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Romance Ek Duje ke Vaaste..

Adirshi

Royal कारभार 👑
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Update 14



अक्षिता जब अगले दिन नींद से जागी तो सर दर्द के साथ ही, उसका सर भारी था और वो अपनी आंखे मलते हुए पलंग पर उठ बैठी थी,

अक्षिता ने अपनी आंखे खोल कर इधर उधर देखा तो अपने आप को अपने रूम मे ना पाकर वो थोड़ा चौकी और फिर जब उसकी नजर कमरे के दरवाजे पर गई तो उसने देखा के स्वरा दरवाजे पर खादी हाथ बांधे उसे देख रही थी और इस वक्त स्वरा काफी सीरीअस लग रही थी

“स्वरा, मैं तुम्हारे कमरे मे क्यू हु?” अक्षिता ने सर पर हाथ रखते हुए पूछा लेकिन स्वरा कुछ नहीं बोली

“स्वरा बता ना, और तुम ऐसे मुझे घूर क्यू रही हो?” अक्षिता ने वापिस पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं आया

“स्वरा”

“तुम्हें होश भी है क्या कर रही हो क्या चाहती हो?” स्वरा ने सीरीअसली कहा वही अक्षिता थोड़ा कन्फ्यूज़ थी

“कुछ याद है कल क्या हुआ? तुमने क्या किया? तुम जानती हो ना तुम्हें ऐसी चीजों से दूर रहना है वरना सही नहीं होगा” स्वरा ने थोड़ा गुस्से मे कहा

“अरे पर मैंने किया क्या है” अक्षिता ने पूछा

“तुम कल रात शराब के नशे मे धुत थी पूरी”

“क्या!!!” अक्षिता थोड़ा चौकी

“हा।“

“लेकिन मैंने तो कल ऐसा कुछ नहीं पिया” अक्षिता ने याद करते हुए कहा

“ओके टी अब मुझे ये बताओ के कल इतना क्या पी लिया था के अपन नशे मे है इसका भी तुमको ध्यान नहीं है”

“मैंने बस थोड़ा कोल्डड्रिंक और पानी पिया था और कुछ नहीं” अक्षिता ने कहा, “ओह शीट, वो शायद कुछ और ही था,” अक्षिता ने याद करते हुए कहा, वो सब याद करने की कोशिश कर रही थी

“वो जो भी हो अक्षु तुम जानती हो न ये तुम्हारे किए कितना खतरनाक हो सकता है, तुम्हें कुछ भी हो सकता था” स्वरा ने धीमे से कहा

“सॉरी यार पर मैंने जान बुझ कर नहीं किया है कुछ”

“जाने दो जो हुआ, अब तुम आराम करो, मैंने आंटी को बता ददिया है तुम यहा हो और मैं अब ऑफिस के लिए निकल रही हु” स्वरा ने कहा

“ओह शीट! ऑफिस के बारे मे तो मैं भूल ही गई थी” अक्षिता ने पलंग से उतरते हुए कहा

“अरे आराम से आज वैसे भी छुट्टी है तुम्हारी सो डोन्ट वरी” स्वरा ने अपना हैन्ड्बैग लेते हुए कहा

“छुट्टी?”

“एकांश की मेहरबानी है तुमपे, उसने की दी है”

“क्यू?”

“क्युकी अक्षु डिअर हमारा बॉस जानता था के तुमको हैंगओवर होने वाला है बस इसीलिए”

“लेकिन उसको कैसे पता चला के मैंने पी रखी थी?”

“उसे कैसे पता नहीं चलता वही तो तुम्हें यहा छोड़ कर गया है,” स्वरा ने कहा

“क्या??”

“तुम्हें सही मे कुछ याद नहीं क्या?” स्वरा ने हसते हुए कहा

“बस इतना बता मैंने कुछ उलटी सीधी हरकत तो नहीं की ना?”

“अक्षु बेबी आज छुट्टी है ना तो दिमाग पे जोर दलों सब याद आ जाएगा मुझे लेट मत कराओ” स्वरा ने जाते हुए कहा

“हा हा ठीक है, वैसे ही जो भी किया होगा तुम्हारे और रोहन के सामने ही किया होगा” अक्षिता ने वापिस दिमाग पे जोर डाला

“ना, वहा सब से खास कर अपने बॉस और उसका दोस्त” स्वरा मे मुसकुराते हुए कहा और अक्षिता ने अपने सर पे हाथ मार लिया

“मैंने क्या किया?”

“कुछ नहीं शाम हो बताऊँगी अभी लेट हो जाएगा मुझे”

“अच्छा इतना तो बता दे जब रोहन हमारे साथ था तो एकांश ने मुझे यहा क्यू छोड़ा? अक्षिता ने याद करते हुए कहा क्युकी वो और स्वरा रोहन के साथ उसकी कार मे गए थे

अब स्वरा रुकी

“रोहन तो हमे छोड़ देता लेकिन तुम एकांश को छोड़ ही नहीं रही थी, उसे अपने से दूर ही नहीं जाने दे रही थी एकदम चिपकी हुई थी उससे, वैसे अक्षु एक बात बता तू एकांश सर को अंश कहकर क्यू बुला रही थी?”

स्वरा का सवाल सुन कर अक्षिता थोड़ा चौकी, उसे ध्यान मे आ गया था के उससे नशे मे गलती तो हुई है,

“अब लेट नहीं हो रहा था तुझे?”

“अरे वो देखा जाएगा तुम पहले ये बताओ तुम एकांश को अंश कह कर क्यू बुला रही थी लग रहा था तुम जानती हो उसे”

“ऐसा कुछ नहीं है मैं.... मैं नशे मे थी ना तो बस अब जाओ तुम” अक्षिता ने जैसे तैसे बात टाली

“अच्छा ठीक है मैं ऑफिस के लिए निकल रही हु, ये दवाई लो तुम्हें ठीक लगेगा, किचन मे नाश्ता और नींबुपानी बना के रखा है ले लेना आउए आराम करना” स्वरा ने अक्षिता को दवाई पकड़ाते हुए कहा अक्षिता ने भी दवाई ले ली और स्वरा को बाय करके कल रात के बारे मे सोचने लगी,

कुछ समय बाद जब अक्षिता का सर दर्द कम हुआ तो दिमाग पे थोड़ा जोर डालने के बाद अक्षिता को कल रात का पूरा सीन याद आ गया था, उसे याद आ गया था के वो कैसे एकांश की गॉड मे उसकी बाहों मे थी, उससे चिपकी हुई थी, और इस वक्त अक्षिता के दिमाग मे कई सवाल चल रहे

‘ये क्या कर दिया मैंने’

‘पता नहीं एकांश क्या सोच रहा होगा’

‘इतने लोगों मे मुझे उससे ही भिड़ना था क्या’

‘और मुझे शराब का पता कैसे नहीं चला यार’

‘नहीं ये मैं नहीं होने दे सकती मैं अपने ही डिसिशन के खिलाफ हो रही हु ऐसे तो उससे दूर जाने के मेरे फैसले पर असर पड़ेगा’

‘मैं ये नहीं होने दे सकती’

‘मेरा उससे दूर रहना ही बेहतर होगा’


--

दूसरी तरफ एकांश इस वक्त अपने ऑफिस मे था और वो थोड़ा डिस्टर्ब लग रहा था, उसके दिमाग मे कल रात की घटनाए चल रही थी के कैसे अक्षिता उसे उससे दूर नहीं होने दे रही थी, उसे कल नशे मे धुत अक्षिता का बिहैव्यर थोड़ा अलग लगा था

एकांश ने अक्षिता के आंखो में डर इनसिक्योरिटी महसूस की थी, ऐसा लग रहा था कुछ कहना था उसे लेकिन वो अपने आप को रोक रही थी, स्वरा भी एकांश से कुछ कहना चाहती थी लेकिन कह नही पाई थी और यही सब बाते इस वक्त एकांश के दिमाग में घूम रही थी और एकांश के इन खयालों को रोका उसके दरवाजे पर हुए नॉक ने

"कम इन"

दरवाजा खुला और एकांश ने उस ओर देखा तो वहा अमर खड़ा था जो अपने हमेशा वाले मजाकिया अंदाज में नही लग रहा था

"एकांश मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है" अमर ने सीरियस टोन में कहा और उसे ऐसे गंभीर देख एकांश को भी कुछ अलग लगा

"आजा बैठ, मुझे भी तुझसे कुछ बात करनी है" एकांश ने अपना लैपटॉप और फाइल्स बंद करते हुए कहा

"पहले मुझे ये बता तू अक्षिता को स्टॉक क्यों कर रहा था?" इससे पहले के अमर कुछ बोलता एकांश ने सवाल दाग दिया

"मैं भी इसी बारे में बात करने आया हु और तुझे इस बारे में कैसे पता चला" अमर बोला

"मतलब सच है ये, हैना?"

"मैं उसे कोई स्टॉक नही कर रहा था बस कुछ जगह पीछा किया था उसका"

"वही तो जानना है मुझे क्यों किया था?"

"उसकी जिंदगी के बारे में जानने के लिए" अमर ने आराम से कहा

"और तू उसके बारे में क्यों जानना चाहता है?" एकांश को हल्का हल्का गुस्सा आ रहा था

"मुझे लगता है वो कुछ छुपा रही है जो हमे नही पता जो तुझे जुड़ा है बस इसीलिए"

"मतलब?" एकांश थोड़ा अब कंफ्यूज था

"मैं जो पुछु बस तू उसका जवाब दे, मुझे बता तुम दोनो अलग क्यों हुए थे" अमर ने पूछा

"तू सब जानता है अमर" एकांश ने मुट्ठियां भींचते हुए कहा

"तू बता यार"

"वो प्यार नही करती मुझसे इसीलिए"

"और ये किसने कहा"

"तू नशा करके आया है क्या, उसने खुद ने और कौन बोलेगा"

"ये कब बोला उसका और क्यों बोला?"

