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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

dil_he_dil_main

Royal 🤴
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#166.

चैपटर-9
सपनों का संसार:
(तिलिस्मा 3.3)

सुयश के साथ सभी अगले द्वार में प्रवेश कर गये।

तिलिस्मा के इस द्वार में प्रवेश करते ही सभी को लगभग 100 फुट ऊंची एक किताब दिखाई दी। जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘सपनों का संसार’ लिखा था।

उस किताब में एक दरवाजा भी लगा था। दरवाजे के अंदर कुछ सीढ़ियां बनीं थीं, जो कि ऊपर की ओर जा रहीं थीं। सभी उस दरवाजे में प्रवेश कर गये और सीढ़ियां चढ़कर ऊपर की ओर चल दिये।

लगभग 50 सीढ़ियां चढ़ने के बाद सभी को फिर से एक दरवाजा दिखाई दिया। सभी उस दरवाजे से अंदर प्रवेश कर गये।

अब वह सभी एक ऊंचे से प्लेटफार्म पर खड़े थे और ऊपर आसमान की ओर ऐसे सैकड़ों प्लेटफार्म दिखाई दे रहे थे।

हर प्लेटफार्म के चारो ओर कुछ सीढ़ियां और 2 दरवाजे बने थे। सारे प्लेटफार्म हवा में झूल रहे थे।

“यह सब क्या है? और हमें जाना कहां है?” ऐलेक्स ने सुयश को देखते हुए कहा।

“पता नहीं, पर मुझे लगता है कि हमें अपने सामने मौजूद दूसरे दरवाजे में घुसने पर ही पता चलेगा कि हमें जाना कहां है?” सुयश ने कहा।

यह सुनकर क्रिस्टी अपने सामने मौजूद दरवाजे में प्रवेश कर गई, अब क्रिस्टी उनसे काफी ऊंचाई पर बने दूसरे प्लेटफार्म पर दिखाई दी।

“कैप्टेन आप लोग भी ऊपर आ जाइये, मुझे लगता है कि हमें इन प्लेटफार्म के द्वारा ही ऊपर की ओर जाना है।” क्रिस्टी ने तेज आवाज में कहा।

क्रिस्टी की आवाज सुन सभी उस दरवाजे में प्रवेश कर गये।

इसी प्रकार कई बार अलग-अलग दरवाजों में प्रवेश करने के बाद, आखिरकार उनका दरवाजा एक बादल के ऊपर जाकर खुला।

जैसे ही सभी बादल के ऊपर खड़े हुए, वह दरवाजा और प्लेटफार्म दोनों ही गायब हो गये।

अब सभी ने अपने चारो ओर नजर डाली। इस समय वह सभी जिस बादल पर खड़े थे, वह लगभग 200 वर्ग फुट का था और बिल्कुल सफेद था।

उस बादल से 100 मीटर की दूरी पर एक बड़ा सा गोला सूर्य के समान चमक रहा था, उसकी रोशनी से ही पूरा क्षेत्र प्रकाशमान था।

“क्या वह कृत्रिम सूर्य है?” जेनिथ ने उस सूर्य के समान गोले की ओर देखते हुए कहा।

“लगता है कैश्वर ने यह द्वार कुछ अलग तरीके से बनाया है।” सुयश ने कहा- “वह सामने का गोला कृत्रिम सूर्य है, जो सूर्य के समान ही रोशनी दे रहा है। हम इस समय बादलों के ऊपर खड़े हैं। पर इन दोनों के अलावा यहां पर कुछ नजर नहीं आ रहा। ना तो बाहर निकलने का कोई दरवाजा दिख रहा है और ना ही यह समझ में आ रहा है कि यहां पर करना क्या है?”

तभी शैफाली की नजर आसमान की ओर गई। आसमान पर नजर पड़ते ही शैफाली आश्चर्य से भर उठी।

“कैप्टेन अंकल, जरा ऊपर आसमान की ओर देखिये, वहां पर बहुत कुछ विचित्र सा है?” शैफाली ने सुयश को आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा। शैफाली की बात सुन सभी ने आसमान की ओर देखा।

अब सभी अपना सिर उठाये विस्मय से ऊपर की ओर देख रहे थे।

“यह आसमान में क्या चीजें बनी हैं?” ऐलेक्स ने बड़बड़ाते हुए कहा।

“मुझे लग रहा है कि हमारे सिर के ऊपर आसमान नहीं बल्कि जमीन है, आसमान पर तो हम लोग खड़े हैं, यानि कि यहां पर सब कुछ उल्टा-पुल्टा है।” क्रिस्टी ने कहा।

“सब लोग जरा ध्यान लगाकर देखो कि वहां ऊपर क्या-क्या चीजें है?” सुयश ने सभी से कहा।

“कैप्टेन मुझे वहां एक खेत दिखाई दे रहा है, जिस में एक किसान बीज बो रहा है।” तौफीक ने कहा।

“मुझे उस खेत के बाहर 5 मूर्तियां दिखाई दे रहीं हैं, शायद वह किसी देवी-देवता की मूर्तियां हैं, उन मूर्तियों पर कुछ लिखा भी है, पर यह भाषा मैं पढ़ना नहीं जानती।” जेनिथ ने कहा।

“वह मूर्तियां सूर्य, चंद्र, इंद्र, पवन और पृथ्वी की हैं।” सुयश ने मूर्तियों की ओर देखते हुए कहा- “और उस पर हिंदी भाषा में लिखा है।” यह कहकर सुयश ने सभी को उन देवी देवताओं के बारे में बता दिया।

“कैप्टेन खेत से कुछ दूरी पर एक बड़ा सा तालाब बना है, जिससे समुद्र जैसी लहरें उठ रहीं हैं।” ऐलेक्स ने कहा- और उसके सामने एक बड़ा सा कमरा बना है, जिस पर एक तीर ऊपर की ओर मुंह किये हुए लगा है। उस तीर के सामने एक बड़ी सी पवनचक्की जमीन पर गिरी पड़ी है।”

“यह तो कोई बहुत अजीब सी पहेली लग रही है....क्यों कि ना तो हम सूर्य के पास जा सकते हैं और ना ही ऊपर जमीन की ओर.....और इन बादलों में कुछ है नहीं?...फिर इस पहेली को हल कैसे करें?” क्रिस्टी ने कहा।

सभी बहुत देर तक सोचते रहे, परंतु किसी को कुछ समझ नहीं आया कि करना क्या है? तभी जेनिथ की निगाह सूर्य की ओर गई।

“कैप्टेन सूर्य अपना रंग बदल रहा है...अब वह सुनहरे से सफेद होता जा रहा है।” जेनिथ ने कहा।

जेनिथ की बात सुन सभी सूर्य की ओर देखने लगे। जेनिथ सही कह रही थी, सूर्य सच में एक किनारे से सफेद हो रहा था।

“मुझे लग रहा है कि सूर्य धीरे-धीरे चंद्रमा में परिवर्तित हो रहा है।” शैफाली ने कहा- “यानि दिन के समय यही सूर्य बन जाता है और रात को यही चंद्रमा बन जाता है।”

“मुझे लगता है कि हमें थोड़ी देर और इंतजार करना चाहिये, हो सकता है कि रात होने पर चंद्रमा हमें कोई मार्ग दिखाए?” तौफीक ने कहा।

तौफीक की बात सुन सभी आराम से वहीं सफेद बादल पर बैठ गये।

धीरे-धीरे सूर्य पूरी तरह से चंद्रमा में परिवर्तित हो गया, अब सभी ध्यान से चंद्रमा को देखने लगे।

“कैप्टेन चंद्रमा में एक द्वार बना है, मुझे लगता है कि हमें उसी द्वार से बाहर जाना है।” जेनिथ ने कहा।

“चलो एक परेशानी तो दूर हुई, कम से कम ये तो पता चला कि हमें जाना कहां है?” सुयश ने खुशी भरे शब्दों में कहा- “अब हमें बस चंद्रमा तक जाने का रास्ता ढूंढना है। क्यों कि इन बादलों से चंद्रमा के बीच सिर्फ हवा ही है।”

“मुझे लगता है कि हमें यहां से कूद कर जमीन तक जाना होगा, चंद्रमा का रास्ता अवश्य ही नीचे से होगा।” ऐलेक्स ने कहा।

“अरे बुद्धू, हम खुद ही नीचे हैं, कूदने से ऊपर कैसे चले जायेंगे?” क्रिस्टी ने ऐलेक्स से हंस कर कहा।

“तो फिर अगर कोई चीज इन बादलों से गिरे तो वह कहां जायेगी? हमसे भी नीचे....या फिर ऊपर जमीन की ओर?” ऐलेक्स की अभी भी समझ में नहीं आ रहा था।

“रुको अभी चेक कर लेते हैं।” यह कहकर क्रिस्टी ने अपनी जेब में रखा एक फल निकाला और उसे कुछ दूरी पर फेंक दिया।

वह फल नीचे जाने की जगह तेजी से ऊपर जमीन की ओर चला गया।

“अब समझे, जमीन और उसका गुरुत्वाकर्षण ऊपर की ओर ही है, हम लोग सिर्फ ऊंचाई पर खड़े हैं और हमें उल्टा दिख रहा है बस। ....और अगर तुमने यहां से कूदने की कोशिश की तो तुम्हारी हड्डियां भी टूट जायेंगी या फिर तुम मर भी सकते है, क्यों कि हमारी ऊंचाई बहुत ज्यादा है।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स को समझाते हुए कहा।

सुयश ने कहा- “मुझे तो लगता है कि अवश्य ही अब इन बादलों में कुछ ना कुछ छिपा है...खाली हाथ तो हम लोग इस द्वार को पार नहीं कर पायेंगे।”

सुयश की बात सुन सभी उस सफेद बादल में हाथ डालकर, टटोल कर कुछ ढूंढने की कोशिश करने लगे।

तभी शैफाली का हाथ बादल में मौजूद किसी चीज से टकराया। शैफाली ने उस चीज को खींचकर निकाल लिया। वह एक 3 फुट का वर्गाकार शीशा था।

“पहले मेरे दिमाग में यह बात क्यों नहीं आयी।” सुयश ने शीशे को देख अपने सिर पर हाथ मारते हुए कहा- “और ढूंढो...हो सकता है कि कुछ और भी यहां पर हो ?”

तभी जेनिथ ने खुशी से कहा- “कैप्टेन, मुझे यह छड़ी मिली है।” सुयश ने जेनिथ के हाथ में थमी छड़ी को देखा। वह एक साधारण लकड़ी की छड़ी लग रही थी।

सभी फिर से बादलों से कुछ और पाने की चाह में उन बादलों का मंथन करने लगे। पर काफी देर ढूंढने के बाद भी बादलों से कुछ और ना मिला।

“यहां तो सिर्फ एक शीशा और छड़ी थी, इन दोनों के द्वारा भला हम चंद्रमा तक कैसे पहुंच सकते हैं?” क्रिस्टी ने कहा।

“इन दोनों के द्वारा हम चंद्रमा तक नहीं पहुंच सकते, पर इनका कुछ ना कुछ तो उपयोग है।” यह कहकर सुयश ने शीशे को चंद्रमा की रोशनी की ओर कर दिया, पर उसमें चंद्रमा की परछाईं दिखने के सिवा कुछ नहीं हुआ।

धीरे-धीरे कई घंटे और बीत गये। अब चंद्रमा फिर से सूर्य में परिवर्तित होने लगा।

सूर्य की पहली किरण सुयश के माथे से आकर टकराई, तभी सुयश के दिमाग में एक विचार कौंधा।

अब सुयश ने शैफाली से शीशा लेकर सूर्य की दिशा में कर दिया।

सूर्य की किरणें शीशे से टकरा कर परावर्तित होने लगीं। अब सुयश ने जमीन की ओर ध्यान से देखा।

खेत में बैठा किसान बीज बोने के बाद, बार-बार ऊपर बादलों की ओर देख रहा था। कभी-कभी वह अपने माथे पर आये पसीने को, अपने कंधे पर रखे कपड़े से पोंछ रहा था।

अब सुयश की निगाह इंद्र की मूर्ति पर पड़ी। इंद्र की मूर्ति देखने के बाद सुयश के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई।

सुयश की मुस्कान देखकर सभी समझ गये कि सुयश को अवश्य कोई ना कोई उपाय मिल गया है?

“कुछ समझ में आया तुम लोगों को?” सुयश ने सभी से पूछा। सभी ने ना में सिर हिला दिया।

यह देख सुयश ने बोलना शुरु कर दिया- “मुझे भी अभी सबकुछ तो समझ में नहीं आया है, पर उस किसान को देखकर यह साफ पता चल रहा है कि उसे बीज बोने के बाद बारिश का इंतजार है और वह बारिश हमें करानी पड़ेगी।”

“यह कैसे संभव है कैप्टेन? हम भला बारिश कैसे करा सकते हैं?” तौफीक ने सुयश का मुंह देखते हुए आश्चर्य से पूछा।

“संभव है....मगर पहले मुझे ये बताओ कि धरती पर बारिश होती कैसे है?” सुयश ने उल्टा तौफीक से ही सवाल कर दिया।

“समुद्र का पानी, सूर्य की गर्मी से वाष्पीकृत होकर, बादलों का रुप ले लेता है और बादल जब आपस में टकराते हैं या फिर उनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो वह बूंदों के रुप में धरती की प्यास बुझाते हैं।” तौफीक ने कहा।

“अब जरा जमीन की ओर देखो। सूर्य की रोशनी उस तालाब के ऊपर नहीं पड़ रही है, इसीलिये किसान के खेत पर बारिश नहीं हो रही है।” सुयश ने तालाब की ओर इशारा करते हुए कहा।

“पर हम सूर्य की रोशनी को तालाब की ओर कैसे मोड़ पायेंगे?” क्रिस्टी के चेहरे पर उलझन के भाव नजर आये।

“इस शीशे की मदद से।” सुयश ने कहा- “इसकी मदद से हम सूर्य के प्रकाश को परावर्तित कर उस तालाब पर डाल सकते हैं।”

“पर यह प्रक्रिया तो बहुत लंबी चलती है। क्या हमें शीशा इतनी देर तक पकड़े रखना पड़ेगा?” ऐलेक्स ने पूछा।

“पता नहीं कितना समय लगेगा, पर इसके सिवा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है?” यह कहकर सुयश ने शीशे को इस प्रकार पकड़ लिया, कि अब सूर्य की रोशनी उससे परावर्तित होकर तालाब पर जाकर पड़ने लगी।

लगभग 2 घंटे की अपार सफलता के बाद, तालाब का पानी वाष्पीकृत होकर बादलों का रुप लेने लगा।

यह देख सभी में नयी ऊर्जा का संचार हो गया। अब सभी बारी-बारी शीशे को पकड़ रहे थे।

अब उनके सफेद बादल का रंग धीरे-धीरे काला होने लगा।

लगभग आधे दिन के बाद उनके बादलों का रंग पूर्ण काला हो गया। अब उस बादल के बीच बिजली भी कड़क रही थी, पर आश्चर्यजनक तरीके से वह बिजली इनमें से किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा रही थी।

बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक देख किसान खुशी से नाचने लगा।

पर बादलों को बरसाना कैसे था? यह किसी को नहीं पता था?

