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sexsarkar

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Update 17:


जब प्राची बाहर आई लड़खड़ाते हुए , प्रज्ञा को समझ आ गया कि दीदी की चल पापा ने ही बिगड़ी है।

प्रज्ञा दादी से धीरे से बोली : दादी , दीदी को क्या हुआ ,रात के सेक्स का असर है क्या ?

दादी: अरे बेशर्म अपने मां के बारे में ऐसे बोलती है।

प्रज्ञा हंसने लगी।

उसने मजाक में ही प्राची के कान में जा के बोला : क्यों दीदी, पापा ने ज्यादा मेहनत कर दी क्या रात को।

प्राची : धत् बदमाश।


दोनों थोड़ा हंसने लगे ।

नाश्ता करते टाइम प्रज्ञा अपने दीदी और पापा को बार बार देख रही थी । उसे यकीन नहीं हो रहा था , जिस दीदी और पापा को वो अभी इतने शांति से खाते हुए देख रही थी वो दोनों रात में क्या क्या ,ओर कितना जबर्दस्त गुल खिला रहे थे । कितने वाइल्ड तरीके से रात को दीदी चीख रही थी। पापा को देखो जरा कितने शरीफ बन के खा रहे है। रात को तो दीदी की जान ही निकाल दी थी इन्होंने ।

उधर दादी भी उधेड़ बुन में थी कि प्राची का वो दर्द में कैसे मदद करे ,जिससे वो जल्दी अपने पति और पिता के साथ सहवास में भाग ले पाए और शंभोग कर पाए।

उधर पापा और प्राची चुप चाप खाना खा रहे थे।

खाना के बाद पापा ऑफिस निकल गए । और प्रज्ञा वी अपने रूम में अपना होमवर्क करने चली गई । उसके १२ के एग्जाम जल्दी ही होने वाले थे ।

दादी प्राची के ले के अपने घर ने आ गई ।

दादी : प्राची , मेरी बच्ची। कैसी रही पहली रात पापा के साथ।

प्राची थोड़ा मुस्कुराते हुए : अच्छी रही दादी।

दादी : सच सच बता बेटी ,मेरे सामने कुछ छुपाने की जरूरत नहीं है ,मै ही तुम्हारी दादी और मै ही तुम्हारी मां हु।

प्राची : दादी वो थोड़ा ....

दादी : क्या थोड़ा ?

प्राची : दादी वो थोड़ा दर्द हो रहा है रात के बाद वह पे ।

दादी : कहा पे बेटी ,मैने बोला न खुल के बता ।

प्राची : दादी योनि में ।

दादी : हाय मेरी बेटी , यानी पापा ने मिलन कर ही लिया तेरे साथ।

दादी को तो पता ही था कि पापा ने प्राची के साथ कितना सेक्स किया है ,लेकिन प्राची शर्मिंदा न हो ,इसलिए दादी ये नहीं बताना चाहती थी कि जब प्राची सो रही थी तो दादी ने उसके शरीर का अवलोकन किया था ।

प्राची : हां दादी ,हुआ था हमारा मिलन । मेरी तो हालत खराब कर दी है पापा ने ।

दादी : क्यों मेरी बच्ची, ऐसा क्या हुआ ?

प्राची : पता है दादी , पापा ने तो जबरदस्ती ही मेरी योनि में अपना दाल दिया ,मुझे बहुत दर्द हुआ दादी । मुझे लगा किसी ने चाकू से मेरे योनि को चीर दिया है। पापा का वो ,गरम लोहे का सरिया लग रहा था दादी ।

दादी : देख बाबू , तू अभी- अभी जवान हुई है । पहली बार था ,इसलिए तुझे लगा कि पापा तेरे साथ जबर्दस्ती कर रहे है । लेकिन हर लड़की को पहली बार ऐसे ही कोई पुरुष हो हैंडल करना पड़ता है । क्योंकि पहली बार में थोड़ा दर्द होता है , ओर लड़की उससे डर जाती है। अब सब सही होगा । मुझे पता है तुझे अब वो दर्द होगा वहां। पर तू घबरा मत ,ये सब नॉर्मल बात ही है।