"जब मैने उसे बताया के मैंने हमारे बारे में घर पर बता दिया है और मेरी मां उससे मिलना चाहती है तब उसने कहा था के वो कोई कमिटमेंट नही चाहती है, सेटल होना नही चाहती है और जब मैने उससे कहा के हम प्यार करते है एकदूसरे से तब इसमें प्रॉब्लम क्या है रिश्ते को आगे लेजाने में क्या दिक्कत है तब उसने कहा के वो मुझसे प्यार नही करती उसे बस मेरा अटेंशन मेरा पैसा प्यारा था मैं नही" एकांश ने पूरी कहानी के सुनाई वही अमर अपने ही खयालों में था

"फिर क्या हुआ?" अमर ने आराम से पूछा

"फिर क्या होना I argued के वो झूठ बोल रही है हमारा रिश्ता कैसा था वगैरा लेकिन वो नहीं मानी, मैंने उससे कहा के मेरी आंखों में देख के कहे के वो मुझसे प्यार नही करती और उसने वो कह दिया, बगैर किसी इमोशन के सीधा मेरी आंखों में देखते हुए" एकांश ने अपनी भावनाओं पे कंट्रोल करते हुए कहा

"फिर तूने क्या किया?"

"करना क्या था मैं एक लड़की के सामने अपने आपको एक लड़की के सामने कमजोर दिखाना नही चाहता था मैं वहा से और उसकी जिंदगी से निकल गया"

"उस इंसीडेंट के बाद कभी अक्षिता ने या तूने एकदूसरे से कॉन्टैक्ट करने को कोशिश की?"

"नही, वो मानो मेरी जिंदगी से गायब सी हो गई थी और उसके बाद मैंने उसे यही इसी ऑफिस में 1.5 साल बाद देखा और मेरा यहा इस ऑफिस में होना उसे नही जम रहा था और उसके बिहेवियर से वो मेरे आसपास नही रहना चाहती ये साफ था" एकांश सब बता रहा था और अमर सारी इन्फो ले रहा था

"लेकिन आज तू ये सब क्यों पूछ रहा है?" एकांश ने पूछा

“एकांश देख, शायद मेरी बात तुक ना बनाए लेकिन सच कुछ अलग है, तुझे ये सब अजीब नहीं लगता? बहुत कुछ है जो तुझे नहीं पता” अमर ने कहा

“क्या??”

“हा, तूने जो बोला जो कुछ तुझे पता है जो हुआ सब अधूरा है”

“तू साफ साफ बताएगा क्या कहना चाहता है?”

“मेरे भाई ऐसा है शायद अक्षिता ने तुझसे झूठ बोला है के वो तुझसे प्यार नहीं करती, तेरी बातों से ऐसा लगता है के उस सिचूऐशन मे कीसी बात ने अक्षिता को वो सब कहने फोर्स किया है, वो कुछ तो छिपा रही है, अब अक्षिता के पास उसके अपने रीज़न हो सकते है, शायद वो तुझसे प्यार करती हो लेकिन कह ना पा रही हो” अमर ने एकांश को पूरा मैटर समझाते हुए कहा

“तू समझ रहा है ना तू क्या कह रहा है? सब बकवास है ये, उसने दिल तोड़ा है मेरा, टु अच्छी तरह जानता है मैंने उसकी वजह से कितना सहा है? और अब तू कह रहा है वो प्यार करती है मुझसे... तू पागल हो गया है क्या?” एकांश ने थोड़ा गुस्से मे कहा, उसकी आंखे भी लाल हो रही थी

“जानता हु भाई सब जानता हु और इसीलिए इस मैटर की गहराई मे जाना चाहता हु, मैंने ऐसे ही उसका पीछा नहीं किया है, मैंने उसके बारे मे उसकी जिंदगी के बारे मे उसके कैरेक्टर के बारे मे जानने के लिए किया और मेरे भाई मैं दावे के साथ कह सकता हु के वो थोड़े अटेन्शन और फेम के लिए कीसी को धोका देने वालों मे से तो नहीं है” अमर एक सास मे बोल गया वही एकांश बस सुन रहा था

“तू खुद सोच तुझे ये सब अजीब नहीं लगता अगर उसे फेम और अटेन्शन ही चाहिए था तो वो तो तेरे साथ रहके भी आसानी से मिल सकता था, वो आंटी से मिल लेती तुम्हारी शादी हो जाती और ये सब आसानी से उसका होता, रघुवंशी परिवार की बहु बनने से कौनसी लड़की मना करेगी, उसकी जगह कोई और लड़की होती तो खुशी खुशी तेरेसे शादी कर लेती लेकिन उसने तुझे रिजेक्ट कर दिया, इसमे कुछ गड़बड़ है ऐसा नहीं लगता तुझे? मतलब अगर उसे पैसा अटेन्शन ही चाहिए था तो ये सब तेरे पास भी था फिर उसने तुझे रिजेक्ट क्यू किया, अगर उसे सच मे तुझे धोका देना होता तो ये तो वो तुझसे शादी करके कर लेती, पैसा मिलता वो अलग लेकिन उसने ये नहीं किया, कुछ तो है जो हमे नहीं पता और वो छिपाने मे माहिर है और अब हमे असल रीज़न पता करना है” इसीके साथ अमर ने अपनी बात खत्म की

अमर की बातों ने एकांश को सोचने पे मजबूर कर दिया था, अमर की बाते एकदम सही थी और ये सवाल तो उसने भी कई बार खुद से किया था के जिस लड़की को उसने इतना चाहा था वो उसे धोका कैसे दे सकती थी

“ठीक है, समझ गया और सच कहू तो मैंने भी सोचा था इस बारे मे लेकिन कभी कुछ जवाब नहीं मिला, ऐसा क्या रीज़न होगा के उसे ये करना पड़ा” अब एकांश भी अपनी सोच मे डूबा हुआ था

“मेरे दिमाग मे एक बात है लेकिन....” अमर बोलते हुए रुका

“क्या बात है बता...”

“तुझे याद है मैंने कहा था के मैंने इसे कही देखा है?” अमर अब भी दुविधा मे था के बताए या नहीं

“हा और अब प्लीज साफ साफ बात”

“मैंने उसे 1.5 साल पहले एक मॉल के बाहर कीसी से बात करते देखा था, इन्फैक्ट वो बात करते हुए रो रही थी” अमर ने कहा और एकांश को देखा

“कौन था वो?” एकांश ने पूछा और अब जो अमर बताने वाला था उसे सुन शायद एकांश को एक काफी बड़ा झटका मिलने वाला था

“तुम्हारी मा.....”



क्रमश:
 

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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अक्षिता का और एकांश की मां का कोई पुराना कनेक्शन है, पक्का।
 

Shetan

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Update 13





“क्या बढ़िया जगह है यार ये” स्वरा ने पार्टी के वेन्यू पर पहुचते हुए कहा

“हम्म” अक्षिता भी इधर उधर देख ही रही थी

“अंदर चले या यही रुकना है फिर?” रोहन ने उन दोनों के पीछे से कहा और वो लोग अंदर आए और देखा तो वहा पहले ही कई लोग आ चुके थे पार्टी चल रही थी, एक ओर कुछ लोग डांस कर रहे थे वही दूसरी ओर ड्रिंक्स का भी बंदोबस्त था, कुछ लोग एक साइड खड़े बात रहे रहे थे कुछ महोल का मजा ले रहे थे

अक्षिता तो तभी ऐसा लगा के कोई उसे देख रहा था और जब अक्षिता ने उस ओर देखा तो वहा कोई नहीं था, अक्षिता ने इस बात को इग्नोर किया और वहा श्रेया को खोजने लगी

कुछ पल नजर इधर उधर घुमाने के बाद उसे श्रेया दिख गई जो एकदम कहर ढा रही थी और कुछ लोगों से बाते कर रही थी, अक्षिता स्वरा और रोहन के साथ श्रेया की ओर बढ़ने लगी और वो भी उन लोगों से इक्स्क्यूज़ लेकर इनके पास आई

“Akshita! I am glad you came” श्रेया ने कहा

“it’s my pleasure and you look gorgeous” अक्षिता ने मुसकुराते हुए कहा

“थैंक यू”

‘बाइ द वे ये मेरे दोस्त है, रोहन और स्वरा और गाइज ये है श्रेया मेहता, आज की होस्ट”

“hello guys, its nice to meet you two, hope you are enjoying the party” श्रेया ने स्वरा और रोहन को देखते हुए कहा

“यस, द पार्टी इस अमेजिंग एण्ड नाइस टु मीट यू टू” रोहन ने फॉर्मली कहा

"हैलो मिस श्रेया वंडरफुल पार्टी एंड थैंक यू फॉर इनवाइटिंग अस" स्वरा ने कहा

"प्लीज कॉल मि श्रेया, आई एम ग्लैड यू गाइज केम" श्रेया ने कहा

"वैसे मेरे दो सवाल है एक तो बगैर जान पहचान के मुझे बुलाना और इस शानदार पार्टी का रीजन तो बताओ" अक्षिता ने पूछा

"देखो मुझे मेरी ही पार्टी में किसी को इन्वाइट करने रीजन नही चाहिए और जैसे मैंने तुम्हे एकांश से बात करते देखा आई थॉट के हम अच्छे दोस्त बन सकते है रही बात पार्टी की तो मैं एक फैशन डिजाइनर की और मेरा अपना फैशन हाउस है और रिसेंटली मेरे डिजाइन्स पेरिस फैशन वीक में सेलेक्ट हुए है," श्रेया ने बताया

"ओह माई गॉड, कांग्रेटूलेशंस!" अक्षिता ने श्रेया को गले लगाते हुए कहा

"थैंक यू, गाइज एंजॉय द पार्टी, मुझे अभी जाना होगा कई लोगो से मिलना है," इतना बोल के श्रेया वहा से निकल गई

--

पार्टी अपने पूरे रंग पे थी शानदार म्यूजिक बज रहा था, रोहन और स्वरा डांस का मजा ले रहे थे वही अक्षिता वहा से थोड़ी दूर एक कोने में बैठी थी, उसे पार्टी करना वैसे भी ज्यादा पसंद नही था और तभी अक्षिता को खुद पर किसी की नजरे महसूस हुई, वो जो लकड़ियों के पास एक्स्ट्रा सेंस होता है बस उससे ही अक्षिता को लगा के कोई उसे देख रहा था लेकिन उसने जब इधर उधर देखने की कोशिश की तो वैसा कुछ नही था

अक्षिता को वहा बैठे बैठे प्यास लग रही थी वो उठी और वहा सर्व हो रहे पानी जैसे ड्रिंक को पी लिया, अक्षिता वहा अब बोर हो रही थी और अब उसे बस घर जाकर सोना था..

