PRABHAT Goyal
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Bhai tumne apne side ki story share ki, dil se acchha laga but philhaal main apni life ke real characters ko tumhari story me involve nahi karna chahta, I am more than happy in my life lekin virtual platform par main tumhara dost ban sakta hoon, tum apne thoughts mujhse share kar sakte ho
मित्र , ये बस एक इत्तेफ़ाक है।
ये किरदार मेरी असल जिंदगी से भी प्रेरित हैं।
रज्जो का किरदार मेरी मां की एक सहेली का है जिनके पास यूके की सिटिजनशिप है वह अपने हसबैंड, बेटे, बहू और ननद(तलाकशुदा) के साथ लंदन में रहती हैं और रामू का किरदार मेरे पिताजी के एक मित्र का है जो गांव में हमारे पुश्तैनी घर और खेती–बाड़ी की देखभाल करते हैं वह अपनी पत्नी, बेटी और साले(इसकी बीवी अपने प्रेमी के साथ फरार है) के साथ गांव में रहते है।
मेरे पिताजी के जाने के बाद हमारे हर छोटे–बड़े सुख–दुख में इन दोनों परिवारों का योगदान रहा है।
मेरे कोई भी फैमिली रिलेटिव्स नहीं है इसलिए इन्हें मैं अपने परिवार का हिस्सा मानता हूं।
वैसे असल जिंदगी में मेरा कोई दोस्त भी नहीं है, लेकिन कहानी के प्वाइंट ऑफ व्यू से मुझे एक दोस्त की जरूरत है, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे और तुम्हारी मां को अपनी कहानी में लिमिटेड रोल दे सकता हूं मैं तुम्हे पर्सनल मैसेज करके प्लॉट बता दूंगा, तुम्हे बस हां या ना बोलना है।
Gazab updateअध्याय ५
रामू के जाते ही लीला ने दरवाजा जोर से बंद कर दिया।
चिटकनी चढ़ाते समय उसके हाथ काँप रहे थे, उसके घुटने पूरी तरह ढीले पड़ गए थे। लीला दीवार का सहारा लेकर धीरे-धीरे फर्श पर बैठ गई।
उसका पूरा बदन पसीने से तर था, साड़ी उसकी त्वचा से पूरी तरह चिपक गई थी, उसके स्तन हर सांस के साथ तेजी से ऊपर-नीचे हो रहे थे मानो कोई उन्हें जोर-जोर से दबा रहा हो। ब्लाउज के अंदर निप्पल इतने सख्त और उभरे हुए थे कि कपड़े में चुभ रहे थे।
सबसे ज्यादा यातना उसकी चूत में थी।
पेटीकोट और साड़ी के बीच उसकी जांघें पूरी तरह भीग चुकी थीं। गर्म, चिपचिपा, पारदर्शी रस लगातार टपक रहा था, चूत की फूली हुई लिप्स सूज गई थीं और हर सांस के साथ अंदर की दीवारें सिकुड़-फैल रही थीं। जांघें आपस में कस–कसकर रगड़ रही थीं।
लीला ने दोनों हाथों से अपना चेहरा पकड़ लिया, रामू की आवाज बार-बार उसके कानों में गूँज रही थी। रामू की शरारती मुस्कान, उसकी भारी आवाज, सब कुछ एक साथ उसे याद आ रहा था।
“हाय रे...” लीला ने काँपते हुए बुदबुदाया।
“रामू मेरा देवर है... और मैं... उसकी बातें सुनकर इतनी गीली हो गई हूँ कि बैठे-बैठे मेरा पानी बह रहा है। पाँच साल से मुझे किसी मर्द ने छुआ तक नहीं और आज रामू के शब्दों ने मुझे इस हालत में पहुँचा दिया।”
लीला की आंखों में आँसू भर आए “लल्लू... कोमल... मेरे बच्चे हैं, मैं उनकी माँ हूँ, अगर किसी को कुछ पता चल गया तो... मैं विधवा हूँ... इज्जतदार औरत हूँ... मैं ऐसी औरत नहीं बन सकती...”
