मिसेज मोइत्रा और उनके रसगुल्ले
मिसेज मोइत्रा की दोनों बेटियों की बुलबुलों में आग लगी हुयी थी,
लेकिन उनसे ज्यादा मिसेज मोइत्रा गर्मायी हुईं थी, और बस यही सोच रही थीं, ये स्साला लौंडा, अगर आज पट जाए और किसी तरह रात में उनके पास रुक जाए तो बस, मिसेज मोइत्रा का १६ साल का उपवास आज ख़त्म हो जाए। कोमल ने तो बोला ही है की वो अपनी दोनों छोटी बहनों को शाम को पार्टी के बाद अपने साथ ले जायेगी, मंजू तो अभी चली जायेगी और २४ घंटे बाद कल दोपहर को लौटेगी, फिर तो, अगर ये सीधे से नहीं मानेगा तो मिसेज मोइत्रा ने तय कर लिया था उसका रेप कर देंगी। ललचाता तो है ही उनके जोबन पे वो, अपनी दोनों सालियों को छोड़ के सास के चक्कर में पड़ा रहता है, तो ले ले न जोबन का रस, बस यही है की कुछ ज्यादा ही शर्मीला है तो भले आज जबरदस्त जबरदस्ती करनी पड़े, बिना उसे पेले वो छोड़ेंगी नहीं।
और गाजर की खीर भी पी गया , तो असर तो उसका होगा ही, आज तक मंजू की कोई बात गलत नहीं हुई है।
चार साड़ियां मिसेज मोइत्रा बदल चुकी थीं और अंत में आलमोस्ट ट्रांसपेरेंट आग लगाने वाली एक रेड शिफॉन की साडी उन्होंने निकाली, उनके भरे बदन पे, गोर रंग पे खूब फबती थी और साथ का एक मैचिंग लो कट का ब्लाउज भी , और उसे कूल्हे के नीचे से बाँधा , उन्हें मालूम था उनकी गहरी नाभि का मर्दो पर क्या असर पड़ता है, गोरा चिकना पेट, चौड़े कूल्हे, और गहरी नाभी, किसी का भी ईमान डोल जाता,
वो शीशे से अपनी बेटियों की छेड़खानी देख रही थीं।
दोनों एकदम अपने जीजू की तरह बुद्धू हैं। मिसेज मोइत्रा ने शीशे में अपनी बेटियों को देखते हुए सोचा, 'अगर उन की जगह वो होती और उनका कोई जीजू ऐसा हैंडसम होता तो अब तक कब का शीशे में उतार चुकी होतीं "
खीर कब की ख़त्म हो चुकी थी, और छुटकी अब अपने जीजू को अपने हाथ से पानी पिला रही थी, और वो बार बार जिद कर रहे थे अपने हाथ से पानी पीने को, बड़ी ने छुटकी को कुछ इशारा किया और छीना झपटी में पानी 'सीधे वहीँ ' गिरा जहाँ खूंटा तना था, और एकम भीग गया।
अब तो दोनों दुष्टों को मौका मिल गया, " अरे जीजू इत्ते जोर से आ रही थी तो वाशरूम चले जाते " बड़ी बोली
" अरे मैं बाहर से खड़ी खड़ी सु सु सु सु बोल भी देती, आप कहते तो " छुटकी ने चिढ़ाया।
मिसेज मोइत्रा तो शीशे में देख रही थीं लेकिन मंजू साफ़ साफ़ देख रही थी और उसने जोर से दोनों लड़कियों को चिढ़ाया, " जब वो पानी गिरायेगा न सफ़ेद वाला तो पता चलेगा, पेट फूलने लगेगा , गाभिन हो जाओगी "
" अरे आप भी न, हिम्मत है क्या इनकी ? फिर आप पहले की बात बोल रही हैं, अब दवा आती है, पहले खाओ, बाद में खाओ, कोई पेट वेट नहीं फूलता, "
छुटकी वहीँ से कपडे से उनके पैंट को रगड़ते बोली, और मिसेज मोइत्रा का अब लगा की उनकी बेटियां बड़ी हो गयी हैं। और वो ये भी देख रही थी, पानी सुखाना एक बहाना था, असल में वो जीजू के तन्नाए खूंटे का मज़ा ले रही थी।