कुछ पल और रुक कर अक्षिता अपने दोस्तो के पास जा ही रही थी के वो किसी से टकरा गई और जब उसने ऊपर देखा

"तुम!!!" अक्षिता ने गुस्से में कहा

"यप :D"

"तुम मेरा पीछा करते हुए यहा तक आ गए?" अक्षिता ने इस बंदे को गुस्से में घूरते हुए कहा

"जी नही, मैं यहा अपने दोस्त की पार्टी अटेंड करने आया हु" उस बंदे से सरेंडर की मुद्रा में अपने हाथ ऊपर उठाते हुए कहा

"तुम मेरा पीछा क्यों कर रहे हो, why are you stalking me?" अक्षिता ने हाथ बांधे पूछा

"मैं कोई तुम्हारा पीछा नही कर रहा ही, मैं बस थोड़ा सा क्यूरियस हु"

"क्यूरियस?"

"हा, तुम्हारे बारे में थोड़ा और जानने के लिए" वो बंदा बोला

अक्षिता ने ना में अपना सर हिलाया और अपने दोस्तो को खोजने लगी

"किसे ढूंढ रही हो?" उस बंदे में पूछा लेकिन बदले में अक्षिता ने बस उसे आंखे बारीक करके घूरा

"चिंता मत करो जल्दी ही उससे मिल लोगो वो श्रेया से मिलने गया है" वो बंदा बोला

"कौन?" अक्षिता ने थोड़ा कंफ्यूज टोन में पूछा लेकिन बदले में वो शक्स बस मुस्कुराया और अक्षिता वहा से जाने लगी और वो बंदा उसके पीछे हो लिया

"तुम यहा क्या कर रही हो?" तभी उनलोगो को ये आवाज सुनाई दी, पलट कर देखा तो वहा एकांश खड़ा था, "अमर, तुम मिस पांडे के साथ क्या कर रहे हो?" एकांश ने थोड़े गुस्से में अमर से पूछा

"कुछ नही भाई बस टकरा गए थे तो थोड़ी बात कर ली :D" अमर में बात झटकते हुए कहा

"तू हमेशा इससे ही क्यों टकराता है बे" एकांश अमर से बोला वही अक्षिता वहा से निकल गई थी...

--



पार्टी अपने पूरे जोर पर थी और इस पार्टी में ना तो एकांश को उतना इंटरेस्ट था और ना ही अक्षिता को वही रोहन और स्वरा पार्टी का पूरा मजा ले रहे थे, वही अक्षिता की प्यास ही नही बुझ रही थी जबकि वो अब तक वहा सर्व होते ड्रिंक्स के कई ग्लास गटक चुकी थी और वही एकांश बता नही रहा था लेकिन अक्षिता पर उसका पूरा ध्यान था तभी एकांश ने देखा के अक्षिता थोड़ा अलग बिहैव कर रही है और उस ओर चल पड़ा

“उठो”

“नहीं”

“मैंने कहा उठो वहा से”

“नो”

“मूव”

“नहीं”

एकांश अक्षिता के पास पहुचा जो जमिन पर बैठे मुस्कुरा रही थी और एकांश उसे वहा से उठाने की कोशिश कर रहा था

“तुम वहा नीचे बैठ कर क्या कर रही हो?” एकांश ने इरिटैटेड टोन मे अक्षिता से पूछा

“मैं कुछ ढूंढ रही हु डिस्टर्ब मत करो” अक्षिता ने कहा

“क्या ढूंढ रही हो?”

“मेरे दोस्तों को ढूंढ रही हु” अक्षिता ने सीरीअसली जवाब दिया और अब एकांश के मैटर ध्यान मे आ गया

“अक्षिता तुमने शराब पी है?” एकांश ने आराम से पूछा

“नहीं तो मैंने तो पानी पिया है और कुछ शर्बत”

“पानी पीने से कीसी को नशा नहीं होता है” एकांश गुस्से मे चिल्लाया वही अक्षिता की शक्ल ऐसी हो गई थी मानो अभी रो देगी

“ये लो ये पिलाओ उसे थोड़ा ठीक लगेगा” अमर भी अब तक वहा आ गया था और उसे मैटर समझ आते हो वो बारटेन्डर से थोड़ा नींबू मिला पानी ले आया था

“ये लो ये पीओ ठीक लगेगा” एकांश ने वो ग्लास अक्षिता की ओर बढ़ाया

“नहीं, मैं ये नहीं पियूँगी” अक्षिता ने कहा

“पी लो बस नींबूपानी है” एकांश ने उसे समझाते हूएं कहा

“नहीं,” और इतना बोल के अक्षिता अपने दोस्तों के नाम से चिल्लाने लगी, वहा का महोल लाउड म्यूजिक सब कुछ अक्षिता के नशे हो हल्का हल्का बढ़ा रहे थे, उसने गलती वहा सर्व होती वोडका पी ली थी और वोडका के साथ एक चीज ये भी है के वो अगर ज्यादा देर हवा से इक्स्पोज़ हो जाए हो उसका टेस्ट पानी जैसा हो जाता है, इसीलिए अक्षिता ये जान ही नहीं पाई के वो पानी नहीं था.. और अब अक्षिता पूरे वोडका के असर मे थी

“रोहन स्वरा.... कहा हो तुम लोग” अक्षिता जोर से चीख रही थी और अब वहा अगल बगल वालों का ध्यान उस ओर जा रहा था...

“शट अप” एकांश ने कहा और अक्षिता चुप हुई और तभी स्वरा और रोहन वहा आ गए थे

“हे भगवान अक्षु तुम ऐसे जमीन पर क्या कर रही हो?” स्वरा ने अक्षिता के पास घुटनों पर बैठते हुए पूछा

“मैं तुम लोगों को ढूंढ रही थी”

“ऐसे जमीन पर बैठ कर?” स्वरा ने पूछा

“हा!” अक्षिता ने हसते हुए कहा वही अमर ये साथ मैटर देख कर अपने आप को हसने से रोक रहा था

“अक्षिता, तुमने शराब पी है?” रोहन ने चिंतित स्वर मे पूछा

“उसने भी यही पूछा तुम भी यही पपुछ रहे हो” अक्षिता ने एकांश की ओर उंगली दिखते हुए कहा

“अक्षु तुम जानती हो ना तुम शराब नहीं पीनी चाहिए, तुम शराब को छु भी नहीं सकती तुमको allowed ही नहीं है” रोहन ने सीरीअसली कहा और अक्षिता को खड़ा किया वही उसकी बात सुन एकांश के कान खड़े हो गए क्युकी रोहन काफी ज्यादा सीरीअस लग रहा था

“क्यू?” रोहन की बात पे अमर ने सवाल किया लेकिन जैसे ही स्वरा ने उसे घूर के देखा वो चुप हो गया

“हा हा पता है मैंने बस थोड़ा पानी पिया था” अक्षिता ने कहा

“चलो घर चलो” रोहन ने कहा

“नहीं, मुझे कही नहीं जाना” और इतना बोल के अक्षिता ने वह खड़े एकांश को पकड़ लिया जो बस उसे देख रहा था

अक्षिता ने एकांश को देखा और उसे देख मुस्कुराने लगी, और तभी उसका बैलन्स बिगड़ा और वो गिरने ही वाली थी के एकांश ने उसे संभाल लिया

“अंश, कितने क्यूट लग रहे हो तुम” अक्षिता ने एकांश को मुसकुराते हुए देख कहा, और एकांश थोड़ा चौका, उसके और अक्षिता के बारे मे कीसी को पता नहीं था के उसका पास्ट क्या था ऐसे मे अक्षिता का उसे अंश कह कर बुलाना कई सवालों को डावात देने जैसा था और ये एकांश बिल्कुल नहीं चाहता था

वही अक्षिता अब एकांश को छोड़ने को तयार ही नहीं था वो उसे कस कर पकड़ी हई थी, स्वरा भी अक्षिता का एकांश के लिए बिहैव्यर देख थोड़ी हैरान थी लेकिन ये वक्त सवाल पूछने का नहीं था

रोहन और स्वरा दोनों को ही टेंशन हो रही थी

“अक्षु चलो, घर चलो” स्वरा ने कहा

“नहीं मैं अंश को छोड़ के कही नहीं जा रही” अक्षिता ने कहा

वो लोग अब पार्किंग मे आ चुके थे

“डोन्ट वरी मिस स्वरा, मैं उसे घर छोड़ दूंगा” अक्षिता उसे छोड़ ही नहीं रही थी इसीलिए एकांश स्वरा से बोला

“नहीं!” रोहन और स्वरा ने एकसाथ कहा और एकांश ने सवालिया नजरों से उसे देखा

“सर मैं उसे मेरे घर लेकर जा रही हु, ऐसी हालत मे वो घर नहीं जा सकती उसके पेरेंट्स को टेंशन होगी” स्वरा ने कहा

“ठीक है फिर मैं तुम दोनों को ड्रॉप कर देता हु, मिस्टर रोहन आप जाइए, अमर हम तीनों को ड्रॉप कर देता” एकांश ने कहा और रोहन ने भी उसकी बात ठीक समझी

अक्षिता से सब चला भी नहीं जा रहा था, और नशे से आंखे भी भारी होने लगी थी लेकिन फिर भी वो एकांश को नहीं छोड़ रही थी और एकांश उसे गोदी मे उठाया और कार की ओर बढ़ गया वही अक्षिता भी उससे चिपकी हुई थी और उसे ऐसे देख स्वरा और रोहन काफी शॉक थे,

एकांश ने अक्षिता को पीछे की सीट पर बिठाया और खुद भी उसके बाजू मे बैठ गया वही स्वरा अमर के बाजू मे आगे पैसेंजर सीट पर बैठी थी, स्वरा ने पीछे पलट कर देखा तो वो थोड़ा और चौकी, अक्षिता एकांश के सिने से लग कर सोई हुई थी स्वरा ने उसे ठीक से बैठने कहा भी लेकिन अक्षिता सुनने की हालत मे थी ही कहा वही एकांश भले ही अपने चेहरे पर जाहीर नहीं होने दे रहा था लेकिन अक्षिता को अपने इतना पास पाकर मन ही मन वो भी काफी खुश था

घर पहुचने पर भी एकांश को उसे गोद मे उठा कर बेडरूम मे सुलाना पड़ा

“टेक केयर ऑफ हर, कल सुबह भारी हैंगओवर होने वाला है उसे” एकांश ने स्वरा से कहा जिसने उसे पानी का ग्लास पकड़ाया जिसपर स्वरा ने हा मे गर्दन हिला दी

जिसके बाद एकांश अमर के साथ वहा से जाने के लिए निकला

“सर” स्वरा ने उसे आवाज दी और एकांश पलटा, स्वरा की आँखों मे थोड़ा पानी था और वो कुछ बोलना चाहती थी लेकिन बोल नहीं पा रही थी

“यस?”

