chapter 108
सुबह होती हैं आसा की जब नींद खुलती है तो अभय आसा को पकरे चिपका हुआ था आसा की गांड अभय की तरफ थी आसा को फिल होता है उसकी गांड के दरार मे मोटा गर्म कुछ घुसा है आसा एकदम से सिहर जाती है आसा अभय जाती है ये उसके बेटे का लंड है जो उसकी गांड की दरार मे घुसा है
आसा को पता नही क्या होता है आसा धीरे धीरे अपनी गांड आगे पीछे करने लगती है जिसकी वजह से अभय का खरा लंड के चमरे आगे पीछे होने लगते है आसा थोरा पीछे गांड करती है तो अभय का लंड सीधा आसा के गांड की छेद पे लगता है वैसे ही आसा आह करती है तभी आसा को एहसास होता है वो क्या कर रही है
आसा जल्दी से उठ कर बैठ तेज सासे लेते हुवे अभय को देख - मे ये किया कर रही थी
आसा अभय को किस करती है फिर खरी होती है पीछे गांड पे दरार मे नाइटी जो घुसी थी उसे बाहर निकाल कमरे से बाहर आती है
सभी धीरे धीरे उठ कर नहाने लगते है अपने काम मे लग जाते है 25 मिनट बाद अभय के कमरे मे मीनाक्षी आके अभय को जगाती है
अभय उठ कर बैठ मीनाक्षी को पकर अपनी गोदी मे बैठा लेता है मीनाक्षी सर्म से डरते हुवे - देवर जी छोरिये मुझे कोई देख लेगा
अभय धीरे से कान मे - वादा करो आप अकेले मे करने दोगी हु
मीनाक्षी डरते हुवे - नही मुझे पता है आप कितने बेसरम है और किया क्या कांड किये है
अभय हैरान मीनाक्षी को अपनी तरफ करके - क्या कोन किसने आपको बताया
मीनाक्षी मुस्कुराते हुवे - कोई है जिसने मुझे सब बताया है
अभय हैरान मन मे - कोन है जो मेरी वाट लगाने पे तुला है
अभय - जानती है तो किसी को बताना नही वर्ना
मीनाक्षी अभय को देख - वर्ना क्या कर लेगे

अभय एकदम से मीनाक्षी के होठ मुह मे लेके चूसने लगता है मीनाक्षी की आखे बरी हो जाती है अभय बरे प्यार से मीनाक्षी के होठ चूसने लगता है ये एहसास मजा मे मीनाक्षी ढीली पर जाती है कुछ कर नही पाती बस अभय को अपना रस पीने देती है 3 मिनट बाद
अभय किस तोरके मुस्कुराते हुवे - वर्ना आपकी भी ले लुंगा
मीनाक्षी शोक अभय को देखती है फिर अभय को मारते हुवे - बेसरम बेसरम है आप
मीनाक्षी जल्दी से भाग जाती है अभय मुस्कुराते हुवे - कोसिस तो करुगा ही लेने की
अभय बाहर आता है सुसमा अभय को देख - उठ गया बेटा
अभय सुसमा को गले लग - मेरी प्यारी मासी
सुसमा मुस्कुराते हुवे अभय को गले लगाते हुवे - मेरा प्यारा बेटा
मितल आते हुवे - वाह मा मे नही हु आपकी प्यारी बेटी अब ये लंगूर हो गया
अभय मितल को देख - मासी सुना दीदी मुझे लंगूर केह रही है
सुसमा - मेरे हैंडसम बेटे को लंगूर मत केह
मितल मुह बना के - कहा से ये लंगूर हैंडसम लग रहा है
मधु आते हुवे - मेरे भइया बहोत हैंडसम है
मितल - आ गई भैया की लाडली भाई का साथ देने
अदिति आते हुवे - मे भी हु भइया की लाडली
सिला - अरे मे भी हु मेरा लाल अकेला थोरि है
तारा - अरे मेरा दामाद करोरो मे एक है
कोमल - हा अभय बहोत हैंडसम है
मिनिता - और नही तो क्या बहोत प्यारा भी है
आसा ये सब देख मुस्कुरा रही थी
मितल मुह खोले सभी को देख - आखिर इस लंगूर मे ऐसा क्या है जो आप सब उसको इतना प्यार करते है
सभी मितल को देख - जान जाओगी जल्दी ही
अभय मितल को गले लगा के - मेरी दीदी भी बहोत जयदा खूबसूरत है
मितल मुस्कुराते हुवे - मेरा प्यारा भाई भी
