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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Ajju Landwalia

Well-Known Member
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#168.

चैपटर-10
शरद ऋतु: (
तिलिस्मा 4.1)

सुयश के साथ सभी अब एक विशाल कमरे में निकले। इस कमरे में एक किनारे पर 15 फुट ऊंचा, एक पृथ्वी का ग्लोब रखा था, जिसे नचाया भी जा सकता था।

उस ग्लोब के आगे एक 12 इंच की त्रिज्या का, सुनहरी धातु का रिंग रखा था, जिसके आगे एक धातु की पट्टी पर, अंग्रेजी के कैपिटल अक्षरों से RING लिखा था। इस रिंग के बगल में एक छोटी सी ट्रे रखी थी, जिसमें 4 रंग के छोटे फ्लैग रखे थे।

उस कमरे की पूरी जमीन काँच की बनी थी, जिस पर पूरे विश्व का मानचित्र बना था।

मानचित्र में विश्व के सभी देशों को 4 अलग-अलग रंगों से दर्शाया गया था। एक जगह पर उन 4 रंगों का वर्गीकरण किया गया था।

जहां लाल रंग ग्रीष्म ऋतु का, नीला रंग शीत ऋतु का, नारंगी रंग शरद ऋतु का और हरा रंग वसंत ऋतु के प्रतीक के रुप में दर्शाया गया था।

“कैप्टेन, इस कमरे को देख कर तो लग रहा है कि यहां पर विश्व के अलग-अलग देशों को, वहां पायी जाने वाली ऋतुओं के हिसाब से वर्गीकृत किया गया है और उसे ग्लोब और मानचित्र के माध्यम से दर्शाया गया है।” जेनिथ ने सुयश को देखते हुए कहा।

“तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो जेनिथ।” सुयश ने कमरे में चारो ओर देखते हुए कहा- “पर अब हमें यह देखना है कि हमें यहां करना क्या है? क्यों कि उसको जाने बिना हम इस द्वार को नहीं पार कर पायेंगे?”

“कैप्टेन मैंने एक चीज गौर की है कि जमीन पर बने मानचित्र में भी 4 रंगों को दर्शाया गया है और यहां टेबल पर रखी ट्रे में मौजूद फ्लैग भी उन्हीं 4 रंग के हैं, इसका मतलब इनमें आपस में कोई ना कोई सम्बन्ध तो जरुर है?” ऐलेक्स ने कहा।

“दरअसल विश्व के अधिकतर देशों में 4 ऋतुओं को ही प्रधानता दी गई है, इसलिये यहां उन्हीं 4 ऋतुओं को मानचित्र के माध्यम से दर्शाया गया है।” सुयश ने कहा।

“कैप्टेन अंकल, मुझे तो इस कमरे में सबकुछ एक ही थीम पर आधारित लग रहा है, बस यह रिंग यहां पर कुछ अजीब सा लग रहा है क्यों कि ऋतुओं या विश्व के मानचित्र में रिंग का कहीं उल्लेख नहीं है।” शैफाली ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा।

“बात तो तुम्हारी सही है शैफाली, तो फिर चलो पहले इसी पर ध्यान देते हैं।” यह कहकर सुयश उस रिंग के पास आकर खड़ा हो गया और ध्यान से उसे देखने लगा।

“कैप्टेन एक बात और है।” तौफीक ने कहा- “यह रिंग हमारे सामने रखा है और हम इसे देखकर पहचान सकते हैं कि यह एक रिंग है, फिर इसके पास यह नेम प्लेट लगा कर रिंग लिखा क्यों गया है?” मुझे यह बात थोड़ी अजीब सी लग रही है।”

इधर सभी बातें कर रहे थे, उधर ऐलेक्स ग्लोब के पास खड़ा होकर ग्लोब को नचा रहा था। जैसे ही ग्लोब रुक जाता, ऐलेक्स उसे फिर नचा देता।

कुछ देर तक ऐसे ही करते रहने के बाद ऐलेक्स ने इस बार जैसे ही ग्लोब को नचाना चाहा, उसके हाथों पर किसी चीज का स्पर्श हुआ।

यह अहसास होते ही ऐलेक्स ध्यान से उस स्थान को देखने लगा। ध्यान से देखने पर ऐलेक्स को इंडिया वाले स्थान पर एक उभरी हुई बिन्दी चिपकी दिखाई दी।

“कैप्टेन, जरा एक बार इसे देखिये।” ऐलेक्स ने सुयश को वहां आने का इशारा करते हुए कहा- “यहां ग्लोब में इंडिया वाले स्थान पर उभरी हुई बिन्दी चिपकी है। क्या इसका कोई मतलब हो सकता है?”

ऐलेक्स की आवाज सुन सुयश सहित, सभी उस ग्लो ब के पास आ गये और छूकर उस बिन्दी को देखने लगे।

“इस बिन्दी का कोई रंग नहीं है, यह पूर्णतया पारदर्शी है।” सुयश ने कहा- “यानि कि इसे छुए बिना इसके बारे में नहीं जाना जा सकता था, अब ऐसी चीज कैश्वर ने यूं ही तो नहीं लगाई होगी? इसकी कुछ ना कुछ तो अर्थ निकलता ही होगा?”

