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Adultery Housewife Ko Boldwife Banaya

RishuG

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रेनू बेडरूम में “तैयार” होने गई थी। हम दोनों सोफे पर बैठे, गिलास हाथ में, पर किसी की हिम्मत नहीं थी कुछ बोलने की। हवा में सिर्फ़ तनाव था, गाढ़ा, गर्म, चिपचिपा।

फिर बेडरूम का दरवाज़ा धीरे से खुला। हर कदम के साथ कमरे में उसकी परफ़्यूम की मीठी गंध और चूत की तेज़, नमकीन खुशबू फैलने लगी। रेनू ऊपर बिलकुल नंगी थी और नीचे सिर्फ एक पेंटी पहने थी।



Yrn-UJa

गले में सिर्फ़ मंगलसूत्र, जो उसकी भारी चूचियों के बीच झूल रहा था, हर कदम पर हल्का सा झनझना रहा था। होंठ खून जैसे लाल, आँखें काजल से काली, पूरा बदन ताज़ा वैक्स किया हुआ… चिकना, चमकदार, पसीने की हल्की चमक।

राजेश के पास आकर उसने पेंटी भी उतार दी अब मैंने देखा की उसकी चूत एकदम क्लीन शेव थी, गुलाबी, होंठ हल्के से खुले हुए, बीच में हल्का सा चमकता हुआ रस। हर कदम के साथ उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, निप्पल इतने सख्त कि काटने को जी चाहे।

राजेश का गिलास हाथ से छूट गया। उसकी पैंट में लंड इतनी जोर से उभरा कि ज़िप फटने की हालत हो गयी। रेनू सीधे राजेश के पास गई। उसने उसकी ज़िप पर उँगलियाँ फेरीं, धीरे से मसलते हुए फुसफुसाई,

“इतना सख्त? अभी तो मैंने छुआ भी नहीं…”

फिर मेरी तरफ देखा, आँखों में शरारत और चुनौती, “देखो मनीष… तुम्हारा दोस्त कितना बेचैन है। तुम तो बस देखते रहना, ये मुझे आज अच्छे से चोदेगा… हैं न राजेश।”

राजेश ने मेरी तरफ देखा। मैंने सिर्फ़ सिर हिलाया, दिल में जलन और उत्तेजना का मिश्रण महसूस करते हुए। पल भर में राजेश नंगा। उसका लंड मेरे से भी मोटा, नसें फूली हुईं, सुपारा पूरा लाल, उस पर पहले से ही चिपचिपा पानी चमक रहा था।

रेनू ने उसका अंडरवियर अपने पैर से खींचा और दूर फेंक दिया। फिर राजेश की गोद में बैठ गई। उसकी गीली चूत और गांड सीधे उस मोटे लंड पर रगड़ने लगी। लंड उसकी गांड की दरार में फँस गया, उसकी गर्मी और चिपचिपाहट साफ़ महसूस हो रही थी। वो धीरे-धीरे कमर हिलाने लगी, लंड को अपनी रसदार चूत से गीला करती हुई।

“इधर कई दिनों से काम कर करके मैं बहुत थक गई हूँ…” उसने बच्ची जैसी आवाज़ में राजेश से कहा, “आज आप मुझे अपने हाथ से खाना खिलाओ ना… प्लीज़?”

खाना शुरू हुआ। राजेश ने रोटी तोड़ी, दाल-सब्जी उँगलियों से उठाई और रेनू के लाल होंठों पर रखी। रेनू ने जीभ निकाल कर चाटा, फिर मुँह में लिया। कभी जानबूझ कर सब्जी अपनी चूचियों पर गिरा देती और राजेश से चाटने को कहती। राजेश झुक कर उसकी चूचियों से एक-एक कतरा चाटता, निप्पल को दाँतों से कुरेदता।

फिर रेनू ने अपना चबाया हुआ निवाला राजेश के मुँह में डाला। राजेश ने आँखें बंद कर के स्वीकार किया। रेनू ने सब्जी उँगलियों पर ली, राजेश के लंड पर अच्छे से मली, फिर वही उँगलियाँ चाटते हुए बोली, “हम्म… तुम्हारे लंड का नमकीन स्वाद… सब्जी में भी कितना अच्छा लग रहा है।”
 