सुयश की निगाह अब जेनिथ के हाथ में पकड़ी छड़ी की ओर गई। सुयश ने वह छड़ी जेनिथ के हाथ से ले ली।

सुयश ने बादल पर जैसे ही वह छड़ी मारी, बादल से जोर की आवाज करती बिजली निकली और जमीन पर स्थित उस घर के ऊपर बने तीर में समा गई।

सुयश ने 2-3 बार ऐसे ही किया। अब बादल से तेज मूसलाधार बारिश शुरु हो गई और धरा की प्यास बुझाने, पृथ्वी की ओर जाने लगी।

बहुत ही विचित्र नजारा था। बादलों से निकली हर बूंद ऊपर की ओर जा रही थी।

तभी सूर्य के सतरंगी प्रकाश से आसमान में एक बड़ा इंद्रधनुष बन गया। सभी को पता था कि यह सब कुछ असली नहीं है, फिर भी वह सभी मंत्रमुग्ध से प्रकृति के इस सुंदर दृश्य को निहार रहे थे।

बूंदों ने अब किसान के खेत पर बरसना शुरु कर दिया। बूंदों के पड़ते ही अचानक किसान का बोया हुआ बीज अंकुरित हो गया।

कुछ ही देर में वह अंकुरित बीज एक लता का रुप ले उस बादल की ओर बढ़ने लगा।

सभी आश्चर्य से उस पृथ्वी के पौधे को बढ़ता हुआ देख रहे थे। 10 मिनट में ही उस लता धारी वृक्ष ने, बादलों से पृथ्वी तक एक विचित्र पुल का निर्माण कर दिया।

तभी वह शीशा और छड़ी गायब हो गये।

“यही है वह रास्ता, जिससे होकर हमें पृथ्वी तक पहुंचना है।” सुयश ने धीरे से पेड़ की लताओं को पकड़ा और सरककर नीचे जाने लगा।

सुयश को ऐसा करते देख, सभी उसी प्रकार से सुयश के पीछे आसमान से उतरने लगे। कुछ ही देर बाद सभी जमीन पर थे।

“अब जाकर कुछ बेहतर महसूस हुआ।” ऐलेक्स ने लंबी साँस छोड़ते हुए कहा- “ऊपर से उल्टा देखते-देखते दिमाग चकरा गया था।

सुयश ने अब खेत के चारो ओर देखा। सभी के बादलों से उतरते ही वह पेड़ और किसान दोनों ही गायब हो गये थे।

सुयश सभी को लेकर खेत से बाहर आ गया। बाहर अब 2 ही मूर्तियां दिख रहीं थीं।

“कैप्टेन, यह 3 मूर्तियां कहां गायब हो गईं?” क्रिस्टी ने कहा।

“जिन मूर्तिंयों का कार्य खत्म हो गया, वह मूर्तियां स्वतः गायब हो गयीं। जैसे सूर्य की मूर्ति का कार्य सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने तक था। इंद्र की मूर्ति का कार्य बिजली और बारिश तक ही सीमित था और पृथ्वी की मूर्ति का कार्य पेड़ को बड़ा होने तक था।” सुयश ने सभी को समझाते हुए कहा।

“इसका मतलब अब चंद्र और पवन का काम बचा है।” जेनिथ ने कहा।

“बिल्कुल ठीक कहा जेनिथ...और इन्हीं 2 मूर्तियों के कार्य के द्वारा ही हम तिलिस्मा के इस द्वार को पार कर पायेंगे।” सुयश ने जेनिथ को देखते हुए कहा- ‘चलो सबसे पहले उस जमीन पर पड़ी पवनचक्की को
देखते हैं। जरुर उसी से हमें चंद्रमा तक जाने का रास्ता मिलेगा।”

सभी को सुयश की बात सही लगी, इसलिये वह तालाब के किनारे स्थित उस मैदान तक जा पहुंचे, जहां पर जमीन पर वह पवनचक्की पड़ी थी।

पवनचक्की का आकार काफी बड़ा था। उस पवनचक्की के बीच में एक गोल प्लेटफार्म बना था। उस प्लेटफार्म पर चढ़ने के लिये सीढियां बनीं थीं।

सभी सीढ़ियां चढ़कर उस प्लेटफार्म के ऊपर आ गये। प्लेटफार्म के ऊपर एक बड़ा सा लीवर लगा था।

प्लेटफार्म का ऊपरी हिस्सा जालीदार था, जो कि एक मजबूत धातु से बना लग रहा था। उस जालीदार हिस्से के नीचे नीले रंग का कोई द्रव भरा हुआ था।

“वह द्रव किस प्रकार का हो सकता है?” तौफीक ने कहा - “वह ऐसी जगह पर रखा है जो कि पूरी तरह से बंद है इसलिये हम सिर्फ उसे देख ही सकते हैं।”

“मैं उस द्रव को सूंघ भी सकता हूं।” ऐलेक्स ने अपनी नाक पर जोर देते हुए कहा- “वह किसी प्रकार का ‘कास्टिक’ है, जिससे साबुन बनाया जाता है।”

“साबुन???” जेनिथ ने आश्चर्य से कहा- “साबुन का यहां क्या काम हो सकता है?”

“कोई भी काम हो...पर अब यह तो श्योर हो गया है कि यही पवनचक्की हमें चंद्रमा तक पहुंचायेगी क्यों कि एक तो यह बिल्कुल सूर्य के नीचे है और दूसरा अभी पवनदेव का काम बचा हुआ है....अब बस ये देखना है कि इस पवनचक्की को शुरु कैसे करना है?” सुयश ने कहा- “चलो चलकर उस कमरे को भी देख लें, हो सकता है कि पवनचक्की का नियंत्रण उसी कमरे में ही हो?”

सभी पवनचक्की के पास बने, उस कमरे के अंदर आ गये। कमरे में एक बहुत बड़ी सी मशीन रखी थी, जिसमें कुछ लाल रंग की लाइट जल रहीं थीं।

सुयश ने ध्यान से पूरी मशीन को देखा और फिर बोल उठा- “पवनचक्की इस मशीन से ही चलेगी। इस कमरे की छत पर जो तीर लगा है, असल में वह तड़ित-चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) है, जिसका प्रयोग नये भवनों के निर्माण में किया जाता है।

"तड़ित चालक भवनों के ऊपर गिरने वाली आसमानी बिजली को, जमीन के अंदर भेज कर भवनों की सुरक्षा करता है। पर इस कमरे पर लगे, तड़ित-चालक पर जब बिजली गिरी तो उसने सारी बिजली को इस मशीन में सुरक्षित कर लिया था। अब उसी बिजली के द्वारा पवन-चक्की को हम चला सकते हैं और वह पवनचक्की हमें किसी ना किसी प्रकार से चंद्रमा पर भेज देगी।”

“इसका मतलब इसे शुरु करने के बाद हमें पवनचक्की पर मौजद उस प्लेटफार्म पर जाकर खड़े होना होगा और वहां मौजूद लीवर को दबाते ही, पवनचक्की हमें चंद्रमा पर भेज देगी।” क्रिस्टी ने कहा।

“बिल्कुल ठीक कहा क्रिस्टी...जरुर ऐसा ही होगा।” जेनिथ ने भी क्रिस्टी की हां में हां मिलाते हुए कहा।

“तो फिर देर किस बात की, चलिये मशीन को शुरु करके एक बार देख तो लें।” ऐलेक्स ने कहा।

सुयश ने सिर हिलाया और मशीन से कुछ दूरी पर लगे, एक ऑन बटन को दबा दिया, पर ऑन बटन के दबाने के बाद भी मशीन शुरु नहीं हुई।

अब सुयश फिर ध्यान से उस मशीन के मैकेनिज्म को समझने की कोशिश करने लगा।

“यह मशीन ऐसे स्टार्ट नहीं होगी।” नक्षत्रा ने जेनिथ को समझाते हुए कहा- “इस मशीन का कोई भी कनेक्शन ऑन बटन के साथ नहीं है, इसका मतलब मशीन के ऑन बटन को स्टार्ट करने के लिये कोई और तरीका है....जेनिथ जरा एक बार कमरे में पूरा घूमो...मैं देखना चाहता हूं कि यहां और क्या-क्या है?”

नक्षत्रा के ऐसा कहने पर जेनिथ कमरे में चारो ओर घूमने लगी।

तभी एक छोटी सी मशीन को देख नक्षत्रा ने जेनिथ को रुकने का इशारा किया- “यह मशीन टरबाइन की तरह लग रही है, और यही छोटी मशीन, एक तार के माध्यम से ऑन बटन के साथ जुड़ी है...तुम एक काम करो सुयश को यह सारी चीजें बता दो, मैं जानता हूं कि वह समझ जायेगा कि उसे आगे क्या करना है?”

जेनिथ ने नक्षत्रा की सारी बातें सुयश को समझा दीं।

“ओ.के. टरबाइन को चलाने के लिये हमें किसी सोर्स की जरुरत होती है, फिर चाहे वह हवा हो या फिर पानी.....पानी....बिल्कुल सही, ये टरबाइन तालाब की लहरों से स्टार्ट किया जा सकता है और देखो इसका तार भी बहुत लंबा है।”

सुयश अब तौफीक और ऐलेक्स की मदद से उस भारी टरबाइन को लेकर तालाब के किनारे आ गया।

तालाब के किनारे टरबाइन को रखने का एक प्लेटफार्म भी बना था, पर इस समय तालाब का पानी बिल्कुल शांत था।

यह देख सुयश का चेहरा मुर्झा सा गया।

“क्या हुआ कैप्टेन? आप उदास क्यों हो गये?” ऐलेक्स ने कहा- “आपने तो कहा था कि तालाब के पानी से यह टरबाइन चलायी जा सकती है?”

“जब हम ऊपर बादलों पर थे, तो तालाब का पानी किसी समुद्र की लहर की भांति काम कर रहा था, पर अभी यह बिल्कुल शांत है और टरबाइन को चलाने के लिये हमें लहरों की जरुरत पड़ेगी।” सुयश ने कहा।

“कैप्टेन अंकल, आप परेशान मत होइये, मैं जानती हूं कि तालाब का पानी अभी शांत क्यों है?” शैफाली ने कहा।

शैफाली के शब्द सुन सुयश आश्चर्य से शैफाली की ओर देखने लगा।

“कैप्टेन अंकल समुद्र की लहरों के लिये चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण ही जिम्मेदार माना जाता है और आप देख रहे हैं कि अभी दिन है और आसमान में सूर्य निकला हुआ है। मुझे लगता है कि जैसे ही शाम होगी और आसमान में चंद्रमा निकलेगा, तालाब का पानी फिर से लहरों में परिवर्तित हो जायेगा और वैसे भी हम दिन में आसमान में जाकर करेंगे भी तो क्या? यहां से निकलने का द्वार तो चंद्रमा में मौजूद है। इसलिये आप बस थोड़ा सा इंतजार कर लीजिये बस...।” शैफाली ने कहा।

शैफाली के शब्दों से एक पल में सुयश सब कुछ समझ गया।

“अच्छा तो इसी के साथ पवन और चंद्रमा की मूर्तियों का कार्य भी पूर्ण हो जायेगा।” सुयश ने खुश होते हुए कहा।

सभी अब चुपचाप वहीं बैठकर चंद्रमा के आने का इंतजार करने लगे।

जैसे ही सूर्य पूरी तरह से सफेद हुआ, शैफाली के कहे अनुसार तालाब का पानी लहरों में परिवर्तित होकर हिलोरें मारने लगा।

तालाब की लहरें अब टरबाइन पर गिरने लगीं, जिससे टरबाइन के अंदर मौजूद ब्लेड ने घूमना शुरु कर दिया।

सुयश टरबाइन पर पानी गिरता देख, भागकर कमरे में पहुंचा और उस मशीन का ऑन बटन दबा दिया।

एक घरघराहट के साथ मशीन ऑन हो गई। यह देख सुयश सभी को साथ लेकर पवनचक्की के ऊपर मौजूद जालीदार प्लेटफार्म पर पहुंच गया।

सुयश ने एक बार सभी को देखा और फिर वहां मौजूद उस लीवर को नीचे की ओर कर दिया।

एक गड़गड़ाहट के साथ विशालकाय पवनचक्की घूमना शुरु हो गई।

जहां सभी एक ओर इक्साइटेड भी थे, वहीं पर सावधान भी थे।

पवनचक्की ने जैसे ही गति पकड़ी, प्लेटफार्म के नीचे मौजूद नीले रंग का कास्टिक तेजी से जाली के ऊपर की ओर आया और जाली पर एक
विशालकाय बुलबुला बन गया।

सभी उस बुलबुले के अंदर बंद हो गये और इसी के साथ वह बुलबुला पवनचक्की की तेज हवाओं से ऊपर आसमान की ओर जाने लगा।

ऐलेक्स को छोड़ सभी को एकाएक शैफाली का बुलबुला और ज्वालामुखी वाला सीन याद आ गया।

“अब समझ में आया कि वहां नीचे कास्टिक क्यों रखा था।” सुयश ने मुस्कुराते हुए कहा।

“अपने ऐलेक्स की नाक तो बिल्कुल कुत्ते जैसी हो गई।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स का मजाक उड़ाते हुए कहा।

“और तुम्हारी आँखें भी तो....।” कहते-कहते ऐलेक्स रुक गया।

“हां-हां बोलो-बोलो मेरी आँखें भी तो....किसी जानवर से मिलती ही होंगी।” क्रिस्टी ने मुंह बनाते हुए कहा।

“हां तुम्हारी आँखें बिल्कुल जलपरी के जैसी हैं, जी चाहता है कि इसमें डूब जाऊं।” अचानक से ऐलेक्स ने सुर ही बदल दिया।

क्रिस्टी को ऐलेक्स से इस तरह के जवाब की उम्मीद नहीं थी, इसलिये वह शर्मा सी गई।

“और तुम्हारा चेहरा इस चंद्रमा से भी ज्यादा खूबसूरत है।” ऐलेक्स क्रिस्टी को शर्माते देख किसी शायर की तरह क्रिस्टी की तारीफ करने लगा।

चांद पर थोड़ा गुरूर हम भी कर लें,
पर मेरी नजरें पहले महबूब से तो हटें..!!🥰


सभी क्रिस्टी और ऐलेक्स की इन मीठी बातों का आनन्द उठा रहे थे।

उधर वह बुलबुला धीरे-धीरे हवा में तैरता हुआ चंद्रमा तक जा पहुंचा।
सभी के चंद्रमा पर उतरते ही वह बुलबुला हवा में फट गया।

बुलबुले के फटते ही सभी चंद्रमा पर उतर गये और चंद्रमा के द्वार में प्रवेश कर गये।


जारी रहेगा_____✍️
Wakai me ye sapno ka sansaar hi hai, jaisa ki prasnottari ke samay aapne bataya tha ki kya ho agar aapko indra ki bhoomika nibhani pade? Waise hi aapne karke dikha diya 🫡 baadlo ki sair, baarish karwana, kisaan ka ket, uski fasal, talaab ke paani se badal ko bharna, pawan chakki wala bhi amaze karne wala tha. Kul milakar ek dhamakedaar, superb, and amazing update tha👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
 

sunoanuj

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चैपटर-9
सपनों का संसार:
(तिलिस्मा 3.3)

सुयश के साथ सभी अगले द्वार में प्रवेश कर गये।

तिलिस्मा के इस द्वार में प्रवेश करते ही सभी को लगभग 100 फुट ऊंची एक किताब दिखाई दी। जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘सपनों का संसार’ लिखा था।

उस किताब में एक दरवाजा भी लगा था। दरवाजे के अंदर कुछ सीढ़ियां बनीं थीं, जो कि ऊपर की ओर जा रहीं थीं। सभी उस दरवाजे में प्रवेश कर गये और सीढ़ियां चढ़कर ऊपर की ओर चल दिये।

लगभग 50 सीढ़ियां चढ़ने के बाद सभी को फिर से एक दरवाजा दिखाई दिया। सभी उस दरवाजे से अंदर प्रवेश कर गये।

अब वह सभी एक ऊंचे से प्लेटफार्म पर खड़े थे और ऊपर आसमान की ओर ऐसे सैकड़ों प्लेटफार्म दिखाई दे रहे थे।

हर प्लेटफार्म के चारो ओर कुछ सीढ़ियां और 2 दरवाजे बने थे। सारे प्लेटफार्म हवा में झूल रहे थे।

“यह सब क्या है? और हमें जाना कहां है?” ऐलेक्स ने सुयश को देखते हुए कहा।

“पता नहीं, पर मुझे लगता है कि हमें अपने सामने मौजूद दूसरे दरवाजे में घुसने पर ही पता चलेगा कि हमें जाना कहां है?” सुयश ने कहा।

यह सुनकर क्रिस्टी अपने सामने मौजूद दरवाजे में प्रवेश कर गई, अब क्रिस्टी उनसे काफी ऊंचाई पर बने दूसरे प्लेटफार्म पर दिखाई दी।

“कैप्टेन आप लोग भी ऊपर आ जाइये, मुझे लगता है कि हमें इन प्लेटफार्म के द्वारा ही ऊपर की ओर जाना है।” क्रिस्टी ने तेज आवाज में कहा।

क्रिस्टी की आवाज सुन सभी उस दरवाजे में प्रवेश कर गये।

इसी प्रकार कई बार अलग-अलग दरवाजों में प्रवेश करने के बाद, आखिरकार उनका दरवाजा एक बादल के ऊपर जाकर खुला।

जैसे ही सभी बादल के ऊपर खड़े हुए, वह दरवाजा और प्लेटफार्म दोनों ही गायब हो गये।

अब सभी ने अपने चारो ओर नजर डाली। इस समय वह सभी जिस बादल पर खड़े थे, वह लगभग 200 वर्ग फुट का था और बिल्कुल सफेद था।

उस बादल से 100 मीटर की दूरी पर एक बड़ा सा गोला सूर्य के समान चमक रहा था, उसकी रोशनी से ही पूरा क्षेत्र प्रकाशमान था।

“क्या वह कृत्रिम सूर्य है?” जेनिथ ने उस सूर्य के समान गोले की ओर देखते हुए कहा।

“लगता है कैश्वर ने यह द्वार कुछ अलग तरीके से बनाया है।” सुयश ने कहा- “वह सामने का गोला कृत्रिम सूर्य है, जो सूर्य के समान ही रोशनी दे रहा है। हम इस समय बादलों के ऊपर खड़े हैं। पर इन दोनों के अलावा यहां पर कुछ नजर नहीं आ रहा। ना तो बाहर निकलने का कोई दरवाजा दिख रहा है और ना ही यह समझ में आ रहा है कि यहां पर करना क्या है?”