लीला ने एक हाथ से अपना स्तन दबाया। ब्लाउज के ऊपर से ही उंगलियाँ निप्पल को मसलने लगीं और दूसरे हाथ ने धीरे-धीरे अपनी जांघों के बीच का रास्ता पकड़ा। साड़ी के ऊपर से ही उंगलियाँ चूत पर दब गईं। पहले हल्का-हल्का फिर थोड़ा जोर से दबाव डालने लगी।
“आह...” एक हल्की–सी कराहट उसके मुंह से निकल गई।
अब उसकी उंगलियां तेजी से घूमने लगीं। चूत से और रस निकल रहा था, साड़ी का कपड़ा भीग रहा था। जांघें कस-कसकर रगड़ रही थीं, वह फर्श पर बैठे-बैठे ही कमर हल्की-हल्की हिला रही थी। लीला की सांसें और तेज हो गईं, अब उंगलियां और जोर से दबा रही थीं, उसकी आँखें बंद थीं और होंठ काँप रहे थे
लेकिन अचानक पता नहीं उसे क्या हुआ “नहीं... ये बहुत गलत है!” उसने तुरंत अपना हाथ हटा लिया लेकिन बदन अभी भी तरस रहा था। लीला ने सिर पीछे दीवार से टिका दिया और आँखें बंद करके तेज-तेज सांस लेने लगी।
“मैं पागल हो गई हूँ... रामू मेरा देवर है... मैं कैसे... अपने देवर के बारे में ऐसा सोच सकती हूँ?” आँसू उसकी आँखों से बहने लगे। वह दोनों घुटनों को छाती से लगाकर बैठ गई और सिर घुटनों पर रख दिया।
“भगवान... मुझे माफ कर दो। मैं कमजोर हो गई हूँ...” फिर भी चूत अभी भी फड़क रही थी, प्यास मिटने का नाम नहीं ले रही थी।
लीला काँपती हुई, शर्म और इच्छा के बीच फँसी हुई, फर्श पर बैठी रही।
उसके मन में दो तूफान साथ-साथ चल रहे थे एक तरफ शर्म, अपराधबोध, माँ होने का कर्तव्य और समाज का डर और दूसरी तरफ पाँच साल से दबी हुई, भूखी, तरसती हुई जवानी जो अब चीख-चीखकर कह रही थी कि उसे तृप्त कर दे।
लीला फर्श पर बैठे-बैठे ही रो रही थी, लेकिन उसके बदन में आग अभी भी धधक रही थी।
काफी देर तक लीला फर्श पर बैठी रही, चूत का गीलापन साड़ी और पेटीकोट में सूख गया था। शाम हो चुकी थी, सूरज ढल चुका था। गांव में धीरे-धीरे अंधेरा छा रहा था।
लीला ने रसोई में चूल्हा जलाया, चावल चढ़ाया, दाल में तड़का लगाया, फिर रोटियाँ सेंकने लगी, उसे रह–रहकर रामू की बातें याद आ रही थीं, उसने पानी का लोटा उठाया, पानी पीने के बाद उसको थोड़ी–सी राहत मिली लेकिन उसकी चूत फिर से हल्की-हल्की गीली होने लगी थी।
उसने मन ही मन कहा “अकेले में तो मैं पागल हो जाऊंगी।”
तभी बाहर से आवाज आई।
“माँ...!”
कोमल अपनी सहेली के घर से लौट आई थी, उसके हाथ में सिलाई का थैला था। कोमल ने अंदर आते ही कहा, “माँ, आज मुझे बहुत देर हो गई, तुमने खाना बना लिया क्या?”
लीला ने खुद को संभाला और बोली, “हाँ बेटी, बना लिया है, हाथ-मुंह धो ले, खा ले। लल्लू अभी तक खेत से नहीं लौटा?”
कोमल ने सिर हिलाया और और रसोई में आकर बैठ गई, लीला ने उसे रोटी , चावल और दाल परोस दी।
कोमल खाना खाते हुए बोली, “माँ, आज सिलाई क्लास में नई डिजाइन सीखी, तुम्हारे लिए भी एक ब्लाउज की डिजाइन लाई हूँ।”
लीला ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसका ध्यान कहीं और था।
कोमल खाते-खाते बोली, “माँ, तुम आज कुछ उदास लग रही हो। सब ठीक तो है ना?”