लेकिन मिसेज मोइत्रा का दिमाग शरारत का कारखाना था और अब मंजू की सोहबत में दिन रात बस एक ही बात घूमती थी, एयर मुस्कराते हुए उन्होंने दोनों बेटियों को गुहार लगाई,
" तुम दोनों कैसी सालिया हों, बेचारे मेरे दामाद का ख्याल ही नहीं रखती, पहले तो खुद पानी गिराया, फिर उसे चिढ़ा रही हो। अरे कहीं जुकाम हो गया, बीमार पड़ गया, गीला हो के तो , ऐसे गीली गीली पेंट पहने , उतार दो न "
अबकी बड़ी बेटी मैदान में आ गयी, " आपकी सास का हुकुम है सुन लिया न, और आप हम दोनों को ही बोलते हैं न , चलिए पैंट उतार दीजिये चुपचाप, सूख जायेगी तो पहन लीजियेगा "
मिसेज मोइत्रा से सर पीट लिया, ये लड़कियां मेरी कब बड़ी होंगी, ऐसा मौका छोड़ रही है। दामाद तो बुद्धू है ही, लड़कियां भी। उन्होंने वहीँ से हड़काया, " तुम दोनों किस मर्ज की दवा हो, अरे दो दो सालियाँ होते हुए दामाद अपने हाथ का इस्तेमाल करे "
लेकिन छुटकी माँ का इशारा मिलने के पहले ही बेल्ट खोल के फेंक चुकी थी और अब तो माँ की आज्ञा, दोनों बेटीयों ने मिल के उन की पैंट खींच के वहीँ फेंक दिया जहाँ थोड़ी देर पहले, मंजू ने दोनों लड़कियों की पैंटी उतार के फेंकी थी,
" क्या जीजू, कल की लौंडियों की तरह शर्मा रहे हैं, पैंट के नीचे कुछ नहीं पहना है क्या " शरारत से उनकी आँख में झांकते हुए छोटी बोली
" अरे, नहीं पहना है तो क्या हुआ, बड़ी दीदी दीदी करती हो। तेरी दीदी रोज देखती हैं, प्यार दुलार करती हैं आज दीदी की छोटी बहने भी देख लेंगी, ऐसा क्या है " मंजू ने दोनों लड़कियों को छेड़ा।
लेकिन दोनों टीनेजर्स देख नहीं पायीं, शेर अभी भी परदे में था, पर देख तो चुकी ही थीं, बीसो बार पिक्स में, वीडियो में, दीदी उनकी रोज भेजती थीं, एक बार तो लाइव भी दिखाया था, व्हाट्सऐप वीडियो काल पे, और अभी भी अंदाज साफ़ लग रहा था। शेर एक बक्सर शार्ट में था आलमोस्ट ट्रांसपेरेंट और खूंटा एकदम तना हुआ तो मोटाई लम्बाई, कड़ेपन का पूरा अंदाजा लग रहा था।
और तभी मिसेज मोइत्रा बाहर निकल कर आ गयीं, जहान उनकी दर्जा नौ वाली दोनों लड़कियां जिन्हे उन्होंने अबतक लड़कों की नजर से बचाकर पाला था, अपने जीजू के साथ खड़ी थीं।
और मिसेज मोइत्रा को देखकर जब उन्होंने खड़े होने की कोशिश की तो मिसेज मोइत्रा ने धप से धक्का देकर उन्हें बैठा दिया और सीधे उनके सामने खड़ी हो गयीं,
बेचारे उनकी ऊपर की सांस ऊपर नीचे की नीचे, जैसे लग रहा था पहली बार मिसेज मोइत्रा को पहली बार देख रहे हों, क्या रूप रंग, क्या जोबन।
उनके एमआइएलएफ वाले सारे वेट ड्रीम्स बचपन से लेकर आज तक के जैसे साकार हो गए हों, मूर्त होकर मिसेज मोइत्रा में समा गए हों, लाल रंग की करीब करीब पारदर्शक साड़ी आग की लपट बनी मिसेज मोइत्रा के शोले ऐसी देह को बस एक पतली लकीर से लपेटे हुए थी, खूब भरे भरे जोबन, कड़े कड़े गदराये छोटी सी चोली में समां नहीं रहे थे। खूब भरी भरीगोरी मांसल देह, लेकिन कमर पर एक छटांक भी एक्स्ट्रा फैट नहीं और सोने की पतली सी तगड़ी, नाभि के ठीक नीचे, और नाभि भी कितनी गहरी और गोरी, चौड़े कूल्हे, और साड़ी कूल्हे से भी खूब नीचे बाँधी,