“ऐलेक्स भैया, एक बार पूरा ग्लोब ध्यान से देखिये। क्या ग्लोब पर और भी ऐसी ही बिन्दियां हैं?” शैफाली ने ऐलेक्स से कहा।

शैफाली की बात सुन कर ऐलेक्स, अपने हाथों के स्पर्श से ग्लोब पर और भी बिन्दियों को ढूंढने में लग गया। कुछ ही देर में ऐलेक्स ने पूरा ग्लोब ध्यान से चेक कर लिया।

“इस ग्लोब पर इंडिया के अलावा रुस, ग्रीनलैंड और न्यूजीलैंड के स्थान पर भी पारदर्शी बिन्दियां भी मौजूद हैं।” ऐलेक्स ने शैफाली से कहा।

यह सुनकर शैफाली मुस्कुरा दी और उठकर ऐलेक्स के गले लगते हुए बोली- “वाह ऐलेक्स भैया, आपने तो इतनी बड़ी समस्या को आसानी से सुलझा दिया।”

पर ऐलेक्स को तो स्वयं नहीं समझ में आया कि उसने कौन सी समस्या को अंजाने में सुलझा दिया, इसलिये वह प्रश्नवाचक नजरों से शैफाली की ओर देखने लगा।

“कैप्टेन अंकल, यहां पर लिखा RING शब्द 4 अक्षर R, I, N और G से बना है, जबकि ग्लोब पर जिन देशों के आगे पारदर्शी बिन्दियां चिपकी हुई हैं, उनके नाम का पहला अक्षर भी यही है। यानि कि Russia का R, India का I, New Zealand का N और Greenland का G....अब मुझे लग रहा है कि हमें ट्रे में मौजूद इन फ्लैग्स को ग्लोब के ऊपर लगाना होगा? पर ध्यान रहे कि जिस देश की ऋतु का रंग जो मानचित्र बता रहा है, फ्लैग हमें उसी ढंग से लगाना होगा।”

शैफाली ने तो एक झटके से पूरी गुत्थी ही सुलझा दी। सभी के चेहरे पर अब खुशी साफ नजर आने लगी थी।

तुरंत तौफीक ने जमीन पर बने मानचित्र पर सबसे पहले रुस देश का रंग देखा, जो कि नारंगी था।

अब ऐलेक्स ने ट्रे से नारंगी रंग का फ्लैग निकालकर उसे ग्लोब के उसी पारदर्शी बिन्दी पर लगा दिया।

जैसे ही ऐलेक्स ने फ्लैग को रुस के स्थान पर लगाया, वातावरण में एक तेज ‘बजर’ की आवाज सुनाई देने लगी।

सभी वह आवाज सुन डर गये। तभी उनकी नजर जमीन पर गई, अब पूरी जमीन पर सिर्फ रुस का ही मानचित्र दिख रहा था और रुस की राजधानी मास्को के स्थान पर एक लाल रंग की लाइट जोर से ब्लिंक
करती हुई दिखाई दी।

“यह सब क्या हो रहा है कैप्टेन?” क्रिस्टी ने सुयश से पूछा।

“मुझे लगता है कि हम जहां खड़े है, वह तिलिस्म नहीं है, बल्कि अब हमें तिलिस्म में प्रवेश करना है और यह बजर हमें इसी का संकेत दे रही है।” सुयश ने कहा- “मुझे लगता है कि तिलिस्म का अगला द्वार मास्को में हमारा इंतजार कर रहा है।” यह कहकर सुयश आगे बढ़कर मास्को के उस स्थान पर खड़ा हो गया, जहां पर लाइट ब्लिंक कर रही थी।

सुयश जैसे ही वहां पर खड़ा हुआ, वह उस स्थान से गायब हो गया। यह देख सभी उस स्थान पर पहुंच कर खड़े हो गये और इसी के साथ सभी गायब हो कर मास्को के एक पार्क में जा पहुंचे। सुयश वहां पहले से ही खड़ा था।

“यह तो मास्को का एक पार्क है।” ऐलेक्स ने चारो ओर देखते हुए कहा- “यहां तो मैं रोज घूमने आता था, यहां से मेरा घर ज्यादा दूर नहीं है।”

“अच्छा तो ब्वॉयफ्रेंड जी, कहीं आप हमको छोड़ कर अपने घर जाने की तो नहीं सोच रहे?” क्रिस्टी ने एक बार फिर से ऐलेक्स को छेड़ते हुए कहा।

“ये लो कर लो बात।” ऐलेक्स ने क्रिस्टी की आँखों में झांकते हुए कहा- “अरे तुम्हारे लिये तो मैं दुनिया छोड़ दूं, तुम्हारे सामने घर की बिसात ही क्या है। और वैसे भी मुझे पता है कि यह कैश्वर का बनाया एक सेट है, असली मास्को नहीं। लेकिन एक बात तो इससे कंफर्म हो गई कि कैश्वर किसी प्रकार से हमारे दिमाग को पढ़ रहा है और उसके बाद ही इन दरवाजों की रचना कर रहा है।”

ऐलेक्स की बात सुन सुयश भी सोच में पड़ गया क्यों कि ऐलेक्स कह तो सही रहा था, इस तिलिस्मा में ऐसी चीजों का ही निर्माण हुआ था, जो कहीं ना कहीं उनके दिमाग में थीं।

“चलिये कैप्टेन, अब इस पार्क को भी देख लें कि यहां पर क्या-क्या है?” तौफीक की आवाज ने सुयश का ध्यान भंग कर दिया और वह अपनी सोच की दुनिया से बाहर आ गया।

सभी अब पार्क में घूमकर वहां मौजूद एक-एक चीज को देखने लगे।

उस पार्क में सबसे पहले एक देवी की मूर्ति मौजूद थी, जो अपने हाथ में ‘सैंड वॉच’ लिये थी।

“क्या कोई बता सकता है कि यह कौन सी देवी हैं?” सुयश ने सभी की ओर देखते हुए पूछा।

“हां, मैं जानती हूं इनके बारे में।” क्रिस्टी ने जवाब दिया- “यह देवी ‘कार्पो’ हैं, ग्रीक माइथालोजी में इन्हें शरद ऋतु (Autumn Season) की देवी कहा जाता है, यानि कि ये देवी बारिश के बाद, प्रकृति में बड़ा बदलाव करते हुए, सभी पेड़ों के पुराने वस्त्रों, यानि कि उनके पत्तों को उनके शरीर से गिरा देती हैं। इसी लिये इस मौसम को पतझड़ भी कहते हैं। यह सबकुछ समय के द्वारा नियंत्रित करती हैं।”