तभी शैफाली की नजर आसमान की ओर गई। आसमान पर नजर पड़ते ही शैफाली आश्चर्य से भर उठी।

“कैप्टेन अंकल, जरा ऊपर आसमान की ओर देखिये, वहां पर बहुत कुछ विचित्र सा है?” शैफाली ने सुयश को आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा। शैफाली की बात सुन सभी ने आसमान की ओर देखा।

अब सभी अपना सिर उठाये विस्मय से ऊपर की ओर देख रहे थे।

“यह आसमान में क्या चीजें बनी हैं?” ऐलेक्स ने बड़बड़ाते हुए कहा।

“मुझे लग रहा है कि हमारे सिर के ऊपर आसमान नहीं बल्कि जमीन है, आसमान पर तो हम लोग खड़े हैं, यानि कि यहां पर सब कुछ उल्टा-पुल्टा है।” क्रिस्टी ने कहा।

“सब लोग जरा ध्यान लगाकर देखो कि वहां ऊपर क्या-क्या चीजें है?” सुयश ने सभी से कहा।

“कैप्टेन मुझे वहां एक खेत दिखाई दे रहा है, जिस में एक किसान बीज बो रहा है।” तौफीक ने कहा।

“मुझे उस खेत के बाहर 5 मूर्तियां दिखाई दे रहीं हैं, शायद वह किसी देवी-देवता की मूर्तियां हैं, उन मूर्तियों पर कुछ लिखा भी है, पर यह भाषा मैं पढ़ना नहीं जानती।” जेनिथ ने कहा।

“वह मूर्तियां सूर्य, चंद्र, इंद्र, पवन और पृथ्वी की हैं।” सुयश ने मूर्तियों की ओर देखते हुए कहा- “और उस पर हिंदी भाषा में लिखा है।” यह कहकर सुयश ने सभी को उन देवी देवताओं के बारे में बता दिया।

“कैप्टेन खेत से कुछ दूरी पर एक बड़ा सा तालाब बना है, जिससे समुद्र जैसी लहरें उठ रहीं हैं।” ऐलेक्स ने कहा- और उसके सामने एक बड़ा सा कमरा बना है, जिस पर एक तीर ऊपर की ओर मुंह किये हुए लगा है। उस तीर के सामने एक बड़ी सी पवनचक्की जमीन पर गिरी पड़ी है।”

“यह तो कोई बहुत अजीब सी पहेली लग रही है....क्यों कि ना तो हम सूर्य के पास जा सकते हैं और ना ही ऊपर जमीन की ओर.....और इन बादलों में कुछ है नहीं?...फिर इस पहेली को हल कैसे करें?” क्रिस्टी ने कहा।

सभी बहुत देर तक सोचते रहे, परंतु किसी को कुछ समझ नहीं आया कि करना क्या है? तभी जेनिथ की निगाह सूर्य की ओर गई।

“कैप्टेन सूर्य अपना रंग बदल रहा है...अब वह सुनहरे से सफेद होता जा रहा है।” जेनिथ ने कहा।

जेनिथ की बात सुन सभी सूर्य की ओर देखने लगे। जेनिथ सही कह रही थी, सूर्य सच में एक किनारे से सफेद हो रहा था।

“मुझे लग रहा है कि सूर्य धीरे-धीरे चंद्रमा में परिवर्तित हो रहा है।” शैफाली ने कहा- “यानि दिन के समय यही सूर्य बन जाता है और रात को यही चंद्रमा बन जाता है।”

“मुझे लगता है कि हमें थोड़ी देर और इंतजार करना चाहिये, हो सकता है कि रात होने पर चंद्रमा हमें कोई मार्ग दिखाए?” तौफीक ने कहा।

तौफीक की बात सुन सभी आराम से वहीं सफेद बादल पर बैठ गये।

धीरे-धीरे सूर्य पूरी तरह से चंद्रमा में परिवर्तित हो गया, अब सभी ध्यान से चंद्रमा को देखने लगे।

“कैप्टेन चंद्रमा में एक द्वार बना है, मुझे लगता है कि हमें उसी द्वार से बाहर जाना है।” जेनिथ ने कहा।

“चलो एक परेशानी तो दूर हुई, कम से कम ये तो पता चला कि हमें जाना कहां है?” सुयश ने खुशी भरे शब्दों में कहा- “अब हमें बस चंद्रमा तक जाने का रास्ता ढूंढना है। क्यों कि इन बादलों से चंद्रमा के बीच सिर्फ हवा ही है।”

“मुझे लगता है कि हमें यहां से कूद कर जमीन तक जाना होगा, चंद्रमा का रास्ता अवश्य ही नीचे से होगा।” ऐलेक्स ने कहा।

“अरे बुद्धू, हम खुद ही नीचे हैं, कूदने से ऊपर कैसे चले जायेंगे?” क्रिस्टी ने ऐलेक्स से हंस कर कहा।

“तो फिर अगर कोई चीज इन बादलों से गिरे तो वह कहां जायेगी? हमसे भी नीचे....या फिर ऊपर जमीन की ओर?” ऐलेक्स की अभी भी समझ में नहीं आ रहा था।

“रुको अभी चेक कर लेते हैं।” यह कहकर क्रिस्टी ने अपनी जेब में रखा एक फल निकाला और उसे कुछ दूरी पर फेंक दिया।

वह फल नीचे जाने की जगह तेजी से ऊपर जमीन की ओर चला गया।

“अब समझे, जमीन और उसका गुरुत्वाकर्षण ऊपर की ओर ही है, हम लोग सिर्फ ऊंचाई पर खड़े हैं और हमें उल्टा दिख रहा है बस। ....और अगर तुमने यहां से कूदने की कोशिश की तो तुम्हारी हड्डियां भी टूट जायेंगी या फिर तुम मर भी सकते है, क्यों कि हमारी ऊंचाई बहुत ज्यादा है।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स को समझाते हुए कहा।

सुयश ने कहा- “मुझे तो लगता है कि अवश्य ही अब इन बादलों में कुछ ना कुछ छिपा है...खाली हाथ तो हम लोग इस द्वार को पार नहीं कर पायेंगे।”

सुयश की बात सुन सभी उस सफेद बादल में हाथ डालकर, टटोल कर कुछ ढूंढने की कोशिश करने लगे।

तभी शैफाली का हाथ बादल में मौजूद किसी चीज से टकराया। शैफाली ने उस चीज को खींचकर निकाल लिया। वह एक 3 फुट का वर्गाकार शीशा था।

“पहले मेरे दिमाग में यह बात क्यों नहीं आयी।” सुयश ने शीशे को देख अपने सिर पर हाथ मारते हुए कहा- “और ढूंढो...हो सकता है कि कुछ और भी यहां पर हो ?”

तभी जेनिथ ने खुशी से कहा- “कैप्टेन, मुझे यह छड़ी मिली है।” सुयश ने जेनिथ के हाथ में थमी छड़ी को देखा। वह एक साधारण लकड़ी की छड़ी लग रही थी।

सभी फिर से बादलों से कुछ और पाने की चाह में उन बादलों का मंथन करने लगे। पर काफी देर ढूंढने के बाद भी बादलों से कुछ और ना मिला।

“यहां तो सिर्फ एक शीशा और छड़ी थी, इन दोनों के द्वारा भला हम चंद्रमा तक कैसे पहुंच सकते हैं?” क्रिस्टी ने कहा।

“इन दोनों के द्वारा हम चंद्रमा तक नहीं पहुंच सकते, पर इनका कुछ ना कुछ तो उपयोग है।” यह कहकर सुयश ने शीशे को चंद्रमा की रोशनी की ओर कर दिया, पर उसमें चंद्रमा की परछाईं दिखने के सिवा कुछ नहीं हुआ।

धीरे-धीरे कई घंटे और बीत गये। अब चंद्रमा फिर से सूर्य में परिवर्तित होने लगा।

सूर्य की पहली किरण सुयश के माथे से आकर टकराई, तभी सुयश के दिमाग में एक विचार कौंधा।

अब सुयश ने शैफाली से शीशा लेकर सूर्य की दिशा में कर दिया।

सूर्य की किरणें शीशे से टकरा कर परावर्तित होने लगीं। अब सुयश ने जमीन की ओर ध्यान से देखा।

खेत में बैठा किसान बीज बोने के बाद, बार-बार ऊपर बादलों की ओर देख रहा था। कभी-कभी वह अपने माथे पर आये पसीने को, अपने कंधे पर रखे कपड़े से पोंछ रहा था।

अब सुयश की निगाह इंद्र की मूर्ति पर पड़ी। इंद्र की मूर्ति देखने के बाद सुयश के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई।

सुयश की मुस्कान देखकर सभी समझ गये कि सुयश को अवश्य कोई ना कोई उपाय मिल गया है?

“कुछ समझ में आया तुम लोगों को?” सुयश ने सभी से पूछा। सभी ने ना में सिर हिला दिया।

यह देख सुयश ने बोलना शुरु कर दिया- “मुझे भी अभी सबकुछ तो समझ में नहीं आया है, पर उस किसान को देखकर यह साफ पता चल रहा है कि उसे बीज बोने के बाद बारिश का इंतजार है और वह बारिश हमें करानी पड़ेगी।”

“यह कैसे संभव है कैप्टेन? हम भला बारिश कैसे करा सकते हैं?” तौफीक ने सुयश का मुंह देखते हुए आश्चर्य से पूछा।

“संभव है....मगर पहले मुझे ये बताओ कि धरती पर बारिश होती कैसे है?” सुयश ने उल्टा तौफीक से ही सवाल कर दिया।

“समुद्र का पानी, सूर्य की गर्मी से वाष्पीकृत होकर, बादलों का रुप ले लेता है और बादल जब आपस में टकराते हैं या फिर उनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो वह बूंदों के रुप में धरती की प्यास बुझाते हैं।” तौफीक ने कहा।

“अब जरा जमीन की ओर देखो। सूर्य की रोशनी उस तालाब के ऊपर नहीं पड़ रही है, इसीलिये किसान के खेत पर बारिश नहीं हो रही है।” सुयश ने तालाब की ओर इशारा करते हुए कहा।

“पर हम सूर्य की रोशनी को तालाब की ओर कैसे मोड़ पायेंगे?” क्रिस्टी के चेहरे पर उलझन के भाव नजर आये।

“इस शीशे की मदद से।” सुयश ने कहा- “इसकी मदद से हम सूर्य के प्रकाश को परावर्तित कर उस तालाब पर डाल सकते हैं।”

“पर यह प्रक्रिया तो बहुत लंबी चलती है। क्या हमें शीशा इतनी देर तक पकड़े रखना पड़ेगा?” ऐलेक्स ने पूछा।

“पता नहीं कितना समय लगेगा, पर इसके सिवा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है?” यह कहकर सुयश ने शीशे को इस प्रकार पकड़ लिया, कि अब सूर्य की रोशनी उससे परावर्तित होकर तालाब पर जाकर पड़ने लगी।

लगभग 2 घंटे की अपार सफलता के बाद, तालाब का पानी वाष्पीकृत होकर बादलों का रुप लेने लगा।

यह देख सभी में नयी ऊर्जा का संचार हो गया। अब सभी बारी-बारी शीशे को पकड़ रहे थे।

अब उनके सफेद बादल का रंग धीरे-धीरे काला होने लगा।

लगभग आधे दिन के बाद उनके बादलों का रंग पूर्ण काला हो गया। अब उस बादल के बीच बिजली भी कड़क रही थी, पर आश्चर्यजनक तरीके से वह बिजली इनमें से किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा रही थी।

बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक देख किसान खुशी से नाचने लगा।

पर बादलों को बरसाना कैसे था? यह किसी को नहीं पता था?

सुयश की निगाह अब जेनिथ के हाथ में पकड़ी छड़ी की ओर गई। सुयश ने वह छड़ी जेनिथ के हाथ से ले ली।

सुयश ने बादल पर जैसे ही वह छड़ी मारी, बादल से जोर की आवाज करती बिजली निकली और जमीन पर स्थित उस घर के ऊपर बने तीर में समा गई।

सुयश ने 2-3 बार ऐसे ही किया। अब बादल से तेज मूसलाधार बारिश शुरु हो गई और धरा की प्यास बुझाने, पृथ्वी की ओर जाने लगी।

बहुत ही विचित्र नजारा था। बादलों से निकली हर बूंद ऊपर की ओर जा रही थी।

तभी सूर्य के सतरंगी प्रकाश से आसमान में एक बड़ा इंद्रधनुष बन गया। सभी को पता था कि यह सब कुछ असली नहीं है, फिर भी वह सभी मंत्रमुग्ध से प्रकृति के इस सुंदर दृश्य को निहार रहे थे।

बूंदों ने अब किसान के खेत पर बरसना शुरु कर दिया। बूंदों के पड़ते ही अचानक किसान का बोया हुआ बीज अंकुरित हो गया।

कुछ ही देर में वह अंकुरित बीज एक लता का रुप ले उस बादल की ओर बढ़ने लगा।

सभी आश्चर्य से उस पृथ्वी के पौधे को बढ़ता हुआ देख रहे थे। 10 मिनट में ही उस लता धारी वृक्ष ने, बादलों से पृथ्वी तक एक विचित्र पुल का निर्माण कर दिया।

तभी वह शीशा और छड़ी गायब हो गये।

“यही है वह रास्ता, जिससे होकर हमें पृथ्वी तक पहुंचना है।” सुयश ने धीरे से पेड़ की लताओं को पकड़ा और सरककर नीचे जाने लगा।

सुयश को ऐसा करते देख, सभी उसी प्रकार से सुयश के पीछे आसमान से उतरने लगे। कुछ ही देर बाद सभी जमीन पर थे।

“अब जाकर कुछ बेहतर महसूस हुआ।” ऐलेक्स ने लंबी साँस छोड़ते हुए कहा- “ऊपर से उल्टा देखते-देखते दिमाग चकरा गया था।

सुयश ने अब खेत के चारो ओर देखा। सभी के बादलों से उतरते ही वह पेड़ और किसान दोनों ही गायब हो गये थे।

सुयश सभी को लेकर खेत से बाहर आ गया। बाहर अब 2 ही मूर्तियां दिख रहीं थीं।

“कैप्टेन, यह 3 मूर्तियां कहां गायब हो गईं?” क्रिस्टी ने कहा।

“जिन मूर्तिंयों का कार्य खत्म हो गया, वह मूर्तियां स्वतः गायब हो गयीं। जैसे सूर्य की मूर्ति का कार्य सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने तक था। इंद्र की मूर्ति का कार्य बिजली और बारिश तक ही सीमित था और पृथ्वी की मूर्ति का कार्य पेड़ को बड़ा होने तक था।” सुयश ने सभी को समझाते हुए कहा।

“इसका मतलब अब चंद्र और पवन का काम बचा है।” जेनिथ ने कहा।

“बिल्कुल ठीक कहा जेनिथ...और इन्हीं 2 मूर्तियों के कार्य के द्वारा ही हम तिलिस्मा के इस द्वार को पार कर पायेंगे।” सुयश ने जेनिथ को देखते हुए कहा- ‘चलो सबसे पहले उस जमीन पर पड़ी पवनचक्की को
देखते हैं। जरुर उसी से हमें चंद्रमा तक जाने का रास्ता मिलेगा।”

सभी को सुयश की बात सही लगी, इसलिये वह तालाब के किनारे स्थित उस मैदान तक जा पहुंचे, जहां पर जमीन पर वह पवनचक्की पड़ी थी।

पवनचक्की का आकार काफी बड़ा था। उस पवनचक्की के बीच में एक गोल प्लेटफार्म बना था। उस प्लेटफार्म पर चढ़ने के लिये सीढियां बनीं थीं।

सभी सीढ़ियां चढ़कर उस प्लेटफार्म के ऊपर आ गये। प्लेटफार्म के ऊपर एक बड़ा सा लीवर लगा था।

प्लेटफार्म का ऊपरी हिस्सा जालीदार था, जो कि एक मजबूत धातु से बना लग रहा था। उस जालीदार हिस्से के नीचे नीले रंग का कोई द्रव भरा हुआ था।

“वह द्रव किस प्रकार का हो सकता है?” तौफीक ने कहा - “वह ऐसी जगह पर रखा है जो कि पूरी तरह से बंद है इसलिये हम सिर्फ उसे देख ही सकते हैं।”

“मैं उस द्रव को सूंघ भी सकता हूं।” ऐलेक्स ने अपनी नाक पर जोर देते हुए कहा- “वह किसी प्रकार का ‘कास्टिक’ है, जिससे साबुन बनाया जाता है।”

“साबुन???” जेनिथ ने आश्चर्य से कहा- “साबुन का यहां क्या काम हो सकता है?”

