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Romance In Love.. With You... (Completed)

Adirshi

Royal कारभार 👑
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शब्दों के घाव बहुत गहरे होते है जिन्हे भरना आसान नहीं होता लेकिन कम जरूर हो सकते है। राघव अब जरूर अच्छा महसूस कर रहा होगा, बढ़िया भाग है
Thank you for the review :thanx:
 

Adirshi

Royal कारभार 👑
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Update 61




निखिल से बात करके उसकी बात सुनके अब राघव को थोड़ा हल्का महसूस हो रहा था, जब वो निखिल से मिल के बाहर आया तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी, एक सेन्स ऑफ रीलीफ था मानो उसके कंधे से कोई बहुत बाद बोझ हट गया हो, वो अपने अतीत की यादों को भूल तो नहीं सकता था लेकिन अब वो इतना तो समझ गया था के अब उनके नीचे दब कर उन्हीं बातों मे उलझने का कोई मतलब नहीं था, उसे आगे बढ़ना था और यही एक रास्ता था उसे अपने आज और आने वाले भविष्य को गले लगाना था।

राघव का दिमाग अब एकदम शांत था क्लियर था, उसने अपने आप को जिन शब्दों के बोझ तले दबा रखा था अब वो सब छट गया था और अब वो अपने दिल मे बगैर कोई मलाल लिए अपनी आगे की जिंदगी जी सकता था और उसकी के खुशी उसे बस नेहा की वजह से मिली थी, अगर वो आज उसे सच का सामना करने मजबूर ना करती तो शायद राघव कभी निखिल से ऐसे बात ही नहीं करता, अब वो अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पे जी सकता था किसी के शब्दों तले दब कर नहीं या किसी गिल्ट मे नहीं

उसने देखा के नेहा उसकी मा के साथ यानि जानकी जी के साथ बात कर रही थी तो वो एक स्माइल लिए उनके पास चला गया

जानकी- नेहा...... तुम यहां क्या कर रहे हो?

जानकी जी नेहा से कुछ बात कर रही थी तभी उन्होंने राघव को वहा मुस्कुराते हुए आते देखा तो पूछा और ये सुन नेहा ने भी पलट कर देखा

राघव- क्यू? अब क्या मैं मेरी मा के पास भी नहीं आ सकता

जानकी- बेटा जी शादी के बाद आपको याद भी है के आपने बैठ कर अपनी मां से कुछ बात की हो, बीवी जो आ गई है

जानकी जी ने सार्केस्टिकली कहा जिसपर नेहा को लगा राघव कुछ बोलेगा बट राघव कुछ नहीं बोला क्युकी जानकी जी ने बात एकदम सच बोली थी

राघव- ऐसा नहीं है मा, आप तो जानती है मैं बिजी था

जानकी- हा हा सब पता है मुझे कहा और कितने बिजी थे

जानकी जी ने नेहा को देखते हुए कहा

राघव- अरे ऐसा नहीं है... खैर मेरा पूरा वीकेंड आपका पक्का बट प्लीज भी के लिए थोड़ी प्राइवसी मिलेगी?

राघव धीमे से अपनी मा के कान मे बोला और उनसे रीक्वेस्ट की

जानकी- हे भगवान नेहा ये तुमने क्या कर दिया है मेरे बेटे को? अपनी सगी मा से प्राइवसी मांग रहा है!!

और यहां राघव ने अपना माथा पीट लिया

राघव- मा यार!! जाने दो मैं ही जाता हु

जानकी- इतना ड्रामा करने की जरूरत नहीं है जा रही हु मैं

और जानकी जी हसते हुए वहा से चली गई

राघव- ये मा भी ना

नेहा- आपने बात की?

जिसपर राघव ने मुसकुराते हुए हा मे गर्दन हिला दी

राघव- हम्म! अब सब क्लियर है और बहुत अच्छा लग रहा है। थैंक यू

राघव ने नेहा का हाथ पकड़ के उसे पास खिचते हुए कहा

नेहा- क्या कर रहे है सब है यहां

नेहा ने इधर उधर देखते हुए राघव से कहा और अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ाने लगी

राघव- तुम्हें नहीं लगता तुम्हें एक गिफ्ट मिलना चाहिए?

