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Incest leela ki rasleela (incest + adultery)

nigga

Member
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Hello doston, main ek nayi story shuru kar raha hoon. Ye story incest aur adultery theme par based hai toh chudai ki bilkul kami nahi hogi, dheere–dheere pariwar ke andar aur bahar ke rishte khulenge, threesome, foursome, group sex, gangbang aur orgy sab padhne ke liye milega aur sab kuch natural tareeke se aage badhega.

Readers ke likes, comments aur feedback se hi story aage badhegi toh padhne ke baad apne reviews dijiyega. Hope aap sabhi ko is kahani ko padhkar bahut maza aayega.
 
Last edited:

motalund4554

Love married pussies...❤️🥵
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अध्याय १

सूरज ढल चुका था, खेतों के किनारे लीला का छोटा–सा मकान था। लीला, तैंतालीस साल की भरे हुए कामुक बदन वाली औरत थी, वह रसोई का काम निपटा चुकी थी, उसके भारी-भरकम बदन पर हल्की पसीने की परत चमक रही थी, साड़ी का आंचल कमर में खोंसा हुआ था, वह थाली में बचा हुआ खाना लेकर जानवरों को खिलाने के लिए पीछे वाले बाड़े की ओर चली गई।


बाड़े के पास पहुंचते ही उसकी नजर एक बड़े से सांड पर पड़ी, काला और मजबूत शरीर वाला वह सांड लीला की ओर देख रहा था। लीला का दिल धड़क उठा, वह थोड़ा–सा पीछे हट गई। “अरे बाप रे!” उसके मुंह से निकला, लेकिन तभी उसका ध्यान अपनी पीठ की ओर गया, जहां एक मोटी गाय खड़ी थी जो शांति से घास चर रही थी। लीला तुरंत समझ गई कि वह सांड उस गाय को देख रहा था, न की उसे और उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।

तभी सांड ने जोरदार हुंकार भरी और तेजी से दौड़ते हुए गाय की ओर बढ़ा, गाय ने हल्का सा प्रतिरोध दिखाया पर सांड ने उसे तुरन्त अपने वश में कर लिया और फिर वह सांड पीछे से उस गाय के ऊपर चढ़ गया, उसका लंबा, मोटा लिंग गाय की योनि में घुसते ही लीला थाली को रखकर दो–चार कदम पीछे हट गई, उसकी आंखें उस दृश्य से हट ही नहीं पा रही थीं, सांड के तेज-तेज धक्के, गाय की हल्की–हल्की सिसकियां, सब कुछ देखते हुए लीला के अंदर एक अजीब-सी गर्मी फैलने लगी, कुछ देर तक खड़े–खड़े ही वह उन्हें चुदाई करते हुए देखती रही। सांड का लिंग बार-बार गाय के अंदर-बाहर हो रहा था, वह इतना मोटा और लंबा था कि लीला की सांसें भारी हो गईं।

“काश... मेरे नसीब में भी ऐसा एक लन्ड होता...” लीला ने मन ही मन अपनी किस्मत को कोसा।

करीब ९ महीने हो चुके थे, पच्चीसवीं वर्षगांठ के दिन ही उसके पति विनोद की मौत हो गई। विनोद बेहद पियक्कड़ और नशेबाज किस्म का आदमी था, उस दिन वह ठेके पर शराब पीने गया था और फिर अगले दिन वह तालाब में मरा पड़ा था।

लीला के दो बच्चे थे। बेटी कोमल, चौबीस साल की, जो अपनी मां के साथ घर के काम संभालती थी, उसकी शादी की उम्र हो चुकी थी और बेटा अर्जुन, इक्कीस साल का, खेतों का काम संभालता था।

कुछ देर बाद, जब सांड और गाय का काम पूरा हो गया तो लीला ने थाली उठाई और घर के अंदर चली गई, उसकी चाल में एक अजीब-सी बेचैनी थी, वह सीधे रसोई में गई, फ्रिज खोला और उसमें से एक लंबा, मोटा बैंगन निकाला। बैंगन देखते ही उसके मुंह में पानी आ गया और वह जल्दी से अपने कमरे में चली गई।

कमरे का दरवाजा बंद करते ही लीला ने अपनी साड़ी एक झटके में उतार फेंकी और बिस्तर पर चली गई, उसने ब्लाउज के हुक खोले और अपने बड़े–बड़े चुचों को बाहर निकाल लिया, फिर अपने ब्राउन निप्पल्स उंगलियों से मरोड़ने लगी, वह जोर-जोर से निचोड़ रही थी। “आह... कोई है जो इन्हें दबाए...” वह बुदबुदाई।

फिर उसने पेटीकोट ऊपर उठा लिया, उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी, वह बैंगन को अपनी चूत पर रगड़ने लगी। ठंडा, मोटा बैंगन उसकी गर्म, भीगी योनि पर रगड़ खा रहा था। “आह्ह्ह... कितना लंबा, मोटा लन्ड है...” वह गंदी-गंदी गालियां देने लगी “कोई है जो मुझे रण्डी बनाकर चोद सके..."