प्राची : ओह ओक दादी।

दादी: अच्छा बेटी ये बता , पापा ने कंडोम तो नहीं पहना था ना।

प्राची इतना पर्सनल सवाल से शर्म से पानी पानी हो गई : नहीं दादी , ऐसे ही किया उन्होंने ।

दादी : चलो , भगवान का लाख लाख शुक्र है कि उसने मेरा कहा मना।

प्राची : दादी ,अपने पापा को कंडोम पहनने से क्यों रोका ।

दादी : तेरे लिए मेरी बच्ची, तेरा पहला संभोग था , तुझे उसका पूरा आनंद मिलना चाहिए था । जब तक नंगा लिंग ,तेरी योनि के दीवारों पे नहीं रगड़ खाता ,तो तुझे असली संभोग का पता कैसे चलता ।

प्राची : अच्छा दादी , थैंक यू।

प्राची दादी का धन्यवाद इसलिए किया क्योंकि वो देख रही थी कि दादी उसका कितना ख्याल करती है।

दादी: हम्ममम...अच्छा , ये बता , वो पापा ने बीज अंदर गिराया ना?

प्राची : जी दादी , उन्होंने सारा अंदर ही गिरा दिया ।

दादी : पांचों बार ?
प्राची : दादी ,आपको कैसे पता पापा ने ५ बार मेरे साथ मिलन किया ?
दादी इस सवाल से पकड़ी गई । अब झूठ बोलना सही नहीं था ।दादी ने सबेरे वाली सारी बात प्राची को बता दिया ।

प्राची दादी से लिपट गई और थोड़ा रोने जैसा मुंह बनाने लगी । दादी आप मेरे कारण पापा को वो डांट सुना दिया । पापा को माफ कर दो दादी । वो कल रात बहुत तड़प रहे थे । मेरे साथ मिलन करने में उनको बहुत सुकून मिल रहा था और वो अपने आप को रोक ही नहीं पा रहे थे । इसलिए मैने भी उनको नहीं रोका । मैने उनका साथ दिया दादी , गलत नहीं किया न मैने ?

दादी : नहीं बेटी बिल्कुल गलत नहीं किया । अच्छी बात इन सब में ये रही कि पापा तेरे गुप्तांग को पांच बार अपना वीर्य पिलाया है। मतलब तेरी प्रेग्नेंसी का संयोग बन सकता है ।
प्राची बस सर झुका के थोड़ा सा मुस्कुरा दी।

दादी : अब शर्मा क्यों रही है , बोल बनेगी न अपने पापा की बच्चे की मां।

प्राची : जी दादी , पापा और आपको जो ठीक लगे ।

दादी : शाबाश मेरी बच्ची, पर ये मत समझ के एक दिन से हो जाएगा ये सब , पापा का तुझे अब हर रात ऐसे ही साथ देना होगा । पापा बार बार प्रयास करेंगे ,फिर जा के कहीं होगा कुदरत का करिश्मा ।

प्राची समझ रही थी दादी किस प्रयास की बात कर रही थी , उसने बस सर हिला के हामी भर दी।

प्राची : दादी , पर मेरे गुप्तांग में बहुत दर्द हो रहा है , पापा ने सबेरे पेन किलर भी दिया था । तभी में यह बैठी हु । मै अब पापा के साथ ये सब नहीं निभा पाऊंगी दादी ।

दादी : हां मैं समझ रही ही बेटी , मै ने तेरे पापा से कह दिया है के तेरे बिल्कुल ही ठीक हो जाने पर ही अगला मिलन होगा।

दादी : रुक बेटी मैं थोड़ा तेरी राहत का जुगार करती हु । एक बार सेक देती हु , तुझे आराम मिलेगा ।

प्राची खुश हो गई ।
दादी ने पानी लाया और फिर दरवाजा बंद कर दिया कि प्रज्ञा को कुछ पता न चले , और दादी ने प्राची से बोला : आ बेटी , थोड़ा अपना साड़ी उठा और पेंटी खोल , सेक देती हु मैं।

