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Adultery रिश्तों की परिभाषा

जादूगर

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कैसे हो मेरे प्यारे पाठको?

उम्मीद है सब कुछ अच्छा ही होगा। खैर मैं कोई लेखक नहीं पर मुझे पढ़ पढ़ के इतना तजुर्बा हो गया है की सोचता हूं अपना लिखूं कुछ, ऐसा जो लिखा ना गया या लिखा गया तो ठीक से उसको लिखा ना जा सका।



ये एक ऐसी कहानी है जो रोमांच से भरपूर होगी, जगह जगह नए किरदार जुड़ेंगे और कहानी के गाड़ी के पहिए बन कर कहानी को आगे बढ़ाएंगे मेरा काम बस इतना है की मैं गाड़ी को नियंत्रण में रखूं और आप सभी इस गाड़ी के ईंधन हैं जिनके बिना संभव ही नहीं की गाड़ी एक इंच भी बढ़ पाए।



मैं इस जगह नया हूं, मुझे फीचर्स समझने में समय लगेगा तो आपसे विनम्र निवेदन हैं की जो भी चीज मुझे समझने में कष्ट हो या लगे की कैसे किया जाए कौन सा फॉन्ट, पेज, पेज को कैसे एक दूसरे से कनेक्ट करना। मुझे जब भी आप लोगों की जरूरत होगी मैं आवाज दूंगा और अच्छे पाठक का फर्ज है मदद करना।



खैर बातें बहुत हुई अब थोड़ा बता देता हूं कहानी का ऊपर ऊपर का हिस्सा कहानी आज से ठीक 1 हफ्ते बाद आएगी। अब आप बोलेंगे इतना समय क्यों तो वो इसीलिए की मैं कहानी का 10 अपडेट जब लिख लूंगा तो कहानी दूंगा मैं ज्यादा इंतजार करवाने में नहीं मानता क्योंकि मैंने भी कई कहानी पढ़े जो पाठक को बीच मझधार में छोड़ देते हैं, फिर उसके आगे क्या हुआ कैसे हुआ कुछ पता नहीं। तो आइए अब इस नए दुनिया की शुरुआत की जाए।



कहानी मूल रूप से एक परिवार के इर्द गिर्द घूमती है उस परिवार में कहने को तो सब है लेकिन मुख्य किरदार हैं चार एक पति, एक पत्नी


एक नन्द, और एक व्यक्ति जिसकी परिचय आपको बाद में मिलेगा। ये कहानी है रिश्तों की, मर्यादा की, मर्यादा को लांघने की, हिम्मत की, कैसे एक व्यक्ति अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकता है और एक बात मैं विशेष रूप से बता दूं कि ये कहानी थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ेगी। यकीन मानिए इसमें भी वो सब है जो बाकी कहानियों में होती है पर मैं अपने किरदारों के साथ खेलना चाहता हूं उनको इस कहानी के रस में ऐसे घोलना चाहता हूं की लगे की वो निर्जीव नहीं सजीव हैं लगे की ऐसा असल में भी हो सकता है। इतनी मिठास, इतना अपनापन, उम्मीद, आशा हर वो चीज जो इंसान को इंसान बनाती है वो इन किरदारों में होगी, जैसे भारत में एक मध्यम वर्ग का परिवार अपनी जिंदगी बसर करता है, वैसे ही।



तो अब आज से ठीक एक हफ्ते बाद आएगी मेरी माने तो आप लोग इसे बुकमार्क कर के रख लें अब कुछ समय तक ये आपके जीवन का एक हिस्सा बनने जा रही है और मुझे भी इस नए सफर के लिए प्रोत्साहन करें ज्यादा से ज्यादा मात्रा में लाइक्स और कमेंट कर के अब इससे कोई मुझे पैसे मिलने नहीं वाले तो आपका प्यार आप कमेंट में ही जताए, मुझे अच्छा लगेगा।
 
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King78

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कैसे हो मेरे प्यारे पाठको?

