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Romance Ek Duje ke Vaaste..

Adirshi

Royal कारभार 👑
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Sr. Moderator
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Update 10



कुछ दिनों तक सब कुछ एकदम शांत रहा एकदम नॉर्मल बस एक ही चीज बदली थी, एकांश का अक्षिता के प्रति रवैया थोड़ा सौम्य हो गया था, वो अब भी उससे ज्यादा बात नहीं करता था लेकिन कठोरता से भी बात नहीं करता था वही अक्षिता भी उससे जितना हो सके उतना दूर रहने की कोशिश करती थी, काम के अलावा वो एक पल भी उसके केबिन मे नहीं रुकती थी,

आज एकांश का जन्मदिन हुए एक हफ्ता हो गया था और वो इस वक्त अपने केबिन मे था वही आज अक्षिता ऑफिस ही नहीं आई थी और ये बात एकांश को परेशान कर रही थी

“कम इन” जब एकांश ने अपने केबिन कर दरवाजे पर नॉक सुना तो उसने कहा

दरवाजा खुला तो वहा रोहन और स्वरा खड़े थे..

“सर आपने बुलाया हमे?” रोहन ने पूछा

“यस, हेव अ सीट” एकांश ने सपाट आवाज मे कहा

रोहन और स्वरा ने एकदूसरे को देखा और एकांश के सामने रखी कुर्सियों पर बैठ गए

“कहा है वो?” एकांश ने उन दोनों को देखते हुए पूछा

“कौन?” स्वरा

“मिस पांडे” एकांश ने बताया

“वो छुट्टी पर है सर, उसने कहा था के इस बारे मे उसने आपको अपना लीव ऐप्लकैशन ईमेल किया है” स्वरा ने नर्वस होते हुए कहा

“अचानक छुट्टी की क्या जरूरत पड गई? वो भी कुछ दिनों के लिए?” एकांश ने अपने लपटॉप मे अक्षिता का लीव ऐप्लकैशन पढ़ते हुए उन दोनों से पूछा

स्वरा ने एक नजर रोहन को देखा मानो पुछ रही हो क्या बताए

“सर... वो... वो उसकी तबीयत ठीक नहीं है” रोहन ने हिचकते हुए कहा

“क्यू... क्या हुआ है उसे?” एकांश ने एकदम से पूछा, उसकी आवाज मे अक्षिता के लिए चिंता साफ झलक रही थी वही उसके बिहैव्यर मे अचानक आए इस बदलाव से रोहन और स्वरा थोड़ा चौके

“कु... कुछ नहीं सर.. बस बुखार है” स्वरा ने कहा

“सिर्फ बुखार है, फिर उसने ऐसा क्यू कहा के वो कुछ दिनों तक ऑफिस नहीं आ पाएगी” एकांश को अब थोड़ा डाउट होने लगा था

“वाइरल फ्लू है सर वो ठीक होते ही वापिस ऑफिस आ जाएगी” रोहन ने कहा जिसपर एकांश ने हा मे गर्दन हिला दी लेकिन उसे अब भी उनकी बातों पर यकीन नहीं हो रहा था

“सर हम जाए?” कुछ पल तक जब एकांश कुछ नहीं बोला तब स्वरा ने पूछा

“हम्म” एकांश ने कहा और वापिस अपने काम मे लग गया

इधर रोहन और स्वरा दोनों ने केबिन से बाहर आते ही राहत की सास ली

“पता नहीं अक्षु कैसे इस केबिन मे इसके साथ सारा टाइम काम करती है” स्वरा ने अपने माथे पर आया पसीना पोंछते हुए कहा

“वही तो ऐसा लग रहा था इंटरोगेशन चल रही थी”

“वैसे बुखार का बहाना सही बनाया है तुमने, मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था क्या बोले” स्वरा ने कहा वो दोनों लिफ्ट की ओर बढ़ रहे थे

“अब कुछ तो बताना ही था, असल बात नहीं बता सकते क्युकी असल रीज़न जानने के बाद हमे नहीं पता वो कैसे रीऐक्ट करता” रोहन ने चिंतित स्वर मे कहा

“वो लोग वहा पहुच गए होंगे क्या?” स्वरा ने अपनी घड़ी मे देखते हुए पूछा, वो लोग अब लिफ्ट मे थे

“इतनी जल्दी कहा अभी तो और कम से कम दो घंटे लगेंगे उनको पहुचने मे” रोहन ने कहा

“यार मैं उसे अभी से मिस कर रही हु”

“मैं भी” रोहन ने कुछ सोचते हुए कहा

“अक्षु का वहा जाने का जरा भी मन नहीं था, वो तो उसके पेरेंट्स जबरदस्ती ले गए है उसको” स्वरा ने कहा

“और पेरेंट्स की बात मानने को कन्विन्स हमने किया था देखना वापिस आने के बाद अपना ही दिमाग खाएगी वो” रोहन ने हसते हुए कहा और वो दोनों वापिस अपनी अपनी डेस्क पर अपने अपने काम मे लग गए...

--

एकांश बहुत ज्यादा बेचैन था, एक तो वो सुबह से अक्षिता की राह देख रहा था के वो उसकी कॉफी लेकर आएगी लेकिन वो नहीं आई और अब जब चुकी उसे पता चल चुका था के वो कुछ दिन नहीं आएगी तो उसे कुछ ठीक सा नहीं लग रहा था, उसने और एक बार उस लीव ऐप्लकैशन वाले ईमेल को पढ़ा

उसे खुद पर ही ताजूब हो रहा था के वो उसकी इतनी केयर क्यू कर रहा है वो तो उससे नफरत करता था..

