एरिया में.

रोमेश – क्या काम करते है आप.

प्रमोद – कुछ नहीं.

रोमेश – (प्रमोद को गौर से देखते हुए) क्या पढ़ते है आप.

प्रमोद – (मुस्कुरा के) पढ़ता था कभी , लेकिन अब तो सब छोड़ छाड़ दिया.

रोमेश – (मुस्कुरा के) लेकिन कुछ तो करते होगे , कपड़े देख के ऐसा लगता है अच्छे खाते पीते घराने से ताल्लुकात रखते है आप.

प्रमोद – (हस्ते हुए) ठीक कहा आपने खाता पिता घराना , आपने **** एरिया में रानी एंपोरियम का नाम तो सुना होगा आपने.

रोमेश – हा सुना है काफी बड़ा डिपार्टमेंटल स्टोर है.

प्रमोद – सही कहा आपने , मै उसक भागीदार हूँ.

रोमेश – हम्ममम भागीदार , तो दूसरे भागीदार कौन है.

प्रमोद – नहीं दूसरे नहीं , सिर्फ एक गगन कुमार , नाम के आदमी है , मेरे पिता जी.

रोमेश – हम्मम ये एंपोरियम तो काफी समय से है.

प्रमोद – जी बिल्कुल , इसकी स्थापना मेरे मां के पिता जी ने की थी , फिर इसमें मेरे पिता जी भागीदार बन गए , फिर मेरे नाना के मरने के बाद मै भागीदार बन गया , मेरी मां , मेरे नाना की इकलौती संतान थी और मैं मेरी मां का इकलौती संतान हूँ.

रोमेश – हम्मम समझ गया , आप शराब पीते है क्या.

प्रमोद – (मुस्कुरा के) बु आ रही है क्या.

रोमेश – (मुस्कुरा के) आपकी उम्र क्या होगी.

प्रमोद – जी इक्कसवीं चल रहा है , अरे मै आपको अपनी जन्म तिथि बात देता हु , 7 अगस्त , सन 1935.

रोमेश – आप कितने दिनों से पी रहे है.

प्रमोद – जब मै 18 साल का था तभी से पी रहा हूँ.

रोमेश – रोज पीते है.

प्रमोद – हा जब मन करता है तो पी लेता हु.

प्रमोद की बात सुन रोमेश के साथ सूरज भी गौर से देखने लगता है प्रमोद को तब , प्रमोद आगे बोलता है.

प्रमोद – लेकिन आपको देख के लगता है , आप इस सुख से वंचित है.

रोमेश – (मुस्कुरा के) शराब से जुड़ी हुई दूसरी बुराइयों का शौक है आपको.

प्रमोद – (हस्ते हुए) अरे बुराई क्यों कह रहे है आप रोमेश बाबू , इतनी लोक प्रिय चीज क्या बुरी हो सकती है.

रोमेश – हम्मम कितनी लड़कियों को बिगड़ा है.

प्रमोद – कभी गिनती नहीं रखी.

रोमेश – हम्मम , आपने कहा आपकी मौत अचानक हो सकती है , क्या आप डर है कोई आपका खून करेगा.

प्रमोद – जी.

रोमेश – जिन लड़कियों को बिगड़ा है उनके कोई सगे संबंधी.

प्रमोद – हम्मम , हो सकता है.

रोमेश – हम्मम किसी पर कोई शक है...

प्रमोद – (चेहरे पर थोड़ी सख्ती लाके) शक तो है लेकिन नाम नहीं लूंगा.

रोमेश – (मुस्कुरा के प्रमोद को देखते हुए) अपनी जान बचाने की कोशिश भी नहीं करेंगे.

प्रमोद – देखिए कोशिश करने से कोई फायदा नहीं होगा , बाकी मेरा ख्याल है मैने आपके सारे सवालों का जवाब दे दिया है , अभी मै चलता हूँ (हल्की आंख मार के) रात को एक जरूरी अपॉइंटमेंट है.

सोफे से उठ कर रोमेश को 5000 देते हुए.

प्रमोद – ये आप रखिए , चलता हूँ.

रोमेश – अपनी लोक प्रियता बढ़ाने जा रहे है क्या आप.

प्रमोद – (हस्ते हुए) यही समझ लीजिए.

रोमेश – अच्छा अगर आपके खून हो जाए तो हमें कैसे पता चलेगा.

प्रमोद – अखबार से पता चल जायेगा आपको , वैसे आप चाहे तो खुद भी पूछ ताछ कर सकते है , आपको ज्यादा ईंट नहीं करना पड़ेगा.

हस्ते हुए निकल गया प्रमोद घर से उसके जाते ही , रागिनी कमर से निकल के रोमेश के दम आई तब.

रागिनी – (मुस्कुराते हुए) आप एक हजार की लिए सोच रहे थे न , देखिए 5000 मिल गए.

रोमेश – ये तो सब ऊपर वाले की मर्जी है , अब कश्मीर जाने की तैयारी करो , (सूरज से) भाई तुम भी कुछ दिन के लिए छुट्टी ले लो अगले हफ्ते हमारे साथ तुम और भाभी भी जारहे है कश्मीर.

सूरज – अरे रोमेश यार तुम.

रोमेश – (बीच में टोक के) वो सारी बाते बाद में , पहले ये बताओ , लड़का तुम्हें मिला कहा और कैसा लगा तुम्हे.

सूरज – यार मै पुलिस स्टेशन में था , तभी ये लड़का आया , और आते ही तुम्हे बारे में पूछने लगा , वो तो मै यूंही तुमसे मिलने आ रहा था , इसीलिए ले आया इसे , बाकी रस्ते में नाम बताया था इस मुझे और काम के लिए बोल रहा था कि रोमेश जी को बताऊंगा काम , बाकी लड़का इतना बेहूदा , मूफट मैने आज तक नहीं देखा.

रोमेश – हम्मम मैने भी , लेकिन ताजुब की बात ये है इसे अपनी जान की परवाह नहीं , लेकिन अपनी मौत की तहकीकात करवाना चाहता है.

बात सुन सूरज हंसता रहा तब.

रागिनी – कश्मीर तो घूमने चल रहे है , लेकिन वहा तो मोटे कंबल की जरूरत पड़ेगी.

रोमेश – हा तो.

रागिनी – (मुस्कुरा के) हा तो , मेरे और लक्ष्मी के लिए ओवर कोट , बाकी साथ में तीन कम्बल.

रोमेश – हम्मम ठीक है , चलो चलते है लेने.

सूरज – लेकिन कहा.

रोमेश – रानी एंपोरियम.

शाम के वक्त सूरज और रोमेश घर आते है तब.

रोमेश – (रागिनी को गर्म कंबल और ओवर कोट का लिफाफा देते हुए) ये लो आ गए कंबल और ओवर कोट.

रागिनी – (मुस्कुर के) कहा लाए.

सूरज – अरे भाभी वो सुबह जो लड़का आया था मेरे साथ उसी की दुकान से लाए है , और आपको पता है 20 % का डिस्काउंट दिया हमें.

रागिनी – अरे वाह बहुत अच्छा लड़का है.

रोमेश – (बीच में) हा और जल्द उसका खून नहीं हुआ तो 2 दिन में रानी एंपोरियम का दिवाला निकल जायेगा.

सूरज – (हस्ते हुए) नहीं नहीं यार ऐसा मत कहो , जितना मै उसे खराब समझ रहा था उतना वो है नहीं.

रोमेश – हम्मम ठीक है , कल सुबह उसके घर का मुआयना करते है.

सूरज – ठीक है.

रोमेश – और है कल ड्यूटी जाते वक्त छुट्टी की अर्जी डाल देना , और लक्ष्मी को बोल देना तैयारी के लिए.

अगले दिन रोमेश और सूरज निकल पड़ते है प्रमोद के घर का मुआयना करने को , रस्ते में जा रहे थे , प्रमोद के घर का पास पहुंच थे तभी एक आदमी की आवाज आई.

आदमी – अरे रोमेश बाबू.

पलट के आदमी को देख.

रोमेश – अरे नंदू तुम , तुम यहां इतनी दूर क्या करने आए हो.

नंदू , रोमेश को अपनी जेब रामपुरी छूरी दिखा के वापस जेब में रख देता है तब.

रोमेश – इरादा क्या है.

नंदू – (धीरे से कान में) आपको बता देता हु किसी को बोलिएगा नहीं , (प्रमोद के घर पे इशारा करके) वो सामने वाले घर में एक लौंडा रहता है उसकी मरम्मत करनी है.

रोमेश – क्यों.

नंदू – वजह है रोमेश बाबू , लेकिन आप इस मुहल्ले में क्या कर रहे है.

रोमेश – प्रमोद को पहचानता हूँ , क्यों उसी की पिटाई करना चाहते हो.

नंदू – (चौक के) अरे रोमेश बाबू आप प्रमोद को जानते हो.

रोमेश – कोई खास पहचान नहीं है , लेकिन तुम उसे क्यों पीटना चाहते हो , उसने तुम्हारा कुछ बिगड़ा है क्या.