उम्मीद है सब कुछ अच्छा ही होगा। खैर मैं कोई लेखक नहीं पर मुझे पढ़ पढ़ के इतना तजुर्बा हो गया है की सोचता हूं अपना लिखूं कुछ, ऐसा जो लिखा ना गया या लिखा गया तो ठीक से उसको लिखा ना जा सका।



ये एक ऐसी कहानी है जो रोमांच से भरपूर होगी, जगह जगह नए किरदार जुड़ेंगे और कहानी के गाड़ी के पहिए बन कर कहानी को आगे बढ़ाएंगे मेरा काम बस इतना है की मैं गाड़ी को नियंत्रण में रखूं और आप सभी इस गाड़ी के ईंधन हैं जिनके बिना संभव ही नहीं की गाड़ी एक इंच भी बढ़ पाए।



मैं इस जगह नया हूं, मुझे फीचर्स समझने में समय लगेगा तो आपसे विनम्र निवेदन हैं की जो भी चीज मुझे समझने में कष्ट हो या लगे की कैसे किया जाए कौन सा फॉन्ट, पेज, पेज को कैसे एक दूसरे से कनेक्ट करना। मुझे जब भी आप लोगों की जरूरत होगी मैं आवाज दूंगा और अच्छे पाठक का फर्ज है मदद करना।



खैर बातें बहुत हुई अब थोड़ा बता देता हूं कहानी का ऊपर ऊपर का हिस्सा कहानी आज से ठीक 1 हफ्ते बाद आएगी। अब आप बोलेंगे इतना समय क्यों तो वो इसीलिए की मैं कहानी का 10 अपडेट जब लिख लूंगा तो कहानी दूंगा मैं ज्यादा इंतजार करवाने में नहीं मानता क्योंकि मैंने भी कई कहानी पढ़े जो पाठक को बीच मझधार में छोड़ देते हैं, फिर उसके आगे क्या हुआ कैसे हुआ कुछ पता नहीं। तो आइए अब इस नए दुनिया की शुरुआत की जाए।



कहानी मूल रूप से एक परिवार के इर्द गिर्द घूमती है उस परिवार में कहने को तो सब है लेकिन मुख्य किरदार हैं चार एक पति, एक पत्नी


एक नन्द, और एक व्यक्ति जिसकी परिचय आपको बाद में मिलेगा। ये कहानी है रिश्तों की, मर्यादा की, मर्यादा को लांघने की, हिम्मत की, कैसे एक व्यक्ति अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकता है और एक बात मैं विशेष रूप से बता दूं कि ये कहानी थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ेगी। यकीन मानिए इसमें भी वो सब है जो बाकी कहानियों में होती है पर मैं अपने किरदारों के साथ खेलना चाहता हूं उनको इस कहानी के रस में ऐसे घोलना चाहता हूं की लगे की वो निर्जीव नहीं सजीव हैं लगे की ऐसा असल में भी हो सकता है। इतनी मिठास, इतना अपनापन, उम्मीद, आशा हर वो चीज जो इंसान को इंसान बनाती है वो इन किरदारों में होगी, जैसे भारत में एक मध्यम वर्ग का परिवार अपनी जिंदगी बसर करता है, वैसे ही।



तो अब आज से ठीक एक हफ्ते बाद आएगी मेरी माने तो आप लोग इसे बुकमार्क कर के रख लें अब कुछ समय तक ये आपके जीवन का एक हिस्सा बनने जा रही है और मुझे भी इस नए सफर के लिए प्रोत्साहन करें ज्यादा से ज्यादा मात्रा में लाइक्स और कमेंट कर के अब इससे कोई मुझे पैसे मिलने नहीं वाले तो आपका प्यार आप कमेंट में ही जताए, मुझे अच्छा लगेगा।
Nice 👌 bro sweet
 

malikarman

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कैसे हो मेरे प्यारे पाठको?