RishuG

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खाना खत्म होते ही मैंने रेनू का हाथ पकड़ा और खींच कर बेडरूम की ओर चल लिया। अगर राजेश ने ट्रान्सफर की बेवकूफी न की होती तो मैंने इसको धीरे धीरे आगे बढ़ने देता और आज सिर्फ राजेश को चोदने देता लेकिन मुझे पता था की ज्यादा समय नहीं है तो आज ही रेनू को थ्रीसम का मजा देना था। राजेश को मैंने पीछे आने को बोला और रेनू को बिस्तर के बीचों-बीच बिठाया। मैं पीछे की तरफ, राजेश दाईं तरफ।

हमने उसके होंठ चूमें। मैंने उसकी जीभ चूसी, राजेश ने उसकी गर्दन। फिर मैंने उसका बायाँ स्तन पूरा मुँह में लिया, निप्पल को दाँतों से काटा। राजेश ने दायाँ। रेनू की सिसकारियाँ शुरू हो गईं, “आह्ह… खा जाओ मुझे… दोनों मिल कर…”

मैं नीचे सरका। उसकी चूत पर जीभ फेरी। मैंने जोर-जोर से चाटना शुरू किया। रेनू का बदन काँप उठा, टाँगें मेरे कंधों पर लिपट गईं।




SK


राजेश ने अपना मोटा लंड उसके मुँह के पास ले गया। रेनू ने पहले मना किया, पर राजेश भी अब वाइल्ड हो गया था, आज वो मैडम मैडम नहीं कर रहा था क्योंकि मैंने उसको खुली छूट दी थी तो उसने रेनू के बाल पकड़ कर जोर से खींचा और बोला, “तू बहुत दिन से तडपा रही है लेकिन अब और नहीं, चल चूस रंडी… तुझे आज सिखाता हूँ असली मर्द कैसे चुदाई करता है।” रेनू ने आँखें बंद कीं और राजेश का लंड गले तक ले लिया। उसकी गाल फूल गए, लार टपकने लगी।

मैंने उसकी टाँगें कंधों पर रखीं और अपना लंड उसकी चूत में एक झटके में पूरा पेल दिया। ठप ठप ठप… दस मिनट बाद राजेश ने मेरी जगह ली। उसने रेनू के गाल पर जोरदार थप्पड़ मारा और बोला, “अब मेरी बारी, तेरे पति से ज्यादा मोटा है मेरा… चिल्ला रंडी।” उसका मोटा लंड अंदर जाता देख मुझे एक सुकून मिला लेकिन रेनू चीखी, “आह… बहुत मोटा है…”

फिर असली खेल। मैंने रेनू को घोड़ी बना दिया। गांड ऊपर। थूक लगाया, उंगली से खोला। फिर अपना लंड गांड के छेद पर टिकाया। रेनू की साँस रुक गई। राजेश ने उसका मुँह अपने लंड से बंद कर दिया। मैंने एक जोरदार झटका मारा। आधा लंड अंदर। रेनू की आँखों से आँसू। मैं रुका नहीं, पूरा अंदर ठूँस दिया। अब दर्द के बाद मजा। रेनू खुद गांड पीछे करने लगी। फिर राजेश ने उसकी चूत लंड पेल कर धक्के मारने शुरू किये, बीच-बीच में उसके चूतड़ों पर जोर-जोर से थप्पड़ मारता, “चल कुतिया… तेज हिला… तेरे पति को दिखा कि तू कितनी बड़ी रंडी है।”



DP

मैं नीचे लेटा। रेनू मेरे ऊपर चढ़ी, मेरा लंड उसकी गांड में पूरा। राजेश सामने से आया और उसकी चूत में अपना मोटा लंड पेल दिया, उसके गले को पकड़ कर दबाते हुए बोला, “साँस मत ले… आज तुझे रफ़ इस्तेमाल करूँगा, तेरे पति के सामने।”

दोनों लंड एक पतली सी दीवार के फर्क से एक-दूसरे को रगड़ रहे थे। रेनू की आँखें पलट गईं, मुँह खुला, लार टपक रही थी। वो बस चिल्ला रही थी,

“हाँ… फाड़ दो… दोनों छेद एक साथ… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… आज मुझे मार डालो…”