“हमने वहां मानचित्र में भी नारंगी रंग को शरद ऋतु के प्रतीक के रुप में देखा था, यानि तिलिस्मा के चौथे द्वार में इस बार हमारा पाला ऋतुओं से पड़ा है और उसी के फलस्वरुप हम पहली ऋतु का सामना करने के लिये मास्को आये हैं।” जेनिथ ने कहा।

जैसे ही जेनिथ ने यह कहा अचानक से मूर्ति ने अपने हाथ में पकड़ी ‘सैंड वॉच’ को उल्टा कर दिया।

यह देख सभी आश्चर्य से मूर्ति की ओर देखने लगे।

तभी उनके आसपास के वातावरण में बदलाव शुरु हो गये और वहां मौजूद सैकड़ों ‘मैपल’ के पेड़ों की पत्तियों ने अपना रंग बदलना शुरु कर दिया।

अब सभी मैपल की पत्तियां हरे से लाल रंग में परिवर्तित होने लगी। हवा भी अब थोड़ी शुष्क हो चली थी।

“कैप्टेन अंकल, देवी कार्पो के सैंड वॉच के चलते ही मौसम में शरद ऋतु के समान बदलाव होने लगे हैं.... इसी के साथ देवी का सैंड वॉच यह भी बता रहा है कि हमें जो भी करना है, उसके लिये हमारे पास बस 2 घंटे का ही समय है...पर हमें करना क्या है? यह हमें अभी तक नहीं पता।” शैफाली ने पार्क में चारो ओर देखते हुए कहा- “इसलिये हमें सबसे पहले अपना कार्य पहचानना होगा, तभी हम उसे समय रहते पूरा कर पायेंगे।”

शैफाली की बात बिल्कुल सही थी, इसलिये बिना देर किये सभी पार्क के चारो ओर घूमकर वहां मौजूद चीजों से अपना कार्य ढूंढने की चेष्टा करने लगे।

तभी उन्हें पार्क के बीचो बीच एक हरा-भरा पेड़ दिखाई दिया, जो अपनी ग्रीनरी के कारण सभी पेड़ों से अलग ही नजर आ रहा था।

“यह क्या? जहां सभी मैपल के पेड़ों के पत्ते धीरे-धीरे लाल होने लगे है, वहां यह पेड़ अभी भी इतना हरा-भरा कैसे नजर आ रहा है?” तौफीक ने कहा।

“शायद इस पेड़ पर देवी कार्पो और शरद ऋतु का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा?” शैफाली ने कहा- “और मुझे लग रहा है कि यही हमारा कार्य है। हमें इस पेड़ पर भी शरद ऋतु का प्रभाव डालना ही होगा, नहीं तो यह
प्रकृति के विरुद्ध होगा और इसका दुष्परिणाम हमें भुगतना होगा।”

शैफाली की बात से सभी सहमत थे। पर जैसे ही ऐलेक्स ने आगे बढ़कर पेड़ के पास जाने की सोची, किसी अदृश्य दीवार ने ऐलेक्स का रास्ता रोक लिया।

“कैप्टेन, यहां पर कोई अदृश्य दीवार है, जो मुझे आगे जाने नहीं दे रही है।” ऐलेक्स ने सुयश से कहा- “अब अगर आगे जायेंगे ही नही, तो इस पेड़ की परेशानी को दूर कैसे करेंगे?”

ऐलेक्स के शब्द सुनकर सभी ने पेड़ के पास जाने की कोशिश की, पर सभी पेड़ के पास पहुंचने में असफल रहे।

“हमें पेड़ के पास पहुंचने का कोई ना कोई तरीका तो ढूंढना ही होगा?” जेनिथ ने कहा और अपने आसपास कुछ ढूंढने लगी।

पर पार्क में उस जगह पर एक बेंच के सिवा कुछ नहीं था। समय धीरे-धीरे बीत रहा था, पार्क के बाकी पेड़ों की पत्तियां पूरी लाल हो चुकीं थीं, पर सामने खड़ा वह पेड़ अपनी हरी पत्तियों को दिखाकर मानो सबको चिढ़ा रहा था।

सुयश अब थककर पेड़ की ओर देख रहा था, कि तभी सुयश को पेड़ के पास, एक छोटे से बिल से एक चूहा झांकता नजर आया, जो कि सुयश को अपनी ओर देखता पाकर वापस बिल में घुस गया।

चूहे को देखकर अचानक सुयश के मस्तिष्क में एक आइडिया आ गया।

“दोस्तों, मैंने अभी इस पेड़ के पास एक चूहा घूमता देखा, तो मुझे लग रहा है कि यदि हम जमीन के अंदर-अंदर, इस पेड़ तक एक सुरंग खोदें तो उस पर इस अदृश्य दीवार का असर नहीं होगा।”

“पर कैप्टेन, हमारे पास समय बहुत कम है, ऐसे में बिना किसी फावड़े या कुदाल के हम इतनी जल्दी इतनी बड़ी सुरंग कैसे खोद पायेंगे?” जेनिथ ने कहा।

“पहली बात है कि हमें सुरंग को पेड़ तक नहीं खोदना है, हमें बस उसे 2 फुट ही खोदना है, जिससे कि हम बस इस अदृश्य दीवार को पार कर जायें। दूसरी बात जिस पेड़ के पास चूहों ने अपना घर बनाया होता है, उस पेड़ के पास की जमीन वैसे ही अंदर से नर्म होती है, इसलिये हमें ज्यादा मुश्किल नहीं आयेगी।” सुयश ने कहा।

तभी ऐलेक्स भागकर सामने पड़ी बेंच की ओर आ गया। वह कुछ देर तक बेंच को देखता रहा और फिर उसने बेंच के हत्थे को खींचकर बेंच से निकाल लिया।

बेंच का वह हत्था बिल्कुल किसी कुदाल के अगले भाग की तरह था, उसके बीच में लकड़ी लगाने के लिये छेद भी था।

ऐलेक्स की नजरें अब बेंच के लकड़ी के एक पाये की ओर गई। इस बार ऐलेक्स ने बेंच से लकड़ी का वह पाया भी अलग कर लिया।

ऐलेक्स ने लकड़ी के उस पाये को कुदाल के अगले भाग में फंसा दिया। इसके बाद जमीन पर थोड़ा ठोंकते ही कुदाल ने पूरा आकार ले लिया।

अब ऐलेक्स ने भागकर वह कुदाल सुयश को पकड़ा दी। सुयश आश्चर्य से ऐलेक्स को देख रहा था, उसे तो समझ में भी नहीं आया कि ऐलेक्स यह कुदाल ले कहां से आया?