अभय आसा को देखता है फिर आख मार देता है आसा सर्म से मन मे - बेसरम बेटा
शादी के 5 दिन बचे थे तैयारी सुरु हो गई थी 10 बज चुके थे अभय काजल के घर आता है और काजल ममता की अच्छे से चुदाई करने के बाद बाते करने लगता है
अभय - आते जाते रहना आप दोनों
काजल ममता - समझ गये
अभय खरा होके - दीदी से बाते कर लेता हु
काजल ममता मुस्कुराते हुवे - धीरे से बाते करना
अभय मुस्कुराते हुवे - हा
अभय कमरे मे आता है रुमा अभय को देख सर्म से - सुबह सुबह कर लिया कितना बेसरम है तू

अभय रुमा के पास बैठ ब्लाउस के बटन खोल चूचे निकाल पीने लगता है रुमा सिसकिया लेते हुवे - आह अभय लगता है तुझे दूध चूस के पीने मे बहोत अच्छा लगता है पीले भाई उफ 3 मिनट बाद
अभय रुमा को बिस्तर पे लेता के सारी पेटीकोट उपर करके मुस्कुराते हुवे - पैंटी नही पहनी हु
रुमा सर्म से - ताकि तुम जब चाहे कर सको
अभय मुस्कुराते हुवे - क्या
रुमा शर्म से - चुदाई

अभय लंड निकाल थूक लगा के थोरा घिसता है और छेद पे रख एक धक्के मे घुसा देता है रुमा दर्द मे मर गई अभय चुदाई करने लगता है रुमा दर्द मजे से वा सिसकिया लेते हुवे - हा उफ भाई तेरा लंड लेके अपनी बुर मे बहोत मजा आता है ऐसी चुदाई के लिये ही मे तरपति रहती थी लेकिन अब तुही मुझे मेरी बुर की आग ठंडी करेगा
अभय चुदाई करते हुवे - दीदी चिंता मत करो अच्छे से आपकी बुर की आग निकाल दूँगा 23 मिनट बाद
अभय - दीदी मुझे जाना होगा अकेला नही हु कई लोग है सदी का माहौल भी
रुमा उठ के सारी बाल सही करते हुवे - जानती हु तुम जाओ
अभय - हु
अभय फिर बाहर आके गुलाबी को फोन करता है
गुलाबी - आ गई मेरी याद
अभय - दीदी काम मे बिजी था मसी के यहा हु मितल की शादी है आप आइये ना
गुलाबी - नही अभय नही आ सकती तुम घर आओगे तो आउंगी
अभय - ठीक है दीदी शादी होने के बाद मे जीत जीतू से मिलने आने ही वाला हु तब आप आना फिर करेगे वो सब
गुलाबी सर्म से - ठीक है
अभय - दीदी चूचे के फोटो भेजो ना देखना है
गुलाबी सर्म से - भेज देती हु
अभय खुश होके - ठीक है दीदी रखता हु
फोन कट
2 मिनट बाद गुलाबी का फोटो आता है अभय देखता है तो उसका लंड पुरे जोस मे खरा होके झटके मरने लगता है

गुलाबी लेती हुई थी ब्लाउस नही थे बिकनी के अंदर से दोनों चूचे निकाल फोटो खिच के भेजा था अभय चूचे देखते हुवे - उफ किया मस्त बरे बरे गोरे चूचे है दीदी के दबाने मसलने चूसने मे मजा आयेगा
अभय चलते हुवे ही जीत की मा कमला को फोन करता है
कमला - याद आ गई तुम आयेगा कब या आना ही नही चाहता
अभय - ऑन्टी आऊगा ना मेने बताया तो मासी की बेटी मितल दीदी की शादी के बाद ही आ पऊगा आप को कहा तो आ नही रही
कमला - बेटा मजबूरी है लेकिन इस महीने के बाद सब काम निपट पायेगा घर भी रेडी
अभय - ठीक है दीदी के शादी के बाद आता हु लेकिन मुझे वो चाहिये
कमला - वो क्या
अभय मुस्कुराते हुवे - आपकी बुर
कमला सर्म से - सपने देख बेसरम कहने मे भी सर्म नही आती तुझे
अभय मुस्कुराते हुवे - देना ही होगा ऑन्टी मजाक नही सच मे आप बहोत खूबसूरत है प्लेस ना एक बार करने दोगी बस एक बार
कमला सन्त रहती है फिर थोरि देर बाद - ठीक है एक बार बस लेकिन अभय बेटा किसी को पता ना चले
अभय खुश होके - जी किसी को पता नही चलेगा तो पक्का
कमला धीरे से सर्म से - हु पक्का