DP1

हमने स्पीड बढ़ाई। रेनू की चूत से फव्वारे छूटने लगे। चार बार, पाँच बार… हर बार उसका बदन बुरी तरह काँपता।

राजेश नीचे लेटा, रेनू उसके ऊपर, उसका लंड उसकी चूत में। मैं पीछे से उसकी गांड में। दोनों एक साथ तेज़-तेज़ धक्के। राजेश ने उसके बाल पकड़ कर खींचे और बोला, “देखिये मनीष सर… आपकी बीवी मेरे नीचे कैसे तड़प रही है… आज देखिये कैसे इसकी चीखे निकलवाता हूँ।” बिस्तर की आवाज़ के साथ रेनू की चीखें पूरे बंगले में गूँज रही थीं।

आखिर में हमने एक साथ झड़ने का प्लान बनाया। राजेश ने चूत में, मैंने गांड में पूरा माल उड़ेल दिया। रेनू का बदन बुरी तरह काँप उठा। वो छठी बार झड़ी, इस बार इतना रस कि बिस्तर पूरी तरह भीग गया। जब हमने लंड निकाले तो दोनों छेदों से गाढ़ा वीर्य की मोटी धारें बह रही थीं। चूत और गांड पूरी तरह खुली हुईं, लाल, सूजी हुईं।
उसका बदन पसीने, लार, वीर्य से लथपथ। साँसें इतनी तेज़ कि छाती फट जाएगी। आँखें बंद, होंठ खुले, चेहरा पूरी तरह पागल। राजेश और मैं एक-दूसरे को देख मुस्कुराए।

रेनू ने थकी, कँपकँपाती आवाज़ में फुसफुसाया, “अब से… जब मन करे… दोनों मिल कर मेरी ऐसे ही लो… मैं तुम्हारी साझा रंडी हूँ… हमेशा के लिए।”


Untitled-1

फिर वो बेहोश-सी हो कर लुढ़क गई। मनीष थक कर बगल में सो गया था। उसकी साँसें नियमित हो चुकी थीं, लेकिन राजेश अभी भी जाग रहा था। अपना लंड पैंट में डालकर किचन की तरफ गया, शायद पानी पीने। रेनू अभी भी बिस्तर पर लेटी थी, उसका बदन पूरी तरह लथपथ, दोनों छेदों से हमारा माल रिस रहा था। वो आँखें बंद करके लेटी रही, लेकिन उसकी साँसें तेज़ थीं, जैसे मन में कोई तूफ़ान चल रहा हो।
 
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कुछ मिनट बाद, जब मनीष पूरी तरह सो गया, रेनू धीरे से उठी। उसकी टाँगें अभी भी काँप रही थीं, चूत और गांड में जलन हो रही थी। वो बाथरूम की तरफ गई, लेकिन रास्ते में रुक गई। आईने में खुद को देखा—चेहरे पर लार और पसीने के निशान, चूचियों पर काटने के दाग, और नीचे का हिस्सा लाल-सूजा हुआ। शादी के बाद इतने सालों में वो कभी इतनी खुली नहीं थी। मनीष उसका पति था, और आज उसने उसके सामने किसी और मर्द से खुद को चुदवाया था। "मैं एक अच्छी घरेलू औरत थी... अब क्या बन गई हूँ? पहले उस शाद के साथ और फिर राजेश के साथ ये सब... मनीष क्या सोच रहा होगा?" उसका मन बोझिल हो गया। वो बाथरूम में घुस गई, शावर ऑन किया और गर्म पानी के नीचे खड़ी हो गई।


BR

राजेश बाहर से आवाज़ सुनकर अंदर आया। वो रेनू को शावर के नीचे देखा। उसने दरवाज़ा खोला और अंदर घुस गया। राजेश ने शावर बंद किया और उसे तौलिए से लपेटा। वो उसे बाहों में भर लिया, गीला बदन उसके बदन से चिपक गया। राजेश ने उसके माथे पर किस किया, पीठ सहलाई। रेनू का बदन हल्का होने लगा। वो राजेश के गले लग गई। राजेश ने रेनू को बिस्तर पर ले जाकर लिटाया, मनीष अभी भी सो रहा था, लेकिन रेनू ने कहा, "उसे मत जगाओ, बाहर चलते हैं... ये वक़्त सिर्फ हम दोनों का है।"

