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Bhai aap time lelo par pehle ki tarah ek badiya holi wala update dedo bhai garam garamहोली पर लंबी छुट्टी के चलते 28 को ही गांव आ गया हूं दोस्तों
यहां थोड़ी व्यस्तता है और नेटवर्क इश्यू है
हालांकि यहां गोपनीयता भी उतनी नहीं मिलती
फिर भी अगर मौका मिलता है तो अपडेट पोस्ट कर दिया जाएगा ।
अन्यथा होली के बाद ही मिलेगा अपडेट
HAPPY HOLI आप सभी को
अध्याय 02
UPDATE 38
बनवारी, रंगी बैठ कर साथ में खाना खा रहे थे, बबीता थोड़ी देर में रोटी लेकर आई और मुस्कुराते हुए रख कर चली गई, अगली बार गीता आई और जब बनवारी और रंगी ने उसकी ओर देखा तो उसने तुनक के मुंह फेर लिया, दोनों ने ही सोचा कि इसे क्या हुआ है, खैर खाना खत्म हुआ तो रंगी बनवारी छत पर टहलने लगे वहीं राज राजेश कमरे में जाकर फोन चलाने लगा,
छत पर टहलने के बाद दोनों नीचे उतरे तो उन्हें कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दी, दोनों के बढ़ कर देखा तो गीता और बबीता दोनों बहनों में तगड़ी बहस हो रही थी, दोनों के वहां पहुंचते ही दोनों चुप हो गई।
बनवारी: अरे क्या हुआ तुम दोनों लड़ क्यों रही थी।
बबीता: देखो न दादाजी ये ही तबसे मुंह बनाए घूम रही है और मुझे भला बुरा बोल रही है,
बनवारी: क्यों गीता क्यों लड़ रही है उससे, बहनों को आपस में प्यार से रहना चाहिए या लड़ कर।
रंगी: हां गीता ये गलत बात है बेटा।
गीता: आप दोनों लोग तो उसका साथ दोगे ही,
गीता ने उनपर भी बरसते हुए कहा,
बनवारी ने उसके जवाब से हैरान होकर रंगी की ओर देखा फिर गीता से बोला: अरे ऐसे क्यों बोल रही है गीता उसका साथ ही क्यों देंगे हमारे लिए तो तुम दोनों ही एक समान हो।
रंगी: और क्या बिटिया, जैसी बबीता वैसी गीता हमारे लिए तो तुम दोनों ही प्यारी हो.
गीता: नहीं ये ज़्यादा प्यारी होगी मैं जानती हूं ये,
बबीता: ऐसा क्यों बोल रही है तू? मैं क्यों प्यारी होने लगी?
गीता: क्यों न बोलूं, मैं सब जानती हूं ज़्यादा भोली मत बन।
बनवारी: गीता क्या हुआ है तुझे क्यों ऐसे लड़ रही है उससे।
गीता: हां मैं ही तो लड़ती हूं ये तो आपकी लाडली है तभी तो कमरे में दोनों के साथ...
गीता इतना बोल कर रुक गई,
रंगी और बनवारी ने एक दूसरे की ओर देखा वो समझ गए थे वो किस बारे में बात कर रही थी, रंगी थोड़ा आगे बड़ा और गीता की पीठ पर हाथ रखा और बोला इधर बैठ बेटा फिर बात करते हैं।
गीता ने कुछ कहा नहीं और बिस्तर पर बैठ गई।
रंगी: तू जानती है बेटा हम क्या कर रहे थे?
गीता आंखें उठा कर रंगी की ओर देखा.....
दूसरे कमरे में राजेश फोन चला रहा था कि उसकी पत्नी भी काम निपटा कर आई, पल्लू में हाथ पोंछते हुए बोली: अरे तुम भी न जब देखो फोन मे लगे रहते हो,
राजेश: अरे मेरी रानी लो रख दिया फोन अब तुम में लग जाता हूं,
राजेश ने उसे अपनी ओर खींचते हुए कहा तो वो भी उसके सीने में चिपकी लेकिन फिर उसे धकेलते हुए
: नहीं हटो मेरा मन नहीं है
: क्या हुआ ?
: अम्मा की तबियत सही नहीं है और मुझे चिंता हो रही है , कल अस्पताल लिवा जा रहे है सब उनको ( सुनीता उदास थी )
: अरे तो ठीक है हम लोग भी कल चल चलेंगे अब उसमें क्या है ?
: हा लेकिन कल नंदोई जी की विदाई करनी है , कैसे सब होगा और बाउजी से बात भी नहीं हुई
: तू फिकर मत कर ... मै बात कर लूंगा बाउजी से
: पक्का न ?