नंदू – बहुत लंबी दस्तान है रोमेश बाबू , अगर आप जानना चाहते है तो पास में , कल्लू पहलवान का अखाड़ा है , आप मेरे साथ वही चलिए मै सब बताता हो आपको.

चुकी नंदू , रोमेश के एरिया में रहता था साथ में रोमेश अच्छे से जानता था नंदू को इसीलिए बिना झिझक के रोमेश और सूरज निकल गए नंदू के साथ , एक घर की तरफ आते है जहां पर घर के बाहर , 4 लोग लूंगी पहने कसरत कर रहे थे , उन्हीं के पास बने एक बड़े से पेड़ के नीचे एक तगड़ा सा आदमी बैठ के हुक्का पी रहा होता है , उसके पीछे एक आदमी और होता है जो उस तगड़े आदमी के पैर दबा रहा होता है तब , नंदू अपने साथ रोमेश और सूरज को उनके सामने ले जाता है तब.

नंदू – (रोमेश और सूरज से तगड़े आदमी का परिचय करता है) ये है कल्लू पहलवान इस अखाड़े के उस्ताद , और कल्लू उस्ताद ये है रोमेश बाबू.

कल्लू उस्ताद – (मुस्कुराते हुए बीच में) अच्छे से जानता हूँ इनको ये रोमेश सक्सेना है , बस फर्क इतना है हम शरीर से भारी है और रोमेश बाबू दिमाग से.

बोलते ही वहा पर सबकी हंसी गूंज गई तब.

कल्लू पहलवान – बैठो रोमेश बाबू , भाई हमारी तो किस्मत खुल गई दिल्ली के जाने माने मशहूर Detective रोमेश बाबू हमारे द्वारे आए , तो बताए रोमेश बाबू क्या सेवा कर सकता हूँ मै आपकी.

रोमेश – (हाथ जोड़ के) इतनी इज्जत अफजाई के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया कल्लू पहलवान जी , असल में मेरे आने की वजह प्रमोद है , वैसे तो मेरी उसकी एक दिन की पहचान है , लेकिन मुझे पता चला आप सब उसकी पिटाई करना चाहते है , मै यही जानना चाहता हूँ ऐसी क्या बात है...

कल्लू पहलवान – रोमेश बाबू असल में वो लौंडा छठा हुआ बदमाश है , मोहल्लों के आदमियों ने शिकायत की है , की वो लड़कियों को छेड़ता है , ये शरीफों का मुहल्ला है उसकी गुंडा गाड़ी नहीं चलने देंगे हम.

रोमेश – हम्मम समझ सकता हूँ मै आपकी बात को , बस मेरी एक गुजारिश है कल्लू पहलवान जी , प्रमोद को सबक सिखाने वाली बात अलग है , लेकिन बस खून खराबा न हो , यही मेरी गुजारिश है आपसे.

नंदू – (बीच में) इसीलिए तो कल्लू उस्ताद ने ये जिम्मा मुझे सौंपा है रोमेश बाबू , क्योंकि मै इस मुहल्ले का हूँ नहीं , ताकि मै अच्छे से उसकी मरम्मत करू और चुपके से खिसक जाओ.

नंदू की बात सुन सब हंसने लगे जिसके बाद कल्लू पहलवान से विदा लेके निकल गए रोमेश और सूरज , अगले दिन सुबह सुबह सूरज तेजी से रोमेश के घर आता है तब.

सूरज – (रोमेश को आज का अखबार देते हुए) वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है.

रोमेश – क्या हुआ आज.

सूरज – कल रात को प्रमोद का खून हो गया , तहकीकात चल रही है.

रोमेश – हम्मम मुझे मालूम था वो ज्यादा देर बचने नहीं वाला , लेकिन इतनी जल्दी , खेर मै तैयार होके आता हूँ , अभी निकलते है हम.

कुछ देर बाद दोनों प्रमोद के घर के अन्दर जा रहे होते है तभी घर के दरवाजे के पास नीचे जमीन में खून का निशान होता है जिसे देख.

सूरज – (रोमेश से) प्रमोद की लाश यही मिली थी हमें , और एक मजे की बात देखोगे..रोमेश – क्या.

सूरज – अपन पीछे दरवाजे पर देखो नीचे से.

दरवाजे के नीचे देखता है तब.

रोमेश – ये तो रूप हरि कागज है , जो सिगरेट के पैकेट में होता है , गोन से चिपकाया है अजीब बात है ये तो.

जिसके बाद दोनों घर के अन्दर जाते है , जहां एक तरफ हाल में रखे सोफे पर प्रमोद के पिता गगन कुमार अकेले बैठे हुए थे गुम सूम से उसके पास जाके.

रोमेश – (आदमी को प्रणाम करते हुए) माफ कीजिए आपको परेशान करने आए है , मेरा नाम रोमेश सक्सेना है और ये सूरज है , इन्हें तो आप जानते होगे.

गगन – हा जानता हूँ इन्हें , ये पुलिस वाले है कल रात में आए थे , (रोमेश से) आपको कोई काम था क्या , आप तो जानते है मेरे घर में एक घटना हो गई है.

रोमेश – जी मै जनता हूँ , प्रमोद की मौत हो गई है , परसो ही मेरी उनसे मुलाकात हुई थी , उन्होंने मेरे सामने एक प्रस्ताव रखा था.

गगन – कैसा प्रस्ताव.

रोमेश – यही की अगर उनकी मौत अकस्मात हो जाए तो मै तहकीकात करूं.

गगन – आप बैठिए पहले , अब बताइए मै क्या कर सकता हूँ आपके लिए.

रोमेश – कल रात प्रमोद की मौत कैसे हुई कुछ बता सकते है आप.

गगन – कल रात लगभग 1 बजे मै अपने कमरे में सोया हुआ था , अचानक जोर की आवाज से मेरी नींद खुल गई , लगा आवाज कमरे से बाहर से आई है.

रोमेश – वैसे आपका सोने का कमरा कौन सा है.

गगन – ऊपर वाले कमरे में , मै कमरे में अकेला सोता हु , मेरी पत्नी बगल वाले कमरे में सोती है.

रोमेश – और प्रमोद कहा सोता था.

गगन – प्रमोद तो यही नीचे वाले कमरे में सोता था , जिसमें ताला लगा हुआ है , ठीक उसके ऊपर वाले कमरे में मेरी पत्नी सोती है.

रोमेश – हम्ममम , और कौन कौन रहता है यहां.

गगन – हम दोनों के इलावा , मेरा भतीजा और भतीजी.

रोमेश – कब से रहते है आपके भतीजा और भतीजी यहां पर.

गगन – एक साल पहले उसके पिता गुजर गए , और मां तो पहले ही गुजर गई थी , तब से मेरे साथ रहते है.

रोमेश – और कोई नौकर है यहां पर.

गगन – एक नौकर है उसका नाम अशोक है.

रोमेश – हम्मम , अच्छे आगे बताइए क्या क्या हुआ था.

गगन – तो आवाज सुनते ही मै दरवाजा खोल के बालकनी में गया , नीचे अंधेरा था कुछ दिखाई नहीं दे रहा था , तभी अशोक के चीखने की आवाज सुनाई दी , मै नीचे आया देखा अशोक के दरवाजा खोल दिया है पास में प्रमोद औंधा पड़ा हुआ है , उसकी पीठ में गोली लगी हुई है , प्रमोद रोज देर से आता था , अशोक बरांडे में सोता था प्रमोद की आवाज सुनते ही वो दरवाजा खोल देता था , कल आवाज आने पर दरवाजा खोलने से पहले ही किसी ने प्रमोद पर गोली चला दी.

रोमेश – हम्मम मौत गोली से हुई फिर.

गगन – फिर पुलिस को इकतिलाह कर दिया तब सूरज बाबू आए थे.

रोमेश – प्रमोद के कमरे पर ताला कौन लगता है.

गगन – वो खुद , जब भी वो कही जाता था तो ताला लगा के जाता था कमरे में.

रोमेश – अब प्रमोद के कमरे की चाबी पुलिस के पास है.

गगन – हा.

रोमेश – अच्छा क्या पुलिस ने कमरा खोल के नहीं देखा.

गगन – नहीं.

रोमेश – ठीक है आपसे और कुछ नहीं पूछना , बाकी घर वालो से कुछ सवाल पूछने है.

गगन – ठीक है पहले किसको बुलाऊं.

रोमेश – आपके नौकर अशोक है यहां पर अभी.

तब सूरज के हंसने की आवाज आई जिसे देख.

रोमेश – क्या बात है तुम हस क्यों रहे हो.

सूरज – (हस्ते हुए) तुम खुद देख लेना तब समझ जाओगे...

फिर गगन ने अपने नौकर अशोक को बुलाया तब.

रोमेश – (अशोक से) अच्छा ये बताओ प्रमोद ने रात में जब दरवाजा खट खटाया तब तुम जगे हुए थे.

अशोक – (डर के हाथ जोड़ के) हुजूर म कुछ नहीं मालूम.

रोमेश – थोड़ा याद करने की कोशिश करो तुमने गोली की आवाज सुनी...

अशोक – (डर से हाथ जोड़ के) नहीं हुजूर मुझे कुछ नहीं मालूम.