एकांश ने अपना काम करना शुरू किया लेकिन वो अपने काम पर फोकस ही नहीं कर पा रहा था, रोहन और स्वरा से बात करने के बाद उसे ये भी लग रहा था के कुछ तो था जो उसे पता नहीं था, वो लोग कुछ तो छिपा रहे थे लेकिन फिर एकांश ने उस ओर से अपना ध्यान हटाया और अपने आप को काम मे बिजी करने मे कमियाब हो गया...

एकांश अपने काम मे लगा हुआ ही था के अचानक उसके केबिन का दरवाजा खुला और एक बंदा अंदर आया, एकांश ने गुस्से से अपने केबिन मे आने वाले तो देखा तो पाया के जो आया था उसपे वो सही से गुस्सा भी नहीं कर सकता था..

“अंदर आने के पहले नॉक करना होता है भूल गया क्या” एकांश ने अमर को घूरते हुए कहा

“हाओ भूल गया” अमर ने भी बात झटकते हुए कहा

“अमर, तू क्यू आया है?”

“क्यू मतलब तेरे से मिलने और क्या”

“तेरे पास और कोई काम नहीं है क्या”

“नहीं है, वैसे काम से याद आया तेरी अससिस्टेंट नहीं दिख रही आज” अमर ने पूछा

“तुझे क्या मतलब है उससे” एकांश ने हल्के गुस्से मे कहा

“मतलब है ब्रो समझा कर” एकांश के गुस्से को इग्नोर करते हुए अमर ने हसते हुए कहा

“शट अप अमर”

“लेकिन सही मे कहा है वो मैं आ रहा था तब भी नहीं दिखी”

“कुछ दिनों की छुट्टी पे है”

“ओह” जिसके बाद अमर इधर उधर की बात करते हुए एकांश का दिमाग खाने लगा लेकिन इसमे एक बात अच्छी हुई एकांश का ध्यान अक्षिता से हट गया था

--

एकांश की कार रघुवंशी मेनशन के बड़े से गेट मे से अंदर घुसी, एकांश कार से निकल कर घर मे आया और अपने रूम की ओर जाती हुई सीढ़िया चढ़ने ही वाला था के कीसी ने उसे पुकारा

“एकांश”

“हा मा” एकांश ने अपनी मा का आवाज सुन कर कहा जो डाइनिंग टेबल के पास खड़ी थी और स्माइल से साथ उसे देख रही थी

“इधर आओ”

जिसके बाद एकांश उनके पास जाकर खड़ा हुआ

“क्या हुआ मा?”

“बेटा इतना लेट ऑफिस मे क्या कर रहे थे, तुम्हें अपनी जरा भी फिक्र नहीं है, देखो कितने थके थके से लग रहे हो”

“मैं ठीक हु मा बस आज काम कुछ ज्यादा था तो लेट हो गया” एकांश ने कहा

जिसके बाद उन्होंने एक जूस का ग्लास एकांश की ओर बढ़ाया और उसने भी बगैर ज्यादा कुछ बोले जूस पी लिया

एकांश की मा को अब आदत हो चुकी थी एकांश का ऐसा उतर हुआ चेहरा देखने की, उनकी आँखों मे मौजूद सुनापान उन्हे साफ महसूस होता था और अपने बेटे को ऐसे देख उनका दिल भी दुखता था और वो इस सब के पीछे का कारण जानते हुए भी कुछ नहीं कर पा रही थी, एकांश मानो हसना ही भूल गया था पिछले 1.5 साल मे उन्होंने उसे कभी हसते खुश होते नहीं देखा था, ना तो एकांश ज्यादा कीसी से मिलता था ना बात करता था बस जितना जरूरी हो उठा ही बोलता था, उसने अपने इर्द गिर्द एक दीवार सी खड़ी कर दी थी जिसमे कीसी को प्रवेश नहीं था, वो एकांश के सर पर हाथ घुमाते हुए यही सोच रही थी

“थैंक्स मा” एकांश ने कहा

एकांश ने वो कीसी को पसंद करता है ये बताने के बाद जो भी कुछ हुआ था उस सब को याद कर उसकी मा के आंखे भर आई थी

“कब तक ऐसे ही रहोगे बेटा , कभी तो आगे बढ़ना होगा ना पुरानी बाते भुलनी होंगी” उन्होंने एकांश को समझाते हुए कहा

बात किस ओर जा रही है एकांश जान रहा था और वो इस बारे मे जरा भी बात नहीं करना चाहता था

“मैं... मैं थक गया हु मा, मैं फ्रेश होकर आता हु” एकांश ने कहा और वहा से जाने लगा

“जल्दी आना, मैं कहना लगवाती हु तब तक”

जिसके बाद एकांश अपने कमरे की ओर चला गया

अपने रूम मे आकार अपना बैग साइड मे रख एकांश अपने बेड पर जा लेटा और जैसे ही उसने अपनी आंखे बंद की उसकी नजरों के सामने एक चेहरा आया और उसने झटके से अपनी आंखे खोली और उठ बैठा, एकांश अपने शर्ट की बटन खोलते हुए अपनी अलमारी तक गया

उसने अलमारी मे का रक ड्रॉर खोला और उसमे से एक तस्वीर निकाली, उस फोटो को देखते हुए उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान उभर आई थी..