(m ldpwiqacxt E Ai)(mh m0Z85Kf XAWAl Ezxk)37385131b

लीला को बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने बैंगन को अपनी चूत में घुसा लिया “आह्ह्ह!” लीला ने आंखें बंद कर लीं और बैंगन को तेजी से अंदर–बाहर करना शुरू कर दिया। “आह्ह्ह और जोर से चोदो... फाड़ डालो मेरी चूत...” उसके चुचे उछल रहे थे और उसका बदन पसीने से तर हो गया था।


अब लीला का बदन अकड़ने लगा और उसकी चूत ने बैंगन को कसकर जकड़ लिया “आआह्ह्ह... हाय रे...!” और एक जोरदार झटके के साथ लीला का बदन ढीला पड़ गया। वह बैंगन को चूत में ही छोड़कर भूल गई और फिर थोड़ी देर बाद वह थकान और संतुष्टि से सो गई।
Nice start
 

tera hero

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अध्याय १

सूरज ढल चुका था, खेतों के किनारे लीला का छोटा–सा मकान था। लीला, तैंतालीस साल की भरे हुए कामुक बदन वाली औरत थी, वह रसोई का काम निपटा चुकी थी, उसके भारी-भरकम बदन पर हल्की पसीने की परत चमक रही थी, साड़ी का आंचल कमर में खोंसा हुआ था, वह थाली में बचा हुआ खाना लेकर जानवरों को खिलाने के लिए पीछे वाले बाड़े की ओर चली गई।


बाड़े के पास पहुंचते ही उसकी नजर एक बड़े से सांड पर पड़ी, काला और मजबूत शरीर वाला वह सांड लीला की ओर देख रहा था। लीला का दिल धड़क उठा, वह थोड़ा–सा पीछे हट गई। “अरे बाप रे!” उसके मुंह से निकला, लेकिन तभी उसका ध्यान अपनी पीठ की ओर गया, जहां एक मोटी गाय खड़ी थी जो शांति से घास चर रही थी। लीला तुरंत समझ गई कि वह सांड उस गाय को देख रहा था, न की उसे और उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।

तभी सांड ने जोरदार हुंकार भरी और तेजी से दौड़ते हुए गाय की ओर बढ़ा, गाय ने हल्का सा प्रतिरोध दिखाया पर सांड ने उसे तुरन्त अपने वश में कर लिया और फिर वह सांड पीछे से उस गाय के ऊपर चढ़ गया, उसका लंबा, मोटा लिंग गाय की योनि में घुसते ही लीला थाली को रखकर दो–चार कदम पीछे हट गई, उसकी आंखें उस दृश्य से हट ही नहीं पा रही थीं, सांड के तेज-तेज धक्के, गाय की हल्की–हल्की सिसकियां, सब कुछ देखते हुए लीला के अंदर एक अजीब-सी गर्मी फैलने लगी, कुछ देर तक खड़े–खड़े ही वह उन्हें चुदाई करते हुए देखती रही। सांड का लिंग बार-बार गाय के अंदर-बाहर हो रहा था, वह इतना मोटा और लंबा था कि लीला की सांसें भारी हो गईं।

“काश... मेरे नसीब में भी ऐसा एक लन्ड होता...” लीला ने मन ही मन अपनी किस्मत को कोसा।

करीब ९ महीने हो चुके थे, पच्चीसवीं वर्षगांठ के दिन ही उसके पति विनोद की मौत हो गई। विनोद बेहद पियक्कड़ और नशेबाज किस्म का आदमी था, उस दिन वह ठेके पर शराब पीने गया था और फिर अगले दिन वह तालाब में मरा पड़ा था।

लीला के दो बच्चे थे। बेटी कोमल, चौबीस साल की, जो अपनी मां के साथ घर के काम संभालती थी, उसकी शादी की उम्र हो चुकी थी और बेटा अर्जुन, इक्कीस साल का, खेतों का काम संभालता था।

कुछ देर बाद, जब सांड और गाय का काम पूरा हो गया तो लीला ने थाली उठाई और घर के अंदर चली गई, उसकी चाल में एक अजीब-सी बेचैनी थी, वह सीधे रसोई में गई, फ्रिज खोला और उसमें से एक लंबा, मोटा बैंगन निकाला। बैंगन देखते ही उसके मुंह में पानी आ गया और वह जल्दी से अपने कमरे में चली गई।

कमरे का दरवाजा बंद करते ही लीला ने अपनी साड़ी एक झटके में उतार फेंकी और बिस्तर पर चली गई, उसने ब्लाउज के हुक खोले और अपने बड़े–बड़े चुचों को बाहर निकाल लिया, फिर अपने ब्राउन निप्पल्स उंगलियों से मरोड़ने लगी, वह जोर-जोर से निचोड़ रही थी। “आह... कोई है जो इन्हें दबाए...” वह बुदबुदाई।

फिर उसने पेटीकोट ऊपर उठा लिया, उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी, वह बैंगन को अपनी चूत पर रगड़ने लगी। ठंडा, मोटा बैंगन उसकी गर्म, भीगी योनि पर रगड़ खा रहा था। “आह्ह्ह... कितना लंबा, मोटा लन्ड है...” वह गंदी-गंदी गालियां देने लगी “कोई है जो मुझे रण्डी बनाकर चोद सके..."


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लीला को बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने बैंगन को अपनी चूत में घुसा लिया “आह्ह्ह!” लीला ने आंखें बंद कर लीं और बैंगन को तेजी से अंदर–बाहर करना शुरू कर दिया। “आह्ह्ह और जोर से चोदो... फाड़ डालो मेरी चूत...” उसके चुचे उछल रहे थे और उसका बदन पसीने से तर हो गया था।


अब लीला का बदन अकड़ने लगा और उसकी चूत ने बैंगन को कसकर जकड़ लिया “आआह्ह्ह... हाय रे...!” और एक जोरदार झटके के साथ लीला का बदन ढीला पड़ गया। वह बैंगन को चूत में ही छोड़कर भूल गई और फिर थोड़ी देर बाद वह थकान और संतुष्टि से सो गई।
Nice update daily dena
 
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