अभय - बस इतना बता तो आप बुर पे बाल है
कमला - छि नही है कल ही साफ किया है
अभय का लंड फिर खरा हो जाता है
अभय - अच्छा ऑन्टी फोटो भेजो ना एक ब्लाउस या बिकनी वाला देखना है कितने बरे है आपके
कमला सर्म से - बेशर्म देखा तो है तूने
अभय - महीने हो गये ना
कमला - अच्छा भेज देती हु किसी को दिखाना मत
अभय - हा ठीक है
फोन कट 2 मिनट बाद फोटो आ जाती है

लाल ब्लाउस मे कमला के चूचे कैद था अभय मन मे - बरे है लेकिन दिख नही रहे जयदा हु ब्लाउस नही होता तो उफ अच्छे से दिखता पर साफ है बरे है गोरे भी अब तो रुका नही जाता लेकिन
अभय गहरी सास लेके - dp devil से जंग भी लरना है मे मरने से नही डरता लेकिन अब मे अकेला अपनी मा का भी बेटा हु मुझे कुछ हो गया तो मेरी मा बाकी सब ना मे चाहता हु विजय जीत जीतू को कुछ हो लेकिन मे ये जनता हु कई सारे लोग इस जंग मे मारे जायेंगे मे भी सभी को बचा नही पऊगा
अभय को यही तो बात तो टेंसन दे रही थी जाहिर है जंग मे कुछ भी हो सकता है किसी के साथ भी और अभय जनता था अच्छे से
अभय जीत की मा जोति को फोन करता है
जोति - कब आ रहा रहा है मितल की शादी के बाद
अभय - जी ऑन्टी किया कर रही है आप
जाती - खेत मे आई हु अभी खास कटने
अभय - हु वो ऑन्टी मे
जाती - बेटा जानती हु तुम मुझसे क्या चाहते हो लेकिन बेटा ये गलत है देखो नाराज मत होना उसके अलावा जो बोलो करुगी
अभय थोरा निरास होके - हु बुर दिखाओगी
जोति सर्म से - हा पूरी नंगी होके तेरे सामने आउंगी सब देख लेना लेकिन वो नही बेटा समझ बात को
अभय - ठीक है ऑन्टी जितना मिलेगा मुझे उसी मे खुश रहुंगा आप जैसी औरत को नँगा देखने का मिले किस्मत की बात है मे शादी बाद आऊगा
जाती - ठीक है
अभय - एक फोटो ब्लाउस के ऊपर से ही देखने के लिये मिल सकता है
जाती - हु भेज देती हु
फोन कट 2 मिनट बाद जोति का फोटो भी आ जाता है

गुलाबी कलर की ब्लाउस जोति ने पहना हुआ था चूचे के उभार साफ दिख रहे थे अभय देखते हुवे मन मे - अंदर कैसे चूचे होगे निपल कैसा होगा उफ ऑन्टी खाजना छुपा के रखा है अपने
अभय गुलाबी जोति तीनों के फोटो देख मन मे - मा बेटी ऑन्टी दोनों बवाल है, अभय कमला के फोटो देख, ऑन्टी भी समझ आ रहा किया करू जंग भी करनी है जाना भी है
अभय फोन रख घर आता है सभी लगे परे थे बातो मे कुछ काम करने मे
अभय सीधा कमरे मे जाके लेत जाता है टेंसन् मे था जंग को लेके दिशा अभय के पास आके बैठ - क्या बात है टेंसन् मे लग रहे है
अभय दिशा को पकर बाहों मे लेके - नही तो
दिशा - क्या कर रहे है कोई आ जायेगा तो
अभय दिशा के ऊपर आके - सब बाते करने या काम पे बिजी है
अभय बैठ के पैंट खोलते हुवे दिशा को देख - जान सारी उपर करो ना जल्दी से कर लेते है चिंता मत करो मधु कोमल किसी को आने नही देगे उन्हें पता है हम कमरे मे है
दिशा जल्दी से सारी पेटीकोट उपर करके तांगे फैला के अभय को देख - रात को नही क्या अपने मेरा भी बहोत मन है डाल दीजिये

अभय लंड निकाल थूक लगा के छेद पे रख एक धक्का मारके पुरा घुसा देता है दिशा दर्द मजे मे - आह पति जी मजा आ गया
दिशा की बुर बहोत प्यारी थी छोटे काले बाल थे बुर पे अभय चुदाई करते हुवे दिशा के ऊपर आके किस करने लगता है लेकिन पुरा दबाव दिशा पे नही डालता कियुंकी दिशा पेट से थी 20 मिनट बाद