: हा मेरी जान , अब तो आजा
: हम्ममम लेकिन बस चिपक के सोना , कुछ करना नहीं
: अच्छा ठीक है पहले तू आ तो सही
: अरे हीहीही ये गलत है अह्ह्ह्ह धत्त गंदे उम्ममम सीईईई आराम से मेरे राजा सीईईई
एक कहा राजेश ने सुनीता को बिस्तर ने पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया था वही
दूसरी ओर कमरे का नज़ारा पूरी तरह बदल गया था बनवारी के कमरे में उसकी और रंगीलाल की आहें गूंज रही थी और दोनों बिस्तर पर लेटे हुए थे,वहीं उनके पैरों के पास उनके बीच में दोनों बहनें थीं गीता अपने दादाजी के मोटे लंड को मुंह में लेकर उसे गरम करते हुए चूस रही थी, वहीं बबीता का मुंह रंगी के लंड पर ऊपर नीचे हो रहा था, बबीता रंगी के लंड को अधिक से अधिक मुंह में भरने की कोशिश कर रही थी जिससे रंगी की आहें निकल रही थी,
बनवारी: ओह आह बिटिया ओह देखा जमाई बाबू मेरी दोनों ओह पोतियां कितनी मेहनती और कुशल हैं आह दोनों एक से बढ़ कर एक हैं।
रंगी: आह बाबूजी बिल्कुल सही कहा, मुझे तो लगा था कि बबीता ही आगे है पर ओह गीता भी कम नहीं है पर आह गीता की मेहनत तो मैने महसूस की ही नहीं।
बनवारी: अरे अभी कर लो जमाई बाबू, गीता जा बिटिया थोड़ा भूभाजी का भी चूस दे उन्हें भी अपने मुंह का स्वाद लेने दे।
गीता ने तुरंत अपने दादा का लंड मुंह से निकाला और रंगी लाल की ओर पलट गई, रंगी का लंड बबीता के मुंह में था तो वो रुक गई,
रंगी: अरे गीता बिटिया अब भी गुस्सा है क्या तू बबिता से?
गीता ने ना में सिर हिलाया तो रंगी बोला: फिर रुकी क्यों है अपनी बहन के साथ लग जा तुम दोनों एक साथ थोड़ा सा चूस दो कितना मज़ा आएगा,
ये सुन गीता ने बबीता की ओर देखा जो लंड मुंह में फंसाए उसे ही देख रही थी, गीता के होंठों पर एक मुस्कान आ गई वहीं बबीता के भी, अगले ही पल दोनों बहनें रंगी के लंड पर धावा बोल रही थी और रंगी की आहें निकल रही थी,
बनवारी लाल अपने लंड को सहलाते हुए मुस्कुरा कर देख रहे थे, बबीता ने लंड को मुंह से निकाला और गीता के होंठो की ओर कर दिया जिसे गीता ने तुरंत मुंह में भर लिया बबीता रंगी की गोलियों पर जीभ फिराने लगी तो रंगी ने दांत पीस लिए,
रंगी: ओह बिटिया आह आह तुम दोनों ही कमाल हो,
गीता ने उसके लंड को गहराई तक चूस कर बाहर निकाला तो बबीता ने भी अपनी जीभ रंगी की गोलियों से हटाई, दोनों बहनों की आंखों ही आंखों में कुछ इशारा हुआ और अगले ही पल दोनों के होंठ मिल गए और दोनों आक्रमकता से एक दूसरे के होंठों को चूसने लगी, ये देख रंगी और बनवारी दोनों के ही चेहरे पर मुस्कान आ गई,
रंगी: ये हुई न बात, तुम दोनों ऐसे ही अच्छी लगती हो प्यारी बहनों की तरह।
बनवारी: और क्या, मुझे पता था मेरी दोनों बिटिया एक दूसरे से ज़्यादा देर गुस्सा रह ही नहीं सकती, बहुत समझदार हैं दोनों,
बनवारी ने हाथ बढ़ाकर दोनों की जांघों को सहलाते हुए कहा, कुछ देर बाद दोनों बहनों के होंठ अलग हुए दोनों के होंठ थूक से सने हुए थे और बहुत कामुक लग रही थी,
बनवारी: बबीता बिटिया अब तू इधर आ जा अपने दादू के पास गीता को जमाई बाबू की सेवा करने दे,
बबीता: अभी आई दादू,
बबीता घुटनों और हाथों पर चलते हुए आगे आई और फिर अपना मुंह झुका कर अपने दादू के लंड को चूमा और फिर आगे हो गई और बनवारी की कमर के दोनों ओर अपने घुटने रखे और फिर लंड को पकड़कर सीधा किया और फिर अपनी चूत में फंसा कर बैठ गई, उसके बैठते ही दादू पोती दोनों के मुंह से आह निकल गई।