उम्मीद है सब कुछ अच्छा ही होगा। खैर मैं कोई लेखक नहीं पर मुझे पढ़ पढ़ के इतना तजुर्बा हो गया है की सोचता हूं अपना लिखूं कुछ, ऐसा जो लिखा ना गया या लिखा गया तो ठीक से उसको लिखा ना जा सका।



ये एक ऐसी कहानी है जो रोमांच से भरपूर होगी, जगह जगह नए किरदार जुड़ेंगे और कहानी के गाड़ी के पहिए बन कर कहानी को आगे बढ़ाएंगे मेरा काम बस इतना है की मैं गाड़ी को नियंत्रण में रखूं और आप सभी इस गाड़ी के ईंधन हैं जिनके बिना संभव ही नहीं की गाड़ी एक इंच भी बढ़ पाए।



मैं इस जगह नया हूं, मुझे फीचर्स समझने में समय लगेगा तो आपसे विनम्र निवेदन हैं की जो भी चीज मुझे समझने में कष्ट हो या लगे की कैसे किया जाए कौन सा फॉन्ट, पेज, पेज को कैसे एक दूसरे से कनेक्ट करना। मुझे जब भी आप लोगों की जरूरत होगी मैं आवाज दूंगा और अच्छे पाठक का फर्ज है मदद करना।



खैर बातें बहुत हुई अब थोड़ा बता देता हूं कहानी का ऊपर ऊपर का हिस्सा कहानी आज से ठीक 1 हफ्ते बाद आएगी। अब आप बोलेंगे इतना समय क्यों तो वो इसीलिए की मैं कहानी का 10 अपडेट जब लिख लूंगा तो कहानी दूंगा मैं ज्यादा इंतजार करवाने में नहीं मानता क्योंकि मैंने भी कई कहानी पढ़े जो पाठक को बीच मझधार में छोड़ देते हैं, फिर उसके आगे क्या हुआ कैसे हुआ कुछ पता नहीं। तो आइए अब इस नए दुनिया की शुरुआत की जाए।



कहानी मूल रूप से एक परिवार के इर्द गिर्द घूमती है उस परिवार में कहने को तो सब है लेकिन मुख्य किरदार हैं चार एक पति, एक पत्नी


एक नन्द, और एक व्यक्ति जिसकी परिचय आपको बाद में मिलेगा। ये कहानी है रिश्तों की, मर्यादा की, मर्यादा को लांघने की, हिम्मत की, कैसे एक व्यक्ति अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकता है और एक बात मैं विशेष रूप से बता दूं कि ये कहानी थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ेगी। यकीन मानिए इसमें भी वो सब है जो बाकी कहानियों में होती है पर मैं अपने किरदारों के साथ खेलना चाहता हूं उनको इस कहानी के रस में ऐसे घोलना चाहता हूं की लगे की वो निर्जीव नहीं सजीव हैं लगे की ऐसा असल में भी हो सकता है। इतनी मिठास, इतना अपनापन, उम्मीद, आशा हर वो चीज जो इंसान को इंसान बनाती है वो इन किरदारों में होगी, जैसे भारत में एक मध्यम वर्ग का परिवार अपनी जिंदगी बसर करता है, वैसे ही।



तो अब आज से ठीक एक हफ्ते बाद आएगी मेरी माने तो आप लोग इसे बुकमार्क कर के रख लें अब कुछ समय तक ये आपके जीवन का एक हिस्सा बनने जा रही है और मुझे भी इस नए सफर के लिए प्रोत्साहन करें ज्यादा से ज्यादा मात्रा में लाइक्स और कमेंट कर के अब इससे कोई मुझे पैसे मिलने नहीं वाले तो आपका प्यार आप कमेंट में ही जताए, मुझे अच्छा लगेगा।
Good
Aap start kijiye
Ho sake to pics bhi add kijiye
 

kamdev99008

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:congrats: शुभकामनायें मित्र

आपकी पहली कहानी के लिये

विशेष रूप से हिन्दी /देवनागरी लिपि में लिखने के लिये आभार
 

SKYESH

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कैसे हो मेरे प्यारे पाठको?