दिशा बुर साफ करते हुवे - हद है बुर मे पानी गिरा देते है बार बार मुझे तो लगता है एक बेबी होते ही फिर मा बना देगे मुझे आप
अभय पैंट पहनते हुवे मुस्कुरा के - हा सही कहा तुमने
दिशा सारी पेटीकोट नीचे कर abh को देख - थोरा तो गेप रखना होगा ना
अभय सोचते हुवे - देखते है
कोमल अंदर आते हुवे - हद है घर मे इतने लोग है लेकिन तुम दोनों लगे हुवे थे और रखवाली हम करे
अभय कोमल को बाहों मे लेके - जान तुम लोगो के भरोसे ही तो मेरा सब काम होने वाला है
दिशा मुस्कुराते हुवे - सुन लिया अच्छा मे चली पति जी आपका तो निकल जाता है फिर भी करते रहते है आई है तो डाल दीजिये
दिशा मुस्कुराते हुवे चली जाती है
अभय कोमल को देख - क्या कहती हो
कोमल सर्म से - हा मेरा भी मन है
अभय फिर कोमल को किस करता है और बिस्तर पे लेता देता है कोमल पैंट पैंटी उपर करके तांगे उठा लेती है अभय लंड निकाल बुर के छेद पे रख धक्के से घुसा देता है कोमल दर्द मे आह करती है

अभय चुदाई करते हुवे - उफ जान बहोत गर्म है रात चोद नही पाया लेकिन आज सब का कोटा पुरा कर दूँगा उफ मस्त बुर है तुमारी
कोमल दर्द मजे मे अभय को देख - आह दर्द होता है धीरे करो ना
अभय - बस जान दर्द मे ही तो असली मजा आता है 18 मिनट बाद
कोमल पैंट पहन बाल कपड़े सही कर अभय को देख - रिस्की है
अभय - जनता हु लेकिन तुम सब हो ना
कोमल अभय को किस करते हुवे - हा वो तो है
अभय बाहर आता है आसा सुसमा बाते करने मे लगे थे अशोक राहुल कई गई हुवे थे मितल घर के पीछे अपने होने वाले पति से बात करने मे लगी हुई थी मीनाक्षी अभय को देखती है और जल्दी से भाग जाती है अदिति अभय के पीछे से आते हुवे हस के - लगता है अपने भाभी को डरा दिया
अभय अदिति को देख हस के - लगता तो है गुरिया सब बिजी है तो कैसा रहेगा हम तेरी छोटी भाभी से मिल के आये
अदिति - जी चलिये फिर चलते है
अभय अदिति गारी मे बैठ निकल परते है और कुछ मिनट मे ही शोभा के पास आ जाते है पहले तो अभय शोभा रेखा की चुदाई करता है फिर बाते करता है
अभय ने काजल ममता रुमा को चोदा तो अपना माल नही निकाला था दिशा की बुर मे ही निकाला था यानी अभय बिना झरे 3 खुश कर दिया था अभय चाहे तो कुछ मिनट रुक रुक के सब का पानी निकाल सकता है नही तो बार बार झरता तो हर किसी के साथ सेक्स नही कर पता यही दिमाग अभय यूज़ कर रहा था
अभय बाकी सब बैठे थे
अभय - 5 दिन बचे है कल या परसो बुआ भी आ जायेगी हु कल तुम सब को शोपिंग पे लेके जाउंगा शादी मे आना जो है
शोभा सब बहोत खुश हो जाते है
रेखा रीना खुश होके - जी पापा मे दादी से मिलने के लिये बेचैन हु
शोभा - मे मम्मी जी दीदी बाकी सब से
अभय - तो तय रहा कल शोपिंग पे जायेंगे अब मुझे जाना होगा जानती ही तो शादी का घर उपर से सब साथ मे है
शोभा - जानती हु आप जाइये
अदिति - भाभी चलती हु रेखा रीना
शोभा - जी
अभय अदिति फिर गारी पे बैठ निकल परते है लेकिन फिर अभय गारी बीच रास्ते पे रोक देता है तो अदिति की सासे तेज हो जाती है
अभय अदिति को देख - गुरिया चुसोगी मन नही है करने का तो चलते है
अदिति सर्म से - वो वो मे हा चुसुगि भाई
अदिति सर्म से नजरे नीचे करके मन मे - बहोत सर्म आ रही है लेकिन मेरा दिल बहोत जोर से भाई का लंड चूसने का कर रहा है