Untitled-2


राजेश उसे गोद में उठा कर दुसरे बेडरूम में ले आया, उसे बिस्तर पर लिटा कर उसने रेनू के होंठों पर किस किया, जीभ अंदर डाली। रेनू की साँसें फिर तेज़ हो गईं। वो अब आत्मग्लानी भूल चुकी थी, बस राजेश की गर्माहट में खो रही थी।

राजेश ने उसे रफ़ तरीके से पलटा, घोड़ी बना दिया। "अब तू मेरी रंडी है, रेनू... चिल्ला जितना चिल्लाना है।" उसने उसके बाल पकड़े और लंड सीधे उसकी चूत में ठोक दिया। चोप-चोप की आवाज़ शुरू हो गई। रेनू चीखी, "आह्ह... राजेश... जोर से..." राजेश ने उसके चूतड़ों पर जोरदार थप्पड़ मारे, लाल निशान पड़ गए। "हाँ रंडी... ले मेरा मोटा लंड... तेरे पति से मोटा।" वो तेज़-तेज़ धक्के मारने लगा, रेनू की चूचियाँ हिल रही थीं।


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फिर राजेश ने उसे उठाया, दीवार से सटा दिया। टाँगें ऊपर उठा कर लंड फिर से अंदर पेला। रेनू की पीठ दीवार से रगड़ रही थी, दर्द और मजा मिल कर उसे पागल कर रहा था। "उफ्फ्फ... मार डालो मुझे... फाड़ दो..." वो चिल्ला रही थी। राजेश ने उसके गले को दबाया, "चुप रंडी... अब तेरी गांड की बारी।" उसने लंड निकाला, थूक लगाया और गांड में एक झटके में आधा घुसेड़ दिया। रेनू की चीख निकली, लेकिन राजेश रुका नहीं। पूरा लंड अंदर-बाहर करने लगा, उसके बाल खींचते हुए। "देख, तेरी गांड कितनी टाइट है... मैं इसे आज बुरी तरह फाड़ूँगा।"


Tight ass

रेनू तीन बार झड़ चुकी थी, उसकी चूत से रस टपक रहा था। आखिर में राजेश ने उसे घुटनों पर बिठाया, लंड मुँह में ठूँसा। "चूस... सारा माल पी जा।" रेनू ने गले तक लिया, राजेश ने उसके सिर को पकड़ कर तेज़-तेज़ मुँह चोदा। आखिर में उसने मुँह में ही माल झाड़ दिया, रेनू ने सारा निगल लिया।


Cum

दोनों थक कर लेट गए। रेनू राजेश के सीने पर सिर रख कर बोली, "पक्का तुम जा रहे हो, रुक नहीं सकते।" राजेश ने मुस्कुरा कर कहा, "तू पहले नाटक न करती तो ट्रान्सफर क्यों लेता। अब तो घर ऑफिस सबको बोल दिया, कल दोपहर की ट्रेन है तो फिलहाल तो रुक नहीं सकता। पर बीच बीच में आता रहूँगा, अब से तू मेरी ख़ास दोस्त है तो तेरे लिए तो आना ही पड़ेगा न।" रेनू जानती थी की आज उसने राजेश को जो मजा दिया है तो ये सिलसिला अब रुकने वाला नहीं।

रेनू राजेश के सीने पर सिर रख कर लेटी थी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। बाहर की सुनसान रात में सिर्फ़ दूर से कुत्तों की भौंकने की आवाज़ आ रही थी, और अंदर उसके मन में एक हलचल मची हुई थी। राजेश की साँसें नियमित हो चुकी थीं, वो सो गया था, लेकिन रेनू की आँखें खुली हुई थीं। वो बिस्तर पर पड़ी, अपनी नंगी बॉडी को चादर से ढकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बदन की चिपचिपाहट और दर्द उसे बार-बार याद दिला रहा था कि क्या-क्या हुआ था। उसकी चूत और गांड अभी भी जलन से भरी हुई थीं, राजेश के रफ़ धक्कों की वजह से। वो धीरे से हाथ नीचे ले गई, छुआ तो दर्द हुआ, लेकिन साथ ही एक अजीब सा सुकून भी।