‘तुमने ऐसा क्यू किया अक्षिता? तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो? ये जानते हुए भी के मैंने तुम्हें कितना चाहा था.. क्यू धोका दिया तुमने मुझे? क्या उस रिश्ते मे जरा भी सच्चाई नहीं थी? एक पल भी सच नहीं था?’

एकांश के दिमाग मे कई सवाल कौंध रहे थे.. उसे पता भी नहीं चला कब उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे थे, उस फोटो मे वो और अक्षिता साथ थे जिसमे उसने उसे पीछे से गले लगाया हुआ था और अक्षिता उसे प्यार से देख रही थी

वो सब झूठ था क्या? अक्षिता के होंठों पर खिलती वो मुस्कान, उसकी आँखों की मासूमियत और प्यार, शर्म से लाल हुए उसके गाल, सब कुछ एक छलावा था?”

एकांश ने वो फोटो वापिस ड्रॉर मे रखा और अपने आँसू पोंछे और बाथरूम मे शॉवर लेने चला गया ताकि अपने आप को थोड़ा रीलैक्स कर सके

--

एकांश अपने ऑफिस मे आ चुका था और अपने केबिन की ओर जाते हुए उसने एक नजर अक्षिता के डेस्क की ओर मारी जो की खाली था, उसने एक लंबी सास छोड़ी और रोहन और स्वरा को देखा जो उसे देख काम मे लग गए थे जैसे उन्होंने उसे देखा ही नहीं था

‘ये लोग कुछ तो छुपा रहे है’ एकांश ने मन ही मन कहा

आज अक्षिता को छुट्टी पर गए तीन दिन हो चुके थे और एकांश अब तक ये बात नाही पचा पाया था वही वो ये भी नहीं मानना चाहता था के वो अक्षिता को मिस कर रहा था

इस सब मे हुआ के के उसका फ्रस्ट्रैशन बढ़ रहा था जिसका सामना उसके एम्प्लॉईस को करना पड रहा था, एकांश की चिढ़चिढ़ बढ़ गई थी और वो अपने हर स्टाफ मेम्बर पर काम से काम एक बार तो जरूर चिल्लाया था, और इस सब मे उसका सबसे ईजी टारगेट बनी बेचारी पूजा जो अक्षिता की जगह काम देख रही थी

एकांश अपनी खुर्ची पर अपना मठ पकड़े बैठा था

‘ये क्या हो गया है मुझे? मुझे उससे दूर रहना है ना की उसे मिस करना है, यू हैट हर एकांश रघुवंशी, यू हेट हर!’

जिसके बाद एकांश मे काम मे अपना मन लगाना चालू किया लेकिन फिर वही बीच बीच मे अक्षिता क खयाल उसका ध्यान भटका देता था और यही उसका फ्रस्ट्रैशन बढ़ा रहा था

‘मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए के वो यहा है या नहीं है, मुझे उससे कुछ लेना देना नहीं है, मैं आज ही ये प्रण लेटा हु के मुझे वो यहा रहे ना रहे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा, आइ विल नॉट रीऐक्ट टु हर प्रेजेन्स ऑर आबसेंस’

और जैसे ही एकांश ने ये सोचा उसके केबिन का दरवाजा खुला, उसने उधर देखा तो वहा उसके सामने अक्षिता खड़ी थी और उसके हाथ मे उसकी कॉफी थी।

“तुम वापिस आ गई!” अक्षिता को देख एकांश ने लगभग चिल्लाते हुए अपनी जगह से उठते हुए कहा..



क्रमश:
 

Sweetkaran

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कुछ दिनों तक सब कुछ एकदम शांत रहा एकदम नॉर्मल बस एक ही चीज बदली थी, एकांश का अक्षिता के प्रति रवैया थोड़ा सौम्य हो गया था, वो अब भी उससे ज्यादा बात नहीं करता था लेकिन कठोरता से भी बात नहीं करता था वही अक्षिता भी उससे जितना हो सके उतना दूर रहने की कोशिश करती थी, काम के अलावा वो एक पल भी उसके केबिन मे नहीं रुकती थी,

आज एकांश का जन्मदिन हुए एक हफ्ता हो गया था और वो इस वक्त अपने केबिन मे था वही आज अक्षिता ऑफिस ही नहीं आई थी और ये बात एकांश को परेशान कर रही थी

“कम इन” जब एकांश ने अपने केबिन कर दरवाजे पर नॉक सुना तो उसने कहा

दरवाजा खुला तो वहा रोहन और स्वरा खड़े थे..

“सर आपने बुलाया हमे?” रोहन ने पूछा

“यस, हेव अ सीट” एकांश ने सपाट आवाज मे कहा

रोहन और स्वरा ने एकदूसरे को देखा और एकांश के सामने रखी कुर्सियों पर बैठ गए

“कहा है वो?” एकांश ने उन दोनों को देखते हुए पूछा

“कौन?” स्वरा

“मिस पांडे” एकांश ने बताया

“वो छुट्टी पर है सर, उसने कहा था के इस बारे मे उसने आपको अपना लीव ऐप्लकैशन ईमेल किया है” स्वरा ने नर्वस होते हुए कहा

“अचानक छुट्टी की क्या जरूरत पड गई? वो भी कुछ दिनों के लिए?” एकांश ने अपने लपटॉप मे अक्षिता का लीव ऐप्लकैशन पढ़ते हुए उन दोनों से पूछा