रोमेश – हा ठीक है तुम्हे कुछ नहीं मालूम , क्या तुम्हे गोली की आवाज सुनाई दी या नहीं बताओ.

अशोक – (डर से हाथ जोड़ के) नहीं हुजूर मुझे कुछ नहीं मालूम.

बात सुन रोमेश , सूरज को देखने लगता है जो मू पर हाथ रख के हस रहा था तब.

रोमेश – (अशोक को समझाते हुए) देखो आपको डरने की जरूरत नहीं बस.

अशोक – (डर से हाथ जोड़ रोने वाली शकल बना के) हुजूर मुझे कुछ नहीं मालूम.

अशोक की बात सुन रोमेश भी आखिर कार अपने सिर पर हाथ रख के मुस्कुराने लगता है तब.

रोमेश – (गगन से) आप अपनी भतीजी को बुलायेंगे.

गगन – (अशोक से) तुम जाओ और शीला को भेज दो.

शिला के आते ही.

रोमेश – (शिला से) आपके मामा ने बताया आप एक साल से यहां रह रहे हो , पहले कहा थे.

शिला – पहले भोपाल में थे.

रोमेश – हम्मम पढ़ाई लिखाई करते हो आप.

शिला – जी.

रोमेश – और आपके भईया.

शिला – जी वो भी पढ़ाई करते है.

रोमेश – अच्छा प्रमोद की मौत का पता आपको कैसे चला.

शिला – मै सो रही थी अचानक भईया ने कमरे का दरवाजा जोर से खट खटाया मेरी नीर टूट गई.

रोमेश – तो आप रात को कमरे के दरवाजा बंद कर के सोती हो.

शिला – जी.

रोमेश – हम्मम सोने का कमरा कहा है आपका.

शिला – नीचे है , पीछे की तरफ भईया के कमरे के पास में.

रोमेश – आपने बंदूक चलने की आवाज सुनी.

शिला – नहीं.

रोमेश – हम्मम नींद टोटन के बाद क्या किया अपने.

शिला – मै भईया के साथ इस कमरे में आई , तब मामा पुलिस को टेलीफोन कर रहे थे.

रोमेश – और आपकी मामी.

शिला – मामी यहां नहीं थी , लेकिन जब ऊपर जाके देखा तो मामी अपने कमरे में बेहोश पड़ी थी.

रोमेश – अच्छा ठीक है आप जाओ , (गगन से) आपकी पत्नी (रानी) से बात हो सकती है.

इससे पहले जी कुछ बोलता तभी उसकी पत्नी गुस्से में बोलते हुए कमरे में आगई.

रानी – (गुस्से में रोमेश से) क्या चाहते है आप और क्यों आए है यहां पर.

रोमेश – (हाथ जोड़ के) शमा कीजियेगा आप , मेरा फर्ज बनता है इसीलिए आप लोग के सामने कुछ गुस्ताखी कर रहा हूँ.

रानी – लेकिन आपको किसी ने नहीं बुलाया , और आपका यहां कोई फर्ज नहीं है , जाइए आप हमें परेशान करने की कोई जरूरत नहीं.

रोमेश – क्या आप नहीं चाहती प्रमोद की हत्या के रहस्य का समाधान हो.

रानी – (गुस्से में) बिल्कुल नहीं चाहती , जो होना था हो गया , जाइए आप अब छुट्टी कीजिए.

बोल के रानी चली गई तब.

गगन – (हाथ जोड़ के) शमा कीजियेगा रोमेश बाबू , पुत्र शोक में हम जरा परेशान है क्या करे क्या न करे समझ नहीं आरहा.

रोमेश – कोई बात नहीं , अच्छा आप एक काम कीजिए शाम को आप अपने भतीजे को मेरे पास भेजिए कुछ सवाल करने है.

गगन – ठीक है.

बोल के निकल रहे थे तभी , घर के दरवाजे में आके.

रोमेश – (गगन से) गगन बाबू घर के बाहर दरवाजे पर नीचे ये सुनहरे रंग का चक्का क्यों लगाया.

गगन – ये किसने लगाया यहां पर (शिला को बुलाकर) शिला ये तुमने लगाया.


शिला – नहीं तो , लेकिन कल शाम को कुछ नहीं था दरवाजे पर.

जिसके बाद रोमेश और सूरज निकल गए वहा से रस्ते में.

रोमेश – (सूरज से) तो सूरज तुम्हारी जांच क्या कहती है इस बारे में.

सूरज – प्रमोद तो पक्का शैतान था , जिसने भी उसे मारा है , उसने उसके परिवार पर बहुत बड़ा एहसान किया है.

रोमेश – हा भाई तुम तो अपनी कार्यवाही करते रहोगे मै तो सिर्फ.

सूरज – (मुस्कुराते हुए) हा जानता हूँ , सत्य की खोज.

रोमेश – अच्छा पोस्टमार्टम रिपोर्ट कब मिलेगी.

सूरज – शाम को मिलेगी , और आगे तुम पूछो मैं पहले बता देता हु , खून किसी बड़ी बंदूक से नहीं पिस्तौल से किया गया है , गोली पीठ के बाएं तरफ से अन्दर घुसी है , और शरीर से निकली नहीं , मतलब उसके सीने के आस पास मौजूद है.

रोमेश – हम्मम गोली पीठ से घुसी है इसका मतलब प्रमोद पर गोली चलाने वाला उसके पीछे होगा.

सूरज – जिस वक्त प्रमोद का कत्ल हुआ वो घर के अन्दर था , नौकर की चीख सुन कर गगन और उसका भतीजा रजत भागे आए वहा पर , लेकिन गोली मारने वाला वहा नहीं हो सकता.

रोमेश – अच्छा क्या गोली छत से चलाई जा सकती है.

सूरज – बेशक , लेकिन छत से गोली अगर मारी जाती तो ऊपर से नीचे की तरफ आती , लेकिन यहां तो गोली पीछे से सामने की तरफ आई.

कुछ देर चलने के बाद.

सूरज – अच्छा रोमेश मै थाने चलता हूँ , शाम को टेलीफोन करूंगा.

रस्ते में रोमेश अकेला जा रहा था घर की तरफ तभी.

नंदू – रोमेश बाबू.

रोमेश – अरे नंदू तुम यहां.

नंदू – मै आपके पास आ रहा था , मुझे अभी पता चला प्रमोद का खून हो गया.

रोमेश – हा सो तो है , एक बात बताओ तुम कहा थे कल रात को.

नंदू – मै तो अपने घर में था.

रोमेश – अच्छा नंदू एक बात बताओ , प्रमोद के मुहल्ले में किसी के पास पिस्तौल हो सकती है...

नंदू – मुश्किल है रोमेश बाबू , लेकिन कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता है इस बारे में.

रोमेश – हम्मम ठीक है , अच्छा अगर कोई जानकारी मिले तो मुझे जरूर बताना.

नंदू – ठीक है.

शाम के वक्त सूरज का फोन आता है रोमेश को तब.

सूरज – मौत रात में 12 से 2 के बीच में हुई है , गोली 45 रिवॉल्वर की है और गोली बाई तरफ ES के पेयौर से नीचे से घुस कर , दिल को चीर कर दाई तरफ के फेफड़े की तीसरी हड्डी में अटकी पड़ी है , जानते हो मजे की बात गोली की दिशा नीचे से ऊपर की तरफ है , और बाहर से अन्दर की तरफ , पेट में शराब थी , और कोई चोट के निशान नहीं है.

रोमेश – तो तुम कहना चाहते हो खूनी पहले से ही अहाते के अन्दर छिपा बैठा था , और जब प्रमोद ने घर का बड़ा फाटक बंद करके 20 , 22 कदम चल के दरवाजा खट खटाया तो खूनी ने गोली चलाई , लेकिन मेरा सवाल है क्यों , जब प्रमोद दरवाजा खोल के आया तो कातिल ने तब गोली क्यों नहीं चलाई , उसी में उसका फायदा था और फिर गोलीमार कर फाटक से भाग भी जाता , वार खाली जाने का कोई अंदेशा नहीं था , क्यों.

सूरज – सवाल का जवाब क्या है तुम्हीं बताओ.

रोमेश – जवाब ये है कि खूनी ने पीछे से गोली नहीं चलाई , इससे भी गंभीर समस्या है रूप हरि चक्का , किसने लगाया , कब लगाया और क्यों लगाया , इस रूप हरि चक्के का कुछ तो मकसद है , बस इस मकसद का पता लग जाए तो कुछ समाधान हो सकता है समस्या का.

तभी दरवाजे पर कोई आया जिसे देख.

रोमेश – अच्छा सूरज सुबह आना फिर बात करते है.

बोल के फ़ोन रख दिया तब.

रोमेश – (दरवाजे खोल सामने रजत को देख) आओ रजत बैठो.

रजत – (हाथ जोड़ के) नमस्ते रोमेश बाबू.

रोमेश – नमस्ते , सुबह तुम घर में मिले नहीं और तुम्हारी मामी बिगड़ गई थी इसीलिए मैने ही तुम्हे यहां आने के बारे में बोला था, ताकि कुछ सवाल कर सकू.

रजत – जी पूछिए.

रोमेश – क्या उम्र है तुम्हारी.