“नथिंग, टेक केयर”

“यू टू” इतना बोल के एकांश अमर के साथ वहा से निकल गया दिमाग मे कई सारे सवाल लिए....

क्रमश:
Amazing creative scene. Padhakar feel kar kar gana gungunane ko dil kar jaaye. Romantic ittefaq. Best update
 

Shetan

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मेरा कहना सही निकला - श्रेया बहुत ही गले पड़ूँ लड़की है। एक तो अक्षिता को बुलाया, फिर बस दो बात कर के पूरी पार्टी में गायब हो गई। अब ये तो कोई तरीका नहीं हुआ किसी को “अच्छे दोस्त” बनाने का!
पानी जैसा ड्रिंक पानी नहीं होता। ड्रिंक हमेशा ही 30 (स्माल) या 60 (लार्ज) मिलीलीटर ही बनाते हैं। बरफ़ डाल देने से ड्रिंक की सतह थोड़ा ऊपर हो सकती है, लेकिन गिलास फिर भी छोटा ही रहता है। पानी को ऊँचे गिलास में डाला जाता है। ऐसे में वोडका को पानी समझने की गलती करना मूर्खतापूर्ण है। वैसे पिछले रिव्यु में मैंने सिद्ध किया हुआ है कि अक्षिता और एकांश दोनों बचकाने हैं। लेकिन अब लग रहा है कि अक्षिता मूर्ख भी है (इस तरह की सामाजिक अज्ञानता को भोलापन / अबोधपन नहीं कहा जा सकता)! वैसे तो बकर बकर बोल लेती है, तो यहाँ क्या उसके मुँह में पँजीरी भर गई थी कि ड्रिंक्स सर्व करने वाले से पूछ भी न सकी कि क्या दे रहे हो?!
वैसे अक्षिता को शराब पीने से मनाही क्यों है? कारण तो बहुत से हो सकते हैं - जैसे कि, लीवर की समस्या, कैंसर जैसी बीमारी, और गर्भावस्था इत्यादि में तो मना ही किया जाता है। तो क्या उसको भी ऐसी ही कोई समस्या है?
Nahi ye abhi nahi bol sakte. Abhi tak pruf nahi huaa ki Shreya ne vo sab kiya he. Ye kishmat ka khel he. Itfak
 

only_me

I ÂM LÕSÉR ẞŪT.....
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Update 14



अक्षिता जब अगले दिन नींद से जागी तो सर दर्द के साथ ही, उसका सर भारी था और वो अपनी आंखे मलते हुए पलंग पर उठ बैठी थी,

अक्षिता ने अपनी आंखे खोल कर इधर उधर देखा तो अपने आप को अपने रूम मे ना पाकर वो थोड़ा चौकी और फिर जब उसकी नजर कमरे के दरवाजे पर गई तो उसने देखा के स्वरा दरवाजे पर खादी हाथ बांधे उसे देख रही थी और इस वक्त स्वरा काफी सीरीअस लग रही थी

“स्वरा, मैं तुम्हारे कमरे मे क्यू हु?” अक्षिता ने सर पर हाथ रखते हुए पूछा लेकिन स्वरा कुछ नहीं बोली

“स्वरा बता ना, और तुम ऐसे मुझे घूर क्यू रही हो?” अक्षिता ने वापिस पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं आया

“स्वरा”

“तुम्हें होश भी है क्या कर रही हो क्या चाहती हो?” स्वरा ने सीरीअसली कहा वही अक्षिता थोड़ा कन्फ्यूज़ थी

“कुछ याद है कल क्या हुआ? तुमने क्या किया? तुम जानती हो ना तुम्हें ऐसी चीजों से दूर रहना है वरना सही नहीं होगा” स्वरा ने थोड़ा गुस्से मे कहा

“अरे पर मैंने किया क्या है” अक्षिता ने पूछा

“तुम कल रात शराब के नशे मे धुत थी पूरी”

“क्या!!!” अक्षिता थोड़ा चौकी

“हा।“

“लेकिन मैंने तो कल ऐसा कुछ नहीं पिया” अक्षिता ने याद करते हुए कहा

“ओके टी अब मुझे ये बताओ के कल इतना क्या पी लिया था के अपन नशे मे है इसका भी तुमको ध्यान नहीं है”

“मैंने बस थोड़ा कोल्डड्रिंक और पानी पिया था और कुछ नहीं” अक्षिता ने कहा, “ओह शीट, वो शायद कुछ और ही था,” अक्षिता ने याद करते हुए कहा, वो सब याद करने की कोशिश कर रही थी

“वो जो भी हो अक्षु तुम जानती हो न ये तुम्हारे किए कितना खतरनाक हो सकता है, तुम्हें कुछ भी हो सकता था” स्वरा ने धीमे से कहा

“सॉरी यार पर मैंने जान बुझ कर नहीं किया है कुछ”

“जाने दो जो हुआ, अब तुम आराम करो, मैंने आंटी को बता ददिया है तुम यहा हो और मैं अब ऑफिस के लिए निकल रही हु” स्वरा ने कहा

“ओह शीट! ऑफिस के बारे मे तो मैं भूल ही गई थी” अक्षिता ने पलंग से उतरते हुए कहा

“अरे आराम से आज वैसे भी छुट्टी है तुम्हारी सो डोन्ट वरी” स्वरा ने अपना हैन्ड्बैग लेते हुए कहा

“छुट्टी?”

“एकांश की मेहरबानी है तुमपे, उसने की दी है”

“क्यू?”

“क्युकी अक्षु डिअर हमारा बॉस जानता था के तुमको हैंगओवर होने वाला है बस इसीलिए”

“लेकिन उसको कैसे पता चला के मैंने पी रखी थी?”

“उसे कैसे पता नहीं चलता वही तो तुम्हें यहा छोड़ कर गया है,” स्वरा ने कहा

“क्या??”

“तुम्हें सही मे कुछ याद नहीं क्या?” स्वरा ने हसते हुए कहा

“बस इतना बता मैंने कुछ उलटी सीधी हरकत तो नहीं की ना?”

“अक्षु बेबी आज छुट्टी है ना तो दिमाग पे जोर दलों सब याद आ जाएगा मुझे लेट मत कराओ” स्वरा ने जाते हुए कहा

“हा हा ठीक है, वैसे ही जो भी किया होगा तुम्हारे और रोहन के सामने ही किया होगा” अक्षिता ने वापिस दिमाग पे जोर डाला

“ना, वहा सब से खास कर अपने बॉस और उसका दोस्त” स्वरा मे मुसकुराते हुए कहा और अक्षिता ने अपने सर पे हाथ मार लिया

“मैंने क्या किया?”

“कुछ नहीं शाम हो बताऊँगी अभी लेट हो जाएगा मुझे”

“अच्छा इतना तो बता दे जब रोहन हमारे साथ था तो एकांश ने मुझे यहा क्यू छोड़ा? अक्षिता ने याद करते हुए कहा क्युकी वो और स्वरा रोहन के साथ उसकी कार मे गए थे

अब स्वरा रुकी

“रोहन तो हमे छोड़ देता लेकिन तुम एकांश को छोड़ ही नहीं रही थी, उसे अपने से दूर ही नहीं जाने दे रही थी एकदम चिपकी हुई थी उससे, वैसे अक्षु एक बात बता तू एकांश सर को अंश कहकर क्यू बुला रही थी?”

स्वरा का सवाल सुन कर अक्षिता थोड़ा चौकी, उसे ध्यान मे आ गया था के उससे नशे मे गलती तो हुई है,

“अब लेट नहीं हो रहा था तुझे?”

“अरे वो देखा जाएगा तुम पहले ये बताओ तुम एकांश को अंश कह कर क्यू बुला रही थी लग रहा था तुम जानती हो उसे”

“ऐसा कुछ नहीं है मैं.... मैं नशे मे थी ना तो बस अब जाओ तुम” अक्षिता ने जैसे तैसे बात टाली

“अच्छा ठीक है मैं ऑफिस के लिए निकल रही हु, ये दवाई लो तुम्हें ठीक लगेगा, किचन मे नाश्ता और नींबुपानी बना के रखा है ले लेना आउए आराम करना” स्वरा ने अक्षिता को दवाई पकड़ाते हुए कहा अक्षिता ने भी दवाई ले ली और स्वरा को बाय करके कल रात के बारे मे सोचने लगी,

कुछ समय बाद जब अक्षिता का सर दर्द कम हुआ तो दिमाग पे थोड़ा जोर डालने के बाद अक्षिता को कल रात का पूरा सीन याद आ गया था, उसे याद आ गया था के वो कैसे एकांश की गॉड मे उसकी बाहों मे थी, उससे चिपकी हुई थी, और इस वक्त अक्षिता के दिमाग मे कई सवाल चल रहे

‘ये क्या कर दिया मैंने’

‘पता नहीं एकांश क्या सोच रहा होगा’

‘इतने लोगों मे मुझे उससे ही भिड़ना था क्या’

‘और मुझे शराब का पता कैसे नहीं चला यार’

‘नहीं ये मैं नहीं होने दे सकती मैं अपने ही डिसिशन के खिलाफ हो रही हु ऐसे तो उससे दूर जाने के मेरे फैसले पर असर पड़ेगा’

‘मैं ये नहीं होने दे सकती’

‘मेरा उससे दूर रहना ही बेहतर होगा’


--

दूसरी तरफ एकांश इस वक्त अपने ऑफिस मे था और वो थोड़ा डिस्टर्ब लग रहा था, उसके दिमाग मे कल रात की घटनाए चल रही थी के कैसे अक्षिता उसे उससे दूर नहीं होने दे रही थी, उसे कल नशे मे धुत अक्षिता का बिहैव्यर थोड़ा अलग लगा था

एकांश ने अक्षिता के आंखो में डर इनसिक्योरिटी महसूस की थी, ऐसा लग रहा था कुछ कहना था उसे लेकिन वो अपने आप को रोक रही थी, स्वरा भी एकांश से कुछ कहना चाहती थी लेकिन कह नही पाई थी और यही सब बाते इस वक्त एकांश के दिमाग में घूम रही थी और एकांश के इन खयालों को रोका उसके दरवाजे पर हुए नॉक ने

"कम इन"

दरवाजा खुला और एकांश ने उस ओर देखा तो वहा अमर खड़ा था जो अपने हमेशा वाले मजाकिया अंदाज में नही लग रहा था

"एकांश मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है" अमर ने सीरियस टोन में कहा और उसे ऐसे गंभीर देख एकांश को भी कुछ अलग लगा

"आजा बैठ, मुझे भी तुझसे कुछ बात करनी है" एकांश ने अपना लैपटॉप और फाइल्स बंद करते हुए कहा

"पहले मुझे ये बता तू अक्षिता को स्टॉक क्यों कर रहा था?" इससे पहले के अमर कुछ बोलता एकांश ने सवाल दाग दिया

"मैं भी इसी बारे में बात करने आया हु और तुझे इस बारे में कैसे पता चला" अमर बोला

"मतलब सच है ये, हैना?"