अभय मुस्कुराते हुवे लंड बाहर निकाल के - हु चुसो मेरी गुरिया

अदिति सर्माते झुक के अभय के लंड पकर मुह मे लेके चूसने लगती है स्वाद लेते हुवे मन मे - उफ भाई का मोटा गर्म लंड का स्वाद चूस के लेने मे बहोत मजा आता है सर्म भी बहोत आ रही है लेकिन क्या करू दिल मानता ही नही उफ बहोत अच्छा लग रहा है भाई के लंड का स्वाद, अभय अदिति के सर पे हाथ रख - चुसो गुरिया अपने भाई का लंड अच्छे से स्वाद लो आह बहोत अच्छा चूसने लगी हो मजा आ रहा है और आह अंदर तक लो उफ हा ऐसे ही अच्छा लग रहा है
12 मिनट बाद
अदिति अपने भाई का माल पीके मुह साफ करते हुवे सर्म से मन मे - उफ कितना गर्म गाढ़ा माल पीके अजीब का मजा नसा चढ़ जाता है
अभय लंड अंदर करके अदिति को देख - गुरिया तु जब लंड चुस्ती है ना सच मे मजा आ जाता है गुरिया कोन का कलर का बिकनी पहना है दिखाओगी अपने भाई को हु बोलो ना
अदिति अभय को देख सर्म से - भाई मुझे सर्म आ रही है बहोत
अभय अदिति के चूचे दबाते हुवे - दिखाओ ना गुरिया
अदिति सिसकिया लेते हुवे सर्म से - जी आह दिखाती हु
अदिति सर्माते हुवे सूट उपर करके अभय को दिखाती है सूट के साथ मैच बिकनी मे अदिति के मस्त गोरे चूचे कैद थे आधे दिख रहे थे गोरे उजले दोनों बरे मस्त चूचे कैद बिकनी मे

अभय अपनी बहन की बिकनी मे कैद चूचे देखता ही रह जाता है अभय अदिति चूचे को देख - गुरिया तेरे चूचे तो बहोत बरे दूध जैसे उजले गोरे है देखो कैसे कैद है बिकनी मे उफ बहोत मस्त है मेरी गुरिया के चूचे आह गुरिया कभी दिखाना अपने भाई को हु
अदिति जल्दी से सूट नीचे करके सर्म से नजरे नीचे किये - सोचुगी
अभय गारी चालू करते हुवे - हु उमीद है मेरी गुरिया मुझे अपने चूचे दिखायेगी
अभय अदिति फिर घर आते है साम् के 3 बज रहे थे अभय अंदर आता है तो कोई नही दिखता तभी मीनाक्षी कमरे से बाहर आती है
अभय - भाभी कोई दिखाई नही दे रहा
मीनाक्षी - देवर जी सब खेत घूमने गये है मम्मी जी मसी ने कहा आप आये तो बता दु जाना है तो जाइये देवरानी जी भी जाने वाले ही
दिशा पीछे से कमरे से आते हुवे अभय अदिति को देख - आ गये आप दोनों खेत जा रही हु चलेंगे
अभय - नही जान तुम गुरिया चले जाओ
दिशा मुस्कुराते हुवे - चले ननद जी
अदिति - जी भाभी
दिशा अदिति चले जाते है अभय मीनाक्षी अकेले थे
अभय मीनाक्षी को देखता है तो मीनाक्षी डरके कमरे मे भाग जाती है अभय भी पीछे से कमरे मे आ जाता है मीनाक्षी डरते हुवे - नही ना देवर जी मत करिये
अभय मन मे - मे ये क्या कर रहा हु मे ऐसा नही था
अभय मीनाक्षी को देख नजरे नीचे कर सर्म से - माफ करना भाभी आपको डरा दिया मे पहले ऐसा नही था लेकिन अब
अभय जाने लगता है तो मीनाक्षी अभय का हाथ पकर अभय को देख - देवर जी भाभी हु आपकी लेकिन बात ऐसी है मे सब जानती हु आपके बरे मे आप जिस्म के पीछे हवस पूरी करने नही जाते लेकिन
मीनाक्षी बिस्तर पे बैठ जाती है अभय भी
मीनाक्षी दुखी मन से - शादी के 2 साल हो गये मा नही बन पा रही ना आपके भैया मुझे खुश कर पाते है आपके भैया बहोत अच्छे है प्यार करते है लेकिन सायद मे ही समझ नही आता क्या करू
अभय मीनाक्षी के हाथ पे हाथ रख - मेरे कई अफेयर है भाभी आप जान ही चुकी है अगर आप मे कोई गर्बर् नही है तो मे आपको मा बना सकता हु अगर आप चाहे तो किसी को पता नही चलेगा