रजत – जी 20 साल.

रोमेश – अच्छा जिस वक्त प्रमोद का खून हुआ था तुम जगे हुए थे.

रजत – जी.

रोमेश – क्या कर रहे थे.

रजत – ????.

रोमेश – (आगे सवाल करते हुए) क्या रात में तुम अपने कमरे का दरवाजा बंद करते हो.

रजत ना में सिर हिलाता है.

रोमेश – उस रात जब सब सो गए तब तुम बाहर गए थे...

रजत – नहीं.

रोमेश – मैना दरवाजे के इलावा घर से बाहर जाने का कोई और दरवाजा है.

रजत – पिछला दरवाजा.

रोमेश – उस रात पिछले दरवाजे से कोई बाहर गया था.

रजत –जी नहीं , अगर कोई गया होता तो मुझे मालूम होता , क्योंकि मेरा कमरा दरवाजे के पास है , दरवाजे खोलते वक्त चरमर की आवाज करता है , इसके इलावा उसपर तला पड़ा रहता है.

रोमेश – उसकी चाबी किसके पास है.

रजत –अशोक के पास.

रोमेश – हम्मम , प्रमोद रात को रोज देर से लौटता ये तुम्हें मालूम है.

रजत – जी.

रोमेश – तुमने कभी पिस्तौल का इस्तमाल किया है.

रजत ना में सिर हिलाता है जिसे देख.

रोमेश – प्रमोद के पास पिस्तौल था.

रजत – मुझे मालूम नहीं , शायद हो भी सकता हो.

रोमेश – क्या घर में कोई पिस्तौल , बंदूक है.

रजत – मालूम नहीं.

रोमेश – प्रमोद के साथ तुम्हारा व्यवहार कैसा था.

रजत – हम दोनों का कोई व्यव्हार नहीं था , हम दोनों आपस में कोई बात चित नहीं करते थे.

रोमेश – हम्ममम क्योंकि वो दुष्ट चरित्र था इसीलिए.

रजत कुछ नहीं बोलता है तब.

रोमेश – अच्छा तुम अपने पिता से प्यार करते थे तो तुम अपनी बहन से भी बहुत प्यार करते हो.

रजत चुप रहता है तब.

रोमेश – प्रमोद का खून करने की कभी इच्छा हुई थी.

फिर रजत कुछ नहीं बोल है जिसे देख.

रोमेश – हम्मम कोई बात नहीं मै समझता हु , अच्छा कभी चेतावनी तो दी होगी.

रजत – हा दी थी , मैने उसे साफ साफ कहा था अगर उसने इस किस्म की हरकत घर में की तो मै उसे छोड़ूंगा नहीं.

रोमेश – घर से तुम्हारा मतलब , तुम्हारी बहन शिला से.

रजत – जी.

रोमेश – अच्छा उस रात नौकर की आवाज सुन कर तुमने जाके क्या देखा.

रजत – मैने देखा प्रमोद औंधा पड़ा था.

रोमेश – लेकिन तुमने देखा कैसे , वहां तो अंधेरा था.

रजत – वहां उसके हाथ में टार्च थी जल रही थी , फिर मामा ने भी बाहर की बत्ती जला दी थी.

रोमेश – तुम्हारे मामा मामी तो प्रमोद को लेके काफी परेशान रहते थे न.

रजत – कैसी परेशानी.

रोमेश – मतलब आपस में झगड़ा.

रजत – नहीं ऐसा तो कुछ नहीं होता है , उनलोगों में कभी झगड़ा नहीं होता , वो तो आपस में एक दूसरे से बात भी नहीं करते.

रोमेश – बात भी नहीं करते , मतलब.

रजत – मतलब मैने तो दोनों को एक दूसरे से बात करते कभी नहीं देखा है.

रोमेश – अच्छा कब से.

रजत – जब से यहां हूँ , उससे पहले हम अक्सर यहां आया करते थे पहले तब भी दोनों आपस में बात नहीं करते थे.

रोमेश – हम्मम.

रजत को घर से विदा कर अगले दिन रोमेश निकल गया गगन दे मिलने तब.

गगन – (मुस्कुरा के) आइए रोमेश बाबू मै आपके बारे में सोच रहा था , कुछ देर पहले मै इंस्पेक्टर सूरज बाबू से मिल के आया हूँ , सोचा कुछ पता चल जाए , लेकिन कुछ पता नहीं चला , इस लड़के की दुष्ट चरित्र ने हम दोनों की जिंदगी बरबाद कर दी , अब सोचता हूँ अपनी पत्नी को लेके कही घूम आऊ , इस शहर के बाहर जाऊंगा शायद तभी मन को शांति मिलेगी.

रोमेश – ये बात तो है , लेकिन कहा जायेगे.

गगन – काशी , वृंदावन , लेकिन पुलिस को एतराज तो नहीं होगा.

रोमेश – आप पुलिस को इकतिलाह करके जाइए , मेरे हिसाब से कोई एतराज नहीं होना चाहिए.

गगन – तो मै कल या परसों निकल जाता हु.

रोमेश – तो क्या दुकान बंद करके जायेगे.

गगन – अरे नहीं नहीं , वो हमारे रोहित बाबू है न , खजांची वो चलायेंगे , वो असल में मेरे ससुर साहेब के वक्त से संभालते आए है दुकान , और साथ में रजत है न , आगे चल के उसे ही तो संभालना है काम को.

रोमेश – (मुस्कुरा के) ठीक है गगन बाबू अब चलता हूँ , जी मुलाक़ात होगी.

बोल के निकल गया रोमेश रानी एंपोरियम पर किसी से मिलने , धाम के वक्त घर में सूरज घर में आया हुआ था तभी रोमेश घर में आया तब.

सूरज – अरे तुम कहा से आ रहे हो ये हाथ में क्या है.

रोमेश – रानी एंपोरियम से आ रहा हूँ , और ये प्रीति उपहार , याने प का तोहफा है ये.

सूरज – ये कागज म क्या लिखा है.

रोमेश – अरे 20 से 25 साल पहले शादी से पहले कागज में छपे हुए देने का रिवाज था , ये वही कागज है , रानी एंपोरियम खजांची रोहित बाबू ने दिया मुझे.

सूरज – मै कुछ समझा नहीं साफ साफ बताओ न.

रोमेश – अच्छा सुनो क्या लिखा है इसमें , कुमारी रानी का शुभ विवाह , गगन के साथ , आगे एक बकवास दी कविता लिखी है जाने दो उसे , नीचे कविता के लेखक का नाम लिखा है , साथ में रोहित और रानी एंपोरियम के उच्च अधिकारी , दिल्ली 17 फरवरी सन 1935 , समझे कुछ.

सूरज – अरे तो इसमें क्या है इतना फूले क्यों समा रहे हो.

रोमेश – अरे इसी में तो सब कुछ है , प्रमोद की मौत का रहस्य का समाधान.

सूरज – मै कुछ समझा नहीं.

रोमेश – ओह हो मूर्ख हो तुम अरे 17 फरवरी सन 1935 , अभी भी नहीं समझे.

सूरज – नहीं.

रोमेश – अरे प्रमोद ने अपने जन्म की तारीख क्या बताई थी , 7 अगस्त 1935 समझे और गगन को शादी ही थी 17 फरवरी और प्रमोद का जन्म हुआ 7 अगस्त याने 6 महीने बाद.

सूरज – ये कैसे हो सकता है , ये नमुमकिन है.

रोमेश – हा क्योंकि प्रमोद , गगन का लडका नहीं है.

सूरज – तो किसका लड़का है.

रोमेश – ये मुझे नहीं मालूम.

सूरज – तो इस तारीख से गगन का क्या ताल्लुख.

रोमेश – ओह हो अरे प्रमोद का खून गगन ने किया है.

सूरज – (चौक के) क्या.

तभी दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई तब दरवाजा खोल के देखा तो शाम गगन खड़ा था.

रोमेश – (मुस्कुरा के) आइए गगन बाबू , अभी आपके बारे में बात हो रही थी.

बिना किसी भाव के गगन सामने आके बैठ गया रोमैश के तब...

गगन – (रोमेश से) आप रोहित बाबू से मिलने गए थे.

रोमेश – हा गया था.

गगन – क्यों मिलने गए थे.

रोमेश – जो कुछ भी जानने गया था पता चल गया.

गगन – क्या जानने गए थे.

रोमेश – सब जानने गया था और दरवाजे। हरि चक्का क्यों लगा था वो भी पता चल गया है मुझे.

गगन – जो कुछ भी पता लगा है उसे अदालत में साबित कर सकते है.

रोमेश – आपकी शादी की तारीख , और प्रमोद के जन्म की तारीख को छोड़ के , बाकी सब साबित कर मुश्किल है लेकिन मै कुछ साबित नहीं करना चाहता , बस जानना चाहता हूँ , प्रमोद ने अपनी मौत की छान बिन करने को कहा था और कुछ नहीं.

गगन – मै आपसे अकेले में बात करना चाहता हूँ.

रोमेश – (सूरज से) तुम कल भाभी को लेकर घर आओ , हम कल बात करते है.