राघव ने नेहा की आँखों मे देखते हुए कहा और नेहा उसका मतलब समझ कर शर्मा दी

राघव- मेरे पास.....

लेकिन राघव की बात पूरी होती उससे पहले ही रिद्धि और विवेक वहा टपक पड़े और राघव को नेहा से दूर हटना पड़ा

राघव- लगता है एक हनीमून पैकेज बुक करना ही पड़ेगा

राघव मुह ही मुह मे पुटपुटाया, वो जब भी नेहा के पास जाता कोई न कोई टपक ही पड़ता था

रिद्धि- मून? भाई क्या बोल रहे हो?

रिद्धि ने पूछा और राघव ने उसकी तरफ देखा तो पाया के सब उसे ही देख रहे थे

राघव- कुछ न ही वो चंद्रयान क्या बढ़िया सक्सेसफुल रहा न बस वही

विवेक- भाई आपने कुछ भांग वगैर ली है क्या??

लेकिन इससे आगे कोई कुछ बोलता नेहा बोल पड़ी

नेहा- अब बाते बंद करो और चलो विसर्जन का टाइम हो गया है

और नेहा के बोलते ही रिद्धि और विवेक टॉपिक भूल के उस ओर चले गए और राघव की जान छूटी तभी नेहा की नजर पीछे से आती हुई श्वेता पर पड़ी,

नेहा- श्वेता क्या हुआ है?? इतनी लाल क्यू हो रखी हो? और तुम्हारी लिप्स्टिक भी खराब हो रखी है?

नेहा ने उसे कन्फ़्युशन मे देखा

श्वेता- हूह... कुछ कुछ नहीं भाभी वो गर्मी कुछ ज्यादा है ना तो... शायद इसीलिए पसीने से...

श्वेता ने इधर उधर देखते हुए कहा और जब नेहा कन्फ़्युशन मे श्वेता को देख रही थी उसकी नजर शेखर पर पड़ी और शेखर को देख नेहा के चेहरे पर स्माइल आ गई

नेहा- मुझे नहीं पता था पसीना पोंछने मे शेखर तुम्हारी मदद कर रहा था

नेहा ने श्वेता के कान मे कहा और श्वेता ने चौक के उसे देखा

श्वेता- भा....

नेहा- पहले थोड़े मजे तो ले लू

इतना बोल के नेहा शेखर के पास आई जो राघव के बाजू मे खड़ा था

नेहा- शेखर...

नेहा ने गाने वाली टोन मे कहा जिसने राघव का भी ध्यान उस ओर खिचा

शेखर- हा भाभी

शेखर ने कैजुअली बोतल से पानी पिते हुए कहा

नेहा- तुम कौनसा लिप्स्टिक का शेड यूज करते हो?

नेहा अब शेखर की फिरकी लेने के मूड मे थी वही नेहा की बात सुन शेखर के गले मे पनि अटक गया और उसे ठसका लगा

नेहा- अरे आराम से !

नेहा ने शेखर की पिठ सहलायी

शेखर- भाभी!!

शेखर ने घबरा के नेहा को देखा

नेहा- नहीं तुमने लिप्स्टिक लगाई हुई है ना तो बस इसीलिए...

नेहा ने अपनी हसी कंट्रोल करते हुए कहा

शेखर- क्या??

नेहा- तुम श्वेता की पसीना पोंछने मे मदद कर रहे थे??

और इसपे शेखर से कुछ नहीं बोला गया वो अपना मुह छुपाते हुए वहा से भाग लिया और इधर उसे जाता देख नेहा की हसी छूट गई और तभी राघव ने उसकी कमर पर चिमटी काटी

नेहा- आउच!!

नेहा ने उस हिस्से को सहलाया और राघव को झूठे गुस्से के साथ घूरा

राघव- डॉन्ट वरी मैं भी ऐसे ही तुम्हारी मदद करूंगा

राघव ने नेहा के कान मे कहा और अब नेहा की सारी हसी गायब, वो राघव की ओर देख भी नहीं थी थी भले दोनों आजू बाजू खड़े थे विसर्जन का समय हो गया था।

दादू के हाथों बप्पा की पूजा और आरती के बाद ढोल ताशे की आवाज मे देशपांडे वाडे मे बने हुए उस टँक मे ही बप्पा की मूर्ति का विसर्जन किया गया, बप्पा जाते जाते अपने साथ आज राघव की सारी समस्या लेकर गए थे और अब जो बचा था वो बस प्यार था....