मीनाक्षी अभय को देख - क्या सच मे आप मुझे मा बना सकते है
अभय - हा इतना दम है मुझसे अगर आपके अंदर गर्बर् नही है तो
मीनाक्षी सोच मे पर जाती है ठोरी देर बाद अभय को देख - नही जानती मुझसे कमी है या आपके भइया मे
अभय - तो कर लेते है ना पता चल जायेगा आपमें कोई प्रॉब्लम नही है तो खुशखबरी आ जायेगी
मीनाक्षी - अगर किसी को पता चल गया तो देवर जी हंगामा हो जायेगा
अभय - आज तक मेने जितनो के साथ क्या किसी को पता नही चला अभी सब बाहर है जयदा सोचिये मत 30 मिनट है हमारे पास
मीनाक्षी बिस्तर पे लेत जाती है और अभय को देख - मा का सुख मुझे भी चाहिये मे भी चाहती हु मेरी गोद मे मेरा प्यारा बच्चा हो उसके लिये मे आपके साथ सब करने को तैयार हु देवर जी
अभय - सिर्फ बच्चे के लिये
मीनाक्षी - सायद हा
अभय - ठीक है भाभी जैसा आप चाहे

अभय मीनाक्षी को देखता है वो बिस्तर पे लेती हुई थी बहोत ही खूबसूरत सेक्सी लग रही थी मीनाक्षी की चिकनी कमर गहरी ढोरी देख अभय का लंड खरा होने लगता है अभय मीनाक्षी के ऊपर आ जाता है ये देख मीनाक्षी की सासे तेज हो जाती है
32 मिनट बाद
अभय कपड़े पहन पसीने से भीगा बाहर आके मन मे - इतनी टाइट गर्म बुर थी ऐसा लग रहा था मेरा लंड जल रहा है , अभय कमरे की तरफ देख , ना मा का सुख ना जिस्म का सुख दोनों के लिये तरप् रही थी भाभी
10 मिनट बाद सुसमा आसा सब आ जाते है तब तक मीनाक्षी अपने आप को संभाल चुकी थी
सुसमा अभय को देख - आया कियु नही खेत मे हा बोल
अभय - अरे मासी बुआ के घर गया था काम से
आसा - हा हा तेरा बहोत काम रहता है
अभय आसा को गले लग - मा
आसा - मस्का मत मार
मिनिता हस्ते हुवे - दीदी प्यार दिखा रहा है
आसा मन मे - बहोत कुछ दिखा चूका है
रात 7 बजे
अभय नीतिका से घर के बाहर बात कर रहा था
नीतिका - आपके बिना मन नही लगता
अभय - जान जनता हु लेकिन कुछ दिन इंतज़ार करना पड़ेगा
नीतिका - हु जानती हु
मीका - शादी की तैयारी चल रही है ना
अभय - हा सुरु हो चुकी है
मिका - मुझे मुझे भी आपकी याद आ रही है
अभय मुस्कुराते हुवे - हा मुझे भी तुम दोनों की बुर की याद आ रही है
नीतिका मीका शर्मा के जोर से एक साथ - छि बेसरम
अभय कुछ देर बाते करता है फिर फोन कट
मितल अभय के पास आके - किसने बाते कर रहा था ना
अभय मुस्कुराते हुवे - दीदी आप तो खुद लगी रहती है जीजा जी के साथ उसका क्या
मितल - बेसरम होने वाले पति है मेरे बात करुगी ही लेकिन तु किससे बाते कर रहा था ये बता
अभय - है एक
मितल हैरान शोक होके - क्या तुम दिशा को धोका दे रहे हो
अभय - नही दीदी दिशा को पता है
मितल और हैरान होके - क्या दिशा कुछ नही बोलती
अभय - नही वो दिशा की दोस्त ही है असल मे कहानी कुछ ऐसी है छोरो जाने दो
मितल एकदम से - क्या कहानी है बता मुझे जल्दी से
अभय मितल को देख - दीदी नही बता सकता समझो ना
मितल - मुझे जानना है नही बताएगा तो मुझे नींद नही आयेगी
अभय - बता दूँगा आप जिद कर रही है तो लेकिन जब हम अकेले होंगे तब
मितल - ठीक है लेकिन ये गलत है हा ऐसा मत कर
अभय - आप कहानी सुन लेना फिर बताना मे गलत हु या सही
मितल - ठीक है
मितल चली जाती है अभय मन मे - झूठी कहानी है दीदी ताकि आप की ले सकु पता नही अब मे रोक नही पाता खुद को