स्वरा ने एक नजर रोहन को देखा मानो पुछ रही हो क्या बताए

“सर... वो... वो उसकी तबीयत ठीक नहीं है” रोहन ने हिचकते हुए कहा

“क्यू... क्या हुआ है उसे?” एकांश ने एकदम से पूछा, उसकी आवाज मे अक्षिता के लिए चिंता साफ झलक रही थी वही उसके बिहैव्यर मे अचानक आए इस बदलाव से रोहन और स्वरा थोड़ा चौके

“कु... कुछ नहीं सर.. बस बुखार है” स्वरा ने कहा

“सिर्फ बुखार है, फिर उसने ऐसा क्यू कहा के वो कुछ दिनों तक ऑफिस नहीं आ पाएगी” एकांश को अब थोड़ा डाउट होने लगा था

“वाइरल फ्लू है सर वो ठीक होते ही वापिस ऑफिस आ जाएगी” रोहन ने कहा जिसपर एकांश ने हा मे गर्दन हिला दी लेकिन उसे अब भी उनकी बातों पर यकीन नहीं हो रहा था

“सर हम जाए?” कुछ पल तक जब एकांश कुछ नहीं बोला तब स्वरा ने पूछा

“हम्म” एकांश ने कहा और वापिस अपने काम मे लग गया

इधर रोहन और स्वरा दोनों ने केबिन से बाहर आते ही राहत की सास ली

“पता नहीं अक्षु कैसे इस केबिन मे इसके साथ सारा टाइम काम करती है” स्वरा ने अपने माथे पर आया पसीना पोंछते हुए कहा

“वही तो ऐसा लग रहा था इंटरोगेशन चल रही थी”

“वैसे बुखार का बहाना सही बनाया है तुमने, मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था क्या बोले” स्वरा ने कहा वो दोनों लिफ्ट की ओर बढ़ रहे थे

“अब कुछ तो बताना ही था, असल बात नहीं बता सकते क्युकी असल रीज़न जानने के बाद हमे नहीं पता वो कैसे रीऐक्ट करता” रोहन ने चिंतित स्वर मे कहा

“वो लोग वहा पहुच गए होंगे क्या?” स्वरा ने अपनी घड़ी मे देखते हुए पूछा, वो लोग अब लिफ्ट मे थे

“इतनी जल्दी कहा अभी तो और कम से कम दो घंटे लगेंगे उनको पहुचने मे” रोहन ने कहा

“यार मैं उसे अभी से मिस कर रही हु”

“मैं भी” रोहन ने कुछ सोचते हुए कहा

“अक्षु का वहा जाने का जरा भी मन नहीं था, वो तो उसके पेरेंट्स जबरदस्ती ले गए है उसको” स्वरा ने कहा

“और पेरेंट्स की बात मानने को कन्विन्स हमने किया था देखना वापिस आने के बाद अपना ही दिमाग खाएगी वो” रोहन ने हसते हुए कहा और वो दोनों वापिस अपनी अपनी डेस्क पर अपने अपने काम मे लग गए...

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एकांश बहुत ज्यादा बेचैन था, एक तो वो सुबह से अक्षिता की राह देख रहा था के वो उसकी कॉफी लेकर आएगी लेकिन वो नहीं आई और अब जब चुकी उसे पता चल चुका था के वो कुछ दिन नहीं आएगी तो उसे कुछ ठीक सा नहीं लग रहा था, उसने और एक बार उस लीव ऐप्लकैशन वाले ईमेल को पढ़ा

उसे खुद पर ही ताजूब हो रहा था के वो उसकी इतनी केयर क्यू कर रहा है वो तो उससे नफरत करता था..

एकांश ने अपना काम करना शुरू किया लेकिन वो अपने काम पर फोकस ही नहीं कर पा रहा था, रोहन और स्वरा से बात करने के बाद उसे ये भी लग रहा था के कुछ तो था जो उसे पता नहीं था, वो लोग कुछ तो छिपा रहे थे लेकिन फिर एकांश ने उस ओर से अपना ध्यान हटाया और अपने आप को काम मे बिजी करने मे कमियाब हो गया...

एकांश अपने काम मे लगा हुआ ही था के अचानक उसके केबिन का दरवाजा खुला और एक बंदा अंदर आया, एकांश ने गुस्से से अपने केबिन मे आने वाले तो देखा तो पाया के जो आया था उसपे वो सही से गुस्सा भी नहीं कर सकता था..

“अंदर आने के पहले नॉक करना होता है भूल गया क्या” एकांश ने अमर को घूरते हुए कहा

“हाओ भूल गया” अमर ने भी बात झटकते हुए कहा

“अमर, तू क्यू आया है?”