क्रमश:
 

Abhi32

Well-Known Member
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Update 61




निखिल से बात करके उसकी बात सुनके अब राघव को थोड़ा हल्का महसूस हो रहा था, जब वो निखिल से मिल के बाहर आया तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी, एक सेन्स ऑफ रीलीफ था मानो उसके कंधे से कोई बहुत बाद बोझ हट गया हो, वो अपने अतीत की यादों को भूल तो नहीं सकता था लेकिन अब वो इतना तो समझ गया था के अब उनके नीचे दब कर उन्हीं बातों मे उलझने का कोई मतलब नहीं था, उसे आगे बढ़ना था और यही एक रास्ता था उसे अपने आज और आने वाले भविष्य को गले लगाना था।

राघव का दिमाग अब एकदम शांत था क्लियर था, उसने अपने आप को जिन शब्दों के बोझ तले दबा रखा था अब वो सब छट गया था और अब वो अपने दिल मे बगैर कोई मलाल लिए अपनी आगे की जिंदगी जी सकता था और उसकी के खुशी उसे बस नेहा की वजह से मिली थी, अगर वो आज उसे सच का सामना करने मजबूर ना करती तो शायद राघव कभी निखिल से ऐसे बात ही नहीं करता, अब वो अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पे जी सकता था किसी के शब्दों तले दब कर नहीं या किसी गिल्ट मे नहीं

उसने देखा के नेहा उसकी मा के साथ यानि जानकी जी के साथ बात कर रही थी तो वो एक स्माइल लिए उनके पास चला गया

जानकी- नेहा...... तुम यहां क्या कर रहे हो?

जानकी जी नेहा से कुछ बात कर रही थी तभी उन्होंने राघव को वहा मुस्कुराते हुए आते देखा तो पूछा और ये सुन नेहा ने भी पलट कर देखा

राघव- क्यू? अब क्या मैं मेरी मा के पास भी नहीं आ सकता

जानकी- बेटा जी शादी के बाद आपको याद भी है के आपने बैठ कर अपनी मां से कुछ बात की हो, बीवी जो आ गई है

जानकी जी ने सार्केस्टिकली कहा जिसपर नेहा को लगा राघव कुछ बोलेगा बट राघव कुछ नहीं बोला क्युकी जानकी जी ने बात एकदम सच बोली थी

राघव- ऐसा नहीं है मा, आप तो जानती है मैं बिजी था

जानकी- हा हा सब पता है मुझे कहा और कितने बिजी थे

जानकी जी ने नेहा को देखते हुए कहा

राघव- अरे ऐसा नहीं है... खैर मेरा पूरा वीकेंड आपका पक्का बट प्लीज भी के लिए थोड़ी प्राइवसी मिलेगी?

राघव धीमे से अपनी मा के कान मे बोला और उनसे रीक्वेस्ट की

जानकी- हे भगवान नेहा ये तुमने क्या कर दिया है मेरे बेटे को? अपनी सगी मा से प्राइवसी मांग रहा है!!

और यहां राघव ने अपना माथा पीट लिया

राघव- मा यार!! जाने दो मैं ही जाता हु

जानकी- इतना ड्रामा करने की जरूरत नहीं है जा रही हु मैं

और जानकी जी हसते हुए वहा से चली गई

राघव- ये मा भी ना

नेहा- आपने बात की?

जिसपर राघव ने मुसकुराते हुए हा मे गर्दन हिला दी

राघव- हम्म! अब सब क्लियर है और बहुत अच्छा लग रहा है। थैंक यू

राघव ने नेहा का हाथ पकड़ के उसे पास खिचते हुए कहा

नेहा- क्या कर रहे है सब है यहां

नेहा ने इधर उधर देखते हुए राघव से कहा और अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ाने लगी

राघव- तुम्हें नहीं लगता तुम्हें एक गिफ्ट मिलना चाहिए?

राघव ने नेहा की आँखों मे देखते हुए कहा और नेहा उसका मतलब समझ कर शर्मा दी

राघव- मेरे पास.....