बस यही, यही,
किसी तरह उन्होंने थूक गटका, बात मन की मन में रह गयी, और मिसेज मोइत्रा का आँचल छलका, जैसे रणभूमि में किसी ने तलवार निकाल ली हो, पल भर के लिए डिजाइनर चोली उनके सामने थी, ऐसी कटिंग की कड़ाव, उभार, गोराई सब छलक के बिखर गयी, वो आँचल ठीक करने के बहाने मुड़ी। एकदम नंगी गोरी चिकनी पीठ, पान के पत्ते की तरह और पीठ पर गहरी नाली, कामुक स्त्रियों की सबसे बड़ी पहचान, चोली बस अंगुल भर की गुलाबी रस्सी से जैसे बंधी हो,
मिसेज मोइत्रा भी समझ गयीं की जादू चल गया और बस अब ये स्साला किसी तरह रात को रुक जाए ने तो आज तो इस चिकने को अच्छी तरह से निचोड़ के ही रहेंगी, कोमल ने बहुत पिक्स दिखायीं हैं आज उन का मौका रहेगा। बस स्साला किसी तरह रात में उनके हत्थे चढ़ जाए तो गाजर की खीर का पूरा असर होगा।
चेहरा उनका तमतमाया, खूंटा जो पहले ही खड़ा था मिसेज मोइत्रा की बेटियों की शरारत से अब तो एकदम शार्ट को फाड़ रहा था,
और किचन से देख के दोनों उनकी सालिया मुस्करा रही थीं, अब मैदान उन्होंने माँ के हवाले कर दिया था।
मिसेज मोइत्रा ने उनकी ओर हाथ बढ़ाया और वो व्ही हाथ पकड़ के खड़े हो गए और मिसेज मोइत्रा अपने दामाद से एकदम चिपक के खड़ी होगयीं, और अपनी देह अपने दामाद के देह से देह रगड़ते चिढ़ाते फुसफुसाते बोलीं, " कुछ हुआ क्या, मुन्ना "
उस मत्स्यगंधा की गंध पूरी तरह उनके देह में रच बस गयी थी, जैसे किसी ने मूठ मार दी हो, जवाब ठीक ९० डिग्री खड़े उनके बालिश्त भर के खूंटे ने दिए और मिसेज मोइत्रा पर मंजू की बातों का असर था, " बेटियों से लाज अब ख़तम , उन दोनों के सामने ही खूंटा पकड़ लेना, और ऊपर से नहीं, चड्ढी में हाथ डाल के, और एक बार कस के दबाओगी न, पकड़ के मुठियाओगी, तो स्साली तुझे भी असली ताकत अपने दामाद की मालूम होगी और उसे भी तेरा मन पता चल जाएगा, फिर सब हिचक ख़तम और मजा शुरू। और अपनी इन लड़कियों के डरती लजाती रह जाओगी और ये जाती हुयी जवानी कब चली जायेगी पता नहीं चलेगा, "
और मिसेज मोइत्रा ने भट्ठी में हाथ डाल दिया।
उन्हें लगा उन्होंने अंगारे को पकड़ लिया है, हाथ जल गया है, और ये नहीं की पहली बार उन्होंने पकड़ा होगा, बोर्डिंग में ही, अपनी इन दोनों बेटियों से थोड़ी ही बड़ी रही होंगीं, दर्जा बारह पास करने के पहले दर्जन भर से ज्यादा, लेकिन कोई दूर दराज तक भी ऐसा कड़क, मोटा गरम नहीं था, और पिछले सोलह साल से कभी कभार मिस्टर मोइत्रा के केंचुए के अलावा,
उनसे नहीं रहा गया, और मिसेज मोइत्रा ने हल्के से दबाया। मंजू सही कह रही थी, लोहे का रॉड झूठ है। एक बार ये अंदर ठोंक दे, सोलह साल के इन्तजार का फल वसूल हो जाएगा, हलके हलके उन्होंने मुठियाना शुरू कर दिया, सुपाड़े पर ऊँगली लगा के देखा, एकदम खुला गुस्साया,
और उसी समय बाहर हार्न बजा, दरवाजा खुला, और कोमल अंदर, उनकी दोनों बेटियां लहक के अपनी दी के पास चिपक गयीं,
मिसेज मोइत्रा ने देखा, मुस्कुरायीं, और अभी भी हाथ शॉर्ट से बाहर नहीं निकाला।