“कोई भी काम हो...पर अब यह तो श्योर हो गया है कि यही पवनचक्की हमें चंद्रमा तक पहुंचायेगी क्यों कि एक तो यह बिल्कुल सूर्य के नीचे है और दूसरा अभी पवनदेव का काम बचा हुआ है....अब बस ये देखना है कि इस पवनचक्की को शुरु कैसे करना है?” सुयश ने कहा- “चलो चलकर उस कमरे को भी देख लें, हो सकता है कि पवनचक्की का नियंत्रण उसी कमरे में ही हो?”

सभी पवनचक्की के पास बने, उस कमरे के अंदर आ गये। कमरे में एक बहुत बड़ी सी मशीन रखी थी, जिसमें कुछ लाल रंग की लाइट जल रहीं थीं।

सुयश ने ध्यान से पूरी मशीन को देखा और फिर बोल उठा- “पवनचक्की इस मशीन से ही चलेगी। इस कमरे की छत पर जो तीर लगा है, असल में वह तड़ित-चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) है, जिसका प्रयोग नये भवनों के निर्माण में किया जाता है।

"तड़ित चालक भवनों के ऊपर गिरने वाली आसमानी बिजली को, जमीन के अंदर भेज कर भवनों की सुरक्षा करता है। पर इस कमरे पर लगे, तड़ित-चालक पर जब बिजली गिरी तो उसने सारी बिजली को इस मशीन में सुरक्षित कर लिया था। अब उसी बिजली के द्वारा पवन-चक्की को हम चला सकते हैं और वह पवनचक्की हमें किसी ना किसी प्रकार से चंद्रमा पर भेज देगी।”

“इसका मतलब इसे शुरु करने के बाद हमें पवनचक्की पर मौजद उस प्लेटफार्म पर जाकर खड़े होना होगा और वहां मौजूद लीवर को दबाते ही, पवनचक्की हमें चंद्रमा पर भेज देगी।” क्रिस्टी ने कहा।

“बिल्कुल ठीक कहा क्रिस्टी...जरुर ऐसा ही होगा।” जेनिथ ने भी क्रिस्टी की हां में हां मिलाते हुए कहा।

“तो फिर देर किस बात की, चलिये मशीन को शुरु करके एक बार देख तो लें।” ऐलेक्स ने कहा।

सुयश ने सिर हिलाया और मशीन से कुछ दूरी पर लगे, एक ऑन बटन को दबा दिया, पर ऑन बटन के दबाने के बाद भी मशीन शुरु नहीं हुई।

अब सुयश फिर ध्यान से उस मशीन के मैकेनिज्म को समझने की कोशिश करने लगा।

“यह मशीन ऐसे स्टार्ट नहीं होगी।” नक्षत्रा ने जेनिथ को समझाते हुए कहा- “इस मशीन का कोई भी कनेक्शन ऑन बटन के साथ नहीं है, इसका मतलब मशीन के ऑन बटन को स्टार्ट करने के लिये कोई और तरीका है....जेनिथ जरा एक बार कमरे में पूरा घूमो...मैं देखना चाहता हूं कि यहां और क्या-क्या है?”

नक्षत्रा के ऐसा कहने पर जेनिथ कमरे में चारो ओर घूमने लगी।

तभी एक छोटी सी मशीन को देख नक्षत्रा ने जेनिथ को रुकने का इशारा किया- “यह मशीन टरबाइन की तरह लग रही है, और यही छोटी मशीन, एक तार के माध्यम से ऑन बटन के साथ जुड़ी है...तुम एक काम करो सुयश को यह सारी चीजें बता दो, मैं जानता हूं कि वह समझ जायेगा कि उसे आगे क्या करना है?”

जेनिथ ने नक्षत्रा की सारी बातें सुयश को समझा दीं।

“ओ.के. टरबाइन को चलाने के लिये हमें किसी सोर्स की जरुरत होती है, फिर चाहे वह हवा हो या फिर पानी.....पानी....बिल्कुल सही, ये टरबाइन तालाब की लहरों से स्टार्ट किया जा सकता है और देखो इसका तार भी बहुत लंबा है।”

सुयश अब तौफीक और ऐलेक्स की मदद से उस भारी टरबाइन को लेकर तालाब के किनारे आ गया।

तालाब के किनारे टरबाइन को रखने का एक प्लेटफार्म भी बना था, पर इस समय तालाब का पानी बिल्कुल शांत था।

यह देख सुयश का चेहरा मुर्झा सा गया।

“क्या हुआ कैप्टेन? आप उदास क्यों हो गये?” ऐलेक्स ने कहा- “आपने तो कहा था कि तालाब के पानी से यह टरबाइन चलायी जा सकती है?”

“जब हम ऊपर बादलों पर थे, तो तालाब का पानी किसी समुद्र की लहर की भांति काम कर रहा था, पर अभी यह बिल्कुल शांत है और टरबाइन को चलाने के लिये हमें लहरों की जरुरत पड़ेगी।” सुयश ने कहा।

“कैप्टेन अंकल, आप परेशान मत होइये, मैं जानती हूं कि तालाब का पानी अभी शांत क्यों है?” शैफाली ने कहा।

शैफाली के शब्द सुन सुयश आश्चर्य से शैफाली की ओर देखने लगा।

“कैप्टेन अंकल समुद्र की लहरों के लिये चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण ही जिम्मेदार माना जाता है और आप देख रहे हैं कि अभी दिन है और आसमान में सूर्य निकला हुआ है। मुझे लगता है कि जैसे ही शाम होगी और आसमान में चंद्रमा निकलेगा, तालाब का पानी फिर से लहरों में परिवर्तित हो जायेगा और वैसे भी हम दिन में आसमान में जाकर करेंगे भी तो क्या? यहां से निकलने का द्वार तो चंद्रमा में मौजूद है। इसलिये आप बस थोड़ा सा इंतजार कर लीजिये बस...।” शैफाली ने कहा।

शैफाली के शब्दों से एक पल में सुयश सब कुछ समझ गया।

“अच्छा तो इसी के साथ पवन और चंद्रमा की मूर्तियों का कार्य भी पूर्ण हो जायेगा।” सुयश ने खुश होते हुए कहा।

सभी अब चुपचाप वहीं बैठकर चंद्रमा के आने का इंतजार करने लगे।

जैसे ही सूर्य पूरी तरह से सफेद हुआ, शैफाली के कहे अनुसार तालाब का पानी लहरों में परिवर्तित होकर हिलोरें मारने लगा।

तालाब की लहरें अब टरबाइन पर गिरने लगीं, जिससे टरबाइन के अंदर मौजूद ब्लेड ने घूमना शुरु कर दिया।

सुयश टरबाइन पर पानी गिरता देख, भागकर कमरे में पहुंचा और उस मशीन का ऑन बटन दबा दिया।

एक घरघराहट के साथ मशीन ऑन हो गई। यह देख सुयश सभी को साथ लेकर पवनचक्की के ऊपर मौजूद जालीदार प्लेटफार्म पर पहुंच गया।

सुयश ने एक बार सभी को देखा और फिर वहां मौजूद उस लीवर को नीचे की ओर कर दिया।

एक गड़गड़ाहट के साथ विशालकाय पवनचक्की घूमना शुरु हो गई।

जहां सभी एक ओर इक्साइटेड भी थे, वहीं पर सावधान भी थे।

पवनचक्की ने जैसे ही गति पकड़ी, प्लेटफार्म के नीचे मौजूद नीले रंग का कास्टिक तेजी से जाली के ऊपर की ओर आया और जाली पर एक
विशालकाय बुलबुला बन गया।

सभी उस बुलबुले के अंदर बंद हो गये और इसी के साथ वह बुलबुला पवनचक्की की तेज हवाओं से ऊपर आसमान की ओर जाने लगा।

ऐलेक्स को छोड़ सभी को एकाएक शैफाली का बुलबुला और ज्वालामुखी वाला सीन याद आ गया।

“अब समझ में आया कि वहां नीचे कास्टिक क्यों रखा था।” सुयश ने मुस्कुराते हुए कहा।

“अपने ऐलेक्स की नाक तो बिल्कुल कुत्ते जैसी हो गई।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स का मजाक उड़ाते हुए कहा।

“और तुम्हारी आँखें भी तो....।” कहते-कहते ऐलेक्स रुक गया।

“हां-हां बोलो-बोलो मेरी आँखें भी तो....किसी जानवर से मिलती ही होंगी।” क्रिस्टी ने मुंह बनाते हुए कहा।

“हां तुम्हारी आँखें बिल्कुल जलपरी के जैसी हैं, जी चाहता है कि इसमें डूब जाऊं।” अचानक से ऐलेक्स ने सुर ही बदल दिया।

क्रिस्टी को ऐलेक्स से इस तरह के जवाब की उम्मीद नहीं थी, इसलिये वह शर्मा सी गई।

“और तुम्हारा चेहरा इस चंद्रमा से भी ज्यादा खूबसूरत है।” ऐलेक्स क्रिस्टी को शर्माते देख किसी शायर की तरह क्रिस्टी की तारीफ करने लगा।

चांद पर थोड़ा गुरूर हम भी कर लें,
पर मेरी नजरें पहले महबूब से तो हटें..!!🥰


सभी क्रिस्टी और ऐलेक्स की इन मीठी बातों का आनन्द उठा रहे थे।

उधर वह बुलबुला धीरे-धीरे हवा में तैरता हुआ चंद्रमा तक जा पहुंचा।
सभी के चंद्रमा पर उतरते ही वह बुलबुला हवा में फट गया।

बुलबुले के फटते ही सभी चंद्रमा पर उतर गये और चंद्रमा के द्वार में प्रवेश कर गये।


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi sundar aur mast update diya hai
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Boss you have amazing writing skills :bow: Suyash and co. Ne agle dwar me pravesh kar liya, per iss dwar ko paar karne ke liye kya kya paapad belne pade hain 😱 ek jaise do statue of liberty, unme anter dhoondhna, aur sabse kathin to wo doosri statue se bachna tha, uske liye kya dimaak lagaya aapne. Hat's of 🫡 or wo date wala bhi tagda tha haa.👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Amazing update again bhai 👌🏻👌🏻
Thank you very much for your wonderful review and superb support bhai :hug: Sath bane rahiye
 

Raj_sharma

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Wakai me ye sapno ka sansaar hi hai, jaisa ki prasnottari ke samay aapne bataya tha ki kya ho agar aapko indra ki bhoomika nibhani pade? Waise hi aapne karke dikha diya 🫡 baadlo ki sair, baarish karwana, kisaan ka ket, uski fasal, talaab ke paani se badal ko bharna, pawan chakki wala bhi amaze karne wala tha. Kul milakar ek dhamakedaar, superb, and amazing update tha👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Thank you very much for your wonderful review and superb support bhai, sath bane rahiye :hug:
 

Raj_sharma

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#168.

चैपटर-10
शरद ऋतु: (
तिलिस्मा 4.1)

सुयश के साथ सभी अब एक विशाल कमरे में निकले। इस कमरे में एक किनारे पर 15 फुट ऊंचा, एक पृथ्वी का ग्लोब रखा था, जिसे नचाया भी जा सकता था।

उस ग्लोब के आगे एक 12 इंच की त्रिज्या का, सुनहरी धातु का रिंग रखा था, जिसके आगे एक धातु की पट्टी पर, अंग्रेजी के कैपिटल अक्षरों से RING लिखा था। इस रिंग के बगल में एक छोटी सी ट्रे रखी थी, जिसमें 4 रंग के छोटे फ्लैग रखे थे।

उस कमरे की पूरी जमीन काँच की बनी थी, जिस पर पूरे विश्व का मानचित्र बना था।

मानचित्र में विश्व के सभी देशों को 4 अलग-अलग रंगों से दर्शाया गया था। एक जगह पर उन 4 रंगों का वर्गीकरण किया गया था।

जहां लाल रंग ग्रीष्म ऋतु का, नीला रंग शीत ऋतु का, नारंगी रंग शरद ऋतु का और हरा रंग वसंत ऋतु के प्रतीक के रुप में दर्शाया गया था।

“कैप्टेन, इस कमरे को देख कर तो लग रहा है कि यहां पर विश्व के अलग-अलग देशों को, वहां पायी जाने वाली ऋतुओं के हिसाब से वर्गीकृत किया गया है और उसे ग्लोब और मानचित्र के माध्यम से दर्शाया गया है।” जेनिथ ने सुयश को देखते हुए कहा।

“तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो जेनिथ।” सुयश ने कमरे में चारो ओर देखते हुए कहा- “पर अब हमें यह देखना है कि हमें यहां करना क्या है? क्यों कि उसको जाने बिना हम इस द्वार को नहीं पार कर पायेंगे?”

“कैप्टेन मैंने एक चीज गौर की है कि जमीन पर बने मानचित्र में भी 4 रंगों को दर्शाया गया है और यहां टेबल पर रखी ट्रे में मौजूद फ्लैग भी उन्हीं 4 रंग के हैं, इसका मतलब इनमें आपस में कोई ना कोई सम्बन्ध तो जरुर है?” ऐलेक्स ने कहा।

“दरअसल विश्व के अधिकतर देशों में 4 ऋतुओं को ही प्रधानता दी गई है, इसलिये यहां उन्हीं 4 ऋतुओं को मानचित्र के माध्यम से दर्शाया गया है।” सुयश ने कहा।

“कैप्टेन अंकल, मुझे तो इस कमरे में सबकुछ एक ही थीम पर आधारित लग रहा है, बस यह रिंग यहां पर कुछ अजीब सा लग रहा है क्यों कि ऋतुओं या विश्व के मानचित्र में रिंग का कहीं उल्लेख नहीं है।” शैफाली ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा।

“बात तो तुम्हारी सही है शैफाली, तो फिर चलो पहले इसी पर ध्यान देते हैं।” यह कहकर सुयश उस रिंग के पास आकर खड़ा हो गया और ध्यान से उसे देखने लगा।

“कैप्टेन एक बात और है।” तौफीक ने कहा- “यह रिंग हमारे सामने रखा है और हम इसे देखकर पहचान सकते हैं कि यह एक रिंग है, फिर इसके पास यह नेम प्लेट लगा कर रिंग लिखा क्यों गया है?” मुझे यह बात थोड़ी अजीब सी लग रही है।”

इधर सभी बातें कर रहे थे, उधर ऐलेक्स ग्लोब के पास खड़ा होकर ग्लोब को नचा रहा था। जैसे ही ग्लोब रुक जाता, ऐलेक्स उसे फिर नचा देता।

कुछ देर तक ऐसे ही करते रहने के बाद ऐलेक्स ने इस बार जैसे ही ग्लोब को नचाना चाहा, उसके हाथों पर किसी चीज का स्पर्श हुआ।

यह अहसास होते ही ऐलेक्स ध्यान से उस स्थान को देखने लगा। ध्यान से देखने पर ऐलेक्स को इंडिया वाले स्थान पर एक उभरी हुई बिन्दी चिपकी दिखाई दी।

“कैप्टेन, जरा एक बार इसे देखिये।” ऐलेक्स ने सुयश को वहां आने का इशारा करते हुए कहा- “यहां ग्लोब में इंडिया वाले स्थान पर उभरी हुई बिन्दी चिपकी है। क्या इसका कोई मतलब हो सकता है?”

ऐलेक्स की आवाज सुन सुयश सहित, सभी उस ग्लो ब के पास आ गये और छूकर उस बिन्दी को देखने लगे।

“इस बिन्दी का कोई रंग नहीं है, यह पूर्णतया पारदर्शी है।” सुयश ने कहा- “यानि कि इसे छुए बिना इसके बारे में नहीं जाना जा सकता था, अब ऐसी चीज कैश्वर ने यूं ही तो नहीं लगाई होगी? इसकी कुछ ना कुछ तो अर्थ निकलता ही होगा?”

