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★☆★ Xforum | Ultimate Story Contest 2025 ~ Reviews Thread ★☆★

Lucifer

ReFiCuL
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Unfortunately We are facing a server issue which limits most users from posting long posts which is very necessary for USC entries as all of them are above 5-7K words ,we are fixing this issue as I post this but it'll take few days so keeping this in mind the last date of entry thread is increased once again,Entry thread will be closed on 7th May 11:59 PM. And you can still post reviews for best reader's award till 13th May 11:59 PM. Sorry for the inconvenience caused.

You can PM your story to any mod and they'll post it for you.

Note to writers :- Don't try to post long updates instead post it in 2 Or more posts. Thanks. Regards :- Luci
 
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motaalund

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vakharia - सीता फिर अग्नि में

दो युगों की दृश्य दर दृश्य तुलना...
वो भी मुख्य बिंदुओं पर...
जो कहानी का सार बनते हैं...
पात्र के काम भी वही...
लेकिन आज के भ्रष्ट आचरण को जायज ठहराने के लिए किसी भी हद तक चले जाना...
ये सत्ता का नशा है..

लेकिन रावण हार कर भी जीत जाता है...
और सीता जीत कर भी हार जाती है...
आखिर पति के संदेह ने जो अविश्वास जताया वो तो उस पर लांछन था...

पर वापस आकर भी अग्नि परीक्षा ने एक बार फिर से काल के गर्भ में समां दिया..

एक अलग लेकिन बहुत हीं सफल प्रयोग...
मेरी तरफ से इसे 9.5/10 रेटिंग.
 
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vakharia

Supreme
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vakharia - सीता फिर अग्नि में

दो युगों की दृश्य दर दृश्य तुलना...
वो भी मुख्य बिंदुओं पर...
जो कहानी का सार बनते हैं...
पात्र के काम भी वही...
लेकिन आज के भ्रष्ट आचरण को जायज ठहराने के लिए किसी भी हद तक चले जाना...
ये सत्ता का नशा है..

लेकिन रावण हार कर भी जीत जाता है...
और सीता जीत कर भी हार जाती है...
आखिर पति के संदेह ने जो अविश्वास जताया वो तो उस पर लांछन था...

पर वापस आकर भी अग्नि परीक्षा ने एक बार फिर से काल के गर्भ में समां दिया..

एक अलग लेकिन बहुत हीं सफल प्रयोग...
मेरी तरफ से इसे 9.5/10 रेटिंग.
आपका रिव्यू पढ़कर दिल सच में खुश हो गया। जिस गहराई से आपने "सीता फिर अग्नि में" को देखा, महसूस किया, और फिर शब्दों में पिरोया — उसके लिए दिल से शुक्रिया। 🙏

"रावण हार कर भी जीत जाता है और सीता जीत कर भी हार जाती है..." बस! यही तो इस कहानी का असली मर्म है, जो आपने इतनी खूबसूरती से पकड़ लिया।

आपने जो 9.5/10 की रेटिंग दी, वो मेरे लिए कोई नंबर नहीं है, वो भरोसा है, जो एक लेखक को आगे बढ़ने का हौसला देता है।

आप जैसे पाठक मिल जाएं तो लिखने का मजा ही कुछ और है।

बहुत-बहुत धन्यवाद... इसी तरह पढ़ते रहिए, साथ बने रहिए। 😊

– वखारिया ✍️
 

Avaran

एवरन
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Waqt Ke Us Paar
Writer - Daredevil420
Story genre - Romance with Thriller

Story summary -
यह कहानी कैप्टन अबीर राठौर और ज़हरा इनायत ख़ान की है। ज़हरा, जो पाकिस्तान के एक बड़े जासूस की बेटी है, अपने देश से भागकर भारत आ जाती है। बर्फ से ढके LOC के बीच अबीर और ज़हरा की मुलाक़ात होती है। धीरे-धीरे शक, विश्वास और प्यार के बीच उनकी कहानी आगे बढ़ती है। ज़हरा अपने पुराने अतीत से लड़ती है और अबीर के साथ मिलकर आतंकियों का एक बड़ा नेटवर्क खत्म करती है। आख़िर में, दोनों मिलकर एक नई ज़िंदगी की शुरुआत करते हैं।