“ऐलेक्स ने तो इस काम को बहुत आसान कर दिया। चलो दोस्तों अब थोड़ा मेहनत भी कर ली जाए।” यह कहकर सुयश तेजी से कुदाल से अदृश्य दीवार के आगे के हिस्से को खोदने लगा।

बाकी के लोग खुदी हुई मिट्टी को दूर करने में लगे थे। सुयश का कहना सही था, चूहों ने पेड़ के आस पास की मिट्टी को भुरभुरा बना दिया था। इसलिये एक छोटी सुरंग तैयार करने में मात्र 15 मिनटं की मेहनत ही करनी पड़ी।

सुरंग बनते ही सुयश और तौफीक तेजी से उस सुरंग में घुसकर पेड़ के पास पहुंच गये और कुछ ना समझ में आते देख पेड़ की पत्तियों को उखाड़ना शुरु कर दिया।

पर सुयश और तौफीक जितनी पत्तियां तोड़ रहे थे, उतनी ही पत्तियां पेड़ पर फिर से आ जा रहीं थीं।

“कैप्टेन अंकल, रुक जाइये।” शैफाली ने सुयश को रुकने का इशारा किया- “आप लोग जितनी पत्तियां तोड़ रहे हैं, उतनी ही पेड़ पर फिर उग रहीं हैं, इसलिये मुझे नहीं लगता कि यह सही तरीका है पेड़ के बदलाव का। हमें कुछ और ही सोचना होगा?”

शैफाली की बात सुन सुयश के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आईं क्यों कि लगभग 1.5 घंटा बीत चुका था, अब सिर्फ आधा घंटा ही शेष था। आसपास के बाकी पेड़ की पत्तियां लगभग झड़ चुकीं थीं।

“जो भी सोचना है जल्दी सोचो शैफाली, क्यों कि हमारे पास ज्यादा समय नहीं बचा है और पेड़ के बारे में तुमसे बेहतर हममें से कोई नहीं सोच सकता।” सुयश ने शैफाली की तारीफ करते हुए उसका उत्साह बढ़ाया।

सुयश के शब्दों को सुन शैफाली जोर-जोर से बड़बड़ा कर सोचने लगी- “मैपल के पेड़ की पत्तियां गर्मियों में हरी होती है, पर जैसे ही शरद ऋतु आती है, वह लाल होने लगती हैं। शरद ऋतु में सूर्य की प्रकाश ज्यादा पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाता, इसका मतलब कि इस पेड़ को भी, कहीं से सूर्य का प्रकाश ज्यादा मिल रहा है, जिसकी वजह से यह इस मौसम में भी अच्छे से क्लोरोफिल बना रहा है, यानि हमें इसका हरा पन रोकने के लिये, सूर्य के प्रकाश के स्रोत का पता लगाना होगा?”

शैफाली की बात सुन ऐलेक्स ने एक बार फिर ध्यान लगा कर पेड़ को देखना शुरु कर दिया, अब उसे प्रकाश की एक किरण किसी ओर से आकर उस पेड़ पर पड़ती दिखाई दी।

“सब लोग मेरे पीछे आओ, मुझे एक प्रकाश की किरण कहीं से आकर इस पेड़ पर पड़ती हुई दिख रही है।” यह कहकर ऐलेक्स पार्क में एक दिशा की ओर भागा।

तब तक सुयश और तौफीक भी सुरंग के रास्ते वापस बाहर निकल आये थे। सभी अब ऐलेक्स के पीछे भागे।

ऐलेक्स भागकर पार्क में मौजूद एक दूसरी मूर्ति के पास पहुंच गया। यह मूर्ति 20 फुट ऊंची थी। उस मूर्ति ने अपने हाथ में एक गोला उठाया हुआ था, जो कि नारंगी रंग का चमक रहा था। वह प्रकाश उसी गोले से आ रहा था।

“यह मूर्ति ग्रीक देवता हीलीयस की है, इन्हें सूर्य के देवता के रुप में जाना जाता है।” क्रिस्टी ने मूर्ति को देखते हुए कहा- “और इन्होंने सूर्य को ही अपने हाथों में उठा रखा है।”

“इसका मतलब इसी सूर्य की किरणों से वह पेड़ अब भी हरा है।” शैफाली ने कहा- “हमें कैसे भी इन किरणों को उस पेड़ तक पहुंचने से रोकना होगा?”

“पर इन किरणों को रोका कैसे जा सकता है?” क्रिस्टी ने दिमाग लगाते हुए कहा।

कुछ सोचने के बाद सुयश ने अपनी बदन पर मौजूद लेदर की जैकेट को उछालकर हीलीयस के हाथ में पकड़े सूर्य पर टांग दिया, पर एक मिनट से भी कम समय में वह जैकेट जलकर राख हो गई और इसी के साथ सुयश के शरीर पर बिल्कुल वैसी ही एक नयी जैकेट आ गई।

“यह प्लान तो काम नहीं करेगा।” सुयश ने कहा- “हम इस सूर्य को किसी भी चीज से ढक नहीं सकते। कुछ और ही सोचना पड़ेगा?”