बनवारी: आह बिटिया ओह कितनी गरम बुर है तेरी आह कैसे निचोड़ रही है दादू के लंड को।
बबीता: ओह आह मम्मी, ओह दादू बहुत अंदर तक जा रहा है,
बबीता ने उछलते हुए कहा। बगल में रंगी गीता के बालों को सहला रहा था और गीता उसके टोपे को सुड़क रही थी,
रंगी: आह गुड़िया अब और नहीं रुका जाता आह आजा अब तू भी सवारी कर अपने फूफा की,
गीता ने भी तुरंत उसकी बात मानी और कुछ पल बाद ही दोनों ही बहनें एक दूसरे के बगल में लंड पर उछल रही थी
रंगी जहां गीता के गोल मटोल चूतड़ों को फैलाते हुए नीचे से धक्का लगा रहा था वहीं बनवारी लाल बबीता की कमर को थामे उसे उछलने में मदद कर रहा था,
रंगी: ओह गुड़िया ओह तुझे अब भी लगता है कि आह हम बबीता को ओह तुझसे ज़्यादा प्यार करते हैं।
गीता: न नहीं फूफाजी ओह आह ऐसा लगता तो नहीं आह।
बनवारी: ऐसा है ही नहीं गुड़िया, तुम दोनों ही हमारे लिए एक समान हो।
गीता: ओह आह समझ गई फूफाजी और दादू, तुम्हारे लंड भी यही बता रहे हैं,
बबीता: आह सच में गीता, अकेले में इतना मजा नहीं आया जितना तेरे साथ आ रहा है,
गीता: मेरी प्यारी बहन,
उछलते हुए ही दोनों करीब आई और एक दूसरे के होंठों को चूसने लगी
लेटे हुए ये नज़ारा देख रंगी और बनवारी और उत्तेजना होने लगे और उन्हें अपना रस लंड में भरता हुआ महसूस होने लगा, और हो भी क्यों न दो जवान कमसिन कलियां एक साथ उनके लंड पर उछल रही थी, उनकी गरम जवान चूत उनके लंड को निचोड़ रही थी, साथ ही उनका एक दूसरे के होंठों को चूसना आग में घी डाल रहा था,
रंगी: ओह गुड़िया मैं आ रहा हूं बस थोड़ी देर और आह आह आह ,
ये सुन गीता तुरंत रंगी के लंड से हट गई और उसके लंड को पकड़ कर चूसने लगी, रंगी की आहें गुर्राहटों में बदल गई और फिर एक के बाद एक धार छोड़ते हुए वो गीता के मुंह में झड़ने लगा जिसने मुंह खुला रखा जिससे कुछ उसके गले के अंदर गया तो कुछ होंठों से बाहर रिस कर उसकी छाती पर गिरने लगा,
रंगी : ओह गुड़िया ये कहां सीखा तूने कितना मजा आया और कितनी सुंदर लग रही है तू ऐसे,
रंगी ने हांफते हुए कहा,
गीता: गंदी फिल्में देख कर सीखा फूफाजी।
उधर उसी समय बनवारी भी गुर्राने लगे तो बबीता भी उनके लंड से उठ गई थी और लंड मुंह में ले लिया पर बनवारी ने उसके सिर को लंड पर दबा दिया और फिर एक के बाद एक धार छोड़ने लगे और सिर को तब तक दबाए रखा जब तक एक आखिरी धार भी बबीता के मुंह में न भरदी, बबीता ने मुंह हटाया तो आंखों से आंसू बह रहे थे पर होंठो पर मुस्कान थी वो अपने दादू के रस की एक एक बूंद जो पी गई थी, उसने गीता की ओर देखा जो रस से सनी बैठी थी तो उस पर कूद पड़ी और उसके चेहरे को चाट चाट कर साफ करने लगी, रंगी और बनवारी गर्व भरी आंखों से दोनों को देख रहे थे ।
जान रहे थे कि अब गिरे तो सुबह बहुत देर ही उठने वाले है और यही सोच कर दोनों ने एक राउंड दोनों बहनों की अच्छे से बुर और गाड़ में लंड डाल से चुदाई की फिर सब वही एक साथ सो गए इस बात से बेखबर कि आने वाला सवेरा एक नए बखेड़ा ला खड़ा करेगा ।
अगली सुबह सुनीता जल्दी उठी , कल शाम को ही उसको सूचना थी कि उसे आज अपनी मां को देखने अस्पताल जाना है । इसके लिए वो जल्दी जल्दी उठ कर घर के कामों में लग गई ।