BS

दिल्ली से दूर इस गाँव में आने के बाद, मनीष के साथ अकेले रहना, सेक्स का वो नया दौर—सुबह, दोपहर, शाम। रेनू को लगता था कि वो अपनी शर्म छोड़ रही है, एक नई औरत बन रही है। लेकिन राजेश के आने के बाद सब बदल गया। आज का थ्रीसम, वो डबल पेनिट्रेशन, राजेश का रफ़ तरीका—उसने खुद को रंडी जैसा महसूस किया था। "मैं एक घरेलू बीवी थी, मम्मी-पापा की सेवा करती, कल एक गैर से चुदी और आज दो मर्दों के बीच सैंडविच बन गई?" उसने मनीष की तरफ देख जो बगल में सो रहा था। भले ही वो खुद ही राजेश को बुलाने का आईडिया देता था। कुकॉल्डिंग का ये खेल उसे अब बोझ लग रहा था।

लेकिन साथ ही एक और भावना थी—उत्तेजना की। राजेश के साथ वो वाइल्ड सेक्स, शाद की वो रफ़नेस, बाल खींचना, थप्पड़ मारना, गले दबाना—ये सब उसे एक नई आजादी दे रहा था। दिल्ली में वो शर्मीली थी, सेक्स में चुपचाप सहती थी। अब वो चिल्लाती थी, लंड मांगती थी, झड़ती थी। "मुझे अच्छा लगता है... बहुत अच्छा। दुसरे मुझे वो मजा देते है जो मनीष नहीं दे पाता। उनका मोटा लंड, वो ताकत... उफ्फ。" सोचते-सोचते उसकी चूत फिर से गीली होने लगी। वो खुद से शर्मिंदा हुई, लेकिन हाथ नीचे चला गया। उँगलियाँ चूत पर फेरते हुए वो सोच रही थी, "मैं बदल गई हूँ। पहले तो ओरल सेक्स के नाम पर डरती थी, अब दो लंड एक साथ ले रही हूँ। ये मेरी अपनी खुशी है, या मैं बस मनीष को खुश करने के लिए कर रही हूँ?" वो मेरा पति है, मुझे इतना प्यार करता है कि मुझे फ्रीडम देता है। लेकिन क्या वो जलता नहीं? उसकी आँखों में तो मजा ही नजर आता है। क्या ये प्यार है? या बस लस्ट?" रेनू कंफ्यूज थी। सुबह होने वाली थी। रेनू ने आँखें बंद कीं, लेकिन नींद नहीं आई। वो बस सोच रही थी—खुशी, दर्द, शर्म, उत्तेजना, प्यार—ये सब मिल कर उसे एक नई रेनू बना रहे थे।
 

malikarman

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कुछ मिनट बाद, जब मनीष पूरी तरह सो गया, रेनू धीरे से उठी। उसकी टाँगें अभी भी काँप रही थीं, चूत और गांड में जलन हो रही थी। वो बाथरूम की तरफ गई, लेकिन रास्ते में रुक गई। आईने में खुद को देखा—चेहरे पर लार और पसीने के निशान, चूचियों पर काटने के दाग, और नीचे का हिस्सा लाल-सूजा हुआ। शादी के बाद इतने सालों में वो कभी इतनी खुली नहीं थी। मनीष उसका पति था, और आज उसने उसके सामने किसी और मर्द से खुद को चुदवाया था। "मैं एक अच्छी घरेलू औरत थी... अब क्या बन गई हूँ? पहले उस शाद के साथ और फिर राजेश के साथ ये सब... मनीष क्या सोच रहा होगा?" उसका मन बोझिल हो गया। वो बाथरूम में घुस गई, शावर ऑन किया और गर्म पानी के नीचे खड़ी हो गई।


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राजेश बाहर से आवाज़ सुनकर अंदर आया। वो रेनू को शावर के नीचे देखा। उसने दरवाज़ा खोला और अंदर घुस गया। राजेश ने शावर बंद किया और उसे तौलिए से लपेटा। वो उसे बाहों में भर लिया, गीला बदन उसके बदन से चिपक गया। राजेश ने उसके माथे पर किस किया, पीठ सहलाई। रेनू का बदन हल्का होने लगा। वो राजेश के गले लग गई। राजेश ने रेनू को बिस्तर पर ले जाकर लिटाया, मनीष अभी भी सो रहा था, लेकिन रेनू ने कहा, "उसे मत जगाओ, बाहर चलते हैं... ये वक़्त सिर्फ हम दोनों का है।"