यह सुनकर सभी इधर-उधर देखने लगे कि शायद यहां कोई और ऐसी चीज हो, जिससे सूर्य की रोशनी को रोका जा सके।

तभी क्रिस्टी की निगाह मूर्ति के पीछे की ओर गई और उसने चिल्ला कर सुयश का ध्यान अपनी ओर कराया- “कैप्टेन, कुछ ढूंढने की जरुरत नहीं है, सूर्य का ग्लोब पीछे की ओर से आधा काला है, इसका साफ मतलब है कि हमें इसके सामने कुछ नहीं रखना, बल्कि इसे घुमाकर इसका पिछला हिस्सा आगे की ओर कर देना है।”

“यह काम मैं करता हूं।” यह कहकर ऐलेक्स तेजी से मूर्ति के ऊपर चढ़ने लगा।

कुछ ही देर में ऐलेक्स मूर्ति के ऊपर था, अब वह सूर्य के ग्लोब को घुमाने की कोशिश करने लगा, पर ऐलेक्स के पूरी ताकत लगा देने के बाद भी वह सूर्य का ग्लोब टस से मस नहीं हुआ।

यह देख ऐलेक्स ने ऊपर से चिल्ला कर कहा- “कैप्टेन यह ग्लोब घूम नहीं रहा है, आप नीचे से देखो, हो सकता है कि मूर्ति को घुमाया जा सके।”

ऐलेक्स की बात सुन सुयश नीचे से मूर्ति को घुमाने की कोशिश करने लगा, पर उस मूर्ति में भी घूमने का कोई ऑप्शन दिखाई नहीं दिया।

अब सच में सबके लिये चिंता की बात थी, क्यों कि अब मात्र 5 मिनट
का ही समय बचा था।

“कैप्टेन, मुझे लगता है कि अब हम इस द्वार को नहीं पार कर पायेंगे, क्यों कि अब हमारे पास सिर्फ और सिर्फ 5 मिनट ही बचा है।” जेनिथ ने निराश होने वाले अंदाज में कहा।

“हमें अंतिम दम तक हार नहीं माननी चाहिये। जिंदगी में कभी-कभी हम उस स्थान से हारकर वापस आ जाते हैं, जो समस्या के समाधान से बिल्कुल करीब होता है। इसलिये अपनी ओर से सभी लोग आखिरी सेकेण्ड तक कोशिश जारी रखो, बाकी सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दो।”

सुयश के शब्द बिल्कुल जादू से भरे थे। इन शब्दों ने सभी में एक बार फिर से जोश का संचार कर दिया था।

सुयश के शब्द सुन ऐलेक्स के कान में गूंजने लगे- “सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दो....यही कहा है कैप्टेन ने.... पर मेरे पास तो देवता हीलीयस के सिवा इस समय कोई नहीं है, चलो इन्हीं पर ध्यान लगाता हूं।” यह सोच ऐलेक्स हीलीयस की मूर्ति को ध्यान से देखने लगा, तभी ऐलेक्स को मूर्ति की गर्दन और सिर के बीच कुछ गैप दिखाई दिया।

कुछ सोच ऐलेक्स ने मूर्ति के सिर को घुमाने की कोशिश की। ऐलेक्स की जरा सी कोशिश से ही मूर्ति का सिर पीछे की ओर घूम गया।

और जैसे ही मूर्ति का सिर पीछे की ओर हुआ, मूर्ति का शरीर भी स्वतः पीछे की ओर घूम गया।

इसी के साथ सूर्य की ग्लोब का अंधेरे वाला हिस्सा आगे की ओर आ गया और उस पेड़ को सूर्य की रोशनी मिलनी बंद हो गई।

इसी के साथ उस पेड़ के पत्तों का रंग भी लाल हो गया। यह देख सब खुशी से चिल्लाये। पर सुयश की निगाह अब देवी कार्पो के हाथ में थमी सैंड वॉच पर थी।

उस सैंड वॉच में अब बहुत थोड़ी सी रेत ही बची थी। अब सुयश कभी मैपल के पेड़ के पत्तों को, तो कभी सैंड वॉच में बची सैंड को देख रहा था।

पेड़ के पत्ते अब पूरे लाल होकर झड़ना शुरु हो गये थे, पर रेत भी बिल्कुल समाप्ति की ओर आ पहुंची थी।

सभी की साँसें इस प्रकार रुकी थीं, मानों विश्व कप फुटबाल के फाइनल के मैच में दोनों टीमें बराबरी पर हों और आखि री 60 सेकेण्ड का टाइमर चल रहा हो।

पेड़ के सारे पत्ते झड़ गये, पर एक अखिरी पत्ता अभी भी डाल पर मौजूद था और सैंड वॉच में सिर्फ 5 सेकेण्ड की रेत ही बची थी......5....4.....3 तभी तौफीक के हाथ में चाकू नजर आया और वह बिजली की तेजी से उस आखिरी पत्ते की ओर झपटा -2..........1 पर आखिरी मिली सेकेण्ड में चाकू ने उस पत्ते को पेड़ से गिरा दिया और इसी के साथ वह द्वार भी पार हो गया।

इससे पहले कि सभी खुशी मना पाते कि रोशनी के एक तेज झमाके के साथ सभी वापस उस कमरे में आ गये, जहां पृथ्वी का ग्लोब रखा था।

तौफीक पर नजर पड़ते ही जेनिथ को छोड़, सभी दौड़कर तौफीक के गले लग गये।

तौफीक की निगाह दूर खड़ी जेनिथ की ओर थी, पर इस समय जेनिथ की आँख में भी, तौफीक के लिये तारीफ के भाव थे।

“अपने मन को इतना व्यथित मत करो जेनिथ।” नक्षत्रा ने कहा- “जो चला गया, उसे जाने दो....तुम्हारे भाग्य में शायद उससे भी बेहतर कुछ लिखा हो?”