उम्मीद है सब कुछ अच्छा ही होगा। खैर मैं कोई लेखक नहीं पर मुझे पढ़ पढ़ के इतना तजुर्बा हो गया है की सोचता हूं अपना लिखूं कुछ, ऐसा जो लिखा ना गया या लिखा गया तो ठीक से उसको लिखा ना जा सका।



ये एक ऐसी कहानी है जो रोमांच से भरपूर होगी, जगह जगह नए किरदार जुड़ेंगे और कहानी के गाड़ी के पहिए बन कर कहानी को आगे बढ़ाएंगे मेरा काम बस इतना है की मैं गाड़ी को नियंत्रण में रखूं और आप सभी इस गाड़ी के ईंधन हैं जिनके बिना संभव ही नहीं की गाड़ी एक इंच भी बढ़ पाए।



मैं इस जगह नया हूं, मुझे फीचर्स समझने में समय लगेगा तो आपसे विनम्र निवेदन हैं की जो भी चीज मुझे समझने में कष्ट हो या लगे की कैसे किया जाए कौन सा फॉन्ट, पेज, पेज को कैसे एक दूसरे से कनेक्ट करना। मुझे जब भी आप लोगों की जरूरत होगी मैं आवाज दूंगा और अच्छे पाठक का फर्ज है मदद करना।



खैर बातें बहुत हुई अब थोड़ा बता देता हूं कहानी का ऊपर ऊपर का हिस्सा कहानी आज से ठीक 1 हफ्ते बाद आएगी। अब आप बोलेंगे इतना समय क्यों तो वो इसीलिए की मैं कहानी का 10 अपडेट जब लिख लूंगा तो कहानी दूंगा मैं ज्यादा इंतजार करवाने में नहीं मानता क्योंकि मैंने भी कई कहानी पढ़े जो पाठक को बीच मझधार में छोड़ देते हैं, फिर उसके आगे क्या हुआ कैसे हुआ कुछ पता नहीं। तो आइए अब इस नए दुनिया की शुरुआत की जाए।



कहानी मूल रूप से एक परिवार के इर्द गिर्द घूमती है उस परिवार में कहने को तो सब है लेकिन मुख्य किरदार हैं चार एक पति, एक पत्नी


एक नन्द, और एक व्यक्ति जिसकी परिचय आपको बाद में मिलेगा। ये कहानी है रिश्तों की, मर्यादा की, मर्यादा को लांघने की, हिम्मत की, कैसे एक व्यक्ति अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकता है और एक बात मैं विशेष रूप से बता दूं कि ये कहानी थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ेगी। यकीन मानिए इसमें भी वो सब है जो बाकी कहानियों में होती है पर मैं अपने किरदारों के साथ खेलना चाहता हूं उनको इस कहानी के रस में ऐसे घोलना चाहता हूं की लगे की वो निर्जीव नहीं सजीव हैं लगे की ऐसा असल में भी हो सकता है। इतनी मिठास, इतना अपनापन, उम्मीद, आशा हर वो चीज जो इंसान को इंसान बनाती है वो इन किरदारों में होगी, जैसे भारत में एक मध्यम वर्ग का परिवार अपनी जिंदगी बसर करता है, वैसे ही।



तो अब आज से ठीक एक हफ्ते बाद आएगी मेरी माने तो आप लोग इसे बुकमार्क कर के रख लें अब कुछ समय तक ये आपके जीवन का एक हिस्सा बनने जा रही है और मुझे भी इस नए सफर के लिए प्रोत्साहन करें ज्यादा से ज्यादा मात्रा में लाइक्स और कमेंट कर के अब इससे कोई मुझे पैसे मिलने नहीं वाले तो आपका प्यार आप कमेंट में ही जताए, मुझे अच्छा लगेगा।
:congrats: best wishes dear friend ...... :happy:
 
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जादूगर

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:congrats: शुभकामनायें मित्र