Positive point
* Writing: बहुत सुंदर और भावनाओं से भरा हुआ। माहौल (ठंडी बर्फ, सन्नाटा, तनाव) को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। डायलॉग्स असली लगते हैं और कहानी में गहराई लाते हैं।

* Atmosphere Building: LOC, बर्फीली वादियां, सन्नाटा — सब बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है।हर सीन में ठंड, डर और ताजगी का एहसास आता है।

* Emotional Moments: ज़हरा का अपनी सच्चाई बताना और अबीर का भरोसा करना — बहुत असरदार तरीके से लिखा गया है। प्यार और देशभक्ति दोनों भावनाओं को संतुलित किया गया है।

* Action and Suspense Balance:
एक्शन सीन छोटे लेकिन बहुत impactful हैं।
हर मोड़ पर कहानी में हल्का सस्पेंस बना रहता है।

Negative Point
* Underdeveloped Antagonist :
Farooq को बहुत खतरनाक और चालाक दिखाया जाता है, लेकिन उसकी गहराई (background, सोच, वजूद) ज्यादा नहीं बताई गई ।उसके और Zahra के पुराने रिश्ते पर थोड़ा और ड्रामा डाला जा सकता था।

Rushed plot resolutions :
* जैसे गद्दार सिपाही का खुलासा बहुत अचानक हुआ। Farooq का end भी जल्दी हो गया, जब उसे और बड़ा खतरा दिखाया गया था।

* Short verdict:
एक दिल छूने वाली, खूबसूरत लिखी गई फौजी-रोमांटिक कहानी, जिसमें छोटे-मोटे कमज़ोर पहलुओं के बावजूद बहुत गहरा असर छोड़ती है।


Overall it's a good story.
Rating 6.5/10
 

Avaran

एवरन
9,416
19,171
174
MERI MALKIN KI KHILONA "
undefined
Writer - Hot_monica
Story genre - BDSM

Story summary:
Kahani Monica naam ki ek ladki ke college ke pehle din ke experiences ke baare mein hai, jahaan woh seniors dwara karaayi jaane waali ragging aur BDSM activities mein shaamil ho jaati hai. Woh Muskan naam ki ek senior ladki ke saath ek complex relationship develop karti hai aur college ke ek program mein participate karti hai jahaan BDSM activities dikhaayi jaati hain.


Positive point
* Character Development: Monica ka ek naive fresher se BDSM subculture mein deeply involved hone tak ka transformation kahani ka ek important part hai aur character development dikhaata hai.

* Detailed Descriptions: Author ne BDSM scenes aur characters ke physical interactions ke kaafi vivid aur detailed descriptions diye hain. Jo readers is genre mein interested hain, unke liye yeh ek positive aspect ho sakta hai.

* Pacing: Story ki raftaar kaafi tez hai, especially jab Monica college mein enter karti hai. Isse reader engage rehta hai, lekin kabhi-kabhi yeh rushed bhi lag sakta hai

Negative point
* Lack of Context/World-Building: Story BDSM elements mein jaldi se dive karti hai, college environment, is subculture ke rules, ya characters ke backgrounds ke baare mein zyada context provide kiye bina. Isse events kuch had tak isolated aur kam believable lag sakte hain.

Short verdict :
Kahani mein kuch interesting elements hain, lekin iska controversial content aur ethical issues ise problematic banate hain. Yeh sirf un logon ke liye hai jo yeh themes samajhte hain aur inke saath comfortable hain.

Overall it's a good story
Rating 5.5/10
 

Daredevil420

Member
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109
Writer - Daredevil420
Story genre - Romance with Thriller

Story summary -
यह कहानी कैप्टन अबीर राठौर और ज़हरा इनायत ख़ान की है। ज़हरा, जो पाकिस्तान के एक बड़े जासूस की बेटी है, अपने देश से भागकर भारत आ जाती है। बर्फ से ढके LOC के बीच अबीर और ज़हरा की मुलाक़ात होती है। धीरे-धीरे शक, विश्वास और प्यार के बीच उनकी कहानी आगे बढ़ती है। ज़हरा अपने पुराने अतीत से लड़ती है और अबीर के साथ मिलकर आतंकियों का एक बड़ा नेटवर्क खत्म करती है। आख़िर में, दोनों मिलकर एक नई ज़िंदगी की शुरुआत करते हैं।