“क्यू मतलब तेरे से मिलने और क्या”

“तेरे पास और कोई काम नहीं है क्या”

“नहीं है, वैसे काम से याद आया तेरी अससिस्टेंट नहीं दिख रही आज” अमर ने पूछा

“तुझे क्या मतलब है उससे” एकांश ने हल्के गुस्से मे कहा

“मतलब है ब्रो समझा कर” एकांश के गुस्से को इग्नोर करते हुए अमर ने हसते हुए कहा

“शट अप अमर”

“लेकिन सही मे कहा है वो मैं आ रहा था तब भी नहीं दिखी”

“कुछ दिनों की छुट्टी पे है”

“ओह” जिसके बाद अमर इधर उधर की बात करते हुए एकांश का दिमाग खाने लगा लेकिन इसमे एक बात अच्छी हुई एकांश का ध्यान अक्षिता से हट गया था

--

एकांश की कार रघुवंशी मेनशन के बड़े से गेट मे से अंदर घुसी, एकांश कार से निकल कर घर मे आया और अपने रूम की ओर जाती हुई सीढ़िया चढ़ने ही वाला था के कीसी ने उसे पुकारा

“एकांश”

“हा मा” एकांश ने अपनी मा का आवाज सुन कर कहा जो डाइनिंग टेबल के पास खड़ी थी और स्माइल से साथ उसे देख रही थी

“इधर आओ”

जिसके बाद एकांश उनके पास जाकर खड़ा हुआ

“क्या हुआ मा?”

“बेटा इतना लेट ऑफिस मे क्या कर रहे थे, तुम्हें अपनी जरा भी फिक्र नहीं है, देखो कितने थके थके से लग रहे हो”

“मैं ठीक हु मा बस आज काम कुछ ज्यादा था तो लेट हो गया” एकांश ने कहा

जिसके बाद उन्होंने एक जूस का ग्लास एकांश की ओर बढ़ाया और उसने भी बगैर ज्यादा कुछ बोले जूस पी लिया

एकांश की मा को अब आदत हो चुकी थी एकांश का ऐसा उतर हुआ चेहरा देखने की, उनकी आँखों मे मौजूद सुनापान उन्हे साफ महसूस होता था और अपने बेटे को ऐसे देख उनका दिल भी दुखता था और वो इस सब के पीछे का कारण जानते हुए भी कुछ नहीं कर पा रही थी, एकांश मानो हसना ही भूल गया था पिछले 1.5 साल मे उन्होंने उसे कभी हसते खुश होते नहीं देखा था, ना तो एकांश ज्यादा कीसी से मिलता था ना बात करता था बस जितना जरूरी हो उठा ही बोलता था, उसने अपने इर्द गिर्द एक दीवार सी खड़ी कर दी थी जिसमे कीसी को प्रवेश नहीं था, वो एकांश के सर पर हाथ घुमाते हुए यही सोच रही थी

“थैंक्स मा” एकांश ने कहा

एकांश ने वो कीसी को पसंद करता है ये बताने के बाद जो भी कुछ हुआ था उस सब को याद कर उसकी मा के आंखे भर आई थी

“कब तक ऐसे ही रहोगे बेटा , कभी तो आगे बढ़ना होगा ना पुरानी बाते भुलनी होंगी” उन्होंने एकांश को समझाते हुए कहा

बात किस ओर जा रही है एकांश जान रहा था और वो इस बारे मे जरा भी बात नहीं करना चाहता था

“मैं... मैं थक गया हु मा, मैं फ्रेश होकर आता हु” एकांश ने कहा और वहा से जाने लगा

“जल्दी आना, मैं कहना लगवाती हु तब तक”

जिसके बाद एकांश अपने कमरे की ओर चला गया

अपने रूम मे आकार अपना बैग साइड मे रख एकांश अपने बेड पर जा लेटा और जैसे ही उसने अपनी आंखे बंद की उसकी नजरों के सामने एक चेहरा आया और उसने झटके से अपनी आंखे खोली और उठ बैठा, एकांश अपने शर्ट की बटन खोलते हुए अपनी अलमारी तक गया

उसने अलमारी मे का रक ड्रॉर खोला और उसमे से एक तस्वीर निकाली, उस फोटो को देखते हुए उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान उभर आई थी..

‘तुमने ऐसा क्यू किया अक्षिता? तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो? ये जानते हुए भी के मैंने तुम्हें कितना चाहा था.. क्यू धोका दिया तुमने मुझे? क्या उस रिश्ते मे जरा भी सच्चाई नहीं थी? एक पल भी सच नहीं था?’

एकांश के दिमाग मे कई सवाल कौंध रहे थे.. उसे पता भी नहीं चला कब उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे थे, उस फोटो मे वो और अक्षिता साथ थे जिसमे उसने उसे पीछे से गले लगाया हुआ था और अक्षिता उसे प्यार से देख रही थी

वो सब झूठ था क्या? अक्षिता के होंठों पर खिलती वो मुस्कान, उसकी आँखों की मासूमियत और प्यार, शर्म से लाल हुए उसके गाल, सब कुछ एक छलावा था?”

एकांश ने वो फोटो वापिस ड्रॉर मे रखा और अपने आँसू पोंछे और बाथरूम मे शॉवर लेने चला गया ताकि अपने आप को थोड़ा रीलैक्स कर सके

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एकांश अपने ऑफिस मे आ चुका था और अपने केबिन की ओर जाते हुए उसने एक नजर अक्षिता के डेस्क की ओर मारी जो की खाली था, उसने एक लंबी सास छोड़ी और रोहन और स्वरा को देखा जो उसे देख काम मे लग गए थे जैसे उन्होंने उसे देखा ही नहीं था

‘ये लोग कुछ तो छुपा रहे है’ एकांश ने मन ही मन कहा

आज अक्षिता को छुट्टी पर गए तीन दिन हो चुके थे और एकांश अब तक ये बात नाही पचा पाया था वही वो ये भी नहीं मानना चाहता था के वो अक्षिता को मिस कर रहा था

इस सब मे हुआ के के उसका फ्रस्ट्रैशन बढ़ रहा था जिसका सामना उसके एम्प्लॉईस को करना पड रहा था, एकांश की चिढ़चिढ़ बढ़ गई थी और वो अपने हर स्टाफ मेम्बर पर काम से काम एक बार तो जरूर चिल्लाया था, और इस सब मे उसका सबसे ईजी टारगेट बनी बेचारी पूजा जो अक्षिता की जगह काम देख रही थी

एकांश अपनी खुर्ची पर अपना मठ पकड़े बैठा था

‘ये क्या हो गया है मुझे? मुझे उससे दूर रहना है ना की उसे मिस करना है, यू हैट हर एकांश रघुवंशी, यू हेट हर!’