"मैं उसे कोई स्टॉक नही कर रहा था बस कुछ जगह पीछा किया था उसका"

"वही तो जानना है मुझे क्यों किया था?"

"उसकी जिंदगी के बारे में जानने के लिए" अमर ने आराम से कहा

"और तू उसके बारे में क्यों जानना चाहता है?" एकांश को हल्का हल्का गुस्सा आ रहा था

"मुझे लगता है वो कुछ छुपा रही है जो हमे नही पता जो तुझे जुड़ा है बस इसीलिए"

"मतलब?" एकांश थोड़ा अब कंफ्यूज था

"मैं जो पुछु बस तू उसका जवाब दे, मुझे बता तुम दोनो अलग क्यों हुए थे" अमर ने पूछा

"तू सब जानता है अमर" एकांश ने मुट्ठियां भींचते हुए कहा

"तू बता यार"

"वो प्यार नही करती मुझसे इसीलिए"

"और ये किसने कहा"

"तू नशा करके आया है क्या, उसने खुद ने और कौन बोलेगा"

"ये कब बोला उसका और क्यों बोला?"

"जब मैने उसे बताया के मैंने हमारे बारे में घर पर बता दिया है और मेरी मां उससे मिलना चाहती है तब उसने कहा था के वो कोई कमिटमेंट नही चाहती है, सेटल होना नही चाहती है और जब मैने उससे कहा के हम प्यार करते है एकदूसरे से तब इसमें प्रॉब्लम क्या है रिश्ते को आगे लेजाने में क्या दिक्कत है तब उसने कहा के वो मुझसे प्यार नही करती उसे बस मेरा अटेंशन मेरा पैसा प्यारा था मैं नही" एकांश ने पूरी कहानी के सुनाई वही अमर अपने ही खयालों में था

"फिर क्या हुआ?" अमर ने आराम से पूछा

"फिर क्या होना I argued के वो झूठ बोल रही है हमारा रिश्ता कैसा था वगैरा लेकिन वो नहीं मानी, मैंने उससे कहा के मेरी आंखों में देख के कहे के वो मुझसे प्यार नही करती और उसने वो कह दिया, बगैर किसी इमोशन के सीधा मेरी आंखों में देखते हुए" एकांश ने अपनी भावनाओं पे कंट्रोल करते हुए कहा

"फिर तूने क्या किया?"

"करना क्या था मैं एक लड़की के सामने अपने आपको एक लड़की के सामने कमजोर दिखाना नही चाहता था मैं वहा से और उसकी जिंदगी से निकल गया"

"उस इंसीडेंट के बाद कभी अक्षिता ने या तूने एकदूसरे से कॉन्टैक्ट करने को कोशिश की?"

"नही, वो मानो मेरी जिंदगी से गायब सी हो गई थी और उसके बाद मैंने उसे यही इसी ऑफिस में 1.5 साल बाद देखा और मेरा यहा इस ऑफिस में होना उसे नही जम रहा था और उसके बिहेवियर से वो मेरे आसपास नही रहना चाहती ये साफ था" एकांश सब बता रहा था और अमर सारी इन्फो ले रहा था

"लेकिन आज तू ये सब क्यों पूछ रहा है?" एकांश ने पूछा

“एकांश देख, शायद मेरी बात तुक ना बनाए लेकिन सच कुछ अलग है, तुझे ये सब अजीब नहीं लगता? बहुत कुछ है जो तुझे नहीं पता” अमर ने कहा

“क्या??”

“हा, तूने जो बोला जो कुछ तुझे पता है जो हुआ सब अधूरा है”

“तू साफ साफ बताएगा क्या कहना चाहता है?”

“मेरे भाई ऐसा है शायद अक्षिता ने तुझसे झूठ बोला है के वो तुझसे प्यार नहीं करती, तेरी बातों से ऐसा लगता है के उस सिचूऐशन मे कीसी बात ने अक्षिता को वो सब कहने फोर्स किया है, वो कुछ तो छिपा रही है, अब अक्षिता के पास उसके अपने रीज़न हो सकते है, शायद वो तुझसे प्यार करती हो लेकिन कह ना पा रही हो” अमर ने एकांश को पूरा मैटर समझाते हुए कहा

“तू समझ रहा है ना तू क्या कह रहा है? सब बकवास है ये, उसने दिल तोड़ा है मेरा, टु अच्छी तरह जानता है मैंने उसकी वजह से कितना सहा है? और अब तू कह रहा है वो प्यार करती है मुझसे... तू पागल हो गया है क्या?” एकांश ने थोड़ा गुस्से मे कहा, उसकी आंखे भी लाल हो रही थी

“जानता हु भाई सब जानता हु और इसीलिए इस मैटर की गहराई मे जाना चाहता हु, मैंने ऐसे ही उसका पीछा नहीं किया है, मैंने उसके बारे मे उसकी जिंदगी के बारे मे उसके कैरेक्टर के बारे मे जानने के लिए किया और मेरे भाई मैं दावे के साथ कह सकता हु के वो थोड़े अटेन्शन और फेम के लिए कीसी को धोका देने वालों मे से तो नहीं है” अमर एक सास मे बोल गया वही एकांश बस सुन रहा था

“तू खुद सोच तुझे ये सब अजीब नहीं लगता अगर उसे फेम और अटेन्शन ही चाहिए था तो वो तो तेरे साथ रहके भी आसानी से मिल सकता था, वो आंटी से मिल लेती तुम्हारी शादी हो जाती और ये सब आसानी से उसका होता, रघुवंशी परिवार की बहु बनने से कौनसी लड़की मना करेगी, उसकी जगह कोई और लड़की होती तो खुशी खुशी तेरेसे शादी कर लेती लेकिन उसने तुझे रिजेक्ट कर दिया, इसमे कुछ गड़बड़ है ऐसा नहीं लगता तुझे? मतलब अगर उसे पैसा अटेन्शन ही चाहिए था तो ये सब तेरे पास भी था फिर उसने तुझे रिजेक्ट क्यू किया, अगर उसे सच मे तुझे धोका देना होता तो ये तो वो तुझसे शादी करके कर लेती, पैसा मिलता वो अलग लेकिन उसने ये नहीं किया, कुछ तो है जो हमे नहीं पता और वो छिपाने मे माहिर है और अब हमे असल रीज़न पता करना है” इसीके साथ अमर ने अपनी बात खत्म की

अमर की बातों ने एकांश को सोचने पे मजबूर कर दिया था, अमर की बाते एकदम सही थी और ये सवाल तो उसने भी कई बार खुद से किया था के जिस लड़की को उसने इतना चाहा था वो उसे धोका कैसे दे सकती थी

“ठीक है, समझ गया और सच कहू तो मैंने भी सोचा था इस बारे मे लेकिन कभी कुछ जवाब नहीं मिला, ऐसा क्या रीज़न होगा के उसे ये करना पड़ा” अब एकांश भी अपनी सोच मे डूबा हुआ था

“मेरे दिमाग मे एक बात है लेकिन....” अमर बोलते हुए रुका

“क्या बात है बता...”

“तुझे याद है मैंने कहा था के मैंने इसे कही देखा है?” अमर अब भी दुविधा मे था के बताए या नहीं

“हा और अब प्लीज साफ साफ बात”

“मैंने उसे 1.5 साल पहले एक मॉल के बाहर कीसी से बात करते देखा था, इन्फैक्ट वो बात करते हुए रो रही थी” अमर ने कहा और एकांश को देखा

“कौन था वो?” एकांश ने पूछा और अब जो अमर बताने वाला था उसे सुन शायद एकांश को एक काफी बड़ा झटका मिलने वाला था

“तुम्हारी मा.....”



क्रमश:
Gajab Bhai 💯
 

Shetan

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अक्षिता का और एकांश की मां का कोई पुराना कनेक्शन है, पक्का।
Nahi he Riky. Aap bade redar ho. Kitni kitni kahani padhi hai. Abhi tak jaj nahin kar paye.
 

Tiger 786

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Update 14



अक्षिता जब अगले दिन नींद से जागी तो सर दर्द के साथ ही, उसका सर भारी था और वो अपनी आंखे मलते हुए पलंग पर उठ बैठी थी,

अक्षिता ने अपनी आंखे खोल कर इधर उधर देखा तो अपने आप को अपने रूम मे ना पाकर वो थोड़ा चौकी और फिर जब उसकी नजर कमरे के दरवाजे पर गई तो उसने देखा के स्वरा दरवाजे पर खादी हाथ बांधे उसे देख रही थी और इस वक्त स्वरा काफी सीरीअस लग रही थी

“स्वरा, मैं तुम्हारे कमरे मे क्यू हु?” अक्षिता ने सर पर हाथ रखते हुए पूछा लेकिन स्वरा कुछ नहीं बोली

“स्वरा बता ना, और तुम ऐसे मुझे घूर क्यू रही हो?” अक्षिता ने वापिस पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं आया

“स्वरा”

“तुम्हें होश भी है क्या कर रही हो क्या चाहती हो?” स्वरा ने सीरीअसली कहा वही अक्षिता थोड़ा कन्फ्यूज़ थी

“कुछ याद है कल क्या हुआ? तुमने क्या किया? तुम जानती हो ना तुम्हें ऐसी चीजों से दूर रहना है वरना सही नहीं होगा” स्वरा ने थोड़ा गुस्से मे कहा

“अरे पर मैंने किया क्या है” अक्षिता ने पूछा

“तुम कल रात शराब के नशे मे धुत थी पूरी”

“क्या!!!” अक्षिता थोड़ा चौकी

“हा।“

“लेकिन मैंने तो कल ऐसा कुछ नहीं पिया” अक्षिता ने याद करते हुए कहा

“ओके टी अब मुझे ये बताओ के कल इतना क्या पी लिया था के अपन नशे मे है इसका भी तुमको ध्यान नहीं है”

“मैंने बस थोड़ा कोल्डड्रिंक और पानी पिया था और कुछ नहीं” अक्षिता ने कहा, “ओह शीट, वो शायद कुछ और ही था,” अक्षिता ने याद करते हुए कहा, वो सब याद करने की कोशिश कर रही थी

“वो जो भी हो अक्षु तुम जानती हो न ये तुम्हारे किए कितना खतरनाक हो सकता है, तुम्हें कुछ भी हो सकता था” स्वरा ने धीमे से कहा

“सॉरी यार पर मैंने जान बुझ कर नहीं किया है कुछ”

“जाने दो जो हुआ, अब तुम आराम करो, मैंने आंटी को बता ददिया है तुम यहा हो और मैं अब ऑफिस के लिए निकल रही हु” स्वरा ने कहा

“ओह शीट! ऑफिस के बारे मे तो मैं भूल ही गई थी” अक्षिता ने पलंग से उतरते हुए कहा

“अरे आराम से आज वैसे भी छुट्टी है तुम्हारी सो डोन्ट वरी” स्वरा ने अपना हैन्ड्बैग लेते हुए कहा

“छुट्टी?”