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने स्वयं के भावों को एक बार फिर से कंट्रोल किया और बोली- “तुमको बड़ा पता है मेरे भाग्य के बारे में। ...एक तो वैसे ही यहां तिलिस्मा में तुम मुझसे कम बात करते हो और ऊपर से ज्ञान और दे रहे हो।”

“मैं क्या करुं जेनिथ, यहां एक कार्य अभी सही से खत्म भी नहीं होता कि दूसरा शुरु हो जाता है, बात करने का समय ही कहां मिल पा रहा? कैश्वर ने तो सबको रोबोट से भी बदतर बना दिया। अब वो देखो सभी फिर से अगले द्वार में जाने की तैयारी कर रहे हैं...जाओ अब तुम भी उनके पास...जब तक मैं कुछ नई खोज करता हूं।”

“तुम्हारे पास खोज करने के लिये लैब तो है ही नहीं, फिर तुम ये खोज करते कहां हो?” जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

“क्यों तुम्हारा दिमाग की प्रयोगशाला, किसी नक्षत्रशाला से कम है क्या? बस इसी में एक टेबल डालकर बैठा हूं। पर तुम चिंता मत करो, तुम्हारे दिमाग में होने वाले सारे प्रयोग पर बस तुम्हारा ही अधिकार होगा।” नक्षत्रा ने कहा।

“सिर्फ तुम्हारे प्रयोग पर ही नहीं तुम पर भी मेरा सारा अधिकार है, आखिर मैं ही तो सिखा रही हूं तुम्हें नयी -नयी चीजें।” जेनिथ ने कहा।

“अच्छा जी, कल तक तो दोस्त बता रही थी और आज अधिकार जताने लगी।” नक्षत्रा ने मजा लेते हुए कहा - “चलो माना तुम्हारा अधिकार स्वयं पर...पर देखता हूं कि जब कोई मुझे तुम से अलग करने आयेगा, तो उसका सामना कैसे करोगी?”

“कौन अलग करने आयेगा?...क्या तुम मुझसे कुछ छिपा रहे हो नक्षत्रा?” जेनिथ यह बात सुन थोड़ा परेशान दिखने लगी।

“नहीं...नहीं...मैं तो ऐसे ही मजाक कर रहा था। तुम कुछ अलग ही अर्थ निकालने लगी।” नक्षत्रा ने अपनी बात को संशोधित करते हुए कहा- “और जल्दी से उधर जाओ, देखो सारे लोग तैयार हैं, अगले द्वार में
जाने के लिये।”

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने सबकी ओर देखा, सच में ऐलेक्स लाल रंग का फ्लैग हाथ में लिये, इंडिया के स्थान पर लगाने के लिये तैयार खड़ा था।

जेनिथ तुरंत सबके पास पहुंच गई। उसे पास आता देख ऐलेक्स ने लाल रंग के फ्लैग को इंडिया वाले स्थान पर, पृथ्वी के ग्लोब में लगा दिया।

इस बार जमीन पर बने मानचित्र में इंडिया का मैप बड़ा होकर आ गया और उस पर खड़े होते ही सभी एक बार फिर उस मानचित्र में समा गये।


जारी रहेगा______✍️

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Ek baar fir apne shant dmag se kaam lene se ye log ek aur dwar paar kar gaye.........

Ab inhe aana he apne desh me.............

Keep rocking Bro
 

Avaran

एवरन
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रिव्यू की शुरुआत

सपनों का संसार लेकिन मुझे ये समझ नहीं आया कि सपनों का संसार किसका? आखिर क्या ये सपनों का संसार किसी चीज़ का संकेत था? चंद्रमा, सूरज, पवन, इंद्र, पृथ्वी क्या ये सामान्य था कि बस टास्क पूरा करो या आगे बढ़ो? समझ ये नहीं आ रहा मुझे कि कुछ भी बिना वजह तो कहानी में नहीं होगा।

मुझे इतना तो विश्वास है राज शर्मा पर कि ज़रूर ये लोग तिलिस्म के ज़रिए कुछ तो बताना चाह रहे, लेकिन समझ नहीं आ रहा मुझे कि क्यों तिलिस्म की मुश्किलें इतने सारे हैं। कुछ तो है जो किसी के पल्ले पड़ रहा है। मुझे शैतानी ख़ोपड़ी चलानी पड़ेगी, तभी कुछ पता चलेगा।

सपनों के संसार में क्रिएटिविटी लेवल लाजवाब था। इतनी क्रिएटिविटी मुझसे तो कभी नहीं हो सकती। बादल से ट्रैवल करना, किसान की समस्या सॉल्व करना कुल मिलाकर लाजवाब अपडेट।

अगला रिव्यू अभी या कल रात को।
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
45,782
122,892
304

Avaran

एवरन
9,762
19,311
174
रिव्यू शुरू किया जाए।
इंटरस्टिंग इंटरस्टिंग मज़ेदार अपडेट।
मयूर और धरा के जाने का ज़िक्र मतलब पिछले कुछ इंचार दिनों के भीतर कुछ अनहोनी गुज़र गई है।
अंदेशा लगाया जाए तो कौन-सा जीव ने ये सब जानवरों का हमला करवाया

क्या वो एंडोर्श ग्रह के निवासी थे या तिलिस्म से भगाए गए जीव हैं वो
मेरा अंदेशा एंडोर्श की तरफ़ जा रहा है उन लोगों ने ज़रूर कुछ अपना प्रयोग शुरू किया है।

वो तिलिस्म जीव इतने बड़े स्तर की तबाही मचाना मुश्किल है; दूसरा, वो ये कि कहीं न कहीं जानबूझकर वेगा और वीनस को भी टारगेट किया जा रहा है।

साथ ही एक और बात वीनस भी कुछ जीव-जंतुओं के माइंड-कंट्रोल की पावर शायद जानती है।
ऐसा लगा मुझे, कहीं ऐसा तो नहीं कि वेगा ने सम्मोहन सिखाया हो उसे पर वेगा तो उस पावर देने वाले से राज़ रखने को कह चुका था।
मतलब वेगा ने नहीं सिखाया, तो शायद वीनस भी मैजिकल है।

घड़ी की पावर्स का एक बार फिर से नमूना देख लिया हमने कितनी ख़तरनाक पावर्स हैं।
अगर ये पावर्स ग़लत हाथों में जाएँ तो बहुत बड़ा नुक़सानदायक साबित होंगी।
 

RagVi Singh

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#-1

22 दिसम्बर 2001, शनिवार, 22:00; न्यूयार्क शहर, अमेरिका !!