जिसके बाद एकांश मे काम मे अपना मन लगाना चालू किया लेकिन फिर वही बीच बीच मे अक्षिता क खयाल उसका ध्यान भटका देता था और यही उसका फ्रस्ट्रैशन बढ़ा रहा था

‘मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए के वो यहा है या नहीं है, मुझे उससे कुछ लेना देना नहीं है, मैं आज ही ये प्रण लेटा हु के मुझे वो यहा रहे ना रहे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा, आइ विल नॉट रीऐक्ट टु हर प्रेजेन्स ऑर आबसेंस’

और जैसे ही एकांश ने ये सोचा उसके केबिन का दरवाजा खुला, उसने उधर देखा तो वहा उसके सामने अक्षिता खड़ी थी और उसके हाथ मे उसकी कॉफी थी।

“तुम वापिस आ गई!” अक्षिता को देख एकांश ने लगभग चिल्लाते हुए अपनी जगह से उठते हुए कहा..



क्रमश:
Nice update bro
 

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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जिंदगी भी आपके मजे लेती है 😌
 

Tiger 786

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कुछ दिनों तक सब कुछ एकदम शांत रहा एकदम नॉर्मल बस एक ही चीज बदली थी, एकांश का अक्षिता के प्रति रवैया थोड़ा सौम्य हो गया था, वो अब भी उससे ज्यादा बात नहीं करता था लेकिन कठोरता से भी बात नहीं करता था वही अक्षिता भी उससे जितना हो सके उतना दूर रहने की कोशिश करती थी, काम के अलावा वो एक पल भी उसके केबिन मे नहीं रुकती थी,

आज एकांश का जन्मदिन हुए एक हफ्ता हो गया था और वो इस वक्त अपने केबिन मे था वही आज अक्षिता ऑफिस ही नहीं आई थी और ये बात एकांश को परेशान कर रही थी

“कम इन” जब एकांश ने अपने केबिन कर दरवाजे पर नॉक सुना तो उसने कहा

दरवाजा खुला तो वहा रोहन और स्वरा खड़े थे..

“सर आपने बुलाया हमे?” रोहन ने पूछा

“यस, हेव अ सीट” एकांश ने सपाट आवाज मे कहा

रोहन और स्वरा ने एकदूसरे को देखा और एकांश के सामने रखी कुर्सियों पर बैठ गए

“कहा है वो?” एकांश ने उन दोनों को देखते हुए पूछा

“कौन?” स्वरा

“मिस पांडे” एकांश ने बताया

“वो छुट्टी पर है सर, उसने कहा था के इस बारे मे उसने आपको अपना लीव ऐप्लकैशन ईमेल किया है” स्वरा ने नर्वस होते हुए कहा

“अचानक छुट्टी की क्या जरूरत पड गई? वो भी कुछ दिनों के लिए?” एकांश ने अपने लपटॉप मे अक्षिता का लीव ऐप्लकैशन पढ़ते हुए उन दोनों से पूछा

स्वरा ने एक नजर रोहन को देखा मानो पुछ रही हो क्या बताए

“सर... वो... वो उसकी तबीयत ठीक नहीं है” रोहन ने हिचकते हुए कहा

“क्यू... क्या हुआ है उसे?” एकांश ने एकदम से पूछा, उसकी आवाज मे अक्षिता के लिए चिंता साफ झलक रही थी वही उसके बिहैव्यर मे अचानक आए इस बदलाव से रोहन और स्वरा थोड़ा चौके

“कु... कुछ नहीं सर.. बस बुखार है” स्वरा ने कहा

“सिर्फ बुखार है, फिर उसने ऐसा क्यू कहा के वो कुछ दिनों तक ऑफिस नहीं आ पाएगी” एकांश को अब थोड़ा डाउट होने लगा था

“वाइरल फ्लू है सर वो ठीक होते ही वापिस ऑफिस आ जाएगी” रोहन ने कहा जिसपर एकांश ने हा मे गर्दन हिला दी लेकिन उसे अब भी उनकी बातों पर यकीन नहीं हो रहा था

“सर हम जाए?” कुछ पल तक जब एकांश कुछ नहीं बोला तब स्वरा ने पूछा

“हम्म” एकांश ने कहा और वापिस अपने काम मे लग गया

इधर रोहन और स्वरा दोनों ने केबिन से बाहर आते ही राहत की सास ली

“पता नहीं अक्षु कैसे इस केबिन मे इसके साथ सारा टाइम काम करती है” स्वरा ने अपने माथे पर आया पसीना पोंछते हुए कहा

“वही तो ऐसा लग रहा था इंटरोगेशन चल रही थी”

“वैसे बुखार का बहाना सही बनाया है तुमने, मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था क्या बोले” स्वरा ने कहा वो दोनों लिफ्ट की ओर बढ़ रहे थे