सूरज हामी भर के निकल गया घर के लिए , उस बीच रोमेश और गगन की बात हुई जिसके बाद गगन चला गया अपने घर , अगले दिन सूरज अपनी बीवी लक्ष्मी के साथ घर आया तब.

सूरज – (रोमेश से) क्या बात हुई कल गगन से तुम्हारी.

रोमेश – सब बताता हूँ तो सुनो , सन 1923 में रानी के पिता रमाकांत ने रानी एंपोरियम की स्थापना की , उनकी एक ही संतान थी रानी , उसी के नाम पर उन्होंने दुख का नाम रखा , और गगन बाबू ने एक मामूली सेल्स मैन की हैसियत से वहा नौकरी की , तब उनकी उम्र 21 से 22 की होगी , गरीब घर का अनाथ लड़के था , दिखने में सुंदर और मेहनती , फिर दो साल नौकरी करने के बाद गगन बाबू की किस्मत खुल गई , एक दिन रमाकांत ने गगन को अपने पास बुलाया और कहा अपनी इकलौती बेटी की शादी गगन से करना चाहते है , गगन को जैसे धरती पर चांद मिल गया कुछ दिनों के बाद दोनों की धूम धाम से शादी हो गई , गगन बाबू के सह कर्मियों ने प्रीति उपहार के तौर पर एक मल मल जैसे कागज पर एक कविता छपवा कर उन्हें भेट दी , वही कागज रानी एंपोरियम के खजांची रोहित बाबू ने मुझे दिया , लेकिन शादी की पहली रात को ही गगन बाबू को पता चल गया कि रमाकांत ने अपनी इकलौती बेटी की शादी एक गरीब , अनाथ , मामली कर्मचारी से क्यों की , क्योंकि शादी की रात रानी तीन महीने की गर्भवती थी , और पूरी रात गगन ने कुर्सी पर बिताई , अगले दिन सवेरे रमाकांत बाबू से जा मिले और कहा आपका मकसद पूरा हो गया अब मुझे छुट्टी दीजिए.

लेकिन रमाकांत बाबू भी इस स्थिति के लिए तैयार थे , उन्होंने गगन से कहा कि उन्हें जल्दी बाजी में ऐसी वैसी कोई हरकत नहीं करनी चाहिए जिससे उनका भी मू काला हो , बेहतर थी होगा कि वो चुप चाप सब सह ले और किसी को कुछ पता नहीं चलेगा , साथ में उन्होंने गगन बाबू के हाथ में एक वकालत नामा रख दिया जिसके मुताबिक रानी एंपोरियम में गगन बाबू भी बराबर के हिस्से दार बने , और उन्होंने गगन से कहा कि आज तक मेरा हुक्म चलता था , कल से तुम्हारा हुकुम चलेगा , गगन बाबू का सिर चकरा गया , अब किसका नहीं चकराता सिर , इतनी धन दौलत को वो ठुकरा न पाए , अब वो अपने ससुराल में रहने लगे , लेकिन रानी के साथ उन्होंने कोई सम्बन्ध नहीं रखा दोनों अलग अलग कमरे में सोते थे , फिर एक महीने बाद रमाकांत बाबू , रानी को लेके विलायत चले गए , कहा लड़की बीमार है इलाज के लिए इंग्लैंड जाना जरूरी है , और एक साल के बाद वो लौटे तो रानी की गोद में एक बच्चा था , अब ये कहना मुश्किल था वो बच्चा दो महीने का है या पांच महीने का.

अब धीरे धीरे प्रमोद बड़ा होने लगा उसकी रगो में किसी धूर्त , दुष्ट चरित्र बाप का खून था और वो भी बिल्कुल वैसा ही अपने अज्ञात बाप की तरह निकला , लापरवाह और उजड़ , जब वो 19 साल का हुआ तब रमाकांत बाबू चल बसे और रानी एंपोरियम का आधा हिस्सा प्रमोद को मिला , उस बीच गगन और रानी में थोड़ी बहुत नजदीकी आगई थी , जैसे मित्रो में होती है भले दोनों अलग कमरे में सोते थे लेकिन परवाह एक दूसरे की करते थे , लेकिन उस बीच प्रमोद को उसके जन्म के रहस्य के बारे में पता चला वो अपनी मां रानी और पिता गगन से नफरत करने लगा और बहुत खरी खरी सुनाने लगा , लेकिन प्रमोद की मनमानी इतनी बढ़ गई कि रानी एंपोरियम का दिवाला निकलने की नौबत आगई थी , और एक दिन तो एक औरत ने दुकान में चिल्ला चिल्ला के कहा कि प्रमोद ने उसकी बेटी का बलात्कार किया है , गुस्से में गगन बाबू घर गए रानी को सब बता दिया उसी रात जब प्रमोद नशे में घर आया तो , प्रमोद ने नशे में शिला के लिए बात की तब गगन और रानी को पता चला कि अब प्रमोद की गंदी नजर शिला पर है , उसी वक्त गगन बाबू ने सोच लिया कि प्रमोद को रस्ते से हटा देंगे , लेकिन प्रमोद भी बहुत तेज लड़का था वो उनका मकसद समझ गया , लेकिन अपने आप को बचा नहीं सका , अगर वो पुलिस के पास जाता तो अपने जन्म का रहस्य खोलना पड़ता , इसीलिए वो मेरे पास आया , लेकिन ये नहीं बताया कि कौन उसका खून करना चाहता है , क्योंकि उसे बताना पड़ता न कि वो लावारिस है उसकी मां कुलटा है , लेकिन वो मुझे अपने जन्म की तारीख दे बैठा , और यही उसकी मृत्यु रहस्य की चाबी है.

जिस रात प्रमोद का खून हुआ उस रात कुछ ऐसा हुआ था , आदत के मुताबिक प्रमोद अक्सर देर रात घर में आता था , उस रात साढ़े दस बजे जब सारे नौकर खाना खा चुके थे , गगन बाबू चुपके से नीचे आए और घर के दरवाजे के नीचे रूप हरा चक्का चिपका के वापस ऊपर चले गए , अपने कमरे की बत्ती बुझाई और बालकनी में इंतजार करने लगे , करीब आधे घंटे बाद प्रमोद आया , घर के बड़े फाटक से घर के दरवाजे का रास्ता जो है वो अंधेरे में रहता है , इसीलिए प्रमोद ने अपनी टॉर्च जलाई , दरवाजे पर आकर दरवाजा खट खटाया , तो प्रमोद ने देखा दरवाजे के नीचे चांदी से गोल सा कुछ चमक रहा है , प्रमोद ने नीचे झुक के देखा और तभी गगन बाबू ने अपनी बालकनी से गोली चला दी , गोली सीधा प्रमोद की पीठ में घुसकर सीधा सीने की हड्डियों में जा घुसी , वो मू के बल वही का वही गिर पड़ा और टॉर्च वही जलती की जलती रह गई , तो ऐसा हुआ था उस रात...

सूरज – तो गगन बाबू ने ये सारी बात बताई तुम्हे.

रोमेश – नहीं उन्होंने कारण बताया सिर्फ , बाकी ये मेरी थ्योरी थी , हा लेकिन जाने से पहले गगन बाबू बता गए कि पीछे 20 , 21 साल से वो और उनकी पत्नी श्मशान की जिन्दगी जी रहे थे , अब पीछा सब भुला कर अपनी पत्नी के साथ जीवन एक नए सिरे से शुरू करन चाहते है , उन्होंने मुझे अनुरोध किया कि उनकी जिंदगी की कहानी किसी के सामने न दोहराए , जीने का एक मौका दे , अब तुम बताओ सूरज मै क्या करता...

सूरज – (मुस्कुरा के) करना क्या है रोमेश बाबू , छुट्टी की अर्जी दे दी है मैने , कल से छुट्टी मंजूर हो गई , कश्मीर चलने की तैयारी करते है.

इसके साथ दोनों की हसी गूंजने लगी.

इति🙏🙏
Again suspense.
Shuru me laga ki shayad Sheela katil hogi, pramod ne nashe me uske saath kuch galat kiya hoga or usne badla le liya or uska bhai sab janta ho jaise, par ye sab galat sabit hua or katil nikla gagan. Vaise uski maa bhi ab uski harkato se usse pareshaan ho gayi thi or jaise ab use uske hone ya hona hone se koi fark hi na padta ho.
Chalo kam se kam kashmir ki trip sponsor kar gaya parmod.
 
  • Like
Reactions: Raj_sharma

dhalchandarun

[Death is the most beautiful thing.]
7,028
22,107
174
Bahut achhi story hai bhai.
Raju ne ye sabit kiya ki bhoot jaisa kuch nahi hota or vo sab kisi pre plaan ka hissa tha jis karan logo ki jaan le rahe the angrej.
Pahle samay me ye rule tha jiska koi nahi bacha uski jameen sarkaar ya us panchayat ki ho jaati thi or gaanv me kisi ek hi parivaar ka raaj hua karta tha to jameen usi ki ho jati thi.
Vaise bhoot vagaira hona ya na hona individually perception hai, kuch ko lagta hai ki hai or kuch ko nahi, vaise mostly log maante hai ki hota hai.
Yeah! Wahi sab cheez dhyan mein rakh kar maine ye chhoti si story likhne ka try kiya hai, yeah, most of the people think that the ghost does exist, btw thanks a lot to have your views on this regard.
 