“एकांश की मेहरबानी है तुमपे, उसने की दी है”

“क्यू?”

“क्युकी अक्षु डिअर हमारा बॉस जानता था के तुमको हैंगओवर होने वाला है बस इसीलिए”

“लेकिन उसको कैसे पता चला के मैंने पी रखी थी?”

“उसे कैसे पता नहीं चलता वही तो तुम्हें यहा छोड़ कर गया है,” स्वरा ने कहा

“क्या??”

“तुम्हें सही मे कुछ याद नहीं क्या?” स्वरा ने हसते हुए कहा

“बस इतना बता मैंने कुछ उलटी सीधी हरकत तो नहीं की ना?”

“अक्षु बेबी आज छुट्टी है ना तो दिमाग पे जोर दलों सब याद आ जाएगा मुझे लेट मत कराओ” स्वरा ने जाते हुए कहा

“हा हा ठीक है, वैसे ही जो भी किया होगा तुम्हारे और रोहन के सामने ही किया होगा” अक्षिता ने वापिस दिमाग पे जोर डाला

“ना, वहा सब से खास कर अपने बॉस और उसका दोस्त” स्वरा मे मुसकुराते हुए कहा और अक्षिता ने अपने सर पे हाथ मार लिया

“मैंने क्या किया?”

“कुछ नहीं शाम हो बताऊँगी अभी लेट हो जाएगा मुझे”

“अच्छा इतना तो बता दे जब रोहन हमारे साथ था तो एकांश ने मुझे यहा क्यू छोड़ा? अक्षिता ने याद करते हुए कहा क्युकी वो और स्वरा रोहन के साथ उसकी कार मे गए थे

अब स्वरा रुकी

“रोहन तो हमे छोड़ देता लेकिन तुम एकांश को छोड़ ही नहीं रही थी, उसे अपने से दूर ही नहीं जाने दे रही थी एकदम चिपकी हुई थी उससे, वैसे अक्षु एक बात बता तू एकांश सर को अंश कहकर क्यू बुला रही थी?”

स्वरा का सवाल सुन कर अक्षिता थोड़ा चौकी, उसे ध्यान मे आ गया था के उससे नशे मे गलती तो हुई है,

“अब लेट नहीं हो रहा था तुझे?”

“अरे वो देखा जाएगा तुम पहले ये बताओ तुम एकांश को अंश कह कर क्यू बुला रही थी लग रहा था तुम जानती हो उसे”

“ऐसा कुछ नहीं है मैं.... मैं नशे मे थी ना तो बस अब जाओ तुम” अक्षिता ने जैसे तैसे बात टाली

“अच्छा ठीक है मैं ऑफिस के लिए निकल रही हु, ये दवाई लो तुम्हें ठीक लगेगा, किचन मे नाश्ता और नींबुपानी बना के रखा है ले लेना आउए आराम करना” स्वरा ने अक्षिता को दवाई पकड़ाते हुए कहा अक्षिता ने भी दवाई ले ली और स्वरा को बाय करके कल रात के बारे मे सोचने लगी,

कुछ समय बाद जब अक्षिता का सर दर्द कम हुआ तो दिमाग पे थोड़ा जोर डालने के बाद अक्षिता को कल रात का पूरा सीन याद आ गया था, उसे याद आ गया था के वो कैसे एकांश की गॉड मे उसकी बाहों मे थी, उससे चिपकी हुई थी, और इस वक्त अक्षिता के दिमाग मे कई सवाल चल रहे

‘ये क्या कर दिया मैंने’

‘पता नहीं एकांश क्या सोच रहा होगा’

‘इतने लोगों मे मुझे उससे ही भिड़ना था क्या’

‘और मुझे शराब का पता कैसे नहीं चला यार’

‘नहीं ये मैं नहीं होने दे सकती मैं अपने ही डिसिशन के खिलाफ हो रही हु ऐसे तो उससे दूर जाने के मेरे फैसले पर असर पड़ेगा’

‘मैं ये नहीं होने दे सकती’

‘मेरा उससे दूर रहना ही बेहतर होगा’


--

दूसरी तरफ एकांश इस वक्त अपने ऑफिस मे था और वो थोड़ा डिस्टर्ब लग रहा था, उसके दिमाग मे कल रात की घटनाए चल रही थी के कैसे अक्षिता उसे उससे दूर नहीं होने दे रही थी, उसे कल नशे मे धुत अक्षिता का बिहैव्यर थोड़ा अलग लगा था

एकांश ने अक्षिता के आंखो में डर इनसिक्योरिटी महसूस की थी, ऐसा लग रहा था कुछ कहना था उसे लेकिन वो अपने आप को रोक रही थी, स्वरा भी एकांश से कुछ कहना चाहती थी लेकिन कह नही पाई थी और यही सब बाते इस वक्त एकांश के दिमाग में घूम रही थी और एकांश के इन खयालों को रोका उसके दरवाजे पर हुए नॉक ने

"कम इन"

दरवाजा खुला और एकांश ने उस ओर देखा तो वहा अमर खड़ा था जो अपने हमेशा वाले मजाकिया अंदाज में नही लग रहा था

"एकांश मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है" अमर ने सीरियस टोन में कहा और उसे ऐसे गंभीर देख एकांश को भी कुछ अलग लगा

"आजा बैठ, मुझे भी तुझसे कुछ बात करनी है" एकांश ने अपना लैपटॉप और फाइल्स बंद करते हुए कहा

"पहले मुझे ये बता तू अक्षिता को स्टॉक क्यों कर रहा था?" इससे पहले के अमर कुछ बोलता एकांश ने सवाल दाग दिया

"मैं भी इसी बारे में बात करने आया हु और तुझे इस बारे में कैसे पता चला" अमर बोला

"मतलब सच है ये, हैना?"

"मैं उसे कोई स्टॉक नही कर रहा था बस कुछ जगह पीछा किया था उसका"

"वही तो जानना है मुझे क्यों किया था?"

"उसकी जिंदगी के बारे में जानने के लिए" अमर ने आराम से कहा

"और तू उसके बारे में क्यों जानना चाहता है?" एकांश को हल्का हल्का गुस्सा आ रहा था

"मुझे लगता है वो कुछ छुपा रही है जो हमे नही पता जो तुझे जुड़ा है बस इसीलिए"

"मतलब?" एकांश थोड़ा अब कंफ्यूज था

"मैं जो पुछु बस तू उसका जवाब दे, मुझे बता तुम दोनो अलग क्यों हुए थे" अमर ने पूछा

"तू सब जानता है अमर" एकांश ने मुट्ठियां भींचते हुए कहा

"तू बता यार"

"वो प्यार नही करती मुझसे इसीलिए"

"और ये किसने कहा"

"तू नशा करके आया है क्या, उसने खुद ने और कौन बोलेगा"

"ये कब बोला उसका और क्यों बोला?"

"जब मैने उसे बताया के मैंने हमारे बारे में घर पर बता दिया है और मेरी मां उससे मिलना चाहती है तब उसने कहा था के वो कोई कमिटमेंट नही चाहती है, सेटल होना नही चाहती है और जब मैने उससे कहा के हम प्यार करते है एकदूसरे से तब इसमें प्रॉब्लम क्या है रिश्ते को आगे लेजाने में क्या दिक्कत है तब उसने कहा के वो मुझसे प्यार नही करती उसे बस मेरा अटेंशन मेरा पैसा प्यारा था मैं नही" एकांश ने पूरी कहानी के सुनाई वही अमर अपने ही खयालों में था

"फिर क्या हुआ?" अमर ने आराम से पूछा

"फिर क्या होना I argued के वो झूठ बोल रही है हमारा रिश्ता कैसा था वगैरा लेकिन वो नहीं मानी, मैंने उससे कहा के मेरी आंखों में देख के कहे के वो मुझसे प्यार नही करती और उसने वो कह दिया, बगैर किसी इमोशन के सीधा मेरी आंखों में देखते हुए" एकांश ने अपनी भावनाओं पे कंट्रोल करते हुए कहा

"फिर तूने क्या किया?"

"करना क्या था मैं एक लड़की के सामने अपने आपको एक लड़की के सामने कमजोर दिखाना नही चाहता था मैं वहा से और उसकी जिंदगी से निकल गया"

"उस इंसीडेंट के बाद कभी अक्षिता ने या तूने एकदूसरे से कॉन्टैक्ट करने को कोशिश की?"

"नही, वो मानो मेरी जिंदगी से गायब सी हो गई थी और उसके बाद मैंने उसे यही इसी ऑफिस में 1.5 साल बाद देखा और मेरा यहा इस ऑफिस में होना उसे नही जम रहा था और उसके बिहेवियर से वो मेरे आसपास नही रहना चाहती ये साफ था" एकांश सब बता रहा था और अमर सारी इन्फो ले रहा था

"लेकिन आज तू ये सब क्यों पूछ रहा है?" एकांश ने पूछा

“एकांश देख, शायद मेरी बात तुक ना बनाए लेकिन सच कुछ अलग है, तुझे ये सब अजीब नहीं लगता? बहुत कुछ है जो तुझे नहीं पता” अमर ने कहा

“क्या??”

