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Shayari — अनकही बातें — kuch ehsaas jo lafzon mein bayaan na hue...

Meesa

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Me chala tha akela ghar se,
khwabon ka ek jhola liye,
raaste saare anjaan the,
par hausla esa jese dil me jalte diye.

Par dheere-dheere samay ne,
apna rang dikhana shuru kiya,
jimmedariyon ke bojh ne phir,
har kadam par aazmana shuru kiya.

Kandhon par sapne bhi the,
aur farz bhi saath chal pade,
khud se kiye waade kahin,
raste ki dhool me dhal pade.

Kabhi thak kar rukna chaha,
par waqt ne mauka hi na diya,
har aansu chupke se gira,
par chehre ne hasna sikh liya.

Aaj bhi chalta hoon ussi raah,
bas fark itna sa aa gaya,
Ke jo nikla tha akela kabhi,
ab apno ke liye jeena aa gaya.
बहुत ही सरलता से दिखाया है दिया कि कैसे शुरुआत में हमारा लक्ष्य सिर्फ हमारे 'सपने' होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे 'अपनों की खुशी' ही हमारा सबसे बड़ा मकसद बन जाता है।
 

Meesa

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“वो दोस्त…”
कुछ रिश्ते खून से नहीं,
दिल की धड़कनों से जुड़ जाते हैं…
नाम भले “दोस्ती” हो उनका,
पर वो हर दर्द में खुद को भूल जाते हैं…

वो दोस्त…
जो तेरी हँसी में अपनी खुशी ढूंढ ले,
और तेरे आँसुओं को चुपके से चुरा ले…
जो तेरे खामोश रहने पर भी
तेरे अंदर का तूफ़ान समझ ले…
जब दुनिया तुझे गलत ठहराए,
वो तेरे साथ खड़ा मिल जाए…
बिना पूछे, बिना शर्तों के,
बस तेरा “अपना” बन जाए…

वो दोस्त…
जो तेरे टूटने पर तुझे जोड़ दे,
और खुद बिखर जाए फिर भी कुछ ना बोले…
जो तेरे “मैं ठीक हूँ” कहने पर भी
तेरी आँखों का सच पढ़ ले…
वक्त बदले, लोग बदल जाएं,
पर वो ना बदले कभी…

तेरी हर जीत पर तुझसे ज्यादा खुश हो,
और तेरी हार में तुझे संभाल ले वही…
कभी सोचना…

अगर वो ना होता तेरी ज़िंदगी में,
तो कितनी अधूरी सी लगती ये दुनिया…
क्योंकि दोस्ती ही वो एहसास है,

जो हर दर्द को बना देती है दवा…
दोस्ती को महज़ एक 'रिश्ता' नहीं, बल्कि एक एहसास और 'ताकत' के रूप में परिभाषित करती हैं।
 

vihan27

“मृत्योः भयम् सर्वदुःखस्य मूलम्।”
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vihan27

“मृत्योः भयम् सर्वदुःखस्य मूलम्।”
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बहुत ही सरलता से दिखाया है दिया कि कैसे शुरुआत में हमारा लक्ष्य सिर्फ हमारे 'सपने' होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे 'अपनों की खुशी' ही हमारा सबसे बड़ा मकसद बन जाता है।
ये वही समझेगा जिसने ये जीया है।
 

vihan27

“मृत्योः भयम् सर्वदुःखस्य मूलम्।”
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Wo beta jo kabhi nikala nhi,
Aaj nikala hai ghar se ek bojh liye.

Aankhon me nami hai, par girne nahi deta,
Dil toot chuka hai, par dikhne nahi deta.
Maa ki awaaz ab bhi kaano me goonjti hai,
Par mud kar dekhne ka haq khud ko nahi deta.

Kal tak jo ro deta tha choti si baat par,
Aaj usne dard ko sahna seekh liya.
Jisne kabhi thokar tak mehsoos na ki thi,
Usne aaj pattharon par chalna seekh liya.

Bhukha bhi raha to kisi se kaha nahi,
Thak kar gira bhi to ruka nahi…
Andheron ne ghera har raat use,
Par usne ujale ka sapna chhoda nahi.

Ghar ki yaadein ab bojh si lagti hain,
Har yaad ek teer ki tarah chubhati hai.
Woh hansna jo kabhi aadat hua karti thi,
Aaj bas ek majboori ban gayi hai.

Woh beta ab khud se ladta rehta hai,
Har din thoda-thoda marta rehta hai…
Zimmedariyon ke is bojh ke neeche,
Apna bachpan kahin dafan karta rehta hai.

Wo beta jo kabhi nikala nhi,
Aaj nikala hai ghar se ek bojh liye…

Aur woh wapas kabhi waisa laut nahi payega,
Jo gaya tha ghar se, woh beta tha…
Jo lautega, wo sirf ek aadmi hoga,
Andar se poora toot chuka, par khada dikhai dega.
 