लीला ने जल्दी से जवाब दिया, “हाँ बेटी, सब ठीक है, बस थोड़ी–सी थकान हो रही है।”
खाना खाने के बाद कोमल बर्तन धोने लगी, लीला बाहर चाकी पर बैठ गई। रात के अंधेरे में तारे चमक रहे थे, हवा हल्की–हल्की चल रही थी।
तभी लल्लू खेत से लौटा, उसका बदन पसीने से तर था। लल्लू ने लीला को देखकर कहा, “माँ, खाना लगा दो, बहुत तेज भूख लगी है।”
लीला ने उसे खाना परोस दिया लेकिन कुछ बोली नहीं, लल्लू भी चुपचाप खाना खाने लगा।
खाना खाने के लल्लू अपने कमरे में चला गया और कोमल भी रसोई का काम निपटाकर अपने कमरे में चली गई।
लीला ने आंगन की सफाई करते हुए फैसला किया “रज्जो जीजी के पास चली जाती हूँ, उनसे बात करके शायद मन हल्का हो जाए।”
उसने एक पुराना घड़ा उठाया जो पिछले दिन उसने रज्जो से लिया था, साड़ी का पल्लू ठीक किया और घर से निकल पड़ी। रात के अंधेरे में गांव की गलियाँ सुनसान थीं, लीला तेज कदमों से रज्जो के घर की तरफ बढ़ रही थी।
आखिरकार वह रज्जो के घर पहुंच गई।
रज्जो आंगन में बैठकर सब्जी काट रही थी और जैसे ही उसकी नजर लीला पर पड़ी तो उसके होंठों पर मुस्कान तैर गई।
"अरे लीला! आ अंदर आ जा।" रज्जो बोली
"जीजी, यह घड़ा कल लिया था तुमसे, सोचा लौटा दूं" लीला धीमी आवाज में बोली
रज्जो ने लीला को ध्यान से देखा और बोली "बहाना अच्छा बना लेती है तेरा चेहरा देखकर लग रहा है कि तेरे मन में कुछ और चल रहा है।"
रज्जो लीला को अंदर वाले कमरे में ले आई, कमरे में तेल का दीपक जल रहा था। रज्जो ने दरवाजा बंद कर दिया और लीला को अपने बिस्तर पर बिठाकर खुद उसके पास बैठ गई।
“बहन!” रज्जो ने लीला का हाथ पकड़ते हुए कहा, “क्या बात है? तेरा चेहरा देखकर लग रहा है कि आज मौसम खराब है लग रहा है कि कोई तूफान गुजरा है।”
लीला ने कुछ पल चुप रहकर धीरे-धीरे बोली, “जीजी... मेरा देवर रामू आज सुबह आया था।”
रज्जो की आँखों में चमक आ गई, वह लीला के और करीब सरक आई और बोली, “अच्छा! फिर क्या हुआ? बता ना।”
लीला ने शर्माते हुए नजरें झुकाईं, रामू के शरारती और डबल मीनिंग बातें रज्जो को बताने लगी।
रज्जो जोर से हँस पड़ी, उसने लीला के कंधे पर हाथ रखकर कहा, “वाह! रामू तो आज खूब जोश में था।”
लीला ने शर्म से सिर झुकाया और बोली, “जीजी, मुझे बहुत शर्म आ रही है, मुझे ऐसी बातें नहीं सुननी चाहिए थी लेकिन... मैं उसकी बातें सुनकर अंदर से बहुत गर्म हो गई थी, मैं खुद को रोक नहीं पा रही थी।”
रज्जो ने लीला को गले लगा लिया और बोली, "इतनी शर्म क्यों कर रही है? पाँच साल हो गए तेरे पति को गए हुए। तू अभी भी जवान है, इसमें गलत क्या है? तू औरत है, तेरी भूख है, प्यास है, इसे नकारने से क्या फायदा?”
लीला ने रज्जो की छाती पर सिर रख दिया और धीरे से बोली, “जीजी, मैं बहुत परेशान हूँ। एक तरफ मेरे बच्चे हैं और समाज है तो दूसरी तरफ मेरी शारीरिक जरूरतें है, कभी-कभी तो लगता है कि बस अब और नहीं सहा जाएगा"
रज्जो ने लीला के बालों में उँगलियाँ फिराईं और दृढ़ स्वर में कहा, “देख लीला, तू मेरी छोटी बहन है, मैं तुझे समझती हूँ लेकिन अगर तू भी अंदर से तैयार है तो उसे मौका दे दे, डर मत।”
लीला ने हैरानी से सिर उठाया और बोली, “जीजी... मैं उसे कैसे... रामू मेरा देवर है?”