दादी प्राची की योनि पहले भी देख चुकी थी तो उसे इस बार इतना शर्म नहीं आया ।

उसने पेंटी तो पहनी भी नहीं थी, इतना दर्द था ।

प्राची : दादी मैने पेंटी नहीं पहनी।

दादी : वाह,फिर जल्दी आ, और साड़ी उठा अपनी ।

प्राची ने वैसा की किया , उसका फूला हुआ चूत दादी के सामने खुल गया ।

दादी ने चूत का अवलोकन किया । योनि द्वार बड़ी हो चुकी थी और पहले से ज़्यादा खुली हुई लग रही थी , योनि के ऊपरी हिस्सा फूला हुआ था और लाल हो गया था । ये सब प्रमाण दे रहा था कि ये योनि अपना पहला चुदाई करवा चुका है।

दादी ने गरम पानी की पट्टी से हल्का हल्का चूत पे फिरने लगी और प्राची को बहुत राहत मिला ।

दादी : आज से ,जब तक तेरा दर्द ठीक नहीं होगा , पापा को इसके पास भी नहीं आने देना। पति को जितना तड़पाएगी वो उतना ही प्यार करेगा , थोड़े नखरे भी करना, हर बात ऐसे ही मत मान जाना ,जैसे रात में मान गई थी , देख पापा ने कैसे तेरी चूत की हालत कर दी है।

प्राची को बहुत सुकून मिल रहा था ।

पूरा दिन दादी ने रह-रह के ४-५ बार ऐसे ही प्राची के योनि की सिकाई करती रही। शाम तक प्राची का योनि का सूजन थोड़ा कम होने लग था।
 
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SamsuSlr

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Update 16:

पापा ने प्राची को आवाज लगाई : बाबू , ओ मेरी रानी , उठ भी जा मेरी दुल्हनिया।

पापा की आवाज के साथ ही प्राची का निद्रा भंग हो गया । प्राची ने धीरे से अपनी आंखें खोली और महसूस किया कि वो नंगी ही अपने पति या पिता ,जो भी कह लो, के सामने पड़ी थी।

वो जरा सा झेप सी गई , रात के अंधेरे में जो भी पापा ने उसके साथ किया वो तो ठीक था , लेकिन दिन के उजाले में उसका शरीर कुछ ज्यादा ही देखने योग्य लग रहा था । प्राची चादर अपने ऊपर ले लिया और थोड़ा उठने की कोशिश की। हायय्ययय..... मेरी गुप्तांग ....प्राची को एक बहुत तेज दर्द महसूस हुआ । उसने अपने चूत की तरफ नजर घुमाई। अरे यार....ये तो पूरा शूज गया है। पापा ने जैसे ही अपने बेटी की मनोदशा देखी उनके दिल में एक शर्मिंदगी सी महसूस हुआ।

पापा: क्या हुआ प्राची।

प्राची : पापा , आह, बहुत तेज दर्द हो रहा है वहां पे ।

पापा: ओह , मुझे माफ के दे बेटी ,मै रात को कुछ जायदा ही भावना में बह गया था , होश ही नहीं रहा कि तू एक कुंवारी लड़की थी कल रात से पहले ओर थोड़ा आराम से करना चाहिए और मुझे इतना देर तक तुम्हारी योनि में घर्षण नहीं करना चाहिए था । एक तो सील टूटी कल तुम्हारी उसका दर्द और फिर आज ये दर्द । सॉरी बेटी मुझे माफ के दे ।

प्राची थोड़ी रूआंसी सी हो के बोली : पापा इसमें आप की गलती थोड़े ना है। आप को किसी स्त्री का स्पर्श बहुत दिनों से नहीं मिला था तो आप मुझे कल जी भर के चोद लेना चाहते थे और अपने किया वो वैसा ही। मैं आप पे गुस्सा भी नहीं हु। मेरा तो कर्तव्य था ,कल रात को आपका साथ देना । आप मेरे पति जो बन गए है अब से।

पापा: वाह बेटी अब तो तू सयानी बिटिया के जैसे बाते करने लगी है। मैं वादा करता हु कि अब से मैं तुझे बहुत प्यार करूंगा बेटी।