“ऐलेक्स भैया, एक बार पूरा ग्लोब ध्यान से देखिये। क्या ग्लोब पर और भी ऐसी ही बिन्दियां हैं?” शैफाली ने ऐलेक्स से कहा।

शैफाली की बात सुन कर ऐलेक्स, अपने हाथों के स्पर्श से ग्लोब पर और भी बिन्दियों को ढूंढने में लग गया। कुछ ही देर में ऐलेक्स ने पूरा ग्लोब ध्यान से चेक कर लिया।

“इस ग्लोब पर इंडिया के अलावा रुस, ग्रीनलैंड और न्यूजीलैंड के स्थान पर भी पारदर्शी बिन्दियां भी मौजूद हैं।” ऐलेक्स ने शैफाली से कहा।

यह सुनकर शैफाली मुस्कुरा दी और उठकर ऐलेक्स के गले लगते हुए बोली- “वाह ऐलेक्स भैया, आपने तो इतनी बड़ी समस्या को आसानी से सुलझा दिया।”

पर ऐलेक्स को तो स्वयं नहीं समझ में आया कि उसने कौन सी समस्या को अंजाने में सुलझा दिया, इसलिये वह प्रश्नवाचक नजरों से शैफाली की ओर देखने लगा।

“कैप्टेन अंकल, यहां पर लिखा RING शब्द 4 अक्षर R, I, N और G से बना है, जबकि ग्लोब पर जिन देशों के आगे पारदर्शी बिन्दियां चिपकी हुई हैं, उनके नाम का पहला अक्षर भी यही है। यानि कि Russia का R, India का I, New Zealand का N और Greenland का G....अब मुझे लग रहा है कि हमें ट्रे में मौजूद इन फ्लैग्स को ग्लोब के ऊपर लगाना होगा? पर ध्यान रहे कि जिस देश की ऋतु का रंग जो मानचित्र बता रहा है, फ्लैग हमें उसी ढंग से लगाना होगा।”

शैफाली ने तो एक झटके से पूरी गुत्थी ही सुलझा दी। सभी के चेहरे पर अब खुशी साफ नजर आने लगी थी।

तुरंत तौफीक ने जमीन पर बने मानचित्र पर सबसे पहले रुस देश का रंग देखा, जो कि नारंगी था।

अब ऐलेक्स ने ट्रे से नारंगी रंग का फ्लैग निकालकर उसे ग्लोब के उसी पारदर्शी बिन्दी पर लगा दिया।

जैसे ही ऐलेक्स ने फ्लैग को रुस के स्थान पर लगाया, वातावरण में एक तेज ‘बजर’ की आवाज सुनाई देने लगी।

सभी वह आवाज सुन डर गये। तभी उनकी नजर जमीन पर गई, अब पूरी जमीन पर सिर्फ रुस का ही मानचित्र दिख रहा था और रुस की राजधानी मास्को के स्थान पर एक लाल रंग की लाइट जोर से ब्लिंक
करती हुई दिखाई दी।

“यह सब क्या हो रहा है कैप्टेन?” क्रिस्टी ने सुयश से पूछा।

“मुझे लगता है कि हम जहां खड़े है, वह तिलिस्म नहीं है, बल्कि अब हमें तिलिस्म में प्रवेश करना है और यह बजर हमें इसी का संकेत दे रही है।” सुयश ने कहा- “मुझे लगता है कि तिलिस्म का अगला द्वार मास्को में हमारा इंतजार कर रहा है।” यह कहकर सुयश आगे बढ़कर मास्को के उस स्थान पर खड़ा हो गया, जहां पर लाइट ब्लिंक कर रही थी।

सुयश जैसे ही वहां पर खड़ा हुआ, वह उस स्थान से गायब हो गया। यह देख सभी उस स्थान पर पहुंच कर खड़े हो गये और इसी के साथ सभी गायब हो कर मास्को के एक पार्क में जा पहुंचे। सुयश वहां पहले से ही खड़ा था।

“यह तो मास्को का एक पार्क है।” ऐलेक्स ने चारो ओर देखते हुए कहा- “यहां तो मैं रोज घूमने आता था, यहां से मेरा घर ज्यादा दूर नहीं है।”

“अच्छा तो ब्वॉयफ्रेंड जी, कहीं आप हमको छोड़ कर अपने घर जाने की तो नहीं सोच रहे?” क्रिस्टी ने एक बार फिर से ऐलेक्स को छेड़ते हुए कहा।

“ये लो कर लो बात।” ऐलेक्स ने क्रिस्टी की आँखों में झांकते हुए कहा- “अरे तुम्हारे लिये तो मैं दुनिया छोड़ दूं, तुम्हारे सामने घर की बिसात ही क्या है। और वैसे भी मुझे पता है कि यह कैश्वर का बनाया एक सेट है, असली मास्को नहीं। लेकिन एक बात तो इससे कंफर्म हो गई कि कैश्वर किसी प्रकार से हमारे दिमाग को पढ़ रहा है और उसके बाद ही इन दरवाजों की रचना कर रहा है।”

ऐलेक्स की बात सुन सुयश भी सोच में पड़ गया क्यों कि ऐलेक्स कह तो सही रहा था, इस तिलिस्मा में ऐसी चीजों का ही निर्माण हुआ था, जो कहीं ना कहीं उनके दिमाग में थीं।

“चलिये कैप्टेन, अब इस पार्क को भी देख लें कि यहां पर क्या-क्या है?” तौफीक की आवाज ने सुयश का ध्यान भंग कर दिया और वह अपनी सोच की दुनिया से बाहर आ गया।

सभी अब पार्क में घूमकर वहां मौजूद एक-एक चीज को देखने लगे।

उस पार्क में सबसे पहले एक देवी की मूर्ति मौजूद थी, जो अपने हाथ में ‘सैंड वॉच’ लिये थी।

“क्या कोई बता सकता है कि यह कौन सी देवी हैं?” सुयश ने सभी की ओर देखते हुए पूछा।

“हां, मैं जानती हूं इनके बारे में।” क्रिस्टी ने जवाब दिया- “यह देवी ‘कार्पो’ हैं, ग्रीक माइथालोजी में इन्हें शरद ऋतु (Autumn Season) की देवी कहा जाता है, यानि कि ये देवी बारिश के बाद, प्रकृति में बड़ा बदलाव करते हुए, सभी पेड़ों के पुराने वस्त्रों, यानि कि उनके पत्तों को उनके शरीर से गिरा देती हैं। इसी लिये इस मौसम को पतझड़ भी कहते हैं। यह सबकुछ समय के द्वारा नियंत्रित करती हैं।”

“हमने वहां मानचित्र में भी नारंगी रंग को शरद ऋतु के प्रतीक के रुप में देखा था, यानि तिलिस्मा के चौथे द्वार में इस बार हमारा पाला ऋतुओं से पड़ा है और उसी के फलस्वरुप हम पहली ऋतु का सामना करने के लिये मास्को आये हैं।” जेनिथ ने कहा।

जैसे ही जेनिथ ने यह कहा अचानक से मूर्ति ने अपने हाथ में पकड़ी ‘सैंड वॉच’ को उल्टा कर दिया।

यह देख सभी आश्चर्य से मूर्ति की ओर देखने लगे।

तभी उनके आसपास के वातावरण में बदलाव शुरु हो गये और वहां मौजूद सैकड़ों ‘मैपल’ के पेड़ों की पत्तियों ने अपना रंग बदलना शुरु कर दिया।

अब सभी मैपल की पत्तियां हरे से लाल रंग में परिवर्तित होने लगी। हवा भी अब थोड़ी शुष्क हो चली थी।

“कैप्टेन अंकल, देवी कार्पो के सैंड वॉच के चलते ही मौसम में शरद ऋतु के समान बदलाव होने लगे हैं.... इसी के साथ देवी का सैंड वॉच यह भी बता रहा है कि हमें जो भी करना है, उसके लिये हमारे पास बस 2 घंटे का ही समय है...पर हमें करना क्या है? यह हमें अभी तक नहीं पता।” शैफाली ने पार्क में चारो ओर देखते हुए कहा- “इसलिये हमें सबसे पहले अपना कार्य पहचानना होगा, तभी हम उसे समय रहते पूरा कर पायेंगे।”

शैफाली की बात बिल्कुल सही थी, इसलिये बिना देर किये सभी पार्क के चारो ओर घूमकर वहां मौजूद चीजों से अपना कार्य ढूंढने की चेष्टा करने लगे।

तभी उन्हें पार्क के बीचो बीच एक हरा-भरा पेड़ दिखाई दिया, जो अपनी ग्रीनरी के कारण सभी पेड़ों से अलग ही नजर आ रहा था।

“यह क्या? जहां सभी मैपल के पेड़ों के पत्ते धीरे-धीरे लाल होने लगे है, वहां यह पेड़ अभी भी इतना हरा-भरा कैसे नजर आ रहा है?” तौफीक ने कहा।

“शायद इस पेड़ पर देवी कार्पो और शरद ऋतु का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा?” शैफाली ने कहा- “और मुझे लग रहा है कि यही हमारा कार्य है। हमें इस पेड़ पर भी शरद ऋतु का प्रभाव डालना ही होगा, नहीं तो यह
प्रकृति के विरुद्ध होगा और इसका दुष्परिणाम हमें भुगतना होगा।”

शैफाली की बात से सभी सहमत थे। पर जैसे ही ऐलेक्स ने आगे बढ़कर पेड़ के पास जाने की सोची, किसी अदृश्य दीवार ने ऐलेक्स का रास्ता रोक लिया।

“कैप्टेन, यहां पर कोई अदृश्य दीवार है, जो मुझे आगे जाने नहीं दे रही है।” ऐलेक्स ने सुयश से कहा- “अब अगर आगे जायेंगे ही नही, तो इस पेड़ की परेशानी को दूर कैसे करेंगे?”

ऐलेक्स के शब्द सुनकर सभी ने पेड़ के पास जाने की कोशिश की, पर सभी पेड़ के पास पहुंचने में असफल रहे।

“हमें पेड़ के पास पहुंचने का कोई ना कोई तरीका तो ढूंढना ही होगा?” जेनिथ ने कहा और अपने आसपास कुछ ढूंढने लगी।

पर पार्क में उस जगह पर एक बेंच के सिवा कुछ नहीं था। समय धीरे-धीरे बीत रहा था, पार्क के बाकी पेड़ों की पत्तियां पूरी लाल हो चुकीं थीं, पर सामने खड़ा वह पेड़ अपनी हरी पत्तियों को दिखाकर मानो सबको चिढ़ा रहा था।

सुयश अब थककर पेड़ की ओर देख रहा था, कि तभी सुयश को पेड़ के पास, एक छोटे से बिल से एक चूहा झांकता नजर आया, जो कि सुयश को अपनी ओर देखता पाकर वापस बिल में घुस गया।

चूहे को देखकर अचानक सुयश के मस्तिष्क में एक आइडिया आ गया।

“दोस्तों, मैंने अभी इस पेड़ के पास एक चूहा घूमता देखा, तो मुझे लग रहा है कि यदि हम जमीन के अंदर-अंदर, इस पेड़ तक एक सुरंग खोदें तो उस पर इस अदृश्य दीवार का असर नहीं होगा।”

“पर कैप्टेन, हमारे पास समय बहुत कम है, ऐसे में बिना किसी फावड़े या कुदाल के हम इतनी जल्दी इतनी बड़ी सुरंग कैसे खोद पायेंगे?” जेनिथ ने कहा।

“पहली बात है कि हमें सुरंग को पेड़ तक नहीं खोदना है, हमें बस उसे 2 फुट ही खोदना है, जिससे कि हम बस इस अदृश्य दीवार को पार कर जायें। दूसरी बात जिस पेड़ के पास चूहों ने अपना घर बनाया होता है, उस पेड़ के पास की जमीन वैसे ही अंदर से नर्म होती है, इसलिये हमें ज्यादा मुश्किल नहीं आयेगी।” सुयश ने कहा।

तभी ऐलेक्स भागकर सामने पड़ी बेंच की ओर आ गया। वह कुछ देर तक बेंच को देखता रहा और फिर उसने बेंच के हत्थे को खींचकर बेंच से निकाल लिया।

बेंच का वह हत्था बिल्कुल किसी कुदाल के अगले भाग की तरह था, उसके बीच में लकड़ी लगाने के लिये छेद भी था।

ऐलेक्स की नजरें अब बेंच के लकड़ी के एक पाये की ओर गई। इस बार ऐलेक्स ने बेंच से लकड़ी का वह पाया भी अलग कर लिया।

ऐलेक्स ने लकड़ी के उस पाये को कुदाल के अगले भाग में फंसा दिया। इसके बाद जमीन पर थोड़ा ठोंकते ही कुदाल ने पूरा आकार ले लिया।

अब ऐलेक्स ने भागकर वह कुदाल सुयश को पकड़ा दी। सुयश आश्चर्य से ऐलेक्स को देख रहा था, उसे तो समझ में भी नहीं आया कि ऐलेक्स यह कुदाल ले कहां से आया?

“ऐलेक्स ने तो इस काम को बहुत आसान कर दिया। चलो दोस्तों अब थोड़ा मेहनत भी कर ली जाए।” यह कहकर सुयश तेजी से कुदाल से अदृश्य दीवार के आगे के हिस्से को खोदने लगा।

बाकी के लोग खुदी हुई मिट्टी को दूर करने में लगे थे। सुयश का कहना सही था, चूहों ने पेड़ के आस पास की मिट्टी को भुरभुरा बना दिया था। इसलिये एक छोटी सुरंग तैयार करने में मात्र 15 मिनटं की मेहनत ही करनी पड़ी।

सुरंग बनते ही सुयश और तौफीक तेजी से उस सुरंग में घुसकर पेड़ के पास पहुंच गये और कुछ ना समझ में आते देख पेड़ की पत्तियों को उखाड़ना शुरु कर दिया।

पर सुयश और तौफीक जितनी पत्तियां तोड़ रहे थे, उतनी ही पत्तियां पेड़ पर फिर से आ जा रहीं थीं।

“कैप्टेन अंकल, रुक जाइये।” शैफाली ने सुयश को रुकने का इशारा किया- “आप लोग जितनी पत्तियां तोड़ रहे हैं, उतनी ही पेड़ पर फिर उग रहीं हैं, इसलिये मुझे नहीं लगता कि यह सही तरीका है पेड़ के बदलाव का। हमें कुछ और ही सोचना होगा?”

शैफाली की बात सुन सुयश के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आईं क्यों कि लगभग 1.5 घंटा बीत चुका था, अब सिर्फ आधा घंटा ही शेष था। आसपास के बाकी पेड़ की पत्तियां लगभग झड़ चुकीं थीं।

“जो भी सोचना है जल्दी सोचो शैफाली, क्यों कि हमारे पास ज्यादा समय नहीं बचा है और पेड़ के बारे में तुमसे बेहतर हममें से कोई नहीं सोच सकता।” सुयश ने शैफाली की तारीफ करते हुए उसका उत्साह बढ़ाया।

सुयश के शब्दों को सुन शैफाली जोर-जोर से बड़बड़ा कर सोचने लगी- “मैपल के पेड़ की पत्तियां गर्मियों में हरी होती है, पर जैसे ही शरद ऋतु आती है, वह लाल होने लगती हैं। शरद ऋतु में सूर्य की प्रकाश ज्यादा पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाता, इसका मतलब कि इस पेड़ को भी, कहीं से सूर्य का प्रकाश ज्यादा मिल रहा है, जिसकी वजह से यह इस मौसम में भी अच्छे से क्लोरोफिल बना रहा है, यानि हमें इसका हरा पन रोकने के लिये, सूर्य के प्रकाश के स्रोत का पता लगाना होगा?”

शैफाली की बात सुन ऐलेक्स ने एक बार फिर ध्यान लगा कर पेड़ को देखना शुरु कर दिया, अब उसे प्रकाश की एक किरण किसी ओर से आकर उस पेड़ पर पड़ती दिखाई दी।

“सब लोग मेरे पीछे आओ, मुझे एक प्रकाश की किरण कहीं से आकर इस पेड़ पर पड़ती हुई दिख रही है।” यह कहकर ऐलेक्स पार्क में एक दिशा की ओर भागा।

तब तक सुयश और तौफीक भी सुरंग के रास्ते वापस बाहर निकल आये थे। सभी अब ऐलेक्स के पीछे भागे।

ऐलेक्स भागकर पार्क में मौजूद एक दूसरी मूर्ति के पास पहुंच गया। यह मूर्ति 20 फुट ऊंची थी। उस मूर्ति ने अपने हाथ में एक गोला उठाया हुआ था, जो कि नारंगी रंग का चमक रहा था। वह प्रकाश उसी गोले से आ रहा था।

“यह मूर्ति ग्रीक देवता हीलीयस की है, इन्हें सूर्य के देवता के रुप में जाना जाता है।” क्रिस्टी ने मूर्ति को देखते हुए कहा- “और इन्होंने सूर्य को ही अपने हाथों में उठा रखा है।”

“इसका मतलब इसी सूर्य की किरणों से वह पेड़ अब भी हरा है।” शैफाली ने कहा- “हमें कैसे भी इन किरणों को उस पेड़ तक पहुंचने से रोकना होगा?”

“पर इन किरणों को रोका कैसे जा सकता है?” क्रिस्टी ने दिमाग लगाते हुए कहा।

कुछ सोचने के बाद सुयश ने अपनी बदन पर मौजूद लेदर की जैकेट को उछालकर हीलीयस के हाथ में पकड़े सूर्य पर टांग दिया, पर एक मिनट से भी कम समय में वह जैकेट जलकर राख हो गई और इसी के साथ सुयश के शरीर पर बिल्कुल वैसी ही एक नयी जैकेट आ गई।

“यह प्लान तो काम नहीं करेगा।” सुयश ने कहा- “हम इस सूर्य को किसी भी चीज से ढक नहीं सकते। कुछ और ही सोचना पड़ेगा?”