घर के सभी कमरों में बारी बारी से झाड़ू लगाते हुए जब वो रंगी के गेस्ट रूम में गई तो वहाँ कमरा खाली पड़ा था और उसकी आंखे बड़ी हो गई थी जब उसने गेस्ट रूम से अपने ससुर के कमरे में अंदर देखा
एक ही बिस्तर पर उसके ससुर , नंदोई और उसकी दोनों बेटियां , सब के सब नंग धडंग सोये हुए है ।
" ये तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है अब "
" ऐसे तो मेरे बच्चों को बिगाड़ कर रख देंगे सब"
" नंदोई जी !!! अच्छा नहीं किया आपने ये "
सुनीता खुद से बड़बड़ाई , एक ओर वो पहले से ही अपनी अम्मा की तबियत को लेकर परेशान थी और सुबह सुबह ये नजारा ।
" अगर बच्चियों को छोड़ कर गई तो ये दोनों सारा दिन उन्हें तंग करेंगे , नहीं नहीं, मै मेरी बेटियों को अब यहाँ नहीं छोड़ सकती इन्हें भी साथ ले चलूंगी , लेकिन इनके पापा से कहूंगी क्या ? वो भी नाराज होंगे ? सह लूंगी , लेकिन यहाँ नहीं रखूंगी बस ... हा यही सही रहेगा "
फिर सुनीता ने अपने पति को उठाने चली गई
इधर रंगी के मोबाइल में अलार्म बजा और वो उठ गया
समय देखा तो सुबह के 07 बज रहे थे
उसने जल्दी जल्दी सबको उठाया और कपड़े पहनने को कहा फिर अपने कमरे में जाकर लेट गया ।
थोड़ी देर बाद सुनीता वापस आई और कमरे के बाहर से अपने ससुर को आवाज दिया
फिर बनवारी उठने का नाटक करता हुआ बाहर आया ,फिर सुनीता ने खुद से ही अपनी मां की तबियत खराब होने की बात कही और कहा कि वो बच्चों को भी ले जाएगी ।
: अरे बहु कह तो मै भी चलूं
: नहीं बाउजी , नंदोई जी भी आज आएंगे घर ? वो अकेले रहेंगे तो सही नहीं होगा
: अच्छा ठीक है , जैसी बात होगी खबर करना और यहाँ की फिकर छोड़ तू
: जी बाउजी
फिर थोड़ी देर बाद 08 बजे तक बनवारी ने गाड़ी गेट पर लगवाई , बनवारी और रंगी वही खड़े थे , सुनीता अपने पति और बच्चों के साथ गाड़ी में बैठ कर निकल गई मायके की ओर , दोनो ससुर दामाद उन्हें जाते देख रहे थे
: हम्ममम जमाई बाबू तो फिर चलना ही है ?
: अह हा बाउजी मन तो नहीं है लेकिन जाना ही पड़ेगा , सोनल के ससुराल से फोन आया था कि उसके चाचा ससुर की शादी हो रही है ?
: क्या अब ? किससे कैसे ?
: अब पता नहीं बाउजी , वो तो जाने के बाद ही पता चल पायेगा , चलिए मै भी पैकिंग कर लूं
दोनों गेट से कमरे की ओर जा ही रहे थे कि एक टेंपो फड़फड़ करता हुआ रुका उनके मकान के सामने
बनवारी और रंगी दोनों ने पलट कर देखा और उसने एक औरत उतरी
जिसके बड़े भड़कीले कूल्हे साड़ी में उनकी ओर थे और वो ऑटो वाले को पैसे दे रही थी
फिर वो पलटी तो दोनों ससुर दामाद की आंखे चमक उठी
दोनों बस एक दूसरे को देख रहे थे और आँखों ही आँखो तय हो गया कि कम से कम आज तो रंगी अपने घर वापस नहीं जा रहा है ।
अमन के घर
सुबह ममता की आंख जल्दी खुल गई
बगल में देखा तो मंजू उसके पास सोई थी , उसकी सुंदर चेहरे को देख कर ममता मुस्कुरा उठी और उसने मंजू के सर पर चूम कर उठ कर बाथरूम में चली गई ।
बाथरूम में बैठे हुए उसकी दिमाग आज के काम की तैयारियों को लेकर चलने लगी
मदन की शादी की छोटी मोटी खरीदारियों के लिए आज वो लोग सरोजा कॉम्प्लेक्स जाने की योजना कर चुके थे ।
" पता नहीं बहु उठी होगी या नहीं "
" अरे हा याद आया , पता नहीं बहु ने वो काम किया होगा या नहीं , आखिर अमन के पापा और अमन मुझे क्या सरप्राईज देना चाहते हैं"
" फिर ये रात में अमन के पापा और देवर जी का क्या चल रहा था वो भी उन्होंने कुछ साफ साफ नहीं बताया "
ममता के जहन में सवाल उठ रहे थे और उसने सबसे पहले सोचा कि क्यों न अमन के पापा से ही बात की जाए