“हैलो मारथा !“ माइकल ने दरवाजे से प्रवेश करते हुए, अपनी पत्नी मारथा कोसंबोधित किया -


“पैकिंग पूरी हुई कि नहीं ? याद है ना कल ही हमें शिप से सिडनी जाना है।“

मारथा ने पहले एक नजर अपनी सो रही बेटी शैफाली पर डाली और फिर मुंह पर उंगली रखकर, माइकल से धीरे बोलने का इशारा किया -

“श् ऽऽऽऽऽ शैफाली, अभी - अभी सोई है, जरा धीरे बोलिए।“
माइकल, मारथा का इशारा समझ गया। इस बार उसकी आवाज धीमी थी –


“मैं तुमसे पैकिंग के बारे में पूछ रहा था।“

“अधिकतर पैकिंग हो चुकी है, बस शैफाली और ब्रूनो का ही कुछ सामान बचा हुआ है।“ मारथा ने धीमी आवाज में माइकल को जवाब दिया।

उधर ब्रूनो, माइकल की आवाज सुन, पूंछ हिलाता हुआ माइकल के पास
आकर बैठ गया । माइकल ने ब्रूनो के सिर पर हाथ फेरा और फिर मारथा से मुखातिब हुआ-


“ये तो अलबर्ट सर ने ब्रूनो के लिए 'सुप्रीम' पर व्यवस्था करवा दी, नहीं तो उस शिप पर जानवर को ले जाना मना है और ब्रूनो को छोड़कर शैफाली कभी नहीं जाती।“

“जाना भी नहीं चाहिए।“ मारथा ने मुस्कुरा कर ब्रूनो की तरफ देखते हुए कहा -

“शैफाली खुद भी छोटी थी, जब आप ब्रूनो को लाए। देखते ही देखते ये शैफाली से कितना घुल-मिल गया । इसके साथ रहते हुए तो शैफाली को अपने अंधेपन का भी एहसास नहीं होता ।“

ब्रूनो फिर खुशी से पूंछ हिलाने लगा । मानो उसे सब समझ आ गया हो।

“अलबर्ट __________सर, कॉलेज में मेरे प्रो फेसर थे। मैं उनका सबसे फेवरेट स्टूडेंट था ।“

माइकल ने पुनः बोलना शुरू किया - “जैसे ही मुझे पता चला कि वो भी न्यूयार्क से सिडनी जा रहे हैं, तो मैं अपने को रोक न पाया । इसीलिए मैं भी उनके साथ इसी शिप से जाना चाहता हूं।“

“मगर ये सफर 65 दिनों का है।“ मारथा ने थोड़ा चिंतित स्वर में कहा–

“क्या 2 महीने तक हम लोग इस सफर में बोर नहीं हो जाएंगे।“

“अरे, यही तो खास बात होती है शिप की । 2 महीने तक सभी झंझटों से
दूऱ........। कितना मजा आएगा ।“ माइकल ने उत्साहित होकर कहा –

“और ये भी तो सोचो, कि अलबर्ट सर को भी टाइम मिल जाएगा, शैफाली के साथ रहने का । वो जरूर इसकी परेशानियों को दूर करेंगे।“

इससे पहले कि मारथा कुछ और कह पाती । ब्रूनो की “कूं-कूं“ की आवाज ने उनका ध्यान भंग कि या।
ब्रूनो, सो रही शैफाली के पास खड़ा था और शैफाली को बहुत ध्यान से देख रहा था ।
दोनों की ही नजर अब शैफाली पर थी । जो बिस्तर पर सोते हुए कुछ अजीब से करवट बदल रही थी । साथ ही साथ वह कुछ बुदबुदा रही थी । माइकल और मारथा तेजी से शैफाली की ओर भागे। मारथा ने शैफाली को हिलाना शुरू कर दिया । पर वह बिल्कुल बेसुध थी ।

शैफाली अभी भी नींद में बड़बड़ा रही थी । पर अब वो आवाजें, माइकल व मारथा को साफ सुनाई दे रहीं थीं –

“अंधेरा ........ लहरें ......... रोशनी ........ फायर
............ लाम ....... कीड़े ........ द्वीप ..... ।“


मारथा , शैफाली की बड़बड़ाहट सुनकर अब बहुत घबरा गई थी । उसने तेजी से शैफाली को हिलाना शुरू कर दिया। अचानक शैफाली झटके से उठ गई।

“क्या हुआ मॉम? आप मुझे हिला क्यों रहीं हैं?“ शैफाली ने अपनी नीली - नीली आंखें चमकाते हुए कहा ।

“तुम शायद फिर से सपना देख रही थी ।“ माइकल ने व्यग्र स्वर में कहा।

“आप ठीक कह रहे हैं डैड। मैं कुछ देख तो रही थी, पर मुझे कुछ ठीक से याद नहीं आ रहा ।“ शैफाली ने कहा ।

“कोई बात नहीं बेटी, आप सो जाओ“ मारथा ने गहरी सांस लेते हुए कहा -


“परेशान होने की जरूरत नहीं है।“
शैफाली दोबारा से लेट गई। माइकल व मारथा अब शैफाली से दूर हट गए थे।

“ये कैसे संभव है मारथा ?“ माइकल ने दबी आवाज में कहा-

“शैफाली तो जन्म से अंधी है, फिर इसे सपने कैसे आ सकते हैं। हर महीने ये ऐसे ही सपने देखकर बड़बड़ाती है।“

“आप परेशान मत हो माइकल।“ मारथा ने गहरी साँस लेते हुए कहा -

“माना कि जन्म से अंधे व्यक्ति सपने नहीं देख सकते, पर अपनी शैफाली भी कहां नॉर्मल है। देखते नहीं हो वह मात्र 12 साल की उम्र में अंधी होकर भी, अपने सारे काम स्वयं करती है और अजीब-अजीब सी पहेलियां बनाकर हल करती रहती है। शैफाली दूसरों से अलग है, बस।“