यह सुनकर सभी इधर-उधर देखने लगे कि शायद यहां कोई और ऐसी चीज हो, जिससे सूर्य की रोशनी को रोका जा सके।

तभी क्रिस्टी की निगाह मूर्ति के पीछे की ओर गई और उसने चिल्ला कर सुयश का ध्यान अपनी ओर कराया- “कैप्टेन, कुछ ढूंढने की जरुरत नहीं है, सूर्य का ग्लोब पीछे की ओर से आधा काला है, इसका साफ मतलब है कि हमें इसके सामने कुछ नहीं रखना, बल्कि इसे घुमाकर इसका पिछला हिस्सा आगे की ओर कर देना है।”

“यह काम मैं करता हूं।” यह कहकर ऐलेक्स तेजी से मूर्ति के ऊपर चढ़ने लगा।

कुछ ही देर में ऐलेक्स मूर्ति के ऊपर था, अब वह सूर्य के ग्लोब को घुमाने की कोशिश करने लगा, पर ऐलेक्स के पूरी ताकत लगा देने के बाद भी वह सूर्य का ग्लोब टस से मस नहीं हुआ।

यह देख ऐलेक्स ने ऊपर से चिल्ला कर कहा- “कैप्टेन यह ग्लोब घूम नहीं रहा है, आप नीचे से देखो, हो सकता है कि मूर्ति को घुमाया जा सके।”

ऐलेक्स की बात सुन सुयश नीचे से मूर्ति को घुमाने की कोशिश करने लगा, पर उस मूर्ति में भी घूमने का कोई ऑप्शन दिखाई नहीं दिया।

अब सच में सबके लिये चिंता की बात थी, क्यों कि अब मात्र 5 मिनट
का ही समय बचा था।

“कैप्टेन, मुझे लगता है कि अब हम इस द्वार को नहीं पार कर पायेंगे, क्यों कि अब हमारे पास सिर्फ और सिर्फ 5 मिनट ही बचा है।” जेनिथ ने निराश होने वाले अंदाज में कहा।

“हमें अंतिम दम तक हार नहीं माननी चाहिये। जिंदगी में कभी-कभी हम उस स्थान से हारकर वापस आ जाते हैं, जो समस्या के समाधान से बिल्कुल करीब होता है। इसलिये अपनी ओर से सभी लोग आखिरी सेकेण्ड तक कोशिश जारी रखो, बाकी सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दो।”

सुयश के शब्द बिल्कुल जादू से भरे थे। इन शब्दों ने सभी में एक बार फिर से जोश का संचार कर दिया था।

सुयश के शब्द सुन ऐलेक्स के कान में गूंजने लगे- “सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दो....यही कहा है कैप्टेन ने.... पर मेरे पास तो देवता हीलीयस के सिवा इस समय कोई नहीं है, चलो इन्हीं पर ध्यान लगाता हूं।” यह सोच ऐलेक्स हीलीयस की मूर्ति को ध्यान से देखने लगा, तभी ऐलेक्स को मूर्ति की गर्दन और सिर के बीच कुछ गैप दिखाई दिया।

कुछ सोच ऐलेक्स ने मूर्ति के सिर को घुमाने की कोशिश की। ऐलेक्स की जरा सी कोशिश से ही मूर्ति का सिर पीछे की ओर घूम गया।

और जैसे ही मूर्ति का सिर पीछे की ओर हुआ, मूर्ति का शरीर भी स्वतः पीछे की ओर घूम गया।

इसी के साथ सूर्य की ग्लोब का अंधेरे वाला हिस्सा आगे की ओर आ गया और उस पेड़ को सूर्य की रोशनी मिलनी बंद हो गई।

इसी के साथ उस पेड़ के पत्तों का रंग भी लाल हो गया। यह देख सब खुशी से चिल्लाये। पर सुयश की निगाह अब देवी कार्पो के हाथ में थमी सैंड वॉच पर थी।

उस सैंड वॉच में अब बहुत थोड़ी सी रेत ही बची थी। अब सुयश कभी मैपल के पेड़ के पत्तों को, तो कभी सैंड वॉच में बची सैंड को देख रहा था।

पेड़ के पत्ते अब पूरे लाल होकर झड़ना शुरु हो गये थे, पर रेत भी बिल्कुल समाप्ति की ओर आ पहुंची थी।

सभी की साँसें इस प्रकार रुकी थीं, मानों विश्व कप फुटबाल के फाइनल के मैच में दोनों टीमें बराबरी पर हों और आखि री 60 सेकेण्ड का टाइमर चल रहा हो।

पेड़ के सारे पत्ते झड़ गये, पर एक अखिरी पत्ता अभी भी डाल पर मौजूद था और सैंड वॉच में सिर्फ 5 सेकेण्ड की रेत ही बची थी......5....4.....3 तभी तौफीक के हाथ में चाकू नजर आया और वह बिजली की तेजी से उस आखिरी पत्ते की ओर झपटा -2..........1 पर आखिरी मिली सेकेण्ड में चाकू ने उस पत्ते को पेड़ से गिरा दिया और इसी के साथ वह द्वार भी पार हो गया।

इससे पहले कि सभी खुशी मना पाते कि रोशनी के एक तेज झमाके के साथ सभी वापस उस कमरे में आ गये, जहां पृथ्वी का ग्लोब रखा था।

तौफीक पर नजर पड़ते ही जेनिथ को छोड़, सभी दौड़कर तौफीक के गले लग गये।

तौफीक की निगाह दूर खड़ी जेनिथ की ओर थी, पर इस समय जेनिथ की आँख में भी, तौफीक के लिये तारीफ के भाव थे।

“अपने मन को इतना व्यथित मत करो जेनिथ।” नक्षत्रा ने कहा- “जो चला गया, उसे जाने दो....तुम्हारे भाग्य में शायद उससे भी बेहतर कुछ लिखा हो?”

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने स्वयं के भावों को एक बार फिर से कंट्रोल किया और बोली- “तुमको बड़ा पता है मेरे भाग्य के बारे में। ...एक तो वैसे ही यहां तिलिस्मा में तुम मुझसे कम बात करते हो और ऊपर से ज्ञान और दे रहे हो।”

“मैं क्या करुं जेनिथ, यहां एक कार्य अभी सही से खत्म भी नहीं होता कि दूसरा शुरु हो जाता है, बात करने का समय ही कहां मिल पा रहा? कैश्वर ने तो सबको रोबोट से भी बदतर बना दिया। अब वो देखो सभी फिर से अगले द्वार में जाने की तैयारी कर रहे हैं...जाओ अब तुम भी उनके पास...जब तक मैं कुछ नई खोज करता हूं।”

“तुम्हारे पास खोज करने के लिये लैब तो है ही नहीं, फिर तुम ये खोज करते कहां हो?” जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

“क्यों तुम्हारा दिमाग की प्रयोगशाला, किसी नक्षत्रशाला से कम है क्या? बस इसी में एक टेबल डालकर बैठा हूं। पर तुम चिंता मत करो, तुम्हारे दिमाग में होने वाले सारे प्रयोग पर बस तुम्हारा ही अधिकार होगा।” नक्षत्रा ने कहा।

“सिर्फ तुम्हारे प्रयोग पर ही नहीं तुम पर भी मेरा सारा अधिकार है, आखिर मैं ही तो सिखा रही हूं तुम्हें नयी -नयी चीजें।” जेनिथ ने कहा।

“अच्छा जी, कल तक तो दोस्त बता रही थी और आज अधिकार जताने लगी।” नक्षत्रा ने मजा लेते हुए कहा - “चलो माना तुम्हारा अधिकार स्वयं पर...पर देखता हूं कि जब कोई मुझे तुम से अलग करने आयेगा, तो उसका सामना कैसे करोगी?”

“कौन अलग करने आयेगा?...क्या तुम मुझसे कुछ छिपा रहे हो नक्षत्रा?” जेनिथ यह बात सुन थोड़ा परेशान दिखने लगी।

“नहीं...नहीं...मैं तो ऐसे ही मजाक कर रहा था। तुम कुछ अलग ही अर्थ निकालने लगी।” नक्षत्रा ने अपनी बात को संशोधित करते हुए कहा- “और जल्दी से उधर जाओ, देखो सारे लोग तैयार हैं, अगले द्वार में
जाने के लिये।”

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने सबकी ओर देखा, सच में ऐलेक्स लाल रंग का फ्लैग हाथ में लिये, इंडिया के स्थान पर लगाने के लिये तैयार खड़ा था।

जेनिथ तुरंत सबके पास पहुंच गई। उसे पास आता देख ऐलेक्स ने लाल रंग के फ्लैग को इंडिया वाले स्थान पर, पृथ्वी के ग्लोब में लगा दिया।

इस बार जमीन पर बने मानचित्र में इंडिया का मैप बड़ा होकर आ गया और उस पर खड़े होते ही सभी एक बार फिर उस मानचित्र में समा गये।


जारी रहेगा______✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Oh toh kahani ka villan Makota :roll3: hai! Poore aarka 🏝️ dweep par raaj karne ke liye usne Jaigan 🐛 ka sahara liya.

Aakruti 🤵‍♀️ ko Shalaka 👸 banakar usne Lufasa 🦁 aur Sanura 🐈‍⬛ ko bhi behka diya.

Supreme 🛳️ ke Bermuda Triangle mei aane ke baad jo bhi musibate aayi woh kahina kahi usi ke wajah se hai.

Supreme par se sabhi laasho ke gayab hone ka raaz toh woh keede 🐛 hi thay.

Lekin Lufasa 🐀 aur Sanura 🐈‍⬛ ne Aakruti aur Makota ki baate sunn hi li. Shayad ab ab woh sahi raasta chune.

Iss Aarka / Atlantis ke chakkar mei hum Supreme par hue sab se pehle khoon ki baat toh bhool hi gaye Aur kyo Aslam ne jahaaz ko Bermuda Triangle ki taraf moda! Aur Woh Vega ki kahani bhi wahi chhut gayi.
Lekin aaj ke iss update mei kaafi sawaalo ke jawaab mil hi gaye. :cool3:





Awesome update

बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
युगाका का एलेक्स बनने का राज शेफाली के कारण सबके सामने आ गया और शेफाली की शक्ति के आगे युगाका नतमस्तक हो गया और जल्दी ही मिलने का बोलकर जंगल में गुम हो गया
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा

Badhiya update bhai

To Toffik hi tha jisne sab kiya tha lekin loren ko kyun mar diya usne wo to usse pyar karta tha na or bechari loren bhi uske pyar me andhi hoker uski baten man rahi thi or jis jenith se badla lena chahta tha use abhi tak jinda rakha ha usne usse pyar ka natak karta ja raha ha Jenith ki sab sachhai pata pad gayi ha dekhte han kab tak Toffik babu apni sachhai chhupa pate han waise bure karm ki saja milti hi ha or jis jagah ye sab han usse lagta ha jaise Aslam miya ko saja mili usi prakar Toffik ka bhi number lag sakta ha

उचित समय आने पर, अवश्य ही

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

Radhe Radhe guruji,, break pe chala gya tha uske baad is id ka password issue ho gya tha so sign in nahi tha itne time se ab wapas aaya hu to dubara se updates ki demand rakhunga...waise stock to abhi full hai kuch time ke liye so read karta hu

Shandaar update and nice story

Nice update....

शानदार अपडेट राज भाई

अद्भुत अंक भाई

फिर से एक अप्रतिम रोमांचक और अद्भुत अविस्मरणीय मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
अब स्टॅचू ऑफ लिबर्टी की मुर्ती पर तिलिस्मा का नया खेल शुरु हो गया
खैर देखते हैं आगे
अगले रोमांचकारी धमाकेदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा

Nice update.....

यह वाला द्वार अधिक कठिन था।
लेकिन पूरे दल की सूझ बूझ से इसके पार जाया जा सका।

सुयश कप्तान तो दो कौड़ी का था, लेकिन भूतपूर्व आर्यन के अवतार के रूप में उसके अंदर वही प्रतिभा है।
वैसे एक बात पर गौर दें तो हम यह देखते हैं कि शेफ़ाली को अगर छोड़ दें, तो बाकी सुप्रीम के बचे हुए यात्रियों में जो ये सभी बच गए हैं, उनके व्यवहार में बहुत परिवर्तन आ गए हैं।
शेफ़ाली स्वयं भी अब देख सकती है।
अब इनमें से किसी का भी वापस भू-लोक में जा कर सामान्य जीवन जीना असंभव है।
मतलब यह कि भविष्य में जब तिलिस्मा टूट जाएगा और वार ऑफ़ द वर्ल्ड्स भी जीत लिया जाएगा, तब इनका क्या हश्र होगा!
क्या करेंगे ये लोग? यहीं इस द्वीप पर रहेंगे? मानव लोक इनके रहने योग्य तो नहीं रह गया है।
हाँ हाँ - बहुत बहुत आगे का सोच रहा हूँ, लेकिन यह प्रश्न दिमाग में आए बग़ैर नहीं रह रहा है।

हमेशा की ही तरह - बेहद उम्दा लेखन। भौतिकी और रसायन के कई सिद्धांतों का प्रयोग हुआ इस अपडेट में!
न केवल मनोरंजन, बल्कि ज्ञानवर्धन का भी उत्तम साधन है यह लेख!

अति उत्तम 👏 👏 ♥️

Maza aa gya bhai

Let's review starts
So ye wala 165 update bahut sare Raaz se Parda Gira Chuka hain .

Mujhe Nahi pata Thaa ki Lufasa ke Father makota nahi hai , hamesha se yahi laga ki makota hi lufasa aur venus ka father hain.

ye Jasoosi karne wala gonjala ko To vyom bhaiya ne dhoya thaa ,vyom bhaiya wala chapter kaha chale gaya unke darshan bahut samay se nahi huwe , aakhir Ye Senore walo ne Agar yudh chalu kiya to vyom bhaiya nirnayak hoge , aakhir panch shool hain unke pass .

Mujhe makota ki adhee baat Jhute lagte hain, ye lufasa ko facts todh marood kar parose raha ,kagoshi aur mufasa ko mujhe nahi lagta ki claat ne unki hatya kari , mujhe to makota be hi power greed ke liye unko marne ki shajish rachi.

Main baat ye hain ki Tilism me Ghusne ki Koshish chal rahee , ab agar Tilism me ye ghusne me kamyab huwe to suyash and company inse kese niptege he log to magical power holder hain waha do log hi hain Jinke pass Power hain Suyash aur shaffali waha wese bhi unki powers kaam nahi aana wali .

Jaigan Bhi Jaag gaya yani makota ke log aur power full hogaye , agar me galt nahi hu to yudh tilism me hi hone wala hain, kyuki sabko chahiye kya clito ka black diamond aur Tilism me hain , To bina tilism me aaye makota and company ko wo moti milega kese issilye tilism me makota aayega

dusra reason agar maan lo tilism me sheffali pehle hi wo black diamond hasil karlegi tab wo bahut powerful hogi , to makota ki kya okaat rahegi idhar fight ki, issilye tilism ke end tak shaffali and company pahuche tak makota ye log tilism me aayege waha sheffali ko isne bhi ladna hoga .

Bas ye dekhnaa hoga Tilism me sheffali aur suyash company ki help ke liye kaha se madad aayege kya vega yugaka varuni kautubh dhanusha ye log kese tilism me aayege

Dusra sheffali ko wo kala moti milna kyu Jaruri hain ye bhi samjh aaraha ye Jaigan aur inke logo se bidhna koi bacho ka khel nahi issilye kala moti sheffali ko chahiye rahega

Makota ki sena To Taiyaar hain
Green insects
Wo gonjala
Wolf sena
Azeeb Tarah ke senik Jo lufasa ko piramid ke niche

Samara ke side
Agar pehle dhara ye log inke sath rahe iska MATLAB
Inke sath wale dhanusha , vikarm , varuni , ye sab inke side hain
Vyom bhi inke side hona chahiye kyuki samara me trikali rahe aise isthti me high possibilities ki samara side se wo lade

Bas ye samjh nahi araha kis Tarah hanuka aur ye Rakhsah vidhumna kis Tarah picture me aayege

Forena ghar ke andorse kiss side ka paksha lege .

Sath hi statue of liberty Tilism pura complete hogaya ,
Suyash ke Copperfield ke knowledge me bacha liya .

Invisible mashal thee but bach gaya mil gaya mashal .

Brown se green karna thaa statue ko
Isme bhi kaam complete hogaya .

Overall shandaar update
Waiting for more.

Besabari se intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....