प्राची अपने पापा से लिपट जाना चाहती थी मगर चूत की दर्द ने उसे उठाने तक नहीं दिया ।

चल बेटी थोड़ा हिम्मत कर और उठ के नहा ले ।

प्राची अपना सारा दम लगा के उठना चाह रही थी , पर उसे तो ऐसा लग रहा था कि पापा ने उसका बदन तोड़ के रख दिया है कल रात। उसके शरीर में जान ही नहीं है। वो तो रात को पापा का साथ देने में इतना छड़ी थी कि उसका सारा उर्जा ही समाप्त हो गया हो जैसे ।

प्राची : आह , पापा मै उठ ही नहीं पा रही ।

पापा के पास अब कोई रास्ता नहीं था । पापा ने अपने दराज में रखे एक पेन किलर दवाई प्राची को खिला दी और कहा : बेटी तेरा दर्द थोड़े देर में छू मंतर हो जाएगा । अब के लिए चल मेरे साथ मै तेरी फ्रेश होने में मदद करता हु।

प्राची : पापा आप कैसे मेरी मदद कर पाएंगे ।

पापा: अरे मैं तुझे अपनी बाहों में उठा के ले चलता हु बाथरूम ।

प्राची थोड़ा शरमाई और बोला: पापा , नहीं नहीं ये मत करिए मुझे बहुत शर्म आएगी।

पापा : बेटी ,अब मैं तेरा पति हु , रात को तुझे पूरी की पूरी नंगी कर के तेरी आबरू से खेला हु। तेरी गहराई को अपने मर्दानगी से नापा है मैने । तेरे स्तनों का स्वाद चखा हु। तेरी बच्चेदानी ने मेरा आखरी बूंद तक निचोड़ा है और मैने उसे अपने बिज से सींचा है। अब मुझसे क्या शर्माना मेरी रानी ।आ मेरी बाहों में ।

इतना बोल के पापा ने प्राची का चादर हटा के उसके बदन को फिर से नंगा कर दिया।

उसे अपने बाहों में भर के जकड़ लिया और उठा दिया । वो नग्न १९ साल की यौवन से भरी ,शर्माई सी, पापा की बाहों में झूल सी गई।

उसे पापा ने बाथ रूम में ले जा कर कमोड पे बिठा दिया और बोला , बेटी जब तेरा हो जाए तो मुझे बुला लेना , खुद से उठाने की कोशिश न करना ।

पापा बाथ रूम से बाहर निकल गए। वो बाहर तो आ गए पर उनका लन्ड फिर से हिचकोले मार के तन गया । पूरे ८ इंच लंबा विकराल लन्ड।

उधर १० मिनट बाद प्राची ने पापा को आवाज लगाई : पापा मेरा हो गया , आप आ जाइए ।

पापा अंदर गए तो प्राची अपने नित्य क्रिया से निपट चुकी थी और कमोड से उठने की कोशिश कर रही थी , पापा ने एक स्टूल जो रूम में पर था उसे बाथ रूम में लगा दिया और प्राची को उसपे बिठा दिया , उसको ब्रश कराया , और फिर नहाने की तैयारी में लग गए ।

पापा : बेटी आज बरसो बाद मन कर रहा है कि तेरे साथ नहा लु। तेरी मम्मी के साथ वो मैने बहुत दिनों से नहीं नहाया था ।

प्राची की ये बहुत रोमांटिक लगा: जी पापा , आप जैसा ठीक समझे ।

पापा ने प्राची के हामी सुनी और उनका तना हुआ लिंग और ऊफान मरने लगा ।

उन्होंने तौलिया खोल के लन्ड को आजाद कर दिया , अपने पत्नी बनी बेटी के सामने । रात को पापा के साथ सुहागरात तो जरूर हुई थी प्राची की , पर शर्म के मारे रात को वो पापा का औजार ही नहीं देख पाई थी। उसके मुंह से निकल गया : बाप रे......पापा अपने इतना बड़ा घुसाया था मेरी गुप्तांग में।