Positive point
* Writing: बहुत सुंदर और भावनाओं से भरा हुआ। माहौल (ठंडी बर्फ, सन्नाटा, तनाव) को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। डायलॉग्स असली लगते हैं और कहानी में गहराई लाते हैं।

* Atmosphere Building: LOC, बर्फीली वादियां, सन्नाटा — सब बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है।हर सीन में ठंड, डर और ताजगी का एहसास आता है।

* Emotional Moments: ज़हरा का अपनी सच्चाई बताना और अबीर का भरोसा करना — बहुत असरदार तरीके से लिखा गया है। प्यार और देशभक्ति दोनों भावनाओं को संतुलित किया गया है।

* Action and Suspense Balance:
एक्शन सीन छोटे लेकिन बहुत impactful हैं।
हर मोड़ पर कहानी में हल्का सस्पेंस बना रहता है।

Negative Point
* Underdeveloped Antagonist :
Farooq को बहुत खतरनाक और चालाक दिखाया जाता है, लेकिन उसकी गहराई (background, सोच, वजूद) ज्यादा नहीं बताई गई ।उसके और Zahra के पुराने रिश्ते पर थोड़ा और ड्रामा डाला जा सकता था।

Rushed plot resolutions :
* जैसे गद्दार सिपाही का खुलासा बहुत अचानक हुआ। Farooq का end भी जल्दी हो गया, जब उसे और बड़ा खतरा दिखाया गया था।

* Short verdict:
एक दिल छूने वाली, खूबसूरत लिखी गई फौजी-रोमांटिक कहानी, जिसमें छोटे-मोटे कमज़ोर पहलुओं के बावजूद बहुत गहरा असर छोड़ती है।


Overall it's a good story.
Rating 6.5/10
Thanks yaar for your honest review! Achha laga ki aapko writing, emotions, aur LOC ka atmosphere pasand aaya. Abir-Zahra ka romance, unka emotional conflict, aur action scenes ka balance bhi aapne notice kiya — dhanyavaad!

Rating thoda kam kyun?
- Farooq ka character thoda *flat* laga? Shorts story me backgroundlikh nahi sakte aur aatankwadi ke koyi emotion hote nahi to character flat hi hoga.
- Climax jaldi khatam ho gaya?
8000 words ke under mere beheterin writingyahi hai.

Par phir bhi, aapko story *dil se pasand aayi* — yeh hi matter karta hai! **6.5/10** ka matlab hai *"Bohot sahi, lekin thoda aur polish kar sakte the!"*

Agar aapke paas koi suggestions hain ki "Agar yeh change ho jaata, toh rating badh jaati!" — batao zaroor! Filhaal, aapka feedback hi hume aur improve karne mein help karega.
 

vakharia

Supreme
6,105
21,490
174
कहानी समीक्षा: Ek Nayi Shuruaat
लेखक महोदय: RED Ashoka

Ek Nayi Shuruaat' कहानी की शुरुआत बढ़िया है.. शादी की पहली रात, प्यार भरा माहौल। लेकिन जैसे ही गोलियों की आवाज और बच्चा वाला ट्विस्ट आता है, कहानी थोड़ा गड़बड़ाने लगती है।

प्लॉट का आइडिया अच्छा है, लेकिन बीच में बहुत सारे सवाल खड़े हो जाते हैं.. गोलियां किसने चलाईं, बच्चा कहां से आया, अस्पताल में किसी ने नोट क्यों नहीं किया वगैरह। सबकुछ जल्दी-जल्दी निपटाया गया है, बिना ढंग से समझाए।

नेहा और आरव के किरदार प्यारे हैं, लेकिन जब हालात बिगड़ते हैं तो उनकी रिएक्शन थोड़ी सीधी-सपाट लगती है। इतनी बड़ी घटना पर थोड़ी और गहराई दिखती तो मजा आता। भाषा साफ-सुथरी और आसान है, पढ़ने में दिक्कत नहीं होती। लेकिन माहौल का जो तनाव होना चाहिए था, वो थोड़ा कम पड़ता है।