Shandaar update and lovely story

Pura physics hi padha daala brother, let's see inhe moon par kuchh aur adventures milta hai ya nahi, wonderful update brother.

Shaandar update

lovely update. vega aur venus ne sabko bacha liya samudri jeevo ke hamle se .fight karte huye bhi dono ka ek dusre ki taang khichna majedar tha .par ye jeev kiske control me the jo pani ke bina bhi jeevit reh sakte the .

nice update

Hamesha ki tarah lajawab update

Bahut hi achha update raha brother, kya inn sab ke pichhe wahi sab hain jo Mayur aur Dhara ko le gaye hain??? Dekhte hain kya Vega apni bahan Dhara ko bacha payega???

Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....

Bhut hi badhiya update Bhai
Kya in sabhi jeev jantuo ke aesa karne ke piche ki vajah ve alien hi hai
Abhi to vega aur vinas ne in sabhi ko rok liya
Dhekte hai ab aage kya hota hai


Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai,

Ho na ho ye sab lufasa ka hi kiya dhara he...........

Vega aur Venus ne bahut bahaduri se is musibat ka samna kiya..........

Apne sath sath aas pass ke logo ki bhi jaan bachayi he in dono ne.........

Zodiak watch ka bahut hi badhiya istemal kiya vega ne............

Keep rocking Bro

Shandaar update and nice story

Nice update.....

Wakai me ye sapno ka sansaar hi hai, jaisa ki prasnottari ke samay aapne bataya tha ki kya ho agar aapko indra ki bhoomika nibhani pade? Waise hi aapne karke dikha diya 🫡 baadlo ki sair, baarish karwana, kisaan ka ket, uski fasal, talaab ke paani se badal ko bharna, pawan chakki wala bhi amaze karne wala tha. Kul milakar ek dhamakedaar, superb, and amazing update tha👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Ok bhai waiting

Update Posted Friends :dost:
 

Sushil@10

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चैपटर-10
शरद ऋतु: (
तिलिस्मा 4.1)

सुयश के साथ सभी अब एक विशाल कमरे में निकले। इस कमरे में एक किनारे पर 15 फुट ऊंचा, एक पृथ्वी का ग्लोब रखा था, जिसे नचाया भी जा सकता था।

उस ग्लोब के आगे एक 12 इंच की त्रिज्या का, सुनहरी धातु का रिंग रखा था, जिसके आगे एक धातु की पट्टी पर, अंग्रेजी के कैपिटल अक्षरों से RING लिखा था। इस रिंग के बगल में एक छोटी सी ट्रे रखी थी, जिसमें 4 रंग के छोटे फ्लैग रखे थे।

उस कमरे की पूरी जमीन काँच की बनी थी, जिस पर पूरे विश्व का मानचित्र बना था।

मानचित्र में विश्व के सभी देशों को 4 अलग-अलग रंगों से दर्शाया गया था। एक जगह पर उन 4 रंगों का वर्गीकरण किया गया था।

जहां लाल रंग ग्रीष्म ऋतु का, नीला रंग शीत ऋतु का, नारंगी रंग शरद ऋतु का और हरा रंग वसंत ऋतु के प्रतीक के रुप में दर्शाया गया था।

“कैप्टेन, इस कमरे को देख कर तो लग रहा है कि यहां पर विश्व के अलग-अलग देशों को, वहां पायी जाने वाली ऋतुओं के हिसाब से वर्गीकृत किया गया है और उसे ग्लोब और मानचित्र के माध्यम से दर्शाया गया है।” जेनिथ ने सुयश को देखते हुए कहा।

“तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो जेनिथ।” सुयश ने कमरे में चारो ओर देखते हुए कहा- “पर अब हमें यह देखना है कि हमें यहां करना क्या है? क्यों कि उसको जाने बिना हम इस द्वार को नहीं पार कर पायेंगे?”

“कैप्टेन मैंने एक चीज गौर की है कि जमीन पर बने मानचित्र में भी 4 रंगों को दर्शाया गया है और यहां टेबल पर रखी ट्रे में मौजूद फ्लैग भी उन्हीं 4 रंग के हैं, इसका मतलब इनमें आपस में कोई ना कोई सम्बन्ध तो जरुर है?” ऐलेक्स ने कहा।

“दरअसल विश्व के अधिकतर देशों में 4 ऋतुओं को ही प्रधानता दी गई है, इसलिये यहां उन्हीं 4 ऋतुओं को मानचित्र के माध्यम से दर्शाया गया है।” सुयश ने कहा।

“कैप्टेन अंकल, मुझे तो इस कमरे में सबकुछ एक ही थीम पर आधारित लग रहा है, बस यह रिंग यहां पर कुछ अजीब सा लग रहा है क्यों कि ऋतुओं या विश्व के मानचित्र में रिंग का कहीं उल्लेख नहीं है।” शैफाली ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा।

“बात तो तुम्हारी सही है शैफाली, तो फिर चलो पहले इसी पर ध्यान देते हैं।” यह कहकर सुयश उस रिंग के पास आकर खड़ा हो गया और ध्यान से उसे देखने लगा।

“कैप्टेन एक बात और है।” तौफीक ने कहा- “यह रिंग हमारे सामने रखा है और हम इसे देखकर पहचान सकते हैं कि यह एक रिंग है, फिर इसके पास यह नेम प्लेट लगा कर रिंग लिखा क्यों गया है?” मुझे यह बात थोड़ी अजीब सी लग रही है।”

इधर सभी बातें कर रहे थे, उधर ऐलेक्स ग्लोब के पास खड़ा होकर ग्लोब को नचा रहा था। जैसे ही ग्लोब रुक जाता, ऐलेक्स उसे फिर नचा देता।

कुछ देर तक ऐसे ही करते रहने के बाद ऐलेक्स ने इस बार जैसे ही ग्लोब को नचाना चाहा, उसके हाथों पर किसी चीज का स्पर्श हुआ।

यह अहसास होते ही ऐलेक्स ध्यान से उस स्थान को देखने लगा। ध्यान से देखने पर ऐलेक्स को इंडिया वाले स्थान पर एक उभरी हुई बिन्दी चिपकी दिखाई दी।

“कैप्टेन, जरा एक बार इसे देखिये।” ऐलेक्स ने सुयश को वहां आने का इशारा करते हुए कहा- “यहां ग्लोब में इंडिया वाले स्थान पर उभरी हुई बिन्दी चिपकी है। क्या इसका कोई मतलब हो सकता है?”

ऐलेक्स की आवाज सुन सुयश सहित, सभी उस ग्लो ब के पास आ गये और छूकर उस बिन्दी को देखने लगे।

“इस बिन्दी का कोई रंग नहीं है, यह पूर्णतया पारदर्शी है।” सुयश ने कहा- “यानि कि इसे छुए बिना इसके बारे में नहीं जाना जा सकता था, अब ऐसी चीज कैश्वर ने यूं ही तो नहीं लगाई होगी? इसकी कुछ ना कुछ तो अर्थ निकलता ही होगा?”

“ऐलेक्स भैया, एक बार पूरा ग्लोब ध्यान से देखिये। क्या ग्लोब पर और भी ऐसी ही बिन्दियां हैं?” शैफाली ने ऐलेक्स से कहा।

शैफाली की बात सुन कर ऐलेक्स, अपने हाथों के स्पर्श से ग्लोब पर और भी बिन्दियों को ढूंढने में लग गया। कुछ ही देर में ऐलेक्स ने पूरा ग्लोब ध्यान से चेक कर लिया।

“इस ग्लोब पर इंडिया के अलावा रुस, ग्रीनलैंड और न्यूजीलैंड के स्थान पर भी पारदर्शी बिन्दियां भी मौजूद हैं।” ऐलेक्स ने शैफाली से कहा।

यह सुनकर शैफाली मुस्कुरा दी और उठकर ऐलेक्स के गले लगते हुए बोली- “वाह ऐलेक्स भैया, आपने तो इतनी बड़ी समस्या को आसानी से सुलझा दिया।”

पर ऐलेक्स को तो स्वयं नहीं समझ में आया कि उसने कौन सी समस्या को अंजाने में सुलझा दिया, इसलिये वह प्रश्नवाचक नजरों से शैफाली की ओर देखने लगा।

“कैप्टेन अंकल, यहां पर लिखा RING शब्द 4 अक्षर R, I, N और G से बना है, जबकि ग्लोब पर जिन देशों के आगे पारदर्शी बिन्दियां चिपकी हुई हैं, उनके नाम का पहला अक्षर भी यही है। यानि कि Russia का R, India का I, New Zealand का N और Greenland का G....अब मुझे लग रहा है कि हमें ट्रे में मौजूद इन फ्लैग्स को ग्लोब के ऊपर लगाना होगा? पर ध्यान रहे कि जिस देश की ऋतु का रंग जो मानचित्र बता रहा है, फ्लैग हमें उसी ढंग से लगाना होगा।”

शैफाली ने तो एक झटके से पूरी गुत्थी ही सुलझा दी। सभी के चेहरे पर अब खुशी साफ नजर आने लगी थी।

तुरंत तौफीक ने जमीन पर बने मानचित्र पर सबसे पहले रुस देश का रंग देखा, जो कि नारंगी था।

अब ऐलेक्स ने ट्रे से नारंगी रंग का फ्लैग निकालकर उसे ग्लोब के उसी पारदर्शी बिन्दी पर लगा दिया।

जैसे ही ऐलेक्स ने फ्लैग को रुस के स्थान पर लगाया, वातावरण में एक तेज ‘बजर’ की आवाज सुनाई देने लगी।

सभी वह आवाज सुन डर गये। तभी उनकी नजर जमीन पर गई, अब पूरी जमीन पर सिर्फ रुस का ही मानचित्र दिख रहा था और रुस की राजधानी मास्को के स्थान पर एक लाल रंग की लाइट जोर से ब्लिंक
करती हुई दिखाई दी।

“यह सब क्या हो रहा है कैप्टेन?” क्रिस्टी ने सुयश से पूछा।

“मुझे लगता है कि हम जहां खड़े है, वह तिलिस्म नहीं है, बल्कि अब हमें तिलिस्म में प्रवेश करना है और यह बजर हमें इसी का संकेत दे रही है।” सुयश ने कहा- “मुझे लगता है कि तिलिस्म का अगला द्वार मास्को में हमारा इंतजार कर रहा है।” यह कहकर सुयश आगे बढ़कर मास्को के उस स्थान पर खड़ा हो गया, जहां पर लाइट ब्लिंक कर रही थी।

सुयश जैसे ही वहां पर खड़ा हुआ, वह उस स्थान से गायब हो गया। यह देख सभी उस स्थान पर पहुंच कर खड़े हो गये और इसी के साथ सभी गायब हो कर मास्को के एक पार्क में जा पहुंचे। सुयश वहां पहले से ही खड़ा था।

“यह तो मास्को का एक पार्क है।” ऐलेक्स ने चारो ओर देखते हुए कहा- “यहां तो मैं रोज घूमने आता था, यहां से मेरा घर ज्यादा दूर नहीं है।”

“अच्छा तो ब्वॉयफ्रेंड जी, कहीं आप हमको छोड़ कर अपने घर जाने की तो नहीं सोच रहे?” क्रिस्टी ने एक बार फिर से ऐलेक्स को छेड़ते हुए कहा।

“ये लो कर लो बात।” ऐलेक्स ने क्रिस्टी की आँखों में झांकते हुए कहा- “अरे तुम्हारे लिये तो मैं दुनिया छोड़ दूं, तुम्हारे सामने घर की बिसात ही क्या है। और वैसे भी मुझे पता है कि यह कैश्वर का बनाया एक सेट है, असली मास्को नहीं। लेकिन एक बात तो इससे कंफर्म हो गई कि कैश्वर किसी प्रकार से हमारे दिमाग को पढ़ रहा है और उसके बाद ही इन दरवाजों की रचना कर रहा है।”

ऐलेक्स की बात सुन सुयश भी सोच में पड़ गया क्यों कि ऐलेक्स कह तो सही रहा था, इस तिलिस्मा में ऐसी चीजों का ही निर्माण हुआ था, जो कहीं ना कहीं उनके दिमाग में थीं।

“चलिये कैप्टेन, अब इस पार्क को भी देख लें कि यहां पर क्या-क्या है?” तौफीक की आवाज ने सुयश का ध्यान भंग कर दिया और वह अपनी सोच की दुनिया से बाहर आ गया।

सभी अब पार्क में घूमकर वहां मौजूद एक-एक चीज को देखने लगे।

उस पार्क में सबसे पहले एक देवी की मूर्ति मौजूद थी, जो अपने हाथ में ‘सैंड वॉच’ लिये थी।

“क्या कोई बता सकता है कि यह कौन सी देवी हैं?” सुयश ने सभी की ओर देखते हुए पूछा।

“हां, मैं जानती हूं इनके बारे में।” क्रिस्टी ने जवाब दिया- “यह देवी ‘कार्पो’ हैं, ग्रीक माइथालोजी में इन्हें शरद ऋतु (Autumn Season) की देवी कहा जाता है, यानि कि ये देवी बारिश के बाद, प्रकृति में बड़ा बदलाव करते हुए, सभी पेड़ों के पुराने वस्त्रों, यानि कि उनके पत्तों को उनके शरीर से गिरा देती हैं। इसी लिये इस मौसम को पतझड़ भी कहते हैं। यह सबकुछ समय के द्वारा नियंत्रित करती हैं।”

“हमने वहां मानचित्र में भी नारंगी रंग को शरद ऋतु के प्रतीक के रुप में देखा था, यानि तिलिस्मा के चौथे द्वार में इस बार हमारा पाला ऋतुओं से पड़ा है और उसी के फलस्वरुप हम पहली ऋतु का सामना करने के लिये मास्को आये हैं।” जेनिथ ने कहा।

जैसे ही जेनिथ ने यह कहा अचानक से मूर्ति ने अपने हाथ में पकड़ी ‘सैंड वॉच’ को उल्टा कर दिया।

यह देख सभी आश्चर्य से मूर्ति की ओर देखने लगे।

तभी उनके आसपास के वातावरण में बदलाव शुरु हो गये और वहां मौजूद सैकड़ों ‘मैपल’ के पेड़ों की पत्तियों ने अपना रंग बदलना शुरु कर दिया।

अब सभी मैपल की पत्तियां हरे से लाल रंग में परिवर्तित होने लगी। हवा भी अब थोड़ी शुष्क हो चली थी।

“कैप्टेन अंकल, देवी कार्पो के सैंड वॉच के चलते ही मौसम में शरद ऋतु के समान बदलाव होने लगे हैं.... इसी के साथ देवी का सैंड वॉच यह भी बता रहा है कि हमें जो भी करना है, उसके लिये हमारे पास बस 2 घंटे का ही समय है...पर हमें करना क्या है? यह हमें अभी तक नहीं पता।” शैफाली ने पार्क में चारो ओर देखते हुए कहा- “इसलिये हमें सबसे पहले अपना कार्य पहचानना होगा, तभी हम उसे समय रहते पूरा कर पायेंगे।”

शैफाली की बात बिल्कुल सही थी, इसलिये बिना देर किये सभी पार्क के चारो ओर घूमकर वहां मौजूद चीजों से अपना कार्य ढूंढने की चेष्टा करने लगे।

तभी उन्हें पार्क के बीचो बीच एक हरा-भरा पेड़ दिखाई दिया, जो अपनी ग्रीनरी के कारण सभी पेड़ों से अलग ही नजर आ रहा था।

“यह क्या? जहां सभी मैपल के पेड़ों के पत्ते धीरे-धीरे लाल होने लगे है, वहां यह पेड़ अभी भी इतना हरा-भरा कैसे नजर आ रहा है?” तौफीक ने कहा।

“शायद इस पेड़ पर देवी कार्पो और शरद ऋतु का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा?” शैफाली ने कहा- “और मुझे लग रहा है कि यही हमारा कार्य है। हमें इस पेड़ पर भी शरद ऋतु का प्रभाव डालना ही होगा, नहीं तो यह
प्रकृति के विरुद्ध होगा और इसका दुष्परिणाम हमें भुगतना होगा।”

शैफाली की बात से सभी सहमत थे। पर जैसे ही ऐलेक्स ने आगे बढ़कर पेड़ के पास जाने की सोची, किसी अदृश्य दीवार ने ऐलेक्स का रास्ता रोक लिया।

“कैप्टेन, यहां पर कोई अदृश्य दीवार है, जो मुझे आगे जाने नहीं दे रही है।” ऐलेक्स ने सुयश से कहा- “अब अगर आगे जायेंगे ही नही, तो इस पेड़ की परेशानी को दूर कैसे करेंगे?”