“हा, तूने जो बोला जो कुछ तुझे पता है जो हुआ सब अधूरा है”

“तू साफ साफ बताएगा क्या कहना चाहता है?”

“मेरे भाई ऐसा है शायद अक्षिता ने तुझसे झूठ बोला है के वो तुझसे प्यार नहीं करती, तेरी बातों से ऐसा लगता है के उस सिचूऐशन मे कीसी बात ने अक्षिता को वो सब कहने फोर्स किया है, वो कुछ तो छिपा रही है, अब अक्षिता के पास उसके अपने रीज़न हो सकते है, शायद वो तुझसे प्यार करती हो लेकिन कह ना पा रही हो” अमर ने एकांश को पूरा मैटर समझाते हुए कहा

“तू समझ रहा है ना तू क्या कह रहा है? सब बकवास है ये, उसने दिल तोड़ा है मेरा, टु अच्छी तरह जानता है मैंने उसकी वजह से कितना सहा है? और अब तू कह रहा है वो प्यार करती है मुझसे... तू पागल हो गया है क्या?” एकांश ने थोड़ा गुस्से मे कहा, उसकी आंखे भी लाल हो रही थी

“जानता हु भाई सब जानता हु और इसीलिए इस मैटर की गहराई मे जाना चाहता हु, मैंने ऐसे ही उसका पीछा नहीं किया है, मैंने उसके बारे मे उसकी जिंदगी के बारे मे उसके कैरेक्टर के बारे मे जानने के लिए किया और मेरे भाई मैं दावे के साथ कह सकता हु के वो थोड़े अटेन्शन और फेम के लिए कीसी को धोका देने वालों मे से तो नहीं है” अमर एक सास मे बोल गया वही एकांश बस सुन रहा था

“तू खुद सोच तुझे ये सब अजीब नहीं लगता अगर उसे फेम और अटेन्शन ही चाहिए था तो वो तो तेरे साथ रहके भी आसानी से मिल सकता था, वो आंटी से मिल लेती तुम्हारी शादी हो जाती और ये सब आसानी से उसका होता, रघुवंशी परिवार की बहु बनने से कौनसी लड़की मना करेगी, उसकी जगह कोई और लड़की होती तो खुशी खुशी तेरेसे शादी कर लेती लेकिन उसने तुझे रिजेक्ट कर दिया, इसमे कुछ गड़बड़ है ऐसा नहीं लगता तुझे? मतलब अगर उसे पैसा अटेन्शन ही चाहिए था तो ये सब तेरे पास भी था फिर उसने तुझे रिजेक्ट क्यू किया, अगर उसे सच मे तुझे धोका देना होता तो ये तो वो तुझसे शादी करके कर लेती, पैसा मिलता वो अलग लेकिन उसने ये नहीं किया, कुछ तो है जो हमे नहीं पता और वो छिपाने मे माहिर है और अब हमे असल रीज़न पता करना है” इसीके साथ अमर ने अपनी बात खत्म की

अमर की बातों ने एकांश को सोचने पे मजबूर कर दिया था, अमर की बाते एकदम सही थी और ये सवाल तो उसने भी कई बार खुद से किया था के जिस लड़की को उसने इतना चाहा था वो उसे धोका कैसे दे सकती थी

“ठीक है, समझ गया और सच कहू तो मैंने भी सोचा था इस बारे मे लेकिन कभी कुछ जवाब नहीं मिला, ऐसा क्या रीज़न होगा के उसे ये करना पड़ा” अब एकांश भी अपनी सोच मे डूबा हुआ था

“मेरे दिमाग मे एक बात है लेकिन....” अमर बोलते हुए रुका

“क्या बात है बता...”

“तुझे याद है मैंने कहा था के मैंने इसे कही देखा है?” अमर अब भी दुविधा मे था के बताए या नहीं

“हा और अब प्लीज साफ साफ बात”

“मैंने उसे 1.5 साल पहले एक मॉल के बाहर कीसी से बात करते देखा था, इन्फैक्ट वो बात करते हुए रो रही थी” अमर ने कहा और एकांश को देखा

“कौन था वो?” एकांश ने पूछा और अब जो अमर बताने वाला था उसे सुन शायद एकांश को एक काफी बड़ा झटका मिलने वाला था

“तुम्हारी मा.....”



क्रमश:
Kya hi jathka diye ho parbu
Lazwaab shandaar update
 

Shetan

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259
Update 14



अक्षिता जब अगले दिन नींद से जागी तो सर दर्द के साथ ही, उसका सर भारी था और वो अपनी आंखे मलते हुए पलंग पर उठ बैठी थी,

अक्षिता ने अपनी आंखे खोल कर इधर उधर देखा तो अपने आप को अपने रूम मे ना पाकर वो थोड़ा चौकी और फिर जब उसकी नजर कमरे के दरवाजे पर गई तो उसने देखा के स्वरा दरवाजे पर खादी हाथ बांधे उसे देख रही थी और इस वक्त स्वरा काफी सीरीअस लग रही थी

“स्वरा, मैं तुम्हारे कमरे मे क्यू हु?” अक्षिता ने सर पर हाथ रखते हुए पूछा लेकिन स्वरा कुछ नहीं बोली

“स्वरा बता ना, और तुम ऐसे मुझे घूर क्यू रही हो?” अक्षिता ने वापिस पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं आया

“स्वरा”

“तुम्हें होश भी है क्या कर रही हो क्या चाहती हो?” स्वरा ने सीरीअसली कहा वही अक्षिता थोड़ा कन्फ्यूज़ थी

“कुछ याद है कल क्या हुआ? तुमने क्या किया? तुम जानती हो ना तुम्हें ऐसी चीजों से दूर रहना है वरना सही नहीं होगा” स्वरा ने थोड़ा गुस्से मे कहा

“अरे पर मैंने किया क्या है” अक्षिता ने पूछा

“तुम कल रात शराब के नशे मे धुत थी पूरी”

“क्या!!!” अक्षिता थोड़ा चौकी

“हा।“

“लेकिन मैंने तो कल ऐसा कुछ नहीं पिया” अक्षिता ने याद करते हुए कहा

“ओके टी अब मुझे ये बताओ के कल इतना क्या पी लिया था के अपन नशे मे है इसका भी तुमको ध्यान नहीं है”

“मैंने बस थोड़ा कोल्डड्रिंक और पानी पिया था और कुछ नहीं” अक्षिता ने कहा, “ओह शीट, वो शायद कुछ और ही था,” अक्षिता ने याद करते हुए कहा, वो सब याद करने की कोशिश कर रही थी

“वो जो भी हो अक्षु तुम जानती हो न ये तुम्हारे किए कितना खतरनाक हो सकता है, तुम्हें कुछ भी हो सकता था” स्वरा ने धीमे से कहा

“सॉरी यार पर मैंने जान बुझ कर नहीं किया है कुछ”

“जाने दो जो हुआ, अब तुम आराम करो, मैंने आंटी को बता ददिया है तुम यहा हो और मैं अब ऑफिस के लिए निकल रही हु” स्वरा ने कहा

“ओह शीट! ऑफिस के बारे मे तो मैं भूल ही गई थी” अक्षिता ने पलंग से उतरते हुए कहा

“अरे आराम से आज वैसे भी छुट्टी है तुम्हारी सो डोन्ट वरी” स्वरा ने अपना हैन्ड्बैग लेते हुए कहा

“छुट्टी?”

“एकांश की मेहरबानी है तुमपे, उसने की दी है”

“क्यू?”

“क्युकी अक्षु डिअर हमारा बॉस जानता था के तुमको हैंगओवर होने वाला है बस इसीलिए”

“लेकिन उसको कैसे पता चला के मैंने पी रखी थी?”

“उसे कैसे पता नहीं चलता वही तो तुम्हें यहा छोड़ कर गया है,” स्वरा ने कहा

“क्या??”

“तुम्हें सही मे कुछ याद नहीं क्या?” स्वरा ने हसते हुए कहा

“बस इतना बता मैंने कुछ उलटी सीधी हरकत तो नहीं की ना?”

“अक्षु बेबी आज छुट्टी है ना तो दिमाग पे जोर दलों सब याद आ जाएगा मुझे लेट मत कराओ” स्वरा ने जाते हुए कहा

“हा हा ठीक है, वैसे ही जो भी किया होगा तुम्हारे और रोहन के सामने ही किया होगा” अक्षिता ने वापिस दिमाग पे जोर डाला

“ना, वहा सब से खास कर अपने बॉस और उसका दोस्त” स्वरा मे मुसकुराते हुए कहा और अक्षिता ने अपने सर पे हाथ मार लिया

“मैंने क्या किया?”

“कुछ नहीं शाम हो बताऊँगी अभी लेट हो जाएगा मुझे”

“अच्छा इतना तो बता दे जब रोहन हमारे साथ था तो एकांश ने मुझे यहा क्यू छोड़ा? अक्षिता ने याद करते हुए कहा क्युकी वो और स्वरा रोहन के साथ उसकी कार मे गए थे

अब स्वरा रुकी

“रोहन तो हमे छोड़ देता लेकिन तुम एकांश को छोड़ ही नहीं रही थी, उसे अपने से दूर ही नहीं जाने दे रही थी एकदम चिपकी हुई थी उससे, वैसे अक्षु एक बात बता तू एकांश सर को अंश कहकर क्यू बुला रही थी?”

स्वरा का सवाल सुन कर अक्षिता थोड़ा चौकी, उसे ध्यान मे आ गया था के उससे नशे मे गलती तो हुई है,

“अब लेट नहीं हो रहा था तुझे?”

