फागुन के दिन चार
भाग ५० रिपोर्ट पृष्ठ ४८८
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फागुन के दिन चार भाग २४
मस्ती गुड्डी की -मजे शॉपिंग के, पृष्ठ ३०६ अपडेट पोस्टेड
पढ़िए, मजे लीजिये और लाइक और कमेंट जरूर करिये
Thanks so much, pleasure is mine.Sexy update thanks for entertaining us
बहुत बहुत आभारकोमल मैम
शानदार अपडेट, और मेरे जैसे पूर्व पाठक तो निश्चित ही सांस रोक कर पढ़ रहे होंगे।
सादर
आप ने चार लाइनों में ही पूरी पोस्ट का चित्र खींच दिया, गुड्डी के अल्लड़पन और मस्ती का और आनंद बाबू की झिझक और हिचक का ।शाॅपिंग के बहाने गुड्डी का वही दिलकश अंदाज ! वही हंसी - परिहास ! वही दिल्लगीपन !
एक बार फिर से गुड्डी के इस अल्हड़पन चरित्र का बेहतरीन वर्णन किया आपने ।
इस शाॅपिंग के दौरान आनंद साहब की वही झिझक , शर्मिलापन दिखाई पड़ी जिसका ताना अक्सर गुड्डी देती रहती है ।
इसके बाद दोनो का एक साथ बुक स्टाल पर अश्लील किताबें खरीदना , फिर फुर्सत के क्षणों मे गुड्डी द्वारा आनंद साहब का इरोटिक मसाज करना , शावर के नीचे स्नान करना और अंत मे गुड्डी का आनंद साहब को लिप सर्विस देना ; हर जगह हर मौके पर बस गुड्डी ही गुड्डी का जलवा था ।
" भांग की पकौड़ी " यह बुक्स काफी साल पहले मैने पढ़ा था । दो फ्रैंड एक दिन पिकनिक स्पाट पर जाते हैं जहां उनकी मुलाकात दो खुबसूरत लड़कियों से होती हैं । इन सभी चारों के दरम्यान सेक्सुअल सम्बन्ध स्थापित होता है लेकिन ट्विस्ट यह है कि इन्ही मे एक लड़की उन एक लड़के की भाभी बन जाती है । यह कहानी काफी इरोटिक थी ।
अंतिम पैराग्राफ मे आपने उत्तर प्रदेश और बिहार के उन नुक्कड़ , उन चाय दुकान , उन महफिल का जिक्र किया जहां पर मर्द अक्सर राजनीतिक बातें करते रहते हैं । यह हंड्रेड पर्सेंट सच है । राजनीति पर ऐसी चर्चा शायद पुरे हिन्दुस्तान मे न होती हो जितना हमारे उत्तर प्रदेश और बिहार मे होता है ।
इरोटिका प्रसंग के साथ साथ रियलिस्टिक घटनाक्रम का वर्णन आप के लेखनी का उत्कृष्ट तत्व है ।
बहुत ही बेहतरीन अपडेट कोमल जी ।
हमेशा की तरह आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग अपडेट ।