नेहा और आरव का रिश्ता कहानी की सबसे सशक्त शुरुआत है। दोनों के बीच का जुड़ाव सुंदर तरीके से दिखाया गया है। परन्तु जैसे ही कहानी गहरा मोड़ लेती है, उनके व्यवहार में वास्ताविकता की कमी महसूस होती है। नेहा का अचानक एक अनजान बच्चे को सहजता से अपनाना, बिना ज्यादा हिचकिचाहट के, थोड़ा सा अविश्वसनीय लगता है। आरव का प्रतिक्रिया भी काफी सतही है.. ऐसी संकटपूर्ण स्थिति में अधिक भय और अविश्वास दिखना चाहिए था। किरदारों के जज़्बात और सोच को थोड़ी और गहराई से दिखाने की ज़रूरत थी।

भाषा सीधी-सपाट और बहती हुई है, इसलिए कहानी पढ़ते वक़्त कोई अड़चन नहीं आती। संवाद भी काफ़ी सहज लगे, लेकिन कहीं-कहीं भाषा इतनी साधारण हो गई कि सीन में जो ड्रामा बनना चाहिए था, वो थोड़ा फीका पड़ गया। अस्पताल, गोली चलने और बच्चे वगैरह जैसी भारी भरकम चीज़ों के बीच जगह-जगह का माहौल या माहौल का ब्यौरा थोड़ा कम दिया गया है, जिससे सब कुछ आंखों के सामने आता नहीं।

कुल मिलाकर कहानी की शुरुआत अच्छी है और भावनाएं भी सही दिशा में हैं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसमें कुछ बातें अधूरी लगती हैं। कुछ सीन जल्दी खत्म कर दिए गए हैं और जरूरी बातें ठीक से समझाई नहीं गईं।

यह एक अच्छा प्रयास है, लेकिन और बेहतर बनाया जा सकता था।
 

RED Ashoka

Writer
745
1,000
124
कहानी समीक्षा: Ek Nayi Shuruaat
लेखक महोदय: RED Ashoka

Ek Nayi Shuruaat' कहानी की शुरुआत बढ़िया है.. शादी की पहली रात, प्यार भरा माहौल। लेकिन जैसे ही गोलियों की आवाज और बच्चा वाला ट्विस्ट आता है, कहानी थोड़ा गड़बड़ाने लगती है।

प्लॉट का आइडिया अच्छा है, लेकिन बीच में बहुत सारे सवाल खड़े हो जाते हैं.. गोलियां किसने चलाईं, बच्चा कहां से आया, अस्पताल में किसी ने नोट क्यों नहीं किया वगैरह। सबकुछ जल्दी-जल्दी निपटाया गया है, बिना ढंग से समझाए।

नेहा और आरव के किरदार प्यारे हैं, लेकिन जब हालात बिगड़ते हैं तो उनकी रिएक्शन थोड़ी सीधी-सपाट लगती है। इतनी बड़ी घटना पर थोड़ी और गहराई दिखती तो मजा आता। भाषा साफ-सुथरी और आसान है, पढ़ने में दिक्कत नहीं होती। लेकिन माहौल का जो तनाव होना चाहिए था, वो थोड़ा कम पड़ता है।

नेहा और आरव का रिश्ता कहानी की सबसे सशक्त शुरुआत है। दोनों के बीच का जुड़ाव सुंदर तरीके से दिखाया गया है। परन्तु जैसे ही कहानी गहरा मोड़ लेती है, उनके व्यवहार में वास्ताविकता की कमी महसूस होती है। नेहा का अचानक एक अनजान बच्चे को सहजता से अपनाना, बिना ज्यादा हिचकिचाहट के, थोड़ा सा अविश्वसनीय लगता है। आरव का प्रतिक्रिया भी काफी सतही है.. ऐसी संकटपूर्ण स्थिति में अधिक भय और अविश्वास दिखना चाहिए था। किरदारों के जज़्बात और सोच को थोड़ी और गहराई से दिखाने की ज़रूरत थी।