Untitled-2


राजेश उसे गोद में उठा कर दुसरे बेडरूम में ले आया, उसे बिस्तर पर लिटा कर उसने रेनू के होंठों पर किस किया, जीभ अंदर डाली। रेनू की साँसें फिर तेज़ हो गईं। वो अब आत्मग्लानी भूल चुकी थी, बस राजेश की गर्माहट में खो रही थी।

राजेश ने उसे रफ़ तरीके से पलटा, घोड़ी बना दिया। "अब तू मेरी रंडी है, रेनू... चिल्ला जितना चिल्लाना है।" उसने उसके बाल पकड़े और लंड सीधे उसकी चूत में ठोक दिया। चोप-चोप की आवाज़ शुरू हो गई। रेनू चीखी, "आह्ह... राजेश... जोर से..." राजेश ने उसके चूतड़ों पर जोरदार थप्पड़ मारे, लाल निशान पड़ गए। "हाँ रंडी... ले मेरा मोटा लंड... तेरे पति से मोटा।" वो तेज़-तेज़ धक्के मारने लगा, रेनू की चूचियाँ हिल रही थीं।


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फिर राजेश ने उसे उठाया, दीवार से सटा दिया। टाँगें ऊपर उठा कर लंड फिर से अंदर पेला। रेनू की पीठ दीवार से रगड़ रही थी, दर्द और मजा मिल कर उसे पागल कर रहा था। "उफ्फ्फ... मार डालो मुझे... फाड़ दो..." वो चिल्ला रही थी। राजेश ने उसके गले को दबाया, "चुप रंडी... अब तेरी गांड की बारी।" उसने लंड निकाला, थूक लगाया और गांड में एक झटके में आधा घुसेड़ दिया। रेनू की चीख निकली, लेकिन राजेश रुका नहीं। पूरा लंड अंदर-बाहर करने लगा, उसके बाल खींचते हुए। "देख, तेरी गांड कितनी टाइट है... मैं इसे आज बुरी तरह फाड़ूँगा।"


Tight ass

रेनू तीन बार झड़ चुकी थी, उसकी चूत से रस टपक रहा था। आखिर में राजेश ने उसे घुटनों पर बिठाया, लंड मुँह में ठूँसा। "चूस... सारा माल पी जा।" रेनू ने गले तक लिया, राजेश ने उसके सिर को पकड़ कर तेज़-तेज़ मुँह चोदा। आखिर में उसने मुँह में ही माल झाड़ दिया, रेनू ने सारा निगल लिया।


Cum

दोनों थक कर लेट गए। रेनू राजेश के सीने पर सिर रख कर बोली, "पक्का तुम जा रहे हो, रुक नहीं सकते।" राजेश ने मुस्कुरा कर कहा, "तू पहले नाटक न करती तो ट्रान्सफर क्यों लेता। अब तो घर ऑफिस सबको बोल दिया, कल दोपहर की ट्रेन है तो फिलहाल तो रुक नहीं सकता। पर बीच बीच में आता रहूँगा, अब से तू मेरी ख़ास दोस्त है तो तेरे लिए तो आना ही पड़ेगा न।" रेनू जानती थी की आज उसने राजेश को जो मजा दिया है तो ये सिलसिला अब रुकने वाला नहीं।

रेनू राजेश के सीने पर सिर रख कर लेटी थी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। बाहर की सुनसान रात में सिर्फ़ दूर से कुत्तों की भौंकने की आवाज़ आ रही थी, और अंदर उसके मन में एक हलचल मची हुई थी। राजेश की साँसें नियमित हो चुकी थीं, वो सो गया था, लेकिन रेनू की आँखें खुली हुई थीं। वो बिस्तर पर पड़ी, अपनी नंगी बॉडी को चादर से ढकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बदन की चिपचिपाहट और दर्द उसे बार-बार याद दिला रहा था कि क्या-क्या हुआ था। उसकी चूत और गांड अभी भी जलन से भरी हुई थीं, राजेश के रफ़ धक्कों की वजह से। वो धीरे से हाथ नीचे ले गई, छुआ तो दर्द हुआ, लेकिन साथ ही एक अजीब सा सुकून भी।


