vihan27
“मृत्योः भयम् सर्वदुःखस्य मूलम्।”
- 20,343
- 12,043
- 213
मुँह ज़बानी न बताता कि मोहब्बत क्या है,
मैं तुझे करके बताता कि मोहब्बत क्या है।
कैसे सीने से लगाऊँ कि किसी और के हो,
मेरे होते तो बताता कि मोहब्बत क्या है।
ख़ूब समझाता तुझे तेरी मिसालें देकर,
काश तू पूछने आता कि मोहब्बत क्या है।
मैं तुझे करके बताता कि मोहब्बत क्या है।
कैसे सीने से लगाऊँ कि किसी और के हो,
मेरे होते तो बताता कि मोहब्बत क्या है।
ख़ूब समझाता तुझे तेरी मिसालें देकर,
काश तू पूछने आता कि मोहब्बत क्या है।