आपकी पहली कहानी के लिये

वि से हिन्दी /देवनागरी लिपि में लिखने के लिये आभार

:congrats: शुभकामनायें मित्र

आपकी पहली कहानी के लिये

विशेष रूप से हिन्दी /देवनागरी लिपि में लिखने के लिये आभार
मुझे भी हिंदी में लिखना ही अच्छा लगता है, इसमें अपनापन है। अपना कीमती वक्त निकाल कर मुझे प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद।
 

जादूगर

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मैंने कहानी का 4 अपडेट लिख लिया है इसीलिए समय से पूर्ण आज रात ठीक 10 बजे इस सफर की शुरुआत होगी पहले अपडेट के साथ। अगला अपडेट कल दोपहर 12 बजे। हर दिन 2 अपडेट आएंगे एक दोपहर में एक रात में। इस कहानी को सिर्फ सेक्स की दृष्टि से ना पढ़ें।
धन्यवाद
 

जादूगर

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Update 1



सुबह के चार बज रहे थे। धीरे धीरे रात इस तरफ से हट कर संसार के दूसरे तरफ पैर पसार रही थी, मुर्गे बांग दे रहे थे, ठंडी हवा पतों को हिला रही थी जिससे ऐसी आवाजें आ रही थी की वो un पत्तों के साथ खेल रही। इन्हीं सब के बीच राज अकेला बालकनी में खड़ा, हांथ में सिगरेट लिए कुछ सोच रहा था, उसके हांथ में एक लिफाफा था जो उसे कल शाम को ही मिल गया था पर उस लिफाफे को खोल के देखने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। उसका और सारे परिवार का भविष्य उस लिफाफे में था उसे डर था की जो बात उसे खा रही है कहीं वो सच ना हो। इसी सब के कारण रात भर उसे नींद नहीं आई। कभी इधर कभी उधर तो कभी अपनी पत्नी को प्यार से सोते हुए देखता और खुद को भगशाली मानता की ऐसी पत्नी मिली पर दोष भी देता की वो उसके लायक नहीं। उसने बालकनी में सिगरेट खतम की ओर जैसे ही मुरने को हुआ उसे उसके कंधे पे हांथ महसूस हुआ।



अंजली: क्या हुआ राज? यहां क्या कर रहे हो



राज: अरे अंजली तुम उठ गई आज जल्दी (बात घुमाते हुए)



अंजली: मै तो उठ गई पर तुम्हें क्या हुआ है जो यहां इस वक्त



राज: अरे कुछ नहीं रात को ज्यादा खा लिया था तो थोड़ी एसिडिटी हो गई थी तुम तो जानती हो मुझे ,थोड़ा भी ज्यादा खा लेता हूं तो हालत खराब हो जाती है



अंजली: ओफो जब पता है फिर क्यों करते हो रुको मैं दावा ले के आती हूं



राज: मैने दावा ले ली है अब तुम आराम करो मैं भी आता हूं



अंजली: अब क्या अब तो सुबह होने हो वाली है मैं वैसे भी आधे घंटे में उठ के जॉगिंग जाती, आज थोड़ा जल्दी सही। चलो मैं फ्रेश हो जाती हूं तुम आराम करो



राज ने इस पर कुछ जवाब नहीं दिया बस मुस्करा दिया और अंजली को देख के मन में कहा कैसे बताऊं तुम्हें अंजली मेरे मन में क्या है। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। ऐसा लग रहा जैसे मैं समय में वापस जाऊं और तुमको खुद से शादी करने से रोक दूं। सोचते सोचते राज लेट जाता है रूम में आ कर