BS

दिल्ली से दूर इस गाँव में आने के बाद, मनीष के साथ अकेले रहना, सेक्स का वो नया दौर—सुबह, दोपहर, शाम। रेनू को लगता था कि वो अपनी शर्म छोड़ रही है, एक नई औरत बन रही है। लेकिन राजेश के आने के बाद सब बदल गया। आज का थ्रीसम, वो डबल पेनिट्रेशन, राजेश का रफ़ तरीका—उसने खुद को रंडी जैसा महसूस किया था। "मैं एक घरेलू बीवी थी, मम्मी-पापा की सेवा करती, कल एक गैर से चुदी और आज दो मर्दों के बीच सैंडविच बन गई?" उसने मनीष की तरफ देख जो बगल में सो रहा था। भले ही वो खुद ही राजेश को बुलाने का आईडिया देता था। कुकॉल्डिंग का ये खेल उसे अब बोझ लग रहा था।

लेकिन साथ ही एक और भावना थी—उत्तेजना की। राजेश के साथ वो वाइल्ड सेक्स, शाद की वो रफ़नेस, बाल खींचना, थप्पड़ मारना, गले दबाना—ये सब उसे एक नई आजादी दे रहा था। दिल्ली में वो शर्मीली थी, सेक्स में चुपचाप सहती थी। अब वो चिल्लाती थी, लंड मांगती थी, झड़ती थी। "मुझे अच्छा लगता है... बहुत अच्छा। दुसरे मुझे वो मजा देते है जो मनीष नहीं दे पाता। उनका मोटा लंड, वो ताकत... उफ्फ。" सोचते-सोचते उसकी चूत फिर से गीली होने लगी। वो खुद से शर्मिंदा हुई, लेकिन हाथ नीचे चला गया। उँगलियाँ चूत पर फेरते हुए वो सोच रही थी, "मैं बदल गई हूँ। पहले तो ओरल सेक्स के नाम पर डरती थी, अब दो लंड एक साथ ले रही हूँ। ये मेरी अपनी खुशी है, या मैं बस मनीष को खुश करने के लिए कर रही हूँ?" वो मेरा पति है, मुझे इतना प्यार करता है कि मुझे फ्रीडम देता है। लेकिन क्या वो जलता नहीं? उसकी आँखों में तो मजा ही नजर आता है। क्या ये प्यार है? या बस लस्ट?" रेनू कंफ्यूज थी। सुबह होने वाली थी। रेनू ने आँखें बंद कीं, लेकिन नींद नहीं आई। वो बस सोच रही थी—खुशी, दर्द, शर्म, उत्तेजना, प्यार—ये सब मिल कर उसे एक नई रेनू बना रहे थे।
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अगले दिन राजेश चला गया। जाने से पहले उसने रेनू के साथ एक ऐसा धमाकेदार सेक्स सेशन किया कि कमरे की दीवारें भी थरथराईं। मनीष सिर्फ कुर्सी पर बैठा, हाथ में कॉफी का मग, आँखें फटी-फटी देखता रहा—राजेश रेनू को डॉगी में पेल रहा था,


keisha grey doggystyle jules jordan


रेनू की चीखें कमरे में गूँज रही थीं, और राजेश हर धक्के के साथ गाली दे रहा था—“ले रंडी, तेरी शादीशुदा चूत आज मेरे नाम कर दी!” रेनू का पानी बार-बार छूट रहा था, चादर गीली हो चुकी थी। आखिर में राजेश ने रेनू के मुँह में माल उगला और रेनू ने सब निगल लिया, आँखों में शरारत भरी मुस्कान के साथ।


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राजेश के जाने के बाद भी दोनों की भूख कम नहीं हुई—बल्कि और बढ़ गई। अब सेक्स में नई बेचैनी थी। मनीष रेनू को चोदते वक्त राजेश की तरह गंदी बातें करने लगा था—“बोल, कितने लंड चखने हैं अभी?” रेनू शरमा कर भी जवाब देती—“जितने तुम लाओगे…” दोनों को लग रहा था कि ये सुनहरा दौर कुछ महीने तो चलेगा ही। लेकिन किस्मत ने जल्दी ही नया मोड़ ले लिया।

