Update 17:
जब प्राची बाहर आई लड़खड़ाते हुए , प्रज्ञा को समझ आ गया कि दीदी की चल पापा ने ही बिगड़ी है।
प्रज्ञा दादी से धीरे से बोली : दादी , दीदी को क्या हुआ ,रात के सेक्स का असर है क्या ?
दादी: अरे बेशर्म अपने मां के बारे में ऐसे बोलती है।
प्रज्ञा हंसने लगी।
उसने मजाक में ही प्राची के कान में जा के बोला : क्यों दीदी, पापा ने ज्यादा मेहनत कर दी क्या रात को।
प्राची : धत् बदमाश।
दोनों थोड़ा हंसने लगे ।
नाश्ता करते टाइम प्रज्ञा अपने दीदी और पापा को बार बार देख रही थी । उसे यकीन नहीं हो रहा था , जिस दीदी और पापा को वो अभी इतने शांति से खाते हुए देख रही थी वो दोनों रात में क्या क्या ,ओर कितना जबर्दस्त गुल खिला रहे थे । कितने वाइल्ड तरीके से रात को दीदी चीख रही थी। पापा को देखो जरा कितने शरीफ बन के खा रहे है। रात को तो दीदी की जान ही निकाल दी थी इन्होंने ।
उधर दादी भी उधेड़ बुन में थी कि प्राची का वो दर्द में कैसे मदद करे ,जिससे वो जल्दी अपने पति और पिता के साथ सहवास में भाग ले पाए और शंभोग कर पाए।
उधर पापा और प्राची चुप चाप खाना खा रहे थे।
खाना के बाद पापा ऑफिस निकल गए । और प्रज्ञा वी अपने रूम में अपना होमवर्क करने चली गई । उसके १२ के एग्जाम जल्दी ही होने वाले थे ।
दादी प्राची के ले के अपने घर ने आ गई ।
दादी : प्राची , मेरी बच्ची। कैसी रही पहली रात पापा के साथ।
प्राची थोड़ा मुस्कुराते हुए : अच्छी रही दादी।
दादी : सच सच बता बेटी ,मेरे सामने कुछ छुपाने की जरूरत नहीं है ,मै ही तुम्हारी दादी और मै ही तुम्हारी मां हु।
प्राची : दादी वो थोड़ा ....
दादी : क्या थोड़ा ?
प्राची : दादी वो थोड़ा दर्द हो रहा है रात के बाद वह पे ।
दादी : कहा पे बेटी ,मैने बोला न खुल के बता ।
प्राची : दादी योनि में ।
दादी : हाय मेरी बेटी , यानी पापा ने मिलन कर ही लिया तेरे साथ।
दादी को तो पता ही था कि पापा ने प्राची के साथ कितना सेक्स किया है ,लेकिन प्राची शर्मिंदा न हो ,इसलिए दादी ये नहीं बताना चाहती थी कि जब प्राची सो रही थी तो दादी ने उसके शरीर का अवलोकन किया था ।
प्राची : हां दादी ,हुआ था हमारा मिलन । मेरी तो हालत खराब कर दी है पापा ने ।
दादी : क्यों मेरी बच्ची, ऐसा क्या हुआ ?
प्राची : पता है दादी , पापा ने तो जबरदस्ती ही मेरी योनि में अपना दाल दिया ,मुझे बहुत दर्द हुआ दादी । मुझे लगा किसी ने चाकू से मेरे योनि को चीर दिया है। पापा का वो ,गरम लोहे का सरिया लग रहा था दादी ।
दादी : देख बाबू , तू अभी- अभी जवान हुई है । पहली बार था ,इसलिए तुझे लगा कि पापा तेरे साथ जबर्दस्ती कर रहे है । लेकिन हर लड़की को पहली बार ऐसे ही कोई पुरुष हो हैंडल करना पड़ता है । क्योंकि पहली बार में थोड़ा दर्द होता है , ओर लड़की उससे डर जाती है। अब सब सही होगा । मुझे पता है तुझे अब वो दर्द होगा वहां। पर तू घबरा मत ,ये सब नॉर्मल बात ही है।
प्राची : ओह ओक दादी।
दादी: अच्छा बेटी ये बता , पापा ने कंडोम तो नहीं पहना था ना।
प्राची इतना पर्सनल सवाल से शर्म से पानी पानी हो गई : नहीं दादी , ऐसे ही किया उन्होंने ।
दादी : चलो , भगवान का लाख लाख शुक्र है कि उसने मेरा कहा मना।
प्राची : दादी ,अपने पापा को कंडोम पहनने से क्यों रोका ।
दादी : तेरे लिए मेरी बच्ची, तेरा पहला संभोग था , तुझे उसका पूरा आनंद मिलना चाहिए था । जब तक नंगा लिंग ,तेरी योनि के दीवारों पे नहीं रगड़ खाता ,तो तुझे असली संभोग का पता कैसे चलता ।
प्राची : अच्छा दादी , थैंक यू।
प्राची दादी का धन्यवाद इसलिए किया क्योंकि वो देख रही थी कि दादी उसका कितना ख्याल करती है।
दादी: हम्ममम...अच्छा , ये बता , वो पापा ने बीज अंदर गिराया ना?