“अब कुछ तो बताना ही था, असल बात नहीं बता सकते क्युकी असल रीज़न जानने के बाद हमे नहीं पता वो कैसे रीऐक्ट करता” रोहन ने चिंतित स्वर मे कहा

“वो लोग वहा पहुच गए होंगे क्या?” स्वरा ने अपनी घड़ी मे देखते हुए पूछा, वो लोग अब लिफ्ट मे थे

“इतनी जल्दी कहा अभी तो और कम से कम दो घंटे लगेंगे उनको पहुचने मे” रोहन ने कहा

“यार मैं उसे अभी से मिस कर रही हु”

“मैं भी” रोहन ने कुछ सोचते हुए कहा

“अक्षु का वहा जाने का जरा भी मन नहीं था, वो तो उसके पेरेंट्स जबरदस्ती ले गए है उसको” स्वरा ने कहा

“और पेरेंट्स की बात मानने को कन्विन्स हमने किया था देखना वापिस आने के बाद अपना ही दिमाग खाएगी वो” रोहन ने हसते हुए कहा और वो दोनों वापिस अपनी अपनी डेस्क पर अपने अपने काम मे लग गए...

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एकांश बहुत ज्यादा बेचैन था, एक तो वो सुबह से अक्षिता की राह देख रहा था के वो उसकी कॉफी लेकर आएगी लेकिन वो नहीं आई और अब जब चुकी उसे पता चल चुका था के वो कुछ दिन नहीं आएगी तो उसे कुछ ठीक सा नहीं लग रहा था, उसने और एक बार उस लीव ऐप्लकैशन वाले ईमेल को पढ़ा

उसे खुद पर ही ताजूब हो रहा था के वो उसकी इतनी केयर क्यू कर रहा है वो तो उससे नफरत करता था..

एकांश ने अपना काम करना शुरू किया लेकिन वो अपने काम पर फोकस ही नहीं कर पा रहा था, रोहन और स्वरा से बात करने के बाद उसे ये भी लग रहा था के कुछ तो था जो उसे पता नहीं था, वो लोग कुछ तो छिपा रहे थे लेकिन फिर एकांश ने उस ओर से अपना ध्यान हटाया और अपने आप को काम मे बिजी करने मे कमियाब हो गया...

एकांश अपने काम मे लगा हुआ ही था के अचानक उसके केबिन का दरवाजा खुला और एक बंदा अंदर आया, एकांश ने गुस्से से अपने केबिन मे आने वाले तो देखा तो पाया के जो आया था उसपे वो सही से गुस्सा भी नहीं कर सकता था..

“अंदर आने के पहले नॉक करना होता है भूल गया क्या” एकांश ने अमर को घूरते हुए कहा

“हाओ भूल गया” अमर ने भी बात झटकते हुए कहा

“अमर, तू क्यू आया है?”

“क्यू मतलब तेरे से मिलने और क्या”

“तेरे पास और कोई काम नहीं है क्या”

“नहीं है, वैसे काम से याद आया तेरी अससिस्टेंट नहीं दिख रही आज” अमर ने पूछा

“तुझे क्या मतलब है उससे” एकांश ने हल्के गुस्से मे कहा

“मतलब है ब्रो समझा कर” एकांश के गुस्से को इग्नोर करते हुए अमर ने हसते हुए कहा

“शट अप अमर”

“लेकिन सही मे कहा है वो मैं आ रहा था तब भी नहीं दिखी”

“कुछ दिनों की छुट्टी पे है”

“ओह” जिसके बाद अमर इधर उधर की बात करते हुए एकांश का दिमाग खाने लगा लेकिन इसमे एक बात अच्छी हुई एकांश का ध्यान अक्षिता से हट गया था

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एकांश की कार रघुवंशी मेनशन के बड़े से गेट मे से अंदर घुसी, एकांश कार से निकल कर घर मे आया और अपने रूम की ओर जाती हुई सीढ़िया चढ़ने ही वाला था के कीसी ने उसे पुकारा

“एकांश”

“हा मा” एकांश ने अपनी मा का आवाज सुन कर कहा जो डाइनिंग टेबल के पास खड़ी थी और स्माइल से साथ उसे देख रही थी

“इधर आओ”

जिसके बाद एकांश उनके पास जाकर खड़ा हुआ

“क्या हुआ मा?”

“बेटा इतना लेट ऑफिस मे क्या कर रहे थे, तुम्हें अपनी जरा भी फिक्र नहीं है, देखो कितने थके थके से लग रहे हो”

“मैं ठीक हु मा बस आज काम कुछ ज्यादा था तो लेट हो गया” एकांश ने कहा

जिसके बाद उन्होंने एक जूस का ग्लास एकांश की ओर बढ़ाया और उसने भी बगैर ज्यादा कुछ बोले जूस पी लिया

एकांश की मा को अब आदत हो चुकी थी एकांश का ऐसा उतर हुआ चेहरा देखने की, उनकी आँखों मे मौजूद सुनापान उन्हे साफ महसूस होता था और अपने बेटे को ऐसे देख उनका दिल भी दुखता था और वो इस सब के पीछे का कारण जानते हुए भी कुछ नहीं कर पा रही थी, एकांश मानो हसना ही भूल गया था पिछले 1.5 साल मे उन्होंने उसे कभी हसते खुश होते नहीं देखा था, ना तो एकांश ज्यादा कीसी से मिलता था ना बात करता था बस जितना जरूरी हो उठा ही बोलता था, उसने अपने इर्द गिर्द एक दीवार सी खड़ी कर दी थी जिसमे कीसी को प्रवेश नहीं था, वो एकांश के सर पर हाथ घुमाते हुए यही सोच रही थी

