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Shayari jaanvi ki - kavita shayari

jaanvi sen

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Baatein bhi kya baatein hain,
jab woh na bole, wo bhi kya baatein hain.

Samjhu main bin bole baatein ko,
Poochhe duniya kaise?

samajhna hota hai un aankhon ko.

Jawab Mein likhun Main.
 

jaanvi sen

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उसकी गलियों में जाना छोड़ी नहीं,
ये एक आदत सी है।

दिल तो उसके इश्क़ में बर्बाद हुआ,
फिर भी हर राह उसी तरफ मुड़ जाती है।

आसान नहीं, ये जानती हूँ मैं,
पर उसकी याद से दिल को सुकून मिल जाती है।

हज़ारों ख़्वाहिशें उसकी ख़ुशी की क़ुर्बान की हैं,
फिर भी उसके दर पे आँखें बिछाए खड़ी हूँ मैं।

ऐ ख़ुदा, ये जो दर्द छुपा है सीने में,
इसे ही तो लोग मोहब्बत का नाम देते हैं।

वो समझे न समझे, क्या फ़र्क़ पड़ता है,

ये इश्क़ तो वही है जो हर सितम को भी क़बूल कर लेता है।
 

jaanvi sen

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Ishq ne mujhe yeh sikhaya,
Ke chhoti si baat mein bhi khushi mil jaati hai.
Jaise baarish ke baad mitti ki khushboo,

Tere haath chhoone se dil bhar aata hai.
 
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hornystuff

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दिल पागल पन कर रहा है,
तुम्हारी याद में विचरण कर रहा है।

फूल पर बैठी है तितली,
एक भंवरा भ्रमण कर रहा है।

दिल काला बताया था उसने,
दिल को अब दर्पण कर रहा है।

जब से मिली है वो मुझसे
मुख उसका वर्णन कर रहा है।

ugtasuraj25
 
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jaanvi sen

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Ishq mein mujhe jaise
shayad hi koi jale hai,
Khuda bhi taras gaya

ab tak usse milaane mein.
 
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jaanvi sen

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वो छोटा सा पेड़ था मेरे सीने में,
उसको अपनी छाँव से मैंने सींचा था।
आज उसकी डाल पे मेरे ही फूल खिलते हैं,
और खुशबू मेरी ही साँसों से आती है।

कभी रात को जब बारिश की बूंदें,
मेरे खिड़की पे आ के रुक जाती हैं।
तो लगता है वोही पुरानी उंगलियाँ,
मेरे गालों पे फिर से गुज़र रही हैं।

रिश्ता हमारा जो भी हो सामने,
लेकिन जब वो मुस्कुराता है।
अंदर की ममता मार जाती है,
अपने ही आँचल में खुद को छुपा लेती है।

कंधे पे सिर रख देती हूँ उसके,
तो दिल को सब समझ आता है।
कोई ममता नहीं ये अब,

कोई अपने महबूब के सीने में लौट आई है।
 

Silent lover

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Ni
वो छोटा सा पेड़ था मेरे सीने में,
उसको अपनी छाँव से मैंने सींचा था।
आज उसकी डाल पे मेरे ही फूल खिलते हैं,
और खुशबू मेरी ही साँसों से आती है।

कभी रात को जब बारिश की बूंदें,
मेरे खिड़की पे आ के रुक जाती हैं।
तो लगता है वोही पुरानी उंगलियाँ,
मेरे गालों पे फिर से गुज़र रही हैं।

रिश्ता हमारा जो भी हो सामने,
लेकिन जब वो मुस्कुराता है।
अंदर की ममता मार जाती है,
अपने ही आँचल में खुद को छुपा लेती है।

कंधे पे सिर रख देती हूँ उसके,
तो दिल को सब समझ आता है।
कोई ममता नहीं ये अब,

कोई अपने महबूब के सीने में लौट आई है।
तुम आये तो आये मुझे याद, गली में आज चाँद निकला 👍
 
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