वो बाथरूम से निकली और एक नाइटी डाल कर चुपचाप साल ओढ कर मदन के कमरे की ओर चली गई ।
घड़ी में सुबह के 6 बज रहे थे
सर्दियों के मौसम में सुबह के 6 बजे उसके घर में उठने वालों में से सिर्फ मदन था , लेकिन वो भी आज सो रहा था लेकिन ये क्या ? मुरारी अपने बिस्तर पर नहीं था
बिस्तर पर नजर डाली तो देखा चादर में मदन में अपना रॉकेट खड़ा कर रखा था, ममता का जी मचल उठा अपने देवर के लंड के लिए और हौले से कमरे में दाखिल हुई । फिर दबे पाव बिस्तर के किनारे जिस तरफ मदन सोया था खड़ी हो गई
बाथरूम में पानी की आवाज आई , मतलब मुरारी बाथरूम में था और ममता ने हाथ बढ़ा कर मदन का लंड चादर के ऊपर से सहलाया
मदन जैसे हल्की नीद में था झट से उसकी आंख खुल गई और वो चौक गया
ममता उसे देख कर मुस्कुराई और मुंह पर उंगली रख कर चुप रहने को कहा
: भाभी , भइया अंदर है बाथरूम में
: सीई उनके आने से पहले ही मेरा काम हो जाएगा ( ममता ने तेजी दिखाते हुए चादर हटा कर मदन का लंड उसके अंडरवियर के ऊपर से मसलने लगी )
: ओह्ह्ह्ह भाभी उम्मम मान जाओ गजब हो जाएगा
: सीईईई चुप करो ( ममता उसके लंड को बाहर निकलती हुई बोली ) मुझे पता है कल रात तुमने भी अपने भइया के साथ पिचकारी छोड़ी थी , सब पता है मुझे समझे
मदन का चेहरा सफेद होने लगा और इधर ममता झुक कर उसका सुपाड़ा खोल कर मुंह में रख ली, मदन की पीठ अकड़ गई जब सूखे सुपाड़े पर ममता ने अपनी जीभ फिराई
: सीईईई ओह्ह्ह भाभी लेकिन आपको कैसे पता ?
: मुझे ? ( ममता ने मुंह से लंड निकाल कर उसे हिलाती हुई बोली ) जब तुम कहा कि " भाभी मेरा भी चूस दो न " , तभी और कन्फर्म तब हुआ जब दो बार गर्म माल मेरे पीछे गिरा अम्मम सीई उम्मम
ममता ने वापस मदन का लंड मुंह में ले लिया और अच्छे से चूसने लगी
: सच सच बताओ क्या प्लानिंग चल ही है तुम्हारी और तुम्हारी भइया की उम्ममम ( ममता उसके आड़ टटोल कर उसके सूपाड़े की गांठ को जीभ से कुरेद कर बोली मदन बिलबिला उठा )
: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह भाभी वो अह्ह्ह्ह सीईईईईई
तभी बाथरूम में फ़ल्श चला और मदन चौंक गया वो ममता की हटने के लिए कहने लगा और ममता नहीं मानी , जैसे बाथरूम का दरवाजा खुला तो मदन ने झट से चादर में अपना सर छुपा लिया, इधर ममता के सर बाथरूम की ओर थे नाइटी में चूतड़ फैले हुए उठे हुआ
मुरारी की नजर जैसे ही सामने पड़ी उसकी आंखे बड़ी हो गई और ममता की नजर भी मुंह में मदन का लंड लिए हुए मुरारी से मिली
: अमन की मां ये सब क्या है ?
: हाय दैय्या!! आप बाथरूम में थे तो ये कौन है ? ( ममता ड्रामा करती हुई बोली )
: अरे यार वो मदन है ? मदन तू जाग रहा है न ? ( मुरारी हड़बड़ा कर बोला )
मदन ने अपना चेहरा बाहर किया , उसका लंड अभी भी आसमानी सर उठाए ममता के लार से चमक रहा था
: हाय दैय्या देवर जी आप , अमन के पापा .. म मुझे लगा कि आप सोए है और देवर जी बाथरूम में है । हे भगवान ये क्या हो गया
: सॉरी भइया , भाभी आते ही एकदम से शुरू हो गई , मुझे लगा अगर उन्हें पता चलेगा कि मै हु तो .....
: और अमन की मां तुम्हे जरा भी नहीं पता चला कि वो मै नहीं हूं , कम से कम साइज से तो देख समझ लेती ( मुरारी उखड़े हुए स्वर में बोला )
: हा साइज का मुझे थोड़ा लगा था पर ... ( ममता थोड़ा हिचक कर बोली )
: पर क्या अमन की मां ?