भाषा सीधी-सपाट और बहती हुई है, इसलिए कहानी पढ़ते वक़्त कोई अड़चन नहीं आती। संवाद भी काफ़ी सहज लगे, लेकिन कहीं-कहीं भाषा इतनी साधारण हो गई कि सीन में जो ड्रामा बनना चाहिए था, वो थोड़ा फीका पड़ गया। अस्पताल, गोली चलने और बच्चे वगैरह जैसी भारी भरकम चीज़ों के बीच जगह-जगह का माहौल या माहौल का ब्यौरा थोड़ा कम दिया गया है, जिससे सब कुछ आंखों के सामने आता नहीं।

कुल मिलाकर कहानी की शुरुआत अच्छी है और भावनाएं भी सही दिशा में हैं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसमें कुछ बातें अधूरी लगती हैं। कुछ सीन जल्दी खत्म कर दिए गए हैं और जरूरी बातें ठीक से समझाई नहीं गईं।

यह एक अच्छा प्रयास है, लेकिन और बेहतर बनाया जा सकता था।
Thanks you vakharia bhai , bhot bhot dhanywaad
Maine aapke review ko padha aur samjha
Wo kya hai ki is kahani ka plot(powered by Black )hi aisa tha to us hisab se hi isko rup diya gaya, hum kahani me kuch baat unsamjhi rahi ,jiska karan ek living suspense rakhna tha story me isliye
Well bhot bhot dhanywaad
 
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vakharia

Supreme
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21,490
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कहानी समीक्षा: जीवों का करुण क्रँदन
लेखिका महोदया: satrangi muniya

JKKK-SM2

यह कहानी बहुत ही नवीन और अलग तरह की रचना है। इसकी कल्पना थोड़ी असामान्य है, लेकिन वही इसे बेहद दिलचस्प बनाती है। पढ़ते-पढ़ते एक पल के लिए ऐसा लगता है मानो हम अपने बचपन के उन दिनों में लौट आए हैं, जब ऐसी मासूम मगर गहरी कहानियाँ किताबों में पढ़ते थे और उनकी दुनिया में खो जाया करते थे।

सतरंगी मुनिया जी ने इस कहानी में पंखों वाले जीवों और जंगल के वाशिंदों के माध्यम से एक ऐसी पुकार रच दी है, जो इंसानी सभ्यता के विकास की आड़ में हो रही तबाही का सजीव चित्र खींचती है। मोरनी सुनीता, तोती वीना, चतुरसेन बंदर, दुर्गम सिंह शेर... हर किरदार जैसे इस धरती के असली मालिकों का प्रतिनिधि बनकर सामने आता है।

कहानी का दर्द, संवादों की सहजता में रच-बसकर ऐसा बहता है कि कई बार रुक कर सांस लेनी पड़ती है। वीना की निरीह पुकार, दुर्गम सिंह का विवेक, चतुरसेन का सुझाव.. सब कुछ दिल को छू जाता है। ऐसा लगता नहीं कि कोई कथा पढ़ रहे हैं, बल्कि जैसे जंगल के बीच बैठकर खुद उनकी मीटिंग सुन रहे हैं। भाषा में सजीवता और भावनाओं का बहाव गजब है। बिना भाषण दिए, कहानी खुद सवाल उठा देती है.. ‘किसका हक़ ज़्यादा है इस धरती पर?’ बिना ओवरड्रामैटिक हुए, जानवरों को ऐसी मासूम सोच दी गई है कि पढ़ने वाला इंसान भी खुद को उनके बराबर खड़ा महसूस करे। सोशल मीडिया, कोर्ट स्टे, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं.. कहानी आधुनिक ज़माने से भी जुड़ी हुई है, जो इसे आज के पाठक के लिए प्रासंगिक बनाती है।

कुछ सुझाव:

कहीं-कहीं संवाद थोड़ा दोहराव लिए हुए हैं (जैसे मोरनी और तोती के बीच चिंता व्यक्त करने के तरीके)। थोड़ा कसाव होता तो कहानी और ज्यादा तीखी बन सकती थी। कुछ चरित्रों का और गहरा चित्रण हो सकता था.. जैसे भीम अजगर का संवाद एकबारगी हल्का-फुल्का बनकर रह गया, जबकि उसमें भी डर और व्यंग्य का एक गहरा स्तर लाया जा सकता था।

अंतिम निष्कर्ष:

"जीवों का करुण क्रंदन" कोई साधारण कहानी नहीं है। यह एक जिंदा दस्तावेज़ है उस मौन त्रासदी का, जो हम इंसान हर दिन करते हैं और फिर अनदेखा कर देते हैं। सतरंगी मुनिया ने अपने शब्दों से एक पूरा जंगल जिंदा कर दिया है... उनकी आवाज़ हमारे कानों में न सही पर हमारी आत्मा में जरूर गूंजती है।
 
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Aakash.

