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Adultery हवेली

Himanshu630

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बस आने ही वाले हैं फौजी भाई लास्ट की अपडेटों को तैयार कर रहे हैं सारे लूस एन्ड्स जोड़कर................. हवेली तो रिवाइज कर चुके
पिछले 2-3 दिन से लगातार दिल अपना प्रीत पराई को पढे जा रहे हैं.......... अर्जुन-पद्मिनी-हुकुम सिंह की कहानी....... और जस्सी की भी :D
मेरे पास लाइक के नोटिफ़िकेशन की बाढ़ सी आ गयी 100-150 अकेले उनके ही इस कहानी से

थोड़ा सब्र रखो..... एडल्ट फोरमों की 2 सबसे बड़ी कहानियों "हवेली" और "दिल अपना प्रीत पराई" को जोड़ने वाली कड़ी है ये कहानी..........
इतना आसान नहीं है .......... इसलिए थोड़ा वक़्त दो
Bhai kabtak start karenge koi new story
Ya
Jo baki kahaniyan hai
 

Sanjay dham

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फोजी भाई को दिल से सलाम। भाई आप बहुत ही अच्छे इंसान हो, और एक बेहतरीन लेखक भी। जिसने एक सेक्सी साइट पर एक ऐसी कहानी लिखी है जिसमे चुदाई का सिर्फ एक ही सीन दिया और वो भी अंत में।
 
#46



रुपाली की बात ने जैसे धमाका ही कर दिया था, मैंने अपने दिमाग को सुन्न होते महसूस किया. एक बहन अपने तीनो भाइयो का बिस्तर गर्म कर रही थी तो दूसरी तरफ वो इंद्र सिंह से मोहब्बत करती थी.

“इश्क और हवस में कोई जायदा फर्क नहीं होता अर्जुन ले देकर बात बस चुदाई की ही होती है ” रुपाली ने बात आगे बढाई

मैं- मुझे कोई परवाह नहीं कौन किस के बिस्तर में घुसा हुआ था . मैं जानना चाहता हूँ की ठाकुर साहब और मंगल के बीच किस बात को लेकर सौदा हुआ था , लाल मंदिर से ठाकुर का क्या रिश्ता है .

ठाकुर- अयाशियो के बोझ तले दबे थे हम , मंगल ने एक शाम हमें बताया की अगर मंदिर से गहने चुरा लिए जाये तो हम दोनों का भला हो सकता है हालाँकि हम चाहते नहीं थे पर हमने हाँ कर दी .

मैं- पर चोरी तो तेज ने की थी

ठाकुर- जानते है हम . हमसे पहले उसने वो काण्ड कर दिया था

मैं- पुरुषोत्तम ने चंदा के पति पर लांछन लगा कर अपना उल्लू भी सीधा कर लिया गजब मादरचोद था वो

मैं जानता था की मेरी बात ठाकुर को बुरी लगी थी पर उसने कुछ कहा नहीं.

“तो गहने कहा है वो अब ” मैंने सीधा पूछा

ठाकुर ने थूक गटका और बोला- चोरी हो गए

मैं- वाह चोरो के घर चोरी गजब . ये हवेली सोलह साल से बंद पड़ी और इसमें से एक पैसा भी चोरी नहीं हुआ और आप कहते है की गहने चोरी हो गए गजब

ठाकुर- मेरा विश्वास करो अर्जुन

मैं- चलो मान लेते है पर सवाल अब भी है की मंगल और आपके बिच का विवाद क्या था .

ठाकुर- मंदिर में चोरी के बाद से ही मंगल कुछ खोया सा रहने लगा था . उसका ज्यादातर समय मंदिर और जंगल में ही बीतता था और फिर हमें मालूम हुआ की जंगल में वो सरिता से मिलता था , ऐसा नहीं था की हमारा दिल पहली बार टुटा था पर अपना दोस्त जब पीठ में छुरा घोम्पे तो तकलीफ बहुत होती है . एक दिन पुरुषोत्तम ने अपनी माँ को चंदा के पति और मंगल के साथ सम्बन्ध बनाते हुए देख लिया और बात हाथ से निकल गयी .



मैं- बेशक मंगल सिंह सरिता देवी को चोदता था (न जाने क्यों ठाकुर के आगे ये शब्द कहते हुए मुझे मजा आ रहा था ) पर उसके मंदिर और जंगल में रहने की वजह कुछ और थी और ये वजह आप बखूबी जानते थे ठाकुर साहब क्योंकि ये जानते हुए भी की आपकी लुगाई को पेल रहा था वो आपने उसे मारा नहीं आप सीधे सीधे वो वजह क्यों नहीं बताते

रुपाली की आँखे मुझ पर और ठाकुर पर जमी हुई थी

मैं- ठाकुर साहब मैं जानता हूँ की मंगल की दिलचस्पी कभी भी गहनों में नहीं थी लाल मंदिर में कुछ और खोज रहा था वो

पहली बार ठाकुर के माथे पर पसीना बहता देखा मैंने .