वो उस तिलिस्म से बाहर आ गए थे, और कोमल ने चिढ़ाया, " लगी रहिये "
" एकदम, बेटी से पहले दामाद पर सास का हक होता है " हँसते हुए मिसेज मोइत्रा बोलीं और अपने मन की फरमाइश, रात भर के लिए दामाद को बेटी से मांगने की, करने वाली थीं की कोमल ने उन्हें चुप करा दिया।
" एकदम और उस से पहले छोटी बहनों का " कुछ प्यार दुलार से कुछ लेस्बो फील से उन दोनों छोटी बंगालिनों के चिकने गाल सहलाते हुए वो बोलीं, और मिसेज मोइत्रा ने अपनी मन की बात कहने की कोशिश की, लेकिन उनकी मुंह बोली बेटी ने बात काट दी और अपनी बात सुना दी,
" एक बात अभी से आप से कह रही हूँ, शाम को क्लब से लौटते थोड़ी देर हो जायेगी, और उसके बाद मैं अपनी दोनों बहनों को अपने साथ ले जाउंगी मस्त पार्टी होगी और कल से वहीँ से तीज प्रिंसेज के लिए हम तीनो बहने "
लेकिन उनकी बात छुटकी ने काट दी, अपने जीजू को आँखों से चिढ़ाते हुए
" लेकिन दी जीजू को मत ले चलिएगा पार्टी में, वो वहां भी फिजिक्स के इक्वेशन पूछेंगे, आज दिन भर तो बायोलॉजी पढ़ाएंगे ही "
" एकदम नहीं गर्ल्स ओनली पार्टी होगी " कोमल ने अपनी बहन की बात मान ली और मिसेज मोइत्रा को आगे का काम पकड़ा दिया, " और ये दामाद आपका, आपके हवाले, खूब सेवा करवाइयेगा। आप ने कहा था मंजू भी नहीं है तो घर का सब काम, और जो भी काम हो "
अब मंजू भी मैदान में आ गई। किचेन समेटते बोली,
" मैं कल बारह बजे आउंगी, तब तक अपने इस साले दामाद से झाडू, पोंछा, नाश्ता खाना सब बनवा लीजिएगा। झाड़ता बहुत अच्छा है ये। "
और अगला इंस्ट्रक्शन इन्हे मिला, " शाम को लौटने में देर हो जायेगी तो मेरी दोनों बहनो का पूरा ख्याल रखियेगा और इन दोनों की सब बात मानियेगा और रात में अपने सास की "
और फिर दोनों की निगाह घडी पर पड़ी -१० -४८
" जल्द निकलिए, आप के पहुँचने का टाइम १० बजकर ५५ है , आप की वेलकम पार्टी इन्तजार कर रही होगी और आर आप जानती हैं ११ बजे के बाद पहुँचने वालियों के लिए क्या पनिशमेंट रखा गया है। " हंसती हुयी कोमल मिसेज मोइत्रा का हाथ पकड़ के खींचती हुयी ले गयी।
इतनी देर से दोनों टीनेजर्स भी अपनी दी से बिन बोले आँखों से यही गुहार लगा रही थी, " दी जल्दी से मम्मी को ले जाइये "
पीछे पीछे मंजू भी निकल गयी और बोलती गयी, दरवाजा अंदर से ठीक से बंद कर लो, और बाहर के गेट में भी ताला लगा लो, तुम लोगो की दी और मम्मी तो शाम को सात बजे से पहले आएँगी नहीं।
जीजा और जवानी की कुण्डी खड़काती दोनों जुड़वा सालिया एक ही बात सोच रही थीं, " पूरे ८ घंटे हैं "
घड़ी बता रही थी कि अभी १० बजकर ५० मिनट हो गए हैं।
बेचारा कोमल का पति.... पहले तो इतना काम दे दिया कोमल ने इसको पहले दोनों रसगुल्लों का ख्याल रखना है और फिर रात में बंगाल वाली सास की सारी बातें माननी है.....



अब इसका क्या होगा....है तो आदमी ही.... 24 घंटे में कितनी मेहनत करेगा बेचारा... पहले 2 2 कुंवारी कन्याओं की आगे से opening फिर पीछे से खुदाई...
और रात में बुढ़ी सास की आगे और पीछे से खुदाई.....









