तुम आये तो आये मुझे याद, गली में आज चाँद निकलावो छोटा सा पेड़ था मेरे सीने में,
उसको अपनी छाँव से मैंने सींचा था।
आज उसकी डाल पे मेरे ही फूल खिलते हैं,
और खुशबू मेरी ही साँसों से आती है।
कभी रात को जब बारिश की बूंदें,
मेरे खिड़की पे आ के रुक जाती हैं।
तो लगता है वोही पुरानी उंगलियाँ,
मेरे गालों पे फिर से गुज़र रही हैं।
रिश्ता हमारा जो भी हो सामने,
लेकिन जब वो मुस्कुराता है।
अंदर की ममता मार जाती है,
अपने ही आँचल में खुद को छुपा लेती है।
कंधे पे सिर रख देती हूँ उसके,
तो दिल को सब समझ आता है।
कोई ममता नहीं ये अब,
कोई अपने महबूब के सीने में लौट आई है।