अंजली: बाथरूम से निकलकर, अच्छा राज मैं आती हूं तुम आराम करो



राज: ठीक है बेबी, मैं नाश्ता बना कर रखूंगा



अंजली: जी नहीं, आप ऐसा कुछ नही करेंगे, आप चुप चाप बिस्तर पर रहिए



ये कहके अंजली राज को किस कर लेती है और बाई बोले निकल जाती है,



अंजली बाहर दौड़ने निकल गई इतनी सुबह थी कोई नही था वो अकेले बगल के पार्क में दौर रही थी उसे पंछी के कभी पतों के आवाजें काफी भा रही थी। उनका आनंद लेने के लिए वो वहीं बैठ गई और एक तरह से खो गई जब उसका ध्यान टूटा तो उसने देखा कि कोई उसको देख रक्षा है एक तो इतना अंधेरा ऊपर से लाइट भी जा चुकी थी, जैसे की हर लड़की को लगता उसे डर लगने लगा उसने जल्दी अपना बॉटल उठाया और वहां से निकल गई। उसे ये भी जानना नहीं था की वो कौन है उसे बस वहां से जाना था ये बात हमें उसके चरित्रवान होने का एक प्रमाण देती है।



जैसे ही वो घर आई उसने चैन की सांस ली तभी किचन से आवाज आती है बर्तन की



अंजली: कौन है? राज?



राज: नहीं भूत



अंजली: अरे मैंने मना किया था ना तुम्हें, तुम मेरी कोई बात मानते क्यों नहीं



राज: अरे बाबा गुस्सा मत करो वैसे भी मुझे नींद नहीं आ रही थी तो सोचा तुम्हारे लिए कॉफी बना कर रखूं, चलो जाओ चेंज कर लो फिर साथ में पीते हैं



अंजली: (खुश होते हुए) बस अभी आई पति देव



अब आप लोग का परिचय इन दो किरदारों से हो गया है लेकिन मैं फिर भी अपनी ओर से दोनो किरदारों का स्पष्ट रूप से विवरण कर दूं, ताकि आपके आंखों में जो जैसा है उसका ठीक वैसा चित्र बन कर आए



राज एक 32 साल का आदमी है। मेहनती, पढ़ा लिखा, समझदार, भावनात्मक, एक पुरुष में जो भी गुण होते हैं वो इसमें हैं। ये एक सरकारी मुलाजिम है। ये देखने में ठीक ठाक है पर वो कहते हैं ना पुरुष की सुंदरता नहीं देखी जाती बल्कि ये देखी जाती है की वो हर तरह से पुरुष कहलाने लायक है या नहीं।



अंजली: ये 28 साल की है। बहुत ही सुंदर, शुशील, संस्कारी। हर वक्त सारी पहेने वाली। बाहर अगर दौड़ने जाती थी तो भी ऐसे ट्रैक सूट पहनती थी जिससे सारा जिस्म ढका रहे। इसे किसी बाद का घमंड नहीं, जो इससे प्रेम से बात करता उसका ये बहुत इज्जत करती। इसका कद काठी एक सामान्य औरत के जैसा ही है। बस उभार इतने आकर्षित हैं की सांसारिक जीवन वाले पुरुष को तो हटा दीजिए जो बाल ब्रह्मचारी हैं उनका भी मन डोल जाए।



अब चलिए देखते हैं दोनो में क्या बात हो रही



राज: चाय पीते हुए: आज का क्या प्लान है तुम्हारा



अंजली: अरे तुम भी कमाल बात करते हो मैं कौन सा काम करती हूं। दिन भर तो पड़ी रहती हूं घर में। तुम कहीं घुमाने भी नहीं ले जाते।



राज: अच्छा तो ठीक है सामान बांध लो हम आज शाम ही नैनीताल घूम के आते हैं



अंजली: क्या सच में?



राज: हां बाबा चलो जल्दी जाओ इससे पहले मेरा मूड बदल जाए।



अंजली: ufff i love you तुमने तो मुझे खुश कर दिया



राज मन में सोचता है की काश तुम्हे मै हमेशा खुशी दे पाता। अब तुम्हें कैसे बताऊं मैं नैनीताल क्यों जा रहा। इस लिफाफे में क्या है क्यों है कैसे बताऊं तुम्हें। खैर बताना तो होगा ही लेकिन अभी नहीं अच्छा समय देख के बताऊंगा। और बस हिम्मत जुटा लूं इस पहाड़ को अपने ऊपर लेने की।
 
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