तभी तारा आते हुवे - दामाद जी क्या कर रहे है बाहर
अभय तारा को देख - मम्मी जी आप औरते तो लगी है खुद मे मै बेचारा किया करू
तारा हस्ते हुवे - औरते जब एक साथ होती है तो बाते बहोत करती है
अभय तारा को बाहों मे लेके दोनों हाथ गांड पे रख दबाते हुवे - जनता हु
तारा सिसकिया लेते हुवे - दामाद जी कोई आ जायेगा
अभय तारा के बुर को पकर मसलते हुवे - बहोत गर्म है लंड चाहिये या नही हु
तारा अभय को देख दर्द मे सिसकिया लेते - आह मा चाहिये दामाद जी लेकिन कैसे सब के होते हुवे
अभय तारा के मुह मे उंगली डालते हुवे - मे कमरे मे जाता हु आप आ जाना समझ गई
तारा नासिलि आखो से देख - कोई आ गया तो कमरे मे
अभय मुस्कुराते हुवे - नही आयेगा आयेगा भी तो पता चल जायेगा
अभय कमरे मे आता है सब बाते कर रहे थे अशोक राहुल भी थे अभय दिशा मधु अदिति कोमल को इसारे से बता देता है फिर कमरे मे आ जाता है तारा भी पीछे से आ जाती है
अभय - जल्दी करिये रिस्क तो है लेकिन दिशा देख लेगी
तारा बिस्तर पे लेत सारी उपर करके - हु डाल दीजिये

अभय तारा के दोनों पैर अच्छे से फैला के बुर पे लंड घुसा के चुदाई करने लगता है तारा के बुर पे भी छोटे बाल थे तारा - आह उफ दामाद जी मजा आ रहा है करते रहिये रात नींद नही आई अच्छे से अपने चोदा ही नही मुझे अपनी सास को उफ
अभय चुदाई करते हुवे - इस लिये इतनी गर्म है आपकी बुर मम्मी जी आह आज रात अच्छी नींद आयेगी मे पूरी गर्मी निकाल दूँगा
15 मिनट बाद
तारा जल्दी से सारी बाल सही करके अभय को देख - आप तो झरे ही नही मे दो बार झर गई
अभय मुस्कुराते हुवे - आपकी बेटी की बुर मे झरुगा
तारा सर्म से - बेशर्म
दोनों बाहर आते है अभय एक जगह बैठ जाता है लेकिन सिला मधु की नजर अभय पे थी अभय दोनों को देख समझ जाता है
अभय मन मे - मर गया आज तो चुदते हुवे अच्छा है मे जल्दी नही झरता नही तो सब की बुर की आग ठंडा नही कर पाता
अशोक - मेरी एक ही बेटी है अब हमे छोर चली जायेगी
सुसमा - बेटी पराइ ही होती है एक दिन जाना ही होता है
आसा - दीदी अपने सही कहा मेरी बेटी भी मुझे छोर एक दिन चली जायेगी
अदिति अभय को देखती है अभय इसारे से कहता है मेरी गुरिया मेरे साथ रहेगी अदिति भी इसारे समझ खुश हो जाती है
दिशा मधु मन मे - घंटा
मितल - आप लोग ऐसी बाते करेगे तो मे शादी नही करुगी
अभय - दीदी बेचारे जिजा जी का क्या होगा
अभय की बात सुन मितल बहोत जयादा सर्म से लाल हो जाती है तो बाकी सब जोर से हसने लगते है
अभय मीनाक्षी को देखता है मीनाक्षी सर्म से नजरे नीचे करके मन मे - कितना लंड ले लिया मेने जान निकाल दी बहोत दर्द जलन हो रही है इतना दर्द तो सुहागरात मे भी नही हुई लेकिन जो मजा आया
बाते करते खाना लग जाता है सब खाते है फिर थोरि देर बाते करते है
अभय भी अपने कमरे मे आके लेत जाता है थक गया था बेचारा तभी मधु अभय के पास आके लेत जाती है और अभय को देख - भाई
अभय मुस्कुराते हुवे - बोलो करना है हु
मधु सर्म से - वो हा करना है बहोत मन है
मधु फिर सर्म से लाल हो जाती है
अभय जल्दी से करते है उतरो पुरा नही पैट उपर कर लो बस

मधु भी पैंट पैंटी उपर करके तांगे उठा लेती है अभय सिर्फ लंड निकाल बुर मे घुसा के चुदाई करने लगता है मधु दर्द मे - आह भाई दर्द हो रहा है अच्छा भी लग रहा है