: वो मुझे लगा सुबह आप मेरा सपना देख रहे होगे और फिर खुशबू भी आपके जैसी आ रही थी देवर जी के उससे तो .... सॉरी अमन के पापा
मदन अपनी हंसी रोकने की कोशिश कर रहा था
: ओहो ये क्या है अमन की मां, अभी रात में ही तो हमने किया था न
: हा तो ... ( ममता ने एक नजर मदन को देखा और फिर रुक कर बोलना शुरू किया ) मैने सुबह सुबह आपका सपना देखा और यहां चली आई । मुझे लगा कि आप भी मुझे याद कर रहे होगे सपने में
: भैया आपका तो नहीं लेकिन भाभी जी ने मुझे जरूर सपने दिखवा दिए । अब ऐसा कीजिए आज से आप भाभी के साथ सोइए तो अच्छा होगा
मुरारी कुछ बोलता उससे पहले ही ममता बोल पड़ी
: हा ताकि आप और देवरानी जी .... ये बिल्कुल नहीं होगा अमन के पापा जान लीजिए
: अरे भैया देखिए न , ये कैसा जुल्म है मुझपर
: एक मिनट भाई मदन चुप रहो तुम , और अमन की मां ये सब क्या है ? तुम्हे क्या दिक्कत है । इसी हफ्ते शादी है उनकी
: वो सब कुछ मै जानती
: तो क्या मदन ऐसे ही परेशान रहेगा और अभी जो तुमने किया उससे उसकी हालात देखो
मुरारी ने ममता को मदन के लंड की ओर इशारा किया
ममता समझ रही थी कि मुरारी को इससे कोई दिक्कत नहीं है कि उसने मदन का लंड चूसा है , लेकिन वो परखना चाहती थी कि आखिर वो उसे किस हद जाने देगा ।
: ठीक है अगर देवर जी को मेरी वजह से परेशानी हुई तो अभी के लिए मै उनकी दिक्कत दूर कर दे रही हूं
: मतलब
: मतलब बताती हूं रुकिए
ये कह कर ममता वापस से झुक कर मदन का लंड पकड़ कर इस बार मुरारी के सामने की मुंह में लेकर का चूसने लगी
मदन एकदम से सिसक पड़ा और चौक भी गया ,मुरारी की भी आंखे बड़ी हो गई
दोनों भाई एक दूसरे को हक्के बक्के देख रहे थे
: सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम भाभी नहीं अह्ह्ह्ह भइया रोकिए न भाभी को ओह्ह्ह्ह
मुरारी का लंड भी उसके अंडरवीयर में खड़ा होने लगा था
: अब मै क्या बोलूं भाई
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई भाभी जी आराम से बहुत तेज कर रही है आप ओह्ह्ह्ह सीईईई भैया बोलो न कुछ
मुरारी लपक कर ममता के पास गया और उसके पीठ छू कर : हा अमन की मां थोड़ा हल्का ओह्ह्ह्ह
मुरारी अपना लंड सहलाता हुआ बोला इधर ममता बिना रहम के मदन का सुपाड़ा चूस रही थी और उसका लंड हिला रही थी
मुरारी की नजरे हवा में हिलती हुई ममता की बड़ी सी गाड़ पर गई थी जो उसकी नाइटी में फैली हुई थी , उसका जी ललचा गया और उसने अपने पंजे आगे कर उसकी मोटी चर्बीदार चूतड़ों को सहलाने लगा
: उम्ममम अमन के पापा क्या कर रहे है ओह्ह्ह्ह उम्ममम मत करिए न ओह्ह्ह
: उफ्फफ मेरी जान , तुझे ऐसे देख कर रहा नहीं जा रहा है अब ( मुरारी उसके पीछे जाकर उसकी बड़ी गद्देदार चूतड़ों पर अपना अंडरवियर में खड़ा लंड दरारों के बीच फंसाने और रगड़ने लगा
: ओह्ह्ह्ह क्या कर रहे है अमन के पापा , देवर जी देख रहे है
: अब कुछ छुपाने जैसा है क्या ? तू भी यही चाहती है न ? तू भी तो परेशान है
: अह्ह्ह्ह सीईईई लेकिन देवर जी के सामने उम्मम रुक जाइए न अमन के पापा ओह्ह्ह
: उसने तो हमे पहले भी देखा उससे क्या शर्माना , क्यों भाई मदन ?