प्राची : जी दादी , उन्होंने सारा अंदर ही गिरा दिया ।
दादी : पांचों बार ?
प्राची : दादी ,आपको कैसे पता पापा ने ५ बार मेरे साथ मिलन किया ?
दादी इस सवाल से पकड़ी गई । अब झूठ बोलना सही नहीं था ।दादी ने सबेरे वाली सारी बात प्राची को बता दिया ।
प्राची दादी से लिपट गई और थोड़ा रोने जैसा मुंह बनाने लगी । दादी आप मेरे कारण पापा को वो डांट सुना दिया । पापा को माफ कर दो दादी । वो कल रात बहुत तड़प रहे थे । मेरे साथ मिलन करने में उनको बहुत सुकून मिल रहा था और वो अपने आप को रोक ही नहीं पा रहे थे । इसलिए मैने भी उनको नहीं रोका । मैने उनका साथ दिया दादी , गलत नहीं किया न मैने ?
दादी : नहीं बेटी बिल्कुल गलत नहीं किया । अच्छी बात इन सब में ये रही कि पापा तेरे गुप्तांग को पांच बार अपना वीर्य पिलाया है। मतलब तेरी प्रेग्नेंसी का संयोग बन सकता है ।
प्राची बस सर झुका के थोड़ा सा मुस्कुरा दी।
दादी : अब शर्मा क्यों रही है , बोल बनेगी न अपने पापा की बच्चे की मां।
प्राची : जी दादी , पापा और आपको जो ठीक लगे ।
दादी : शाबाश मेरी बच्ची, पर ये मत समझ के एक दिन से हो जाएगा ये सब , पापा का तुझे अब हर रात ऐसे ही साथ देना होगा । पापा बार बार प्रयास करेंगे ,फिर जा के कहीं होगा कुदरत का करिश्मा ।
प्राची समझ रही थी दादी किस प्रयास की बात कर रही थी , उसने बस सर हिला के हामी भर दी।
प्राची : दादी , पर मेरे गुप्तांग में बहुत दर्द हो रहा है , पापा ने सबेरे पेन किलर भी दिया था । तभी में यह बैठी हु । मै अब पापा के साथ ये सब नहीं निभा पाऊंगी दादी ।
दादी : हां मैं समझ रही ही बेटी , मै ने तेरे पापा से कह दिया है के तेरे बिल्कुल ही ठीक हो जाने पर ही अगला मिलन होगा।
दादी : रुक बेटी मैं थोड़ा तेरी राहत का जुगार करती हु । एक बार सेक देती हु , तुझे आराम मिलेगा ।
प्राची खुश हो गई ।
दादी ने पानी लाया और फिर दरवाजा बंद कर दिया कि प्रज्ञा को कुछ पता न चले , और दादी ने प्राची से बोला : आ बेटी , थोड़ा अपना साड़ी उठा और पेंटी खोल , सेक देती हु मैं।
दादी प्राची की योनि पहले भी देख चुकी थी तो उसे इस बार इतना शर्म नहीं आया ।
उसने पेंटी तो पहनी भी नहीं थी, इतना दर्द था ।
प्राची : दादी मैने पेंटी नहीं पहनी।
दादी : वाह,फिर जल्दी आ, और साड़ी उठा अपनी ।
प्राची ने वैसा की किया , उसका फूला हुआ चूत दादी के सामने खुल गया ।
दादी ने चूत का अवलोकन किया । योनि द्वार बड़ी हो चुकी थी और पहले से ज़्यादा खुली हुई लग रही थी , योनि के ऊपरी हिस्सा फूला हुआ था और लाल हो गया था । ये सब प्रमाण दे रहा था कि ये योनि अपना पहला चुदाई करवा चुका है।
दादी ने गरम पानी की पट्टी से हल्का हल्का चूत पे फिरने लगी और प्राची को बहुत राहत मिला ।
दादी : आज से ,जब तक तेरा दर्द ठीक नहीं होगा , पापा को इसके पास भी नहीं आने देना। पति को जितना तड़पाएगी वो उतना ही प्यार करेगा , थोड़े नखरे भी करना, हर बात ऐसे ही मत मान जाना ,जैसे रात में मान गई थी , देख पापा ने कैसे तेरी चूत की हालत कर दी है।
प्राची को बहुत सुकून मिल रहा था ।
पूरा दिन दादी ने रह-रह के ४-५ बार ऐसे ही प्राची के योनि की सिकाई करती रही। शाम तक प्राची का योनि का सूजन थोड़ा कम होने लग था।