राजेश के गए सिर्फ दो दिन बाद अंकुर का फोन आया। मनीष मीटिंग में था, लेकिन फोन देखते ही बाहर निकल आया, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

फोन उठाते ही अंकुर नॉनस्टॉप शुरू हो गया “मनीष यार,तेरा लल्लू मिल गया! मेरे आदमी ने काफी पूछताछ की—पुराने मोहल्ले में जाकर लोगों से बात की, वो जो रिटायर्ड कपल की बात तुमने कही थी उन सक्सेना साब के घर भी गया जहाँ वो लास्ट में नौकरी करता था, तब उन्होंने बताया की उसका असली नाम लाल सिंह है और उसका एक दोस्त मॉडल टाउन में कही नौकर था तो कभी कभी उससे मिलने आता था। उससे गाँव का पता चला। वो अब वहीँ है और पास के हाईवे पर एक छोटी-सी चाय की दुकान पर काम कर रहा है, चाय बनाता है, समोसे तलता है। मालिक से बात की तो कहता है लल्लू काम तो अच्छा करता है लेकिन तनख्वाह कम है बस 4 हजार तो हमेशा शिकायत करता रहता है। गाँव का नाम पता सब भेजता हूँ, और नंबर भी। फोटो भी भेजता हूँ, वैसे तुमने जितना कहा उतना बूढ़ा लग नहीं रहा है।”

“वाह यार, तूने कमाल कर दिया! नंबर भेज, मैं खुद बात करता हूँ। कितना चार्ज?”

“अरे भाई, तूने जो भेजा उसमे भी बच ही गया है वो वापस भेज रहा हूँ लेकिन कभी ससुराल आना हो तो बढ़िया पार्टी देना।”

“बिलकुल भाई, पार्टी पक्की। अभी एक मीटिंग में हूँ तो बाद में बात करते हैं बस तुम नंबर भेज दो”

फोन काटते ही अंकुर ने नंबर भेज दिया और नंबर मिलते ही मैंने लल्लू को कॉल किया। रिंग हुई, फिर एक भारी, थकी हुई आवाज़—“हैलो? कौन बोल रहा?”

“लाल सिंह जी? मैं मनीष बोल रहा हूँ।“

“कौन मनीष?”

“आप पांच-छह साल पहले सिविल लाइन्स वाले सक्सेना जी के यहाँ काम करते थे न?”

“क्यों पूछ रहे हो भाई? क्या काम है?”

“दरअसल मेरी पत्नी उनको जानती है, उसका उनके घर आना जाना था और वो बता रही थी की आप बहुत अच्छा काम करते थे, और भरोसे के आदमी हो तो मुझे अपने घर के लिए किसी ऐसे ही आदमी की जरूरत थी”

“नहीं साहब, अब मैं घरों में काम नहीं करता, अपने गाँव में रहता हूँ और यहाँ खुश हूँ।“

“अच्छा! दरअसल हम दिल्ली के रहने वाले हैं और आजकल आपके गाँव के पास ही मेरी पोस्टिंग है इसीलिए सोच रहे थे की कोई भरोसे का आदमी मिल जाए। पैसे भी ठीक दे देंगे।“

“कितने पैसे देंगे साहब? बताइए तो मैं कोई भरोसे का आदमी भेज दूंगा।“

“बीस हजार तक दे देंगे।“

“बीस हजार!“ लल्लू ने चौंक कर पुछा

“चलो पच्चीस तक दे देंगे और रहना खाना तो साथ में रहेगा ही।“ मैंने उसे लालच दिखाया।

“अच्छा और नौकरी कहाँ है” लल्लू ने पूछा तो मैंने अपनी फैक्ट्री जिस गाँव में थी वहां का नाम बताया।

“साहब ये तो हमारे गाँव से बस तीन घंटे का रास्ता है तो मैं सोच रहा था मुझे ही आना चाहिए बस महीने में एक बार दो-तीन दिन की छुट्टी दे दीजियेगा तो यहाँ गाँव में आकर देखरेख कर जाया करूंगा”

“अरे तीन क्या चार दिन छुट्टी ले लेना बस जल्दी आ जाओ, मुझे नौकर की सख्त जरूरत है और मैं देर नहीं कर सकता”
 
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