अभय चुदाई करते हुवे - गुरिया उफ तेरी टाइट गर्म बुर चुदने मे मजा आ जाता है
मधु - आह भाई करते रहिये चोदीये अपनी गुरिया को आह
16 मिनट बाद
मधु पैंट पहन लेती है अभय - अब खुश बुर की खुजली मिट गई
मधु सर्म से - हा
अभय मधु को गले लगा के - शादी का माहौल है सब साथ है तो आराम से बात नही कर सकते ना वो
मधु - जानती हु
मधु चली जाती है अभय फिर लेत लंड पकर -मेरा लंड भी दर्द करने लगा है अब कल से हर किसी को चोद नही सकता एक दिन छोर के करना परेगा या बुर चाट् के पानी निकाल दूँगा उफ थक गया
तभी सिला आती है तो अभय मन मे लग गये
सिला अभय के पास बैठ - कियु अब मेरे पास नही आता मन भर गया क्या
अभय सिला को बिस्तर पे लेता के - जानती तो है माहौल कैसा है
अभय किस करने लगता है उसके बाद - सारी उपर करिये जल्दी
सिला सारी उपर कर देती है

अभय बुर मे लंड घुसा के चोदने लगता है सिला दर्द मजे मे - उफ मा अभय बेटा बहोत मजा आ रहा है करते रह उफ मेरी बुर आह
अभय चुदाई करते हुवे - आपकी बुर बहोत गर्म है मा
सिला - आह बहोत आग है बेटा ठंडा कर दे
16 मिनट बाद सिला भी चली जाती है
तभी रीमा आती तो अभय को पसीने आने लगते हो रीमा हस्ते हुवे - नही भाई फिर कभी विजय जी ने करके आग ठंडी कर दी है
अभय गहरी सास लेके - चलो अच्छा है
दिशा आते हुवे - आज बहोत मेहनत हो गई है ना
अभय - हा बीवी जी बहोत
दिशा रीमा बाते थोरि देर करते हो फिर चले जाते है तब आसा आती है और अभय के पास लेत के - दीदी भी हमारे साथ सोयेगी
अभय हैरान आसा को देख - क्या नही ना फिर हम
आसा बीच मे अभय के कान पकर - रात को बहोत कुछ हो गया तूने किया ऐसा तो नही करता था आज नही दीदी आती होगी अभी
अभय उदास होके - ठीक है समझ गया
आसा अभय को किस करते हुवे - कल रात को हु
अभय खुश होके - हु ठीक है मा लेकिन अभी थोरा
तभी सुसमा नाइटी पहने आते हुवे - मा बेटा लेत भी गये
आसा - दीदी आईये
सुसमा अभय के बगल मे लेत जाती है अभय बीच मे दोनों बहन के बीच था एक तो उसकी मा एक मने दोनों खूबसूरत हॉट औरतेअभय से चिपक ले लेती हुई थी
अभय मन मे - क्या किस्मत है मेरी अब तो मासी को चोदना ही पड़ेगा मा जब सो जायेगी तो मा के बगल मे मा की बरी बहन को चोदने मे उफ सोच कर ही लंड मेरा खरा हो गया मासी जब सो जायेगी चुदाई के बाद तो मा के भी मजे ले लुंगा हु हा ये सही है बहोत मजा आयेगा आज रात को
सुसमा अभय को सीने से लगा के आसा को देख - चोटकी अपने बहु अभय बेटे के साथ सही नही क्या बहु की जगह हम आके लेत गये
आसा थोरा शर्मा के - दीदी अपने कहा तो सही कियु लाला
अभय आसा को देख फिर सुसमा को देख मुस्कुराते हुवे - एक बेटा एक भांजे के बलग मे दो खूबसूरत हॉट बहने चिपक के लेती हो तो एक बेटे भांजे को और क्या चाहिये
सुसमा आसा को देख - सुना तेरा लाल लाल ने क्या कहा
आसा मुस्कुराते हुवे अभय के कान पकर - सुना दीदी बेसरम हो गया है
अभय आसा के सीने से लग बाहों मे लेके - मा
आसा अभय को सीने से दबा के - मेरा बच्चा
सुसमा भी अभय से चिपक जाती है थोरि बाते करने के बाद आसा सो जाती है सुसमा भी लेकिन जब अभय देखता है आसा दूसरी तरफ चेहरा करके नींद मे है तो अभय को मोक्का मिल जाता है
अभय धीरे से सुसमा के सारी उपर करने लगता है
आज के लिये इतना ही