“थैंक्स मा” एकांश ने कहा

एकांश ने वो कीसी को पसंद करता है ये बताने के बाद जो भी कुछ हुआ था उस सब को याद कर उसकी मा के आंखे भर आई थी

“कब तक ऐसे ही रहोगे बेटा , कभी तो आगे बढ़ना होगा ना पुरानी बाते भुलनी होंगी” उन्होंने एकांश को समझाते हुए कहा

बात किस ओर जा रही है एकांश जान रहा था और वो इस बारे मे जरा भी बात नहीं करना चाहता था

“मैं... मैं थक गया हु मा, मैं फ्रेश होकर आता हु” एकांश ने कहा और वहा से जाने लगा

“जल्दी आना, मैं कहना लगवाती हु तब तक”

जिसके बाद एकांश अपने कमरे की ओर चला गया

अपने रूम मे आकार अपना बैग साइड मे रख एकांश अपने बेड पर जा लेटा और जैसे ही उसने अपनी आंखे बंद की उसकी नजरों के सामने एक चेहरा आया और उसने झटके से अपनी आंखे खोली और उठ बैठा, एकांश अपने शर्ट की बटन खोलते हुए अपनी अलमारी तक गया

उसने अलमारी मे का रक ड्रॉर खोला और उसमे से एक तस्वीर निकाली, उस फोटो को देखते हुए उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान उभर आई थी..

‘तुमने ऐसा क्यू किया अक्षिता? तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो? ये जानते हुए भी के मैंने तुम्हें कितना चाहा था.. क्यू धोका दिया तुमने मुझे? क्या उस रिश्ते मे जरा भी सच्चाई नहीं थी? एक पल भी सच नहीं था?’

एकांश के दिमाग मे कई सवाल कौंध रहे थे.. उसे पता भी नहीं चला कब उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे थे, उस फोटो मे वो और अक्षिता साथ थे जिसमे उसने उसे पीछे से गले लगाया हुआ था और अक्षिता उसे प्यार से देख रही थी

वो सब झूठ था क्या? अक्षिता के होंठों पर खिलती वो मुस्कान, उसकी आँखों की मासूमियत और प्यार, शर्म से लाल हुए उसके गाल, सब कुछ एक छलावा था?”

एकांश ने वो फोटो वापिस ड्रॉर मे रखा और अपने आँसू पोंछे और बाथरूम मे शॉवर लेने चला गया ताकि अपने आप को थोड़ा रीलैक्स कर सके

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एकांश अपने ऑफिस मे आ चुका था और अपने केबिन की ओर जाते हुए उसने एक नजर अक्षिता के डेस्क की ओर मारी जो की खाली था, उसने एक लंबी सास छोड़ी और रोहन और स्वरा को देखा जो उसे देख काम मे लग गए थे जैसे उन्होंने उसे देखा ही नहीं था

‘ये लोग कुछ तो छुपा रहे है’ एकांश ने मन ही मन कहा

आज अक्षिता को छुट्टी पर गए तीन दिन हो चुके थे और एकांश अब तक ये बात नाही पचा पाया था वही वो ये भी नहीं मानना चाहता था के वो अक्षिता को मिस कर रहा था

इस सब मे हुआ के के उसका फ्रस्ट्रैशन बढ़ रहा था जिसका सामना उसके एम्प्लॉईस को करना पड रहा था, एकांश की चिढ़चिढ़ बढ़ गई थी और वो अपने हर स्टाफ मेम्बर पर काम से काम एक बार तो जरूर चिल्लाया था, और इस सब मे उसका सबसे ईजी टारगेट बनी बेचारी पूजा जो अक्षिता की जगह काम देख रही थी

एकांश अपनी खुर्ची पर अपना मठ पकड़े बैठा था

‘ये क्या हो गया है मुझे? मुझे उससे दूर रहना है ना की उसे मिस करना है, यू हैट हर एकांश रघुवंशी, यू हेट हर!’

जिसके बाद एकांश मे काम मे अपना मन लगाना चालू किया लेकिन फिर वही बीच बीच मे अक्षिता क खयाल उसका ध्यान भटका देता था और यही उसका फ्रस्ट्रैशन बढ़ा रहा था

‘मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए के वो यहा है या नहीं है, मुझे उससे कुछ लेना देना नहीं है, मैं आज ही ये प्रण लेटा हु के मुझे वो यहा रहे ना रहे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा, आइ विल नॉट रीऐक्ट टु हर प्रेजेन्स ऑर आबसेंस’

और जैसे ही एकांश ने ये सोचा उसके केबिन का दरवाजा खुला, उसने उधर देखा तो वहा उसके सामने अक्षिता खड़ी थी और उसके हाथ मे उसकी कॉफी थी।

“तुम वापिस आ गई!” अक्षिता को देख एकांश ने लगभग चिल्लाते हुए अपनी जगह से उठते हुए कहा..



क्रमश:
Yaar ekansh ko thora sakht hona padega,akshita ne chodda tha usko or ab akshita ko hi pehl karni pade
Adhii bhai wah wah kya baat baat👏👏👏👏👏💯💯💯💯
 
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Raj_sharma

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