  • Like
Reactions: Raj_sharma and JTN

Black

Bitter as karela
Prime
27,758
42,003
304
Road Trip To The Heart

Writer
Aakash.
Kaafi ache se likhi hai aapne kahani kahin pe bhi bore nahi karti shuru se leke ant tak baandhe rehti hai. Ek sweet romantic story. Aryan aur zoya ki pehli mulakaat bhi interesting thi
Ek shikayat hai story mein emotions kam feel hote hain baki aapki lekhni toh hai hi shandar agli baar thoda aur peeke likhne ka..kahani ko aapne bahut detail ke sath likha hai aur dil se likha hai kahi Aryan ju hi toh nahi ho khair mujhe bahut achi lagi kahani.
 
Last edited:

Black

Bitter as karela
Prime
27,758
42,003
304
The Sins of the Scalpel
Writer Mr. Magnificent
Aapki pichhli kahani se achi Hain yeh kahani aapki lekhni shandar hai
Aapne bahut ache se aur details ke sath likha hai is kahani ko
Doctor Sameer ka jo haal hua karm karne jata hoon kaand ho jaata hai
Woh gaye the Abhimanyu ki madad karne lekin uski madad karke woh khud fans jaate hain kyunki doctor Sameer ko waah waahi bhi chahiye thi
Ab sab kuchh insaan ke soch ke hisaab se nahi ho sakta jeevan mein kuchh milta hai kuchh nahi milta
Aise hi likhte rahiye ho sakta hai aapki yeh story jeet jaaye kyunki ise aapne bahut achche se likha hai.
 
Last edited:
  • Like
Reactions: Raj_sharma

RanaXrajput

𝕭𝖔𝖗𝖓 𝖙𝖔 𝕽𝖚𝖑𝖊 𝕹𝖔𝖙 𝖙𝖔 𝕱𝖔𝖑𝖑𝖔𝖜 👑
228
264
63
ANDHERA
by

BLACK
Honestly speaking it was too short but again your narrative of story telling was amazing and one thing that i was most impressed of you haven't done PUNCTUAL or CASUAL wording mistakes as most of the writers do so in short a very good story bro i've loved it and it does not mean that i love you so i also love the story but the story itself made me to cast my vote ah actually no vote its a review an honest one
STAY BLESSED
STAY SAFE
REGARDS, RanaXrajput

:flybye:
Propose I Love You GIF
 
  • Love
Reactions: Black

Shetan

Well-Known Member
17,798
52,322
259
Black
( Andhera )
(Non-Contesting)

Mera naam ajay hai meri ek electronic shop hai. mai abhi bas meri biwi aur meri beti ke sath rehta hun ek apartment mai , beti ka naam kiran aur meri wife ka naam komal



Mera naam ajay hai meri ek electronic shop hai. mai abhi bas meri biwi aur meri beti ke sath rehta hun ek apartment mai , beti ka naam kiran aur meri wife ka naam komal

Meri beti ke paida hone ke 10 din baad komal papa guzar gaye aur phir 10 din baad komal kii maa bhi guzar gayi


Komal kafi dukhi rehne lagi thi apne maa baap ko khone baad se lekin Komal ne hamesha mera bahut sath diya, is beech woh khud beemaar rehti thi kyunki uski delivery hui thi

Kuch saalo baad mere papa bhi gujar gaye , aur unke ke kuch saalo baad hi meri maa bhi chal basi .

Main kabhi kabhi sochta tha ki komal kitni kathor ho gayi hai use pata hai ki mere mata pita guzar gaye hain main kis haal se guzar rha hoon phir bhi woh nahi samajh rahi

Dheere dheere samay beeta aur mujhe samajh mein aane laga ki galti komal ki nahi thi bas haalaat ki thi kyuki maa baap to usne bhi khoye the apne .

Jaise woh raat raat bhar uthke kiran ko dekhti use uska sir sehlati use takti rehti , subah uthti toh uske sar mein dard hota kabhi kabhi main kaam se ghar aata toh phone chalane lagta jis wajah se woh gussa ho jaati ki din bhar hum beti ko dekhte hain aur aap aate hi mobile mein lag jaate ho

Main kiran ke sath baate karne lagta uske sath khilane lagta

Hum ek rented flat mein rehte the

Woh mera bahut khyal rakhti thi shayad haalaat ki wajah se woh mujhe kabhi kabhi buri lagti thi

Phir main apni maa ke baare mein sochta tha meri maa mere liye bahut achchi thi

Lekin baaki sab ko koi na koi shikayat thi meri maa se meri dono bhabhi ko meri dono behno ko

Par meri komal ne kabhi meri maa ki shikayat nahi ki

Aise hi humari zindagi chal rahi thi

Meri life mein mere pariwar ke alawa kuchh nahi tha

Mujye subah se hi ajeeb lag raha tha pata nahi Kyu main aaj kaam pe jaana nahi chahta tha lekin meri income abhi kam thi isi liye chhutti nahi maar sakta tha

Maal bik nahi raha tha mandi thi market mein upar se chhutti karna sambhav nahi tha

Main apni komal ke dono gaal pe kiss kiya naak pe kiss kiya dono aankho pe kiss kiya maathe pe kiss kiya aur phir hont pe

Woh bhi aise hi mujhe vida karti thi mere poore chhere ko choom ke

Mujhe bahut achi lagti thi woh ek dum simple seedhi saadhi apni zimmedari ache nibhati thi woh

Komal..Aaj na mere liye gajra leke aana aap

Ajay..le aaunga meri jaan aur kuchh

Komal..gajra le aaiye bahut hai

Woh hansi

Main muskurake apni Kiran ke maathe ko chumke nikal gaya apne shop ki taraf

Kareeb 1 ghante baad main apni shop pe pahuncha aur mera staff sarjoo jo ki 20 saal ka ladka tha usne mujhe namaste kiya aur phir saaf safayi mein lag gaya

Shop bhi rent pe hi tha main chair pe baithke intezar karne laga customer ka. Subah se dopeher ho gayi dopeher se shaam lekin koi nahi aaya shayad market down tha

Tabhi mera phone baja maine dekha unknown number hai maine phone uthaya

Jee kaun

Aap jaldi se apne ghar aajao main inspector Arjun bol rha hoon

Main buri tarah se ghabra gaya ki kya hua

Aap aajaiye main yahi bata dunga aapko aur phir phone cut gaya

Main bhaaga apne ghar ki taraf maine kayi baar komal ko call kiya lekin kisi ne phone nahi uthaya

Main auto reserve karke apne ghar pahuncha toh dekha buliding ke bahar bahut bheed hai police ki gaadiya bhi thi

Mera flat first floor pe tha main bhaagta hua apne flat pe pahuncha dil mera zoro se dhadak raha tha

Mujhe samajh nahi aaraha tha kya hua hai ki police ne mujhe phone kiya komal ne phone nahi uthaya main jab ghar mein ghusa toh mere hosh udd gaye mere hath pair kaanpne lage dil zoro se dhadakne laga ek laash jispe safed kapda tha

Komal main zor se chillaya komal komal

Main bas bolta tha inspector Arjun ne mujhe pakad liya woh bhi meri hi umra ka tha

Inspector Arjun..dheeraj rakhiye ajay sahab sab theek ho jaayega dheeraj rakhiye

Ajay..meri komal kaha hai meri kiran kaha hai yeh kaun hai kiski laash hai yeh

Inspector Arjun.. aapki biwi ab is duniya mein nahi hai, aur aapki beti ka bhi kuchh pata nahi hai kaha gayi

Main zo zor se cheekh cheekh ke rone laga

Main apni komal ke paas jaane laga lekin Arjun ne mujhe pakad rakha tha

Main bahut buri tarah se toot gaya tha

Woh laash ko leke chale gaye

Body ko postmortem ke liye bhej diya gaya

Postmortem karne waale doctor ne jab Arjun ko bataya toh Arjun ka chehra thanda pad gaya

Use saans lene mein dikkat hone lagi woh bahar aake lambi lambi saansen lene laga

Usne hawaldar shubham ki taraf dekha

Yeh baat kisi ko pata nahi chalni chahiye

Poora ilaaka chhan maaro kahin toh koi camera hoga dekho woh madarchod kahan hain mujhe woh chahiye

Shubham..sahab kitne bade dusht hain woh unhone aakhir aisa Kyu kiya

Arjun daant peeske reh gaya

Mere dono bhai meri dono behen aur unki family mere Ghar pe the

Mere dono bhai jo sirf naam ke bhai the woh mujhe himmat de rahe the

Mata pita ke jaane ke baad toh kabhi aaye nahi mere ghar pe

Bas komal ki dono bhabhi se baat ho jaati

thi

Ajay...aap log apne ghar jaaiye kya zaroorat hai aapki yaha ab toh main akayla hoon mujhe kisi ki zaroorat nahi hai

Woh sab chale gaye aur main wohin baitha sochta raha ki agar main aaj shop pe nahi gaya hota toh yeh sab nahi hota