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**"ज़िम्मेदारियाँ हैं मेरी…
ये लड़का कमाता है, ये सब जानते हैं,
लेकिन कैसे कमाता है — ये कोई नहीं जान पाता।

हम किसी से कहते भी नहीं, यार…
कि हमारे दिल में क्या चल रहा है,
हमारे ज़ेहन में कैसी उथल-पुथल है,
किस तरह के मेंटल स्ट्रेस से हम गुज़र रहे हैं।

बचपन से बस एक ही बात सिखाई गई —
‘मर्द को दर्द नहीं होता।’
अरे होता है…
उसे भी दर्द होता है, बहुत होता है।

उसे भी रोना आता है,
उसे भी बुरा लगता है…
लेकिन हम उसे बस ‘मर्द’ मानते-मानते
ये भूल जाते हैं कि वो भी एक इंसान है।

और सच तो ये है…
जो सबको संभालते हैं,

उन्हें संभालने वाले बहुत कम होते हैं।"**
 
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वही चेहरा है, वही बातें, वही हँसना तुम्हारा है,
मगर न जाने क्यों अब ये मंज़र कुछ अनजाना सा प्यारा है।

कल तक जो हाथ बस कंधे पे एक भरोसा था,
आज क्यों उस छुअन में एक अनकहा सा लरज़ा (कम्पन) है?

वो बेबाक सी बातें, वो बेफ़िक्र सा साथ अपना,
अब खामोशियों में ढलकर बुनने लगा है एक सपना।

तेरी हर मज़ाक पे जो मैं खिलखिलाकर हँस देती थी,
अब उसमें अपनी धड़कनों की गूँज सुनने लगी हूँ।

तुझे 'दोस्त' कहते-कहते लब अब क्यों रुकने लगे हैं,
तेरी नज़रें उठती हैं तो मेरे नैन क्यों झुकने लगे हैं?

भीड़ में भी अब सिर्फ़ तेरा ही ख्याल रहता है,
ये कैसा बदलाव है जो दिल में हर पल मचल रहता है?

हाँ, शायद दोस्ती की सरहदें अब पीछे छूट गई हैं,
मर्यादा की वो पुरानी सारी ज़ंजीरें टूट गई हैं।

तुझे खोने के डर से जो दिल अब तक चुप रहा,
आज वो धड़कन बनके तेरे ही इश्क़ में बह रहा।

अब तू सिर्फ़ यार नहीं, मेरी रूह का हिस्सा है,
मेरी कहानी का सबसे खूबसूरत और मुकम्मल किस्सा है।
 

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वही चेहरा है, वही बातें, वही हँसना तुम्हारा है,
मगर न जाने क्यों अब ये मंज़र कुछ अनजाना सा प्यारा है।

कल तक जो हाथ बस कंधे पे एक भरोसा था,
आज क्यों उस छुअन में एक अनकहा सा लरज़ा (कम्पन) है?

वो बेबाक सी बातें, वो बेफ़िक्र सा साथ अपना,
अब खामोशियों में ढलकर बुनने लगा है एक सपना।

तेरी हर मज़ाक पे जो मैं खिलखिलाकर हँस देती थी,
अब उसमें अपनी धड़कनों की गूँज सुनने लगी हूँ।

तुझे 'दोस्त' कहते-कहते लब अब क्यों रुकने लगे हैं,
तेरी नज़रें उठती हैं तो मेरे नैन क्यों झुकने लगे हैं?

भीड़ में भी अब सिर्फ़ तेरा ही ख्याल रहता है,
ये कैसा बदलाव है जो दिल में हर पल मचल रहता है?

हाँ, शायद दोस्ती की सरहदें अब पीछे छूट गई हैं,
मर्यादा की वो पुरानी सारी ज़ंजीरें टूट गई हैं।

तुझे खोने के डर से जो दिल अब तक चुप रहा,
आज वो धड़कन बनके तेरे ही इश्क़ में बह रहा।

अब तू सिर्फ़ यार नहीं, मेरी रूह का हिस्सा है,
मेरी कहानी का सबसे खूबसूरत और मुकम्मल किस्सा है।

Bahut hi heart touching line ek bestfriend se ek jeevan sathi ki tarah pyar krne ka ye ek ehsaas likha hai aapne nice one
 
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जब तू पास नहीं होती,
तो हर खुशी अधूरी सी लगती है…
जैसे भीड़ में भी तन्हाई,
और साँसों में कोई कमी सी लगती है।
तू दूर जाती है जब मुझसे,
तो खामोशी भी सवाल बन जाती है,
हर धड़कन तेरे नाम की हो जाती,
और हर सोच तेरी याद बन जाती है।
ना जाने कैसा रिश्ता है ये,
जो दूरियों में भी टूटता नहीं,
तू पास हो या ना हो…

दिल तुझे छोड़कर कहीं और जाता नहीं। 💔✨
 
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वो जो सड़क पर गिरा था, मदद को पुकार रहा था,
हर गुजरता इंसान बस तमाशा देख रहा था…
मर गई है शायद इंसानियत इस शहर में,

वरना कोई तो होता जो उसे उठा रहा था।
 
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