: ओह्ह्ह्ह हा भइया उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह भाभी ऐसे ही और और लो उम्ममम मजा आ रहा है सीई ओह्ह्ह
: उम्ममम मेरे जान सीईईई क्या कमाल की गाड़ है तेरी ओह्ह्ह कितनी मुलायम और बड़ी
मुरारी उसकी नाइटी पीछे से उठा कर उसकी चर्बीदार चूतड़ों पर अपने पंजे सहलाने लगा
: ओह्ह्ह्ह अमन के पापा ओह्ह्ह उम्ममम रुक जाओ ओह्ह्ह नहीं क्या कर रहे है ओह्ह्ह्ह उम्ममम आपकी जीभ ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह
इधर मुरारी झट से नीचे बैठ कर उसकी गुलाबी रसाई फांकों को चाटने लगा और चूसने लगा
: सीई क्या हुआ भाभी
: उम्मम देवर जी वो अह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह आपके भैया उम्ममम वो नीचे जीभ लगा ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह मम्मीइई मत करो न ओह्ह्ह्ह मुझे पता है आप मेरी तकलीफ बढ़ा रहे है जानबूझ कर ओह्ह्ह्ह उम्ममम अमन के पापा ओह्ह्ह
मुरारी तेजी से जीभ लपलपाकर ममता की बुर के फांकों को चाट रहा था और अपना लंड हिला रहा था
ममता की सिसकियां बढ़ने लगी और उसकी बुर खूब रस छोड़ने लगी , मुरारी को लगा यही सही समय है और वो उठ कर पीछे से ही खड़े खड़े अपना लंड उसकी रसाती बुर में उतार दिया ।
: ओह्ह्ह्ह सीईईई अमन के पापा उम्ममम कितना मोटा है आपका ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह
ममता सिसकने लगी और आगे बढ़ कर वापस से मदन का लंड मुंह में ले लिया
: ओह्ह्ह्ह मेरी जान अह्ह्ह्ह कितनी गर्म है तू अंदर ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई मजा आ रहा है उम्मम
मुरारी ममता के गद्देदार चूतड़ों को पकड़ कर खूब करारे झटके देने लगा और ममता भी सामने मदन का लंड पकड़े हुए झटके खा रही थी सिसक रही थी
: उम्ममम अह्ह्ह्ह अमन के पापा ऐसे ही ओह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है और कस के ओह्ह्ह मेरे राजा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह डालिए और अंदर उम्मम
: हां मेरी जान ले ओह्ह्ह और ले उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई तोड़ा मदन का भी ख्याल रखते रहना
: अह्ह्ह्ह्ह मेरे राजा रख रही उम्ममम सीईईई उम्मम
ममता ने वापस से लंड मदन का मुंह में डाल लिया और मुरारी के करारे झटके खाते हुए लंड को गले तक ले जाने लगी
: ओह्ह्ह्ह भाभी हा ऐसे ही उम्ममम बस ऐसे ओह्ह्ह उम्ममम
ममता ने गले से लंड बाहर निकाला और हांफने लगी
: उम्ममम उम्मम ओह्ह्ह हा हा और और हम्मम पूरा और अंदर ओह्ह्ह्ह मेरे राजा सीईईई
: क्या हुआ मेरी जान , बाहर क्यों निकाल दिया ( मुरारी ममता की बुर में पेलते हुए बोला )
: क्या करु अमन के पापा , देवर जी का निकल ही नहीं रहा है ( ममता ने मुस्कुरा कर मदन को आंख मारी और मदन समझ गया कि ममता जरूर कुछ खेल खेलने के फिराक में है )
: क्या हुआ भाई क्यों नहीं हो रहा है ?
: पता नहीं भइया, कोशिश कर रहा हूं , बहुत टाइट हो गया है सीई ओह
: आखिरी बार कब निकाला था
: वो उस रोज जब आप दोनों को देखा था कमरे में तब , आप भाभी को पीछे से कर रहे थे
: ओह्ह्ह लग रहा है तुझे विजुअल के बिना नहीं होगा
: हा भइया,
: ऐसा कर तू मेरे पास खड़ा होकर देख तुझे मदद मिलेगी , आजा
मुरारी ने चालाकी से मदन को अपने पास बुला लिया , लेकिन ममता से उसकी चालाकी कहां छिपी थी
वो समझ रही थी कि जल्द ही उसे दूसरे लंड का स्वाद मिलने ही वाला है।
मदन अब अपने आंखों के सामने अपने भैया को भाभी की बुर में लंड डालते देख रहा था और अपना लंड हिला रहा था
मुरारी ने इशारे से पूछा कि अंदर डालेगा तो मदन ने अपने लंड को तेजी से हिलाते हुए हा में सर हिलाया
इसके बाद मुरारी लंबे लम्बे शॉट लगाने लगा ममता की चूत में , वो सुपाड़े को खींच कर पूरा बाहर लाता और वापस उसकी चूत में उतार देता जड़ तक
: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा ये क्या ओह्ह्ह्ह मम्मीई ओह्ह्ह फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम डालो न जल्दी जल्दी ओह्ह्ह
तभी मुरारी ने मदन को इशारा कर तेजी से ममता की चूत से निकल कर दबे पाव पीछे हुआ और मदन ने फौरन अपना लंड ममता की बुर के फांकों में लगाते हुए खुली हुई चूत में उतार दिया
ममता फर्क महसूस कर चुकी थी