लेकिन राघव की बात पूरी होती उससे पहले ही रिद्धि और विवेक वहा टपक पड़े और राघव को नेहा से दूर हटना पड़ा

राघव- लगता है एक हनीमून पैकेज बुक करना ही पड़ेगा

राघव मुह ही मुह मे पुटपुटाया, वो जब भी नेहा के पास जाता कोई न कोई टपक ही पड़ता था

रिद्धि- मून? भाई क्या बोल रहे हो?

रिद्धि ने पूछा और राघव ने उसकी तरफ देखा तो पाया के सब उसे ही देख रहे थे

राघव- कुछ न ही वो चंद्रयान क्या बढ़िया सक्सेसफुल रहा न बस वही

विवेक- भाई आपने कुछ भांग वगैर ली है क्या??

लेकिन इससे आगे कोई कुछ बोलता नेहा बोल पड़ी

नेहा- अब बाते बंद करो और चलो विसर्जन का टाइम हो गया है

और नेहा के बोलते ही रिद्धि और विवेक टॉपिक भूल के उस ओर चले गए और राघव की जान छूटी तभी नेहा की नजर पीछे से आती हुई श्वेता पर पड़ी,

नेहा- श्वेता क्या हुआ है?? इतनी लाल क्यू हो रखी हो? और तुम्हारी लिप्स्टिक भी खराब हो रखी है?

नेहा ने उसे कन्फ़्युशन मे देखा

श्वेता- हूह... कुछ कुछ नहीं भाभी वो गर्मी कुछ ज्यादा है ना तो... शायद इसीलिए पसीने से...

श्वेता ने इधर उधर देखते हुए कहा और जब नेहा कन्फ़्युशन मे श्वेता को देख रही थी उसकी नजर शेखर पर पड़ी और शेखर को देख नेहा के चेहरे पर स्माइल आ गई

नेहा- मुझे नहीं पता था पसीना पोंछने मे शेखर तुम्हारी मदद कर रहा था

नेहा ने श्वेता के कान मे कहा और श्वेता ने चौक के उसे देखा

श्वेता- भा....

नेहा- पहले थोड़े मजे तो ले लू

इतना बोल के नेहा शेखर के पास आई जो राघव के बाजू मे खड़ा था

नेहा- शेखर...

नेहा ने गाने वाली टोन मे कहा जिसने राघव का भी ध्यान उस ओर खिचा

शेखर- हा भाभी

शेखर ने कैजुअली बोतल से पानी पिते हुए कहा

नेहा- तुम कौनसा लिप्स्टिक का शेड यूज करते हो?

नेहा अब शेखर की फिरकी लेने के मूड मे थी वही नेहा की बात सुन शेखर के गले मे पनि अटक गया और उसे ठसका लगा

नेहा- अरे आराम से !

नेहा ने शेखर की पिठ सहलायी

शेखर- भाभी!!

शेखर ने घबरा के नेहा को देखा

नेहा- नहीं तुमने लिप्स्टिक लगाई हुई है ना तो बस इसीलिए...

नेहा ने अपनी हसी कंट्रोल करते हुए कहा

शेखर- क्या??

नेहा- तुम श्वेता की पसीना पोंछने मे मदद कर रहे थे??

और इसपे शेखर से कुछ नहीं बोला गया वो अपना मुह छुपाते हुए वहा से भाग लिया और इधर उसे जाता देख नेहा की हसी छूट गई और तभी राघव ने उसकी कमर पर चिमटी काटी

नेहा- आउच!!

नेहा ने उस हिस्से को सहलाया और राघव को झूठे गुस्से के साथ घूरा

राघव- डॉन्ट वरी मैं भी ऐसे ही तुम्हारी मदद करूंगा

राघव ने नेहा के कान मे कहा और अब नेहा की सारी हसी गायब, वो राघव की ओर देख भी नहीं थी थी भले दोनों आजू बाजू खड़े थे विसर्जन का समय हो गया था।

दादू के हाथों बप्पा की पूजा और आरती के बाद ढोल ताशे की आवाज मे देशपांडे वाडे मे बने हुए उस टँक मे ही बप्पा की मूर्ति का विसर्जन किया गया, बप्पा जाते जाते अपने साथ आज राघव की सारी समस्या लेकर गए थे और अब जो बचा था वो बस प्यार था....