Main cheekh pada aur rone laga

Tabhi inspector Arjun ka mujhe phone aaya

Ajay..kahiye inspection sahab

Arjun...aapki biwi ka rape karke hatya ki gayi

Yeh sunte hi main phone zameen pe de maara

Main buri tarah se paagal ho chuka tha

Main apni betii ko dhudne nikal pada lekin mujhe woh kahin nahi dikhi

Kayi din beet gaye lekin mujhe meri beti nahi mili maine sab jagah talash kiya Arjun se bhi kaha lekin use bhi pata nahi chala

Mere bhaiyo ne meri haalat dekhke mujhe apne sath le Gaye woh ek sath rehte the

Sanjay aur sumit dono ajay ko sambhal nahi paa rahe the

Ajay kuchh dino mein hi paagal ho gaya raat raat bhar cheekhta chillata aur rota

Yeh sab dekhke sanjay aur sumit ne use mental hospital mein admit karwa diya

Kayi mahine beet gaye inspector Arjun ko pata nahi laga ki aakhir kisne kiya yeh sab

Sabse puchh taachh hui lekin koi bhi suraag nahi mila ki aakhir din dahade kaun tha jisne yeh ghinona paap Kiya aur kisi ne kuchh dekha bhi nahi

Buliding mein 5 floor the ground pe owner rehte the

First pe ajay aur dusri side koi aur family

Baaki 4 floor waalo ko bhi kuchh pata nahi tha

Aakhir kaise yeh sab hua aur aakhir yeh sab kisne kiya

Kahin kisi ne bhi kisi ko aate jaate nahi dekha na kisi ne kuchh suna

Aisa kaise ho sakta hai

Kahin se koi suraag pata nahi chala inspector Arjun ko majburan file band karni padi aur phir case itna sensitive tha ki unka transfer kar diya gaya

Is ghatna ko kuch saal beet gaye the , Ek din inspector arjun subah uthke news dekh rahe the tabhi unhone dekha ki ek ladke ne ek ladki ki hatya kar di dono pehle prem mein the phir ladki ki shaadi tay ho gayi

Us ladke ne usi ki building mein ek flat rent pe liya waha chhupa raha

Ek din mauka dekhke usne ladki ko uske ashleel photo's bheje aur phir us ladki ko apne flat pe bulaya usne uska rape kiya aur maar diya

Tabhi inspector Arjun ka zordar jhatka laga

Usne hawaldar shubham ko phone kiya aur usse ajay ke case ki file mangwayi

Usne dekha ki jis building mein ajay rehta tha usi building ke fourth floor pe uske bade bhai Sanjay ne flat rent pe liya tha 1 mahine pehle

Usne turant apne senior ko phone kiya aur unhein sab bata diya

Dobara chhaan been hui aur phir sab kuchh saamne aagaya

Saare sabit match hue Arjun ne toh yeh samjha tha ki pariwar ke log hain usi liye finger prints toh honge hi

Komal ke sath jin dono ne woh ghinauna paap Kiya tha woh koi aur nahi Sanjay aur sumit the ajay ke bade bhai

Poore desh mein khalbali mach gayi

Sab jagah yahi khabar thi ki kaise do bhaiyo ne milke apne chhote bhai ki biwi ke sath itna ghinauna paap Kiya

Kuchh dino baad inspector Arjun ke paas case ki file aayi dobara investigation jo hui thi

Usmein saaf likha tha ki ajay ke mata pita ne apni saari property jo unke gaon mein thi woh sab Ajay ke naam kar di thi Sanjay aur sumit ko kuchh nahi mila tha

Kareeb 20 crore ki property thi khet ghar waala gaon milake

Komal ki hatya se 2 mahine pehle Sanjay aur sumit dono komal ke paas Gaye the usse baat karne

Sanjay aur sumit ne komal se kaha ki mata pita ki property hai kya ajay ka farz nahi banta ki woh humein bhi hissa de

Bhaiyo ka haq khaake kaun kaamyaab ho jaata hai

Komal ne kaha ki woh baat karegi

Sumit baar baar komal ko dekh raha tha use komal bahut khubsurat lagti thi

Sanjay ne yeh bhaap liya aur sumit ko samjhaya bhi

Kareeb 15 din baad phirse dono komal ke paas Gaye komal ne yahi kaha ki maine inse baat ki thi inhone saaf mana kar diya ki main apni cheez kisi ko nahi doonga

Yeh sunke dono bhaiyo ne plan banaya ki komal ko dara dhamkake nanga karenge aur phir uski video banake ajay ko blackmail karenge

Aur phir woh aaya kaala din jis din inhone apne plan ko anjaam dena theek samjha

Dono Ghar mein ghuse

Komal

Baithiye aap dono main chai banati hoon

Sanjay...kiran bitiya nahi dikh rahi hai

Komal...use mere bhaiya leke Gaye hain apne ghar

Sumit...komal jaldi se apne kapde utaaro

Yeh sunke komal ke hosh udd gaye

Woh gusse mein dono ko dekhne lagi

Lekin woh kuchh bolti usse pehle hi dono uspe haawi ho gaye karna toh yeh tha ki komal ka bas video banana tha lekin sumit ka kuchh aur plan tha usne apne plan ko anjaam diya aur phir Sanjay bhi us cheez mein shamil ho gaya

Dono apna kaam karke jaane lagi

Komal gusse mein chaaku leke sanjay ki taraf daud padi

Usse pehle hi Sumit ne komal ki hatya kar di

Dono ne apne kapde dhoye apne aapko saaf kiya aur phir waha se nikal gaye building ke fourth floor pe jaake chhip gaye

Pados mein rehne waali Sheela ne kisi cheez ke liye komal ko awaz di toh komal ne jawab nahi Diya gate thoda khula hua tha usne farsh pe khoon dekha aur jab woh andar aayi usne jo dekha usse cheekh nikal gayi uski

Komal ki laash bina kapdo ke farsh pe padi thi

Mauka dekhke dono bhai bhi bheed mein shamil ho gaye police ke aane se pehle

Police jab aayi toh unhone sab ko waha se hata diya

Inspector Arjun ajay se milne mental hospital pahunche

Lekin ajay ki haalat aisi nahi thi ki woh dono unse kuchh baat kar sakein


Kuch saalo baad ..


Ek lady dr. - Suniye suniye kaha khoye hain aaap

Kya hua madam Kyu itna gussa kar rahi hain aap

Doctor ..ek toh Sunday ko aapko time milta hai usmein aap kahani likhne baith jaate hain

Ajay..kya karu kahani likhna mera passion hai

Komal..haan haan isi liye aapne kahani likhne mein itne puruskar jeet liye

Ajay..ab aise bhi na bolo

Komal..dikhaiye toh kaunsi kahani likhi hai aapne

Ajay..tum na dekho toh behtar hai kyunki yeh tum padh nahi paaogi

Doctor..dikhaiye mujhe, doctor ne aankhein dikhate hue boli

Uske baad us ne kahani padhni shuru ki

Doctor...kya kya likhte hain aap log samjhenge ki aapki yahi fantasies hain

Ajay...ab kuchh log toh bahut kuchh likhte hain toh kya woh unki fantasies hain

Yeh bolke Ajay hansne laga

Doctor ne kuchh nahi kaha


Doctor komal Ajay ke saamne baithi thi

Kya hua ajay itna muskura Kyu rahe ho

Ajay...aap mujhpe gussa kar rahi hai isi liye


Doctorl har ek word ko note kar rahi thi

Doctor .. Ajay tum yaha kaise aaye, tumhe kuchh yaad hai

Ajay...maine apne dono bhaiyo ka khoon kar diya tha jis wajah se mujhpe court mein case chala aur phir mujhe yaha bhej diya gaya

Doctor ... lekin tumne apne bhaiyo ka khoon Kyu kiya

Ajay.. aise nahi kaan mein bataoonga

Doctor kayi din se ajay se baat kar rahi thi unhein kabhi ajay se khatra mehsus nahi hua tha

Unhone apna chehra ajay ke kareeb kiya

Ajay apna munh unke kaan ke paas le gaya

Ajay...unhone mere mata pita ka khoon kiya tha

Yeh bolke Ajay ne doctor komal ke mathe pe kiss kar diya

Doctor komal yeh sab bhi note karne lagi

Ajay..ek baat bataoon aapko

Doctor..bolo Ajay

Ajay... Aap na bilkul meri komal ke jaisi dikhti ho wohi chehra bilkul meri apni lagti ho

Doctor ne ek baar Ajay ko dekha aur phir room se nikal gayi

Ajay.. Mera man tera pyasa mera man tera pyasa

Doctor sun paa rahi thi Ajay ko gaate hue unki aankhon mein aansu the

Jaldi se theek ho jaaiye papa main aapka intezar kar rahi hoon

Kiran ne dheere se bola

Jab komal ke bhaiya Kiran ko apne sath leke Gaye the lekin raaste mein unka accident ho gaya dono hospital mein the komal ke bhaiya ki death ho gayi Kiran ko kuchh bhi yaad nahi tha ek couple ( jo ki usi hospital mai bohat bade doctor the jisme aaj kiran doctor hai ) Kiran ko apne sath le gaye the aur Kiran ki saari jankari nikalwane ke baad jab unhen pata chala ki kiran ka apna koi saga hai nhi ab toh unhone kiran ko adopt kiya tha …
जब स्टोरी का टाइटल देखा. और फिर आप का नाम. तो मेरा मज़ाक करने का मूड था. स्टोरी पढ़ना शुरू किया और पहेली दो लाइन रिपीट हुई तो भी मुझे लगा की लगता है Black मस्ती के मूड मे है. और कुछ ऐवेंजर जैसा मज़ाक होगा. या फिर कुछ सेक्सुअल डाला होगा.