“अरे वो देखा जाएगा तुम पहले ये बताओ तुम एकांश को अंश कह कर क्यू बुला रही थी लग रहा था तुम जानती हो उसे”

“ऐसा कुछ नहीं है मैं.... मैं नशे मे थी ना तो बस अब जाओ तुम” अक्षिता ने जैसे तैसे बात टाली

“अच्छा ठीक है मैं ऑफिस के लिए निकल रही हु, ये दवाई लो तुम्हें ठीक लगेगा, किचन मे नाश्ता और नींबुपानी बना के रखा है ले लेना आउए आराम करना” स्वरा ने अक्षिता को दवाई पकड़ाते हुए कहा अक्षिता ने भी दवाई ले ली और स्वरा को बाय करके कल रात के बारे मे सोचने लगी,

कुछ समय बाद जब अक्षिता का सर दर्द कम हुआ तो दिमाग पे थोड़ा जोर डालने के बाद अक्षिता को कल रात का पूरा सीन याद आ गया था, उसे याद आ गया था के वो कैसे एकांश की गॉड मे उसकी बाहों मे थी, उससे चिपकी हुई थी, और इस वक्त अक्षिता के दिमाग मे कई सवाल चल रहे

‘ये क्या कर दिया मैंने’

‘पता नहीं एकांश क्या सोच रहा होगा’

‘इतने लोगों मे मुझे उससे ही भिड़ना था क्या’

‘और मुझे शराब का पता कैसे नहीं चला यार’

‘नहीं ये मैं नहीं होने दे सकती मैं अपने ही डिसिशन के खिलाफ हो रही हु ऐसे तो उससे दूर जाने के मेरे फैसले पर असर पड़ेगा’

‘मैं ये नहीं होने दे सकती’

‘मेरा उससे दूर रहना ही बेहतर होगा’


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दूसरी तरफ एकांश इस वक्त अपने ऑफिस मे था और वो थोड़ा डिस्टर्ब लग रहा था, उसके दिमाग मे कल रात की घटनाए चल रही थी के कैसे अक्षिता उसे उससे दूर नहीं होने दे रही थी, उसे कल नशे मे धुत अक्षिता का बिहैव्यर थोड़ा अलग लगा था

एकांश ने अक्षिता के आंखो में डर इनसिक्योरिटी महसूस की थी, ऐसा लग रहा था कुछ कहना था उसे लेकिन वो अपने आप को रोक रही थी, स्वरा भी एकांश से कुछ कहना चाहती थी लेकिन कह नही पाई थी और यही सब बाते इस वक्त एकांश के दिमाग में घूम रही थी और एकांश के इन खयालों को रोका उसके दरवाजे पर हुए नॉक ने

"कम इन"

दरवाजा खुला और एकांश ने उस ओर देखा तो वहा अमर खड़ा था जो अपने हमेशा वाले मजाकिया अंदाज में नही लग रहा था

"एकांश मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है" अमर ने सीरियस टोन में कहा और उसे ऐसे गंभीर देख एकांश को भी कुछ अलग लगा

"आजा बैठ, मुझे भी तुझसे कुछ बात करनी है" एकांश ने अपना लैपटॉप और फाइल्स बंद करते हुए कहा

"पहले मुझे ये बता तू अक्षिता को स्टॉक क्यों कर रहा था?" इससे पहले के अमर कुछ बोलता एकांश ने सवाल दाग दिया

"मैं भी इसी बारे में बात करने आया हु और तुझे इस बारे में कैसे पता चला" अमर बोला

"मतलब सच है ये, हैना?"

"मैं उसे कोई स्टॉक नही कर रहा था बस कुछ जगह पीछा किया था उसका"

"वही तो जानना है मुझे क्यों किया था?"

"उसकी जिंदगी के बारे में जानने के लिए" अमर ने आराम से कहा

"और तू उसके बारे में क्यों जानना चाहता है?" एकांश को हल्का हल्का गुस्सा आ रहा था

"मुझे लगता है वो कुछ छुपा रही है जो हमे नही पता जो तुझे जुड़ा है बस इसीलिए"

"मतलब?" एकांश थोड़ा अब कंफ्यूज था

"मैं जो पुछु बस तू उसका जवाब दे, मुझे बता तुम दोनो अलग क्यों हुए थे" अमर ने पूछा

"तू सब जानता है अमर" एकांश ने मुट्ठियां भींचते हुए कहा

"तू बता यार"

"वो प्यार नही करती मुझसे इसीलिए"

"और ये किसने कहा"

"तू नशा करके आया है क्या, उसने खुद ने और कौन बोलेगा"

"ये कब बोला उसका और क्यों बोला?"

"जब मैने उसे बताया के मैंने हमारे बारे में घर पर बता दिया है और मेरी मां उससे मिलना चाहती है तब उसने कहा था के वो कोई कमिटमेंट नही चाहती है, सेटल होना नही चाहती है और जब मैने उससे कहा के हम प्यार करते है एकदूसरे से तब इसमें प्रॉब्लम क्या है रिश्ते को आगे लेजाने में क्या दिक्कत है तब उसने कहा के वो मुझसे प्यार नही करती उसे बस मेरा अटेंशन मेरा पैसा प्यारा था मैं नही" एकांश ने पूरी कहानी के सुनाई वही अमर अपने ही खयालों में था

"फिर क्या हुआ?" अमर ने आराम से पूछा

"फिर क्या होना I argued के वो झूठ बोल रही है हमारा रिश्ता कैसा था वगैरा लेकिन वो नहीं मानी, मैंने उससे कहा के मेरी आंखों में देख के कहे के वो मुझसे प्यार नही करती और उसने वो कह दिया, बगैर किसी इमोशन के सीधा मेरी आंखों में देखते हुए" एकांश ने अपनी भावनाओं पे कंट्रोल करते हुए कहा

"फिर तूने क्या किया?"

"करना क्या था मैं एक लड़की के सामने अपने आपको एक लड़की के सामने कमजोर दिखाना नही चाहता था मैं वहा से और उसकी जिंदगी से निकल गया"

"उस इंसीडेंट के बाद कभी अक्षिता ने या तूने एकदूसरे से कॉन्टैक्ट करने को कोशिश की?"

"नही, वो मानो मेरी जिंदगी से गायब सी हो गई थी और उसके बाद मैंने उसे यही इसी ऑफिस में 1.5 साल बाद देखा और मेरा यहा इस ऑफिस में होना उसे नही जम रहा था और उसके बिहेवियर से वो मेरे आसपास नही रहना चाहती ये साफ था" एकांश सब बता रहा था और अमर सारी इन्फो ले रहा था

"लेकिन आज तू ये सब क्यों पूछ रहा है?" एकांश ने पूछा

“एकांश देख, शायद मेरी बात तुक ना बनाए लेकिन सच कुछ अलग है, तुझे ये सब अजीब नहीं लगता? बहुत कुछ है जो तुझे नहीं पता” अमर ने कहा

“क्या??”

“हा, तूने जो बोला जो कुछ तुझे पता है जो हुआ सब अधूरा है”

“तू साफ साफ बताएगा क्या कहना चाहता है?”

“मेरे भाई ऐसा है शायद अक्षिता ने तुझसे झूठ बोला है के वो तुझसे प्यार नहीं करती, तेरी बातों से ऐसा लगता है के उस सिचूऐशन मे कीसी बात ने अक्षिता को वो सब कहने फोर्स किया है, वो कुछ तो छिपा रही है, अब अक्षिता के पास उसके अपने रीज़न हो सकते है, शायद वो तुझसे प्यार करती हो लेकिन कह ना पा रही हो” अमर ने एकांश को पूरा मैटर समझाते हुए कहा

“तू समझ रहा है ना तू क्या कह रहा है? सब बकवास है ये, उसने दिल तोड़ा है मेरा, टु अच्छी तरह जानता है मैंने उसकी वजह से कितना सहा है? और अब तू कह रहा है वो प्यार करती है मुझसे... तू पागल हो गया है क्या?” एकांश ने थोड़ा गुस्से मे कहा, उसकी आंखे भी लाल हो रही थी

“जानता हु भाई सब जानता हु और इसीलिए इस मैटर की गहराई मे जाना चाहता हु, मैंने ऐसे ही उसका पीछा नहीं किया है, मैंने उसके बारे मे उसकी जिंदगी के बारे मे उसके कैरेक्टर के बारे मे जानने के लिए किया और मेरे भाई मैं दावे के साथ कह सकता हु के वो थोड़े अटेन्शन और फेम के लिए कीसी को धोका देने वालों मे से तो नहीं है” अमर एक सास मे बोल गया वही एकांश बस सुन रहा था

“तू खुद सोच तुझे ये सब अजीब नहीं लगता अगर उसे फेम और अटेन्शन ही चाहिए था तो वो तो तेरे साथ रहके भी आसानी से मिल सकता था, वो आंटी से मिल लेती तुम्हारी शादी हो जाती और ये सब आसानी से उसका होता, रघुवंशी परिवार की बहु बनने से कौनसी लड़की मना करेगी, उसकी जगह कोई और लड़की होती तो खुशी खुशी तेरेसे शादी कर लेती लेकिन उसने तुझे रिजेक्ट कर दिया, इसमे कुछ गड़बड़ है ऐसा नहीं लगता तुझे? मतलब अगर उसे पैसा अटेन्शन ही चाहिए था तो ये सब तेरे पास भी था फिर उसने तुझे रिजेक्ट क्यू किया, अगर उसे सच मे तुझे धोका देना होता तो ये तो वो तुझसे शादी करके कर लेती, पैसा मिलता वो अलग लेकिन उसने ये नहीं किया, कुछ तो है जो हमे नहीं पता और वो छिपाने मे माहिर है और अब हमे असल रीज़न पता करना है” इसीके साथ अमर ने अपनी बात खत्म की

अमर की बातों ने एकांश को सोचने पे मजबूर कर दिया था, अमर की बाते एकदम सही थी और ये सवाल तो उसने भी कई बार खुद से किया था के जिस लड़की को उसने इतना चाहा था वो उसे धोका कैसे दे सकती थी

“ठीक है, समझ गया और सच कहू तो मैंने भी सोचा था इस बारे मे लेकिन कभी कुछ जवाब नहीं मिला, ऐसा क्या रीज़न होगा के उसे ये करना पड़ा” अब एकांश भी अपनी सोच मे डूबा हुआ था

“मेरे दिमाग मे एक बात है लेकिन....” अमर बोलते हुए रुका

“क्या बात है बता...”

“तुझे याद है मैंने कहा था के मैंने इसे कही देखा है?” अमर अब भी दुविधा मे था के बताए या नहीं

“हा और अब प्लीज साफ साफ बात”

“मैंने उसे 1.5 साल पहले एक मॉल के बाहर कीसी से बात करते देखा था, इन्फैक्ट वो बात करते हुए रो रही थी” अमर ने कहा और एकांश को देखा

“कौन था वो?” एकांश ने पूछा और अब जो अमर बताने वाला था उसे सुन शायद एकांश को एक काफी बड़ा झटका मिलने वाला था

“तुम्हारी मा.....”



क्रमश:
Amezing... Socha nahi tha ki ye bhi ho sakta hai. Kyo akshita jab ansh ki maa se uske ghar mili tab ese koi behave dekne ko nahi mile. Amezing.
 
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