क्रमश:
Thanks for such a lovely update
 

Yasasvi3

😈Devil queen 👑
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144
Update 61




निखिल से बात करके उसकी बात सुनके अब राघव को थोड़ा हल्का महसूस हो रहा था, जब वो निखिल से मिल के बाहर आया तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी, एक सेन्स ऑफ रीलीफ था मानो उसके कंधे से कोई बहुत बाद बोझ हट गया हो, वो अपने अतीत की यादों को भूल तो नहीं सकता था लेकिन अब वो इतना तो समझ गया था के अब उनके नीचे दब कर उन्हीं बातों मे उलझने का कोई मतलब नहीं था, उसे आगे बढ़ना था और यही एक रास्ता था उसे अपने आज और आने वाले भविष्य को गले लगाना था।

राघव का दिमाग अब एकदम शांत था क्लियर था, उसने अपने आप को जिन शब्दों के बोझ तले दबा रखा था अब वो सब छट गया था और अब वो अपने दिल मे बगैर कोई मलाल लिए अपनी आगे की जिंदगी जी सकता था और उसकी के खुशी उसे बस नेहा की वजह से मिली थी, अगर वो आज उसे सच का सामना करने मजबूर ना करती तो शायद राघव कभी निखिल से ऐसे बात ही नहीं करता, अब वो अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पे जी सकता था किसी के शब्दों तले दब कर नहीं या किसी गिल्ट मे नहीं

उसने देखा के नेहा उसकी मा के साथ यानि जानकी जी के साथ बात कर रही थी तो वो एक स्माइल लिए उनके पास चला गया

जानकी- नेहा...... तुम यहां क्या कर रहे हो?

जानकी जी नेहा से कुछ बात कर रही थी तभी उन्होंने राघव को वहा मुस्कुराते हुए आते देखा तो पूछा और ये सुन नेहा ने भी पलट कर देखा

राघव- क्यू? अब क्या मैं मेरी मा के पास भी नहीं आ सकता

जानकी- बेटा जी शादी के बाद आपको याद भी है के आपने बैठ कर अपनी मां से कुछ बात की हो, बीवी जो आ गई है

जानकी जी ने सार्केस्टिकली कहा जिसपर नेहा को लगा राघव कुछ बोलेगा बट राघव कुछ नहीं बोला क्युकी जानकी जी ने बात एकदम सच बोली थी

राघव- ऐसा नहीं है मा, आप तो जानती है मैं बिजी था

जानकी- हा हा सब पता है मुझे कहा और कितने बिजी थे

जानकी जी ने नेहा को देखते हुए कहा

राघव- अरे ऐसा नहीं है... खैर मेरा पूरा वीकेंड आपका पक्का बट प्लीज भी के लिए थोड़ी प्राइवसी मिलेगी?

राघव धीमे से अपनी मा के कान मे बोला और उनसे रीक्वेस्ट की

जानकी- हे भगवान नेहा ये तुमने क्या कर दिया है मेरे बेटे को? अपनी सगी मा से प्राइवसी मांग रहा है!!

और यहां राघव ने अपना माथा पीट लिया

राघव- मा यार!! जाने दो मैं ही जाता हु

जानकी- इतना ड्रामा करने की जरूरत नहीं है जा रही हु मैं

और जानकी जी हसते हुए वहा से चली गई

राघव- ये मा भी ना

नेहा- आपने बात की?

जिसपर राघव ने मुसकुराते हुए हा मे गर्दन हिला दी

राघव- हम्म! अब सब क्लियर है और बहुत अच्छा लग रहा है। थैंक यू

राघव ने नेहा का हाथ पकड़ के उसे पास खिचते हुए कहा

नेहा- क्या कर रहे है सब है यहां

नेहा ने इधर उधर देखते हुए राघव से कहा और अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ाने लगी

राघव- तुम्हें नहीं लगता तुम्हें एक गिफ्ट मिलना चाहिए?

राघव ने नेहा की आँखों मे देखते हुए कहा और नेहा उसका मतलब समझ कर शर्मा दी

राघव- मेरे पास.....