पापा: हां बेटी ,रात को इसी ने तेरी चूत द्वार तोड़ा था ।

प्राची अपने आप पे विश्वास नहीं कर पा रही थी कि इतना विकराल लण्ङ उसके छोटी से गुप्तांग में गई कैसे ।

पापा को अब नंगी प्राची को देख के बहुत ज्यादा जोश चढ़ गया ,लेकिन वो अभी चाह के भी प्राची में प्रवेश नहीं कर सकते थे । उन्होंने एक अलग उपाय निकाला ।

पापा: प्राची मेरी जान , मेरा फिर से मन कर रहा है , देख रही है न कितना अकड़ के खड़ा है ये तेरे नग्न दर्शन मात्र से । इसे थोड़ा शांत कर दोगी।

प्राची अंदर से दहल गई : पापा...ये कैसे ...नहीं नहीं ,पापा ...रहम करिए मुझ पे ....मेरी ये हालत नहीं है कि ये मै ले पाऊंगी अभी। बहुत दर्द हो रहा है पापा मेरी गुप्तांग में । प्लीज़ पापा...मुझे छोड़ दीजिए ।

पापा: अरे पागल..., इसे हमेशा तेरे गुप्तांग में डाल के ही शान्ति नहीं मिलेगा मुझे । अभी तो मैं इसे अगल तरीके से तेरे अंदर डालूंगा ।

रची : कैसे पापा?

पापा: तेरे दोनों होंठों के बीच से ये तेरे अंदर जायेगा और तू इसे चूस चूस के शान्त कर सकती है।

प्राची के लिए एकदम नया सा बात था। पापा अपना लन्ड उसके मुंह में देने की बात कर रहे थे । पर उसे ये अपने चुत में लेने से ज्यादा आसान लगा ।

प्राची : अच्छा पापा ,तो ये करना चाहते है आप मेरे साथ।

पापा: हा मेरी सैक्सी बेटी , मेरी मदद कर ।

पापा ने वो स्टूल एकदम झरना के नीचे लगा दिया और पानी चला दिया । प्राची का बदन भीगने लगा । पापा भी प्राची के सामने आ गए और अब प्राची का मुंह पापा के लिंग के एकदम सामने था ।

लो बेटी , थोड़ा अपना मुंह खोलो और इसे अंदर अपने मुंह में जाने दो । मुंह में ले के , लॉलीपॉप समझ के इसे वैसे ही चूसना ।

प्राची ने वैसा ही किया । वो पहले अपने जीभ से पापा के लिंग का सुपारा को छुआ।


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उसे पापा के लन्ड का स्वाद थोड़ा कसैला सा लगा । मगर लण्ङ से निकल रहा प्री कम का सुगन्ध प्राची को वो पागल कर रहा था । पापा ने प्राची के दोनों चूची अपने हाथों से थाम लिया और दबाने लगे । प्राची धीरे धीरे पापा का लौड़ा को अपने मुंह में इंच बाई इंच अन्दर लेती रही । लण्ङ की मोटाई से प्रज्ञा का मुंह एकदम ज्यादा ज्यादा खुल रहा था । वो आराम से पापा का लिंग का रस पान करने लगी । Sruuuppp...sruuppppp, chapppppppp-chapppp, gooooooo... गोओओप्प की आवाज और झरने से पानी गिरने की आवाज से पूरा बाथ रूम गूंज उठा।

पापा को परम आनंद महसूस होने लगा था । अपनी बेटी से शादी कर के उन्होंने बहुत सही फैसला किया था । एक दम मखमली गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठों से उनकी बेटी पापा का लन्ड अपने मुंह में लिए जा रही थीं।

IMG 20260221 023338बहुत अद्भुत नजारा था ये ।
पापा ने धीरे धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाई और फुल जोश में अपना लण्ङ अन्दर बाहर प्राची के मुंह में करने लगे । प्राची किसी अल्हड़ लड़की के जैसे लन्ड चूस रही थी , इसे पता चल रहा था कि उसने ऐसा पहली बार किया है । पापा का लिंग अपने बेटी के हलक तक चला जाता कभी ओर बीच बीच में प्राची का सांस तक अटक कर रह जाता था , फिर पापा अपना लौड़ा बाहर खींच लेते थे , और उसके जान में जान आती थी।