पर आप ने तो शार्टकट मे पूरी एक फ़िल्म दिखा दी. बहोत लाजवाब. दोनों भाइयो के धोखे का बदला अजय ने लिया. पर उसने अपनी पत्नी के मौत का जीकर नहीं किया. और वो डॉक्टर उसी की बेटी निकली. पर पूरी स्टोरी तो कोमल और अजय की थी. खेर मझा आया. यह स्टोरी आपने शब्दो को कम से कम करके लिखने की कोसिस की है. इस स्टोरी को आप फुल वर्जन मे भी लिख सकते हो. आप बहोत अमेज़िंग राइटर हो. पर मूडी ज्यादा हो.
 

Black

Bitter as karela
Prime
27,758
42,003
304
Black

जब स्टोरी का टाइटल देखा. और फिर आप का नाम. तो मेरा मज़ाक करने का मूड था. स्टोरी पढ़ना शुरू किया और पहेली दो लाइन रिपीट हुई तो भी मुझे लगा की लगता है Black मस्ती के मूड मे है. और कुछ ऐवेंजर जैसा मज़ाक होगा. या फिर कुछ सेक्सुअल डाला होगा.

पर आप ने तो शार्टकट मे पूरी एक फ़िल्म दिखा दी. बहोत लाजवाब. दोनों भाइयो के धोखे का बदला अजय ने लिया. पर उसने अपनी पत्नी के मौत का जीकर नहीं किया. और वो डॉक्टर उसी की बेटी निकली. पर पूरी स्टोरी तो कोमल और अजय की थी. खेर मझा आया. यह स्टोरी आपने शब्दो को कम से कम करके लिखने की कोसिस की है. इस स्टोरी को आप फुल वर्जन मे भी लिख सकते हो. आप बहोत अमेज़िंग राइटर हो. पर मूडी ज्यादा हो.
Thank you:bhoi: tam ko kahani achi lagi kuchh log toh mujhe hi target karne lage the :sigh: ki aisi story main Kyu likha hai
Aage koshish karenge aur achcha likhne ki
 

tera hero

Active Member
708
1,594
124
कहानी : "प्रेम "

प्रिय लेखक महोदय: Raj_sharma

विशाल और मायरा की यह कहानी 'प्रेम' भावनाओं, संयोग और नियति (Destiny) का एक बहुत ही खूबसूरत मिश्रण है।


1. कथानक और पटकथा (Plot & Screenplay)


कहानी की शुरुआत एक सस्पेंस और थ्रिलर वाले माहौल से होती है (मनाली की वादियों में विशाल का मायरा को बचाना), जो पाठक को तुरंत बाँध लेती है। कहानी का 'पेस' (Gati) अच्छा है। जिस तरह से विशाल और मायरा के बीच धीरे-धीरे दोस्ती विकसित होती है, वह बहुत ही स्वाभाविक लगती है।


2. किरदारों का चित्रण (Character Development)


  • विशाल: उसे एक सुलझे हुए, धैर्यवान और निस्वार्थ प्रेमी के रूप में दिखाया गया है। वह जबरदस्ती प्यार थोपने के बजाय मायरा के दर्द को समझने की कोशिश करता है, जो उसे एक 'हीरो' बनाता है।
  • मायरा: मायरा का किरदार बहुत गहराई लिए हुए है। उसका पुराना दर्द (विहान की मौत) और उसके कारण उसका वर्तमान जीवन में खुद को अकेला कर लेना, उसकी मानसिक स्थिति को बहुत अच्छे से दर्शाता है।
  • नानी: नानी का किरदार कहानी में एक 'सपोर्ट सिस्टम' की तरह है, जो रिश्तों के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखती हैं।

3. इमोशनल कोशेंट (Emotional Depth)


कहानी के दो हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावशाली हैं:


  • फ्लैशबैक: विहान और मायरा की कॉलेज लव स्टोरी को जिस सादगी से लिखा गया है, वह विहान की मौत के दुख को और गहरा कर देती है।
  • क्लाइमेक्स (The Big Twist): यह कहानी का सबसे मजबूत हिस्सा है। 'हार्ट ट्रांसप्लांट' का ट्विस्ट कहानी को एक नया आयाम देता है। यह अहसास कि विशाल के अंदर विहान का ही दिल धड़क रहा है, रोंगटे खड़े कर देने वाला (Goosebumps) मोमेंट है।

4. लेखन शैली (Writing Style)


आपकी भाषा सरल लेकिन असरदार है। कविता और शायरी का इस्तेमाल कहानी को रूहानी (Soulful) बनाता है। विशेषकर मायरा की वह कविता:


"जो तेरी अपनी परछाई भी तुझे अधूरा छोड़ जाए... तो बस तू मुझे याद करना"
यह पंक्तियाँ कहानी के अंत के साथ बहुत सुंदर तरीके से न्याय करती हैं।


5. कुछ सुझाव (Minor Suggestions)


  • संवाद: कुछ जगहों पर संवादों को थोड़ा और संक्षिप्त किया जा सकता था, हालांकि वे भावनाओं को व्यक्त करने में सफल रहे हैं।
  • अंत: अंत बहुत ही सुखद (Happy Ending) है। यह संदेश देता है कि सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता, वह बस अपना रूप बदल लेता है।

निष्कर्ष (Final Verdict)


यह एक हार्ट-टचिंग (Heart-touching) कहानी है जो उम्मीद और प्यार की ताकत को दर्शाती है। संयोग का ऐसा ताना-बाना बुनना कि एक प्रेमी का दिल दूसरे प्रेमी के पास पहुँच जाए, कहानी को 'Soulful' बनाता है।


रेटिंग: 4.5/5 ⭐
 

tera hero

Active Member
708
1,594
124
Story - Ret par Ugta Suraj

Writer - manikmittalme07

"Ret par Ugta Suraj" ek bahut hi prabhavshali (impactful) aur emotional kahani hai. Aap ne ek architect ki technicality aur ek kalakaar ki bhavnaon ko bahut khoobsurti se joda hai.



1. Plot aur Theme (Vishu aur Vishay)


Kahani ka plot kaafi mazboot hai. Ek successful architect ka apni aankhon ki roshni khone ke baad wapas mitti se judna, ek naye sangharsh (struggle) ko dikhata hai. Theme "Vikas vs. Prakriti" (Development vs. Nature) par aadharit hai, jo aaj ke samay mein bahut relevant hai.


2. Character Depth (Patra Chitran)


  • Abhijeet: Yeh ek inspirational character hai. Uska andhera use kamzor nahi, balki sensitive banata hai. Uska mitti ko touch karke "Blueprint" samajhna uski expertise ko dikhata hai.
  • Amya: Amya ka kirdaar kahani mein masoomiyat aur umeed (hope) bharta hai. Bina bole uska aur Abhijeet ka rishta ek silent emotional backbone hai.
  • Khanna: Khanna ek classic antagonist hai jo modern greed ko represent karta hai. Uska contrast Abhijeet ke saath kaafi teekha aur asardaar hai.

3. Symbolism (Prateekvad)


Kahani mein symbolism ka use kamaal ka hai:


  • Ret ka Suraj: Yeh umeed ka prateek hai jo har roz naya banta hai.
  • Kacchue (Turtles): Yeh dikhate hain ki kaise chhoti si jaan bhi bade badlav ka zariya ban sakti hai.
  • Kale Chashme: Yeh sirf andhere ka nahi, balki us purani duniya se katne ka bhi prateek hai jise Abhijeet ne peeche chhod diya.

4. Emotional Impact


Bhaag 3 aur 4 sabse zyada emotional hain. Jab Khanna aag lagata hai aur Abhijeet raakh ko apne mathe par lagata hai, wo moment hero ke "Rebirth" ko dikhata hai. Ending bahut hi sukoon bhari hai, jahan "JEET" shabd sirf naam nahi, balki pure gaon ki vijay ban jata hai.


Sudhar ke Sujhaav (Suggestions for Improvement):


  • Dialogue Delivery: Kahani ke dialogues acche hain, lekin Khanna ke dialogues ko thoda aur natural banaya ja sakta tha. Kuch jagah woh thode filmi lagte hain.
  • Pacing: Bhaag 2 se Bhaag 3 ka transition thoda tez hai. Aag lagne waale incident ko thoda aur build-up diya ja sakta tha taaki darr ka mahaul zyada mehsoos ho.

Conclusion


Aap ki yeh kahani ek sabaq deti hai ki pragati ka matlab sirf unchi imaratein nahi, balki prakriti ke saath talmel (harmony) hai. Bhasha saral hai lekin asardaar.


Rating: 4.5/5 ⭐
 
Top