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"Galti Kiski, Doshi Kaun?" By Carry0

Yeh kahani Sumer ke jeevan ke ek tukde ko dikhati hai jo Kashi ke ganga ghat par apni sadhna aur seva mein laga rehta hai. Ek ghayal mor ke sath uski dosti aur uski anjane mein maut ki ghatna is kahani ka dil hai. Kahani sundar bhavnaon, prakriti ke saath judav aur ek nishkalank dil ke dard ko dikhati hai.

Positive Points:

▪︎ Bhavna aur Darshan: Kahani mein Sumer ka nishchhal prem aur seva ka jazba dil ko chhoo jata hai. Mor ke sath uski dosti aur uske dard ka varnan bahut sundar hai. Sadhu ke aakhri shabd ek gehri seekh dete hain ki zindagi mein kabhi-kabhi koi doshi nahi hota.

▪︎ Kashi ka Vatavaran: Ganga ke ghat, mandiron ki ghantiyan aur prakriti ka varnan itna jeevant hai ki padhne wala wahan pahunch jata hai.

▪︎ Patron ka Vikas: Sumer ka charitra bahut sundar dikhaya gaya hai garib par swabhimani, kathor jeevan mein bhi vidya aur seva se juda.

▪︎ Rhythm aur Bhasha: Kahani ka flow ekdum natural hai. Shuru se ant tak padhne wala bandha rehta hai. Hindi bhasha ka upyog saral par prabhavshali hai.

Negative Points:

▪︎ Kuch Ghatnaen Anumanit: Mor ki maut ka twist thoda predictable lag sakta hai kyunki kahani shuru se hi ek tragedy ki taraf ishara karti hai.

▪︎ Sadhu ka Aana: Sadhu ka achanak aakar seekh dena thoda filmi lagta hai agar unka charitra pehle se thoda dikhaya jata to yeh zyada natural lagta.

▪︎ Wartani (Spelling): Kahani mein wartani ki chhoti-moti galtiyan hain thodi aur editing se yeh sudhar sakta tha.

▪︎ Aur Gahrai: Sumer ke antardwand (inner conflict) ko aur thoda dikhaya ja sakta tha jaise uska dosh aur seekh ke beech ka sangharsh.

Ek Acchi Kahani ke Liye Kya Accha, Kya Bura:

▪︎ Accha: Ek acchi kahani dil ko chhuti hai sandesh deti hai aur padhne wale ko sochne par majboor karti hai is kahani mein yeh sab hai, Sumer ka prem, mor ke sath bandhan aur zindagi ki seekh. Prakriti aur sanskriti ka mishran iski khoobsurati badhata hai.

▪︎ Bura: Agar kahani predictable ho ya charitron ka vikas adhoora lage to asar kam hota hai is kahani mein thodi aur gahrai aur naye twists isse aur behtar bana sakte the.

Wartani aur Rhythm:

Wartani mein chhoti galtiyan hain lekin bhasha ka pravah itna sundar hai ki yeh badi samasya nahi lagti. Rhythm ekdum thik hai na zyada tez na dheema har hissa apne samay par dil ko chhuta hai, khaas kar Sumer aur mor ke beech ke pal.

Overall:

Dil ko chhoo lene wali kahani hai jo prem, seva aur zindagi ke anjane modon ki baat karti hai. Kashi ka sundar varnan aur Sumer ka charitra iski jaan hain thodi aur gahrai aur editing isse aur shandaar bana sakti thi lekin yeh ab bhi ek prabhavshali kahani hai jo padhne ke baad man mein baat chhod jati hai.

Is kahani mein koi bhi spasht roop se doshi nahi hai na mor, na saanp, na Sumer yeh ek dukhdayi ghatna hai jaisa ki sadhu ne kaha jo prakriti ke khel aur anjaane parinaamon ka hissa hai.
 
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