गप्प गप्प , गुप्प गुप्प की आवाज से लन्ड अब सटा सट प्राची के मुंह में जा रहा था । लगभग १० मिनट के अंतराल के बाद पापा इतना मखमली एहसास के आगे हार गए और उनका पानी अपनी पुत्री के गले में ही उतर गया। प्राची का मुंह पापा के गरम वीर्य से भर गया । उसे पता नहीं था कि वो उसे क्या करे , बाहर थूक दे या गटक जाए ।

पापा उसकी इशारे को समझते हुए उसे इशारे में ही बोला कि गटक जाओ।

प्राची तो नादान थी , वो पापा के कहे अनुसार एक घुट में सारा पानी पी गई। पापा बहुत खुश हुए क्योंकि उनका लण्ङ का स्वाद अब उनके बेटी को पता चल गया था । कल तो सारा पानी पापा ने प्राची के चूत को ही पिलाई थी । आज सारा पानी प्राची के हलक से नीचे गया था ।

प्राची को पापा का गरम पानी पी के थोड़ा अजीब जरूर लगा। पर अब वो पापा को मन थोड़ी कर सकती थी।

पापा: बेटी ,कैसा लगा प्रेम रस का स्वाद ।

प्राची : पापा , अच्छा लगा । बहुत गर्म था ।

पापा: थैंक यू मेरी बच्ची, तूने मेरे अरमान पूरे के दिए । आ मै तुझे नहा देता हु अब।

पापा ने प्राची का हर अंग रगड़ रगड़ के उसे नहाया । अब उनका हाथ , प्राची के नंगी पीठ पर फिरता, तो कभी चूची की गोलाई नापता । कभी चूत पे उगे हल्के हल्के बालों को सहलाता तो भी चूत के दाने को छेड़ते । पापा का हाथ प्राची की मनोदशा खराब करने लगा , वो परम सुख के तरफ बढ़ने लगी । ५ मिनट के ,पापा के हाथ से , छुअन के बाद ही प्राची के चूत गीली हो के बहने लगीं, उसके मुंह से अचानक की एक लंबी आह निकली , उसका शरीर अकर स गया। पापा समझ गए प्राची झर चुकी है।

अब दोनों बाप बेटी पूरा नहा के एक दूसरे को तौलिया से सूखने लगे । पापा ने प्राची के हर अंग को तौलिया से पोंछा, ओर बाहों में भर के ही बाहर आ गए । प्राची को पापा ने कपड़े खुद के हाथों से पहनाया और प्राची के मांग में सिन्दूर भरा । प्राची ने पापा को प्रणाम किया और पापा के सहार ले के बाहर की ओर चल दी। पेन किलर के कारण ही वो थोड़ा उठ पाई और पापा के सहारा ले के , लड़खड़ा के चल प रही थी।

रूम का गेट खुलते ही दादी पूजा के लिए दोनों को ले के पूजा घर की ओर चल दी। दादी पोती की ये दशा देख के अब चकित नहीं हुई थी ,क्योंकि वो प्राची की हालत उसे सोते हुए ममे ही देख ली थी। गरिमट थी कि वो अब चल प रही है। दादी ने सोचा पूजा के बाद वो प्राची से थोड़ा बात करेगी और उसे थोड़ा आराम मिले उसका वो कुछ उपाय करेगी।

३० मिनट बाद पूजा समाप्त हो चुका था । और घर में सभी नाश्ता करने चल दिए ।





Sandarr
 
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sexsarkar

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Update 18:

शाम को पापा घर आ चुके थे । सबने मिल के डिनर खाया और पापा और प्राची को फिर से एकांत मिल गया । वो दोनों उसी रूम में और बेड पे वापस आ गए थे ,जहां पापा ने कल बेदर्दी से प्राची की गुप्तांग भोगा था।