रज्जो ने मुस्कुराते हुए लीला के गाल पर हाथ फेरा और बोली, “तो क्या हुआ? वो मर्द है और तू भी औरत है, अगर दोनों की इच्छा है तो बीच में समाज को मत ला वरना जिंदगी भर मिट्टी की मूर्ति बनकर रह जाएगी।”
लीला कुछ नहीं बोली, उसकी सांसें तेज चल रही थीं, उसके अंदर शर्म, डर, इच्छा और उत्तेजना एक साथ उबाल मार रहे थे।
लीला चुपचाप रज्जो की गोद में सिर रखकर बैठी रही।
थैंक्स फॉर योर फीडबैक, मैं तुम्हारे सुझाव को ध्यान में रखूंगा।Bhai tumne apne side ki story share ki, dil se acchha laga but philhaal main apni life ke real characters ko tumhari story me involve nahi karna chahta, I am more than happy in my life lekin virtual platform par main tumhara dost ban sakta hoon, tum apne thoughts mujhse share kar sakte ho
Waise ek idea hai, agar tumhe ek maa-bete ki jodi chahiye toh dirty_thoughts ki story "maalti ka kamuk sansaar" se maalti aur monu ki maa-bete ki jodi ko apni story me add kar sakte ho
मित्र, मैंने सब कहानी के पहले पोस्ट में ही मेंशन कर दिया था, बाकी कुछ रीडर्स के कमेंट्स के रिप्लाई में भी बताया है, आपके कमेंट के लिए धन्यवाद।पिछले 3 दिनों से मैं इस कहानी पर पूर्ण रूप से एक विश्लेषण लिखकर पोस्ट करने का प्रयास कर रहा हूं लेकिन ऑफिस के काम ने इतना उलझा दिया है की समय ही नहीं मिल पा रहा है, फिलहाल इतना ही कह सकता हूं कि इस कहानी के संवाद दो अर्थी होकर भी इतने मदमस्त है की तन बदन में आग लगा दे, लेकिन जैसा की nigga भाई ने कहा है कि इस कहानी पर उस तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है जैसी उन्हें उम्मीद थी शायद इसका एक कारण ये भी है की ज्यादातर लोग इस कहानी में मां बेटे की अपेक्षा के साथ ही पढ़ने आते होंगे लेकिन लीला की औरों के साथ रासलीला पढ़कर निराश हो जाते होंगे !
आपकी बात सही है लेकिन पाठकों का adultery से ज्यादा झुकाव incest की ओर है खासकर मां बेटे के उत्तेजक रिश्तों के बीच तो और ज्यादा, ये मैं अपने इतने वर्षों के मंच के अनुभव के आधार पर कह रहा हूं और उस पर आप जैसे उत्कृष्ठ लेखक मिल जाए, जिसकी कहानी के संवाद मदमस्त करने के लिए काफी हो, तो पाठकों के लिए वो सोने पर सुहागा जैसा पल हो जाता है, वैसे मेरा मानना है कि आपने जितने अपडेट्स इस कहानी को लेकर प्लान किए थे उस पर कायम रहे, उससे समझौता करने पर कहानी वैसी अदभुत नहीं रहेगी!मित्र, मैंने सब कहानी के पहले पोस्ट में ही मेंशन कर दिया था, बाकी कुछ रीडर्स के कमेंट्स के रिप्लाई में भी बताया है, आपके कमेंट के लिए धन्यवाद।
जब भी आपके पास फ्री टाइम हो आप आराम से रिव्यू लिखिएगा,
वैसे गलती भी मेरी है मुझे इतनी जल्दी रीडर्स से उम्मीद नहीं रखनी चाहिए
मैंने पहले भी बताया था और अब भी बता रहा हूं कि इस कहानी की मुख्य नायिका लीला है और बाकी अन्य किरदार सहायक भूमिका में हैं।