मैं-वो चोरी बस एक आवरण थी उस चीज को ढकने की जिसे आप छिपा रहे है , लाल मंदिर में क्या था ठाकुर साहब . ऐसा क्या था वहां पर जिसके लिए आपने अपने तीनो बेटो को मार दिया

मेरी बात सुन कर रुपाली की आँखे फट सी गयी .

मैं- हाँ ठाकुर साहब वो आप ही थे जिसने अपने तीनो बेटो को मारा , वो आप ही थे जो चंदा के साथ चुदाई करते थे , कामिनी कहा है ठाकुर साहब और सबसे महत्वपुरन सवाल मैं क्यों हु इस हवेली में मेरा क्या लेना देना है आप सब से मैं किसका बेटा हूँ .



एक साँस में मैंने अपने सारे सवाल पूछ डाले

“अर्जुन के सवालों के क्या जवाब है पिताजी और क्या ये सच है की हवेली के तीनो दिए आपने बुझाये थे ” रुपाली की आवाज में कुछ सख्ती महसूस की मैंने .

ठाकुर -तुम्हारी कसम रुपाली हमने उन तीनो नालायको में से किसी को नहीं मारा बल्कि उस रात जब ये सब हुआ हम तो हवेली में थे ही नहीं

रुपाली- तो कहाँ थे आप

ठाकुर खामोश रहा

मैं- कहाँ थे आप

ठाकुर- लाल मनदिर में .

न जाने क्यों मेरे होंठो पर मुस्कराहट आ गयी.

मैं- जश्न छोड़ कर उजाड़ मंदिर में आने का क्या मकसद था ऐसा क्या था वहां पर जो दिल महफ़िल में न लगा .

ठाकुर- अपने लालच का मोह त्यागने गया था मैं, अपने कर्मो की माफ़ी के लिए गया था मैं वहां पर .

रुपाली- कैसा लालच

मैं- अगर मैं गलत नहीं हूँ तो उस रात ठाकुर साहब सोना वापिस रखने गए थे वहां पर क्यों ठाकुर साहब



रुपाली- कौन सा सोना

मैं- वही जो मंगल ने इनको दिया था . ठाकुर साहब सोलह साल बीत गए है उस राज को दिल में दबाये हुए कब तक अब कुछ नहीं बचा नजरे उठा कर देखिये इन दीवारों को कितने अरमान रहे होंगे जब ये हवेली बनी होगी माना के आज नहीं पर कभी तो घर रहा ही होगा ये .

ठाकुर- मंगल ने कभी नहीं बताया की वो सोना कहाँ से लाता था पर मुझे शक होने लगा था मैंने उसकी जासूसी शुरू की उसका ज्यादातर समय लाल मनदिर और उसके साथ वाले जंगल में ही रहता था . घंटो वो बस उस टूटी हुई मूर्त को निहारता था ऐसे ही एक शाम दिन बस छिप ही रहा था रात शाम को आगोश में भरने ही वाली थी की तभी......
HalfbludPrince ji आपकी कहानी कुछ दिन हुए देखि थी उसका एक दो अपडेट अपने पास सेव किया और आज अपडेट ४६ तक की कहानी अपने पास सेव कर ली हे अब पढना शुरू करूंगा शुरुआत से तो कुछ समझ नही आ रहा हे , वेसे जहाँ तक मुझे याद आ रहा हे रुपाली की कहानी दो या तीन पार्ट में कहीं पढ़ी हे खुनी हवेली की वासना , आपकी कहानी आगे शायद कुछ अलग हो बाकि भूषण नाम का चरित्र उसमे भी था . कहीं न कहीं ये लग रहा हे की ये कहानी उन कहानियों से कनेक्ट हे इसे आप ही ज्यादा बता सकते हें . अपडेट ४६ के बाद क्या और भी अपडेट आयें हें या आने वाले हें

एक जगह पढ़ा था आपके परिवार के आपसी विवाद के बारे में सुनकर दुःख हुआ ये नही होना चाहिए अगर ये सच हे तो
 

Raj_sharma

एको अहम् द्वित्यो ना अस्ति ❣️
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@ halfbludPrince
Bhai mere bohot din hue intzar Karte hue ab Bhatkar hue musafir bhi saam ko Ghar lot hi aate hai or xf bhi apna ek thikana hi hai.
AajA BHAI
 
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