लेकिन राघव की बात पूरी होती उससे पहले ही रिद्धि और विवेक वहा टपक पड़े और राघव को नेहा से दूर हटना पड़ा

राघव- लगता है एक हनीमून पैकेज बुक करना ही पड़ेगा

राघव मुह ही मुह मे पुटपुटाया, वो जब भी नेहा के पास जाता कोई न कोई टपक ही पड़ता था

रिद्धि- मून? भाई क्या बोल रहे हो?

रिद्धि ने पूछा और राघव ने उसकी तरफ देखा तो पाया के सब उसे ही देख रहे थे

राघव- कुछ न ही वो चंद्रयान क्या बढ़िया सक्सेसफुल रहा न बस वही

विवेक- भाई आपने कुछ भांग वगैर ली है क्या??

लेकिन इससे आगे कोई कुछ बोलता नेहा बोल पड़ी

नेहा- अब बाते बंद करो और चलो विसर्जन का टाइम हो गया है

और नेहा के बोलते ही रिद्धि और विवेक टॉपिक भूल के उस ओर चले गए और राघव की जान छूटी तभी नेहा की नजर पीछे से आती हुई श्वेता पर पड़ी,

नेहा- श्वेता क्या हुआ है?? इतनी लाल क्यू हो रखी हो? और तुम्हारी लिप्स्टिक भी खराब हो रखी है?

नेहा ने उसे कन्फ़्युशन मे देखा

श्वेता- हूह... कुछ कुछ नहीं भाभी वो गर्मी कुछ ज्यादा है ना तो... शायद इसीलिए पसीने से...

श्वेता ने इधर उधर देखते हुए कहा और जब नेहा कन्फ़्युशन मे श्वेता को देख रही थी उसकी नजर शेखर पर पड़ी और शेखर को देख नेहा के चेहरे पर स्माइल आ गई

नेहा- मुझे नहीं पता था पसीना पोंछने मे शेखर तुम्हारी मदद कर रहा था

नेहा ने श्वेता के कान मे कहा और श्वेता ने चौक के उसे देखा

श्वेता- भा....

नेहा- पहले थोड़े मजे तो ले लू

इतना बोल के नेहा शेखर के पास आई जो राघव के बाजू मे खड़ा था

नेहा- शेखर...

नेहा ने गाने वाली टोन मे कहा जिसने राघव का भी ध्यान उस ओर खिचा

शेखर- हा भाभी

शेखर ने कैजुअली बोतल से पानी पिते हुए कहा

नेहा- तुम कौनसा लिप्स्टिक का शेड यूज करते हो?

नेहा अब शेखर की फिरकी लेने के मूड मे थी वही नेहा की बात सुन शेखर के गले मे पनि अटक गया और उसे ठसका लगा

नेहा- अरे आराम से !

नेहा ने शेखर की पिठ सहलायी

शेखर- भाभी!!

शेखर ने घबरा के नेहा को देखा

नेहा- नहीं तुमने लिप्स्टिक लगाई हुई है ना तो बस इसीलिए...

नेहा ने अपनी हसी कंट्रोल करते हुए कहा

शेखर- क्या??

नेहा- तुम श्वेता की पसीना पोंछने मे मदद कर रहे थे??

और इसपे शेखर से कुछ नहीं बोला गया वो अपना मुह छुपाते हुए वहा से भाग लिया और इधर उसे जाता देख नेहा की हसी छूट गई और तभी राघव ने उसकी कमर पर चिमटी काटी

नेहा- आउच!!

नेहा ने उस हिस्से को सहलाया और राघव को झूठे गुस्से के साथ घूरा

राघव- डॉन्ट वरी मैं भी ऐसे ही तुम्हारी मदद करूंगा

राघव ने नेहा के कान मे कहा और अब नेहा की सारी हसी गायब, वो राघव की ओर देख भी नहीं थी थी भले दोनों आजू बाजू खड़े थे विसर्जन का समय हो गया था।

दादू के हाथों बप्पा की पूजा और आरती के बाद ढोल ताशे की आवाज मे देशपांडे वाडे मे बने हुए उस टँक मे ही बप्पा की मूर्ति का विसर्जन किया गया, बप्पा जाते जाते अपने साथ आज राघव की सारी समस्या लेकर गए थे और अब जो बचा था वो बस प्यार था....

क्रमश:
Bhot hi pyara update...😍
 
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