दादी ने पहले ही बोले था पापा से : बेटा , मेरी बहु के साथ , जैसा मैने बोला था , अभी कुछ दिनों तक कुछ मत करना । तुझे अपने आप पे कंट्रोल करना पड़ेगा बेटा।

पापा एकांत में आते ही एक जिम्मेदार पति की तरह , प्राची का हाथ अपने हाथ में लिए और बोला : बेटी मै कल के लिए अभी वो शर्मिंदा महसूस कर रहा हुआ। काश मैं तुझे कल जानवरों की तरह न पेला होता । तो आज रात वो मै तेरे योनि की प्यास मिटता ।

प्राची : नहीं पापा , आप कल की बाते भूल जाएं । आप बहुत अच्छे पापा और पति दोनों है मेरे लिए । आप अगर जानवर होते तो ,आज मुझे दर्द है ये जानते हुए भी, मेरे ऊपर चढ़ ही जाते। आप अलग है पापा। आप बहुत केयरिंग पति है।

पापा और बेटी प्यार में थे । दोनों की उस रात देर तक रोमांटिक बाते होती रही । ये बाते यह प्रमाण दे रही थी । की प्राची और पापा , अब पति और पत्नी के बंधन अच्छे से बंध रहे है। ओर अपना पुराना रिश्ता भूल के आगे बढ़ गए है।

उस रात पापा ने कुछ व नहीं किया । वो बस प्राची की होठों को चूसते रहे और कपड़े के ऊपर से ही अपने बेटी का गोलाई को दबाते रहे और फिर दोनों बाप बेटी लिपट के नींद के गहराई में खो गए।

अगले दिन प्राची के चाल में थीरा सुधार था । वो अब भी लंगड़ा के ही चल रही थी मगर आज बिना किसी सहारे के ।

दादी आज भी अपने पोती की वैसे ही सिकाई करती रही। और इसी तरह २ दिन बीत गए और अब चूत का सूजन एक दम खत्म सा हो गया था । प्राची की चाल नॉर्मल तो नहीं हुआ था । पर अब बहुत सुधार गया था ।

उस दिन प्राची, प्रज्ञा के कमरे में उसे दूध देने गई ।

प्राची : प्रज्ञा ,ये दूध पी लो , कितना मेहनत कर रही है एग्जाम के लिए ।

प्रज्ञा : जी दीदी....., मेरा मतलब है मां।

प्राची ओर प्रज्ञा का रिश्ता बदल चुका था ।

प्राची कमरे से बाहर जाने ही वाली थी । की प्रज्ञा ने उसे आवाज दिया : मां, जरा इधर आइए न मेरे पास ।

प्राची ने प्रज्ञा के मुंह से मां सुन के गदगद हो गई।

प्राची : हां बोल न प्रज्ञा।
प्रज्ञा: मां , आप ठीक तो है ना।

प्राची : हां बाबू ,मै बिल्कुल ठीक ही । तू ऐसा क्यों पूछ रही है?

प्रज्ञा : वो आप ३ दिन से ऐसे लंगड़ा लंगड़ा के चल रही है।

प्राची : वो तो बस , थोड़ी पैर में चोट लग गई थी ।
प्राची अभी वो सोच रही थी प्रज्ञा वही छोटी बच्ची है जिसे कुछ वी पता नहीं , पर प्रज्ञा तो दादी से अब कुछ जान चुकी थी ।

प्रज्ञा : अच्छा ,पापा ने आपको दर्द आपके वहां ( चूत की तरफ इशारा कर के ) में दिया और चोट आपको पैर में लग गई । ये कैसे मां, सर समझाइए ।

प्राची ये नहीं सोच रही थी कि प्रज्ञा अब ये सब पता होगा । वो आश्चर्य से भर गई।

प्राची : अरे ,तुझे ये सब किसने बताया , तू यही सब पढ़ रही है क्या आज कल।

प्रज्ञा : हां पढ़ तो रही हु ही , पर दादी ने भी सब बताया मुझे ।

प्राची समझ गई दादी ने प्रज्ञा को वो बिगाड़ दिया है। वो अंदर से थोड़ा मुस्कुरा के रह गई।

कहानी अभी जारी रहेगी.....।
 
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