: ओह्ह्ह्ह मेरी जान उम्मम अह्ह्ह्ह्ह कितना फूल रहा है आपका अंदर उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई
मदन हौले हौले अपनी कमर चलाने लगा और जल्द ही उसका लंड पूरा ममता की चूत में था , उसका लंड ममता की चूत में और टाइट हो रहा था ये सोच कर कि वो आज अपने भैया के सामने भाभी की बुर चोद रहा था
: ओह्ह्ह मेरे राजा कस कस के मारो न उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ऐसे ही हा और तेज ओह्ह्ह्ह सीई हा अमन के पापा ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई उम्मम और अंदर उम्मम ऐसे ही रुकना मत ओह्ह्ह
मदन अब अपने भैया के सामने अपने मर्दानगी दिखाने लगा था , ताबड़तोड़ पेलाई चल रही थी , मुरारी भी लंड हिला रहा था
: उम्ममम हा ऐसे ही ओह्ह्ह मेरे राजा आज क्या हुआ है आपको उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह मेरा आ रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई रुकना मत ओह्ह्ह पेलते रहो ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम
ममता ने मदन का लंड अपनी बुर में कस लिया और झटके खाने लगी और साथ ही मदन का लंड सुरक रही थी
मदन का चेहरा लाल होने लगा था और उसके चेहरे से साफ था कि वो झड़ने वाला है
मुरारी भी समझ गया और वो भी तेजी से अपना लंड हिला लगा
: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई भाभी मेरा आयेगा
: हा मेरी जान ऐसे ही मेरा भी आयेगा
: झड़ जाओ मेरी जान अंदर ही आपके लंड की गर्मी मिलेगी तो सुकून रहेगा सारा दिन
इधर दोनों भाई हड़बड़ा उठे कि अब क्या करे , ममता मदन के लंड की ग्रिप टाइट कर दी और खींच रही थी ,किसी भी हालात में उसका लंड छोड़ने को तैयार नहीं थी ।
मुरारी भी झड़ने के करीब था और मदन ने इशारे से फुसफुसाया : नहीं निकल रहा है बाहर
: छोड़ दे ( मुरारी ने आंखों से इशारा कर मदन को अंदर ही झड़ने को कहा )
: ओह्ह्ह्ह मेरी जान आ रहा है मेरा ओह्ह्ह्ह लो भर दे रहा हूं तुम्हारी बुर ओह्ह्ह्ह
मुरारी के बोलते ही मदन ने अपना सुपाड़ा ढीला कर ममता की बुर में और अंदर ही अपना माल छोड़ने लगा
: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा कितना गर्म है ओह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह
इधर मुरारी भी झड़ने के करीब था और उसने मदन का कंधा हिलाया और उसे होश में लाया जो ममता के बुर की गहराई में झड़ रहा था
: ओह्ह्ह भाभी मेरा भी आ रहा है कहा निकलूं ओह्ह्ह्ह ( मदन बोला )
: फर्श पर नहीं , मै पोछा नहीं लगाने वाली
: फिर ? ( मदन बोला )
मुरारी उसकी पीछे हटा कर : आ तू भी यही निकाल दे
: क्या ? नहीं ? रुकिए देवर जी
मुरारी ने एक नहीं सुनी और सीधा वापस उसकी मदन के बीज से डबडबाई बुर में अपना लंड डाल दिया और दो से तीन बार झटके देकर अंदर ही झड़ने लगा
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह देवर जी ये क्या किया आपने उम्मम अह्ह्ह्ह्ह
मुरारी आंखे बंद कर ममता की बुर झड़ने का मजा लेते हुए मदन को इशारा किया
: उम्मम भाभी सीई ओह्ह्ह कितना सॉफ्टी है अह्ह्ह्ह कितना गर्म है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम
ममता हांफती हुई बिस्तर पर सहारा लेकर नीचे फर्श पर घुटने टेक दिए और दोनों भइया का वीर्य उसी चूत से बहने लगा था ।
दोनों भाई हांफते भी सामने सोफे पर बैठ गए वैसे ही नंगे मुरझाए लंड के साथ
थोड़ी देर बाद ममता उठी
: क्या हुआ जानेमन कहा ? ( मुरारी ने कहा )
: अब क्या सारा दिन यही रहूं , बहुत काम है मुझे । आप दोनों भी नहा लो
फिर वो चुपचाप निकल गई और दोनों भाई हस पड़े ।
जारी रहेगी
( पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करना )
Aesi hi ek story thi bht jbrdst. But wo aduri rah gyi. M chahta hu k ab puri hoDreamboy ji आपकी स्टोरी लिखने की कला बहुत ही जबरजस्त और रोचक हैं। 1 अपडेट पढ़ने के बाद नेक्स्ट अपडेट पढ़ने का मन करता है और अगर मैं अपनी बात करूं तो मैने मात्र 2 हफ्ते में सपना या हकीकत के 1 से लेकर 1453 पेज को खत्म किया है ।
आपसे 1 अनुरोध और भी है कि 1 परिवार स्टोरी ओर लिखे पर उसमें family+adultery+ dirty का सीन जबरजस्त हो अगर आप डर्टी लाइक करते हो तो।
बाकी आपकी स्टोरी के लिए बहुत बहुत बधाई , आशा करते है कि अलग अपडेट जल्द ही मिलेगा ओर सोनल की चुदाई उसके ससुराल और मायके में भी मिलेगी