ऐलेक्स के शब्द सुनकर सभी ने पेड़ के पास जाने की कोशिश की, पर सभी पेड़ के पास पहुंचने में असफल रहे।

“हमें पेड़ के पास पहुंचने का कोई ना कोई तरीका तो ढूंढना ही होगा?” जेनिथ ने कहा और अपने आसपास कुछ ढूंढने लगी।

पर पार्क में उस जगह पर एक बेंच के सिवा कुछ नहीं था। समय धीरे-धीरे बीत रहा था, पार्क के बाकी पेड़ों की पत्तियां पूरी लाल हो चुकीं थीं, पर सामने खड़ा वह पेड़ अपनी हरी पत्तियों को दिखाकर मानो सबको चिढ़ा रहा था।

सुयश अब थककर पेड़ की ओर देख रहा था, कि तभी सुयश को पेड़ के पास, एक छोटे से बिल से एक चूहा झांकता नजर आया, जो कि सुयश को अपनी ओर देखता पाकर वापस बिल में घुस गया।

चूहे को देखकर अचानक सुयश के मस्तिष्क में एक आइडिया आ गया।

“दोस्तों, मैंने अभी इस पेड़ के पास एक चूहा घूमता देखा, तो मुझे लग रहा है कि यदि हम जमीन के अंदर-अंदर, इस पेड़ तक एक सुरंग खोदें तो उस पर इस अदृश्य दीवार का असर नहीं होगा।”

“पर कैप्टेन, हमारे पास समय बहुत कम है, ऐसे में बिना किसी फावड़े या कुदाल के हम इतनी जल्दी इतनी बड़ी सुरंग कैसे खोद पायेंगे?” जेनिथ ने कहा।

“पहली बात है कि हमें सुरंग को पेड़ तक नहीं खोदना है, हमें बस उसे 2 फुट ही खोदना है, जिससे कि हम बस इस अदृश्य दीवार को पार कर जायें। दूसरी बात जिस पेड़ के पास चूहों ने अपना घर बनाया होता है, उस पेड़ के पास की जमीन वैसे ही अंदर से नर्म होती है, इसलिये हमें ज्यादा मुश्किल नहीं आयेगी।” सुयश ने कहा।

तभी ऐलेक्स भागकर सामने पड़ी बेंच की ओर आ गया। वह कुछ देर तक बेंच को देखता रहा और फिर उसने बेंच के हत्थे को खींचकर बेंच से निकाल लिया।

बेंच का वह हत्था बिल्कुल किसी कुदाल के अगले भाग की तरह था, उसके बीच में लकड़ी लगाने के लिये छेद भी था।

ऐलेक्स की नजरें अब बेंच के लकड़ी के एक पाये की ओर गई। इस बार ऐलेक्स ने बेंच से लकड़ी का वह पाया भी अलग कर लिया।

ऐलेक्स ने लकड़ी के उस पाये को कुदाल के अगले भाग में फंसा दिया। इसके बाद जमीन पर थोड़ा ठोंकते ही कुदाल ने पूरा आकार ले लिया।

अब ऐलेक्स ने भागकर वह कुदाल सुयश को पकड़ा दी। सुयश आश्चर्य से ऐलेक्स को देख रहा था, उसे तो समझ में भी नहीं आया कि ऐलेक्स यह कुदाल ले कहां से आया?

“ऐलेक्स ने तो इस काम को बहुत आसान कर दिया। चलो दोस्तों अब थोड़ा मेहनत भी कर ली जाए।” यह कहकर सुयश तेजी से कुदाल से अदृश्य दीवार के आगे के हिस्से को खोदने लगा।

बाकी के लोग खुदी हुई मिट्टी को दूर करने में लगे थे। सुयश का कहना सही था, चूहों ने पेड़ के आस पास की मिट्टी को भुरभुरा बना दिया था। इसलिये एक छोटी सुरंग तैयार करने में मात्र 15 मिनटं की मेहनत ही करनी पड़ी।

सुरंग बनते ही सुयश और तौफीक तेजी से उस सुरंग में घुसकर पेड़ के पास पहुंच गये और कुछ ना समझ में आते देख पेड़ की पत्तियों को उखाड़ना शुरु कर दिया।

पर सुयश और तौफीक जितनी पत्तियां तोड़ रहे थे, उतनी ही पत्तियां पेड़ पर फिर से आ जा रहीं थीं।

“कैप्टेन अंकल, रुक जाइये।” शैफाली ने सुयश को रुकने का इशारा किया- “आप लोग जितनी पत्तियां तोड़ रहे हैं, उतनी ही पेड़ पर फिर उग रहीं हैं, इसलिये मुझे नहीं लगता कि यह सही तरीका है पेड़ के बदलाव का। हमें कुछ और ही सोचना होगा?”

शैफाली की बात सुन सुयश के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आईं क्यों कि लगभग 1.5 घंटा बीत चुका था, अब सिर्फ आधा घंटा ही शेष था। आसपास के बाकी पेड़ की पत्तियां लगभग झड़ चुकीं थीं।

“जो भी सोचना है जल्दी सोचो शैफाली, क्यों कि हमारे पास ज्यादा समय नहीं बचा है और पेड़ के बारे में तुमसे बेहतर हममें से कोई नहीं सोच सकता।” सुयश ने शैफाली की तारीफ करते हुए उसका उत्साह बढ़ाया।

सुयश के शब्दों को सुन शैफाली जोर-जोर से बड़बड़ा कर सोचने लगी- “मैपल के पेड़ की पत्तियां गर्मियों में हरी होती है, पर जैसे ही शरद ऋतु आती है, वह लाल होने लगती हैं। शरद ऋतु में सूर्य की प्रकाश ज्यादा पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाता, इसका मतलब कि इस पेड़ को भी, कहीं से सूर्य का प्रकाश ज्यादा मिल रहा है, जिसकी वजह से यह इस मौसम में भी अच्छे से क्लोरोफिल बना रहा है, यानि हमें इसका हरा पन रोकने के लिये, सूर्य के प्रकाश के स्रोत का पता लगाना होगा?”

शैफाली की बात सुन ऐलेक्स ने एक बार फिर ध्यान लगा कर पेड़ को देखना शुरु कर दिया, अब उसे प्रकाश की एक किरण किसी ओर से आकर उस पेड़ पर पड़ती दिखाई दी।

“सब लोग मेरे पीछे आओ, मुझे एक प्रकाश की किरण कहीं से आकर इस पेड़ पर पड़ती हुई दिख रही है।” यह कहकर ऐलेक्स पार्क में एक दिशा की ओर भागा।

तब तक सुयश और तौफीक भी सुरंग के रास्ते वापस बाहर निकल आये थे। सभी अब ऐलेक्स के पीछे भागे।

ऐलेक्स भागकर पार्क में मौजूद एक दूसरी मूर्ति के पास पहुंच गया। यह मूर्ति 20 फुट ऊंची थी। उस मूर्ति ने अपने हाथ में एक गोला उठाया हुआ था, जो कि नारंगी रंग का चमक रहा था। वह प्रकाश उसी गोले से आ रहा था।

“यह मूर्ति ग्रीक देवता हीलीयस की है, इन्हें सूर्य के देवता के रुप में जाना जाता है।” क्रिस्टी ने मूर्ति को देखते हुए कहा- “और इन्होंने सूर्य को ही अपने हाथों में उठा रखा है।”

“इसका मतलब इसी सूर्य की किरणों से वह पेड़ अब भी हरा है।” शैफाली ने कहा- “हमें कैसे भी इन किरणों को उस पेड़ तक पहुंचने से रोकना होगा?”

“पर इन किरणों को रोका कैसे जा सकता है?” क्रिस्टी ने दिमाग लगाते हुए कहा।

कुछ सोचने के बाद सुयश ने अपनी बदन पर मौजूद लेदर की जैकेट को उछालकर हीलीयस के हाथ में पकड़े सूर्य पर टांग दिया, पर एक मिनट से भी कम समय में वह जैकेट जलकर राख हो गई और इसी के साथ सुयश के शरीर पर बिल्कुल वैसी ही एक नयी जैकेट आ गई।

“यह प्लान तो काम नहीं करेगा।” सुयश ने कहा- “हम इस सूर्य को किसी भी चीज से ढक नहीं सकते। कुछ और ही सोचना पड़ेगा?”

यह सुनकर सभी इधर-उधर देखने लगे कि शायद यहां कोई और ऐसी चीज हो, जिससे सूर्य की रोशनी को रोका जा सके।

तभी क्रिस्टी की निगाह मूर्ति के पीछे की ओर गई और उसने चिल्ला कर सुयश का ध्यान अपनी ओर कराया- “कैप्टेन, कुछ ढूंढने की जरुरत नहीं है, सूर्य का ग्लोब पीछे की ओर से आधा काला है, इसका साफ मतलब है कि हमें इसके सामने कुछ नहीं रखना, बल्कि इसे घुमाकर इसका पिछला हिस्सा आगे की ओर कर देना है।”

“यह काम मैं करता हूं।” यह कहकर ऐलेक्स तेजी से मूर्ति के ऊपर चढ़ने लगा।

कुछ ही देर में ऐलेक्स मूर्ति के ऊपर था, अब वह सूर्य के ग्लोब को घुमाने की कोशिश करने लगा, पर ऐलेक्स के पूरी ताकत लगा देने के बाद भी वह सूर्य का ग्लोब टस से मस नहीं हुआ।

यह देख ऐलेक्स ने ऊपर से चिल्ला कर कहा- “कैप्टेन यह ग्लोब घूम नहीं रहा है, आप नीचे से देखो, हो सकता है कि मूर्ति को घुमाया जा सके।”

ऐलेक्स की बात सुन सुयश नीचे से मूर्ति को घुमाने की कोशिश करने लगा, पर उस मूर्ति में भी घूमने का कोई ऑप्शन दिखाई नहीं दिया।

अब सच में सबके लिये चिंता की बात थी, क्यों कि अब मात्र 5 मिनट
का ही समय बचा था।

“कैप्टेन, मुझे लगता है कि अब हम इस द्वार को नहीं पार कर पायेंगे, क्यों कि अब हमारे पास सिर्फ और सिर्फ 5 मिनट ही बचा है।” जेनिथ ने निराश होने वाले अंदाज में कहा।

“हमें अंतिम दम तक हार नहीं माननी चाहिये। जिंदगी में कभी-कभी हम उस स्थान से हारकर वापस आ जाते हैं, जो समस्या के समाधान से बिल्कुल करीब होता है। इसलिये अपनी ओर से सभी लोग आखिरी सेकेण्ड तक कोशिश जारी रखो, बाकी सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दो।”

सुयश के शब्द बिल्कुल जादू से भरे थे। इन शब्दों ने सभी में एक बार फिर से जोश का संचार कर दिया था।

सुयश के शब्द सुन ऐलेक्स के कान में गूंजने लगे- “सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दो....यही कहा है कैप्टेन ने.... पर मेरे पास तो देवता हीलीयस के सिवा इस समय कोई नहीं है, चलो इन्हीं पर ध्यान लगाता हूं।” यह सोच ऐलेक्स हीलीयस की मूर्ति को ध्यान से देखने लगा, तभी ऐलेक्स को मूर्ति की गर्दन और सिर के बीच कुछ गैप दिखाई दिया।

कुछ सोच ऐलेक्स ने मूर्ति के सिर को घुमाने की कोशिश की। ऐलेक्स की जरा सी कोशिश से ही मूर्ति का सिर पीछे की ओर घूम गया।

और जैसे ही मूर्ति का सिर पीछे की ओर हुआ, मूर्ति का शरीर भी स्वतः पीछे की ओर घूम गया।

इसी के साथ सूर्य की ग्लोब का अंधेरे वाला हिस्सा आगे की ओर आ गया और उस पेड़ को सूर्य की रोशनी मिलनी बंद हो गई।

इसी के साथ उस पेड़ के पत्तों का रंग भी लाल हो गया। यह देख सब खुशी से चिल्लाये। पर सुयश की निगाह अब देवी कार्पो के हाथ में थमी सैंड वॉच पर थी।

उस सैंड वॉच में अब बहुत थोड़ी सी रेत ही बची थी। अब सुयश कभी मैपल के पेड़ के पत्तों को, तो कभी सैंड वॉच में बची सैंड को देख रहा था।

पेड़ के पत्ते अब पूरे लाल होकर झड़ना शुरु हो गये थे, पर रेत भी बिल्कुल समाप्ति की ओर आ पहुंची थी।

सभी की साँसें इस प्रकार रुकी थीं, मानों विश्व कप फुटबाल के फाइनल के मैच में दोनों टीमें बराबरी पर हों और आखि री 60 सेकेण्ड का टाइमर चल रहा हो।

पेड़ के सारे पत्ते झड़ गये, पर एक अखिरी पत्ता अभी भी डाल पर मौजूद था और सैंड वॉच में सिर्फ 5 सेकेण्ड की रेत ही बची थी......5....4.....3 तभी तौफीक के हाथ में चाकू नजर आया और वह बिजली की तेजी से उस आखिरी पत्ते की ओर झपटा -2..........1 पर आखिरी मिली सेकेण्ड में चाकू ने उस पत्ते को पेड़ से गिरा दिया और इसी के साथ वह द्वार भी पार हो गया।

इससे पहले कि सभी खुशी मना पाते कि रोशनी के एक तेज झमाके के साथ सभी वापस उस कमरे में आ गये, जहां पृथ्वी का ग्लोब रखा था।

तौफीक पर नजर पड़ते ही जेनिथ को छोड़, सभी दौड़कर तौफीक के गले लग गये।

तौफीक की निगाह दूर खड़ी जेनिथ की ओर थी, पर इस समय जेनिथ की आँख में भी, तौफीक के लिये तारीफ के भाव थे।

“अपने मन को इतना व्यथित मत करो जेनिथ।” नक्षत्रा ने कहा- “जो चला गया, उसे जाने दो....तुम्हारे भाग्य में शायद उससे भी बेहतर कुछ लिखा हो?”

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने स्वयं के भावों को एक बार फिर से कंट्रोल किया और बोली- “तुमको बड़ा पता है मेरे भाग्य के बारे में। ...एक तो वैसे ही यहां तिलिस्मा में तुम मुझसे कम बात करते हो और ऊपर से ज्ञान और दे रहे हो।”

“मैं क्या करुं जेनिथ, यहां एक कार्य अभी सही से खत्म भी नहीं होता कि दूसरा शुरु हो जाता है, बात करने का समय ही कहां मिल पा रहा? कैश्वर ने तो सबको रोबोट से भी बदतर बना दिया। अब वो देखो सभी फिर से अगले द्वार में जाने की तैयारी कर रहे हैं...जाओ अब तुम भी उनके पास...जब तक मैं कुछ नई खोज करता हूं।”

“तुम्हारे पास खोज करने के लिये लैब तो है ही नहीं, फिर तुम ये खोज करते कहां हो?” जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

“क्यों तुम्हारा दिमाग की प्रयोगशाला, किसी नक्षत्रशाला से कम है क्या? बस इसी में एक टेबल डालकर बैठा हूं। पर तुम चिंता मत करो, तुम्हारे दिमाग में होने वाले सारे प्रयोग पर बस तुम्हारा ही अधिकार होगा।” नक्षत्रा ने कहा।

“सिर्फ तुम्हारे प्रयोग पर ही नहीं तुम पर भी मेरा सारा अधिकार है, आखिर मैं ही तो सिखा रही हूं तुम्हें नयी -नयी चीजें।” जेनिथ ने कहा।

“अच्छा जी, कल तक तो दोस्त बता रही थी और आज अधिकार जताने लगी।” नक्षत्रा ने मजा लेते हुए कहा - “चलो माना तुम्हारा अधिकार स्वयं पर...पर देखता हूं कि जब कोई मुझे तुम से अलग करने आयेगा, तो उसका सामना कैसे करोगी?”

“कौन अलग करने आयेगा?...क्या तुम मुझसे कुछ छिपा रहे हो नक्षत्रा?” जेनिथ यह बात सुन थोड़ा परेशान दिखने लगी।

“नहीं...नहीं...मैं तो ऐसे ही मजाक कर रहा था। तुम कुछ अलग ही अर्थ निकालने लगी।” नक्षत्रा ने अपनी बात को संशोधित करते हुए कहा- “और जल्दी से उधर जाओ, देखो सारे लोग तैयार हैं, अगले द्वार में
जाने के लिये।”

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने सबकी ओर देखा, सच में ऐलेक्स लाल रंग का फ्लैग हाथ में लिये, इंडिया के स्थान पर लगाने के लिये तैयार खड़ा था।

जेनिथ तुरंत सबके पास पहुंच गई। उसे पास आता देख ऐलेक्स ने लाल रंग के फ्लैग को इंडिया वाले स्थान पर, पृथ्वी के ग्लोब में लगा दिया।

इस बार जमीन पर बने मानचित्र में इंडिया का मैप बड़ा होकर आ गया और उस पर खड़े होते ही सभी एक बार फिर उस मानचित्र में समा गये।


जारी रहेगा______✍️
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