माइकल ने भी गहरी सांस छोड़ी और उठते हुए बोला - “चलो अच्छा ! तुम बाकी की पैकिंग करो , मैं भी मार्केट से कुछ जरूरी सामान लेकर आता हूं।“

23 दि सम्बर 2001, रविवार, 14:00; (“सुप्रीम “) न्यूयार्क का बंदरगाह छोड़कर मंथर गति से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा था। बंदरगाह को छोड़े हुए उसे लगभग 5 घंटे बीत चुके थे। दिसंबर का ठंडा महीना था और सूर्य भी अपनी चमकती किरणें बिखेरता हुआ, आसमान से सागर की लहरों पर, अठखेलियां करती हुई, अपनी परछाई को देखकर खुश हो रहा था ।
मौसम ठंडा होने के कारण सूर्य की गुनगुनी धूप सभी को बड़ी अच्छी लग रही थी ।

'सुप्रीम' के डेक पर बहुत से यात्रियों का जमावड़ा लगा हुआ था । कोई डेक पर टहलकर, इस गुनगुनी धूप का मजा ले रहा था, तो कोई अपने इस खूबसूरत सफर और इस शानदार शिप के बारे में बातें कर रहा था।

सभी अपने-अपने काम में मशगूल थे। परंतु ऐलेक्स जो कि एक पोल से टेक लगाए हुए खड़ा था, बहुत देर से, दूर स्लीपिंग चेयर पर लेटी हुई एक इटैलियन लड़की को देख रहा था। वह लड़की दुनिया की नजरों से बेखबर, बड़ी बेफिक्री से लेटी हुई, सुनहरी धूप का मजा लेते हुए, एक किताब पढ़ रही थी ।

ऐलेक्स की निगाहें बार-बार कभी उस लड़की पर, तो कभी उसकी किताब पर पड़ रही थी । दोनों की बीच की दूरी बहुत अधिक ना होने के कारण उसे किताब का नाम बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा था।
किताब का नाम ’वर्ल्ड फेमस बैंक रॉबरी ’ होने के कारण ना जाने, उसे क्यों बड़ा अटपटा सा महसूस हुआ।

उसे उस लड़की की तरफ देखते हुए ना जाने कितना समय बीत चुका था, परंतु उसकी नजर उधर से हटने का नाम ही नहीं ले रहीं थी। तभी एक आवाज ने उसका ध्यान भंग किया।

“हाय क्रिस्टी !“ एक दूसरी लड़की अपना हाथ हिलाते हुए उस इटैलियन लड़की की तरफ बढ़ी, जिसका नाम यकीनन क्रिस्टी था –

“व्हाट ए सरप्राइज, तुम इस तरह से यहां शिप पर मिलोगी, ये तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था ।“

“ओऽऽऽ हाय लॉरेन!“ क्रिस्टी ने चैंक कर किताब को नजरों के सामने से हटाते हुए, लॉरेन पर नजर डालते हुए, खुशी से जवाब दिया –

“तुम यहां शिप पर कैसे? अच्छा ये बताओ, कॉलेज से निकलकर तुमने क्या-क्या किया ? इतने साल तक तुम कहां थी ? और .......।“


“बस-बस.....!“ लॉरेन ने क्रिस्टी के मुंह को अपनी हथेली से बंद करते हुए कहा- “अब सारी बातें एक साथ पूछ डालोगी क्या? चलो चलते हैं, कॉफी पीते हैं, फिर आऽऽराऽऽम से एक दूसरे से सारी बातें पूछेंगे।“

“तुम ठीक कहती हो । हमें कहीं बैठकर आराम से बात करनी चाहिए और वैसे भी तुम मुझ से लगभग 3 साल बाद मिल रही हो । मुझे भी तो पता चले इन बीते हुए सालों में तुमने क्या-क्या तीर मारे?“

यह कहकर क्रिस्टी लगभग खींचती हुई सी, लॉरेन को लेकर रेस्टोरेंट की ओर बढ़ गई।

ऐलेक्स, जो कि अब तक दोनों सहेलियों की सारी बातें ध्यान से सुन रहा था,

उसकी निगाहें अब सिर्फ और सिर्फ उस किताब पर थी, जो कि अनजाने में ही शायद वहां पर छूट गई थी । वह धीरे धीरे चलता हुआ, उस स्थान पर पहुंचा, जहां पर वह किताब रखी हुई थी । अब उसने अपनी नजरें हवा में इधर-उधर घुमाई। जब उसे इस बात का विश्वास हो गया, कि इस समय किसी की नजरें उस पर नहीं है, तो उसने धीरे से झुक कर उस किताब को उठा लिया । वहीं पर खड़े-खड़े ऐलेक्स ने उस किताब का पहला पृष्ठ खोला । जिस पर अंग्रेजी में बहुत ही खूबसूरत राइटिंग में

’क्रिस्टीना जोंस’ लिखा था।
ऐलेक्स ने चुपचाप किताब को बंद किया और धीरे-धीरे उस स्थान से दूर चला गया। लेकिन जाते-जाते वह अपने होंठों ही होंठों में बुदबुदाया-

“क्रिस्टी !“




जारी रहेगा...…:writing:
Starting se end Tak sirf suspence hi hai
Ummid hai yeh aane wale 65 din mysterious ho
Aur shayed shefali ke sapno ka link bhi ho
Khair Raj_sharma wonderful start
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Starting se end Tak sirf suspence hi hai
Ummid hai yeh aane wale 65 din mysterious ho
Aur shayed shefali ke sapno ka link bhi ho
Khair Raj_sharma wonderful start
Welcome to the story, and Thank you very much for your valuable review :thanks:
Kewal shefaali ka hi nahi, har cheej ka link milega :roll:
 
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